अमेरिकियों के पास सतर्क रहने के हैं तमाम कारण

आत्मविश्वास से लबरेज किम जोंग उन अपनी योजना के साथ सिंगापुर आया, थोड़ा दिया और ज्यादा लेकर लौटा. अपना कद बढ़ाया, अमेरिकी राष्ट्रपति से तारीफें बटोरीं, सैन्य अभ्यास खत्म करने का वादा लिया. सबसे बड़ी बात उसका वह बढ़ा हुआ आत्मविश्वास कि उत्तर कोरिया ने सब कुछ बखूबी किया. निश्चित रूप से यह सब युद्ध से तो बेहतर ही है. हालांकि भय की पूरी दीवार जब ट्रंप की खड़ी की हुई हो तो उन्हें तो श्रेय नहीं दिया जा सकता.

अमेरिकी राष्ट्रपति अपने अहंकार की तुष्टि के लिए किम पर मेहरबान दिखे. उन्हें नहीं पता कि उन्होंने अपने देश का कितना नुकसान कर लिया. संयुक्त वक्तव्य की भाषा भी पिछले वक्तव्यों की तुलना में लचर दिखी. इसमें भविष्य के प्रति आश्वस्त करने वाली कोई प्रतिज्ञा नहीं दिखी. हां, ट्रंप को बैठक से इतना खुश देखना आश्चर्य नहीं, हंसी का मामला है.

ट्रंप उत्तर कोरिया वालों को समझाते दिखे कि कैसे वे तोपखाने के अभ्यास वाले समुद्र तटों पर ‘दुनिया के सबसे अच्छे होटल’ बना सकते हैं. वे किम को उसके बढ़ते वायस ओवर के साथ किसी हॉलीवुड फिल्म के ट्रेलर की तरह पेश करते नजर आए. उसे अपने देश से प्यार करने वाला एक ‘ऐसा प्रतिभाशाली इंसान’ बताया, जो अच्छे-अच्छे काम करना चाहता है. भूल गए कि वे ऐसे तानाशाह की बात कर रहे हैं, जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ आधुनिक विश्व में मानवाधिकार हनन का अपने तरह का अकेला पर्याय मानता है.

किम के बारे में वे बहुत मजबूती से कहते हैं कि ‘उन्हें मुझ पर और मुझे उन पर भरोसा है’. अब अमेरिकी राष्ट्रपति भले ही इतने नासमझ हों, उत्तर कोरियाई नेता तो कतई ऐसा नहीं हो सकता, यह सब जानते हैं. ईरान समझौते से इकतरफा मुकरने के बाद कहा जाने लगा है कि अमेरिका की बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता. जी 7 व सिंगापुर बैठकों ने भी बताया है कि घटक हमेशा साथ नहीं रह सकते.

खैर, मंगलवार की बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकियों के पास सतर्क रहने के तमाम कारण हैं. वे खुद भी ट्रंप के वादों पर भरोसा नहीं कर सकते.

भोजपुरी सिनेमा की छटपटाहट, नकल की आंधी में असल गायब

कहने को भोजपुरी सिनेमा ने 50 साल से ज्यादा का सफर पूरा कर लिया है, लेकिन उस के खाते में 50 बेहतरीन फिल्में भी नहीं हैं. हर साल 50 से ज्यादा भोजपुरी फिल्में बन रही हैं, लेकिन हिंदी फिल्मों की अंधी नकल की वजह से वे न घर की रहीं और न घाट की.

भारत समेत मौरीशस, फिजी, सूरीनाम वगैरह देशों में तकरीबन 25 करोड़ लोग भोजपुरी बोलने समझने वाले हैं. देश में बिहार और उत्तर प्रदेश में भोजपुरी बोलने वाले सब से ज्यादा हैं. महाराष्ट्र, पंजाब, गुजरात वगैरह राज्य भी भोजपुरी सिनेमा के बड़े बाजार हैं, क्योंकि बिहार और उत्तर प्रदेश के हजारों लाखों लोग वहां के कल कारखानों में काम करते हैं.

भोजपुरी सिनेमा के हीरो राजीव मिश्रा कहते हैं कि परदेश में अपनी बोली की फिल्म देख कर लोग अपने गांव की मिट्टी की खुशबू के जैसा मजा लेते हैं. इसी वजह से दूसरे राज्यों में भी भोजपुरी फिल्में काफी चलती हैं. वहीं मिट्टी की खुशबू आज की भोजपुरी फिल्मों से पूरी तरह से गायब हो चुकी है और उस की जगह पूरी तरह से मुंबइया फिल्मों के स्टाइल ने ले ली है.

‘गंगा मइया तोहरे पियरी चढ़इबो’ पहली भोजपुरी फिल्म थी, जो 5 फरवरी, 1962 में रिलीज हुई थी. 5 लाख रुपए में बनी उस फिल्म ने 75 लाख रुपए की कमाई की थी.

विश्वनाथ शाहाबादी की बनाई इस फिल्म को मिली भारी कामयाबी के बाद तो भोजपुरी सिनेमा का रास्ता ही खुल गया और एक के बाद एक धड़ाधड़ भोजपुरी फिल्में बनने लगीं.

