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Hindi Kahani: मां की भूमिका में चमेली

Hindi Kahani: छत्तीसगढ़ का शहर बिलासपुर हाईकोर्ट होने की वजह से न्यायधानी के नाम से जाना जाता है. दिनेश अपने परिवार के साथ बिलासपुर के जरहाभाटा के मंझवापारा में रहता था. वह अपने ही मोहल्ले की किशोरी वीना कौशिक को भगा ले गया था. यह भी कह सकते हैं कि वीना दिनेश के साथ जीनेमरने की कसम खा कर अपने घर की देहरी लांघ आई थी और उस के साथ लिवइन रिलेशन में रहने लगी थी.

वीना के पिता जवाहर कौशिक अपनी पत्नी चमेली और बेटी वीना से अलग दूसरे मोहल्ले में रहते थे. सिर्फ मां चमेली ही वीना की एकमात्र गार्जियन थी. वीना अभी 18 वर्ष की हुई थी कि उसे दिनेश से प्रेम हो गया. फिर एक दिन वह घर से बिना बताए गायब हो गई.

दिनेश के पिता रविशंकर श्रीवास की हेयर कटिंग सैलून थी जिस से वे परिवार का भरण पोषण करते थे. दिनेश भी पिता की दुकान पर काम करता था. वह अल्पायु में ही पढ़ाई छोड़ चुका था. फिलहाल वह 21 वर्ष का था. दिनेश और वीना एकदूसरे का हाथ थाम कर घर से निकले तो कुछ दिन रायपुर में बिताने के बाद बिलासपुर आ गए. इस शहर में वह तिफरा में किराए का मकान ले कर रहने लगे.

दिनेश एक सैलून में नौकरी करने लगा, ताकि वीना की और अपनी जिंदगी को हसीन बना सके. लेकिन यह संभव न हो सका. दिनेश के पिता रविशंकर और मां नूतन को यह पता चला कि बेटा वीना के साथ सुखपूर्वक रह रहा है तो वे मौन रह गए. लेकिन वीना की मां चमेली मौन नहीं रह सकी.

एक दिन जब दिनेश काम पर गया हुआ था, तो वीना की मां आ धमकी. वीना ने मां को बैठाया, चायपानी को पूछा. दोनों की बातचीत हुई तो चमेली आंसू बहाते हुए कहने लगी, ‘‘बेटी, तुम ने यह क्या कर दिया, हमारी तो सारी इज्जत ही मिट्टी में मिल गई.’’

वीना मां की बातें सुनती रही. बातोंबातों में चमेली ने पूछा, ‘‘बेटा, तुम ने दिनेश से ब्याह कहां किया? गवाह कौनकौन थे?’’

इस पर वीना का सिर झुक गया, वह बोली, ‘‘मां, हम ने अभी तक विवाह नहीं किया है.’’

इस पर चमेली स्तब्ध रह गई. बोली, ‘‘तुम बिना विवाह के दिनेश के साथ कैसे रह सकती हो? यह तो पाप है बेटी.’’

वीना चुपचाप मां की बातें सुनती रही.

चमेली ने आगे कहा, ‘‘तुम खुश तो हो न? मैं तुम्हारी शादी दिनेश से ही करा दूंगी. ऊंचनीच तुम क्या जानो, औरत के लिए मंगलसूत्र और सिंदूर का बड़ा महत्त्व होता है. समाज में रह कर उसी के हिसाब से जीना पड़ता है और उस के नियमकायदे मानने होते हैं. तुम अगर मेरी बात नहीं मानोगी तो पछताओगी.’’

वीना कुछ दिन दिनेश के साथ रह कर समझ गई थी कि प्यार के शुरुआती आकर्षण वाले मीठे सपने जब हकीकत के कठोर धरातल पर टकराते हैं, तब टूट कर किरचाकिरचा बिखर जाते हैं. उसे मां का सहारा मिला तो वह फट पड़ी और आंखों में आंसू लिए मां की गोद में सिर रख कर रोने लगी.

मां ने उसे ढांढस बंधाया, फिर बोली, ‘‘बेटा, तुम ने गलती तो बहुत बड़ी की है. लेकिन मैं मां हूं. मैं तुम्हें माफ नहीं करूंगी तो कौन करेगा.’’

वीना मां की ओर आशा भरी निगाहों से देखने लगी. चमेली ने कहा, ‘‘अच्छा, अब तू दिनेश के साथ खुश है या नहीं, साफसाफ बता.’’

वीना ने बहुत सोचा, फिर कहा, ‘‘मां, मुझे लगता है कि मैं ने भूल की है. मुझे दिनेश के लिए घर नहीं छोड़ना चाहिए था. बताओ, अब मैं क्या करूं?’’

चमेली ने कहा, ‘‘अच्छा, अभी तुम मेरे साथ चलो, बाद में देखेंगे कि क्या करना है.’’

वीना तैयार हो गई. घर में ताला लगा कर उस ने चाबी पड़ोस की एक महिला को दे दी. इस के बाद वह मां चमेली के साथ घर मन्नाडोला चली गई.

रात में जब दिनेश काम से घर लौटा तो वहां ताला लगा था. पड़ोस से पता चला कि वीना की मां आई थी, वह उसे अपने साथ ले गई है. उस ने घर का ताला खोला और चुपचाप लेट गया. उस की आंखों के आगे अंधेरा फैला हुआ था, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई. उस ने दरवाजा खोला तो 2 पुलिस वाले खड़े थे. उन्हें देख दिनेश डर गया. पुलिस वाले उसे थाना सिविल लाइंस ले गए.

एक पुलिस वाले ने उसे बताया कि उस पर वीना नाम की लड़की को बहलाफुसला कर भगा ले जाने का आरोप है. केस दर्ज हो चुका है. यह सुन कर दिनेश घबरा गया.

उस ने पुलिस को बताया कि वह और वीना अपनी मरजी से घर छोड़ कर नई जिंदगी बसर करने के लिए निकले थे और तिफरा में किराए का मकान ले कर खुशीखुशी रह रहे थे. आज उस की मां चमेली यहां आई और बिना बताए उसे अपने साथ ले गई.

लेकिन पुलिस ने दिनेश की एक नहीं सुनी. उस के खिलाफ थाने में भादंवि की धारा 363 के अंतर्गत वीना को बहलाफुसला कर भगा ले जाने का मुकदमा दर्ज था. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. दिनेश गम का घूंट पी कर रह गया.

वह यह भी साबित नहीं कर सका कि उस ने वीना के साथ विवाह किया था. वैसे भी वीना से अपने पक्ष की कोई उम्मीद रखना बेवकूफी थी, क्योंकि अब वह अपनी मां चमेली के प्रभाव में थी. वह वही कहती जो उस की मां चाहती.

दिनेश के जेल जाने की खबर जब उस के घर वालों को मिली तो उन्होंने एक वकील से इस मामले की पैरवी कराई. फलस्वरूव वह 2 महीने में जेल से बाहर आ गया. जो होना था, वह हो चुका था. दिनेश अब वीना को भुलाने की कोशिश करते हुए अपने परिवार के साथ रहने लगा. इसी बीच एक दिन गोल बाजार में उसे वीना मिल गई.

दिनेश उस से जानना चाहता था कि उस ने उसे किस बात की सजा दिलाई, इसलिए वह उसे एक कौफी हाउस में ले गया. बातचीत हुई तो दोनों के गिलेशिकवे शुरू हो गए. दिनेश ने वीना का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘वीना, जो भी हुआ, मैं उसे भूलने को तैयार हूं.’’

वीना ने आंखें नीची कर के कहा, ‘‘तुम ने मेरे साथ बहुत गलत किया है.’’

दिनेश ने आश्चर्य से पूछा, ‘‘क्या गलत किया मैं ने?’’

‘‘तुम ने मुझ से शादी नहीं की, मुझे प्यार के बहकावे में रख कर मेरा शोषण करते रहे. क्या यह तुम्हारा फर्ज नहीं था कि मुझ से विवाह कर के अपने घर ले जाते?’’

‘‘देखो वीना, मैं ने जो भी किया, तुम्हारी मरजी से किया. मैं ने कभी जबरदस्ती नहीं की, फिर भी तुम ने मेरे खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा कर मुझे जेल भिजवा दिया, क्या यह सही था?’’

‘‘तुम्हारी नीयत मुझे ठीक नहीं लगी, मां ने मुझे बताया कि शादी के बाद लड़की को सुरक्षा मिलनी चाहिए. तुम तो मुझे मंगलसूत्र और सिंदूर तक नहीं दे सके. अगर तुम मुझे छोड़ कर भाग जाते तो मैं तो बरबाद हो जाती. न इधर की रह जाती, न उधर की. तुम मुझ से प्यार करते थे तो शादी क्यों नहीं की?’’

दिनेश निरुत्तर रह गया. उसे अपनी भूल का अहसास हो रहा था. उसे वीना से ब्याह कर लेना चाहिए था. वह संभल गया, ‘‘अच्छा, मुझ से गलती हो गई. मैं अब तुम से शादी करूंगा, ठीक है.’’

वीना मौन बैठी थी. दिनेश ने उसे आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘तुम मुझ पर अविश्वास कैसे कर सकती हो. क्या मैं बेवफा हूं? मैं तुम्हारे साथ सारी जिंदगी हंसीखुशी गुजारने को तैयार हूं.’’

इस पर वीना ने धीमे स्वर में कहा, ‘‘मैं सोच कर बताऊंगी. एक बार गलती कर चुकी हूं. इसलिए अब मैं दोबारा कोई गलती करना नहीं चाहती.’’

बहरहाल दिनेश और वीना में सहमति बनी कि दोनों एक बार फिर से एकदूसरे को समझेंगे, जानेंगे, तब कोई कदम उठाएंगे ताकि पहले की तरह कोई भूल न हो. अब जो भी कदम उठाएंगे, सोचसमझ कर उठाएंगे.

दोनों एक बार फिर घरपरिवार के बंधनों को भूल कर मिलने लगे, भविष्य के सपने बुनने लगे. वीना दिनेश के प्रभाव में आ गई थी. वह जब चाहता, उसे एकांत में ले जा कर संबंध बना लेता और फिर उसे उस के घर छोड़ जाता. लेकिन इस बार भी चमेली दिनेश और वीना के बीच आ कर खड़ी हो गई. इस बार कुछ ऐसा भयावह हो गया, जिस की कल्पना किसी ने नहीं की होगी.

19 जून, 2019 की सुबह दिनेश के मोबाइल की घंटी बजी. देखा वीना की काल थी. उस ने काल रिसीव की. उधर से वीना चहकी, ‘‘आज कोर्ट में तुम्हारी पेशी है न? मैं कोर्ट आऊंगी और मजिस्ट्रैट के सामने तुम्हारे ही पक्ष में बयान दे दूंगी.’’

वीना की बात सुन कर दिनेश श्रीवास खुश हो कर बोला, ‘‘मैं तुम से कब से बोल रहा था कि आ कर मजिस्ट्रैट के सामने बयान दे दो, लेकिन तुम टालती जा रही थी.’’

‘‘मैं मां के कितने प्रेशर में हूं, तुम नहीं जानते. मां ने मेरा जीना हराम कर रखा है. एक तरह से मैं घर में कैद सी हो गई हूं. मां मेरी हर गतिविधि पर निगाह रखती हैं. मैं ने बड़ी मुश्किल से काल की है और आऊंगी भी. मां आज बाहर जाने वाली हैं न…’’ वीना ने ऐसे कहा जैसे उत्साह से भरी हो.

‘‘चलो, कम से कम तुम को सद्बुद्धि तो आई.’’ दिनेश ने हंसते हुए कहा.

19 जून, 2019 को पूर्वाह्न लगभग 11 बजे दिनेश श्रीवास न्यायालय परिसर में पहुंच गया. अब उसे अपने वकील और वीना के आने का इंतजार था. लेकिन पता चला कि उस का वकील नहीं आएगा. पेशी की तारीख आगामी किसी दिन की ली जाएगी. इस से उसे बेचैनी होने लगी. थोड़ी देर में उसे वीना आती दिखाई दी, लेकिन वह अकेली नहीं थी. उस के साथ उस की मां चमेली भी थी.

दिनेश श्रीवास ने वीना को अगली पेशी की तारीख बता कर कहा, ‘‘हमारे वकील साहब बीमार हैं, इसलिए नहीं आए. तुम्हें अगली बार आना होगा, तभी बयान हो पाएगा.’’

वीना कुछ कहती, इस से पहले ही चमेली ने बातों का सिरा अपने हाथों में ले लिया. वह बोली, ‘‘दिनेश, बयान तो हो जाएगा. लेकिन तुम्हें क्या लगता है, वीना का जीवन बरबाद कर के तुम खुश रह पाओगे. मैं ने सुना है तुम कहीं और ब्याह करने की सोच रहे हो?’’

‘‘नहींनहीं, मैं नहीं मेरे पिताजी बात चला रहे हैं.’’ दिनेश ने बात घुमानी चाही.

‘‘और तुम..? तुम क्या करोगे?’’ चमेली ने दिनेश से पूछा.

‘‘मैं क्या करूंगा, मुझे भी नहीं मालूम. मैं पिताजी को नाराज नहीं कर पाऊंगा. उन्होंने मुझे जेल से निकलवाया, मुझे माफ किया. मुझे लगता है आप ने ठीक ही किया, जो वीना को उस दिन घर से ले आईं. बिना ब्याह हम लोगों का एक साथ रहना हमारे और हमारे परिवारों के लिए कलंक बन जाता.’’ दिनेश ने नजरें झुका कर कहा.

‘‘मगर बेटा,’’ चमेली ने प्यार से कहा, ‘‘फिर तो वीना का भविष्य बरबाद हो गया मानूं. अब उस के साथ कौन शादी करेगा?’’

यह सुन कर दिनेश कनखियों से वीना की ओर देखने लगा. बोला कुछ नहीं. चमेली बोली, ‘‘मैं और मेरी बेटी दोनों कोर्ट में तुम्हारे हक में बयान दे देंगे, मगर तुम्हें वीना को सम्मान के साथ ब्याह कर उसे स्वीकार करना होगा.’’

दिनेश चमेली की बात सुन अनसुनी कर के दूसरी तरफ देखने लगा. चमेली को उस का यह व्यवहार बुरा लगा. उस ने पुचकारते हुए कहा, ‘‘दिनेश, आज क्यों न हम पिकनिक पर चलें. एकदूसरे से बातें भी हो पाएंगी और समझनेसमझाने का मौका भी मिल जाएगा. नहीं तो हमारे रास्ते अलगअलग तो हैं ही.’’

चमेली की बात सुन दिनेश ने हामी भर दी. कोर्ट परिसर में से एक आटो ले कर तीनों पिकनिक मनाने और एकदूसरे को समझने के लिए चमेली के बताए उसलापुर सकरी की ओर निकल गए.

5 जुलाई, 2019 को बिलासपुर सिटी के थाना सिविल लाइंस के दरजनों बार चक्कर लगाने के बाद दिनेश श्रीवास के पिता रविशंकर व मां नूतन अंतत: आईजी कार्यालय में अपना प्रार्थना पत्र ले कर पहुंचे. प्रार्थना पत्र में उन्होंने लिखा था—

हमारा बेटा दिनेश श्रीवास विगत 19 जून, 2019 से लापता है. हमें शक है कि उस के साथ कुछ अनिष्ट हो गया है. हमें यह भी अंदेशा है कि उसे गायब करने में हमारी पड़ोसी वीना और चमेली का हाथ है. हम दरजनों बार सिविल लाइंस थानाप्रभारी से मिले और गुजारिश की कि हमारे बच्चे को ढूंढें, लेकिन वह हमें टाल कर घर भेज देते हैं.

आईजी प्रदीप गुप्ता अपने औफिस में बैठे थे. अर्दली ने अंदर जा कर रविशंकर और नूतन के नाम का पेपर दे दिया. उन्होंने दोनों को तत्काल बुलाया और सामने बैठा कर पूछा, ‘‘बताइए, क्या बात है?’’

इस पर दिनेश की मां ने लिखा हुआ प्रार्थना पत्र उन्हें दे कर निवेदन करते हुए कहा, ‘‘साहब, हमें न्याय दिलाएं, हमारा बेटा गायब है.’’

नूतन ने आंसू बहाते हुए जब आईजी से थाने आनेजाने की आपबीती बताई तो आईजी साहब नाराज हो गए. उन्होंने तत्काल थानाप्रभारी सिविललाइंस से फोन पर बात की. उन्होंने थानाप्रभारी कलीम खान को डांटते हुए कहा, ‘‘इस संवेदनशील मामले में 24 घंटे के अंदर एफआईआर दर्ज कर रिपोर्ट मेरे सामने पेश करें.’’

आईजी प्रदीप गुप्ता के आदेश पर थाना सिविल लाइंस में हड़कंप मच गया. थानाप्रभारी कलीम खान ने तत्काल 2 सिपाही भेज कर वीना और उस की मां को थाने बुला लिया. दोनों थाने आईं तो पुलिस ने सख्ती से पूछताछ करनी शुरू कर दी, लेकिन वीना ने स्पष्ट इनकार करते हुए कहा कि वह दिनेश श्रीवास से बहुत दिनों से नहीं मिली है.

मोबाइल फोन की काल डिटेल्स खंगालने पर इस बात का खुलासा हो गया कि 19 जून तक दिनेश और वीना के बीच मोबाइल पर बातें हो रही थीं. एक सूत्र ने पुलिस को बताया कि 19 तारीख को तीनों कोर्ट में एक साथ दिखाई दिए थे. इसी सूत्र के आधार पर कलीम खान ने कोर्ट में लगे सीसीटीवी की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी. एक फुटेज में तीनों को आटो में बैठ कर जाते देखा गया.

पुलिस को बहुत बड़ा सूत्र मिल गया था. इस पर जांच आगे बढ़ाई गई तो वीना की मां चमेली ने 19 जून, 2019 को तीनों के पिकनिक जाने की बात स्वीकार करते हुए उस की हत्या की बात स्वीकार कर ली.

चमेली ने अपने बयान में बताया कि बेटी की जिंदगी बरबाद होते देख वह परेशान रहने लगी थी. उसलापुर सकरी में पिकनिक के दौरान दिनेश श्रीवास ने जब स्पष्ट रूप से हाथ खड़े कर लिए कि अब वह वीना का साथ नहीं निभा सकेगा, तब उस ने और वीना ने मिल कर उस की हत्या कर दी.

चमेली ने बताया- पिकनिक स्पॉट में दिनेश जब दोपहर को आंखें बंद कर के लेटा था तो उन दोनों ने उस के सिर पर पत्थर दे मारा, जिस से वह बुरी तरह घायल हो गया. बाद में उन्होंने धारदार हंसिया से दिनेश का गला रेत दिया. साथ ही एक पत्थर मार कर उस का चेहरा विकृत कर दिया और उसे वहीं फेंक कर वापस आ गईं.

