पत्नी करती है लेट नाइट जौब, सैक्स के लिए नहीं होता समय, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं एक शादीशुदा आदमी हूं मेरी पत्नी वर्किंग है हम दोनों काम पर जाते है. मेरी पत्नी IT सैक्टर में नौकरी करती है. जिस वजह से वे नाइट शिफ्ट भी करती है कभी कभी देर रात औफिस में होती है. जबकि मैं दिन में औफिस में होता हूं. जिस वजह हम एक दूसरे को समय नहीं दे पाते है न फिजिकल रिलेशन के लिए टाइम निकाल पाते है. मैं इस बात से परेशान रहता हूं मैं क्या करूं? 

 

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जवाब

यह एक रिलेशन के लिए गंभीर प्रौब्लम है. इस टौपिक पर आपको अपने पत्नी से बैठकर बात करनी चाहिए. आपको उनसे अपने रिश्ते के लिए समय मागंना चाहिए. हालांकि जब वे नाइट ड्यूटी करती है तो आप वीकेंड का इंतजार करें. वीकेंड पर ज्यादा से ज्यादा एक-दूसरे को समय दें. क्योंकि पति-पत्नी को सैक्स के लिए समय निकालना जरूरी है.

अगर ये करने पर भी परेशान है तो आपको अपनी पत्नी से कहना चहिए कि वे डे शिफ्ट ढूंढे. क्योंकि दोनों अगर नौकरी वाले है तो दोनों का एक ही समय हो तो अच्छा होता है. एक ही समय पर औफिस से छुट्टी लें. readers

हर रिलेशन में ये जरूरी है कि आप एक दूसरे के साथ फिजिकल होने का समय दें. इससे रिश्ते में मजबूती आती है और आप एक-दूसरे के ओर नजदीक आते है.

NO Pain, NO Gain Myth कहते है ट्रेनर, एक्सरसाइज से जुड़े जाने मिथ    

किसी भी काम को शुरु करने से पहले उसके बारे में जान लेना बेहद जरूरी होता है चाहे बात एक्सरसाइज करने की हो या फिर एक नई डाइट शुरु करने की. क्योंकि हर चीज से जुड़े मिथ जरूर सुनने को मिलते है ऐसा ही एक्सरसाइज से भी जुडे मिथ होते है. जिन्हे जानकर आप शायद हैरान हो जाएं.

 

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No Pain, No gain एक तरह का मिथ है

वर्कआउट के दौरान आपका जिम ट्रेनर ये जरूर कहता होगा कि NO PAIN, NO GAIN.  हालांकि ये तरह का मिथ है क्योकि अगर एक्सरसाइज से आपको दर्द होता है तो आप तुरंत उसे बंद कर दे. जिससे आपकी बौड़ी को रिलेक्स मिलेगा. क्योकि दर्द वे तरीका है जो आपको बतात है कि शरीर के साथ कुछ गलत है.  लेकिन आप एक्सरसाइज के जारी रखेंगे तो आप एक गंभीर चोट के शिकार हो सकते है.

एक्सरसाइज लंबी उम्र को बरकरार रखती है

एक्सरसाइज आपके स्वास्थ्य में सुधार करती है और आपके डेली रूटीन को बेहतर बनाती है. लेकिन ये एक मिथ है कि एक्सरसाइज आपकी ऐज को बरकारर रखेंगी. लेकिन इसका आपकी लंबी उम्र से कोई संबंध नहीं है. lifestyle

दौड़ना आपके घुटनों के लिए लाभदायक नहीं है

रिसर्च में ये बात सामने आई है कि दौड़ना से घुटने के जोड़ों में सूजन कम होती है. लेकिन ये एक मिथ है कि दौड़ने से आपके घुटने को फायदा नहीं पहुंचता है. यह एक विचार की लंबी दूरी की दौड़ आपके घुटनों के लिए बुरा है,  लेकिन यह एक मिथक है.

जितना भारी वजन उठाएंगे, वे बौडी के मसल्स को मजबूत कर देगा

ये भी एक तरह का मिथ है, जिसमे कहा जाता है कि भारी वजन उठाने से आपके बौडी के मसल्स मजबूत होते है. ज्यादातर महिलाओं को इस बात की चिंता रहती है कि उनमे भारी वजन से मसल्स का निर्माण होगा. जिससे वे बौडी बिल्डर की तरह दिखेंगी. लेकिन ऐसा नहीं है. अगर आप बिना वजन की भी एक्सरसाइज करेंगे तो शरीर तंदूरस्त रहेगा.

सेक्स में तन के साथ जरूरी है मन की तंदुरुस्ती

सेक्स पतिपत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाता है, यह हम सभी जानते हैं. मगर सफल सेक्स के लिए स्वस्थ शरीर के साथसाथ मन का स्वस्थ होना भी बहुत जरूरी है. आज हम आपको बताऐंगे सेक्स में कब कब नाकामी मिलती है, और सेक्स में नाकामी मिलना एक पुरुष के लिए काफी गंभीर बात हो सकती है.

  • शिथिलता : सेक्स की इच्छा होने पर पुरुष इंद्रिय की ओर रक्तसंचार का प्रभाव बढ़ता है, जिस से इंद्रिय में उत्थान और कठोरता आती है. यदि आप का पार्टनर भय, चिंता, तनाव से परेशान हो तो इंद्रिय की कठोरता समाप्त या फिर कम हो जाती है. ऐसे पतियों को मानसिक रूप से नपुंसक कहा जाता है.
  • मानसिक तनाव : सेक्स में नाकामी का एक कारण मानसिक भी है. इंद्रिय उत्थान नर्वस स्टिम्युलेशन पर आधारित होता है. जब संवेदना नहीं मिलती है तब उत्थान का अभाव होता है. सेक्स की प्रबल इच्छा होते हुए भी पति इंद्रिय शिथिलता के कारण सेक्स करने में असमर्थ होता है.
  • तीखे, गरम, खट्टे का अधिक सेवन : तीखी, खट्टीमीठी, गरम चीजों का अधिक सेवन करने से वीर्य विकृत हो जाता है. परिणामस्वरूप पतिपत्नी सेक्स का पूरी तरह से आनंद नहीं उठा पाते हैं.
  • प्रजनन अंग में रोग : प्रजनन अंग का रोग भी इंद्रिय उत्थान क्रिया में बाधा डालता है, जिस से पतिपत्नी दोनों ही सेक्स को ऐंजौय नहीं कर पाते हैं. कई बार पति के अंग में चोट लगने से भी उत्थान नहीं हो पाता है. इस के अलावा कई बार मन और शरीर दोनों का कामावेग से उत्तेजित होने पर सहवास क्रिया में प्रवृत्त होने पर पति अतिशीघ्र स्खलित हो जाता है.
  • पत्नी के सहयोग का अभाव : यदि पत्नी सहवास के दौरान पति को पूर्णरूप से सहयोग नहीं करती है या फिर अपने सजनेसंवरने अथवा शरीर की साफसफाई का ध्यान नहीं रखती है तो इस से भी पति के मन में सेक्स के प्रति अरुचि पैदा हो जाती है.
  • गैरजरूरी नियम बनाना : कई बार संबंध बनाने के दौरान पत्नी कुछ गैरजरूरी नियम बना लेती है जैसे लाइट औफ न करना, नए तरीके आजमाने के लिए मना करना, जल्दी करो की रट लगाना आदि से भी संबंध बनाने में नाकामी का सामना करना पड़ता है.
  • कभी पहल न करना : परिणय संबंध के लिए पत्नी द्वारा हमेशा पति की ही बाट जोहना, खुद कभी पहल न करना भी पति को अच्छा नहीं लगता है. पति भी चाहता है कि पत्नी भी पहल करे.
  • उत्साह की कमी : सहवास के दौरान पतिपत्नी दोनों को उत्साह के साथ हंसतेबोलते, चुहलबाजी करते हुए सहयोग करना चाहिए. यदि पत्नी ऐसा नहीं करती, तो पति को लगता है कि पत्नी केवल औपचारिकता निभा रही है.
  • और्गेज्म की परवाह न करना : जिस तरह पत्नी चाहती है कि वह सेक्स में पति को पूरी तरह संतुष्ट कर सके, ठीक उसी तरह पति भी चाहता है कि वह पत्नी को पूर्णरूप से संतुष्ट कर सके, मगर यह तभी संभव हो सकता है जब दोनों ही मानसिक व शारीरिक रूप से एकदूसरे से जुड़ कर सेक्स का आनंद लें.
  • इम्युनिटी बढ़ाता है : सेक्स पूरे शरीर को प्रभावित करता है. यह दिलदिमाग के साथसाथ रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है.
  • जकड़न से छुटकारा : यदि पति या पत्नी स्टिफनेस की समस्या से परेशान रहते हों तो सहवास क्रिया उन की मदद करेगी. दरअसल, यह एक ऐसी क्रिया है, जिस से शरीर की सभी मसल्स की एक्सरसाइज हो जाती है, स्टिफनेस जैसी तकलीफ से भी छुटकारा मिलता है. कोलेस्टेराल नियंत्रित रहता है, रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, सर्दीजुकाम की समस्या कम होती है.
  • पेनकिलर है : शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो तो सेक्स से परहेज न करें, क्योंकि सेक्स करने से दर्द से राहत मिलेगी. यह तनाव भी दूर करता है.
  • खूबसूरती : यदि पतिपत्नी दोनों ही खुल कर सेक्स सुख को अपनाते हैं, तो इस से उन की खूबसूरती ही नहीं बढ़ती, अपितु उम्र भी बढ़ती है.

