कश्मीर में जोश की नहीं होश की जरूरत

जम्मूकश्मीर में नाराज कश्मीरियों के पत्थरमार अभियान से बचाव के लिए भारतीय सेना ने एक अजीब प्रयोग किया जो बुरी तरह उल्टा पड़ गया. सेना ने एक कश्मीरी युवक को अपनी जीप के आगे बांध दिया और अपनी एक आवश्यक गश्त बिना पत्थरमारों के प्रहार के पूरी कर ली. पर आज के जमाने में हरेक के हाथ में स्मार्टफोन है जिस के चलते सेना की यह तरकीब जल्दी ही दुनियाभर में फैल गई. सेना द्वारा मानव कवच के इस्तेमाल पर खूब हल्ला मच रहा है.

कश्मीर की गुत्थी लगातार उलझ रही है. यह उमीद की गई थी कि भारतीय जनता पार्टी, जो कश्मीर में सख्त कदमों की हिमायती रही है, कश्मीरी युवाओं को सही रास्ते पर ले आएगी. लेकिन महबूबा मुफ्ती के साथ उस की बनाई गई सरकार बुरी तरह फिसड्डी रही है. इस बार वहां उपचुनाव में 3 फीसदी वोटिंग के रिकौर्ड तय किए गए. ऐसे माहौल में मानव कवच ने चिंगारियों पर पैट्रोल छिड़कने का काम किया है.

कश्मीर घाटी के युवा अब बंदूकों और बंदूकों से ही नहीं, पत्थरों से भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. सेना जवाब में क्या करें, उस की समझ नहीं आ रहा. ये पत्थर फेंकने वाले 12-15 साल के बच्चे होते हैं और उन पर गोलियां चलाना आसान नहीं है. जो लोग 65-70 साल से कश्मीर के मामले को बिगाड़ने का दोष कांग्रेस को देते रहे हैं उन को अब समझ नहीं आ रहा है कि क्या प्रतिक्रिया करें और मानव कवच को सही ठहराएं या नहीं.

मानव कवच विद्रोहियों द्वारा दुनियाभर में इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिका में बहुत से अकेले उग्रवादियों और सिरफिरे हत्यारों ने मानव कवच के सहारे ही अपना बचाव किया है. यह एक पुराना तरीका है जिस का इतिहास में अकसर जिक्र मिलता है. पर आमतौर पर खलनायक, जो कमजोर होते हैं, वे इसे इस्तेमाल करते हैं. भारतीय सेना द्वारा इस का इस्तेमाल शहर की सड़कों पर करना गंभीर आलोचना का विषय बन गया. दुनियाभर के मानव अधिकारों के समर्थक इस पर बेहद खफा हैं. इस से भारत की छवि पर गहरा धब्बा लगा है.

कश्मीर भारत का अंग है और रहेगा. और भारत और उस की सेना का यह कर्तव्य है कि इस की रक्षा में कोई चूक न होने पाए. पत्थरों की तो छोडि़ए, बमों और टैंकों से भी कोई कश्मीर को भारत के हाथों से नहीं छीन सकता. पर भारत को देश का हिस्सा बचाने के लिए मानवीय नियमों का तो पालन करना ही पड़ेगा.

सेना के इस कदम के चलते भारत सरकार की दुनियाभर में पाकिस्तान समर्थक अलगाववादियों को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश पर पानी फिर गया है. सरकार खुद आलोचना का निशाना बन गई है. यह न भूलें कि सीरिया में अमेरिका के खब्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को टौमहाक मिसाइलों से 89 टन का बम बरसाने का मौका तब ही मिला जब सीरिया में विद्रोहियों पर राष्ट्रपति बशर अल असद की फौजों ने कैमिकल अटैक किया, जिस में आम बच्चे तक झुलस कर मर गए. कश्मीर में देश को जोश से नहीं, होश से काम लेना होगा.