दिनेश को कोई पहचान न सके, इसलिए उस का मोबाइल वीना ने अपने पास रख लिया. पुलिस ने चमेली और वीना के बयान के आधार पर दिनेश की खोजबीन की तो उन्हें उसलापुर के कोकने नाला में दिनेश का क्षतविक्षत शव मिल गया.

पुलिस ने वीना और चमेली को गिरफ्तार कर लिया. उन के खिलाफ भादंवि की धाराओं 302, 120बी के तहत केस दर्ज किया गया. पूछताछ के बाद दोनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें सेंट्रल जेल बिलासपुर भेज दिया गया. Hindi Kahani

Crime Story: जुर्म- वजह छोटी, अपराध बड़े- मकसद से भटकती कमउम्र पीढ़ी

Crime Story: दक्षिण भारत की सुपरहिट फिल्म ‘केजीएफ चैप्टर वन’ के एक सीन में जब बच्चा रौकी दिनदहाड़े एक पुलिस वाले के सिर पर बोतल फोड़ कर भागताभागता रुक जाता है, तो उस का साथी बच्चा पूछता है कि रुक क्यों गया? इस पर रौकी बोलता है कि उस पुलिस वाले को अपना नाम तो बताया ही नहीं. वह फिर उस घायल पुलिस वाले के पास जाता है और दोबारा उस का सिर फोड़ कर अपना नाम बताता है.

यह तो महज एक फिल्मी सीन था, जिस पर सिनेमाघरों में खूब सीटियां और तालियां बजी थीं, पर असली जिंदगी में अपराध इतना ग्लैमरस नहीं होता है और न ही किसी अपराधी का भविष्य सुनहरा होता है.

इस के बावजूद बहुत से नौजवान अपनी छोटीमोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपराध की दुनिया में उतर जाते हैं, पर जब वे पुलिस के हत्थे चढ़ते हैं, तो अपनी जरूरतों का रोना रोने लगते हैं.

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले का एक मामला देखते हैं. वहां 2 लड़के लूट के एक मामले में पकड़े गए थे. इस सिलसिले में पुलिस ने 19 साल के शुभम उर्फ अर्पण और 18 साल के अभिषेक शुक्ला उर्फ बच्ची को गिरफ्तार किया था. वे दोनों रीवां जिले के मिसिरिहा गांव के रहने वाले थे.

इन दोनों आरोपियों ने 13 जुलाई, 2022 को गांव बुढ़ाकर में लूट की वारदात को अंजाम देने से पहले बैंक की रेकी की थी. एक पतिपत्नी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपने खाते में जमा 40,000 रुपए बैंक से निकाल कर बाहर फल विक्रेता के पास खड़े थे.

उसी दौरान दोनों आरोपी मोटरसाइकिल से आए और उन्होंने औरत से नकदी भरा बैग छीन लिया. बाद में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपियों को पकड़ा था.

अर्पण ने इस कांड की वजह के तौर पर पुलिस को बताया कि उस के परिवार में पैसे की बेहद तंगी थी और उस के पास जबलपुर में प्रतियोगी परीक्षा की अपनी कोचिंग फीस और मकान का किराया देने के लिए पैसे नहीं थे.

अर्पण का दोस्त अभिषेक भी प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग ले रहा था और वह भी पैसे की तंगी का सामना कर रहा था.

अर्पण ने पुलिस को यह भी बताया कि पैसे के लिए किसी को लूटने का प्लान अभिषेक ने बनाया था. उन दोनों ने कई दिनों तक कई बैंकों की रेकी की थी और 40,000 रुपए निकालने वाले इन पतिपत्नी का पता लगाया था.

चलो, यहां तो पैसे की तंगी के चलते अपराध हुआ था, पर आजकल के कमउम्र नौजवान तो इश्क के चक्कर में क्याक्या नहीं कर बैठते हैं, इस की एक बानगी देखिए.

प्रेमिका की चाहत पूरी करने के लिए गोंडा, उत्तर प्रदेश में कुछ नौजवानों ने अपराध की सारी हदें पार कर दीं और लुटेरे बन गए. हैरत की बात तो यह है कि इन में से कोई इंजीनियरिंग, तो कोई डाक्टर बनने का सपना लिए घर से निकला था, पर उन्हें माशूका के नखरे उठाने का ऐसा चसका लगा कि वे लुटेरे बन बैठे.

दरअसल, गिरफ्तार किए गए ये पांचों नौजवान आदतन अपराधी नहीं थे, पर जब अचानक उन की जिंदगी में माशूका आ गई तो मुहब्बत की अंधी राह ने उन्हें अपराध की दुनिया में धकेल दिया. ये आरोपी गोंडा और आसपास के जनपदों में मोबाइल की लूट और छीनाझपटी की वारदात को अंजाम दे रहे थे.

पुलिस ने केस दर्ज कर जब इस मामले की छानबीन शुरू की, तो एक रैकेट इस के पीछे काम करता हुआ मिला. पुलिस ने एक नौजवान को गिरफ्तार कर के पूछताछ की तो एकएक कर 5 लोगों के नाम सामने आए.

जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो पता चला कि गोंडा जिले के तरबगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले ये लड़के लखनऊ, दिल्ली और पंजाब में रह रही अपनी गर्लफ्रैंड की ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए लूट की वारदात को अंजाम देने लगे थे.

देहात कोतवाली पुलिस और एसओजी की टीम ने गिरफ्तार नौजवानों के कब्जे से चोरी के 9 मोबाइल फोन, वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली 2 मोटरसाइकिल, नकदी के अलावा दूसरा सामान भी बरामद किया.

बालिग तो बालिग, नाबालिग भी अपराध के दलदल में काफी अंदर तक धंसे हुए हैं. नैशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड और नैशनल क्राइम रिकौर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2020 में हत्या, अपहरण, लूट, डकैती, चोरी जैसी 29,768 आपराधिक वारदात ऐसी थीं, जिन में 74,124 नाबालिग शामिल थे.

बच्चों द्वारा की गई आपराधिक वारदात की बात करें तो इस में नंबर एक पर मध्य प्रदेश रहा था, जहां 4,819 वारदात में बच्चे शामिल थे. 4,079 ऐसी वारदात के साथ महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर, 3,394 वारदात के साथ तमिलनाडु तीसरे नंबर पर और 2,455 वारदात के साथ दिल्ली चौथे नंबर पर रही थी.

5वें नंबर पर राजस्थान (2,386 वारदात), 6ठे नंबर पर छत्तीसगढ़ (2,090 वारदात) और 7वें नंबर पर गुजरात (1,812 वारदात) जैसे राज्य थे.

ऐसे अपराधों की जड़ में पैसे की कमी और सामाजिक वजह बताई जाती हैं. यह कड़वी हकीकत है कि आज बड़ी तादाद में नौजवान बेरोजगार हैं. ऐसे में वे जब अपराध की तरफ खिंचते हैं, तो उन का पहला पड़ाव झपटमारी होता है. इस में मिली कामयाबी के बाद वे लूट और डकैती की तरफ चले जाते हैं. जेल में जा कर उन में से कुछ तो सुधर जाते हैं, पर बहुत से जेल में सजा काट रहे दूसरे बड़े अपराधियों की संगत में पूरी तरह से अपराधी बन जाते हैं.

इस के अलावा बहुत से नौजवान खराब परवरिश, महंगी जरूरतों, अपनी बढ़ती इच्छाओं, स्कूलकालेज के कैंपस की गुंडागर्दी, अकेलेपन और अपने गुस्सैल स्वभाव के चलते अपराध की ओर बढ़ने लगते हैं.

इस बुराई में समाज के साथसाथ सरकार भी बराबर की जिम्मेदार है. आज की नौजवान पीढ़ी नारों पर नहीं, बल्कि नतीजों पर यकीन करती है, जबकि केंद्र सरकार ने उसे रोजगार देने के नाम पर सिर्फ सपने दिखाए हैं.

हकीकत तो यह है कि दिसंबर, 2021 तक भारत में बेरोजगार लोगों की तादाद 5.3 करोड़ रही थी. देश की आजादी की 75वीं सालगिरह पर इस तरह के आंकड़े चिंता और शर्म की बात हैं. Crime Story

Superstitious Crime: जानलेवा बना खाली लोटा

Superstitious Crime: मध्य प्रदेश में जबलपुर जिले के कुम्ही सतधारा के पास ददरा टोला सहदरा गांव में 9 मई, 2025 की सुबह के तकरीबन 7 बजे कसा नदी से नहा कर घर लौट रही 57 साल की एक औरत तितरी बाई बरकड़े ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उस का सगा भतीजा ही उस की जान ले लेगा.

आदिवासी अंचल में रहने वाली तितरी बाई की गलती केवल इतनी थी कि नदी से नहाने के बाद वह खाली लोटा ले कर घर जा रही थी. वह एक हाथ में गीले कपड़े और एक हाथ में लोटा ले कर नदी का घाट चढ़ रही थी, तभी उस का 47 साल का भतीजा मत्तू सिंह बरकड़े मिल गया. चाची के हाथ में खाली लोटा देख कर वह गालीगलौज करने लगा. विरोध जताने पर वह चाची के साथ मारपीट पर उतर आया.

तितरी बाई ने उस से बचने के लिए भागने की कोशिश की तो वह गिर गई, तभी मत्तू ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उस के सिर पर मार दिया, जिस के चलते उस की मौत हो गई.

इस वारदात की खबर छोटे से गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई. मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटों में हत्यारे मत्तू सिंह बरकड़े को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस की पूछताछ में मत्तू ने चाची को मारने की जो वजह बताई, उसे सुन कर पुलिस के भी होश उड़ गए.
मत्तू ने बताया कि रास्ता काटना और खाली बरतन दिखना अपशकुन होता है. इसी अंधविश्वास के चलते उस ने चाची की जान ले ली.

पुलिस ने मत्तू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर लिया.

अंधविश्वास के चलते घटी यह वारदात साबित करती है कि आज भी गांवदेहात के इलाकों में अंधविश्वास किस कदर फैला हुआ है.

दिसंबर, 2021 की एक वारदात मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले की है, जब एक पिता पर अंधविश्वास इस कदर हावी हो गया कि उस ने अपने 5 साल के मासूम बेटे की कुल्हाड़ी से काट कर उस की बेरहमी से हत्या कर दी.

पिता के मुताबिक, उसे गुरुमाता ने कहा था कि बेटा उस के घर के लिए अपशकुन है. फिर अंधविश्वास पर भरोसा कर पिता ने ऐसा कदम उठाया जिस की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. हत्या के बाद बाप ने बच्चे को कई टुकड़ों में काटा और खेत में दफना दिया.

अलीराजपुर जिले के खरखादी गांव में एक पिता दिनेश दावर ने अपने ही 5 साल के मासूम बेटे की अंधविश्वास के चलते कुल्हाड़ी से काट कर हत्या कर दी. पिता को इस बात का शक था उस के बेटे पर भूतप्रेत का साया है.

पिता को लगता था कि उस के बेटे में कोई बुरी आत्मा का वास है, जिस के चलते उस के घर में परेशानियां और अशांति रहती है. परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए उस ने अपने ही जिगर के टुकड़े को मार डाला.

अंधविश्वास के चलते हुई ये घटनाएं यह साबित करती हैं कि अंधविश्वास हमारे आसपास चारों ओर बिखरा पड़ा है. इन में बिल्ली का रास्ता काटना, रास्ते में खाली घड़ा दिखाई देना, शुभ काम के दौरान विधवा या बांझ का दिख जाना, पूजापाठ के दौरान दीपक का बुझ जाना, घाव में कीड़े पड़ना, कुत्ते का रोना,

दरवाजे पर नीबूमिर्च, काला कंगन, लाल रिबन या काला पुतला टांगना, दूल्हे को लोहा पकड़ाना, खाट या चप्पलों का उलटा पड़ा होना, बरतनों का टकराना, दूध का फटना, टूटे हुए आईने में शक्ल देखना, कछुआ या कछुए की मूर्ति घर में रखना भी अंधविश्वास की श्रेणी में आते हैं. इन का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है.

देश में सरकारी तंत्र अंधविश्वास को रोकने की बजाय फैलाने में अहम भूमिका निभा रहा है. पांढुरना का गोटमार मेला हो या हिंगोट युद्ध सभी में पुलिस प्रशासन मूक दर्शक बन कर इन दकियानूसी रिवाजों को खादपानी देने का काम कर रहा है. कोविड 19 वायरस को भगाने के लिए जब दीपक जला कर, ताली और घंटेघडि़याल बजाने का टोटका देश के प्रधानमंत्री खुद ही जनता को बताते हों, उस देश में वैज्ञानिक सोच भला कैसे विकसित होगी.

देश के नागरिकों की बुनियादी जरूरत शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजलीपानी और सड़क की है. इस के लिए सरकार को इंजीनियरिंग और मैडिकल कालेज खोलने के साथसाथ साफ पानी और भरपूर बिजली के साथ कहीं भी आनेजाने के लिए अच्छी सड़कें मुहैया कराने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, मगर सरकार इन सब को छोड़ कर बड़ीबड़ी मूर्तियां और मंदिर बनाने पर तुली हुई है.

धार्मिक रंग में पूरी तरह रंगी सरकार की सोच यह है कि देश के पढ़ेलिखे नौजवानों को नौकरी की बजाय धार्मिक रैली, जुलूस, कांवड़ यात्रा, भंडारे और आरती में उलझ कर उन्हें तार्किक न बनने दिया जाए. यही वजह है कि आज भी देश में अंधविश्वास और दकियानूसी रिवाजों का बोलबाला है. Superstitious Crime

Hindi Crime Story: हवस – मर्यादा तोड़ने का खतरनाक अंजाम

Hindi Crime Story: जय प्रकाश दोपहर में अपनी दुकान से घर आ गया. उस ने तय कर लिया था कि आज वह हर हाल में अपनी बीवी सीमा और उस के चचेरे भाई मनोज के असली चेहरे बेनकाब कर के रहेगा.

आंगन का दरवाजा बंद था. चारदीवारी फांद कर जय प्रकाश अंदर गया. दबे पैर चल कर उस ने बैडरूम के दरवाजे पर कान लगाया, तो अंदर से उसे सीमा और मनोज की बातें सुनाई पड़ीं.

‘‘काश, तुम मेरी बीवी बन कर जिंदगीभर मेरे साथ रहतीं?’’ यह मनोज की आवाज थी.

‘‘बीवी तो मैं दूसरे की हूं, लेकिन प्रेमिका के नाते तुम्हारे साथ बीवी जैसा फर्ज तो अदा कर रही हूं,’’ सीमा बोल रही थी.

‘‘मैं तुम्हें जिंदगीभर के लिए पाना चाहता हूं,’’ मनोज ने कहा था.

‘‘ठीक है, अगर कभी मेरे पति को हमारे नाजायज रिश्ते की जानकारी हो गई और उसी ने मु?ो अपने साथ रखने से मना कर दिया, तो तुम मु?ो अपनी बीवी बना लेना.

‘‘मैं क्या अपनी खुशी से जय प्रकाश के साथ रह रही हूं. यह मैं ही जानती हूं कि मैं उस से कैसे निबाह रही हूं. यह मेरी बदकिस्मती थी कि लाख कोशिशों के बावजूद मेरी तुम से शादी नहीं हो सकी, नहीं तो मैं आज तुम्हारी ही बीवी होती. खैर, छोड़ो उन सब बातों को, अपने कपड़े तो उतारो.’’

जय प्रकाश सबकुछ सम?ा गया, मगर दरवाजे पर दस्तक देने से पहले वह अपनी आंखों से कमरे का नजारा देख कर यह पक्का कर लेना चाहता था कि उन दोनों में नाजायज रिश्ता है.

दरवाजे में कोई छेद नहीं था, इसलिए वह खिड़की की तरफ बढ़ गया. उस ने खिड़की के पाटों के बीच एक दरार में आंख लगा दी.

भीतर का नजारा देख कर जय प्रकाश हैरान था. सीमा बिस्तर पर लेटी थी. मनोज उस से सट कर बैठा था. वह सीमा के होंठों और गालों को चूम रहा था.

जय प्रकाश का खून खौल उठा. उस का मन सीमा का कत्ल कर के जेल चले जाने का हुआ, मगर उस ने यह सोच कर इस विचार को छोड़ दिया कि अगर वह जेल चला जाएगा, तो उस के 3 साल के बेटे रोहित की परवरिश कौन करेगा?

मगर जय प्रकाश सीमा और मनोज को यों ही नहीं छोड़ना चाहता था. वह उन्हें सबक सिखाना चाहता था, इसलिए उस ने दरवाजे पर दस्तक दी.

दस्तक सुन कर वे दोनों सचेत हो गए. अपने कपडे़ ठीक करते हुए सीमा बिस्तर से उठ कर आई और दरवाजा खोल दिया.

जैसे ही सीमा की नजर जय प्रकाश पर पड़ी, उस का हलक सूख गया.

सीमा को कुछ कहे बिना जय प्रकाश कमरे में आ गया और उस ने मनोज को ढूंढ़ निकाला. वह पलंग के नीचे छिप गया था.

सीमा को लातघूंसों से मारते हुए जय प्रकाश ने कहा, ‘‘बदजात औरत, तू ने तो कहा था कि मनोज तुम्हारा चचेरा भाई है. महल्ले के लोग यों ही तु?ो बदनाम करते हैं.

‘‘अब बता कि यह सब क्या है? भाई के साथ कमरा बंद कर के क्या कोई चोंच से चोंच मिलाता है?’’

सीमा ने ?ाट से जय प्रकाश के पैर पकड़ लिए और अपनी गलती के लिए माफी मांगते हुए कहा कि अब वह मनोज के साथ नाजायज संबंध नहीं रखेगी.

जय प्रकाश सीमा को एक मौका और देना चाहता था, इसलिए उस ने उसे इस शर्त पर माफ किया कि वह आइंदा मनोज से नहीं मिलेगी.

मनोज के जाने के कुछ देर बाद जय प्रकाश अपने मकान से बाहर आया, तो वहां लोगों की भीड़ लगी थी. लोग उसे ऐसे देख रहे थे, जैसे आज उन्हें पता चला हो कि उन के महल्ले में कोई नामर्द रहता है.

पड़ोस की एक औरत ने जय प्रकाश के मुंह पर कह भी दिया, ‘‘क्यों भैया, मर्द नहीं हो क्या? बीवी को दूसरे मर्द के साथ सोते देख कर भी उसे माफ कर दिया?’’