सेक्स की कमजोरी में टेस्टोस्टेरान का प्रयोग किया जाता है. यानी पुरुष हारमोन से इलाज किया जाता है. यह उन रोगियों के लिए ही उपयोगी सिद्ध होता है, जिन के शरीर में सचमुच कामोत्तेजना की कमी होती है. इस तरह सेक्स की नाकामी को दूर कर के सुखद सेक्स जिंदगी जीना आज की भागमभाग वाली जिंदगी के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है.

बेवफा सनम: जब कुंआरी लड़की पर फिसला शादीशुदा अनिल

कई तरह के पकवान बनाने मे माहिर नीलिमा एक बहुत अच्छी डांसर भी थी. वे दोनों एकदूसरे पर जान छिड़कते थे. दोनों की शादीशुदा जिंदगी पिछले 10 साल से बेहद सुकून और प्यार से चल रही थी.इधर, अनीता ने हाल ही में एमए और कंप्यूटर कोर्स किया था. वह किसी नौकरी की तलाश में थी. वह एक मिडिल क्लास परिवार से थी. पिछले कई दिनों से वह स्कूटी चलाने की प्रैक्टिस कर रही थी.

अनिल की कंपनी 3 शिफ्ट में चलती थी और उस की ड्यूटी सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे वाली शिफ्ट में थी. सुबह घर से सवा 7 बजे निकल कर दफ्तर पहुंचना अनिल का रोज का नियम था. और अब क्योंकि यह उस की आदत में आ चुका था, इसलिए वह साधारण रफ्तार से कार चलाते हुए अपने औफिस की 10 किलोमीटर की दूरी महज 20 मिनट में नाप लेता था.हमेशा की तरह बेखयाली में कार में बजते म्यूजिक का मजा लेते हुए अनिल औफिस की तरफ जा रहा था.

अनीता अपनी स्कूटी ले कर सुबहसुबह सड़क पर थी. मालवीय नगर के पास के एक स्कूल के बाहर स्कूल बस खड़ी होने के चलते अनीता ने थोड़ी तेज रफ्तार में स्कूटी को साइड से निकालना चाहा, पर सामने दूसरी ओर से अनिल की कार आ गई और अनीता घबराहट में उस कार से भिड़ कर बीच सड़क पर औंधे मुंह जा गिरी.यह देख अनिल के होश फाख्ता हो गए. उस ने कार से उतर कर अनीता को टटोला, फिर घायल और बेहोश अनीता को किसी तरह से उठा कर अपनी कार में लिटाया और थोड़ी दूरी पर अनुराग अस्पताल में ले गया.सुबहसुबह इमर्जैंसी में अनीता को भरती किया गया.

उस के पास किसी तरह का पहचानपत्र नहीं मिलने के चलते अनिल उस के घर वालों को खबर करने में नाकाम था. अस्पताल में जानपहचान होने से उस ने अनीता को अपना निकट संबंधी बता कर भरती करा दिया.थोड़ी देर बाद जब अनीता को होश आया, तो उस ने खुद को अस्पताल के बिस्तर पर पाया. पास बैठे अनिल को उस ने सवालिया निगाह से देखा.

अनिल ने उसे बताया कि कैसे वह उस की कार से टकरा कर बेहोश हो गई थी. बात करने पर पता चला कि अनीता के घर में और कोई नहीं था. उस के मांबाप और एकलौते भाई की एक हादसे में 2 साल पहले मौत हो चुकी थी.शाम तक अनीता के पास बैठा अनिल कब उस की सादगी पर मरमिटा, यह दोनों को ही नहीं पता चला. अनिल ने अपने शादीशुदा होने की बात अनीता से छिपा ली थी.

शाम को 5 बजे के आसपास नीलिमा का फोन आया, तो अनिल को होश आया कि उस का खुद का घर पर इंतजार हो रहा है. उस ने नीलिमा से झूठा बहाना बना दिया कि औफिस के किसी जरूरी काम के लिए उसे 2 दिन के लिए गुड़गांव जाना पड़ गया है और वह रास्ते में है.शाम तक अनीता को प्राइवेट रूम में शिफ्ट कर दिया गया और डाक्टर की सलाह पर और 2 दिन तक भरती रहने के लिए कहा गया.रात को अनीता के साथ प्राइवेट रूम में रुकने पर थोड़ा असहज महसूस करते हुए अनिल को अनीता ने देखा, तो वह बोली, ‘‘देखिए अनिलजी, आप ने मेरे लिए इतना किया, तो आप मेरे साथ रात को रूम में रुकने में शरमा क्यों रहे हैं, बल्कि घबराना तो मुझे चाहिए.’’अनिल ने रातभर अनीता का ध्यान रखा और अगले दिन शाम को अनीता को अस्पताल से छुट्टी मिल गई.

अस्पताल से डिस्चार्ज करा कर अनिल अनीता को उस के घर छोड़ने गया. थोड़ी देर बाद उस ने अपने घर के लिए निकालना चाहा, तो अनीता ने बेहद प्यार से उसे रोका और कहा, ‘‘मेरे लिए इतनाकुछ किया है, तो 2-4 दिन मेरे घर पर रह कर मुझे संभाल लो.’’अनिल भी अनीता के मोहपाश में बंधा जा रहा था, लेकिन उसे अपनी पत्नी का खयाल भी आ रहा था. खैर, आज की रात तो उस ने वहां रुकना मंजूर कर ही लिया. अनीता रात के खाने के बाद नहा कर गाउन पहन कर अपने बिस्तर पर लेट गई. रात के 10 बजे अनीता ने अनिल से घुटने की मालिश करने को कहा.

अनिल बाम ले कर मालिश करने लगा.अनीता ने घुटने से ऊपर भी दर्द की शिकायत की तो अनिल के हाथ उस की जांघ की मालिश भी करने लगे. अनीता के मुंह से मीठी आह निकलने लगी. उस ने बाएं कंधे पर भी मालिश करने को कहा और गाउन के ऊपर के 3 बटन खोल दिए. कंधे के साथ ही अनीता के बड़े उभारों की थोड़ी सी झलक अनिल को दिखने लगी.

अनिल के हाथ कंधे के नीचे सरकने लगे. उस ने अनीता से कहा कि अगर वह गाउन के और बटन खोल देगी तो मालिश करने में और आसानी होगी.अब तक अनीता पूरी तरह अनिल को अपना मान चुकी थी और खुद भी ऐसा ही कुछ चाह रही थी. नीचे के 2 बटन और खोलने के साथ ही उस ने अपनी फ्रंट ओपन ब्रा के हुक भी खोल दिए. अनीता के मादक शरीर की छुअन, उस का ताजा खिला हुआ मदमाता जोबन अनिल को और कुछ न सोचने के लिए काफी था.

अनिल जवानी से भरपूर अनीता के हर नाजुक अंग पर अपनी छाप छोड़ते हुए उस के गुलाबी होंठों को चूमता गया. कुछ ही समय में उन दोनों के जिस्म एक हो चुके थे. सुबह होने तक वे दोनों 4 बार सैक्स का मजा ले चुके थे. अनिल ने महसूस किया कि अनीता की जवानी नीलिमा से कई कदम आगे थी.जहां अनीता को अनिल एक जीवनसाथी और सहारे की तरह नजर आ रहा था, वहीं अनिल को ऐसा लग रहा था कि उसे देहसुख पाने का एक नया और कमसिन जरीया मिल गया है.

