आदर्श होती हैं कामकाजी महिलाएं

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने 25 देशों में 50 हजार व्यस्कों पर एक शोध किया और पाया कि वर्किंग मदर्स के बच्चे हर दृष्टि से बेहतर साबित होते हैं. उन की बेटियां अपना कैरियर अच्छा बनाती हैं, प्रतियोगिताओं को दमखम से फेस करती हैं, वे ज्यादा ऊंचे पद पाती हैं. यह आंकड़ा चौंकाने वाला इसलिए है कि जिन मांओं ने सिर्फ घर ही संभाला उन के मुकाबले वर्किंग मांओं की बेटियां 23% ज्यादा वेतन पाती हैं. 8% ज्यादा बेटियों को मैनेजर की जगह मिली.

यही नहीं वर्किंग मदर्स के बेटे घरों में पत्नी का हाथ ज्यादा बंटाते हैं और फिर भी उन का कैरियर कम नहीं होता. एक आम धारणा यह है कि वर्किंग मदर्स के ऐक्स्ट्रा चाबी वाले बच्चे अकेले रह जाते हैं, बिगड़ जाते हैं पर इस स्टडी ने इस बात को झुठलाया है और यह साबित कर दिया है कि कुल मिला कर कामकाजी मांएं बच्चों पर एक अच्छा प्रभाव छोड़ती हैं.

यह स्वाभाविक है, क्योंकि कामकाजी महिलाएं जहां बेटियों के सामने आदर्श रहती हैं कि घरबाहर दोहरी जिम्मेदारियां उठा कर वे अपनी शक्ति का सदुपयोग करती हैं वैसे ही बेटियों को करना चाहिए. वहीं वर्किंग मदर्स बेटियों को आफिसों की राजनीति, दूसरेपराए पुरुषों से व्यवहार, आर्थिक फैसले करने का अभ्यास बखूबी करा देती हैं. वर्किंग मदर्स की बेटियां प्रारंभ से ही घर ज्यादा अच्छा चला लेती हैं, क्योंकि वे परंपराओं से दूर रहती हैं.

इस स्टडी में तो यह नहीं पूछा गया पर यह पक्का है कि भारत में कामकाजी मांओं को धार्मिक पाखंडों से मुक्ति जरूर मिल जाती है और वे रोजरोज के व्रतों, उपवासों, पंडों को खिलाने, घंटियों को बजाने, मंदिरों की लाइनों में लगने से बच जाती हैं. ये गुण बेटियों में भी आ जाते हैं.

कामकाजी मांएं बेटों को आत्मसमर्थ बना देती हैं और वे बेहतर पति साबित होते हैं.

मांओं के लिए कामकाजी होना बच्चों के लिए एक अच्छा अवसर होता है भले कुछ साल उन्हें दादियों, चाचियों या आयाओं के साथ काटने पड़ते हों. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के इस शोध ने साबित किया है कि औरतें किसी से कम नहीं और जो औरतें किसी से कम नहीं वे घरबाहर दोनों के लिए वरदान हैं.

जुमे का दिन और मिर्जा की मिजाजपुरसी

जुमे का दिन था और मैं भी मूड में था, इसलिए सोचा कि चलो, कुछ देर मिर्जा के साथ गपें लड़ाएं. हो सकता है कि लंच से पहले एक टी पार्टी भी हो जाए.

मैं ने जल्दी से नहाधो कर शेरवानी पहनी, गुलाब का बढि़या इत्र लगाया, पीतल जड़ी नक्काशी वाली बेंत हाथ में ली, सुबह के 11 बजे घर से निकल कर सीधे मिर्जा के घर का रुख किया.

मैं जैसे ही मिर्जा के घर के करीब पहुंचा, तभी मुझ पर अचानक जैसे तड़ाक से बिजली सी गिर गई. दिमाग बिजली की तरह कौंधा और पलभर में हजारों बुरे खयालात दिमाग के एक कोने से दूसरे कोने तक कौंध गए.

देखा कि मिर्जा की बैठक का दरवाजा खुला था. बाहर धूपछांव में एक टूटे से खटोले पर कोई… शायद मिर्जा एक मैली सी चादर ओढ़े लेटे थे. गली के आसपास के दोचार बड़ेबूढ़े भी पास ही बैठे थे.

यह मंजर देख कर मेरी तो जैसे रूह ही निकल गई और टांगें तो जैसे वाइब्रेशन मोड पर आ गई थीं. मेरी बेंत ने मुझ गिरते हुए को सहारा दिया.

मैं ने बड़ी मुश्किल से खुद को संभालते हुए कांपती आवाज में पूछा, ‘‘यह जनाजा किस… क्या… मिर्जा…?’’

तभी वहां बैठे एक शख्स, जिन्हें गली के लड़के ‘चचा मुकुंदा’ कहते थे और जो चारपाई के सिरहाने बैठे थे, ने अपने मुंह पर उंगली रख कर इशारे से मुझे चुप रह कर बैठने का इशारा किया.

थोड़ी देर बाद वे दबी आवाज में बोले, ‘‘जनाब, आप को खबर भी है कि मिर्जा को चोट लगी है. नींद की दवा दे रखी है, ताकि दर्द का एहसास कम हो.’’

मेरे मुंह से एक हमदर्दी भरी चीख निकलने को हुई, मगर वह जैसे गले में घुट कर रह गई.

मैं ने सवाल पूछा, ‘‘क्या किसी मोटरसाइकिल वाले ने साइड मार दी?’’

‘‘नहीं…’’

‘‘तो क्या फिसल कर सीढि़यों से लुढ़क गए?’’

‘‘नहीं…’’

तभी वहां बैठे सभी लोगों के होंठों पर हलकी सी मुसकान तैर गई. यह देख कर मेरा दिमाग 360 डिगरी पर घूम गया.

‘‘तो क्या माजरा है…’’ मेरे मुंह से निकल पड़ा, ‘‘मिर्जा को चोट लगी है और आप बेशर्मों की तरह मुसकराते हो. कुछ तो शर्म करो. बेशर्मी की भी हद होती है.’’

तभी चचा मुकुंदा ने अपना हाथ मेरी गरदन पर रख कर मुझे अपनी तरफ खींचा और मेरा कान अपने मुंह के पास ले गए.

मैं डर गया कि शायद कहीं मेरा कान ही न चबा डालें. फिर भी मैं ने न जाने क्यों अपना कान उन के मुंह के सामने कर दिया.

चचा मुकुंदा मेरे कान में कुछ फुसफुसाए, जो बस मुझे ही सुनाई दिया.

मेरे मुंह से निकला, ‘‘क्या… ऐसा हुआ… क्यों?’’

मैं ने पूरे जोश के साथ मिर्जा के कफन… माफ कीजिए चादर को मुंह से पैर तक खींच कर साइड में डाल दिया और मिजाजपुरसी की रस्म अदा करते हुए हमदर्दी के तौर पर उन्हें हिलाया.

मैं ने देखा कि मिर्जा के दाहिने हाथ पर किसी ने बांस की खपच्चियां रख कर पट्टी लपेटी हुई थी. उन की बाईं आंख सूज कर काली पड़ गई थी और भौंह के ऊपर माथे को ढके हुए सिर के चारों तरफ पट्टी लिपटी थी, जिस पर लाल दवा के निशान थे, जो सूख कर काले पड़ने लगे थे.

मिर्जा ने अपनी दाईं आंख धीरे से खोली और एक बेबसी वाला गुस्सा मेरी तरफ बम की तरह फेंका.

मैं ने हमदर्दी दिखाते हुए मिर्जा के सिर के नीचे अपना एक हाथ रखा और दूसरा हाथ उन की कमर के नीचे रख कर सहारा दिया और उन का सिर

अपनी गोद में रख कर उन से पूछा, ‘‘यह सब क्या…’’

मिर्जा का गला रुंध गया और वे कुछ न बोल सके. तब मौके की नजाकत को भांपते हुए मैं ने ही पूछा, ‘‘यार मिर्जा, यह बेलन की बात तो अकसर तुम्हारे साथ होती ही रहती थी, पर ये प्लेटेंगिलास, चम्मच के चौकेछक्के कब से? अगर कहीं तुम्हारी आंख फूट जाती तो…?’’

मिर्जा, जो अब तक कुछ सामान्य हो चुके थे, बोले, ‘‘मैं खाना खा रहा था. गले में निवाला फंस गया था. पानी मांगा था, तभी बेगम ने गुस्से में खाली गिलास मेरे ऊपर फेंका और बोलीं, ‘ले, पी पानी.’

‘‘गिलास से तो मैं ने अपनेआप को साइड में झुक कर बचा लिया, लेकिन निशाना खाली जाने से बेगम तिलमिला गईं और फिर एकदम से एक प्लेट अर्जुन के तीर की तरह फेंकी, जो मेरी आंख पर लग जाती, तो आंख ही फूट गई होती.

