मां बाप ने कहा, शूट करो मेरी बेटी का न्यूड सीन..!

मां बाप ने कहा, शूट करो मेरी बेटी का न्यूड सीन. जी हां इस बॉलीवुड की इस एक्ट्रेस के मां बाप ने ही उसको न्यूड सीन करने के लिए प्रेरित किया है. इन दिनों मराठी फिल्म एक्ट्रेस नेहा महाजन का एक न्यूड वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में नेहा ने अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी हैं. इसमें नेहा बेड से बाथरूम में जाती दिख रही हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने एक कपड़ा भी नहीं पहन रखा है. नेहा ने यह न्यूड वीडियो एक मलयालम फिल्म ‘छायम पोस्सिया विदु’ के लिए शूट किया था. लेकिन इस आपत्तिजनक सीन के कारण फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पास नहीं किया.

साल 2015 में ‘द पेंटेड हॉउस’ नॉवेल पर बेस्ड ‘छायम पोस्सिया विदु’ नाम की एक मलयालम फिल्म बनी थी. फिल्म में कई न्यूड सीन होने की वजह से सेंसर बोर्ड ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी. सेंसर बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने के लिए इन दृश्यों को हटाने की शर्त रखी, जिसे फिल्म के निर्माताओं ने खारिज कर दिया था. जिसके बाद सेंसर बोर्ड से फिल्म को इंडिया में बैन कर दिया था. लेकिन एक साल बाद फिल्म के ये एडल्ट सीन इंटरनेट पर लीक हो गए हैं. लीक हुए इस वीडियो में नेहा बिना कपड़ों के बाथरूम और बेड रूम में नजर आ रही हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म का कुछ हिस्सा अचानक इंटरनेट पर लीक हो गया है. कुछ सेकेंड्स का ये वीडियो बेहद अश्लील है. वीडियो वायरल होने के बाद से नेहा सुर्खियों में आ गई हैं. इस पूरे मामले पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “किरदार की जरुरत थी, इसलिए न्यूड सीन किया. लेकिन इस सीन के लिए मैंने अपने माता-पिता से पहले ही चर्चा की थी. इसमें कोई अश्लीलता नहीं है.”

जब कैटरीना ने दिए बोल्ड और बिकिनी सीन

साल 2003 में फिल्म ‘बूम’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाली कैटरीना आज बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार हैं. उनकी पहली फिल्म बूम बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही थी. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और गुलशन ग्रोवर भी थे. कैटरीना ने इस फिल्म में बेहद कामुक और उत्तेजक सींस देकर बॉलीवुड में खलबली मचा दी थी लेकिन फिल्म को उसका कोई लाभ नहीं मिल पाया था.

फिल्म बूम में बोल्ड और बिकिनी सीन से सुर्खियां बटोरने वाली कैटरीना कैफ रील से ज्यादा रियल लाइफ में बिकिनी पहनना ज्यादा पसंद करती हैं. रणबीर के साथ वेकेशन वाली उनकी बिकिनी की पिक्चर देखकर उनके फैन्स को तो यही लगा था. हालांकि कैटरीना मॉडलिंग के दिनों में भी कई बिकिनी के शूट करा चुकी हैं, लेकिन बूम के बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में बोल्ड सीन और बिकिनी पहनने से परहेज ही किया है.

हालांकि मिस्टर परफेक्शनिस्ट के साथ धूम में काम करते हुए उन्होंने कई बोल्ड सीन दिए और फैन्स ने उनके बिकिनी लुक को भी काफी पसंद किया. खबरें आ रही हैं कि कैटरीना जग्गा जासूस में भी बिकिनी में नजर आएंगी. बता दें कि कैटरीना बॉलीवुड में उनकी डेब्यू फिल्म सलमान खान के साथ मैंने प्यार क्यूं किया को मानती हैं, लेकिन उन्होंने बूम से बॉलीवुड में डेब्यू किया था.

