किरण की कहानी : प्यार दे या मार दे

रखने को तो घर वालों ने उस का नाम किरण रख दिया था, लेकिन मिडिल स्कूल की पढ़ाई के दौरान ही उस की समझ में आ गया था कि उस की जिंदगी में उम्मीद की कोई किरण नहीं है. इस की वजह यह थी कि प्रकृति ने उस के साथ घोर अन्याय किया, जो उसे एक आंख से दिव्यांग बनाया था.

किरण न बहुत ज्यादा खूबसूरत थी और न ही किसी रईस घराने से ताल्लुक रखती थी. एक मामूली खातेपीते परिवार की यह साधारण सी युवती न तो अपनी उम्र की लड़कियों की तरह रोमांटिक सपने बुनती थी और न ही ज्यादा सजनेसंवरने की कोशिश करती थी. घर में पसरे अभाव भी उसे दिखाई देते थे तो खुद को ले कर पिता का चिंतित चेहरा भी उस की परेशानी का सबब बना रहता था.

उस के पिता डालचंद कौरव अब से कई साल पहले नरसिंहपुर जिले की तहसील गाडरवारा के गांव सूरजा से भोपाल आ कर बस गए थे. उन का मकसद बच्चों की बेहतर परवरिश और शहर में मेहनत कर के ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना था, जिस से घरपरिवार का जीवनस्तर सुधरे और धीरेधीरे ही सही, बच्चों का भविष्य बन सके. इस के लिए वह खूब मेहनत करते थे. लेकिन आमदनी अगर चवन्नी होती थी तो पता चलता था कि महंगाई की वजह से खर्चा एक रुपए का है.

वह भोपाल में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते थे, जहां से मिलने वाले वेतन से खींचतान कर किसी तरह खर्च चल जाता था. 3 बेटियों के पिता डालचंद बड़ी बेटी की शादी ठीकठाक और खातेपीते परिवार में कर चुके थे. उस के बाद किरण को ले कर उन की चिंता स्वाभाविक थी, क्योंकि आजकल हर कोई उस लड़की से शादी करने से कतराता है, जिस के शरीर में कोई कमी हो.

सयानी होती किरण की भी समझ में यह बात आ गई थी कि एक आंख कमजोर होने की वजह से सपनों का कोई राजकुमार उसे ब्याहने नहीं आएगा. शादी होगी भी तो वह बेमेल ही होगी, इसलिए उस ने काफी सोचविचार के बाद तय कर लिया कि जो भी होगा, देखा जाएगा. हालफिलहाल तो पढ़ाई और कैरियर पर ध्यान दिया जाए. अपने एकलौते भाई राजू को वह बहुत चाहती थी, जो बाहर की भागादौड़ी के सारे काम तेजी और संयम से निपटाता था. यही नहीं, वह पढ़ाई में भी ठीकठाक था.

छोटी बहन आरती भोपाल के प्रतिष्ठित सैम कालेज में पढ़ रही थी. किरण भी वहीं से बीकौम की पढ़ाई कर रही थी. वह स्वाभिमानी भी थी और समझदार भी, लिहाजा उस ने मीनाल रेजीडेंसी स्थित एजिस नाम के कालसैंटर में पार्टटाइम नौकरी कर ली थी. वहां से मिलने वाली तनख्वाह से वह अपनी पढ़ाई का और अन्य खर्च उठा लेती थी.

21 अक्तूबर, 2016 को किरण अपने घर ई-34 सिद्धार्थ लेकसिटी, आनंदनगर से रोज की तरह कालेज जाने को तैयार हुई तो घर का माहौल रोज की तरह ही था. चायनाश्ते का दौर खत्म हो चुका था और सभी अपनेअपने औफिस, स्कूल और कालेज जाने के लिए तैयार हो रहे थे.

किरण भी तैयार थी. वह कालेज के लिए घर से निकलने लगी तो चाचा संबल कौरव से खर्चे के लिए कुछ पैसे मांगे. उन्होंने उसे 20 रुपए दे दिए. किरण का भाई राजू भी तैयार था, इसलिए किरण उस के साथ चली गई. ऐसा लगभग रोज ही होता था कि जब किरण जाने लगती थी तो राजू उस के साथ हो लेता था और उसे सैम कालेज के गेट पर छोड़ देता था. उस दिन भी उस ने किरण को कालेज के गेट पर छोड़ा तो वह चुपचाप अंदर दाखिल हो गई. उन दिनों सैम कालेज में निर्माण कार्य चल रहा था.

राजू को कतई अहसास नहीं था कि बहन के दिलोदिमाग में एक ऐसा तूफान उमड़ रहा है, जो उस की जिंदगी लील लेगा. वह दीदी को बाय कह कर वापस चला गया तो किरण सीधे कालेज की निर्माणाधीन बिल्डिंग ब्लौक की छत पर जा पहुंची और चौथी मंजिल पर जा कर खड़ी हो गई. उस के दिल में उमड़ता तूफान अब शबाब पर था, जिस का मुकाबला करने की हिम्मत अब उस में नहीं रह गई थी. लिहाजा वह चौथी मंजिल से सीधे नीचे कूद गई.

इस के बाद सैम कालेज में हल्ला मच गया. इतनी ऊंचाई से नीचे कूदने के बाद किरण के जिंदा बचने का कोई सवाल ही नहीं था. जरा सी देर में छात्रों की भीड़ इकट्ठा हो गई. इस बात की खबर कालेज प्रबंधन तक भी पहुंच गई. फलस्वरूप उसे तुरंत नजदीकी नर्मदा अस्पताल पहुंचाया गया. अस्पताल से पुलिस को खबर कर दी गई. किरण को देखने के बाद डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

कालेज प्रबंधन ने किरण की बहन आरती को इस हादसे की सूचना दी तो उस ने घर वालों को बताया. घर वाले भागेभागे नर्मदा अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक किरण दुनिया को अलविदा कह चुकी थी. उस के पास से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला था, जबकि आमतौर पर ऐसा नहीं होता कि कोई पढ़ीलिखी समझदार युवती खुदकुशी करे और सुसाइड नोट न छोड़े. पर इस मामले में ऐसा ही हुआ था. कौरव परिवार में रोनाधोना मच गया था. किरण के सहपाठी भी दुखी थे कि आखिर जिंदादिल किरण ने ऐसा आत्मघाती कदम क्यों उठाया.

पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए छानबीन और पूछताछ शुरू की. जिस खुदकुशी को गुत्थी समझा जा रहा था, वह चंद घंटों में सुलझ गई, जो प्यार में धोखा खाई हीनभावना से ग्रस्त एक लड़की की दर्दभरी छोटी सी कहानी निकली.