‘‘इतने पर भी जब वे नहीं रुकीं, तो जो हाथ में आया फेंक कर मारती गईं. उन के इन तीरों की बौछार से बचने के लिए मैं हड़बड़ा कर बाहर की तरफ भागा कि तभी न जाने कमबख्त कौन से साहबजादे ने केला खाया होगा और छिलका दरवाजे में डाल दिया. मेरा पैर उस पर पड़ा और धड़ाम से जमीन पर. अब कुहनी का फ्रैक्चर न जाने कब ठीक होगा.’’

मैं ने मिर्जा को हिम्मत दी और नकली हंसी हंसते हुए कहा, ‘‘बस… इतना ही. अरे यार मिर्जा, तुम तो खुशकिस्मत हो, जो बीवी से पिटे… मुबारक हो…’’

तभी मिर्जा के चेहरे पर ऐसे भाव आए, जैसे वे मुझे कच्चा ही चबा जाएंगे, पर बेबस थे.

वे धीरे से बोले, ‘‘ठीक है… तुम भी उड़ा लो मजाक… जिस दिन पिटोगे, तब सब पता चल जाएगा.’’

मैं ने कहा, ‘‘यार मिर्जा, तुम जो गरीबी का रोना रोते हो, वह अब दूर होने वाली है. तुम बड़े आदमी बनने वाले हो. इतने बड़े कि… जैसे…’’

तभी मिर्जा बोल पड़े, ‘‘क्या मैं अमेरिका का राष्ट्रपति बन रहा हूं? क्यों तू मेरे जख्मों पर नमक छिड़क रहा है? एक तू ही तो था, जिस से मैं मन की बात कर लेता था. और अब तू भी… ठीक है, उड़ा ले मेरी हंसी… जिस दिन भाभी की मार पड़ेगी, तब पता चलेगा.’’

मैं ने मिर्जा से ऐसे दिखावटी हमदर्दी जताई, जैसे मैं उन पर दुनिया का सब से बड़ा एहसान कर रहा हूं.

मिर्जा से मुखातिब होते हुए मैं ने कहा, ‘‘नहीं यार मिर्जा, ऐसी बात भूल कर भी अपने दिमाग में मत लाना. मैं तुम्हारा सच्चा हमदर्द हूं. कभी शक की गुंजाइश मत रखना.

‘‘देखो मिर्जा, ध्यान से सुनो. वे हैं न हमारे… अरे, वे ही जनाब अमेरिका के बिल क्लिंटन साहब. क्या वे बड़े आदमी नहीं बने, वे भी ऐसे देश के जो पूरी दुनिया को तिगनी का नाच नचाता है…

‘‘तो…’’ मिर्जा बीच में ही बोल पड़े, ‘‘मेरा मिस्टर बिल से क्या ताल्लुक?’’

मैं ने मिर्जा को टोका, ‘‘यार, यही तो कमी है तुम्हारी सोच में? अबे, वे भी अपनी बीवी से पिट कर ही इतने बड़े आदमी बने हैं. उन पर बीवी की मिसाइलों जैसे गिलासप्लेट, चम्मच से अनेक बार हमले हुए हैं.

‘‘जैसे सोना तप कर और पिट कर कुछ बनता है, ऐसे ही हमारे चचा क्लिंटन साहब भी अपनी बीवी के मिसाइलोंबमों से पिट कर अमेरिका के राष्ट्रपति बने…

‘‘यह तो भला हो उन की सहायक का, जिस ने दुनिया के सभी मर्दों को बड़ा बनने का राज दुनिया के सामने खोल दिया, वरना…’’

यह सुनते ही मिर्जा कुछ देर के लिए शांत हुए और एक लंबी उबासी ली, जैसे सचमुच ही अमेरिका के राष्ट्रपति बनने जा रहे हों. अब तक उन की नींद की गोली का असर शायद खत्म हो चुका था, तभी वे और भड़क उठे और बोले, ‘‘क्या बकवास करते हो… वह अमेरिका है और यह हिंदुस्तान… यहां ऐसा कभी नहीं हो सकता.’’

मैं ने मिर्जा को फिर झूठी तसल्ली देने की कोशिश की और कहा, ‘‘यार, चचा क्लिंटन की बात छोड़ो. अगर तुम गलीमहल्ले के नेता भी बन गए, तो भी तुम गुजरबसर लायक अमीर तो बन ही सकते हो.’’

शायद यह बात मिर्जा को जंच गई थी. उन्होंने राहत की लंबी सांस ली और फिर करवट बदल कर खर्राटे लेने शुरू कर दिए, जैसे अमीरी के ख्वाबों की दुनिया में पहुंच गए हों.

दोपहर के साढ़े 12 बज चुके थे. मैं ने मिर्जा का सिर धीरे से तकिए पर रखा और कहीं दोपहर का खाना खाने के लिए रैस्टोरैंट ढूंढ़ने लगा. मिर्जा के यहां तो लंच की उम्मीद ही नहीं थी.

हुक्मशाही का दौर है : अन्ना हजारे

अन्ना हजारे आज किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं. आजादी के बाद शांतिपूर्ण आंदोलन कर सत्ता को उखाड़ फेंकने का बड़ा काम अन्ना हजारे ने किया था. महाराष्ट्र के अहमदनगर के रालेगण सिद्धि गांव में रहने वाले अन्ना हजारे का पूरा नाम किसन बाबू राव हजारे है. परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए वे बचपन में ही अपनी बूआ के साथ मुंबई आए और यहां उन्होंने फूल बेचने का काम शुरू किया.

अन्ना के दादाजी सेना में थे. अन्ना के बचपन पर उन का प्रभाव था. 1962 में जब भारतचीन युद्ध हुआ तो युवाओं से सेना में शामिल होने की अपील की गई, जिस के तहत अन्ना सेना में भरती हो गए. 15 साल उन्होंने सेना में काम किया. इस के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले कर वे अपने गांव वापस आ गए.

अन्ना के जीवन पर महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज का काफी असर था. ऐसे में उन्होंने अपने गांव में सुधारकार्य शुरू किया. गांव में सिंचाई के साधन उपलब्ध कराए जिस से गांव तरक्की की राह पर आगे बढ़ा. आज यह गांव देश में एक मिसाल है. लोग इसे देखने के लिए यहां आते हैं. अन्ना हजारे को पद्मभूषण सहित कई सम्मान मिल चुके हैं.

अन्ना का नाम दोबारा चर्चा में तब आया जब 1991 में उन्होंने महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन शुरू किया. शिवसेना और भाजपा सरकार के भ्रष्ट मंत्रियों को हटाने की मांग की. इस के बाद 1997 में अन्ना ने सूचना का अधिकार कानून बनाने के लिए अभियान शुरू किया. यह कानून बन गया. फिर वर्ष 2011 में लोकपाल कानून बनाने के लिए जन आंदोलन शुरू किया जो देश के सब से बड़े आंदोलनों में गिना जाता है. इस का ही असर था कि कांग्रेस सरकार को कई कानून बनाने पड़े. सरकार ने लोकपाल बिल तैयार किया.

अन्ना के इसी आंदोलन का असर था कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार बन गई. अन्ना अब एक बार फिर से आंदोलन की राह पर हैं. वे 22 प्रदेशों का दौरा कर चुके हैं. 2 दिनों के दौरे पर वे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ आए और लखनऊ से सीतापुर तक कई जगहों पर उन्होंने जनसभाएं की. लखनऊ में लोकतंत्र की पाठशाला कार्यक्रम में हिस्सा लिया, युवाओं से बातचीत की. इसी दौरान इस प्रतिनिधि की अन्ना हजारे से बातचीत हुई, पेश हैं अंश :

आप के इस दौरे का उद्देश्य क्या है, किस तरह का बदलाव चाहते हैं?

हम चाहते हैं कि देश पर किसी एक पार्टी का  शासन न हो. बल्कि संविधान का राज हो. अभी देश में पार्टी का राज चलता है. नेता बदलते हैं लेकिन कुरसी पर बैठते ही वे चुनावी वादे भूल जाते हैं. नेता सत्तापैसा के बीच ही चलता रहता है. हम लोगों को बताना चाहते हैं कि सरकार बदलने की चाबी उन्हीं के पास है. इसे जनता भूल गई है. जनता के सरकार गिराने का डर यदि नेताओं में बैठ जाएगा तो वे चुनावी वादे नहीं भूलेंगे. आज के नेताओं की बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता. विश्वास पानीपत की लड़ाई में खो सा गया है. चुनाव में सुधार हों ताकि जनता सही प्रत्याशी को चुन सके.

राजनीतिक बदलाव की बातें लोकपाल आंदोलन के समय हुई थीं, वे कैसे बेनतीजा हो गईं?

लोकपाल आंदोलन सफल रहा. पूरा देश एकसाथ खड़ा था. कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना. सरकार बनाने के बाद भाजपा ने जो वादे किए, उन को पूरा नहीं किया. अब हम अपने साथ काम करने वाले लोगों से एक हलफनामा ले रहे हैं कि उन का उद्देश्य चुनाव लड़ना नहीं है.