जय प्रकाश सिर ?ाका कर अपने रास्ते चला गया. भला वह उस औरत की बात का क्या जवाब देता? उसे कैसे बताता कि अपने बेटे का खयाल कर के उस ने अपनेआप से सम?ौता किया है.

सीमा मुजफ्फरपुर के एक गांव की रहने वाली थी. मनोज का घर भी उसी गांव में था. वह सीमा से एक साल बड़ा था, मगर दोनों ने बीए तक एकसाथ पढ़ाई की थी.

जवानी की दहलीज पर आते ही मनोज सीमा की तरफ खिंच गया और उसे अपना दिल दे दिया.

सीमा भी मनोज को मन ही मन प्यार करती थी. दोनों का मिलनाजुलना शुरू हो गया. एक दिन मौका मिला, तो दोनों ने जिस्मों का मिलन भी कर लिया.

कुछ महीनों के बाद उन दोनों ने शादी कर के जिंदगीभर साथ रहने का फैसला किया, मगर उन की एक न चली.

दोनों एक ही गांव के थे और अलगअलग जाति के भी. उन के घर वाले जाति की दीवार तोड़ने के लिए तैयार नहीं हुए.

आखिरकार सीमा की शादी जय प्रकाश से कर दी गई. वह कोलकाता का रहने वाला था. वहां उस की कपड़े की दुकान थी.

सीमा अपने पति के घर आ गई. पति से भरपूर प्यार और सासससुर का दुलार पा कर भी वह मनोज को भुला न सकी. जब भी मौका मिलता, सीमा मनोज को फोन कर लेती.

मनोज भी सीमा से मिलने के लिए कम बेचैन नहीं था.

इसी तरह 6 महीने बीत गए. मनोज अपनेआप पर काबू न रख सका. फोन पर सीमा से इजाजत ले कर एक दिन वह कोलकाता पहुंच गया.

सीमा ने पति और सासससुर से मनोज की पहचान अपने चचेरे भाई के रूप में कराई, इसलिए उन दोनों के नाजायज रिश्ते पर किसी को शक नहीं हुआ. एकदूसरे की बांहों में समा कर वे दोनों अपनी हवस शांत कर लेते.

जल्दी ही मनोज के घर वालों को पता चल गया कि वह सीमा से मिलने बारबार कोलकाता जाता है, फिर तो मनोज के पिता ने जल्दी ही उस की शादी वीणा से करा दी.

वीणा सीमा से भी ज्यादा खूबसूरत थी. लेकिन मनोज उस के रूपजाल में ज्यादा दिनों तक बंधा न रह सका.

अपनी शादी के 4 महीने बाद ही मनोज कोलकाता जा कर सीमा से मिला. उस समय वह मां बन चुकी थी. उस के बेटे का नाम रोहित था. इस के बावजूद सीमा ने मनोज से नाजायज संबंध नहीं तोड़ा.

सीमा से मिलने बारबार कोलकाता न आना पड़े, इसलिए मनोज ने वहीं रहने का फैसला किया.

कुछ कोशिश के बाद मनोज को एक कंपनी में नौकरी मिल गई. उसे सीमा के घर से कुछ ही दूरी पर किराए का मकान भी मिल गया.

जय प्रकाश रोजाना घर से सुबह 10 बजे दुकान जाता था. वहां से लौट कर वह रात के 10 बजे घर आता था. इस बीच सीमा पूरी तरह आजाद रहती थी. उस का जब भी मन होता, वह मनोज को घर बुला लेती.

मनोज की आजादी पर अंकुश उस समय लगा, जब उस की पत्नी वीणा गांव से शहर आ गई. उस की एक साल की बच्ची थी.

जल्दी ही वीणा को मनोज और सीमा के नाजायज संबंध की सारी जानकारी हो गई. फिर तो उन दोनों में सीमा को ले कर ?ागड़ा होने लगा.

मनोज किसी भी हाल में सीमा से नाजायज संबंध तोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ, तो एक दिन वीणा सीमा के घर गई.

उस ने सीमा को सम?ाने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

सीमा ने उसी दिन मनोज को बुला कर बताया. मनोज को वीणा पर बहुत गुस्सा आया. उस ने घर जा कर वीणा की खूब पिटाई की और यह चेतावनी दी कि अगर उस ने फिर कभी सीमा से कुछ कहा, तो वह उसे तलाक दे देगा.

वीणा को इस बात से इतना धक्का पहुंचा कि एक दिन वह गले में साड़ी का फंदा लगा कर पंखे से ?ाल गई. खुदकुशी करने से पहले उस ने अपनी बेटी को भी जहर दे कर मार डाला था.

पत्नी और बच्ची की मौत के बाद भी मनोज नहीं सुधरा. उस ने पहले की तरह सीमा से नाजायज संबंध बनाए रखा.

सीमा ने भी इस घटना से कोई सीख नहीं ली.

वीणा ने जब अपनी बेटी को मार कर खुदकुशी की थी, तभी जय प्रकाश को किसी ने मनोज और सीमा के नाजायज संबंध के बारे में सबकुछ बता दिया था.

जय प्रकाश सीधासादा था. वह मन में छलकपट नहीं रखता था. सो, एक दिन उस ने सीमा से पूछा, ‘‘क्या यह सच है कि मनोज से तुम्हारा नाजायज रिश्ता है? तुम दोनों की वजह से ही मनोज की पत्नी ने खुदकुशी की थी?’’

पहले तो सीमा घबरा गई, मगर तुरंत उस ने अपनेआप को संभाल लिया और बोली ‘‘यह आप क्या कह रहे हैं? महल्ले वालों की बातों में आ कर भाईबहन के पवित्र रिश्ते पर लांछन लगा रहे हैं? आप ही बताइए कि क्या मैं चरित्रहीन लगती हूं?’’ यह कह कर सीमा फफकफफक कर रोने लगी.

जय प्रकाश को उस की बात पर भरोसा हो गया और उस ने उसे यह कह कर चुप कराया कि अब वह उस पर शक नहीं करेगा.

इस के बाद 3 महीने और बीत गए. एक दिन जय प्रकाश के पड़ोस की मुंहबोली भाभी ने उसे मनोज और सीमा की सारी करतूतें बताते हुए कहा कि अगर उस ने जल्दी ही सीमा और मनोज के नाजायज संबंध को नहीं रोका, तो महल्ले के लोग उस की बीवी पर जिस्मफरोशी का आरोप लगा कर पुलिस के हवाले कर देंगे.

जय प्रकाश को अपनी मुंहबोली भाभी पर पूरा भरोसा था. उस ने मनोज और सीमा को रंगे हाथ पकड़ने का प्लान बना लिया.

अगले दिन ही जय प्रकाश दुकान से घर आया और उस ने सीमा को मनोज के साथ पकड़ लिया.

अपने बेटे का खयाल कर के जय प्रकाश ने सीमा को माफ कर दिया. मगर सीमा ने मनोज से नाजायज संबंध नहीं तोड़ा, वह सिर्फ सावधानी बरतने लगी.

2-3 महीने बाद जब सीमा को लगा कि महल्ले के लोग अब उस के पति के कान नहीं भरेंगे, तो उस ने फिर से मनोज को अपने घर बुलाना शुरू कर दिया.

एक दिन जय प्रकाश को एक काम से किसी रिश्तेदार के घर पटना जाना था. सीमा को 3 दिन बाद लौटने की बात कह कर वह चला गया, मगर उस की ट्रेन छूट गई और वह घर लौट आया.

उस समय शाम के 4 बज रहे थे. उस के घर के बाहर महल्ले के बहुत से लोग खड़े थे.

जय प्रकाश ने उस भीड़ में एक से पूछा, ‘‘क्या बात है?’’

‘‘हम लोग यहां तमाशा देखने के लिए खड़े हैं. तुम अंदर जाओगे, तो खुद जान जाओगे कि यहां कैसा तमाशा हो रहा है.’’

जय प्रकाश उस शख्स की बात सम?ा नहीं पाया. वह चुपचाप आंगन में चला गया.

उस के बैडरूम का दरवाजा बंद था. पड़ोस में रहने वाला एक 16 साल का लड़का दरवाजे से आंख लगाए खड़ा था.

जय प्रकाश को गुस्सा आ गया.

उस ने लड़के का गरीबान पकड़ कर पूछा, ‘‘मेरे घर में ताक?ांक क्यों कर रहा है? चल, तेरे बाप को तेरी करतूत बताता हूं.’’

वह लड़का भी कोई कम नहीं था. उस ने तुरंत जवाब दिया, ‘‘मेरे बाप को बाद में बताना, पहले दरवाजा खुलवा कर अपनी बीवी से पूछ कि तेरे रहते वह गैरमर्द के साथ कमरा बंद कर के क्या कर रही है?’’

जय प्रकाश के हाथों के तोते उड़ गए. लड़के ने अपना गिरेबान छुड़ाया और अपनी राह चला गया.

जय प्रकाश ने गुस्से में दरवाजा पीटना शुरू कर दिया.

जय प्रकाश को देखते ही सीमा डर गई. वह कुछ सम?ा नहीं पाई कि ऐसी हालत में उसे क्या करना चाहिए.

लेकिन जय प्रकाश समझ गया था कि सीमा और मनोज के दिल में हवस का तूफान है. वे दोनों समझने वालों में से नहीं हैं, इसलिए उस ने छुटकारा पाने के लिए उन का कत्ल कर देना ही ठीक समझा.

जय प्रकाश ने बरामदे में पड़ी लोहे की छड़ उठाई और सीमा के सिर पर एक जोरदार वार किया, जिस से उस का सिर फट गया और वह चीख कर जमीन पर गिर गई.

सीमा का हश्र देख कर मनोज ने वहां से भागने की कोशिश की, मगर जय प्रकाश ने उसे भागने नहीं दिया.

लोहे की उसी छड़ से उस ने मनोज के सिर पर कई वार किए. जो हश्र सीमा का हुआ, वही मनोज का भी हुआ. थोड़ी देर में दोनों की लाशें बिछ गईं.

सूचना पा कर पुलिस आई और जय प्रकाश को गिरफ्तार कर के ले गई. रोहित अनाथ हो गया. Hindi Crime Story

Hindi Crime Story: खून से रंगी रिश्तेदारी – जीजा और साले बने कातिल

Hindi Crime Story: ‘‘संजू, मेरी समझ में यह नहीं आ रहा कि तुम ने मुझ पर ऐसा कौन सा जादू कर दिया है, जो मेरा किसी भी काम में मन नहीं लगता. अब तो तुम्हारे बिना न दिन को चैन आता है और न रातों को नींद.’’ प्रीति ने प्रेमी संजू से कहा.

‘‘यह कोई जादू नहीं है बल्कि इसी को प्यार कहते हैं. सच कहूं, प्रीति ऐसा ही तो हाल मेरा है. तुम सामने होती हो तो सब कुछ सतरंगी सा लगता है और तुम से जुदा होते ही चारों ओर वीरानी नजर आती है. प्रीति, कभीकभी तो मैं यह सोच कर ही डरता हूं कि कहीं हमारे प्यार को किसी की नजर न लग जाए. क्योंकि मैं तुम्हारे बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकता.’’ प्रीति का हाथ अपने हाथों में लेते हुए संजू बोला.

‘‘संजू, जुदाई की सोचते ही मेरी तो रूह कांप जाती है. मैं यही सोच कर परेशान हूं कि कहीं मेरे घरवालों को हम दोनों के प्यार के बारे में पता चल गया तो उन का मेरे प्रति व्यवहार कैसा होगा. क्योंकि हम दोनों नदी के दो किनारों की तरह हैं, जो कभी आपस में मिल नहीं सकते. बताओ, ऐसे में हमारे प्यार को मंजिल कैसे मिलेगी?’’ यह कहते ही प्रीति के चेहरे पर गंभीरता छा गई. वह एक पल के लिए रुकी और फिर बोली, ‘‘मेरी एक बात मानोगे, संजू? क्यों न हम यहां से कहीं दूर जा कर अपने प्यार की नई दुनिया बसा लें, जहां हमें किसी का डर न हो. जब हम एकदूजे के हो जाएंगे तो उस के बाद किसी में इतनी ताकत नहीं होगी कि कोई हमें अलग कर पाए.’’

प्रीति ने कहा तो संजू भी सोच में डूब गया. उसे भी महसूस हुआ कि प्रीति की सोच अपनी जगह ठीक है. प्यार के एक नहीं, लाखों दुश्मन होते हैं. फिर प्रीति ने उस से जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया है. उसे अपना बनाने के लिए अगर हिम्मत कर के यह कदम उठा भी ले तो कौन सी बुराई है. जिला शाहजहांपुर के सिधौली थाना के गांव रामपुर में रहता था 35 वर्षीय संजू मंसूरी. वह ईरिक्शा चालक था. उस के पिता का नाम शेर मोहम्मद और मां का नाम रजिया था. पिता खेतीकिसानी करते थे. संजू की 2 बड़ी बहनें व एक छोटा भाई इस्लामुद्दीन था. दोनों बहनों का निकाह हो चुका था. इसी गांव में रामविलास परिवार सहित रहता था. परिवार में पत्नी सुधा और एक बेटा गुड्डू और 2 बेटियां प्रिया और प्रीति थीं.

रामविलास खेती करता था, जिस से होने वाली आमदनी से घर का खर्च चलता था. उस के सभी बच्चों ने गांव के सरकारी स्कूल से 8वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की थी. प्रिया का विवाह हो चुका था. प्रीति अभी अविवाहित थी. स्वभाव से वह काफी चंचल थी. घर के कामों में उस का मन नहीं रमता था. प्रीति हमेशा बनठन कर रहती और टीवी से ही चिपकी रहती. मां की डांट के बावजूद प्रीति टीवी पर आने वाली फिल्में देखे बगैर नहीं रहती थी. टीवी पर फिल्मों और फिल्मी गानों का इतना प्रभाव प्रीति पर पड़ा था कि वह अपने आप को फिल्मी हीरोइन से कम नहीं समझती थी.

चूंकि फिल्मों में प्यारमोहब्बत का हमेशा महिमामंडित किया जाता है, इसलिए प्रीति को भी ऐसे युवक की तलाश थी, जो फिल्मी हीरो की तरह उस के सामने प्यारमोहब्बत का प्रस्ताव रखे. उसे चाहे और उसे सराहे. उस के हुस्न की तारीफ करे और उस की याद में तड़प सके. दूसरी ओर संजू अधिक पढ़लिख नहीं सका था, लेकिन वह अपने पहनावे से पढ़ालिखा और हैंडसम युवक नजर आता था. अपने शरीर पर वह विशेष ध्यान देता था. वह हमेशा आधुनिक फैशनेबल कपड़े पहनता था. संजू को भी फिल्में देखने का शौक पागलपन इस हद तक था कि उस का बात करने और चलने का स्टाइल भी फिल्मी हो गया था.

संजू अपनी उम्र के उस मोड़ पर था, जहां आशिकी स्वभाव में अपने आप आ कर शामिल हो जाती है. संजू भी इस का अपवाद नहीं था. लव स्टोरी वाली फिल्में देखदेख कर संजू का मिजाज भी आशिकाना हो गया था. वह मोहल्ले की लड़कियों पर अकसर नजर रखने की कोशिश किया करता था. लेकिन कोई लड़की उस की तरफ आकर्षित नहीं हुई थी. संजू की दोस्ती रामविलास के बेटे गुड्डू से थी. इस वजह से उस का उस के घर आनाजाना था. आनेजाने में गुड्डू की बहन प्रीति से उस की मुलाकात हो जाती. प्रीति की सुंदरता संजू के मन को भा गई. बारबार आनेजाने से उन के बीच बातचीत भी होने लगी. प्रीति संजू की निगाहों को भांप कर उस के दिल का हाल जान चुकी थी. उसे संजू पसंद आया था, इसलिए वह भी संजू से बात करने में गुरेज नहीं करती थी.

दोनों एक ही शौक के शिकार थे. उन के बीच फिल्मों को ले कर ही अधिक बातचीत होती थी. इस तरह दोनों एकदूसरे के साथ काफी समय बिताते थे. इस के लिए वे घर के बाहर भी मिलते थे. क्योंकि ज्यादा देर तक वह घर में एक साथ बैठ कर बात नहीं कर सकते थे. ऐसा करने पर घर वाले उन पर शक करने लगते. समय के साथसाथ दोनों को एकदूसरे का संग खूब भाने लगा. दोनों साथ में मोबाइल पर रोमांटिक मूवी भी देखते. फिर फिल्म के कलाकारों की नकल करते हुए दोनों उन के डायलौग बोलते और उसी अंदाज में एकदूसरे के पास आ कर बांहों में भर कर आंखों में आंखें डाल कर उसी तरह बात करते जैसे कलाकार फिल्म में करते थे. इस से दोनों एकदूसरे के काफी नजदीक आते चले गए.

वे दोनों दिल की धड़कनों की आवाज और सांसों की सरगम को भी बखूबी महसूस करते थे. ये नजदीकियां दोनों को अच्छी लगने लगी थीं. जब वे नजदीक होते तो अलग होने की बात दिमाग में लाने ही नहीं देते थे. लेकिन मजबूर हो कर उन को एकदूसरे से अलग होना ही पड़ता. फिल्मी कलाकारों के लव सीन की एक्टिंग करतेकरते वे दोनों भी एकदूसरे से प्यार कर बैठे. अब प्यार का इजहार करना बाकी था. एक दिन लव सीन की एक्टिंग करतेकरते संजू ने प्रीति को अपनी बांहों में लिया तो फिल्म के डायलौग न बोल कर उस ने अपने दिल की बात कहनी शुरू कर दी, ‘‘प्रीति, देखता तो मैं तुम्हें बचपन से आया हूं. लेकिन जब से हम एक्टिंग के जरिए एकदूसरे के नजदीक आए हैं, तब से मैं ने तुम्हें बेहद करीब से देखा तब से ये नजरें तुम्हारे सिवा कुछ और देखना ही नहीं चाहतीं.

तुम्हारी झील सी आंखों की गहराइयों में डूब कर तुम्हारे दिल का हाल जाना तो यही लगा कि तुम्हारा दिल भी मेरे पास आना चाहता है. इस बात की गवाही तुम्हारे दिल की धड़कनें देती हैं. मैं तो तुम्हें दिलोजान से चाहता हूं. मुझे अपने प्यार पर भी पूरा भरोसा है कि वह भी मुझे बेइंतहा चाहता है, बस देर है तो उसे तुम्हारे द्वारा जुबां से कुबूल करने की.’’

प्रीति तो जैसे उस के पे्रम से सराबोर हो गई और उस की आंखों में देखती हुई फिल्मी स्टाइल में बेसाख्ता बोली, ‘‘कुबूल है…कुबूल है…कुबूल है मेरे महबूब.’’