किरण ने सुसाइड नोट छोड़ने की जरूरत शायद इसलिए नहीं समझी थी, क्योंकि उसे जो कहना था, उसे वह अपने फेसबुक एकाउंट में लिख चुकी थी. किरण के घर और कालेज वाले यह जान कर हैरान हो उठे थे कि किरण किसी से प्यार करती थी और वह भी इतना अधिक कि अपने प्रेमी की बेरुखी से घबरा गई थी और उसे कई दिनों से मनाने की कोशिश कर रही थी.

सैम कालेज से बीई कर रहा रोहित किरण का बौयफ्रैंड था, जो बीते कुछ दिनों से उसे भाव नहीं दे रहा था. रोहित की दोस्ती और प्यार ने किरण के मन में जीने की उम्मीद जगा दी थी, उस की नींद में कई रोमांटिक ख्वाब पिरो दिए थे. इस से उसे लगने लगा था कि अभी भी दुनिया में ऐसे तमाम लड़के हैं, जो प्यार के सही मतलब समझते हैं. जातिपांत, ऊंचनीच और शारीरिक कमियों पर ध्यान नहीं देते. उन के लिए सूरत से ज्यादा सीरत अहम होती है.

सब कुछ ठीकठाक चल रहा था, पर कुछ दिनों से रोहित का मूड उखड़ाउखड़ा रहता था. वह किरण से बात भी नहीं कर रहा था. उस का यह रवैया किरण की समझ में नहीं आ रहा था. अगर रोहित उसे वजह बताता तो तय था कि वह किसी न किसी तरह उसे मना लेती, कोई गलतफहमी होती तो वह उसे दूर कर देती. लेकिन रोहित की इस बेरुखी से किरण को अपने ख्वाब उजड़ते नजर आए और वह खुद को ठगा सा महसूस करने लगी.

जब प्रेमी बात ही नहीं कर रहा था तो वह क्या करती  लिहाजा किरण ने फेसबुक पर कशिश कौरव नाम से बनाए अपने एकाउंट पर मन की व्यथा साझा करनी शुरू कर दी. अपने पोस्टों में उस ने बौयफ्रैंड के छोड़े जाने यानी ब्रेकअप की बात कही और भावुकता में अपने सुसाइड की बात भी कह डाली थी. शायद ही नहीं, निश्चित रूप से वह अपने प्रेमी को अपने दिल का दर्द बताना चाह रही थी, जो उस की सांसों में बस चुका था.

एक जगह उस ने शायराना अंदाज में लिखा था, ‘ऐ इश्क तुझे खुदा की कसम या तो मुझे मेरा प्यार दे या फिर मुझे मार दे.’

प्यार नहीं मिला तो किरण ने खुद के लिए मौत चुनने की नादानी कर डाली, वह भी इस तरह कि कोई रोहित पर सीधे अंगुली न उठा सके. लेकिन फेसबुक एकाउंट में अपने प्यार और प्रेमी की बेरुखी की चर्चा कर के उस ने उसे शक के दायरे में तो ला ही दिया था. दूसरे दिन पुलिस ने साईंखेड़ा स्थित रोहित के घर में दबिश दी, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. जाहिर है, किरण की खुदकुशी के बाद वह गिरफ्तारी के डर से फरार हो गया था.

पुलिस ने कालेज में पूछताछ की तो एक बात यह भी सामने आई कि रोहित और किरण में दोस्ती तो थी, पर प्यार जैसी कोई बात उन के बीच नहीं थी. किरण की कुछ सहेलियों ने दबी जुबान से स्वीकार किया था कि वह रोहित से एकतरफा प्यार करती थी. इस का मतलब तो यही हुआ कि किरण दोस्ती को प्यार मानते हुए जबरदस्ती रोहित के गले पड़ना चाहती थी. इस बात का खुलासा अब रोहित ही कर सकता है, जो कथा लिखे जाने तक पुलिस की पकड़ में नहीं आया था.

किरण भावुक थी और रोहित को ले कर शायद वह जरूरत से ज्यादा जज्बाती हो गई थी. इस की एक वजह उस की आंख की विकृति से उपजी हीनभावना भी हो सकती है. रोहित से दोस्ती के बाद निस्संदेह उस की यह सोच और भी गहरा गई होगी. फेसबुक पर उस ने तरहतरह से रोहित को मनाने की कोशिश की थी, लेकिन असफल रही थी.

जब उसे लगा कि यार और प्यार नहीं तो जिंदगी क्यों, जो अब किसी के काम की नहीं. यही सोच कर उस ने यह खतरनाक फैसला ले डाला होगा.

कौरव परिवार ने इस गम में दिवाली नहीं मनाई. उन्हें अपनी लाडली किरण की मौत के बारे में यकीन ही नहीं हो रहा है. उन्हें लगता ही नहीं कि अब वह इस दुनिया में नहीं है. डालचंद के चेहरे पर विषाद है, पर इसलिए नहीं कि किरण ने उन की चिंता हमेशा के लिए दूर कर दी है, बल्कि इसलिए कि उन की बेटी ने जल्दबाजी में आत्मघाती फैसला ले लिया और खुद ही हमेशा के लिए उन से दूर चली गई.

रोहित का कुछ खास बिगड़ेगा, ऐसा नहीं लग रहा. क्योंकि उस ने अगर किरण से कुछ वादे किए भी होंगे तो उन के प्रमाण नहीं हैं और न ही किरण ने उसे सीधे तौर पर अपनी खुदकुशी का जिम्मेदार ठहराया है.

संभव है कि वह दोस्ती को प्यार समझते हुए मन ही मन रोहित को चाहने लगी हो और ठुकराए जाने पर व्यथित हो कर टूट गई हो. लेकिन वह हौसला और सब्र रख कर जिंदा रहती तो शायद बात बन जाती.

मैं 4 सालों से एक शादीशुदा औरत से प्यार करता हूं, हम ने कई बार सेक्स भी किया है. क्या ऐसा करना ठीक है?

सवाल
मैं पिछले तकरीबन 4 सालों से एक शादीशुदा औरत से प्यार करता हूं. हम ने कई बार हमबिस्तरी भी की है. क्या ऐसा करना ठीक है?

जवाब
अगर औरत राजी हो तो ठीक है, पर उस के पति को पता चल गया तो जनाब बुरी तरह पिटोगे. अच्छा है साथ छोड़ दें.

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सीमा के पिता रेलवे में नौकरी करते थे, सो वे ज्यादातर दौरे पर रहते थे. सीमा की मां सारा दिन कालोनी में यहांवहां घूमती रहती थीं. सीमा घर पर होती तो उस की मां का रिश्तेदार चंदू आ जाता. चंदू तबीयत से दिलफेंक मिजाज का था और इस की वजह से उस की बीवी उसे छोड़ चुकी थी. वह प्राय: इधरउधर लड़कियों के पीछे घूमता रहता. सीमा की मां के लिए शहर से उपहार लाता तो वे खुश हो जातीं. एक दिन वह सीमा को शहर घुमाने के बहाने ले गया और उसे बहलाफुसला कर उस से संबंध बना लिए. सीमा को जब तक कुछ समझ में आता, उसे अनचाहा गर्भ ठहर चुका था.

