महागठबंधन में यूपी उपचुनाव लड़ेगा विपक्ष

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में विपक्ष एकजुट होकर भाजपा का मुकाबला करेगा. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी जल्द इन दोनों सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से बात करेंगे. पार्टी महागठबंधन के लिए बसपा से भी संपर्क करेगी.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे के बाद इन दोनों सीट पर जल्द चुनाव तय है. ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले यूपी में एकजुटता बरकरार रखी जाए. इसलिए, कांग्रेस महागठबंधन बनाए रखने की पूरी कोशिश करेगी.

बसपा सुप्रीमो मायावती ने पिछले दिनों सीट बंटवारे की शर्त रखकर खुद को विपक्षी एकता से अलग कर लिया था. पर मेरठ रैली में मायावती की सपा और कांग्रेस पर चुप्पी को पार्टी सकारात्मक मान रही है.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बसपा अमूमन उपचुनाव नहीं लड़ती है. ऐसे में बसपा को कांग्रेस-सपा गठबंधन का समर्थन करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी. लोकसभा चुनाव में गोरखपुर और फूलपुर सीट पर सपा उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे हैं. ऐसे में इन दोनों सीट पर सपा की दावेदारी बनती है.

योगी, केशव मौर्य का लोकसभा से इस्तीफा

विधान परिषद का सदस्य बनने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन की अनुपस्थिति में दोनों नेताओं से लोकसभा सचिवालय में सचिव को अपने इस्तीफे सौंपे. इसके पहले उन्होंने महाजन से फोन पर बात कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी.

आदित्यनाथ योगी गोरखपुर और केशव प्रसाद मौर्य फूलपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. दोनों सीटों के लिए उप चुनाव गुजरात के विधानसभा चुनाव के साथ होने की संभावना है. इस्तीफा देने के पहले दोनों नेताओं ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की.

रामानंद सागर की पोती ने टौपलेस फोटो शेयर कर मचाई खलबली

90 के दशक के रामानंद सागर तो आपको याद ही होंगे. जी हां, वही रामानंद जिन्होंने दूरदर्शन पर प्रसारित ‘रामायण’ और ‘श्रीकृष्णा’ जैसे धारावाहिक के जरिए देश भर में भक्ति और संस्कार की गंगा बहा दी थी. इस धारावाहिक को हर घर में बड़े प्रेम से देखा जाता था.

उन्हीं रामानंद सागर की परपोती साक्षी चोपड़ा आजकल अपनी बिंदास तस्वीरों से सोशल मीडिया की टाप ट्रेंडिंग लिस्ट में हैं और अपनी बोल्ड तस्वीरों से वो आये दिन सोशल मीडिया पर आग लगाती रहती हैं.

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इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक से बढ़ कर एक ग्लैमरस और उत्तेजित करने वाली तस्वीरें पोस्ट करने वाली साक्षी चोपड़ा ने तो इस बार हद कर दी है. हाल ही में उन्होंने अपनी टापलेस फोटो शेयर की है. गौगल लगाए हुए साक्षी की ये टापलेस फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. साक्षी की इन बिंदास पिक्चर्स ने इंस्टा पेज पर उनके फैन्स की लाइन लगा दी है.

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लेकिन यह पहली बार नहीं है जब साक्षी ने सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड तस्वीरें शेयर की हो, इससे पहले भी वह अपनी कई तस्वीरे शेयर कर चुकी हैं. बीते दिनों जून, 2017 में साक्षी की बोल्ड और हाट तस्वीरों पर लोगों की काफी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी.

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इसके जवाब में साक्षी ने एक टापलेस फोटो पोस्ट करते हुए लिखा था- “ह्यूमन बाडी का हर हिस्सा खुबसूरत है. चाहे वो मेल हो या फीमेल. आप मेरे लिए चीप या और भी बुरे नाम का इस्तेमाल कर सकते हैं. मैं उनपर कोई ध्यान नहीं देना चाहती. अगर आप अपनी बाडी को कवर करके और मुझे ऐसा बोलकर खुश हैं, तो आप करें लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. मैं वही करूंगी, जिससे मुझे खुशी होती है.

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सोशल साइट्स पर तस्वीरें शेयर करने के अलावा वह एक सिंगर भी हैं. साक्षी ने दस साल की उम्र में वेस्टर्न वोकल्स की डिग्री भी हासिल कर ली थी. साक्षी एक यूट्यूब स्टार हैं. यूट्यूब पर उनके कई वीडियो हिट हो चुके हैं. वह एक वीडियो ब्लागर भी हैं. उनका वीडियो ‘फिलिंग गुड’ यूट्यूब पर काफी हिट हो रहा है. इसके अलावा इंस्टाग्राम पर साक्षी के 3 लाख से भी ज्यादा फालोअर्स हैं.

