Film Story: परदे की दुनिया – फटा पोस्टर निकली मोनालिसा

Film Story: आप को प्रयागराज महाकुंभ मेला याद है जहां नीली आंखों वाली एक लड़की के माला बेचने की वीडियो इतनी ज्यादा वायरल हो गई थी कि वह सोशल मीडिया पर छा गई थी. वही मोनालिसा जो बाद में हिंदी फिल्मों में काम करने के लिए मुंबई चली गई थी और अब उस की फिल्म डायरी औफ मणिपुरका पोस्टर भी रिलीज हो गया है, जिस में वह गांव की छोरी के किरदार में नजर आएगी. सनोज मिश्रा की यह फिल्म मोनालिसा की जिंदगी को क्या नया मोड़ देती है, यह तो आने वाला समय बताएगा, पर फिलहाल मोनालिसा के सोशल मीडिया के फैंस बड़े खुश नजर रहे हैं कि एक बेहद गरीब घर की आम लड़की सच में फिल्म हीरोइन बन रही है.  

विक्की कौशल बनेंगेधुरंधर
हिंदी फिल्मधुरंधरका दूसरा पार्ट 19 मार्च को रिलीज होने की उम्मीद है. पार्ट 1 में रहमान डकैत बने अक्षय खन्ना ने अपनी जालिम अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया था और अब सुनने में आया है कि पार्ट 2 में विक्की कौशल इस का हिस्सा बनते दिखेंगे. वे कई साल पहले आई फिल्मउरी : सर्जिकल स्ट्राइकके मेजर विहान के रूप में इस फिल्म में कैमियो करेंगे.
विक्की कौशल के कैमियो में कुछ एक्शन सीन भी शामिल हैं और उन्होंने पिछले साल 2025 में हीधुरंधरके पहले पार्ट की रिलीज से पहले ही अपने हिस्से की शूटिंग पूरी कर ली थी.


राशा ने गाया गाना
रवीना टंडन की बेटी राशा थडानी ने अजय देवगन की बनाई फिल्मआजादसे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रहा था, जो बुरी तरह से पिट गई थी, पर अब वे अपनी नई फिल्मलाइका लाइकीसे सुर्खियां बटोर रही हैं, जिस में उन्होंने गाना भी गाया है. इस गाने
मैं तो छाप तिलक…’
का वीडियो सामने चुका है.
फिल्मलाइका लाइकीमें राशा थडानी के साथ अभय वर्मा बतौर हीरो दिखाई देंगे. भावना तलवार और राघव गुप्ता इस फिल्म को प्रोड्यूस कर रहे हैं.


खुशी कपूर का ब्रेकअप
जाह्नवी कपूर की छोटी बहन खुशी कपूर ने भी हिंदी फिल्मों में बतौर हीरोइन हाथ आजमाया है, पर वे अभी तक तो फ्लौप ही रही हैं. वैसे, वे निजी जिंदगी में सुर्खियों में बनी रहती हैं. नई खबर उन के ब्रेकअप की है. सुनने में आया है कि बोनी कपूर और श्रीदेवी की छोटी बेटी खुशी कपूर का अपने बौयफ्रैंड वेदांग रैना से ब्रेकअप हो गया है. एक पत्रकार विक्की लालवानी ने सोशल मीडिया पर खुशी कपूर और वेदांग रैना के ब्रेकअप को लेकर दावा करते हुए कहा कि खुशी और वेदांग अब साथ नहीं हैं, लेकिन ब्रेकअप की असली वजह अभी पता नहीं चली है. हालांकि, खुशी और वेदांग की तरफ से इस ब्रेकअप को ले कर कोई रिएक्शन नहीं आया है.        Film Story

 

Political News: दीपक प्रकाश वंशवाद की नई बेल

Political News: बिहार विधानसभा चुनाव में बंपर जीत मिलने के बाद 20 नवंबर, 2025 को पटना के गांधी मैदान में पूरे जोशोखरोश के साथ मुख्यमंत्री समेत 26 मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह हुआ, जिसे लाखों लोगों ने देखा. इस गठबंधन के 6 विधायकों पर एक मंत्री बनाने का विचार हुआ. इस फार्मूले के तहत राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोरचा को भी एक मंत्री पद मिलना था. अब चूंकि इस दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सदस्य हैं, तो उन के 4 में से किसी एक विधायक का मंत्री बनना तय था. लोग यही कयास लगा रहे थे कि शायद उन की पत्नी स्नेहलता मंत्री बनेंगी, जो सासाराम विधानसभा से  जीती हैं. मगर जब अचानक ही मीडिया में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने की खबर आई, तो सभी चौंक गए.


इस चौंकने की वजह यह थी कि दीपक प्रकाश विधानसभा का चुनाव तो क्या जीतते, जब वे उम्मीदवार भी नहीं थे. वे विधानपरिषद के सदस्य भी नहीं थे. फिर वे मंत्री पद पर काबिज कैसे हुए, यह सवाल हैरान करने वाला था. राजनीतिशास्त्र की जरा भी जानकारी रखने वाला यह जानता है कि किसी भी नागरिक को मंत्रिमंडल में मंत्री तो क्या, मुख्यमंत्री तक बनाया जा सकता है. बस, उसे अगले 6 महीने में विधानसभा या विधानपरिषद का सदस्य बनना होगा.


यहां उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी को मजबूत बनाने के लिए यह चाल चली, जो लोगों को बड़ी देर बाद सम? में आया. दरअसल, विधानपरिषद के 3 सदस्य भी विधानसभा के लिए चुने गए हैं. ऐसे में विधानपरिषद के इन 3 सीटों के लिए चुनाव होंगे ही. भाजपा, जद (यू) या दूसरा कोई बड़ा दल इस पर अपनी दावेदारी पेश करे, इस के पहले ही उपेंद्र कुशवाहा ने एक तरह से अपनी दावेदारी पेश कर दी है.
अब कोई सरकार अपने ही मंत्री को सिर्फ इस कारण से तो मंत्रिमंडल से हटाने से रही कि वह विधानमंडल का सदस्य नहीं है. सो, यह भाजपा और जद (यू) के लिए मजबूरी है कि वे दीपक प्रकाश को विधानपरिषद का सदस्य बनाने में सहयोग करें.


दीपक प्रकाश के सदस्य बन जाने से उपेंद्र कुशवाहा को एक और फायदा है. वह यह कि अगले 2 साल बाद राज्यसभा के चुनाव के वक्त वे खुद एक उम्मीदवार होंगे. ऐसे में उन्हें अपनी पार्टी के वोट पक्के हो जाएंगे, जिस से वे दोबारा राज्यसभा के सांसद सदस्य के रूप में आसानी से चुन लिए जाएंगे. पर अब यह सवाल उठने लगा है कि राजनीति में कोरे दीपक प्रकाश क्या कुछ कर पाएंगे? 36 साल के दीपक प्रकाश बीटैक पास हैं और मल्टीनैशनल कंपनी में सौफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी भी कर चुके हैं. बाद में उन्होंने अपना बिजनैस शुरू किया. राजनीति में उन की ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी, मगर मां स्नेहलता, जो सासाराम से उम्मीदवार थीं, के चुनाव प्रचार में उन्होंने जम कर पसीना बहाया था.


मूल रूप से उत्तर प्रदेश निवासी रिटायर्ड अधिकारी एसएन मिश्रा की बेटी साक्षी मिश्रा से दीपक प्रकाश ने लव मैरिज की हुई है. साक्षी मिश्रा ने भी अपनी सास स्नेहलता का खुल कर चुनाव प्रचार किया था.
यह ठीक है कि कल तक दीपक प्रकाश को कोई जानता भी नहीं था, मगर आज वे अचानक चर्चा का विषय बन गए हैं. विपक्ष द्वारा फटाफट परिवार और वंशवाद के आरोप मढ़े जाने लगे. कहा गया किये महानुभाव रालोमो अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं. खुद उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा सांसद हैं. पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को विधानसभा चुनाव सासाराम से लड़वाया, वे जीत गईं. बेटा बचा हुआ था, तो वाइल्ड कार्ड एंट्री दिलवा कर सीधे मंत्रीपद की शपथ दिलवा दी’.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी क्या, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी परिवारवाद के खिलाफ हैं. लेकिन गठबंधन धर्म का पालन भी तो जरूरी है. ऐसे में सहयोगी दलों का खयाल रखना ही होता है और यही वजह रही कि दीपक प्रकाश को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों का आशीर्वाद भी मंच पर मिल गया. उपेंद्र कुशवाहा ने बिना किसी सदन के सदस्य रहे अपने बेटे को बिहार मंत्रिमंडल में अपनी पार्टी के कोटे से शामिल करवाया. यह उपेंद्र कुशवाहा का निजी फैसला था. अब इस को ले कर सोशल मीडिया पर उपेंद्र कुशवाहा को ट्रोल किया जाने लगा.


ऐसे में पहले उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार के ही एक पुराने जमाने के जुमले को सुना दिया किखाने के वक्त मक्खियां भिनभिनाती ही हैं. सो बाएं हाथ से मक्खियों को भगाते रहो और दाएं हाथ से खाते रहो’.
यह अलग बात है कि उपेंद्र कुशवाहा ने बाद में सफाई दी कि उन्हें ऐसा करने को क्यों मजबूर होना पड़ा. वे बोले किवे संगठन बनाते थे, जो आगे चल कर बिखर जाता था, टूट जाता था. आगे यह बिखरे, टूटे, इस के लिए उन्होंने यह इंतजाम किया है’.


लंबे समय से राजनीति में अज्ञातवास में रहने वाले उपेंद्र कुशवाहा की बातों में दम तो है ही, तभी तो यह ट्रोल करना रुक गया है. याद रहे कि सीट बंटवारे से पहलेएनडीए में इस बार कुछ भी ठीक नहीं हैकह कर हाहाकार मचा देने वाले उपेंद्र कुशवाहा ने ऐसी सधी राजनीतिक बाजी खेली है कि चुनाव नतीजों और कैबिनेट गठन के बाद हर कोई उन के राजनीतिक कौशल की चर्चा कर रहा है. चुनाव नतीजों के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सब से ज्यादा फायदे में नजर रहे थे. लोजपा का 29 विधानसभा सीटों पर लड़ कर 19 जीतना और उस के हिसाब से 2 मंत्री मिलना स्वाभाविक है. जीतनराम मां? की पार्टी हम का 6 सीट लड़ना और 5 जीत कर एक मंत्री बनना प्रत्याशित बात है.

ध्यान रहे कि सीट बंटवारे में 6 सीट मिलने और खासतौर पर महुआ सीट लोजपा को मिलने से उपेंद्र कुशवाहा की खुली नाराजगी के बाद उन को मनाने के लिए रातोंरात नित्यानंद राय हवाईजहाज से दिल्ली ले गए थे. लोकसभा चुनाव के दौरान पवन सिंह के लड़ने से काराकाट सीट पर उपेंद्र कुशवाहा के फंसने और आखिरकार हारने के चलते शाहाबाद और मगध में राजग को महागठबंधन ने पीछे छोड़ दिया था. भाजपा विधानसभा में उन की नाराजगी नहीं चाहती थी. उपेंद्र कुशवाहा माने, लेकिन अपनी राजनीतिक ताकत की भरपूर कीमत वसूली.


उपेंद्र कुशवाहा ने खुल कर स्वीकार किया है किबेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाना, सिर्फ काबिलीयत का मामला नहीं था, बल्कि यह पार्टी बचाने की मजबूरी भी थी. उन्होंने साफ कहा कि 2014 में 3 सांसद जीते, जिन में से 2 पार्टी छोड़ गए. इसी तरह 2015 में 2 विधायक आए और चले भी गए. मतलबपार्टी खड़ी करें और लोग टूट जाएं. इस से बचने का बस एक ही उपाय उन के पास बचा था’. उन के इस बयान ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. क्या यह परिवारवाद है या एक छोटी पार्टी के वजूद की सिक्योरिटी?
बहरहाल, दीपक प्रकाश ने 22 नवंबर, 2025 को मंत्री, पंचायती राज विभाग, बिहार, पटना में पदभार ग्रहण किया. वैसे, अगले साल बिहार में पंचायती चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में उन के काम चुनौती से भरे तो होंगे ही, देखते हैं कि ऊंट किस करवट बैठता है.    Political News

Film Story: मालविका मोहनन – विजय की फैन, प्रभास पर क्रश

Film Story: पै इंडिया फिल्म राजा साबको भले ही लोगों ने कम पसंद किया हो, मगर इस फिल्म के हीरो प्रभास के साथसाथ हीरोइन मालविका मोहनन की अदाकारी की भी काफी चर्चाएं हुईं. मालविका मोहनन अब तक 15 से ज्यादा फिल्मों में एक्टिंग कर चुकी हैं, जबकि वे हीरोइन के बजाय कैमरामैन बनना चाहती थीं.


दक्षिण भारत के मशहूर कैमरामैन केयू मोहनन और लेखक पत्रकार मां की बेटी मालविका मोहनन का जन्म 4 अगस्त, 1993 को केरल के कन्नूर जिले के पय्यानूर कसबे में हुआ था, पर उन की परवरिश पढ़ाईलिखाई मुंबई में हुई. मालविका मोहनन अब तक मोहनलाल, ममूटी, दुलकर सलमान, रजनीकांत, विजय थलपति, कार्तिक, प्रभास समेत दक्षिण भारत के सभी बड़े कलाकारों के साथ ही नहीं, बल्कि साल 2017 में ईरानी फिल्मकार माजिद मजीदी के डायरैक्शन में बनी फिल्मबियौंड क्लाउड्समें भी नजर आई थीं.


मालविका मोहनन के एक्टिंग कैरियर की शुरुआत साल 2013 में दुलकर सलमान के साथ फिल्मपत्तम पोलेसे हुई थी, फिर साल 2015 में वे अपनी दूसरी फिल्मनिर्णयकममें बैले डांसर बनी थीं. फिल्मबियौंड क्लाउड्समें मालविका मोहनन ने ईशान खट्टर की बड़ी बहन का किरदार निभाया था. इस फिल्म के लिए उन्होंने जेल के एक सीन की शूटिंग के लिए 15 दिनों में 8 किलोग्राम वजन कम किया था और ?ाग्गी बस्ती में रहने वाली लड़की का सही रूप पाने के लिए कई दिनों तक अपने बाल नहीं धोए थे. अब उन्हें तमिल एक्शन फिल्मसरदार 2’ के रिलीज होने का इंतजार है.


फिल्म राजा साबमें मालविका मोहनन ने भैरवी का किरदार निभाया है. वे बताती हैं, ‘‘इस फिल्म में लोग मु? भैरवी के किरदार में देख रहे हैं. भैरवी हमेशा अपनों के लिए लड़ने के लिए तैयार रहती है. पहले भैरवी अपने नाना के लिए लड़ती है और जब उसे प्रभास के किरदार राजू से प्यार हो जाता है, तो वह राजू के लिए भी लड़ती है.’’ हाल ही में मशहूर फिल्म डायरैक्टर संदीप रेड्डी वांगा ने प्रभास कोभारत का सुपरस्टारकी संज्ञा दी है. इस पर मालविका मोहनन ने कहा, ‘‘संदीप रेड्डी वांगा ने सच ही कहा है. सिर्फ तेलुगु ही नहीं, बल्कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में भी ऐसे बहुत कम कलाकार हैं, जो अपने बल पर दर्शकों को सिनेमाघर के अंदर खींच कर ला सकते हैं और प्रभास सर इस देश में सब से ज्यादा दर्शकों को खींचने वाले कलाकार हैं.


‘‘प्रभास सर सही मायने में बौक्स औफिस के किंग हैं. ‘बाहुबलीके बाद मेरा प्रभास सर पर क्रश है और मु? लगता है कि बहुतों को उन पर क्रश है.’’ मालविका मोहनन फिल्म बैकग्राउंड से हैं, पर उन का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में कुछ पुरुष कलाकार महिलाओं के प्रति इज्जत दिखाने की अपनी ?ाठी इमेज पेश करते हैं. हाल ही में इस मुद्दे पर मालविका मोहनन का एक बयान काफी चर्चित हुआ था, जिस में मालविका ने कहा था, ‘‘कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो अच्छी इज्जत पाने के लिए सही समय परमुखौटापहन कर दिखावा करते हैं. यह कड़वा सच है. ‘‘मैं पिछले 5 सालों में ऐसे कई लोगों
से मिली हूं, जो चतुराई से अपनी दोहरी इमेज बनाए रखते हैं. जब कैमरा बंद होता है तो वे अलग तरह से एक्टिंग करते हैं.


‘‘इन कलाकारों को पता है कि उन्हें कब बोलना है और किस तरह से बरताव करना है, जिस से उन्हें जनता की स्वीकृति मिले खासकर महिलाओं के मुद्दों पर. हालांकि, उन का असली स्वभाव अकसर तब सामने आता है, जब वे सुर्खियों से दूर होते हैं. ‘‘मैं ने देखा है कि कैमरा बंद होते ही कुछ कलाकारों का व्यक्तित्व कितना बदल जाता है. मेरी राय में फिल्म इंडस्ट्री में लैंगिक भेदभाव की जड़ें काफी गहरी हैं, जिन्हें खत्म किया जाना चाहिए.’’ मालविका मोहनन कभी फिल्ममास्टरमें विजय थलपति के साथ काम कर चुकी हैं. मालविका ने खुद को विजय थजपति की फैन बताते हुए कहा है, ‘‘मैं तो विजय थलपति की बहुत बड़ी फैन हूं. जब उन्होंने घोषणा की थी कि वे एक्टिंग छोड़ कर राजनीति में जा रहे हैं, तो मु? अच्छा नहीं लगा था. मु? दुख है कि वे सिनेमा को अलविदा कह रहे हैं.’’