कैटरीना ने मॉडलिंग के दिनों में कई छोटे-बड़े प्रोजेक्ट किए हैं. इस दौरान उन्होंने बिकिनी शूट भी किया है. कहा जाता है कि इंडस्ट्री में कोई गॉडफादर नहीं होने की वजह से कैटरीना ने बूम जिसे सॉफ्ट पोर्न भी कहा गया था, में भी काम किया.

बूम के बाद कैटरीना की मुलाकात सलमान खान से हुई और उन्होंने कैटरीना को मैंने प्यार क्यूं किया के लिए अप्रोच किया. कई इंटरव्यू में कैटरीना कह चुकी हैं कि उनके फिल्मी कैरियर में वो बूम को नहीं गिनती हैं. बूम में उनके और गुलशल ग्रोवर के हॉट सीन ने काफी कॉन्ट्रोवर्सी क्रिएट की थी. एक इंटरव्यू में गुलशन ग्रोवर ने कहा था कि उन्होंने कैटरीना के साथ किस सीन के लिए दो घंटे रिहर्सल की थी. कैटरीना सलमान को आज भी अपना मैंटर मानती हैं औऱ इंडस्ट्री में आने का क्रेडिट उनको देती हैं.

सलमान के साथ काम करने के दौरान कैटरीना और सलमान के अफेयर की खबरें आई थीं, लेकिन दोनों ने कभी इसे खुलकर स्वीकार नहीं किया. सलमान की शादी के सवाल पर एक बार उनके पिता सलीम खान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि एक्ट्रेस सलमान को काम मिलने के लिए यूज करती हैं.

कैटरीना कहती हैं कि बॉलीवुड में डेब्यू करते टाइम उन्हें हिंदी सिनेमा के बारे में कुछ भी नहीं पता था, इसीलिए उन्होंने बूम जैसी फिल्म साइन कर ली थी. कैटरीना को अब बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस में काउंट किया जाता है. उनके और रणबीर के अफेयर की खबरें उस वक्त पक्की हो गई थीं, जब उनकी रणबीर के साथ सीक्रेट वेकेशन की पिक्चर लीक हो गई थी.

खैर ये सब छोड़िए और अब आइये मुद्दे की बात पर. आज हमको जो वीडियो दिखाने जा रहे हैं, उसे देखकर आप यकीन मानेंगे की कैटरीना अपनी पहली फिल्म से ही  बेहद हॉट थी.

आप भी देखिए ये वीडियो…

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तर्क पर भारी पड़ता जा रहा है धर्म

सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर कहा है कि भारतीय दंड विधान 1973 की धारा 295 ए के अंतर्गत धार्मिक भावनाओं का जो प्रावधान है वह बहुत सीमित है. आज अंधभक्तों की संख्या इस कदर बढ़ती जा रही है कि वे छोटी सी बात पर भी पुलिसस्टेशन या अदालत में लेखकों, संपादकों, खिलाडि़यों फिल्म अभिनेताओं, नेताओं आदि पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में मुकदमे दर्ज करा देते हैं.

मजे की बात यह है कि मुकदमा दर्ज करने वाला अपने शहर में ही मुकदमा डालता है क्योंकि वहीं उस की भावना को ठेस पहुंची थी जबकि अभियुक्त बन जाता है दूरदराज के शहर का जहां वह रहता है या काम करता है. कोर्ट के पूर्व फैसलों के बावजूद पुलिस थाने, छोटी कई अदालतों से सम्मन, वारंट जारी कर दिए जाते हैं कि तुरंत 2-4 दिनों में अदालत में पेश हो जाओ.

सर्वोच्च न्यायालय ने साफ कहा है कि अपराध तब होता है जब जानबूझ कर उत्पात खड़ा करने के मकसद से कुछ कहा, लिखा या दर्शाया गया हो. जानबूझ कर और उत्पात पैदा करने की मंशा  आवश्यक अंश हैं अपराध के. पर न पुलिस वाले इस पर ध्यान देते हैं और न पहली अदालत.