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खूबसूरती और बोल्डनेस के मामले में साक्षी ने कई अपकमिंग एक्ट्रेस नव्या नवेली, जाह्नवी और सुहाना को पीछे छोड़ दिया है. साक्षी मीनाक्षी सागर की बेटी हैं और अन्य सभी स्टार किड्स की तरह सोशल साइट्स पर काफी एक्टिव रहती हैं.

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अपनी इन हाट और बोल्ड तस्वीरों से साक्षी बालीवुड की तैयारी कर रहीं या कोई और बात है, यह तो वही जानें. लेकिन साक्षी का एटीट्यूड और ड्रेस सेंस देख कर ये साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह अपने दादाजी के विचारों से पूरी तरह अलग और आजाद हैं.

जुझारूपन से मिलती ममता बनर्जी को सफलता

भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में धर्म का झुनझुना बजा कर फैल गई है पर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी उसे घुसने नहीं दे रही हैं. कुछ नगर निकायों के चुनावों में ममता को मिलीं 140 सीटों के मुकाबले में भाजपा को मात्र 6 सीटें मिलीं. यह और कुछ नहीं, बस, यह बताता है कि अगर लगन हो तो भूकंपों, आंधियों और आग से भी मुकाबला किया जा सकता है.

ममता बनर्जी के पास कोई धर्म नहीं, दिमाग को सुन्न करने वाला कोई कैडर नहीं. उन के जुझारूपन, उन के त्याग, उन की मेहनत और उन की सादगी का नतीजा है कि वे पश्चिम बंगाल की आंखों का तारा बनी हुई हैं.

यह जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है. सफल वही होते हैं जो लग कर काम करते हैं, चाहे क्षेत्र पढ़ाई का हो, क्रिकेट का हो, डांस का हो या लेखन का. जम कर काम करना और अपना ध्येय व लक्ष्य सामने रखना जरूरी होता है. आप जो कर रहे हैं और कह रहे हैं उस में स्वार्थ ही न हो, दूसरों का खयाल भी हो.

ममता इस का जीताजाता उदाहरण हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की लगातार कोशिशों के बावजूद पूरे बंगाल की जनता टस से मस नहीं हो रही. त्रिपुरा में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायक तोड़े भी, लेकिन फिर भी पश्चिम बंगाल में वह कुछ न कर पाई. हर युवा को अपने काम पर विरोधी को सेंध मारने से रोकने के लिए अपना किला मजबूत करना सीखना होगा. यह मुश्किल नहीं है.

हर युवा को कन्हैया कुमार की तरह जुझारू होना होगा. वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम के दौरान नकली नारों के नाम पर पकड़ा गया, जेल में रहा पर उस ने हिम्मत नहीं हारी. वह आज करोड़ों का नहीं, तो हजारों की आंखों का तारा तो है. वह जब बोलता है तो लोगों की सांसें रुक जाती हैं. न अमीर घर का रहनसहन, न अंगरेजी स्कूल की पढ़ाई. पर उसे हर बात का ज्ञान है, हर बात की समझ है.

गुजरात में हार्दिक पटेल भारतीय जनता पार्टी की किरकिरी बना हुआ है, वह लगातार संघर्ष में जो लगा है. जो युवा अपने सुखों को अपने लक्ष्यों के लिए कुरबान करने को तैयार हैं, वे सफल होते हैं. जनून की जरूरत है. हेरफेर से कुछ सफल होते हैं, हर कोई नहीं. मेहनत व जमीर दोनों का पैसा व शोहरत पाने के लिए इस्तेमाल करें लेकिन उन्हें नीलाम न कर दें. रातदिन लगन ही सफलता की जरूरत है. सोने की तश्तरी में कुछ नहीं मिलता. तानाशाहों को भी कभी नहीं मिला.

‘बागी 2’ होगी 2018 की सबसे महंगी एक्शन फिल्म

मार्शल आर्ट्स और बेहतरीन एक्शन के साथ फिल्म ‘बागी’ ने एक्शन का एक उम्दा नमूना दर्शकों के सामने पेश किया था और अब अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों को फिल्म ‘बागी 2’ के साथ जोड़कर एक्शन को एक स्तर और ऊपर ले जाने की कोशिश की जा रही है. टाइगर श्राफ की अगली फिल्म ‘बागी 2’ साल 2018 की सबसे महंगी एक्शन फिल्म होगी.

बता दें कि फिल्म निर्माताओं ने थाईलैंड, हान्गकान्ग, लास एंजलिस, अमेरिका और चीन जैसे स्थानों से उम्दा तकनीशियन और एक्शन निर्देशक को अपनी फिल्म के साथ जोड़ा है. इस फिल्‍म के लिए टाइगर जमकर तैयारी कर रहे हैं. इस फिल्‍म में अपने लुक के लिए टाइगर ने अपने खूबसूरत घुंघराले बाल भी कटवा दिये हैं. इस फिल्‍म के लिए टाइगर ने पूरा सिर मुंडवा दिया है.