हमारे साथ जुड़े 5 हजार लोग 100 रुपए के स्टांप पर यह लिख कर दे चुके हैं कि वे राजनीति में नहीं जाएंगे. ये लोग अगर बाद में अपने वादे से मुकरे तो मैं उन के खिलाफ कोर्ट में जाऊंगा. राजनीति में अच्छे लोग आने चाहिए. उस से पहले चुनाव प्रणाली, मतदान सुधार की दिशा में काम होना चाहिए. 1952 में  ही संविधान की बातों को चुनाव में दरकिनार किया गया. उस समय चुनाव आयोग मौन था जिस का खमियाजा आज देश को भुगतना पड़ रहा है. ऐसे में चुनावसुधार की जरूरत है. तभी पार्टीतंत्र खत्म हो कर सही माने में लोकतंत्र आएगा.

लोकपाल को ले कर आप की क्या रणनीति है?

मजबूत लोकपाल की मांग है. अभी जो लोकपाल कानून बना है वह बेहद कमजोर है. कई ऐसे उपाय कर दिए गए हैं जिन से भ्रष्टाचार को रोका नहीं जा सकता. केंद्र सरकार ने बिना चर्चा के ही लोकपाल बिल पास कर दिया. लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में बिना चर्चा के बिल पास हो गया. संसद ने जिस तरह से लोकपाल बिल को पास किया उस से साफ है कि सरकार चर्चा में नहीं, हुक्म देने में विश्वास कर रही है. असल बात यह है कि कोई भी सरकार लोकपाल लाना ही नहीं चाहती, जिस से उस का सत्ताकुरसी का खेल चलता रहे, चुनाव जीतने के लिए पार्टियां झूठे आश्वासन देती हैं.

राजनीति में बदलाव कैसे होगा?

चरित्रवान लोग राजनीति में आएं, तभी कुछ सुधार हो सकता है. राजनीति में धर्म और जातपांत का प्रभाव भी चुनावी सुधार से रोका जा सकता है, जिस के बाद ही देश संविधान के अनुसार चल सकेगा. हम ने देशभर का दौरा कर के युवाओं को जागरूक किया है. बहुत सारे संगठन हमारे साथ जुड़ रहे हैं. यह काम किसी जादू की छड़ी से होने वाला नहीं है. यह धीरेधीरे संभव होगा. नेताओं की नफरत वाली राजनीति को लोग समझने लगे हैं. आने वाली पीढ़ी के लिए देश को बचाना जरूरी है.

केंद्र में सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार को कैसे देखते हैं?

कोई भी सरकार लोकपाल कानून को लागू नहीं करना चाहती. मोदी सरकार ने लोकपाल बिल को कमजोर किया, जिस की वजह से देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है. अंगरेजी हुकूमत चली गई पर देश में लोकतंत्र नहीं आ पाया. आज किसानों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है. किसान आत्महत्या कर रहा है, पर उस की बात नहीं सुनी जा रही है. 2013 में लोकपाल नियुक्ति कानून पास हो गया, पर 5 वर्षों के बाद भी उस को लागू नहीं किया जा सका. गोरे अंगरेज तो देश छोड़ कर चले गए पर देश के भ्रष्ट काले लोग यहां हावी हो गए हैं. केंद्र सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर रही है. कालाधन वापस ला कर सभी के खातों में 15-15 लाख रुपए देने की बात कह कर वोट तो ले लिए पर खातों में 15 रुपए भी नहीं आए.

दिल्ली में केजरीवाल सरकार के बारे में आप की क्या राय है?

केजरीवाल क्या काम कर रहे हैं, यह सब देख रहे हैं. मेरी उन से उस समय ही बातचीत बंद हो गई थी जब उन्होंने पार्टी बना कर चुनाव लड़ा था. लोकपाल बिल पर उन्होंने मुझ से कुछ सुझाव मांगे थे. सुझाव भेजने के बाद उस पर क्या हुआ, यह जानकारी नहीं है. जनता के हित में सरकार गिराने की ताकत जनता में होनी चाहिए.

आप ने इन्वैस्टर समिट के बाद उत्तर प्रदेश का दौरा किया, क्या लाभ दिख रहा है?

इन्वैस्टर समिट से बिजनैस करने वालों को लाभ हो सकता है, लेकिन किसानों और आम जनता को कोई लाभ नहीं होने वाला. किसानों को तब तक लाभ नहीं मिलेगा जब तक उन की उपज का सही दाम उन्हें नहीं मिलेगा. अभी किसानों की हालत ‘माल खाए मदारी नाच करे बंदर’ जैसी है. केंद्र सरकार को गरीबों और किसानों की नहीं, उद्योगपतियों की

चिंता है. तभी तो देश का करोड़ों रुपया ले कर वे गायब हो रहे हैं. मोदी सरकार बनने के बाद मैं ने 22 पत्र लिखे पर एक का भी जवाब नहीं मिला. हम ने यह भी पूछा कि वे व्यस्तता के कारण जवाब नहीं दे रहे या ईगो के कारण, तो उस का भी जवाब नहीं दिया.

‘मेंटल है क्या’ के सेट से लीक हुई कंगना की अतरंगी तस्वीरें

कंगना रनौत और राजकुमार राव की जोड़ी फिल्‍म ‘क्‍वीन’ में पहली बार नजर आई और इस फिल्‍म ने कंगना को बौलीवुड की ‘क्‍वीन’ ही बना दिया. अब एक बार फिर यह दोनों एक्‍टर्स फिल्‍म ‘मेंटल है क्‍या’ के लिए साथ आए हैं. इस फिल्‍म की घोषणा करते हुए जो पोस्‍टर शेयर किए गए थे, उन्‍होंने पहले ही कंगना और राजकुमार के किरदारों को लेकर काफी उत्‍सुकता बढ़ा दी थी और इस फिल्‍म के सेट से कंगना का लुक लीक हो गया है. फिल्‍म के सेट पर कंगना बेहद अतरंगी कपड़ों में नजर आ रही हैं.

एक्‍टर राजकुमार राव पिछले दिनों अपनी आने वाली फिल्‍म ‘स्‍त्री’ की शूटिंग में बिजी थे. ‘स्‍त्री’ में राजकुमार, श्रद्धा कपूर के साथ नजर आएंगे. वहीं कंगना पिछले दिनों अपनी फिल्‍म ‘मणिकर्णिका: द क्‍वीन औफ झांसी’ की शूटिंग में लगी थीं. शूटिंग के पहले दिन कंगना अलग-अलग तरह के कपड़ों में स्पौट की गईं. कंगना के अलावा फिल्‍म के सेट पर एक्‍ट्रेस अमायरा दस्‍तूर भी नजर आईं.

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राजकुमार ने बुधवार को फिल्म के क्लैपबोर्ड की तस्वीर अपने इंस्‍टाग्राम पर शेयर करते हुए लिखा था, “पहला दिन, आईए शुरू करें ‘मेंटल है क्या’. एकता कपूर, कंगना रनौत, प्रकाश कोवेलमुडी, कनिका ढिल्लों, रुचिका कपूर.”

अपने होम बैनर बालाजी टेलीफिल्म्स लिमिटेड के तहत फिल्म को सह-प्रस्तुत कर रहीं निर्माता एकता कपूर ने ट्वीट किया, “ओह ये! जय माता दी.” ‘मेंटल है क्या’ कनिका ढिल्लों द्वारा लिखित है और राष्ट्रीय पुरस्कार-विजेता निर्माता प्रकाश कोवेलमुडी इसका निर्देशन करेंगे. वह ‘अनागनागा ओ धीरुडु और ‘साइज जीरो’ जैसी दक्षिणी भारतीय फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं.

क्या यही लोकतंत्र है

श…श…श… कोई सुन न ले. अब यह भूल जाइए कि आप की कोई बात गुप्त है. आप की हर बात कोई भी सुन सकता है और कभी भी कहीं भी. आप का लिखा पढ़ सकता है, आप का फोटो देख सकता है. अगर मौजमस्ती मेंकोई अंतरंग फोटो खींचा है, तो उस का दुरुपयोग कर सकता है. आप के खाने की रैसिपी पढ़ कर आप को बेसन के विज्ञापन भेज सकता है. आप के मसूरी के प्रोग्राम के बारे में सहेली को लिखे मैसेज को जान कर आप को मसूरी के ट्रैवल एजैंटों के नाम भेजना शुरू कर सकता है. आप के बचपन की तसवीरें ढूंढ़ सकता है. बीसियों के गु्रप में आप को पहचान सकता है.

यह सब इसलिए हो सकता है, क्योंकि आप मोबाइल इस्तेमाल कर रही हैं और उसे अपना जीवन अमृत मानती हैं. इस में आप की आत्मा बसती है, इसी के सहारे आप जिंदा हैं.

