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Crime Story: ऐंजल चकमा – हेट क्राइम की भेंट चढ़ा मासूम

Crime Story: महज 10,491 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का त्रिपुरा पूर्वोत्तर भारत में बसा एक खूबसूरत राज्य है और उस से भी खूबसूरत हैं वहां के रहवासी. यहीं के उनाकोटी जिले के नंदानगर इलाके का रहने वाला एक नौजवान लड़का ऐंजल चकमा अपने सपने पूरे करने दूसरे पर्वतीय राज्य उत्तराखंड की राजधानी देहरादून गया था, जहां वह पढ़ाई कर रहा था.


पर 9 दिसंबर, 2025 का दिन ऐंजल चकमा पर कहर बन कर टूटा. एक छोटी सी कहासुनी मारपीट में बदली और फिर ऐसा खूनी खेल हुआ कि ऐंजल चकमा अपनी जिंदगी से ही हाथ धो बैठा. इस वारदात को ऐंजल चकमा के छोटे भाई माइकल चकमा के कहे मुताबिक सम?ाते हैं. 9 दिसंबर की शाम के तकरीबन 6 से 7 बजे माइकल अपने भाई ऐंजल के साथ कुछ सामान लेने घर से निकला था. वे दोनों सेलाकुई में ही रहते थे. ऐंजल देहरादून की जिज्ञासा यूनिवर्सिटी में एमबीए फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहा था, जबकि माइकल उत्तरांचल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा था.


जब वे दोनों मार्केट में पहुंचे तो बाइक और स्कूटी पर आए कुछ लड़के उन के पास आए. उन सभी लड़कों ने दोनों भाइयों पर कमैंट करना शुरू कर दिया. माइकल चकमा ने बताया, ‘‘हमें वे लोग लगातार ‘चाइनीज’, ‘चिंकी’ और ‘मोमो’ कह कर चिढ़ा रहे थे. पहले हम ने इग्नोर किया, लेकिन वे माने नहीं. जब मैं ने उन से पूछा कि क्या दिक्कत है? क्यों यह सब बोल रहे हो? तो उन्होंने पीटना शुरू कर दिया.
‘‘एक लड़के ने कड़े से मारा. मारपीट होती देख कर तुरंत ऐंजल बीचबचाव करने पहुंचा, फिर उन्होंने  छोड़ कर ऐंजल को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया. मैं ने काफी कोशिश की उन्हें रोकने की, लेकिन हम दोनों ही घिर चुके थे. वे लगातार हम दोनों को ही मार रहे थे.’’


इस बारे में ऐंजल चकमा के मामा ने बताया, ‘‘जब शुरुआत में वे लड़के कमैंट कर रहे थे, तो माइकल ने बाइक से उतर कर उन से कहा था कि ‘हम भी इंडियन हैं’ हमें चाइनीज क्यों बोल रहे हो?’ लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी. ‘‘उस रात उन लड़कों ने दोनों को सिर्फ कड़ों से ही नहीं मारा, बल्कि चाकू से भी ऐंजल के पेट में वार किया गया. वे लोग ऐंजल की गरदन पर कड़े से तब तक मारते रहे, जब तक उस की पूरी गरदन फट नहीं गई. खून भी निकलता रहा, लेकिन वे उसे बस पीटते ही रहे. गरदन पर किए गए घातक वार के चलते ही ऐंजल के सिर में खून जमा हो गया था.’’


हमले के बाद ऐंजल और माइकल दोनों गंभीर हालत में ग्राफिक एरा अस्पताल पहुंचे. माइकल के सिर में हलकी चोट थी, लेकिन ऐंजल को आईसीयू में भर्ती कर दिया गया. वह अस्पताल में जिंदगी और मौत से रहा और 26 दिसंबर, 2025 की सुबह तकरीबन 4 बजे उस ने दम तोड़ दिया. इस के बाद पूरे देश में एक बहस सी गई कि ऐंजल चकमा हेट क्राइम का शिकार हुआ है, जबकि देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने इस हत्याकांड को हेट क्राइम मानने से साफ इनकार किया. उन के मुताबिक, यह 2 गुटों के बीच अचानक हुई कहासुनी का नतीजा था.


देहरादून पुलिस की ओर से अब तक हुई जांच में सामने आया है कि ऐंजल चकमा और उस के भाई माइकल चकमा पर हमला करने वाले आरोपी भी पूर्वोत्तर में मणिपुर और पड़ोसी देश नेपाल जैसे पर्वतीय इलाके के हैं. पुलिस ने तेजी दिखाते हुए 6 में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया. उन में 2 नाबालिग शामिल थे, जबकि एक आरोपी को फरार बताया गया. उस पर पुलिस ने 25,000 रुपए का इनाम भी घोषित किया था.


भारत में हेट क्राइम की वजह
सितंबर, 2015 और दिसंबर, 2019 के बीच भारत में दर्ज हेट क्राइम की ज्यादातर वारदात एससी तबके पर टारगेट ले कर की गई थीं, इस के बाद मुसलिमों का नंबर रहा. कथिततौर पर नफरत के चलते जाति, धर्म से ले कर औनर किलिंग और लव जिहाद तक कुल 902 अपराध दर्ज किए गए. अगर वजह की बात करें तो हमारे देश में रूढि़वाद परिवार, धर्म और तालीम में गहराई से घुसा हुआ है. इतना ज्यादा कि ऊंची जाति के बच्चे कुछ समुदायों या जातियों को अपने से नीचा मानते हुए उन्हें नफरत से देखते हैं, जानवर से बदतर  हैं.


यही वजह है कि जब लोग राजनीति में अपनी पहचान बनाते हैं तो वोटबैंक जुटाने के चक्कर में अकसर हेट क्राइम का सहारा लेते हैं. जाति और धर्म को देश से ऊपर मनाने वाले बहुत से नेता कभीकभी अपने समर्थकों को एकजुट करने के लिए नफरती भाषा का इस्तेमाल करते हैं, ताकि उन के समाज के लोग उन्हें ही वोट दें. इस के अलावा भारत का कमजोर कानूनी ढांचा भी नफरती अपराधों से निबटने में बेबस सा दिखता है और ज्यादातर मामले भारतीय दंड संहिता की उन धाराओं के तहत दर्ज किए जाते हैं, जिन में मारपीट, हत्या या दंगे की बात कही गई है, जबकि हेट क्राइम की मूल जड़ को नजरअंदाज कर दिया जाता है.


जब से भारत में सोशल मीडिया हावी हुआ है, बहुत से प्लेटफार्म अकसर हेट क्राइम को बढ़ाने वाली सामग्री को बढ़ावा देते हैं. सियासी माहौल गरमाया पर चूंकि यह मामला हेट क्राइम जैसा था तो इस पर सियासी उबाल आना लाजिमी था. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के कद्दावर नेता राहुल गांधी ने इस मामले में कहा कि हमें एक ऐसा मरा हुआ समाज नहीं बनना चाहिए जो देशवासियों को निशाना बनाए
जाने पर आंखें मूंद ले.

ऐसी घटनाएं उस नफरत का नतीजा हैं, जो नौजवानों के बीच परोसी जा रही हैं. इस मामले में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि यह नफरती सोच का बुरा नतीजा है. विघटनकारी सोच रोज किसी की जान ले रही है और सरकारी अभयदान हासिल ये लोग विषबेल की तरह फलफूल रहे हैं. दूसरी तरफ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने त्रिपुरा के मारे गए छात्र ऐंजल चकमा की पिता तरुण प्रसाद चकमा से फोन पर बात की और कहा कि सरकार पूरी तरह से पीडि़त परिवार के साथ खड़ी है.


लोगों का फूटा गुस्सा किसी पहाड़ी राज्य में एक पहाड़ी लड़के को ‘चाइनीज’, ‘चिंकी’ या ‘मोमो’ कह कर उस पर जानलेवा वार करना हमारे देश की एकता पर एक सवालिया निशान है. हम किसी को उस के रूपरंग, चेहरेमोहरे और बोलने के अंदाज से कैसे जज कर के उस का मजाक बना सकते हैं? यही वजह है कि इस हत्याकांड के बाद उत्तराखंड से ले कर त्रिपुरा तक विरोधप्रदर्शन हुए और लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की.


