संक्रमण से बचाएंगी ये 7 आदतें

कोरोना से जंग की बात हो तो हमें हाथ धोने, मास्क लगाने, सैनिटाइजर का प्रयोग करने और सामाजिक दूरी बना कर रखने जैसे उपायों को जरूर अपनाना चाहिए. इन उपायों से आप कोरोना वायरस से दूर रह पाएंगे.

मगर मान लीजिए कि किसी तरह कोरोना ने आप के शरीर में प्रवेश कर ही लिया. फिर कैसे लड़ेंगे? इस के लिए जरूरी है आप का अंदर से मजबूत होना और अंदर से मजबूती के लिए जरूरी है लाइफस्टाइल और डाइट में सुधार.

इन छोटेछोटे बदलावों से आप खुद को और परिवार को किसी भी तरह के संक्रमण से सुरक्षित रख सकती हैं.

सकारात्मक सोच

यह सही है कि आज हम रातदिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और मरने वालों की लगातार बढ़ती संख्या देख और सुन रहे हैं. ऐसे में सकारात्मक सोच बनाए रखना कठिन है. मगर ध्यान दें, दरअसल सकारात्मक सोच के लिए हमें परिस्थितियों की भयावहता से अधिक संभावित उपायों पर नजर रखनी होगी. परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों यदि हम मन से मजबूत हैं, आशावान हैं, बेहतर और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद कर रहे हैं तो हम कहीं न कहीं अपने दिमाग तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि घबराने वाली कोई बात नहीं. इस से आप का नर्वस सिस्टम बेहतर ढंग से काम कर पाता है. शरीर ऐक्टिव रहता है. शरीर का हर अंग ज्यादा अच्छी तरह काम करता है और आप बीमारियों से लड़ने को तैयार हो जाते हैं. आप का इम्यून सिस्टम मजबूती से किसी भी संक्रमण का सामना करने के लिए तैयार रहता है.

शांत मन प्रसन्न हृदय

मन को शांत रखें. आप का मन विचलित होगा, आप किसी के लिए बुरा सोचेंगे और कठोर वचन बोलेंगे, क्रोधित होंगे या फिर किसी बात को  ले कर दुखी रहेंगे तो आप अपने मन और शरीर की मदद करें. सद्भावना रखें. इस से आप को दूसरों का प्यार मिलेगा और शरीर में अच्छे और स्वस्थ हारमोन तैयार होंगे.

खूब हंसे

हंसने के बहाने ढूंढें. छोटीछोटी बातों पर खिलखिला कर हंसे. मन में उत्साह रखें. छोटेछोटे सपने पूरे होने की खुशी मनाएं. मिल कर जीने का आनंद लें. इस से शरीर में एंड्रोफिन, डोपामिन जैसे हारमोंस बनते हैं जो शरीर को ऊर्जा और मजबूती से भर देते हैं.

खुद को व्यस्त रखें

कहते हैं न कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है. भले ही आप को औफिस, स्कूल या कालेज से छुट्टी मिल गई हो मगर आप वर्क फ्रौम होम कर के खुद को व्यस्त रख सकते हैं. औफिस के साथसाथ घर के कामों में भी एकदूसरे की मदद करें. दूसरों के लिए कुछ करने का प्रयास करें. इस से मन को बहुत खुशी और मजबूती मिलेगी और आप अंदर से मजबूत होंगे.

अच्छी किताबें पढ़ें

समय पास करने के लिए दूसरों से लड़नेझगड़ने और बेकार की फिल्में देखने या मोबाइल पर टाइम पास करने के बजाय अच्छी किताबें और पत्रिकाएं पढ़ें. आप औनलाइन भी पत्रिकाएं पढ़ सकते हैं. आप को नई बातें जानने को मिलेंगी. दिमाग खुलेगा. अच्छे जोक्स और सुरीले गाने सुनें ताकि मन प्रसन्न रहे. अपनी हौबी के लिए समय निकालें. कुछ क्रिएटिव करेंगे तो आप को महसूस होगा जैसे आप के अंदर खास गुण हैं. ऐसी सकारात्मक सोच ही आप को अंदर से मजबूत बनाएगी.

कैसी हो डाइट

लौकडाउन के समय में हम सबों को अपनी इम्यूनिटी का खास खयाल रखना चाहिए. जितनी अच्छी इम्यूनिटी होगी उतने ही बेहतर तरीके से हम किसी भी बीमारी से लड़ पाएंगे. चाहे वह कोरोना हो, मलेरिया हो, साधारण बुखार हो या फिर कैंसर जैसी बड़ी बीमारी. गुडवेज फिटनैस की न्यूट्रिशनिस्ट शक्ति बताती हैं कि इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इन दिनों डाइट का खास खयाल रखना चाहिए.

आप को रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे

पास्ता, पिज्जा, फ्रैंच फ्राइज, बर्गर, पेस्ट्रीज, केक्स, व्हाइट ब्रैड, मैदा, पकोड़े, टिक्की, समोसे जैसी तली हुई चीजों और जंक फूड से दूरी बढ़ानी पड़ेगी. रिफाइंड शुगर से बनी चीजें कम लें या बिलकुल न लें. इन्हें खाने से इम्यूनिटी घटती है.

इन के बजाए खूब कच्चे फल और सब्जियां खाएं. इन से जरूरी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं जिस से आप अंदर से मजबूत बनते हैं.

खाने में विटामिन सी की मात्रा भी बढ़ाएं. विटामिन सी को सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए माना जाता है. इसी से बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है. नीबू, अनानास, अमरूद, टमाटर, कीवी, संतरा, आमला जैसी चीजें विटामिन सी के बेहतर स्रोत हैं.

ब्रोकोली खाएं: विटामिन ए,

सी और ई के साथसाथ कई

अन्य ऐंटीऔक्सीडैंट्स और फाइबर से भरपूर ब्रोकोली हैल्दी सब्जियों में से एक है.

पालक: पालक में फौलेट पाया जाता है जो शरीर में नई कोशिकाएं बनाने के साथ कोशिकाओं में मौजूद डीएनए की मरम्मत भी करता है. इस में पाया जाने वाला फाइबर, आयरन हमारे शरीर को हर तरह से स्वस्थ बनाए रखता है.

तुलसी: एंटी वायरल और एंटी इंफ्लेमेट्री जैसे औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी आप की इम्यूनिटी बढ़ाती है.

दही: दही रोगों से लड़ने के लिए शरीर को शक्ति प्रदान करता है.

हल्दी: हलदी ऐंटीऔक्सीडैंट गुणों से भरपूर है. रोज रात में दूध में हलदी डाल कर पीने से आप की इम्यूनिटी मजबूत होगी.

