फंदे पर लटकी मोहब्बत

कानपुर शहर से 30 किलोमीटर दूर बेला-बिधूना मार्ग पर एक गांव है-कंजती. कंजती गांव कानपुर देहात जनपद के चौबेपुर थाना अंतर्गत आता है. इसी गांव में रहने वाले सुनील की बेटी सोनी शिवली में स्थित ताराचंद्र इंटर कालेज में पढ़ती थी. इस कालेज में लड़केलड़कियां साथ पढ़ते थे. सोनी के साथ उसी की कक्षा में शिववीर भी पढ़ता था.

शिववीर धनपत का बेटा था. वह सोनी के घर के पास ही रहता था. शिववीर पढ़ने में होशियार था. जब वह 8वीं कक्षा में पढ़ता था, तभी उस की दोस्ती सोनी से हो गई थी. गंभीर प्रवृत्ति का शिववीर सोनी को इतना अच्छा लगता था कि उस का दिल चाहता था कि हर घड़ी वह उसी के साथ रहे. शायद उस का यही लगाव जल्दी ही प्यार में बदल गया. शिववीर को भी सोनी अच्छी लगती थी. वैसे तो क्लास में और भी लड़कियां थीं, लेकिन शिववीर को सोनी सब से अलग दिखती थी.

जैसे ही दोनों को लगा कि वे एकदूसरे से प्यार करने लगे हैं, अन्य प्रेमियों की तरह उन्होंने भी साथ जीनेमरने की कसमें खा लीं. उसी बीच एक दिन सोनी के पिता ने उसे बुला कर कहा, ‘‘पता चला है कि तू किसी जाटव के लड़के के साथ घूमतीफिरती है. तुझे पता नहीं कि हम यादव हैं. यादव और जाटव का कोई जोड़ नहीं, इसलिए तू उस से दूर ही रह.’’

पिता की बातें सुन कर सोनी सन्न रह गई. जाति की बात तो उस ने सोची ही नहीं थी. बस, शिववीर उसे अच्छा लगता था, इसलिए वह उसे प्यार करने लगी थी. अब उस की समझ में आया कि प्यार भी जाति पूछ कर किया जाता है. वह सोच में पड़ गई कि अब क्या होगा.

अगले रोज शिववीर कालेज में मिला तो उस ने उसे पिता की चेतावनी के बारे में बताया. शिववीर ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘प्यार करने वालों की राह आसान नहीं होती सोनी. हमें मजबूत बनना होगा. तभी हमें मंजिल मिलेगी.’’

सोनी को लगा कि शिववीर सब संभाल लेगा. लेकिन 8वीं पास करतेकरते सोनी और शिववीर के प्यार की चर्चा गांव वालों तक पहुंच गई थी. इस के बाद गांव वाले सुनील से कहने लगे कि वह अपनी बेटी पर नजर रखें, वरना वह नाक कटा कर रहेगी.

सुनील को लगा कि गांव वाले सच कह रहे हैं, इसलिए उस ने सोनी की पढ़ाई पर रोक लगा दी. जबकि शिववीर पढ़ता रहा. सुनील का सोचना था कि शिववीर से अलग हो कर सोनी उसे भूल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. दोनों लगातार मिलते रहे. जब इस बात की जानकारी सुनील को हुई तो उसे गहरा आघात लगा. उस ने बेटी को डांटा कि अगर उस ने उस जाटव के लड़के से मिलना नहीं छोड़ा, तो सख्त रुख अपनाना पड़ेगा.

 

गांव में सुनील की बेटी की आशिकी चर्चा का विषय बनती जा रही थी. लेकिन सुनील को ही नहीं, पूरे गांव को चिंता थी कि अगर यादव की बेटी जाटव के साथ भाग गई, तो उन की बिरादरी पर कलंक लग जाएगा. सुनील पर गांव वालों का दबाव बढ़ने लगा कि वह अपनी बेटी को संभाले.

सोनी को जब पता चला कि उसे शिववीर से दूर करने की साजिश रची जा रही है तो वह घबरा गई. लेकिन उस के इरादे कमजोर नहीं पड़े. उस ने तय कर लिया कि कुछ भी हो, वह किसी भी कीमत पर शिववीर को नहीं छोड़ेगी.

इस के बाद वह बागी होती गई. एक दिन उस ने अपनी मां संतोषी से खुल कर कह दिया, ‘‘आखिर क्या कमी है शिववीर में? दिखने में भी अच्छा है. पढ़ाई में भी ठीक है. सब से बड़ी बात तो यह है कि वह मुझे प्यार करता है.’’

बेटी की बात सुन कर संतोषी सन्न रह गई. उसे लगता था कि अभी बेटी छोटी है. डांटनेफटकारने से रास्ते घर आ जाएगी. लेकिन बेटी तो बहुत आगे निकल चुकी थी. तब मां ने सोनी को डांटा, ‘‘एक जाटव के लड़के के साथ तेरी शादी कभी नहीं हो सकती. समाज में रहने के लिए उस के नियमों को मानना पड़ता है.’’

लेकिन सोनी ने तय कर लिया था कि वह किसी की नहीं मानेगी. वह वही करेगी जो उस का दिल चाहता है. दूसरी ओर शिववीर के पिता धनपत को पता नहीं था कि वह यादव की बेटी से प्यार करता है. लेकिन जब इस बात की जानकारी उन्हें हुई तो उन्होंने उसे समझाया कि वह जो कुछ कर रहा है, वह ठीक नहीं है.

आज भी समाज में ऊंचनीच की दीवार कायम है. अगर किसी ने उस दीवार को तोड़ने की कोशिश की है तो उस के साथ बुरा ही हुआ है.

धनपत बेटे के लिए परेशान रहने लगा था, उसे डर था कि यादव जाति के लोग उसे कोई नुकसान न पहुंचा दें. उसे शिववीर के सिर पर खतरा मंडराता नजर आया तो वह उस पर नजर रखने लगा. ऐसे में सोनी ने जब शिववीर से पूछा कि उस ने भविष्य के बारे में क्या सोचा है तो उस ने कहा, ‘‘हम समाज की बेडि़यों से बंधे हैं. अगर यह समाज हमें साथ जीने नहीं देगा तो हमें साथ मरने से तो नहीं रोक सकता.’’

‘‘मरने की बात कहां से आ गई शिववीर? मैं अभी जीना चाहती हूं, वह भी तुम्हारे साथ.’’ सोनी बोली.

शिववीर ने उसे समझाया कि जीना तो वह भी चाहता है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है. तब सोनी ने कहा, ‘‘चलो, हम घर छोड़ कर भाग चलते हैं.’’

तभी शिववीर ने कहा, ‘‘नहीं, ऐसा करने से दोनों के घर बरबाद हो जाएंगे. हम अपनी खुशियों के लिए अपने घर वालों की खुशियां नहीं छीन सकते. सोनी, हमारे सामने जो हालात हैं, उन्हें देख कर यही लगता है कि अब हमारे सामने एक ही रास्ता है कि हम मर कर सभी को दिखा दें कि हमारा प्यार सच्चा था. हमें मिलने से कोई नहीं रोक सका.’’

इधर सोनी पर घर वालों की बंदिशें इतनी बढ़ चुकी थीं कि वह परेशान रहने लगी थी. एक दिन उस ने शिववीर को फोन कर के बताया, ‘‘शिव, मुझे तो लगता है कि हम कभी नहीं मिल पाएंगे. क्योंकि घर वाले मेरी शादी की बात कर रहे हैं.’’

शिववीर ने सोचा कि अब उसे कोई निर्णय ले ही लेना चाहिए. समाज की पाबंदियों की वजह से जीवन के प्रति उस की उदासीनता बढ़ रही थी. उस के पास न तो ऐसे कोई साधन थे और न ही हिम्मत कि वह अपनी प्रेमिका को कहीं दूर ले जा कर अपना आशियाना बसा ले.

ऐसे में उस के सामने एक ही रास्ता था कि वह प्रेमिका के साथ मौत को गले लगा ले. ताकि इस जहान में न सही, उस जहान में तो मिल सके. वहां उन्हें रोकने के लिए न तो समाज होगा और न ही ऊंचनीच की कोई दीवार.

एक शाम गांव के बाहर रवि के बगीचे में दोनों का आमनासामना हुआ. बातचीत के दौरान सोनी ने पूछा, ‘‘शिववीर, क्या सोचा है तुम ने? क्योंकि अब मैं बंदिशों से परेशान हो गई हूं. घर वाले मुझ से काफी नाराज हैं.’’

‘‘सोनी, हम ने साथ जीनेमरने की कसमें खाई थीं. अब तक हमारी समझ में यह आ गया है कि हम साथसाथ जी नहीं सकते. लेकिन हम साथसाथ इस जालिम दुनिया को अलविदा तो कर ही सकते हैं.’’

‘‘शिववीर, मैं ने तुम्हें जीवन भर साथ निभाने का वचन दिया है, इसलिए पीछे नहीं हटूंगी. लेकिन मेरी इच्छा है कि मैं सुहागन हो कर मरूं. अगर हम ने इस जन्म में शादी नहीं की तो अगले जन्म में भी साथ नहीं रह सकेंगे.’’

शिववीर ने उस का हाथ पकड़ कर कहा, ‘‘तुम जैसा चाहती हो, वैसा ही होगा. मरने से पहले हम शादी कर लेंगे.’’

इधर परेशान सुनील ने अपनी बेटी सोनी की शादी बिल्हौर थाना क्षेत्र के धंसी निवादा रहने वाले मेवाराम यादव के बेटे अमर के साथ तय कर दी. 20 मार्च को तिलक और 30 मार्च, 2021 को शादी की तारीख भी तय हो गई. इस के बाद वह शादी की तैयारी में जुट गया.

सोनी को अपनी शादी की बाबत पता चला तो वह परेशान हो उठी. उस ने शादी तय होने और 30 मार्च को बारात आने की जानकारी शिववीर को दी तो वह भी परेशान हो उठा. उस ने सोनी को समझाया भी. लेकिन सोनी ने साफ कह दिया कि वह दुलहन तो बनेगी, लेकिन किसी और की नहीं, केवल अपने मन के मीत की.

सुनील बेटी की शादी धूमधाम से करना चाहता था. घर में खुशी का माहौल था. घर में नातेरिश्तेदारों का आना शुरू हो गया था. मंडप भी गड़ गया था और मंडप के नीचे मंगल गीत गाए जाने लगे थे. सोनी की काया को निखारने के लिए उस के शरीर पर उबटन लगाया जाने लगा था.