अनीता का देहसुख पाने की चाह में अनिल ने नीलिमा को झूठ कह दिया कि औफिस के काम के चलते उसे महीने में 15 दिन जयपुर से बाहर रहना पड़ेगा. अब अनिल का आधा समय अनीता और बाकी समय नीलिमा के साथ बीतने लगा और एकसाथ 2 जिस्मों का सुख उसे अलग ही मजा दे रहा था. अनीता की जवानी ने अभी अंगड़ाई लेनी शुरू की थी. वह अनिल के साथ सारीसारी रात सैक्स करने का मजा लेती थी. ऐसे में अनिल के पास नीलिमा के लिए ज्यादा कुछ बचता नहीं था.

नीलिमा के शिकायत करने पर अनिल बहाना बना देता कि काम ज्यादा होने के चलते थकान बहुत होने लगी है.4-5 महीने यों ही बीत गए. इधर अनीता बारबार अनिल पर शादी करने के लिए दबाव डाल रही थी. पर कभी उसे महंगे गिफ्ट दे कर, तो कभी और थोड़े दिन इंतजार का बहाना बना कर अनिल उस की जवानी का भरपूर मजा लेता रहा.पर एक ही शहर में 2 अलगअलग जगह ‘पत्नीसुख’ कितने दिन चलना था. एक दिन कुछ सामान लेने के लिए अपनी सहेली के साथ घर से निकली नीलिमा ने अनिल की कार एक घर के बाहर खड़ी देख ली. यह देख कर उस का माथा ठनक गया.

अनिल को फोन लगाया, तो उस ने कहा कि वह गुड़गांव के रास्ते में कार में ट्रैफिक में फंसा है, बाद में बात करेगा.पड़ोस में तहकीकात करने पर पता लगा कि बगल वाले घर में 4-5 महीने पहले प्रेम विवाह कर के अनीता नामक एक लड़की अपने पति के साथ रह रही है. जल्द ही ये लोग खुद के फ्लैट में शिफ्ट होने वाले हैं.यह बात अनीता ने ही फैलाई थी, ताकि अनिल उस के पास बेरोकटोक आजा सके और किसी को कोई शक न हो. यहां तक कि उस ने घर में अनिल के साथ जोड़े समेत खिंचवाई गईं बहुत सारी तसवीरें फे्रम करा कर दीवार पर टांग रखी थीं. एक गहरे सदमे के साथ नीलिमा अपने घर लौटी.

उस ने सारी रात करवटें बदलते हुए बिताई.अगले दिन नीलिमा ने अनिल के औफिस के समय के दौरान अनीता से मिलने का फैसला किया. अनीता के घर नीलिमा को आसानी से प्रवेश मिल गया, क्योंकि अनीता काफी सरल स्वभाव की थी. यह बात और थी कि वह अब अनिल के मोहपाश में पूरी तरह से बंधी हुई थी.घर की दीवारों पर अनिल और अनीता की ढेरों तसवीरें देख कर नीलिमा को चक्कर से आने लगे. जब उस ने तसवीर में उस के साथ वाले आदमी के बारे में अनीता से पूछा, तो उस ने बताया कि उन दोनों ने कुछ महीने पहले ही मंदिर में प्रेम विवाह किया है और अनिल के घर वालों की रजामंदी मिलते ही वे दोनों पूरे रीतिरिवाज के साथ शादी कर लेंगे.

नीलिमा अपने साथ अपनी शादी के बाद का फोटो अलबम वहां ले गई थी. उस ने अनीता के सामने वह फोटो अलबम रख दिया. वह अलबम खोलते ही चक्कर आने की बारी अनीता की थी. धीरेधीरे अनिल के झूठ के सारे पुलिंदे खुलते चले गए.अनीता गहरे सदमे में आ चुकी थी. उस ने अनिल के खिलाफ पुलिस में धोखाधड़ी का केस दर्ज करने की बात कही. नीलिमा को पता था कि ऐसा होने पर न केवल अनिल को जेल हो जाएगी, बल्कि उस की नौकरी भी चली जाएगी, खुद की शादीशुदा जिंदगी तो उस की बिगड़ ही चुकी थी.नीलिमा यह सब नहीं चाहती थी, पर वह अनिल को कड़ा सबक भी सिखाना चाहती थी.

अनीता ने स्वीकार किया कि अनिल ने उस के ऊपर अभी तक लाखों रुपए खर्च किए हैं और अनिल को अपने घर में बिना उस के बारे में अतापता किए  इतने दिनों से आनेजाने की छूट देने की वह खुद जिम्मेदार थी. साथ ही, खुद के पड़ोसियों को यह झूठ कह कर कि अनिल से उस की शादी हो चुकी है, गुनाह में वह बराबर की हिस्सेदार थी.अनिल को सबक कैसे सिखाया जाए, इस पर अगले दिन साथ बैठ कर विचार करने की कह कर नीलिमा घर चली गई.

अनीता के भविष्य के सपनों पर जो बिजली गिरी थी, उस का अंदाजा लगाना आसान नहीं था.थोड़ी देर बाद अनीता किसी को बिना कुछ कहे, घर पर ताला लगा कर निकल गई. शाम को अनिल को घर बंद मिला, तो उस ने अनीता को फोन किया, लेकिन वह भी स्विच औफ था.आखिरकार अनिल ने खुद के घर की ओर रुख किया. नीलिमा को अनिल की शक्ल से नफरत हो चुकी थी.

नीलिमा का बदलाबदला बरताव अनिल को समझ नहीं आ रहा था.जो नहीं होना चाहिए था, वही हुआ. अगले दिन अखबार में 25-26 साल की एक जवान लड़की की जगतपुरा रेलवे स्टेशन पर रेल से कट कर मौत होने की खबर आई. वह अनीता ही थी.अनिल और नीलिमा का रिश्ता दोबारा कभी नहीं सुधर सका. अनिल की हवस और अनीता की नासमझी ने 3 जिंदगियां हमेशाहमेशा के लिए बरबाद कर दी थीं.

सुहानी गुड़िया: सलोनी से अरविंद को क्यों मांगनी पड़ी माफी

आज मेरा जी चाह रहा है कि उस का माथा चूम कर मैं उसे गले से लगा लूं और उस पर सारा प्यार लुटा दूं, जो मैं ने अपने आंचल में समेट कर जमा कर रखा था. चकनाचूर कर दूं उस शीशे की दीवार को जो मेरे और उस के बीच थी. आज मैं उसे जी भर कर प्यार करना चाहती हूं.

मुझे बहुत जोर की भूख लगी थी. भूख से मेरी आंतें कुलबुला रही थीं. मैं लेटेलेटे भुनभुना रही थी, ‘‘यह मरी रेनू भी ना जाने कब आएगी. सुबह के 10 बजने को हैं, पर महारानी का अतापता ही नहीं. यह लौकडाउन ना होता तो ना जाने कब का इसे भगा देती और दूसरी रख लेती. जब इसे काम की जरूरत थी तो कैसे गिड़गिड़ा मेरे पास आई थी और अब नखरे देखो मैडम के.’’

अरविंद सुबहसुबह मुझे चाय के साथ ब्रेड या बिसकुट दे कर दवा खिलाते और खुद दूध कौर्नफ्लैक्स खा कर अस्पताल चले जाते हैं. डाक्टरों की छुट्टियां कैंसिल हैं, इसलिए ज्यादा मरीज ना होने पर भी उन्हें अस्पताल जाना ही पड़ता है.

मैं डेढ़ महीने से टाइफाइड के कारण बिस्तर पर पड़ी हूं. घर का सारा काम रेनू ही देखती है. मैं इतनी कमजोर हो गई हूं कि उठ कर अपने काम करने की भी हिम्मत नहीं होती. पड़ेपड़े न जाने कैसेकैसे खयाल मन में आ रहे थे, तभी सुहानी की मधुर आवाज मेरे कानों में पड़ी, ‘‘मां आप जाग रही हैं क्या? मैं आप के लिए चाय बना लाऊं.’’

मैं ने कहा, ‘‘नहीं, चाय और दवा तो तेरे बड़े पापा दे गए हैं, पर बहुत जोर की भूख लगी है. रेनू भी ना जाने कब आएगी. कितना भी डांट लो, इस पर कोई असर नहीं होता.’’

सुहानी बोली, ‘‘मां, आप उस पर चिल्लाना मत, आप की तबीयत और ज्यादा खराब हो जाएगी.’’

उस ने टीवी औन कर के लाइट म्यूजिक चला दिया. मैं गाने सुन कर अपना ध्यान बंटाने की कोशिश करने लगी.

थोड़ी ही देर में सुहानी एक प्लेट में पोहा और चाय ले कर मेरे पास खड़ी थी. मैं हैरानी से उसे देख कर बोली, ‘‘अरे, यह क्या किया तुम ने, अभी रेनू आ कर बनाती ना.’’