हालांकि दंडप्रक्रिया संहिता में साफ प्रावधान है कि राज्य या केंद्र सरकार की अनुमति ली जाए पर आमजन को इस अनुमति के बिना ही वारंट तक जारी कर दिए जाते हैं. सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय ताक पर धरा रह जाता है.

खिलाड़ी महेंद्र सिंह धौनी को एक पत्रिका द्वारा देवता के रूप में दिखाने पर दर्ज मुकदमे को खारिज कर सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी है. पर असल में खेद की बात तो यह है कि निचली अदालतें सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों पर ध्यान नहीं देतीं और आम आदमी बनाम खास आदमी का सा मामला मान कर बेमतलब का मुकदमा दर्ज कर लेती हैं.

धार्मिक भावनाएं तो होती ही पतले कागज की तरह हैं क्योंकि धर्म का विशाल साम्राज्य कागजी महल है जो कई हजार सालों से कायम है. काल्पनिक कहानियों के सहारे बने धर्मों ने इन हजारों सालों में ज्यादा हत्याएं की हैं, ज्यादा जुल्म ढाए हैं, ज्यादा औरतों को गुलाम बनाया है, ज्यादा भक्तों को लूटा है बनिस्बत चोरों, डाकुओं, लुटेरों या बाहर के आक्रमणकारियों के. दुनिया में जर, जोरू और जमीन के लिए नहीं, ज्यादा लड़ाइयां धर्म के नाम पर हुई हैं.

आज विश्वभर में धर्म की आग जल रही है. भारत भी पूरी तरह सुलग रहा है. धर्मजनित जातिव्यवस्था या संप्रदायों के विभाजन से आज पड़ोसी भी दुश्मन बन गए हैं. विज्ञान और तर्क का जो ज्ञान का प्रकाश पिछली 4 शताब्दियों में चमका था, आज धर्म के काले जहरीले धुएं में फीका पड़ गया है.

तमन्ना का ये वीडियो बेहद हॉट है, संभलकर देखें

फिल्मी बाहुबाली के पहले भाग में जिस अवंतिका की सुंदरता पर फिदा होकर बाहुबली पर्वत को पार कर लेता है, उसी अवंतिका यानी तमन्ना की खूबसूरती के आजकल इंटरनेट पर खूब चर्चे हैं.

बाहुबली फिल्म के पहले भाग में बाहुबली और अवंतिका की कैमिस्ट्री में डायरेक्टर ने तमन्ना की खूबसूरती को बेहद सलीके और सादगी से पेश किया था. वे इस फिल्म में बेहद खूबसूरत लग रही थी.

लेकिन इन दिनों तमन्ना का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है, जिसमें वो बहुत ही हॉट अंदाज में नजर आ रही हैं..

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मुंबई की रहने वाली इस पंजाबी कुड़ी को बचपन से ही ऐक्टिंग का शौक था. वे 12 साल की उम्र से थिएटर करने लगी थीं. उनके स्कूल में एक प्रोड्यूसर के बच्चे भी पढ़ते थे. जब उस प्रोड्यूसर ने उन्हें स्कूल के सालाना जश्न में देखा तो अपनी अगली फिल्म में ले लिया. इस तरह तेरह साल की उम्र में ही उन्हें अपनी पहली फिल्म मिली. फिल्म का नाम था ‘चांद सा रोशन चेहरा’ (2005).

बारहवीं क्लास तक पढ़ीं तमन्ना के करियर में उनकी पहली तीन फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर दम तोड़ने के बाद डायरेक्टर शेखर कमुला की ‘हैपी डेज’ (2007) से बदलाव आया. कॉलेज लाइफ पर बनी इस फिल्म ने उन्हें आंध्र प्रदेश के युवा दिलों की धड़कन बना डाला. उनका फलसफा है कि काम करते रहो. इस पर अमल करते हुए वे तमिल और तेलुगु फिल्मों में अभिनय कर आगे बढ़ती रहीं. नतीजा आज वे तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री की चहेती बन गई हैं.