साल 2016 में आई फिल्‍म ‘बागी’ में टाइगर श्राफ के साथ श्रद्धा कपूर की केमिस्‍ट्री नजर आई थी. जबकि इस फिल्‍म में टाइगर के साथ दिशा पटानी नजर आने वाली हैं. टाइगर श्राफ और दिशा पाटनी यूं तो एक वीडियो सान्‍ग में साथ नजर आ चुके हैं, लेकिन उनके फैन्‍स लंबे समय से फिर से इस जोड़ी को साथ देखना चाहते थे.

निर्देशक अहमद खान के साथ फिल्म की पूरी टीम लगभग छह महीने से फिल्म पर काम कर रही है. टाइगर श्राफ अपने अद्भुत एक्शन के साथ एक बार फिर ‘बागी 2’ में अपना जादू बिखेरने के लिए तैयार हैं. सोमवार को ही इस फिल्‍म की शूटिंग शुरू की गई है. टाइगर ने फिल्‍म के सेट से एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की है. इस फोटो में टाइगर, दिशा, फिल्मकार साजिद नाडियाडवाला और निर्देशक अहमद खान नजर आ रहे हैं. दिशा ने भी मंगलवार को वही तस्वीर साझा करते हुए लिखा, ‘और इस तरह हमने ‘बागी 2′ की शूटिंग शुरू की. टाइगर श्राफ, साजिद नाडियाडवाला, अहमद खान, अभी तो हमने स्टार्ट (शुरू) किया है.’

पहली फिल्‍म ‘बागी’ में टाइगर के एक्‍शन को काफी सराहा गया था. अब ‘बागी 2’  में उनकी और भी जबरदस्‍त एक्‍शन व डांस की उम्‍मीद लगाई जा रही है. साजिद नाडियाडवाला द्वारा निर्मित ‘बागी 2’ को फाक्स स्टार स्टूडियो और नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा. यह फिल्म अगले साल 27 अप्रैल को रिलीज होगी.

‘आप’ उम्मीदवारों की पहली सूची अगले माह

गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी अक्तूबर में अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकती है. पहली सूची में केवल उन विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी, जहां पर पार्टी का संगठन मजबूत स्थिति में है.

दिल्ली प्रदेश के संयोजक और गुजरात प्रभारी गोपाल राय ने इस बात के संकेत दिए हैं. राय ने कहा, दो अक्तूबर से गुजरात में आप अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू करेगी. बता दें कि पंजाब और गोवा विधानसभा चुनाव, दिल्ली में विधानसभा उपचुनाव और नगर निगम चुनाव में मिली हार के बाद आप ने केवल दिल्ली पर फोकस करने की बात कही थी. हार के बाद पार्टी नेताओं के बीच भी घमासान मच गया था. आप नेता कुमार विश्वास ने इसके लिए पार्टी नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया था. आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने डैमेज कंट्रोल करने के मकसद से कई राज्यों के प्रभारियों की जिम्मेदारी बदल दी थी.

बीते दिनों बवाना विधानसभा उपचुनाव में आप ने जिस तरह बड़ी जीत दर्ज की है, उससे एक बार फिर पार्टी ने दूसरे राज्यों में पांव पसारने की योजना बनाई है. फिलहाल आप गुजरात और राजस्थान के विधानसभा चुनाव पर ध्यान दे रही है. पार्टी ने राजस्थान में सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है. इसके अलावा गुजरात में आप कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी, अभी यह तय नहीं है.

राय के मुताबिक, आप वहां पर चुनाव लड़ेगी. हम अभी जीत वाली विधानसभाओं पर फोकस कर रहे हैं. इस साल के अंत में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए आप दो अक्तूबर से चुनाव प्रचार अभियान शुरू करेगी. गांधी जयंती पर आप नेता गोपाल राय अहमदाबाद में रोड शो का नेतृत्व करेंगे. इसके बाद आप के कई बड़े नेता गुजरात पहुंचेंगे. दिल्ली सरकार के मंत्री और विधायकों के दौरों का कार्यक्रम भी तय किया जा रहा है.

तेल के बढ़े दामों के खिलाफ आंदोलन

आम आदमी पार्टी पेट्रोल-डीजल के बढ़े दामों के खिलाफ देशभर में आंदोलन करेगी. इसे लेकर रणनीति बनाने के लिए पार्टी के विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों की आपात बैठक बुलाई गई है. इसमें राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी. गोपाल राय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 50 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल को तकरीबन 56 प्रतिशत मुनाफे के साथ बेचा जा रहा है.

