मैंने 35 साल की एक औरत के साथ लगातार एक महीने तक हमबिस्तरी की है, उस से कुछ होगा क्या.

सवाल
मैं 23 साल का हूं. मेरे रिश्ते की दादी 35 साल की हैं. उन के 4 बच्चे हैं और पति 4 साल पहले गुजर चुके हैं. मैं ने उन के साथ लगातार एक महीने तक हमबिस्तरी की है, उस से कुछ होगा क्या? वे मुझे फोन कर के बारबार बुलाती हैं?

जवाब

35 साल की औरत मजेदार होती है और आप ने महीनेभर मौज की. इस से वे पेट से भी हो सकती हैं. तब आप फंस सकते हैं. बेहतर होगा कि उन के पास न जाएं.

किसने कॉपी किया ईवलिन शर्मा का बिकिनी आइडिया

कुछ महीने पहले ही ईवलिन शर्मा ने स्विमिंग पुल पर हॉट पिंक बिकिनी में अपने कर्व्स दिखाकर, बोल्ड फोटोशूट कराया, पर तब उन्होंने सोचा भी नहीं था कि जल्दी ही उन्हें अब ऐसी किसी प्रतियोगिता का सामना करना पड़ेगा.

हम आपको बता देना चाहते हैं उनकी ये प्रतियोगी कोई और नहीं अभिनेत्री अदिति राव हैदरी ही हैं. अदिति का पिंक बिकिनी पहने फोटोग्राफ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और अब तो ईवलिन के प्रशंसक दोनों की तस्वीरों में समानताएं ढूंढ रहे हैं. सबका कहना यही है कि अदिति ने, ईवलिन को कॉपी किया है.

इस बारे में मीडिया ने जब उनसे बात करनी चाही तो ईवलिन की पब्लिसिटी या पीआर टीम ने ‘ठीक है’ कह कर बात टाल दी. वे कहते हैं ‘फिल्म ‘यारियां’ के लिए हनी सिंह द्वारा गाया गया गाना ‘सनी सनी’ जब से लोकप्रिय हुआ है, तब से ईवलिन को बॉलीवुड की बेस्टबिकिनी गर्ल्स में से एक माना जाता है और पिंक बिकिनी तो ईवलिन का ‘ट्रेडमार्क’ बन गई है. या कह लें कि पिंक बिकिनी ही उनकी पहचान बन गई है.’

कहते हैं कि ईवलिन तब बड़ी खुश होती हैं जब उनके फैंस किसी को भी पिंक बिकिनी में देख उसकी तुलना ईवलिन से कर देते हैं. शायद इसे ही कहते हैं ‘ब्रैंड रिकॉल वैल्यू’. तो क्या ये मान लिया जाए कि ईवलिन शर्मा की पहचान बन गई है ये पिंक बिकिनी और अब बॉलीवुड में जो भी इस रंग में नजर आएगा उसकी तुलना ईवलिन से ही की जाएगी.

चुनाव आयोग के दर्द को भी तो समझिए

चुनाव आयोग की नाराजगी समझी जा सकती है. पिछले कुछ समय से जो लोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, वे दरअसल चुनाव आयोग पर ही कीचड़ उछाल रहे हैं. ये वे लोग हैं, जो खुद ईवीएम के जरिये ही चुनाव जीतकर सत्ता में पहुंचे हैं. कुछ समय पहले हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद से कुछ जगह चुनाव आयोग को इस तरह निशाना बनाया जा रहा है, जैसे वह केंद्र सरकार के किसी सहायक अंग की तरह काम कर रहा हो. चुनाव आयोग ने अपनी तरफ से सफाई देने की तमाम कोशिशें कीं, यहां तक कि ईवीएम को हैक करने की चुनौती तक दी, लेकिन ये आरोप थमने का नाम नहीं ले रहे. अब आयोग ने कहा है कि उसे यह अधिकार दिया जाना चाहिए कि वह अपनी अवमानना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सके. विधि मंत्रालय को लिखे गए एक पत्र में आयोग ने कहा है कि उसकी हैसियत एक अर्द्धन्यायिक संस्था की है, इसलिए नियमों में संशोधन करके उसे यह अधिकार दिया जाना चाहिए कि वह अपनी अवमानना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सके. इसके लिए उसने पाकिस्तान के चुनाव आयोग का उदाहरण भी दिया है, जिसके पास ऐसा अधिकार है.

अक्सर यह कहा जाता है कि भारत में अगर कोई सबसे सम्मानित संस्था है, तो वह चुनाव आयोग ही है. कई मामलों में जो सम्मान चुनाव आयोग को दिया जाता है, वह संसद और न्यायपालिका तक को नहीं मिलता. इस सम्मान की सबसे बड़ी वजह है कि हमारे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर आमतौर पर संदेह नहीं किया जाता. इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि जितने बड़े पैमाने पर शांति से सरकारें भारत में बदलती हैं, उतनी दुनिया के बहुत ही कम देशों में बदलती हैं. चुनाव आयोग के इसी सम्मान के चलते हमने बैलेट बॉक्स वाले लोकतंत्र को बड़ी आसानी से ईवीएम वाले लोकतंत्र में बदल दिया, जबकि दुनिया के कई विकसित देश अब भी इसके लिए जूझ रहे हैं. तकनीक में वे हमसे आगे हो सकते हैं, लेकिन चुनाव आयोग की निष्पक्षता की स्वीकार्यता में वे अभी हमसे काफी पीछे हैं. इसलिए जो लोग अपनी चुनावी हार के बाद ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं, वे देश की अकेली सबसे सम्मानित संस्था की विश्वसनीयता को आहत कर रहे हैं. एक बड़ा सच यह है कि भारतीय मतदान प्रणाली की गड़बड़ियों और इससे जुड़े घपलों को किसी सरकार या किसी आंदोलन ने कम नहीं किया, बल्कि चुनाव आयोग ने खुद अपने प्रयासों से कम किया है.

क्या इसका समाधान यह है कि चुनाव आयोग को अवमानना करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार दे दिया जाए? अभी तक ऐसा अधिकार न्यायपालिका के पास है और वहां यह पिछले काफी समय से विवाद का केंद्र बना हुआ है. चुनाव आयोग की शिकायत जायज है, लेकिन यह ऐसा मसला है, जिसके कई पक्ष हैं और गंभीरता से विचार करने के बाद ही इस पर आगे बढ़ा जाना चाहिए. तब तक चुनाव आयोग के सामने यह रास्ता तो खुला ही है कि वह अपनी अवमानना करने वालों के खिलाफ अदालत के दरवाजे पर दस्तक दे सकता है. बेशक, यह कोई बेहतर स्थिति नहीं होगी कि चुनाव आयोग बेवजह मुकदमेबाजी में उलझे, लेकिन अपनी अवमानना के मामले में वह खुद ही न्यायाधीश बने, यह भी कोई अच्छी स्थिति नहीं है. ठीक यहीं पर एक और बात कहनी भी जरूरी है कि भारत का चुनाव आयोग दुनिया के बहुत से देशों के लिए एक आदर्श है, ऐसे आयोग के लिए यह शोभा नहीं देता कि वह किसी मुद्दे पर उस देश का उदाहरण दे, जहां लोकतंत्र कभी ठीक से स्थापित ही नहीं हुआ.