यह सुनते ही संजू की खुशी का ठिकाना न रहा. उस ने प्रीति को अपने सीने से लगा लिया और बोल उठा, ‘‘आई लव यू…आई लव यू प्रीति.’’

उस के प्यार भरे शब्द प्रीति के कानों में रस घोल रहे थे. उसे एक मीठा सुखद एहसास हुआ तो उस ने अपनी आंखें बंद कर लीं और संजू के कंधे पर अपना सिर रख दिया. काफी देर तक वे दोनों उसी स्थिति में रहे. उस के बाद जब दोनों अलग हुए तो उन के चेहरे खिले हुए थे. इस के बाद तो प्रीति और संजू की तूफानी मोहब्बत बड़ी तेजी के साथ अपनी बुलंदियों की तरफ बढ़ने लगी. अब तो रोज ज्यादा से ज्यादा वह एकदूसरे के पास रहने की कोशिश करते. कभी घर पर, कभी खेत पर. इस चक्कर में संजू अपने काम से जी चुराने लगा था. उसे रोज घर में डांट खाने को मिलती थी. लेकिन संजू पर तो प्रीति की मोहब्बत का भूत सवार हो गया था. वह प्रीति के लिए हर किसी से बगावत करने को तैयार था.

दरअसल ग्रामीण परिवेश में प्यारमोहब्बत के मामले अधिक दिनों तक छिप नहीं पाते हैं. प्रीति और संजू की मोहब्बत के साथ भी यही हुआ. उन दोनों की अपनी दीवानगी की वजह से ही पूरा गांव इस प्रेम प्रकरण के बारे में जान गया था. उधर उन दोनों प्रेमियों की हालत ऐसी हो गई थी कि उन्हें एकदूसरे को देखे बिना करार नहीं आता था. लोगों को पता लग जाने के बाद दोनों हर समय चोरीछिपे की मुलाकातों का जुगाड़ बैठाने की जुगत में लगे रहते थे. गांव के बाहर एक खंडहरनुमा मकान उन की मिलनस्थली बन गया था. इसी दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए.

एक दिन गांव में रह रहे बिरादरी के कुछ लोगों ने प्रीति के पिता रामविलास को बताया कि उस की लड़की गलत रास्ते पर जा रही है. यह सब सुन कर रामविलास आगबबूला हो उठा. उस ने अपनी पत्नी सुधा को हड़काया कि वह प्रीति को खेतों और बाजार में न जाने दे. इसी दौरान सुधा ने अपनी आंखों से एक ऐसा नजारा देखा, जिसे देखने के बाद उस ने प्रीति की खूब पिटाई की. दरअसल, संजू प्रीति के घर के सामने से निकल रहा था तो प्रीति दरवाजे पर खड़ी थी. संजू के देखने पर प्रीति उसे बारबार फ्लाइंग किस देने लगी. संजू उस किस को अपने हाथ में लेने का प्रयत्न करता दिखाई दे रहा था. यह सब होते हुए सुधा ने अपनी आंखों से देख लिया था. यह देख कर ही सुधा ने प्रीति की पिटाई की थी.

इस दृश्य को देखने के बाद सुधा ने अपने पति रामविलास से स्पष्ट शब्दों में कह दिया था कि वह अपनी लाडली के हाथ पीले कर दें, वरना वह किसी दिन वह इस परिवार की नाक कटवा कर रहेगी. रामविलास सचमुच इस मामले में गंभीर हो उठा था. उस ने उसी रोज से प्रीति के लिए बिरादरी में कोई लड़का ढूंढना शुरू कर दिया. अंतत: उस की मेहनत रंग लाई. उसे शाहजहांपुर के ही जसनपुर गांव निवासी रामवीर का बेटा आकाश प्रीति के लिए उपयुक्त लगा. वह खेती करता था. आकाश देखने में सुंदर और अच्छी कदकाठी का था और खेती भी अच्छीखासी थी. सब कुछ देखजान कर रामविलास ने रिश्ते की बात चलाई तो जल्द ही बात बन गई.

प्रीति ने विरोध करना चाहा, लेकिन पिता का गुस्सा देख कर वह कुछ न कर पाई. उसे धमकी भी मिली थी कि अगर वह शादी के लिए तैयार न हुई तो उसे वह जिंदा मार देंगे. प्रीति बेबस हो गई. वह तो संजू के साथ भाग जाने की सोच रही थी, लेकिन पिता को संबंधों का पता चलने के बाद मारने की धमकी देने पर वह कुछ न कर पाई. एक साल पहले प्रीति का विवाह आकाश से हो गया. वह मायके से ससुराल आ गई. यहां आ कर वह किसी तरह संजू को भूलने की कोशिश करने लगी, लेकिन वह जितना उसे भूलने की कोशिश करती, उतना ही वह ज्यादा उसे याद आता. आकाश ने उसे अपनी तरफ से भरपूर प्यार दिया, उस का खयाल रखा.

दूसरी ओर संजू अपने आप को प्रीति से दूर होने के बाद संभाल नहीं पा रहा था. रहरह कर उठतेबैठते उस के खयालों में प्रीति ही छाई रहती थी. जब बरदाश्त की हद पार हुई तो वह एक दिन प्रीति की ससुराल पहुंच गया. प्रीति उस की हिम्मत देख कर चौंक गई. लेकिन काफी अरसे बाद उसे देख कर उस के दिल को सुकून भी पहुंचा. उस से मिलने के बाद फोन पर बात करने की बात कह कर वापस आ गया. इस के बाद उन दोनों की चोरीछिपे फोन पर बातें होने लगीं. जब भी प्रीति मायके आती तो संजू के साथ खूब समय बिताती. एक दिन आकाश ने अपनी पत्नी प्रीति को संजू से बातें करते पकड़ लिया. आकाश ने प्रीति को जम कर पीटा. उस के बाद वह प्रीति पर नजर रखने लगा.

16 नवंबर, 2020 की रात संजू ने खाना खाया. उस के बाद वह घर से निकल गया. काफी देर तक नहीं लौटा तो उसे तलाशा गया लेकिन उस का कोई पता नहीं चला. 17 नवंबर की सुबह फिर संजू की तलाश शुरू हुई तो गांव के बाहर सेठपाल के खेत में पराली के ढेर के पास संजू की चप्पलें पड़ी मिलीं. पराली हटाने पर उस के नीचे संजू की लाश मिली. लाश मिलते ही कोहराम मच गया. घरवाले वहां पहुंच कर रोनेपीटने लगे. संजू के भाई इस्लामुद्दीन को गांव के लोगों से पता चला कि रात में उन लोगों ने संजू को गुड्डू के साथ जाते देखा था. संजू की लाश मिलने पर गुड्डू वहां नहीं पहुंचा, न ही वह घर पर था, इसलिए पूरा शक गुड्डू  पर गया.

स्थानीय सिधौली थाने की पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई. थाने के इंसपेक्टर जगनारायण पांडेय सूचना मिलते ही पुलिस टीम के साथ वहां पहुंच गए. मृतक के गले पर गहरे निशान थे.  शरीर पर और किसी प्रकार के निशान नहीं थे. संभवत: गला दबा कर हत्या की गई थी. इस के बाद इंसपेक्टर पांडेय ने इस्लामुद्दीन से आवश्यक पूछताछ की. इसी बीच एसपी (ग्रामीण) अपर्णा गौतम भी मौके पर पहुंच गईं. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर के पूछताछ की फिर आवश्यक दिशानिर्देश दे कर चली गईं. चूंकि मामला 2 संप्रदायों से जुड़ा था. इस वजह से उपजे तनाव को देखते हुए गांव में पीएसी तैनात कर दी गई. लाश को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजने के बाद इंसपेक्टर जगनारायण पांडेय इस्लामुद्दीन को साथ ले कर थाने आ गए.

इस्लामुद्दीन की तहरीर पर इंसपेक्टर पांडेय ने गुड्डू, सेठपाल, विमल, अंगद और एक अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 147/302/201 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. इस्लामुद्दीन ने इन लोगों पर संजू के मोबाइल और 80 हजार रुपए के लालच में हत्या करने का आरोप लगाया था. 21 नवंबर, 2020 को सुबह 10 बजे इंसपेक्टर पांडेय ने गुड्डू और उस के बहनोई आकाश को नियामतपुर मोड़ से गिरफ्तार कर लिया. उन के पास से संजू का वीवो कंपनी का मोबाइल फोन भी बरामद हो गया. थाने ला कर जब दोनों से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया और हत्या की वजह बता दी.

उन्होंने बताया कि प्रीति संजू से बात करना बंद नहीं कर रही थी. इस वजह से आकाश और उस के बीच विवाद हो जाता था. आकाश अपनी पत्नी की चरित्रहीनता बरदाश्त नहीं कर पा रहा था. इसी साल भैयादूज पर वह प्रीति को ले कर उस के मायके आया. प्रीति के भाई गुड्डू से कहा कि उस की बहन प्रीति का चरित्र ठीक नहीं है. उस के संजू से अवैध संबंध हैं. अब वह प्रीति को अपने साथ नहीं रखेगा, उस से तलाक ले लेगा. इस पर गुड्डू ने उसे समझाया कि ऐसा कुछ करने की जरूरत ही नहीं पडे़गी. हम लोग संजू को ही ठिकाने लगा देते हैं. आकाश ने भी आवेश में उस की हां में हां मिला दी.

16 नवंबर की शाम को संजू खाना खा कर घर से निकला तो उसे निकलता देख कर गुड्डू उस के पास आ गया और बातोंबातों में उसे गांव के बाहर सेठपाल के खेत पर ले गया. वहां आकाश पहले से मौजूद था. दोनों ने मिल कर संजू को दबोच लिया और हाथों से गला दबा कर उस की हत्या कर दी. गुड्डू ने संजू के पैंट की जेब से उस का मोबाइल निकाल लिया. फिर संजू की लाश को पराली के ढेर में दबा दिया. लेकिन दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ ही गए. आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों हत्याभियुक्तों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Madhya Pradesh Crime: पत्नी की साजिश – प्रेमी संग मिलकर पति की बेरहमी से हत्या

Madhya Pradesh Crime: मध्य प्रदेश की संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर का उपनगरीय इलाका रांझी रक्षा मंत्रालय की फैक्ट्रियों के लिए जाना जाता है. यहां पर गन कैरेज, आर्डिनैंस, व्हीकल और ग्रे आयरन फाउंडी में सेना के उपयोग में आने वाले गोलाबारूद, टैंक और भारी वाहन बनाए जाते हैं. ग्रे आयरन फाउंडी के गेट नंबर 2 के पास ही रांझी के रिछाई अखाड़ा मोहल्ले में 40 साल का सोनू ठाकुर अपनी 28 साल की पत्नी नीतू और 2 बेटियों के साथ रहता था. मूलरूप से दामोह जिले के हिनौता गांव का रहने वाला सोनू परिवार में 4 भाईबहनों में सब से बड़ा था. शादी के पहले सोनू अपने खर्च के लिए अपने मातापिता की कमाई पर आश्रित था. लेकिन शादी होते ही उसे अहसास हो गया था कि उसे जल्द ही कोई कामधंधा शुरू कर देना चाहिए.

अपनी और पत्नी की जरूरतों को पूरा करने के लिए वह गांव में मेहनतमजदूरी का काम करने लगा, मगर गांव में मिलने वाले मेहनताने से वह पत्नी को खुश नहीं रख पा रहा था. गांव में एक छोटे से घर में उस का पूरा परिवार रहता था. जहां पर वे एकदूसरे से ढंग से बात भी नहीं कर पाते थे. रात को एक छोटी सी कोठरी में सोते समय दोनों अपने मन की बातें एकदूजे से नहीं कर पाते थे. यह बात नीतू को बहुत अखरती थी. रात को जब घर के सभी लोग सो जाते, तब उन्हें एकदूसरे का साथ मिलता था. इस बात का उलाहना दे कर अकसर ही नीतू सोनू से कहती थी कि वह कहीं अलग घर ले कर क्यों नहीं रहते. तब सोनू उसे समझा देता कि अभी हमारी नईनई शादी हुई है. अभी परिवार से अलग रहेंगे तो घर वालों को अच्छा नहीं लगेगा. कुछ महीनों के बाद वह अपना कामधंधा जमा कर अलग रहने लगेगा. जब शादी को साल भर का समय हो गया तो एक रात नीतू ने ही सोनू को सलाह देते हुए कहा, ‘‘क्यों न हम लोग गांव से दूर शहर जा कर कुछ कामधंधा कर लें.’’

सोनू को पत्नी की सलाह पसंद आई. सोनू भी सोचने लगा कि घर के लोगों की कमाई से कब तक अपना और बीवी का पेट भरेगा. जबलपुर शहर में हिनौता गांव के कुछ लड़के काम करते थे. सोनू ने उन के घर वालों से मोबाइल नंबर ले कर बातचीत की तो उन्होंने बताया कि उसे भी जबलपुर में आसानी से काम मिल जाएगा. शादी होने के साल भर बाद ही सोनू बीवी के साथ काम की तलाश में जबलपुर आ गया था. रांझी के अखाड़ा मोहल्ले में वे एक किराए की कोठरी में रहने लगे. नीतू सिलाईकढ़ाई का काम करने लगी और सोनू को यहां के बड़ा फुहारा में घमंडी चौक पर एक कपड़े की दुकान में सेल्समैन का काम मिल गया. जबलपुर आए हुए सोनू को करीब 5 साल हो गए थे. उन्होंने धीरेधीरे तिनकातिनका जोड़ कर एक छोटा सा घर बना लिया था.

इन सालों में नीतू 2 बेटियों की मां बन चुकी थी. सोनू और नीतू की गृहस्थी की गाड़ी हंसीखुशी पटरी पर चल रही थी, मगर एक रौंग नंबर की काल ने उन के जीवन में जहर घोल दिया. 2020 के जनवरी महीने की बात है. दोपहर का वक्त था. घर के कामकाज से फुरसत पा कर नीतू मोबाइल फोन में यूट्यूब पर वीडियो देख रही थी. तभी उस के मोबाइल फोन की रिंग बज उठी. नीतू ने जैसे ही काल रिसीव की तो दूसरी तरफ से आवाज आई, ‘‘हैलो, मैं राजू बोल रहा हूं.’’

‘‘कौन राजू? मैं ने आप को पहचाना नहीं.’’

‘‘जी, मैं गाजीपुर से राजू राजभर बोल रहा हूं. कंप्यूटर ट्रेडिंग का काम करता हूं. क्या मेरी बात निशा वर्मा से हो रही है?’’

‘‘जी नहीं, आप ने गलत नंबर लगाया है.’’ नीतू ने बेतकल्लुफी से जबाब देते हुए कहा.

‘‘जी सौरी, मुझे निशा वर्मा के घर प्रिंटर भिजवाना था. गलती से आप का नंबर लग गया. वैसे आप कहां से बोल रही हैं?’’ राजू ने विनम्रता के साथ पूछा.

‘‘मैं तो जबलपुर से बोल रही हूं.’’

‘‘आप की आवाज तो बड़ी प्यारी है. क्या मैं आप का नाम जान सकता हूं?’’ वह बोला.

‘‘मेरा नाम नीतू ठाकुर है.’’ नीतू ने कहा.

‘‘नीतूजी, आप से बात कर के बहुत अच्छा लगा.’’

‘‘जी शुक्रिया.’’

इतना कह कर नीतू ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया, मगर नीतू को भी राजू नाम के इस लड़के का इस तरह से बात करना अच्छा लगा. कुछ ही दिनों के बाद राजू नीतू के मोबाइल पर काल करने लगा. रौंग नंबर से शुरू हुआ बातचीत का सिललिला धीरेधीरे दोस्ती में बदल गया. अब तो नीतू भी हर दिन राजू के फोन आने का इंतजार करने लगी. एकदूसरे को वीडियो काल कर के घंटों उन की बातचीत होने लगी. तीखे नैननक्श वाली नीतू ने हायर सेकेंडरी तक पढ़ाई की थी. घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने का उसे बड़ा शौक था. उस ने शादी के पहले जो रंगीन ख्वाब देखे थे, वे सोनू से शादी कर के बिखर चुके थे. थोड़ी सी पगार में घरगृहस्थी चलाने वाला उस का पति सोनू दिन भर काम में लगा रहता और नीतू घर की चारदीवारी में कैद हो कर रह गई थी.

यही वजह रही कि नीतू हर समय मोबाइल फोन की दुनिया में अपने सपनों की उड़ान भरती रहती. पति के काम पर जाने के बाद अकसर वह खाली समय में मोबाइल में सोशल मीडिया साइट पर व्यस्त रहती थी. मोबाइल फोन के जरिए राजू और नीतू का प्यार जब परवान चढ़ने लगा तो वे दोनों एकदूसरे से मिलने को बेताब रहने लगे. नीतू राजू के प्यार में इस कदर खो चुकी थी कि बारबार राजू से जबलपुर आ कर मिलने की बात करती. प्यार की आग राजू के सीने में भी धधक रही थी. राजू नीतू को भरोसा दिलाता कि वह जल्द ही जबलपुर आ कर उस से मिलेगा. इसी बीच मार्च महीने में कोरोना महामारी के कारण 25 मार्च को लौकडाउन लग गया. लौकडाउन में भी मोबाइल फोन पर नीतू और राजू की बातें होती रहीं.

नीतू का पति सोनू घर के बाहर गली में जब भी टहलने जाता, नीतू राजू को काल कर लेती. जैसेजैसे लौकडाउन में ढील मिल रही थी, राजू जबलपुर जाने की प्लानिंग करने लगा था. राजू जिस कंपनी के लिए कंप्यूटर ट्रेडिंग का काम करता था, उस का कारोबार जबलपुर शहर में भी था. किसी तरह कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर से बात कर के उस ने जबलपुर की कंपनी में काम करने का जुगाड़ कर लिया. जैसे ही कंपनी की तरफ से उसे जबलपुर में काम करने का मौका मिला तो उस के मन की मुराद पूरी हो गई. एक ही शहर में कामधंधा और प्यार उसे आम के आम और गुठलियों के दाम जैसे लगा. इसी हसरत में 25 साल का कुंवारा राजू नीतू की चाहत में सितंबर 2020 में अपने गांव जफरपुर, गाजीपुर से जबलपुर आ गया .

जिस दिन राजू जबलपुर आ कर नीतू से मिला तो नीतू की खुशी का ठिकाना न रहा. राजू ने जैसे ही नीतू को करीब से देखा तो बस देखता ही रह गया.

‘‘वाकई तुम बहुत खूबसूरत हो,’’ जैसे ही राजू ने नीतू से कहा तो वह शरमा कर बोली, ‘‘मेरी तारीफ बाद में करना. मैं चाय बना कर लाती हूं.’’