तेलुगु के सभी बड़े स्टार्स के साथ काम कर चुकी हैं. चिंरजीवी के बेटे राम चरण तेजा (रच्छा), चिरंजीवी के छोटे भाई पवन कल्याण (कैमरामैन गंगा तो रामबाबू), अलु अर्जुन (बदरीनाथ), जूनियर एनटीआर (ऊसरावेली), नागार्जुन के बेटे नागा चैतन्य (100 परसेंट लव) और अब प्रभास.

तमन्ना के लिए हैदराबाद का शुरुआती सफर आसान नहीं रहा. उस समय उन्हें न तेलुगु और न ही तमिल आती थी. तमन्ना ने ट्यूटर रखकर दोनों भाषाएं सीखीं. बचपन से ही श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित को रोल मॉडल मानने वाली तमन्ना योग करती हैं और इंडियन फूड की शौकीन हैं. फिल्में देखना, डांसिंग और बुक्स पढ़ने का उन्‍हें शौक है. कम ही लोग जानते हैं कि उन्हें शायरी करने और पतंगें उड़ाने में भी मजा आता है.

उनका ड्रीम रोल है, संजय लीला भंसाली का डायरेक्शन हो और रितिक रोशन उनके हीरो हों. हर कलाकार की तरह नेशनल अवॉर्ड जीतना उनकी चाहत है.

सनी लियोन का ये वीडियो देखकर आप भी शर्मा जाएंगे

सनी लियोन को देखने के लिया हर बूढ़ा और जवान मचल उठता है और जब सनी कभी कभी हरकतें कुछ ऐसी कर जाती है की देखने वाला वैसे ही दीवाना हो जाये. हम भी एक मूवी में से कुछ ऐसा ही सीन लेकर आये है. जिसमे सनी पहले तो साडी में मस्त लग रही थी. पर उसके बाद उन्होंने कुछ ऐसा कर दिया की देखने वालो की आंखे फटी की फटी रह गई.

आप भी देखें ये मदमस्त कर देने वाला वीडियो…

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सचिन ए बिलियन ड्रीम्स : बेहतरीन डाक्यूड्रामा

क्रिकेटर एम एस धोनी की बायोपिक फिल्म ‘‘एम एस धोनी अनटोल्ड स्टोरी’’ को मिली अपार सफलता के बाद अब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले क्रिकेटर सचिन तेंडुलकर के जीवन पर फिल्मकार जेम्स अर्कस्क्रीन डाक्यूड्रामा फिल्म ‘‘सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स’’ लेकर आए हैं. दोनों ही फिल्में क्रिकटरों की होने के बावजूद बहुत अलग हैं. इसलिए दर्शक को इन दोनों फिल्मों की तुलना करने से बचना होगा. क्योंकि ‘‘एम एस धोनी अन टोल्ड स्टोरी’’ में क्रिकेटर एम एस धोनी की कहानी में कल्पना का पुट भी था. जबकि ‘सचिनःए बिलियन ड्रीम्स’ में कुछ भी काल्पनिक नहीं है.

फिल्म ‘‘सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स’’ एक मध्यमवर्गीय परिवार के लड़के की अपने परिश्रम के बलबूते शोहरत की बुलंदियो पर पहुंचने की दास्तान है. जो कि हर इंसान खास तौर पर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का सबक बन सकती है. इस फिल्म में सचिन की मेहनत, ईमानदारी, सकारात्मक सोच का चित्रण है. सचिन ने तुरंत सफलता पाने के लिए जोड़तोड़ यानी कि शार्ट कट रास्ता नहीं अपनाया. मगर जैसा कि हर इंसान की आटोबायोग्राफी की किताब में उसके जीवन के नकारात्मक पहलुओं पर कम बात होती है, उसी तरह इस फिल्म में भी कुछ कमियां नजर आती हैं. मसलन-बचपन के दोस्त सचिन और विनोद कांबली के बीच करियर के लगभग अंतिम पड़ाव के वक्त  जो दरार आयी थी, उस पर यह फिल्म कुछ नहीं कहती. जबकि सचिन व विनोद कांबली की लंबी पारी का जिक्र यह फिल्म करती है. वैसे इस फिल्म में सचिन की जिंदगी के कई वास्तविक वीडियो समाहित किए गए हैं.