अब चूंकि चंदू तो मतलब साध कर निकल गया, लेकिन जैसेजैसे सीमा पर दिन चढ़े तो उन की पड़ोसिन को संदेह हुआ. गांव में रहने के कारण मामला गंभीर था. अगर किसी को भनक लग गई तो पूरे गांव में बदनामी हो जाएगी.

अब सीमा की मां को कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करें? क्योंकि 3-4 माह का गर्भ हो चुका था. यदि वे पति को बतातीं तो पति तो उन्हें ही बदचलन कह कर छोड़ देता. सीमा की मां अपनी पड़ोसिन के साथ पास के गांव की दाई रजिया के पास गई. रजिया ने यह काम आसानी से करने का भरोसा दिलाया और बतौर मेहताना मोटी रकम मांगी. वक्त तय हुआ रात 12 बजे का. सीमा के पिता नाइट ड्यूटी पर चले गए तब रजिया व पड़ोसिन सीमा के घर आए. उस ने सीमा को लिटाया. बिना किसी दवा व इंजैक्शन के रजिया ने सीमा की योनि से उस के गर्भ में एक कमची जैसी पतली लकड़ी डाली, जैसे हरे बांस की छड़ी होती है. उस पतली लकड़ी के भीतर डाले जाने से सीमा चीखने लगी. वह असहाय दर्द से बिलबिला उठी तो रजिया ने कहा कि उस का हाथ पकड़ कर रखो साथ ही मुंह भी दबा दो.

रजिया ने लकड़ी को गर्भाशय में आघात से चलाना शुरू किया व उस की मां व पड़ोसिन ने सीमा के हाथ कस कर पकड़े रखे और मुंह भी कपड़े से बांध दिया ताकि वह चीख न सके.

लकड़ी के तेज आघात से सीमा का गर्भाशय क्षतविक्षत हो गया और जब ब्लीडिंग होने लगी तो सीमा की मां घबरा गई. रजिया बोली, ‘‘गर्भ गिर गया है. सुबह तक होश आ जाएगा.’’ वह पैसे ले कर चली गई. लेकिन न तो ब्लीडिंग रुकी और न ही सीमा होश में आई. वह असहनीय पीड़ा से तड़पतड़प कर प्राण गवां चुकी थी.

सीमा की मां को सुबह पता चला कि सीमा का प्राणांत हो चुका है. कमरा सीमा के खून से भर चुका था. पुलिस ने जांच की तो रजिया की करतूत पता चली. सीमा की मां की रंगीनमिजाजी उस की बेटी को लील गई. इतना ही नहीं, चंदू की ऐयाशी अभी भी जारी रही क्योंकि वह पकड़ से दूर जा चुका था.

भोजपुरी एक्ट्रेस Shweta sharma का देसी डांस हुआ वायरल, देखें वीडियो

भोजपुरी एक्ट्रेस Shweta sharma इन दिनों सुर्खियों में छाई हुई है सोशल मीडिया पर श्वेता की फैंन फॉलोइंग काफी अच्छी है जहां वो समय-समय पर पोस्ट करती है अब हाल ही में उन्होंने एक डांस वीडियो शेयर किया है जिसे देख लोग जमकर कमेंट बरसा रहे है और ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

 

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आपको बता दें, कि श्वेता शर्मा वैसे तो कई गानों पर डांस करती हुई नजर आई है लेकिन ये पहला वीडियो है जब श्वेता शर्मा अग्रेंजी गाने पर थिरकती हुई नजर आई है. इस वीडियो में अपनी हॉटनेस को जलवा बिखेरती हुई नजर आ रही है इस वीडियो को अंदाज यूपी-बिहार के लोगों को काफी पसंद आ रहा है. श्वेता शर्मा का ये अंदाज लोगों को खूब पसंद आया है.

 

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बताते चलें कि भोजपुरी एक्ट्रेस श्वेता शर्मा अपने बेबाक और बोल्ड अंदाज के लिए मशहूर हैं. एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने फैंस के साथ तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती रहती हैं. श्वेता शर्मा की फोटोज और वीडियोज इंटरनेट वर्ल्ड में आते ही वायरल जाती है यह वजह ही है कि उन्हें लोग भोजपुरी क्वीन कहते है.मालूम हो कि श्वेता शर्मा की फैन फॉलोइंग भी काफी तगड़ी है. इस मामले में वो भोजपुरी की टॉप एक्ट्रेस नम्रता मल्ला को टक्कर देती हैं.

Ileana D’cruz ने दी फैंस को प्रेग्नेंसी की अपडेट, नहीं बताया कौन है पिता

इन दिनों एक्ट्रेस इलियाना डिक्रूज चर्चा में बनी हुई है. उनका सुर्खियों में आने की वजह उनका इंस्टाग्राम अकाउंट है जहां उन्होनें एक पोस्ट शेयर किया है  और अपनी प्रेग्नेंनी की अपडेट दी है. हालांकि फैंस उनका ये पोस्ट देख हैरत में आ गए है क्योकि अभी तक एक्ट्रेस ने पिता के नाम का खुलासा नहीं किया है.

 

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आपको बता दें, कि इलियाना डिक्रूज ने इंस्टाग्राम पर स्टोरी पोस्ट की है जहां वो अपनी प्रेग्नेंसी की अपडेट देती हुई नजर आ रही है इस पोस्ट में इलियाना बिस्टर पर लेटी नजर आ रही है उन्हे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह सोने के मूड में है. इसके साथ इलियाना डिक्रूज ने लिखा है, जब आप नींद लेना चाहते हैं लेकिन बेबी आपके पेट में डांस करने का फैसला करता है। इस तरह से इलियाना डिक्रूज ने बताया है कि उनका बेबी उनके पेट में किक कर रहा है.

नहीं की इलियाना ने शादी

जानकारी के लिए आपको बता दें, कि इलियाना डिक्रूज ने अभी तक शादी नहीं की है और जब उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी का ऐलान किया तो लोग हैरान रह गए. इलियाना डिक्रूज की प्रेग्नेंसी की जानकारी सामने आने के बाद लोग कयासबाजी कर रहे हैं कि वह किसके बच्चे की मां बनने वाली हैं. बता दें कि इलियाना डिक्रूज का नाम कई स्टार्स के साथ जुड़ा है.खबरें आई थीं कि इलियाना डिक्रूज ऑस्ट्रेलियन फोटोग्राफर एंड्रयू नीबोन के डेट कर रही हैं और इन दोनों ने गुपचुप शादी कर ली है. हालांकि, इनकी ब्रेकअप की खबरें सामने आई थीं. वहीं, इलियाना डिक्रूज का नाम कटरीना कैफ के भाई सेब्सयिन लॉरेंट माइकल के साथ भी जुड़ा था.