इस तरह धराशायी हो गया आडवाणी का सपना

वे लोग वाकई अतिदूरदर्शी व ज्ञानी हैं जो यह कह रहे हैं कि लालकृष्ण आडवाणी या मुरली मनोहर जोशी अब राष्ट्रपति नहीं बन पाएंगे, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उन सहित 13 अन्य लोगों पर साजिश का मुकदमा चलाने का फैसला दिया है. इन में एक और अहम नाम साध्वी उमा भारती का भी है, जिन्होंने उम्मीद के मुताबिक बड़ी मासूमियत से कहा कि जो था खुल्लमखुल्ला था, कोई साजिश नहीं थी. अव्वल तो उमा का सार्वजनिक रूप से दिया गया यह बयान ही यह जताने के लिए काफी है कि सचमुच उस दिन अयोध्या में कोई साजिश नहीं हुई थी, अब यह तो अदालत की दरियादिली या मजबूरी है कि वह किसी फैसले पर पहुंचने के लिए चार्जशीट, गवाह और सुबूतों वाला नाटक खेले और इस ऐतिहासिक मुकदमे का अंत करे.

मुकदमे के राजनीतिक माने

 धार्मिक तौर पर इस विवाद के अलग माने हैं. अयोध्या मसले पर 25 साल से हिंदू और मुसलिम धर्मगुरु अपनी रोटियां सेंक रहे हैं, जिन की मंशा झगड़ा सुलझाने की नहीं इसे लटकाए रखने की ज्यादा रही है. जब भी इन के धंधे पर मंदी मंडराती है तो ये झट से बाबरी मसजिद और रामजन्मभूमि का राग छेड़ देते हैं.

इस मुकदमे के अपने सियासी माने भी हैं, जिस का फायदा भाजपा उठाती रही है और रामराम करते ही इतनी मजबूत हो पाई है कि आज केंद्र और अधिकांश राज्यों में उस की सत्ता है. इन दिनों भाजपा जो राजनीति कर रही है उस में हल्ला ज्यादा है, सुधार और विकास की बातें कम हैं.

ऐसे में यह फैसला उस के लिए वरदान ही है जिस से उसे उग्र हिंदूवादी नेताओं की दावेदारी और भागीदारी से बैठेबिठाए छुटकारा मिल गया है.

अब लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती व मनोहर जोशी सरीखे नेता अपने दम पर कोई फसाद राममंदिर के नाम पर खड़ा करने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि न केवल ये लोग बल्कि पूरी भाजपा नरेंद्र मोदी और अमित शाह की मुहताज हो गई है.

आमतौर पर भाजपाई जब खुश होते हैं तो आतिशबाजी जरूर चलाते हैं, जो इस फैसले पर नहीं चलाई गई तो आम लोगों को लगा कि ऐसा होना भाजपा सहन नहीं कर सकती, जबकि हकीकत यह है कि केसरिया मनों में लड्डू फूट रहे हैं. 2019 की गरमी तक फैसला आ पाया तो चित नरेंद्र मोदी की और पट भाजपा की होगी. अगर मुलजिम साहेबान बरी हुए और न हुए तो भी एक और मंदिरनिर्माण की पटकथा तो लिखनी शुरू हो ही गई है.

बकौल विनय कटियार और उमा भारती, ‘जान देनी पड़े या फांसी हो, मंदिर वहीं बनाएंगे.’ देश का माहौल धार्मिक कट्टरवाद की इतनी गिरफ्त में शायद 90 के दशक में भी नहीं था जब भजभज मंडली राम के नाम पर घरघर से चंदा इकट्ठा करती मंदिर निर्माण के लिए इसी आस्था की दुहाई देते प्राणों की आहुति देने को आमादा थी. अब तसवीर यह है कि मुसलमानों का टेंटुआ हिंदूवादियों के पंजे में है, अजान से किसी गवैये की नींद खुलती है तो वह झट से ट्वीट कर देता है और देखते ही देखते हल्ला मच जाता है.

मोदी, योगी को मुसलिम महिलाओं पर दया आ रही है, क्योंकि उन्हें झट से तलाक मिल जाता है, हिंदू दंपतियों की तरह सालोंसाल अदालत की चौखट पर नाक रगड़ते एक उम्र जाया नहीं करनी पड़ती.

इस पर भी मिसाल द्रौपदी के चीरहरण की दी जाती है, सीता की अग्निपरीक्षा की नहीं. सार यह कि अपने दामन के दाग नहीं देखने हैं, बस, जैसे भी हो 2 साल इसी तरह गुजार देने हैं. इस के बाद आएगा अदालती फैसला जो भाजपा का अगला मुद्दा हो जाएगा कि बस, अब बहुत हो गया, बात आस्था और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं की है, इसलिए सारे झंझटें और मुद्दे (अगर बचे तो) डालो डस्टबिन में और चलो अयोध्या वरना विश्वगुरु बनने का सपना मिट्टी में मिल जाएगा.