अरविंद केजरीवाल की बेचारगी के मायने

अरविंद केजरीवाल का लोकपाल सत्याग्रह और भ्रष्टाचार पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ युद्ध अब केजरीवाल को खुद निगलने लगा है. 2014 के बाद बनी भारतीय जनता पार्टी की सरकार का शासन करने का तरीका कांग्रेसी सरकारों से अलग है. केजरीवाल या तो उसे समझ नहीं पाए या उन मोरचों को खोलने की हिम्मत नहीं है उन में. कांग्रेस की तरह भाजपा भी भयंकर रूप से सरकारी अधिकारों का दुरुपयोग कर रही है पर हिंदू धर्म के मोटे, मजबूत और धारदार परदे के पीछे से.

अगर जनता की मेहनत के पैसे को लूटना भ्रष्टाचार है तो भाजपा की सरकार जनता का पैसा धार्मिक आडंबरों पर खर्च कर रही है. पर न कांग्रेस की, न अरविंद केजरीवाल की हिम्मत है कि उस की पोलपट्टी खोल सकें.

गंगा नमामि, नर्मदा फैस्टिवल, शिवाजी स्मारक, पटेल स्मारक, अमृतसर का सौंदर्यीकरण, सरकारी या जनता के पैसों पर गौरक्षकों की फौज खड़ी करना, सामाजिक कल्याण व संस्कृति संबंधित विभागों, मंत्रालयों में भगवाइयों को भरना एक तरह का भ्रष्टाचार ही है जो जनता को कोल स्कैम या कौमनवैल्थ स्कैम से ज्यादा महंगा पड़ रहा है.

पर अरविंद केजरीवाल या राहुल गांधी इस पर चुप रहने को विवश हैं क्योंकि वे धर्म की आलोचना करने का साहस नहीं रखते. अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने पंजाब में अच्छेखासे वोट हासिल किए और दिल्ली नगर निगम चुनावों में भी वोटों की गिनती में वे भारतीय जनता पार्टी से सिर्फ 11 प्रतिशत ही कम हैं पर वे आर्थिक भ्रष्टाचार की पोलपट्टी खोलतेखोलते इतनी संकरी गली में चलने के आदी हो चुके हैं कि पूरे मैदान का धार्मिक भ्रष्टाचार उन्हें दिख ही नहीं रहा.

जनता एक सरकार से सुरक्षा, सही कर कानून, सही न्याय, सही प्रबंध की उम्मीद करती है और ये न मिलने पर भी यदि वह एक ही पार्टी को वोट देती

रहे तो वोटिंगमशीन का अत्याचार कहा जाएगा. देश की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो रही. मध्यवर्ग के युवाओं के पास न देश में नौकरियां हैं, न विदेश में.

ठीकठाक वर्षा के बावजूद किसानों की हालत में खास बदलाव नहीं आया है. बजाय जनता की मुश्किलों को ध्यान में रखने के, अरविंद केजरीवाल के साथी नेता ही उन का सारा समय आपसी विवादों में ले कर उन के जगाएदिखाए सपनों को भंग कर रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल आर्थिक भ्रष्टाचार के साथ यदि धार्मिक भ्रष्टाचार व बढ़ते शासकीय अत्याचार के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे तो उन का सफाया होना स्वाभाविक है. अरविंद केजरीवाल आतिशबाजी जला कर पहाड़ को तोड़, सिर्फ चमकने वाली नहर बनाने का निरर्थक सपना देख रहे हैं. उन्हें लाइन से कुछ हट कर करना होगा.

क्या भारत उल्टे पांव चल रहा है, सोचिए

केन्द्र में मोदी की सरकार है और भारत के 13 राज्यों में भाजपा की सरकारें बन चुकी हैं. कह सकते हैं, कि उसके कब्जे में देश की बड़ी आबादी है. सही अर्थों में भाजपा पूरे देश पर अपना अधिकार चाहती है. और यह स्वाभाविक है. दशकों से वह देश को अपनी सोच के सांचे में ढ़ालना चाहती है. जिसके लिये सरकार बने रहना जरूरी है. नरेन्द्र मोदी को आधार बना कर वह न सिर्फ सत्ता में बने रहना चाहती है, बल्कि सत्ता में बने रहने के लिये वह देश के प्रमुख राजनीतिक दलों और संगठनों को भी समाप्त करना चाहती है. उसकी नीति वित्तीय ताकतो-विश्व बैंक से लेकर अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष और राष्ट्रीय एवं बहुराष्ट्रीय निजी कम्पनियां के लिये काम करते हुए देश की आम जनता को राष्ट्रवाद के सपनों में डुबा कर रखने की है. वह सपनों के समय सीमा का निर्धारण और संभावनाओं की अवधि का निर्धारण ऐसे कर रही है कि चुनावी समर में जीत मिलती रहे. उम्मीदें बनी रहें. अब तक वह अपनी योजनाओं में सफल भी रही है.

भाजपा की सोच एक राष्ट्र, एक धर्म, एक दल और एक नेता की रही है. उसने समाजवाद या गैरपूंजीवादी विकास के बारे में कभी सोचा ही नहीं. लेकिन जैसे ही देश में अर्थव्यवस्था के उदारीकरण की शुरूआत हुई, राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय निजी कम्पनियों का महत्व बढ़ गया और दक्षिणपंथी ताकतों को खुली छूट मिल गई. भाजपा और नरेन्द्र मोदी के मूल में इन्हीं ताकतों की बढ़ी हुई भूमिका है, जिसके प्रथम पुरूष कांग्रेस के मनमोहन सिंह हैं. जिन्होंने राष्ट्रीयकरण की ओट में निजीकरण को बढ़ावा दिया, मगर भाजपा के नरेन्द्र मोदी ने निजीकरण को राष्ट्रीय नीति का रूप दे दिया है. अब भारत में समाजवाद और गैरपूंजीवादी विकास कहीं नहीं है. यह अलग बात है, कि जिस संविधान की कसमें खा कर सरकारें बनती हैं वहां लोकतंत्र और समाजवाद आज भी है. जिसकी नुमाईशें सरकार कभी-कभार मरे हुए सोच के जीवाष्म की तरह कर लेती है.

