मैं डरती हुई भैया के पास आई. भैया ने आरती की थाली मुझे सौंपनी चाही कि ताऊजी व पापा ने मुझ से वह थाली छीन ली और बोले, ‘‘यह लड़की इस घर का कोई शुभ कार्य नहीं करेगी. इस से हमारा कोई नाता नहीं है. हमारे लिए यह मर चुकी है और इस के लिए हम मर चुके हैं.’’

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