फिल्मकार जेम्स अर्कस्क्रीन ने फिल्म की शुरुआत बहुत भावनात्मक मोड़ से की है. शुरुआत एक वीडियो से होती है, जिसमें सचिन अपनी बेटी सारा को गोद में लिए हुए हैं. उस वक्त पहली बार अपनी बेटी को गोद में लेते हुए सचिन ने कहा था-‘मुझे बहुत डर लग रहा है, इसे पकड़ने में.’ उसके बाद कहानी सचिन के बचपन में चली जाती है. बचपन में वह बड़े शरारती थे, पर जब उनकी बड़ी बहन कश्मीर से लाया गया बैट यानी कि बल्ला उपहार में सचिन को देती हैं और यहीं से सचिन की जिंदगी बदल जाती है.

फिर सचिन के बड़े भाई अजीत तेंडुलकर उन्हे लेकर क्रिकेट के कोच रमाकांत आचरेकर के पास जाते हैं. पहली ही गेंद पर सचिन के स्टैंप धराशाही हो जाते हैं. तब अजीत, रमाकांत आचरेकर से कहते हैं कि सचिन जल्द ही तकनीक सीख लेगा. फिर मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे की इच्छा, महत्वाकांक्षा, हंसी, खुशी, संघर्ष और गम आदि का जिक्र हो जाता है. अपने कोच आचरेकर से क्रिकेट सीखने से लेकर पहले मैच तक पहुंचने, जो कि पाकिस्तान के खिलाफ था, की कथा नाटकीय ढंग से चित्रित की गयी है. उसके बाद फिल्म में ज्यादातर वीडियो ही दिखाए गए हैं. बीच बीच में सचिन सूत्रधार के रूप में आते रहते हैं.

फिर वह वीडियो आता हैं, जिसे क्रिकेटर सचिन के खेल की पहचान कहा जाता है. और उससे प्रभावित होकर रमाकांत आचरेकर, अजीत से पूछते हैं कि ‘नाम क्या बताया तुम्हारे भाई का’, जिसका जवाब कंमेटेटर टोनी ग्रेग की घोषणा में आता है-सचिन तेंडुलकर. कहानी पहुंच जाती है 1983 के विश्व कप क्रिकेट तक. जिसने सचिन की जिंदगी को नई दिशा दी. वह क्रिकेट को जिंदगी मानते हुए विश्व कप जीतने का सपना देखने लगे. कई मैच के वीडियो सचिन के सपनों व उनके क्रिकेट को परदे पर पेश करते हैं. मसलन-वासिम अकरम और वकार युनुस का सचिन को चिढ़ाना, एक नौसीखिए गेंदबाज की गेंद का सचिन की नाक पर लगना तथा सचिन का कहना कि ,‘‘मैं अपने देश को नीचे आने नहीं दे सकता और न ही क्रीज छोड़कर जा सकता हूं.’

1996 में ईडेन गार्डेन पर खेले गए ‘विश्व कप सेमी फाइनल’ सहित कई मैच के वीडियो नजर आते हैं. फिर भारतीय क्रिकेट टीम के कैप्टन के पद से हटाए जाने पर सचिन अपनी बेबाक राय रखते हैं. वह कहते हैं-कैप्टनशिप छीनी जा सकती है, पर क्रिकेट नहीं.’ फिर 1999 में खेले गए कई मैचों के रोचक पल नजर आते हैं. इंटरवल से पहले वह सीन आता है, जब अपने पिता का अंतिम संस्कार कर सचिन किक्रेट के लिए वापस इंग्लैंड पहुंचते हैं. क्योंकि वह मानते हैं कि उनके पिता भी यही चाहते कि वह देश के लिए खेले. पर पिता को खोने का दर्द उस वक्त स्पष्ट रूप से उनके चेहरे पर झलकता है, जब उनकी पत्नी अंजली होटल के कमरे में पिता के देहांत की खबर देती हैं. और दर्शक भी अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक पाता.