भाजपा और मोदी की सरकार आर्थिक एवं राजनीतिक विकास की गलत दिशा है. लोकतंत्र और समाज के बहुसंख्यक वर्ग के हितों के लिये बड़ा खतरा है. भले ही एक चुनी हुई सरकार को इस नजरिये से देखना कुछ लोगों के लिये गलत और अक्षम्य अपराध हो, मगर आने वाला कल यही प्रमाणित करेगा. जिसे विकास पुरूष, जन-नायक और अब राष्ट्र-ऋषि बनाया जा रहा है, वास्तव में यह एक व्यक्ति को एकाधिकारवादी बनाना है. विकास पुरूष की सरकार निजी कम्पनियां और कॉरपोरेट की सरकार है, जो उन्हें वैधानिक बना रहा है. जन-नायक की राष्ट्रवादी सोच हिन्दुत्व के वर्चस्व से पीड़ित है. ‘राष्ट्र-ऋषि’ की उपाधि बांटने वाला योग गुरू से बना ऐसा कारोबारी है, जो देश के खा- बाजार पर कब्जा कर रहा है. वास्तव में, यह सब गांधी के ‘राष्ट्रपिता’ की तर्ज पर रचे गये गीत और तराने हैं, जिसे मीडिया, वित्तीय ताकतें और संत-महात्मा से राजनीतिक-कारोबारी बने लोग गा-बना रहे हैं. जिनका मकसद नरेन्द्र मोदी को आम लोगों के दिल में उतारना है.

आज सेना के लिये रचे जा रहे जुनून का नारा है – ‘सेना का सम्मान देश का सम्मान है’. कल नरेन्द्र मोदी को देश का सम्मान और देश का पर्याय बनाया जाना भी तय है. भारत उल्टे पांव चल रहा है.

बोल तेरे साथ क्या सुलूक किया जाए

धोखेबाज’, ’दगाबाज’, ’झूठा’, ’मक्कार…’ कुछ समय पहले तक युवतियां अकसर इस तरह के संबोधनों से अपने बेवफा प्रेमी को संबोधित करती थीं और छटपटा कर रह जाती थीं, लेकिन वक्त के साथसाथ युवतियों की सोच और उन के व्यवहार में काफी बदलाव आया है. अब वे भी ’जैसे को तैसा’ की नीति पर विश्वास करते हुए सिसकियां भर कर अपने दगाबाज प्रेमी को भुलाने के बजाय उसे सबक सिखाना ज्यादा उचित समझती हैं.

हाल ही में लंदन की एक डैंटिस्ट प्रेमिका ने भी अपने बौयफ्रैंड को सबक सिखाने के लिए कानून तक को अपने हाथ में ले लिया. हुआ यों कि जब प्रेमिका को अपने प्रेमी की बेवफाई के बारे में पता चला तो उसे सबक सिखाने के चक्कर में उस ने उस के  सारे दांत तोड़ डाले. डैंटिस्ट ने बहाने से अपने प्रेमी को क्लिनिक पर बुलाया और चैकअप का झांसा दे कर उस के सारे दांत निकाल दिए. जब तक प्रेमी को होश आया, तब तक उसे धोखेबाजी की सजा मिल चुकी थी. उसे बिना दांत के देख उस की दूसरी प्रेमिका भी उसे छोड़ कर भाग गई, लेकिन बाद में उस डैंटिस्ट को जेल की हवा खानी पड़ी.

अकसर देखा गया है कि युवतियां बदला लेने के चक्कर में यह भूल जाती हैं कि उन्हें खुद को नहीं बल्कि अपने बेवफा प्रेमी को दुख पहुंचाना है. इस चक्कर में वे ऐसे काम कर जाती हैं, जिन से उन का भी नुकसान हो जाता है. इस बाबत बालाजी ऐक्शन मैडिकल इंस्टिट्यूट की साइकोलौजिस्ट शिल्पी आस्ता कहती हैं, ’’किसी युवक को सबक सिखाना या उस से बदला लेना गलत नहीं है, लेकिन ऐसा करते समय युवतियों को अपना मानसिक संतुलन बनाए रखना चाहिए.’’

बीते दिनों एक खबर ने लोगों को चौंका दिया था. दिल्ली की दीपिका ने अपने धोखेबाज मंगेतर पर शादी से ठीक एक सप्ताह पहले तेजाब फेंक दिया. इस से उस की एक आंख की रोशनी चली गई और एक कान से सुनाई देना बंद हो गया. दीपिका की इस करतूत पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. दीपिका की तरह ही बहुत सी युवतियां हैं, जो बदले को क्राइम का रूप दे बैठती हैं.

बदले की भावना के चलते युवतियां भले ही अपने साथ हुए धोखे का बदला ले लेती हों, मगर यह बदला कभीकभी इतना खतरनाक हो जाता है कि उन्हें लेने के देने पड़ जाते हैं.

डा. शिल्पी कहती हैं कि सब से बड़ा बदला तो यही है कि युवक को इस बात का एहसास करा दो कि उस के बिना भी आप खुश हैं और ठीक तरह से अपनी जिंदगी बिता सकती हैं, लेकिन इस के बावजूद अगर आप का मन बिना उस को नुकसान पहुंचाए नहीं मानता तो बदला लेने के कुछ ऐसे तरीके भी हैं, जिन से आप कानूनी चाबुक पड़ने से बच सकती हैं.

बदले के 30 तीर… और प्रेमी ढेर

1      सब से पहला और आसान तरीका तो यह है कि आप अपने बौयफ्रैंड के दोस्त को ही पटा लें. इस से आप के बौयफ्रैंड के अंदर जलन की भावना पैदा हो जाएगी. हो सकता है उसे अपनी गलती का एहसास हो जाए और वह आप की जिंदगी में वापस आना चाहे.

2      आप अपने बौयफ्रैंड को फर्जी एसएमएस मसलन, ’हैलो डार्लिंग, कैसे हो?’, ’यू फिल्ड माई लाइफ विद हैपीनैस’, ’आई मिस यू, आई लव यू’,’तुम जो आए जिंदगी में बात बन गई…’ भेजें और तुरंत बाद अगले ही मैसेज में खेद प्रकट करते हुए लिखें कि यह मैसेज उस के लिए नहीं किसी और के लिए था.

3      अपने धोखेबाज प्रेमी से बदला लेने के लिए सभी फ्रैंड्स के बीच यह बात फैला दें कि वह गे था इसलिए उसे छोड़ दिया.

4      अपने धोखेबाज प्रेमी को नीचा दिखाने के लिए आप यह भी कर सकती हैं कि कालेज और उस के औफिस में यह अफवाह फैला दें कि आप के दगाबाज प्रेमी को मानसिक रोग है और अपनी इस बीमारी के चलते वह किसी को भी नुकसान पहुंचा सकता है.

5      जिस युवती के लिए उस ने आप को धोखा दिया उस युवती के सामने प्रेमी की सारी पोलपट्टी खोल दें. उस की नई प्रेमिका को अपनी और उस की तसवीरें दिखाएं या फिर उस के ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप दिखाएं.

6      अपने बौयफ्रैंड के नाम पर उस के पड़ोसियों के घर के पते पर कोई अश्लील पत्रिका भिजवा दें. इस से उस के आसपास रहने वालों में उस की  इमेज बिगड़ेगी.