शांति स्वरूप त्रिपाठी

Hindi Kahani: लुट गई जोगी तेरे प्यार में

Hindi Kahani: जमीला और शर्मिला पक्की सहेलियां थीं. उन की दोस्ती को देख कर घरपरिवार वाले और पड़ोसी उन्हें दो जिस्म एक जान कहते थे. दोनों सहेलियों ने गांव में ही एकसाथ पढ़ाई की थी. आगे की पढ़ाई के लिए गांव में स्कूल होने, गरीबी और परदा प्रथा की वजह से उन के परिवारों ने आगे दिलचस्पी नहीं दिखाई. नतीजतन, वे दोनों घर पर ही रह कर परिवार के साथ बीड़ी बनाने का काम करने लगीं.
जमीला कब जवान हो गई, उस की सम? में नहीं आया. घर के बड़ेबूढ़े जब उसे टोकते, ‘बड़ी हो गई है तू, ठीक से दुपट्टा ओढ़ कर बाहर निकला कर. अकेले घूमने मत जाना. बहू, इसे नकाब ला कर दे. अब कोई छोटी बच्ची थोड़े ही है, बड़ी हो गई…’


वह सोचती, ‘आखिर मु? में ऐसा क्या हुआ है? जब मैं स्कूल जाती थी, तब कोई कुछ नहीं कहता था.’
शर्मिला की शादी पास के गांव में हो गई और जमीला अकेली रह गई. दिल की बात कहनेसुनने वाला कोई रहा. उस की जिंदगी कैद के पंछी की तरह रह गई. बीड़ी बनाते और घर का काम करतेकरते उस का दम घुटने लगा. समय पंख लगा कर उड़ने लगा. जवानी जमीला को जिंदगी का मजा लूटने की दावत देने लगी. वह अंदर ही अंदर कसमसाने लगी. जब वह जवान जोड़ों को देखती, तो उस की बेचैनी और बढ़ जाती. शहनाई की आवाज सुन कर वह जोश में जाती. ‘‘जमीला के अब्बू, देखनाजमीला को क्या हुआ है…’’ उस की मां ने घबरा कर आवाज दी.


‘‘आया बेगम,’’ बाहर अपने दोस्तों के साथ बैठे जमीला के अब्बू जावेद मियां ने कहा. वे दौड़ेदौड़े बैठक में आए, जहां जमीला अकेली बैठी बीड़ी बनातेबनाते बेहोश हो कर गिर गई थी. ‘‘क्या हुआ बेटी, देखो मु?आंखें खोलोबेगम, पानी लाओइस के मुंह पर पानी के छींटे मारो,’’ जावेद मियां ने कहा. तब तक उन के दोस्त भी अंदर गए थे. ‘‘कैसे हो गया यह सब?’’ मौलाना ने पूछा, जो जावेद के दोस्त थे.
‘‘क्या बताऊंजमीला बैठी बीड़ी बना रही थी कि एकाएक बेहोश हो कर गिर पड़ी,’’ जमीला की मां ने बताया. मौलाना ने ?ाड़फूंक शुरू कर दी. मुंह पर पानी के छींटे मारे, प्याज सुंघाई गई और तकरीबन आधा घंटे बाद जमीला को होश गया. जमीला कुछ थकीथकी सी लग रही थी, इसलिए उसे आराम करने की सलाह दे कर जावेद मियां के दोस्त वहां से चले गए. दूसरे दिन मौलाना ने जावेद मियां के घर पर दस्तक दी. दोनों बैठ कर जमीला की बीमारी पर बातचीत करने लगे.


‘‘देखो जावेद मियां, ऐसे हालात में लड़की की शादी करने में मुश्किल आएगी,’’ मौलवी ने कहा. ‘‘बात तो सही है, पर इस का कोई उपाय तो बताओ? ‘‘जमीला के ठीक होते ही मु? जैसा भी लड़का मिलेगा, मैं उस की शादी कर दूंगा,’’ कह कर जावेद मियां चुप हो गए. ‘‘ठीक है, मैं पता करता हूं, फिर तुम्हें खबर करूंगा…’’ मौलाना ने कहा, ‘‘अब मैं चलता हूं.’’ तकरीबन हफ्तेभर बाद मौलाना जावेद मियां के घर दोबारा आए. ‘‘आओ मौलाना, काफी दिन बाद आना हुआ,’’ जावेद मियां ने कहा. ‘‘मैं तुम्हारे काम में लगा था. बड़ी मुश्किल से एक शख्स मिला है. उस का कहना है कि वह लड़की को ठीक कर देगा. कुछ वक्त लगेगा, पैसा भी खर्च होगा. जब तक ?ाड़फूंक चलेगी, तब तक यह बात किसी तक पहुंचे, वरना इल्म टूट जाएगा.’’ ‘‘मौलाना, मु? हर शर्त मंजूर है. तुम आज से ही इलाज शुरू करा दो. अपनी बेटी की बेहतरी के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूं.’’


मौलाना के मन में खोट था. उस ने अपने एक दूर के साले असद से इस पूरे मसले पर पहले ही बात कर ली थी. मौलाना ने उस से कहा था, ‘देखो मियां, मैं ने सौदा पटा लिया है. जावेद मियां की जमीन अपनी जमीन से लगी हुई है. हमें उसे हड़पना है. अब जा कर फंसा है. पहले तो बड़ीबड़ी बातें करता था, खेत जाने का रास्ता बंद कर दिया था, इसलिए मजबूरी में मु? उस से दोस्ती करनी पड़ी. तुम ऐसी चाल चलो कि जावेद की जमीन बिक जाए और वह मु?मिल जाए.’ असद एक शातिर बदमाश था. उस की बीवी उस की हरकतों से तंग कर पिछले 10 सालों से अपने मायके में बैठी थी. गांव के भोलेभाले लोगों को गंडेतावीज बना कर देना, उन से रकम ऐंठना उस का पेशा था. असद ने जावेद मियां के घर कर अपना काम शुरू कर दिया. शुरूशुरू में तो जमीला को कुछ भी अच्छा लगा, लेकिन अकेले में पराए मर्द को पा कर वह धीरेधीरे खुश रहने लगी. जब असद को महसूस हुआ कि जमीला उस की ओर खिंच रही है, तो उस ने जावेद मियां से कहा, ‘‘जावेद साहब, कुछ जरूरी काम से मैं 1-2 दिन के लिए घर जा रहा हूं, लेकिन जल्दी ही वापस जाऊंगा.’’


जाने से पहले मौलाना और असद के बीच साजिश की लंबी बात चली. इसी के तहत वह अचानक अपने घर चला गया. इधर जावेद मियां परेशान हो उठे, क्योंकि जमीला फिर से बारबार बेहोश होने लगी थी.
वे घबरा कर मौलाना के पास गए और असद को जल्द से जल्द बुलाने की गुहार लगाई. मौलाना की खबर पा कर असद वापस आया ही था कि 8-10 मर्द और औरत उसे ढूंढ़ते हुए जावेद मियां के घर जा पहुंचे.
वे सभी गुजारिश करने लगे, ‘जोगी बाबा गांव वापस चलो, हम सब परेशान होने लगे हैं.’ इसी बीच मौलाना ने कर लोगों को सम?ाया कि आप के जोगी बाबा 2 दिन बाद आप के पास जाएंगे. रात में असद उर्फ जोगी बाबा के शरीर में भयानक हलचल होने लगी और वह जोरजोर से हंसने लगा. घर के सभी लोग जाग गए. बाहर से आए उस के चेले दुआ मांगने लगे, परेशानी से बचने के उपाय पूछने लगे. जोगी बाबा का गुस्से से भरा मिजाज देख कर सब डर गए. असद ने बताया कि जावेद के घर के पीछे किसी ने काला जादू कर दिया है, उसे निकाल कर नदी में डाल दो. पर सावधान, किसी की जान जा सकती है. 5 क्विंटल पुलाव बना कर फातिहा दिलाओ और पहले कहीं से काले जादू की पुडि़या ढूंढ़ो.

ज्यादा से ज्यादा लोगों को खाना खिलाओ. जोगी बाबा जो कहे वह करो. सब ठीक हो जाएगा.
काफी मशक्कत के बाद आखिर कपड़े में लिपटी एक पुडि़या मिल गई. उस पुडि़या में हड्डी, काजल, सिंदूर, अनाज, काली चूड़ी वगैरह मिली. शक अब यकीन में बदल गया. ‘‘जावेद मियां, बात को सम?…’’ मौलाना ने कहा, ‘‘बच्ची प्यारी है या जायदाद. तुम ऐसा करो कि मेरे नाम जमीन की रजिस्ट्री कर दो. पूरा खर्चा मैं करता हूं. जब पैसा हो, तो मेरा पैसा लौटा देना और जमीन वापस ले लेना.’’ मौलाना ने अपनी चाल से जावेद को फांस लिया. अंधविश्वास में फंसे जावेद ने मौलाना की बात मान कर जमीन की रजिस्ट्री उन के नाम कर दी. इधर असद उर्फ जोगी बाबा ने ऐसी चाल चली कि जमीला ने अपनेआप को उस के हवाले कर दिया. अब वे दोनों बीमारी की आड़ लेकर जिंदगी का मजा लूटने लगे. ?ाड़फूंक के बहाने अब दोनों को कोई नहीं रोक पाता था. जमीला को जब से पराए मर्द का चसका लगा था, तब से वह खुश रहने लगी थी. उस के मांबाप इसे जोगी बाबा की ?ाड़फूंक का नतीजा मान रहे थे.

धीरेधीरे साल पूरा होने को आया. उस के मांबाप को जमीला की शादी की फिक्र होने लगी और वे
लड़के की तलाश में जुट गए. इस बात की भनक असद को लग गई. वह मौका पा कर वहां से रफूचक्कर हो गया. इसी बीच जमीला की शादी पक्की हो गई, लेकिन एक दिन वह अचानक बेहोश हो कर गिर पड़ी.
लोगों के ?ाक?ोरने पर भी होश नहीं आया, तो उसे अस्पताल ले जाया गया. लेडी डाक्टर ने जांच करने के बाद कहा, ‘‘हम ने बच्ची को देख लिया है. अब वह होश में गई है. आप उस का खयाल रखिए. भारी चीज उठाने दें, क्योंकि आप की बेटी मां बनने वाली है.’’ लेडी डाक्टर की यह बात सुन कर जावेद, उस की बेगम और रिश्तेदारों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. उन की जमीला ढोंगी जोगी के प्यार में लुट चुकी थी.  Hindi Kahani

लेखक  ए. खान

Hindi Story: अपना खयाल रखना अब्बू

Hindi Story: लखनऊ छोड़ कर गाजियाबाद में नौकरी करने आई सना का सामना मिस्टर कुमार से हुआ जो उस का बौस था. एक दिन कुमार ने उसे अपने घर बुला कर धोखे से उस की इज्जत लूट ली. सबा को अपने बीमार अब्बू का खयाल आया. क्या वह हालात को संभाल पाई?

जिंदगी में चाहे जितनी बार भी इंटरव्यू दिया जाए, हर बार घबराहट होना लाजिमी ही है. यही हाल सना का भी था. आज गाजियाबाद केओरियन मौलमें उस का इंटरव्यू था.
सना ने हलके आसमानी रंग का सूट पहना था और अपने बालों को खुला रहने दिया था. होंठों पर नैचुरल कलर की लिपस्टिक लगा कर उस ने अपनेआप को देखा, तो अपनी खूबसूरती पर रश्क किए बिना रह सकी.


कैब में बैठने के ठीक 30 मिनट के बाद ही सनाओरियन मौलके सामने थी. कैब का भुगतान करने के बाद सना उस मौल के मौडर्न गेट से अंदर दाखिल हुई. अभी सुबह के 10 ही बज रहे थे. मौल में भीड़भाड़ का आना अभी शुरू नहीं हुआ था. भीतर चारों तरफ रूम फ्रैशनर की खुशबू फैली हुई थी. सना ने अपनी नजरें दौड़ाईं, तो पाया कि इस मौल की विशालता और खूबसूरती के आगे वे सब मौल और शोरूम फीके हैं, जिन में वह पहले काम कर चुकी है. सना ने 5वें फ्लोर पर जाने के लिए लिफ्ट का बटन दबाया. कुछ ही सैकंड्स के बाद लिफ्ट खुल गई. ट्रांसपेरेंट लिफ्ट ऊपर जा रही थी और सना अपनी उत्सुकता भरी नजरों से चारों तरफ मौल की भव्यता को देख रही थी.


5वें फ्लोर पर लिफ्ट खुली तो सना ने देखा कि फ्लोर के एक कोने पर मार्बल का बड़ा सा काउंटर बना हुआ है जिस के पीछे एक दुबलीपतली सी खूबसूरत रिसैप्शनिस्ट बैठी हुई है. सना ने आत्मविश्वास भरे लहजे में उस से बात शुरू की, ‘‘गुड मौर्निंग मैम, आज मु? अकाउंट औफिसर के इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है.’’ सना की बात आगे सुनने से पहले ही वह रिसैप्शनिस्ट मुसकराई और उस ने एक बटन दबा कर चपरासी को बुलाया और सना के लिए कौफी लाने को कहा. थोड़ी देर में ही कौफी भी गई.
दिव्या नाम की उस रिसैप्शनिस्ट ने सना को एक ओर रखे सोफे पर बैठने और कौफी पीने का इशारा किया, तो सना  ‘थैंक्सकह कर कौफी पीने लगी.


कौफी खत्म करते ही सना तेजी से उठ कर रिसैप्शनिस्ट के पास पहुंची तो रिसैप्शनिस्ट ने सना को बताया कि उस का इंटरव्यू आज नहीं हो पाएगा, क्योंकि अकाउंट मैनेजर कुमार सर बाहर गए हुए हैं और उन की गैरमौजूदगी में किसी का भी इंटरव्यू नहीं हो सकता. सना को पूरे 2 दिन का इंतजार करना होगा. सना बु? मन से अपने होटल में लौट गई और अपनी खिसियाहट और थकान मिटाने के लिए एक शावर लिया और कमरे में ही पिज्जा मंगवा कर खाया और मोबाइल साइलैंट मोड पर लगा कर सो गई. जब सना जागी तो मोबाइल में अब्बू की 3 मिस कौल्स थीं. सना ने ?ाट से अब्बू को फोन मिलाया. अब्बू सना का हालचाल और खैरियत जानना चाह रहे थे.


सना ने अपनी बातों से अब्बू को निश्चिंत कर दिया था कि वह ठीक है और अपना ध्यान खुद रख सकती है.
अब्बू ने फोन अम्मी को पकड़ा दिया तो अम्मी की वही पुरानी नसीहतें फिर से शुरू हो गई थीं, ‘‘जमाना बहुत खराब है. आदमी की जात पर कभी भरोसा मत करना और देर रात तक घर के बाहर रहना बिलकुल ठीक नहीं.’’ सना मुसकरा रही थी और अम्मी की हर बात का जवाब देते जा रही थी. बातचीत के बाद सना ने फोन रखा और खाना खाने के लिए बाहर गई और अगले 2 दिन उस ने घूमनेफिरने में बिताए और वह सुबह भी ही गई जब सना को अपना इंटरव्यू देने जाना था. अगली सुबह सना रिसैप्शनिस्ट दिव्या से जा कर मिली.


दिव्या ने एक मुसकराहट से सना का स्वागत किया और उसे बताया कि आज सना को निराश नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि कुमार सर गए हैं और थोड़ी देर में अपने औफिस में जाएंगे, तब तक सना को उन का इंतजार करना होगा. सना एक ओर रखे सोफे में धंस गई थी. थोड़ी देर बाद दिव्या ने सना को कर बताया कि कुमार सर अपने छठी मंजिल पर बने औफिस में चुके हैं और सना अब जा कर इंटरव्यू दे सकती है. सना लिफ्ट ले कर छठे फ्लोर पर पहुंची. लिफ्ट से बाहर निकल कर बाईं तरफ एक शानदार केबिन बना हुआ था जिस के बाहर कुमार के नाम की नेम प्लेट लगी हुई थी. सना ने धड़कते दिल से दरवाजा खोला और बोली, ‘‘सर, क्या मैं अंदर सकती हूं?’’


सना के सामने एक 30-32 साल का आदमी बैठा हुआ था, जो अपनेआप को काफी बिजी दिखा रहा था. उस की टेबल पर 2 लैपटौप रखे हुए थे, जिन पर वह बारबार नजरें गड़ा रहा था. ‘‘मैं ने आप का बायोडाटा देखा, काफी अच्छी परफौर्मैंस रही है आप की,’’ मिस्टर कुमार के मुंह से अपनी तारीफ सुन कर सना खुश हुई. ‘‘पर एक बात नहीं सम? आई?’’ सना मिस्टर कुमार के इस सवाल से थोड़ा ठिठक गई. मिस्टर कुमार ने सना से यह जानना चाहा कि वह तो रहने वाली लखनऊ की है और लखनऊ में तो शौपिंग मौल्स की कमी है और तो अकाउंट से रिलेटेड किसी भी काम की, तो फिर उसे लखनऊ छोड़ कर गाजियाबाद क्यों आना पड़ा?


