सैक्स और गंदगी में फर्क : कल्पना शाह

कल्पना शाह मुंबई की रहने वाली हैं. उन के पिता फ्लाइट लैफ्टिनैंट हैं. इस वजह से उन की पढ़ाई चंडीगढ़ में ज्यादा हुई. कल्पना शाह को स्कूल के समय से ही ऐक्टिंग करने का शौक था. जब वे 11वीं जमात में थीं, तभी उन्हें दूरदर्शन के लिए बन रहे एक शो में ऐंकरिंग करने का काम मिल गया था. इसे देख कर भोजपुरी फिल्मों के प्रोड्यूसर अशोक चंद जैन ने उन्हें अपनी फिल्म औफर की थी.

नतीजतन, साल 2008 में कल्पना शाह ने अपनी पहली फिल्म ‘जोगीजी धीरेधीरे’ से धमाकेदार शुरुआत की. उन्होंने भोजपुरी फिल्मों के साथसाथ हिंदी फिल्म ‘यारियां’ से शुरुआत की. ‘क्या फर्क पड़ता है’ हिंदी में आने वाली उन की अगली फिल्म है.

तकरीबन 67 फिल्मों में काम कर चुकी कल्पना शाह ने ऐक्टिंग के साथसाथ पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन पूरी की. पेश हैं, उन के साथ हुई बातचीत के खास अंश:

स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही आप फिल्मों में आ गई थीं. यह फैसला लेने में परिवार वालों में सब से ज्यादा किस का सहयोग था?

मेरे भाई ने मुझे पूरा सहयोग दिया. मेरे परिवार में 70 फीसदी डाक्टर और 30 फीसदी पायलट हैं. उन्होंने समझाया कि ऐक्टिंग करने में कोई हर्ज नहीं, पर पहले अपनी पढ़ाई को पूरा करना है.

मैं ने ऐक्टिंग के साथसाथ पढ़ाई को जारी रखा. मुझे भोजपुरी के साथ हिंदी फिल्में भी करने को मिलीं. भोजपुरी बोली मुझे आती नहीं थी, जिसे मैं ने फिल्म में काम करने वाले लोगों की मदद से सीखा.

मुझे लगता है कि अपनी पढ़ाई हर किसी को पूरी करनी चाहिए. पढ़ाई इनसान को समझदार बनाती है.

भोजपुरी फिल्मों में सैक्स बहुत हावी दिखता है. इस बारे में आप क्या सोचती हैं?

दरअसल, भोजपुरी फिल्मों को बनाने वाले बहुत कम लोग खुद की सोच रखते हैं. ज्यादातर सैक्स प्रधान फिल्में भोजपुरी के गानों पर बनी होती हैं. गायक खुद ही फिल्म का हीरो बन जाता है. गानों के गंदे बोलों को जब हीरोहीरोइन पर फिल्माया जाता है, तो गंदापन खुल कर दिखने लगता है.

वैसे, सैक्स और गंदगी में फर्क होता है. सैक्स हिंदी फिल्मों में कम नहीं होता, पर उस को दिखाने का तरीका अलग होता है.

भोजपुरी फिल्मों का बाजार भी काफी बढ़ रहा है. इस के बावजूद इस फिल्म उद्योग की इमेज नहीं सुधर रही है. क्यों?

भोजपुरी फिल्म बनाने वालों को अपने पर भरोसा नहीं होता. वे हीरो की बातों पर आंख मूंद कर के यकीन करते हैं. उन को लगता है कि हीरो की बात मानने से फिल्म चल जाएगी.

दरअसल, हीरो का अपना मकसद होता है. उस का फिल्म के कलाकारों के चुनने तक में दबाव होता है. ज्यादातर हीरो अपने पसंद की हीरोइन रखना चाहते हैं. इस के चलते अच्छे कलाकारों का कैरियर खराब होता है, जिस का असर फिल्मों पर पड़ता है. कलाकारों के चुनने में फिल्म बनाने वालों को ध्यान देना चाहिए. कहानी की मांग में जो फिट बैठ रहा हो, उस को लेना चाहिए. हीरो के दखल से बचना चाहिए.

फिल्मों में गानों खासकर आइटम गीतों की क्या भूमिका होती है?

भोजपुरी फिल्मों में गानों की अपनी अहमियत होती है. आइटम गीत फिल्म की बिक्री से जुड़ा मुद्दा होता है. दर्शकों पर इस का अच्छा असर पड़ता है.

आइटम गीत में गानों के बोल और उस के फिल्मांकन का ध्यान देना जरूरी होता है. मैं ने फिल्म ‘ग्रेट हीरो हीरालाल’ में आइटम डांस ‘मर गइनी दैया पाके बलम हलवइयां’ किया था. गाना और उस का फिल्मांकन अच्छा हो, तो वह देखने वालों को अच्छा लगता है.

क्या आप मानती हैं कि इन फिल्मों में ऐक्सपोजर नहीं होना चाहिए?

फिल्मों में ऐक्सपोजर होगा, क्योंकि दर्शक उसे पसंद करते हैं. यह बात हर तरह की फिल्मों पर लागू होती है. मेरा मानना है कि ऐक्सपोजर फिल्म की कहानी और उस की डिमांड के हिसाब से होना चाहिए.

भोजपुरी फिल्मों में ऐक्सपोजर नंगापन की तरह दिखता है. यह फिल्मों की इमेज के लिए ठीक नहीं होता. परिवार ऐसी फिल्मों से दूर हो जाता है. जिस फिल्म की कहानी में ऐक्सपोजर की डिमांड भी नहीं होती, वहां गानों के फिल्मांकन में जबरदस्ती उस को डाल दिया जाता है.

आप को कैसे रोल पसंद हैं?

रोमांटिक और महिला प्रधान कहानी वाले रोल मुझे बेहद पसंद हैं. अपनी फिल्मों में मैं ने हर तरह के रोल किए हैं.

समाज में औरतों की हालत पहले से बेहतर हुई है?

औरतों की हालत पहले भी समाज में अच्छी थी. इतिहास बहुत बहादुर औरतों से भरा पड़ा है. आज भी ऐसी औरतें हैं. आज के दौर में अपने पैरों पर खड़ी औरतों की तादाद बढ़ गई है. हर तबके में औरतों को परिवार का सहयोग मिलने लगा है. जैसजैसे पढ़ाईलिखाई का लैवल बढ़ेगा, औरतों में और भी ज्यादा बदलाव आएगा.

राजनीति के प्रति आप की सोच क्या है?

मेरा तो यही मानना है कि औरतों को अपनी राजनीतिक सोच रखनी चाहिए. राजनीति में भी अपनी जगह बनाने के लिए प्रयास करना चाहिए. मुझे कभी मौका मिला, तो जरूरी राजनीति में आऊंगी.

मैं मुंबई की एक बस्ती में औरतों और बच्चों की मदद करती हूं. मैं मुंबई में भाजपा मुक्ति महिला मोरचा की पदाधिकारी हूं.

शादी लव मैरिज होनी चाहिए या अरेंज मैरिज?

जैसी शादी लड़की और उस का परिवार पसंद करता हो, वैसी शादी होनी चाहिए. इस से शादी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता कि वह लव मैरिज है या अरेंज मैरिज. शादी वही कामयाब होती है, जहां रिश्तों में भरोसा होता है.

लुढ़कती अर्थव्यवस्था और सरकार की उदासीनता

हर कट्टरपंथी समाज का एक गुण होता है कि वह सुनीसुनाई बात को परम सत्य मान लेता है. वह पुरखों की या महान माने जाने वाले लोगों की बातों को बिना परखे, बिना तर्क की कसौटी पर जांचे, बिना वैज्ञानिक परीक्षण के मान लेता है. यह वही समाज है जो गणेश का दूध पीना 21वीं सदी में सही मान लेता है, जो कुतुबमीनार को किसी राजा की रानी के लिए जमुना की पूजा का मंच मान लेता है और गणेश के सिर को सर्जरी की कला का कमाल मान लेता है.