उसके बाद सचिन व अंजली के बेटे अर्जुन तेंडुलकर के जन्म की कहानी, सचिन उसे महान क्रिकेटर बनाने के लिए किस तरह ट्रेनिंग देते हैं, और सचिन के परिवार वालों को लगता है कि सचिन के पिता अर्जुन के रूप में वापस आ गए हैं. फिर सचिन के करियर का कठिन पड़ाव शुरू होता है, जब उन्हे दूसरी बार भारतीय क्रिकेट टीम का कैप्टन बना दिया जाता है. मैच फिक्सिंग का दौर चरम पर था. हर क्रिकेटर इस डर के साथ खेल रहा थाकि उनके खिलाफ कभी भी जांच हो सकती हैं, दूसरी तरफ सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड, अनिल कुंबले, वीवीएस लक्ष्मण उभर रहे थे. जबकि मोहम्मद अजहरूद्दीन जैसे कुछ क्रिकेटर उनकी बात नहीं मान रहे थे. फिल्म में उनके करियर के पतन का भी जिक्र है. अखबारों में उनके पतन की सुर्खियों का भी जिक्र है, पर उस वक्त उनके दोस्तों ने उनका साथ दिया. 2007 में शर्मनाक हार के बाद 2011 विश्व कप जीतने की मेहनत को भी बेहतर तरीके से दिखाया गया है. अंततः वानखेड़े स्टेडियम में सचिन का क्रिकेट से संन्यास लेने के अति भावुक सीन के साथ फिल्म खत्म होती है और दर्शक मंत्रमुग्ध रह जाता है.

फिल्मकार ने सचिन के जीवन के तमाम पहलुओं को बहुत ही बेहतरीन तरीके से फिल्म के अंदर पिरोया है. आम बालीवुड फिल्मों से हटकर इस फिल्म में सचिन के जीवन को काफी यथार्थपरक तरीके से पेश किया गया है. सचिन के जीवन व करियर के उतार चढ़ाव कई जगहों पर सपनों की दुनिया सी लगती है, जबकि वह यथार्थ है. फिल्मकार ने सचिन को ही ज्यादा महत्व दिया. उन्हे एक अच्छा पुत्र, एक अच्छा पिता, एक अच्छा पति दिखाया है, पर सचिन व अंजली की प्रेम कहानी पर फिल्म कुछ नही कहती. फिल्म में क्रिकेट के काले अध्याय का भी ज्रिक है. मगर सचिन को जब सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड और धोनी के कैप्टनशिप में खेलना पड़ा, उन दिनों की उनकी मानसिक स्थिति पर कोई बात नही करती. मो.अजहरूद्दीन के साथ विवाद को ठीक से चित्रित नहीं किया गया. संगीत के प्रति सचिन के लगाव का भी जिक्र अच्छे ढंग से किया गया है. फिल्म में सुनील गावसकर, कपिल देव व रवि शास्त्री तथा सचिन के प्रशंसक के रूप में अमिताभ बच्चन और सचिन की पत्नी अंजली के इंटरव्यू भी हैं.

एक बेहतरीन डाक्यूड्रामा वाली फिल्म बनाने के लिए निर्देशक जेम्स अर्कस्कीन के साथ ही लेखक जेम्स अर्कस्क्रीन व शिवकुमार अनंत बधाई के पात्र हैं.