केजरीवाल लौटे, आज बैठक करेंगे

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दस दिन बाद मंगलवार को विपासना से दिल्ली वापस आ गए. मुख्यमंत्री ने आते ही बुधवार को कैबिनेट के सदस्यों की बैठक बुलाई है. बैठक में दिल्ली के कामकाज की स्थिति पर चर्चा होगी. इसके अतिरिक्त अब मुख्यमंत्री के पास जल बोर्ड का कार्यभार भी है और इसी सप्ताह में जल बोर्ड की बैठक भी बुलाई गई है. जहां से दिल्ली के सीवर व पानी संबंधित योजनाओं पर मंजूरी के लिए रखा जाएगा. मुख्यमंत्री विपासना के लिए महाराष्ट्र गए थे.

KBC में पिता सैफ के साथ भाग ले चुकी है सारा अली खान..!

सैफ अली खान और उनकी पहली पत्नी अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान इन दिनों बौलीवुड में अपने पहले डेब्यू को लेकर चर्चाओं में छाई हुई है. सैफ की ये राजकुमारी अपनी खूबसूरती के बूते कई बार लोगों को अपना दीवाना बना चुकी है. सारा उन स्टार किड्स में से एक हैं, जिससे लोगों को काफी उम्मीदें हैं. यही वजह है कि लोग सारा अली खान से जुड़ी हुई हर बात जानना चाहते हैं.

आज हम आपको उनसे जुड़ी एक ऐसी बात बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपने पहले कभी नहीं सुना होगा. क्या आप जानते हैं साल 2005 में आए KBC के दूसरे सीज़न में सैफ अली खान गेस्ट बनकर आए थे. उनके साथ उनकी छोटी सी बेटी यानी सारा अली खान भी थीं. सारा अली खान की ये वीडियो उनके इन्स्टाग्राम अकाउंट से मिली है.


इस वीडियो में अमिताभ बच्चन सैफ से सवाल कर रहे हैं और उनके जवाब को सुनकर उनकी बेटी सारा मुस्कुरा रही है. सारा अली खान उन बच्चों में से है, जो बचपन से लेकर आज तक किसी न किसी बात को लेकर खबरों में बनी हुई है. बौलीवुड में अब तक किसी भी फिल्म में भाग न लेने के बावजूद उनकी फैन फोलोइंग देखते ही बनती है. सारा न सिर्फ अपने पिता की वजह से, बल्कि अपनी खूबसूरती को लेकर भी लोगों के लेकर फेमस है. इतना ही नहीं. उनकी खूबसूरती समय के साथ बढ़ गई है.

तो क्या अब सचिन को क्रिकेट में हराएंगी कैटरीना?

कैटरीना कैफ इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘टाइगर जिंदा है’ की शूटिंग में व्यस्त हैं. लेकिन इस हेक्टिक शेड्यूल के बीच भी सलमान और कैटरीना मस्ती करना नहीं भूलते. कभी ये दोनों लंच पर साथ दिखाई देते हैं, तो कभी दोनों साथ स्विमिंग का मजा लेते हैं.

लेकिन दोनों ही अपने इन मस्ती भरे पलों को अपने फैन्स के साथ शेयर करना नहीं भूलते. हाल ही में कैटरीना ने अपने इन्स्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें वे बल्ला पकड़े छक्के-चौके लगाती हुई दिखाई दे रही हैं.

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इस वीडियो में आप देख पाएंगे कि शूटिंग के बीच अपने लिए खेल का समय निकाल कर कैटरीना क्रिकेट खेलने में मग्न है. कोई उनके लिए बोलिंग कर रहा है, वहीं वे हर बल पर शाट लगाती हुई दिखाई दे रही हैं. हालांकि उन्होंने इससे पहले कभी किसी पब्लिक इवेंट पर खेल के प्रति रुचि नहीं दिखाई है, लेकिन इस वीडियो को देखकर तो लगता है कि वे बहुत पहले ही क्रिकेट में अपना हाथ आजमा चुकी हैं. इस वीडियो को देखकर तो यही कहा जा सकता है कि वे सचिन को भी क्रिकेट में हरा सकती हैं.

बता दें कि कैटरीना ने कुछ समय पूर्व ही इन्स्टाग्राम ज्वाइन किया है, जहां वे इन दिनों अपनी हर छोटी-बड़ी बात शेयर करने लगी हैं. बेहद कम समय में उनके कई हजार फोलोअर हो चुके हैं. उनके फैन्स उनकी इस मासूमियत को बेहद पसंद करते हैं, लेकिन क्या आपको उनकी ये अदा पसंद आई?

सामाजिक कुरीतियों पर अदालत का हथौड़ा

हमीदा के 3 बच्चे थे. बड़ी बेटी 18 साल की थी. उस के निकाह की बात चल रही थी. बेटा 16 साल का था और सब से छोटी बेटी 12 साल की. हमीदा पढ़ी लिखी नहीं थी. देखने में खूबसूरत थी. माता पिता गरीब थे, इसलिए प्रिंटिंग प्रैस में काम करने वाले मुस्तफा से उस का निकाह कर दिया गया था.