इसी समाज के नेता सुनीसुनाई बातों पर भरोसा कर रहे थे कि देश में कालाधन या तो स्विस बैंकों में जमा है या लोगों की तिजोरियों में बंद है. इसीलिए नरेंद्र मोदी ने 2014 में वादा किया कि जीतने के बाद हर नागरिक को 15 लाख रुपए मिल जाएंगे और 8 नवंबर,  2016 को वादा किया कि 1 जनवरी, 2017 से न कालाधन होगा, न रिश्वतखोरी. देश प्रगति की कुलांचें भरेगा.

यही वादा कर के ‘एक देश एक टैक्स’ लाया गया कि जीएसटी से न ब्लैक इकोनौमी होगी और न कर चोरी.

इन सब से कर चोरी तो जरूर रुकेगी क्योंकि लोगों के पास पैसे ही नहीं बचेंगे. रिश्वतखोर कांग्रेस सरकार के जमाने में अर्थव्यवस्था जिस तरह बढ़ रही थी उस पर ब्रेक लग गया है. आंकड़े बता रहे हैं कि नोटबंदी का लाभ जीरो मिला है क्योंकि सारे नोट ही नहीं, शायद सारों से ज्यादा, नकली सहित, बैंकों में पहुंच गए. नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था को बीमार कर दिया था जिस से वह लड़खड़ा कर उठ रही ही थी कि अब जीएसटी की मार ने उस का सिर फोड़ दिया है.

अर्थव्यवस्था की प्रगति, जो 6.9 से 7.3 प्रतिशत से बढ़ रही थी, अब 5.2 प्रतिशत रह गई है. भविष्य में यह और ज्यादा घट सकती है. हम युवाशक्ति पर गर्व करते हैं पर गांवों और शहरों में युवाओं को काम नहीं मिल रहा है. वहीं, किसान व आमलोग अपनी संपत्ति बेचने की फिराक में है. खेती व शहरी जमीनों के दाम गिर रहे हैं.

नीतिनिर्धारक दरअसल प्रचारकों की भाषा में सोचते हैं कि अंतिम सत्य किताबों में, शोधों में नहीं, प्रवचनों और मंत्रों में होता है. बुलेट ट्रेन मंत्री की रेलों में दुर्घटनाएं होती हैं और जीवन उद्धार करने वाले भगवा मुख्यमंत्री के अपने शहर में बच्चे जीवन त्याग रहे हैं, वह भी सरकारी अस्पताल में.

हां, एक मोरचे पर भारी सफलता है- वोटों के मोरचे पर. केंद्र सरकार को अभी भी भारी समर्थन मिल रहा है. बिहार में सत्ताधारी एक पूरी पार्टी उस के साथ आ मिली है और ऐसा ही तमिलनाडु में होने जा रहा है. गुरु राम रहीम जिन तथाकथित चमत्कारों का दावा कर के लोगों को वश में करता था वह कला बहुतों को आती है.

पेपर माफिया के निराले खेल

इसी साल 22 मार्च की सुबह के करीब 10 बजे जयपुर में कुछ पत्रकारों को सूचना मिली कि टोंक फाटक के पास किताबों की कुछ दुकानों पर राजस्थान विश्वविद्यालय का बीएससी द्वितीय वर्ष का फिजिकल कैमिस्ट्री का प्रश्नपत्र बेचा जा रहा है. यह पेपर उसी दिन दोपहर 3 बजे होने वाला था. किसी परीक्षार्थी ने दुकानों पर बिक रहे उस पेपर की कौपी वाट्सऐप द्वारा एक पत्रकार को भेज दी थी. उस पत्रकार ने इस मामले की जानकारी अपने एक साथी को दी. उन दिनों जयपुर में राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था. दोनों पत्रकारों ने सावधानी के तौर पर विधानसभा पहुंच कर कुछ विधायकों को इस मामले के बारे में बताया ही नहीं, वह पेपर भी दिखाया.

दोनों पत्रकारों ने उस प्रश्नपत्र पर 4 विधायकों से हस्ताक्षर करवा कर समय भी दर्ज करवा लिया. उन में सत्तापक्ष भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी, कांग्रेस के घनश्याम मेहर, श्रवण कुमार और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल शामिल थे.

शाम 6 बजे जब पेपर समाप्त हुआ तो उस पेपर का मिलान किया गया. हूबहू वही पेपर आया था, जो उन के पास था. उस में न कोई सवाल बदला था और न ही सवालों का क्रम. ओरिजिनल पेपर और बाजार में बिक रहे पेपर की भाषा और छपाई का फोंट भी एक ही था.

जब यह मामला सामने आया तो राजस्थान यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश्वर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस की जांच कराएगा. यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक बी.एल. गुप्ता ने कहा कि परीक्षाओं में पूरी गोपनीयता बरती जा रही है, फिर भी मामला कमेटी के पास जांच के लिए भेजा जाएगा.

जांच के बाद आखिर यूनिवर्सिटी ने वह पेपर निरस्त कर दिया. राजस्थान यूनिवर्सिटी की पूरे देश में बहुत अच्छी साख है. पेपर आउट होने की इस घटना से यूनिवर्सिटी की छवि पर विपरीत असर पड़ सकता था. निस्संदेह यह बेहद गंभीर मामला था, इसलिए उच्चाधिकारियों ने राजस्थान पुलिस के स्पैशल औपरेशन ग्रुप (एसओजी) को इस मामले की जांच करने को कहा.

एसओजी ने सूचनाएं जुटानी शुरू कीं तो जानकारी मिली कि राजस्थान के विभिन्न शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की ओर से आयोजित होने वाली विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही कई माध्यमों से लीक हो रहे हैं.

गहराई से जांच की गई तो पता चला कि बीकानेर यूनिवर्सिटी की ओर से इसी साल 5 अप्रैल को होने वाली एमकौम फाइनल की परीक्षा, राजस्थान विश्वविद्यालय द्वारा 10 अप्रैल को कराई गई बीए तृतीय वर्ष के भूगोल के प्रथम प्रश्नपत्र की परीक्षा और 12 अप्रैल को होने वाली द्वितीय प्रश्नपत्र और 13 अप्रैल को होने वाली एमए प्रीवियस एवं एबीएसटी द्वितीय के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही लीक हो गए थे.

इस से परीक्षाओं की गोपनीयता भंग हुई थी. जांच के बाद एसओजी ने पेपर माफिया के विरुद्ध 3 मामले दर्ज किए. एसओजी के आईजी दिनेश एम.एन. के निर्देश पर एसओजी के एसपी संजय श्रोत्रिय के निर्देशन में करीब एक दर्जन टीमों का गठन किया गया. इन टीमों ने पेपर लीक होने के मामले में तकनीकी जांच कर संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी.

इस के बाद 17 अप्रैल को सब से पहले राजस्थान यूनिवर्सिटी के एक विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया. इन में राजस्थान यूनिवर्सिटी के भूगोल के विभागाध्यक्ष जगदीश प्रसाद जाट, राजस्थान विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर गोविंद पारीक, भूगोल के सेवानिवृत्त प्रोफेसर बी.एल. गुप्ता थे.

इस के अलावा राजकीय कालेज खाजूवाला (बीकानेर) के प्राचार्य एन.एस. मोदी और बीकानेर निवासी उन के बेटे निपुण मोदी, एसएसजी पारीक गर्ल्स कालेज चौमूं (जयपुर) के प्रोफेसर शंभुदयाल झालानी, अग्रसेन कालेज भादरा (हनुमानगढ़़) के लेक्चरर कालीचरण शर्मा, रमेश बुक डिपो, मानसरोवर, जयपुर का कर्मचारी शरद शामिल थे.

इन लोगों से पूछताछ में पता चला कि बीकानेर यूनिवर्सिटी की ओर से 5 अप्रैल को एमकौम फाइनल वर्ष के ओआर एंड क्यूटी की परीक्षा आयोजित की गई थी. लेकिन इस परीक्षा के प्रश्नपत्र के सवालों को 4 दिन पहले यानी 1 अप्रैल को राजस्थान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गोविंद पारीक ने एसएसजी पारीक गर्ल्स कालेज चौमूं के प्रोफेसर शंभुदयाल झालानी से नोट कर के बीकानेर यूनिवर्सिटी के खाजूवाला कालेज के प्राचार्य एन.एस. मोदी को बता दिया.