यही वजह थी कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पूर्वोत्तर के लोगों की सुरक्षा और संरक्षण तय करने की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि भारतीय समाज में नस्लवाद और भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है.
किसी भी जाति, नस्ल या धर्म के लोगों का मजाक नहीं उड़ाया जाना चाहिए. केवल पूर्वोत्तर के लोग ही नहीं, बल्कि सभी को इस तरह की घटनाओं से दुखी होना चाहिए, क्योंकि यह किसी के साथ भी हो सकता है. पर केंद्रीय मंत्री के इतना कह देने भर से पीडि़त परिवार के जख्मों पर मरहम नहीं लग सकती और कभी कभी तो लगता है कि एक समाज के तौर पर हम वहशीपन के दौर में पहुंच गए हैं. अब यहां लोगों के कपड़े और उस कपड़े के रंग से पहचान दी जा रही है.


इतना ही नहीं, लोगों के खानपान, नाम, नैननक्श से भी यह निशानदेही की जा रही है कि कौन हमारे हक में है और कौन नहीं. देश भगवा, हरे और नीले रंग की दरारों से पटता जा रहा है और देश के बड़े से बड़े नेता के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही. अब तो लगता है कि हर सियासी नेता चाहता है कि देश उन्मादी नदी में गोते लगाए. और यही उन्मादी नदी अब धर्म के नाम पर तांडव करने लगी है. कहीं गौमाता के नाम पर मौब लिंचिंग हो रही है तो कहीं सिर तन से जुदा होगा के जहरीले नारे लग रहे हैं.


वैलेंटाइन डे पर नौजवानों को सरेआम धर्म की आड़ ले कर पीटा जा रहा है. कोई घुसपैठिया है तो कोई देश का गद्दार. फिल्म सितारे शाहरुख खान की देशभक्ति भी अब सवालों के घेरे में आ गई है. इस सब में हम यह भूल जाते हैं कि इस तरह के हत्याकांड एक परिवार को उम्रभर के लिए तोड़ देते हैं. ऐंजल का छोटा भाई माइकल क्या अपने भाई की इस दर्दनाक मौत को भूल पाएगा? कभी नहीं. उस के दिल पर ‘चाइनीज’, ‘चिंकी’ और ‘मोमो’ जैसे शब्द परमानैंट टैटू की तरह गोद दिए गए हैं.


ऐंजल के मामा मोमेन चकमा ने बताया कि ऐंजल के पिता ने भारी कर्ज ले कर अगरतला के बाहरी इलाके नंदननगर में एक नया घर खरीदा था. इस के अलावा ऐंजल ने देहरादून से एमबीए करने के लिए एजूकेशन लोन लिया था और हम सभी जानते हैं कि देहरादून में ऐसा कोर्स करना महंगा होता है. अब सबकुछ बरबाद हो गया है. ऐंजल चकमा के पिता तरुण प्रसाद चकमा ने कहा कि वे नहीं चाहते कि जो उन के बच्चे के साथ हुआ वह किसी और के साथ न हो. वे बौर्डर सिक्योरिटी फोर्स में हैं और इस वक्त मणिपुर में तैनात हैं.


जिन पर ऐंजल चकमा की जान लेने का आरोप लगा है उन में 25 साल के अविनाश नेगी, 25 साल के सुमित, 18 साल के सूरज खवास और 22 साल के यज्ञराज अवस्थी का नाम सामने आया है. बाकी 2 लड़के नाबालिग हैं. देखा जाए तो जिंदगी इन की और इन के परिवार की भी बरबाद हुई है. ये सारे 25 साल या उस से कम उम्र के हैं. वैसे, इस मामले में अनूप प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिस में हेट क्राइम से निबटने में हुई संवैधानिक नाकामी की न्यायिक जांच की मांग की गई है. जब ऊना और खैरलांजी में शर्मसार हुआ था देश


11 जुलाई, 2016 की बात है. गांधी के गुजरात के ऊना में खुद को ‘गौरक्षक’ कहलाने वाले लोगों ने सामाजिकतौर पर निचले कहे जाने वाले समुदाय के 7 सदस्यों की बेरहमी से पिटाई से पिटाई की थी, जिस के बाद देशभर में बवाल मच गया था. दरअसल, गिर सोमनाथ जिले के मोटा समाधियाला गांव में वशराम सरवैया और उन के भाइयों को तथाकथित ‘गौरक्षकों’ ने अधनंगा कर के पीटा था और उन पर पर गौहत्या में लिप्त होने का आरोप लगाया था.


हमलावरों के दावे के उलट बाद में हुई जांच में पता चला कि एससी परिवार एक मरी गाय की खाल उतार रहा था, जिसे वे बेदिया गांव से लाए थे. अब महाराष्ट्र के भंडारा जिले के खैरलांजी गांव की बात करते हैं, जहां रहने वाली महार जाति की सुरेखा भोतमांगे और उन का परिवार नफरती हिंसा की भेंट चढ़ गया था.
दरअसल, सुरेखा भोतमांगे एक पढ़ीलिखी औरत थीं और उन्होंने अपनी मेहनत से अपने परिवार को गरीबी से उबारा और एक पक्का मकान बनवाया. उन के परिवार में उन के पति भैयालाल, 2 बेटे सुधीर व रोशन और बेटी प्रियंका शामिल थे. प्रियंका 12वीं की टौपर थी.


खैरलांजी के कुनबी मराठा समुदाय को सुरेखा भोतमांगे की यह तरक्की बरदाश्त नहीं हो रही थी. लिहाजा, सुरेखा और उन के परिवार को तरहतरह से दबाने की कोशिश की गई. सुरेखा डरी नहीं और स्थानीय पुलिस हवलदार सिद्धार्थ गजभिये, जो भोतमांगे परिवार के रिश्तेदार थे, ने उन्हें समर्थन दिया और एससीएसटी कानून के तहत कार्रवाई की धमकी दी, जिस से कुनबियों में गुस्सा और बढ़ गया. नतीजतन, 29 सितंबर, 2006 की शाम को तकरीबन 70 कुनबियों ने सुरेखा के घर पर हमला कर दिया. उस समय घर पर सिर्फ सुरेखा और उन के बच्चे थे, जबकि उन के पति खेतों में काम कर रहे थे.

इन हमलावरों ने सुरेखा और उन की बेटी प्रियंका को नंगा कर पूरे गांव में घुमाया. इस के बाद उन के साथ गैंगरेप किया गया. सुरेखा के दोनों बेटों सुधीर और रोशन को भी नंगा कर के उन की बेरहमी से हत्या कर दी गई. बाद में सुरेखा और प्रियंका की भी हत्या कर उन की लाशों को सूखी नदी में फेंक दिया गया. Crime Story

    

Hindi Story: अतरंगी बाबाओं का सतरंगी साम्राज्य

Hindi Story: बाबा लोगों का अपना ही क्रेज होता है जनाब. ये किसी क्रिकेट लीग से कम नहीं, बस फर्क इतना है कि यहां टी-20 की जगह टीकाचंदन और चंदे का चौकाछक्का चलता है. सब से पहले मुखातिब होइए टीकाचंदन स्पैशल बाबाजी से. हाथ में छोटा सा सिंगार बौक्स, माथे पर त्रिपुंड और निगाह हमेशा इस खोज में कि कौन सा यजमान आज ‘सेवा’ करवाने के मूड में है.

ये एक ही झटके में तिलक लगा कर ऐसा आशीर्वाद देते हैं कि यजमान के पर्स का भार मनचाहे आशीर्वाद के बोझ से तत्काल ही हलका हो जाता है. 100-50 की दैनिक आमदनी से ये खुद तो गुजारा करते ही हैं, साथ में भक्ति भावना की जीडीपी भी बढ़ाते रहते हैं. फिर आते हैं गंगा किनारे वाले बाबा, जिन का लाइफस्टाइल ‘आल इनक्लूसिव नशा पैकेज’ जैसा होता है.