‘‘जी ,दरअसल, गाजियाबाद में मेरे कुछ दोस्त और कई रिश्तेदार रहते हैं. वे बता रहे थे कि बड़ी जगह काम करने से एक्सपोजर ज्यादा मिलता है और फिर जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए बहुत सी बातों को छोड़ना पड़ता हैं. और फिर मेरे अब्बू की किडनी में इंफैक्शन है, जिस के कारण उन का इलाज काफी महंगा है. पैसे की जरूरत भी मेरे यहां आने की एक वजह है,’’ सना ने जवाब दिया. कुछ और औपचारिक सवाल पूछने के बाद मिस्टर कुमार ने सना से बाहर इंतजार करने को कहा. सना बाहर कर बैठ गई, पर अब उसे अच्छा नहीं लग रहा था. पता नहीं उसे यह नौकरी मिले भी या मिले, पर सना की यह सोच जल्द ही खत्म हो गई जब मिस्टर कुमार ने सना को अंदर बुलाया और उस को बधाई देते हुए कहा कि उसे अकाउंट औफिसर की जौब के लिए रख लिया गया है और वह कल से ही काम पर सकती है. सना ने कैब बुला ली और होटल में वापस गई. आते ही उस ने एक पीजी रूम खोजना शुरू कर दिया. औफिस से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर पीजी रूम मिला.


सना ने अगले दिन से ही औफिस जौइन कर लिया. कुमार सर के ठीक बगल में सना का केबिन था. वह मेहनत और लगन से काम करती थी और सारे खर्चे और पैसों के लेनदेन का पूरा हिसाब रखती थी.
उस दिन जब सना औफिस से घर जाने के लिए निकली तभी कुमार भी अपनी कार पार्किंग से निकाल कर रहा था. सना को देख कर उस ने कार रोकी और अंदर आने का इशारा किया. सना पहले तो हिचकिचाई पर फिर कार के अंदर बैठ गई. कुमार ने सना से उस के पीजी रूम का पता पूछा तो सना ने पता बताया. कुमार सना से कहने लगा कि उस का पीजी तो औफिस से बहुत दूर पड़ता है.
‘‘जी सर, औफिस के आसपास तो पीजी रूम मैं अफोर्ड नहीं कर सकती.’’ बदले में कुमार मुसकरा दिया था. इस के बाद कुमार सना को कार से उस के पीजी पर छोड़ने लगा. एक दिन कुमार ने सना से पास ही बनी सिविल लाइंस कालोनी के उस के फ्लैट में चल कर एक कप कौफी पीने को कहा, तो सना को तनिक
भी हिचकिचाहट नहीं हुई.


सिविल लाइंस एक बेहद शानदार कालोनी थी, जिस के अंदर मौल, जिम, स्विमिंग पूल जैसी कई सुविधाएं
मुहैया थीं. कुमार का 3 कमरों का फ्लैट देख कर सना को अजीब सा जरूर लगा कि अकेले आदमी के लिए तो एक कमरे का फ्लैट ही काफी होगा, फिर 3 कमरे का खासा बड़ा फ्लैट क्यों ले रखा है?
इतने में कुमार खुद ही कौफी बना कर ले आया था और सना से कौफी पीने को कहा और खुद मोबाइल पर दूसरे कमरे में जा कर बात करने लगा. जब तक कुमार आया, तब तक सना कौफी पी चुकी थी. कुमार सना को देख कर मुसकराए जा रहा था. सना ने कुछ देर बाद ही महसूस किया कि उस का सिर भारी हो रहा है और आंखों के सामने धुंधलापन छा रहा है. सना को तेज़ी से नींद रही थी.


सना की बेहोशी कब टूटी उसे पता नहीं था. उसे इतना जरूर सम? गया था कि उस के बदन से उस के कपड़े गायब हैं और पास में ही कुमार भी बिना कपड़ों के बेशर्मी से लेटा हुआ था. ‘‘तुम भी और लोगों की तरह नीच और कमीने निकले. मैं चुप नही बैठूंगी, बल्कि पुलिस में तुम्हारी रिपोर्ट करूंगी,’’ सना चीख रही थी. कुमार ने मुसकराते हुए सना की तरफ मोबाइल की स्क्रीन घुमा दी, जिस में एक वीडियो क्लिपिंग चल रही थी जिस में कुमार सना के नंगे जिस्म से खेल रहा था. सना अचकचा कर रह गई, ‘‘नहींइसे डिलीट करो.’’ कुमार पर सना की बात का कोई असर नहीं हुआ क्योंकि अब तो उस के हाथ में तुरुप का पत्ता लग गया था, जिसे वह इस्तेमाल कर के सना को जब चाहे तब मजबूर कर सकता था.


कुमार पर भरोसा करना सना को बहुत भारी पड़ गया था और अब तो उस क्लिपिंग के बल पर कुमार उसे ब्लैकमेल करेगा और सना का अंदाजा सही था. आने वाले दिनों में कुमार लगातार सना को वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर उस से शारीरिक संबंध बनाता रहा. करीब 2 महीने हो चुके थे. इस बीच कुमार ने कई बार सना को ब्लैकमेल किया. पर उस दिन सना को पता नहीं क्या हुआ कि वह कुमार के औफिस में जा कर रोने और गिड़गिड़ाने लगी, ‘‘प्लीज, आप को जो करना था आप मेरे साथ कर चुके हैं अब तो वह क्लिप डिलीट कर दीजिए, नहीं तो खुदकुशी करना ही मेरे लिए आखिरी उपाय रह जाएगा.’’ सना को इस तरह रोता देख कर कुमार का मन भर आया और उस ने अपने मोबाइल से वह क्लिप सना को सैंड कर दी और तुरंत ही अपने मोबाइल से डिलीट भी कर दी.


सना के मन से मानो बहुत भारी बो? उतर गया था. उस की न्यूड क्लिप डिलीट हो चुकी थी और अब कुमार उसे ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा, पर ऐसा सोचना सना की गलतफहमी थी. 2 दिन के बाद कुमार का फोन फिर आया और उस ने सना को अपने फ्लैट पर बुलाया और आने पर क्लिप को वायरल करने और औफिस में सब को उन के नाजायज रिश्ते की बात बता देने की धमकी देने लगा. ‘‘पर अब तुम मु? ब्लैकमेल नहीं कर सकते. वह क्लिप तो तुम ने डिलीट कर दी थी,’’ सना ने तीखी आवाज में कहा तो कुमार ठहाके मार कर हंसने लगा और कुटिल अंदाज में उस ने बताया कि सना जैसी खूबसूरत लड़की के नंगे जिस्म के साथ गुजारे हुए पलों की वीडियो की एक नहीं, बल्कि कई कौपी रखी जाती हैं और इतना कह कर कुमार ने सना की एक और वीडियो क्लिप उसे सैंड कर दी.


सना यह देख कर हैरान थी कि यह वीडियो क्लिप उस की बेहोशी वाले दिन की नहीं है, बल्कि बाद के किसी दिन ही है, जो कमरे में छिपे हुए कैमरे से शूट की गई है और ऐसी जाने कितनी वीडियो क्लिप उस के पास होंगी और उन के बल पर वह जाने कितने दिनों तक उस का शोषण करता रहेगा
अब तो सना को नौकरी छोड़ कर लखनऊ वापस चले ही जाना चाहिए. पर तब भी तो कुमार उस का पीछा नहीं छोड़ेगातो क्या खुदकुशी करना ही आखिरी उपाय है? पर तब अम्मीअब्बू क्या सोचेंगे? और फिर उन के बुढ़ापे में उन का साथ कौन देगा? सना परेशान होती जा रही थी   और कुमार के लगातार आते फोन और मैसेज उसे और भी परेशान कर रहे थे. सना पिछले 4 दिन से औफिस भी नहीं गई थी और मन ही मन उस ने यह फैसला ले लिया था कि अब कुमार उसे लगातार ब्लैकमेल करता रहेगा, इसलिए उस के लिए इस्तीफा दे कर वापस जाना ही ठीक रहेगा, बाद में जो होगा वह देखा जाएगा.


सना ने तुरंत ही अपने लैपटौप पर इस्तीफा टाइप किया और अपना सामान पैक करने लगी. उस ने आननफानन में  कैब बुला कर गाजियाबाद छोड़ने की तैयारी कर ली थी. कैब में बैठ कर सना ने राहत की सांस ली. वह सोच रही थी कि स्टेशन पर पहुंच कर अपना इस्तीफा कंपनी को सैंड कर देगी. सना की कैब सिविल लाइंस वाले इलाके से निकल रही थी. वह एक अजीब सी उल?ान से भर उठी थी. उस ने नजरें नीची कर लीं और जल्दी से स्टेशन पहुंच जाने के बारे में सोचने लगी, पर लाल बत्ती के चलते कैब रुकी, तो सना ने अपने अगलबगल की गाडि़यों पर नजर डाली. सना ने तभी देखा कि बगल वाली गाड़ी में कुमार अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ बैठा हुआ था. कुमार अपने बीवीबच्चे के साथ बहुत खुश नजर रहा था, पर यह कुमार की पत्नी है या कोई और, सना सम? नहीं पाई.

कुछ सोच कर सना ने रिसैप्शनिस्ट दिव्या को फोन लगाया और बातोंबातों में कुमार के शादीशुदा होने के बारे में जानकारी मांगी, तो उसे पता चला कि कुमार ने उस से अविवाहित होने का ?ाठ बोला था. सच तो यह था कि उस का एक बच्चा भी है और उस की पत्नी सरकारी नौकरी में है और उस के पास गाजियाबाद आती रहती है. सना के चेहरे पर कई रंग आते और जाते रहे. इस दौरान ड्राइवर ने स्टेशन पर जा कर कैब रोक दी, पर सना उतरी नहीं, बल्कि उस ने कैब वापस ले चलने को कहा और कुछ देर बाद एक बार फिर से सना पीजी रूम में वापस चुकी थी. सना अगले 2-3 दिन तक औफिस नहीं गई. इस बीच कुमार ने भी उसे कोई फोन नहीं किया.


उस दिन कुमार बहुत खुश था, क्योंकि उस के बेटे का बर्थडे था. कुमार शाम को जल्दी घर वापस गया था. घर को उस की पत्नी ने पूरी तरह से सजा दिया था, पर कुमार यह देख कर बुरी तरह चौंक गया था कि उस की पत्नी के साथ सना भी उस के काम में हाथ बंटा रही थी. कुमार सवालिया नजरों से सना की तरफ देखे जा रहा था. बदले में सना सिर्फ मुसकराए जा रही थी. ‘‘इन से मिलो, ये सना हैं. मार्केट में मिली तो दोस्ती हो गई. अभी थोड़ी परेशान हैं, क्योंकि इन का बौस इन्हें तंग कर रहा है. मेरे हिसाब से ऐसे बौस को तो जेल में होना चाहिएआप बैठिए, मैं चाय ले कर आती हूं,’’ कुमार की पत्नी एक सांस में कह गई थी.
कुमार को सना पर बहुत गुस्सा रहा था, लेकिन वह नौर्मल रहने का दिखावा करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता था. सना बच्चे के केक कटने तक वहां रुकी रही थी. कुमार ने देखा कि उस का बेटा भी सना से बहुत लगाव दिखा रहा था.


अगले दिन सना औफिस भी गई थी और अपना काम कर रही थी. कुमार ने उसे फोन कर के बुलाया.
‘‘मेरे घर क्यों गई थी?’’ गुस्से से कुमार ने पूछा. ‘‘मैं तो इस से पहले भी कई बार आप के घर जा चुकी हूं और आप के बिस्तर पर सो भी चुकी हूंभूल गए क्या आप?’’ सना ने यह बात कुछ इस ढंग से कही थी कि कुमार को मिर्ची सी लग गई थी. सना अपनी कुरसी से उठ कर बात करने लगी थी, ‘‘अगर आप यह सोचते हैं कि मेरा न्यूड वीडियो वायरल कर के आप मु? अब भी ब्लैकमेल कर सकते हैं, तो ऐसा सोचना छोड़ दें, क्योंकि अब वे वीडियो मेरे मोबाइल पर भी आप मु? भेज चुके हैं,’’ सना ने कहा तो कुमार को याद आया कि उस के मोबाइल पर कुमार ने ही तो वीडियो क्लिप भेजी थी, ताकि सना डर जाए.


सना ने आगे यह भी कहा कि कुमार ने अगर उसे ब्लैकमेल किया, तो वह खुद औफिस में सब को वह न्यूड वीडियो दिखा देगी क्योंकि उस वीडियो में कुमार भी तो न्यूड ही नजर रहा है और अगर बेइज्जती सना की होगी तो कुमार की भी तो बेइज्जती होगी और यह भी शक किया जाएगा कि इस तरह जाने कितनी लड़कियों का यौन शोषण किया होगा कुमार ने. इस के बाद सना यह वीडियो मीडिया में दे देगी और कुमार पर नशा दे कर रेप करने का आरोप लगाएगी. और तो और अब तो कुमार की पत्नी भी यहां पर है. सोचो जरा जब कुमार की पत्नी अपने पति को किसी दूसरी औरत के साथ ऐसी हालत में देखेगी, तो उस पर क्या गुजरेगी? ‘‘इसलिए मिस्टर कुमार, अब यह सना तुम्हारी धमकियों से नहीं डरेगी, बल्कि अब तुम्हें मु? से डरना होगा, क्योंकि यह वीडियो में तुम्हारी पत्नी को सैंड करने जा रही हूं,’’ मोबाइल हाथ में घुमाते हुए सना ने कहा.

कुमार थूक निगल रहा था. उसे सना की आंखों में चिनगारियां और आवाज में कठोरता सम? में गई थी. वह सम? गया था कि सना की उंगली की एक थिरकन उस के बसेबसाए घर को उजाड़ सकती है और उस के औफिस में बनी इमेज को मिट्टी में मिला सकती है. और हो सकता है कि सना इस वीडियो के सहारे उसे जेल की हवा भी खिला दे. कुमार एकदम से सना के पैरों में गिर गया था, ‘‘मु? माफ कर दो. मु? से गलती हो गई. मैं अभी तुम्हारी सारी वीडियो डिलीट करता हूं, बस तुम मेरी पत्नी से यह सब मत बताना,’’ कहते हुए कुमार ने अपने मोबाइल और लैपटौप से सना के सारे न्यूड वीडियो डिलीट कर दिए थे.
सना की मांग पर कुमार ने उसे नौकरी में प्रमोशन और डबल इंक्रीमैंट भी दे दिया था.

सना मुसकरा रही थी. उस ने मजबूरी में कुमार के आगे घुटने तो टेक दिए थे, मगर ठंडे दिमाग और शातिराना चाल चल कर उस ने अपनेआप को दलदल में गिरने से बचा लिया था. सना का फोन बजा तो उस ने देखा कि अब्बू की वीडियो काल थी. सना रिलैक्स हो कर अब्बूअम्मी से बात कर रही थी, ‘‘यहां सब ठीक है अब्बू. आप की बेटी अपना ध्यान रख सकती है. आप लोग अपना खयाल रखना.’’ सना अब सच में अपना ध्यान रख सकती थी.  Hindi Story                 

Hindi Story: दीवारों के उस पार

Hindi Story: 2 बच्चों की तलाकशुदा मां रोजी उत्तराखंड से काम के सिलसिले में गुरुग्राम गई. वहां उस की मुलाकात समीर से हुई, जिसे वह उत्तराखंड से ही जानती थी. समीर ने उसे लिवइन रिलेशनशिप में रहने के लिए कहा. क्या चल रहा था उस के मन मेंरोजी ने क्या जवाब दिया?

32  साल की रोजी मूल रूप से उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग की रहने वाली थी और 2 बच्चों की मां थी. उस की जिस लड़के से शादी हुई थी, वह शराब पीने का आदी था. गंदी हरकतें तो उस की रगरग में बसी थीं. रोजी ने भी हर लड़की की तरह सुनहरे सपने संजाए थे कि शादी के बाद वह अपने पति के संग घूमेगीफिरेगी और अपने सपनों को पूरा करेगी, लेकिन जिंदगी को कुछ और ही मंजूर था. रोजी का पति रोजाना शराब पी कर घर आता और जराजरा सी बातों को ले कर ?ागड़ा करता. उस की इन्हीं हरकतों से तंग कर रोजी ने अपने पति को तलाक दे दिया और हरियाणा गुरुग्राम में अपनी छोटी बहन पूजा के पास चली आई.

रोजी की छोटी बहन पूजा की शादी हो चुकी थी और वह अपने पति और बच्चों के साथ आराम से जिंदगी गुजार रही थी. 32 साल की होने के बावजूद रोजी लगती नहीं थी कि वह 2 बच्चों की मां है. उस ने अपने बदन को सलीके से संजोया था. जो भी उसे एक बाद देख ले, उस का दीवाना हो जाएरोजी के होंठ जैसे गुलाब की पंखुड़ी, उस के नुकीले उभार उस की खूबसूरती को चार चांद लगाते थे. रोजी गुरुग्राम के ही एक स्पा सैंटर में काम करने लगी और एक कमरा किराए पर रह कर रहने लगी. दोनों बच्चों को सुबह ही तैयार कर के स्कूल भेजती और फिर अपने काम से निकल जातीहालांकि, रोजी की मां अभी भी रुद्रप्रयाग में ही रहती थीं. पिता की मौत हो चुकी थी, इसलिए बीचबीच में वह अपनी मां का हालचाल जानने के लिए रुद्रप्रयाग चली जाती थी.