7      अगर आप का धोखेबाज प्रेमी आप के कालेज में ही आप के साथ है, तो मौका देख कर उस की शर्ट पर ’मैं धोखेबाज हूं’ की चिट चिपका दें. जब इस चिट के साथ कालेज के अन्य छात्रछात्राएं उसे देखेंगे, तो वह सब के आगे हंसी का पात्र बनेगा.

8      अगर इतने से भी जी न भरे तो किसी अनजान युवती को हायर कर बीच सड़क पर अपने बेवफा आशिक पर छेड़छाड़ का इलजाम लगवा कर उसे पिटवा दें.

9      अपनी किसी फ्रैंड को उस से फ्लर्ट करने को कहें और जब प्रेमी रिलेशनशिप में सीरियस हो जाए तो अपनी दोस्त को उसे धोखा देने को कहें.

10    अलगअलग नंबरों से फोन कर उसे धमकी दें. जब तक वह अपना नंबर बदल न ले ऐसा करते रहें. नंबर बदल लेने के बाद फिर कहीं से उस का नंबर पता लगाएं और फिर से उसे परेशान करें.

11    अगर संभव हो तो अपने प्रेमी की ऐसी तसवीरें जो उस के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हों, अपने सारे दोस्तों को एमएमएस कर दें या फिर अलगअलग साइट पर अपलोड कर दें.

12    प्रेमी के घर उस की शादी का नकली कार्ड बनवा कर भिजवा दें. ऐसा करने से उस के घर में बवाल मच जाएगा.

13    बदला लेने के लिए आप प्रेमी को एक बेनाम गिफ्ट पैक  भेज सकती हैं. गिफ्ट हेयर रिमूवर की बौटल पर किसी शैंपू का स्टीकर चिपका कर उसे ऐसे रखें कि वह नया लगे.

14    अगर प्रेमी उसी कालेज या औफिस में हो जहां आप भी काम करती हों, तब आप के लिए उस की चाय या कौफी में जमालगोटा मिलाने में मुश्किल नहीं होगी. पेट पकड़ कर जब पूरा दिन वह वाशरूम के चक्कर लगाता दिखेगा, तो आप के कलेजे को पक्का ठंडक मिलेगी.

15    कालेज के बुलेटिन बोर्ड का सही इस्तेमाल करें और प्रेमी की तसवीर पर बिंदी व लिपस्टिक लगा कर बोर्ड पर चिपका दें.

16    प्रेमी के नाम पर एक आपत्तिजनक सीडी उस के प्रिंसिपल या बौस तक पहुंचा दें. खरीखोटी तो वह सुनेगा ही उस की नौकरी पर भी तलवार लटकने लगेगी.

17    आप एक गुप्त पत्र प्रिंसिपल के नाम लिख कर उस में प्रेमी की करतूतों का बखान कर सकती हैं.

18    किसी बच्चे को कहें कि उस की गर्लफ्रैंड के आगे उसे पापा कह कर बुलाए. बच्चे की इस हरकत से उस की नई गर्लफ्रैंड के अंदर शक के बीज अंकुरित हो जाएंगे.

19    प्रेमी की डैस्क पर गर्भनिरोधक गोलियां और कंडोम के डब्बे डाल दें. उस के साथ जब ये अश्लील सामग्री उस की डैस्क पर देखेगी तो सब उसे संदेह की नजरों से देखने लगेंगे.

20    अगर एक ही औफिस में साथ काम करते हों तो धोखेबाज प्रेमी को मजा चखाने के लिए उस की सीट पर फैवीक्विक डाल दें. जब फैवीक्विक अपना कमाल दिखाएगा तो लोग उस पर हंसेंगे.

21    अपनी पहचान गुप्त रख कर टैलीविजन पर प्रेमी के नाम पर लापता का विज्ञापन चलवा दें. उस विज्ञापन में प्रेमी को घर से भागा हुआ बताएं और उसी की नई गर्लफ्रैंड का नंबर दे दें.

22    यही काम अखबार में भी पहचान गुप्त रख कर करवाया जा सकता है. प्रेमी के फोटो के साथ विज्ञापन छपवाएं और विज्ञापन में उसे चोर घोषित करते हुए उस के नाम पर इनाम की घोषणा कर दें. विज्ञापन में नंबर उस की नई गर्लफ्रैंड का और पता उस के घर का दे दें. आप अपने प्रेमी का नंबर भी विज्ञापन में दे सकती हैं.

23    अगर आप दोनों एक ही पार्टी में मौजूद हैं तो अपने प्रेमी के कपड़ों पर कुछ गिरा दें. कोशिश करें कि ऐसी जगह गिरे जहां वह देख भी न सके और लोग उस का मजाक बनाएं. वैसे मौका मिले तो उस के कपड़ों पर ’मैं बेवफा हूं’ लिखा कागज चिपका दें. ऐसा करने पर वह पार्टी में आकर्षण का केंद्र बन जाएगा.

24    इंटरनैट पर ऊटपटांग साइटों पर उस के नाम और मोबाइल नंबर को रजिस्टर कर दें. जब उस के फोन पर अनचाहे मैसेज और कौल्स आएंगी तो वह परेशान हो जाएगा.

25    एक ही औफिस में काम करते हों तो उस के कंप्यूटर से सारा डेटा डिलीट कर दें या फिर उस की प्रैजैंटेशन सीडी को फिल्म की सीडी से बदल दें.

26    कालेज की दीवारों पर जगहजगह अश्लील मैसेज लिखें और मैसेज के नीचे अपने बौयफ्रैंड का नंबर लिख दें.

27    आप अपने बौयफ्रैंड को सोशल नैटवर्किंग साइट पर भी बदनाम कर सकती हैं. अपने सभी फ्रैंड्स को बौयफ्रैंड की आईडी के साथ एक मैसेज भेजें, जिस में आप अपनी आपबीती उन से शेयर कर सकती हैं.

28    उस की कार या बाइक का टायर पंक्चर कर दें.

29    अपनी पहचान गुप्त रखते हुए पुलिस में उस के खिलाफ धोखाधड़ी और नशीले पदार्थों का सेवन करने की शिकायत दर्ज करा दें.

30    फोटोशौप पर प्रेमी की तसवीर बिगाड़ कर सभी दोस्तों को फर्जी ईमेल आईडी से मेल कर दें. हो सके तो उस की पोलपट्टी भी उस मेल में खोल दें.

क्यों देते हैं युवक धोखा

’धोखा देना युवकों की फितरत होती है,’ यह कहना गलत होगा. सचाई तो यह है कि युवक हमेशा रिश्तों में भटकाव की समस्या से ग्रसित होते हैं और बात जब सही युवती के चुनाव की होती है, तो यह समस्या और भी प्रबल हो जाती है.

डा. शिल्पी आस्ता का मानना है, ’’युवकों को रिश्तों में हमेशा नएपन की तलाश रहती है. वे किसी भी तरह के दोहराव से बहुत जल्दी ऊब जाते हैं. युवतियों का रिश्तों को ले कर अति उतावलापन भी युवकों को रास नहीं आता. बारबार युवकों पर शादी के लिए दबाव बनाना या उन की तुलना किसी दूसरे से करना भी युवकों के मन में अलगाव की भावना पैदा करता है.’’