मोबाइल कंपनियों के लिए मोबाइल और उस के मुफ्त ऐप असल में शेर का शिकार करने के लिए बांधे गए मेमने हैं, जिन के सहारे आप के पर्स पर कब्जा किया जा रहा है. कुछ शातिर लोग आप की निजी बातों को जान कर कब आप को ब्लैकमेल करने लगें, पता नहीं.

हम डरा नहीं रहे. फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने अमेरिकी संसद की संयुक्त समिति में एक हियरिंग में यह माना और कहा कि वे अपने यूजर्स के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, क्योंकि यूजर्स ने उन की मुफ्त सेवाएं लेते समय सब जान लेने की सहमति दी थी. यह सहमति आप ने एक बौक्स पर ‘हां’ का निशान लगाते समय दी थी, जिस के बिना आप फेसबुक अकाउंट खोल ही नहीं सकतीं.

कल्पना करिए कि आप की अविवाहित सहेली कहती है कि वह प्रैगनैंट है और यह बात कहीं से कहीं होती हुई उस तक पहुंच जाती है जो इस का दुरुपयोग कर सकता है. फेसबुक कंपनी मानती है कि उस के पास तो यह डेटा है ही पर सुरक्षित है. यह सुरक्षा कैसी है यह सब जानते हैं.

भारत सरकार ने भी बहुत सा डेटा आधार नंबर के जरीए जमा कर रखा है. आप का मोबाइल आधार से जुड़ा है और आप ने मोबाइल से ही लाल रंग की पैंटी खरीदी थी, यह अब सरकार को मालूम है. आपकी निजी जिंदगी है ही नहीं. आप फेसबुक, व्हाट्सऐप, आधार के सामने बिना कपड़ों की हैं. सारे राज जगजाहिर हैं.

क्या यही लोकतंत्र है, जिस में आप कैदी की तरह हैं और जिस के चारों ओर कैमरे लगे हैं? निजता जीवन का अभिन्न अंग है. आप ने सही किया या गलत यह किसी को भी नहीं पता चलना चाहिए जब तक आप ने अपराध न किया हो. सरकार हर जने को जन्मजात अपराधी नहीं मान सकती.

आप के डेटा का दुरुपयोग करने वाला कौन है? कोई भी हो सकता है. सरकारी नौकरी है तो सरकार हो सकती है. निजी नौकरी में हैं तो कोई पैसा दे कर यह जानकारी ले सकता है. डिटैक्टिव ऐजेंसियां इस तरह की जानकारी जमा कर सकती हैं. बैंक आप को लोन देने से पहले आप का कच्चा चिट्ठा जमा कर सकते हैं. विवाहपूर्व जानकारी जमा करने का धंधा आधार और फेसबुक से डेटा चोरी करने वाले खोल सकते हैं. कैंब्रिज एनैलिटिका ने यही किया था और कई देशों में नेताओं के प्रचार में सही तरह से भरमाने का रास्ता सुझाया था. आप के छोटे से मोबाइल की सुविधा जंजीर भी हो सकती है आप की आजादी की.

आज खतरा मंडरा नहीं रहा. लोग पकड़े नहीं जा रहे, पर कल क्या होगा पता नहीं.

मोबाइल छोड़ना आसान नहीं पर यह समझ लें कि यह वह टाइम बम है जो अगर फटा तो जीवन में हलचल मचा देगा.

रणबीर ने आलिया को बताया उनका क्रश

बौलीवुड के चौकलेट ब्वाय रणबीर कपूर और अदाकारा आलिया भट्ट पिछले कुछ समय से नजदीकियों को लेकर चर्चा में है. वैसे तो आलिया भट्ट पहले ही एक हिन्दी समाचार पत्र को दिए इंटरव्यू में स्वीकार कर चुकी हैं कि रणबीर कपूर ही उनके क्रश हैं और वह उनसे शादी भी करना चाहती हैं. लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि आलिया के बाद अब रणबीर ने भी इस बात को स्वीकारा है. जी हां, रणबीर ने आलिया पर अपना क्रश जाहिर कर दिया है जिसके बाद बी-टाउन में फिर से हलचल बढ़ गई है.

एक हिन्दी चैनल ने रणबीर कपूर से जब ‘गर्ल क्रश’ आलिया भट्ट के बारे में सवाल किया गया तो रणबीर ने कहा, ”फिलहाल अब मुझे उन पर बौय क्रश हो गया है.” रणबीर ने आलिया के बारे में बात करते हुए उनकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘राजी’ की भी तारीफ की. रणबीर ने राजी के बारे में कहा, ”यह भारतीय सिनेमा की महान फिल्मों में से एक है.”

दोनों के रोमांस की अफवाहों की उस वक्त हवा मिल गई जब बौलीवुड डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने एक चैट शो में कयास लगाए कि आलिया और रणबीर साल 2018 में हुकअप(कनेक्शन मिलना) हो सकते हैं. इतना ही नहीं रणबीर और आलिया हाल ही में सोनम कपूर के वेडिंग रिसेप्शन में एक साथ पहुंचे थे, दोनों ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था. रणबीर और आलिया की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं.

फिलहाल अभी दोनों में से किसी ने भी खुलकर अपने रिश्तों का स्वीकारा नहीं है और ऐसा कही जा सकता है कि यह दोनों ही स्टार्स सिंगल हैं. आलिया और रणबीर दोनों एक साथ निर्देशक अयान मुखर्जी की फिल्म ‘ब्रहामास्त्र’ में काम कर रहे हैं.

मोनालिसा ने अपनी बोल्ड अदाओं का बिखेरा जलवा, वायरल हुआ वीडियो

बिग बौस कंटेस्टेंट और भोजपुरी फिल्मों की टौप अदाकारा मोनालिसा इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रही हैं. अपनी बोल्ड फोटो शूट के लिए मशहूर मोनालिसा की झोली में इन दिनों कई बड़े प्रोजेक्ट हैं. इनदिनों मोनालिसा एक बंगाली भाषा के शो की तैयारी में हैं. वह अपने ‘दुपुर ठाकुरपो 2’  शो के प्रमोशन में जुटी हुई हैं. इस नए शो में वह ‘झूमा बौउदी’ का किरदार निभा रहीं है.

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वैसे तो वह शो के शूटिंग के दौरान की कई तस्वीरों को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर कर चुकी हैं. लेकिन इन दिनों मोनालिसा के इस नए शो से जुड़ा एक प्रमोशनल वीडियो में उनका बोल्ड रूप सामने आया है. वीडियो में मोनालिसा अलग-अलग पोज में अपनी हौट अदाओं को दिखाती नजर आ रही हैं. सोशल मीडिया साइट्स पर यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है. एक नजर इस वीडियो की तरफ डालते हैं.

मोनालिसा के इस नई सीरीज के बारे में बात करें तो इस ‘झूमा बौउदी’ वाले उनके किरदार के छह दीवाने हैं जो मोनालिसा की अदाओं पर जान झिड़कते हैं. मोनालिसा का यह नया शो होईचोई वेब चैनल पर टेलीकास्ट किया जाएगा.

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आपको बता दें कि बिग बौस के बाद मोनालिसा ने अपने पति के साथ डांसिंग रियलिटी शो ‘नच बलिए’ में भी अपना जलवा बिखेरा था.

VIDEO : कलरफुल डॉटेड नेल आर्ट

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नई दुल्हन के साथ कुछ इस अंदाज में दिखे हिमेश रेशमिया

बौलीवुड गायक, संगीतकार और अभिनेता हिमेश रेशमिया बुधवार देर रात मुंबई एयरपोर्ट पर अपनी नयी दुल्हन सोनिया कपूर के साथ नजर आये. दरअसल, दोनों ही शादी के बाद हनीमून के बहाने कुछ जरूरी खरीदारी करने के लिए दुबई गए थे और अब वो मुंबई लौट आये हैं.

बता दें कि हिमेश रेशमिया ने हाल ही में यानी 11 मई को अपनी लौन्ग टाइम गर्लफ्रेंड सोनिया कपूर से शादी करके सबको चौंका दिया था. क्योंकि यह शादी बड़े ही गुपचुप तरीके से हुई थी, हिमेश ने एक बातचीत में बताया‍ कि- ‘वो और सोनिया पिछले करीब एक दशक से अच्‍छे दोस्‍त रहे हैं.

इस रिश्‍ते को और मजबूती देते हुए अब हमने शादी कर ली है और हमारे लिए यह बहुत ही खुशी का पल है.’ बहरहाल, एयरपोर्ट पर हिमेश और सोनिया कुछ इस अंदाज में कैमरे में कैद हुए. आप देख सकते हैं हिमेश ने अपने अंदाज में कुछ यूं चीयर करते हुए फोटोग्राफरों का अभिवादन स्वीकार किया तो वहीं उनकी वाइफ सोनिया कपूर भी इस मौके पर बेहद खुश नजर आ रही हैं.