उम्र बढ़ने के साथसाथ रोजी की मां को कई तरह की बीमारियां भी साथ लग गई थीं. रोजी ही मां को अस्पताल में ले जाने और दवा का खर्च उठाती थी. एक दिन रोजी ने अपने बच्चों को तैयार कर के स्कूल भेज दिया और खुद भी तैयार हो कर अपने स्पा सैंटर पर जाने के लिए निकली. रोजी पैदलपैदल ही अपने स्पा सैंटर की ओर जा रही थी कि अचानक से उस के पास एक कार कर रुकी. कार में एक नौजवान सवार था, जो कार को ड्राइव कर रहा था. उस ने कई बार हौर्न बजाया, तो रोजी सड़क पर किनारे हो गई और आगे बढ़ने लगी, लेकिन कार उस के पीछेपीछे रही थी. एक बार को तो रोजी घबरा गई और रुक गई. उस ने पीछे मुड़ कर देखा तो एकदम से हैरान रह गई. कार ड्राइव कर रहा नौजवान कार रोक कर बाहर निकला, तो रोजी के चेहरे पर एक प्यारी सी मुसकान बिखरी. रोजी के मुंह से अचानक निकला, ‘‘समीर, तुम यहां.’’ दरअसल, समीर वही लड़का था, जो रुद्रप्रयाग में रहता था और टैक्सी चलाता था और अकसर रोजी की मां को अस्पताल ले जाने में मदद करता था.


समीर ने इशारा किया तो रोजी कार में बैठ गई. थोड़ी दूर चलने के बाद समीर ने चुप्पी तोड़ी और बोला, ‘‘रोजी, तुम तो बिना बताए यहां चली आई, जिस के बाद रुद्रप्रयाग में मेरा भी मन नहीं लगा और मैं तुम्हारी तलाश में रुद्रप्रयाग से गुरुग्राम चला आया. ‘‘कई महीनों की तलाश के बाद आखिरकार आज तुम हाथ ही लग गई. यहां कर तुमने अपना मोबाइल नंबर भी बदल लिया, इस वजह से तुम्हें ढूंढ़ने में दिक्कत हुई…’’ ‘‘समीर तुम तो जानते हो, रुद्रप्रयाग में रहते हुए मैं कितना परेशान हो गई थी. मैं रुद्रप्रयाग की यादों को फिर से ताजा नहीं करना चाहती हूं.’’ ‘‘सौरी रोजी, मैं तुम्हारा दिल दुखाना नहीं चाहता, लेकिन मैं भी तुम्हारे बिना अकेला हो गया था. तुम मेरी बहुत अच्छी दोस्त हो और जब अच्छा दोस्त ही पास हो तो मन कैसे लग सकता है,’’ समीर ने मायूस हो कर अपनी बात कही. थोड़ी दूर चलने के बाद रोजी ने समीर से गाड़ी रोकने के लिए कहा. कार रुकने के बाद रोजी नीचे उतरी और बोली, ‘‘मैं यहां पर नौकरी करती हूं. मेरी ड्यूटी का टाइम हो गया है. मैं ज्यादा देर तक तुम्हारे साथ नहीं रुक सकती.’’


‘‘ओहो, तो मैडमजी.यहां पर नौकरी कर रही हैं और हम रुद्रप्रयाग की सड़कों पर धक्के खा रहे हैं,’’ समीर ने मजाकिया अंदाज में कहा तो रोजी जोर से हंस दी और बोली, ‘‘आखिर तुम अपनी हरकतों से बाज नहीं आओगे. खैर, मैं चलती हूं, शाम को फ्री हो कर तुम से बात करती हूं.’’ स्पा सैंटर में 2-4 कस्टमरों को देखने के बाद दोपहर होने पर रोजी ने घर से बना कर लाई खाना खाया और एक कुरसी पर आराम से बैठ गई. कब वह पुरानी यादों में खो गई, पता ही नहीं चला. उसे वह दिन याद गया, जब पति से अलग होने के बाद वह रुद्रप्रयाग से देहरादून में नौकरी की तलाश में जा रही थी. रुद्रप्रयाग के बसस्टैंड पर ही रोजी की समीर से मुलाकात हुई थी. दोनों एक ही बस में सवार हुए थे. रोजी विंडो सीट पर बैठी थी तो समीर उस के बगल वाली सीट पर कर बैठ गया था. पहाड़ की घुमावदार सड़क के चलते कई बार ऐसे मौके भी आए, जब दोनों एक दूसरे से बिलकुल सट गए. कई बार तो रोजी समीर के ऊपर गिरने से भी बची.
एक मौका ऐसा भी आया, जब समीर का हाथ रोजी की जांघ पर रखा गया. इस से रोजी पूरी तरह से सिहर उठी. उस के शरीर में एक अजीब तरह की हलचल हुई.


पति से तलाक के बाद किसी मर्द का हाथ रोजी की जांघ पर रखा था. रोजी का पति अकसर उस की जांघ पर हाथ फेर कर उसे प्यार करने के लिए तैयार करता था. खैर, रोजी ने किसी तरह से अपनेआप को संभाला. देहरादून चुका था. दोनों बस से नीचे उतरे और अलगअलग रास्तों पर निकल पड़े.
स्पा सैंटर की मैनेजर आई और ताली बजाई तो रोजी पुरानी यादों से बाहर निकली. करीब 2 महीने बाद रात के 11 बज रह थे. रुद्रप्रयाग से आई एक खबर से उस की आंखों की नींद गायब हो गई. दोनों बच्चों को सुला दिया था और रोजी खुद भी सोने की कोशिश कर रही थी, लेकिन नींद आंखों से काफी दूर थी. बैड पर लेटे हुए 2 घंटे से ज्यादा का समय गुजर चुका था. आधी रात बीत गई. रोजी ने मोबाइल उठाया और कुछ देखने लगी. फोन बुक खोली और जानकारों के नंबर सर्च करने लगी. एक मोबाइल नंबर और नाम पर नजर पड़ी तो रुक गई. यह नंबर समीर का था.


काफी सोचने के बाद रोजी ने नंबर डायल किया, ‘‘हैलो समीर, पहचानारोजी बोल रही हूं…’’ ‘‘मैडमजी, नमस्कार मैं तो आप की आवाज से ही पहचान गया था. फिर मेरे पास आप का नंबर सेव है,’’ समीर ने मजाक की कोशिश की तो रोजी बीच में ही रोकते हुए बोली, ‘‘समीर, मु? तुम्हारी हैल्प चाहिए.’’ ‘‘इतनी रात को क्या हुआ.. सब ठीक तो है .’’ ‘‘हां, सब ठीक है, क्या तुम मेरे साथ रुद्रप्रयाग चल सकते हो?’’ रोजी ने समीर से सवाल किया. ‘‘कब चलना है?’’ समीर ने पूछा. ‘‘अभी मेरी मां की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई है. उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ सकता है. कल शाम या परसों तक वापस जाएंगे. जितने भी पैसे लगेंगे मैं दे दूंगी,’’ रोजी ने कारण बताया. ‘‘ठीक है. तुम अपनी लोकेशन सैंड मैं, मैं कुछ ही देर में पहुंचता हूं.’’ करीब आधा घंटे के बाद समीर अपनी कार ले कर रोजी के घर पहुंच गया. रोजी ने अपने दोनों बच्चों को उठाया और उन्हें भी साथ ले कर रुप्रप्रयाग के लिए निकल पड़ी. दिन निकलने वाला था और कार रुद्रप्रयाग में एंट्री कर चुकी थी. कुछ ही देर में रोजी अपनी मां के पास पहुंच गई.


समीर ने रोजी की मां को अस्पताल ले जाने से ले कर दवा के खर्च में पूरी मदद की. रोजी की मां की हालत में सुधार हुआ. 1-2 दिन रुद्रप्रयाग में रुकने के बाद रोजी बच्चों को ले कर वापस गुरुग्राम लौट आई.
गुरुग्राम लौटने पर रोजी ने जब समीर से टैक्सी का किराया देने के लिए कहा तो समीर ने सिर्फ इतना कहा, ‘‘रोजी, हम अच्छे दोस्त हैं और दोस्ती में भी मैं तुम से किराया लूं, तो लानत है मु? पर.’’ इस तरह जब भी रोजी रुद्रप्रयाग जाना होता, तो वह समीर की मदद लेती. उधर, समीर भी सोचता कि वह अपने अम्मीअब्बू की सेवा तो नहीं कर पाता, रोजी की बुजुर्ग मां ही सही. वे भी तो उस की अम्मी जैसी ही हैं. एक दिन समीर ने मौका देख कर अपने दिल की बात रोजी के सामने रख दी. वह बोला, ‘‘रोजी तुम मु? बहुत अच्छी लगती हो. क्या हमारी यह दोस्ती प्यार में बदल सकती है?’’ रोजी ने कोई जवाब नहीं दिया. ‘‘अगर कुछ गलत बोल दिया हो या तुम्हारे दिल को ठेस पहुंची हो तो सौरी.’’ समीर ने फिर से अपनी बात कही.


रोजी कुछ देर के लिए चुप रही और फिर बोली, ‘‘आगे कोई रैस्टोरैंट या ढाबा दिखाई दे तो गाड़ी रोक देना,’’ जिस पर समीर ने सड़क किनारे एक ढाबे पर कार को रोक दिया. कार से उतरते ही रोजी ने समीर से सवाल किया, ‘‘चाय लोगे?’’ समीर नेहांमें जवाब दिया. एक टेबल पर दोनों आमनेसामने बैठे थे. रोजी चाय की चुसकी लेते हुए सोचविचार करने की हालत में नजर रही थी. उस के चेहरे पर एक अजीब तरह का भाव था. समीर उसे बड़े ध्यान से देख रहा था, लेकिन कुछ नहीं बोला. वह सोच रहा था कि शायद रोजी उस की बातों से नाराज हो गई. चाय खत्म हुई तो रोजी ने पैमेंट किया. दोनों कार में सवार हुए और निकल गए. ‘‘मैडमजी, सीट बैल्ट लगा लीजिए, नहीं तो यह बेचारा बिना वजह मारा जाएगा.’’ समीर ने फिर मजाकिया अंदाज में कहा. कार थोड़ा आगे बढ़ी, तो रोजी ने सवाल किया, ‘‘समीर, तुम्हारी शादी हो चुकी है?’’ ‘‘नहीं,’’ समीर ने जवाब दिया. ‘‘मेरे बारे में कितना जानते हो, यही कि मैं भी रुद्रप्रयाग की हूं और
तुम भी…’’ इस से पहले कि रोजी कुछ और बोल पाती, समीर ने बोल पड़ा, ‘‘रोजी, इतने दिन हो गए तुम्हारे साथ दोस्ती कोजानता हूं, तुम तलाकशुदा हो, 2 बच्चों की मां होअपनी मां की देखभाल के साथ अपना और अपने 2 बच्चों का पेट पाल रही हो.


‘‘मां की देखभाल के लिए अपनी जौब की भी परवाह नहीं करती हो. अपनी मां से बहुत प्यार करती हो, इस से ज्यादा मु? जानना भी नहीं है,’’ इतना बोल कर समीर चुप हो गया. कार में पूरी तरह से सन्नाटा छा गया. इस सन्नाटे को रोजी ने ही तोड़ा और बोली, ‘‘ओके.’’ इस के बाद तो समीर और रोजी में रोजाना मोबाइल पर बाते होने लगीं. समीर रोजी से उस की मां के बारे में पूछता तो उसे लगता कि कोई उस का अपना है, जिस से वह अपना दुखदर्द शेयर कर सकती है. एक दिन रोजी अपनी छोटी बहन पूजा से मिलने के लिए उस के घर पहुंची तो पूजा की सास ने नाकमुंह सिकोड़ लिया. रोजी पूजा के पास करीब आधा घंटा रुकी. इस मुलाकात में उस ने अपने और समीर के बारे में सारी जानकारी दे दी. ‘‘दीदी, आप मु? से बड़ी हैं, फिर भी एक बात कहती हूं. जो भी कदम उठाना, सोचसम? कर ही उठाना,’’ पूजा ने रोजी से कहा.
‘‘अभी तक हम अच्छे दोस्त थे, कल ही समीर ने मु? प्रपोज किया है. मां को देखने के लिए कब जाना पड़ जाए, ऐसे में समीर ही काम आता है.’’ रोजी ने जवाब दिया.


थोड़ी देर के बाद रोजी फिर से बोली, ‘‘अभी तक समीर ने कुछ ऐसावैसा भी नहीं किया है. समीर किसी तरह की डिमांड भी नहीं की है और ही उस के हावभाव से लगता है कि वह कुछ गलत काम करेगा.’’
जैसेजैसे दिन गुजरते जा रहे थे, रोजी और समीर एकदूसरे के बेहद करीब आते जा रहे थे. कभीकभी तो पूरी रात ही फोन काल, व्हाटसऐप चैटिंग और वीडियो काल में गुजर जाती थी. एक दिन समीर ने रोजी को फोन किया. ‘‘हां, बोलो.’’ रोजी ने कहा. ‘‘मैं कह रहा था, आज शाम को जल्दी घर पहुंच जाना, रात का खाना एकसाथ करेंगे. दोनों बच्चों को भी तैयार रखना. मैं ठीक साढ़े 7 बजे तुम्हें लेने के लिए जाऊंगा.’’ रोजी नेओकेबोल कर फोन काट दिया. ठीक साढ़े 7 बजे समीर अपनी टैक्सी ले कर रोजी के घर के बाहर पहुंच गया और फोन कर के रोजी को बाहर बुलाया. रोजी सजसंवर कर किसी शादीशुदा औरत से कम नहीं लग रही थी. उस ने अपने फेवरेट ब्लू कलर का सूटसलवार पहना था. होंठों पर लगी हलकी गुलाबी लिपिस्टक उस के चेहरे पर चार चांद लगा रही थी. दोनों बच्चे भी साथ गए. रोजी आगे की सीट पर बैठी, जबकि दोनों बच्चों को पीछे की सीट पर बैठा दिया.


शहर के एक रैस्टोरैंट में पहुंच कर समीर ने खाने का और्डर दिया. खाना लगने में वेटर ने समय मांगा था. इस से पहले बच्चों के लिए आइसक्रीम वगैरह मंगा ली. समीर ने बात शुरू करते हुए कहा, ‘‘रोजी मेरे दिमाग में एक बात चल रही है.’’ ‘‘हां, बोलो…’’ रोजी ने पूछा. ‘‘क्या हम एकसाथ रह सकते हैं?’’ समीर ने अपनी जिज्ञासा जाहिर की. ‘‘मतलब?’’ रोजी ने पूछा. मतलब यही कि अगर हम दोनों लिवइन में रहें तो,’’ समीर ने बताया. समीर की भावनाओं को रोजी तुरंत सम? गई. एक प्यारी सी मुसकान बिखेरते हुए वह बोली, ‘‘इरादा तो ठीक है, लेकिन हम रहेंगे कहां? तुम्हारे पास भी एक ही कमरा है और मेरे पास भी एक ही कमरा है. 2 बच्चे भी हैं. कैसे एडजस्ट करेंगे?’’ ‘‘उस का इंतजाम हो जाएगा. कोई टू रूम सैट घर देख लेंगे दोनों मिल कर एडजस्ट कर लेंगे.’’ ‘‘ठीक है, लेकिन मेरी एक शर्त है…’’ रोजी बोली, ‘‘तुम मेरे साथ कोई शरारत नहीं करोगे.’’ ‘‘ओके मैं सम? गया. मैं वादा करता हूं, जब तक तुम इजाजत नहीं दोगी, तब तक मैं तुम्हें टच भी नहीं करूंगा.’’ समीर ने रोजी को भरोसा दिलाया. वेटर खाना ले कर चुका था. सभी ने भरपेट खाना खाया. समीर ने रैस्टोरैंट में पैमेंट किया और फिर रोजी और बच्चों को गुरुग्राम की सड़कों
पर घुमाया.


रात के तकरीबन 11 बजे समीर ने रोजी और बच्चों को उन के कमरे पर छोड़ कर अपने कमरे पर कर ले गया. आज वह बहुत खुश नजर रहा था. 3-4 दिन के बाद ही उन दोनों ने मिल कर एक टू रूम सैट घर किराए पर लिया और अपनी जिंदगी गुजारने लगे. खाना पकाने से ले कर और दूसरे घरेलू कामों में समीर रोजी की पूरी मदद करता था. रोजी अपने दोनों बच्चों के साथ एक कमरे में सोती थी, तो समीर दूसरे कमरे में. इस तरह से 6 महीने का समय गुजर गया. एक दिन समीर शाम होने से पहले ही अपने कमरे पर पहुंच गया. आज उस की तबीयत कुछ ठीक नजर नहीं रही थी. सिर में दर्द और बदन में अकड़न हो रही थी. कार को पार्क कर के वह अपने कमरे में जा कर लेट गया. शाम को रोजी जब स्पा सैंटर से वापस लौटी तो देखा समीर अपने कमरे में लेटा था. अकसर समीर रोजी के आने के बाद रात को 9 बजे के करीब लौटता था, लेकिन आज उस के जल्दी लौटने और बिस्तर पर लेटे रहने की वजह से रोजी के मन में घबराहट पैदा हुई.


