प्रेम के 11 टुकड़े : पति और सास ससुर ने की बहू की हत्या

6 मई, 2017 की बात है. दिन के यही कोई 9 बज रहे थे. नवी मुंबई के उपनगर रबाले के शिलफाटा रोड स्थित एमआईडीसी के बीच से बहने वाले नाले पर एक सुनसान जगह पर काफी लोग इकट्ठा थे. इस की वजह यह थी कि नाले की घनी झाडि़यों के बीच प्लास्टिक का एक बैग पड़ा था. उस में एक मानव धड़ भर कर फेंका गया था. उस का सिर, दोनों हाथ और पैर गायब थे.

यह हत्या का मामला था. इसलिए किसी जागरूक नागरिक ने इस की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दे दी थी.

चूंकि घटनास्थल नवी मुंबई के थाना एमआईडीसी के अंतर्गत आता था, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही थानाप्रभारी चंद्रकांत काटकर ने चार्जरूम में ड्यूटी पर तैनात सहायक इंसपेक्टर अमर जगदाले को बुला कर डायरी बनवाई और तुरंत सहायक इंसपेक्टर प्रमोद जाधव, अमर जगदाले और कुछ सिपाहियों को ले कर घटनास्थल के लिए रवाना हो गए.

घटनास्थल पर पहुंच कर थानाप्रभारी चंद्रकांत काटकर ने वहां एकत्र भीड़ को हटा कर उस प्लास्टिक के बैग को झाडि़यों से बाहर निकलवाया. बैग में भरा धड़ बाहर निकलवाया गया. वह धड़ किसी महिला का था. हत्या के बाद लाश को ठिकाने लगाने के लिए उस का सिर और हाथपैर काट कर केवल धड़ वहां फेंका गया था. घटनास्थल की काररवाई निपटा कर चंद्रकांत काटकर ने धड़ को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. लेकिन पोस्टमार्टम के लिए भेजने से पहले उन्होंने डीएनए जांच के लिए सैंपल सुरक्षित करवा लिया था.

मृतका के बाकी अंग न मिलने से पुलिस समझ गई कि हत्यारा कोई ऐरागैरा नहीं, काफी होशियार और शातिर था. खुद को बचाने के लिए उस ने सबूतों को नष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.

धड़ के साथ ऐसी कोई चीज नहीं मिली थी, जिस से उस की शिनाख्त हो सकती. धड़ के निरीक्षण में पुलिस को उस की बची बांह पर सिर्फ गणेश भगवान का एक टैटू दिखाई दिया था. इस से यह तो स्पष्ट हो गया था कि मृतका हिंदू थी, लेकिन सिर्फ एक टैटू से शिनाख्त होना संभव नहीं था. फिर भी पुलिस को उम्मीद की एक किरण तो मिल ही गई थी.

घटनास्थल की काररवाई निपटा कर थानाप्रभारी थाने लौटे और सहायकों के साथ बैठ कर विचारविमर्श के बाद इस मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी इंसपेक्टर प्रमोद जाधव को सौंप दी थी.

मामले की जांच की जिम्मेदारी मिलते ही प्रमोद जाधव ने तुरंत मुंबई और उस के आसपास के सभी छोटेबड़े थानों को वायरलैस संदेश भिजवा कर यह पता लगाने की कोशिश की कि किसी थाने में किसी महिला की गुमशुदगी तो नहीं दर्ज है. इसी के साथ उन्होंने मृतका की बाजू पर बने गणेश भगवान के टैटू को हाईलाइट करते हुए महानगर के सभी प्रमुख दैनिक अखबारों में फोटो छपवा कर उस धड़ की शिनाख्त की अपील की.

अखबार में छपी इस अपील का पुलिस को फायदा यह मिला कि धड़ की शिनाख्त हो गई. वह धड़ प्रियंका गुरव का था. उस की गुमशुदगी मुंबई के पौश इलाके के थाना वरली में दर्ज थी. ठाणे के डोंबिवली कल्याण की रहने वाली कविता दूधे और उन के भाई गणेश दूधे ने उस धड़ को अपनी छोटी बहन प्रियंका का धड़ बताया था.

अखबार में खबर छपने के अगले दिन सवेरे कविता दूधे अपने भाई गणेश दूधे के साथ थाना एमआईडीसी पहुंची और चंद्रकांत काटकर से मिल कर बांह पर बने गणेश भगवान के टैटू से आशंका व्यक्त की थी कि वह धड़ उन की बहन प्रियंका का हो सकता है. क्योंकि 5 मई, 2017 से वह गायब है.

ससुराल वालों के अनुसार, वह सुबह किसी नौकरी के लिए इंटरव्यू देने घर से निकली थी तो लौट कर नहीं आई थी. कविता ने बरामद धड़ देखने की इच्छा जाहिर की, क्योंकि वह उस टैटू को पहचान सकती थी. प्रियंका ने अपनी बांह पर वह टैटू उसी के सामने बनवाया था.

चंद्रकांत काटकर ने कविता और गणेश को धड़ दिखाने के लिए इंसपेक्टर प्रमोद जाधव के साथ अस्पताल के मोर्चरी भिजवा दिया. धड़ देखते ही कविता और गणेश फूटफूट कर रो पड़े थे. इस से साफ हो गया था कि वह धड़ प्रियंका का ही था. इस तरह धड़ की शिनाख्त हो गई तो जांच आगे बढ़ाने का रास्ता मिल गया.अब पुलिस को यह पता लगाना था कि प्रियंका की हत्या क्यों और किस ने की? पूछताछ में प्रियंका की बहन कविता और भाई गणेश ने बताया था कि प्रियंका ने वर्ली स्थित पीडब्ल्यूडी के सरकारी आवास में अपने परिवार के साथ रहने वाले सिद्धेश गुरव से 30 अप्रैल, 2017 को प्रेम विवाह किया था.

भाईबहन ने प्रियंका को इस विवाह से मना किया था. इस की वजह यह थी कि न सिद्धेश उस से विवाह करना चाहता था और न ही उस के घर वाले चाहते थे कि सिद्धेश प्रियंका से विवाह करे. आखिर वही हुआ, जिस की उन्हें आशंका थी. प्रियंका के हाथों की मेहंदी का रंग फीका होता, उस से पहले ही उस की जिंदगी का रंग फीका हो गया.

इस के बाद पुलिस ने मृतका के पति सिद्धेश और उस के घर वालों को थाने बुला कर पूछताछ की तो उन्होंने भी वही सब बताया, जो कविता और गणेश बता चुके थे. उन का कहना था कि 5 मई की सुबह इंटरव्यू के लिए गई प्रियंका रात को भी घर लौट कर नहीं आई तो उन्हें चिंता हुई. सभी पूरी रात उस की तलाश करते रहे. जब कहीं से भी उस के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने अगले दिन यानी 6 मई को थाना वर्ली में उस की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी.

थाना एमआईडीसी पुलिस तो इस मामले की जांच कर ही रही थी, क्राइम ब्रांच के सीनियर इंसपेक्टर जगदीश कुलकर्णी भी इस मामले की जांच कर रहे थे. प्रियंका की ससुराल वालों ने जो बयान दिया था, उस में उन्हें दाल में कुछ काला नजर आ रहा था. जब उन्होंने प्रियंका के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स और लोकेशन निकलवाई तो उन्हें पूरी दाल ही काली नजर आई.