आरएसएस का दांव

 लोग तो धर्म के अंधे हमेशा से ही हैं, लिहाजा वे भगवा ध्वज ले कर कूच करते रेडीमेड पुण्य कमाने से चूकेंगे, ऐसा कहने की कोई वजह नहीं. भाजपा ने कभी नहीं  कहा कि आडवाणी या जोशी राष्ट्रपति होंगे, न ही कभी ऐसा कहेगी. ये तो बलि के बकरे बन गए हैं जो 2 सालों तक रोज अपनी ईद मनते देखने को विवश हैं. कर्मफल के सिद्धांतों की बात करें तो ये अपने किए की सजा भुगतेंगे. यह राजनीति में ही हो सकता है कि प्यादे वजीर और वजीर प्यादे बन जाएं. इस बिसात के दोनों तरफ से चालें चलने वाला आरएसएस तय करेगा कि राष्ट्रपति किसे बनाया जाए.

मुमकिन है इस दफा मंदिरनिर्माण के लिए दलितों का सहयोग बाकायदा घोषित तौर पर लिया जाए और उन्हें मौजूदा लोकतांत्रिक वर्णव्यवस्था में हनुमान व जामवंत बना कर चतुर्थ श्रेणी का हिंदू घोषित कर दिया जाए.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लग यह रहा है कि अगले आम चुनावों में मोदी सरकार के 5 सालों का कामकाज मुद्दा नहीं होगा बल्कि कोई रथयात्रा निकाली जा सकती है, कोई भी मुहिम मंदिर के नाम पर  छेड़ी जा सकती है, जिस से नएनए आडवाणी, जोशी, उमा, विनय, कल्याण और ऋतंभरा पैदा किए जा सकें. इस से लोगों को अपनी परेशानियां और दुख भुलाने में सहूलियत रहेगी. एक बार मंदिर बन भर जाए, फिर तो सारे कष्ट रामजी हर ही लेंगे, जिन्होंने अपने भक्तों को इस फैसले की शक्ल में  संजीवनी दिला दी है.

मुकदमा चलाने के फैसले से दोषी नेता भी खुश हैं. वे मंदिर के नाम पर फांसी चढ़ने और जान देने की बात कर रहे हैं तो उन्हें यह एहसास है कि अगर कल को फिर से मंदिरनिर्माण मुद्दा बनाने के लिए पार्टी मजबूर हुई तो आगे उन्हें ही रखा जाएगा. वैसे भी मुकदमे से जुड़े तमाम नेता हर स्तर पर खारिज हो चुके हैं और मोदी बाली भाजपा पर भार ही बने हुए हैं.

नरेंद्र मोदी कैसा भारत गढ़ना चाहते हैं, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है पर इतना हर किसी की समझ में आ रहा है कि देश न पहले कभी धर्मनिरपेक्ष था न आज है और हालात यही रहे तो कभी हो भी नहीं पाएगा.

पूजापाठ, यज्ञहवन में उलझे लोगों को भी मजबूत और सशक्त नेता नहीं, बल्कि धर्म के नाम पर पाखंड और विवाद करने वाले नेता ही पसंद आते हैं. जब तक कांग्रेसी इस में आगे रहे तो लोग उन्हें वोट देते रहे और अब भाजपा बाजी मार रही है तो वह सत्ता में है.

अब साफ दिख रहा है कि दोषियों को सजा हुई तो फिर आस्था के नाम पर बवंडर मचाया जाएगा. यह भाजपा की राजनीतिक जरूरत भी होगी और अगर अभियुक्त बरी हुए तो देशभर में जश्न का माहौल होगा, गलीगली में दीवाली, होली मनाई जाएगी.

कहा यह जाएगा कि रामनाम की महिमा अपरंपार है और बेहतर यह होगा कि भाजपा के राष्ट्रवाद, जो कट्टर हिंदूवाद का नया नाम भर है, को सभी मान लें, वरना तो देश छोड़ देने का विकल्प तो उन के पास है ही.