28 मार्च, 2021 को होली का त्यौहार था. रात 10 बजे होली जलाई गई. रात 12 बजे जब घर के लोग सो गए तो सोनी ने शिववीर को फोन किया और पूरी तैयारी के साथ उसे गांव के बाहर शीतला देवी के मंदिर पर मिलने को कहा.

उसी रात शिववीर घर से निकल कर शीतला देवी मंदिर पहुंच गया, जहां सोनी उस का इंतजार कर रही थी. रात में ही उन्होंने मां शीतला को साक्षी मान कर मंदिर में शादी कर ली. शिववीर ने सोनी की मांग भर कर उसे पत्नी बना लिया.

रात भर दोनों एकदूसरे की बांहों में समाए रहे. रात का अंधेरा और तारे उन की मोहब्बत के गवाह बने.

सुबह 4 बजे शिववीर ने कहा, ‘‘सोनी, अब हमें लंबे सफर पर चलना होगा.’’

इस के बाद सोनी और शिववीर कमल कटियार के खेत पहुंचे. खेत के किनारे नीम का पेड़ था. इस पेड़ पर दोनों चढ़ गए. सामान को उन्होंने 2 शाखाओं के बीच रखा, फिर रस्सी का फंदा गले में डाल कर दोनों झूल गए. कुछ देर में ही उन के प्राणपखेरू उड़ गए.

सुबह 7 बजे कंजती गांव का आशू कटियार दिशामैदान को गया तो उस ने नीम के पेड़ पर रस्सी के सहारे प्रेमी युगल को लटकते देखा. वह भाग कर गांव आया और गांव वालों को जानकारी दी. इस के बाद तो कंजती गांव में सनसनी फैल गई. कुछ ही देर में वहां भीड़ जुट गई.

सुनील की बेटी सोनी तथा धनपत का बेटा शिववीर भी अपनेअपने घर से नदारद थे. उन का माथा ठनका. सुनील अपनी पत्नी संतोषी के साथ घटनास्थल पहुंचा. वहां अपनी बेटी सोनी को फांसी के फंदे पर झूलता देख कर वह दहाड़ मार कर रो पड़ा. धनपत भी बेटे की मौत पर आंसू बहाने लगा.

इसी बीच गांव के प्रधान राजेश ने प्रेमी युगल द्वारा जीवनलीला समाप्त करने की सूचना थाना चौबेपुर पुलिस को दे दी. सूचना पाते ही थानाप्रभारी कृष्णमोहन राय पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

मृतका सोनी और मृतक शिववीर कंजती गांव के ही रहने वाले थे. सोनी करीब 21 वर्ष की थी, जबकि शिववीर 22 वर्ष का था. सोनी की मांग में सिंदूर था. देखने से ऐसा लग रहा था कि मरने के पहले दोनों ने शादी कर ली थी.

थानाप्रभारी कृष्णमोहन राय अभी निरीक्षण कर ही रहे थे कि यादव और जाटव बिरादरी के लोगों में कहासुनी होने लगी. तनाव बढ़ता देख श्री राय ने सूचना पुलिस अधिकारियों को दी. सूचना पा कर एसपी (देहात) केशव कुमार चौधरी तथा डीएसपी संदीप सिंह वहां आ गए.

पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया तथा दोनों पक्षों के लोगों को समझा कर शांत किया. इस के बाद उन्होंने फंदे पर लटके दोनों शवों को नीचे उतरवाया. उन्होंने मृतकों के घर वालों से पूछताछ की.

मृतक शिववीर की जामातलाशी ली गई तो उस की जेब से मोबाइल फोन, पैन कार्ड, आधार कार्ड, डेबिट कार्ड तथा 597 रुपए मिले. इस के अलावा पेड़ की डाल पर चुनरी, गमछा, मोबाइल फोन, हाथ घड़ी, 2 जींस, पेड़ के नीचे लेडीज चप्पलें तथा पानी की बोतल मिली. पुलिस ने बरामद सामान को सुरक्षित किया तथा दोनों शवों को पोस्टमार्टम हाउस माती भिजवा दिया.

थाना चौबेपुर पुलिस ने प्रेमी युगल आत्महत्या प्रकरण को जीडी में दर्ज तो किया, लेकिन दोनों की मृत्यु होने से उन्होंने इस प्रकरण की फाइल बंद कर दी. बेटी के गलत कदम से सुनील का सिर झुक गया था. यादव समाज का तिरस्कार उसे भारी पड़ रहा था.

पप्पू यादव के लिए विदेश से आई बुलेटप्रूफ कार, 500 गोलियों को भी दे देगी मात

इन दिनों बौलीवुड से लेकर राजनीति में लौरेंस बिश्नोई गैंग का खौफ मंडरा रहा है. लौरेंस गैंग की तरफ से पहले बौलीवुड के भाईजान सलमान खान को धमकियां मिलने शुरु हुई थी. इस सपोर्ट में राजनेता पप्पू यादव भी आ गए तो उन्हे भी धमकी भरे कौल आने लगे. जिसके बाद उनकी सुरक्षा को लेकर नए कदम उठाए गए और पप्पू यादव के लिए एक बुलेट प्रूफ कार भी तैयार की गई है.

 

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धमकियां मिलने की वजह से पप्पू यादव की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है. उनके लिए एक नई गाड़ी लाई गई है और ये गाड़ी पुलिस कर्मी या राजनेताओं की तरफ से नहीं बल्कि उनके शुभचिंतक दोस्त ने तोहफे में दी है. उनके दोस्त ने 15 दिनों के भीतर इस गाड़ी को विदेश से मंगवाया है. पप्यू यादव के इस दोस्त का नाम प्रकाश है. उनकी दी हुई गाड़ी भी ऐसी है कि उन पर गोलियों का असर नहीं होगा. बुलेट प्रूफ लैंड क्रूजर गाड़ी का नाम है. जिसकी खासियत यही है कि इस गाड़ी पर रौकेट लौन्चर के वार भी असर नहीं करेंगे.

बुलेट प्रूफ लैंड क्रूजर को काफी सुरक्षित गाडियो में एक माना जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस गाड़ी में लीड और पौलीकार्बोरेटेड से तैयार किए गए बुलेट प्रूफ बैलेस्टिक ग्लास का इस्तेमाल किया जाता है. जो किसी भी तरह की बुलेट की गोली से आपको सेफ रखेगा. साथ ही कहा जाए तो ये गाड़ी 500 राउंड गोलियां झेलने की क्षमता है. इस गाड़ी के बाहर और अंदर वाले फ्रेम पर बैलेस्टिक लेयर लगे हुए है.

दोस्त से तोहफे में मिली गाड़ी पर पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को कहना है कि “सरकार को मेरी सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है, लेकिन हमें तो मतलब है. हमें तो परहेज लेना पड़ेगा. अपना कर्म तो करना पड़ेगा. सरकार को फ्रिक नहीं है, लेकिन हमारे दोस्त को हमारी फिक्र है”.

सलमान खान के पास भी है बुलेटप्रूफ निसान कार

पप्पू यादव धमकियों के डर से बुलेट प्रूफ कार ले आएं. तो, भला बौलीवुड के सलमान खान कैसे पीछे रहे जाते. लौरेंस गैंग तो उनकी जान के पीछे पड़ी हुई है. इसलिए घर में तो सुरक्षा टाइट करवाई ही साथ ही,सलमान खान ने भी अपने लिए एक बुलेटप्रूफ निसान एसयूवी (Nissan Patrol SUV) ली. यह एक पेट्रोल वर्जन कार है. गौरतलब है कि सलमान खान ने ये कार विदेश से इंपोर्ट करवाई है, क्योंकि यह कार देश में नहीं मिलती है. ये उनकी सुरक्षा को चारगुना कर देंगी. हालांकि पुलिस ने अपनी सिक्योरिटी टाइट कर रखी है.

जानें क्या है बुलेटप्रूफ कार?

बुलेटप्रूफ कार को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि कार विस्फोट और गोलियों के हमले को झेल पाए. लेकिन हर बुलेटप्रूफ कार एक जैसी नहीं होती है Ballistic Protection वाली नहीं होती है.

Ballistic Protection के तहत B1 से B10 तक रेटिंग मिलती है जो इस बात को बताती है कि कार किस हद तक वार झेल सकती है. आसान भाषा में समझें तो जितनी ज्यादा बैलिस्टिक प्रोटेक्शन रेटिंग उतनी ही ज्यादा कार वार झेलने में सक्षम और मजबूत होगी.

इस तरह की कार को स्टील, एल्यूमिनियम और बहुत ही ज्यादा मजबूत फाइबर जैसे मैटेरियल से तैयार किया जाता है. इसके अलावा गाड़ी में मोटे और मजबूत शीशे लगाए जाते हैं जो गोलियों को अंदर जाने से रोकते हैं. अगर गाड़ी के टायर पर गोली लग भी गई तो भी इन गाड़ियों में फ्लैट टायर तक कुछ दूरी तक चलने की क्षमता होती है.

लगावे लू जब लिपिस्टिक…समेत इन भोजपुरी गानों की बिना नहीं होती है बिहारयूपी में शादियां

भोजपुरी सिनेमा जिस तरह से आगे बढ़ रहा है. उसी तरह से उनके गानें भी दिनों दिन सुपरहिट होते जा रहे हैं. भोजपुरी एक्‍टर खेसारी लाल यादव और एक्‍टर व सिंगर पवन सिंह के गाने तो इस कदर मशहूर है कि कोई भी गांव मोहल्‍ले में ही नहीं दिल्‍ली और मुंबई के पब में भी खूब बजाए जाते हैं. इस तरह के गानों की लिस्ट लंबी है.

साल 2022 में भी ऐसे ही कुछ मजेदार और दमदार गाने रिलीज किए गए, जिन्होंने लोगों को झूमने पर मजबूर किया. साल 2022 में यूट्यूब के ट्रेंडिंग लिस्ट में खेसारी लाल यादव के दो और पवन सिंह के एक गाने ने जगह बनाई. मजेदार बात यह है कि इस लिस्ट में बौलीवुड के एक भी रीमेक गाने का नाम शामिल नहीं है. इस गाने के अलावा भी भोजपुरी सिनेमा के कई गानों के व्यूज मिलियन में रहे हैं .