इन फिल्मों को जरूर देखें

– ’लव का द ऐंड’ युवक को सबक सिखाने के लिए युवती उस के ड्रिंक में कुछ ऐसा पदार्थ मिला देती है, जिस से वह अपना दिमागी संतुलन खो बैठता है.

– ’प्यार तो होना ही था’ इस फिल्म में युवक से बदला लेने के लिए युवती एक युवक को हायर कर उस से प्यार का नाटक करती है.

– ’तेरी मेरी कहानी’ फिल्म में हीरो से रिवैंज लेने के लिए उस की ऐक्स गर्लफ्रैंड उस के निजी वीडियोज सब को एमएमएस कर देती है.

– ’एक हसीना थी’ इस फिल्म में हीरो से बदला लेने के लिए हीरोइन उस से प्यार का नाटक करती है. बाद में उसे एक ऐसी जगह पर छोड़ देती है, जहां बहुत सारे चूहे होते हैं और हीरो उन से बचने के लिए कुछ नहीं कर पाता.

– ’अंजाम’ मूवी में हीरो से बदला लेने के लिए हीरोइन उस की नर्स बन जाती है और मौका मिलते ही उसे चट्टान से धक्का मार देती है.

जब करीना ने बिपाशा को कहा था काली बिल्ली

बॉलीवुड में दो अभिनेत्रियों का दोस्त होना बहुत मुश्किल है और अगर एक फिल्म में दो हीरोइन एक साथ काम कर रही हैं, तब तो कैट फाइट होना लाजमी है. ऐसा ही कुछ हुआ था 2001 की फिल्म ‘अजनबी’ के दौरान.

फिल्म में करीना कपूर और बिपाशा बसु लीड रोल में थे. उस दौरान खबर आई थी कि करीना और बिपाशा में कॉस्टयूम को लेकर जमकर लड़ाई हुई है. दरअसल करीना के डिजाइनर ने करीना से बिना पूछे बिपाशा की मदद कर दी थी. इससे करीना बहुत नाराज हो गई थीं और उन्होंने बिपाशा को काली बिल्ली कह दिया था. माहौल इतना खराब हुआ कि करीना ने बिपाशा को थप्पड़ भी जड़ दिया था.

बिपाशा ने साल 2001 में फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू मे बताया था कि वो राई का पहाड़ बनाने वाली बात थी. करीना को कॉस्टयूम से कुछ प्रॉब्लम थी. मुझे बिना मतलब उसमें खींच लिया गया था. वो बचपना था.

उसके बाद साल 2002 में फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में करीना ने अपनी बात रखी और कहा मुझे लगता है उन्हें अपने काम पर कॉन्फिडेंस नहीं हैं, इसलिए चार पेज के इंटरव्यू में उन्होंने तीन पेज मेरी ही बातें की हैं. लगता है उनके लिए फेम की यही बात है कि करीना ने उनसे लड़ाई की थी. उन्होंने कहा कि करीना ने मुझे गलत नामों से पुकारा. ऐसा कहकर वो अपनी ही इमेज खराब कर रही हैं.

दोनों की लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई. कॉफी विद करण के दूसरे सीजन में करीना के बिपाशा के उस समय के बॉयफ्रेंड जॉन अब्राहम को एक्सप्रेशनलेस कह दिया था और कहा कि मैं उनके साथ कभी काम नहीं करना चाहूंगी. इसका बदला लेते हुए बिपाशा ने इसी शो के दौरान कहा कि करीना के पास कुछ ज्यादा ही एक्सप्रेशन्स हैं.

लेकिन साल 2008 में करीना ने लड़ाई खत्म करते हुए सैफ अली खान की बर्थडे पार्टी में बिपाशा को इन्वाइट किया था.

अब दोंनो के बीच मामला सुलझा सा नजर आने लगा है और हो सकता है आगो वे किसी फिल्म में एक साथ भी नजर आ सकती हैं.

तो इसलिए बहुत खास था लीजा का ये फोटोशूट

बॉलीवुड की हॉटेस्ट एक्ट्रेस की लिस्ट में शुमार लीजा हेडेन के इस फोटोशूट के सुर्खियों में आने की वजह थी उनका बेबी बंप. जी हां इस फोटोशूट में खूबसूरत लीजा बिकिनी में बेबी बंप फ्लॉन्ट करती हुई दिखाई दे रही थीं. लीजा इन तस्वीरों में अपनी प्रेग्नेंसी को फ्लॉन्ट करती हुई नजर आ रही थीं और बेहद खूबसूरत नजर आ रही थीं. हालांकि इससे पहले भी उन्होंने फोटोशूट कराया था.

अपनी प्रेग्नेंसी को इंजॉय करती लीजा ने फोटोशूट करवाया था. इस फोटोशूट में वे खूबसूरत और बिकिनी में बेहद हॉट दिख रही थीं. ये फोटोशूट किसी भी महिला के लिए बेशक खास होगा क्योंकि मां बनने के एहसास को लीजा ने इस फोटोशूट में बखूबी दिखाया है और इसके साथ ही उन्होंने एक्पोस से भी कॉम्प्रोमाइज नहीं किया.

प्रेग्नेंसी में फोटोशूट करवा रहीं लीजा बेहद फिट नजर आ रहीं थीं. वे बेबाकी से बिकिनी में अपना बेबी बंप दिखा रही हैं. लीजा की ये बोल्डनेस आपको भी उनका कायल बना देगी.

इस फोटोश्लूट के समय लीजा हेडन की प्रेग्नेंसी को पांच से छ: महीने का समय हो रहा था. वे अपनी प्रेग्नेंसी की ये जर्नी खूब एन्जॉय कर रही थीं. वे लगातार फोटोशूट के जरिए लोगों को अपनी प्रेग्नेंसी से भी अपडेट रखे हुए थीं.

उन्होंने मैग्जीन ‘Elle’ के लिए फोटोशूट कराया था. इस मैगजीन के मई इश्यू कवर में आप इनकी तस्वीर देख सकते हैं.

बिकिनी में लीजा

लीजा ने इस फोटोशूट में मल्टी कलर बिकिनी में अपना बेबी बंप फ्लॉन्ट किया था. अब इस मैगजीन के लिए करवाए गए बिकिनी फोटोशूट के और सारे फोटोज भी सामने आ गए हैं.

इन फिल्मों में दिखीं लीजा

बता दें कि आखिरी बार लीजा को ‘ए दिल है मुश्किल’ में देखा गया था. इसके अलावा, लीजा बॉलीवुड में ‘आयशा’, ‘रास्कल’, ‘क्वीन’, ‘द शौकीन्स’, ‘संता बंता प्राइवेट लिमिटेड’, ‘हाउसफुल-3’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकी हैं.