चिताभस्म का कुदरती फेस पैक लगा कर, गांजाभांग की और्गैनिक स्मूदी पी कर ये संसार से विरक्ति की ऐसी परिभाषा गढ़ते हैं कि मार्केटिंग वाले भी सोच में पड़ जाएं. इन का मूल और मस्त मंत्र है ‘जीवन माया है, बस नशा सच है’. इन बाबाओं के मदमस्त हालात केआगे बौलीवुड के ‘बाबा’ का नशा भी कम मालूम पड़ता है.


बाबा की एक और प्रजाति भी है. ये हिमालयन साइलैंस मोड बाबा हैं. ये वे लोग हैं, जिन्होंने परिवार, समाज, बिजली बिल, सब से मुक्ति पा रखी है. इन की साधना इतनी स्ट्रौंग है कि नैटवर्क कंपनी वाले भी इन के इलाके में टौवर लगाने की हिम्मत नहीं करते. लेकिन असली खेल शुरू होता है कथावाचक लग्जरी बाबा से. मंच ऐसा कि बौलीवुड स्टार्स का सैट फीका पड़ जाए.

आवाज में ऐसा उतारचढ़ाव कि औडियंस खुद ही नोटों का पुष्पवर्षा करने लगती है. रोज की लाखों की कमाई, विदेश यात्राएं और कम खर्च में भक्ति का हाई प्रोफाइल संस्करण ‘कथा ब्रांड अध्यात्म’.बात जब भौतिक सुख की हो तो योगी के रूप में भोगी बाबाजी की चर्चा लाजिमी है, विलासी श्रेणी के ऐसे बाबा उम्र के बंधन से मुक्त हो कर राम की बजाय ‘काम’ में लीन होते हैं.


आइए, अब पंडा समुदाय पर भी थोड़ी रोशनी डालते हैं. धार्मिक स्थलों पर इन का अधिकार ऐसा है कि मानो दिव्य भूमि की रजिस्ट्री इन के पूर्वजों के नाम से है. इन की मुसकान, इन का स्वर सब में दैवीय अनुशासन दिखाई देता है, लेकिन इस ईकोसिस्टम का असली ‘सिक्योरिटी गार्ड’ है. दूसरे शब्दों में कहें तो बाबाजी समुदाय का बाउंसर. हट्टेकट्टे, चौड़े कंधे और ऐसी पावरफुल शख्सीयत कि यजमान का श्रद्धा लैवल अचानक 200 फीसदी तक बढ़ जाता है.


इन्हें देख कर लगता है कि मंदिर के चारों ओर कोई धार्मिक डब्लूडब्लूएफ की तैयारी चल रही है. इन बाबा का मेन काम है लाइन में लगे भक्तों को आध्यात्मिक रूप से ‘सीधे’ रखना और श्रद्धालुओं में अनुशासन बढ़ाना व डराधमका कर दक्षिणा वसूली. वर्तमान में लोकतांत्रिक बाबा भी देखने को मिल रहे हैं, जो बियाबान की बजाय विधानमंडल और संसद में जनप्रतिनिधि बन कर मोहमाया के बीच मोक्ष तलाश रहे हैं.


कुलमिला कर बाबाजी का भी अपना नसीब होता है, किसी को मिलता है गंगा घाट, किसी को मिलता है जंगल का ठाट, किसी को लोकतांत्रिक सौगात, किसी को कथा का माइक, जबकि बाहुबली टाइप वाले बाबाजी को  ‘धार्मिक सिक्योरिटी’ का रूलटाइम ब्रह्मास्त्र. बहरहाल, समयसमय पर इन बाबाजी की हरकत और तबीयत देख कर यजमान के मुंह से बरबस यही बात निकल जाती है, ‘बाबा रे बाबा… बच के रहना रे बाबा…’ Hindi Story       
लेखक विनोद कुमार विक्की

 

Hindi Story: कलम का जादूगर

Hindi Story. ‘‘कोई आदमी अपनी गाड़ी के सामने आ गया है,’’ अपने पति मोहन की यह बात सुन कर किसी अनहोनी के डर से गीता का कलेजा कांप उठा.


अभी नीचे उतरने के लिए गाड़ी का दरवाजा खोला ही था कि उस आदमी का चेहरा देख कर गीता चौंक गई. उस ने ?ाट से हथेलियों से अपना चेहरा ढक लिया. वह कोई और नहीं, बल्कि गीता का सालों का खोया हुआ प्यार अजय था, लेकिन गाड़ी की टक्कर से उसे चोट नहीं आई आई थी.
‘‘सर, आप ठीक तो हैं न?’’ मोहन ने ?ाट गाड़ी से नीचे उतर कर अजय को संभालते हुए पूछा.
गीता और मोहन अपने एकलौते बेटे को लेने के लिए दिल्ली के रेलवे स्टेशन जा रहे थे, तभी यह हादसा हुआ था.


‘‘हां, मैं बिलकुल ठीक हूं,’’ अजय ने कहा. ‘‘लेकिन सर, आप यहां कैसे? मोहन ने पूछा.‘‘सर, आज ही मेरी बेटी लंदन से अपनी पढ़ाई पूरी कर के घर वापस आई थी. उस के यहां घूमने की जिद के चलते मैं यहां था,’’ अजय ने बताया. ‘‘लेकिन आप की बेटी इस समय आप के साथ नहीं है?’’ मोहन ने पूछा. ‘‘वह कुछ खरीदारी करने गई थी, आती ही होगी,’’ जवाब में अजय ठहाका मार कर हंस पड़ा, तो गीता भी उस के साथ मुसकरा उठी. काफी अरसे बाद वे दोनों साथ हंस रहे थे, लेकिन अजय को इस बात की जानकारी नहीं थी.


देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा होने लगी. सब की आंखें अजय पर टिकी हुई थीं. लेकिन गीता की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. तभी उस भीड़ को चीरती हुई एक बेहद खूबसूरत गाड़ी आ कर रुकी. उस गाड़ी के सामने गीता की गाड़ी फीकी लग रही थी. उस गाड़ी की ड्राइविंग सीट से एक लड़की उतरी और अजय को देखते हुए बोली, ‘‘पापा, आप यहां क्या कर रहे हैं? सब ठीक तो है न? यहां इतनी भीड़ क्यों जमा है?’’ ‘‘कुछ नहीं बेटा… बस ऐसे ही’’ अजय ने कहा. ‘‘तो फिर घर चलें हम?’’ वह लड़की बोली.


‘‘चलता हूं,’’ अजय ने वहां जमा भीड़ की तरफ हाथ जोड़ते हुए कहा और अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गया. उस के बैठते ही गाड़ी सड़क पर दौड़ने लगी. जब अजय की गाड़ी दूर निकल गई और गीता को यह यकीन हो गया कि अब वह भीड़ की तरफ मुड़ कर देखेगा, तो भी उसे नहीं पहचान पाएगा, लिहाजा वह गाड़ी से नीचे उतर गई. ‘‘कौन था यह आदमी?’’ गीता ने अनजान बनते हुए मोहन से पूछा. ‘‘जादूगर,’’ मोहन ने कहा.


‘‘जादूगर?’’ गीता ने मोहन का यह शब्द बड़े ही जबरदस्त अंदाज में दोहराया. ‘‘हां, कलम का जादूगर. दुनियाभर में इस के लिखे उपन्यास खूब बिकते हैं. फुरसत के पलों में मैं भी इस के उपन्यास बड़े ही चाव से पढ़ता हूं,’’ मोहन ने गीता को बताया. उस समय रात के 2 बज रहे थे, लेकिन गीता की आंखों से नींद कोसों दूर गायब थी. आज उसे रहरह कर पुरानी यादें ताजा हो रही थीं.


गीता अजय की सादगी पर मरमिटी थी. वे दोनों एक ही कालेज में पढ़ते थे और प्यार भी करते थे. लेकिन उन दोनों के प्यार को गीता के भैया की नजर लग गई थी.गीता के भैया नहीं चाहते थे कि वह एक गरीब लड़के से प्यार करे, क्योंकि गीता एक अमीर परिवार से थी, इसलिए उस के भैया की नजर में अजय गरीब होने के साथसाथ एक गंवार और जाहिल लड़का भी था. लेकिन प्यार तो प्यार होता है. एक दिन गीता के भैया ने उन दोनों को एकसाथ देख लिया.