मोदी ने उन सवालों को अपने बेटे निपुण मोदी को बता दिया. वह इस पेपर की परीक्षा दे रहा था. यही पेपर रमेश बुक डिपो के कर्मचारी शरद ने परीक्षा से पहले ही अग्रसेन कालेज भादरा (हनुमानगढ़) के व्याख्याता कालीचरण शर्मा के जरिए फोन पर हासिल कर लिया और अन्य लोगों को वितरित कर दिया.

इसी तरह राजस्थान यूनिवर्सिटी में 10 अप्रैल को होने वाली बीए फाइनल ईयर की परीक्षा में भूगोल प्रथम प्रश्नपत्र का पेपर 8 अप्रैल को ही राजस्थान यूनिवर्सिटी के भूगोल के विभागाध्यक्ष जगदीश प्रसाद जाट ने पेपर सैटर बी.एल. गुप्ता से नोट किया और परीक्षार्थियों को वितरित कर दिया.

राजस्थान यूनिवर्सिटी की 12 अप्रैल को होने वाली बीए तृतीय वर्ष का भूगोल द्वितीय प्रश्नपत्र का पेपर 11 अप्रैल को ही जगदीश प्रसाद जाट ने हासिल कर विद्यार्थियों में बांट दिया था. इस तरह यह पेपर भी आउट कर दिया गया था.

राजस्थान यूनिवर्सिटी की 13 अप्रैल को होने वाली एबीएसटी द्वितीय प्रश्नपत्र (एडवांस्ट कोस्ट एकाउंटिंग) की परीक्षा का पेपर एक दिन पहले 12 अप्रैल को राजस्थान यूनिवर्सिटी की गोपनीय शाखा के कर्मचारी नंदलाल सैनी, अशोक अग्रवाल एवं महेश गुप्ता तथा अन्य लोगों ने आउट कर दिया था.

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि 17 अप्रैल को हो रहे बीकौम फाइनल ईयर के इनकम टैक्स का पेपर भी परीक्षा से पहले लीक हो चुका था. इस सूचना पर 17 अप्रैल को ही एसओजी की एक टीम ने दौसा जिले के बांदीकुई कस्बे में छापा मारा. अगले दिन यानी 18 अप्रैल को एसओजी ने पेपर लीक प्रकरण में 3 अन्य मुकदमे दर्ज कर 5 लोगों को गिरफ्तार किया.

इन में राजस्थान यूनिवर्सिटी की गोपनीय शाखा का अनुभाग अधिकारी नंदलाल सैनी, राजकीय कालेज कालाडेरा (जयपुर) का लेक्चरर शंकर चोपड़ा, बांदीकुई (दौसा) का कोचिंग संचालक चंद्रप्रकाश सिंधी तथा फाइनल ईयर के छात्र अखिल रावत एवं अजय कुमार सैनी शामिल थे.

इन में कालाडेरा कालेज के लेक्चरर शंकर चोपड़ा ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के एमए फाइनल ईयर के वाटर रिसोर्स एवं एडवांस ज्योग्राफी औफ इंडिया के पेपर परीक्षा से पहले 8 अप्रैल को ही यूनिवर्सिटी के भूगोल के विभागाध्यक्ष जगदीश प्रसाद जाट को बता दिए थे.

लगातार तीसरे दिन काररवाई करते हुए एसओजी ने 19 अप्रैल को राजस्थान यूनिवर्सिटी के कौमर्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. महेशचंद गुप्ता को गिरफ्तार किया. उन्होंने यूनिवर्सिटी के एमकौम प्रीवियस की 13 अप्रैल को हुई एबीएसटी की परीक्षा का पेपर तैयार किया था.

इस की सूचना यूनिवर्सिटी की गोपनीय शाखा के अनुभाग अधिकारी नंदलाल सैनी ने प्रो. अशोक अग्रवाल को दी थी. प्रो. अशोक अग्रवाल ने डा. महेशचंद गुप्ता से संपर्क कर परीक्षा से एक दिन पहले पेपर हासिल कर लिया था.

उसी दिन एसओजी ने राजकीय कालेज कालाडेरा के भूगोल के लेक्चरर सुरेंद्र कुमार सैनी को गिरफ्तार किया. उन्होंने यूनिवर्सिटी के एमए/एमएससी फाइनल ईयर भूगोल की एडवांस ज्योग्राफी औफ इंडिया की 17 अप्रैल को होने वाली परीक्षा का पेपर तैयार किया था.

सैनी ने यह पेपर शंकर को बता दिया था. शंकर के माध्यम से यह पेपर जगदीश प्रसाद जाट एवं अन्य लोगों तक पहुंच गया था. इस के बाद एसओजी ने 21 अप्रैल को राजस्थान यूनिवर्सिटी के कौमर्स विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर व चीफ वार्डन राजीव शर्मा एवं यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक के निजी सचिव सुरेंद्र मोहन शर्मा को गिरफ्तार किया.

इन में निजी सहायक सुरेंद्र मोहन शर्मा ने नंदलाल सैनी से पेपर बनाने वाले प्राध्यापकों के नाम पता कर के एसोसिएट प्रोफेसर राजीव शर्मा को बताए थे. राजीव शर्मा ने अपने परिचितों के लिए पेपर बनाने वाले उन प्राध्यापकों से संपर्क किया और परीक्षा की गोपनीयता भंग की.एसओजी ने 22 अप्रैल को यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार एम.सी. गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया. इस के अगले दिन जयपुर के टोंक फाटक स्थित एक कौमर्स कोचिंग क्लासेज के संचालक अतिशय जैन को पकड़ा गया. इस तरह पेपर लीक प्रकरण में 17 से 23 अप्रैल तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

इन लोगों से की गई पूछताछ और एसओजी की जांच में सामने आया कि सरकारी यूनिवर्सिटी के अधिकारियों, कर्मचारियों, पेपर बनाने वाले प्रोफेसरों से ले कर उन के सहायकों, कोचिंग संचालकों, प्राइवेट कालेजों एवं बुक सेलरों का पूरा रैकेट है. ये लोग पैसों के लालच, कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने, पासबुक (गेस पेपर) लिखने के लिए राइटर बने रहने और परिचितों एवं परिजनों को अच्छे नंबर दिलाने के लिए पेपर लीक करते थे.

एसओजी ने पेपर लीक होने की सूचना मिलने के बाद कई दिनों तक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों व अन्य लोगों के फोन सर्विलांस पर रखे. इस के बाद एक से एक कडि़यां जुड़ती गईं. 1 अप्रैल को प्रिंसिपल एन.एस. मोदी व प्रोफेसर गोविंद पारीक के बीच वाट्सऐप पर हुई वार्ता में मोदी ने पारीक से कहा था, ‘‘5 अप्रैल को एमकौम का पेपर है, सेंड करो.’’

इस पर पारीक ने कहा, ‘‘पेपर मेरे पास नहीं है. मैं ले कर देता हूं.’’

इस के बाद चौमूं के अग्रसेन कालेज के प्रो. शंभुदयाल झालानी और पारीक के बीच बातचीत सामने आई. इस में पारीक ने झालानी से कहा, ‘‘यार, एमकौम का जो पेपर बनाया था, उसे सेंड करो.’’

झालानी ने कहा, ‘‘सर, उस दिन जो सेंड किया था, वही पेपर है.’’

पारीक ने कहा, ‘‘एक बार फिर सेंड करो.’’

झालानी ने कहा, ‘‘ठीक है, मैं अभी सेंड कर देता हूं.’’

पारीक ने कहा, ‘‘हां यार, मोदी को सेंड करना है. उन का बेटा एमकौम में है.’’

इस के बाद झालानी ने वाट्सऐप पर पारीक को पेपर सेंड कर दिया था.

राजस्थान यूनिवर्सिटी ने इसी साल पेपर सेटर के मानदेय बढ़ाए थे. अंडर ग्रैजुएट का प्रति पेपर मानदेय ढाई हजार रुपए एवं पोस्ट ग्रैजुएट का प्रति पेपर 3 हजार रुपए किया गया है. इस के बावजूद यूनिवर्सिटी के विभागाध्यक्ष और बोर्ड औफ स्टडीज के समन्वयक या सदस्यों के दबाव में आ कर पेपर लीक किए गए.