इतना कह कर नीतू राजू के लिए चाय बनाने जैसे ही किचन में गई, राजू अपने आप को रोक नहीं सका. पीछे से वह भी किचन में पहुंच गया और नीतू को अपनी बांहों में भर लिया. उस के गालों पर चुंबन देते हुए बोला, ‘‘तुम्हें पाने को कितना इंतजार करना पड़ा.’’

नीतू ने अपने आप को छुड़ाते हुए नखरे दिखा कर कहा, ‘‘थोड़ा सब्र और करो, धीरज का फल मीठा होता है.’’

नीतू राजू को चाय का कप पकड़ा कर बाहर आ गई. उस ने बाहर आ कर देखा उस की दोनों बेटियां आंगन में किसी खेल में मस्त थीं. इसी मौके का फायदा उठा कर नीतू ने राजू के पास जा कर कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और राजू के सीने से लग गई. राजू ने नीतू की कमर में हाथ डाला और उसे बिस्तर पर ले गया. 8 महीने से मोबाइल पर चल रहे उन के प्यार के हसीन ख्वाब साकार हो रहे थे. उस दिन दिल खोल कर दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कर लीं. नीतू ने उस की खूब खातिरदारी कर ढेर सारी बातें कीं. राजू ने जब उसे बताया कि उस ने अपना ट्रांसफर जबलपुर करा लिया है. इसलिए अब यहीं रहेगा. तब नीतू बड़ी खुश हुई.

इतना ही नहीं, उस ने राजू को अपना रिश्तेदार बताते हुए अपने मोहल्ले में रहने वाले एक मकान मालिक के खाली कमरे को भाड़े पर उसे दिला दिया. उस के खानेपीने की जिम्मेदारी वह खुद ही करने लगी. नीतू ने राजू से मिलने का एक तरीका खोज लिया था. उस ने पति सोनू से बात कर उसे इस बात के लिए राजी कर लिया था कि ढाई हजार रुपए महीने में राजू को दोनों टाइम खाना बना कर देगी. सोनू ने यह सोच कर हामी भर दी कि थोड़ी सी मेहनत से बैठे ठाले ढाई हजार रुपए महीने की आमदनी बढ़ जाएगी, जो उस की बेटियों की पढ़ाईलिखाई के काम आएगी. सोनू का यही निर्णय उस के लिए घातक साबित हुआ. नीतू को तो बस अपने प्रेमी से मिलने का बहाना चाहिए था. अब वह बेरोकटोक राजू के लिए खाने का टिफिन देने के बहाने उस से मिलनेजुलने लगी थी.

सोनू सुबह 9 बजे ही घर से निकल जाता और दिन भर कपड़े की दुकान में काम कर के थकाहारा रात 9 बजे के बाद ही अपने घर पहुंचता था. नीतू और उस के पति सोनू की उम्र में 12 साल का फासला था. शायद यही वजह थी कि नीतू की शारीरिक जरूरतों को वह पूरा नहीं कर पाता था. इसी का फायदा उठाते हुए नीतू अपने से कम उम्र के गठीले नौजवान राजू के प्यार में पागल हो गई. दोनों का प्यार जिस्मानी तौर पर भी एकदूसरे की जरूरतों को पूरा करने लगा था. सोनू की गैरमौजूदगी में राजू नीतू को घुमानेफिराने, रेस्टोरेंट ले जा कर खूब पैसा लुटाता था. जब भी राजू को मौका मिलता वह नीतू के घर भी आ धमकता. नीतू भी अपनी बेटियों तनु और गुड्डी को काम के बहाने घर से बाहर भेज देती और दोनों जी भर कर अपनी हसरतें पूरी करते.

पति के होते गैरमर्द से संबंध बनाने वाली नीतू को न तो अपनी बेटियों और पति की सुध थी और न ही समाज का डर. प्यार और वासना का यह खेल रोज ही खेला जाने लगा था. कभी राजू के घर तो कभी नीतू के घर. 29 नवंबर, 2020 की सुबह के साढ़े 7 बजे का समय था. जबलपुर के रांझी थाने में फोन पर सूचना मिली कि ग्रे आयरन फाउंडी जीआईएफ के गेट नंबर 2 के पास की नाली में कंबल में लिपटी एक लाश पड़ी है. खबर मिलते ही टीआई आर.के. मालवीय ने पुलिस के आला अधिकारियों को सूचना दी और वह पुलिस टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. घटनास्थल पर आसपास के लोगों की भीड़ मौजूद थी. लोगों ने लाश की शिनाख्त कर बताया कि यह पास में ही रहने वाले सोनू ठाकुर की है.

सोनू की गरदन और बाएं हाथ की नस कटी हुई थी. घटनास्थल के पास ही सोनू की पत्नी अपनी दोनों बेटियों को सीने से चिपकाए चीखचीख कर रो रही थी. जब पुलिस ने सोनू के बारे में नीतू से पूछताछ की तो उस ने बताया कि रात को साढ़े 10 बजे यह घर से घूमने की बात कह कर निकले थे. जब देर रात तक नहीं लौटे तो इन्हें फोन किया. फोन स्विच्ड औफ बता रहा था. नीतू से प्रारंभिक पूछताछ करने के बाद पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए मैडिकल कालेज भेज दी और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर मामले की जांच शुरू कर दी. जांच के दौरान पुलिस टीम के ट्रेनी आईपीएस सिटी अमित कुमार, टीआई आर.के. मालवीय और फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और पाया कि जीआईएफ गेट नंबर 2 के पास की जिस नाली में सोनू की लाश मिली थी, वहां खून के धब्बों के निशान थे.

सड़क पर मिले खून के निशान का मुआयना करतेकरते पुलिस नाले से ले कर सोनू के घर तक पहुंच गई. जांच टीम को सोनू के घर में भी खून के धब्बे मिले. जबकि नीतू सोनू के रात साढ़े 10 बजे घर से बाहर जाने की बात कर रही थी. पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि नीतू के मोहल्ले में रहने वाले एक युवक राजू से संबंध थे. पुलिस के इसी संदेह की सुई नीतू की तरफ घूमी तो पुलिस ने नीतू को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ की. पहले नीतू पुलिस को गोलमोल जबाब दे कर पल्ला झाड़ती रही. लेकिन जब पुलिस टीम की महिला आरक्षक ने उस से सख्ती के साथ पूछताछ की तो जल्द ही उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया.

नीतू के बयान के आधार पर रांझी पुलिस ने राजू को भी हिरासत में ले कर पूछताछ की. पुलिस पूछताछ में नीतू और राजू ने पुलिस को जो कहानी बताई, वह नाजायज संबंधों की ऐसी कहानी निकली जो दोनों को गुनाह के रास्ते पर ले जाने को मजबूर कर गई. कहते हैं कि इश्क और मुश्क छिपाए नहीं छिपते. रौंग नंबर फोन काल से शुरू हुए नीतू और राजू के प्रेम संबंधों की जानकारी धीरेधीरे पूरे मोहल्ले में चर्चा का विषय बन चुकी थी. नीतू के द्वारा फोन पर की जाने वाली लंबी बातें सोनू के मन में शक की जड़ें जमा चुकी थीं. मगर उसे यह उम्मीद नहीं थी कि जिस्मानी भूख मिटाने के लिए उस की बीवी नीतू किसी गैरमर्द से नाजायज संबधों की कहानी लिख रही थी.

शक होने पर सोनू नीतू पर नजर रखने लगा. एक दिन सोनू ने नीतू को मोबाइल फोन पर किसी से अमर्यादित बातें करते हुए देख लिया तो इस बात को ले कर दोनों में विवाद हो गया. अपनी कमजोरी छिपाने के लिए अकसर नीतू रोनेधोने का नाटक करने लगती और सोनू से कहती कि वह उस के चरित्र पर शक कर रहा है. कहते हैं कि चालाक औरतों के आंसू भी किसी हथियार से कम नहीं होते. सोनू नीतू के आंसुओं के आगे हार मान जाता था. राजू नीतू को रोजरोज पैसे और तोहफे ला कर देता और सोनू की गैरमौजूदगी में उसे और उस की बच्चियों को घुमाने ले जाता. नीतू और राजू के नाजायज संबंधों का यह खेल ज्यादा दिनों तक समाज की नजरों से छिप नहीं सका.

दोनों के प्रेम संबंधों की चर्चा मोहल्ले में खुलेआम होने लगी थी. मोहल्ले के कुछ लोगों ने भी सोनू को बताया कि उस की गैरमौजूदगी में राजू अकसर उस के घर आताजाता है. सोनू को अब इस बात का पक्का यकीन हो गया था कि पत्नी उस के साथ बेवफाई कर रही है. इस बात से सोनू मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था. पतिपत्नी के रिश्ते में विश्वासरूपी डोर टूट जाए तो जिंदगी नरक बन जाती है. एक दिन सोनू को अपनी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी. इसलिए अपने सेठ से बोल कर वह दोपहर के वक्त अपने घर आ गया. उस की बेटियां खिलौनों के साथ खेल रही थीं. उस ने कमरे के पास जा कर धीरे से जैसे ही दरवाजा खोला, अंदर का दृश्य देखते ही उस के होश उड़ गए. बिस्तर पर नीतू अपने प्रेमी के साथ रंगरलियां मना रही थी.

यह देखते ही उस की आंखों में खून सवार हो गया. वह जोर से पत्नी पर चीखा, ‘‘हरामजादी, मेरी गैरमौजूदगी में आशिक के साथ ये गुल खिला रही है.’’

सोनू की चीख सुन कर दोनों हड़बड़ा कर कर अलग हो गए. राजू अपने कपड़े समेट कर भाग खड़ा हुआ और नीतू अपराधबोध से नजरें नीची किए खड़ी थी. उस ने पति से माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का वादा किया. सोनू ने भी उसे माफ कर दिया. नीतू कुछ दिन तो ठीक रही, लेकिन उस से प्रेमी की जुदाई बरदाश्त नहीं हो रही थी. इसलिए वह उस से फिर मिलनेजुलने लगी. कहा जाता है कि आंखों देखी मक्खी खाई नहीं जाती मगर सोनू सब कुछ जान कर भी पत्नी की वेवफाई को बरदाश्त कर रहा था. कई बार उस के मन में विचार आता कि वेवफा पत्नी को हमेशाहमेशा के लिए छोड़ कर कहीं चला जाए, परंतु अपनी मासूम बेटियों के भविष्य की खातिर वह चुप हो कर बैठ जाता.

नीतू भी अपने पति की चुप्पी और मजबूरियों का जम कर फायदा उठा रही थी. सोनू नीतू को जितना समझाता, उतना ही वह राजू से दूरियां बनाने की बजाय नजदीकियां बढ़ा रही थी. इस बात को ले कर पतिपत्नी के बीच रोज ही विवाद होने लगा था. रोजरोज पत्नी से विवाद होने पर सोनू को कुछ नहीं सूझ रहा था. वैसे तो सोनू ने जीआईएफ गेट नंबर 2 के सामने खुद का घर बना लिया था. मगर नीतू के बहके कदमों को रोकने के लिए सोनू ने बहुत सोचविचार के बाद यह फैसला कर लिया था कि इसी रविवार कुछ दिनों के लिए वह बीवीबच्चों को ले कर अपने गांव चला जाएगा और गांव में ही कुछ कामधंधा करेगा. उसे भरोसा था कि कुछ दिन नीतू राजू से दूर रहेगी तो प्यार का यह रोग भी दूर हो जाएगा. और नीतू अपनी बेटियों की परवरिश में सब कुछ भूल कर सही रास्ते पर आ जाएगी. वापस गांव लौटने के अपने इस फैसले की जानकारी उस ने नीतू को भी दे दी थी.

इधर नीतू सोनू के गांव लौटने के फैसले से परेशान रहने लगी थी. नीतू को लगने लगा था कि यदि गांव चले गए तो फिर अपने प्रेमी राजू से मिलने को तरस जाएगी. जब नीतू ने राजू से परिवार सहित गांव वापस लौटने की बात कही तो राजू के माथे पर भी चिंता की लकीरें उभर आईं. उसे लगा कि जिस नीतू की खातिर वह अपने गांव से इतनी दूर आ गया, वही अब उस की नजरों से दूर चली जाएगी. राजू की प्लानिंग नीतू के साथ शादी कर के घर बसाने की थी और राजू के इस निर्णय में नीतू की भी सहमति थी. पहले दोनों के मन में विचार आया कि घर से भाग कर शादी कर लें और सुकून से अपनी जिंदगी गुजारें, मगर अपनी मासूम बेटियों की खातिर नीतू कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई.

राजू का भी जबलपुर शहर में कामधंधा ठीकठाक चल रहा था. उसे पता था कि नई जगह कामधंधा जमाने में कितनी मुश्किल होती है. वह अपने गांव भी नहीं लौटना चाहता था, क्योंकि उसे पता था घर वाले बालबच्चों वाली विवाहिता नीतू को इतनी आसानी से नहीं अपनाएंगे. जैसेजैसे रविवार का दिन नजदीक आ रहा था, नीतू और राजू की चिंता बढ़ती जा रही थी. राजू को पता था कि रविवार के पहले यदि इस समस्या का कोई हल नहीं निकला तो सोनू नीतू को ले कर अपने गांव चला जाएगा. राजू नीतू को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता था. सोनू उन के प्यार के रास्ते में कांटा बन कर चुभ रहा था. इसी ऊहापोह में दोनों ने सोनू को अपने प्यार की राह से दूर करने का निर्णय ले लिया था.

एकदूसरे के लिए मर मिटने की कसमें खाने वाला यह प्रेमी जोड़ा जुदा होने से बचने के लिए कुछ भी कर गुजरने पर आमादा हो गया था. वासना के इस घिनौने खेल में अंधे हो चुके ये प्रेमी अपने प्यार को अंजाम तक पहुंचाने के लिए बड़ी से बड़ी कुरबानी देने का मन बना चुके थे. आखिरकार उन्होंने तय कर लिया कि अपनी राह के कांटे को वे निकाल फेंकेंगे. राजू और नीतू ने सोनू को हमेशा के लिए उन की जिंदगी से दूर करने का खौफनाक प्लान तैयार कर लिया था. उन्होंने सोच लिया लिया था कि किसी भी तरह सोनू को जान से मार कर सदासदा के लिए एकदूसरे के हो जाएंगे. घटना के दिन सोनू दिन भर घर से बाहर नहीं निकला. वह सोनू की हत्या कर लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाता रहा.

नीतू पूरे दिन सब्जी काटने वाले चाकू की धार तेज करने में लगी रही. नीतू ने तेज धार वाले चाकू को अपने तकिए के नीचे छिपा कर रख लिया था. 28 नवंबर, 2020 की रात रोज की तरह सोनू अपने घर आया तो उस ने दूसरे दिन बस से अपने गांव वापस लौटने की चर्चा नीतू से की तो नीतू ने भी हामी भर दी. यह देख कर सोनू खुश हो गया. उसे लगा कि नीतू को अपने किए पर पछतावा है और गांव चल कर उन की जिंदगी फिर से खुशहाल हो जाएगी. खाना खाने के बाद कुछ समय वह अपने बेटियों को दुलारता रहा और उस के बाद टहलने के लिए घर से बाहर आ गया. साढ़े 10 बजे वापस आ कर वह बिस्तर पर लेटेलेटे नीतू से प्यारभरी बातें करता रहा.

अपनी दोनों बेटियों को सुलाने के बाद नीतू भी सोनू के बिस्तर पर आ कर प्यार का नाटक करने लगी. दोनों एकदूसरे के आगोश में समा गए और जैसे ही सोनू निढाल हो कर सो गया नीतू आगे की योजना बनाने में लग गई. नीतू की आंखों से उस रात नींद कोसों दूर थी. उस के दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. उस ने रात करीब एक बजे राजू को फोन कर के अपने घर बुला लिया. राजू के आते ही योजना के मुताबिक नीतू ने गहरी नींद सो रहे सोनू के दोनों पैर पकड़ लिए और राजू ने उस की छाती पर बैठ कर चाकू से उस का गला रेत दिया और एक हाथ की कलाई भी काट दी. कुछ देर छटपटाने के बाद सोनू निढाल हो कर एक तरफ लुढ़क गया. अब दोनों ही सोनू की लाश को ठिकाने लगाने की सोचने लगे. उन्होंने बिस्तर पर गिरे खून के दागधब्बों को पोंछा. फिर लाश एक कंबल में लपेट ली.

इसी बीच नीतू ने घर का दरवाजा खोल कर बाहर का मुआयना किया और मौका देखते ही वे दोनों लाश को ग्रे आयरन फाउंडी के गेट नंबर 2 के पास बनी नाली में फेंक आए. लाश को ठिकाने लगाने के बाद दोनों अपनेअपने घर चले गए और अपने कपड़ों पर लगे खून के दाग साफ करते रहे. दूसरे दिन सुबह नीतू ने घर पर रोनापीटना शुरू कर दिया. चीखपुकार सुन कर मोहल्ले के लोग उस के घर जमा होने लगे तो नीतू ने बताया कि उस के पति रात से घर नहीं लौटे हैं और उन का मोबाइल भी बंद है. सोनू के गायब होने की बात सुन कर मोहल्ले के लोग उस की खोज में लगे हुए थे, तभी किसी ने आ कर बताया कि ग्रे आयरन फाउंडी गेट नंबर 2 के पास सोनू की लाश एक कंबल में लिपटी पड़ी है.

मोहल्ले के लोगों के साथ नीतू भी नाले के पास पहुंच गई. सोनू की लाश देख कर चीखचीख कर घडि़याली आंसू बहाने लगी थी. सोनू की लाश मिलने की खबर से नीतू का प्रेमी राजू भी वहां आ गया था. सोनू की मौत को लेकर मोहल्ले के लोग नीतू के प्रेमी राजू पर भी शक कर रहे थे. इसी बीच वहां पर रांझी थाने की पुलिस ने आ कर कुछ ही घंटों में हत्या की गुत्थी सुलझा दी. रांझी थाना पुलिस ने 24 घंटे में ही सेल्समैन सोनू सिंह हत्याकांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा और ट्रेनी आईपीएस अमित कुमार ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर मामले का खुलासा किया. दोनों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, खून से सने कपड़े, मृतक सोनू और आरोपी नीतू और राजू के 3 मोबाइल, एटीएम कार्ड आदि जब्त कर लिए गए.