उसी दिन भैया ने गीता की शादी अपने दोस्त के बेटे के साथ तय कर दी. ‘भैया, मैं यह शादी नहीं कर सकती,’ गीता ने कहा. ‘क्यों? क्या बुराई है इस रिश्ते में?’ भैया ने पूछा. ‘कुछ नहीं भैया. बुराई तो आप की बहन में है जो किसी से बेपनाह मुहब्बत कर बैठी है.’ ‘किस से? उस अनपढ़, जाहिल, गंवार लड़के से, जिस के पास कोई ठिकाना नहीं है?’ ‘हां भैया.

आप की यह बहन उस के बगैर जिंदा नहीं रह सकती, इसलिए आप मेरा प्यार मेरी झोली  में अपनी तरफ से भीख समझ कर डाल दीजिए,’ यह कहते हुए गीता ने अपना आंचल भाई के आगे फैलाया ही था कि भाई ने गीता के गाल पर एक थप्पड़ रसीद कर दिया. थप्पड़ इतना जोरदार था कि गीता ‘धड़ाम’ से फर्श पर गिर गई. गीता को इस बात की कतई उम्मीद नहीं थी. आज अपने मांबाप की बहुत कमी खल रही थी कि तभी अजय की आवाज उस के कानों में गूंजी.


‘देख लीजिए भैया. अजय आज अपने प्यार को छिनते देख कर आप के पास चला आया है.’ ‘मैं इस की हिम्मत का कद्र करता हूं, लेकिन आज यह मेरे हाथों से जिंदा बच कर नहीं जाएगा,’ कहते हुए भैया दीवार पर टंगी हुई म्यान से तलवार खींच कर दरवाजे की तरफ बढ़ गए. ‘नहीं भैया, आप ऐसा नहीं करेंगे. आप जहां चाहेंगे, मैं वहीं शादी करने के लिए तैयार हूं,’ जब गीता ने यह कहा, तो भैया के बढ़ते कदम रुक गए.


‘तो जा कर उस से कह दो कि तुम इस शादी से खुश हो. साथ ही यह भी बोल देना कि आज के बाद वह
यहां आसपास भी न दिखाई दे,’ भैया ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा. अजय गली में खड़ा था. गीता के बाहर आते ही उस ने गीता का हाथ कस कर पकड़ कर कहा, ‘यह मैं क्या सुन रहा हूं…’ ‘तुम ने ठीक सुना है…’ गीता की आवाज कड़क थी, ‘आखिर जिस से मेरी शादी हो रही है, उस के पास सबकुछ है. तुम्हारे पास क्या है?’


‘क्या तुम ने इसलिए मुझसे से प्यार किया था कि आज मेरी हैसियत का मजाक उड़ा सको?’ गीता ने कुछ नहीं सुना और घर के भीतर चली गई. देखते ही देखते न जाने कैसे 25 साल गुजर गए, पता ही नहीं चला और अजय की याद दिल के कोने में ही दब गई. लेकिन उस की याद गीता में एक टीस पैदा कर देती थी. ‘‘गीता सुबह हो गई, तुम कहां खोई हो?’’ मोहन के कहने पर वह वर्तमान में आई.


‘‘अभी थोड़ी देर में उठती हूं,’’ कह कर गीता ने मोहन से पीछा छुड़ाया. थोड़ी देर में मोहन नहाने के लिए बाथरूम में चले गए. अब मोहन से क्या कहती गीता कि वह कभी अजय से दिलोजान से मुहब्बत करती थी. उस दिन के बाद जब भी वह उस के लिखे गए उपन्यास को पढ़ती है, तो उसे अजय से हुई आखिरी मुलाकात याद आ जाती है.


गीता रोते हुए अजय से बोल रही थी, ‘अजय, आज मुझे इस बात की उतनी तकलीफ नहीं है कि कल सवेरे हम दोनों एकदूसरे से हमेशा के लिए अलग हो जाएंगे, जितना मुझे इस बात की तकलीफ है कि मेरे भैया तुम्हें एक अनपढ़, जाहिल, गंवार से ज्यादा कुछ नहीं समझाते हैं, क्योंकि तुम गरीब हो. ‘इसे हमदर्दी मत समझना पर तुम्हें तुम्हारी गरीबी से नजात दिलाने के लिए मैं तुम्हारे लिए एक कलम लाई हूं.

जिस तरह तुम ने मेरे बगैर जीना नहीं सीखा है, उसी तरह तुम इस कलम से सीख लेना और अच्छा लिखना.‘तुम अपना चेहरा तभी  मुझे दिखाना जब तुम एक कलम का जादूगर बन चुके होगे,’ इतना कह कर अजय की जेब में कलम रख दी और गीता अपने घर की तरफ बढ़ गई. पुलिस से उगाही करने वालों पर लगा मकोका

दिल्ली में पुलिस वालों को ‘ब्लैकमेल’ कर वसूली करने वाले गैंग को दबोच कर उस पर महाराष्ट्र कंट्रोल औफ और्गैनाइज्ड क्राइम एक्ट लगा दिया गया. क्राइम ब्रांच की एंटी रौबरी एंड स्नैचिंग सैल ने इस मामले में केस दर्ज किया और गिरोह के सरगना राजकुमार उर्फ राजू मीणा को गिरफ्तार कर लिया. उसे दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में पेश किया, जहां से 7 दिन की रिमांड मिली.

पुलिस अफसरों ने बताया कि यह उगाही गैंग दिल्ली नौर्थईस्ट जिले में साल 2018 से सक्रिय था, जो ज्यादातर ट्रैफिक पुलिस वालों को टारगेट करता था. ट्रैफिक स्टाफ से कथिततौर पर ‘रिश्वत’ लेते हुए का वीडियो होने का दावा किया जाता था. इस के बाद वे एक लाख से ले कर 5 लाख रुपए तक मांगते थे. पैसा नहीं देने पर गैंग मैंबर आला अफसरों के साथसाथ सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर कैरियर बरबाद करने की धमकी देते थे. कई पुलिस वाले इस गिरोह के जाल में फंसे, जिन्होंने मोटी रकम दे कर अपना पीछा छुड़ाया.  Hindi Story

लेखक – आनंद कुमार नायक

सरस सलिल ने Bhojpuri Cine Awards के छठे संस्करण की घोषणा की

Bhojpuri Cine Awards: लखनऊ, 28 मार्च 2025: भारत की सबसे अधिक पढ़ी जाने वाली हिंदी पत्रिकाओं में से एक सरस सलिल, 10 अप्रैल 2025 को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स 2025 के छठे संस्करण का आयोजन लखनऊ में करेगी. भोजपुरी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को सम्मानित करने के लिए इस भव्य समारोह का आयोजन होने जा रहा है.

सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड्स एक ऐसा खास कार्यक्रम बन गया है, जहां फिल्म निर्माताओं, अभिनेताओं, टेक्निशियन और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के अन्य सदस्यों के बेहतरीन काम को सराहा और सम्मानित किया जाता है. इस साल के पुरस्कार समारोह में 50 से ज़्यादा कैटेगरी में भोजपुरी सिनेमा में अवार्ड दिए जाएंगें, जिसमें एक्टिंग, डायरेक्टिंग, संगीत, सिनेमा और अन्य क्षेत्रों में उपलब्धियों को पुरूस्कृत किया जाएगा. इसके अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (पुरुष और महिला) शामिल हैं.

इस अवसर पर भोजपुरी सिनेमा के कुछ सबसे बड़े नाम शामिल होंगे, जिनमें दिनेश यादव निरहुआ, अरविंद अकेला कल्लू, आम्रपाली दुबे, अंजना सिंह, संजय पांडे, केके गोस्वामी, समर सिंह, रक्षा गुप्ता, यामिनी सिंह, देव सिंह, विमल पांडे, सीपी भट्ट, विनोद मिश्रा, शुभम तिवारी, पल्लवी गिरी, राधा सिंह, माही खान, ऋचा दीक्षित और विद्या सिंह शामिल हैं. उनकी मौजूदगी भोजपुरी सिनेमा के इस भव्य उत्सव की शोभा को बढ़ाएगी.