जहां तक फिल्म को दर्शक मिलने का सवाल है, तो इस पर कुछ भी ठोस कहना मुश्किल है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि आज की नई पीढ़ी ने सचिन के बल्ले का कमाल देखा नहीं है. आज की नई पीढ़ी को पता ही नहीं है कि सचिन को क्रिकेट का भगवान क्यों कहा जाता है. दूसरी बात यह फिल्म डाक्यूड्रामा है. जिसमें नाटकीयता नहीं है, जो मनोरंजन दे, पर क्रिकेट प्रेमियों को फिल्म पसंद आनी चाहिए.

दो घंटे 19 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘सचिनः ए बिलियन ड्रीम्स’’ के निर्माता रवि भागचंदका व  कार्निवल मोशन सिनेमा, लेखक व निर्देशक जेम्स आर्कस्क्रीन, संगीतकार ए आर रहमान हैं. फिल्म के कलाकार हैं-सचिन तेंडुलकर, अर्जुन तेंडुलकर, मयूरेश पेम, महेद्र सिंह धोनी, अंजली तेंडुलकर, वीरेंद्र सहवाग, सारा तेंडुलकर.

पूनम पांडे की ये आग लगाती तस्वीरें देखीं आपने

पूनम पांडे आमतौर पर मीडिया में बने रहने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाती हैं और सोशल मीडिया में उनके कई सारे बोल्ड वीडियोज भरे पड़े हैं. कुछ समय पहले उन्होंने 20 मिनिट की मोबाइल एडल्ट फिल्म भी बनाई थी. अपनी बोल्ड अदाओं के लिए फेमस पूनम पांडे ने खुद का एक एप भी शुरू किया था.

खैर, हम बात करने जा रहे हैं पूनम पांडे की उन नई तस्वीरों की जिन्होंने इंस्टाग्राम पर आग लगा रखी है.

आप भी देखिए ये तस्वीरें

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मेट्रो या ट्रेन में चढ़ने से पहले एक बार देख लें ये वीडियो

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जो कि मुंबई लोकल ट्रेन का है. ये बात तो सभी जानते हैं कि हर रोज लाखों लोग मुंबई लोकल ट्रेन में सफर करते हैं. यहां रहने वाले लोगों के लिए लोकल ट्रेन काफी महत्वपूर्ण होती हैं.

आपको बता दें कि मुंबई की लोकल ट्रेन में जितनी भीड़ होती हैं उतनी ज्यादा भीड़ कहीं और नहीं होती. ज्यादा भीड़ के चलते हर रोज मुंबई लोकल ट्रेन में हादसे भी होते रहते हैं. जिसमे लोग अपनी जान तक गवां देते हैं. आज हम आपको एक वीडियो दिखने जा रहे हैं जो कि एक महिला के साथ हुए हादसे का वीडियो है.

आपको बता दें कि मुंबई लोकल ट्रेन में लोग काफी तेजी से चढ़ते हैं और तेजी से उतरते हैं. 1 मिनट जब लोकल रुकती है तब लाखों लोग एक समय पर लोकल से उतरते हैं तो लाखों लोग उसी समय लोकल में चढ़ते भी हैं. इस दौरान लोग काफी जल्दबाजी करते हैं और अपनी जान तक गवां देते हैं.

अब एक महिला भी ऐसे ही तेजी से लोकल में चढ़ने वाली थी तभी लोकल वहां से छूट गयी. वो महिला दरवाजे से लटकी रहीं और काफी चिल्लाने लगी. उसे देखते ही लोगों ने लोकल को रुकवाया. फिर ड्राईवर ने लोकल को रोक दिया. लोगों ने काफी आवाज लगाई जिस वजह से ड्राईवर ने लोकल को तुरंत रोक दिया. इस वजह से उस महिला की जान भी बचाई गयी.

आप भी देखें वीडियो

अपने आधे कटे सिर को पकड़ कर बैठा रहा ये लड़का

ब्राजील की एक ऐसी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसे देखकर आपका दिल दहल जाएगा. वीडियो देखकर आप हैरत में पड़ जाएंगे कि आखिर कोई कैसे इतना कुछ होने के बाद भी जिंदा रह सकता है. दरअसल मामला कुछ इस तरह है. ब्राजील में एक 18 साल के लड़के Pablo Patrik de Souza नाम के युवक पर इतनी बेरहमी से किसी धारदार चीज से हमला किया की उसकी गर्दन कट गई.