 

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इलियाना डिक्रूज के करियर के बार में बात की जाए तो उन्होंने बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री की तमाम फिल्म में काम किया है. इलियाना डिक्रूज ने साल 2006 में साउथ फिल्म इंडस्ट्री से अपने करियर की शुरुआत की थी. इलियाना डिक्रूज को बॉलीवुड इंडस्ट्री में ‘बर्फी’, ‘रुस्तम’, ‘बादशाहो’, ‘रेड’, ‘मैं तेरा हीरो’ जैसी फिल्मों के लिए जाना जाता है.

कर्नाटक में रिजर्वेशन एक अहम मुद्दा

रिजर्वेशन से पहले दलितों का और बाद में ओवीसी कास्यों का हाल सुथरा हो ऐसा नहीं है पर फिर भी जो थोड़ी भी सीटें उन जातियों की मिली. इन जातियों को हमारे पौराणिक ग्रंथ बारबार पाप का फल कहते रहते हैं और यही ङ्क्षहदू सोच की जड़ में है कि ये खुद अपनी बुरी हालत के लिए जिम्मेदार हैं. हालत तो यह है कि सदियों की पढ़ाई पट्टी की वजह से पिछड़ी व अछूत जातियां खुद को दोषी मान कर जोरशोर से पूजापाठ करती है ताकि अगले जन्म में वे इस जंजाल में न फंसे.

इस रिजर्वेशन के बावजूद ऊंची जातियां आज भी देश, समाज, सरकारी, व्यापारों, पढ़ाई, सेना, शासन, पुलिस, सेना में सब से ऊंचे स्थान पर बैठी है. दिक्कत यह है कि कहने को ये लोग पढ़ेलिखे हैं, मेरिट वाले हैं पर यही ऐसा भारत बना रहे हैं जो हर पैमाने पर ओवीसी देशों से भी गया गुजरा है.

कर्नाटक के चुनावों में रिजर्वेशन एक बड़ा मुद्दा रहा है क्योंकि मुसलमानों को मिलने वाला 4′ रिजर्वेशन हटा कर भारतीय जनता पार्टी कट्टर ङ्क्षहदू वोटरों को कह रही है कि लो तुम्हारे लिए 2 पुष्पक विमान उतार दिया है. उन्हें भरोसा दिलाया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी को वोट करते रहो तो बाकि 50′ रिजर्वेशन भी एक न एक दिन खत्म हो जाएगा और पौराणिक आदेश की जन्म के हिसाब से ही पद मिलेंगे, ऊंचे घरों वाले खुद ब खुद ऋषिमुनि बन जाएंगे, राजाओं के पुत्र राजा बन जाएंगे और दासों के पुत्र दास रह जाएंगे और सब की औरतें पापों की गठरियों की तरह मानी जाती रहेंगी.

अगर मेरिट वाले 50′ लोगों ने कुछ किया होता तो यह देश हर पैमाने पर पिछड़ा न होता. आगे उन्होंने कुछ किया होा तो देश के 2 बड़े शहर दिल्ली और मुंबई झुग्गीझोपडिय़ों के यहां नहीं होते जहां न पानी है, न सीवर न वर्षा से बचाव, न गरर्मी की तड़प से बचाव.

अगर मेरिट से आए 50′ लोगों ने सरकार चलाते हुए ढंग से देश चलाया होता तो लाखों भारतीयों को भाग कर दूसरे देशों में जाना नहीं पड़ता. हालत तो यह है कि भूख और बेकारी के कारण भारत के लोग अफ्रीका के गरीबों में गरीब देश सूडान तक पहुंचा रहे हैं कि 2 रोटी का इंतजाम हो सके और आजकल सूडान के लोगों की आपसी लड़ाई में फंसे हुए हैं.

मेरिट की दुहाई की वजह से देश का मीडिया गोदी मीडिया बन कर मोदी मीडिया बना हुआ है. गोदी मीडिया को ङ्क्षहदूमुसलिम, मोदी वाह, भाजपा वाह इसलिए करना अच्छा लगता है कि शायद इस तरह वे रिजर्वेशन को खत्म कर सकें. गोदी मीडिया, चाहे टीवी वाला हो या ङ्क्षप्रट वाला कभी पिछड़ों, दलितों और मुसलमानों व सिखों के नेताओं की बात नहीं करता क्योंकि वे सब रिजर्वेशन को सही मानते हैं.

रिजर्वेशन के बावजूद जनरल कर वालों के 50′ से ज्यादा पदों पर बैठे लोग में जनरल कास्ट की आधी औरतें क्यों नहीं है. क्यों उन्होंने अपनी ही कास्ट की औरतों को मौका नहीं दिया. वे इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी, ममता बैनर्जी, जयललिता, मायावती अपने बलबूते पर कुछ बनीं पर सरकारी पदों पर औरतों की गिनती न के बराबर है क्यों.

जो लोग मेरिट की दुहाई देते हैं वे अपने ही घरों की औरतों को जब बरावर का मौका, बरावर की इज्जत नहीं दे सकते वे भला कैसे पिछड़े शूद्रों और दलित अछूतों को ओबीसी व एएसी कोर्ट की जगह दे सकते हैं.

रिजर्वेशन पाने के बाद कुछ का हाल सुथरा पर उन के हाथ इतने बंधे हैं और रिजर्वेशन पा कर कुछ बने अपने को इतना हन समझते हैं कि वे अपने लोगों के लिए कुछ करते दिखना भी नहीं चाहते. रामनाथ कोङ्क्षवद हो, द्रौपदी मुर्मू, के.आर. नारायण, ये एक पूजापाठी रहे हैं और वर्ण व्यवस्था को मानने वाले जो दूसरे दलिलों पिछड़ों आदिवासियों के लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं रहे या हैं. इसी वजह से रिजर्वेशन के बावजूद व दलितों, पिछड़ों का हाल सुधरा है न देश का.

प्यार के लिए दबंगई कहां तक जायज

उत्तर प्रदेश के महानगर मुरादाबाद के लाइनपार इलाके के रहने वाले महावीर सिंह सैनी के परिवार में उस की पत्नी शारदा के अलावा एक बेटा अंकित और 3 बेटियां थीं. 2 बेटियों की शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर की बेटी पूनम 9वीं कक्षा में पढ़ रही थी. महावीर राजमिस्त्री था. रोजाना की तरह 10 दिसंबर, 2016 को भी वह अपने काम पर चला गया था. बेटा अंकित ट्यूशन पढ़ने गया था. घर पर शारदा और उस की बेटी पूनम ही थी. सुबह करीब 10 बजे जब शारदा नहाने के लिए बाथरूम में गई तब पूनम घर के काम निपटा रही थी. शारदा को बाथरूम में घुसे 5-10 मिनट ही हुए थे कि उस ने चीखनेचिल्लाने की आवाजें सुनीं. चीख उस की बेटी पूनम की थी.