रोजी ने अपना बैग रखा और कमरे में घुसते ही सवाल किया, ‘‘क्या हुआ समीर?’’ ‘‘कुछ नहीं सिर में दर्द है, बदन भी अकड़ रहा है,’’ समीर ने जवाब दिया. ‘‘चलो, खड़े हो, डाक्टर को दिखा देती हूं,’’ रोजी ने जब यह कहा तो समीर ने मना कर दिया और बोला, ‘‘हलका है आराम करने से ठीक हो जाएगा.’’ रोजी उठी और अलमारी से सिरदर्द की एक गोली निकाल कर लाई, पानी ला कर दिया और समीर को गोली खिला दी. इस के बाद बाम ले कर आई और समीर के सिरहाने बैठ कर उस के सिर पर बाम लगाने लगी. इस दौरान रोजी ने थोड़ा रुक कर समीर का सिर उठा कर अपनी गोद में रख लिया और बाम लगाने लगी.
जब रोजी समीर के माथे पर बाम लगा रही थी तो समीर की गरदन भी हिल रही थी. कब समीर का सिर रोजी की जांघ पर पहुंच गया, पता ही नहीं चला. जांघ पर समीर का सिर रखे होने से रोजी के बदन में तरंग सी उठने लगी. ?ाक कर बाम लगाए जाने से रोजी के उभार समीर के माथे से टकराए, तो रोजी के बदन में हलचल बढ़ गई.


धीरेधीरे रोजी के बदन में तरंगें तेज होने लगीं. जांघ पर समीर के सिर की रगड़ लगने के कारण वह धीमी आहें भरने लगी. उस के मुंह से अबसमीरसमीरसमीर…’ निकल रहा था. ‘‘समीर अपनी कसम तोड़ दो, मेरी फीलिंग सम? कुछ करो समीर.’’ यह सुन कर समीर उठ कर बैठ गया. उस का सिरदर्द जैसे अब दूर हो गया हो. समीर ने रोजी की आंखों में आंखें डालीं. वह मुसकरा तो नहीं रही थी, लेकिन उस का चेहरा बता रहा था कि वह मिलन के लिए बेताब है. रोजी से उस के बदन को छूने करने की इजाजत मिलने के बाद समीर ने सब से पहले अपने होंठ रोजी के होंठ पर रख दिए. वह रोजी के एकएक अंग को प्यार से सहलाने लगा, तो रोजी की सांसों में तेजी गई. वह जोश की ओर बढ़ रही थी. दोनों ने अपनेअपने बदन से कपड़े अलग किए. कमरे में रोजी की सिसकारियों की आवाज साफ सुनाई दे रही थी. कमरे में दोनों के मिलन का जो तूफान पैदा हुआ, वह करीब 10 मिनट बाद जा कर शांत हुआ. रोजी ने खुद को संभाला, जल्दी से कपड़े पहने और बोली, ‘‘अब सिर का दर्द कैसा है?’’ ‘‘जिसे तुम जैसी मदमस्त जवानी का प्यार मिल जाए, उस का सिर का दर्द तो क्या, हर बीमारी दूर हो जाए.’’ समीर ने शरारत करते हुए कहा.


इस के बाद रोजी हाथमुंह धो कर रसोई में गई और 2 कप कड़क चाय बना कर लाई. दोनों चाय की चुसकियां लेते हुए काफी खुश नजर रहे थे. कुछ समय लिवइन रिलेशनशिप में रहने के बाद रोजी और समीर ने शादी करने का फैसला किया. रोजी की मां और छोटी बहन तो इस शादी के लिए तैयार हो गईं, लेकिन समीर के परिवार वाले दोनों की शादी के लिए तैयार नहीं हुए. वे कट्टरवादी सोच के थे. उन्होंने साफ कह दिया कि एक तलाकशुदा और दूसरे धर्म की बहू उन्हें कतई स्वीकार नहीं होगी, पर परिवार के विरोध के बावजूद समीर ने रोजी का अपनाने का फैसला किया. शादी की तारीख तय हुई तो रोजी की तरफ से उस की छोटी बहन और स्पा सैंटर में काम करने वाली कुछ लड़कियां और आसपास के लोग पहुंचे, जबकि समीर की तरफ से उस के 1-2 दोस्त आए. सभी लोग कोर्ट में पहुंचे, जहां रजिस्ट्रार ने दोनों की शादी कराई. कोर्ट के बाहर एक रैस्टोरैंट में छोटी सी पार्टी रखी गई.


इस दौरान रोजी के साथ स्पा सैंटर में काम करने वाली एक लड़की ने चुटकी लेते हुए दोनों से कहा, ‘‘दीदीजीजूवैसे तो आप के बीच में सबकुछ हो चुका है, लेकिन फिर भी सुहागरात मनाना
मत भूलना. असल में आप की आज से नई जिंदगी की शुरूआत हो रही है. यह शुरुआत रोमांटिक और रोमांस से भरी होनी चाहिए. बच्चों की चिंता मत करना, उन्हें मैं अपने साथ ले जाऊंगी.’’ यह बात सुन कर वहां मौजूद सभी लोग जोरजोर से हंसने लगे, वहीं रोजी नजरें नीचे कर के मंदमंद मुसकरा रही थी.
शादी के बाद समीर और रोजी अपने कमरे पर पहुंचे. शाम होने से पहले रोजी और समीर बाजार गए. थोड़ी देर के लिए रोजी से अलग हुई और कुछ जरूरी सामान खरीदने लगी, जिस के बाद दोनों वापस कमरे पर लौट आए.


समीर और रोजी ने रात को खाना खाया, जिस के बाद रोजी ने समीर से सख्त लहजे में कहा, ‘‘मैं दूसरे कमरे में जा रही हूं, मु? परेशान मत करना.’’ रोजी ने दूसरे कमरे में जा कर खुद को बंद कर लिया. समीर कुछ सम? नहीं पाया कि आखिर रोजी में अचानक से यह कैसा बदलाव गया. सोचने लगा कि शायद औरतों संबंधी परेशानी हो गई होगी और इसलिए अलग सोने का फैसला किया. उस के मन में तरहतरह के विचार कौंधने लगे. तकरीबन एक घंटे बाद रोजी ने कमरा खोला और समीर को अंदर बुलाया.
समीर हैरान रह गया. कमरे का रंगरूप बदला हुआ था. बैड पर जहां गुलाब की पंखुडि़यां पड़ी थीं, वहीं मोगरा के फूलों की कलियां भी पड़ी थीं. गुलाब और मोगरा की खुशबू से कमरा पूरी तरह से महक रहा था.
रोजी दुलहन के लिबास में बैड पर बैठी थी. उस ने परफ्यूम लगाया था. उस के बदन से रही खुशबू समीर को दीवाना बनाने वाली थी.


रोजी बोली, ‘‘क्यों हैरान हो रहे हो पतिदेवयह तुम्हारे लिए सरप्राइज है.’’ इस के बाद रोजी ने अपने दोनों हाथ समीर के गले में डाल दिए. समीर ने रोजी के माथे पर किस किया और जांघ पर हाथ फेरने लगा, तो रोजी आहें भरने लगी. उस ने समीर को रोका और बैड से नीचे उतर कर अपने कपड़े उतारे. रोजी आसमानी कलर की ब्रा और पैंटी में थी. स्टाइलिश ब्रापैंटी में रोजी को देख कर समीर मदहोश हो गया
और रोजी को बांहों में भर कर बैड पर लेटा दिया. समीर ने रोजी के बदन पर हाथ फेरा तो वह पूरी तरह से सिहर उठी. देखते ही देखते वे दोनों एकदूसरे में समा गए. यह सिलसिला पूरी रात में कई बार चला.
बच्चे समीर को अबअंकलकी जगहपापाबुलाने लगे. दोनों की जिंदगी में रोमांस की कोई कमी नहीं थी. रोजी भी अब अपने स्पा सैंटर में शादीशुदा की तरह जाती थी. शाम को जब समीर वापस लौटता, तो बच्चों के लिए कुछ कुछ ले कर आता. लेकिन एक दिन समीर के गांव से फोन आया, ‘‘बेटा, तेरी शादी की बात पक्की हो गई है. लड़की बहुत अच्छे घरपरिवार की है. अगले महीने की 15 तारीख रख दी है.’’


समीर सन्न रह गया. वह रोजी को छोड़ने की कल्पना तक नहीं कर सकता था. उस ने मना करने की कोशिश की, लेकिन मां ने साफ कह दिया, ‘‘तू उस तलाकशुदा और दूसरे मजहब की औरत के साथ रहना चाहता है तो हमारा तु? से कोई रिश्ता नहीं रहेगा. हम तेरी परवाह अब और नहीं करेंगे.’’ समीर कई दिनों तक रोजी से यह बात छिपाता रहा, लेकिन बात आखिर रोजी तक पहुंच ही गई. रोजी ने जब यह सुना तो जैसे उस के पैरों तले जमीन खिसक गई. उस ने बिना कुछ सोचे समीर के गांव जा कर उस के घर वालों से बात करने का फैसला किया. गांव पहुंचते ही रोजी ने समीर के घर के सामने सब के सामने सवाल दाग दिए, ‘‘क्यों? सिर्फ इसलिए कि मैं तलाकशुदा हूं? इसलिए कि मेरे 2 बच्चे हैं? क्या प्यार का हक सिर्फ उन लड़कियों को है, जोकुंआरीकहलाती हैं?’’ गांववाले जमा हो गए. समीर की पिता ने गुस्से में कहा, ‘‘हम अपने खानदान की इज्जत मिट्टी में नहीं मिलने देंगे. या तो वह औरत छोड़ या इस घर से निकल जा.’’


समीर ने रोजी का हाथ थामा और बिना कुछ बोले घर से बाहर निकल गया. दोनों के चेहरे पर आंसू थेएक तरफ मां का प्यार, दूसरी तरफ रोजी का साथ. एक दिन रोजी बच्चों को स्कूल छोड़ कर लौटी तो देखा कि समीर कमरे में बैठा है. उस की आंखों से आंसू टपक रहे थे, ‘‘रोजी, मु? गांव जाना होगा. मां की तबीयत बहुत खराब है. शायद वापस लौट पाऊं या नहीं, कुछ नहीं पता लेकिन एक बात जान लो, तुम मेरी जिंदगी की सब से सच्ची मुहब्बत हो.’’ रोजी ने कुछ कहने की कोशिश की, लेकिन गला भर आया. उस ने बस समीर का हाथ पकड़ा और बोली, ‘‘अगर कभी लौटो, तो बताना मत बस, दरवाजे पर खड़े होना. मेरे बच्चे पहचान लेंगे कि उन केपापा गए हैं.’’ समीर चला गया. कई महीने बीत गए. रोजी अब भी स्पा सैंटर में काम करती है, बच्चों को स्कूल भेजती है और शाम को बालकनी में बैठ कर आसमान को देखती है, जहां कभी समीर के साथ बिताए पल तैरते हैं.


रोजी की आंखों से आंसू बहे, लेकिन इस बार वह टूटी नहीं थीमजबूत थी. उस ने खुद को संभाल
लिया था. समीर की याद उस के दिल में अब भी थी, लेकिन अब वह उस की कमजोरी नहीं, ताकत बन चुकी थी. रोजी जानती थी, हर मुहब्बत को मंजिल नहीं मिलती लेकिन कुछ रिश्ते अधूरे हो कर भी दिल में मुकम्मल हो जाते हैं. दूसरी ओर, समीर अपने गांव में मां की बीमारी, परिवार और समाज के दबाव में उल? हुआ था. उस की मां बिस्तर पर थीं और आसपड़ोस के लोग ताने दे रहे थे, ‘अपने खानदान की इज्जत मिटा दी इस ने तलाकशुदा औरत को लाने चला है. शर्म नहीं आती…’ समीर हर बात चुपचाप सुनता रहा, लेकिन उस के मन में रोजी और बच्चों का चेहरा उभरता रहता.


एक दिन रात को मां के सिरहाने बैठा, तो मां ने कमजोर आवाज में समीर से कहा, ‘‘बेटा, अगर तू खुश रहना चाहता है तो अपने दिल की सुन. मैं ने जिंदगीभर जातपांत, समाज की बातें मान कर जिंदगी जी लेकिन अब जब आंखें बंद होने को हैं तो सम? आया कि इनसान का दिल जाति से बड़ा होता है.’’
समीर की आंखों में आंसू गए. उस ने मां का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘मां, मैं रोजी और उस के बच्चों से बहुत प्यार करता हूं. वही मेरा घर है वही मेरी दुनिया…’’ मां ने धीमे से कहा, ‘‘तो फिर देर किस बात की, अपने घर को अपना बना ले.’’ कुछ दिन बाद समीर ने पूरे परिवार को बैठा कर अपनी बात रखी, ‘‘मैं सिर्फ रोजी के साथ ही रहूंगा, चाहे वह तलाकशुदा हो, चाहे उस के बच्चे हों वह मेरी जिंदगी है. अगर आप लोग साथ होंगे तो यह मेरी सब से बड़ी ताकत होगी, नहीं तो मैं अकेला ही सही, लेकिन ?ाठ का साथ नहीं दूंगा.’’


समीर के इस फैसले और उस के चेहरे पर ?ालकते सच्चे प्यार ने उस के पिता और भाइयों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. मां तो पहले ही पिघल चुकी थीं. पिता भी गहरी सांस ली और बोले, ‘‘शायद अब समय गया है कि हम भी अपनी सोच बदलें. अगर तू खुश है, तो हमें क्या हक है तेरी खुशी के बीच खड़े होने का…’’ पूरा परिवार एकमत हो गया. सभी ने रोजी को अपनाने के लिए गुरुग्राम जाने का फैसला किया. शाम का समय था. रोजी बालकनी में बैठी बच्चों को पढ़ा रही थी. तभी नीचे गाड़ी के रुकने की आवाज आई. उस ने ?ांक कर देखा, समीर और उस के पूरे परिवार वाले थे. रोजी कुछ सम? पाती, इस से पहले समीर की मां सीढि़यां चढ़ कर आईं और रोजी के सामने खड़ी हो गईं. रोजी के दिल की धड़कनें तेज हो गईं. उस ने बच्चों को पीछे खींच लिया. उसे अंदाजा नहीं था, क्या होने वाला है. समीर की मां ने उस के पास कर उस का हाथ थाम लिया और कहा, ‘‘बेटी, हमें माफ कर दो. हम ने तु? बिना जाने, बिना सम? ठुकरा दिया. आज सम? आया, तेरे जैसे दिल वाली औरत किसी जाति, किसी धर्म से बंधी नहीं होती. तू तो वह रोशनी है जिस ने हमारे बेटे की जिंदगी में सुकून भरा.’’


रोजी की आंखों से आंसू बह निकले. समीर आगे बढ़ा, दोनों बच्चों को उठा कर बोला, ‘‘चलो घर चलें. अब यही मेरा परिवार हैतुम, बच्चे और ये सब.’’ समीर के पिता ने बच्चों के सिर पर हाथ रखा और बोले, ‘‘अब से तुम हमारे पोते हो हमारा खून सही, लेकिन हमारा अपनापन जरूर होगा.’’ गांव में एक सादा समारोह हुआ, जिस में समीर और रोजी ने समाज की परंपराओं को तोड़ते हुए एकदूसरे को सार्वजनिक रूप से जीवनसाथी स्वीकार किया. जो गांव वाले कभी ताने मारे थे, अब तालियां बजा रहे थे. रोजी की आंखों में खुशी के आंसू थे. उस ने बच्चों को गले लगाया और आसमान की ओर देखा मानो कह रही हो, ‘शुक्र है. इस बार जिंदगी ने मेरा साथ दिया.’  Hindi Story

लेखक महेश कांत शिवा

Hindi Story: नौजवान इंजीनियर और मौत का गड्ढा

Hindi Story: रविवार की सुबह थी. विजय घर पर अकेला था. उस के मातापिता किसी रिश्तेदार के घर गए हुए थे. आज विजय ने ठान लिया था कि घर के पीछे के आंगन में वह गड्ढा खोद कर ही दम लेगा. दरअसल, उसे एक पूरा का पूरा पेड़ शिफ्ट करना था. चूंकि पेड़ बड़ा था, तो उस ने अंदाजे से 8 फुट गहरा गड्ढा खोद डाला था.


आप सोच रहे होंगे कि पेड़ को कैसे शिफ्ट करते हैं? अमूमन तो पौधा ही लगाया जाता है, पर पूरा का पूरा पेड़ कैसे जड़ समेत मिट्टी में बोया जाता है? इस तकनीक में किसी पेड़ को उस की वर्तमान जगह से उठाने के लिए खास तरह के उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है या पेशेवरों को बुलाया जाता है. शाखाओं या जड़ों (रूट बौल) को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए पेड़ को सावधानी से संभालें. पेड़ को एक मजबूत गाड़ी पर रखें, यह पक्का करते हुए कि पेड़ पूरी यात्रा के दौरान हिलेडुले , उसे किसी तरह का नुकसान हो.


विजय यह एक्सपैरिमैंट कर रहा था. वह गड्ढा खोदने में इतना मशगूल था कि मिट्टी को गीला करने के लिए जो नल उस ने चलाया था, उस में लगा पाइप धीरेधीरे उस गड्ढे को भर रहा था. चूंकि विजय शारीरिक काम कर रहा था, तो उसे गरमी लग रही थी. धूप भी खिली थी. इसी बीच कब वहां अनामिका आई, उसे पता ही नहीं चला. विजय को मिट्टी में सना देख कर अनामिका को एक खुराफात सू?. उसे पता नहीं था कि गड्ढा कितना गहरा है. उसे लगा कि आज मड बाथ लिया जाए. वैसे भी घर पर कोई नहीं है.