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गौरतलब है कि हिमेश ने बड़े ही गुपचुप तरीके से यह शादी की जिसमें उनके कुछ चुनिंदा दोस्त ही शामिल हो सके. वेडिंग सेरेमनी की कुछ तस्‍वीरें बाद में हिमेश ने इंस्‍टाग्राम अकाउंट पर अपलोड की. बहरहाल, शादी के बाद यह जोड़ा हनीमून के लिए दुबई गया था. हिमेश के मुताबिक उनकी पत्नी सोनिया को दुबई में कुछ शौपिंग करनी थी.

खबर है कि उनकी वाइफ उनकी स्टाइलिस्ट भी हैं और उनके आने वाले कुछ प्रोजेक्ट्स के लिए उनका लुक वही डिजाइन करेंगी जिसके लिए उन्हें वहां से कुछ जरूरी चीजें लेनी थीं और इसलिए वे दुबई गए थे.

गौरतलब है कि सोनिया कपूर हिमेश रेशमिया की दूसरी पत्‍नी हैं. 44 साल के हिमेश की पहली पत्नी का नाम कोमल है, जिनसे उन्‍हें एक बेटा भी है, जिसका नाम स्‍वयं है. आप जानते ही हैं कि जनवरी 2017 में हिमेश और कोमल का तलाक हो गया था और अब हिमेश और सोनिया शादी के बंधन में बंधकर नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं. दोनों इस शादी से बेहद खुश हैं.

सोनिया कपूर 1990 के दशक से इंडियन टेलीविजन की दुनिया में सक्रिय रही हैं. उस दौर के चर्चित टीवी सीरियल ‘यस बौस’ से लेकर ‘कृष्‍णा’ तक में सोनिया कपूर ने अपने दमदार रोल से टीवी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी. यूं तो सोनिया कपूर ने छोटे बजट की कई हिंदी फिल्में जैसे ‘फरेब’, ‘औफिसर’ आदि में भी काम किया है, पर ज्‍यादातर लोग उन्‍हें टीवी एक्‍टर के तौर पर ही जानते हैं.

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हाल के दिनों में बौलीवुड की यह तीसरी शादी रही. हिमेश से पहले सोनम कपूर और नेहा धूपिया की शादी की खबरें भी आ चुकी थीं. हिमेश, सोनम और नेहा इन तीनों की शादी में एक बात कौमन है और वो यह कि तीनों ने अपने खास दोस्त से शादी की. सोनम और आनंद आहूजा भी कई साल से अच्छे दोस्त रहे हैं साथ ही नेहा धूपिया ने भी अंगद बेदी के बारे में यही बताया कि वो उनके बेस्ट फ्रेंड हैं.

हिमेश की बात करें तो उन्होंने बौलीवुड की तमाम फिल्मों के लिए लगातार सिंगिंग और कंपोजिंग करते रहे हैं और इसके बाद उन्‍होंने ‘कर्ज’ से लेकर ‘तेरा सुरुर’ जैसी कुछ फिल्मों में लीड एक्‍टर के तौर पर भी काम किया. हिमेश कुछ म्युजिक बेस्ड रियल्टी शोज़ से भी जुड़े रहे हैं और उनकी एक जबरदस्त फैन फौलोविंग है.

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बताते चले कि हिमेश इसी महीने 19 तारीख को कानपुर (उत्तरप्रदेश) में होंगे जहां उनका एक शो होना है उसके बाद वो अगले महीने जापान भी एक शो करने के लिए जाने वाले हैं.

VIDEO : कलरफुल डॉटेड नेल आर्ट

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इश्क के चक्कर में

मेरे मुवक्किल रियाज पर नादिर के कत्ल का इलजाम था. इस मामले को अदालत में पहुंचे करीब 3 महीने हो चुके थे, पर बाकायदा सुनवाई आज हो रही थी. अभियोजन पक्ष की ओर से 8 गवाह थे, जिन में पहला गवाह सालिक खान था. सच बोलने की कसम खाने के बाद उस ने अपना बयान रिकौर्ड कराया.

सालिक खान भी वहीं रहता था, जहां मेरा मुवक्किल रियाज और मृतक नादिर रहता था. रियाज और नादिर एक ही बिल्डिंग में रहते थे. वह तिमंजिला बिल्डिंग थी. सालिक खान उसी गली में रहता था. गली के नुक्कड़ पर उस की पानसिगरेट की दुकान थी.

भारी बदन के सालिक की उम्र 46-47 साल थी. अभियोजन पक्ष के वकील ने उस से मेरे मुवक्किल की ओर इशारा कर के पूछा, ‘‘सालिक खान, क्या आप इस आदमी को जानते हैं?’’

‘‘जी साहब, अच्छी तरह से जानता हूं.’’

‘‘यह कैसा आदमी है?’’

‘‘हुजूर, यह आवारा किस्म का बहुत झगड़ालू आदमी है. इस के बूढ़े पिता एक होटल में बैरा की नौकरी करते हैं. यह सारा दिन मोहल्ले में घूमता रहता है. हट्टाकट्टा है, पर कोई काम नहीं करता.’’

‘‘क्या यह गुस्सैल प्रवृत्ति का है?’’ वकील ने पूछा.

‘‘जी, बहुत ही गुस्सैल स्वभाव का है. मेरी दुकान के सामने ही पिछले हफ्ते इस की नादिर से जम कर मारपीट हुई थी. दोनों खूनखराबे पर उतारू थे. इस से यह तो नहीं होता कि कोई कामधाम कर के बूढ़े बाप की मदद करे, इधरउधर लड़ाईझगड़ा करता फिरता है.’’

‘‘क्या यह सच है कि उस लड़ाई में ज्यादा नुकसान इसी का हुआ था. इस के चेहरे पर चोट लगी थी. उस के बाद इस ने क्या कहा था?’’ वकील ने मेरे मुवक्किल की ओर इशारा कर के पूछा.

‘‘इस ने नादिर को धमकाते हुए कहा था कि यह उसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेगा. इस का अंजाम उसे भुगतना ही पड़ेगा. इस का बदला वह जरूर लेगा.’’

इस के बाद अभियोजन के वकील ने कहा, ‘‘दैट्स आल हुजूर. इस धमकी के कुछ दिनों बाद ही नादिर की हत्या कर दी गई, इस से यही लगता है कि यह हत्या इसी आदमी ने की है.’’

उस के बाद मैं गवाह से पूछताछ करने के लिए आगे आया. मैं ने पूछा, ‘‘सालिक साहब, क्या आप शादीशुदा हैं?’’

‘‘जी हां, मैं शादीशुदा ही नहीं, मेरी 2 बेटियां और एक बेटा भी है.’’

‘‘क्या आप की रियाज से कोई व्यक्तितगत दुश्मनी है?’’

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है.’’

‘‘तब आप ने उसे कामचोर और आवारा क्यों कहा?’’

‘‘वह इसलिए कि यह कोई कामधाम करने के बजाय दिन भर आवारा घूमता रहता है.’’

‘‘लेकिन आप की बातों से तो यही लगता है कि आप रियाज से नफरत करते हैं. इस की वजह यह है कि रियाज आप की बेटी फौजिया को पसंद करता है. उस ने आप के घर फौजिया के लिए रिश्ता भी भेजा था. क्या मैं गलत कह रहा हूं्?’’

‘‘नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. हां, उस ने फौजिया के लिए रिश्ता जरूर भेजा था, पर मैं ने मना कर दिया था.’’ सालिक खान ने हकलाते हुए कहा.

‘‘आप झूठ बोल रहे हैं सालिक खान, आप ने इनकार नहीं किया था, बल्कि कहा था कि आप पहले बड़ी बेटी शाजिया की शादी करना चाहते हैं. अगर रियाज शाजिया से शादी के लिए राजी है तो यह रिश्ता मंजूर है. चूंकि रियाज फौजिया को पसंद करता था, इसलिए उस ने शादी से मना कर दिया था. यही नहीं, उस ने ऐसी बात कह दी थी कि आप को गुस्सा आ गया था. आप बताएंगे, उस ने क्या कहा था?’’

‘‘उस ने कहा था कि शाजिया सुंदर नहीं है, इसलिए वह उस से किसी भी कीमत पर शादी नहीं करेगा.’’

‘‘…और उसी दिन से आप रियाज से नफरत करने लगे थे. उसे धोखेबाज, आवारा और बेशर्म कहने लगे. इसी वजह से आज उस के खिलाफ गवाही दे रहे हैं.’’

‘‘ऐसी कोई बात नहीं है. मैं ने जो देखा था, वही यहां बताया है.’’

‘‘क्या आप को यकीन है कि रियाज ने जो धमकी दी थी, उस पर अमल कर के नादिर का कत्ल कर दिया है?’’

‘‘मैं यह यकीन से नहीं कह सकता, क्योंकि मैं ने उसे कत्ल करते नहीं देखा.’’