ये पुरस्कार न केवल भोजपुरी सिनेमा के सितारों को बल्कि पर्दे के पीछे के उन नायकों को भी पहचान दिलाने का मंच प्रदान करते हैं जो फिल्मों को सफल बनाते हैं. निर्माता और निर्देशक से लेकर टेक्निशियन, कोरियोग्राफर और साउंड इंजीनियर तक, फिल्म की सफलता में योगदान देने वाले हर व्यक्ति को पहचाना और सम्मानित किया जाता है.

परेश नाथ, दिल्ली प्रेस के एडिटर-इन-चीफ और पब्लिशर ने कहा, “सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है; यह भोजपुरी सिनेमा को आकार देने वाले जुनून और रचनात्मकता को पुरूस्कृत करता है. हमें इंडस्ट्री के विकास और सफलता में योगदान देने वाली अविश्वसनीय प्रतिभा को पहचानने और सम्मानित करने पर गर्व है. इस साल का आयोजन और भी शानदार होगा, जिसमें उन सितारों और गुमनाम नायकों को सराहा जाएगा जो सिनेमा को एक बेहतरीन कला के रूप में लोगों के सामने लेकर आते हैं.”

पुरस्कारों के लिए नामांकन प्रक्रिया बहुत ही सावधानीपूर्वक होती है. इस साल के पुरस्कारों के लिए 1 जनवरी, 2024 से 31 दिसंबर, 2024 के बीच रिलीज़ होने वाली सभी फ़िल्में शामिल हैं. इंडस्ट्री के विशेषज्ञों, आलोचकों और सिनेमा जगत की प्रमुख हस्तियों का एक पैनल नामांकितों का मूल्यांकन करेगा और प्रत्येक श्रेणी से विजेताओं का चयन करेगा.

पुरस्कार समारोह में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और अभिनेत्री, साथ ही सहायक कलाकारों के लिए पुरस्कार दिए जाएंगे. इसके अलावा, सर्वश्रेष्ठ सिनेमेटोग्राफी और एडिटिंग जैसे तकनीकी पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले और संगीत जैसे रचनात्मक पुरस्कार भी शामिल होंगे. इनके अलावा, लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, उभरती प्रतिभा और साल की सर्वश्रेष्ठ भोजपुरी फिल्म जैसी खास श्रेणियां भी होंगी, जिसमें इंडस्ट्री के दिग्गजों और नए कलाकारों की उपलब्धियों को सम्मानित किया जाएगा.

सरस सलिल अवार्ड्स के बारे में अधिक जानने और नए समाचारों से अपडेट रहने के लिए, उनकी आधिकारिक वेबसाइट सरस सलिल पुरस्कार पर जाएं.

सरस सलिल के बारे में

सरस सलिल भारत की अग्रणी हिंदी पत्रिकाओं में से एक है, जिसे दिल्ली प्रेस द्वारा प्रकाशित किया जाता है. यह अपनी बेहतर लेख के लिए जानी जाती है, जिसमें सिनेमा, लाइफस्टाइल, संस्कृति और सामाजिक मुद्दों सहित कई विषयों को शामिल किया जाता है. भारत और उसके बाहर के पाठकों के साथ, सरस सलिल भोजपुरी सिनेमा पर विशेष ध्यान देने के साथ अलग-अलग रीजनल फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और उनका जश्न मनाने में सबसे आगे रहा है. अपने पुरस्कारों के माध्यम से, सरस सलिल प्रतिभा, कड़ी मेहनत और रचनात्मकता के लिए मान्यता का प्रतीक बना हुआ है, जो दर्शकों का मनोरंजन करने और उन्हें प्रेरित करने वाली फिल्में बनाने में जाता है.

मीडिया जानकारी के लिए

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भव्य होगा छठा ‘Saras Salil Bhojpuri Cine Award’, लखनऊ में होगा रंगारंग आयोजन

Saras Salil Bhojpuri Cine Award : दिल्ली प्रेस की देश चर्चित पत्रिका ‘सरस सलिल’ द्वारा प्रत्येक वर्ष ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड’ का आयोजन किया जाता है. इस साल ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड’ का छठा साल होगा.

इस आयोजन के संदर्भ में प्रेस क्लब बस्ती में आयोजित प्रेस वार्ता में दिल्ली प्रेस के दिल्ली कार्यालय से आए भानु प्रकाश राणा ने बताया कि इस बार के अवॉर्ड समारोह में भोजपुरी के सभी बड़े और चर्चित एक्टर और एक्ट्रेस के साथसाथ चरित्र अभिनेताओं, फिल्मों से जुड़े टेक्नीशियंस को निर्धारित कैटेगिरी में जूरी के निर्णय के आधार पर सम्मानित किया जाएगा. इस के लिए नॉमिनेशन की प्रक्रिया चालू है. भोजपुरी फिल्म निर्माता साल 2024 में रिलीज हुई अपनी फिल्मों का नॉमिनेशन भेज सकते हैं.

‘ढेला बाबा’ के नाम से विख्यात भोजपुरी फिल्मों के चर्चित अभिनेता और कॉमेडियन सीपी भट्ट ने कहा कि वे ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड’ के सभी एडिशन से जुड़े रहे हैं. इस बार भी वे अपने चुलबुले अंदाज में दर्शकों को गुदगुदाने आएंगे. उन्होंने बताया कि वे इस बार एंकरिंग टीम का हिस्सा भी रहेंगे.

भोजपुरी गायक और अभिनेता के साथसाथ ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड’ के आयोजन से जुड़े विवेक पांडेय ने बताया कि इस अवॉर्ड समारोह में भोजपुरी के सभी जानेमाने सिंगर शिरकत कर रहे हैं.

आयोजन से जुड़े समाजसेवी नितेश शर्मा ने कहा कि हर साल की तरह इस साल भी सभी के लिए प्रवेश निःशुल्क होगा. अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि आयोजन में सुरक्षा के मद्देनजर सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियां भी मुस्तैदी से जिम्मेदारी संभालेंगी. भोजपुरी गायक अमरेश पाण्डेय अमृत नें भी तैयारिओं को लेकर अपनी बात रखा.

अंत में इस समारोह से जुड़े बृहस्पति कुमार पांडेय ने बताया कि ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड‘ का पहला और तीसरा आयोजन बस्ती में हुआ था. बाकी सालों में यह आयोजन अयोध्या में किया गया था, जिस में भोजपुरी के टॉप हीरो दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’, प्रदीप पांडेय ‘चिंटू’, अरविंद अकेला ‘कल्लू’, समर सिंह, विमल पांडेय के अलावा गुंजन सिंह, आम्रपाली दुबे, रितु सिंह, अंजना सिंह, रक्षा गुप्ता, अनारा गुप्ता, श्रुति राव, पल्लवी गिरी, पाखी हेगड़े, कनक यादव, कनक पांडेय, संजना सिल्क, मधु सिंह राजपूत, निशा सिंह, यामिनी सिंह जैसी हीरोइनों ने भी शिरकत की थी.

बृहस्पति कुमार पांडेय ने यह भी बताया कि भोजपुरी फिल्मों में विलेन के तौर पर अपनी छाप छोड़ रहे संजय पांडेय, देव सिंह, सुशील सिंह, अनूप अरोरा, बृजेश त्रिपाठी, सीपी भट्ट, सिंगर प्रियंका सिंह, अंतरा सिंह, प्रियंका, कविता यादव, अलका झा, संजोली पांडेय, ममता राउत, अनुपमा यादव, कॉमेडियन मनोज सिंह टाइगर, केके गोस्वामी, आरके गोस्वामी, रोहित सिंह मटरू, सीपी भट्ट, लोटा तिवारी, धामा वर्मा जैसे नामचीन एक्टर और एक्ट्रेस के साथसाथ तमाम भोजपुरी फिल्म टेक्नीशियंस भी शामिल होते रहे हैं. इस बार का आयोजन और ज्यादा भव्य और रंगारंग होगा.