फ्लैक्स सीड्स: फ्लैक्स सीड्स हमारे शरीर के लिए बहुत अच्छा इम्यूनिटी बूस्टर है. इस के नियमित सेवन से आप कोरोना समेत कई बीमारियों से बच सकते हैं. फ्लैक्स सीड में अल्फा लिनोलेनिन ऐसिड, ओमेगा 3 फैटी ऐसिड होता है जो शरीर की प्रतिरोधिक क्षमता को बढ़ाने में मददगार है.

दालचीनी: दालचीनी में मौजूद ऐंटीऔक्सीडैंट्स गुण खून को जमने से रोकने और हानिकारिक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं.

ग्रीन टी: यह ऐंटीऔक्सीडैंट्स से भरपूर पेय है. ग्रीन टी पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है.

लहसुन: लहसुन में ऐंटीऐलर्जिक प्रौपर्टीज होती हैं. यह इम्यूनिटी को बढ़ाता है.

इस के साथ ही पूरे दिन कुनकुना पानी पीएं. नारियल पानी भी इम्यूनिटी बढ़ाता है जिस से शरीर में ऐनर्जी बनी रहती है.

करें व्यायाम

स्वस्थ रहने के लिए ऐक्टिव शरीर और नियमित व्यायाम जरूरी है. आप रोज सुबह उठ कर 15-20 मिनट दौड़ने या तेज वाक करने का अभ्यास करें. बाहर नहीं जा सकते तो अपने घर की छत या ग्राउंड में तेज वाक कर लें. घर की सीढि़यों पर तेजी से उतरनेचढ़ने का अभ्यास करें. यह भी एक अच्छी ऐक्सरसाइज है और इस से हृदय और फेफड़े स्वस्थ रहते हैं. घर में ही स्ट्रेचिंग, साइक्लिंग और तरहतरह के कार्डियो ऐक्सरसाइज कर सकते हैं. इस के अलावा दंड बैठक लगाना, रस्सी कूदना बच्चों के साथ दौड़भाग के खेल खेलना और दूसरे छोटेबड़े व्यायाम करने का नियमित अभ्यास रखें. व्यायाम करने से शरीर में खून का बहाव तेज होता है, आक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है और फेफड़े स्वस्थ रहते हैं.

बने रहें जवां : शान से जिएं जिंदगी

बचपन, युवावस्था और वृद्धावस्था. जिंदगी के ये 3 पड़ाव हैं. बचपन और युवावस्था तो गुज़र जाते हैं लेकिन वृद्धावस्था इंसान के साथ आखिरी सांस तक रहती है. सच है कि उम्र का बढ़ना तय है और हर किसी को वृद्धावस्था यानी बुढ़ापा से दोचार होना है. बूढ़ा होने से कोई खुद को रोक तो नहीं सकता लेकिन उस अवस्था को भी एंजौय जरूर कर सकता है. यानी, एक तरह से वह जवां बना रह सकता है.

जिंदगी की व्यस्तताओं ने इंसान को रोबोट सा बना दिया है. सुबह उठने से ले कर रात को सोने तक काम, काम और काम. टेबल पर खाना खाता इंसान एक मशीन सा बन कर रह गया है. हालात और ज्‍यादा खराब हो जाते हैं  जब इंसान अपनी सेहत, भोजन और नींद को भी नजरअंदाज करने लगता है.

वहीं, सच यह है कि बढ़ती उम्र के प्रभाव को कोई भी अपने चेहरे पर जल्दी नहीं देखना चाहता. अपनेआप को स्मार्ट दिखाने के लिए हर कोई परेशान रहता है और इंसान पूरी कोशिश करता है कि उस की झलक सब से अलग दिखे.

पुरुष दें ध्यान :

पुरुषों को अपनी त्वचा का खयाल रखने के लिए छोटी से छोटी बात पर ध्यान देने की जरूरत है. पुरुषों की त्वचा सख्त होती है, वे लंबे समय तक जवां दिखना चाहते हैं तो उन्हें कुछ आदतों को छोड़ कर अच्छी आदतों को अपनाना होगा. ऐसा करने से होने वाले फायदे कुछ ही दिनों में ही ज़ाहिर होना शुरू हो जाते हैं.

शाम को भी साफ़ करें चेहरा :

हर इंसान अपना चेहरा धोता है, लेकिन आमतौर पर सिर्फ सुबह. और यह उस की बचपन से ही आदत होती है. अच्छी आदत है. चेहरे की स्किन ज्यादा उम्र तक जवां बनी रहे, इस के लिए रोजाना शाम को भी फेसवौश या साबुन से चेहरे को धोना/साफ़ करना बेहद ज़रूरी है. ऐसा करने के नतीजे में आप के चेहरे पर मौजूद दिनभर की गंदगी भी साफ हो जाएगी और आप का चेहरा साफ रहेगा. इतना ही नहीं, रोजाना चेहरा अच्छी तरह साफ करने के चलते आप कई तरह के स्किन इंफैक्शन से बचे भी रहेंगे.

क्रीम नहीं मौइस्चराइजर है अनिवार्य:

ज़्यादातर युवा नहाने के बाद किसी क्रीम को ही लगाते हैं. दरअसल, युवाओं के चेहरे के लिए यह ठीक नहीं है. इस के चलते उन्हें रिऐक्शन हो सकता है और चेहरे पर पिंपल व दागधब्बों से भी जूझना पड़ सकता है. 30 साल की उम्र पार करने के बाद पुरुषों को नियमितरूप से नहाने के बाद मौइस्चराइजर का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए. यह स्किन पोर्स (त्वचा के महीनमहीन छिद्र) को खोलने में मदद करता है, जिस से चेहरे को खिलाखिला बनाए रखने में काफी मदद मिलती है. हां, मौइस्चराइजर के बाद चाहें तो कोई क्रीम लगा सकते हैं.

सप्ताह में 2 बार फेसपैक :

अकसर पुरुष समझते हैं कि फेसपैक का इस्तेमाल केवल महिलाएं करती हैं, जबकि ऐसा नहीं है. यह चेहरे पर मौजूद गंदगी को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, वह चेहरा महिला का हो या पुरुष का. इस के अलावा, यह चेहरे की स्किन को निखारने और दागधब्बे व मुहांसों को दूर करने के लिए भी काफी प्रभावी माना जाता है. यह चेहरे की रंगत को बरकरार रखता है और बढ़ती हुई उम्र के असर को भी चेहरे पर पूरी तरह से नहीं आने देता. फेसपैक किसी घरेलू नुस्खे के जरिए भी तैयार किया जा सकता है, अन्यथा बाज़ार में उपलब्ध हैं.

सप्ताह में स्क्रब जरूर :

चेहरा देख कर आमतौर पर लोग किसी की उम्र का पता लगा लेते हैं. बुढ़ापे का असर या कह लें ढलती हुई उम्र सब से पहले चेहरे पर अपना असर दिखाना शुरू कर करती है. इसलिए, चेहरे का खास खयाल रखते हुए हफ्ते में एक बार स्क्रब जरूर करें. स्क्रब किसी घरेलू नुस्खे के जरिए भी तैयार किया जा सकता है, अन्यथा बाज़ार में उपलब्ध हैं. स्क्रब करने से चेहरे की स्किन खिलीखिली लगती है.