सुहानी ने बड़े धीमे से कहा, ‘‘मां, आप को भूख लगी थी, इसीलिए सोचा कि मैं ही कुछ बना देती हूं.’’

मेरा पेट सच में ही भूख के कारण पीठ से चिपका जा रहा था, इसलिए मैं प्लेट उस के हाथ से ले कर चुपचाप पोहा खाने लगी. उस ने मुझ से पूछा, ‘‘मां, पोहा ठीक से बना है ना?’’

नमक थोड़ा कम था, पर मैं मुसकरा कर बोली, ‘‘हां, बहुत अच्छा बना है, तुम ने यह कब बनाना सीखा.’’

यह सुन कर उस की आंखों में जो संतोष और खुशी की चमक मुझे दिखी, वह मेरे मन को छू गई.

जब से मैं बीमार पड़ी हूं, मेरे पति और बच्चों से भी ज्यादा मेरा ध्यान सुहानी रखती है. मेरे कुछ बोलने से पहले ही वह समझ जाती है कि मुझे क्या चाहिए.

मुझे याद आने लगा वह दिन, जब मेरे देवरदेवरानी अपनी नन्ही सी बिटिया के साथ शौपिंग कर के लौट रहे थे. सामने से आती एक तेज रफ्तार कार ने उन की कार में टक्कर मार दी. वे दोनों बुरी तरह घायल हो गए.

देवर ने तो अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ दिया था और देवरानी एक हफ्ते तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद भगवान को प्यारी हो गई.

अस्पताल में जब अर्धचैतन्य अवस्था में देवरानी ने नन्ही सलोनी का हाथ अरविंद के हाथों में थमाते हुए कातर निगाहों से देखा तो वह फफकफफक कर रो पड़े. उन की मृत्यु के बाद लखनऊ में उन के घर, औफिस, फंड, ग्रेच्युटी वगैरह के तमाम झमेलों का निबटारा करने के लिए लगभग 2 महीने तक अरविंद को लखनऊ में काफी भागदौड़ करनी पड़ी. सारी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सलोनी की कस्टडी का प्रश्न उठा.

देवरानी का मायका रायबरेली में 3 भाइयों और मातापिता का सम्मिलित परिवार और व्यवसाय था. वे चाहते थे कि सलोनी की कस्टडी उन्हें दे दी जाए. उन के बड़े भैया बोले, ‘‘सलोनी हमारी बहन की एकमात्र निशानी है, हम उसे अपने साथ ले जाना चाहते हैं.’’

इस पर अरविंद ने कहा कि सलोनी मेरे भाई की भी एकमात्र निशानी है. वहीं अरविंद के पिताजी बोले, ‘‘सलोनी कहीं नहीं जाएगी. मेरे बेटे अनिल की बिटिया हमारे घर में ही रहेगी.”

इस पर देवरानी का छोटा भाई बिगड़ कर बोला, ‘‘मैं अपनी भांजी का हक किसी को नहीं मारने दूंगा. आप लोग मेरे बहनबहनोई की सारी संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं, इसीलिए सलोनी को अपने पास रखना चाहते हैं.’’

इस विषय पर अरविंद और मांबाबूजी की उन से बहुत बहस हुई. अरविंद और बाबूजी जानते थे कि उन लोगों की नजर मेरे देवर के लखनऊ वाले मकान और रुपयोंपैसों पर थी. सलोनी के नानानानी बहुत बुजुर्ग थे, वे उस की देखभाल करने में सक्षम नहीं थे. अंत में अरविंद ने सब को बैठा कर निर्णय लिया कि अम्मांबाबूजी बहुत बुजुर्ग हैं और गांव में सलोनी की पढ़ाईलिखाई का उचित इंतजाम नहीं हो सकता, इसलिए सलोनी मेरे साथ रहेगी. अनिल का लखनऊ वाला मकान सलोनी के नाम पर कर दिया जाएगा और उसे किराए पर उठा दिया जाएगा. उस का जो भी किराया आएगा, उसे सलोनी के अकाउंट में जमा कर दिया जाएगा.

अनिल के औफिस से मिला फंड वगैरह का रुपया भी सलोनी के नाम से फिक्स कर दिया जाएगा, जो उस की पढ़ाईलिखाई और शादीब्याह में खर्च होगा.

अरविंद के इस फैसले से मैं सहम गई. उस समय तो कुछ न कह पाई, पर अपने 2 छोटे बच्चों के साथ एक और बच्चे की जिम्मेदारी उठाने के लिए मैं बिलकुल तैयार नहीं थी. अभी तक जिस सहानुभूति के साथ मैं उस की देखभाल कर रही थी, वह विलुप्त होने लगी.

मैं ने डरतेडरते अरविंद से कहा, ‘‘सुनिए, मुझे लगता है कि आप को सलोनी को उस के नानानानी को दे देना चाहिए. नानानानी और मामा के बच्चों के साथ वह ज्यादा खुश रहेगी.’’

अरविंद शायद मेरी मंशा भांप गए और मेरे कंधे पर सिर रख कर रो पड़े. कातर नजरों से मेरी ओर देखते हुए बोले, ‘‘रंजू, अनिल मेरा एकलौता भाई था. वह मुझे इस तरह छोड़ जाएगा, यह सपने में भी नहीं सोचा था. सलोनी मेरे पास रहेगी तो मुझे लगेगा मानो मेरा भाई मेरे पास है.’’

मैं ने उन्हें जीवन में पहली बार इतना मायूस और लाचार देखा था. वह बच्चों की तरह बिलखते हुए बोले, ‘‘रंजू, मेरे मातापिता और सलोनी को अब तुम्हें ही संभालना है.’’

उन को इतना व्यथित देख मैं ने चुपचाप नियति को स्वीकार कर लिया. बाबूजी इस गम को सह न पाए. हार्ट पेशेंट तो थे ही, महीनेभर बाद दिल का दौरा पड़ने से परलोक सिधार गए.

बाबूजी के जाने के बाद तो अम्मां मानो अपनी सुधबुध ही खो बैठीं, न खाने का होश रहता, न नहानेधोने का. हर समय पूजापाठ में व्यस्त रहने वाली अम्मां अब आरती का दीया भी ना जलाती थीं. वे कहतीं, ‘‘बहू, अब कौनो भगवान पर भरोसा नाही रही गओ है, का फायदा ई पूजापाठ का जब इहै दिन दिखबे का रहै.’’

उन्हें कुछ भी समझाने का कोई फायदा नहीं था. वे अंदर ही अंदर घुलती जा रही थीं. एक बरस बाद वे भी इस दुनिया को छोड़ कर चली गईं.

अरविंद अपने काम में बहुत व्यस्त रहने लगे. सामान्य होने में उन्हें दोतीन वर्ष का समय लग गया.

नन्ही सलोनी मुझे मेरे घर में सदैव अवांछित सदस्य की तरह लगती थी. उस के सामने न जाने क्यों मैं अपने बच्चों को खुल कर न तो दुलरा ही पाती और न ही खुल कर गले लगा पाती थी. मैं अपने बच्चों के साथसाथ उसे भी तैयार कर के स्कूल भेजती और उस की सारी जरूरतों का ध्यान रखती, पर कभी गले से लगा कर दुलार ना कर पाती.

समय कब हथेलियों से सरक कर चुपकेचुपके पंख लगा कर उड़ जाता है, इस का हमें एहसास ही नहीं होता. कब तीनों बच्चे बड़े हो गए और कब मैं सलोनी की बड़ी मां से सिर्फ मां हो गई, मुझे पता ही ना चला. मैं उसे कुछ भी नहीं कहती थी, पर सुमित और स्मिता को जो भी इंस्ट्रक्शंस देती, वह उन्हें चुपचाप फौलो करती. उन दोनों को तो मुझे होमवर्क करने, दूध पीने और खाने के लिए टोकना पड़ता था, पर सलोनी अपना सारा काम समय से करती थी.

मुझे पेंटिंग्स बनाने का बड़ा शौक था. घर की जिम्मेदारियों की वजह से मैं अपने इस शौक को आगे तो नहीं बढ़ा पाई, पर बच्चों के प्रोजैक्ट में और जबतब साड़ियों, कुरतों और कपड़ों के बैग वगैरह पर अपना हुनर आजमाया करती थी.