गर्मी में भोजपुरी एक्ट्रेस गुंजन पंत बनीं जलपरी

भोजपुरी एक्ट्रेस गुंजन पंत इन दिनों फिल्म गंगा की बेटी की शूटिंग में व्यस्त हैं. इस फिल्म मे गुंजन पंत एक जलपरी की भूमिका निभा रही हैं. फिल्म की शूटिंग झुमरी तलैया के झील के पास हो रही है. तेज गर्मी के बाद भी गुंजन शूटिंग में जुटी हुई हैं. शूटिंग देखने के लिए दर्शक भी पहुंच रहे हैं.

नई भूमिका में आ रहा है मजा

गुंजन पंत ने कहा कि इस फिल्म की कहानी बहुत अलग है. भोजपुरी में इस तरह की फिल्में बहुत कम बनती हैं. इसमें लव भी है और इमोशन भी. फिल्म की कहानी दूसरे दुनिया के लोगों की है. जलपरी को प्यार हो जाता है, लेकिन उसका प्यार अधूरा रह जाता है.

फिल्म की शूटिंग पहाड़, तालाब और झील के किनारे की जा रही है. अलग रोल करके बहुत मजा आ रहा है. बहुत सारे सीन पानी के अंदर फिल्माए गए हैं. गुंजन पंत ने कहा कि फिलहाल झारखंड के झुमरी तलैया, रांची, हजारीबाग के पहाड़ी एरिया में फिल्म की शूटिंग हो रही है. यहां पर बहुत ही अच्छी लोकेशन है. इस फिल्म में मेरे हीरो राकेश मिश्रा हैं. फिल्म के निर्देशक कुमार विकल हैं.

भोजपुरी में ‘डर्टी पिक्चर’ करना चाहती है ये एक्ट्रेस

श्‍वेता यादव भोजपुरी सिनेमा में एक स्‍थापित नाम है. लेकिन, बचपन में वे किरन बेदी की तरह पुलिस अफसर बनने का सपना देखा करतीं थीं. पुलिस में नौकरी का मौका भी मिला, लेकिन उसे छोडक़र फिल्मों में आ गईं. श्‍वेता ने बताया कि वे बचपन में पुलिस ऑफिसर बनना चाहतीं थीं. वे किरण बेदी की तरह देश की सेवा करना चाहती थीं. हां, दिल में एक्‍ट्रेस बनने की भी इच्‍छा थी. लेकिन, किस्‍मत में पुलिस की नौकरी नहीं लिखी थी, इसलिए 2012 में पुलिस सब इंस्‍पेक्‍टर पद पर नियुक्त होने का अवसर मिलने पर भी ज्‍वायन नहीं कर सकीं.

बकौल श्‍वेता उन्‍होंने अपने फिल्‍मी करियर की शुरुआत 2013 में प्रदर्शित भोजपुरी फिल्म ‘बंधन’ से की. आगे कुछ गुजराती फिल्मों में भी काम किया. श्‍वेता ने बताया कि वे इन दिनों एक महिला प्रधान फिल्म ‘मैं ससुराल नहीं ले जाउंगी’ बना रही हैं. इसमें श्‍वेता अभिनय भी कर रही हैं.

श्‍वेता को बॉलीवुड में ऑफर्स मिल रहे हैं, लेकिन वे फिलहाल भोजपुरी फिल्‍मों में मुकाम बनाना चाहती हैं. बॉलीवुड में उनकी रोल मॉडल विद्या बालन हैं. श्‍वेता ने कहा कि उन्‍हें विद्या बालन की सभी फिल्में पसंद हैं, लेकिन फिल्म ‘डर्टी पिक्चर’ में उनकी एक्टिंग लाजवाब है. जिस तरह से उन्होंने सिल्क स्मिता का किरदार निभाया वह काबिले तारीफ है. यदि अवसर मिले तो वे भी भोजपुरी फिल्म में सिल्क का किदार निभाना चाहेंगी. श्‍वेता की आने वाली फिल्मों में ‘मैं ससुराल नही जाउंगी’ और ‘परवतिया’ आदि प्रमुख हैं.

लंदन में बिना कपड़ों के इस भारतीय लड़की ने चलाई साइकिल

तमिलनाडु की रहने वाली मीनल जैन इन दिनों चर्चा में हैं. मीनल ने उस समय सबको चौंका दिया जब उन्होंने यह फैसला किया कि वह लंदन में जाकर नग्न रैली में भाग लेंगी. इसके बाद मीनल जैन ने उस रैली में भाग लिया, जिसके चलते सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हो रही है. हालांकि मीनल जैन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ, जिसमें वह पूर्ण रुप से नग्न अवस्था में साइकिल चला रही थीं.