बदमाशों ने युवक पर इतनी बेहरमी से हमला किया जो वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है. इस लड़के के आधे सिर को लुटेरों ने काट दिया है. लेकिन आप और ज्यादा हैरान रह जाएंगे जब आपको पता चलेगा कि Pablo घबराया नहीं और पूरी रात वहीं अपने सिर को पकड़ कर बैठा रहा. इस वीडियो को साउथ ब्राजील में पुलिस ने शूट किया है. वीडियो में De Souza अपने आधे कटे हुए सिर को पकड़े बैठा हुआ है.

वो Penha के Ponta da Vigia में पुलिस को उस वक्त मिला, जब वो आपातकालीन सेवाओं के लिए गश्त लगा रही थी. हमले में बुरी तरह जख्मी De Souza ने बताया कि हमलावरों ने पीछे से उसकी गर्दन पर हमला किया और उसके बाद उसे मृत समझ कर जंगल की झाड़ियों में फेंक दिया. कुछ वक्त के लिए उसने अपनी सांसे रोक लीं और चुपचाप लेटा रहा. सुबह होते ही वो सड़क के किनारे पहुंच गया, जहां वो आपातकालीन सेवाओं के लिए ऑफ ड्यूटी ऑफिसर के संपर्क में आया.

आप भी देखिये वीडियो…

राधिका आप्टे का एडल्ट वीडियो लीक

मुंबई पुलिस की सायबर सेल में अनुराग कश्यप ने एफआईआर दर्ज कराई है. इसका कारण एक्ट्रेस राधिका आप्टे के एक एडल्ट वीडियो का वायरल हो जाना है. ये वीडियो अनुराग कश्यप की बनाई शॉर्ट फिल्म का हिस्सा है.

इस बात से खासे परेशान हुए अनुराग ने कहा कि यह फिल्म उन्होंने विदेश में दिखाने के लिए बनाई थी. वीडियो का लीक हो जाना एक कलाकार के काम के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. यह फिल्म इंटरनेशनल मार्केट में रिलीज करने के उद्देश्य से बनाई गई थी और इसकी कहानी भी एक सत्य घटना से प्रेरित थी. यह एक मजबूत फिल्म है.

उन्होंने बताया ‘इस सीन को नॉन सेक्सुअल तरीके से फिल्माए जाने में ही बहुत ज्यादा समय लग गया. इसलिए हम इसे फिल्माने में जो भी सावधानी बरत सकते थे हमने बरती.’

अनुराग ने कहा, ‘ऐसी एक्ट्रेस को खोज पाना ही कोई सरल काम नहीं था, क्योंकि इस सीन को करने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए थी. पूरे शूटिंग क्रू में महिलाएं ही शामिल थीं क्योंकि हम जानते थे कि हम जो बनाने जा रहे हैं वो बहुत ही संवेदनशील है. पोस्ट प्रोडक्शन की हर स्टेज पर भी लड़कियां ही शामिल थीं. पोस्ट प्रोडक्शन की हर स्टेज पर संवेदनशील दृश्यों को या तो ब्लैक कर दिया गया या फिर पिक्सल्ड कर दिया गया.’

उन्होंने कहा ‘ऐसे में किसी को भी नहीं पता है कि आखिर फिल्म के किस हिस्से में यह सीन है. और हर कोई जानता है कि यह एक इंडियन फिल्म है सो यह निश्चित रूप से पिक्सल्ड होगी. सभी तरह की देखभाल करने के बाद एक महीने पहले ही फिल्म को न्यूयॉर्क मार्केट में भेजा गया. मगर अचानक यह सुनने को मिला कि यह तो ऑनलाइन दिख रहा है जो कि निराशाजनक है.’

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