जब भी मैं कुछ इस तरह का काम करती, तो सुहानी भी अपनी ड्राइंग बुक और कलर्स के साथ मेरे पास आ कर बैठ जाती और अपनी कल्पनाओं को रंग देने का प्रयास करती. यदि कहीं कुछ समझ में ना आता, तो बड़ी मासूमियत से पूछती, ‘‘बड़ी मां, इस में यह वाला रंग करूं अथवा ये वाला ज्यादा अच्छा लगेगा.’’ उस की कला में दिनोंदिन निखार आता गया. विद्यालय की ओर से उसे सभी प्रतियोगिताओं के लिए भेजा जाने लगा और हर प्रतियोगिता में उसे कोई ना कोई पुरस्कार अवश्य मिलता. पढ़ाई में भी अव्वल सलोनी अपने सभी शिक्षकशिक्षिकाओं की लाड़ली थी.

जब कभी सुमित, स्मिता और सुहानी तीनों आपस में झगड़ा करते, तो सुहानी समझदारी दिखाते हुए उन से समझौता कर लेती. मैं बच्चों के खेल और लड़ाई के बीच में कोई दखलअंदाजी नहीं करती थी.

डेढ़ महीने पहले जब डाक्टर ने मेरी रिपोर्ट देख कर बताया कि मुझे टाइफाइड है तो सभी चिंतित हो गए. सुमित, स्मिता और अरविंद हर समय मेरे पास ही रहते और मेरा बहुत ध्यान रखते थे, पर धीरेधीरे सब अपनी दिनचर्या में बिजी हो गए.

अभी परसों की ही बात है, मैं स्मिता को आवाज लगा रही थी, ‘‘स्मिता, मेरी बोतल में पानी खत्म हो गया है, थोड़ा पानी कुनकुना कर के बोतल में भर कर रख दो.”

इस पर वह खीझ कर बोली, ‘‘ओफ्फो मम्मा, आप थोड़ा वेट नहीं कर सकतीं. कितनी अच्छी मूवी आ रही है, आप तो बस रट लगा कर रह जाती हैं.’’

इस पर सुहानी ने उठ कर चुपचाप मेरे लिए पानी गरम कर दिया. मेरी खिसियाई सी शक्ल देख कर वह बोली, ‘‘मां क्या आप का सिरदर्द हो रहा है, लाइए मैं दबा देती हूं.”

मैं ने मना कर दिया. सुमित बीचबीच में आ कर मुझ से पूछ जाता है, ‘‘मां, आप ने दवा ली, कुछ खाया कि नहीं वगैरह.”

स्मिता भी अपने तरीके से मेरा ध्यान रखती है और अरविंद भी, किंतु सलोनी उस के तो जैसे ध्यान में ही मैं रहती हूं.

आज मुझे आत्मग्लानि महसूस हो रही है. 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली सलोनी कितनी समझदार है. मैं सदैव अपने घर में उसे अवांछित सदस्य ही मानती थी, कभी मन से उसे बेटी न मान पाई. लेकिन वह मासूम मेरी थोड़ी सी देखभाल के बदले में मुझे अपना सबकुछ मान बैठी. कितने गहरे मन के तार उस ने मुझ से जोड़ लिए थे.

मुझे याद आ रहा है उस का वह अबोध चेहरा, जब सुमित और स्मिता स्कूल से आ कर मेरे गले से झूल जाते और वह दूर खड़ी मुझे टुकुरटुकुर निहारती तो मैं बस उस के सिर पर हाथ फेर कर सब को बैग रख कर हाथमुंह धोने की हिदायत दे देती थी.

उस ने मेरी थोड़ी सी सहानुभूति को ही शायद मेरा प्यार मान लिया था. अपनी मां की तो उसे ज्यादा याद नहीं, पर मुझे ही मानो मां मान कर चुपचाप अपना सारा प्यार उड़ेल देना चाह रही है.

आज मेरा जी चाह रहा है कि मैं उसे अपने गले से लगा कर फूटफूट कर रोऊं और अपने मन का सारा मैल और परायापन अपने आंसुओं से धो डालूं. मैं उसे अपने सीने से लगा कर ढेर सारा प्यार करना चाह रही हूं. मैं उस से कहना चाहती हूं, ‘‘मैं तेरी बड़ी मां नहीं सिर्फ मां हूं. मेरी एक नहीं दोदो बेटियां हैं. अपने और सलोनी के बीच जो कांच की दीवार मैं ने खड़ी कर रखी थी, वह आज भरभरा कर टूट गई है. सलोनी मेरी गुड़िया मुझे माफ कर दो.‘‘

मौडर्न सिंड्रेला: मनाली ने लगाया रिश्तों पर दांव

आज मयंक ने मनाली को खूब शौपिंग करवाई थी. मनाली काफी खुश लग रही थी. उसे खुश देख कर मयंक भी अच्छा महसूस कर रहा था. वैसे वह बड़ा फ्लर्ट था, पर मनाली के लिए वह बिलकुल बदल गया था. मनाली से पहले भी उस की कई गर्लफ्रैंड्स रह चुकी थीं, पर जैसी फीलिंग उस के मन में मनाली के प्रति थी वैसी पहले किसी के लिए नहीं रही.

‘‘चलो, तुम्हें घर ड्रौप कर दूं,’’ मयंक ने कहते ही मनाली के लिए कार का दरवाजा खोल दिया.

‘‘नहीं मयंक, मुझे निमिशा दीदी का कुछ काम करना है इसलिए आप चले जाइए. मैं घर चली जाऊंगी,’’ प्यार से मुसकराते हुए मनाली निकल गई. फिर उस ने फोन कर के कोको स्टूडियो में पता किया कि कोको सर आए हैं कि नहीं. उसे आज हर हाल में फोटोशूट करवाना था. कैब बुक कर के वह कोको स्टूडियो पहुंच गई. तभी उसे याद आया, ‘आज तो ईशा मैम की क्लास है. उन की क्लास मिस करना बड़ी बात थी. वे क्लास बंक करने वाले स्टूडैंट्स को प्रैक्टिकल में बहुत कम नंबर देती थीं. तुरंत कीर्ति को फोन कर रोनी आवाज में दुखड़ा रोया, ‘‘प्लीज मेरी हाजिरी लगवा देना. चाची और निमिशा दीदी ने सुबह से जीना हराम कर रखा है.’’

‘‘ओह, तुम परेशान मत हो,’’ कीर्ति उसे दुखी नहीं देख सकती थी. वह समझती थी कि चाचाचाची मनाली को बहुत तंग करते हैं. तभी कोको सर भी आ गए. मौडलिंग की दुनिया में काफी नाम कमाया था उन्होंने. हां, थोड़े सनकी जरूर थे पर मौलिक, कल्पनाशील लोग ज्यादातर ऐसे होते ही हैं. कोको सर ने मनाली को ध्यान से देखा और उस पर बरस पड़े, ‘‘तुम्हें वजन कम करने की जरूरत है. मैं ने पहले भी तुम्हें बताया था. आज तुम्हारा फोटोशूट नहीं हो सकेगा.’’‘‘बुरा हो इस मयंक का और कालेज के अन्य दोस्तों का. जबतब जबरदस्ती कुछ न कुछ खिलाते रहते हैं,’’ मनाली आगबबूला हो कर स्टूडियो से बड़बड़ाती हुई निकली. घर पहुंची तो चाची ने चुपचाप खाना परोस दिया. चाची उस से ज्यादा बातचीत नहीं करती थीं पर उस का खयाल अवश्य रखती थीं.

उस ने खाने की प्लेट की तरफ देखा तक नहीं, क्योंकि अब उस पर डाइटिंग का भूत सवार हो चुका था. रात का खाना भी उस ने नहीं खाया तो चाचाचाची को चिंता हुई. वैसे भी वह चाचा की लाड़ली थी. वे उसे अपने तीनों बच्चों की तरह ही प्यार करते थे. मनाली के मातापिता का तलाक हो गया था. उस की मां ने एक एनआरआई डाक्टर के साथ दूसरी शादी कर ली थी और अमेरिका में ही सैटल हो गई थीं. वहीं पिता कैंसर के मरीज थे. मनाली जब 8 वर्ष की थी तभी उन की मृत्यु हो गई थी. कुछ समय बूआ के पास रहने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए उसे चंडीगढ़ चाचाचाची के पास भेजा गया. पढ़ाईलिखाई में मनाली का मन कम ही लगता था जबकि चाचा के तीनों बच्चे पढ़ने में बहुत अच्छे थे. चाची उसे भी पढ़ने को कहतीं पर मनाली पर उस का कम ही असर होता था. इंटर में गिरतेपड़ते पास हुई तो चाचा उस के अंक देख कर चकराए. ‘‘किस कालेज में दाखिला मिलेगा?’’