दरअसल, विभिन्न विषयों के विभागों में एक अध्ययन मंडल (बोर्ड औफ स्टडीज) होता है. इस में समन्वयक व 2 सदस्य होते हैं. ये ही पेपर सेटर नियुक्त करते हैं. संबंधित विषय के विभागाध्यक्ष या डीन इस से जुड़े रहते हैं. 3 प्रोफेसर 3 पेपर सेलेक्ट कर सीलबंद लिफाफे में परीक्षा नियंत्रक के पास भेजते हैं.

परीक्षा नियंत्रक एवं यूनिवर्सिटी के अन्य उच्चाधिकारी उन में से एक पेपर सेलेक्ट कर छपने के लिए प्रिंटिंग प्रैस पर भेजते हैं.

पेपर लीक करने के लिए कन्वीनर और सेलेक्टर संबंधित विभाग की गोपनीय शाखा से पता करते थे कि किस प्रोफेसर का पेपर सेलेक्ट हुआ है. जिस प्रोफेसर का पेपर सेलेक्ट होता था, उस से संपर्क कर के पेपर हासिल कर लिया जाता था. वह प्रोफेसर भी अपने परिचितों को पेपर बता देता था. कन्वीनर के पूछने पर उसे भी पेपर बता दिया जाता था.

इस घपले में लिप्त लोग बाकायदा बोर्ड औफ स्टडीज के चुनाव में अपने रसूख का प्रयोग करते थे. कुछेक तो बोर्ड औफ स्टडीज के समन्वयक भी बने हुए थे. इन्हीं के माध्यम से पेपर सेटर से पेपर पूछा जाता था. ऐसा न करने पर उन पर हटाने का दबाव डाला जाता था. दूसरी ओर कुछ पब्लिशर बोर्ड औफ स्टडीज एवं एचओडी से मिल कर मुख्य प्रश्नों की पासबुक (गेस पेपर) छापते थे.

जिस पब्लिशर की पासबुक से परीक्षा में सब से ज्यादा सवाल आते थे, उस की प्रसिद्धि रातोंरात हो जाती थी. उस की पासबुक खरीदने के लिए परीक्षार्थियों में होड़ मच जाती थी. ये पब्लिशर इस तरह चांदी काटते थे.

इस के अलावा कुछ प्रोफेसर कोचिंग संस्थानों में पढ़ाते थे. ये प्रोफेसर परीक्षार्थियों को मोस्ट इंपोर्टेंट सवाल बता कर अपनी प्रसिद्धि के लिए येन केन प्रकारेण पेपर हासिल करते थे. कोचिंग संस्थानों के संचालक भी रातोंरात प्रसिद्धि पाने और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए अपने विद्यार्थियों को पेपर बताते थे. ये भी अनैतिक तरीकों से पेपर हासिल करते थे.

बांदीकुई का जो कोचिंग संचालक पकड़ा गया है, उस से इसी बात के संकेत मिलते हैं. प्रोफेसर बुकसेलरों को इसलिए पेपर मुहैया कराते थे, क्योंकि पब्लिशर उन्हें लेखक बनाए रखें. अधिकांश अपनी किताबों के लेखक राजस्थान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों को बनाते थे, ताकि उन की किताबों की ज्यादा से ज्यादा बिक्री हो. इस के बदले में प्रोफेसर उन्हें पेपर उपलब्ध कराते थे.

पब्लिशर इन पेपरों का उपयोग वन वीक सीरीज आदि में करते थे, ताकि उन की किताबों, पासबुक और अन्य परीक्षाओं में सहायक पुस्तकों की बिक्री होती रहे.  पेपर लीक करने का मामला उजागर होने पर 18 अप्रैल को राजस्थान की उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने राजस्थान यूनिवर्सिटी के भूगोल के विभागाध्यक्ष प्रो. जगदीश प्रसाद जाट, राजस्थान विश्वविद्यालय के कौमर्स विभाग के प्रोफेसर गोविंद पारीक, राजकीय कालेज खाजूवाला (बीकानेर) के प्राचार्य एन.एस. मोदी, राजकीय कालेज कालाडेरा के लेक्चरर शंकर चोपड़ा एवं यूनिवर्सिटी की गोपनीय शाखा के अनुभाग अधिकारी शंकरलाल सैनी को निलंबित कर दिया था.

इस के दूसरे दिन 19 अप्रैल को राजस्थान यूनिवर्सिटी के कार्यवाहक कुलपति वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश्वर सिंह ने प्रो. जगदीश प्रसाद जाट एवं प्रो. गोविंद पारीक को निलंबित कर दिया. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 24 अप्रैल को एसोसिएट प्रोफेसर डा. राजीव शर्मा, कुलसचिव परीक्षा गोपनीय एम.सी. गुप्ता एवं परीक्षा नियंत्रक के पीए सुरेंद्र मोहन शर्मा को भी निलंबित कर दिया.

यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जगदीश प्रसाद जाट की गिरफ्तारी भी 17 अप्रैल को नाटकीय तरीके से हुई. उस दिन सुबह एसओजी के एक डिप्टी एसपी महिला पुलिसकर्मी के साथ पितापुत्री बन कर जयपुर में मौडल टाउन स्थित प्रो. जगदीश प्रसाद जाट के घर गए. वे किराएदार बन कर उन से मिले और किराए पर मकान लेने की बात कही.

प्रो. जगदीश प्रसाद जाट ने उन्हें अपना मकान दिखा दिया. किराए पर मकान लेने के बहाने एसओजी के डिप्टी एसपी ने पूरा मकान देखपरख लिया और अन्य सबूट जुटा लिए. इस के बाद डिप्टी एसपी ने बाहर खड़े एसओजी के एडिशनल एसपी को खुद का दामाद बता कर अंदर बुलाया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

एसओजी की टीम प्रो. जगदीश प्रसाद जाट को ले कर एसओजी मुख्यालय पहुंची तो वह हैरान रह गए. जो लोग किराए पर मकान लेने आए थे, वे पुलिस के अफसर निकले. दूसरी ओर प्रो. जगदीश प्रसाद जाट को एक महिला समेत 3-4 लोगों द्वारा ले जाने पर उन के घर में हड़कंप मच गया. वे समझ नहीं सके कि क्या हुआ था. उन्होंने पुलिस को प्रो. जगदीश प्रसाद जाट के अपहरण की सूचना दे दी.

उन की सूचना पर थाना मालवीयनगर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. करीब 3 घंटे बाद पता चला कि प्रो. जगदीश प्रसाद जाट को एसओजी ले गई थी. दिन भर की पूछताछ के बाद शाम को प्रो. जगदीश प्रसाद जाट की गिरफ्तारी की सूचना मिलने पर उन के घर वालों के चेहरे मुरझा गए थे.

यही स्थिति रमेश बुक डिपो के कर्मचारी शरद को गिरफ्तार करने के दौरान हुई थी. उस दिन सुबह सादे कपड़ों में एसओजी की टीम जयपुर में मानसरोवर के रजत पथ स्थित रमेश बुक डिपो से शरद को पकड़ कर ले गई. इस पर बुक डिपो के लोगों ने पुलिस को शरद के अपहरण की सूचना दे दी. थाना मानसरोवर पुलिस ने जांच की तो पता चला कि शरद को एसओजी ले गई थी.

पेपर लीक रैकेट में जयपुर के कई बुक डिपो की भूमिका संदिग्ध पाई गई है. ये बुक डिपो विशेषज्ञों के नाम पर वन वीक सीरीज, गेस पेपर व पासबुक प्रकाशित करते हैं. रैकेट ने जिनजिन पेपरों को आउट किए हैं, उन पेपरों के न्यूमेरिकल हूबहू पासबुक व वन वीक सीरीज में थे.

दरअसल, अलगअलग कालेजों एवं यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों तथा लेक्चरर विभिन्न बुक डिपो से जुड़े हुए हैं. कोई बुक डिपो की किताबों का लेखक है तो कोई वन वीक सीरीज का विशेषज्ञ.

बांदीकुई के कोचिंग संचालक चंद्रप्रकाश ने एसओजी को पूछताछ में बताया कि उसे आमतौर पर शाम को या देर रात को अगले दिन की परीक्षा का पेपर मिल जाता था. इस पेपर के आधार पर कोचिंग सेंटर के विद्यार्थियों को रिवीजन के नाम पर कोचिंग सेंटर पर बुला कर रात भर पेपर रटवाया जाता था. इस से उस की कोचिंग को प्रसिद्धि मिल रही थी.