बालों को भी दें समय :

चेहरे से ही इंसान जवां नहीं दिखता. जवां दिखने के लिए जरूरी नहीं कि कोई अपने जिस्म के सिर्फ एक हिस्से पर ही ध्यान दे बल्कि उस को सभी ब्यूटी टिप्स पर ध्यान देने की जरूरत है. बालों की अच्छी चमक हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है. पुरुषों को अपने बालों की भी खास केयर करनी चाहिए. बढ़ती उम्र के साथसाथ उन्हें समयसमय पर हेयरकेयर टिप्स का इस्तेमाल कर के बालों को हैल्दी बनाए रखना चाहिए. कुछ घरेलू नुस्खों के ज़रिए भी बालों को काला करने और उन्हें मजबूती देने के लिए खास हेयरमास्क का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

बुरी आदतों से बचें :

शराब का सेवन और स्मोकिंग करना जिस्म के लिए नुकसानदायक हैं. किसी को अगर ये आदतें हैं तो उसे इन आदतों को छोड़ना पड़ेगा वरना उम्र से पहले वह बूढा नज़र आने लगेगा. इन आदतों के चलते चेहरे की स्किन के साथसाथ पूरे जिस्म के अंगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. बढ़ती उम्र में ये बुरी आदतें जिस्म को विभिन्न प्रकार के नकारात्मक दोषों से नहीं बचा सकेंगी और इंसान के चेहरे पर बुढ़ापे की झलक साफ दिखने लगेगी.

जल्दी उठना, जल्दी सोना :

अर्ली टु बेड ऐंड अर्ली टु राइज… सुबह जल्दी उठने और रात में जल्दी सोने से इंसान की सेहत अच्छी रहती है. पुरुषों को सुबह जल्दी उठना चाहिए, यह उन की सेहत के लिए काफी अच्छा होता है. जल्दी उठने के लिए रात में जल्दी सोना होगा ताकि नींद का समय पूरा हो सके. वहीं, सुबह उठ कर बाहर टहलने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि सुबह की फ्रेश एयर इंसान के पूरे दिन को अच्छा बना देती है.

औयलीफूड और जंकफूड से बचें :

तेल की अधिक मात्रा में बने भोजन यानी औयलीफूड का सेवन कम से कम करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर की एनर्जी को जल्द खत्म कर देता है. इस के साथ ही रात को थोड़ा हलका खाना खाएं. घर के बने खाने में अच्‍छे तेल का उपयोग करें, क्योंकि खराब क्वालिटी वाला तेल सेहत पर काफी बुरा प्रभाव डालता है. पुरुषों को जंक फूड से भी परहेज करना होगा. इस के ज्यादा खाने से शुक्राणुओं की गुणवत्‍ता में गिरावट आ जाती है. इस की जगह  फ्रूट्स, अंकुरित अनाज और जूस लिया जा सकता है.

रोजा करें ऐक्‍सरसाइज़ :

पुरुषों को मोटापा कम करने औऱ फिट रहने के लिए रोजाना ऐक्‍सरसाइज़ करनी चाहिए. अगर आप ऐक्सरसाइज़ नहीं कर सकते हैं, तो थोड़ाबहुत उछलकूद ही करें यानी जिस्म को हरकत दें ताकि पूरा जिस्म फिट बना रहे. मौर्निंग वौक हर इंसान को करना चाहिए.

इस तरह, कोई भी इंसान अपने जीवन के हर पड़ाव को एंजौय कर सकता है. वह वृद्धावस्था में भी अपने को जवां महसूस कर सकता है चूंकि जिस्म से फिट जो है. सो, आप भी अंतिम क्षणों को तक जीवन को एंजौय करें, खुद को जवां फील करें.

Raghav chadha संग IPL देखने पहुंची Parineeti chopra, भाभी जिंदाबाद के लगे नारे

इऩ दिनों आईपीएल फीवर सबके सर चढ़ कर बोल रहा है जहां लोगों की निगाहे सिर्फ मैच पर ही टिकी रहती  है ऐसे में कई सेलिब्रिटी भी मैच देखे बिना नहीं रहते है अब मोहाली में हुए आईपीएल में कुछ अलग ही देखने को मिला. जी हां, आईपीएल मैच में चार-चांद लगाने पहुंचे नए कपल, परिणीति चौपड़ा औऱ राघव चढ्डा. दोनो की शादी की खबरों के बीच पहली बार एक साथ पब्लिकली स्पॉट किया गया है जहां लोगों ने मैच से ज्यादा भाभी जिंदाबाद के नारे लगाएं.

 

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आपको बता दें, कि बॉलीवुड एक्ट्रेस परिणीति चोपड़ा (Parineet Chopra) और राघव चड्ढा (Raghav Chadha) की शादी की खबरें इन दिनों हर किसी की जुवान पर हैं. परिणीति और आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा के डेटिंग रूमर्स पिछले कई महीनों से चल रहे हैं. रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि राघव और परिणीति 13 मई को सगाई कर सकते हैं और अक्टूबर के महीने में ये दोनों सात फेरे लेंगे. हालांकि अभी तक ना तो राघव और ना ही परिणीति ने अपनी शादी की खबरों पर कोई चुप्पी तोड़ी है. अब इसी बीच बी-टाउन के इस नए कपल की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं. इन फोटोज में राघव और परिणीति एक-साथ आईपीएल मैच देखते नजर आ रहे हैं.

आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा (Raghav Chadha) और परिणीति चोपड़ा (Parineeti Chopra) की यह तस्वीरें मोहाली स्टेडियम की हैं. यह दोनों पंजाब किंग्स वर्सेज मुंबई इंडियन्स का मैच देखने के लिए पहुंचे थे. इस दौरान दोनों ब्लैक कलर के आउटफिट में ट्वि्निंग भी करते नजर आए. जहां राघव चड्ढा ने ब्लैक कलर की शर्ट पहनी थी तो वहीं परिणीति चोपड़ा ब्लैक वनपीस में नजर आईं. आईपीएल के दौरान दर्शकों की निगाहें मैच की तरफ कम और परिणीति-राघव की ओर ज्यादा थीं. राघव और परिणीति की इन तस्वीरों पर लोग खूब कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.

राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा जैसे ही आईपीएल मैच देखने के दौरान कैमरे में कैद हुए तो पूरा मोहाली स्टेडियम परिणीति भाभी जिंदाबाद के नारों से गूंज गया, जिसका वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि फैंस की आवाज सुनकर परिणीति शरमा रही हैं तो वहीं राघव भी ब्लश कर रहे हैं. बता दें कि राघव चड्ढा और परिणीति चोपड़ा का रोका हो चुका है.एक इंटरव्यू में बताया गया था, “एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान दोनों का रोका हुआ. वह दोनों बहुत खुश थे.अब इसी साल अक्टूबर के अंत में शादी होने की संभावना है. राघव और परिणिति को फिलहाल शादी की कोई जल्दी नहीं है. फिलहाल यह दोनों अपने वर्क कमिटमेंट्स में फंसे हैं, इस कारण वह अपनी सगाई से लेकर शादी की रस्मों वर्क कमिटमेंट्स के हिसाब से अच्छी तरह से प्लान करेंगे.