‘‘मतलब यह कि सब कुछ सिर्फ अंदाजे से कह रहे हो?’’

मैं ने सालिक खान से जिरह खत्म कर दी. रियाज और मृतक नादिर गोरंगी की एक तिमंजिला बिल्डिंग में रहते थे, जिस की हर मंजिल पर 2 छोटेछोटे फ्लैट्स बने थे. नादिर अपने परिवार के साथ दूसरी मंजिल पर रहता था, जबकि रियाज तीसरी मंजिल पर रहता था.

रियाज मांबाप की एकलौती संतान था. उस की मां घरेलू औरत थी. पिता एक होटल में बैरा थे. उस ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थी. वह आगे पढ़ना चाहता था, पर हालात ऐसे नहीं थे कि वह कालेज की पढ़ाई करता. जाहिर है, उस के बाप अब्दुल की इतनी आमदनी नहीं थी. वह नौकरी ढूंढ रहा था, पर कोई ढंग की नौकरी नहीं मिल रही थी, इसलिए इधरउधर भटकता रहता था.

बैरा की नौकरी वह करना नहीं चाहता था. अब उस पर नादिर के कत्ल का आरोप था. मृतक नादिर बिलकुल पढ़ालिखा नहीं था. वह अपने बड़े भाई माजिद के साथ रहता था. मांबाप की मौत हो चुकी थी. माजिद कपड़े की एक बड़ी दुकान पर सेल्समैन था. वह शादीशुदा था. उस की बीवी आलिया हाउसवाइफ थी. उस की 5 साल की एक बेटी थी. माजिद ने अपने एक जानने वाले की दुकान पर नादिर को नौकरी दिलवा दी थी. नादिर काम अच्छा करता था. उस का मालिक उस पर भरोसा करता था. नादिर और रियाज के बीच कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी.

अगली पेशी के पहले मैं ने रियाज और नादिर के घर जा कर पूरी जानकारी हासिल  कर ली थी. रियाज का बाप नौकरी पर था. मां नगीना से बात की. वह बेटे के लिए बहुत दुखी थी. मैं ने उसे दिलासा देते हुए पूछा, ‘‘क्या आप को पूरा यकीन है कि आप के बेटे ने नादिर का कत्ल नहीं किया?’’

‘‘हां, मेरा बेटा कत्ल नहीं कर सकता. वह बेगुनाह है.’’

‘‘फिर आप खुदा पर भरोसा रखें. उस ने कत्ल नहीं किया है तो वह छूट जाएगा. अभी तो उस पर सिर्फ आरोप है.’’

नगीना से मुझे कुछ काम की बातें पता चलीं, जो आगे जिरह में पता चलेंगी. मैं रियाज के घर से निकल रहा था तो सामने के फ्लैट से कोई मुझे ताक रहा था. हर फ्लैट में 2 कमरे और एक हौल था. इमारत का एक ही मुख्य दरवाजा था. हर मंजिल पर आमनेसामने 2 फ्लैट्स थे. एक तरफ जीना था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, 17 अप्रैल की रात 2 बजे के करीब नादिर की हत्या हुई थी. उसे इसी बिल्डिंग की छत पर मारा गया था. उस की लाश पानी की टंकी के करीब एक ब्लौक पर पड़ी थी. उस की हत्या बोल्ट खोलने वाले भारी रेंच से की गई थी.

अगली पेशी पर अभियोजन पक्ष की ओर से कादिर खान को पेश किया गया. कादिर खान भी उसी बिल्डिंग में रहता था. बिल्डिंग के 5 फ्लैट्स में किराएदार रहते थे और एक फ्लैट में खुद मकान मालिक रहता था. अभियोजन के वकील ने कादिर खान से सवालजवाब शुरू किए.

लाश सब से पहले उसी ने देखी थी. उस की गवाही में कोई खास बात नहीं थी, सिवाय इस के कि उस ने भी रियाज को झगड़ालू और गुस्सैल बताया था. मैं ने पूछा, ‘‘आप ने मुलाजिम रियाज को गुस्सैल और लड़ाकू कहा है, इस की वजह क्या है?’’

‘‘वह है ही झगड़ालू, इसलिए कहा है.’’

‘‘आप किस फ्लैट में कब से रह रहे हैं?’’

‘‘मैं 4 नंबर फ्लैट में 4 सालों से रह रहा हूं.’’

‘‘इस का मतलब दूसरी मंजिल पर आप अकेले ही रहते हैं?’’

‘‘नहीं, मेरे साथ बीवीबच्चे भी रहते हैं.’’

‘‘जब आप बिल्डिंग में रहने आए थे तो रियाज आप से पहले से वहां रह रहा था?’’

‘‘जी हां, वह वहां पहले से रह रहा था.’’

‘‘कादिर खान, जिस आदमी से आप का 4 सालों में एक बार भी झगड़ा नहीं हुआ, इस के बावजूद आप उसे झगड़ालू कह रहे हैं, ऐसा क्यों?’’

‘‘मुझ से झगड़ा नहीं हुआ तो क्या हुआ, वह झगड़ालू है. मैं ने खुद उसे नादिर से लड़ते देखा है. दोनों में जोरजोर से झगड़ा हो रहा था. बाद में पता चला कि उस ने नादिर का कत्ल कर दिया.’’

‘‘क्या आप बताएंगे कि दोनों किस बात पर लड़ रहे थे?’’

‘‘नादिर का कहना था कि रियाज उस के घर के सामने से गुजरते हुए गंदेगंदे गाने गाता था. जबकि रियाज इस बात को मना कर रहा था. इसी बात को ले कर दोनों में झगड़ा हुआ था. लोगों ने बीचबचाव कराया था.’’

‘‘और अगले दिन बिल्डिंग की छत पर नादिर की लाश मिली थी. उस की लाश आप ने सब से पहले देखी थी.’’

एक पल सोच कर उस ने कहा, ‘‘हां, करीब 9 बजे सुबह मैं ने ही देखी थी.’’

‘‘क्या आप रोज सवेरे छत पर जाते हैं?’’

‘‘नहीं, मैं रोज नहीं जाता. उस दिन टीवी साफ नहीं आ रहा था. मुझे लगा कि केबल कट गया है, यही देखने गया था.’’

‘‘आप ने छत पर क्या देखा?’’

‘‘जैसे ही मैं ने दरवाजा खोला, मेरी नजर सीधे लाश पर पड़ी. मैं घबरा कर नीचे आ गया.’’

‘‘कादिर खान, दरवाजा और लाश के बीच कितना अंतर रहा था?’’

‘‘यही कोई 20-25 फुट का. ब्लौक पर नादिर की लाश पड़ी थी. उस की खोपड़ी फटी हुई थी.’’

‘‘नादिर की लाश के बारे में सब से पहले आप ने किसे बताया?’’

‘‘दाऊद साहब को बताया था. वह उस बिल्डिंग के मालिक हैं.’’

‘‘बिल्डिंग के मालिक, जो 5 नंबर फ्लैट में रहते हैं?’’

‘‘जी, मैं ने उन से छत की चाबी ली थी, छत की चाबी उन के पास ही रहती है.’’

‘‘उस दिन छत का दरवाजा तुम्हीं ने खोला था?’’

‘‘जी साहब, ताला मैं ने ही खोला था?’’

‘‘ताला खोला तो ब्लौक पर लाश पड़ी दिखाई दी. जरा छत के बारे में विस्तार से बताइए?’’

‘‘पानी की टंकी छत के बीच में है. टंकी के करीब छत पर 15-20 ब्लौक लगे हैं, जिन पर बैठ कर कुछ लोग गपशप कर सकते हैं.’’

‘‘अगर ताला तुम ने खोला तो मृतक आधी रात को छत पर कैसे पहुंचा?’’

‘‘जी, यह मैं नहीं बता सकता. दाऊद साहब को जब मैं ने लाश के बारे में बताया तो वह भी हैरान रह गए.’’

‘‘बात नादिर के छत पर पहुंचने भर की नहीं है, बल्कि वहां उस का बेदर्दी से कत्ल भी कर दिया गया. नादिर के अलावा भी कोई वहां पहुंचा होगा. जबकि चाबी दाऊद साहब के पास थी.’’

‘‘दाऊद साहब भी सुन कर हैरान हो गए थे. वह भी मेरे साथ छत पर गए. इस के बाद उन्होंने ही पुलिस को फोन किया.’’

इसी के बाद जिरह और अदालत का वक्त खत्म हो गया.

मुझे तारीख मिल गई. अगली पेशी पर माजिद की गवाही शुरू हुई. वह सीधासादा 40-42 साल का आदमी था. कपड़े की दुकान पर सेल्समैन था. फ्लैट नंबर 2 में रहता था. उस ने कहा कि नादिर और रियाज के बीच काफी तनाव था. दोनों में झगड़ा भी हुआ था. यह कत्ल उसी का नतीजा है.