ससुराल वालों ने जिस दिन प्रियंका के बाहर जाने की बात बताई थी, मोबाइल फोन की लोकेशन के अनुसार उस दिन पूरे दिन प्रियंका घर पर ही थी. वह घर से बाहर गई ही नहीं थी. इस के अलावा किसी संपन्न परिपवार की बहू विवाह के मात्र 5 दिनों बाद ही नौकरी के लिए किसी कंपनी में इंटरव्यू देने जाएगी, यह भी विश्वास करने वाली बात नहीं थी. उस समय तो वह पति के साथ खुशियां मनाएगी.

मामला संदिग्ध लग रहा था. लेकिन परिवार सम्मनित था, इसलिए उन पर हाथ डालने से पहले इंसपेक्टर जगदीश कुलकर्णी ने अधिकारियों से राय ली. अधिकारियों ने आदेश दे दिया तो वह प्रियंका के पति सिद्धेश, ससुर मनोहर गुरव और मां माधुरी गुरव को क्राइम ब्रांच के औफिस ले आए.

सभी से अलगअलग पूछताछ की गई तो आखिर में प्रियंका की हत्या का खुलासा हो गया. पता चला कि इन्हीं लोगों ने प्रियंका की हत्या की थी. इस पूछताछ में प्रियंका की हत्या से ले कर उस की लाश को ठिकाने लगाने तक की जो कहानी प्रकाश में आई, वह इस प्रकार थी.

25 वर्षीय सिद्धेश गुरव का परिवार मुंबई से सटे ठाणे के उपनगर कल्याण बासिंद में रहता था. उस के पिता का नाम मनोहर गुरव और मां का माधुरी गुरव था. परिवार छोटा और सुखी था. मनोहर गुरव सरकारी नौकरी में थे. रहने के लिए सरकारी आवास मिला था. सिद्धेश गुरव उन का एकलौता बेटा था, जिसे पढ़ालिखा कर वह सीए बनाना चाहते थे.

सिद्धेश पढ़ाईलिखाई में तो ठीकठाक था ही, महत्त्वाकांक्षी भी था. वह सीए तो नहीं बन सका, लेकिन पढ़ाई पूरी होते ही उसे मुंबई के विक्रोली स्थित टीसीएस कंपनी में उसे अच्छी नौकरी मिल गई थी. बेटे को नौकरी मिलते ही मनोहर गुरव का भी प्रमोशन हो गया था. इस के बाद उन्हें रहने के लिए मुंबई के वर्ली स्थित पीडब्ल्यूडी कालोनी में बढि़या सरकारी आवास मिल गया. इस के बाद वह अपना बासिंद का घर छोड़ कर वर्ली स्थित सरकारी आवास में रहने आ गए.

22 साल की प्रियंका सिद्धेश के साथ ही पढ़ती थी. खूबसूरत प्रियंका की पहले सिद्धेश से दोस्ती हुई, उस के बाद दोनों में प्यार हो गया. आकर्षक शक्लसूरत और शांत स्वभाव का सिद्धेश प्रियंका को भा गया था. ऐसा ही कुछ सिद्धेश के साथ भी था.

प्रियंका अपनी बड़ी बहन कविता दूधे, भाई गणेश दूधे और बूढ़ी मां के साथ कल्याण के उपनगर दिवा गांव में रहती थी. पिता की बहुत पहले मौत हो चुकी थी. मां ने किसी तरह दोनों बेटियों और बेटे को पालपोस कर बड़ा किया था. कविता सयानी हुई तो मां की सारी जिम्मेदारी उस ने अपने कंधों पर ले ली. उस ने प्रियंका और भाई को पढ़ाया-लिखाया, जबकि वह खुद ज्यादा पढ़लिख नहीं पाई थी. लेकिन वह प्रियंका और गणेश को पढ़ालिखा कर उन्हें अच्छी जिंदगी देने का सपना जरूर देख रही थी.

प्रियंका और सिद्धेश की प्रेमकहानी की शुरुआत 3 साल पहले सन 2014 में हुई थी. उस समय डोंबिवली कालेज में दोनों एक साथ पढ़ रहे थे. दोनों में प्यार हुआ तो साथसाथ जीनेमरने की कसमें भी खाई गईं. इस के बाद दोनों में शारीरिक संबंध भी बन गए.

लेकिन जब सिद्धेश को नौकरी मिल गई और उस के पिता का प्रमोशन हो गया तो वह परिवार के साथ वर्ली रहने चला गया. इस के बाद कुछ दिनों तक तो वह प्रियंका से मिलता रहा और शादी करने की बात करता रहा, लेकिन धीरेधीरे उस ने प्रियंका से मिलनाजुलना कम कर दिया.

इस के बाद वह सिर्फ फोन पर ही प्रियंका से बातें कर के रह जाता था. प्रियंका जब भी उस से मिलने की बात करती, कोई न कोई बहाना बना कर वह टाल देता था. वह शादी की बात करती तो कहता कि अभी शादी की इतनी जल्दी क्या है, जब समय आएगा, शादी भी कर लेंगे.

अचानक प्रियंका को जो जानकारी मिली, उस से उस का सारा अस्तित्व ही हिल उठा. उसे कहीं से पता चला कि सिद्धेश के जीवन में कोई और लड़की आ गई है, जिस में उस के मांबाप की भी सहमति है. इस से वह परेशान हो उठी. जब इस बात की जानकारी उस के घर वालों को हुई तो उन्होंने उसे समझाया कि ऐसे में उस का सिद्धेश से विवाह करना ठीक नहीं है.

लेकिन प्रियंका ने तो ठान लिया था कि वह विवाह सिद्धेश से ही करेगी. क्योंकि वह मर्यादाओं की सारी सीमाएं तोड़ चुकी थी, इसलिए उस ने अपने घर वालों की बात भी नहीं मानी.

निश्चय कर के एक दिन प्रियंका सिद्धेश से मिली और विवाह के बारे में पूछा. सिद्धेश ने यह कह कर टालना चाहा कि वह उस के मांबाप को पसंद नहीं है, इसलिए वह उस से शादी नहीं कर सकता. इस पर प्रियंका ने कहा, ‘‘मुझे तुम्हारे मांबाप पसंद नहीं करते तो न करें, तुम तो मुझे पसंद करते हो. शादी के बाद हम मांबाप को राजी कर लेंगे.’’

प्रियंका की इस बात का सिद्धेश के पास कोई जवाब नहीं था. कुछ देर तक चुप बैठा वह सोचता रहा, उस के बाद बोला, ‘‘मैं मजबूर हूं. मैं अपने मांबाप के खिलाफ नहीं जा सकता. तुम मुझे भूल जाओ.’’