मृतक सोनू के घर वालों के जबलपुर पहुंचने से पहले नीतू हवालात के अंदर थी, इस वजह से दोनों बेटियों तनु और गुड्डी को पड़ोसियों की देखरेख में रखवाया गया. बाद में गांव से उस के परिजनों के आते ही उन के सुपुर्द किया गया. कथा लिखे जाने तक नीतू और उस का प्रेमी राजू जेल में थे. अपने पति से वेवफाई कर मौजमस्ती की खातिर बनाए गए नाजायज संबंधों की वजह से नीतू ने अपनी जिंदगी के साथ मासूम बेटियों की जिंदगी भी बेनूर कर दी. कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Best Story In Hindi: जुल्म की सजा – समरथ सिंह की कारगुजारी

Best Story In Hindi: उत्तर प्रदेश के बदायूं, शाहजहांपुर और फर्रुखाबाद जिलों की सीमाओं को छूता, रामगंगा नदी के किनारे पर बसा हुआ गांव पिरथीपुर यों तो बदायूं जिले का अंग है, पर जिले तक इस की पहुंच उतनी ही मुश्किल है, जितनी मुश्किल शाहजहांपुर और फर्रुखाबाद जिला हैडक्वार्टर तक की है.

कभी इस गांव की दक्षिण दिशा में बहने वाली रामगंगा ने जब साल 1917 में कटान किया और नदी की धार पिरथीपुर के उत्तर जा पहुंची, तो पिरथीपुर बदायूं जिले से पूरी तरह कट गया. गांव के लोगों द्वारा नदी पार करने के लिए गांव के पूरब और पश्चिम में 10-10 कोस तक कोई पुल नहीं था, इसलिए उन की दुनिया पिरथीपुर और आसपास के गांवों तक ही सिमटी थी, जिस में 3 किलोमीटर पर एक प्राइमरी स्कूल, 5 किलोमीटर पर एक पुलिस चौकी और हफ्ते में 2 दिन लगने वाला बाजार था.

सड़क, बिजली और अस्पताल पिरथीपुर वालों के लिए दूसरी दुनिया के शब्द थे. सरकारी अमला भी इस गांव में सालों तक नहीं आता था.

देश और प्रदेश में चाहे जिस राजनीतिक पार्टी की सरकार हो, पर पिरथीपुर में तो समरथ सिंह का ही राज चलता था. आम चुनाव के दिनों में राजनीतिक पार्टियों के जो नुमाइंदे पिरथीपुर गांव तक पहुंचने की हिम्मत जुटा पाते थे, वे भी समरथ सिंह को ही अपनी पार्टी का झंडा दे कर और वोट दिलाने की अपील कर के लौट जाते थे, क्योंकि वे जानते थे कि पूरे गांव के वोट उसी को मिलेंगे, जिस की ओर ठाकुर समरथ सिंह इशारा कर देंगे.

पिरथीपुर गांव की ज्यादातर जमीन रेतीली और कम उपजाऊ थी. समरथ सिंह ने उपजाऊ जमीनें चकबंदी में अपने नाम करवा ली थीं. जो कम उपजाऊ जमीन दूसरे गांव वालों के नाम थी, उस का भी ज्यादातर भाग समरथ सिंह के पास गिरवी रखा था.

समरथ सिंह के पास साहूकारी का लाइसैंस था और गांव का कोई बाशिंदा ऐसा नहीं था, जिस ने सारे कागजात पर अपने दस्तखत कर के या अंगूठा लगा कर समरथ सिंह के हवाले न कर दिया हो. इस तरह सभी गांव वालों की गरदनें समरथ सिंह के मजबूत हाथों में थीं.

पिरथीपुर गांव में समरथ सिंह से आंख मिला कर बात करने की हिम्मत किसी में भी नहीं थी. पासपड़ोस के ज्यादातर लोग भी समरथ सिंह के ही कर्जदार थे.

समरथ सिंह की पहुंच शासन तक थी. क्षेत्र के विधायक और सांसद से ले कर उपजिलाधिकारी तक पहुंच रखने वाले समरथ सिंह के खिलाफ जाने की हिम्मत पुलिस वाले भी नहीं करते थे.

समरथ सिंह के 3 बेटे थे. तीनों बेटों की शादी कर के उन्हें 10-10 एकड़ जमीन और रहने लायक अलग मकान दे कर समरथ सिंह ने उन्हें अपने राजपाट से दूर कर दिया था. उन की अपनी कोठी में पत्नी सीता देवी और बेटी गरिमा रहते थे.

गरिमा समरथ सिंह की आखिरी औलाद थी. वह अपने पिता की बहुत दुलारी थी. पूरे पिरथीपुर में ठाकुर समरथ सिंह से कोई बेखौफ था, तो वह गरिमा ही थी.

सीता देवी को समरथ सिंह ने उन के बैडरूम से ले कर रसोईघर तक सिमटा दिया था. घर में उन का दखल भी रसोई और बेटी तक ही था. इस के आगे की बात करना तो दूर, सोचना भी उन के लिए बैन था.

कोठी के पश्चिमी भाग के एक कमरे में समरथ सिंह सोते थे और उसी कमरे में वे जमींदारी, साहूकारी, नेतागीरी व दादागीरी के काम चलाते थे. वहां जाने की इजाजत सीता देवी को भी नहीं थी.

समरथ सरकार के नाम से पूरे पिरथीपुर में मशहूर समरथ सिंह की कोठी में बाहरी लोगों का आनाजाना पश्चिमी दरवाजे से ही होता था. इस दरवाजे से बरामदे में होते हुए उन के दफ्तर और बैडरूम तक पहुंचा जा सकता था.

कोठी के पश्चिमी भाग में दखल देना परिवार वालों के लिए ही नहीं, बल्कि नौकरचाकरों के लिए भी मना था.

अपने पिता की दुलारी गरिमा बचपन से ही कोठी के उस भाग में दौड़तीखेलती रही थी, इसलिए बहुत टोकाटाकी के बाद भी वह कभीकभार उधर चली ही जाती थी.

गांव की हर नई बहू को ‘समरथ सरकार’ से आशीर्वाद लेने जाने की प्रथा थी. कोठी के इसी पश्चिमी हिस्से में समरथ सिंह जितने दिन चाहते, उसे आशीर्वाद देते थे और जब उन का जी भर जाता था, तो उपहार के तौर पर गहने दे कर उसे पश्चिमी दरवाजे से निकाल कर उस के घर पहुंचा दिया जाता था.

आतेजाते हुए कभी गांव की किसी बहूबेटी पर समरथ सिंह की नजर पड़ जाती, तो उसे भी कोठी देखने का न्योता भिजवा देते, जिसे पा कर उसे कोठी में हर हाल में आना ही होता था.

समरथ सिंह की इमेज भले ही कठोर और बेरहम रहनुमा की थी, पर वे दयालु भी कम नहीं थे. खुशीखुशी आशीर्वाद लेने वालों पर उन की कृपा बरसती थी. अनेक औरतें जबतब उन का आशीर्वाद लेने के लिए कोठी का पश्चिमी दरवाजा खटखटाती रहती थीं, ताकि उन के

पति को फसल उपजाने के लिए अच्छी जमीन मिल सके, दवा व इलाज और शादीब्याह के खर्च वगैरह को पूरा करने हेतु नकद रुपए मिल सकें.

लेकिन बात न मानने से समरथ सिंह को सख्त चिढ़ थी. राधे ने अपनी बहू को आशीर्वाद लेने के लिए कोठी पर भेजने से मना कर दिया था. उस की बहू को समरथ के आदमी रात के अंधेरे में घर से उठा ले गए और तीसरे दिन उस की लाश कुएं में तैरती मिली थी.

अपनी नईनवेली पत्नी की लाश देख कर राधे का बेटा सुनील अपना आपा खो बैठा और पूरे गांव के सामने समरथ सिंह पर हत्या का आरोप लगाते हुए गालियां बकने लगा.

2 घंटे के अंदर पुलिस उसे गांव से उठा ले गई और पत्नी की हत्या के आरोप में जेल भेज दिया. बाद में ठाकुर के आदमियों की गवाही पर उसे उम्रकैद की सजा हो गई.

राधे की पत्नी अपने एकलौते बेटे की यह हालत बरदाश्त न कर सकी और पागल हो गई. इस घटना से घबरा कर कई इज्जतदार परिवार पिरथीपुर गांव से भाग गए.

समरथ सिंह ने भी बचेखुचे लोगों से साफसाफ कह दिया कि पिरथीपुर में समरथ सिंह की मरजी ही चलेगी. जिसे उन की मरजी के मुताबिक जीने में एतराज हो, वह गांव छोड़ कर चला जाए. इसी में उस की भलाई है.

समरथ सिंह की बेटी गरिमा जब थोड़ी बड़ी हुई, तो समरथ सिंह ने उस का स्कूल जाना बंद करा दिया. अब वह दिनरात घर में ही रहती थी.

गरमी के मौसम में एक दिन दोपहर में उसे नींद नहीं आ रही थी. वह लेटेलेटे ऊब गई, तो अपने कमरे से बाहर निकल कर छत पर चली गई और टहलने लगी.

अचानक उसे कोठी के पश्चिमी दरवाजे पर कुछ आहट सुनाई दी. उस ने झांक कर देखा, तो दंग रह गई. समरथ सिंह का खास लठैत भरोसे एक औरत को ले कर आया था. कुछ देर बाद कोठी का पश्चिमी दरवाजा बंद हो गया और भरोसे दरवाजे के पास ही चारपाई डाल कर कोठी के बाहर सो गया.

गरिमा छत से उतर कर दबे पैर कोठी के बैन इलाके में चली गई. अपने पिता के बैडरूम की खिड़की के बंद दरवाजे के बीच से उस ने कमरे के अंदर झांका, तो दंग रह गई. उस के पिता नशे में धुत्त एक लड़की के कपड़े उतार रहे थे. वह लड़की सिसकते हुए कपड़े उतारे जाने का विरोध कर रही थी.

जबरन उस के सारे कपड़े उतार कर उन्होंने उस लड़की को किसी बच्चे की तरह अपनी बांहों में उठा कर चूमना शुरू कर दिया. फिर वे पलंग की ओर बढ़े और उसे पलंग पर लिटा कर किसी राक्षस की तरह उछल कर उस पर सवार हो गए.

गरिमा सांस रोके यह सब देखती रही और पिता का शरीर ढीला पड़ते ही दबे पैर वहां से निकल कर अपने कमरे में आ गई. उसे यह देख कर बहुत अच्छा लगा और बेचैनी भी महसूस हुई.

अब गरिमा दिनभर सोती और रात को अपने पिता की करतूत देखने के लिए बेचैन रहती.

अपने पिता की रासलीला देखदेख कर गरिमा भी काम की आग से भभक उठती थी.

एक दिन समरथ सिंह भरोसे को ले कर किसी काम से जिला हैडक्वार्टर गए हुए थे. दोपहर एकडेढ़ बजे उन का कारिंदा भूरे, जिस की उम्र तकरीबन 20 साल होगी, हलबैल ले कर आया.

बैलों को बांध कर वह पशुशाला के बाहर लगे नल पर नहाने लगा, तभी गरिमा की निगाह उस पर पड़ गई. वह देर तक उस की गठीली देह देखती रही.

जब भूरे कपड़े पहन कर अपने घर जाने लगा, तो गरिमा ने उसे बुलाया. भूरे कोठरी के दरवाजे पर आया, तो गरिमा ने उसे अपने साथ आने को कहा.

गरिमा को पता था कि उस की मां भोजन कर के आराम करने के लिए अपने कमरे में जा चुकी है.

गरिमा भूरे को ले कर कोठी के पश्चिमी दरवाजे की ओर बढ़ी, तो भूरे ठिठक कर खड़ा हो गया. गरिमा ने लपक कर उस का गरीबान पकड़ लिया और घसीटते हुए अपने पिता के कमरे की ओर ले जाने लगी.

भूरे कसाई के पीछेपीछे बूचड़खाने की ओर जाती हुई गाय के समान ही गरिमा के पीछेपीछे चल पड़ा.

पिता के कमरे में पहुंच कर गरिमा ने दरवाजा बंद कर लिया और भूरे को कपड़े उतारने का आदेश दिया. भूरे उस का आदेश सुन कर हैरान रह गया.

उसे चुप खड़ा देख कर गरिमा ने खूंटी पर टंगा हंटर उतार लिया और दांत पीसते हुए कहा, ‘‘अगर अपना भला चाहते हो, तो जैसा मैं कह रही हूं, वैसा ही चुपचाप करते जाओ.’’

भूरे ने अपने कपड़े उतार दिए, तो गरिमा ने अपने पिता की ही तरह उसे चूमनाचाटना शुरू कर दिया. फिर पलंग पर ढकेल कर अपने पिता की तरह उस पर सवार हो गई.

भूरे कहां तक खुद पर काबू रखता? वह गरिमा पर उसी तरह टूट पड़ा, जिस तरह समरथ सिंह अपने शिकार पर टूटते थे.

गरिमा ने कोठी के पश्चिमी दरवाजे से भूरे को इस हिदायत के साथ बाहर निकाल दिया कि कल फिर इसी समय कोठी के पश्चिमी दरवाजे पर आ जाए. साथ ही, यह धमकी भी दी कि अगर वह समय पर नहीं आया, तो उसकी शिकायत समरथ सिंह तक पहुंच जाएगी कि उस ने उन की बेटी के साथ जबरदस्ती की है.

भूरे के लिए एक ओर कुआं था, तो दूसरी ओर खाई. उस ने सोचा कि अगर वह गरिमा के कहे मुताबिक दोपहर में कोठी के अंदर गया, तो वह फिर अगले दिन आने को कहेगी और एक न एक दिन यह राज समरथ सिंह पर खुल जाएगा और तब उस की जान पर बन आएगी. मगर वह गरिमा का आदेश नहीं मानेगा, तो वह भूखी शेरनी उसे सजा दिलाने के लिए उस पर झूठा आरोप लगाएगी और उस दशा में भी उसे जान से हाथ धोना पड़ेगा.

मजबूरन भूरे न चाहते हुए भी अगले दिन तय समय पर कोठी के पश्चिमी दरवाजे पर हाजिर हो गया, जहां गरिमा उस का इंतजार करती मिली.

अब यह खेल रोज खेला जाने लगा. 6 महीने बीततेबीतते गरिमा पेट से हो गई. भूरे को जिस दिन इस बात का पता चला. वह रात में ही अपना पूरा परिवार ले कर पिरथीपुर से गायब हो गया.

गरिमा 3-4 महीने से ज्यादा यह राज छिपाए न रख सकी और शक होने पर जब सीता देवी ने उस से कड़ाई से पूछताछ की, तो उस ने अपनी मां के सामने पेट से होना मान लिया. फिर भी उस ने भूरे का नाम नहीं लिया.

सीता देवी ने नौकरानी से समरथ सिंह को बुलवाया और उन्हें गरिमा के पेट से होने की जानकारी दी, तो वे पागल हो उठे और सीता देवी को ही पीटने लगे. जब वे उन्हें पीटपीट कर थक गए, तो गरिमा को आवाज दी.

2-3 बार आवाज देने पर गरिमा डरते हुए समरथ सिंह के सामने आई. उन्होंने रिवाल्वर निकाल कर गरिमा को गोली मार दी.

कुछ देर तक समरथ सिंह बेटी की लाश के पास बैठे रहे, फिर सीता देवी से पानी मांग कर पिया. तभी फायर की आवाज सुन कर उन के तीनों बेटे और लठैत भरोसे दौड़े हुए आए.

समरथ सिंह ने उन्हें शांत रहने का इशारा किया, फिर जेब से रुपए निकाल कर बड़े बेटे को देते हुए कहा, ‘‘जल्दी से जल्दी कफन का इंतजाम करो और 2 लोगों को लकड़ी ले कर नदी किनारे भेजो. खुद भी वहीं पहुंचो.’’

समरथ सिंह के बेटे पिता की बात सुन कर आंसू पोंछते हुए भरोसे के साथ बाहर निकल गए.

एक घंटे के अंदर लाश ले कर वे लोग नदी किनारे पहुंचे. चिता के ऊपर बेटी को लिटा कर समरथ सिंह जैसे ही आग लगाने के लिए बढ़े, तभी वहां पुलिस आ गई और दारोगा ने उन्हें चिता में आग लगाने से रोक दिया.

यह सुनते ही समरथ सिंह गुस्से से आगबबूला हो गए और तकरीबन चीखते हुए बोले, ‘‘तुम अपनी हद से आगे बढ़ रहे हो दारोगा.’’

‘‘नहीं, मैं अपना फर्ज निभा रहा हूं. राधे ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है कि आप ने अपनी बेटी की गोली मार कर हत्या कर दी है, इसलिए पोस्टमार्टम कराए बिना लाश को जलाया नहीं जा सकता.’’

समरथ सिंह ने दारोगा के पीछे खड़े राधे को जलती आंखों से देखा. वे कुछ देर गंभीर चिंता में खड़े रहे, फिर रिवाल्वर से अपने सिर में गोली मार ली.

इस घटना को देख कर वहां मौजूद लोग सन्न रह गए, तभी पगली दौड़ती हुई आई और दम तोड़ रहे समरथ सिंह के पास घुटनों के बल बैठ कर ताली बजाते हुए बोली, ‘‘देखो ठाकुर, तेरे जुल्मों की सजा तेरे साथ तेरी औलाद को भी भोगनी पड़ी. खुद ही जला कर अपनी सोने की लंका राख कर ली.’’

जैसेजैसे समरथ सिंह की सांस धीमी पड़ रही थी, वहां मौजूद लोगों में गुलामी से छुटकारा पाने का एहसास तेज होता जा रहा था. Best Story In Hindi

Hindi Story: विश्वास – अमित के सुखी वैवाहिक जीवन में क्यों जहर घोलना चाहती थी अंजलि?

Hindi Story: करीब 3 साल बाद अंजलि और अमित की मुलाकात शौपिंग सैंटर में हुई तो दोनों एकदूसरे का हालचाल जानने के लिए एक रेस्तरां में जा कर बैठ गए.

यह जान कर कि अमित ने पिछले साल शादी कर ली है, अंजलि उसे छेड़ने से नहीं चूकी, ‘‘मैं बिना पूछे बता सकती हूं कि वह नौकरी नहीं करती है. मेरा अंदाजा ठीक है?’’

‘‘हां, वह घर में रह कर बहुत खुश है, अंजलि,’’ अमित ने मुसकराते हुए जवाब दिया.

‘‘और वह तुम से लड़तीझगड़ती भी नहीं है न, अमित?’’

‘‘ऐसा अजीब सा सवाल क्यों पूछ रही हो?’’ अमित के होंठों पर फैली मुसकराहट अचानक गायब हो गई.

‘‘तुम्हारी विचारधारा औरत को सदा दबा कर रखने वाली है, यह मैं अच्छी तरह से जानती हूं, माई डियर अमित.

‘‘अतीत के हिसाब से तो तुम शायद ठीक कह रही हो, पर अब मैं बदल गया हूं,’’ अमित ने जवाब दिया.

‘‘तुम्हारी बात पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा है.’’

‘‘तब सही बात शिखा से पूछ लेना.’’

‘‘कब मिलवा रहे हो शिखा से?’’