हम आपको उस रैली की कुछ तस्वीरें दिखा रहे हैं. इन तस्वीरों को एक महिला की गरिमा का ध्यान रखते हुए संपादित किया गया है. आप देख सकते हैं कि कैसे मीनल इस रैली में शामिल होकर बहुत खुश नजर आ रही हैं.

 

ट्रंप को उनकी पत्नी ने किया सरेआम बेइज्जत

इन दिनों सोशल मीडिया पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है. ट्रंप अपनी पत्नी के साथ इस्राइल दौरे पर निकले हुए हैं. इसी सिलसिले अपनी ट्रिप के तीसरे दिन डोनाल्ड इजरायल पहुंचे. इजरायल के बेन गुर्रियन एयरपोर्ट पर जब डोनाल्ड ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया तो मेलिना ने उनका हाथ झटक दिया. जबकि इसी समय इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पत्नी का हाथ पकड़ रखा था.

मेलानिया का सैकड़ों कैमरों के सामने इस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति का ‘बेरहमी’ से हाथ झटक देना सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर लोगों का पूरा ध्यान दोनों की बॉडी-लैंग्वेज पर रहा और सभी ने इस ओर इशारा किया कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी पत्नी को एक कदम पीछे छोड़कर इस्राइली दंपति के साथ चल रहे थे.

अफसरों की आंकडेबाजी में उलझे योगी आदित्यनाथ

महापुरुषों के नाम पर छुट्टियां रद्द करने से उत्तर प्रदेश की सरकार को 50 हजार करोड का लाभ होगा. यह अफसरों द्वारा तैयार की गई आंकड़ों की ऐसी बाजीगरी है जिससे योगी सरकार खुश होकर अपनी पीठ थपथपा रही है. सरकार को खुश करने की कला जानने वाले अफसर योगी सरकार को भी अपनी आंकड़ों की बाजीगरी दिखा रहे हैं. जिसमें गुमराह होकर सरकार खुश है. इसका जनता को क्या लाभ होगा यह दिखाई नहीं दे रहा है. छुटिट्या खत्म होने से काम की क्षमता बढ़ती है. यह सरल सा नियम है. सरकार के आधे से ज्यादा विभाग अनुउत्पादक काम करते हैं. ऐसे में उनसे यह लाभ कैसे मिलेगा सोचने वाली बात है. अगर महापुरुषों के नाम से छुट्टियां खत्म होने से इतना लाभ है तो सरकार को चाहिये कि धार्मिक आधार पर दी जाने वाली छुट्टियों को कम करके कुछ और लाभ कमाने की कोशिश करे जिससे उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की श्रेणी से जल्दी बाहर निकाला जा सके.

योगी सरकार ने महापुरुषों के नाम पर होने वाली छुट्टियों को खत्म किया तो अफसरो ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ को यह बता दिया कि इससे उत्तर प्रदेश सरकार को 50 हजार करोड़ का लाभ होगा. देखिये अफसरों ने यह मुनाफा दिखाया कहां से है. विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण का जवाब देते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी सरकार की जीडीपी करीब रुपये 12 से 12.50 लाख करोड वार्षिक के बीच की है. इस हिसाब से एक महीने में एक लाख करोड का राजस्व मिलता है. 15 दिन की छुट्टियां खत्म होने पर करीब 50 हजार करोड़ का मुनाफा होगा.

दो माह के बाद भी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी मनपसंद अफसरों की टीम का गठन नहीं कर पाये हैं. पुलिस विभाग में जिस तरह से अफसरों की तैनाती की गई उनके रैंक को लेकर सवाल उठने लगे हैं. प्रशासनिक अफसरों में वह कोई बड़ा बदलाव नहीं कर पा रहे हैं. शुरुआती दौर में केन्द्र सरकार से वापस लौटे अफसरों को प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी दी गई, पर उसका कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है. न चाहने के बाद भी मुख्यमंत्री योगी को पुरानी सरकार में खास पदों पर रहे नौकरशाहों को यहां भी बड़ी जिम्मेदारी देने पर मजबूर होना पड़ रहा है. अफसर भी अब ऐसी बातों पर जोर देने लगे है जिनको सुनकर मुख्यमंत्री खुश हों.