Bhojpuri actress Rani Chatterjee ने साड़ी पहन लगाए ठुमके, फैंस ने की जमकर तारीफें

भोजपुरी सिनेमा की एक्ट्रेस रानी चटरर्जी इन दिनों मीडिया की लाइमलाइट में आ गई है उनका सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर धमाल मचा रहा है भोजपुरी सिनेमा की क्वीन मानी जाने वाली एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया से कुछ समय पहले ब्रेक लिया था, जिसके बाद उनका कोई पोस्ट सोशल मीडिया पर दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन अब ब्रेक लेने के बाद उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है जिसमे वह साड़ी पहनी हुई है और जमकर डांस कर रही है इस वीडियो को फैंस खूब प्यार बरसा रहे है.

आपको बता दें, कि रानी चटरर्जी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती है वो समय-समय पर पोस्ट और वीडियो शेयर करती रहती है ऐसे में हाल में बनाया हुआ उनका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है इस वीडियो में रानी चटरर्जी डांस करती हुई नजर आ रही है वो साड़ी पहन ‘लेके पहला पहला प्यार’ पर जमकर नाच रही है. एक्ट्रेस के इस रील पर सोशल मीडिया यूजर्स जमकर कमेंट करते हुए उनकी तारीफ कर रहे हैं. एक फैन ने लिखा, ‘चाहे कोई भी आ जाए भोजपुरी में रानी तो रानी ही है.

बता दें , कि एक्ट्रेस अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं जिसे देख लोग मदहोश हो जाते हैं. रानी चटर्जी की फैन फॉलोइंग भी काफी तगड़ी है.इस मामले में वो बॉलीवुड से लेकर टीवी तक की एक्ट्रेसेस को टक्कर देती हैं. बता दें कि भोजपुरी इंडस्ट्री में धमाल मचाने के बाद रानी चटर्जी टीवी की दुनिया में अपना जलवा बिखेर रही हैं. रानी इन दिनों सीरियल मस्त मौली में नजर आ रही हैं.

मेरा प्रेमी संबंध बनाने की मांग करता है लेकिन शादी के लिए कहने पर टालमटोल करने लगता है, क्या करूं?

सवाल


मैं पिछले 2 वर्ष से एक युवक से प्यार करती हूं. वह मुझ से बार बार संबंध बनाने की मांग करता है. एकांत मिलने पर मुझे उकसाता भी है. मेरी जांघों, बांहों पर हाथ फेरता है और मुझे आलिंगनबद्ध करता है. मुझे भी ये सब अच्छा लगता है इसीलिए मैं उसे मना नहीं करती, लेकिन इस सब के बीच जब कभी मैं उस से शादी के लिए कहती हूं तो वह टालमटोल करने लगता है, क्या करूं?

जवाब
आप का प्रेमी आप के बजाय आप के शरीर से प्रेम करता है और शारीरिक सुख भोगना चाहता है. इसलिए पहले तो आप को चेतना होगा. भूल कर भी अपना शरीर उसे न सौंपें, क्योंकि उस के बाद हो सकता है वह आप की ओर देखे भी नहीं.

आप उसे आलिंगनबद्ध करने पर भी इसलिए नहीं रोकतीं कि ऐसा करना आप को भी अच्छा लगता है लेकिन यह बात आप के लिए नासूर बन सकती है. अत: जब भी वह आप के शरीर से छेड़छाड़ करे उसे कह दें कि ये सब बातें शादी के बाद ही अच्छी लगती हैं. अगर तुम्हें इस की चाहत है तो शादी कर लो.

यकीन मानिए इसी से उस के प्रेम की परख भी हो जाएगी और आप का बचाव भी. अगर वह आप से सही माने में प्रेम करता है तो अवश्य कोई कदम उठाइए वरना दूरी बना कर चलने में ही भलाई है.

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प्यार एक गहरा और खुशनुमा एहसास है. जब किसी से प्यार होने लगता है तो हम शुरुआत में अकसर उस की सकारात्मक चीजें ही देखते हैं. उस समय हमें अपना अच्छाबुरा कुछ समझ नहीं आता और यही वह खुमारी होती है जब हम प्रेमी के प्यार के बदले में उस की हर जायजनाजायज मांग भी पूरी करने लगते हैं. लेकिन कुछ पल ठहर कर एक बार सोच लें कि कहीं आप प्रेमी को प्यार के बदले अपना शरीर तो नहीं सौंप रही हैं. अगर ऐसा है तो संभल जाइए, क्योंकि यह सही नहीं है. यह वक्त सिर्फ प्यार करने का है, सैक्स तो शादी के बाद भी हो सकता है. इस में आखिर इतना उतावलापन और जल्दबाजी क्यों?

प्यार को प्यार ही रहने दें

प्यार एक खूबसूरत एहसास है, इसे दिल से महसूस करें न कि शरीर से. एकदूसरे के साथ समय बिताएं, एकदूसरे को समझें, प्यारभरी बातें करें, भविष्य के सपने बुनें, एकदूसरे की केयर करें, अपनेपन का एहसास साथी के मन में जगाएं, उसे विश्वास दिलाएं कि आप उस के लिए एकदम सही जीवनसाथी साबित होंगे. अपने कैरियर पर ध्यान दें. खुद खुश रहें और साथी को भी खुश रखें. यह वक्त बस यही करने का है बाकी जो भावनाएं हैं उन्हें शादी के बाद के लिए बचा कर रखें.

प्यार में आकर्षण बना रहेगा

अगर आप किसी से प्यार करती हैं और सैक्स नहीं किया है तो सैक्स को ले कर चाह और एक आकर्षण बना रहने के कारण साथी के प्रति खिंचाव हमेशा बना रहेगा, लेकिन एक बार सैक्स हो जाने के बाद कोई नयापन नहीं रहेगा और वह आकर्षण जो आप को एकदूसरे के प्रति खींचता था, खत्म हो जाएगा.

अपराधबोध नहीं होगा

एक बार संभोग करने के बाद उसे बदला नहीं जा सकता. कई बार बाद में पता चलता है कि प्रेमी आप के लिए सही नहीं है तब वक्त से पहले संबंध बना लेने का अपराधबोध होता है. इसलिए जरूरी है कि जब तक पूरी तरह से आश्वस्त न हो जाएं तब तक संबंध न बनाएं.