चीख सुन कर शारदा घबरा गई. उस ने बड़ी फुरती से कपड़े पहने और बाथरूम से बाहर निकली तो देखा पूनम आग की लपटों से घिरी थी. उस के शरीर पर आग लगी थी. शोर मचाते हुए वह पूनम के कपड़ों की आग बुझाने में लग गई. उस की आवाज सुन कर पड़ोसी भी वहां आ गए. किसी तरह उन्होंने बुझाई. तब तक पूनम काफी झुलस चुकी थी और बेहोश थी. आननफानन में लोग उसे राजकीय जिला चिकित्सालय ले गए. बेटी के शरीर के कपड़ों में लगी आग बुझाने की कोशिश में शारदा के हाथ भी झुलस गए थे.

अस्पताल से इस मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई. कुछ ही देर में थाना मझोला के थानाप्रभारी नवरत्न गौतम पुलिस टीम के साथ अस्पताल पहुंच गए. खबर मिलने पर पूनम के पिता महावीर भी अस्पताल आ गए. डाक्टरों के इलाज के बाद पूनम होश में आ गई थी. पूनम के बयान लेने जरूरी थे. इसलिए पुलिस ने इलाके के मजिस्ट्रैट को सूचना दे कर अस्पताल बुलवा लिया.

पुलिस और मजिस्ट्रैट की मौजूदगी में पूनम ने बताया कि शिवदत्त ने उस के ऊपर केरोसिन डाल कर आग लगाई थी. उस के साथ उस के पिता महीलाल भी थे. शिवदत्त पूनम के घर के पास चामुंडा वाली गली में रहता था. पता चला कि वह पूनम से एकतरफा प्यार करता था.

थानाप्रभारी नवरत्न गौतम ने यह जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दे दी. मामला मुरादाबाद शहर का ही था इसलिए तत्कालीन एसएसपी दिनेशचंद्र दूबे और एएसपी डा. यशवीर सिंह जिला अस्पताल पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने पूनम का इलाज कर रहे डाक्टरों से बात की.

तब तक पूनम की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ने लगी थी. डाक्टरों ने उसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी. पूनम के घर वालों ने उसे दिल्ली ले जाने को कहा तो जिला अस्पताल से पूनम को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रैफर कर दिया गया.

महावीर की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली. चूंकि पूनम ने शिवदत्त और उस के पिता पर आरोप लगाया था, इसलिए पुलिस ने शिवदत्त के घर दबिश दी पर उस के घर कोई नहीं मिला. पुलिस संभावित जगहों पर उन्हें तलाश करने लगी, पर दोनों बापबेटों में से कोई भी पुलिस के हत्थे नहीं लगा.

उधर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भरती पूरम की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था. उस की हालत बिगड़ती जा रही थी. बर्न विभाग के डाक्टरों की टीम पूनम को बचाने में लगी हुई थी पर उन्हें सफलता नहीं मिल सकी. आखिर 10 दिसंबर की रात को ही पूनम ने दम तोड़ दिया.

अगले दिन जवान बेटी की हृदयविदारक मौत की खबर जब उस के मोहल्ले वालों को मिली तो पूरे मोहल्ले में जैसे मातम छा गया. आरोपी को अभी तक गिरफ्तार न किए जाने से लोग आक्रोशित थे. कहीं लोगों का गुस्सा भड़क न जाए इसलिए उस इलाके में भारी तादाद में पुलिस तैनात कर दी गई.

रविवार होने की वजह से पूनम की लाश का पोस्टमार्टम सोमवार 12 दिसंबर को हुआ. दोपहर बाद उस की लाश दिल्ली से मुरादाबाद लाई गई. पुलिस मोहल्ले के गणमान्य लोगों से बात कर के माहौल को सामान्य बनाए रही. अंतिम संस्कार के समय भी भारी मात्रा में पुलिस थी.

उधर पुलिस की कई टीमें आरोपियों को तलाशने में जुटी हुई थीं. जांच टीमों पर एसएसपी का भारी दबाव था. आखिर पुलिस की मेहनत रंग लाई. 12 दिसंबर को पुलिस ने शिवदत्त को गिरफ्तार कर लिया. उस के गिरफ्तार होने के बाद लोगों का गुस्सा शांत हुआ.

थाने ला कर एसएसपी और एएसपी के सामने थानाप्रभारी नवरत्न गौतम ने अभियुक्त से पूछताछ की तो पहले तो वह पुलिस को बेवकूफ बनाने की कोशिश करता रहा पर उस का यह झूठ ज्यादा देर तक पुलिस के सामने नहीं टिक सका. उस ने पूनम को जलाने का अपराध स्वीकार कर उस की हत्या की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

जिला मुरादाबाद के लाइनपार इलाके में मंडी समिति गेट के सामने की बस्ती में रहने वाला महावीर सिंह अपने राजगीर के काम से परिवार का पालनपोषण कर रहा था. इसी की कमाई से वह 2 बेटियों की शादी कर चुका था. पूनम 9वीं की पढ़ाई के साथ महिलाओं के कपड़े सिलती थी. घर के पास ही उस ने बुटीक खोल रखा था.

उस के घर के पास ही महीलाल का मकान था. महीलाल का बेटा शिवदत्त बदमाश प्रवृत्ति का था. उस की दोस्ती मंडी समिति के पास स्थित बिजलीघर में तैनात कर्मचारियों के साथ थी. उन्हीं की वजह से उसे ट्रांसफार्मर रखने के लिए बनाए जाने वाले चबूतरों का ठेका मिल जाता था.

चूंकि शिवदत्त का पड़ोसी महावीर राजमिस्त्री था, इसलिए उसी के द्वारा वह चबूतरे बनवा देता था. इस से कुछ पैसे शिवदत्त को बच जाते थे. काम की वजह से शिवदत्त का महावीर के घर आनाजाना शुरू हो गया था.

महावीर की छोटी बेटी पूनम पर शिवदत्त की नजर पहले से ही थी. जब भी वह घर से निकलती तो वह उसे ताड़ता रहता था. पर पूनम ने उसे लिफ्ट नहीं दी. जब शिवदत्त का पूनम के घर आनाजाना शुरू हो गया तो उस ने पूनम के नजदीक पहुंचने की कोशिश की.