 

आतंक के ग्लैमर में फंसा सैफुल्ला

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान जिस तरह से मध्य प्रदेश पुलिस की सूचना पर लखनऊ में आतंकी सैफुल्ला मारा गया, उसे राजनीतिक नफानुकसान से जोड़ कर देखना ठीक नहीं है. सैफुल्ला की कहानी से पता चलता है कि हद से अधिक धार्मिक दिखने वाले लोगों के पीछे कुछ न कुछ राज अवश्य हो सकता है. धर्म के नाम पर लोग दूसरों पर आंख मूंद कर भरोसा कर लेते हैं. ऐसे में धर्म की आड़ में आतंक को फैलाना आसान हो गया है. अगर बच्चा आक्रामक लड़ाईझगड़े वाले वीडियो गेम्स और फिल्मों को देखने में रुचि ले रहा है तो घर वालों को सचेत हो जाना चाहिए. यह किसी बीमार मानसिकता की वजह से हो सकता है.

मातापिता बच्चों को पढ़ालिखा कर अपने बुढ़ापे का सहारा बनाना चाहते हैं. अगर बच्चे गलत राह पर चल पड़ते हैं तो यही कहा जाता है कि मातापिता ने सही शिक्षा नहीं दी. जबकि कोई मांबाप नहीं चाहता कि उस का बेटा गलत राह पर जाए. हालात और मजबूरियां सैफुल्ला जैसे युवाओं को आतंक के ग्लैमर से जोड़ देती हैं.

धर्म की शिक्षा इस में सब से बड़ा रोल अदा करती है. धर्म के नाम पर अगले जन्म, स्वर्ग और नरक का भ्रम किसी को भी गुमराह कर सकता है. सैफुल्ला आतंकवाद और धर्म के फेर में कुछ इस कदर उलझ गया था कि मौत ही उस से पीछा छुड़ा पाई. कानपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार का सैफुल्ला भी अन्य युवाओं जैसा ही था.

सैफुल्ला का परिवार उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर की जाजमऊ कालोनी के मनोहरनगर में रहता था. उस के पिता सरताज कानपुर की एक टेनरी (चमड़े की फैक्ट्री) में नौकरी करते थे. उन के 2 बेटे खालिद और मुजाहिद भी यही काम करते थे. उन की एक बेटी भी थी. 4 बच्चों में सैफुल्ला तीसरे नंबर पर था.

सैफुल्ला के पिता सरताज 6 भाई हैं, जिन में नूर अहमद, ममनून, सरताज और मंसूर मनोहरनगर में ही रहते थे. बाकी 2 भाई नसीम और इकबाल तिवारीपुर में रहते है. सैफुल्ला बचपन से ही पढ़ने में अच्छा था. जाजमऊ के जेपीआरएन इंटरकालेज से उस ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई की थी. इंटर में उस ने 80 प्रतिशत नंबर हासिल किए थे.

सन 2015 में उस ने मनोहरलाल डिग्री कालेज में बीकौम में दाखिला लिया. इसी बीच उस की मां सरताज बेगम का निधन हो गया तो वह पूरी तरह से आजाद हो गया. घरपरिवार के साथ उस के संबंध खत्म से हो गए. उसे एक लड़की से प्रेम हो गया, जिसे ले कर घर में लड़ाईझगड़ा होने लगा.

सैफुल्ला के पिता चाहते थे कि वह नौकरी करे, जिस से घरपरिवार को कुछ मदद मिल सके. पिता की बात का असर सैफुल्ला पर बिलकुल नहीं हो रहा था. जब तक वह पढ़ रहा था, घर वालों को कोई चिंता नहीं थी. लेकिन उस के पढ़ाई छोड़ते ही घर वाले उस से नौकरी करने के लिए कहने लगे थे. जबकि सैफुल्ला को पिता और भाइयों की तरह काम करना पसंद नहीं था.

वह कुछ अलग करना चाहता था. अब तक वह पूरी तरह से स्वच्छंद हो चुका था. सोशल मीडिया पर सक्रिय होने के साथ वह आतंकवाद से जुड़ने लगा था. फेसबुक और तमाम अन्य साइटों के जरिए आतंकवाद की खबरें, उस की विचारधारा को पढ़ता था.

यहीं से सैफुल्ला धर्म के कट्टरवाद से जुड़ने लगा. ऐसे में आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन के कारनामे उसे प्रेरित करने लगे. टीवी और इंटरनेट पर उसे वीडियो गेम्स खेलना पसंद था. इन में लड़ाईझगड़े और मारपीट वाले गेम्स उसे बहुत पसंद थे.

शार्ट कौंबैट यानी नजदीकी लड़ाई वाले गेम्स उसे खास पसंद थे. वह यूट्यूब पर ऐसे गेम्स खूब देखता था. इस तरह की अमेरिकी फिल्में भी उसे खूब पसंद थीं. यूट्यूब के जरिए ही उस ने पिस्टल खोलना और जोड़ना सीखा.

कानपुर में रहते हुए सैफुल्ला कई लोगों से मिल चुका था, जो आतंकवाद को जेहाद और आजादी की लड़ाई से जोड़ कर देखते थे. वह आतंक फैलाने वालों की एक टीम तैयार करने के मिशन पर लग गया. फेसबुक पर तमाम तरह के पेज बना कर वह ऐसे युवाओं को खुद से जोड़ने लगा, जो आर्थिक रूप से कमजोर थे. सैफुल्ला ऐसे लोगों के मन में नफरत के भाव भी पैदा करने लगा था. उस का मकसद था युवाओं को खुद से जोड़ना और आईएसआईएस जैसे आतंकी संगठन की राह पर चलते हुए भारत में भी उसी तरह का संगठन खड़ा करना. युवाओं को वह सुविधाजनक लग्जरी लाइफ और मोटी कमाई का झांसा दे कर खुद से जोड़ने लगा था.

कानपुर में लोग सैफुल्ला का पहचानते थे, इसलिए इस तरह के काम के लिए उस का कानपुर से बाहर जाना जरूरी था. आखिर एक दिन वह घर छोड़ कर भाग गया. घर वालों ने भी उस के बारे में पता नहीं किया. उस ने इस के लिए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को चुना. वहां मुसलिम आबादी भी ठीकठाक है और प्रदेश तथा शहरों से सीधा जुड़ा हुआ भी है. इन सब खूबियों के कारण लखनऊ उस के निशाने पर आ गया.

नवंबर 2016 में सैफुल्ला लखनऊ के काकोरी थाने की हाजी कालोनी में बादशाह खान का मकान 3 हजार रुपए प्रति महीने के किराए पर ले लिया. यह जगह शहर के ठाकुरगंज इलाके से पूरी तरह से सटी हुई है, जिस से वह शहर और गांव दोनों के बीच रह सकता था. यहां से कहीं भी भागना आसान था.

बादशाह खान का मकान सैफुल्ला को किराए पर पड़ोस में रहने वाले कयूम ने दिलाया था. वह मदरसा चलाता था. बादशाह खान दुबई में नौकरी करता था. उस की पत्नी आयशा और परिवार मलिहाबाद में रहता था. मकान को किराए पर लेते समय उस ने खुद को खुद्दार और कौम के प्रति वफादार बताया था.