इस का हल भी मनाली ने सोच लिया था. वह चाचा को आते देख कर किसी न किसी काम में जुट जाती. यह देख कर चाचा चाची पर खूब नाराज होते. उस के कम अंक आने का जिम्मेदार चाचा ने चाची और बड़ी बेटी निमिशा को मान लिया था. खैर, जैसेतैसे चाचा ने मनाली का ऐडमिशन अच्छे कालेज में करा दिया था. कालेज में भी मनाली ने सब को चाची और निमिशा के अत्याचारों के बारे में बता कर सहानुभूति अर्जित कर ली थी. चाचा की छोटी बेटी अनीशा की मनाली के साथ अच्छी बनती थी. अनीशा थोड़ी बेवकूफ थी और अकसर मनाली की बातों में आ जाती थी. दोनों बाहर जातीं और देर होने पर मनाली अनीशा को आगे कर देती. बेचारी को चाचाचाची से डांट खानी पड़ती. चाची मनाली की चालाकियां खूब समझती थीं पर अनीशा मनाली का साथ छोड़ने को तैयार न थी. उस का लैपटौप, फोन, मेकअप का सामान मनाली खूब इस्तेमाल करती थी.

एक दिन अनीशा ने उसे बताया कि वह एक लड़के को पसंद करती है. पापा के दोस्त का बेटा है. उस की पार्टी में ही मुलाकात हुई थी. अनीशा ने मनाली को मयंक से मिलवाया. मयंक बहुत हैंडसम था और अमीर बाप की इकलौती संतान. मनाली ने मन ही मन निश्चय कर लिया कि वह कैसे भी मयंक को हासिल कर के रहेगी. ‘‘देखो मयंक, मैं कहना तो नहीं चाहती पर अनीशा को साइकोसिस की बीमारी है.’’ मनाली ने भोली सी सूरत बना कर कहा.

‘‘क्या?’’ मयंक तो हैरान रह गया था.

‘‘प्लीज, तुम यह बात अनीशा और उस की फैमिली से मत कहना. तुम्हें तो पता ही है न उस घर में मेरी क्या हैसियत है.’’

मयंक मनाली की बातों में आ गया. और उस ने अनीशा के प्रति अपना नजरिया बदल लिया. उधर अनीशा को मयंक का व्यवहार कुछ अलग लगने लगा. उस के फोन उठाने भी उस ने बंद कर दिए. अनीशा ने मनाली को इस बारे में बताया तो उस ने आंखें मटकाते हुए समझाया, ‘‘मयंक को मैं ने एक नामी मौडल के साथ देखा है. वह उस की गर्लफ्रैंड है. तुम उसे भूल जाओ.’’ मनाली को तसल्ली हो गई कि अनीशा के भी अंक इस बार कम ही आएंगे. अच्छा हो, दोनों ही डांट खाएं. एक दिन चाचा के बेटे मनीष ने उसे कालेज टाइम में मयंक के साथ घूमते देख लिया. घर आ कर चाचाचाची के सामने मनाली की पोल खुली. ‘‘मैं तो मयंक की खबर लेने गई थी कि उस ने अनीशा का दिल दुखाया,’’ सुबकते हुए मनाली ने कारण बताया. बात बनाना उसे खूब आता था. घर वालों को अनीशा की उदासी का कारण भी पता चला. अनीशा मनाली से नाराज होने के बजाय उस से लिपट गई, ‘‘इस घर में एक तुम ही हो, जिसे मेरी फिक्र है.’’ खैर, कड़ी मेहनत के बाद मनाली ने वजन घटा ही लिया. फोटोशूट भी हो गया और चोरीछिपे एक दो असाइनमैंट भी मिल गए.

एक दिन मयंक से उस ने साफसाफ पूछा, ‘‘मयंक, मैं चाचाचाची के पास रहते हुए तंग आ चुकी हूं. मुंबई में मेरी मौसी रहती हैं. क्या, तुम कुछ समय के लिए मेरी मदद कर सकते हो?’’ ‘‘हांहां, क्यों नहीं. मैं तुम्हारे रहने का बंदोबस्त कर देता हूं. तुम बस मुझे बताओ कि तुम्हें कितनी रकम चाहिए,’’ मयंक सोच रहा था कि मनाली मुंबई जा कर मौसी के पास रह कर अपनी पढ़ाई करना चाहती है. उस ने ढेर सारी रकम और एटीएम कार्ड मनाली को दिया और निश्चित तारीख का टिकट भी पकड़ा दिया. चाचाचाची से कालेज ट्रिप का बहाना बना कर मुंबई जाने का रास्ता मनाली ने खोज लिया था. ‘वापसी शायद अब कभी न हो,’ सोच कर मंदमंद मुसकराती मौडर्न सिंड्रेला मुंबई की उड़ान भर चुकी थी. उसे खुद पर और उस से भी ज्यादा लोगों की बेवकूफी पर भरोसा था कि वह जो चाहेगी वह पा ही लेगी.

वे नौ मिनट: बुआजी का अनोखा फरमान

“निम्मो,  शाम के दीए जलाने की तैयारी कर लेना. याद है ना, आज 5 अप्रैल है.”– बुआ जी ने मम्मी को याद दिलाते हुए कहा.

” अरे दीदी ! तैयारी क्या करना .सिर्फ एक दिया ही तो जलाना है, बालकनी में. और अगर दिया ना भी हो तो मोमबत्ती, मोबाइल की फ्लैश लाइट या टॉर्च भी जला लेंगे.”

” अरे !तू चुप कर “– बुआ जी ने पापा को झिड़क दिया.

” मोदी जी ने कोई ऐसे ही थोड़ी ना कहा है दीए जलाने को. आज शाम को 5:00 बजे के बाद से प्रदोष काल प्रारंभ हो रहा है. ऐसे में यदि रात को खूब सारे घी के दीए जलाए जाए तो महादेव प्रसन्न होते हैं, और फिर घी के दीपक जलाने से आसपास के सारे कीटाणु भी मर जाते हैं. अगर मैं अपने घर में होती तो अवश्य ही 108 दीपों की माला से घर को रोशन करती और अपनी देशभक्ति दिखलाती.”– बुआ जी ने अनर्गल प्रलाप करते हुए अपना दुख बयान किया.

दिव्या ने कुछ कहने के लिए मुंह खोला ही था कि मम्मी ने उसे चुप रहने का इशारा किया और वह बेचारी बुआ जी के सवालों का जवाब दिए बिना ही कसमसा कर रह गई.

” अरे जीजी! क्या यह घर आपका नहीं है ? आप जितने चाहे उतने दिए जला लेना. मैं अभी सारा सामान ढूंढ कर ले आती हूं.” —मम्मी की इसी कमजोरी का फायदा तो वह बरसों से उठाती आई हैं.

बुआ पापा की बड़ी बहन हैं तथा विधवा हैं . उनके दो बेटे हैं जो अलग-अलग शहरों में अपने गृहस्थी बसाए हुए हैं. बुआ भी पेंडुलम की भांति बारी-बारी से दोनों के घर जाती रहती हैं. मगर उनके स्वभाव को सहन कर पाना सिर्फ मम्मी के बस की ही बात है, इसलिए वह साल के 6 महीने यहीं पर ही रहती हैं . वैसे तो किसी को कोई विशेष परेशानी नहीं होती क्योंकि मम्मी सब संभाल लेती हैं परंतु उनके पुरातनपंथी विचारधारा के कारण मुझे बड़ी कोफ्त होती है.

इधर कुछ दिनों से तो मुझे मम्मी पर भी बेहद गुस्सा आ रहा है. अभी सिर्फ 15- 20 दिन ही हुए थे हमारे शादी को ,मगर बुआ जी की उपस्थिति और नोएडा के इस छोटे से फ्लैट की भौगोलिक स्थिति में मैं और दिव्या जी भर के मिल भी नहीं पा रहे थे.

कोरोना वायरस के आतंक के कारण जैसे-तैसे शादी संपन्न हुई.हनीमून के सारे टिकट कैंसिल करवाने पड़े, क्योंकि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा बंद हो चुकी थी. बुआ को तो गाजियाबाद में ही जाना था मगर उन्होंने कोरोना माता के भय से पहले ही खुद को घर में बंद कर लिया. 22 मार्च के जनता कर्फ्यू के बाद स्थिति और भी चिंताजनक हो गई और  25 मार्च को लॉक डाउन का आह्वान किए जाने पर हम सबको कोरोना जैसी महामारी को हराने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हो गए; और साथ ही कैद हो गई मेरी तथा दिव्या की वो सारी कोमल भावनाएं जो शादी के पहले हम दोनों ने एक दूसरे की आंखों में देखी थी.