जब वह पूनम को ज्यादा ही परेशान करने लगा तो एक दिन पूनम ने इस की शिकायत अपनी मां से कर दी. इस के बाद शारदा ने यह बात पति को बताई तो महावीर ने शिवदत्त के पिता महीलाल से शिकायत करने के साथ शिवदत्त से बातचीत बंद कर दी. इस के अलावा उस ने अपने घर आने को भी उसे साफ मना कर दिया.

शिवदत्त दबंग था. महावीर द्वारा उस के पिता से शिकायत करने की बात उसे बहुत बुरी लगी. वह पूरी तरह से दादागिरी पर उतर आया और अब पूनम को खुले रूप से धमकी देने लगा कि वह उस से शादी करे नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. महावीर ने फिर से महीलाल से शिकायत की. इस बार महीलाल ने अपने बेटे शिवदत्त का ही पक्ष लिया.

महावीर कोई लड़ाईझगड़ा नहीं करना चाहता था. बात बढ़ाने के बजाय वह चुप हो कर बैठ गया. महावीर के रिश्तेदारों और मोहल्ले के कुछ लोगों ने उस से थाने में शिकायत करने का सुझाव दिया पर बेटी की बदनामी को देखते हुए वह थाने नहीं गया.

महावीर के चुप होने के बाद शिवदत्त का हौसला और बढ़ गया. वह पूनम को और ज्यादा तंग करने लगा. इतना ही नहीं, वह कई बार पूनम के घर तमंचा ले कर भी पहुंचा.

हर बार वह उस से शादी करने की धमकी देता. घटना से एक दिन पहले भी वह पूनम के घर गया. तमंचा निकाल कर उस ने धमकी दी कि वह शादी के लिए अभी भी मान जाए वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहे.

10 दिसंबर को शिवदत्त फिर से पूनम के घर जा धमका. उस दिन वह अपने साथ एक केन में केरोसिन भी ले गया था. पूनम उस समय घर में झाड़ू लगा रही थी, तभी उस ने उस पर केरोसिन उड़ेल कर आग लगा दी और वहां से भाग गया.

शिवदत्त से पूछताछ के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

तत्कालीन एसएसपी दिनेशचंद्र दूबे का कहना था कि इस मामले में शिवदत्त के अलावा और कोई दोषी पाया गया तो उस के खिलाफ भी कानूनी काररवाई की जाएगी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मेरी शादी होने वाली है. अगर मेरी मंगेतर किसी के साथ सेक्स करती होगी, तो इस का पता मुझे कैसे चलेगा?

सवाल
मैं 27 साल का हूं. मेरी शादी होने वाली है. अगर मेरी मंगेतर किसी के साथ हमबिस्तरी करती होगी, तो इस का पता मुझे कैसे चलेगा?

जवाब
शादी की बुनियाद यकीन पर टिकी है. आप शादी से पहले ही ऐसी बातें मत सोचिए. आम भारतीय लड़की शादी से पहले अमूमन अछूती होती है.

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किसी भी युवती के लिए पहले सैक्स के दौरान उस की वर्जिनिटी सब से ज्यादा माने रखती है. युवती की योनि के ऊपरी हिस्से में पतली झिल्ली होती है जो उस के वर्जिन होने का प्रमाण देती है, लेकिन किसी भी युवती की योनि और उस के ऊपरी सिरे में स्थित हाइमन झिल्ली को देख कर यह पता लगाना कि वह वर्जिन है कि नहीं न तो संभव है न ही ठीक. सैक्स के दौरान अकसर पार्टनर द्वारा युवती की योनि से रक्तस्राव की उम्मीद की जाती है लेकिन ज्यादातर मामलों में पाया गया है कि पहली बार सैक्स के दौरान युवती के वर्जिन होने के बावजूद उस की योनि से रक्तस्राव नहीं होता, फिर भी साथी  द्वारा यह मान लिया जाता है कि युवती पहले भी सैक्स कर चुकी है, जबकि पहली बार सैक्स के दौरान युवती की योनि से स्राव होने या न होने को उस के वर्जिन होने का सुबूत नहीं माना जा सकता, क्योंकि पहली बार में बहुत सी युवतियों को इसलिए रक्तस्राव नहीं होता, क्योंकि खेलकूद, साइकिल चलाना आदि की वजह से उन की योनि में स्थित झिल्ली कब फट जाती है उन्हें स्वयं नहीं पता चलता. इस का कारण हाइमन झिल्ली का बहुत पतला व लचीला होना है. कभीकभी युवती में जन्म के समय से ही यह झिल्ली मौजूद नहीं होती. ऐसे में पहले सैक्स के दौरान योनि से रक्तस्राव न होने के आधार पर युवती के चरित्र पर संदेह करना गलत होता है.

पहली बार सैक्स के दौरान युवक अपने साथी से उस के कुंआरी होने का सुबूत भी मांगते हैं, जबकि वह खुद के कुंआरे होने का सुबूत देना उचित नहीं समझते. इस वजह से पहला सैक्स जिसे हम वर्जिनिटी का नाम देते हैं, आगे चल कर सैक्स संबंधों में बाधा बन जाता है. युवती की वर्जिनिटी पर शक की वजह से कई तरह की गलतफहमियां जन्म लेती हैं. इस का प्रमुख कारण कुंआरेपन को ले कर लोगों से सुनीसुनाई बातें हैं.

किसी भी युवक या युवती के लिए पहली बार किए जाने वाले सैक्स का जो रोमांच होता है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह एक ऐसी स्टेज है जहां युवकयुवती एकदूसरे के सामने अपने सारे कपड़े उतारने और सैक्स को ले कर होने वाली झिझक को दूर करने की शुरुआत करते हैं. यहीं से युवकयुवती के कुंआरेपन की समाप्ति होती है और यही वह स्टेज है जहां दोनों अपनी वर्जिनिटी खोते हैं.

युवती को अपने कुंआरेपन का सुबूत देने के लिए कई तरह की परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है जोकि सरासर गलत है. अगर युवती पुरुष से कुंआरे होने का सुबूत नहीं मांगती तो उसे भी चाहिए कि अपने साथी पर विश्वास करते हुए उस के कुंआरेपन पर सवाल खड़ा न करे. अकसर युवती के कुंआरेपन को ले कर घरेलू ंिहंसा व तलाक जैसी नौबत भी आ जाती है. अपने चरित्र का प्रमाण देने के लिए युवती को तमाम तरह के सुबूत पेश करने के लिए कहा जाता है.

सैक्स के दौरान वर्जिनिटी को ले कर आने वाले खून की कुछ बूंदों के प्रति पुरुषवर्ग इतना गंभीर होता है कि वह वर्षों से चले आ रहे इस दकियानूसी खयाल से बाहर आने की सोच भी नहीं सकता, जबकि अपने कुंआरेपन को गृहस्थी के बीच का मुद्दा बनाना गलत है. इसलिए युवकयुवतियों को चाहिए कि वे पहले सैक्स को यादगार बनाएं न कि वर्जिनिटी के चक्कर में पड़ कर संबंधों में दरार पैदा करें.