सैफुल्ला ने कहा था कि वह मेहनत से अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ अपनी कौम के बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा देना चाहता है. अपने खर्च के बारे में उस ने बताया था कि वह कम फीस पर बच्चों को कंप्यूटर के जरिए आत्मनिर्भर बनाने का काम करता है.

इसी से सैफुल्ला ने अपना खर्च चलाने की बात कही थी. उस की दिनचर्या ऐसी थी कि कोई भी उस से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता था. अपनी दिनचर्या का पूरा चार्ट बना कर उस ने कमरे की दीवारों पर लगा रखा था. वह सुबह 4 बजे उठ जाता था. खुद को फिट रखने के लिए. वह पांचों वक्त नमाज पढ़ता था. कुरआन के अनुवाद तफ्सीर पढ़ता था. वह पूरी तरह से धर्म में रचबस गया था. हजरत मोहम्मद साहब के वचनों हदीस पर अमल करता था. अपना खाना वह खुद पकाता था. दोपहर 3 बजे उस का लंच होता था. शरीयत से जुड़ी किताबें पढ़ता था. रात 10 बजे तक सो जाता था.

रमजान के दिनों में वह पूरी तरह से उस में डूब जाता था. वह बिना देखे कुरआन की हिब्ज पढ़ता था. वह खुद को पूरी तरह से मोहम्मद साहब के वचनों पर चलने वाला मानता था. उसे करीब से देखने वाला समझता था कि इस से अच्छा लड़का कोई दुनिया में नहीं हो सकता. हाजी कालोनी के जिस मकान में सैफुल्ला रहता था, उस में कुल 4 कमरे थे. मकान के दाएं हिस्से में महबूब नामक एक और किराएदार अपने परिवार के साथ रहता था. बाईं ओर के कमरे में महबूब का एक और साथी रहता था. इस के आगे दोनों के किचन थे. दाईं ओर का कमरा खाली पड़ा था और उस के आगे भी बाथरूम और किचन बने थे. असल में बादशाह खान ने अपने इस मकान को कुछ इस तरह से बनवाया था कि कई परिवार एक साथ किराए पर रह सकें. कोई किसी से परेशान न हो, ऐसे में सब के रास्ते, स्टोररूम और बाथरूम अलगअलग थे. मकान खुली जगह पर था, इसलिए चोरीडकैती से बचने के लिए सुरक्षा के पूरे उपाय किए गए थे. सैफुल्ला ने किराए पर लेते समय इन खूबियों को ध्यान में रखा था और उसे यह जगह भा गई थी.

सैफुल्ला को यह जगह काफी मुफीद लगी थी. जैसे यह उसी के लिए ही तैयार की गई हो. वह समय पर किराया देता था. अपने आसपास वालों से वह कम ही बातचीत करता था. ज्यादा समय वह अपने कंप्यूटर पर देता था. इस में वह सब से ज्यादा यूट्यूब देखता था, जिस में आईएसआईएस से जुड़ी जानकारियों पर ज्यादा ध्यान देता था.

7 मार्च, 2017 को भोपाल-उज्जैन पैसेंजर रेलगाड़ी में बम धमाका हुआ. वहां पुलिस को बम धमाके से जुड़े कुछ परचे मिले, जिस में लिखा था, ‘हम भारत आ चुके हैं—आईएस’. यह संदेश पढ़ने के बाद भारत की सभी सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस सक्रिय हो गई. ट्रेन में हुआ बम धमाका बहुत शक्तिशाली नहीं था, जिस से बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था.

पर यह संदेश सुरक्षा एजेंसियों और सरकार की नींद उड़ाने वाला था. पुलिस जांच में पता चला कि यह काम भारत में काम करने वाले किसी खुरासान ग्रुप का है, जो सीधे तौर पर आईएस की गतिविधियों से जुड़ा हुआ नहीं है, पर उस से प्रभावित हो कर उसी तरह के काम कर रहा है. यह खुरासान ग्रुप तहरीके तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का एक हिस्सा है, जो आईएस से जुड़ा है.

मध्य प्रदेश पुलिस ने जब पकड़े गए 3 आतंकवादियों से पूछताछ की तो कानपुर की केडीए कालोनी में रहने वाले दानिश अख्तर उर्फ जफर, अलीगढ़ के इंदिरानगर निवासी सैयद मीर हुसैन हमजा और कानपुर के जाजमऊ के रहने वाले आतिश ने माना कि वे 3 साल से सैफुल्ला को जानते हैं. वह उन्हें वीडियो दिखा कर कहता था, ‘एक वे हैं और एक हम. कौम के लिए हमें भी कुछ करना होगा.’

उन्होंने बताया था कि सैफुल्ला का इरादा भारत में कई जगह बम विस्फोट करने का है. इस जानकारी के बाद पुलिस को सैफुल्ला की जानकारी और लोकेशन दोनों ही मिल गई थी. इस के बाद पुलिस ने दोपहर करीब ढाई बजे सैफुल्ला के घर पर दस्तक दी. लखनऊ की पुलिस पूरी तरह से अलर्ट थी. उस के साथ एटीएस के साथ एसटीएफ भी थी.

सैकड़ों की संख्या में पुलिस और दूसरे सुरक्षा बलों ने घर को घेर लिया था. आसपास रहने वालों को जब पता चला कि सैफुल्ला आतंकवादी है और मध्य प्रदेश में हुए बम विस्फोट में उस का हाथ है तो सभी दंग रह गए. सुरक्षा बलों ने पूरे 10 घंटे तक घर को घेरे रखा. वे सैफुल्ला को आत्मसमर्पण के लिए कहते रहे, पर वह नहीं माना.

घर के अंदर से सैफुल्ला पुलिस पर गोलियां चलाता रहा. ऐसे में रात करीब 2 बजे पुलिस ने लोहे के गेट को फाड़ कर उस पर गोलियां चलाईं. तब जा कर वह मरा. पुलिस को उस के कमरे के पास से .32 बोर की 8 पिस्तौलें, 630 जिंदा कारतूस, 45 ग्राम सोना और 4 सिमकार्ड मिले.

इस के साथ डेढ़ लाख रुपए नकद, एटीएम कार्ड, किताबें, काला झंडा, विदेशी मुद्रा रियाल, आतिफ के नाम का पैनकार्ड और यूपी78 सीपी 9704 नंबर की डिसकवर मोटरसाइकिल मिली. इस के अलावा बम बनाने का सामान, वाकीटाकी फोन के 2 सेट और अन्य सामग्री भी मिली.

पुलिस को उस के कमरे से 3 पासपोर्ट भी मिले, जो सैफुल्ला, दानिश और आतिफ के नाम के थे. आतिफ सऊदी अरब हो आया था. बाकी दोनों ने कोई यात्रा इन पासपोर्ट से नहीं की थी. सैफुल्ला का ड्राइविंग लाइसेंस और पासपोर्ट मनोहरनगर के पते पर ही बने थे, जहां उस का परिवार रहता था.