प्यार अपने से: जब प्यार ने तोड़ी मर्यादा- भाग 3

संध्या ने कोई जवाब नहीं दिया. इसी बीच एक बार सोमेन के दोस्त ने उन्हें खबर दी कि उस ने रिया और गोपाल को एकसाथ सिनेमाघर से निकलते देखा है.

इस के कुछ ही दिनों बाद संध्या के रिश्ते के एक भाई ने बताया कि उस ने गोपाल और रिया को रैस्टौरैंट में लंच करते देखा है.

सोमेन ने अपनी पत्नी संध्या से कहा, ‘‘रिया और गोपाल दोनों को कई बार सिनेमाघर या होटल में साथ देखा गया है. उसे समझाओ कि उस के लिए अच्छे घरों से रिश्ते आ रहे हैं. सिर्फ उस के हां कहने की देरी है.’’

संध्या बोली, ‘‘रिया ने मुझे बताया था कि वह गोपाल से प्यार करती है.’’

सोमेन चौंक पड़े और बोले, ‘‘क्या? रिया और गोपाल? यह तो बिलकुल भी नहीं हो सकता.’’

अगले दिन सोमेन ने रिया से कहा, ‘‘बेटी, तेरे रिश्ते के लिए काफी अच्छे औफर हैं. तू जिस से बोलेगी, हम आगे बात करेंगे’’

रिया ने कहा, ‘‘पापा, मैं बहुत दिनों से सोच रही थी कि आप को बताऊं कि मैं और गोपाल एकदूसरे को चाहते हैं. मैं ने मम्मी को बताया भी था कि पीजी पूरा कर के मैं शादी करूंगी.’’

‘‘बेटी, कहां गोपाल और कहां तुम? उस से तुम्हारी शादी नहीं हो सकती, उसे भूल जाओ. अपनी जाति के अच्छे रिश्ते तुम्हारे सामने हैं.’’

‘‘पापा, हम दोनों पिछले 5 सालों से एकदूसरे को चाहते हैं. आखिर उस में क्या कमी है?’’

‘‘वह एक आदिवासी है और हम ऊंची जाति के शहरी लोग हैं.’’

‘‘पापा, आजकल यह जातपांत, ऊंचनीच नहीं देखते. गोपाल भी एक अच्छा डाक्टर है और उस से भी पहले बहुत नेक इनसान है.’’

सोमेन ने गरज कर कहा, ‘‘मैं बारबार तुम्हें मना कर रहा हूं… तुम समझती क्यों नहीं हो?’’

‘‘पापा, मैं ने भी गोपाल को वचन दिया है कि मैं शादी उसी से करूंगी.’’

उसी समय संध्या भी वहां आ गई और बोली, ‘‘अगर रिया गोपाल को इतना ही चाहती है, तो उस से शादी करने में क्या दिक्कत है? मुझे तो गोपाल में कोई कमी नहीं दिखती है.’’

सोमेन चिल्ला कर बोले, ‘‘मेरे जीतेजी यह शादी नहीं हो सकती. मैं तो कहूंगा कि मेरे मरने के बाद भी ऐसा नहीं करना. तुम लोगों को मेरी कसम.’’

रिया बोली, ‘‘ठीक है, मैं शादी ही नहीं करूंगी. तब तो आप खुश हो जाएंगे.’’

सोमेन बोले, ‘‘नहीं बेटी, तुझे शादीशुदा देख कर मुझे बेहद खुशी होगी. पर तू गोपाल से शादी करने की जिद छोड़ दे.’’

‘‘पापा, मैं ने आप की एक बात मान ली. मैं गोपाल को भूल जाऊंगी. परंतु आप भी मेरी एक बात मान लें, मुझे किसी और से शादी करने के लिए मजबूर नहीं करेंगे.’’

ये बातें फिलहाल यहीं रुक गईं. रात में संध्या ने पति सोमेन से पूछा, ‘‘क्या आप बेटी को खुश नहीं देखना चाहते हैं? आखिर गोपाल में क्या कमी है?’’

सोमेन ने कहा, ‘‘गोपाल में कोई कमी नहीं है. उस के आदिवासी होने पर भी मुझे कोई एतराज नहीं है. वह सभी तरह से अच्छा लड़का है, फिर भी…’’

रिया को नींद नहीं आ रही थी. वह भी बगल के कमरे में उन की बातें सुन रही थी. वह अपने कमरे से बाहर आई और पापा से बोली, ‘‘फिर भी क्या…? जब गोपाल में कोई कमी नहीं है, फिर आप की यह जिद बेमानी है.’’

सोमेन बोले, ‘‘मैं नहीं चाहता कि तेरी शादी गोपाल से हो.’’

‘‘नहीं पापा, आखिर आप के न चाहने की कोई तो ठोस वजह होनी चाहिए. आप प्लीज मुझे बताएं, आप को मेरी कसम. अगर कोई ऐसी वजह है, तो मैं खुद ही पीछे हट जाऊंगी. प्लीज, मुझे बताएं.’’

सोमेन बहुत घबरा उठे. उन को पसीना छूटने लगा. पसीना पोंछ कर अपनेआप को संभालते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह शादी इसलिए नहीं हो सकती, क्योंकि…’’

वे बोल नहीं पा रहे थे, तो संध्या ने उन की पीठ सहलाते हुए उन को हिम्मत दी और कहा, ‘‘हां बोलिए आप, क्योंकि… क्या?’’

सोमेन बोले, ‘‘तो लो सुनो. यह शादी नहीं हो सकती है, क्योंकि गोपाल रिया का छोटा भाई है.

‘‘जब मैं हजारीबाग में अकेला रहता था, तब मुझ से यह भूल हो गई थी.’’

रिया और संध्या को काटो तो खून नहीं. दोनों हैरानी से सोमेन को देख रही थीं. रिया की आंखों से आंसू गिरने लगे. कुछ देर बाद वह सहज हुई और अपने कमरे में चली गई.

रात में ही उस ने गोपाल को फोन कर के कहा, ‘‘गोपाल, क्या तुम मुझ से सच्चा प्यार करते हो?’’

गोपाल बोला, ‘क्या इतनी रात गए यही पूछने के लिए फोन किया है?’

‘‘तुम ने सुना होगा कि प्यार सिर्फ पाने का नाम नहीं है, इस में कभी खोना भी पड़ता है.’’

गोपाल ने कहा, ‘हां, सुना तो है.’’

‘‘अगर यह सही है, तो तुम्हें मेरी एक बात माननी होगी. बोलो मानोगे?’’ रिया बोली.

गोपाल बोला, ‘यह कैसी बात कर रही हो आज? तुम्हारी हर जायज बात मैं मानूंगा.’

‘‘तो सुनो. बात बिलकुल जायज है, पर मैं इस की कोई वजह नहीं बता सकती हूं और न ही तुम पूछोगे. ठीक है?’’

‘ठीक है, नहीं पूछूंगा. अब बताओ तो सही.’

रिया बोली, ‘‘हम दोनों की शादी नहीं हो सकती. यह बिलकुल भी मुमकिन नहीं है. वजह जायज है और जैसा कि मैं ने पहले ही कहा है कि वजह न मैं बता सकती हूं, न तुम पूछना कभी.’’

गोपाल ने पूछा, ‘तो क्या हमारा प्यार झूठा था?’

रिया बोली, ‘‘प्यार सच्चा है, पर याद करो, हम ने तय किया था कि शादी नहीं होने तक हमारा प्यार ‘अधूरा प्यार’ रहेगा. बस, यही समझ लो.

‘‘अब तुम कहीं भी शादी कर लो, पर मेरातुम्हारा साथ बना रहेगा और तुम चाहोगे भी तो भी मैं कभी भी तुम्हारे घर आ धमकूंगी,’’ इतना कह कर रिया ने फोन रख दिया.

प्यार अपने से: जब प्यार ने तोड़ी मर्यादा- भाग 2

हजारीबाग से जाने के पहले लक्ष्मी ने सोमेन से अकेले में कहा, ‘‘बाबूजी, आप से एक बात कहना चाहती हूं.’’