उत्सुकता बनी रहेगी

जब कोई भी काम समय पर करते हैं तो उस का आनंद ही अलग होता है, लेकिन जब आप सैक्स शादी से पहले ही कर लेते हैं तो इसे ले कर कोई उत्सुकता नहीं रहती. यदि सैक्स न करने से आप की उत्सुकता बनी रहती है तो बेहतर है इसे शादी तक न किया जाए.

यौन रोगों से बचे रहेंगे

सैक्स के प्रति लापरवाही यौन रोग होने का खतरा काफी हद तक बढ़ा देती है. उस समय आप की प्राथमिकताएं शारीरिक आकांक्षाओं को पूरा करना होता है, लेकिन सैक्स करते समय किनकिन सावधानियों का खयाल रखना चाहिए यह बात आप सोचते नहीं हैं और गंभीर बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं.

सच्चे प्यार में सैक्स का कोई मतलब नहीं

सच्चा प्यार किसी को देखते ही नहीं हो जाता, यह एकदूसरे को जानने और समझने के बाद होता है. सच्चे प्यार में कोई जल्दबाजी नहीं होती, इस में ठहराव होता है. एकदूसरे की आपसी अंडरस्टैंडिंग होती है, एकदूसरे पर भरोसा होता है, एकदूसरे की कद्र होती है. सच्चा प्यार हमेशा के लिए होता है. इस में प्रेमी एकदूसरे से दिल की गहराइयों से जुड़े होते हैं. एकदूसरे के प्रति अपनीअपनी जिम्मेदारियों का एहसास होता है इसलिए उन्हें पता होता है कि सैक्स का सही समय शादी के बाद ही है और ऐसा करने के लिए वे एकदूसरे पर जोर भी नहीं डालते, क्योंकि इस के लिए इंतजार करना भी उन के इसी सच्चे प्यार का एक अहम हिस्सा होता है.

प्रेमी की पहचान करने का सही वक्त

यदि प्रेमी बारबार आप से शारीरिक संबंध बनाने पर जोर दे रहा है तो इस का मतलब उसे आप से ज्यादा इंट्रस्ट संबंध बनाने में है. उसे आप की भावनाओं का खयाल रखते हुए शादी तक इस चीज के लिए सब्र रखना चाहिए, लेकिन अगर वह ऐसा नहीं कर पा रहा है तो या तो उस की नीयत में खोट है या फिर वह आप का साथ निभाने के काबिल ही नहीं है.

सैक्स के नुकसान

बोरियत हो जाएगी

कुछ लोगों के लिए सैक्स ही सबकुछ होता है और जब उन्हें उस की पूर्ति हो जाती है तो उन की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और फिर उन्हें प्रेमिका में कोई रुचि नहीं रहती. उन्हें उस के साथ समय बिताने, घूमने, हंसीमजाक करने में बोरियत लगने लगती है. ऐसे में रिश्ते का लंबे समय तक खिंच पाना मुश्किल हो जाता है.

प्रैग्नैंट हो गईं तो मुश्किल

बाजार में कई तरह के गर्भनिरोधक उपलब्ध हैं, लेकिन कई बार वे भी पूरी तरह से सक्षम नहीं होते. कई बार आप को पता भी नहीं चलता कि आप गर्भवती हैं और जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. इस के बाद मानसिक परेशानी का ऐसा दौर शुरू होता है जो आप को अंदर तक तोड़ कर रख देता है.

शादी न हुई तो दिक्कत

आज सारी परिस्थितियां आप के पक्ष में हैं और आप को लग रहा है कि आप के प्रेमी से ही आप की शादी होगी, लेकिन समय बदलते देर नहीं लगती, हो सकता है कल परिस्थितियां कुछ और हों. आप दोनों की किन्हीं कारणों से शादी न हो पाए, तो फिर क्या करेंगी?

जिस के साथ आप की शादी होगी अगर उस को आप के शादी से पहले के संबंधों के बारे में पता चल गया तो जिंदगी दूभर हो जाएगी या फिर हमेशा आप डरती रहेंगी कि कहीं यह बात खुल गई तो? ऐसे में आप शादी के बाद के खूबसूरत पलों को ढंग से ऐंजौय नहीं कर पाएंगी.

रिश्ते से बाहर आना मुश्किल

अगर आप अपने बौयफ्रैंड के साथ बिना संबंध बनाए डेट कर रहे हैं और आप को लगता है कि आप दोनों इस रिश्ते को आगे बढ़ाने में सहमत नहीं हैं तो रिश्ता खत्म करना आप के लिए काफी आसान होता है, लेकिन एक बार शारीरिक संबंध बन जाने के बाद उस रिश्ते से बाहर आना भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर बहुत कठिन हो जाता है.

मलाल न हो

आप जिस व्यक्ति के साथ संबंध बना रही हैं वह आप के लिए काफी महत्त्वपूर्ण होना चाहिए. केवल शारीरिक जरूरतें पूरी करने के लिए संबंध बनाना सही नहीं है.

ब्लैकमेलिंग का शिकार न हों

कई बार देखने में आता है कि जिस पर हम सब से ज्यादा भरोसा करते हैं वही हमारा विश्वास तोड़ता है. आएदिन अखबार ऐसी सुर्खियों से भरे रहते हैं कि प्यार करने के बाद सैक्स किया, फिर धोखा दिया. अकसर प्रेमी इस तरह की वारदात को अंजाम देते हैं इसलिए अगर बौयफ्रैंड धोखेबाज निकला और उस ने आप का कोई वीडियो बना लिया और फिर इस के जरिए आप को ब्लैकमेल करने लगा तो फिर क्या होगा?

माना कि आप का बौयफ्रैंड ऐसा नहीं है पर यह काम उस का कोई दोस्त या कोई अनजान भी तो कर सकता है, तब क्या करेंगी? किस से मदद मांगेंगी? इसलिए ऐसा काम करना ही क्यों, जिसे करने के बाद परेशानी भुगतनी पड़े. इसलिए तमाम बातों को ध्यान में रख कर ही आगे कदम बढ़ाएं अन्यथा ताउम्र इस का दंश झेलना पड़ेगा.      

बदचलनी का ठप्पा – भाग 4 : क्यों भागी परबतिया घर से?

यह सुन कर अर्जुन को कुछ उम्मीद बंधी. भीड़ भी एकमत थी बलदेव प्रसाद से. और लोगों की भी बीवियां तो खूबसूरत हैं कोलियरी में. अगर बदमाशों को न रोका गया तो न जाने कितने अर्जुन होंगे और कितनी परबतिया. देवेंद्रजी बोले, ‘‘भाइयो, आप सब की मदद से हम ने आज तक कई मामले निबटाए हैं. कभी बदनामी नहीं उठानी पड़ी. पर इस तरह के मियांबीवी वाले मामले में हम ने अब तक कभी हाथ नहीं डाला है, क्योंकि ऐसे मामलों में बड़ा जोखिम उठाना पड़ता है,’’

देवेंद्रजी भीड़ पर अपना रुतबा जमाते हुए बोले. भीड़ खुश हो गई. अर्जुन को उम्मीद बंधी कि अब देवेंद्रजी इस मामले को हाथ में ले रहे हैं तो वह जरूर कामयाब होें. पर खतरा? यह खतरे वाली बात कहां से पैदा हो गई. अर्जुन को थोड़ा शक हुआ. भीड़ के कान खड़े हो गए. ‘‘कैसा खतरा?’’