दो कमरों के इस छोटे से फ्लैट में एक कमरे में बुआ और उनके अनगिनत भगवानों ने एकाधिकार कर रखा था.  मम्मी को तो वह हमेशा अपने साथ ही रखती हैं ,दूसरा कमरा मेरा और दिव्या का है ,मगर अब पिताजी और मैं उस कमरे में सोते हैं तथा दिव्या हॉल में, क्योंकि पिताजी को दमे की बीमारी है इसलिए वह अकेले नहीं सो सकते. बुआ की उपस्थिति में मम्मी कभी भी पापा के साथ नहीं सोतीं वरना बुआ की तीखी निगाहें  उन्हें जला कर भस्म कर देंगी. शायद यही सब देखकर दिव्या भी मुझसे दूर दूर ही रहती है क्योंकि बुआ की तीक्ष्ण निगाहें हर वक्त उसको तलाशती रहती हैं.

“बेटे ! हो सके तो बाजार से मोमबत्तियां ले आना”, मम्मी की आवाज सुनकर मैं अपने विचारों से बाहर निकला.

” क्या मम्मी ,तुम भी कहां इन सब बातों में उलझ रही हो? दिए जलाकर ही काम चला लो ना. बार-बार बाहर निकलना सही नहीं है. अभी जनता कर्फ्यू के दिन ताली थाली बजाकर मन नहीं भरा क्या जो यह दिए और मोमबत्ती का एक नया शिगूफा छोड़ दिया.”   मैंने धीरे से बुदबुताते हुए मम्मी को झिड़का, मगर इसके साथ ही बाजार जाने के लिए मास्क और गल्ब्स पहनने लगा. क्योंकि मुझे पता था कि मम्मी मानने वाली नहीं हैं .

किसी तरह कोरोना वारियर्स के डंडों से बचते बचाते  मोमबत्तियां तथा दिए ले आया. इन सारी चीजों को जलाने के लिए तो अभी 9:00 बजे रात्रि का इंतजार करना था, मगर मेरे दिमाग की बत्ती तो अभी से ही जलने लगी थी. और साथ ही इस दहकते दिल में एक सुलगता सा आईडिया भी आया था. मैंने झट से मोबाइल निकाला और व्हाट्सएप पर दिव्या को अपनी प्लानिंग समझाई, क्योंकि आजकल हम दोनों के बीच प्यार की बातें व्हाट्सएप पर ही बातें होती थी. बुआ के सामने तो हम दोनों नजरें मिलाने की भी नहीं सोच सकते.

” ऐसा कुछ नहीं होने वाला, क्योंकि बुआ जी हमे बहू बहू की रट लगाई रहती हैं” दिव्या ने रिप्लाई किया.

” मैं जैसा कहता हूं वैसा ही करना डार्लिंग, बाकी सब मैं संभाल लूंगा. हां तुम कुछ गड़बड़ मत करना. अगर तुम मेरा साथ दो तो वह नौ मिनट हम दोनों के लिए यादगार बन जाएगा.”

” ओके. मैं देखती हूं.” दिव्या के इस जवाब से मेरे चेहरे पर चमक आ गई .

और मैं शाम के नौ मिनट की अपनी उस प्लानिंग के बारे में सोचने लगा. रात को जैसे ही 8:45 हुआ कि मम्मी ने मुझसे कहा कि घर की सारी बत्तियां बंद कर दो और सब लोग बालकनी में चलो. तब मैंने साफ-साफ कह दिया–

” मम्मी यह सब कुछ आप ही लोग कर लो. मुझे आफिस का बहुत सारा काम है, मैं नहीं आ सकता.”

” इनको रहने दीजिए मम्मी जी ,चलिए मैं चलती हूं.” दिव्या हमारी पूर्व नियोजित योजना के अनुसार मम्मी का हाथ पकड़कर कमरे से बाहर ले गई. दिव्या ने मम्मी और बुआ के साथ मिलकर 21 दिए जलाने की तैयारी करने लगी. बुआ का मानना था कि 21 दिनों के लॉक डाउन के लिए 21 दिए उपयुक्त हैं. उन्हें एक पंडित पर फोन पर बताया था.

“मम्मी जी मैंने सभी दियों में तेल डाल दिया है. मोमबत्ती और माचिस भी यहीं रख दिया है. आप लोग जलाईए, तब तक मैं घर की सारी बत्तियां बुझा कर आती हूं.”— दिव्या ने योजना के दूसरे चरण में प्रवेश किया.

वह सारे कमरे की बत्तियां बुझाने लगी. इसी बीच मैंने दिव्या के कमर में हाथ डाल कर उससे कमरे के अंदर खींच लिया और दिव्या ने भी अपने बाहों की वरमाला मेरे गले में डाल दी.

” अरे वाह !तुमने तो हमारी योजना को बिल्कुल कामयाब बना दिया .” मैंने दिव्या की कानों में फुसफुसाकर कहा .

“कैसे ना करती; मैं भी तो कब से तड़प रही थी तुम्हारे प्यार और सानिध्य को” दिव्या की इस मादक आवाज ने मेरे दिल के तारों में झंकार पैदा कर दी .

“सिर्फ 9 मिनट है हमारे पास…..”— दिव्या कुछ और बोलती इससे पहले मैंने उसके होठों को अपने होठों से बंद कर दिया. मोहब्बत की जो चिंगारी अब तक हम दोनों के दिलों में लग रही थी आज उसने अंगारों का रूप ले लिया था ,और फिर धौंकनी सी चलती हमारी सांसों के बीच 9 मिनट कब 15 मिनट में बदल गए पता ही नहीं चला.

जोर जोर से दरवाजा पीटने की आवाज सुनकर हम होश में आए.

” अरे बेटा !सो गया क्या तू ? जरा बाहर तो निकल…. आकर देख दिवाली जैसा माहौल है.”– मां की आवाज सुनकर मैंने खुद को समेटते हुए दरवाजा खोला. तब तक दिव्या बाथरूम में चली गई .

“अरे बेटा! दिव्या कहां है ?दिए जलाने के बाद पता नहीं कहां चली गई?”

” द…..दिव्या तो यहां नहीं आई . वह तो आपके साथ ही गई थी.”— मैंने हकलाते हुए कहा और  मां का हाथ पकड़ कर बाहर आ गया.

बाहर सचमुच दिवाली जैसा माहौल था. मानो बिन मौसम बरसात हो रही हो.तभी दिव्या भी खुद को संयत करते हुए बालकनी में आ खड़ी हुई.

” तुम कहां चली गई थी दिव्या ? देखो मैं और मम्मी तुम्हें कब से ढूंढ रहे हैं “— मैंने बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा.

” मैं छत पर चली गई थी .दियों की रोशनी देखने.”— दिव्या ने मुझे घूरते हुए कहा “सुबूत चाहिए तो 9 महीने इंतजार कर लेना”. और मैंने एक शरारती मुस्कान के साथ अंधेरे का फायदा उठाकर और बुआ से नजरें बचाकर एक फ्लाइंग किस उसकी तरफ उछाल दिया.

मेरे पति के कई महिलाओं के साथ संबंध हैं, मैं क्या करूं?

सवाल
मैं 25 वर्षीय विवाहित महिला हूं. विवाह को 2 वर्ष हो गए हैं. लेकिन अब मुझे अपने पति के बारे में जो बातें पता चल रही हैं, अगर मुझे पहले पता होती तो मैं उन से शादी कभी न करती. मेरी केवल बहनें हैं कोई भाई नहीं है और पति का कहना है कि उन्होंने मेरे पिता के कहने पर मुझ से इसलिए विवाह किया ताकि मेरे गांव और शहर दोनों की संपत्ति उन के नाम हो जाए.

मेरे पति मुझ पर मायके से पैसा लाने के लिए दबाव डालते हैं और नशे में मुझे मारतेपीटते भी हैं. उन के खुद के अन्य महिलाओं से अफेयर हैं पर वे मुझ पर शक करते हैं जबकि मेरा ऐसा कोई संबंध नहीं है. वे मुझ पर हमेशा नजर रखते हैं और घर से बाहर नहीं जाने देते. कहते हैं, ‘‘मैं तुम्हें तलाक कभी नहीं दूंगा. तुम्हें ऐसे ही रहना होगा.’’ मैं बीए कर चुकी हूं और एमए कर रही हूं. मैं इतनी सक्षम हूं कि अकेले रह सकती हूं लेकिन मेरे पति मुझे तलाक नहीं देना चाहते. मैं बहुत परेशान हूं. मैं ऐसे इंसान के साथ और नहीं रह सकती. मैं अकेले रहना चाहती हूं. क्या करूं सलाह दें.