‘‘तुम मुझे भूल सकते हो, लेकिन मैं तुम्हें नहीं भूल सकती. तुम ने मुझे खिलौना समझ रखा है क्या कि जब तक मन में आया खेला और जब मन भर गया तो फेंक दिया? शादी का वादा कर के मेरे मन और तन से खेलते रहे. देखा जाए तो एक तरह से मेरा यौनशोषण करते रहे. अब तुम्हें कोई दूसरी लड़की मिल गई है तो मुझ से पीछा छुड़ा रहे हो. अगर तुम ने शादी नहीं की तो मैं तुम्हारे खिलाफ शादी का झांसा दे कर यौनशोषण का मुकदमा दर्ज कराऊंगी.’’

प्रियंका की इस धमकी से सिद्धेश और उस के घर वाले घबरा गए. समाज और नातेरिश्तेदारों में बदनामी से बचने के लिए सिद्धेश ने प्रियंका से शादी कर ली. इस में घर वालों ने भी रजामंदी दे दी. इस तरह सिद्धेश और प्रियंका ने प्रेम विवाह कर लिया.

सिद्धेश ने विवाह तो कर लिया, लेकिन यह एक तरह की जबरदस्ती की शादी थी. इसलिए प्रियंका को ससुराल में जो प्यार और सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला. सम्मान देने की कौन कहे, उस के पति और सासससुर तो किसी तरह उस से पीछा छुड़ाने की सोच रहे थे.

इस के लिए सिद्धेश और उस के मांबाप ने साजिश रच कर 4-5 मई, 2017 की रात प्रियंका जब गहरी नींद में सो रही थी, तब सिद्धेश ने उस के मुंह पर तकिया रख कर उसे हमेशा के लिए सुला दिया.

प्रियंका की हत्या के बाद जब उस की लाश को ठिकाने लगाने की बात आई तो सिद्धेश और उस के मांबाप ने डोंबिवली के रहने वाले अपने परिचित अपराधी प्रवृत्ति के दुर्गेश कुमार पटवा से संपर्क किया. प्रियंका की लाश को ठिकाने लगाने के लिए उस ने एक लाख रुपए मांगे.

सौदा तय हो गया तो दुर्गेश ने मदद के लिए डोंबिवली के ही रहने वाले अपने मित्र विशाल सोनी को सैंट्रो कार सहित बुला लिया. विशाल के आने पर दुर्गेश ने प्रियंका की लाश को बाथरूम में ले जा कर उस के 11 टुकड़े किए. लाश के टुकड़े करने के लिए हथियार वे अपने साथ लाए थे.

लाश के टुकड़ों को अलगअलग प्लास्टिक के बैग में अच्छी तरह से पैक कर विशाल ने उन्हें कार में रखा और 5-6 मई, 2017 की रात धड़ को रबाले के नाले में तो सिर को ले जा कर शाहपुर के जंगल में फेंका. कमर के नीचे के हिस्से और हाथों को अमरनाथ-बदलापुर रोड के बीच स्थित खारीगांव की खाड़ी में ले जा कर पैट्रोल डाल कर जला दिया.

लाश ठिकाने लग गई तो 6 मई को सिद्धेश अपने मांबाप के साथ थाना वर्ली पहुंचा और प्रियंका की गुमशुदगी दर्ज करा दी. उन्होंने तो सोचा था कि सब ठीक हो गया है, लेकिन 3 दिनों बाद ही सब गड़बड़ हो गया, जब क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर जगदीश कुलकर्णी ने पूछताछ के लिए उन्हें अपने औफिस बुला लिया. मामले का खुलासा होने के बाद उन्होंने सभी को थाना एमआईडीसी पुलिस के हवाले कर दिया.

सिद्धेश, उस के पिता मनोहर तथा मां माधुरी से पूछताछ कर मामले की जांच कर रहे प्रमोद जाधव ने 12 मई, 2017 को दुर्गेश पटवा को डोंबिवली से तो 14 मई को विशाल सोनी को भी उस के घर से सैंट्रो कार सहित गिरफ्तार कर लिया. इन की निशानदेही पर पुलिस ने प्रियंका के सिर तथा बाकी अंगों की राख बरामद कर ली थी.

सबूत जुटा कर पुलिस ने सिद्धेश गुरव, उस के पिता मनोहर गुरव, मां माधुरी गुरव, दुर्गेश कुमार पटवा और विशाल सोनी को अदालत में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया.

  • कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

मेरे घरवाले पैसों की खातिर मेरी शादी करवाना चाहते हैं, मैं क्या करूं?

सवाल-

मैं 23 साल का हूं. 2 साल पहले मेरे घर वालों ने पैसों की खातिर एक अमीर परिवार की लड़की से मेरी शादी करा दी थी. वे पैसे भी मेरे घर वालों ने रख लिए थे.

शादी के कुछ दिनों बाद वह लड़की दूसरे लड़कों के साथ संबंध रखने लगी तो मैं ने उसे तलाक दे दिया. अब मैं घर में अपनी दूसरी शादी की बात करता हूं तो घर वाले दोबारा पैसे वाला परिवार ढूंढ़ना चाहते हैं यानी वे मेरी सौदेबाजी करना चाहते हैं. मैं क्या करूं?

जवाब-

एक बार घर वालों के लालच का शिकार बन कर भी आप को अक्ल नहीं आई है जो उन के कहने पर दोबारा किसी अमीरजादी से ही शादी करना चाहते हैं.

सौदेबाजी और शर्तों पर जिंदगी नहीं चलती. इस बार आप खुद अच्छी लड़की देख कर शादी करें. इस के लिए घर वालों से अलग भी होना पड़े तो हर्ज की बात नहीं. आप खुद को बिकाऊ सामान न बनने दें, नहीं तो फिर पछताना पड़ सकता है.

प्राइवेट स्कूलों पर भारी है सराकरी स्कूल!

आमतौर पर समझा यही जाता है कि आईआईटी, मेडिकल कालेजों, इंजीनियङ्क्षरग कालेजों में पढ़ाई के दरवाजे सिर्फ प्राइवेट इंग्लिश मीडियम स्टूडेंट्स के लिए खुली हैं. दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 2200 से ज्यादा सरकारी स्कूलों के युवाओं ने नीट, जेईई मेन व जेईई एडवांस एक्जाम क्वालीफाई करके साबित किया है कि स्कूल या मीडिया नहीं स्कूल चलाने बालों की मंशा ज्यादा बड़ा खेल खेलती है.

अरङ्क्षवद केजरीवा की आम आदमी पार्टी जो एक तरफ धर्मभीरू है, भाजपा की छवि लिए घूमती है, दूसर और भाजपा की केंद्र सरकार और उस के  दूत उपराज्यपाल के लगातार दखल से परेशान रहती है, कुछ चाहे और न करे, स्कूलों का ध्यान बहुत कर रही है. सरकारी स्कूलों के एक शहर के इतने सारे युवा इन एक्जाम में पास हो जाएं जिन के लिए अमीर घरों के मांबाप लाखों तो कोङ्क्षचग में खर्च करते हैं, बहुत बड़ी बात है.

यह पक्का साबित करता है कि गरीबी गुरबत और ज्ञान न होना जन्मजात नहीं, पिछले जन्मों के कर्मों का फल नहीं, ऊंचे समाज की साजिश है. एक बहुत बड़ी जनता को गरीबी में ही नहीं मन से भी फटेहाल रख कर ऊंचे लोगों ने अनपढ़ सेवकों की एक पूरी जमात तैयार कर रखी है जो मेहनत करते हैं, क्या करते हैं पर उस में स्विल की कमी है, लिखनेपढऩे की समझ नहीं हैै.