पेपर लीक रैकेट के उजागर होने से राजस्थान यूनिवर्सिटी प्रशासन उलझन में फंस गया है.

एसओजी की जांच एवं अन्य सबूतों के आधार पर कई पेपर आउट हुए थे. एसओजी ने इस का खुलासा तो किया ही, आरोपियों ने अपनी करतूत भी स्वीकार कर ली. लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन उन पेपरों को आउट घोषित करने में देरी करता रहा.

इस की वजह यह थी कि परीक्षा प्लानिंग एवं मौनिटरिंग कमेटी ही यूनिवर्सिटी की सब से पावरफुल कमेटी होती है.

प्रो. गोविंद पारीक इस कमेटी के संयोजक थे और वह पेपर लीक मामले में गिरफ्तार हो चुके थे. हालांकि उन की गिरफ्तारी के कई दिनों बाद उन के स्थान पर प्रो. एस.एल. शर्मा को इस कमेटी का संयोजक बना दिया गया था.

प्रो. गोविंद पारीक ने यूनिवर्सिटी की चयन कमेटी की परीक्षाओं में पेपर लीक न हो, इस की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन वह खुद ही पेपर लीक करने वालों में शामिल थे.

एसओजी की जांच में सामने आया है कि एमकौम का जो पेपर प्रो. गोविंद पारीक को बनाना था, वह उन्होंने चौमूं के निजी कालेज अग्रसेन कालेज के प्रोफेसर शंभुदयाल से बनवाया था और यूनिवर्सिटी में पेपर जमा करवाते समय यह शपथ पत्र दिया था कि पेपर उन्होंने खुद बनाया है.

जबकि निजी कालेज के प्रोफेसर शंभुदयाल से पेपर बनाने के दौरान ही लीक हो गया था.

21 अप्रैल को राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुलपति वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राजेश्वर सिंह ने एग्जामिनेशन प्लानिंग एंड मौनिटरिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर 5 पेपर रद्द करते हुए उन्हें दोबारा कराने का फैसला लिया.

इन में 10 अप्रैल को होने वाला बीए फाइनल ईयर का ज्योग्राफी प्रथम का प्रश्नपत्र, 11 अप्रैल को हुआ. एमए फाइनल ईयर का ज्योग्राफी औफ वाटर रिसोर्सेज देयर मैनेजमेंट एंड यूटिलिटीज का प्रश्नपत्र, 12 अप्रैल को होने वाला बीए फाइनल ईयर  का ज्योग्राफी द्वितीय का प्रश्नपत्र, 13 अप्रैल को हुआ एमकौम प्रीवियस का एबीएसटी (एडवांस कास्ट एकाउंटिंग) का प्रश्नपत्र तथा 17 अप्रैल को आयोजित एमए फाइनल  ईयर का एडवांस ज्योग्राफी औफ इंडिया प्रश्नपत्र का पेपर रद्द कर दिया गया.

दूसरी ओर एसओजी की ओर से लगातार की जा रही गिरफ्तारियों के विरोध में राजस्थान यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ एवं राजस्थान विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया.

इन का कहना था कि एसओजी मनमर्जी से काररवाई कर रही है, जबकि सारे शिक्षक गलत नहीं हैं. कुछ शिक्षकों ने गेस पेपर विद्यार्थियों को बताए हैं, लेकिन फोन रिकौर्डिंग में रुपयों के लेनदेन की कोई बात साबित नहीं हो रही है.

एसओजी ने करीब एक महीने की अपनी जांच में लगभग सौ से अधिक लोगों के फोन टेप किए.

इन फोन काल्स रिकौर्डिंग में कई चौंकाने वाली जानकारियां मिलीं. इस के बाद 17 अप्रैल को एक साथ जयपुर, बीकानेर, चौमूं, बांदीकुई, हनुमानगढ़ के भादरा आदि स्थानों पर छापे मारे गए. सब से पहले 8 लोगों को पकड़ा गया. इन से पूछताछ में कडि़यां जुड़ती गईं और 7 दिनों में 19 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया.

एसओजी की जांच में ऐसे लेक्चरर और प्रोफेसर सामने आए हैं, जिन्होंने अपना ईमान नहीं बेचा. फोन रिकौर्डिंग के अनुसार, एक दिन यूनिवर्सिटी के डिप्टी रजिस्ट्रार एम.सी. गुप्ता ने गोपनीय शाखा के अनुभाग अधिकारी नंदलाल सैनी को फोन कर के पूछा, ‘परीक्षाओं की क्या तैयारी चल रही है?’

नंदलाल ने कहा, ‘‘सर, पेपर प्रिंट हो कर आने लगे हैं.’’

‘‘अच्छा…यार ये इनकम टैक्स का पेपर किस का प्रिंट हुआ है?’’ गुप्ता ने पूछा.

नंदलाल ने बताया, ‘‘सर, कोई राम गर्ग हैं.’’

‘‘कहां का है यह?’’

‘‘सर, कूकस में आर्यन कालेज का लेक्चरर है.’’

‘‘यार, उस का कोई नंबर है तो मैसेज कर दो.’’

‘‘ठीक है सर, अभी करता हूं.’’

बाद में डिप्टी रजिस्ट्रार एम.सी. गुप्ता ने राम गर्ग को फोन किया, ‘‘राम गर्गजी बोल रहे हैं?’’

‘‘हां, बोल रहा हूं. बताओ, क्या काम है?’’ राम गर्ग ने पूछा.

‘‘मैं यूनिवर्सिटी से डिप्टी रजिस्ट्रार एम.सी. गुप्ता बोल रहा हूं.’’

‘‘जी सर, बताइए.’’

‘‘यार, आप ने जो पेपर सेट किया है, वही आएगा.’’

गर्ग, ‘‘अच्छा…’’

गुप्ता ने कहा, ‘‘यार, कौन से क्वेश्चन पेपर के लिए सेलेक्ट किए हैं, जरा बताओ.’’

‘‘पेपर..? सर मरवाओगे क्या? मैं ऐसा नहीं करूंगा.’’

‘‘अरे यार, कुछ नहीं होगा. तुम्हारे भी काम आऊंगा.’’

‘‘नहीं सर, मैं नहीं बताऊंगा. माफ करो.’’

कथा लिखे जाने तक कई प्रोफेसर फरार थे. एसओजी उन की तलाश में जुटी थी. बहरहाल, पेपर लीक प्रकरण ने उच्च शिक्षा को राजस्थान को बदनाम कर दिया है. इस समय राजस्थान में कभी किसी यूनिवर्सिटी और कालेज के पेपर आउट हो रहे हैं तो कभी किसी भर्ती परीक्षा के.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

आज भी वो लड़की सबको याद आती है

फिल्म इंडस्ट्री में फिल्में तो बहुत सारी बनती हैं लेकिन उनमें से कुछ ऐसी फिल्में भी होती हैं जो कि लोगों को लंबे समय तक याद रहती हैं और जिसे लोग हमेशा देखना पसंद करते हैं.

ऐसी ही एक हौलीवुड की फिल्म है जिसे लोग आज भी उतना ही पसंद करते हैं जितना कि पहले करते थे. जी हां, हम बात कर रहे हैं हौलीवुड की फिल्म टाइटैनिक की. यह फिल्म 90 के दशक में आई. इस फिल्म को पूरी दुनिया का प्यार मिला था.

फिल्म टाइटैनिक 1997 में बड़े पर्दे पर आई थी. इस फिल्म में सबने ही काफी अच्छी एक्टिंग की थी. इस फिल्म में सारे ही सितारों की एक्टिंग लोगों को पसंद आई थी. इस फिल्म की लाल बालों वाली हीरोइन केट विंसलेट अब 42 साल की हो चुकी है. आपको बता दें कि केट विंसलेट ने बहुत सारी हौलीवुड की फिल्मों में काम किया है. लेकिन उनकी फिल्मों की लिस्ट में टाइटैनिक फिल्म का नाम सबसे टाप पर है.