हमीदा सोच रही थी कि बड़ी बेटी का निकाह हो जाए, तो वह आराम से दोनों बच्चों के अपने पैरों पर खड़ा होने के बाद ही उन की शादी करेगी. इस बीच हमीदा की मां की तबीयत खराब रहने लगी. एक दिन वह अपनी मां को देखने गई, तो वहां रात को उसे रुकना पड़ा.

मुस्तफा को यह सब पसंद नहीं आया. यह बात पता चलते ही वह लड़नेझगड़ने लगा. बड़ी बेटी ने फोन कर के कहा, ‘‘अब्बू बहुत गुस्से में हैं. आप जल्दी चली आओ.’’

हमीदा कभी अपनी बीमार मां की तरफ देख रही थी, तो कभी उसे शौहर के गुस्सा होने का डर लग रहा था. इस के बाद भी उस ने मां के पास ही रुकने की सोची. रात के तकरीबन 11 बज रहे थे. मुस्तफा का फोन आया. हमीदा ने बताया कि मां की तबीयत बहुत ज्यादा खराब है. वह कुछ दिन उन की खिदमत करना चाहती है.

यह बात सुन कर मुस्तफा को गुस्सा आ गया. उस ने फोन पर ही एकसाथ 3 बार ‘तलाक तलाक तलाक’ बोल कर कहा कि वह उसे तलाक दे रहा है. अब वह आराम से अपनी मां के साथ रहे.

‘तलाक’ के ये 3 शब्द सुन कर हमीदा के पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई. एक तरफ मां की खराब तबीयत थी, तो दूसरी ओर परिवार का बोझ. पति ने तलाक दे दिया था. वह अगले दिन सुसराल गई. वहां पति और उस के परिवार वालों ने उसे घर में घुसने नहीं दिया.

मुस्लिम औरतों के सामाजिक मुद्दों पर रिसर्च कर रही नाइश हसन कहती हैं, ‘‘तीन तलाक की पीड़ा बहुत सारी औरतों ने झेली है. तलाक केवल अपने पति से अलग होना भर नहीं होता, बल्कि तलाक से समाज में औरत का अपना वजूद ही खतरे में पड़ जाता है. वह घर से बेघर हो जाती है.

‘‘तलाक का डर दिखा कर उन के साथ सदियों से मनमानी हो रही है. उन का दर्द कोई नहीं सुनता. इन में से तमाम औरतों को हलाला जैसी कुरीतियों का भी सामना करना पड़ता है, जिस में गैरमर्द के साथ निकाह करने से ले कर जिस्मानी संबंध बनाने जैसे काम करने पड़ते हैं.

‘‘तीन तलाक की तरह ही हलाला जैसी कुरीतियों पर भी रोक लगनी चाहिए. यह औरतों की पहचान पर सब से बड़ी चोट करने वाली प्रथा है.’’

रजिया नामक लड़की की शादी तकरीबन 16 साल की उम्र में हो गई थी. उस का पति विदेश में नौकरी करता था. शादी के बाद वह कुछ दिन साथ रहा. रजिया पेट से हुई, तो वह अपनी नौकरी पर वापस चला गया. वहां उसे किसी ने यह बता दिया था कि रजिया अच्छी लड़की नहीं है. नतीजतन, वह उस से लड़नेझगड़ने लगा. एक दिन उस ने फोन पर ही तीन बार तलाक बोल कर रजिया को तलाक दे दिया.

रजिया ने अपने घर पर ही रह कर पढ़ाई पूरी की और एक स्कूल में टीचर की नौकरी करने लगी. उस का बच्चा भी बड़ा होने लगा था.

3 साल बाद पति विदेश से वापस आया. वह अपनी नौकरी छोड़ कर आया था. उस ने रजिया को अपने पैरों पर खड़ा देखा, तो उसे अपनी भूल का अहसास हुआ. वह रजिया के घर गया और उसे वापस ले जाने के लिए कहने लगा.

मौलाना ने उसे समझाया कि अब बिना हलाला के वह रजिया को अपने घर नहीं ले जा सकता. दोनों का तलाक हो चुका है. रजिया को भी यह समझाया गया कि अगर वह बिना हलाला के अपने पति के घर जाएगी, तो मरने के बाद उस को कोई कंधा नहीं देगा.

रजिया की ही रिश्तेदारी में एक लड़का था, जो अभी अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा था. रजिया और उस का निकाह हुआ. दोनों साथ रहे, तो अब वह लड़का उसे तलाक देने को तैयार नहीं था.

ऐसे में रजिया को दूसरे लड़के के साथ रहना पड़ा. वह लड़का उस के बच्चे को भी अपनाने को तैयार हो गया. पहला पति लड़ाई झगड़ा करने लगा. रजिया न इधर की रही, न उधर की.