‘लगावे लू लिपस्टिक’

सिंगर पवन सिंह का गाना ‘लगावे लू लिपस्टिक’ तो खूब सुर्खियों में रहा है. हर पार्टी फंक्शन में भी बजता ही है. ये सभी पार्टियों की जान बन चुका है. इस गाने ने सभी रिकोर्ड्स भी तोड़ डाले थे. जिसके बाद पवन सिंह की अवाज को भी खूब पसंद किया गया था. यह गाना अमेरिका में भी काफ़ी मशहूर हुआ था. पवन सिंह को भोजपुरी सिनेमा में ‘पावरस्टार’ के नाम से जाना जाता है. यह गाना ही उन्‍हें ऊंचाई की बुलंदी तक पहुंचाया. 

‘रातें दिया बुताके’

अकसर भोजपुरी गानों को अश्‍लील माना जाता है लेकिन गांव देहात की शादियों में आज भी शादियों की असली रौनक इन्‍हीं गानों से होती है. रातें दिया बुताके भी भोजपुरी के सुपर हिट गानों में से एक है. इस गाने की खास बात यह है कि इसे पवन सिंह ने गाया है और इसके साथ इसमें डांस भी किया. इस गाने से ही आम्रपाली दुबे और पवन सिंह की स्‍टार जोड़ी हिट हुई थी. ये गाना उनकी फिल्म ‘सत्या’ का है. जिसके लाखों  व्यूज मिले और पौपुलर हुआ. पवन सिंह के साथसाथ इस गाने को इंदु सोनाली और सुमित सिंह चंद्रवंशी ने लिखा है. गाने की कोरियोग्राफिक रामदेवन ने किया है.

‘ले ले आई कोका कोला’

भोजपुरी सिनेमा के अलावा कुछ गानों के मशहूर होने के पीछे यूट्यूब चैनल का भी हाथ है.   ‘ले ले आई कोका कोला’ (Le Le Aayi Coca Cola) गाने को यूट्यूब चैनल से अप्रैल 2022 जारी किया गया था जिस पर अब तक 160 मिलियन्स से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. यह बिहार और यूपी में सबसे ज्यादा बजने वाला गाना है. इस वीडियो में सोना पांडे और खेसारी की कैमिस्ट्री लोगों को पसंद आती है . इस गाने को खुद खेसारी लाल यादव ने गाया है. अभी तक इसे 321 मिलियन व्यूज मिल चुके है.

‘लाल घाघरा’ गाना

‘लाल घाघरा’ गाने को 65 मिलियन से भी ज्यादा बार देखा जा चुका है. सिंगर और एक्‍टर पवन सिंह और शिल्पी की ट्यूनिंग तो इस गाने में खूब पसंद की गई.  भोजपुरी पावर स्टार पवन सिंह का गाना ‘लाल घाघरा’ यूट्यूब पर लगातार वायरल हुआ. ये गाना आते ही सभी पार्टियों की जान बन गया. इस गाने को यूट्यूब पर अब भी लोग लाइक और कमेंट्स मिल रहे हैं.

‘हरी हरी ओढ़नी’ गाना

इस गाने के निर्माता धीरज सिंह हैं. ‘हरी हरी ओढ़नी’ गाने में पवन सिंह के साथ अनुपमा यादव ने अपनी आवाज दी है. बता दें कि गाने को 19 दिन में ही 100 मिलियन का व्यूज मिल चुके थे. गाना चार नवंबर 2022 को रिलीज हुआ था और आज भी बेहद पौपुलर है. बिहार में ये गाना घर घर में शादियों के फंक्शन में बजाया जाता है. इस गाने को कोरियोग्राफर अमित चावला ने किया हैं. इस गाने को सुनने के बाद हर कोई झूमने पर मजबूर हो जाता है, चाहे उसे डांस आता हो या नहीं

‘दो घूंट’ गाना

‘दो घूंट’ गाना खेसारी लाल यादव का गाया हुआ है जिसमें उन्होंने खुद एक्टिंग भी किया है. ये साल 2022 में रिलीज हुआ था. ये गाने 1973 में आई बौलीवुड फ़िल्म ‘झील के उस पार’ के गाने ‘दो घूंट मुझे भी पिला दे शराबी’ का भोजपुरी वर्जन है. जो बौलीवुड में बेहद पौपुलर है.  भोजपुरी में तो सभी गानों को हिला कर रख दिया. इस गानें में खेसारी लाल यादव पुलिस औफ़िसर के किरदार में हैं और नम्रता मल्ला ठुमके लगाती हुई नज़र आ रही हैं. इस गाने में शिल्पी राज ने भी अपनी आवाज दी है. गाने का म्यूज़िक शुभम राज ने दिया है और इसके बोल अजीत मंडल ने लिखे हैं. कोरियोग्राफ़ लक्की विश्वकर्मा ने किया है. रिलीज़ होने के 12 घंटों के अंदर ही इस गाने को 26 लाख 51 हज़ार से ज़्यादा व्यूज़ मिल चुके थे. इस गाने में खेसारी लाल यादव और नम्रता मल्ला की कैमिस्ट्री को फ़ैंस ने काफ़ी पसंद किया था.

सेहत: सैक्स रोगों की अनदेखी न करें

सैक्स से जुड़े रोग आदमी और औरत दोनों में सैक्स के प्रति अरुचि बढ़ाते हैं. इस के साथ ही ये शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह की परेशानियों को भी बढ़ाते हैं.

सैक्स से जुड़े रोग वैवाहिक संबंधों पर सीधा असर डालते हैं. जैसे कोई पार्टनर सैक्स संबंध के लिए मन से तो तैयार होता है, लेकिन उस का शरीर सहयोग करने से इनकार कर देता है. ऐसा अगर बारबार होने लगे तो डिप्रैशन जैसे हालात बन जाते हैं.

मर्दों में सैक्स कमजोरी की कई वजहें होती हैं, जो मानसिक और शारीरिक दोनों हो सकती हैं. पर घबराने की कोई बात नहीं, क्योंकि इन का इलाज सही डाक्टर से हो सकता है. जरूरी यह है कि आप शरमाएं नहीं और माहिर डाक्टर के पास जाएं. वजह, सैक्स रोग ऐसे होते हैं, अगर इन्हें छिपाया गया तो ये अपने साथसाथ पार्टनर की हैल्थ पर भी बुरा असर डाल सकते हैं.

मर्दों में शीघ्रपतन, तनाव, अंग से सफेद पदार्थ गिरना, अंग के आगे दाने होना जैसे सैक्स रोग हो सकते हैं. पर मर्द ज्यादातर उन्हें दबा देते हैं, क्योंकि कई बार उन्हें लगता है कि अगर वे अपने सैक्स रोगों की चर्चा करेंगे, तो यह मर्दाना कमजोरी मानी जाएगी.

इसी डर से वे किसी माहिर डाक्टर की जगह झोलाछाप डाक्टरों या जड़ीबूटी देने वालों के पास चले जाते हैं, जहां उन्हें फायदे की जगह नुकसान हो जाता है. कई बार लोग मैडिकल स्टोर से सीधे ही दवा ले कर खा लेते हैं. इस में भी नुकसान का खतरा होता है.

औरतों के सैक्स रोग

अपने साथी के साथ सैक्स संबंध बनाने के दौरान अगर कम इच्छा, लगातार दर्द का सामना करना पड़ रहा है, तो इस की वजह सैक्स रोग हो सकते हैं. मर्दों के मुकाबले औरतों को ज्यादा सैक्स से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

औरतों को होने वाली सैक्स समस्याएं किसी भी उम्र में कुछ समय से ले कर उम्रभर तक भी साथ रह सकती हैं. इस वजह से उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

औरतों, इस में लड़कियां भी शामिल हैं, को होने वाले सैक्स रोगों की वजहों को 2 भागों में बांटा जा सकता है, पहला शारीरिक और दूसरा मनोवैज्ञानिक.

अगर कोई औरत पहले किसी शारीरिक या यौन शोषण से जूझ चुकी है, तो उसे सैक्स करने के दौरान डर रहता है. इसी वजह से उसे सैक्स समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

अगर किसी औरत को अपना पार्टनर पसंद नहीं आता है, तो उस की वजह से भी वह सैक्स संबंधित समस्याओं का सामना कर सकती है. उसे अपने पार्टनर के साथ सैक्स करने की इच्छा नहीं होती. इस वजह से उसे मानसिक बीमारियां हो सकती हैं. जब कोई डिप्रैशन से जूझता है, तो उस की सैक्स संबंधों में दिलचस्पी खत्म होने लगती है.

 रोग की शारीरिक वजह

अगर कोई औरत लगातार एंडोमेट्रियोसिस, डिंब ग्रंथि के सिस्ट, गर्भाशय फाइब्रोएड और अंग से बदबूदार पानी निकलने की बीमारियों से जूझ रही है, तो उसे सैक्स करने के दौरान दर्द होगा. इस से सैक्स रोग बढ़ सकते हैं.

औरतों में सब से ज्यादा हार्मोनल बदलाव होता है, जिस की वजह से उन्हें सैक्स संबंधित रोगों का ज्यादा सामना करना पड़ता है. इस में उन्हें अंग में सूखापन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

कम एस्ट्रोजन का लैवल भी सैक्स पर गलत असर डालता है. मीनोपौज, सर्जरी और गर्भावस्था हार्मोन के लैवल पर असर डालती हैं.

इस के साथसाथ मधुमेह, गठिया, मल्टीपल स्कैलेरोसिस और दिल की बीमारी भी सैक्स की ताकत पर बुरा असर डालती हैं. नशीली दवाओं की लत या शराब ज्यादा पीने से भी औरतों को सैक्स रोग हो सकते हैं.

अगर कोई औरत अपने अंग में सूखापन महसूस करती है, तो यह भी सैक्स रोग का लक्षण हो सकता है. अंग का सूखापन स्तनपान या मीनोपौज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाब के चलते हो सकता है, जो कुछ समय के लिए होता है. लेकिन अगर इस ओर ध्यान न दिया जाए, तो यह जिंदगीभर भी रह सकता है.

न छिपाएं, डाक्टर को बताएं

सैक्स रोगों को छिपाएं नहीं, बल्कि उन के बारे में अपने डाक्टर को बताएं. आजकल मर्दाना और जनाना दोनों ही तरह के सैक्स रोगों के जानकार डाक्टर सही सलाह देने के लिए आसानी से मिल जाते हैं.

झोलाछाप डाक्टरों से बचें, क्योंकि वे आप को सही जानकारी देने के बजाय उलझाने का काम करते हैं. मनोवैज्ञानिक वजहों को किसी माहिर डाक्टर से बात कर के सुलझा सकते हैं. अपने साथी को अपनी परेशानी जरूर बताएं. अगर कोई शारीरिक रोग है, तो डाक्टर दवाएं दे कर उन्हें दूर करते हैं.

सैक्स के दौरान दर्द को कम करने के कई उपाय होते हैं. संतुलित आहार भी जरूर लें, ताकि शरीर अंदर से मजबूत बन सके. इस का भी सैक्स लाइफ पर असर पड़ता है.

Boyfriend के इन 5 सवालों से कतराती हैं लड़कियां

कहा जाता है कि लड़कियों को समझ पाना बहुत मुश्किल काम होता हैं, जो कि एक हद तक सही बात हैं. क्योंकि लड़कियों के मन में कब क्या चल रहा होता है, कोई नहीं जान पाता है. लेकिन कुछ बातें ऐसी होती हैं जो हर लड़की के मन में छिपी हुई होती हैं और लड़कियां कतराती है कि कहीं उनका बौयफ्रेंड उनसे ये सवाल ना पूछ ले.

जी हां, आज हम आपको उन्हीं कुछ सवालों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका जवाब देने से लड़कियां कतराती हैं और चाहती हैं कि उनका बौयफ्रेंड उनसे कभी भी ये सवाल ना पूछे. तो आइये जानते हैं इन सवालों के बारे में.

क्या मैं तुम्हारा पहला प्यार हूं?

हर लड़का अपनी गर्लफ्रैंड से यह सवाल तो जरूर पूछना चाहता है कि क्या वह उसका पहला प्यार है. मगर लड़कियों को अपने बौयफ्रैंड से पहले कोई और जरूर पसंद होता है, चाहे वह उसका क्रश ही क्यों न हो.

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क्या तुम मेरी मौम के साथ शौपिंग पर जाओगी?

हर लड़का चाहता है कि उसकी गर्लफ्रैंड उसकी मौम के साथ शौपिंग पर जरूर जाए, ताकि वह इसी बहाने उन्हें अच्छे से जान लें. मगर लड़कियां अपने बौफ्रैंड की मौम के साथ शौपिंग पर जाने से बहुत डरती है.

तुम्हारे पैरेंट्स मुझे पसंद करेंगे या नहीं?

अपनी गर्लफ्रैंड के पेरेंट्स से मिलना लड़कों के लिए सबसे मुश्किल काम होता है और वह पहले ही अपने पार्टनर से यह सवाल करने लगते हैं. मगर लड़कियां इस बात को लेकर खुद इतनी टेंशन में होती है कि वह सवाल से बचना चाहती हैं.

मेरी फ्रैंड या बहन कितनी क्यूट है न!

हर लड़का अपनी गर्लफ्रैंड से यह जरूर पूछता है कि उसकी बहन या दोस्त उसे कैसे लगती है. मगर लड़कियां ऐसी बातों से दूर रहना ही पसंद करती हैं.

तुम अब किसी दूसरे लड़के को डेट तो नहीं करोगी?

लड़कों के मन में हमेशा यह डर रहता है कि उसकी पार्टनर किसी बात को लेकर गुस्सा न हो जाए. ऐसे में अपनी इस इनसिक्योरटी के चलते अपनी गर्लफ्रैंड से यह सवाल पूछ बैठते हैं.

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मैट्रेमोनियल साइट से लड़की को डेट किया, लेकिन अब वो मेरे साथ सिर्फ पैसों के लिए है, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 31 साल है. मैं गुड़गांव में नौकरी करता हूं. मैं एक मैट्रिमोनियल साइट पर एक लड़की से
मिला और उस के साथ डेट पर भी गया. वह लड़की मुझे पसंद है, पर उस की एक आदत मुझे अच्छी नहीं लगती है कि वह हरदम मेरे पैसे खर्चवाने पर जोर देती रहती है. उस का एक ही मकसद होता है कि किसी तरह मुझ से कैश या गिफ्ट में कुछ न कुछ ले ले. मुझे इस बात से बड़ी कोफ्त होती है और कभीकभार लगता है कि वह मेरे साथ बस मेरे पैसों के लिए है. इस बात से मैं दिमागीतौर पर परेशान रहने लगा हूं. आप ही बताइए कि मैं क्या करूं?

जवाब

कुछ लड़कियां समझती हैं कि बौयफ्रैंड के पैसों से मजे करो. हालांकि इस के एवज में वे काफीकुछ देती भी हैं, लेकिन आप अगर वाकई शादी को ले कर सीरियस हैं, तो उस लड़की को समझाएं कि यह हलकापन न दिखाए. अभी तो ठीक है, पर शादी के बाद भी अगर उस की सोच यही रही तो आप और ज्यादा परेशान हो जाएंगे, इसलिए सोचसमझ कर फैसला लें और उसे भी समझाएं. इस पर भी न माने या न सुधरे तो किनारा कर लें, क्योंकि फिजूलखर्च और पैसों की अहमियत न समझाने वाली लड़कियां घरगृहस्थी को सलीके से नहीं चला पाती हैं.

गलत फैसला : सुखराम चंदा गांव पहुंचा तो क्या देखा

रौयल स्काई टावर को बनते हुए 2 साल हो गए. आज यह टावर शहर के सब से ऊंचे टावर के रूप में खड़ा है. सब से ऊंचा इसलिए कि आगरा शहर में यही एक 22 मंजिला इमारत है. जब से यह टावर बन रहा है, हजारों मजदूरों के लिए रोजीरोटी का इंतजाम हुआ है. इस टावर के पास ही मजदूरों के रहने के लिए बनी हैं झोंपड़ियां.

इन्हीं झोंपड़ियों में से एक में रहता है सुखराम अपनी पत्नी चंदा के साथ. सुखराम और चंदा का ब्याह 2 साल पहले ही हुआ था. शादी के बाद ही उन्हें मजदूरी के लिए आगरा आना पड़ा. वे इस टावर में सुबह से शाम तक साथसाथ काम करते थे और शाम से सुबह तक का समय अपनी झोंपड़ी में साथसाथ ही बिताते थे. इस तरह एक साल सब ठीकठाक चलता रहा.

एक दिन चंदा के गांव से चिट्ठी आई. चिट्ठी में लिखा था कि चंदा के एकलौते भाई पप्पू को कैंसर हो गया है और उन के पास इलाज के लिए पैसे का कोई इंतजाम नहीं है.

सुखराम को लगा कि ऐसे समय में चंदा के भाई का इलाज उस की जिम्मेदारी है, पर पैसा तो उस के पास भी नहीं था, इसलिए उस ने यह बात अपने साथी हरिया को बता कर उस से सलाह ली.

हरिया ने कहा, ‘‘देखो सुखराम, गांव में तुम्हारे पास घर तो है ही, क्यों न घर को गिरवी रख कर बैंक से लोन ले लो. बैंक से लोन इसलिए कि घर भी सुरक्षित रहेगा और बहुत ज्यादा मुश्किल का सामना भी नहीं करना पड़ेगा.’’

कहते हैं कि बुरा समय जब दस्तक देता है, इनसान भलेबुरे की पहचान नहीं कर पाता. यही सुखराम के साथ हुआ. उस ने हरिया की बात पर ध्यान न दे कर यह बात ठेकेदार लाखन को बताई.

लाखन ने उस से कहा, ‘‘क्यों चिंता करता है सुखराम, 20,000 रुपए भी चाहिए तो ले जा.’’

सुखराम ने चंदा को बिना बताए लाखन से 20,000 रुपए ले लिए और चंदा के भाई का इलाज शुरू हो गया.

चंदा समझ नहीं पा रही थी कि इतना पैसा आया कहां से, इसलिए उस ने पूछा, ‘‘इतना पैसा आप कहां से लाए?’’

तब सुखराम ने लाखन का गुणगान किया. जब कुछ दिनों बाद पप्पू चल बसा, तो उस के अंतिम संस्कार का इंतजाम भी सुखराम ने ही किया.

इस घटना के कुछ ही दिनों के बाद सुखराम की मां भी चल बसीं. वे गांव में अकेली रहती थीं, इसलिए पड़ोसी ही मां का सहारा थे. पड़ोसियों ने सुखराम को सूचित किया.

सुखराम चंदा के साथ गांव लौटा और मां का अंतिम संस्कार किया.  जिंदगीभर गांव में खाया जो था, इसलिए खिलाना भी जरूरी समझा.

मकान सरपंच को महज 15,000 रुपए में बेच दिया. तेरहवीं कर के आगरा लौटने तक सुखराम के सभी रुपए खर्च हो चुके थे, क्योंकि गांव में मां का भी बहुत लेनदेन था.

इतिहास गवाह है कि चक्रव्यूह में घुसना तो आसान होता है, पर उस में से बाहर निकलना बहुत मुश्किल. जिंदगी के इस चक्रव्यूह में सुखराम भी बुरी तरह फंस चुका था. जैसे ही वह आगरा लौटा, शाम होते ही लाखन शराब की बोतल हाथ में लिए चला आया.

वह सुखराम से बोला, ‘‘सुखराम, मुझे अपना पैसा आज ही चाहिए और अभी…’’

सुखराम ने उसे अपनी मजबूरी बताई. वह गिड़गिड़ाया, पर लाखन पर इस का कोई असर नहीं हुआ. वह बोला, ‘‘तुम्हारी परेशानी तुम जानो, मुझे तो मेरा पैसा चाहिए. जब मैं ने तुम्हें पैसा दिया है, तो मु   झे वापस भी चाहिए और वह भी आज ही.’’

सुखराम और चंदा की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. वे उस के सामने मिन्नतें करने लगे.

लाखन ने कुटिलता के साथ चंदा की ओर देखा और बोला, ‘‘ठीक है सुखराम, मैं तु   झे कर्ज चुकाने की मोहलत तो दे सकता हूं, लेकिन मेरी भी एक शर्त है. हफ्ते में एक बार तुम मेरे साथ शराब पियोगे और घर से बाहर रहोगे… उस दिन… चंदा के साथ… मैं…’’

इतना सुनते ही सुखराम का चेहरा तमतमा उठा. उस ने लाखन का गला पकड़ लिया. वह उसे धक्के मार कर घर से बाहर निकाल देना चाहता था, लेकिन क्या करता? वह मजबूर था. चंदा चाहती थी कि उस की जान ले ले, मगर वह

खून का घूंट पी कर रह गई. उस के पास भी कोई दूसरा रास्ता नहीं था. जब लाखन नहीं माना और उस ने सुखराम के साथ मारपीट शुरू कर दी तो चंदा लाखन के आगे हाथ जोड़ कर सुखराम को छोड़ने की गुजारिश करने लगी.

लाखन ने सुखराम की कनपटी पर तमंचा रख दिया तो वह मन ही मन टूट गई. उस की आंखों से आंसू बहने लगे, इसलिए कलेजे पर पत्थर रख कर उस ने लाखन को अपने शरीर से खेलने की हामी भर दी.

लाखन बहुत खुश हुआ, क्योंकि चंदा गजब की खूबसूरत थी. उस का जोबन नदी की बाढ़ की तरह उमड़ रहा था. उस की आंखें नशीली थीं. यही वजह थी कि पिछले 2 साल से लाखन की बुरी नजर चंदा पर लगी थी.

बुरे समय में पति का साथ देने के लिए चंदा ने ठेकेदार लाखन के साथ सोना स्वीकार किया और सुखराम की जान बचाई.

सुखराम ने उस दिन से शराब को गम भुलाने करने का जरीया बना लिया. इस तरह हवस के कीचड़ में सना लाखन चंदा की देह को लूटता रहा. जब सुखराम को पता चला कि चंदा पेट से है, तो उस ने चंदा से बच्चा गिराने की बात की, पर वह नहीं मानी.

सुखराम बोला, ‘‘मैं उस बच्चे को नहीं अपना सकता, जो मेरा नहीं है.’’

चंदा ने उसे बहुत समझाया, पर वह न माना. चंदा ने भी अपना फैसला सुना दिया, ‘‘मैं एक औरत ही नहीं, एक मां भी हूं. मैं इस बच्चे को जन्म ही नहीं दूंगी, बल्कि उसे जीने का हक भी दूंगी.’’

इस बात पर दोनों में झगड़ा हुआ. सुखराम ने कहा, ‘‘ठेकेदार के साथ सोना तुम्हारी मजबूरी थी, पर उस के बच्चे को जन्म देना तो तुम्हारी मजबूरी नहीं है.’’

चंदा ने जवाब दिया, ‘‘तुम्हारा साथ देने के लिए मैं ने ऐसा घोर अपराध किया था, लेकिन अब मैं कोई गलती नहीं करूंगी… जो हमारे साथ हुआ, उस में इस नन्हीं सी जान का भला क्या कुसूर? जो भी कुसूर है, तुम्हारा है.’’

इस के बाद चंदा सुखराम को छोड़ कर चली गई. वह कहां गई, किसी को नहीं मालूम, पर आज सुखराम को हरिया की कही बात याद आई. वह सिसक रहा था और सोच रहा था कि काश, उस ने गलत फैसला न लिया होता.

एक बार फिर : लिवइन का लफड़ा

आरोही ने रात 8 बजे औफिस सेनिकलते ही जयको फोन किया, ‘‘मैं अभी निकली हूं, तुम घर पहुंच गए?’’‘‘हां, जल्दी फ्री हो गया था, सीधे घर ही आ गया. औफिस नहीं आया फिर.’’

‘‘डिनर का क्या करना है? कुछ बना लोगे या और्डर करना है? मु  झे भी घर आतेआते 1 घंटा तो लग ही जाएगा.’’‘‘और्डर कर दो यार, कुछ बनाने का मन नहीं… और हां आइसक्रीम भी खत्म हो गई है, वह भी और्डर कर दो.’’आरोही ने फोन रख दिया, दिन काफी व्यस्त रहा था, शारीरिक और मानसिक रूप से काफी थक गई थी. अभी भी दिमाग में बहुत कुछ चल रहा था…

जय और आरोही एक ही कंपनी में अलगअलग डिवीजन में काम करते हैं. आरोही पुणे की है और मुंबई में 2 साल से एक बड़ी कंपनी में जय से बड़ी पोस्ट पर है और बहुत अच्छी तरह अपनी लाइफ जी रही है. जय के साथ 1 साल से लिव इन रिलेशनशिप में रह रही है.

दोनों एक मीटिंग में मिले थे, एक ही बिल्डिंग में दोनों के औफिस हैं, बस अलगअलग हैं, जय दिल्ली का है. दोनों एकदूसरे के साथ खुशीखुशी फ्लैट शेयर कर रहे हैं और काम भी मिलबांट कर करते हैं.दोनों के परिवार वालों को नहीं पता कि दोनों लिव इन में रहते हैं.

आरोही का जय का मस्त स्वभाव बहुत अच्छा लगता है. जय को आरोही का जिम्मेदार स्वभाव भाता है. दोनों एकदूसरे से बिलकुल अलग हैं पर एकदूसरे को बहुत पसंद करते हैं. मगर आजकल जय के बारे में जितनी गहराई से सोचती जा रही थी, कहीं कुछ खल रहा था, जिस पर पहले कभी ध्यान नहीं गया था…

तभी उस की मम्मी रेखा का फोन आ गया, दिन में एक बार आरोही की अपनी फैमिली से बात हो ही जाती. बात कर के आरोही ने डिनर और्डर कर दिया. वह जब घर पहुंची, जय कोई मूवी देख रहा था. फ्रैश हो कर आरोही भी लेट गई. इतने में खाना भी आ गया.आरोही ने कहा, ‘‘चलो जय, खाना लगा लें?’’

‘‘प्लीज, तुम ही लगा लो, मूवी छोड़ने का मन ही नहीं कर रहा है,’’ जय ने कहतेकहते आरोही को फ्लाइंग किस दे दिया. आरोही मुसकरा दी. दोनों ने डिनर साथ किया.

मूवी खत्म होने पर जब जय सोने आया, आरोही लेटीलेटी फोन पर ही कुछ देख रही थी. जय ने आरोही के पास लेट कर अपनी बांहों में भर लिया.आरोही भी उस के सीने से लगती हुई बोली, ‘‘कैसा था

दिन?’’‘‘बोर.’’आरोही चौंकी, ‘‘क्यों?’’‘‘बहुत काम करना पड़ा.’’

‘‘तो इस में बुराई क्या है?’’‘‘अरे यार, मेरा मन ही नहीं करता कोई काम करने का,

मन होता है कि बस आराम करूं. घर में भी सब मु  झे कामचोर कहते हैं,’’

जय ने हंसते हुए बताया और आगे शरारत से कहा, ‘‘असल में बस मन यही होता है कि या आराम करूं या तुम्हें प्यार.’’‘‘पर डियर, खाली आराम या मु  झे प्यार करने से तो लाइफ नहीं चलेगी न?’’

‘‘चल जाएगी बड़े आराम से… देखो, तुम्हारी सैलरी मु  झ से बहुत ज्यादा है, इस में हमारा घर आसानी से चल सकता है और तुम हो भी अपने पेरैंट्स की इकलौती संतान, वहां का भी सब तुम्हारा है. चलो, शादी कर लेते हैं. मजा आ जाएगा,’’

कहतेकहते जय उस के थोड़ा और नजदीक आ गया.2 युवा दिलों की धड़कनें जब तेज होने लगीं तो बाकी बातों की फिर जगह न रही. सब भूल दोनों एकदूसरे में खोते चले गए. अगले कुछ दिन तो रोज की तरह ही बीते, दोनों पतिपत्नी तो नहीं थे पर लिव इन में रहने वाले रहते तो पतिपत्नी की ही तरह हैं.

रिश्ते पर मुहर नहीं लगी होती है पर रिश्ता तो होता ही है.कभी नोक  झोंक भी होती, फिर रूठनामनाना भी होता, पर कुछ बातें आरोही को आजकल सचमुच खल रही थीं, बातें तो छोटी थीं पर उन पर ध्यान तो जा ही रहा था. हर तरह के खर्च आरोही के ही जिम्मे आते जा रहे थे,

सारे बिल्स, खानेपीने के सामान की जिम्मेदारी, फ्लैट का किराया भी काफी दिन से जय ने नहीं दिया था. यह विषय आने पर कहता कि यार, तुम तो मु  झ से ज्यादा कमाती हो,

मेरे पास तो प्यार है, बस. ऐसा नहीं कि जय की सैलरी बहुत कम थी, हां, आरोही जितनी नहीं थी. इस पर आरोही कहना तो बहुत कुछ चाहती थी पर जय को इतना प्यार करने लगी थी कि उस से पैसों की बात करना उसे बहुत छोटी बात लगती थी.

वह यही सोचती कि एक दिन तो दोनों शादी कर ही लेंगे, क्या फर्क पड़ता है, पर जितना जय को दिन ब दिन जान रही थी, वह मन ही मन थोड़ा अलर्ट हो रही थी. 6 महीने और बीते, आरोही ने नोट किया, जय जब भी अपने घर दिल्ली जाता, वहां से उसे न कोई फोन करता, न किसी तरह का कोई मतलब रखता. एक दिन उस के कलीग रवि ने आरोही को हिंट दिया कि जय अपने पेरैंट्स की पसंद की लड़की से शादी करने के लिए तैयार है,

इसलिए उस के दिल्ली के चक्कर बढ़ गए हैं.आरोही के लिए यह एक बड़ा   झटका था. वह अकेले में खूब रोई, सचमुच जय को अपना जीवनसाथी मानने लगी थी. बहुत दुखी भी रही पर वह आजकल की हिम्मती, आत्मनिर्भर और इंटैलीजैंट लड़की थी. जीभर कर रोने के बाद वह सोचने लगी कि अच्छा हुआ,जय की सचाई पता चल गई. वही तो सारे खर्च, सारे काम करती आ रही थी. ठीक है, अब ब्रेकअप होगा, ठीक है, कोई बात नहीं, दुनिया में न जाने कितनी लड़कियों के साथ ऐसा होता है. मैं एक चालाक लड़के के लिए अब और नहीं रोऊंगी, एक बार फिर अपनी लाइफ शुरू करूंगी.

जय जब वापस आया तो आरोही ने उसे लंच टाइम में औफिस की कैंटीन में आने के लिए कहा और सीधेसीधे बात करना शुरू किया, ‘‘देखो जय, मु  झे साफसाफ बात करना पसंद है… अब हम साथ नहीं रह सकते.’’जय चौंका, ‘‘क्या हुआ?’’

‘‘मैं और बेवकूफ नहीं बन सकती, तुम आराम से अपने पेरैंट्स की मरजी से शादी करो, मु  झे कोई प्रौब्लम नहीं है. मैं तुम्हारे साथ रह कर काफी आर्थिक रूप से नुकसान उठा चुकी हूं.

अब इतनी भी बेवकूफ नहीं कि तुम्हें पालती रहूं और जब तक तुम्हारी शादी न हो, तुम्हारे शरीर की जरूरतों के लिए एक सुविधा बनी नहीं… अब यह बताओ मैं दूसरा फ्लैट ढूंढ़ू या तुम जाओगे?’’ जय का चेहरा शर्म और अपमान से काला हो गया.

झेंपते हुए बोला, ‘‘मैं ही चला जाता हूं.’’‘‘ठीक है, अगर हो सके तो कल शनिवार है, कल कहीं भी शिफ्ट हो जाना, मैं पुणे जारही वीकैंड में… मेरे आने से पहले अपना सामान ले जाना.’’आरोही ने औफिस से जल्दी उठ कर रात की ही बस पकड़ ली और पुणे चली गई.

शिवनेरी बस पुणे और मुंबई के बीच चलने वाली आरामदायक बसें हैं, सोफे जैसी सीट पर बैठ कर आरोही बीते दिनों को याद कर उदास तो हो रही थी पर वह लाइफ में आगे बढ़ने के लिए भी खुद को संभालती जा रही थी.कई बार आंखें नम हुईं, कई बार दिल बैठने को हुआ पर जय की चालाकियां बहुत दिनों से देख रही थी, बहुत कुछ खलने लगा था. दिमाग कहता रहा जो हुआ, अच्छा हुआ.

पुणे आने तक दिल भी दिमाग का साथ देने लगा कि अच्छा हुआ, एक लालची, स्वार्थी और कामचोर इंसान का साथ छूटा. मजबूत कदमों से चलते हुए उस ने घर पहुंच कर खुद को मां की नर्म, स्नेही बांहों में सौंप दिया. मां मां थीं, उदास चेहरा देख कर सम  झ गईं बेटी रात को यों ही तो नहीं आई. हमेशा सुबह की बस पकड़ कर आती थी, पर उस समय किसी ने कुछ नहीं पूछा.

उस के पापा संजय ने उसे खूब दुलारा. खाना खा कर थकी हूं मां, सुबह बात करते हैं, कह कर आरोही सोने लेट गई.शनिवार और रविवार आरोही ने हमेशा की तरह अपने मम्मीपापा के साथ बिताए, तीनों थोड़ा घूम कर आए, बाहर खायापीया. रेखा आरोही की पसंद की चीजें बनाती रहीं, आरोही का बु  झा चेहरा देख 1-2 बार पूछा, ‘‘आरोही, सब ठीक तो है न?

औफिस के काम का स्ट्रेस है क्या?’’‘‘नहीं मम्मी,

सब ठीक है.’’

रेखा सम  झदार मां थीं. सम  झ गईं, बेटी अभी अपने मन की कोई बात शेयर करने के मूड में नहीं है, जब ठीक सम  झेगी, खुद ही शेयर कर लेगी. मांबेटी की बौंडिंग अच्छी है, जब ठीक लगेगा, बताएगी. संडे की रात आरोही वापस मुंबई आने के लिए पैकिंग कर रही थी.

संजय ने कहा, ‘‘बेटा, एक परिचित हैं, उन्होंने अपने बेटे सुमित के लिए तुम्हारे लिएबात की है.

तुम जब ठीक सम  झो, उन से मिल लो, कहो तो अगली बार तुम्हारे आने पर उन्हें बुला लूं?’’बैग बंद करते हुए आरोही के हाथ पल भर को रुके, फिर रेखा की तरफ देखते हुए कहा, ‘‘मम्मी, मु  झे थोड़ा समय दो.’’संजय ने कहा, ‘‘अरे बेटा, अब तुम 30 की हो गई, वैलसैटल्ड हो…

यह परिवार अच्छा है. एक बार मिल तो लो. सबकुछ तुम्हारी हां कहने के बाद ही होगा.’’आरोही ने कहा, ‘‘इस समय मु  झे जाने दें, मैं बहुत जल्दी आप से इस बारे में बात कर लूंगी.’’संजय और रेखा आज के जमाने के पेरैंट्स थे… उन्होंने बेटी पर अपनी मरजी कभी नहीं थोपी.

उसे भरपूर सहयोग दिया हमेशा. यह भी एक कारण था कि आरोही बहुत स्ट्रौंग, बोल्ड और इंटैलीजैंट थी, वह अपनी शर्तों पर जीने वाली लड़की थी, फिर भी अपने पेरैंट्स की बहुत रिस्पैक्ट करती.रेखा ने मन ही मन कुछ अंदाजा लगाया कि कोई बात है जरूर, हमेशा खिला रहने वालाचेहरा यों ही नहीं बु  झा, फिर कहा, ‘‘ठीक है,तुम आराम से जाओ… ये बातें तो फोन पर भीहो जाएंगी.’’मुंबई अपने फ्लैट पर आ कर आरोही ने देखा कि जय अपना सारा सामान ले जा चुका है…

खालीखाली तो लगा पर उस ने अपनेआप को इतने समय में संभाल लिया था. उस ने यह बात स्वाभाविक तौर पर ली. खुद से ही कहाकि इतने दिन का साथ था, कोई बात नहीं.आदत थी उस की, छूट जाएगी. ऐसे   झूठे रिश्तों के लिए अफसोस करने में वह अपनी लाइफ नहीं बिता सकती. अभी बहुत कुछ करना है, खुश रहना है, जीना है, लाइफ जय जैसों के साथ खत्म नहीं हो जाती.

बस यह विचार आते ही आरोही रोज की तरह औफिस पहुंची. रवि ने बताया कि जय किसी दोस्त के साथ रहने चला गया है… तुम ने जो किया, ठीक किया.जय के औफिस की बिल्डिंग से आतेजाते जब भी कभी उस का आमनासामना हुआ, आरोही के निर्विकार चेहरे को देख जय की कभी हिम्मत ही नहीं हुई उस से बात करने की. कुछ महीनों बाद आरोही ने पेरैंट्स के कहने पर सुमित से मिलना स्वीकार कर लिया.सुमित मुंबई में ही काम करता था.

वह अपने 2 दोस्तों के साथ फ्लैट शेयर करता था. पुणे में सुमित अपने मम्मीपापा, विकास और आरती और छोटी बहन सीमा के साथ उन के घर आया. पहली मीटिंग में तो सब एकदूसरे से मिल कर खुश हुए.मुंबई में ही होने के कारण सुमित चाहता था कि वह मुंबई में ही जौब करने वाली लड़की के साथ शादी करे.

सब को यह सोच कर अच्छा लग रहा था कि दोनों पुणे आतेजाते रहेंगे. दोनों के ही घर एक जगह थे, सबकुछ ही देखते तय होता गया. आरोही ने पेरैंट्स की पसंद का मान रखा, सुमित से जितना मिली, वह ठीक ही लगा. आरोही चाहती थी कि नया रिश्ता वह ईमानदारी के साथ शुरू करे, वह सुमित को जय के साथ लिव इन में रहने के बारे में बताना चाहती थी. इस बारे में जब उस ने अपने पक्के दोस्त रवि से बात की, तो रवि ने कहा, ‘‘क्या जरूरत है? मत बताओ, कोई भी लड़का कितनी भी मौडर्न हो, यह बरदाश्त नहीं करेगा.’’‘‘क्यों?

अगर वह मु  झे बताए कि वह भी किसी गर्लफ्रैंड के साथ लिव इन में रहा है, तो मैं तो कुछ नहीं कहूंगी, उलटा इस बात पर खुश होऊंगी कि मेरे होने वाले पति ने ईमानदारी के साथ मु  झ से अपना सच शेयर किया.’’‘‘यार, तुम आरोही हो. सब से अलग, सब से प्यारी लड़की,’’

फिर आरोही को हंसाने के लिए शरारत से कहा, ‘‘मेरी बीवी आज तक मेरे कालेज की गर्लफ्रैंड को ले कर ताने मारती है… अब बोलो.’’आरोही हंस पड़ी, ‘‘बकवास मत करो, जानती हूं मैं तुम्हारी बीवी को, वह बहुत अच्छी हैं.’’‘‘हां, यही तो… सम  झो, लड़के जल्दी हजम नहीं करते ऐसी बातों को…

वह तो तुम बहुत बड़े दिल की हो.’’रवि ने काफी सम  झाया पर आरोही जब सुमित के कहने पर उस के साथ डिनर पर गई, तो आरोही ने जय के बारे में सब बता दिया.सुन कर सुमित मुसकराया, ‘‘तुम बहुत सच्ची हो. आरोही, मु  झे इन बातों का फर्क नहीं पड़ता, मेरे भी 2 ब्रेकअप हुए हैं, क्या हो गया. यह तो लाइफ है. होता ही रहता है. अब तुम मिली हो, बस मैं खुश हूं.’’

आरोही के दिल से जैसे बो  झ हट गया.1-2 बार और सुमित से मिलने के बाद उस ने अपने पेरैंट्स को इस शादी के लिए हां कर दी. उन की खुशी का ठिकाना न था. 4 महीने बाद की शादी की डेट भी फिक्स हो गई.दोनों पक्ष शादी की तैयारियों में व्यस्त हो गए.

बहुत तो नहीं पर सुमित और आरोही बीचबीच में मिलते रहते, दोनों औफिस के काम में व्यस्त रहते पर चैटिंग, फोन कौल्स चलते रहते. शादी पुणे में ही धूमधाम से हुई. दोनों के काफी कलीग्स आए. मुंबई आ कर आरोही के ही फ्लैट में सुमित अपने सामान के साथ शिफ्ट कर गया. दोनों खुश थे, आरोही ने जय का खयाल पूरी तरह से दिलोदिमाग से निकाल दिया था.

1 साल बहुत खुशी से बीता.आरोही अपनी लाइफ से अब पूरी तरह संतुष्ट व सुखी थी. दोनों छुट्टी होने पर कभी साथ पुणे निकल जाते, कभी किसी के पेरैंट्स मिलने आ जाते. सब ठीक था, आरोही की अगली 2 प्रोमोशंस तेजी से हुई, वह अब काफी अच्छे पैकेज पर थी, उस ने बहुत जल्दी अब एक अपना फ्लैट लेने की इच्छा जाहिर की.सुमित ने कहा, ‘‘देखो आरोही,

तुम्हारी सैलरी मु  झ से अब काफी ज्यादा है, तुम चाहो तो ले लो.’’आरोही चौंकी, ‘‘अरे, मेरा पैसा तुम्हारा पैसा अलगअलग है क्या? हमारा भी प्यारा सा अपना घर होगा,

कब तक इतना किराया देते रहेंगे?’’‘‘देख लो, तुम ही सोच लो, मैं तो अपनी सैलरी से ईएमआई दे नहीं पाऊंगा, घर भी पैसा भोजना होता है मु  झे.’’आरोही ने सुमित के गले में बांहें डाल दीं.

कहा, ‘‘ठीक है, तुम बस मेरे साथ फ्लैट पसंद करते चलो, सब हो जाएगा.’’

यह सच था कि सुमित की सैलरी आरोही से बहुत कम थी और जब से आरोही की प्रोमोशंस हुई थीं, सुमित की मेल ईगो बहुत हर्ट होने लगी थी. वह अकसर उखड़ा रहता. आरोही यह सम  झ रही थी, उसे खूब प्यार करती, उस की हर जरूरत का ध्यान रखती और जब आरोही ने कहा कि सुमित, मैं सोच रही हूं, मैं औफिस जानेआने के लिए एक कार ले लूं. बस में ट्रैफिक में बहुत ज्यादा टाइम लग रहा है. मजा आएगा, फिर पुणे भी कार से जायाआया करेंगे, अभी तो बस और औटो में बैठने का मन नहीं करता.’’

सुमित ने कुछ तलख लहजे में कहा, ‘‘तुम्हारे पैसे हैं, चाहे उड़ाओ चाहे बचाओ, मु  झे क्या,’’ कह कर सुमित वहां से चला गया.आरोही इस बदले रूप पर सिर पकड़ कर बैठी रह गई. 2 महीने में ही आरोही ने फ्लैट और कार ले ही ली. सुमित मशीन की तरह पसंद करने में साथ देता रहा.थोड़ा समय और बीता तो आरोही कोसुमित के व्यवहार में कुछ और बदलाव दिखे, अब वह कहता, ‘‘तुम ही पुणे जा कर सब से मिल आओ, तो कभी कहता टूर पर जा रहा हूं,

2 दिनों में आ जाऊंगा.’’आरोही ने कहा, ‘‘मैं भी चलूं? कार से चलते हैं, मैं घूम लूंगी…

तुम अपना काम करते रहना. आनेजाने में दोनों का कुछ चेंज हो जाएगा.सुमित ने साफ मना कर दिया. वह चला गया. अब वह पहले की तरह बाहर जा कर आरोही से उस की खबर बिलकुल न लेता.

आरोही फोन करती तो बहुत बिजी हूं, घर आकर ही बात करूंगी, कह कर फोन रख देता. सुमित बहुत बदल रहा था और इस का कारणभी आरोही के सामने जब आया, तो वह ठगी सी रह गई.एक सुबह सुमित सो रहा था, उस का मोबाइल साइलैंट था,

पर जब कविता नाम उस की स्क्रीन पर बारबार चमकता रहा, आरोही ने धीरे से फोन उठाया और दूसरे कमरे में जा कर जैसे ही हैलो कहा, फोन कट गया. आरोही ने यों ही व्हाट्सऐप चैट खोल ली और जैसेतैसे फिर कविता और सुमित की चैट पढ़ती गई, साफ हो गया कि दोनों का जबरदस्त अफेयर चल रहा है, गुस्से के मारे आरोही का खून खौल उठा.साफसाफ सम झ आ गया कि सुमित की बेरुखी का क्या कारण है.

वह चुपचाप सोफे पर बैठी कभी रोती, कभी खुद को सम झाती, सुमित के जागने का इंतजार कर रही थी, सुमित जब सो कर उठा, आरोही के हाथ में अपना फोन देख चौंका. आरोही का चेहरा देख उसे सब सम  झ आ गया.

बेशर्मी से बोला, ‘‘क्या हुआ?’’‘‘तुम बताओ, यह सब क्या चल रहा है?‘‘तो तुम भी तो शादी से पहले लिव इन रिलेशनशिप में रही थी?’’आरोही हैरान रह गई. बोली, ‘‘ये सब तो शादी से पहले की बात है और तुम्हें सब पता था. मैं ने तुम्हें शादी के बाद तो कभी धोखा नहीं दिया? तुम तो मु  झे अब धोखा दे रहे हो…’’‘‘असल में मैं तुम से अलग होना चाहता हूं…

मैं अब कविता से शादी करना चाहता हूं.’’आरोही ने गुस्से से कहा, ‘‘तुम्हें जरा भी शर्म नहीं आ रही है?’’‘‘तुम्हें आई थी लिव इन में रहते हुए?’’

‘‘पहले की बात अब इतने दिनों बाद करने का मतलब? अब अपनी ऐय्याशी छिपाने के लिए मु  झ पर ऊंगली उठा रहे हो?’’‘‘मैं ने अपना ट्र्रांसफर दिल्ली करवा लिया है.

आज मैं पुणे जा रहा हूं,’’ कह कर सुमित आरोही की तरफ कुटिलता से देखते हुए मुसकराया और वाशरूम चला गया.आरोही को कुछ नहीं सू  झ रहा था. यह क्या हो गया, अपना अफेयर चल रहा है, तो गड़े मुरदे उखाड़ कर मु  झ पर ही इलजाम डाल रहा है.

मेड आ गई तो वह भी औफिस के लिए तैयार होने लगी और चुपचाप सुमित को एक शब्द कहे बिना औफिस चली गई.रवि ने उस की उड़ी शकल देखी तो उसे कैंटीन ले गया और परेशानी का कारण पूछा. देर से रुके आंसू दोस्ती की आवाज सुन कर ही बह निकले.

वह सब बताती चली गई. इतने में दोनों की एक और कलीग दोस्त सान्या भी आ गई. सब जान कर वह भी हैरान रह गई. थोड़ी देर बाद तीनों उठ कर काम में लग गए.आरोही के दिल को चैन नहीं आ रहा था. फिर एक और धोखा. क्या करे. क्या यह रिश्ता किसी तरह बचाना चाहिए? नहीं, जबरदस्तीकैसे किसी को अपने से बांध कर रखा जा सकता है? यह तो प्यार, विश्वास का रिश्ता है. अब तो कुछ भी नहीं बचा. वह अपना आत्मसम्मान खो कर तो जबरदस्ती इस रिश्ते को नहीं ढो सकती..

जो होगा देखा जाएगा. ऐसे रिश्ते का टूटना ही अच्छा है. जब रात को आरोही घर लौटी, सुमित जा चुका था. वह अपनी पैकिंग अच्छी तरह कर के गया था, लगभग सारा सामान ले गया. कुछ दिन बाद ही आरोही को तलाक के पेपर मिले तो वह रो पड़ी. यह क्या हो गया, सब बिखर गया. उस की कहां क्या गलती है.सुमित ने उसे फोन किया और कहा, ‘‘साइन जल्दी कर देना,

मैं कोर्ट में यही कहने वाला हूं कि तुम चरित्रहीन हो, तुम पहले भी लिव इन में बहुत समय रह चुकी हो और मु  झे ये सब बताया नहीं गया था.’’‘‘पर मैं ने तुम्हें सारा सच बता दिया था और तुम्हें कोई परेशानी नहीं थी.’’‘‘पर तुम्हारे पास कोई सुबूत नहीं है न कि तुम ने मु  झे सब बता दिया था.’’

आरोही चुप रह गई. अगले दिन रवि और सान्या ने सब जान कर अपना सिर पकड़ लिया. फिर सान्या ने पूछा, ‘‘आरोही, तुम ने कैसे बताया था सुमित को जय के बारे में?’’‘‘मिल कर, फिर बहुत कुछ चैटिंग में भी इस बारे में बात होती रही थी.’’‘‘चैट कहां है?’’‘‘उन्हें तो मैं डिलीट करती रहती हूं. सुमित भी जानता है कि मु  झे चैट डिलीट करते रहने की आदत है.’’

‘‘अभी राजनीति में, ड्रग केसेज में जो इतनी चैट खंगाल दी गईं, वह भी नामी लोगों की, तो इस का मतलब यह मुश्किल भी नहीं.’’‘‘और मेरे पास कविता और उस के अफेयर का सुबूत है…

मैं ने जब उन दोनों की चैट पढ़ी, खूब सारी पिक्स ले ली थीं.’’‘‘यह अच्छा किया तुम ने, गुस्से में होश नहीं खोया, दिमाग लगाया. भांडुप में मेरा कजिन सुनील पुलिस इंस्पैक्टर है, उस से बात करूंगी, वह तुम्हारी पुरानी चैट निकलवा पाएगा, इसे तो तलाक हम देंगे.

बच्चू याद रखेगा.’’सान्या ने उसी दिन सुनील से बात की. उस ने कहा सब हेल्प मिल जाएगी. रवि और सान्या आरोही के साथ खड़े थे. वीकैंड आरोही ने पुणे जा कर अपने पेरैंट्स से बात करने का, उन्हें पूरी बात बताने का मन बनाया.अभी तक आरोही ने अपने पेरैंट्स से कुछ भी शेयर नहीं किया था. सुमित आरोही से अब बिलकुल टच में नहीं था.

कभीकभी एक मैसेज तलाक के बारे में कर देता.संजय और रेखा पूरी बात सुन कर सिर पकड़ कर बैठ गए. कुछ सम  झ न आया, दोनों को जय के बारे में भी अब ही पता चला था, क्या कहते, बच्चे जब आत्मनिर्भर  हो कर हर फैसला खुद लेने लगें तो सम  झदार पेरैंट्स, कुछ कहने का फायदा नहीं है, यह भी जानते हैं. जय के साथ, सुमित के साथ बेटी का अनुभव अच्छा नहीं रहा, प्यारी, सम  झदार बेटी दुखी है, यह समय उसे कुछ भी ज्ञान देने का नहीं है.इस समय उसे अपने पेरैंट्स की सपोर्ट चाहिए. कोई ज्ञान नहीं… और सुमित तो गलत कर ही रहा था…

जय की बात जरूर अजीब लगी थी, पर अब वे बेटी के साथ थे.संजय ने कहा, ‘‘मैं आज ही वकील से बात करता हूं.’’रेखा ने सुमित के पेरैंट्स अनिल और रमेश से बात की. मिलने के लिए कहा, उन्होंने आरोही को चरित्रहीन कहते हुए रेखा के साथ काफी अपमानजनक तरीके से बात की तो सब को सम  झ आ गया, यह रिश्ता नहीं बचेगा.रवि और सान्या आरोही के टच में थे. सुनील ने काफी हिम्मत बंधा दी थी, बहुत कुछ सोच कर सुमित को आरोही ने फोन किया, ‘‘सुमित, मैं पुणे आई हुई हूं, कल सुबह चली जाऊंगी. आज तुम से मिलना चाहती हूं… कैफे कौफी डे में आज शाम को 5 बजे आओगे?’’

‘‘ठीक है,’’ पता नहीं क्या सोच कर सुमित मिलने के लिए तैयार हो गया.आरोही बिना पेरैंट्स को बताए सुमित से मिलने के लिए पहुंची. दिल में अपमान और क्रोध का एक तूफान सा था.

आज भड़ास निकालने का एक मौका मिल ही गया था. एक टेबल पर बैठा सुमित उसे देख कर जीत और बेशर्मी के भाव के साथ मुसकराया. उस के बैठते ही कहा, ‘‘देखो, गिड़गिड़ाना मत, मु  झे दीनहीन लड़कियां अच्छी नहीं लगतीं.’’

यह सुनते ही आरोही के दिल में कुछ बचा भी एक पल में खत्म हो गया. मजबूत स्वर में बोली, ‘‘मु  झे भी धोखेबाज लोग अच्छे नहीं लगते. आज तुम्हें बस इतना बताने आई हूं कि मैं जा कर तलाक के पेपर साइन कर दूंगी… अभी तक पूरी तैयारी भी तो करनी थी.’’सुमित उस की आवाज की मजबूती पर चौंका, ‘‘कैसी तैयारी?’’‘‘तुम मु  झे चरित्रहीन बताने वाले हो न?

मैं ने भी तुम्हारी और कविता की सारी चैट के फोटो ले लिए थे और इंस्पैक्टर सुनील हमारी वे चैट निकाल रहे हैं, जिन में मैं ने तुम्हें साफसाफ जय के बारे में पहले ही बता दिया था और तुम्हेंउस में कोई आपत्ति नहीं थी. तुम्हारे ऊपर तो ऐसीऐसी बात उठेगी कि किसी लड़की को आगे धोखा देना भूल जाओगे, सारी ऐयाशियां न भूल जाओ तो कहना.‘‘मैं कभी कमजोर लड़की नहीं रही…

तुम्हारे जाने का अफसोस हो ही नहीं सकतामु  झे, मैं खुश हूं कि जल्द ही तुम से पीछा छूट गया. मैं तो एक बार फिर जीवन में आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हूं. अब कोर्ट में अपने वकील के साथ मिलेंगे,’’ कह कर मुसकराते हुए आरोही खड़ी हो गई. फिर कुछ याद करते हुए बैठ गई. वेटर को इशारा करते हुए बिल मांगा और कहा, ‘‘कौफी भले ही ठंडी हो गई थी,

भले ही पी भी नहीं, पर आज एक बार फिर मेरे आत्मविश्वास को देख कर तुम जैसे, जय जैसे पुरुष की यह उड़ी शकल देखने में बहुत मजा आया,’’ कहतेकहते उस ने पेमैंट की और वहां से निकल गई.सुमित आने वाले तूफान से अभी से घबरा गया था.

पति बना पत्नी का काल, फरसे से काट दिया गला

दिल्ली में शराबी पति ने पत्नी से मांगे शराब के लिए 500 रुपए, इनकार करने पर घोंप दिया पेट में चाकू. पत्नी की मौत.

बरेली में शराब के लिए रुपए न देने पर पत्नी को पत्थर से सिर कुचल कर मौत के घाट उतारा.

बरेली में नाजायज संबंधों के शक के चलते पति ने खाना बना रही पत्नी की फरसा से गला काट कर हत्या कर दी.

इटावा में रहने वाले आभूषण कारोबारी ने अपनी प्रेमिका के लिए अपनी बीवी, बेटे और बेटी का किया कत्ल.

ये वरदातें किसी फिल्म का सीन नहीं हैं, बल्कि हकीकत हैं हमारे समाज की  जहां औरतों पर शादी के बंधन में बंध कर जोरजुल्म तो हो ही रहा है, साथ में ऐसे पति उन का कब काल बन जाएं, इस बात का भरोसा भी नहीं है.

आज औरतों को जागरूक होने की जरूरत है, क्योंकि सहन करने से न सिर्फ उन की जिंदगी बरबाद हो रही है, बल्कि उन के बच्चों की भी जिंदगी अधर में लटक जाती है. ऐसे में समझना होगा कि जब संबंध में जहर घुलने लगे, तो उस रिश्ते से निकलने में ही भलाई है. आप की भी व आप के परिवार की भी.

ज्यादातर औरतों के चरित्र में शुमार होता है बरदाश्त करना, लेकिन एक सीमा से ज्यादा सहन करना सबकुछ बरबाद कर सकता है, तो जरूरी है कि आप को मालूम हो कि आप का रिश्ता बरबादी की राह पर है :

-अगर आप के पति का दूसरी औरतों के साथ नाजायज संबंध है, तो इस बात की समय रहते छानबीन करें व परिवार के सदस्यों से भी बातचीत करें. पति आप की बात को समझे, तो खुल कर अपने हक के साथ अलग होने की बात रखें. जरूरत पड़े तो पुलिस की मदद जरूर लें, क्योंकि ऐसे पति कब आप की जान के दुश्मन बन जाएं समझ पाना मुश्किल होता है.

-किसी के पति में अगर कोई बुरी लत है, जैसे वह नशीली चीजों का सेवन करता है, शराब पीता है या जुआ खेलने का आदी है, तो ऐसे पतियों से सावधान रहना बहुत जरूरी है, क्योंकि जब उन के खिलाफ कदम उठाने की कोशिश की जाती है, तो उन की लत उन पर इस कदर  हावी होती है कि वे आप को नुकसान ही नहीं, बल्कि कत्ल करने से भी पीछे नहीं हटेंगे, इसलिए समय रहते कड़े कदम लेना आप के और आप के बच्चों के लिए बहुत जरूरी है.

-जब किसी मर्द के अहम को चोट पहुंचती है या उसे ऐसा लगता है कि उस की पत्नी उस से ज्यादा कामयाब है और हर तरह से उस से ज्यादा काबिल है तब भी वह उस से बदले की भावना रखने लगता है और हर वक्त उस के लिए अपने मन में नफरत और जलील करने का भाव रखता है. कब वह कत्ल जैसा अपराध कर रिश्तों को तार तार कर दे, समझना मुश्किल है. ऐसे रिश्तों में सतर्क रहना बहुत जरूरी है.

Avinash के साथ बिताई थी वो रात, बाहर निकलकर Alice kaushik ने बताया सच

विवादित रियलिटी शो बिग बौस 18 (Bigg Boss18) हर बार की तरह एलिमिनेशन और वाइल्ड कार्ड एंट्री से भरा हुआ शो है. हर बार की तरह कोई न कोई घर से बेघर होना ही था. ऐसे में इस बार एलिस कौशिक घर से बाहर हुई है. बीते वीकेंड का वार में एलिस कौशिक(Alice Kaushik) को कम वोट्स के आधार पर सलमान खान(Salman khan) ने शो से बाहर का रास्ता दिखा दिया. लेकिन बाहर आने के बाद एलिस ने कई खुलासे और सच बताएं. जिन्हे जानने के लिए जनता उत्सुक है.

 

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एलिस ने बाहर आते ही सबसे पहले अपने बौयफ्रेंड कंवर ढिल्लों से मुलाकात की, जिनके नाम पर शो में पहले ही ड्रामा हो चुका है. कंवर ने एलिस को अपनी गर्लफ्रेंड मानने से ही इंकार कर दिया था. वहीं. शो में एलिस के नाम पर एक और विवाद हुआ, वह अविनाश मिश्रा के साथ बेड शेयर करती दिखीं, जिस वजह से वह खूब ट्रोल हुईं. अब एक्ट्रेस ने इस पर चुप्पी तोड़ी है.

दरअसल, बिग बौस 18 से एलिस कौशिक का एक वीडियो सामने आया था. इस वीडियो में एलिस अविनाश मिश्रा(Avinash Mishra) के कंधे पर सिर रखकर सोती हुई दिखी थीं. दोनों ने लगभग पूरी रात बेड शेयर किया था और इसी वजह से एलिस को ट्रोल किया गया था. इस मामले पर अब एलिस ने चुप्पी तोड़ते हुए उस रात का सच बताया है. एक्ट्रैस ने कहा, ‘मैं अकेली इंसान नहीं हूं, जिसे पैनिक और एग्जायटी अटैक आते हैं. कई सारे ऐसे लोग हैं. मुझे कई अलग अलग तरह के पैनिक अटैक आते हैं. उस वक्त मैं कांप रही थी. मुझे पता है आप किस वीडियो, किस इंसान के बारे में बात कर रहे हो. ये बहुत दुखद और दिल तोड़ने वाला है कि आप इस चीज को लेकर मजाक उड़ा रहे हो. आप किसी की मेंटल हेल्थ का मजाक उड़ा रहे हो ये बहुत दुखद है.’

एलिस ने आगे अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि मैं इतना ही कहूंगी की वो क्लिप गलत तरीके से लोगों को दिखाई गई है. मैं अविनाश के कंधे पर जरूर सिर रखकर सो रही थी, लेकिन मुझे एंग्जायटी और डिप्रेशन होता है. सभी ये बात जानते हैं कि मैं हर सुबह और रात दवाइयां लेती हूं. डौक्टर को दिखाती हूं. मुझे वहां पर मेडिकल रूम में बुलाया जाता है और इस दौरान मेरे साथ ईशा और अविनाश दोनों ही होते थे, लेकिन पता नहीं क्यों लोगों को ईशा वाला नहीं दिखाया गया और सिर्फ अविनाश वाला दिखाया गया है. अविनाश मेरा सिर्फ अच्छा दोस्त हैं. उन लोगों ने ही मुझे वहां पर संभाला है.

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