‘‘हां, कहो,’’ सोमेन ने कहा.

‘‘गोपाल आप का ही खून है.’’

सोमेन बोले, ‘‘यह तो मैं यकीनी तौर पर नहीं मान सकता हूं. जो भी हो, पर तुम मुझ से चाहती क्या हो?’’

‘‘बाबूजी, मैं बेटे की कसम खा कर कहती हूं, गोपाल आप का ही खून है.’’

‘‘ठीक है. बोलो, तुम कहना क्या चाहती हो?’’

‘‘ज्यादा कुछ नहीं. बस, यह भी पढ़लिख कर अच्छा इनसान बने. मैं किसी से कुछ नहीं बोलूंगी. आप इतना भरोसा तो मुझ पर कर सकते हैं,’’ लक्ष्मी बोली.

‘‘ठीक है. तुम लोगों के बच्चों का तो हर जगह आसानी से रिजर्वेशन कोटे में दाखिला हो ही जाता है. फिर भी मुझ से कोई मदद चाहिए तो बोलना.’’

इस के बाद सोमेन रांची चले गए. समय बीतता गया. सोमेन की बेटी रिया 10वीं पास कर आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गई थी.

बीचबीच में इंस्पैक्शन के लिए सोमेन को हजारीबाग जाना पड़ता था. वे वहीं आ कर बंगले में ठहरते थे. लक्ष्मी भी उन से मिला करती थी. उस ने सोमेन से कहा था कि गोपाल भी 10वीं क्लास के बाद दिल्ली के अच्छे स्कूल और कालेज में पढ़ना चाहता है. उसे कुछ माली मदद की जरूरत पड़ सकती है.

सोमेन ने उसे मदद करने का भरोसा दिलाया था. गोपाल अब बड़ा हो गया था. वे उसे देख कर खुश हुए. शक्ल तो मां की थी, पर रंग गोरा था. छरहरे बदन का साधारण, पर आकर्षक लड़का था. उस के नंबर भी अच्छे आते थे.

रिया के दिल्ली जाने के एक साल बाद गोपाल ने भी दिल्ली के उसी स्कूल में दाखिला ले लिया. सोमेन ने गोपाल की 12वीं जमात तक की पढ़ाई के लिए रुपए उस के बैंक में जमा करवा दिए थे.

रिया गोपाल से एक साल सीनियर थी. पर एक राज्य का होने के चलते दोनों में परिचय हो गया. छुट्टियों में ट्रेन में अकसर आनाजाना साथ ही होता था. गोपाल और रिया दोनों का इरादा डाक्टर बनने का था.

रिया ने 12वीं के बाद कुछ मैडिकल कालेज के लिए अलगअलग टैस्ट दिए, पर वह कहीं भी पास नहीं कर सकी थी. तब उस ने एक साल कोचिंग ले कर अगले साल मैडिकल टैस्ट देने की सोची. वहीं दिल्ली के अच्छे कोचिंग इंस्टीट्यूट में कोचिंग शुरू की.

अगले साल गोपाल और रिया दोनों ने मैडिकल कालेज में दाखिले के लिए टैस्ट दिए. इस बार दोनों को कामयाबी मिली थी. गोपाल के नंबर कुछ कम थे, पर रिजर्वेशन कोटे में तो उस का दाखिला होना तय था.

गोपाल और रिया दोनों ने बीएचयू मैडिकल कालेज में दाखिला लिया. सोमेन गोपाल की पढ़ाई का भी खर्च उठा रहे थे. अब दोनों की क्लास भी साथ होती थी. आपस में मिलनाजुलना भी ज्यादा हो गया था. छुट्टियों में भी साथ ही घर आते थे.

वहां से शेयर टैक्सी से हजारीबाग जाना आसान था. हजारीबाग के लिए कोई अलग ट्रेन नहीं थी. जब कभी सोमेन रिया को लेने रांची स्टेशन जाते थे, तो वे गोपाल को भी बिठा लेते थे और अगर सोमेन को औफिशियल टूर में हजारीबाग जाना पड़ता था, तो गोपाल को वे साथ ले जाते थे. इस तरह समय बीतता गया और गोपाल व रिया अब काफी नजदीक आ गए थे. वे एकदूसरे से प्यार करने लगे थे.

गोपाल और रिया दोनों असलियत से अनजान थे. दोनों के मातापिता भी उन की प्रेम कहानी से वाकिफ नहीं थे. उन्होंने पढ़ाई के बाद अपना घर बसाने का सपना देख रखा था. साढ़े 4 साल बाद दोनों ने अपनी एमबीबीएस पूरी कर ली. आगे उसी कालेज में दोनों ने एक साल की इंटर्नशिप भी पूरी की.

रिया काफी समझदार थी. उस की शादी के लिए रिश्ते आने लगे, पर उस ने मना कर दिया और कहा कि अभी वह डाक्टरी में पोस्ट ग्रेजुएशन करेगी.

लक्ष्मी कुछ दिनों से बीमार चल रही थी. इसी बीच सोमेन भी हजारीबाग में थे. उस ने सोमेन से कहा, ‘‘बाबूजी, मेरा अब कोई ठिकाना नहीं है. आप गोपाल का खयाल रखेंगे?’’

सोमेन ने समझाते हुए कहा, ‘‘अब गोपाल समझदार डाक्टर बन चुका है. वह अपने पैरों पर खड़ा है. फिर भी उसे मेरी जरूरत हुई, तो मैं जरूर मदद करूंगा.’’

कुछ दिनों बाद ही लक्ष्मी की मौत हो गई.

गोपाल और रिया दोनों ने मैडिकल में पोस्ट ग्रैजुएशन का इम्तिहान दिया था. वे तो बीएचयू में पीजी करना चाहते थे, पर वहां उन्हें सीट नहीं मिली. दोनों को रांची मैडिकल कालेज आना पड़ा.

उन में प्रेम तो जरूर था, पर दोनों में से किसी ने भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया था. दोनों ने तय किया कि जब तक उन की शादी नहीं होती, इस प्यार को प्यार ही रहने दिया जाए.

रिया की मां संध्या ने एक दिन उस से कहा, ‘‘तुम्हारे लिए अच्छेअच्छे घरों से रिश्ते आ रहे हैं. तुम पोस्ट ग्रेजुएशन करते हुए भी शादी कर सकती हो. बहुत से लड़केलड़कियां ऐसा करते हैं.’’

रिया बोली, ‘‘करते होंगे, पर मैं नहीं करूंगी. मुझ से बिना पूछे शादी की बात भी मत चलाना.’’

‘‘क्यों? तुझे कोई लड़का पसंद है, तो बोल न?’’

‘‘हां, ऐसा ही समझो. पर अभी हम दोनों पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे रहे हैं. शादी की जल्दी किसी को भी नहीं है. पापा को भी बता देना.’’

प्यार अपने से: जब प्यार ने तोड़ी मर्यादा- भाग 1

झारखंड राज्य का एक शहर है हजारीबाग. यह कुदरत की गोद में बसा छोटा सा, पर बहुत खूबसूरत शहर है. पहाड़ियों से घिरा, हरेभरे घने जंगल, झील, कोयले की खानें इस की खासीयत हैं. हजारीबाग के पास ही में डैम और नैशनल पार्क भी हैं. यह शहर अभी हाल में ही रेल मार्ग से जुड़ा है, पर अभी भी नाम के लिए 1-2 ट्रेनें ही इस लाइन पर चलती हैं. शायद इसी वजह से इस शहर ने अपने कुदरती खूबसूरती बरकरार रखी है.

सोमेन हजारीबाग में फौरैस्ट अफसर थे. उन दिनों हजारीबाग में उतनी सुविधाएं नहीं थीं, इसलिए उन की बीवी संध्या अपने मायके कोलकाता में ही रहती थी.