सरकारी स्कूल ही उन के लिए एक सहारा है पर गौ भक्त राज्यों में ऊंची जातियों के टीचर नीची जातियों के छात्रों के पहले दिन से ऊंट फटका कर निकम्मा बना देते हैं कि उन में पढऩे का सारा जोश ठंडा पड़ जाता है और वे या तो गौर रक्षक बन डंडे चलाना शुरू कर देते हैं या कांवड ढोने लगते हैं. केजरीवाल की सरकार के स्कूलों में उन्हें पढऩे की छूट दी, लगातार नतीजों पर नजर रखी. ये लोग चाहे जैसे भी घरों से लाए, पढऩे की तमन्ना थी और जरा सा हाथ पकडऩे वाले मिले नहीं कि सरकारी स्कूलों ने 2000 से ज्यादा को इंजीनियङ्क्षरग और मेडिकल कालेजों की खिड़कियां खोल दीं.्र

यह अपनेआप एक अच्छी बात है और यदि सही मामलों में देश में लोकतंत्र आना है तो जरूरी है कि स्कूली शिक्षा सब के एि एक समान हो, चाहे जिस भी भाषा में हो पर अंग्रेजी में न हो, प्राईवेट कोङ्क्षचग स्कूली शिक्षा के दौरान न हो.

सत्ता में बराबर की भागीदारी चाहिए तो वोटरों को खयाल रखना होगा कि जो पौराणिक तरीके चाहते हैं उन्हें सत्ता में रखे या जो पुराणों में बनाई गई ऊंची खाईयों को पाटने वालों को वोट दें. वोट से पढ़ाई का स्टैंडर्ड बदला जा सकता है. यूपी, मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों को हाल क्या है, इस को दूसरों राज्यों के स्कूलों से मुकाबला कर के देखा जा सकता है कि जयश्रीराम का नारा काम का है. ज्ञानविज्ञान और तर्क का नारा.

कंटेंट अच्छा मिले तो बोल्ड कैरेक्टर करने से परहेज नहीं है – नीतिका जायसवाल!

दर्जनों टीवी सीरियल, वेब सीरीज व फिल्मों में अपने सशक्त अभिनय का लोहा मनवा चुकी चुलबुली अभिनेत्री नीतिका जायसवाल Neetika Jaiswal की भोजपुरी फ़िल्म बाप रे बाप रिलीज़ के लिए तैयार है. फ़िल्म के प्रोमोशन पर निकली नीतिका ने इस अवसर पर कुछ सवालों के जवाब बड़ी ही बेबाकी से दिए जिनके कुछ अंश यहां आपके सामने प्रस्तुत हैं.
प्रश्न – आप अपने निवास स्थान और परिवार के बारे में कुछ बताइए ?
नीतिका – मैं आध्यात्मिक नगरी प्रयागराज की रहने वाली हूँ . यहाँ पर ही मेरी फैमिली आज भी रहती है. मैं एक बड़े जॉइंट फैमिली से ताल्लुक रखती हूं जहाँ मेरे मम्मी पापा भाई बहन ताया ताई सब लोग एक साथ रहते हैं .
प्रश्न – इतने बड़े फैमिली से हैं तो क्या इनका सपोर्ट शुरू से रहा है आपके अभिनय में जाने को लेकर ?
नीतिका – नहीं , शुरू शुरू में तो बहुत दिक्कत हुई थी, सबको कन्वेंस करना काफी कठिन था लेकिन अब एक दशक बीत जाने के बाद जब सबने मुझे एक सफल अभिनेत्री होते हुए देखा तो टीवी और फिर बड़े पर्दे पर देखने के बाद से सब ठीक हैं.
प्रश्न – आपकी पढ़ाई लिखाई कहाँ से हुई ?

नीतिका – यहीं प्रयागराज से मेरी शिक्षा दीक्षा सम्पन्न हुई , जॉइंट फैमिली रहने के कारण घर से ही पढ़ाई लिखाई में सहयोग मिलता रहा .ग्रेजुएशन इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से करने के बाद यहीं से अभिनय के क्षेत्र में छोटे मोटे काम करना शुरू कर दिया और आगे की पढ़ाई नहीं कि , क्योंकि रुझान इस फ़िल्म इंडस्ट्री की तरफ हो गया था.

प्रश्न – आपके अभिनय क्षेत्र में आने का फैसला किसका था ?
नीतिका – मेरा ख़ुद का . पढ़ाई लिखाई के दौरान ही स्कूल कॉलेज में छोटे छोटे प्ले और स्टेज शो करने लगी थी, इसके बाद इस काम मे मन लगने लगा , और फिर अपने ही शहर में छोटे छोटे विज्ञापन भी मिलने लगे , उसके बाद मुझे लगने लगा कि अब मुझे फिल्मों के लिए ट्राई करना चाहिए . और फिर मैं आज यहां हूँ.
प्रश्न – आपकी इस इंडस्ट्री में पहला ब्रेक क्या था ?
नीतिका – इस इंडस्ट्री में मेरा पहला ब्रेक टीवी सीरियल जय जय बजरंग बली में मिला था, उसी के बाद से लगातार काम मिलते गया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा . जय जय बजरंग बली के बाद तारक मेहता का उल्टा चश्मा, बड़ी दूर से आये हैं, जैसे बड़े सीरियल के अलावा एपिसोडिक आहट, सीआईडी, शपथ में भी बहुत काम किया है.
प्रश्न – इतने बड़े बड़े टीवी सीरियल में काम करने के बाद भोजपुरी फिल्मों में क्यों आ गईं ? और यहां अब क्या कर रही हैं ?
नीतिका – भोजपुरी हमारी मातृभाषा है, और अपनी मातृभाषा में काम करना हर अभिनेता / अभिनेत्री का कर्तव्य होना चाहिए .भोजपुरी फिल्मों में / एल्बम में काम करने के बाद हमें आत्मसंतुष्टि का जो अनुभव होता है वो कहीं नहीं है . और फिर एक और बात यह भी है कि आप टीवी में काम करके उतनी प्रसिद्धि नहीं पा सकती जितनी फिल्मों और वेब सीरीज में काम करके पा सकते हैं .
प्रश्न – अभी तक आपने कितनी भोजपुरी फिल्मों में काम की है ?
नीतिका – भोजपुरी फिल्मों में मेरी शुरुआत हुई थी लगभग 2014 में , और मेरी पहली फ़िल्म विनय आनंद के साथ थी शिव चर्चा , जिसमें विनय आनंद और प्रतिभा पाण्डेय के साथ मैंने काम किया था . उसके बाद मैंने इच्छाधारी नाग, घातक , साक्षी शंकर और चैलेंज जैसी बड़ी फिल्मों में भी काम किया है .जिसमें फ़िल्म चैलेंज से मुझे बड़ी पहचान मिली. और अभी मेरी फिल्म बाप रे बाप रीलीजिंग के लिए तैयार है.
प्रश्न – आपने क्या आजकल के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर बन रही वेब सीरीज के लिए भी काम किया है ? उसका अनुभव कैसा रहा है ?
नीतिका – जी हां अभी हाल फिलहाल ही मैं लंदन से एक वेब सीरीज शूट करके लौटी हूँ. वहाँ मैने एक बड़े प्लेटफॉर्म के लिए वेबसिरिज शूट किया है. उसके अलावा भी कई अन्य वेबसिरिज में काम कर चुकी हूँ.
प्रश्न – आजकल बोल्ड और एक्सपोजर का जबरदस्त प्रचलन है, तो क्या आप ऐसे कंटेंट करना पसंद करती हैं ?
नीतिका – अभी तक तो ऐसे कन्टेन्ट नहीं कि हूँ, लेकिन यदि साफ सुथरा कन्टेन्ट हो और मिनिमम ऑथेंटिक एक्सपोजर हो तो करने में कोई परहेज नहीं है, हां यदि इस बोल्डनेस के नाम पर वल्गर और एडल्ट कन्टेन्ट कराना चाहे तो उसके लिए ना है. क्योंकि आजकल बिना एक्सपोजर के भी बढ़ियां काम बहुतेरे हो रहे हैं .

