ज्यादातर लोगों में तालीम की कमी है, इसलिए 21वीं सदी में भी बहुत से लोगों की सोच बहुत पीछे है. नतीजतन, वे रोजमर्रा के मसलों को खुद नहीं सुलझा पाते.