फिल्म में टाइटैनिक डूब गया, जैक भी डूब गया, उस साल के आस्कर अवार्ड्स में फिल्म को 11 आस्कर मिले और बाकी सभी फिल्मों के अरमान भी डूब गए लेकिन उभर कर आईं केट विंसलेट.

इस फिल्म का लीड जैक, जिसे लियोनार्डो डि कैप्रियो निभा रहे थे, एक स्केच आर्टिस्ट थे और महिलाओं के नग्न स्केच बनाने में उसे महारत हासिल थी. जैक एक दृश्य में रोज यानि केट विंसलेट का एक वैसा ही चित्र बनाता है और सेकेंड के सौवें हिस्से के लिए केट बिना कपड़ों के नजर आती है. 70 एम एम के पर्दे पर रोज के उस लुभावने स्वरुप को देखने के लिए सिनेमाघरों के बाहर लाइन लग रही थी.

केट विंसलेट की सारी ही फिल्मों को उनके फैन्स का बहुत प्यार मिला, लेकिन टाइटैनिक फिल्म उनके फैन्स के लिए बहुत ही खास है. केट की हिट फिल्मों में उनकी दो फिल्मों के नाम है एक टाइटैनिक और दूसरी द रीडर.

फिल्म टाइटैनिक में केट विंसलेट ने काफी अच्छी एक्टिंग की जिस वजह से उन्हें सबसे बेहतरीन एक्ट्रेस का खिताब मिला. केट विंसलेट आज भी लोगों के दिलों पर राज करती हैं. उनका जलवा वैसा का वैसा ही है जैसा 90 के दशक में हुआ करता था.

केट अपने करियर में बौडी शेमिंग को लेकर काफी संवेदनशील रही हैं और अपने भारी शरीर को लेकर उन्होनें कभी भी कोई हिचक महसूस नहीं की. वो अक्सर अपने फैन्स को कहती रहती हैं कि हौलीवुड बौडीज पाने के लिए अपने शरीर के साथ खिलवाड़ न करें.

जी क्यू मैगजीन ने जब अपने कवर पेज पर उनकी तस्वीर छापी और उसमें उन्हें पतला कर दिया तो इस बात पर उन्होनें जी क्यू पर केस कर दिया और मैगजीन को उनसे माफी मांगनी पड़ी. केट ने इस केस को जीतने के बाद कहा,”इस माफी को सार्वजनिक तौर पर छपवाने का कारण ये है कि मैं नहीं चाहती लोगों को लगे मैं झूठ कहती हूं और अपने शरीर को मोटा या पतला करने के लिए उन्हीं तरीकों का इस्तेमाल करती हूं जो दुनिया करती है.” मैं इस पूरे वजन के धंधे के खिलाफ हूं और लोगों को उनके शरीर के साथ खिलवाड़ नहीं करने देना चाहती, मैं भारी थी तो भी ठीक थी और हल्की हो गई हूं तो भी नैचुरल तरीके से क्योंकि ये मेरा शरीर है.

20 साल हो गए पर केट विंसलेट आज भी उतनी ही सुन्दर है जितना कि पहले हुआ करती थी. केट जीरो फिगर कतई नहीं थी, लेकिन फिर भी वह भारतीय सुंदरता के मानकों के हिसाब से एकदम आदर्श ‘सुंदरी’ थी.

फिल्म के साथ-साथ केट विंसलेट को भी उनके फैन्स आज तक पसंद करते हैं. आपको बता दें कि केट 3 शादियां कर चुकी हैं और 3 बच्चों की मां हैं. उनके वर्तमान पति नेड राकएनरोल, अरबपति रिचर्ड ब्रेनसन के भतीजे हैं.

एक बात जो आज भी उनके साथ जुड़ी है, वो है टाइटैनिक, वो आस्कर जीत चुकी हैं, टाइटैनिक को 20 साल पीछे छोड़ चुकी हैं लेकिन आज भी उन्हें फिल्म स्क्रीन पर देखकर मन में वायलिन की वही धुन बजती है और सिलीन डियोन का वो गाना याद आ जाता है – माई हार्ट विल गो आन…वो लाल बालों वाली लड़की भूलती नहीं जो अब 42 साल की हो गई है.

मेट्रो के बढ़े किराये पर छिड़ी राजनीतिक जंग

दिल्ली मेट्रो का किराया बढ़ा तो मेट्रो डूब जाएगी. पहली बढ़ोत्तरी के बाद डेढ़ लाख यात्री कम हुए थे. मेट्रो को रियल एस्टेट में काम करना चाहिए ताकि घाटा कम किया जा सके. उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह बयान सोमवार को विधानसभा में दिया. उन्होंने कहा कि केंद्र व भाजपा किराये को बढ़ाने की साजिश रच रहे हैं, जबकि वक्त की जरूरत है कि किराये को कम किया जाए.

इसके बाद सरकार ने मेट्रो किराया बढ़ाने के विरोध में संकल्प सदन से पारित कर दिया. इस दौरान सिसोदिया ने कहा कि जरूरत इस बात कि है कि किराया कम हो ताकि सड़कों से वाहनों का बोझ कम हो. इसे बढ़ाने से दिल्ली की सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार ने 2.5 साल में मेट्रो के किसी काम को नहीं रोका है.

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि किराया बढ़ाने के पीछे ओला और उबर जैसी कंपनियों को राहत देने की साजिश है. इससे इन कंपनियों को सीधा लाभ होगा. सरकार इस मामले में केंद्र और भाजपा की नीति का पर्दाफाश करेगी. मेट्रो को जनता के पैसे से व जनता के लिए तैयार किया गया है. दिल्ली सरकार इसको प्रीमियम सेवा नहीं बनने देगी. उन्होंने कहा कि इस आड़ में डीटीसी को भी बदनाम करने की कोशिश हो रही है. जबकि इस समय भी लोग मेट्रो से अधिक डीटीसी की सवारी कर रहे हैं.

रियल एस्टेट में कभी हासिल नहीं किया लक्ष्य

मेट्रो ने रियल एस्टेट में कभी लक्ष्य पूरा नहीं किया. पहले चरण में मेट्रो ने 300 करोड़ कमाए थे, जबकि, दूसरे चरण में 960 में से 209 व तीसरे चरण में 1086 करोड़ में से 370 करोड़ की कमाई की. यह जानकारी परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने दी.

दिल्ली सरकार पूरा घाटा उठाए : भाजपा

किराया बढ़ोत्तरी को रोकने के लिए अगर दिल्ली सरकार गंभीर है तो वह बढ़ी दरों का पूरा खर्च उठाए. ऑपरेशनल घाटे की भरपाई खुद करे, क्योंकि इसकी सीधी जिम्मेवारी दिल्ली सरकार की है. यह बयान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने दिया.

उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की इस बात को नकारा कि केन्द्र और दिल्ली सरकार मेट्रो में बराबर की हिस्सेदार है. उन्होंने कहा कि मेट्रो के नियमों के अंतर्गत केवल दिल्ली सरकार ही ऑपरेशनल घाटे की भरपाई करने की जिम्मेवार है. गुप्ता ने कहा कि डीटीसी 34,000 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही है. सरकार 4 बार डीटीसी की बसों के विस्तार का प्रस्ताव ला चुकी है परन्तु अभी तक एक भी बस को नहीं जोड़ा गया है. इस वजह से आम जनता की परेशानियां और बढ़ गईं हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार तीसरे और चौथे चरण में मेट्रो की योजनाओं को पूरा होने में हो रही देरी का जवाब दे. मेट्रो वर्तमान में 30 लाख यात्रियों को सफर करा रही है. मेट्रो लाइन नेटवर्क पूरा होने पर प्रति दिन 50 लाख यात्री यात्र करेंगे. तीसरे चरण की मेट्रो का कार्य 16 दिसंबर 2016 तक पूरा किया जाना था. लेकिन, दिल्ली सरकार की लापरवाही के कारण इसमें 15 महीने की देरी हुई है.

चौथे चरण में लगभग 40 लाख दूरदराज की आबादी के लिए मेट्रो लाइन बिछाई जानी है. जिन क्षेत्रों में चौथे चरण के मेट्रो लाइन की सुविधा पहुंचनी है वह मुख्यता बदरपुर, मदनगीर, संगम विहार, वसंत कुंज, महिपाल पुर, खजुरी खास, रिठाला, बवाना, नरेला, मौजपुर, भजनपुरा, तुगलकाबाद आदि हैं.