धर्म का डर

अपने ही पति से दोबारा निकाह करने से पहले गैरमर्द के साथ निकाह और हलाला जैसे रिवाज धर्म के डर की वजह से लोग मानते हैं.

इस्लाम के नाम पर चल रही हलाला प्रथा पूर्व इस्लामिक रिवाज है. यह प्रथा औरतों को अपने कब्जे में रखने के लिए शुरू हुई थी. ऐसे में जब मर्द चाहते थे, तो 3 बार तलाक कह कर औरत को घर से बाहर निकाल देते थे और जब मन होता था, फिर से वापस बुला लेते थे.

मोहम्मद साहब ने इस प्रथा का विरोध किया था. वे चाहते थे कि औरतों के साथ ऐसा बर्ताव न हो. ऐसे में कहा गया कि एक औरत को अगर तलाक दे दिया गया है, तो तलाक देने वाले का मन बदल भी जाए, तो वह ऐसे ही उस औरत को घर नहीं ला सकता. यह तभी हो सकता है, जब उस औरत का किसी दूसरे मर्द से निकाह हो और किसी वजह से उन का तलाक हो जाए.

हलाला प्रथा उस समय मर्दों के साथ सख्ती थी कि वे औरतों को यौन दासी बना कर न रख सकें. आज के समय में हलाला प्रथा एक तरह से कुरीति बन गई. इस का गलत इस्तेमाल होने लगा. लोगों ने जब चाहे अपनी बीवी को तीन बार तलाक बोल कर घर से बाहर कर दिया, फिर वापस रखने के लिए उस को किसी गैरमर्द से निकाह करने और उस से यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया. फिर उस के साथ दोबारा निकाह कर लिया.

सामाजिक सुधार जरूरी

इस्लाम धर्म में जहां बहुत सारे लोग इस तरह से ऐसे मामलों को धर्म से जोड़ कर देखते रहे हैं, वहीं कुछ सुधारवादी लोग इस का हमेशा विरोध भी करते रहे हैं. कट्टरपन ज्यादा होने के चलते सुधारों को मूल समाज का साथ नहीं मिल सका है.

60 के दशक में महाराष्ट्र में सुधारवादी नेता हामिद दलवाई ने इस प्रथा का विरोध किया था. राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, तब शाहबानो केस सामने आया था. इस मामले में कोर्ट के फैसले को कानून बना कर प्रभावित किया गया था.

शाहबानो को भले ही गुजाराभत्ता न मिल सका हो, पर उस के बाद मुस्लिम निकाह में फैली कुरीतियों पर सवाल उठने लगे थे.

तीन तलाक के मसले पर उत्तराखंड के काशीपुर की शायरा बानो ने नई लड़ाई लड़ी और एक नया मुकाम हासिल किया.

शायरा बानो जैसी लड़ाई लड़ने वाली इशरत जहां, फरह फैज, गुलशन परवीन और आफरीन रहमान ने इस को मजबूत आधार दिया.

इन सभी के पीछे मुसलिम समाज की करोड़ों औरतों का समर्थन भी था. समाज के लिए बेहतर तो यही था

कि अदालत को ऐसे फैसले नहीं देने पड़ते. अगर समाज अपनी कुरीतियों और रूढि़वादी सोच को बदले, तो तमाम तरह की परेशानियां खुद से ही खत्म हो सकती हैं.

तीन तलाक जैसी कुरीतियों से दुनिया के कई देश आजाद हो चुके हैं. ऐसे में भारत में अगर यह पहले खत्म हो जाता, तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते.

भारत में धर्म को राजनीति का हथियार बनाया जाता है. इस वजह से इस का तुष्टीकरण होता है. ऐसे में वोट बैंक के लिए धार्मिक कुरीतियों को राजनीतिक समर्थन दे दिया जाता है.

अदालत ने केंद्र सरकार को 6 महीने में कानून बना कर मुस्लिम औरतों को तीन तलाक से मुक्त करने को कहा है.

तीन तलाक के बाद सात जन्मों के रिश्तों पर भी नजर डाल लीजिए

सामाजिक सुधारों की जरूरत केवल मुस्लिम धर्म को ही नहीं है, बल्कि दूसरे धर्मों में भी ऐसी तमाम कुरीतियां हैं, जो सभी को प्रभावित करती हैं. जातिभेद और जातिवाद जैसी तमाम बुराइयां हर धर्म और समुदाय में हैं. औरतों के साथ भेदभाव सभी धर्मों में है. तलाक जैसे मसले हिंदू धर्म में भी हैं. हिंदू धर्म में तलाक का कानून सरल नहीं है. ऐसे में दहेज, अपराध और औरतों को सताने की वारदातें होती हैं.