अभियोजन के वकील ने सवाल कर लिए तो मैं ने पूछा, ‘‘आप का भाई कब से कब तक अपनी नौकरी पर रहता था?’’

‘‘सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक. वह 9 बजे तक घर आ जाता था.’’

‘‘कत्ल वाले दिन वह कितने बजे घर आया था?’’

‘‘उस दिन मैं घर आया तो वह घर पर ही मौजूद था.’’

‘‘माजिद साहब, पिछली पेशी पर एक गवाह ने कहा था कि उस दिन शाम को उस ने नादिर और रियाज को झगड़ा करते देखा था. क्या उस दिन वह नौकरी पर नहीं गया था?’’

‘‘नहीं, उस दिन वह नौकरी पर गया था, लेकिन तबीयत ठीक न होने की वजह से जल्दी घर आ गया था.’’

‘‘घर आते ही उस ने लड़ाईझगड़ा शुरू कर दिया था?’’

‘‘नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है. घर आ कर वह आराम कर रहा था, तभी रियाज खिड़की के पास खड़े हो कर बेहूदा गाने गाने लगा था. मना करने पर भी वह चुप नहीं हुआ. पहले भी इस बात को ले कर नादिर और उस में मारपीट हो चुकी थी. नादिर नाराज हो कर बाहर निकला और दोनों में झगड़ा और गालीगलौज होने लगी.’’

‘‘झगड़ा सिर्फ इतनी बात पर हुआ था या कोई और वजह थी?’’ मैं ने पूछा.

‘‘यह आप रियाज से ही पूछ लीजिए. मेरा भाई सीधासादा था, बेमौत मारा गया.’’ जवाब में माजिद ने कहा.

‘‘आप को लगता है कि रियाज ने धमकी के अनुसार बदला लेने के लिए तुम्हारे भाई का कत्ल कर दिया है.’’

‘‘जी हां, मुझे लगता नहीं, पूरा यकीन है.’’

‘‘जिस दिन कत्ल हुआ था, सुबह आप सो कर उठे तो आप का भाई घर पर नहीं था?’’

‘‘जब मैं सो कर उठा तो मेरी बीवी ने बताया कि नादिर घर पर नहीं है.’’

‘‘यह जान कर आप ने क्या किया?’’

‘‘हाथमुंह धो कर मैं उस की तलाश में निकला तो पता चला कि छत पर नादिर की लाश पड़ी है.’’

‘‘पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, नादिर का कत्ल रात 1 से 2 बजे के बीच हुआ था. क्या आप बता सकते हैं कि नादिर एक बजे रात को छत पर क्या करने गया था? आप ने जो बताया है, उस के अनुसार नादिर बीमार था. छत पर ताला भी लगा था. इस हालत में छत पर कैसे और क्यों गया?’’

‘‘मैं क्या बताऊं? मुझे खुद नहीं पता. अगर वह जिंदा होता तो उसी से पूछता.’’

‘‘वह जिंदा नहीं है, इसलिए आप को बताना पड़ेगा, वह ऊपर कैसे गया? क्या उस के पास डुप्लीकेट चाबी थी? उस ने मकान मालिक से चाबी नहीं ली तो क्या पीछे से छत पर पहुंचा?’’

‘‘नादिर के पास डुप्लीकेट चाबी नहीं थी. वह छत पर क्यों और कैसे गया, मुझे नहीं पता.’’

‘‘आप कह रहे हैं कि आप का भाई सीधासादा काम से काम रखने वाला था. इस के बावजूद उस ने गुस्से में 2-3 बार रियाज से मारपीट की. ताज्जुब की बात तो यह है कि रियाज की लड़ाई सिर्फ नादिर से ही होती थी. इस की एक खास वजह है, जो आप बता नहीं रहे हैं.’’

‘‘कौन सी वजह? मैं कुछ नहीं छिपा रहा हूं.’’

‘‘अपने भाई की रंगीनमिजाजी. नादिर सालिक खान की छोटी बेटी फौजिया को चाहता था. वह फौजिया को रियाज के खिलाफ भड़काता रहता था. उस ने उस के लिए शादी का रिश्ता भी भेजा था, जबकि फौजिया नादिर को इस बात के लिए डांट चुकी थी. जब उस पर उस की डांट का असर नहीं हुआ तो फौजिया ने सारी बात रियाज को बता दी थी. उसी के बाद रियाज और नादिर में लड़ाईझगड़ा होने लगा था.’’

‘‘मुझे ऐसी किसी बात की जानकारी नहीं है. मैं ने रिश्ता नहीं भिजवाया था.’’

‘‘खैर, यह बताइए कि 2 साल पहले आप के फ्लैट के समने एक बेवा औरत सकीरा बेगम रहती थीं, आप को याद हैं?’’

माजिद हड़बड़ा कर बोला, ‘‘जी, याद है.’’

‘‘उस की एक जवान बेटी थी रजिया, याद आया?’’

‘‘जी, उस की जवान बेटी रजिया थी.’’

‘‘अब यह बताइए कि सकीरा बेगम बिल्डिंग छोड़ कर क्यों चली गई?’’

‘‘उस की मरजी, यहां मन नहीं लगा होगा इसलिए छोड़ कर चली गई.’’

‘‘माजिद साहब, आप असली बात छिपा रहे हैं. क्योंकि वह आप के लिए शर्मिंदगी की बात है. आप बुरा न मानें तो मैं बता दूं? आप का भाई उस बेवा औरत की बेटी रजिया पर डोरे डाल रहा था. उस की इज्जत लूटने के चक्कर में था, तभी रंगेहाथों पकड़ा गया. यह रजिया की खुशकिस्मती थी कि झूठे प्यार के नाम पर वह अपना सब कुछ लुटाने से बच गई. इस बारे में बताने वालों की कमी नहीं है, इसलिए झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं है. सकीरा बेगम नादिर की वजह से बिल्डिंग छोड़ कर चली गई थीं.’’

‘‘जी, इस में नादिर की गलती थी, इसलिए मैं ने उसे खूब डांटा था. इस के बाद वह सुधर गया था.’’

‘‘अगर वह सुधर गया था तो आधी रात को छत पर क्या कर रहा था? क्या आप इस बात से इनकार करेंगे कि नादिर सकीरा बेगम की बेटी रजिया से छत पर छिपछिप कर मिलता था? इस के लिए उस ने छत के ताले की डुप्लीकेट चाबी बनवा ली थी. जब इस बात की खबर दाऊद साहब को हुई तो उन्होंने ताला बदलवा दिया था.’’

उस ने लड़खड़ाते हुए कहा, ‘‘यह भी सही है.’’

अगली पेशी पर मैं ने इनक्वायरी अफसर से पूछताछ की. उस का नाम साजिद था. मैं ने कहा, ‘‘नादिर की हत्या के बारे में आप को सब से पहले किस ने बताया?’’

‘‘रिकौर्ड के अनुसार, घटना की जानकारी 18 अप्रैल की सुबह 10 बजे दाऊद साहब ने फोन द्वारा दी थी. मैं साढ़े 10 बजे वहां पहुंच गया था.’’

‘‘जब आप छत पर पहुंचे, वहां कौनकौन था?’’

‘‘फोन करने के बाद दाऊद साहब ने सीढि़यों पर ताला लगा दिया था. मैं वहां पहुंचा तो मृतक की लाश टंकी के पीछे ब्लौक पर पड़ी थी. अंजाने में पीछे से उस की खोपड़ी पर  लोहे के वजनी रेंच से जोरदार वार किया गया था. उसी से उस की मौत हो गई थी.’’

‘‘हथियार आप को तुरंत मिल गया था?’’

‘‘जी नहीं, थोड़ी तलाश के बाद छत के कोने में पड़े कबाड़ में मिला था.’’

‘‘क्या आप ने उस पर से फिंगरप्रिंट्स उठवाए थे?’’

‘‘उस पर फिंगरप्रिंट्स नहीं मिले थे. शायद साफ कर दिए गए थे.’’

‘‘घटना वाली रात मृतक छत पर था, वहीं उस का कत्ल किया गया था. सवाल यह है कि जब छत पर जाने वाली सीढि़यों के दरवाजे पर ताला लगा था तो मृतक छत पर कैसे पहुंचा? इस बारे में आप कुछ बता सकते हैं?’’

जज साहब काफी दिलचस्पी से हमारी जिरह सुन रहे थे. उन्होंने पूछा, ‘‘मिर्जा साहब, इस मामले में आप बारबार किसी लड़की का जिक्र क्यों कर रहे हैं? इस से तो यही लगता है कि आप उस लड़की के बारे में जानते हैं?’’

‘‘जी सर, कुछ हद तक जानता हूं.’’

‘‘तो आप मृतक की प्रेमिका का नाम बताएंगे?’’ जज साहब ने पूछा.

‘‘जरूर बताऊंगा सर, पर समय आने दीजिए.’’