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने पटरी पर लेट मेट्रो रोकी

कांग्रेस के छात्रसंगठन एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो रोककर किराये में वृद्धि के प्रस्ताव का विरोध किया. सुबह लगभग 11 बजे एनएसयूआई के लगभग 15 कार्यकर्ता सुरक्षा जांच के बाद प्लेटफार्म नम्बर दो पर पहुंचे. यहां मेट्रो किराए की बढ़ोतरी के विरोध में नारेबाजी करने लगे. लगभग 11.18 बजे एनएसयूआई के तीन कार्यकर्ता, इनमें दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष अक्षय लाखड़ा, शोर्यवीर सिंह और अजरुन चपराना मेट्रो के सामने पटरी पर उतर गए. छात्रों ने पटरी पर लेटकर किराये में बढ़ोतरी का प्रस्ताव वापस लेने और छात्रों को किराए में छूट के साथ पास देने की मांग की. यह नारे भी लगाते रहे.

हालात बिगड़ता देख सीआईएसएफ कर्मियों ने तत्काल प्रदर्शनकारियों को पटरियों से हटाया. छात्रों को पटरी से निकालकर स्टेशन खाली करवाया. इसके बाद मेट्रो का परिचालन शुरू हो सका. सीआईएसएफ प्रदर्शनकारी छात्रों को कश्मीरी गेट के मेट्रो के पुलिस थाने ले गए. अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों पर जुर्माना और कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की बात कही है.

इस वजह से स्टेज शो करती हैं सपना चौधरी

बिग बौस सीजन 11 में सेलेब्रिटी कंटेस्टेंट सपना चौधरी के इस शो के जरिए न सिर्फ धीरे धीरे कई रूप सामने आ रहे हैं बल्कि उनकी जिंदगी से जुड़े कई राज भी सामने आ रहे हैं. हाल ही में सपना चौधरी ने शो के दौरान साथी कंटेस्टेंट प्रियंक शर्मा को अपने जीवन के कई किस्से बयां किए.

हालांकि प्रियंक वीकेंड पर शो से निकाले जा चुके हैं. सपना के साथ उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में सपना चौधरी अपने उस दौर को बयां कर रही हैं, जिसके बारे में हम सभी अंजान हैं. वीडियो में प्रियंक और सपना किचिन में हैं. सपना रोटियां सेक रही हैं वहीं प्रियंक उनकी सहायता करते हुए उनके परिवार के बारे में पूछ रहे हैं. प्रियंक ने सपना से पूछा कि उनके घर में कौन-कौन है.

सपना ने बताया कि उनके घर में दो बहन और एक भाई है. बहन उनसे बड़ी है और भाई उनका उनसे 4 साल छोटा 19 साल का है. सपना ने बताया कि उनका भाई बहुत केयरिंग है. सपना की एक बड़ी बहन है जिसकी शादी हो गई है और उनके 2 बच्चें हैं. उनकी बहन की दो शादी हुई हैं लेकिन दोनों ने उनके बहन को धोखा दिया है.

लिहाजा अपनी बहन के दर्द को देखकर ही सपना लड़कों से दूर रहती हैं. सपना ने अपनी पर्सनल लाइफ के बारे में बताया कि उन्हें लड़कों पर जरा भी भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा कि लड़के हरामजादे होते हैं हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि सभी एक से नहीं होते. उन्होंने बताया कि उनके स्कूल टाइम में भी दोस्त नहीं थे. वे लास्ट बेंच पर बैठती थीं. उन्होंने बताया कि उनको बचपन से ही पैसों से प्यार रहा है बजाए लवर बौय के.

इसी दौरान सपना ने ये भी बताया कि कैसे वे डांसिंग और सिंगिंग के शोज करने लगीं. सपना ने प्रियंक को बताया कि जब वे 13 साल की थीं तब उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था. जिंदा रहते पिता काफी बीमार रहते थे, जिनकी बीमारी का करीब 8 साल तक इलाज चला. पिता के इलाज में सपना की मां ने लोगों से न सिर्फ पैसा उधार लिया उनका घर तक गिरवी रख गया था. प्रियंक ने पूछा कि पापा की डेथ कैसे हो गई थी, जिसके जवाब में सपना ने बताया कि पापा ने शराब पीनी शुरु कर दी थी.

पापा की तारीफ ने सपना ने बताया कि वे कभी अपने परिवार वालों से मारपीट नहीं करते थे. लिहाजा बाद में सपना ने बताया कि उन्होंने पापा के जाने के बाद 2009 की जनवरी से शो करने शुरू कर दिए. तब वे क्लास 9 में पड़ती थीं. वे दिन में स्कूल जाती थीं और रात को शो करती थी. टीचर ने उन्हें कभी डाटा नहीं. इसके बाद धीरे-धीरे सपना की लोकप्रियता बढ़ने लगी थी.

सपना ने बताया कि उनके अंदर एक मुकाम हासिल करने की प्रेरणा उनकी मां से आई. सपना ये भी बताया कि उनके पापा-मम्मी की लव मैरिज हुई थी. उन्होंने बताया कि उस दौर में मम्मी उनकी बेहद खूबसूरत थीं, इसलिए उनके पापा उन पर फिदा हो गए थे और बाद भागकर लव मैरिज की. वहीं सपना प्यार मोहब्बत के मामले में बिल्कुल पीछे हैं. हालांकि इसी दौरान उन्होंने ये भी बताया कि उनका घर से पास ही दोस्त है, जिसे वे प्यार से सेक्सी कहकर बुलाती हैं.

नोटबंदी और जीएसटी के बाद उलझन में आम व्यापारी

नोटबंदी और जीएसटी के साथसाथ भारीभरकम एनफोर्समैंट डायरैक्टोरेट की आयकर छापेमारी, गौरक्षकों की मनमानी, रोज बदलते सरकारी नियमों और भय के वातावरण में इंडियन सैल्युलर एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज मोहिंद्रू ने भारत को व्यापार करने के लिए सब से बुरा देश करार दिया है. नरेंद्र मोदी की विजय के पीछे व्यापारियों की पूरी जमात का खुलाछिपा सहयोग व समर्थन था. वे भाजपा व आरएसएस द्वारा किए गए धर्मराज/रामराज के सुहावने सपने से भ्रमित हो कर भगवा सरकार का प्रयोग करने को बेचैन थे.

अब राज पूरी तरह भगवाइयों के हाथों में आ गया है. इतिहास साक्षी है कि ब्राह्मणों, ऋषिमुनियों, पंडितों को व्यापारी कभी पसंद नहीं आए. हमारे धर्मग्रंथों में ऐसी कहानियां भरी हैं जिन में व्यवसायियों को बुरी तरह दुत्कारा गया है. उन्हें पैसा कमाने के पाप से मुक्ति पाने के लिए बारबार दान देने की सलाह दी गई है.

नए गुड्स ऐंड सर्विसेज ऐक्ट में व्यापारियों पर भारी जुर्मानों और कैद के प्रावधान हैं और हर अफसर को अपार अधिकार दिए गए हैं. यह मान कर चला गया है कि स्वामियों की तरह हर सरकारी अफसर दूध की तरह धुला है जबकि हर व्यापारी बेईमानी के काजल से लिपापुता है.

सरकार कहने को तो हर रोज व्यापार को सुविधाजनक बनाने का वचन देती है पर असल में होता उलटा है. व्यापार चलाना आजकल चारधाम की यात्रा की तरह हो गया है जिस में संकट और खतरे हर पक्ष पर हैं और जब ध्येय पर पहुंच जाओ तो धक्कामुक्की, पुजारियों की डांटफटकार सहने के बाद और मूर्तियों के आगे सैकड़ों का दर्शन पा कर व्यापारीभक्त तृप्त होता है.