आंकड़ों को देखें, तो भारत में हिंदू धर्म में 6 लाख, 18 हजार, 529 औरतें और 3 लाख, 44 हजार, 281 मर्द तलाकशुदा हैं. मुसलिम धर्म में 2 लाख,

12 हजार औरतें और 57 हजार मर्द तलाकशुदा हैं. ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन धर्म में भी तलाकशुदा लोगों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में जरूरत है कि तलाक के कानून को सरल बनाया जाए, जिससे तमाम तरह की कुरीतियां खत्म हो सकें.

एकसाथ तीन तलाक पर कानूनी पाबंदी से इस बात की उम्मीद जग गई है कि औरतों के हकों पर सरकार और अदालतें गंभीरता से विचार करेंगी.

मुस्लिम धर्म की ही तरह हिंदू धर्म में भी बहुत सारे ऐसे मामले हैं, जिन में शादीशुदा जोड़े अलग होना चाहते हैं. हिंदू धर्म में शादी के बाद अलग होना बेहद जटिल है, जिस में लोग सालों साल पिसते रहते हैं. कई बार इस तरह की परेशानियों के चलते आपराधिक वारदातें भी घटती हैं, जिन के मुकदमे दहेज को ले कर सताने और दहेज हत्या जैसे हालात तक पहुंच जाते हैं.

हिंदू धर्म में खाप पंचायतों और जातीय पंचायतों में शादी से अलग होने के अजीबो गरीब फैसले होते रहते हैं. जिस तरह से तीन तलाक को लेकर कानून और सरकार सख्त हुए हैं, उसी तरह से हिंदू धर्म में भी शादी के बाद अलगाव होने का रास्ता सरल बनाया जाए.

आज समाज में सिंगल पेरेंट की तादाद बढ़ती जा रही है. इस की मूल वजह यह है कि हिंदू धर्म में शादी के बाद अलगाव होना आसान नहीं है.

अलगाव की शुरुआत दहेज को ले कर सताने जैसे मुकदमों से शुरू होती है. दोनों ही पक्ष एकदूसरे पर अलग अलग तरह के आरोप लगाते हैं. थानों से ले कर कचहरी तक ये मुकदमे चलते हैं.

अगर सहमति से अलगाव नहीं हो रहा, तो अपनी कही बात को साबित करना बहुत मुश्किल होता है. ऐसे में सालोंसाल थाने से ले कर कचहरी तक भटकना पड़ता है.

हर जिले में पारिवारिक अदालतें हैं. वहां लगी भीड़ को देख कर समझा जा सकता है कि सात जन्मों तक साथ देने का वादा इसी जन्म में किस तरह से टूट रहा है.

कई बार ऐसे फैसलों में इतना वक्त लग जाता है कि दोबारा शादी की उम्र ही निकल जाती है. ऐसे में पति या पत्नी अकेले रहना सब से ज्यादा पसंद

करते हैं. सब से बड़ी परेशानी उन पतिपत्नी के सामने आती है, जिन के बच्चे हो चुके होते हैं. ऐसे में बच्चों को साथ ले कर ये लोग सिंगल पेरेंट के रूप में रहते हैं.

आज के दौर में 25 साल की उम्र तक शादी हो जाती है. 4 से 5 साल शादी के बंधन से अलग होने का फैसला लेने तक उम्र 30 साल हो जाती है. 10 से 12 साल अलगाव में लग जाते हैं. अगर 40 की उम्र तक किसी का अलगाव हो भी जाए, तो वह दूसरी शादी कर के घर बसाने के लायक नहीं रह जाता है.

PHOTOS : बहुत ग्लैमरस है सनी लियोन की भाभी

‘बिग बास’ में एंट्री लेने के बाद ‘जिस्म 2’ के जरिए अपने बौलीवुड करियर की शुरुआत करने वाली सनी एक्टिंग के साथ-साथ फिल्मों में अपने धमाकेदार आइटम नंबर्स की वजह से चर्चा में बनी रहती हैं. पोर्न स्टार से बौलीवुड एक्ट्रेस बनीं सनी लियोन की गिनती अब इंडस्ट्री की टौप हीरोइनों में होती है.

सनी का एक भाई भी है, जिनका नाम संदीप वोहरा है. संदीप वोहरा उर्फ सनी ने पिछले साल स्टाइलिस्ट करिश्मा नायडू से शादी की है. बता दें कि लंबे समय तक डेटिंग करने के बाद करिश्मा और संदीप ने दिसंबर, 2016 में लास एंजिलिस में शादी की थी. सेलेब्रेशन में सनी अपने पति डेनियल के साथ पहुंची थीं. सनी लियोनी के भाई और करिश्मा नायडू के पति संदीप वोहरा यूएस के मशहूर पब ‘किंग्स रो गेस्ट्रो’ में बतौर एग्जीक्यूटिव शेफ काम करते हैं.