अनामिका चुपके से विजय के पीछे गई उसे धक्का दे कर गड्ढे में धकेल दिया. अचानक हुए इस हमले से विजय हैरान रह गया. पर चूंकि अभी गड्ढा सिर्फ 5 फुट तक भरा था, तो उसे ज्यादा महसूस नहीं हुआ.
विजय ने अनामिका को देखा, तो हंस कर बोला, ‘‘इस गड्ढे में मैं अकेला क्या करूंगातुम भी जाओ.’’
अनामिका भी गड्ढे में कूद गई. वे दोनों अब वहां मस्ती करने लगे. अनामिका का मिट्टी से सराबोर बदन विजय को ललचा रहा था. उस ने अनामिका को बांहों में भर लिया और चूमने लगा.


अनामिका भी उस का साथ देने लगी. इसी बीच गड्ढे में पानी अभी भी भर रहा था. जब अनामिका की गरदन से पानी ऊपर हुआ, तो वह थोड़ा सतर्क हो गई और बोली, ‘‘चलो, अब हम बाहर निकलते हैं.’’
पर जैसे ही विजय ने उचक कर बाहर निकलने की कोशिश की, वह फिसल गया. इस के बाद उस ने कई बार कोशिश की, पर नाकाम रहा. अनामिका ने कहा, ‘‘लगता है, ऐसे बाहर नहीं निकला जाएगा. तुम मु? उठाओ. पहले मैं बाहर निकलती हूं.’’


विजय ने ऐसा ही किया. अनामिका तो बाहर चली गई, पर वह जैसे ही विजय को खींचने लगी, तो मिट्टी लगी होने की वजह से दोनों के हाथ बारबार फिसल रहे थे. इस बीच पानी और ज्यादा बढ़ गया था. अनामिका को चिंता हुई. विजय भी थोड़ा घबरा गया था. उस ने कहा, ‘‘दीवार की साइड पर एक सीढ़ी है, जल्दी लाओ.’’ अनामिका ने ऐसा ही किया. जल्दी से गड्ढे में सीढ़ी लगाई और बड़ी मुश्किल से विजय बाहर निकला. विजय की सांसें फूल रही थीं. वह बोला, ‘‘आज तो बालबाल बचे. अगर सीढ़ी होती तो बाहर निकलना मुश्किल हो जाता.’’


फिर वे दोनों बाथरूम में गए और एकसाथ नहाए. विजय ने अनामिका को अपनी बहन के कपड़े दे दिए.
अनामिका अभी भी किसी गहरी सोच में थी. विजय ने पूछा, ‘‘क्या सोच रही हो?’’ ‘‘ग्रेटर नोएडा वाला कांड तो तुम ने सुना ही होगा?’’ अनामिका ने अपने बाल सुखाते हुए कहा. ‘‘यार, बस सरसरी तौर पर पढ़ा था. क्या हुआ था?’’ विजय ने पूछा. ‘‘27 साल के एक सौफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की 16 जनवरी, 2026 की आधी रात के बाद उस समय मौत हो गई थी, जब घने कोहरे में उस की कार फिसल कर एक नाले के पास बन रहे शौपिंग कौंप्लैक्स के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर गई थी.


‘‘युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि उन का बेटामेरी मदद करोमेरी मदद करो…’ चीख रहा था. लोग वीडियो बना रहे थे, पर कोई उसे बचाने के लिए कुछ नहीं कर रहा था. मैं ने उन्हें डांटा, फिर भी कोई कोशिश नहीं की गई. मेरे बेटे की मौत बेवजह हुई. ‘‘लोग राजकुमार मेहता का दर्द कभी नहीं सम? पाएंगे, जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने बेटे युवराज को कार में डूबते हुए देखा. राजकुमार मेहता का कहना था कि हादसे वाली जगह पर 80 कर्मचारी मौजूद थे, पर कोई भी पानी में नहीं उतरा.’’


‘‘यह तो दर्दनाक मौत थी. प्रशासन और सरकार ने क्या किया?’’ विजय ने अफसोस जताते हुए पूछा.
‘‘पुलिस ने युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर 2 रियल एस्टेट डेवलपर्स एमजेड विजटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, जिस में उस ने लोकल अफसरों पर लापरवाही का आरोप लगाया और जवाबदेही की मांग की. विजटाउन प्लानर्स के बड़े अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया.’’


‘‘यह तो बहुत बड़ा सियासी मुद्दा भी बन गया. क्या विपक्ष ने सरकार को नहीं घेरा?’’ विजय ने पूछा.
‘‘बिलकुल घेरा. देखने पर यह एक साधारण सी मौत लगती है और सरकार इसे बिल्डरों की लापरवाही मान रही है या इसे भ्रष्टाचार के एंगल से खंगाल रही है, पर इस मामले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि समस्या केवल भ्रष्टाचार नहीं समाज में जड़ें फैलाती लालच की वह लत भी है, जो भारतीय शासन की जवाबदेही निगल गई है.


‘‘दूसरी ओर राजकुमार मेहता ने कहा कि वे मुख्यमंत्री योगी से एक बार मिलना चाहेंगे. इस से उन्हें मन की शांति मिलेगी. वैसे, सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया है कि उन्हें सही दिशा में उचित सहयोग मिलेगा. ‘‘इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी योगी सरकार को घेरा. उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सौफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के लिए सीधेतौर पर सरकार जिम्मेदार है.


‘‘उन्होंने आगे कहा कि हादसे वाली जगह पर पहुंचने के बाद भी सरकार और उस के तमाम महकमे इंजीनियर युवराज को बचा नहीं पाए. पानी ठंडा होने की वजह से कोई उसे बचाने के लिए आगे नहीं आया. अखिलेश यादव ने मीडिया को भी नसीहत दी कि मौत के बाद किसी की इमेज खराब करने वाले वीडियो चलाए जाएं. ‘‘ज्यादा दबाव पड़ने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी लोकेश एम. को उन के पद से हटा दिया. हादसे की जांच के लिए 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया. मेरठ जोन के एडीजी एसआईटी के अध्यक्ष बनाए गए.


‘‘इधर, पुलिस कमिश्नर (कानून व्यवस्था) डाक्टर राजीव नारायणी ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है. सूचना मिलते ही दमकल टीम सभी उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची और बचाव का काम शुरू किया गया. एसडीआरएफ की मदद से अंतिम बचाव अभियान चलाया गया. उस समय विजिबिलिटी जीरो थी, लेकिन युवराज को बचाया नहीं जा सका.’’ ‘‘पिता राजकुमार मेहता ने बिल्डरों के खिलाफ किन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई है?’’ विजय ने पूछा.


‘‘धारा 105 (अनजाने में हत्या), धारा 106 (1) (किसी व्यक्ति की लापरवाही या असावधानी के कारण हुई मृत्यु) और धारा 125 (मानव जीवन या दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) एफआईआर दर्ज की गई है,’’ अनामिका ने बताया. ‘‘यार, यह सुन कर तो मेरे रोंगटे खड़े हो रहे हैं. बड़ा ही दिल दहलाने वाला कांड है,’’ विजय बोला. ‘‘इस पूरे मामले को राजकुमार मेहता ने कुछ इस तरह बताया था… ‘शुक्रवार की आधी रात को 12 बज कर,


20 मिनट पर मेरे पास युवराज का फोन आया. वह घर आने ही वाला था, इसलिए सम? नहीं आया कि वह मु? क्यों फोन कर रहा है. ‘‘‘मैं ने फोन उठाया. दूसरी तरफ से एक डरी हुई आवाज सुनाई दी. उस ने कहा किपापापापामैं नाले में गिर गया हूं, मैं मरना नहीं चाहताप्लीज, मु? बचा लीजिए’.
‘‘‘यह सुन कर मैं उन्हीं कपड़ों में बाहर भागा. सोसाइटी से निकलने से पहले मैं ने एक मैसेज टाइप किया और उसे सोसाइटी के ग्रुप में पोस्ट कर दिया, ताकि मदद मिल सके.


‘‘‘मेरे बेटे ने जिस नाले का जिक्र किया था, वह हमारी सोसाइटी से 200 मीटर दूर था. मैं दौड़ कर उस नाले के पास गया. वहां, मैं घने कोहरे और अंधेरे में 30 मिनट तक अपने बेटे को ढूंढ़ता रहा, आवाज लगाने की कोशिश करता रहा, ताकि कोई जवाब मिले. फिर मु? लगा कि मैं गलत जगह ढूंढ़ रहा हूं.
‘‘‘रात के साढ़े 12 के आसपास वहां वीडियो बना रहे लोगों से मैं ने कहा कि प्लीज, मेरे बेटे को बचा लीजिए. इस के बाद मैं सड़क के किनारे पहुंचा, जहां एक इमारत का निर्माण अधूरा था.
यहां बेसमैंट के लिए एक गड्ढा खोदा गया था.


‘‘‘वहां पहुंच कर मैं चिल्लाने लगा. मेरी आवाज सुन कर मेरा बेटा भी चीख उठा… ‘बचाओबचाओमेरी मदद करो…’ की आवाज सुन कर मैं सम? गई कि मेरा बेटा यहां गिर गया है. ‘‘‘मैं थोड़ा आगे बढ़ा और कोहरे में से देखा कि कार पानी में थी और मेरा बेटा उस की छत पर लेटा हुआ था. वह सड़क से तकरीबन 50 से 60 फुट दूर था. वह धीरेधीरे डूब रहा था. किनारे पर खड़े लोगों को यह बताने के लिए कि वह जिंदा है, अपने मोबाइल फोन की लाइट बारबार जलाबु? रहा था.


‘‘‘मैं ने डायल 112 पर फोन किया. मैं उसे अपनी आंखों के सामने डूबते हुए देख रहा था. वहां और भी लोग थे, लेकिन कोई मदद नहीं कर रहा था. कुछ लोग वीडियो बना रहे थे, मैं ने उन से कहा कि प्लीज, वीडियो बनाना बंद करें, मेरे बेटे की मदद करें.’’’ इतना बता कर अनामिका चुप हो गई. थोड़ी देर के बाद विजय ने पूछा, ‘‘बचाव अभियान कब शुरू हुआ?’’ ‘‘खबरों के मुताबिक, रात के तकरीबन पौने 1 बजे पुलिस और फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी डायल 112 के साथ मौके पर पहुंची. तब तक घना कोहरा छा चुका था. सब से पहले, पुलिस और फायर ब्रिगेड ने रस्सी फेंक कर बचाव का काम शुरू किया.


‘‘पर वह रस्सी युवराज तक नहीं पहुंच रही थी. कुछ पुलिस अफसर कह रहे थे कि पानी बहुत ठंडा है और उस में उतरना मुश्किल है. कुछ का कहना था कि हादसे वाली जगह के नीचे लोहे की छड़ें हो सकती हैं.
‘‘इस के बाद क्रेन बुलाई गई, लेकिन क्रेन भी युवराज तक नहीं पहुंच पाई. वह सिर्फ 30-40 फुट तक ही जा पा रही थी. वहां मौजूद कोई भी आदमी पानी में उतरने की कोशिश नहीं कर रहा था. ‘‘पिता राजकुमार मेहता ने बताया कि गड्ढा शायद 15 से 20 फुट गहरा था, इसलिए अगर गोताखोर वहां होते तो उन के बेटे की जान बच सकती थी.


‘‘एसडीआरएफ की टीम रात के तकरीबन सवा 1 बजे पहुंची. उन लोगों के पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे. इसी बीच युवराज की कार पूरी तरह पानी में डूब गई. कार के ऊपर लेटे हुए युवराज भी पानी में समा गए. सब लोग बस यह सब देखते रह गए. ‘‘सर्चलाइट, क्रेन और सीढ़ी की मदद से टीम पानी में उतरी. 2 घंटे की मशक्कत के बाद युवराज की लाश तकरीबन सवा 4 बजे बरामद की गई. ‘‘पिता राजकुमार मेहता ने कहा कि इस घटनास्थल को ले कर पहले भी शिकायतें की गई थीं, पर सब लोग सोते रहे. उन्होंने अपने बेटे की मौत के लिए नोएडा प्रशासन को दोषी ठहराया.’’


‘‘वे बिलकुल ठीक कह रहे हैं. सरकारें घर उजाड़ने के लिए बुलडोजर तो चला रही हैं, पर इस तरह के मौत के गड्ढे भरने के लिए कुछ नहीं कर रही है. बिल्डरों पर गाज गिराने से कुछ नहीं होगा. कौन सा बिल्डर चाहेगा कि उस का प्रोजैक्ट समय पर पूरा हो. पर प्रशासन के नियमकानून इतने पेचीदा बना दिए जाते हैं कि लोग कानून के शिकंजे में फंस कर रह जाते हैं. ‘‘यह हादसा तो एक इंजीनियर के साथ हुआ है और इस कांड के वीडियो भी बन गए, तभी प्रशासन इतना जल्दी कार्रवाई करता दिख रहा है. दूरदराज के इलाकों में जाने कितने युवराज अपनी जिंदगी से खेल रहे हैं, किसे इस बात की चिंता है.’’


‘‘विजय, सवाल यह नहीं है कि कौन गुनाहगार है और उसे सजा मिलेगी या नहीं, पर मुद्दा यह भी है कि क्या एक जवान लड़के की ऐसी मौत देखने के बाद उस के पिता कभी सब्र का घूंट पी सकेंगे…’’ अनामिका बोली. ‘‘कभी नहीं. इस तरह की मौत देश की तरक्की की भी पोल खोलती है, क्योंकि तरक्की का मतलब यह नहीं है कि ऊंचीऊंची इमारतें बना देना, जबकि असली तरक्की का मतलब है लोगों के मन से असुरक्षा का भाव खत्म होना.


‘‘दिल्ली के इतना पास एक पढ़ालिखा नौजवान सिर्फ इसलिए मर गया कि वह रात के अंधेरे में पानी से लबालब ऐसे गड्ढे में जा गिरा, जो वहां होना ही नहीं चाहिए था. यह देश के रहनुमाओं पर एक तरह की लानत है कि वे अपने नागरिकों को सुरक्षा देने में नाकाम हो रहे हैं,’’ विजय ने अपने दिल की भड़ास निकाली. अनामिका चुप थी. वह बाहर आंगन में खोदे गए गड्ढे को देख रही थी, जिस में अब भी गंदला पानी जमा था.  Hindi Story
   

Hindi Story: उद्धार

Hindi Story: ‘‘  री छमिया, री कहां रह गई. चल, जल्दीजल्दी चल. सब से पहले हमें पहुंचना है. तेरे भाई को मैं ने पहले ही भेज दिया, ताकि वह हमारी जगह रोक कर रखे.’’ ‘‘आई भाभी आई, कोई ढंग का कपड़ालत्ता नहीं मिल रिहा था. फटाफट  दर्जी से यह लहंगा बनवाने लग गई थी. इसी खातिर देर हो गई,’’ छमिया ने कहा.


जैसे ही छमिया लहंगा पहन कर झोपड़े से बाहर निकली, उस की मुंहबोली भाभी बस्ती के मांगेलाल की बहू लाजो बिना पलकें ? झपकाए उसे ही देखे जा रही थी. मानो उस ने कोई अजूबा देख लिया हो.
‘‘भाभी, चालो अब, यह मुझे मुझे टुकुरटुकुर क्या देख रही हो?’’ ‘‘वाह छोरी, मैं ने तो पहचाना ही नहीं, एकदम परी लग रही है आज तोध्यान से रहना वहां, कहीं कोई शहरी बाबू दिल दे बैठे .’’


‘‘क्या भाभी, तुम भी …’’ छमिया ने ऐसा कहते हुए शरमा कर नजरें झुका लीं. झॉ दोनों  उस तरफ चल पड़ीं, जिधर आज बहुत बड़ा पंडाल बना हुआ था. मुफ्त में खाना बंटने वाला था. खाने के साथ हर ?  झोपड़पट्टी वाले को 1-1 कंबल मुफ्त में दिया जाएगा. ऐसी घोषणा 2 दिन पहले हुई थी. कोई नेता रहे थे नारी उद्धार का बीड़ा उठाने. इस बस्ती में वे नारी उद्धार कर के रहेंगे. अब कोई नारी किसी भी वजह से दुखी नहीं रहेगी, इसलिए बस्ती के सभी लोगों को उस पंडाल में जमा होने को कहा गया था. सभी अपनीअपनी फरियाद ले कर पहुंचें, सभी की समस्याओं का हल किया जाएगा. ऐसी अनाउंसमैंट हुई थी.


लाजो और छमिया दोनों को जातेजाते रास्ते में और भी औरतें मिली थीं. बहुत ज्यादा बड़ी बस्ती तो थी नहीं, लेदे कर 400-500 घर ही होंगे उस बस्ती में. घर भी क्या ?ांपड़पट्टी ही कहो. सभी औरतें रास्ते में अपनीअपनी समस्याओं का जिक्र करती जा रही थीं. कोई कहती कि बस्ती में पानी की समस्या का समाधान होना चाहिए, तो कोई कहती कि बस्ती में एक भी डाक्टर नहींअगर कोई बीमार पड़ जाए तो दवादारू के लिए उसे शहर जाना पड़ता है. कभी किसी की हालत ज्यादा खराब हो तो शहर तक जातेजाते रास्ते में ही उस का राम नाम सत्य हो जाता है.