पुलिस के एक अधिकारी का बयान आया कि ‘पुलिस उन सड़कों पर सघन चेकिंग अभियान चलायेगी, जहां से पशुओं को लाया ले जाया जाता है.’ उत्तर प्रदेश में अपराध और कानून व्यवस्था को लेकर योगी सरकार के दावे हवा हो रहे हैं. सरकार के खिलाफ जनता सड़कों पर है. ऐसे में अफसर इस बात को लेकर सर्तक हैं कि किसी पशु के खिलाफ कुछ गलत न हो. ऊर्जा विभाग के अफसरों के दावे में आकर मुख्यमंत्री ने सभी जिलों को ज्यादा बिजली देने की घोषणा कर दी. हालत यह है कि बिजली की कमी से पूरा प्रदेश परेशान है. सरकार इस बात को मानने को तैयार नहीं है.

असल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा अच्छी है. वह कहते हैं ‘यह पद मेरे लिये दायित्व है. आभूषण नहीं, कर्तव्य है प्रतिष्ठा है पर साथ ही साथ परीक्षा भी है’. योगी के अफसर अपने काम से मुख्यमंत्री की तारीफ पाने के लिये ऐसे काम कर रहे हैं जिससे योगी खुश रहें. अतिउत्साह में किये जाने वाले काम योगी सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी शहीद के घर सात्वंना देने गये तो वहां प्रशासन ने एसी से लेकर तमाम तरह के इंतजाम कर दिये. मुख्यमंत्री के वापस आते ही प्रशासन ने वह सब सामान घर से हटवा लिया. जो एक तरह से शहीद का अपमान सा लगा. मुख्यमंत्री योगी को ऐसे अफसरों की करतूतों से सावधान रहना चाहिये. काम भले ही अफसर करते हो पर इनका परिणाम नेताओं को ही भुगतना पड़ता है.

कभी भैंस चराता था भोजपुरी का ये स्टार

छपरा के रहने वाले भोजपुरी एक्टर खेसारीलाल यादव जिन्हें कभी सानिया मिर्जा ने जेल भिजवा दिया था और उन्हें तीन दिनों तक जेल में ही रहना पड़ा था. आज खेसारी लाल यादव एक शो के लिए दस लाख रुपये लेते हैं. आजकल खेसारी लाल यादव की नई फिल्म ‘मैं सेहरा बांध के आऊंगा’ की इन दिनों शूटिंग चल रही है. फिल्मों के अलावा खेसारी इंडिया के अलावा उन देशों में भी शोज करते हैं जहां बड़ी संख्या में बिहार और यूपी के लोग रहते हैं. खेसारी यहां एक शो के लिए करीब 10 लाख रुपए चार्ज करते हैं.

बता दें कि इन्होंने सानिया मिर्जा पर बेस्ड एक गाना गया था जिसके बाद सानिया ने इनपर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था. मामले में खेसारी को तीन दिनों तक जेल में भी रहना पड़ा था.

बचपन में चराते थे भैंस

खेसारी बिहार के छपरा के रहने वाले हैं. वे फैमिली के खर्च के लिए दिल्ली में लिट्‌टी की दुकान चलाते थे, वहीं बचपन में भैंस चराते थे. खेसारी फिल्मों में काम करने से पहले भोजपुरी गाना गाते थे. एक गाने ने खेसारी को रातोंरात फेमस कर दिया था. साल 2008 में खेसारी का गाना ‘भौजी केकरा से लड़ब पिया अरब गईले ना’ हिट था. इस गाने की 70-80 लाख सीडी की बिक्री हुई थी.

दिल्ली में थी लिट्टी की दुकान

एक इंटरव्यू में खेसारी ने बताया था कि दिल्ली में काम के दौरान उनकी शादी हो गई थी. इसके बाद लिट्टी के दुकान पर उनके काम में पत्नी भी हेल्प करतीं थीं. उन्होंने बताया था कि इस दौरान वे कम्पिटीशन की तैयारी में भी लगे थे. करीब ढाई साल के बाद खेसारी का सिलेक्शन बीएसएफ में हो गया. लेकिन उनका इस नौकरी में मन नहीं लगा और नौकरी छोड़ वे दोबारा दिल्ली पहुंचे. यहां काम कर कुछ पैसे बचाए और फिर अपना भोजपुरी एलबम निकाला.