लगा कि बलदेव प्रसाद भी चकित था. ‘‘हम अगर जल्दबाजी में कोई कदम उठाएंगे तो हो सकता है कि वह बदमाश परबतिया को कोई नुकसान पहुंचा दे,’’ देवेंद्रजी ने कहा, ‘‘इसलिए हमें कतई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.’’ भीड़ को देवेंद्रजी की बातों में कुछ सार नजर आया.

उम्मीद बंधी. पर अर्जुन फिर निराशा से घिरने लगा था. गया प्रसाद उस की परबतिया को नुकसान पहुंचा सकता है, यह बात उस के दिमाग में घूम रही थी. उस का खून खौलने लगा.  अगर उस का बस चले तो… जैसे वह जंगल में लकड़ी काटा करता है, वैसे ही गया प्रसाद की गरदन पर कुल्हाड़ी चला दे.

पर, क्या करे?  नहींनहीं… वह बदमाश परबतिया को कोई नुकसान न पहुंचाए. वह दुष्ट तो उस के बच्चे को भी नुकसान पहुंचा सकता है. देवेंद्रजी शायद ठीक कह रहे हैं. कोई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. मौका आने पर वह खुद ही निबट लेगा गया प्रसाद से.

अर्जुन का मन हुआ कि वह चिल्ला कर देवेंद्रजी से कह दे कि उसे कोई जल्दी नहीं है. बस, पार्वती और उस का बच्चा सहीसलामत रहे. ‘‘हांहां, आप ठीक ही कह रहे हैं,’’ बलदेव प्रसाद बोला, ‘‘उस जैसे दुष्टों का कोई भरोसा नहीं. लेकिन ऐसे दुष्टों को बताना ही होगा कि वे बसीबसाई घरगृहस्थी नहीं उजाड़ सकते. हां भाइयो, हम ऐसी धांधली नहीं चलने देंगे,’’ उस ने भीड़ को देखा. देवेंद्रजी के मुंह से अब एक नेता की आवाज उभरी, ‘‘हम गया प्रसाद को चेतावनी देना चाहते हैं कि वह अर्जुन की घरवाली परबतिया को बाइज्जत घर पहुंचाए और अपनी इस हरकत के लिए अर्जुन से माफी मांगे.’’

देवेंद्रजी के कहने के ढंग से लगा मानो गया प्रसाद वहीं भीड़ में दुबका हुआ उन की बातें सुन रहा हो. ‘बाइज्जत’ शब्द सभी के सामने एक बड़ा सवाल बन कर खड़ा हो गया.  परबतिया एक रात तो गया प्रसाद के घर में बिता ही चुकी है. अब भी उस की इज्जत बची होगी भला?

यह बात तो अर्जुन को भीतर ही भीतर मथे डाल रही थी. एक दर्द उभरा अर्जुन के मन में. यह क्या सोच गया वह? नहीं, परबतिया कैसी भी हो, उसे उस शैतान के चंगुल से छुड़ाना ही होगा. ‘‘और हम बता देना चाहते हैं कि…’’ देवेंद्रजी ने धमकी भरी आवाज में कहा, ‘‘अगर एक हफ्ते के भीतर इस बात पर अमल नहीं किया गया तो हमें कोई कड़े से कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.’’

बलदेव प्रसाद ने भी अर्जुन को ढांढस बंधाया, ‘‘अब एक हफ्ते तक इंतजार करना ही पड़ेगा अर्जुन भाई, इसलिए अपने मन को कड़ा करो और जा कर नहाओ, खाओ. रात की ड्यूटी किए हो, थक गए होगे. हम सब तुम्हारा दुख समझते हैं.’’ भीड़ को एक बार फिर लगा कि देवेंद्रजी और बलदेव बड़े दयालु और दूसरों के दुख को अपना दुख समझने वाले इनसान हैं.

पहली बार अर्जुन ने कुछ कहा, ‘‘जो मरजी हुजूर. बस, आप लोगों का सहारा है. गरीब हूं, माईबाप,’’ कहतेकहते अर्जुन का गला भर आया. आगे बढ़ कर उस ने देवेंद्रजी के पैर छू लिए. ‘‘ठीक है, ठीक है,’’ देवेंद्रजी की आवाज में दया थी, करुणा थी,

‘‘अब, तुम निश्चिंत हो कर जाओ अर्जुन.’’ ‘‘हांहां, अर्जुन, अब चिंता की कोई बात नहीं,’’ बलदेव प्रसाद बोला, ‘‘अब तो देवेंद्रजी ने तुम्हारे मामले को अपने हाथों में ले ही लिया है. अब तो  हमारी और देवेंद्रजी की इज्जत का भी सवाल है.’’

देवेंद्रजी उठ कर अपने घर के भीतर चले गए. तमाशा खत्म हुआ तो भीड़ भी छंटने लगी. कुछ लोग देवेंद्रजी की प्रशंसा कर रहे थे. कुछ गया प्रसाद को कोस रहे थे. सभी जल्दीजल्दी अपने घरों की ओर बढ़ने लगे थे इस डर से कि कहीं इसी बीच उन की घरवालियां  भी किसी बदमाश के घर जा कर न बैठ गई हों.  न जाने कितने गया प्रसाद छिपे पड़े होंगे इस कोलियरी में. न जाने कितने निहत्थे अर्जुन, न जाने कितनी खूबसूरती का शाप झेलती औरतें. फिर देवेंद्र की वही चौपाल,

भीड़, तमाशा और सरेआम उछलती किसी मजदूर की इज्जत. एक हफ्ते के भीतर ही गया प्रसाद परबतिया को उस के बच्चे समेत बाइज्जत अर्जुन के घर पहुंचाने गया था. पर अर्जुन ने पार्वती को बहुत भलाबुरा कहा और उसे अपने घर पर रखने से इनकार कर दिया. इस अफवाह ने देवेंद्रजी की इज्जत को तो बढ़ाया, पर अर्जुन को सभी धिक्कारने लगे कि वह फिर बेवकूफी कर बैठा.

कुछ लोगों के विचार से अर्जुन ने जो किया वह ठीक ही किया. ऐसी बदचलन औरत को तो जिंदा ही जमीन में गाड़ देना चाहिए. गहनेकपड़े, रुपएपैसे सबकुछ तो वह गया प्रसाद के घर ही छोड़ आई थी. अर्जुन की जिंदगीभर की कमाई उस बदमाश को भेंट कर आई थी. अर्जुन को परबतिया का अचार तो डालना नहीं था, सो उस ने बिलकुल ठीक किया. परंतु एक खबर पूरी कोलियरी में बड़ी तेजी से फैली. कुछ लोग इसे अफवाह कह रहे थे, तो कुछ सौ फीसदी सच होने का दावा कर रहे थे.