दरअसल, शादी के बाद कुछ महीनों तक वे दोनों फौरैस्ट अफसर के शानदार बंगले में रहते थे. जब संध्या मां बनने वाली थी, सोमेन ने उसे कोलकाता भेज दिया था. उन्हें एक बेटी हुई थी. वह बहुत खूबसूरत थी, रिया नाम था उस का. सोमेन हजारीबाग में अकेले रहते थे. बीचबीच में वे कोलकाता जाते रहते थे.

हजारीबाग के बंगले के आउट हाउस में एक आदिवासी जोड़ा रहता था. लक्ष्मी सोमेन के घर का सारा काम करती थी. उन का खाना भी वही बनाती थी. उस का मर्द फूलन निकम्मा था. वह बंगले की बागबानी करता था और सारा दिन हंडि़या पी कर नशे में पड़ा रहता था.

एक दिन दोपहर बाद लक्ष्मी काम करने आई थी. वह रोज शाम तक सारा काम खत्म कर के रात को खाना टेबल पर सजा कर चली जाती थी.

उस दिन मौसम बहुत खराब था. घने बादल छाए हुए थे. मूसलाधार बारिश हो रही थी. दिन में ही रात जैसा अंधेरा हो गया था.

अपने आउट हाउस में बंगले तक दौड़ कर आने में ही लक्ष्मी भीग गई थी. सोमेन ने दरवाजा खोला. उस की गीली साड़ी और ब्लाउज के अंदर से उस के सुडौल उभार साफ दिख रहे थे.

सोमेन ने लक्ष्मी को एक पुराना तौलिया दे कर बदन सुखाने को कहा, फिर उसे बैडरूम में ही चाय लाने को कहा. बिजली तो गुल थी. उन्होंने लैंप जला रखा था.

थोड़ी देर में लक्ष्मी चाय ले कर आई. चाय टेबल पर रखने के लिए जब वह झुकी, तो उस का पल्लू सरक कर नीचे जा गिरा और उस के उभार और उजागर हो गए.

सोमेन की सांसें तेज हो गईं और उन्हें लगा कि कनपटी गरम हो रही है. लक्ष्मी अपना पल्लू संभाल चुकी थी. फिर भी सोमेन उसे लगातार देखे जा रहे थे.

यों देखे जाने से लक्ष्मी को लगा कि जैसे उस के कपड़े उतारे जा रहे हैं. इतने में सोमेन की ताकतवर बाजुओं ने उस की कमर को अपनी गिरफ्त में लेते हुए अपनी ओर खींचा.

लक्ष्मी भी रोमांचित हो उठी. उसे मरियल पियक्कड़ पति से ऐसा मजा नहीं मिला था. उस ने कोई विरोध नहीं किया और दोनों एकदूसरे में खो गए.

इस घटना के कुछ महीने बाद सोमेन ने अपनी पत्नी और बेटी रिया को रांची बुला लिया. हजारीबाग से रांची अपनी गाड़ी से 2 ढाई घंटे में पहुंच जाते हैं.

सोमेन ने उन के लिए रांची में एक फ्लैट ले रखा था. उन के प्रमोशन की बात चल रही थी. प्रमोशन के बाद उन का ट्रांसफर रांची भी हो सकता है, ऐसा संकेत उन्हें डिपार्टमैंट से मिल चुका था.

इधर लक्ष्मी भी पेट से हो गई थी. इस के पहले उसे कोई औलाद न थी. लक्ष्मी के एक बेटा हुआ. नाकनक्श से तो साधारण ही था, पर रंग उस का गोरा था. आमतौर पर आदिवासियों के बच्चे ऐसे नहीं होते हैं.

अभी तक सोमेन हजारीबाग में ही थे. वे मन ही मन यह सोचते थे कि कहीं यह बेटा उन्हीं का तो नहीं है. उन्हें पता था कि लक्ष्मी की शादी हुए 6 साल हो चुके थे, पर वह पहली बार मां बनी थी.

सोमेन को तकरीबन डेढ़ साल बाद प्रमोशन और ट्रांसफर और्डर मिला. तब तक लक्ष्मी का बेटा गोपाल भी डेढ़ साल का हो चुका था.

प्रमोद शास्त्री को मिला बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड

भोजपुरी फ़िल्म जगत में प्रयोगधर्मिता के साथ सिनेमा निर्माण की पहचान रखने वाले निर्देशक प्रमोद शास्त्री को बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड मिला है। उन्हें यह अवार्ड प्रसिद्ध  दिल्ली प्रेस की महत्वपूर्ण पत्रिका सरस सलिल के द्वारा आयोजित भोजपुरी सिने अवार्ड में इस सम्मान से नवाजा गया है।  यह अवार्ड उन्हें उनकी फिल्म ‘प्यार तो होना ही था’ में बेतरीन डायरेक्शन के लिए दिया गया। वहीं इस फ़िल्म के हिस्से और भी कई अवार्ड आए। बता दें कि प्रमोद शास्त्री के लिए सरस सलिल भोजपुरी सिने अवॉर्ड यह दूसरी बार हुआ है कि उनके कार्यों को इस सम्मान से सराहा गया है। उन्हें इससे पहले भोजपुरी फ़िल्म छलिया के लिए बेस्ट डायरेक्टर (क्रिटिक) का अवार्ड मिल चुका है।

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प्रमोद शास्त्री ने अपने क्रिएशन क्षमता को कभी बांध कर नहीं रखा और एक के बाद एक बेहतरीन व सराहनीय फिल्मों के निर्माण में वे आज भी लगे हैं। प्रमोद शास्त्री इन दिनों अपनी डेब्यू हिंदी फिल्म की शूटिंग में बिजी हैं, जिसका नाम है “तुम तक”। उन्होंने हाल ही में इस फ़िल्म के 35 दिनों का शूटिंग शेड्यूल पूरा किया। इस शेड्यूल की शूटिंग नैनीताल उत्तराखंड हुई है, जबकि मई प्रथम सप्ताह में गानों की शूटिंग के लिए वे कश्मीर जाने वाले हैं, जहां की मनोरम वादियों को वे अपने सिनेमाई स्कोप से दर्शकों को सामने लाने वाले हैं।

प्रमोद शास्त्री का कल्चरल एक्टिविटी में रुचि स्कूल के दिनों से ही रही है। उसके बाद कॉलेज के दिनों में वे नाटक लिखते और निर्देशित करते थे, जिसे यूनिवर्सिटी स्तर के साथ – साथ राज्य स्तर पर भी सराहा गया। इसके बाद डॉ राम मनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी कॉलेज से उन्होंने स्नातक की और फिर प्रमोद शास्त्री सपनों के शहर बॉम्बे चले गए, जहां उन्होंने नवोदित फिल्म और टेलीविजन उद्योग में शामिल हो गए। यहां एक सहायक के रूप में शुरुआत की और निर्देशक बनने के लिए अपने तरीके से काम किया। इसके बाद निर्देशक प्रमोद शास्त्री ने “किसे रोके रुका है सवेरा” टीवी धारावाहिक लिखा और निर्देशित किया जो डीडी किसान चैनल पर बहुत लोकप्रिय हुआ।

उन्होंने मेगास्टार रवि किशन अभिनीत फिल्म आपन माटी आपन देस का निर्माण किया, जिसे ‘भोजपुरी फिल्म अवार्ड्स’ के लिए सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में प्रमुख पुरस्कार जीते। इसके बाद प्रमोद शास्त्री ने फिल्मों का निर्देशन करने का रुख कर लिया। फिर उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और उन्होंने रब्बा इश्क ना होवे, छलिया, प्यार तो होना ही था जैसी फिल्मों का सफल निर्देशन किया। इन फिल्मों में भोजपुरी सिनेमा के बड़े नाम थे। उनकी फिल्मे सामाजिक रूप से प्रासंगिक विषयों के इर्द-गिर्द केंद्रितरहती है, जो कमर्सियल के साथ सार्थक भी होती है। उनकी फिल्मों ने जनता के दिलों को छुआ और बॉक्सऑफिस पर उनका जलवा बरकरार है प्रमोद शास्त्री द्वारा लिखित और निर्देशित मल्टी स्टारर मेगा बजट फिल्म “आन बान शान” जल्द ही सिनेमा हॉल में दस्तक देने वाली है…

Serial Story: प्यार अपने से

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