पिछली पेशी पर मैं ने प्यार और प्रेमिका का जिक्र कर के मुकदमे में सनसनी पैदा कर दी थी. यह कोई मनगढ़ंत किस्सा नहीं था. इस मामले में मैं ने काफी खोज की थी, जिस से मृतक नादिर के ताजे प्यार के बारे में पता कर लिया था. अब उसी के आधार पर रियाज को बेगुनाह साबित करना चाहता था.

काररवाई शुरू हुई. अभियोजन की तरफ से बिल्डिंग के मालिक दाऊद साहब को बुलाया गया. वकील ने 10 मिनट तक ढीलीढाली जिरह की. उस के बाद मेरा नंबर आया. मैं ने पूछा, ‘‘छत की चाबी आप के पास रहती है. घटना वाले दिन किसी ने आप से चाबी मांगी थी?’’

‘‘जी नहीं, चाबी किसी ने नहीं मांगी थी.’’

‘‘इस का मतलब यह हुआ कि 17 अप्रैल की रात को कातिल रियाज और मृतक नादिर में किसी एक के पास छत के दरवाजे की चाबी थी या दोनों के पास थी. उसी से दोनों छत पर पहुंचे थे. दाऊद साहब, आप के खयाल से नादिर की हत्या किस ने की होगी?’’

दाऊद ने रियाज की ओर इशारा कर के कहा, ‘‘इसी ने मारा है और कौन मारेगा? इन्हीं दोनों में झगड़ा चल रहा था.’’

‘‘आप ने सरकारी वकील को बताया है कि रियाज आवारा, बदमाश और काफी झगड़ालू है. आप भी उसी बिल्डिंग में रहते हैं. आप का रियाज से कितनी बार लड़ाईझगड़ा हुआ है?’’

‘‘मुझ से तो उस का कभी कोई झगड़ा नहीं हुआ. मैं ने उसे झगड़ालू नादिर से बारबार झगड़ा करने की वजह से कहा था.’’

‘‘इस का मतलब आप के लिए वह अच्छा था. आप से कभी कोई लड़ाईझगड़ा नहीं हुआ था.’’

‘‘जी, आप ऐसा ही समझिए.’’ दाऊद ने गोलमोल जवाब दिया.

‘‘सभी को पता है कि 2 साल पहले रजिया से मिलने के लिए नादिर ने छत के दरवाजे में लगे ताले की डुप्लीकेट चाबी बनवाई थी. जब सब को इस बात की जानकारी हुई तो बड़ी बदनामी हुई. उस के बाद आप ने छत के दरवाजे का ताला तक बदल दिया था. हो सकता है, इस बार भी उस ने डुप्लीकेट चाबी बनवा ली हो और छत पर किसी से मिलने जाता रहा हो? इस बार लड़की कौन थी, बता सकते हैं आप?’’

‘‘इस बारे में मुझे कुछ नहीं पता. हां, हो सकता है उस ने डुप्लीकेट चाबी बनवा ली हो. लड़की के बारे में मैं कैसे बता सकता हूं. हो सकता है, रियाज को पता हो.’’

‘‘आप रियाज का नाम क्यों ले रहे हैं?’’

‘‘इसलिए कि वह भी फौजिया से प्यार करता था या उसे इस प्यार की जानकारी थी.’’

मैं ने भेद उगलवाने की गरज से कहा, ‘‘दाऊद साहब, यह तो सब को पता है कि रियाज फौजिया से शादी करना चाहता था और इस के लिए उस ने रिश्ता भी भेजा था. जबकि नादिर उसे रियाज के खिलाफ भड़काता था. कहीं नादिर फौजिया के साथ ही छत पर तो नहीं था? इस का उल्टा भी हो सकता है?’’

दाऊद जिस तरह फौजिया को नादिर से जोड़ रहा था, यह उस की गंदी सोच का नतीजा था या फिर उस के दिमाग में कोई और बात थी. उस ने पूछा, ‘‘उल्टा कैसे हो सकता है?’’

‘‘यह भी मुमकिन है कि घटना वाली रात नादिर फौजिया से मिलने बिल्डिंग की छत पर गया हो और…’’

मेरी अधूरी बात पर उस ने चौंक कर मेरी ओर देखा. इस के बाद खा जाने वाली नजरों से मेरी ओर घूरते हुए बोला, ‘‘और क्या वकील साहब?’’

‘‘…और यह कि फौजिया के अलावा कोई दूसरी लड़की भी तो हो सकती है? किसी ने फौजिया को आतेजाते देखा तो नहीं, इसलिए वहां दूसरी लड़की भी तो हो सकती थी. इस पर आप को कुछ ऐतराज है क्या?’’

दाऊद ने हड़बड़ा कर कहा, ‘‘भला मुझे क्यों ऐतराज होगा?’’

‘‘अगर मैं कहूं कि वह लड़की उसी बिल्डंग की रहने वाली थी तो..?’’

‘‘…तो क्या?’’ वह हड़बड़ा कर बोला.

‘‘बिल्डिंग का मालिक होने के नाते आप को उस लड़की के बारे में पता होना चाहिए. अच्छा, मैं आप को थोड़ा संकेत देता हूं. उस का नाम ‘म’ से शुरू होता है और आप का उस से गहरा ताल्लुक है, जिस के इंतजार में नादिर छत पर बैठा था.’’

मैं असलियत की तह तक पहुंच चुका था. बस एक कदम आगे बढ़ना था. मैं ने कहा, ‘‘दाऊद साहब, नाम मैं बताऊं या आप खुद बताएंगे? आप को एक बार फिर बता दूं कि उस का नाम ‘म’ से शुरू होता है, जिस का इश्क नादिर से चल रहा था और यह बात आप को मालूम हो चुकी थी. अब बताइए नाम?’’

दाऊद गुस्से से उबलते हुए बोला, ‘‘अगर तुम ने मेरी बेटी मनीजा का नाम लिया तो ठीक नहीं होगा.’’

मैं ने जज साहब की ओर देखते हुए कहा, ‘‘सर, मुझे अब इन से कुछ नहीं पूछना. मेरे हिसाब से नादिर का कत्ल इसी ने किया है. रियाज बेगुनाह है. इस की नादिर से 2-3 बार लड़ाई हुई थी, इस ने धमकी भी दी थी, लेकिन इस ने कत्ल नहीं किया. धमकी की वजह से उस पर कत्ल का इल्जाम लगा दिया गया. अब हकीकत सामने है सर.’’

अगली पेशी पर अदालत ने मेरे मुवक्किल को बाइज्जत बरी कर दिया, क्योंकि वह बेगुनाह था. दाऊद के व्यवहार से उसे नादिर का कातिल मान लिया गया था. जब अदालत के हुक्म पर पुलिस ने उस से पूछताछ की तो थोड़ी सख्ती के बाद उस ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था.

नादिर एक दिलफेंक आशिकमिजाज लड़का था. जब फौजिया ने उसे घास नहीं डाली तो उस ने इश्क का चक्कर दाऊद की बेटी मनीजा से चलाया. वह उस के जाल में फंस गई. दाऊद को अपनी बेटी से नादिर के प्रेमसंबंधों का पता चल गया था. नादिर के इश्कबाजी के पुराने रिकौर्ड से वह अच्छी तरह वाकिफ था.

दाऊद ने बेटी के प्रेमसंबंधों को उछालने या उसे समझाने के बजाय नादिर की जिंदगी का पत्ता साफ करने का फैसला कर लिया. वह मौके की ताक में रहने लगा. रियाज और नादिर के बीच लड़ाईझगड़े और दुश्मनी का माहौल बना तो दाऊद ने नादिर के कत्ल की योजना बना डाली.

दाऊद को पता था कि नादिर ने मनीजा की मदद से छत की डुप्लीकेट चाबी बनवा ली है. घटना वाली रात को वह दबे पांव मनीजा के पहले छत पर पहुंच गया. नादिर छत पर मनीजा का इंतजार कर रहा था, तभी पीछे से अचानक पहुंच कर दाऊद ने उस की खोपड़ी पर वजनी रेंच से वार कर दिया.

एक ही वार में नादिर की खोपड़ी फट गई और वह मर गया. उस की जेब से चाबी निकाल कर दाऊद दरवाजे में ताला लगा कर नीचे आ गया.

मैं ने दाऊद से कहा कि वह बिल्डिंग का मालिक था. नादिर को वहां से निकाल सकता था. मारने की क्या जरूरत थी? जवाब में उस ने कहा, ‘‘मैं उस बदमाश को छोड़ना नहीं चाहता था. घर बदलने से उस की बुरी नीयत नहीं बदलती. वह मेरी मासूम बच्ची को फिर बहका लेता या फिर किसी सीधीसादी लड़की की जिंदगी बरबाद करता.’’

इस तरह नादिर को मासूम लड़कियों को अपने जाल में फंसाने की कड़ी सजा मिल गई थी.

VIDEO : जियोमेट्रिक स्ट्राइप्स नेल आर्ट

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