दूसरी पार्टी के मजदूर नेता इस बात का जोरशोर से प्रचार कर रहे थे कि परबतिया जो गहनेकपड़े और रुपए अपने साथ लाई थी, उस में से देवेंद्रजी और बलदेव प्रसाद ने अपनेअपने हिस्से ले लिए हैं. यही नहीं, कुछ तो यहां तक कहते सुने गए कि भरी रात बलदेव प्रसाद और देवेंद्रजी गया प्रसाद के घर से मुंह काला कर के निकलते हुए भी देखे गए.

सचाई जो हो, पर इतना सच है कि परबतिया को अर्जुन ने अपने घर में घुसने तक नहीं दिया. बच्चे को भी नहीं रखा. बेचारी परबतिया बच्चे को साथ लिए कहां जाए? गया प्रसाद के यहां वह खुद गई थी या जबरन ले जाई गई थी, यह  भी किसी ने नहीं पूछा. उस पर क्या गुजरी, यह जानने की किसी ने जरूरत ही नहीं समझी.  अर्जुन के साथ हमदर्दी जताने के लिए तो अच्छीखासी भीड़ इकट्ठी हो गई थी, पर ‘परबतिया’ को कौन पूछे? औरत जो ठहरी बेचारी. और उस पर भी बदचलन होने का ठप्पा जो लग चुका था.

औनर किलिंग- भाग 4: आखिर क्यों हुई अतुल्य की हत्या?

लेकिन अमृता को तो यह बात पहले से ही पता थी. छोटी भाभी को ऐसा ही तो होता था जब रुद्र पैदा होने वाला था. तब उन्हें भी तो कुछ खाने का मन नहीं होता था. तबीयत खराब रहती थी, उलटी होने का सा एहसास रहता था. अब ठीक अमृता को भी वैसा ही लग रहा है. इस का मतलब वह पेट से थी. अपने भीतर वह एक हलचल सी महसूस करने लगी थी.

अपने अजन्मे बच्चे के बारे में जान कर अतुल्य तो खुशी से बावला हो गया और कहने लगा कि वह जल्द ही वहां आ रहा है और हाथ जोड़ कर वह उस के भाइयों से उस का हाथ मांगेगा, जिसे उन्हें देना ही पड़ेगा.

अमृता अपने आने वाले बच्चे के बारे में सोच कर ही खुश हुए जा रही थी, लेकिन उस ने कितने बड़े तूफान को न्योता दिया था, उसे नहीं पता था.

रुक्मिणी के पूछने पर अमृता ने सब सचसच बता दिया और कहने लगी, ‘‘मैं और अतुल्य एकदूसरे से प्यार करते हैं और शादी भी करना चाहते हैं.’’

यह सुन कर रुक्मिणी ने अपना माथा पीट लिया और बोली, ‘‘यह क्या अनर्थ कर डाला. पता भी है, अगर घर में किसी को यह बात पता चल गई तो क्या होगा? काट डालेंगे तुम दोनों को. अच्छा, वह लड़का… मेरा मतलब है, अतुल्य यहां कब आ रहा है?’’

‘‘वह आज रात आने वाला है और मैं उस से मिलने उसी पुरानी फैक्टरी में जाने वाली हूं. इस काम में आप को मेरी मदद करनी पड़ेगी.’’

‘‘वह सब तो ठीक है, पर मैं तुम्हारे भैया को क्या कहूंगी? देखो अमृता, मु झे बहुत डर लग रहा है. लग रहा है, जैसे कोई बहुत बड़ा तूफान आने वाला है.’’

‘‘ऐसा कुछ नहीं है. भैया को अभी कुछ बताने की जरूरत ही क्या है?’’

‘‘पर, कभी तो बताना ही पड़ेगा न,’’ रुक्मिणी बोली. लेकिन उन दोनों को नहीं पता था कि बाहर खड़ा रघुवीर उन की सारी बातें सुन चुका था. उस का खून ऐसे खौल रहा था, जैसे सब जला कर राख कर देगा.

रघुवीर को अचानक अपने सामने खड़ा देख कर रुक्मिणी और अमृता का तो जैसे खून ही सूख गया. अमृता अभी कुछ बोलती ही कि वह उस के बालों को पकड़ कर घसीटता हुआ बाहर आंगन में ले गया. तब तक घर के बाकी लोग भी वहां पहुंच चुके थे. सच जानने के बाद सब की आंखें गुस्से से लाल हो गई थीं.

‘‘गलती हो गई, जो इसे शहर पढ़ने भेजा. कहा था मैं ने इस की शादी करवा देते हैं, पर नहीं. कलक्टर जो बनाना था बेटी को. लेकिन सिर्फ इस लड़की की वजह से मेरे परिवार की नाक कटे, यह मैं सहन नहीं कर सकता पिताजी, इसलिए जितनी जल्दी हो इस की शादी करवानी होगी,’’ गरजते हुए रघुवीर ने जोर से दरवाजे पर अपना हाथ पीटा था.

रुक्मिणी दौड़ कर रघुवीर के पास गई, तो उस ने उसे जोर से धक्का दे दिया. भाई का यह रूप देख कर अमृता कुछ पल के लिए अंदर तक कांप उठी थी.

मगर अमृता में भी वही गरम खून था. वह कहने लगी, ‘‘मैं हरगिज किसी और से ब्याह नहीं करूंगी. शादी तो मैं अपने अतुल्य से ही करूंगी.’’

अमृता का यह कहना ही था कि घर के दूसरे लोगों ने उस पर लातघूंसों की ऐसी बारिश कर दी कि वह बेदम हो कर जमीन में लोट गई. वह तो रुक्मिणी बीच में आ गई, नहीं तो आज उस की जान ले ली जाती.

अमृता के दोनों भाई आज इस किस्से को खत्म कर देना चाहते थे. दोनों भाइयों को धारदार चाकू ले कर भागते देख अमृता उन के पीछे भागी, मगर घर के लोगों ने उसे कमरे में बंद कर दिया. और तो और गांव की दाई को बुलवा कर उस का बच्चा भी गिरवा दिया.

मोटी रकम ले कर दाई भी यह वादा कर के चली गई कि वह किसी को कुछ नहीं बताएगी. वे लोग नहीं चाहते थे कि गांव के लोगों को इस बात की भनक भी लगे. अगर ऐसा हुआ, तो पूरे गांव में उन की थूथू हो जाएगी…

‘‘मैं अपना कुछ भी नहीं बचा पाई इंस्पैक्टर साहब… न अपने प्यार को और न उस की निशानी को ही…’’ बोल कर अमृता अपना पेट पकड़ते हुए बिलख पड़ी.