मुंबई एक्टर बनने का सपना लेकर आए थे मनीष पॉल, पढ़े इंटरव्यू

मुंबई शहर में कई सारे लोग एक्टर बनने का सपना लेकर आते हैं. जिनमें से कुछ ही लोग होते हैं जो अपनी मंजिल तक पहुंच पाते हैं . उन्हीं में से एक एक्टर जो की प्रसिद्ध एंकर भी हैं मनीष पॉल एक ऐसा जाना माना नाम है जिन्हें हर कोई पहचानता है. बस फर्क इतना है कि मनीष पॉल एक्टिंग से ज्यादा लोगों को हंसाने के लिए, कॉमेडी करने के लिए बतौर एंकर जाने जाते हैं. शायद ही कोई रियलिटी शो या अवॉर्ड शो होगा जिसके एंकर मनीष पॉल नहीं होंगे. क्योंकि मनीष पॉल ने अभी तक अनगिनत अवॉर्ड शो म्यूजिकल डांसिंग शोज़ की एंकरिंग करके अच्छा खासा नाम कमाया है. लेकिन यह बहुत कम लोग जानते हैं कि मनीष पॉल का एक्टर बनने का सपना अभी भी अधूरा है जिस को पूरा करने की कोशिश जारी है.. अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए मनीष एंकरिंग के साथ एक्टिंग के लिए भी अग्रसर रहते हैं. जिसके चलते हाल ही में  वह उनकी रिलीज फिल्म जुग जुग जियो में एक महत्वपूर्ण किरदार में नजर आए. अब मनीष पॉल एक बार फिर रफू चक्कर वेब सीरीज के जरिए लोगों को चौंका रहे हैं. क्योंकि इस सीरीज में मनीष पॉल ने पांच अलग किरदार निभाए हैं. जिसके लिए उन्होंने बहुत सारी तैयारी की है .10 से 15 किलो तक  वजन कम कर के और फिर वही वजन फिर से बढ़ाकर. इस सीरीज के लिए कई किरदार अदा किये  है. मनीष पॉल ने कोई कसर नहीं छोड़ी है अपने आप को बेहतर एक्टर प्रस्तुत करने के लिए. इसके अलावा भी मनीष पॉल सोनी चैनल पर प्रसारित कॉमेडी सर्कस, और कुछ फिल्मों में भी नजर आए हैं. पेश है मनीष पॉल जैसे बेहतरीन एक्टर एंकर और कॉमेडियन के साथ दिलचस्प बातचीत के खास अंश. ताजातरीन बातचीत के दौरान.

प्रश्न- आपकी ताजातरीन वेब सीरीज रफू चक्कर के लिए आप की काफी तारीफ हो रही है इसमें आपने कई तरह के किरदार निभाए हैं सुना है उसके लिए आपने मेहनत भी बहुत की है. क्या इस बारे में कुछ बताएंगे?

हा… रफूचक्कर मेरे लिए बहुत ही चैलेंजिंग रहा है. क्योंकि इसके लिए मुझे करीबन 20 किलो वजन बढ़ाना पड़ा. जो मैंने आज तक कभी नहीं किया. इसके बाद मुझे रफूचक्कर का ही दूसरा किरदार निभाने के लिए मुझे फिर से अपना उतना ही वजन कम करना पड़ा . क्योंकि वह मेरा दूसरा गेटअप था. इस वेब सीरीज में मेरा एक नहीं बल्कि पांच अलग-अलग रूप हैं. जो  मुश्किल और चैलेंजिग भी है. खास तौर पर जब मैंने बूढ़े का किरदार निभाया . तो वह मेरे लिए और सबसे ज्यादा मुश्किल था. क्योंकि उसमें मेरा मेकअप बहुत मुश्किल और तकलीफ देह था. लेकिन इन सबके बावजूद जब मुझे दर्शकों का अच्छा रिस्पांस मिला तो मैं अपनी सारी तकलीफ भूल गया .एक एक्टर के तौर पर मुझे रफ़ूचक्कर में अपना किरदार निभाकर अभिनय संतुष्टि मिली. 

प्रश्न – दिल्ली से मुंबई तक का आपका सफर काफी मुश्किल और संघर्ष मय रहा है .इस दौरान क्या कभी आपको निराशा हुई?

निराशा तो नहीं बोल सकते कभी-कभी परेशान जरूर हो जाता था. जब आर्थिक तंगी के चलते संघर्ष के दौरान काफी कुछ झेलना पड़ता था. जैसे कि अब तक के कैरियर में मुझे जो भी काम मिला मैंने वह किया.. शूटिंग स्थल तक पहुंचने के लिए पैसों के अभाव के चलते मैं कई घंटों चलता रहता था ताकि रिक्शा बस का पैसा बचा सकूं. फन रिपब्लिक सिनेमा की सीढ़ियों पर बैठकर लोगों को फोन किया करता था. ताकि मैं ऑडिशन दे सकूं और काम पाने के लिए निर्माताओं से मिल सकूं. मैंने काफी समय यश राज स्टूडियो के बाहर जो सैंडविच वाले होते हैं उनके पास एक सैंडविच खा कर पूरा दिन गुजार कर भी मुश्किल वक्त गुजारा है. लेकिन इस बीच कभी भी मैं पूरी तरह से निराश नहीं हुआ. और ना ही मैंने यह सोचा की अब और नहीं होगा . यानी कि मैंने कभी भी हार नहीं मानी. क्योंकि मेरे साथ मेरी मां पिता का पूरा सपोर्ट था. मेरी पत्नी संयुक्तता जो मेरी बचपन की दोस्त भी है ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया. घरवालों के मेंटल सपोर्ट की वजह से ही मैं जिंदगी में आगे बढ़ पाया. उन्हीं की बदौलत मैंने छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक लंबा सफर आसानी से तय कर लिया. मुझे पहला शो संडे टैगो में एंकरिंग करने का मौका मिला. उसके बाद मैंने रेड़ियो जॉकी औऱ वीडियो जॉकी बन कर कई सारे शोज किए. उसके बाद राधा की बेटियां कुछ कर दिखाएंगी , घोस्ट बना दोस्त, जिंदादिल जैसे सीरियलों में काम किया। सारेगामा लिटिल चैंप्स में बताओ एंकर काम करने का मौका मिला. उसके बाद अक्षय कुमार कैटरीना कैफ की फिल्म तीस मारखा में रोल निभाने का मौका मिला . आखिरकार बतौर हीरो मिकी वायरस फिल्म करने का मौका मिला. जो मेरे लिए बहुत बड़ा मौका था.

प्रश्न – पहली फिल्म मिकी वायरस की असफलता ने क्या आपको आहत किया?

जब हम किसी चीज के लिए मेहनत करते हैं. और हमारी उससे कई सारी उम्मीदें जुड़ी होती हैं. तो दुख तो होता ही है लेकिन फिल्म फ्लॉप होने के बावजूद मैंने हार नहीं मानी. और ना ही मैंने टीवी छोड़ा. जब मैंने मिकी वायरस फिल्म साइन की थी . तो मुझे कई लोगों ने बोला कि मैं टीवी मैं काम करना बंद कर दू . लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया. मैंने कभी भी बड़े पर्दे के लिए छोटे पर्दे को नजर अंदाज़ नहीं किया. और मेरी इसी अच्छाई ने बड़े पर्दे की तरफ बढ़ने के लिए मेरा साथ दिया. मिकी वायरस की असफलता के बावजूद जुग जुग जियो में मुझे अच्छा और बड़ा रोड मिला जिसका मुझे फायदा भी हुआ मुझे लोगों ने बतौर एक्टर पसंद किया. और मुझे अच्छे-अच्छे रोल ऑफर होने लगे. जिनमें से एक रफू चक्कर वेब सीरीज है. 

प्रश्न – दिल्ली से मुंबई जब भी कोई लड़का एक्टर बनने आता है तो कोई ना कोई बड़ा हीरो उसका आइडियल होता है. ऐसे में आप सबसे ज्यादा कौन से हीरो से प्रभावित थे?

मैं अमित जी का बहुत बड़ा फैन हूं. मेरा सौभाग्य है कि मुझे अपने जन्मदिन पर उनका आशीर्वाद  मिल जाता है. अमित जी के साथ मुझे थोड़ा भी स्क्रीन शेयर करने को मिलता है तो मैं गदगद हो जाता हूं. अमित जी के अलावा अनिल कपूर और अक्षय कुमार भी मेरे बहुत फेवरेट है. उनके साथ काम करने में अलग ही मजा आता है.

प्रश्न – बतौर एंकर आप काफी लोकप्रिय है आप की कॉमेडी टाइमिंग बहुत अच्छी है .आप ही की तरह भारती सिंह और कपिल शर्मा भी बहुत अच्छी एंकरिंग करते हैं. ऐसे में क्या आप उनको अपना प्रतिद्वन्दी मानते हैं

नही ..बिल्कुल नहीं. भारती सिंह तो मेरी बहन जैसी है. हम दोनों ने साथ में संघर्ष किया है कई शोज में हम दोनों दर्शकों के बीच फंस जाते थे.  तो हमे वहां से सरपट भागना पड़ता था. संघर्ष के दिनों से लेकर आज तक भारती और मैंने एक दूसरे का हमेशा साथ दिया. हमने कई सारे कॉमेडी एक्ट कॉमेडी सर्कस शो में किए हैं .जो दर्शकों द्वारा काफी पसंद किए गए. कपिल शर्मा भी मेरे भाई जैसा है हमारे बीच में कोई जलन या प्रतिद्वंदिता नहीं है. हम एक दूसरे की इज्जत करते हैं. और हमेशा एक दूसरे के काम भी आते हैं.

प्रश्न -एक कॉमेडियन के लिए गंभीर रोल करना कितना मुश्किल होता है ? जबकि वह अपनी कॉमेडी में टाइप्ड हो चुका हो. जैसे कि आप की पहली फिल्म मिकी वायरस फ्लॉप रही. जबकि जुग जुग जियो में आप की कॉमेडी को पसंद किया गया?

हां आप सही कह रही हैं. लोगों को यह बात बिल्कुल भी हजम नहीं होती की एक कॉमेडियन या हंसाने वाला एंकर गंभीर रोल भी अच्छे से निभा सकता है. अपने आपको अच्छा एक्टर साबित करने के लिए एक कॉमेडियन को एक्टर से भी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. मैंने भी ऐसा ही किया. जिसके चलते रफू चक्कर में गंभीर किरदार में भी लोगों ने मुझे पसंद किया. मैं मुंबई एक्टर बनने आया था और मेरी आखिर तक कोशिश रहेगी कि मैं अपने आपको दर्शकों की नजर में अच्छा एक्टर साबित कर सकूं.

प्रश्न -आजकल इंडस्ट्री में गुटबाजी का चलन है. किसी ग्रुप में जुड़े रहने से फिल्मों में काम पाना आसान हो जाता है. क्या आप कभी किसी ग्रुप में शामिल हुए?

नहीं मैं किसी भी गैंग या  ग्रुप का हिस्सा नहीं हूं. मेरे सभी के साथ अच्छे संबंध रहे हैं. शाहरुख सलमान अक्षय सभी से मुझे प्यार और सम्मान मिला है. एंकरिंग की वजह से मेरे सभी के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं. मेरा मानना है अच्छा काम मुझे तभी मिलेगा जब या तो मेरे नसीब में होगा, या मेरी मेहनत रंग लाएगी. गुटबाजी करने से कुछ भी हासिल नहीं होगा. इससे बेहतर है मैं अपने काम पर ध्यान दू.

प्रश्न -आपने अपने कैरियर की शुरुआत सन 2002 में की थी आज 2023 में आप अपने आप को कितना संतुष्ट पाते हैं?

मैं अपने अब तक के कैरियर से बहुत खुश हूं. इतने लंबे कैरियर के बाद भी आप लोग मुझे देखना चाहते हैं. मुझे पसंद करते हैं. आज भी मुझे काम मिल रहा है, मेरे काम की सराहना भी हो रही है, पारिवारिक, मानसिक और आर्थिक तौर पर मैं स्थिर और संतुष्ट  हूं. एक समय में खाने के लिए पैसे नहीं थे. आज घर गाड़ी पैसा सब कुछ है. अपनों और दर्शकों का प्यार है. इससे ज्यादा क्या चाहिए.

प्रश्न -आपने एक शो भी किया था अपने नाम से . मूवी मस्ती विद मनीष पॉल, उससे आपको कितना फायदा मिला?

मेरा वह शो बहुत ही मजेदार था. लेकिन उसके लिमिटेड एपिसोड थे इसलिए ज्यादा नहीं आगे बढ़ा पाए. यह गेम शो फिल्मों पर आधारित था, जिसमें आए कलाकार भी जवाब नहीं दे पा रहे थे. क्योंकि मैं खुद फिल्मी कीड़ा हूं. मुझे फिल्मों से प्यार है. इसीलिए मुझे यह शो करने में बहुत मजा आया था.

प्रश्न – आपका परिवार आपकी पत्नी कभी सोशल मीडिया पर नजर नहीं आती. क्या आप नहीं चाहते कि आपकी फैमिली सोशल मीडिया पर नजर आए?

नही ऐसी कोई बात नहीं है. मेरे परिवार शो बिजनेस से दूर रहता है. मैं अपने परिवार को साल में एक बार लंबी छुट्टियों पर घुमाने ले जाता हू.

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सवाल

मेरी जिंदगी में एक लड़का आया है जो मुझ से कम उम्र का है. वह मुझे बहुत चाहता है. वह मेरे पास मैथ्स की क्लासेज लेने आता था. धीरे-धीरे हमारे बीच अजीब सा आकर्षण पैदा हुआ. मैं मानती हूं कि यह गलत है, क्योंकि मैं शादीशुदा हूं. मगर मैं स्वयं नहीं जानती कि ऐसा कैसे हो गया. आप ही बताएं, मैं क्या करूं?

जवाब

आप के और उस लड़के के बीच आकर्षण का पैदा होना स्वाभाविक प्रक्रिया है. विपरीतलिंगी व्यक्ति के साथ जब आप समय बिताते हैं तो सहज ही आप के बीच ऐसा रिश्ता कायम हो सकता है. मगर इस रिश्ते को आप को अपने जीवन की गलती नहीं बनानी चाहिए.

आप का अपना परिवार है. यह संबंध परिवारों में तनाव पैदा कर सकता है. उस लड़के से आप कम से कम मिलें. उस के साथ सिर्फ हैल्दी फ्रैंडशिप का रिश्ता रखें.

कुछ महिलाएं इस वजह से भी अपने से कम उम्र के पुरुषों के प्रति आकर्षित हो जाती हैं क्योंकि वे अपने पति की बढ़ती उम्र, उदासीनता और सपाट रवैए से नाखुश रहने लगती हैं. यदि ऐसा है तो अपने पति से इस संदर्भ में बात करें. इस प्रकार का दिल का संबंध आमतौर पर तर्क व व्यावहारिकता नहीं देखता और नितांत प्राकृतिक है. आप अपराधबोध नहीं रखेंगी तो ज्यादा खुश रहेंगी.

कैसा था उस लड़की का खुमार

दरवाजा खुला. जिस ने दरवाजा खोला, उसे देख कर चंद्रम हैरान रह गया. वह अपने आने की वजह भूल गया. वह उसे ही देखता रह गया.

वह नींद में उठ कर आई थी. आंखों में नींद की खुमारी थी. उस के ब्लाउज से उभार दिख रहे थे. साड़ी का पल्लू नीचे गिरा जा रहा था. उस का पल्लू हाथ में था. साड़ी फिसल गई. इस से उस की नाभि दिखने लगी. उस की पतली कमर मानो रस से भरी थी.

थोड़ी देर में चंद्रम संभल गया, मगर आंखों के सामने खुली पड़ी खूबसूरती को देखे बिना कैसे छोड़ेगा? उस की उम्र 25 साल से ऊपर थी. वह कुंआरा था. उस के दिल में गुदगुदी सी पैदा हुई.

वह साड़ी का पल्लू कंधे पर डालते हुए बोली, ‘‘आइए, आप अंदर आइए.’’

इतना कह कर वह पलट कर आगे बढ़ी. पीछे से भी वह वाकई खूबसूरत थी. पीठ पूरी नंगी थी.

उस की चाल में मादकता थी, जिस ने चंद्रम को और लुभा दिया था. उस औरत को देखने में खोया चंद्रम बहुत मुश्किल से आ कर सोफे पर बैठ गया. उस का गला सूखा जा रहा था.

उस ने बहुत कोशिश के बाद कहा, ‘‘मैडम, यह ब्रीफकेस सेठजी ने आप को देने को कहा है.’’

चंदम ने ब्रीफकेस आगे बढ़ाया.

‘‘आप इसे मेज पर रख दीजिए. हां, आप तेज धूप में आए हैं. थोड़ा ठंडा हो जाइएगा,’’ कहते हुए वह साथ वाले कमरे में गई और कुछ देर बाद पानी की बोतल, 2 कोल्ड ड्रिंक ले आई और चंद्रम के सामने वाले सोफे पर बैठ गई.

चंद्रम पानी की बोतल उठा कर सारा पानी गटागट पी गया. वह औरत कोल्ड ड्रिंक की बोतल खोलने के लिए मेज के नीचे रखे ओपनर को लेने के लिए झुकी, तो फिर उस का पल्लू गिर गया और उभार दिख गए. चंद्रम की नजर वहीं अटक गई.

उस औरत ने ओपनर से कोल्ड ड्रिंक खोलीं. उन में स्ट्रा डाल कर चंद्रम की ओर एक कोल्ड ड्रिंक बढ़ाई.

चंद्रम ने बोतल पकड़ी. उस की उंगलियां उस औरत की नाजुक उंगलियों से छू गईं. चंद्रम को जैसे करंट सा लगा.

उस औरत के जादू और मादकता ने चंद्रम को घायल कर दिया था. वह खुद को काबू में न रख सका और उस औरत यानी अपनी सेठानी से लिपट गया. इस के बाद चंद्रम का सेठ उसे रोजाना दोपहर को अपने घर ब्रीफकेस दे कर भेजता था. चंद्रम मालकिन को ब्रीफकेस सौंपता और उस के साथ खुशीखुशी हमबिस्तरी करता. बाद में कुछ खापी कर दुकान पर लौट आता. इस तरह 4 महीने बीत गए.

एक दोपहर को चंद्रम ब्रीफकेस ले कर सेठ के घर आया और कालबेल बजाई, पर घर का दरवाजा नहीं खुला. वह घंटी बजाता रहा. 10 मिनट के बाद दरवाजा खुला.

दरवाजे पर उस की सेठानी खड़ी थी, पर एक आम घरेलू औरत जैसी. आंचल ओढ़ कर, घूंघट डाल कर.

उस ने चंद्रम को बाहर ही खड़े रखा और कहा, ‘‘चंद्रम, मुझे माफ करो. हमारे संबंध बनाने की बात सेठजी तक पहुंच गई है. वे रंगे हाथ पकड़ेंगे, तो हम दोनों की जिंदगी बरबाद हो जाएगी.

‘‘हमारी भलाई अब इसी में है कि हम चुपचाप अलग हो जाएं. आज के बाद तुम कभी इस घर में मत आना,’’ इतना कह कर सेठानी ने दरवाजा बंद कर दिया.

चंद्रम मानो किसी खाई में गिर गया. वह तो यह सपना देख रहा था कि करोड़पति सेठ की तीसरी पत्नी बांहों में होगी. बूढ़े सेठ की मौत के बाद वह इस घर का मालिक बनेगा. मगर उस का सपना ताश के पत्तों के महल की तरह तेज हवा से उड़ गया. ऊपर से यह डर सता रहा था कि कहीं सेठ उसे नौकरी से तो नहीं निकाल देगा. वह दुकान की ओर चल दिया.