1-2 बार ऐसा हुआ भी था. बस्ती के नाई घसीटामल को सांस की तकलीफ थी. एक बार तकलीफ इतनी बढ़ी कि सांस लेना दूभर हो रहा था. बस्ती का ?ालाछाप डाक्टर भी कुछ नहीं कर पा रहा था. जितना वह इलाज करता, सांस लेने में और दिक्कत आती, इसलिए शहर के डाक्टर के पास जाने की सलाह दी गई.
लेकिन शहर जाते समय रास्ते में घसीटामल की सांस हमेशा के लिए बंद हो गई. इसी तरह के और भी कई केस हुए थे.


इसी तरह सभी औरतें अपनीअपनी समस्याओं के बारे में बातें करते हुए पंडाल में जा पहुंची थीं. तरहतरह के खाने की खुशबू से पंडाल महक रहा था. खुशबू इतनी शानदार थी कि सब के मुंह में पानी गया.
‘‘ भाई, ये साहब लोग कब तक आएंगे? मेरा तो खाना खाने का जी कर रहा है. इतना खुशबूदार खाना आज तक नहीं देखा है. पता नहीं आज क्याक्या मिलेगा खाने को.’’ ‘‘थम जा भाई, अभी जाएंगे. पहले साहब लोगों को खाने देना, फिर आप जितना जी चाहे खा लेना.’’ ‘‘रे बावले, यह जो खाना हम गरीब लोगों के लिए बनाया है, वह साहब लोग थोड़ी खाएंगे. साहब लोगों का खाना तो स्पैशल बनेगा…’’


थोड़ी ही देर में एक लंबी सी गाड़ी कर रुकी. उस के पीछेपीछे कुछ गाडि़यां और भी थीं. लंबी गाड़ी में से सफेद कुरताधोती पहने, सिर पर सफेद टोपी लगाए एक सज्जन निकले और दनदनाते हुए सीधे उस टैंट में घुस गए, जो खास उन के लिए शहर से आए लोगों ने बनाया था. उन के पीछेपीछे कुछ बस्ती वाले भी, जो अपना चौधरपना दिखाना चाहते थे, दुमछल्ले के जैसे पीछे लग लिए, जैसे वे इन मंत्री के सगे वाले हों.
लेकिन टैंट के पास आते ही नेताजी के चमचों ने उन्हें बाहर ही रोक लिया, मगर टैंट के अंदर की एकालक तो देखने को मिल ही गई.


एक शानदार सोफा और सैंट्रल टेबल पर ताजा फूलों से महकता हुआ गुलदस्ता सजा हुआ था. साथ में फलों से भरी हुई छोटी सी खूबसूरत टोकरी रखी हुई थी. और भी जाने क्याक्या पीने के सामान रखे थे, ये वे मासूम बस्ती वाले क्या जानेंखैर, थोड़ी ही देर में जो खाना यहां बना हुआ था उस की एक थाली अंदर टैंट में ले जाई गई और उस के बाद अनाउंसमैंट हुई, ‘‘बस्ती वालो, जो खाना आप लोगों के लिए बनवाया गया है, वही खाना नेताजी को भी दिया गया है, क्योंकि हमारे आदर्श नेता आप सब को अपना भाईबंधु मानते हैं, इसलिए वे भी आप के साथ ही बैठ कर खाना खाना चाहते थे.


‘‘मगर तबीयत खराब होने की वजह से उन का खाना अंदर ही दे दिया गया है और अब आप सब भी खाना शुरू करें. उस के बाद नेताजी खुद कर आप सब के उद्धार के बारे में चर्चा करेंगे.’’ सभी लोग यह सुनते ही खाने वाले पंडाल की तरफ टूट पड़े. आज जाने कितने सालों बाद इतने लजीज खाने की खुशबू सूंघी है. जैसे ही जनता खाने वाले स्टौल की तरफ लपकी, नेताजी का एक चमचा दौड़ कर नेताजी की कार में से टिफिन बौक्स निकाल लाया. हां, इस बस्ती में एक बंदा ऐसा था, जो थोड़ाबहुत सुनसुना कर टूटीफूटी इंगलिश ?ाड़ता था. उस ने नेताजी के बाशिंदे को टिफिन ले जाते देख करा झट से उसे दबोच लिया, ‘‘क्यों सरजी, बट इज इट…’’

‘‘नथिंग, नथिंग, जस्ट मैडिसन…’’
‘‘हांजीक्या बोले जी? अरे, हम पूछिंग, बट इज दिस…’’
‘‘ओह, इस टिफिन में साहब की दवाएं हैं. खाने के साथ लेनी होती हैं, इसलिए ले जा रहा हूं.’’
‘‘ओके, ओके, गो, गो…’’


आप समझ सकते हैं सबकुछ कि टिफिन में कौन दवाएं रखता है. अरे, नेताजी भला वह खाना खाएंगे जो आम लोगों के लिए लंगर चलवाया था? खैरभोजनपानी हो गया. सब लोग पंडाल में गए. नेताजी भी दांतों मेंसे कुछ फंसा हुआ चिकन का पीस
माचिस की तीली से निकालते हुए पधार रहे हैं. चमचों ने सब को शांत हो कर बैठने को कह दिया. सब लोग शांति से बैठ गए.


जिन के छोटे बच्चे थे, वे थोड़ा शोरशराबा करने लगे, तो नेताजी के चमचों ने फरमान सुनाया कि इन बच्चों को उन के दादादादी पंडाल के पीछे के हिस्से में खेलने के लिए ले जाएं, ताकि वे जवान लोगों को उन के उद्धार का तरीका अच्छे ढंग से सम? सकें. औरतें आगे और मर्द पीछे बैठ गए. नेताजी कि नजरें उद्धार करने लायक चेहरे खोजने लगीं. अब हुआ नेताजी का भाषण शुरू.


नेताजी ने सब की शिकायतें सुनीं और अपने एक चमचे को हुक्म दिया कि कागज पर सब की शिकायतें नोट कर लें, ताकि किसी की भी कोई समस्या रह जाए, जिस का समाधान हो. अब नेताजी ने सब को आश्वासन दिया कि सत्ता में आते ही सब की समस्या का समाधान किया जाएगा और इस बस्ती का उद्धार नेताजी कर के रहेंगे. नेताजी ने एक और बहुत बड़ी बात कह दी कि चाहे वे सत्ता में आएं या आएं, लेकिन इस बस्ती का उद्धार तो वे आज से करना शुरू करेंगे, क्योंकि यह बस्ती उन्हें अपने परिवार की तरह है.


जी हां, सामने छमिया जैसी कई सुंदरियां उन्हें अपनी ही लग रही थीं, इसलिए भाषण के बाद उन के टैंट में उन सुंदरियों की भीड़ लग गई, जिनजिन के नाम ले कर उद्धार के लिए बुलाया गया था. नेताजी उन सब सुंदरियों को शहर में अच्छी नौकरी, अच्छा रहनसहन, अच्छा खानपान और शहरी सलीका सिखाने के लिए साथ ले गए. 2 साल बाद छमिया जैसी सभी वे लड़कियां जिन का उद्धार करने के लिए ले जाया गया था, बस्ती में आईं. सब ने बेशकीमती कपड़े और गहने पहने हुए थे. हाथों में पान की छोटी सी डिबिया जिन में से वे पान निकाल कर मुंह में ठूंस कर इधरउधर पीक फेंक रही थीं. उन के परिवारजनों के पास छोटेछोटे पक्के मकान थे. बिजलीपानी की सुविधा थी.


दूसरे  झांपड़पट्टी वालों ने उद्धार की गुहार लगाई, तो उन्हें बताया गया कि शहर में केवल सुंदरियों को ही काम पर रखा जाता है. उन के द्वारा ही उन के परिवारों का उद्धार हो सकता है और इसलिए वे उद्धार करने के लिए ही दूसरी सुंदरियों को चुनने आई हैं.  Hindi Story 

लेखक प्रेम बजाज

Hindi Story : जानलेवा चुनौती

Hindi Story : यह कहानी बंटवारे से पहले अंगरेजी राज की है. उस समय लोगों के स्वास्थ्य बहुत अच्छे हुआ करते थे. बीड़ीसिगरेट, वनस्पति घी का प्रयोग नहीं हुआ करता था. उस जमाने के लोग बहुत निडर होते थे. हत्या, डकैती की कोई घटना हो जाती थी तो पुलिस और जनता उस में रुचि लिया करती थी. गांवों में पुलिस आ जाती तो पूरे गांव में खबर फैल जाती कि थाना आया हुआ है.

एक अंगरेज डिप्टी कमिश्नर इंग्लैंड से रावलपिंडी स्थानांतरित हो कर आया था. जब भी कोई नया अंगरेज अधिकारी आता तो उसे उस इलाके की पूरी जानकारी कराई जाती थी, जिस से वह अच्छा कार्य कर के अपनी सरकार का नाम ऊंचा कर सके. उस अंगरेज डिप्टी कमिश्नर को बताया गया कि भारत में अनोखी घटनाएं होती हैं, जिन में डाके और चोरियां शामिल हैं. अपराधियों की खोज करना बहुत कठिन होता है. कई घटनाएं ऐसी होती हैं कि सुन कर हैरानी होती है.

नए अंगरेज डिप्टी कमिश्नर ने एसपी से कहा कि मेरे बंगले पर 24 घंटे पुलिस की गारद रहती है साथ ही 2 खूंखार कुत्ते भी. इस के अलावा मेरे इलाके में पुलिस भी रहती है. रात भर लाइट जलती है, क्या ऐसी हालत में भी चोर मेरे घर में चोरी कर सकता है?

एसपी ने जवाब दिया कि ऐसे में भी चोरी की संभावना हो सकती है. अंगरेज डिप्टी कमिश्नर ने कहा, ‘‘मैं इस बात को नहीं मानता, इतनी सावधानी के बावजूद कोई चोरी कैसे कर सकता है?’’

एसपी ने कहा, ‘‘अगर आप आजमाना चाहते हैं तो एक काम करें. एक इश्तहार निकलवा दें, जिस में यह लिखा जाए कि अंगरेज डिप्टी कमिश्नर के बंगले पर अगर कोई चोरी कर के निकल जाए, तो उसे 500 रुपए का नकद ईनाम दिया जाएगा. अगर वह पुलिस या कुत्तों द्वारा मारा जाता है तो अपनी मौत का वह स्वयं जिम्मेदार होगा. अगर वह मौके पर पकड़ा या मारा नहीं गया तो पेश हो कर अपना ईनाम ले सकता है. उसे गिरफ्तार भी नहीं किया जाएगा और न ही कोई सजा दी जाएगी.’’

डिप्टी कमिश्नर ने एसपी की बात मान ली. इश्तहार छपा कर पूरे शहर में लगा दिए गए. इश्तहार निकलने के 2 महीने बाद यह बात उड़तेउड़ते चकवाल गांव भी पहुंची. उस जमाने में गांवों के लोग शाम को चौपालों पर एकत्र हो कर गपशप किया करते थे. चकवाल की एक ऐसी चौपाल पर अमीर नाम का आदमी बैठा हुआ था, जो 10 नंबरी था.

उस ने वहीं डिप्टी कमिश्नर के इश्तहार वाली बात सुनी. उस ने लोगों से पूछा कि 2 महीने बीतने पर भी वहां चोरी करने कोई नहीं आया क्या? एक आदमी ने उसे बताया कि पिंडी से आए एक आदमी ने बताया था कि उस बंगले में किसी की हिम्मत नहीं है जो चोरी कर सके. वहां चोरी करने का मतलब है अपनी मौत का न्यौता देना.

अमीर ने उसी समय फैसला कर लिया कि वह उस बंगले में चोरी जरूर करेगा. अंगरेज डिप्टी कमिश्नर को वह ऐसा सबक सिखाएगा कि वह पूरी जिंदगी याद रखेगा. उस ने अपनी योजना के बारे में सोचना शुरू कर दिया.

कुत्तों के लिए उस ने बैलों के 2 सींग लिए और देशी घी की रोटियों का चूरमा बना कर उन सींगों में इस तरह से भर दिया कि कुत्ते कितनी भी कोशिश करें, रोटी न निकल सकें. उस जमाने में रेल के अलावा सवारी का कोई साधन नहीं था. गांव के लोग 30-40 मील तक की यात्रा पैदल ही कर लिया करते थे.

चूंकि अमीर 10 नंबरी था इसलिए कहीं बाहर जाने से पहले इलाके के नंबरदार से मिलता था. इसलिए अमीर सुबह जा कर उस से मिला, जिस से उसे लगे कि अमीर गांव में ही है. चकवाल से रावलपिंडी का रास्ता ज्यादा लंबा नहीं था. अमीर दिन में ही पैदल चल कर डिप्टी कमिश्नर की कोठी के पास पहुंच गया.
उस ने संतरियों को कोठी के पास ड्यूटी करते हुए देखा. बंगले के बाहर की दीवार आदमी की कमर के बराबर ऊंची थी. बंगले के अंदर संतरों के पेड़ थे, और बड़ी संख्या में फूलों के पौधे भी थे.

बंगले के चारों ओर लंबेलंबे बरामदे थे, बरामदे के 4-4 फुट चौड़े पिलर थे. अमीर को अंदर जा कर कोई भी चीज चुरानी थी और यह साबित करना था कि भारत में एक ऐसी भी जाति है, जो बहुत दिलेर है और जान की चिंता किए बिना हर चैलेंज कबूल करने के लिए तैयार रहती है.

जब आधी रात हो गई तो वह बंगले की दीवार से लग कर बैठ गया और संतरियों की गतिविधि देखने लगा. जिन सींगों में घी लगी रोटियों का चूरमा भरा था, उस ने वे सींग बड़ी सावधानी से अंदर की ओर रख दिए.

वह खुद दीवार से 10-12 गज दूर सरक कर बैठ गया. कुत्तों को घी की सुगंध आई तो वे सींगों में से चूरमा निकालने में लग गए. फिर दोनों कुत्ते सींगों को घसीटते हुए काफी दूर अंदर ले गए.

अब अमीर ने संतरियों को देखा, वे 4 थे. बरामदे में इधर से उधर घूमते हुए थोड़ीथोड़ी देर के बाद एकदूसरे को क्रौस करते थे. संतरी रायफल लिए हुए थे और उन्हें ऐसा लग रहा था कि 2 महीने से भी ज्यादा बीत चुके हैं. अब किसी में यहां आने की हिम्मत नहीं है. वैसे भी वह थके हुए लग रहे थे.

अमीर दीवार फांद कर पौधों की आड़ में बैठ गया. वह ऐसे मौके की तलाश में था जब संतरियों का ध्यान हटे और वह बरामदे से हो कर अंदर चला जाए. उसे यह मौका जल्दी ही मिल गया. क्रौस करने के बाद जब संतरियों की पीठ एकदूसरे के विपरीत थी, अमीर जल्दी से कूद कर बरामदे के पिलर की आड़ में खड़ा हो गया.

अमीर फुर्तीला था. दौड़ता हुआ ऐसा लगता था, मानो जहाज उड़ा रहा हो. उसे यकीन था कि काम हो जाने के बाद अगर वह बंगले के बाहर निकल गया तो संतरियों का बाप भी उसे पकड़ नहीं पाएगा.

दूसरा अवसर मिलते ही वह कमरे का जाली वाला दरवाजा खोल कर कमरे में पहुंच गया. लकड़ी का दरवाजा खुला हुआ था. चारों ओर देख कर वह बंगले के बीचों बीच वाले कमरे के अंदर पहुंचा. उस ने देखा कमरे के बीच में बहुत बड़ा पलंग था. उस पर एक ओर साहब सोया हुआ था और दूसरी ओर उस की मेम सो रही थी. मध्यम लाइट जल रही थी.

कमरे में लकड़ी की 2-3 अलमारियां थीं, चमड़े के सूटकेस भी थे. उस ने एक सूटकेस खोला, उस में चांदी के सिक्के थे. उस ने एकएक कर के सिक्के अपनी अंटी में भरने शुरू कर दिए. जब अंटी भर गई तो उस ने मजबूती से गांठ बांध ली. वह निकलने का इरादा कर ही रहा था कि उस की नजर सोई हुई मेम के गले की ओर गई, जिस में मोतियों की माला पड़ी थी.

मध्यम रोशनी में भी मोती चमक रहे थे. उस ने सोचा अगर यह माला उतारने में सफल हो गया तो चैलेंज का जवाब हो जाएगा. मेम और साहब गहरी नींद में सोए हुए थे. उस ने देखा कि माला का हुक मेम की गरदन के दाईं ओर था. उस ने चुपके से हुक खोलने की कोशिश की. हुक तो खुल गया, लेकिन मेम ने सोती हुई हालत में अपना हाथ गरदन पर फेरा और साथ ही करवट बदल कर दूसरी ओर हो गई.

अब माला खुल कर उस की गरदन और कंधे के बीच बिस्तर पर पड़ी थी, अमीर तुरंत पलंग के नीचे हो गया. 5 मिनट बाद उसे लगा कि अब मेम फिर गहरी नींद में सो गई. उस ने पलंग के नीचे से निकल कर धीरेधीरे माला को खींचना शुरू कर दिया. माला निकल गई. उस ने माला अपनी लुंगी की दूसरी ओर अंटी में बांध ली.

अमीर जाली वाले दरवाजे की ओट में देखता रहा कि संतरी कब इधरउधर होते हैं. उसे जल्दी ही मौका मिल गया. वह जल्दी से खंभे की ओट में खड़ा हो कर बाहर निकलने का मौका देखने लगा. कुत्ते अभी तक सींग में से रोटी निकालने में लगे हुए थे.