‘‘जब चाहो हमारे घर आ जाओ. मेरा यह कार्ड रखो. इस में घर का पता भी लिखा हुआ है,’’ अमित ने अपने पर्स में से एक विजिटिंग कार्ड निकाल कर उसे पकड़ा दिया.

‘‘मैं जल्दी आती हूं उस बेचारी से मिलने.’’

‘‘उस बेचारी की चिंता छोड़ो और अब अपनी सुनाओ. तुम्हारे पति तो पायलट हैं न?’’ अंजलि ने उस की टांग खींचना बंद नहीं किया तो अमित ने बातचीत का विषय बदल दिया.

‘‘हां, ऐसे पायलट हैं जिन्हें हवाईजहाज तो अच्छी तरह से उड़ाना आता है पर घरगृहस्थी चलाने के मामले में बिलकुल जीरो हैं,’’ अंजलि का स्वर कड़वा हो गया.

‘‘क्या तुम दोनों की ढंग से पटती नहीं है?’’ अमित की आवाज में सहानुभूति के भाव उभरे.

‘‘वे अजीब किस्म के इंसान हैं, अमित. मैं पास होती हूं तो मेरी कद्र नहीं करते. जब मैं नाराज हो कर मायके चली आती हूं तो मुझे वापस बुलाने के लिए खूब गिड़गिड़ाते हैं. तुम्हें अपने दिल की एक बात सचसच बताऊं?’’

‘‘हां, बताओ?’’

‘‘मुझे मनपसंद जीवनसाथी नहीं मिला है,’’ अंजलि ने गहरी सांस छोड़ी.

‘‘मैं तो हमेशा ही कहता था कि तुम्हें मुझ से अच्छा पति कभी नहीं मिलेगा पर तुम ने तब मेरी सुनी नहीं,’’ माहौल को हलका करने के इरादे से अमित ने मजाक किया.

‘‘मैं भी मानती हूं कि वह गलती तो मुझ से हो गई,’’ जवाब में अंजलि भी मुसकरा उठी.

‘‘पर तुम्हारी गलती के कारण मेरा तो बड़ा फायदा हो गया.’’

‘‘वह कैसे?’’

‘‘मुझे शिखा मिल गई. वह ऐसा हीरा है जिस ने मेरी जिंदगी को खुशहाल बना दिया है. तुम से शादी हो जाती तो आपस में लड़तेझगड़ते ही जिंदगी गुजरती,’’ अमित जोर से हंस पड़ा.

अमित की हंसी में अंजलि को अपना अपमान नजर आया. उसे लगा कि शिखा की यों तारीफ कर के वह उस की खिल्ली उड़ा रहा है.

उस ने मुंह बनाते हुए जवाब दिया, ‘‘मैं जब शिखा से मिलूंगी तभी इस बात का पता लगेगा कि वह कितनी खुश है तुम्हारे साथ. अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना तो आसान होता है.’’

‘‘मैं इतना अच्छा पति हूं कि मेरी तारीफ करतेकरते उस का गला सूख जाएगा,’’ अमित ने ठहाका लगाया तो वह अंजलि को जहर लगने लगा.

जलन और अपमान की वजह से अंजलि ज्यादा देर उस के साथ नहीं बैठी. जरूरी काम का बहाना बना उस ने कौफी पीते ही विदा ले ली.

‘अमित जैसे गुस्सैल और शक्की इंसान के साथ कोई लड़की खुश रह ही नहीं सकती. उस से शादी न करने का मेरा फैसला गलत नहीं था,’ ऐसे विचारों में उलझी अंजलि से ज्यादा इंतजार नहीं हुआ और 2 दिन बाद ही उस ने शिखा से उस के घर फोन कर बात की.

उस ने शिखा से कहा, ‘‘तुम मुझे जानतीं नहीं हो शिखा, मैं अमित के कालेज की फ्रैंड अंजलि बोल रही हूं…’’

‘‘मुझे परसों ही बताया है अमित ने आप के बारे में. क्या आप आज हमारे यहां आ रही हो?’’ शिखा का उत्साहित स्वर अंजलि को अजीब सा लगा.

‘‘तुम्हारे घर तो मैं अपने पति के साथ किसी दिन आऊंगी. लेकिन आज अगर संभव हो तो तुम मेरे साथ कौफी पीने किसी पास के रेस्तरां में आ जाओ.’’

‘‘इस वक्त तो मेरा निकलना जरा…’’

अंजलि ने उसे टोकते हुए कहा, ‘‘मैं तुम से कुछ ऐसी बातें करना चाहती हूं, जो तुम्हारे फायदे की साबित होंगी.’’

‘‘तब हम मिल लेते हैं पर अभी नहीं बल्कि शाम को.’’

‘‘कितने बजे और कहां?’’

‘‘जिस मौल में तुम अमित से मिली थीं, उस की बगल में जो आकाश रैस्टोरैंट है, उसी में हम सवा 5 बजे मिलते हैं.’’

‘‘शिखा, अमित को तुम हमारी होने वाली मुलाकात के बारे में अभी कुछ नहीं बताना. बाद में बताना या न बताना तुम्हारा फैसला होगा.’’

‘‘ओके.’’

‘‘तो सवा 5 बजे मिलते हैं,’’ यह कह कर अंजलि ने फोन काट दिया.

शाम को रेस्तरां में मुलाकात होने पर पहले कुछ देर दोनों ने एकदूसरे के बारे में हलकीफुलकी जानकारी ली फिर अंजलि ने अपने मुद्दे पर बात शुरू कर दी.

‘‘क्या तुम्हें अमित ने बताया कि वह मुझ से प्यार करता था और हम शादी कर के साथ जिंदगी बिताने के सपने देखते थे?’’

‘‘नहीं, यह तो कभी नहीं बताया,’’ शिखा बड़े ध्यान से उस के चेहरे के हावभाव को पढ़ रही थी.

‘‘तब तो यह भी मुझे ही बताना पड़ेगा कि हमारे अलगाव का क्या कारण था.’’

‘‘बताइए.’’

‘‘शिखा, कालेज में हम दोनों सदा साथसाथ रहते थे, इसलिए हमारे बीच प्यार का रिश्ता बहुत मजबूत बना रहा. फिर मैं ने औफिस जाना शुरू किया तो परिस्थितियां बदलीं और उन के साथ बदल गया अमित का व्यवहार.’’

‘‘किस तरह का बदलाव आया उन के व्यवहार में?’’

‘‘वह बहुत ज्यादा शक्की आदमी है, क्या तुम मेरे इस कथन से सहमत हो?’’

‘‘यह तो तुम ने बिलकुल ठीक कहा,’’ शिखा हौले से मुसकरा उठी.

‘‘तब तुम समझ सकती हो कि किसी भी युवक से जरा सा खुल कर हंसनेबोलने पर अमित मुझ से कितना झगड़ता होगा. तुम्हें भी उस की इस आदत के कारण मानसिक यातनाएं झेलनी पड़ी होंगी?’’

‘‘थोड़ी सी… शुरूशुरू में,’’ शिखा की मुसकराहट और गहरी हो गई.

‘‘और अब?’’

‘‘अब सब ठीक है.’’

‘‘यानी अपने स्वाभिमान को मार कर व रातदिन के झगड़ों से तंग आ कर तुम ने घुटघुट कर जीना सीख लिया है?’’

‘‘ऐसा कुछ नहीं है. हमारे बीच झगड़े नहीं होते हैं.’’

‘‘तुम मुझ से कुछ भी छिपाओ मत, क्योंकि मैं तुम्हें अमित के हाथों प्रताडि़त होने से बचने की तरकीब बता सकती हूं,’’ अपने 1-1 शब्द पर अंजलि ने बहुत जोर दिया.

‘‘तो जल्दी बताइए न,’’ शिखा किसी छोटी बच्ची की तरह खुश हो उठी.

शिखा की दिलचस्पी देख कर अंजलि ने जोशीले अंदाज में बोलना शुरू किया, ‘‘मुझे उस ने अपने शक्की स्वभाव के कारण जब बहुत ज्यादा तंग करना शुरू किया तो मैं चुप रहने के बजाय उस के साथ झगड़ा करने के साथसाथ बोलचाल भी बंद कर देती थी. तब वह एकदम से सही राह पर आ जाता था.

‘‘तुम भी उस के गुस्से से डर कर दबना बंद कर दो. वह ख्वाहमख्वाह शक करे तो अपने को अकारण अपराधबोध का शिकार मत बनाया करो. अमित को सही राह पर रखने का तरीका यही है कि जब वह तुम्हें नाजायज तरीके से दबाने की कोशिश करे तो तुम पूरी ताकत से उस के साथ भिड़ जाओ. देखना, वह एकदम से सही राह पर आ जाएगा.’’

कुछ देर खामोश रह कर शिखा सोचविचार में खोई रही और फिर पूछा, ‘‘तुम ने यही रास्ता अपनाया था और वे इस से सही राह पर आ भी जाते थे, तो फिर तुम ने उन के साथ शादी क्यों नहीं की?’’

‘‘मैं बारबार होने वाले झगड़ों से तंग आ गई थी. मुझे जब यह लगने लगा कि यह आदमी कभी नहीं सुधरेगा, तो मैं ने हमेशा के लिए अलग होने का फैसला कर लिया था.’’

‘‘अच्छा, यह बताओ कि क्या तुम अपनी विवाहित जिंदगी में खुश और सुखी हो?’’

‘‘शादी के झंझटों में फंस कर कौन बहुत खुश और सुखी रह सकता है?’’

‘‘आप के पति पायलट हैं न?’’

‘‘हां.’’

‘‘उन की पगार 2-3 लाख रुपए तो होगी?’’

‘‘यह सवाल क्यों पूछ रही हो?’’

‘‘अमित अभी हर महीने 40 हजार रुपए कमाने तक पहुंचे हैं. मेरे मन में यह विचार उठ रहा है कि कहीं आर्थिक कारणों ने तब तुम्हारा मन बदलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका तो नहीं निभाई थी?’’

‘‘मैं तुम्हारी सहायता करने आई हूं न कि अमित से शादी न करने के कारणों का खुलासा करने,’’ अंजलि एकदम से चिढ़ उठी.

‘‘लेकिन मुझे तुम्हारी किसी भी सहायता की जरूरत नहीं है. व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर अपने जीवनसाथी से झगड़ने का तुम्हारा सुझाव मुझे बिलकुल बचकाना लगा. अमित जैसे हैं, अच्छे हैं और मैं उन के साथ बहुत खुश हूं,’’ शिखा ने अपने ऊपर से नियंत्रण नहीं खोया और शांत बनी रही.

‘‘तुम इस झूठ के साथ जीना चाहती हो तो तुम्हारी मरजी,’’ अंजलि नाराज हो कर बोली. शिखा ने अपने मोबाइल में समय देखा और बोली, ‘‘करीब 10 मिनट बाद अमित मुझे लेने यहां आ जाएंगे. तब तक हम किसी और विषय पर बात करते हैं.’’

‘‘मेरे मना करने पर भी तुम ने हमारी इस मुलाकात के बारे में उसे क्यों बताया?’’

अंजलि की आंखों में अब गुस्से के भाव नजर आ रहे थे.

‘‘मैं उन से कुछ नहीं छिपाती हूं. आज शक्की स्वभाव वाले अमित को मुझ पर पूरा विश्वास है तो उस के पीछे मेरी उन्हें सब कुछ बता देने की इस आदत से ही.’’

‘‘क्या तुम उसे हमारे बीच हुई बातों की भी सारी जानकारी दोगी?’’

‘‘हां, पर इस ढंग से नहीं कि तुम्हारी छवि खराब हो और तुम उन की नजरों में गिर जाओ.’’

‘‘थैंक यू. मुझे लग रहा है कि मैं ने तुम्हारी सहायता करने की पहल कर के शायद समझदारी नहीं दिखाई है. मैं चलती हूं,’’ अंजलि जाने को उठ खड़ी हुई.

‘‘अमित से नहीं मिलोगी?’’

‘‘नहीं. गुडबाय.’’

‘‘पत्नी को पति का दिल व विश्वास जीतने के लिए अगर पति के सामने झुक कर भी जीना पड़े, तो इस में कोई बुराई नहीं है, अंजलि.’’

‘‘मुझे ये लैक्चर क्यों दे रही हो?’’

‘‘मैं लैक्चर नहीं दे रही हूं पर इंसान को अपनी समझ में आई कोई भी अच्छी बात दूसरों से बांट लेनी चाहिए. अपने पति के साथ तुम हमारे घर जरूर आना.’’

‘‘कोशिश करूंगी,’’ रुखाई से जवाब दे कर अंजलि तेज कदमों से चल पड़ी.

अपनी बातों का जो असर वह शिखा

पर देखना चाह रही थी, वह उसे नजर नहीं आया था. शक्की अमित को उस ने कभी

यही सोच कर रिजैक्ट कर दिया था कि वह अच्छा पति साबित नहीं होगा. शिखा उस के साथ शादी कर के सुखी और संतुष्ट है, यह बात उसे हजम नहीं हो रही थी. उस के साथ अपनी तुलना कर रही अंजलि के मन में खीज व गुस्से के भाव पलपल बढ़ते ही जा रहे थे. Hindi Story

Crime Story: जुआ, जिस्म और कत्ल

Crime Story, लेखक – महेश कांत शिवा

उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के कांधला कसबे के रहने वाले 26 साला असलम, पिता का नाम आबिद, की बहन की शादी बागपत जनपद के गांव फतेहपुर कुट्ठी धनौरा में हुई थी.

बहन की शादी के बाद असलम का वहां आनाजाना हुआ तो उस की मुलाकात वहीं की ही रहने वाली 24 साल की आसमीन से हो गई. आसमीन असलम की बहन के पास आतीजाती रहती थी. इसी से असलम और आसमीन के बीच इश्क की आंखमिचौली शुरू हो गई.

9 साल पहले दोनों में दोस्ती हुई और कुछ ही समय में यह दोस्ती प्यार में बदल गई. दोनों परिवार वालों से छिपछिपा कर मिलने भी लगे.

एक दिन आसमीन ने असलम से कह ही दिया, ‘‘मैं तुम्हारे बिना अब एकपल भी जिंदा नहीं रह सकती. न जाने तुम ने मुझ पर क्या जादू कर दिया है, हरपल तुम ही तुम नजर आते हो.’’

‘‘ऐसा ही कुछ हाल मेरा भी है जानू. मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता. मैं अपने घर वालों को मना लूंगा, तुम भी अपने घर वालों से बात कर के देखो,’’ असलम ने जवाब दिया.

‘‘ठीक है, मैं आज अम्मी से बात कर के देखती हूं. उम्मीद है कि वे मान जाएंगी,’’ आसमीन ने कहा.

उसी दिन आसमीन ने अपने दिल की बात अपनी अम्मी से कह दी, लेकिन उस की अम्मी ने उस के अब्बू से बात करने की बात की.

आसमीन के अब्बू जब काम से वापस लौटे तो अम्मी ने आसमीन और असलम के बीच चल रहे संबंधों की जानकारी दी.

‘‘नहीं, यह हरगिज नहीं हो सकता. अगर ऐसा हुआ तो मैं असलम को मार दूंगा,’’ अचानक से वहां पहुंचे आसमीन के भाई हारून ने भड़कते हुए कहा.

इस के बाद अपने परिवार की नाराजगी की सारी बात आसमीन ने असलम को बता दी.

‘‘अब तो एक ही रास्ता निकलता है कि हम दोनों घर से भाग कर निकाह कर लें. तुम्हारी क्या राय है?’’ असलम ने आसमीन से पूछा.

‘‘जो भी करना है, जल्दी करो. हमारे पास ज्यादा वक्त नहीं है. मेरा निकाह कहीं और कर दिया जाएगा. तुम बस देखते रह जाओगे,’’ आसमीन ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा.

साल 2016 में एक दिन असलम और आसमीन अपनाअपना घर छोड़ कर भाग गए. दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली और कांधला कसबे से बाहर किराए का कमरा ले कर रहने लगे.

दोनों के बीच प्यारभरे संबंध बने तो आसमीन ने असलम की गोद में एक नन्हा सा बच्चा डाल दिया. दोनों हंसीखुशी से रहने लगे.

असलम को जो भी काम मिल जाता, वह उसे कर लेता था. रात को जब असलम काम से वापस लौटता तो अपने बच्चे और आसमीन को देख कर उस की दिनभर की सारी थकान दूर हो जाती थी.

दोनों की जिंदगी हंसीखुशी से बीत रही थी कि 5 साल पहले उन की जिंदगी में एक मोड़ आया. असलम और आसमीन कांधला लौट आए.

कांधला लौटने पर असलम ने अपने घर से दूर महल्ला रायजादगान में एक मकान किराए पर लिया और वहां पर रहने लगा. वहां पर रहतेरहते आसमीन 3 बच्चों की मां बनी. अब वह कुल 4 बच्चों की मां थी, जिन में 2 बेटे और 2 बेटियां थीं.

असलम ने कांधला में ही एक होटल पर नौकरी करना शुरू कर दी. जैसेजैसे परिवार बढ़ा और बच्चे बड़े होने लगे, तो असलम की जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं. घर और बच्चों के स्कूल की फीस का खर्च भी बढ़ रहा था.

होटल से असलम को थोड़ीबहुत ही तनख्वाह मिलती थी, जिस से गुजारा होना मुश्किल हो रहा था. घरखर्च चलाने के लिए उस ने जुआ खेलना शुरू कर दिया. जुए में पैसा हारने की वजह से वह लोगों का कर्जदार भी होता चला गया.

एक फाइनैंसर से असलम ने 20-30 हजार रुपए का कर्ज लिया, लेकिन समय से कर्ज की किस्तें अदा नहीं कर पा रहा था, जिस के चलते फाइनैंसर और उस के आदमी घर आ कर रुपयों का तकादा करने लगे.

रोजाना फाइनैंसर के घर आने से आसमीन भी परेशान हो गई.

असलम के पड़ोस में इंतजार नामक आटोरिकशा ड्राइवर भी रहता था. इंतजार की पत्नी की डेढ़ साल पहले मौत हो चुकी थी. तकरीबन 6 महीने पहले इंतजार और आसमीन के बीच मुलाकात हुई और प्यार हो गया. इंतजार ने असलम के घर में आनाजाना शुरू कर दिया.

उन दोनों के बीच मोबाइल पर दिनरात घंटों प्यारभरी बातें होने लगीं. ह्वाट्सएप पर भी वे दोनों खूब चैटिंग करने लगे.

असलम के होटल पर जाने के बाद इंतजार अकसर उस के घर पहुंच जाता था. आसमीन और इंतजार में संबंध भी बन गए थे.