जवाब
आप की सारी बातों से पता चल रहा है कि आप के पति ने संपत्ति के लालच में आप से विवाह किया है और उन्हें आप से कोई लगाव या प्यार नहीं है. उन का मकसद सिर्फ आप को परेशान करना है. अगर आप सचमुच उन से छुटकारा पाना चाहती हैं तो या तो आप बिना तलाक के भी पति से अलग रह सकती हैं. इस के अलावा आप का इस तरह उन से अलग रहना कानूनन तलाक का आधार नहीं माना जाएगा.

इस के अलावा अगर आप चाहें तो पति के क्रूरतापूर्ण व्यवहार के आधार पर न्यायिक पृथक्करण करवा सकती हैं या तलाक ले सकती हैं. अगर आप तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी देती हैं तो कोर्ट एक खास समय के लिए कानूनी अलगाव की मंजूरी देता है ताकि पतिपत्नी अपने रिश्ते के बारे में पूर्ण विचार कर सकें. इस अवधि में आप दोनों कानूनन विवाहित रहेंगे. लेकिन इस अवधि के बाद भी आप का निर्णय अलग होने का होगा तो कानून के अंतर्गत आप की तलाक की याचिका पर सुनवाई होगी.

अनंत की शादी के इवेंट में Male Guest ने कैरी किए देसी लिबास, लेटेस्ट है फैशन

अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी 12 से 14 जुलाई तक चलने वाली है. इससे पहले शादी के सभी फंक्शन्स बड़े धूमधाम से हुए. जहां गेस्ट भी बड़ी मस्तीभरे अंदाज में एंट्री करते हुए नजर आए. अनंत की शादी में देशविदेश के सभी सैलिब्रिटी नजर आएं.

 

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अनंत की प्री-वेडिंग में भी बौलीवुड के स्टार्स नजर आए थे. जहां सितारों ने महफिल जमाई थी. वहीं इन सभी फंक्शन में बौलीवुड के एक्टर भी सुर्खियों में बने रहे. जहां वे हमेशा मौर्डन लुक में नजर आते हैं , फंक्शन में उन्हें देसी लिबास में देखा गया. उनकी एक से बढ़कर एक शेरवानियां देखने लायक थी. जो कि बेहद ही हटकर डिजाइन की गई थी .

– सिद्धार्थ मल्होत्रा ने पहनी व्हाइट एंब्रौयडरी वाली शेरवानी

बौलीवुड सिलेब्स कपल अनंत के सभी फंक्शन में पहुंचे थे जहां सिद्धार्थ कियारा अडवाणी के साथ नजर आई थी. एक्टर सिद्धार्थ की शेरवानी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था. कैमेरामैन की नजरे सिद्धार्थ की शेरावानी पर थी. बता दें ये शेरवानी अनंत की प्री-वेडिंग में पहनी थी. सिद्धार्थ मल्होत्रा ने व्हाइट एंब्रौयडरी वाली शेरवानी पहनी.

– रणवीर सिंह ने कैरी की औफ व्हाइट शेरवानी कैरी

अनंत अंबानी की शादी शानोशौकत से हो रही है. जहां रणवीर सिंह गेस्ट है और उन्होंने इस फंक्शन के लिए औफ व्हाइट शेरवानी कैरी की है. रणवीर सिंह का फैशन हमेशा कुछ हटकर होता है. इस बार भी वह हटकर देसी लिबास में नजर आए है. Ranveer singh

– सिंगर कैलाश खेर भी दिखे एथनिक आउटफिट में

अनंत की शादी के फंक्शन में शिरकत करने सिंगर कैलाश खेर भी पहुंचे. जहां उन्होंने बेहद ही सिंपल सोबर कुर्ता कैरी किया. कैलाश खेर भी एथनिक में ही नजर आए. उनकी ड्रैस के साथ उनके बालों का स्टाइल भी ट्रैंडी था, कैलाश अक्सर इस हेयर स्टाइल में ही नजर आते हैं, जहां वे अपने थोड़े बालों को पीछे की तरह बांध कर रखते हैं .

– हार्दिक पांड्या की ब्लैक शेरवानी ने बटोरी मीडिया की लाइमलाइट

क्रिकेटर हार्दिक पांड्या हाल में अपने तलाक को लेकर सुर्खियों में रहे. अनंत और राधिका के शादी फंक्शन में जब हार्दिक अकेले पहुंचे तो सभी की नजरे उन पर टिकी हुई थी. जहां वे ब्लैक एंब्रौयडरी वाली शेरवानी सूट में नजर आए. बता दें ये सूट उन्होंने संगीत में पहना था.

– शेरवानी में दिखे शाहरुख खान, साथ में गौरी भी

शाहरुख खान तो हर फंक्शन की जान है तो अनंत अंबानी की शादी के सभी फंक्शन में शाहरुख कैसे पीछे रहते है ऐसे मौके पर वे जब जब नजर आएं तो उन्होंने भी देसी लिबास कैरी किए हुए थे. शाहरुख अपनी वाइफ गौरी खान के साथ स्टेज पर डांस भी करते दिखे थे. जो कि प्री-वेडिंग में नजर आए थे. साथ उन्होंने बेटे अब्राहम के साथ भी काफी फोटोज क्लिक करवाइ थी.

जानिए मोदी जी और दूसरे नेताओं को मिलती है कितनी सैलेरी

भारत में सबसे ज्यादा अबादी युवाओं की है, भारत युवाओं का देश है. जहां का युवा पौलिटिक्स की हर चीज जानने में रुची रखता है हालांकि, युवा राजनीति में आने में तो ज्यादा नहीं आना चाहते है लेकिन देश के नेता कितना कमा रहे है ये जरूर जानना चाहते है. तो देश की पीएम मोदी जी कितना कमा रहे है इस बात की जानकारी सब लेना चाहते होंगे, साथ ही बाकी नेताओं की क्या सैलेरी है यहां जाने.
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राष्ट्रपति

राष्ट्रपति हर महीने 5 लाख रुपए कमाता है. इतना ही नही, रिटायर होने के बाद भी उनकी हर महीने 1.5 लाख रुपए की इनकम आती है. भारत की वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू है.

उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति को राष्ट्रपति से हर महीना 1 लाख रुपए सैलेरी के तौर पर मिलता है. सैलेरी के अलावा उन्हे हर महीना हर तरह के भत्ते मिलते है. भारत के वर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जी है.

प्रधानमंत्री

अब बात आती है भारत के प्रधनमंत्री की सैलेरी कितनी है तो हाल के पीएम श्री नरेंद्र मोदी जी है. जो हर महीना 1 लाख 60 हजार रुपए बतौर इनकम लेते है. इसके साथ ही पीएम को अलग अलग तरह के सरकारी भत्ते और बाकि सेवाएं दी जाती हैं.

राज्यपाल

राज्यपाल की सैलेरी तो 1 लाख 10 हजार रुपए होती है लेकिन सरकारी भत्ता मिला कर उन्हे 3.5 लाख रुपए पूरी इनकम दी जाती है. बता दें, हर राज्य का राज्यपाल अलग होता है. वर्तमान में भारत की राजधानी दिल्ली के राज्यपाल अनिल बैजल है और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल है.

मुख्यमंत्री   

मुख्यमंत्री भारत के हर राज्य के अलग है. वही, राज्य के हिसाब से सभी मुख्यमंत्री की सैलरी अलग होती है. जैसे की उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हर महीने 3 लाख 65 हजार रुपये सैलरी के रूप में मिलते हैं. वही, सबसे ज्यादा सैलरी कर्नाटक के मुख्यमंत्री की है जो 4 लाख 21 हजार रुपये है. बता दें, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 1.70 लाख रुपये वेतन लेते हैं.

विधायक

हर राज्य के विधायक की सैलरी अलग-अलग होती है. अनुच्छेद 164 के अनुसार हर राज्य में विधायक की सैलरी उसके राज्य विधायिकाओं द्वारा तय की जाती है. तेलंगाना के विधायकों को सबसे ज्‍यादा सैलरी दी जाती है. वहीं सबसे कम सैलरी त्रिपुरा और मेघालय के विधायकों को दी जाती है. तेलंगाना के विधाय‍क हर महीने 2.50 लाख रुपये पाते हैं तो त्रिपुरा के विधायकों को 34 हजार रुपये सैलरी दी जाती है. इस तरह से विधायक लाख से हजार रुपए तक कमा लेते है.

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