उसे जैसे ही मौका मिला, वह दीवार फांद कर बाहर की ओर कूद कर भागा. संतरी होशियार हो गए और जल्दबाजी में अंटशंट गोलियां चलाने लगे. लेकिन उन की गोली अमीर का कुछ नहीं बिगाड़ सकीं. वह छोटे रास्ते से पगडंडियों पर दौड़ता हुआ रात भर चल कर अपने घर पहुंच गया.

बाद में अमिर को पता लगा कि गोलियों की आवाज सुन कर मेम और साहब जाग गए थे. जागते ही उन्होंने कमरे में चारों ओर देखा. सिक्कों की चोरी को उन्होंने मामूली घटना समझा. लेकिन जब मेम साहब ने अपनी माला देखी तो उस ने शोर मचा दिया. वह कोई साधारण माला नहीं थी, बल्कि अमूल्य थी.

एसपी साहब और नगर के सभी अधिकारी एकत्र हो गए. उन्होंने नगर का चप्पाचप्पा छान मारा, लेकिन चोर का पता नहीं लगा. अंगरेज डिप्टी कमिश्नर हैरान था कि इतनी सिक्योरिटी के होते हुए चोरी कैसे हो गई. उस ने कहा कि चोर हमारी माला वापस कर दे और अपनी 5 सौ रुपए के इनाम की रकम ले जाए. साथ में उसे एक प्रमाणपत्र भी मिलेगा.

इश्तहार लगाए गए, अखबारों में खबर छपाई गई लेकिन 6 माह गुजरने के बाद भी चोर सामने नहीं आया. दूसरी तरफ मेमसाहब तंग कर रही थी कि उसे हर हालत में अपनी माला चाहिए. माला की फोटो हर थाने में भिजवा दी गई. साथ ही कह दिया गया कि चोर को पकड़ने वाले को ईनाम दिया जाएगा.

उधर अमीर चोरी के पैसों से अपने घर का खर्च चलाता रहा, उस समय चांदी का एक रुपया आज के 2-3 सौ से ज्यादा कीमत का था. अमीर के घर में पत्नी और एक बेटी थी, बिना काम किए अमीर को घर बैठे आराम से खाना मिल रहा था. उस ने सोचा, पेश हो कर अपने लिए क्यों झंझट पैदा करे, हो सकता है उसे जेल में डाल दिया जाए.

उस की पत्नी ने माला को साधारण समझ कर एक मिट्टी की डोली में डाल रखा था. एक दिन उस ने उस माला के 2 मोती निकाले और पास के एक सुनार के पास गई. उस ने सुनार से कहा कि उस की बेटी के लिए 2 बालियां बना दे और उन में एक मोती डाल दे. सुनार ने उन मोतियों को देख कर अमीर की पत्नी से कहा, ‘‘यह मोती तो बहुत कीमती हैं. तुम्हें ये कहां से मिले?’’

उस ने झूठ बोलते हुए कहा, ‘‘मेरा पति गांव के तालाब की मिटटी खोद रहा था, ये मोती मिट्टी में निकले हैं. मैं ने सोचा बेटी के लिए बालियां बनवा कर उस में ये मोती डाल दूं, इसलिए तुम्हारे पास आई हूं.’’ सुनार ने उस की बातों पर यकीन कर के बालियां बना दीं. उस ने अपनी बेटी के कानों में बालियां पहना दीं.

दुर्भाग्य से एक दिन अमीर की बेटी अपने घर के पास बैठी रो रही थी. तभी एक सिपाही जो किसी केस की तफ्तीश के लिए नंबरदार के पास जा रहा था, उस ने रास्ते में अमीर के घर के सामने लड़की को रोते हुए देखा. देख कर ही वह समझ गया कि किसी गरीब की बच्ची है, मां इधरउधर गई होगी. इसलिए रो रही होगी.

लेकिन जब उस की नजर बच्ची के कानों पर पड़ी तो चौंका. उस की बालियों में मोती चमक रहे थे. उसे लगा कि वे साधारण मोती नहीं हैं. उस ने नंबरदार से पूछा कि यह किस की लड़की है. उस ने बता दिया कि वह अमीर की लड़की है, जो दस नंबरी है.

हवलदार को कुछ शक हुआ. उस ने पास जा कर मोतियों को देखा तो वे मोती फोटो वाली उस माला से मिल रहे थे. जो थाने में आया था.

उस ने अमीर को बुलवा कर कहा कि वह बच्ची की बालियां थाने ले जा रहा है, जल्दी ही वापस कर लौटा देगा. थाने ले जा कर उस ने चैक किया तो वे मोती मेम साहब की माला के निकले. अमीर पहले से ही संदिग्ध था, नंबरी भी. उसे थाने बुलवा कर पूछा गया कि ऊपर से 10 मोती उसे कहां से मिले. सब सचसच बता दे, नहीं तो मारमार कर हड्डी पसली एक कर दी जाएगी.

पहले तो अमीर थानेदार को इधरउधर की बातों से उलझाता रहा, लेकिन जब उसे लगा कि बिना बताए छुटकारा नहीं मिलेगा तो उस ने पूरी सचाई उगल दी. उस के घर से माला भी बरामद कर ली गई.

थानेदार बहुत खुश था कि उस ने बहुत बड़ा केस सुलझा लिया है, अब उस की पदोन्नति भी होगी और ईनाम भी मिलेगा. अमीर को एसपी रावलपिंडी के सामने पेश किया गया. साथ ही डिप्टी कमिश्नर को सूचना दी गई कि मेम साहब की माला मिल गई है.

डीसी और मेम साहब ने उन्हें तलब कर लिया. मेम साहब ने माला को देख कर कहा कि माला उन्हीं की है. डिप्टी कमिश्नर ने अमीर के हुलिए को देख कर कहा कि यह चोर वह नहीं हो सकता, जिस ने उन के बंगले पर चोरी की है. क्योंकि उस जैसे आदमी की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती कि माला गले से उतार कर ले जाए.

एसपी ने अमीर से कहा कि अपने मुंह से साहब को पूरी कहानी सुनाए. अमीर ने पूरी कहानी सुनाई और बीचबीच में सवालों के जवाब भी देता रहा. उस ने यह भी बताया कि सोते में मेम साहब ने अपनी गरदन पर हाथ भी फेरा था. डिप्टी कमिश्नर ने उस की कहानी सुन कर यकीन कर लिया, साथ ही हैरत भी हुई.

उन्होंने कहा, ‘‘तुम ने हमें बहुत परेशान किया है, अगर तुम उसी समय हमारे पास आ जाते तो हमें बहुत खुशी होती, लेकिन हम चूंकि वादा कर चुके हैं, इसलिए तुम्हें तंग नहीं किया जाएगा. हम तुम्हें सलाह देते हैं कि बाकी की जिंदगी शरीफों की तरह गुजारो.’’

अमीर ने वादा किया कि अब वह कभी चोरी नहीं करेगा. वह एक साधू का चेला बन गया और उस की बात पर अमल करने लगा. लेकिन कहते हैं कि चोर चोरी से जाए, पर हेराफेरी से नहीं जाता. वह छोटीमोटी चोरी फिर भी करता रहा. धीरेधीरे उस में शराफत आती गई.

Hindi Story : पुल

Hindi Story : ‘‘शुक्रिया जनाब, लेकिन मैं शराब नहीं पीता,’’ मुस्ताक ने अपनी जगह से थोड़ा पीछे हटते हुए जवाब दिया. ‘‘कमाल की बात करते हो मुस्ताक भाई, आजकल तो हर कारीगर और मजदूर शराब पीता है. शराब पिए बिना उस की थकान ही नहीं मिटती है और न ही खाना पचता है. ‘‘कभीकभार मन की खुशी के लिए तुम्हें भी थोड़ा सा नशा तो कर ही लेना चाहिए,’’ ऐसा कहते हुए ठेकेदार ने वह पैग अपने गले में उड़ेल लिया. ‘‘गरीब आदमी के लिए तो पेटभर दालरोटी ही सब से बड़ा नशा और सब से बड़ी खुशी होती है. शराब का नशा करूंगा तो मैं अपना और अपने बच्चों का पेट कैसे भरूंगा?’’ ‘‘खैर, जैसी तुम्हारी मरजी. मैं ने तो तुम्हें एक जरूरी काम के लिए बुलाया था. तुम्हें तो मालूम ही है कि इस पुल के बनने में सीमेंट के हजारों बैग लगेंगे.

ऐसा करना, 2 बैग बढि़या सीमेंट के साथ 2 बैग नकली सीमेंट के भी खपा देना. नकली सीमेंट बढि़या सीमेंट के साथ मिल कर बढि़या वाला ही काम करेगी. ‘‘इसी तरह 6 सूत के सरिए के साथ 5 सूत के सरिए भी बीचबीच में खपा देना. पास खड़े लोगों को भी पता नहीं चलेगा कि हम ऐसा कर रहे हैं,’’ ठेकेदार ने उसे अपने मन की बात खोल कर बताई. रात का समय था. पुल बनने वाली जगह के पास खुद के लिए लगाए गए एक साफसुथरे तंबू में ठेकेदार अपने बिस्तर पर बैठा था.

नजदीक के एक ट्यूबवैल से बिजली मांग कर रोशनी का इंतजाम किया गया था. ठेकेदार के सामने एक छोटी सी मेज रखी हुई थी. मेज पर रम की खुली बोतल सजी हुई थी. पास में ही एक बड़ी प्लेट में शहर के होटल से मंगाया गया लजीज चिकन परोसा हुआ था. ‘‘ठेकेदार साहब, यह काम मुझ से तो नहीं हो सकेगा,’’ मुस्ताक ने दोटूक जवाब दिया. ‘‘क्या…?’’ हैरत से ठेकेदार का मुंह खुला का खुला रह गया. हाथ की उंगलियां, जो चिकन के टुकड़े को नजाकत के साथ होंठों के भीतर पहुंचाने ही वाली थीं, एक झटके के साथ वापस प्लेट के ऊपर जा टिकीं. ठेकेदार को मुस्ताक से ऐसे जवाब की जरा भी उम्मीद नहीं थी. एक लंबे अरसे से वह ठेकेदारी का काम करता आ रहा था, पर इस तरह का जवाब तो उसे कभी भी नहीं मिला था. ‘‘क्यों नहीं हो सकेगा तुम से यह काम?’’ गुस्से से ठेकेदार की आंखें उबल कर बाहर आने को हो गई थीं. ‘‘साहब, आप को भी मालूम है और मुझे भी कि इस पुल से रेलगाडि़यां गुजरा करेंगी.

अगर कभी पुल टूट गया तो हजारों लोग बेमौत मारे जाएंगे. मैं तो उन के दुख से डरता हूं. मुझे माफ कर दें,’’ मुस्ताक ने हाथ जोड़ कर अपनी लाचारी जाहिर कर दी. खुद का मनोबल बनाए रखने के लिए ठेकेदार ने रम का एक और पैग डकारते हुए कहा, ‘‘अरे भले आदमी, तुम खुद मेरे पास यह काम मांगने के लिए आए थे… मैं तो तुम्हें इस के लिए बुलाने नहीं गया था. तब तुम ने खुद ही कहा था कि तुम अपने काम से मुझे खुश कर दोगे. ‘‘पहले जो कारीगर मेरे साथ काम करता था, उसे जब यह पता चला कि मैं ने तुम्हें इस काम के लिए रख लिया है, तो वह दौड़ता हुआ मेरे पास आया और मुझे सावधान करते हुए कहने लगा कि यह विधर्मी तुम्हें धोखा देगा… ‘‘पर, मैं ने उस की एक न सुनी… वह नाराज हो कर चला गया… तुम्हारे लिए अपने धर्मभाइयों को मैं ने नाराज किया और तुम हो कि ईमानदारी का ठेकेदार बनने का नाटक कर रहे हो.’’

‘‘मैं कोई नाटक नहीं कर रहा साहब. यह ठीक है कि मैं आप के पास खुद काम मांगने के लिए आया था… आप ने मेहरबानी कर के मुझे यह काम दिया… मैं इस का बदला चुकाऊंगा, पर दूसरी तरह से… ‘‘मैं वादा करता हूं कि मैं और मेरे साथी कारीगर हर रोज एक घंटा ज्यादा काम करेंगे. इस के लिए हम आप से फालतू पैसा नहीं लेंगे… इस तरह आप को फायदा ही फायदा होगा,’’ मुस्ताक ने यह कह कर ठेकेदार को यकीन दिलाना चाहा. ‘‘अच्छा, इस का मतलब यह कि तू चाहता है कि मैं लुट जाऊं… बरबाद हो जाऊं और तू तमाशा देखे… क्यों?’’ ठेकेदार खा जाने वाली नजरों से मुस्ताक को घूर रहा था. कारीगर मुस्ताक यह देख कर डर गया. उस ने हकलाते हुए कहा, ‘‘नहीं… मेरा मतलब यह नहीं था कि…’’ ‘‘और क्या मतलब है तुम्हारा? क्या तुम्हें मालूम नहीं कि ईमानदारी के रास्ते पर चल कर पेट तो भरा जा सकता है, पर दौलत नहीं कमाई जा सकती. जिस तरह तू काम करने की बात कर रहा है, वह तो सचाई और ईमानदारी का रास्ता है. उस से हमें क्या मिलेगा? ‘‘तुम्हें मालूम होना चाहिए कि इंजीनियर साहब पहले ही मुझ से रिश्वत के हजारों रुपए ले चुके हैं. ‘वर्क कंप्लीशन सर्टिफिकेट’ देने से पहले न जाने कितने और रुपए लेंगे.

कहां से आएंगे वे रुपए? क्या तुम दोगे? नहीं न? तब क्या मैं तुम्हारी ईमानदारी को चाटूंगा? बोलो, क्या काम आएगी ऐसी वह ईमानदारी? ‘‘मुस्ताक मियां, मुझे ईमानदारी बन कर बरबाद नहीं होना है. मुझे तो हर हाल में पैसा कमाना है. याद रखना, ऐसा करने से तुम्हें भी कोई फायदा नहीं होने वाला है.’’ मुस्ताक ने जवाब देने के बजाय चुप रहना ही बेहतर समझा. ठेकेदार ने मन ही मन सोचा कि मुस्ताक को उस के तर्कों के सामने हार माननी ही पड़ेगी. आखिर कब तक नहीं मानेगा? उसे भूखा थोड़े ही मरना है. अपने लिए एक पैग और तैयार करते हुए ठेकेदार ने मुस्ताक से कहा, ‘‘तुम ने जवाब नहीं दिया.’’ ‘‘मैं मजबूर हूं साहब,’’ मुस्ताक ने धीरे से कहा. ‘‘मुस्ताक मियां, मजबूरी की बात कर के मुझे बेवकूफ मत बनाओ.

मैं जानता हूं कि तुम जैसे गरीब तबके के लोगों की नीयत बहुत गंदी होती है. तुम्हें हर चीज में अपना हिस्सा चाहिए. ठीक है, वह भी तुम्हें दूंगा और पूरा दूंगा. ‘‘इसीलिए तो तुम लोग सच्चे और ईमानदार बनने का नाटक करते हो. घबराओ मत, मैं भी जबान का पक्का हूं, जो कह दिया, सो कह दिया.’’ ठेकेदार अपनी जगह से उठ खड़ा हुआ. उस ने अपना दायां हाथ मुस्ताक के कंधे पर रख दिया. इस तरह वह उस का यकीन जीतना चाहता था. मुस्ताक को चुप देख कर ठेकेदार ने कहा, ‘‘पुल के गिरने वाली बात को अपने मन से निकाल दो. अगर यह पुल गिर भी गया, तब भी न तो मेरा कुछ बिगड़ेगा और न ही तुम्हारा. ‘‘मेरे पास तो अपनी 2 कारें हैं, इसलिए मैं कभी भी रेलगाड़ी में नहीं बैठूंगा. रही बात तुम्हारी, तो तुम्हारे पास इतना पैसा ही नहीं होता कि तुम रेल में बैठ कर सफर करो.’’

ठेकेदार को अचानक महसूस हुआ कि वह मुस्ताक के सामने कुछ ज्यादा ही झुक गया है. मुस्ताक इस बात को उस की कमजोरी मान कर उस पर हावी होने की कोशिश जरूर करेगा, इसलिए उस ने अपना हाथ मुस्ताक के कंधे से दूर किया. फिर अपने लहजे को कुछ कठोर बनाते हुए ठेकेदार ने कहा, ‘‘और अगर अब भी तुम यह काम नहीं करना चाहते, तो कल से तुम्हारी छुट्टी. और कोई आ जाएगा यह काम करने के लिए. कोई कमी नहीं है यहां कारीगरों की. अब जाओ, मेरा सिर मत खाओ.’’ ऐसा कहते हुए ठेकेदार बेफिक्र हो कर फिर से अपने बिस्तर पर जा बैठा और प्लेट से चिकन का टुकड़ा उठा कर आंखें बंद कर के चबाने लगा. ‘‘तो ठीक है साहब, कल से आप किसी और कारीगर को बुला लें.’’ अचानक मुस्ताक मियां के मुंह से निकले इन शब्दों को सुन कर ठेकेदार को ऐसा लगा, मानो उस के गालों पर कोई तड़ातड़ तमाचे जड़ रहा हो. उस की आंखें अपनेआप खुल गईं. उस ने देखा कि मुस्ताक वहां नहीं था. उस के लौटते कदमों की दूर होती आवाज साफ सुनाई पड़ रही थी.

 लेखक- रामकुमार आत्रेय

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