सेठानी ने मन ही मन कहा, ‘चंद्रम, तुम्हें नहीं मालूम कि सेठ मुझे डांस बार से लाया था. उस ने मुझ से शादी की और इस घर की मालकिन बनाया. पर हमारे कोई औलाद नहीं थी. मैं सेठ को उपहार के तौर पर बच्चा देना चाहती थी. सेठ ने भी मेरी बात मानी. हम ने तुम्हारे साथ नाटक किया. हो सके, तो मुझे माफ कर देना.’ इस के बाद सेठानी ने एक हाथ अपने बढ़ते पेट पर फेरा. दूसरे हाथ से वह अपने आंसू पोंछ रही थी.

अगर आप भी कर रही हैं पार्टनर को सेक्स के लिए मना तो जरूर पढ़ें ये खबर

अगर आप की पार्टनर लंबे समय से सेक्स के लिए न कह रही है, तो यह चिंता की बात हो सकती है. यह संभव है कि आप की पार्टनर सेक्स के प्रति रुझान न होने की समस्या से जूझ रही हो. इसे महिला यौन अक्षमता भी कहा जाता है. इस शब्द का उपयोग उस व्यक्ति को परिभाषित करने के लिए किया जाता है, जो अपने साथी को सेक्स के दौरान सहयोग नहीं करता. महिलाओं में एफएसडी यानी फीमेल सैक्सुअल डिसफंक्शन होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे सेक्स के दौरान दर्द या मनोवैज्ञानिक कारण. ऐसे में डाक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है.

इस समस्या के निम्न मुख्य कारण हैं:

मनोवैज्ञानिक कारण:  पुरुषों के लिए सेक्स एक शारीरिक मुद्दा हो सकता है, लेकिन महिलाओं के लिए यह एक भावनात्मक मुद्दा है. पिछले बुरे अनुभवों के चलते कुछ महिलाएं भावनात्मक रूप से टूट जाती हैं. वर्तमान में बुरे अनुभवों के कारण मनोवैज्ञानिक मुद्दे या फिर अवसाद इस का कारण हो सकता है.

और्गेज्म तक न पहुंच पाना: एफएसडी का दूसरा भाग ऐनौर्गेस्मिया कहलाता है. यह स्थिति तब होती है जब व्यक्ति को या तो कभी और्गेज्म नहीं होता या वह कभी इस तक पहुंच ही नहीं पाता. और्गेज्म तक पहुंचने में असमर्थता भी एक मैडिकल कंडीशन है. सेक्स में रुचि की कमी और और्गेज्म तक पहुंचने में असमर्थता दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं.

ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि महिलाएं अधिक फोरप्ले पसंद करती हैं. अगर ऐसा नहीं होता है तो और्गेज्म तक पहुंचना मुश्किल है.

इस का मनोचिकित्सा के माध्यम से इलाज किया जा सकता है. महिलाओं को अपने रिश्ते में सेक्स के साथ समस्याएं होती हैं. यदि आप को भी ऐसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो आप को जल्द से जल्द ऐंड्रोलौजिस्ट से मिलना चाहिए ताकि समस्या संबंधों को प्रभावित न करे.

फीमेल सैक्सुअल डिसफंक्शन का इलाज और उपचार: जहां तक एफएसडी इलाज के घरेलू उपचार का सवाल है तो वास्तव में यह बहुत प्रभावी नहीं होता. बाजार में कई तरह की महिला वियाग्रा मौजूद हैं, लेकिन ये आमतौर पर मनचाहे नतीजे नहीं दे पातीं. महिलाएं लेजर के साथ योनि कायाकल्प ट्राई कर सकती हैं. आप चाहें तो प्लेटलेट रिच प्लाज्म (पीआरपी) थेरैपी भी अपना सकती हैं. इस क्षेत्र में ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करने के लिए योनि के पास इंजैक्शन दिया जाता है. इसे ओशौट के रूप में जाना जाता है.

यदि आप यौन संबंध का आनंद नहीं ले पा रही हैं तो डाक्टर से मिलें. दोनों भागीदारों के लिए डाक्टर का यौन परामर्श उपयोगी हो सकता है. दिनचर्या बदलने और अलगअलग आसन अपना कर इसे और अधिक आनंदायक बनाया जा सकता है. योनि क्रीम का उपयोग भी किया जा सकता है.

ज्यादातर महिलाएं, विशेष रूप से जब उम्रदराज हो जाती हैं तो उन्हें संभोग से पहले अधिक फोरप्ले की आवश्यकता होती है. ज्यादातर महिलाओं को योनि प्रवेश के साथ संभोग के दौरान ज्यादा आनंद नहीं आता है. उन्हें अपने को संभोग करने में सक्षम बनाने के लिए अपने साथी से अपने यौनांगों को सहलाने के लिए कहना चाहिए. हस्तमैथुन या मौखिक सेक्स यौन गतिविधियां अपनाई जा सकती हैं.

मोटापा कम करने के लिए ऐसे बनाएं शहद को अपनी डाइट का हिस्सा

मोटपे से परेशान है तो शहद आपके लिए बेहद ही फायदेमंद हो सकता है बस उन्हे खाने में तरह-तरह के रुप में खाना होगा जिससे आपको कई फायदे होंगे.शहद में एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं और फेनोलिक कंपाउंड्स जैसे फ्लेवेनॉइड्स पाए जाते हैं जो सेहत को दुरुस्त रखने में असर दिखाते हैं. वजन घटाने की डाइट में भी शहद (Honey) को शामिल किया जा सकता है. शहद विटामिन, खनिज और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है और इसके एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सेहत को अच्छा रखते हैं. यहां जानिए किस-किस तरह से शहद का सेवन शरीर के एक्सेस फैट को घटाने में मददगार साबित होता है.

नींबू और शहद

वजन घटाने में सबसे मददगार साबित होता नींबू के साथ शहद. इसका सेवन किया जाता है जिसे आमतौर पर हल्के गर्म पानी के साथ मिलाकर पीना चाहिए. ये शरीर का वजन कम करने में फायदेमंद साबित होता है. क्योकि इससे शरीर में टॉक्सिस बाहर निकलते है.जो आपका फैट कम करते है.

शहद दालचीनी

शरीर के लिए शहद और दालचीनी भी कई तरह से फायदेमंद हैं. इसे वजन घटाने के लिए खाने के कई तरीके हैं. रोजाना शहद और दालचीनी की चाय भी पी जा सकती है. इस चाय का असर वजन घटाने में अच्छा दिखता है. एक कप ग्रीन टी में एक चम्मच शहद और आधा चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर चाय तैयार करें. इस चाय का सेवन पेट की चर्बी घटाने और शरीर को ऊर्जा देने में भी असरदार साबित हो सकता है.

शहद और लहसुन

सेहत को देखते हुए लहसुन (Garlic) को तरह-तरह से डाइट का हिस्सा बनाया जाता है. इसे शहद के साथ भी खाया जा सकता है जिससे इसके गुणों में वृद्धि होती है और यह सेहत को दुरुस्त रखता है. सेवन के लिए एक चम्मच शहद में एक कच्चा लहसुन डालकर खा लें. इसे सुबह खाली पेट सबसे पहले खाया जाता है. यह शरीर को डिटॉक्सिफाई भी करता है और पाचन को बेहतर रखने में भी कारगर है.

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