सैफुल्ला के आतंकी होने और पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे जाने की खबर जब उस के पिता सरताज अहमद को मिली, तब वह समझ पाए कि उन का बेटा क्या कर रहा था. पुलिस ने जब उन से शव लेने और उसे दफनाने के लिए कहा तो उन्होंने कहा कि सैफुल्ला ने ऐसा कोई काम नहीं किया कि उस का जनाजा निकले.

वह गद्दार था. उस के शव को ले कर वह अपना ईमान खराब नहीं करेंगे.  इस के बाद पुलिस ने सैफुल्ला को लखनऊ के ही ऐशबाग कब्रगाह में दफना दिया था.

सैफुल्ला की कहानी किसी भी ऐसे युवक के लिए सीख देने वाली हो सकती है कि आतंक की पाठशाला में पढ़ाई करना किस अंजाम तक पहुंचा सकता है. ऐसे शहरी या गांव के लोगों के लिए भी सीख देने वाली हो सकती है, जिन के आसपास रहने वाला इस तरह धार्मिक प्रवृत्ति का हो.

आतंकवाद का ग्लैमर दूर से देखने में अच्छा लग सकता है, पर उस का करीबी होना बदबूदार गंदगी की तरह होता है. धर्म के नाम पर दुकान चलाने वाले लोग मासूम युवाओं को गुमराह करते हैं. सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले लोगों को प्रभावित करना आसान होता है.

ऐसे में जरूरत इस बात की है कि युवा और उन के घर वाले होशियार रहें, जिस से उन के घर में कोई सैफुल्ला न बन सके. बच्चे आतंकवादी नहीं होते, उन्हें धर्म पर काम करने वाले कट्टरपंथी लोग आतंक से जोड़ देते हैं. पैसे कमाने और बाहुबली बनने का शौक बच्चों को आतंक के राह पर ले जाता है.

वन बैल्ट वन रोड का चीन का सपना

चीन ने 30 देशों के प्रमुखों और लगभग 100 देशों के प्रतिनिधियों को जमा कर के वन बैल्ट वन रोड का जो सपना परोसा है वह सदियों की कूटनीति में अनूठा है और एशिया के देश का दुनिया की अर्थव्यवस्था के केंद्र में आ जाना है. एशिया के सब से बड़े देश चीन ने पिछले 40 सालों में अभूतपूर्व उन्नति की है और अब वह अपने लिए बाजार ढूंढ़ रहा है और अपना प्रभुत्व जमाना चाह रहा है.

वन बैल्ट वन रोड से चीन, रूस, मंगोलिया, पाकिस्तान, यूरोप के अधिकांश देशों को सड़कमार्ग, रेलमार्ग से जोड़ा जाएगा और जलमार्ग से अफ्रीका तक पहुंच होगी. आजकल इन देशों के संबंध अपने पड़ोसियों तक से अच्छे नहीं हैं क्योंकि न रेलें हैं न सड़कें हैं जो एकदूसरे को जोड़ती हैं. जहां रास्ते हैं वहां भी सीमा पर फौजों और कस्टम वालों ने दीवारें खड़ी कर रखी हैं.

प्राचीन रेशम मार्ग, जिस के माध्यम से चीन का रेशम यूरोप जाता था और वहां का सोनाचांदी वापस आता था, अब पुनर्जीवित किया जा रहा है. रूस, टर्की, पाकिस्तान, मंगोलिया तो इस सपने से बहुत खुश हैं क्योंकि उन्हें चीनी सामान और सस्ता मिलेगा और वे अपना कच्चा माल चीनी कारखानों तक पहुंचा सकेंगे.

1940-45 में जिस संयुक्त राष्ट्र संघ की कल्पना विश्व युद्ध के दौरान की गई थी उस में केवल कागजी घोड़े दौड़े थे. आज संयुक्त राष्ट्र संघ यानी यूनाइटेड नेशंस का दुनियाभर में प्रभाव है. पर जमीन पर कहीं यूनाइटेड नेशंस नहीं दिखता. चीन का वन बैल्ट वन रोड सपना अगर साकार हुआ तो दिखेगा. दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में सड़कें, गैस या तेल के पाइप, बंदरगाह, रेललाइनें दिखेंगी. यह केवल कौन्फ्रैंसरूमों का सपना नहीं है, जमीनी है.

इन मार्गों के किनारेकिनारे सैकड़ों नए शहर बसेंगे, कारखाने बनेंगे जो कच्चा माल खपाएंगे, तैयार माल इधरउधर भेजा जाएगा. अमेरिका के घटते विश्वव्यापी प्र्रभाव को भरने को चीन इतनी तेजी से  आएगा, इस की उम्मीद न थी.

भारत को इस से अलग रहना पड़ा है क्योंकि चीनपाकिस्तान मार्ग उस इलाके से जा रहा है जिसे भारत अपना मान रहा है. भारत को यह भी लग रहा है कि चीन पाकिस्तान, नेपाल व म्यांमार के सहारे  उसे घेर रहा है. भारत ने श्रीलंका व बंगलादेश को कोशिश कर के रोका है पर वे ज्यादा दिन रुकेंगे, ऐसा नहीं लगता क्योंकि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जरमनी आदि भी उस के खिलाफ नहीं हैं और वे, चीन के इस सपने में अपने बेरोजगारों के लिए नए अवसर देख रहे हैं. एशिया के अंदरूनी देशों में बड़े बाजार हैं, जो आज कटे हुए हैं. वे अमीर देशों से जुड़ना चाह रहे हैं.

भारत के पास ईरान, इराक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, बंगलादेश, म्यांमार, थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया, वियतनाम, मलयेशिया को जोड़ने का अवसर है पर हमारे नेता इतने अंतर्मुखी हैं कि उन्हें पूजापाठों से ही फुरसत नहीं है. उन्होंने चीन का जो विरोध किया, वह जरूरी है, पर पर्याय भी बनाना था जो बना नहीं सके.

चीन प्रति व्यक्ति आय में हर साल 500-600 अमेरिकी डौलर जोड़ रहा है, उस के नेता इस प्रगति का लाभ दूसरों से शेयर भी कर रहे हैं. भारत तो योग के निर्यात को सफल मान कर धन्य होता दिख रहा है. जिस भारत ने कभी बौद्ध धर्म के सहारे पूरे एशिया पर धाक जमाई थी उस का धर्म ही आज सब से बड़ी जंजीर बना हुआ है.

धार्मिक कारणों से ही भारत को पाकिस्तान से बैर रखना पड़ रहा है और इसी वजह से वन बैल्ट वन रोड प्रयास सिर्फ चीन का रह गया वरना यह सिल्क रोड और स्पाइस रूट सामूहिक रूप से भारत व चीन का हो सकता था और ये दोनों एशियाई देश दुनियाभर पर वैसे राज कर सकते थे जैसे इंगलैंड व अमेरिका ने किया था.

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