पहली फिल्म के लिए मिले थे 11 हजार रुपए

खेसारी ने बताया कि उनकी पहली फिल्म ‘साजन चले ससुराल’ थी जिसके लिए बतौर फीस उन्हें 11 हजार रुपए मिले थे. खेसारी की पहली फिल्म ‘साजन चले ससुराल’ सिल्वर जुबली हुई. इसके बाद कई फिल्मों का ऑफर मिलने लगा. बता दें कि खेसारी अबतक 60 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं.

लाइव शो में निरहुआ ने किया आम्रपाली को किस

भोजपुरी फिल्म के फेमस एक्टर दिनेश लाल यादव और एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे का हॉट वीडियो आजकल सोशल मीडिया में वायरल हो गया है. इस वीडियो के बारे में बताया जा रहा है कि यह दोहा शो का है. इस लाइव शो के वीडियो में भोजपुरी के गाने टेबल पर लेबल मिली गाने पर दिनेश आम्रपाली को किस कर रहे हैं. इस दौरान दर्शक वाह-वाह कर रहे हैं.

इस हॉट वीडियो में दिनेश लाल ने आम्रपाली को डांस के दौरान कई बार पकड़ा. फिर किस किया और गोद में भी उठाया. जिसके बाद दर्शक दीर्घा से वाह-वाह की आवाजें आने लगीं. फिर भी इस दौरान दोनों ने डांस को पूरा किया.

बता दें कि दोहा में लाइव शो का आयोजन 17 मार्च को किया गया था. इस शो में शामिल होने के लिए एक्ट्रेस आम्रपाली दुबे, काजल राघवानी, अंजना सिंह, आइटम डांसर सीमा सिंह भी गई हुई थी. एक्टर दिनेश लाल यादव इनके भाई प्रवेश लाल यादव और खेसारी लाल यादव समेत कई कलाकार भी दोहा गए हुए थे.

इस  लाइव शो को देखने के लिए भारी संख्या में बिहार और यूपी के लोग पहुंचे हुए थे. इससे पहले भी ये सभी स्टार दोहा में स्टेज शो कर चुके हैं. इस लाइव शो में दर्शकों की काफी भीड़ थी, सबने खूब इंज्वॉय किया.

11 साल की उम्र में हुआ यौन शोषण : मोनालिसा

भोजपुरी की हॉट एक्ट्रेस व बिग बॉस फेम मोनालिसा ने अपने बारे में बड़ा खुलासा किया है. एक कार्यक्रम में उन्‍होंने बताया कि 11 साल की उम्र में वे सेक्सुअल अब्यूज का शिकार हुईं थीं. एक साधारण बंगाली परिवार से ताल्‍लुक रखने वाली मोनालिसा को उनकी मां ने ही डांस और गायन की शिक्षा दी. जब वे 16 साल की थीं, तब एक रेस्टारेंट से होस्टेस बन गईं. आगे उन्‍होंने कोलकाता के कुछ होटलों में ‘गेस्ट रिलेशन एग्जिक्यूटिव’ का काम किया. इसी दौरान प्रॉडयूसर्स और इंवेंट कंपनी के लोगों से उनकी जान-पहचान हुई. उन्‍हें एक्टिंग के ऑफर मिलने लगे.

मोनालिसा के अनुसार इसके बाद उन्‍होंने बंगाली सीरियल्स में काम किया. साथ ही एक फिल्म में आइटम डांस भी किया. फिर, मुंबई जाने का फैसला किया. वहां उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. मोनालिसा ने बताया कि उन्होंने मुंबई जाकर एक मूवी में एक छोटा कैरेक्टर रोल तथा एक भोजपुरी फिल्म में सपोर्टिंग रोल किया.

साल 2004 में मोनालिसा मुंबई में सेटल हो गईं. वहां पहले-पहल कुछ पंजाबी वीडियोज तथा बी-ग्रेड फिल्मों में काम किया. फिर, भोजपुरी फिल्मों में ब्रेक मिला.

मोनालिसा ने बताया कि करीब 11 साल उम्र में वे परिवार के साथ कोलकाता घूमने गईं थीं. उस दौरान एक व्‍यक्ति ने बहाने से उन्‍हें सेक्सुअली अब्यूज किया था. मोनालिसा के अनुसार उस उम्र में उन्‍हें इन चीजों की समझ नहीं थी. तब वह घटना उनके लिए काफी चौकाने वाली थी.

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