प्यार और भरोसे से करें शुरुआत

नीरज की अरेंज्ड मैरिज थी, अत: वह अपनी होने वाली पत्नी से कभी मिला नहीं था. ऐसे में नीरज के दोस्त शादी की पहली रात को ले कर नीरज को तमाम तरह की सलाह देने में लगे हुए थे. उस के एक दोस्त ने कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ पहली रात के सैक्स यानी सुहागरात में पत्नी के वर्जिन होने का पता लगाने के लिए योनि से रक्तस्राव होने पर जरूर ध्यान दे. अगर रक्तस्राव हुआ तो समझ ले कि पत्नी ने किसी के साथ सैक्स नहीं किया है, अगर नहीं हुआ तो वह पहले सैक्स कर चुकी है.

लेकिन नीरज ने दोस्त की इस बात पर ध्यान न दिया, क्योंकि वह जानता था कि पहले सैक्स में रक्तस्राव होना जरूरी नहीं. इस से यह पता चलता है कि वर्जिन होने के लिए सुबूत देने की जरूरत नहीं होती बल्कि पहली बार किए जाने वाले सैक्स की शुरुआत प्यार और भरोसे के साथ की जाए तो यह न केवल ज्यादा मजा देने वाला होता है, बल्कि इस से रिश्ता और भी गहरा व विश्वसनीय बन जाता है.

बातचीत है जरूरी

सैक्स व मनोरोग विशेषज्ञ डा. मलिक मोहम्मद अकमलुद्दीन का कहना है कि कौमार्य खोने के पहले एकदूसरे के बारे में अच्छी तरह से जान लें, क्योंकि सैक्स आनंद के लिए किया जाता है न कि भूख मिटाने के लिए. इसलिए सैक्स को मजेदार बनाने की कोशिश करें, आपस में कामुक बातचीत की शुरुआत हो और धीरेधीरे यह बातचीत शर्म से ऊपर उठ कर सैक्स संबंध के रूप में आगे बढे़. इस तरह सैक्स का मजा दोगुना हो जाता है और पतिपत्नी के बीच शर्म का परदा भी उठ जाता है.

पहले सैक्स को ज्यादा मजेदार व यादगार बनाने के लिए वर्जिनिटी जैसे दकियानूसी खयाल से ऊपर उठ कर शारीरिक व मानसिक संतुष्टि को ज्यादा महत्त्व देना चाहिए. इस के अलावा किसी तरह की अजीबोगरीब उम्मीदें नहीं पालनी चाहिए जिन से जीवन साथी को किसी तरह की ठेस पहुंचे.

कैसी प्रेमिका की चाहत

एक सर्वे के अनुसार 51त्न युवा प्रेमियों को प्रेमिका की ब्यूटी, 36त्न को ब्रेन और 15त्न को प्रेमिका की ब्यूटी विद ब्रेन दोनों का कौंबिनेशन प्रभावित करता है.

प्रेमी प्रेमिका की तरह अपनी पसंद और नापसंद के आधार पर प्रेमिका को चुनते हैं.

आइए जानें वे क्या पसंद करते हैं अपनी प्रेमिका में :

–       युवा प्रेमी को साफसफाई का खयाल रखने वाली प्रेमिका अधिक पसंद आती है.

–       युवा प्रेमी को प्रेमिका की बौडी लैंग्वेज, बाल, आंखें, मुसकराहट भी अपनी ओर आकर्षित करती है.

–       युवा प्रेमी बहुत होनहार प्रेमिका की चाहत नहीं रखते बल्कि उन्हें हर सामान्य कार्य में रुचि रखने वाली प्रेमिका ज्यादा पसंद आती है.

–       51% युवाओं का मानना है कि उन्हें प्रेमिका की खूबसूरती के अलावा उस का केयरिंग नेचर बहुत प्रभावित करता है.

–       आत्मविश्वासी प्रेमिका युवा प्रेमी को ज्यादा पसंद आती है.

–       अकसर युवक ऐसी प्रेमिका को पसंद करते हैं जो अपना अधिकांश समय उन्हें ही दे.

–       बातबात पर इमोशनल होने वाली पे्रमिका से वे दूरी बनाने में ही भलाई समझते हैं.

–       युवा प्रेमी अकसर ऐसी प्रेमिका चाहते हैं, जो सैक्सी और कौपरेट करती हो.

 

संक्रमण से बचाएंगी ये 7 आदतें

कोरोना से जंग की बात हो तो हमें हाथ धोने, मास्क लगाने, सैनिटाइजर का प्रयोग करने और सामाजिक दूरी बना कर रखने जैसे उपायों को जरूर अपनाना चाहिए. इन उपायों से आप कोरोना वायरस से दूर रह पाएंगे.

मगर मान लीजिए कि किसी तरह कोरोना ने आप के शरीर में प्रवेश कर ही लिया. फिर कैसे लड़ेंगे? इस के लिए जरूरी है आप का अंदर से मजबूत होना और अंदर से मजबूती के लिए जरूरी है लाइफस्टाइल और डाइट में सुधार.

इन छोटेछोटे बदलावों से आप खुद को और परिवार को किसी भी तरह के संक्रमण से सुरक्षित रख सकती हैं.

सकारात्मक सोच

यह सही है कि आज हम रातदिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप और मरने वालों की लगातार बढ़ती संख्या देख और सुन रहे हैं. ऐसे में सकारात्मक सोच बनाए रखना कठिन है. मगर ध्यान दें, दरअसल सकारात्मक सोच के लिए हमें परिस्थितियों की भयावहता से अधिक संभावित उपायों पर नजर रखनी होगी. परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों यदि हम मन से मजबूत हैं, आशावान हैं, बेहतर और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद कर रहे हैं तो हम कहीं न कहीं अपने दिमाग तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि घबराने वाली कोई बात नहीं. इस से आप का नर्वस सिस्टम बेहतर ढंग से काम कर पाता है. शरीर ऐक्टिव रहता है. शरीर का हर अंग ज्यादा अच्छी तरह काम करता है और आप बीमारियों से लड़ने को तैयार हो जाते हैं. आप का इम्यून सिस्टम मजबूती से किसी भी संक्रमण का सामना करने के लिए तैयार रहता है.

शांत मन प्रसन्न हृदय

मन को शांत रखें. आप का मन विचलित होगा, आप किसी के लिए बुरा सोचेंगे और कठोर वचन बोलेंगे, क्रोधित होंगे या फिर किसी बात को  ले कर दुखी रहेंगे तो आप अपने मन और शरीर की मदद करें. सद्भावना रखें. इस से आप को दूसरों का प्यार मिलेगा और शरीर में अच्छे और स्वस्थ हारमोन तैयार होंगे.