इस बात का जब असलम को पता चला तो उस ने एतराज जताया, लेकिन आसमीन नहीं मानी और उस ने इंतजार से बने रिश्ते को जारी रखा.

‘‘आसमीन, जो तुम कर रही हो, वह ठीक नहीं है. मैं ने इंतजार को भी समझाया है, पर वह नहीं मान रहा. कम से कम तुम तो मान जाओ. रोजाना उस का हमारे घर आना, तुम्हारे साथ बैठ कर खाना खाना… क्या कहेंगे महल्ले वाले…’’

आसमीन कुछ नहीं बोली, बस चुपचाप असलम की बातें सुनती रही. वह अब इंतजार के साथ एक नई जिंदगी की शुरुआत करना चाहती थी, लेकिन असलम इस राह में रोड़ा बन रहा था.

आसमीन के दिमाग में आया कि असलम को बीच रास्ते से हटाना होगा, तभी जा कर वह इंतजार के साथ नई जिंदगी की शुरुआत कर सकती है.

आसमीन ने इंतजार से मिलना जारी रखा. एक दिन उस ने अपने भाई हारून को अपने और इंतजार के रिश्ते के बारे में सारी बात बता दी. यह जानकारी पा कर हारून भी उस के घर पहुंच गया. इंतजार को भी बुला लिया गया.

आसमीन ने अपने भाई से सारे हालात की जानकारी दी, ‘‘असलम जुआ खेलता है. उस ने लोगों का कर्जा सिर पर चढ़ा रखा है. घर के बाहर कोई न कोई अपने पैसे मांगने वाला खड़ा ही रहता है. मैं तो तंग आ गई हूं. वह जो कमाता है, उसे जुए में उड़ा देता है. इस से अच्छा है कि उसे मार ही दो.’’

‘‘असलम तुम्हें ले कर घर से भागा था, जिस से रिश्तेदारों और बिरादरी में हमारी नाक कट गई,’’ हारून ने अपनी बहन से नाराजगी भरे लहजे में कहा.

‘‘मेरी भूल थी भाई. मुझे क्या पता था कि निकाह के बाद वह नकारा हो जाएगा, जुआ खेलने लगेगा,’’ आसमीन ने मायूसी भरे लहजे में कहा.

‘‘ठीक है, कुछ करते हैं,’’ हारून ने आसमीन को दिलासा देते हुए कहा.

9 अगस्त, 2025. शनिवार की शाम को हारून ने असलम को फोन कर के कहा, ‘‘चलो, आज घूमने कैराना चलते हैं, आसमीन भी साथ रहेगी.’’

असलम को शक नहीं हुआ. बीवी साथ थी तो सब सामान्य लगा. वे तीनों कांधला से कैराना की तरफ निकल पड़े. शराब के ठेके से शराब की बोतल ली. रास्ते में एक जगह पर बैठ कर उन दोनों ने शराब पी.

हारून ने कम शराब पी, जबकि असलम को ज्यादा शराब पिला दी, जिस से उसे कुछ होश न रहा.

थोड़ी देर के बाद असलम पूरी तरह से बेहोश हो चुका था. इस के बाद इंतजार अपना आटोरिकशा ले कर वहां पहुंच गया. उन तीनों ने मिल कर असलम को आटोरिकशा में डाला और एक सुनसान जगह ले जा कर मीट काटने वाले चाकू से असलम का गला रेत कर हत्या कर दी.

इस के बाद उन तीनों ने असलम की लाश को कैराना में कांधला रोड पर हाशिम के आम के बाग में फेंक दिया और फरार हो गए.

10 अगस्त, 2025, रविवार की सुबह तकरीबन सवा 9 बजे कैराना कोतवाली पुलिस को आम के बाग में एक लाश पड़ी होने की सूचना मिली. फोरैंसिक टीम को मौके पर बुला कर सुबूत जुटाए गए.

असलम की जेब से मिले आधारकार्ड से उस की पहचान हुई तो पुलिस ने असलम के पिता को भी मौके पर बुला लिया.

एसपी शामली रामसेवक गौतम ने हत्या के खुलासे के लिए एक टीम बनाई और कांधला से ले कर कैराना तक के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए. सीसीटीवी में एक हरे रंग के आटोरिकशा में आसमीन, हारून और इंतजार असलम को ले जाते हुए नजर आए.

कैराना कोतवाली पुलिस ने बिना देरी किए आटोरिकशा ड्राइवर इंतजार को हिरासत में ले लिया. उस के और आसमीन के फोन की काल डिटेल खंगाली गई. मोबाइल में दोनों की ह्वाट्सएप चैटिंग भी मिली.

इस पर पुलिस का शक गहरा गया. वह अब पूरी तरह से यह मान चुकी थी कि असलम की पत्नी ने ही नाजायज संबंधों के चलते उस की हत्या कराई है.

पुलिस ने आसमीन और उस के भाई हारून को भी गिरफ्तार कर लिया. आसमीन ने पुलिस को बताया कि वह इंतजार से दूसरा निकाह करना चाहती थी, लेकिन असलम राह का रोड़ा बन रहा था.

बाद में आसमीन ने अपना बयान बदलते हुए पुलिस का बताया कि उस ने ऐसे ही कहा दिया था कि असलम को मार डालो, लेकिन इन दोनों (हारून और इंतजार) ने तो सच में ही उस के शौहर को मार डाला.

पुलिस ने 12 घंटे के भीतर वारदात का खुलासा किया और आसमीन, हारून और इंतजार को गिरफ्तार कर लिया. तीनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया. Crime Story

Story In Hindi: अनोखा बदला – निर्मला ने कैसे लिया बहन और प्रेमी से बदला

Story In Hindi: निर्मला से सट कर बैठा संतोष अपनी उंगली से उस की नंगी बांह पर रेखाएं खींचने लगा, तो वह कसमसा उठी. जिंदगी में पहली बार उस ने किसी मर्द की इतनी प्यार भरी छुअन महसूस की थी.

निर्मला की इच्छा हुई कि संतोष उसे अपनी बांहों में भर कर इतनी जोर से भींचे कि…

निर्मला के मन की बात समझ कर संतोष की आंखों में चमक आ गई. उस के हाथ निर्मला की नंगी बांहों पर फिसलते हुए गले तक पहुंच गए, फिर ब्लाउज से झांकती गोलाइयों तक.

तभी बाहर से आवाज सुनाई पड़ी, ‘‘दीदी, चाय बन गई है…’’

संतोष हड़बड़ा कर निर्मला से अलग हो गया, जिस का चेहरा एकदम तमतमा उठा था, लेकिन मजबूरी में वह होंठ काट कर रह गई.

नीचे वाले कमरे में छोटी बहन उषा ने नाश्ता लगा रखा था. चायनाश्ता करने के बाद संतोष ने उठते हुए कहा, ‘‘अब चलूं… इजाजत है? कल आऊंगा, तब खाना खाऊंगा… कोई बढि़या सी चीज बनाना. आज बहुत जरूरी काम है, इसलिए जाना पड़ेगा…’’

‘‘अच्छा, 5 मिनट तो रुको…’’ उषा ने बरतन समेटते हुए कहा, ‘‘मुझे अपनी एक सहेली से नोट्स लेने हैं. रास्ते में छोड़ देना. मैं बस 5 मिनट में तैयार हो कर आती हूं.’’

उषा थोड़ी देर में कपड़े बदल कर आ गई. संतोष उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर चला गया.

उधर निर्मला कमरे में बिस्तर पर गिर पड़ी और प्यास अधूरी रह जाने से तड़पने लगी.

निर्मला की आंखों के आगे एक बार फिर संतोष का चेहरा तैर उठा. उस ने झपट कर दरवाजा बंद कर दिया और बिस्तर पर गिर कर मछली की तरह छटपटाने लगी.

निर्मला को पहली बार अपनी बहन उषा और मां पर गुस्सा आया. मां चायनाश्ता बनाने में थोड़ी देर और लगा देतीं, तो उन का क्या बिगड़ जाता. उषा कुछ देर उसे और न बुलाती, तो निर्मला को वह सबकुछ जरूर मिल जाता, जिस के लिए वह कब से तरस रही थी.

जब पिता की मौत हुई थी, तब निर्मला 22 साल की थी. उस से बड़ी कोई और औलाद न होने के चलते बीमार मां और छोटी बहन उषा को पालने की जिम्मेदारी बिना कहे ही उस के कंधे पर आ पड़ी थी.

निर्मला को एक प्राइवेट फर्म में अच्छी सी नौकरी भी मिल गई थी. उस समय उषा 10वीं जमात के इम्तिहान दे चुकी थी, लेकिन उस ने धीरेधीरे आगे पढ़ कर बीए में दाखिला लेते समय निर्मला से कहा था, ‘‘दीदी, मां की दवा में बड़ा पैसा खर्च हो रहा है. तुम अकेले कितना बोझ उठाओगी…

‘‘मैं सोच रही हूं कि 2-4 ट्यूशन कर लूं, तो 2-3 हजार रुपए बड़े आराम से निकल जाएंगे, जिस से मेरी पढ़ाई के खर्च में मदद हो जाएगी.’’

‘‘तुझे पढ़ाई के खर्च की चिंता क्यों हो रही है? मैं कमा रही हूं न… बस, तू पढ़ती जा,’’ निर्मला बोली थी.

अब निर्मला 30 साल की होने वाली है. 1-2 साल में उषा भी पढ़लिख कर ससुराल चली जाएगी, तो अकेलापन पहाड़ बन जाएगा.

लेकिन एक दिन अचानक मौका हाथ आ लगा था, तो निर्मला की सोई इच्छाएं अंगड़ाई ले कर जाग उठी थीं.

उस दिन दफ्तर में काम निबटाने के बाद सब चले गए थे. निर्मला देर तक बैठी कागजों को चैक करती रही थी. संतोष उस की मदद कर रहा था. आखिरकार रात के 10 बजे फाइल समेट कर वह उठी, तो संतोष ने हंस कर कहा था, ‘‘इस समय तो आटोरिकशा या टैक्सी भी नहीं मिलेगी, इसलिए मैं आप को मोटरसाइकिल से घर तक छोड़ देता हूं.’’

निर्मला ने कहा था, ‘‘ओह… एडवांस में शुक्रिया?’’

निर्मला को उस के घर के सामने उतार कर संतोष फिर मोटरसाइकिल स्टार्ट करने लगा, तो उस ने हाथ बढ़ा कर हैंडल थाम लिया और कहने लगी, ‘‘ऐसे कैसे जाएंगे… घर तक आए हैं, तो कम से कम एक कप चाय…’’

‘‘हां, चाय चलेगी, वरना घर जा कर भूखे पेट ही सोना पड़ेगा. रात भी काफी हो गई है. मैं जिस होटल में खाना खाता हूं, अब तो वह भी बंद हो चुका होगा.’’

‘‘आप होटल में खाते हैं?’’

‘‘और कहां खाऊंगा?’’

‘‘क्यों? आप के घर वाले?’’

‘‘मेरा कोई नहीं है. मैं मांबाप की एकलौती औलाद था. वे दोनों भी बहुत कम उम्र में ही मेरा साथ छोड़ गए, तब से मैं अकेला जिंदगी काट रहा हूं.’’

संतोष ने बहुत मना किया, लेकिन निर्मला नहीं मानी थी. उस ने जबरदस्ती संतोष को घर पर ही खाना खिलाया था.

अगले दिन शाम के 5 बजे निर्मला को देख कर मोटरसाइकिल का इंजन स्टार्ट करते हुए संतोष ने कहा था, ‘‘आइए… बैठिए.’’

निर्मला ने बिना कुछ बोले ही पीछे की सीट पर बैठ कर उस के कंधे पर हाथ रख दिया था. घर पहुंच कर उस ने फिर चाय पीने की गुजारिश की, तो संतोष ने 1-2 बार मना किया, लेकिन निर्मला उसे घर के अंदर खींच कर ले गई थी.

इस के बाद रोज का यही सिलसिला हो गया. संतोष को निर्मला के घर आने या रुकने के लिए कहने की जरूरत नहीं पड़ती थी, खासतौर से छुट्टी वाले दिन तो वह निर्मला के घर पड़ा रहता था. सब ने उसे भी जैसे परिवार का एक सदस्य मान लिया था.

एक दिन अचानक निर्मला का सपना टूट गया. उस दिन उषा अपनी सहेली के यहां गई थी. दूसरे दिन उस का इम्तिहान था, इसलिए वह घर पर बोल गई थी कि रातभर सहेली के साथ ही पढ़ेगी, फिर सवेरे उधर से ही इम्तिहान देने यूनिवर्सिटी चली जाएगी.

उस दिन भी संतोष निर्मला के साथ ही उस के घर आया था और खाना खा कर रात के तकरीबन 10 बजे वापस चला गया था.

उस के जाने के बाद निर्मला बाहर वाला दरवाजा बंद कर के अपने कमरे में लौट रही थी, तभी मां ने टोक दिया, ‘‘बेटी, तुझ से कुछ जरूरी बात करनी है.’’

निर्मला का मन धड़क उठा. मां के पास बैठ कर आंखें चुराते हुए उस ने पूछा, ‘‘क्या बात है मां?’’

‘‘बेटी, संतोष कैसा लड़का है. वह तेरे ही दफ्तर में काम करता है… तू तो उसे अच्छी तरह जानती होगी.’’

निर्मला एकाएक कोई जवाब नहीं दे सकी.

मां ने कांपते हाथों से निर्मला का सिर सहलाते हुए कहा, ‘‘मैं तेरे मन का दुख समझती हूं बेटी, लेकिन इज्जत से बढ़ कर कुछ नहीं होता, अब पानी सिर से ऊपर जा रहा है, इसलिए…’’

निर्मला एकदम तिलमिला उठी. वह घबरा कर बोली, ‘‘ऐसा क्यों कहती हो मां? क्या तुम ने कभी कुछ देखा है?’’

‘‘हां बेटी, देखा है, तभी तो कह रही हूं. कल जब तू बाजार गई थी, तब दो घड़ी के लिए संतोष आया था. वह उषा के साथ कमरे में था.

‘‘मैं भी उन के साथ बातचीत करने के लिए वहां पहुंची, लेकिन दरवाजे पर पहुंचते ही मैं ने उन दोनों को जिस हालत में देखा…’’

निर्मला चिल्ला पड़ी, ‘‘मां…’’ और वह उठ कर अपने कमरे की ओर भाग गई.

निर्मला के कानों में मां की बातें गूंज रही थीं. उसे विश्वास नहीं हुआ. मां को जरूर धोखा हो गया है. ऐसा कभी नहीं हो सकता. लेकिन यही हो रहा था.

अगले दिन निर्मला दफ्तर गई जरूर, लेकिन उस का किसी काम में मन नहीं लगा. थोड़ी देर बाद ही वह सीट से उठी. उसे जाते देख संतोष ने पूछा, ‘‘क्या हुआ? तबीयत ठीक नहीं है क्या?’’

निर्मला ने भर्राई आवाज में कहा, ‘‘मेरी एक खास सहेली बीमार है. मैं उसे ही देखने जा रही हूं.’’

‘‘कितनी देर में लौटोगी?’’

‘‘मैं उधर से ही घर चली जाऊंगी.’’

बहाना बना कर निर्मला जल्दी से बाहर निकल आई. आटोरिकशा कर के वह सीधे घर पहुंची. मां दवा खा कर सो रही थीं. उषा शायद अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी. बाहर का दरवाजा अंदर से बंद नहीं था. इस लापरवाही पर उसे गुस्सा तो आया, लेकिन बिना कुछ बोले चुपचाप दरवाजा बंद कर के वह ऊपर अपने कमरे में चली गई.

इस के आधे घंटे बाद ही बाहर मोटरसाइकिल के रुकने की आवाज सुनाई पड़ी. निर्मला को समझते देर नहीं लगी कि जरूर संतोष आया होगा.

निर्मला कब तक अपने को रोकती. आखिर नहीं रहा गया, तो वह दबे पैर सीढि़यां उतर कर नीचे पहुंची. मां सो रही थीं.

वह बिना आहट किए उषा के कमरे के सामने जा कर खड़ी हो गई और दरवाजे की एक दरार से आंख सटा कर झांकने लगी. भीतर संतोष और उषा दोनों एकदूसरे में डूबे हुए थे.

उषा ने इठलाते हुए कहा, ‘‘छोड़ो मुझे… कभी तो इतना प्यार दिखाते हो और कभी ऐसे बन जाते हो, जैसे मुझे पहचानते नहीं.’’

संतोष ने उषा को प्यार जताते हुए कहा, ‘‘वह तो तुम्हारी दीदी के सामने मुझे दिखावा करना पड़ता है.’’

उषा ने हंस कर कहा, ‘‘बेचारी दीदी, कितनी सीधी हैं… सोचती होंगी कि तुम उन के पीछे दीवाने हो.’’

संतोष उषा को प्यार करता हुआ बोला, ‘‘दीवाना तो हूं, लेकिन उन का नहीं तुम्हारा…’’

कुछ पल के बाद वे दोनों वासना के सागर में डूबनेउतराने लगे. निर्मला होंठों पर दांत गड़ाए अंदर का नजारा देखती रही… फिर एकाएक उस की आंखों में बदले की भावना कौंध उठी. उस ने दरवाजा थपथपाते हुए पूछा, ‘‘संतोष आए हैं क्या? चाय बनाने जा रही हूं…’’

संतोष उठने को हुआ, तो उषा ने उसे भींच लिया, ‘‘रुको संतोष… तुम्हें मेरी कसम…’’

‘‘पागल हो गई हो. दरवाजे पर तुम्हारी दीदी खड़ी हैं…’’ और संतोष जबरदस्ती उठ कर कपड़े पहनने लगा.

उस समय उषा की आंखों में प्यार का एहसास देख कर एक पल के लिए निर्मला को अपना सारा दुख याद आया.

मां के कमरे के सामने नींद की गोलियां रखी थीं. उन्हें समेट कर निर्मला रसोईघर में चली गई. चाय छानने के बाद वह एक कप में ढेर सारी नींद की गोलियां डाल कर चम्मच से हिलाती रही, फिर ट्रे में उठाए हुए बाहर निकल आई.

संतोष ने चाय पी कर उठते हुए आंखें चुरा कर कहा, ‘‘मुझे बहुत तेज नींद आ रही है. अब चलता हूं, फिर मुलाकात होगी.’’

इतना कह कर संतोष बाहर निकला और मोटरसाइकिल स्टार्ट कर के घर के लिए चला गया.

दूसरे दिन अखबारों में एक खबर छपी थी, ‘कल मोटरसाइकिल पेड़ से टकरा जाने से एक नौजवान की दर्दनाक मौत हो गई. उस की जेब में मिले पहचानपत्रों से पता चला कि संतोष नाम का वह नौजवान एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था’. Story In Hindi

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