सनी लियोन की तरह उनकी भाभी करिश्मा भी काफी ग्लैमरस लाइफ जीने में विश्वास रखती हैं. करिश्मा फैशन स्टाइलिस्ट हैं और वह बतौर स्टाइलिस्ट रियलिटी शो ‘स्प्लिट्जविला’ का भी हिस्सा रह चुकी हैं. बता दें, करिश्मा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं, वो अक्सर अपने पति संदीप के साथ सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करती रहती हैं. उन्होंने अपनी कई ग्लैमरस तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा की है.

सनी के पेशे से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन उनकी निजी जिन्दगी के बारे में बेहद कम ही लोग जानते हैं. बौलीवुड में कदम रखने से पहले ही सनी लियोन के माता-पिता का निधन हो गया था. सनी लियोन का असली नाम करनजीत कौर वोहरा है. सनी ने अपनी लाइफ पर बनी डाक्यूमेंट्री फिल्म में बताया था कि पोर्न इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले जब उनसे उनका नया नाम चुनने को कहा गया था, तब उनके दिमाग में भाई का ख्याल आया, जिन्हें प्यार से सनी कहा जाता था. भाई सनी उर्फ संदीप के नाम से ही उन्होंने पोर्न इंडस्ट्री में कदम रखा था.

बोल्डनैस का ये है परफैक्ट इस्तेमाल

चंडीगढ़ में विकास बराला और उस के दोस्त आशीष ने सिद्ध कर दिया कि एक गाड़ी में भी एक युवती बहुत सेफ नहीं है. शोहदे यदि चाहें तो वे तेज गाड़ी में जाती लड़की को भी अगवा कर सकते हैं. इस बहुचर्चित मामले में केवल 2 लड़कों में ही इतनी हिम्मत थी कि गाड़ी में चलती लड़की को पकड़ने की कोशिश कर सकें.

ठीक है विकास बराला के सिर पर सत्ता का बड़ा भूत सवार था कि उस का बाप सरकार चलाता है. अगर वह भारतीय जनता पार्टी की हरियाणा प्रदेश इकाई के अध्यक्ष का बेटा न होता, तो भी ऐसा कर लेता, इस में थोड़ा संदेह है. हां, अगर सताई लड़की आईएएस अधिकारी की बेटी न होती तो मामला उछलता ही नहीं.

देश में लड़कियों को जो आजादी मिली है वह अभी भी सतही है और इस पर भी हजार पाबंदियां हैं. लड़कियों को आज भी कोरे मनोरंजन की चीज समझा जा रहा है क्योंकि देश के अधिकांश घरों में मांओं, दादियों, बूआओं, मौसियों और बहनों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को हर कोई देखता है. जब घरघर में दहेज हत्या की चर्चा हो रही हो तो स्वाभाविक है कि यह हरेक के मन में बैठ जाएगा कि औरत जात के साथ जैसा मरजी व्यवहार किया जा सकता है.

लड़कियों के पैदा होते ही यह पाठ पढ़ा दिया जाता है कि वे कमजोर हैं लेकिन इस से ज्यादा लड़कों को यह पढ़ाया जाता है कि वे ज्यादा मजबूत हैं और मनमानी कर सकते हैं. ऐसा हर स्तर पर होता है. निर्भया कांड में सब से दुर्दांत नाबालिग लड़का किसी नेता का बेटा नहीं था, एक बेहद गरीब का, सड़कों का मारा लड़का था. उस ने बड़े ही वहशीपन से लड़की के साथ बरताव किया था.

इस मानसिकता को बदलना आसान नहीं  है.  हर लड़की की अपनी आजादी है कि वह घर में रहे या बाहर मजे में घूमे, विवाह पूर्व सैक्स करे या न करे, चिरकुंआरी रहे, ऊपर से नीचे टैंटनुमा कपड़ों में रहे या अपने सुंदर अंगों का सार्वजनिक प्रदर्शन करे. समाज, सरकार या स्वामियों को उसे रोकने का कोई हक नहीं. लड़कियां कब क्या करें क्या न करें, यह उन के विवेक पर छोड़ें.

हर जीव की तरह हर लड़की भी अपनी सीमाएं जानती है. वह जल्दी समझ जाती है कि किस हद तक स्वतंत्रता का इस्तेमाल किया जा सकता है. उसे यह पाठ अपनी गलतियों से खुद सीखने दें, उस पर थोपें नहीं. चंडीगढ़ के मामले में आईएएस पिता ने 12 बजे रात को अकेले आने के बेटी के अधिकार की रक्षा की है, यह तारीफ की बात है. यह भी तारीफ की बात है कि उस लड़की ने धैर्य नहीं खोया और अपनी गाड़ी को बचा भी लिया और पुलिस को रात में सड़कों पर रेस करते हुए सूचना भी दे दी. इतना प्रैजेंस औफ माइंड हरेक में नहीं होता. यह सही मानो में उस लड़की की बोल्डनैस है जिस का उस ने परफैक्ट इस्तेमाल किया.

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