Hindi Story: बनसारी नदी उफान पर थी. परसेहरा गांव पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा था. ऊंची जाति की विधवा सरिता ने अपना सामान बांध लिया था. पर वह बाढ़ में फंस गई. इतने में जोखू मछुआरा नाव ले कर आया. क्या वह सरिता को बचा पाया?

पूरे इलाके में हल्ला मचा हुआ था कि बनसारी नदी बढ़ी चली रही है. ननका बांध से और भी ज्यादा पानी छोड़ दिया गया है. इस के बाद अभी और भी पानी छोड़ा जाने वाला है. परसेहरा गांव के लोगों में एक अजीब सी बेचैनी और दहशत फैल रही थी, क्योंकि बाढ़ का पानी तो कर चला जाता है, पर अपने पीछे तबाही और भुखमरी के निशान छोड़ जाता है, जिस का असर महीनों तक देखने को मिलता रहता है और बाढ़ में जाने कितनों की जानें भी चली जाती हैं.
इस गांव के लोगों को आज भी याद है कि 3 साल पहले भी बाढ़ आई थी और अपने साथ सबकुछ बहा ले गई थी.

तब लोगों के घरों और फसलों का नामोनिशान तक नहीं मिला था.
सरकार द्वारा मुआवजा देने का ऐलान तो कर दिया गया था, पर सरकारी काम में घालमेल के चलते वह मुआवजा किस को मिला, यह आज तक कोई नहीं जान सका. गांव में बाढ़ के आने पर लोग अगर समय रहते ऊंची जगह पर पहुच जाते तो जान बच सकती थी, पर इस गांव में एक ही ऊंची जगह थी, जहां पर बाढ़ का पानी नहीं जा सकता था और वह जगह थी ठाकुर नाथ सिंह की तीमंजिला हवेली, पर पिछली बार बाढ़ आने पर जब गांव के लोगों ने नाथ सिंह से शरण मांगी थी, तो ठाकुर ने अपनी हवेली का गेट ही नहीं खोला था.

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