ऐसा ही व्यापार चलाने में हो रहा है. पगपग पर अनुमतियां चाहिए. पहले फाइलों के अंबारों से अपने काम निकलवाने होते थे, अब कंप्यूटरों ने उन की जगह ले ली है जिन का सौफ्टवेयर बेहद एकतरफा है, जिस में लचीलापन बिलकुल नहीं है. केवल कुछ चहेते व्यवसायियों को छोड़ कर सब के लिए व्यापार करना कठिन होता जा रहा है.

नोटबंदी के बाद जीएसटी का कानून लाखों छोटे व्यापारियों को नष्ट कर देगा और यह देश की सदियों से बनी व्यापारिक परंपरा को तोड़ देगा. देश का व्यापार कुछ सौ हाथों में सिमट जाएगा. मध्य दरजे के ज्यादातर व्यापारी व उद्योगपति बड़ों के दरबारों के चाटुकार बन कर रह जाएंगे. व्यापार कुशलता नहीं, बल्कि भक्ति और समर्थन इस देश में बिजनैस सैंस बनेंगे, इस का आभास होने भी लगा है. जबजब देश पर विदेशियों ने कब्जा किया, इस देश की अंदरूनी हालत कुछ ऐसी ही थी. आज सिर्फ इतिहास को दोहराया जा रहा है.

राज कपूर की दस अनसुनी कहानियां

बौलीवुड के ‘शोमैन’ यानी राज कपूर एक मल्टि टैलेंटेड और बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी थे. भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों में से एक राज कपूर ने अपने काम के ज़रिए आने वाली पीढ़ी को खूब प्रेरित किया है. फिल्म में अभिनय के अलावा वो फिल्मों के निर्माता और निर्देशक भी रह चुके है. बौलीवुड के पहले परिवार की दूसरी पीढ़ी के सदस्य राज कपूर ने क्वालिटी सिनेमा का निर्माण किया था.

आज हम आपको बताने जा रहे है उनकी दस अनसुनी कहानियां जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे.

राज कपूर ने करियर की शुरुआत एक क्लैपर ब्वाय के तौर पर की थी. 1943 में अभिनेता केदार शर्मा जब फिल्म ‘विषकन्या’ के लिए शूटिंग कर रहे थे तब राज कपूर को उनके क्लोज़अप शौट के लिए क्लैप करना था. केदार शौट के लिए नकली दाढ़ी लगाए हुए थे लेकिन राज कपूर ने उनके मुंह के बहुत पास क्लैपबोर्ड ऐसे बजाया कि उनकी दाढ़ी ही निकल गई. शर्मा ने इस गुस्ताखी के लिए पूरी यूनिट के सामने कपूर को एक थप्पड़ जड़ दिया.

राज कपूर ने एक्टिंग की दुनिया में कदम 1935 में फिल्म ‘इंकलाब’ में एक बाल कलाकार के रूप में रखा था. उनको बड़ा ब्रेक 12 वर्षों बाद फिल्म ‘नील कमल’ से मिला जिसमें मधुबाला उनकी सह-अभिनेत्री थीं

‘राज’ तीनों कपूर भाईयों में इस्तेमाल किया जाता है. राज कपूर का पूरा नाम रणबीर राज कपूर है. शम्मी का पूरा नाम शमशेर राज कपूर और शशि का पूरा नाम बलबीर राज कपूर है.

बहुत कम लोग जानते हैं कि राज कपूर संगीत के खूब शौकीन और जानकार थे. उनको संगीत की अच्छी समझ थी और यहां तक कि वो अभिनेता बनने से पहले एक संगीतकार बनना चाहते थे.

दिलीप कुमार की शादी जो उस समय में काफी आकर्षक मानी जाती थी उसमें राज कपूर, पृथ्वी राज कपूर और देव आनंद बाराती के तौर पर शामिल हुए थे.

निर्देशक हृषिकेश मुखर्जी को फिल्म आनंद को बनाने का सुझाव राज कपूर से ही आया था. दरअसल राज कपूर की उन दिनों तबियत काफ़ी खराब रहती थी और मुखर्जी को उनकी म्रत्यु का डर सता रहा था. इस डर से प्रभावित होकर उन्होंने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन को लेकर सने 1971 में फिल्म ‘आनंद’ बनाई जो सुपरहिट रही.

राज कपूर की फिल्म ‘बौबी’ का वो सीन तो आपको याद ही होगा जिसमें ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया एक घर में मिलते है. ये सीन असल में राज कपूर और नरगिस की पहली मुलाकात से ही प्रेरित था.

1991 में आई फिल्म ‘हिना’ राज कपूर की आखिरी निर्देशित फिल्म थी जिसे वो पूरी तरह निर्देशित नहीं कर पाए और उनका बीच में ही निधन हो गया था. उनके बेटे रंधीर कपूर ने बाकी के बचे फिल्म के द्रश्यों को डायरेक्ट किया था.

नरगिस की तरह राज कपूर का नाम वैजयंतीमाला के साथ भी बहुत समय तक जुड़ा रहा. बाद में उनसे अनबन हो गई लेकिन राज कपूर के ज़हन में वैजयंतीमाला इस क़दर नक़्स थी कि वो दक्षिण भारत से उनकी काफ़ी हमशक्ल एक हिरोइन को ले आए जिसका नाम था पद्मिनी. इनके साथ उन्होंने जिस देश में गंगा बहती है फिल्म की.

नरगिस और राज कपूर साथ में आखिरी बार फिल्म जागते रहो में दिखे थे वो भी एक छोटे से दृश्य के लिए जिसमें नरगिस राज कपूर को पानी पिलाती हुई नजर आती है.

अब इस अभिनेत्री ने राम रहीम पर लगाये गंभीर आरोप

बाबा राम रहीम को लेकर लगातार कई बड़े खुलासे हो रहे हैं. अब माडल और एक्ट्रेस मरीना कुंवर ने भी राम रहीम पर गंभीर आरोप लगाए और कई ऐसे खुलासे किए, जो बेहद ही चौकाने वाले हैं.

उनका कहना है कि राम रहीम ने उन्हें फिल्म का आफर दिया था. जब वो राम रहीम के पास गई तो उसने उन्हें गले से लगाया और गलत तरीके से छूने की कोशिश करने लगा. यह सब उनके लिए काफी अजीब और अनकन्फर्टेबल था.

मरीना का कहना है कि राम रहीम को नशा लेने की आदत थी और वह खूब शराब और ड्रग्स भी लेता था. बाबा उसे कई बार मीटिंग के लिए भी बुलाता था मरीना ने आरोप लगाया कि वह उन्हें गुफा में भी ले गया था और बेटी-बेटी कहकर बुला रहा था. जब भी वो राम रहीम से मिलतीं तो वह उन्हें गलत नजर से देखता था. उसके साथ हमेशा हनीप्रीत हुआ करती थी और वो इस तरह की सारी हरकतें हनीप्रीत के सामने किया करता था और इससे हनीप्रीत को भी कोई दिक्कत नहीं हुआ करती थी.

मरीना का कहना है कि बाबा की इन हरकतों को लेकर उन्होंने 6 महीने पहले रात में करीब 1 बजे ट्वीट भी किया था लेकिन उसके बाद लोगों ने उन्हें डराना, धमकाना शुरू कर दिया जिसके बाद उन्होंने ट्वीट डिलीट कर दिया.

बता दें कि माडल के ब्वायफ्रेंड ने भी हनीप्रीत पर कई आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि हनीप्रीत उसे फोन करती थी और उनके साथ रिलेशनशिप में आना चाहती थी. मरीना की मानें तो राम रहीम से करीब होने के कारण हनीप्रीत उनसे काफी नफरत करती थी.

मैंने एक तलाकशुदा औरत के साथ कई बार सेक्स किया है. मेरे घर वाले शादी के लिए राजी नहीं हैं. मैं क्या करूं.

सवाल
मैं 25 साल का हूं और पड़ोस की एक तलाकशुदा औरत से बहुत प्यार करता हूं. मैं उस के साथ कई बार हमबिस्तरी भी कर चुका हूं. चूंकि वह औरत दूसरी जाति की है, इसलिए घर वाले शादी के लिए राजी नहीं हैं. मैं क्या करूं?

जवाब
दूसरी जाति की औरत के साथ हमबिस्तरी की जा सकती है, तो शादी क्यों नहीं कर सकते? आप दोनों अदालती शादी कर के अपना घर बसा लें.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें