‘‘मुझ से फोटो डिलीट करने को कह रहे हो और खुद 2 पैग ह्विस्की नहीं पिला सकते.’’
‘‘2 क्या 4 पैग पिलाऊंगा. पहले फोटो डिलीट कर दो.’’
‘‘ठीक है, डिलीट कर दूंगा, लेकिन 2 पैग पीने के बाद. रूम सर्विस को फोन कर के गिलास, सोडा और रोस्ट चिकन का आर्डर दो.’’
मजबूरी थी, नंदन ने रूम सर्विस को फोन कर के भानु के मनमुताबिक आर्डर दे दिया.
कमरा वातानुकूलित था. अंदर ज्यादा ठंड नहीं थी. बाथरूम के बाहर आ कर युवती को काफी राहत मिली थी.
जब तक वेटर सामान ले कर आया, तब तक नंदन और भानु के बीच कोई बात नहीं हुई. इस बीच भानु बैठा हुआ फिल्मी गीत गुनगुनाता रहा. ‘आज की रात… वेटर सामान दे गया, तो भानु ने पहले अपना पैग बनाया, फिर मेज के नीचे से दोनों गिलास निकाल कर उन में ह्विस्की डाली. उसे तीसरे गिलास में ह्विस्की डालते देख नंदन ने पूछा, ‘‘तीसरा पैग क्यों बना रहे हो?’’
‘‘उस के लिए.’’ भानु ने लड़की की ओर इशारा कर के कहा.
‘‘वो नहीं पिएगी.’’
‘‘तुम्हें कैसे पता? यह तो उस की इच्छा पर निर्भर है. सामने आ कर बैठेगी तो खुद ब खुद इच्छा हो जाएगी.’’
‘‘मैं ने कहा न, नहीं पिएगी.’’ नंदन तीखी आवाज में बोले, तो भानु ने उन की आंखों में झांकते हुए व्यंग्य से कहा, ‘‘वो तुम्हारी बीवी है, जो तुम्हारे इशारों पर नाचेगी.’’
नंदन का मन कर रहा था अपने बाल नोच लेने का. उन का वश चलता तो वह एक पल में भानु को कमरे के बाहर कर देते. लेकिन मजबूरी थी. अत: गिड़गिड़ा कर दयनीय स्वर में बोले, ‘‘भानु प्लीज, तुम दो पैग पियो और जाओ.’’
‘‘जाने को तो मैं बिना पिए भी चला जाऊंगा. लेकिन…’’
‘‘लेकिन क्या?’’
‘‘सो नहीं पाओगे रातभर. जिस मकसद से आए हो, वह भी अधूरा रह जाएगा.’’
‘‘तो तुम ही बताओ, मैं क्या करूं?’’
‘‘कुछ नहीं, उसे बुला लो और प्यार से 2 पैग पिला दो. यकीन मानो, उस के बाद कतई डिस्टर्ब नहीं करूंगा.’’
नंदन सिर पकड़ कर बैठ गए. सोचने लगे, क्या करें?
भानु बोला, ‘‘क्या नाम है मोहतरमा का? मैं खुद ही बुला लेता हूं.’’
‘‘जी का जंजाल.’’ नंदन ने माथा पीटते हुए चिढ़ कर कहा, तो भानु खड़े होते हुए हंस कर बोला, ‘‘नाम अच्छा है. एकदम मौर्डन. चलो, इसी नाम से बुला लेते हैं.’’
युवती ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी बाल सुखा रही थी. भानु कुछ देर तक स्लीवलैस नाइटी से बाहर झांकती उस की गोरीगोरी बाहों को देखता रहा, फिर उस की नंगी बाहों को पकड़ कर उसे उठाने की कोशिश करते हुए बोला, ‘‘उठो जी के जंजाल. दो पैग ह्विस्की हमारे साथ भी पी लो.’’
युवती ने खड़े हो कर तीखी नजरों से भानु की ओर देखा, फिर बांह छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली, ‘‘ये क्या बद्तमीजी है?’’
‘‘बद्तमीजी तब होती है डियर जान के जंजाल, जब सड़क चलती किसी अनजान लड़की का हाथ इस तरह पकड़ा जाए. होटल के बंद कमरे में किसी गैर मर्द के साथ गुलछर्रे उड़ा रही औरत का उसी कमरे में हाथ पकड़ लेना बद्तमीजी नहीं है. वैसे भी मैं ने हाथ ही तो पकड़ा है, और कुछ नहीं.’’
क्षणमात्र में युवती का ठंडा बदन गरम हो गया. चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. आंखों में बेबसी के भाव साफ झलक रहे थे. पलभर रूक कर भानु उस के कान के पास मुंह ले जा कर धीरे से बोला, ‘‘तुम्हारे बारे में बहुत ज्यादा तो नहीं, पर थोड़ा बहुत जानता हूं. कुंवारी नहीं, शादीशुदा हो तुम.
‘‘बात पति और ससुराल तक पहुंच गई, तो घर की रहोगी, न घाट की. चल कर चुपचाप ह्विस्की पियो. उतने ही प्यार से जितने प्यार से नंदन के साथ पी रही थीं.’’
युवती का चेहरा पीला पड़ गया. वह बिना कुछ बोले मेज की ओर बढ़ गई. भानु की इस हरकत को देख कर नंदन खून का घूंट पी कर रह गए. भानु युवती को नंदन के पास वाली कुर्सी पर बैठाते हुए बोला, ‘‘देखो, बुरा आदमी नहीं हूं मैं. तुम लोगों का बुरा कतई नहीं चाहूंगा. जानता हूं. कपड़ों के नीचे सब नंगे होते हैं. जैसे तुम. वैसा मैं. अकेला था, सो चला आया. चलो उठाओ अपनेअपने पैग. मैं 2 पैग पी कर चला जाऊंगा.’’
नंदन गिलास उठाता या कुछ बोलता, इस से पहले ही भानु का इशारा पा कर युवती ने कंपकपाते हाथों से गिलास उठा लिया. नंदन अभी सोच में डूबा बैठा था. भानु उस की ओर देख कर व्यंग्य में बोला, ‘‘नौ सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली. ज्यादा संयासी न बनो उठाओ गिलास.’’