खूब हंसे

हंसने के बहाने ढूंढें. छोटीछोटी बातों पर खिलखिला कर हंसे. मन में उत्साह रखें. छोटेछोटे सपने पूरे होने की खुशी मनाएं. मिल कर जीने का आनंद लें. इस से शरीर में एंड्रोफिन, डोपामिन जैसे हारमोंस बनते हैं जो शरीर को ऊर्जा और मजबूती से भर देते हैं.

खुद को व्यस्त रखें

कहते हैं न कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है. भले ही आप को औफिस, स्कूल या कालेज से छुट्टी मिल गई हो मगर आप वर्क फ्रौम होम कर के खुद को व्यस्त रख सकते हैं. औफिस के साथसाथ घर के कामों में भी एकदूसरे की मदद करें. दूसरों के लिए कुछ करने का प्रयास करें. इस से मन को बहुत खुशी और मजबूती मिलेगी और आप अंदर से मजबूत होंगे.

अच्छी किताबें पढ़ें

समय पास करने के लिए दूसरों से लड़नेझगड़ने और बेकार की फिल्में देखने या मोबाइल पर टाइम पास करने के बजाय अच्छी किताबें और पत्रिकाएं पढ़ें. आप औनलाइन भी पत्रिकाएं पढ़ सकते हैं. आप को नई बातें जानने को मिलेंगी. दिमाग खुलेगा. अच्छे जोक्स और सुरीले गाने सुनें ताकि मन प्रसन्न रहे. अपनी हौबी के लिए समय निकालें. कुछ क्रिएटिव करेंगे तो आप को महसूस होगा जैसे आप के अंदर खास गुण हैं. ऐसी सकारात्मक सोच ही आप को अंदर से मजबूत बनाएगी.

कैसी हो डाइट

लौकडाउन के समय में हम सबों को अपनी इम्यूनिटी का खास खयाल रखना चाहिए. जितनी अच्छी इम्यूनिटी होगी उतने ही बेहतर तरीके से हम किसी भी बीमारी से लड़ पाएंगे. चाहे वह कोरोना हो, मलेरिया हो, साधारण बुखार हो या फिर कैंसर जैसी बड़ी बीमारी. गुडवेज फिटनैस की न्यूट्रिशनिस्ट शक्ति बताती हैं कि इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इन दिनों डाइट का खास खयाल रखना चाहिए.

आप को रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे

पास्ता, पिज्जा, फ्रैंच फ्राइज, बर्गर, पेस्ट्रीज, केक्स, व्हाइट ब्रैड, मैदा, पकोड़े, टिक्की, समोसे जैसी तली हुई चीजों और जंक फूड से दूरी बढ़ानी पड़ेगी. रिफाइंड शुगर से बनी चीजें कम लें या बिलकुल न लें. इन्हें खाने से इम्यूनिटी घटती है.

इन के बजाए खूब कच्चे फल और सब्जियां खाएं. इन से जरूरी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं जिस से आप अंदर से मजबूत बनते हैं.

खाने में विटामिन सी की मात्रा भी बढ़ाएं. विटामिन सी को सफेद रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए माना जाता है. इसी से बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है. नीबू, अनानास, अमरूद, टमाटर, कीवी, संतरा, आमला जैसी चीजें विटामिन सी के बेहतर स्रोत हैं.

ब्रोकोली खाएं: विटामिन ए,

सी और ई के साथसाथ कई

अन्य ऐंटीऔक्सीडैंट्स और फाइबर से भरपूर ब्रोकोली हैल्दी सब्जियों में से एक है.

पालक: पालक में फौलेट पाया जाता है जो शरीर में नई कोशिकाएं बनाने के साथ कोशिकाओं में मौजूद डीएनए की मरम्मत भी करता है. इस में पाया जाने वाला फाइबर, आयरन हमारे शरीर को हर तरह से स्वस्थ बनाए रखता है.

तुलसी: एंटी वायरल और एंटी इंफ्लेमेट्री जैसे औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी आप की इम्यूनिटी बढ़ाती है.

दही: दही रोगों से लड़ने के लिए शरीर को शक्ति प्रदान करता है.

हल्दी: हलदी ऐंटीऔक्सीडैंट गुणों से भरपूर है. रोज रात में दूध में हलदी डाल कर पीने से आप की इम्यूनिटी मजबूत होगी.

फ्लैक्स सीड्स: फ्लैक्स सीड्स हमारे शरीर के लिए बहुत अच्छा इम्यूनिटी बूस्टर है. इस के नियमित सेवन से आप कोरोना समेत कई बीमारियों से बच सकते हैं. फ्लैक्स सीड में अल्फा लिनोलेनिन ऐसिड, ओमेगा 3 फैटी ऐसिड होता है जो शरीर की प्रतिरोधिक क्षमता को बढ़ाने में मददगार है.

दालचीनी: दालचीनी में मौजूद ऐंटीऔक्सीडैंट्स गुण खून को जमने से रोकने और हानिकारिक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकते हैं.

ग्रीन टी: यह ऐंटीऔक्सीडैंट्स से भरपूर पेय है. ग्रीन टी पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है.

लहसुन: लहसुन में ऐंटीऐलर्जिक प्रौपर्टीज होती हैं. यह इम्यूनिटी को बढ़ाता है.

इस के साथ ही पूरे दिन कुनकुना पानी पीएं. नारियल पानी भी इम्यूनिटी बढ़ाता है जिस से शरीर में ऐनर्जी बनी रहती है.

करें व्यायाम

स्वस्थ रहने के लिए ऐक्टिव शरीर और नियमित व्यायाम जरूरी है. आप रोज सुबह उठ कर 15-20 मिनट दौड़ने या तेज वाक करने का अभ्यास करें. बाहर नहीं जा सकते तो अपने घर की छत या ग्राउंड में तेज वाक कर लें. घर की सीढि़यों पर तेजी से उतरनेचढ़ने का अभ्यास करें. यह भी एक अच्छी ऐक्सरसाइज है और इस से हृदय और फेफड़े स्वस्थ रहते हैं. घर में ही स्ट्रेचिंग, साइक्लिंग और तरहतरह के कार्डियो ऐक्सरसाइज कर सकते हैं. इस के अलावा दंड बैठक लगाना, रस्सी कूदना बच्चों के साथ दौड़भाग के खेल खेलना और दूसरे छोटेबड़े व्यायाम करने का नियमित अभ्यास रखें. व्यायाम करने से शरीर में खून का बहाव तेज होता है, आक्सीजन की आपूर्ति बढ़ती है और फेफड़े स्वस्थ रहते हैं.

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