अमृता की दर्दनाक कहानी सुन कर इंस्पैक्टर माधव के साथ वहां खड़े बाकी लोगों की रूह भी कांप उठी थी कि कोई इनसान इतना जालिम कैसे हो सकता है कि अपनी ही बहनबेटी की खुशियां नोच डाले… मगर यह सब सच था.

‘‘लेकिन, तुम यहां तक कैसे पहुंची? तुम्हें तो कमरे में बंद कर पहरा बिठा दिया गया था?’’ इंस्पैक्टर माधव के पूछने पर अमृता बताने लगी कि जब उसे पता चला कि दोनों भाइयों ने अतुल्य को खत्म कर दिया, तो वह चीख उठी थी. लगा जैसे अब सबकुछ खत्म हो गया, तो उस के जीने का मतलब क्या रह गया? वह मर जाना चाहती थी. वह पंखे से  झूलने ही जा रही थी कि रुक्मिणी वहां पहुंच गई.

‘‘यह क्या कर रही हो तुम… मरने जा रही हो?’’ उस के हाथों से दुपट्टा छीनते हुए रुक्मिणी चीखी थी.

‘‘तो और क्या करूं मैं भाभी… किस के लिए जीऊं? कौन है अब मेरा? नहीं, मु झे मर जाने दो,’’ भाभी के हाथ से दुपट्टा छीनते हुए अमृता बोली.

‘‘मर जा, ले अभी मर जा. चल, मैं तेरी मदद करती हूं मरने में. और आजाद घूमने दे इन हत्यारों को, ताकि ये फिर किसी मासूम की बलि चढ़ा सकें. क्या तू नहीं चाहती कि इन हत्यारों को सजा मिले? क्या अतुल्य और अपने अजन्मे बच्चे को इंसाफ नहीं दिलाएगी तू?

‘‘तू सोच रही होगी कि मैं अपने ही पति के बारे में कैसी बातें कर रही हूं, लेकिन रघुवीर जैसा इनसान न तो किसी का पति बनने के लायक है और न ही भाई…’’

भाभी का ऐसा रूप देख कर एक पल के लिए तो अमृता सिहर उठी, लेकिन फिर रुक्मिणी कहने लगी, ‘‘जब किसी का प्यार छिन जाता है, तो उसे कितना दर्द होता है, यह मैं भुगत चुकी हूं.

‘‘मैं भी किसी से प्यार करती थी. हम दोनों शादी करने वाले थे. परिवार भी राजी था. मगर ऐयाश रघुवीर की नजर जाने कब और कैसे मु झ पर पड़ गई. वह हर हाल में मु झे अपना बना लेना चाहता था. उस ने मेरे मांबाप को धमकी दी कि अगर उस की शादी रुक्मिणी से नहीं हुई, तो वह किसी को नहीं छोड़ेगा.

‘‘अपनी जान की सलामती के डर से मेरे मातापिता ने मेरी शादी रघुवीर से करवा तो दी, लेकिन बाद में जब उन्हें पता चला कि रघुवीर नामर्द है, तो उन्होंने अपना माथा पीट लिया था कि उन की बेटी की जिंदगी बरबाद हो गई.’’

अपने भाई की सचाई सुन कर अमृता के पैरों तले की जमीन खिसक गई थी.

‘‘तुम तो मर कर आजाद हो जाओगी. मगर सोचो उन बेचारे बूढ़े मांबाप के बारे में, जिन का एकलौता बेटा चला गया. अमृता, मैं तुम्हारा साथ दूंगी इस में…’’

अमृता के घर वालों को जब पता चला कि वह उन की कैद से भाग गई है, तो पुलिस के डर से वे लोग भी घर छोड़ कर भाग गए. लेकिन कहां यह रुक्मिणी को भी नहीं पता था, क्योंकि अब वह अपने पिता के घर चली गई थी.

इंस्पैक्टर माधव को पता था कि अब उस के भाई अमृता को छोड़ेंगे नहीं, इसलिए उन्होंने उसे महिला संरक्षणगृह में रखवा दिया और गुनाहगारों की खोज में लग गए.

पर कोई कामयाबी नहीं मिली, तो अमृता ने बताया कि अगर एक पकड़ा जाए, तो अपनेआप सब मिल जाएंगे. और वह जानती है कि उस का भाई रघुवीर कहां हो सकता है. पास के एक गांव में ही एक औरत रहती है लालबाई, उस के घर भाई का डेरा होता है.

और ऐसा ही हुआ. रघुवीर के पकड़ में आते ही बाकी सब लोग भी धीरेधीरे पुलिस की गिरफ्त में आ गए.

जब कोर्ट में उन से पूछा गया कि क्यों उन्होंने अतुल्य की हत्या की? उस पर रघुवीर ने आंखें लाल कर के कहा, ‘‘एक गांव में लड़कालड़की बहनभाई होते हैं, जिन में शादी नहीं हो सकती. और वैसे भी वह निचली जाति का लड़का था. कहीं से भी उन की बराबरी का नहीं था. ऐसे लोगों की हत्या कर देना बिलकुल ठीक है.’’

कोर्ट में अमृता ने उन सब के खिलाफ गवाही दी और कहा कि इन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए. क्योंकि इन्होंने सिर्फ उन के प्यार की हत्या नहीं की, बल्कि उस के बच्चे के खून से भी अपने हाथ रंगे हैं.

उस दाई ने भी कोर्ट में आ कर उन के खिलाफ गवाही दी. नतीजतन, अमृता के दोनों भाइयों को उम्रभर कैद की सजा सुनाई गई. और बाकी सभी लोगों को भी सजा हुई.

अमृता के पास जीने का कोई मकसद नहीं रह गया था. वह एक पुल से नदी में छलांग लगाने ही वाली थी कि पीछे से इंस्पैक्टर माधव ने उस का हाथ खींच लिया और कहने लगे, ‘‘क्या तुम नहीं चाहती कि औनर किलिंग के नाम पर दुनिया में जो अपराध हो रहे हैं, उन्हें रोका जाना चाहिए?’’

‘‘पर, मैं जब खुद के प्यार को नहीं बचा पाई, तो और लोगों की क्या मदद कर पाऊंगी? और कौन देगा मेरा साथ इंस्पैक्टर साहब?’’

‘‘मैं दूंगा,’’ कह कर इंस्पैक्टर माधव ने अपना हाथ आगे बढ़ाया, तो अमृता ने उन का हाथ थाम लिया.

‘‘और तुम मु झे सिर्फ माधव बुला सकती हो, क्योंकि आज से हम दोनों दोस्त बन गए हैं.’’

अमृता माधव के कंधे पर सिर रख कर जी भर कर रोई और माधव ने भी उसे रोने दिया, ताकि उस के मन का सारा दुख आंसुओं के रास्ते बह जाए. उन दोनों ने एकसाथ प्रण लिया कि वे इस सामाजिक बुराई के खिलाफ मिल कर लड़ेंगे.

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