साल 1977 में भोजपुरी सिनेमा तब एक बार फिर उठ खड़ा हुआ, जब हिंदी सिनेमा के खलनायक रहे सुजीत कुमार और छोटेमोटे रोल करने वाली प्रेम नारायण भोजपुरी फिल्म ‘दंगल’ में हीरो हीरोइन बन कर आए.

‘दंगल’ भोजपुरी की पहली रंगीन फिल्म थी. ‘दंगल’ के गाने ‘गोरकी पतरकी रे मारे गुलेलवा जियरा हिलहिल जाए…’ ने तो धमाल ही मचा दिया. उस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोंसले ने आवाज दी थी. उस के बाद राकेश पांडे और पद्मा खन्ना की जोड़ी ‘बलम परदेसिया’ ले कर आई, जिस ने कामयाबी के झंडे गाड़े.

उस के बाद ‘धरती मैया’, ‘दूल्हा गंगा पार के’, ‘दगाबाज बलमा’, ‘संईयां मगन पहलवानी में’, ‘हमार दूल्हा’ जैसी बीसियों भोजपुरी फिल्में बनीं, पर कोई खास धमाल नहीं मचा सकीं. उस के बाद एक बार फिर भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री जैसे कोमा में चली गई.

भोजपुरी फिल्मों के जानकार बृजलाल कहते हैं कि हिंदी सिनेमा की कोरी नकल, फूहड़ डायलौग और गीतों ने भोजपुरी सिनेमा का बहुत कबाड़ा किया है. इस वजह से ज्यादातर लोग परिवार के साथ फिल्म देखने से कतराते हैं.

हीरो रविकिशन कहते हैं कि भोजपुरी सिनेमा के लोग अपनी सोच और बाजार के हिसाब से फिल्में बनाते हैं. एक बार जो चीज चल गई, उसे ही कामयाबी की गारंटी मान लेना फिल्मकारों की बहुत पुरानी बीमारी है. जो करोड़ों रुपए खर्च कर फिल्म बनाएगा, वह कमाई का खयाल तो रखेगा ही. जनता की पसंद के हिसाब से फिल्में बनती हैं. भोजपुरी फिल्मों की वजह से ही बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के सैकड़ों सिनेमाघर बंद होने से बच गए.

भोजपुरी फिल्मों से जुड़े लोग अपनी पीठ कितनी भी ठोंक ले, पर यह सच है कि भोजपुरी सिनेमा को वह दर्जा नहीं मिल सका है, जो तमिल, तेलुगु, मलयाली, बंगला, कन्नड़, मराठी फिल्मों को हासिल हो चुका है.

भोजपुरी फिल्मों के नामी विलेन उदय श्रीवास्तव कहते हैं कि इस इंडस्ट्री में बाहरी लोगों के घुसने से भोजपुरी फिल्मों की पहचान खत्म हो गई है. ऐसे लोगों को भोजपुरी की माटी की खुशबू, उस की संस्कृति और पहचान से कोई लेनादेना नहीं होता है. वे यही समझते हैं कि केवल भोजपुरी बोली में फिल्म बना देने से वह भोजपुरी फिल्म हो जाती है.

आज की भोजपुरी फिल्मों में खूनखराबे की भरमार होने से औरतें ऐसी फिल्मों से कट चुकी हैं, जिस से फिल्में चल नहीं पाती हैं.

हिंदी फिल्मों के नाम अंगरेजी में क्यों: राकेश

भोजपुरी फिल्मों के हिंदी नाम रखने के चलन के बारे में सुपरस्टार राकेश मिश्रा कहते हैं कि इस में कोई खराबी नहीं है. दक्षिण की कई हिट फिल्में हिंदी में बन रही हैं और ढेरों मुंबइया फिल्मों के नाम अंगरेजी में रखे जाते हैं. फिल्म बनाने वाला और फाइनैंसर यही चाहता है कि किसी भी तरह से उस की फिल्म हिट हो और उन्हें मुनाफा मिल सके.

राकेश मिश्रा का दावा है कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री ने खूब तरक्की की है और आज भी उस की कामयाबी का सफर जारी है. कई फिल्मों के ओवर बजट होने की वजह से इंडस्ट्री को थोड़ा झटका लगा था, पर अब सबकुछ पटरी पर लौट आया है. वैसे, भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री नई तकनीक और पुरानी परंपरा के बीच छटपटा रही है और इस कसमसाहट के दौर के बाद कुछ बेहतर नतीजा ही सामने आएगा.

बहन की गलती से वायरल हुआ सारा खान का न्यूड बाथटब वीडियो

अदाकारा सारा खान इनदिनों काफी चर्चा में हैं. चर्चा में आने के पीछे का कारण है उनका एक वीडियो. बता दें कि हाल ही में सोशल मीडिया पर सारा खान का नहाते हुए एक वीडियो वायरल हो गया था. जिसमें सारा न्यूड नजर आ रही थी. इतना ही नहीं ये वीडियो किसी और ने नहीं बल्कि खुद सारा की बहन आर्या खान ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया था. हालांकि वीडियो को कुछ ही सेकेंड में डिलीट भी कर दिया गया था. अब खुद सारा खान ने सामने आकर वीडियो को लेकर सफाई दी है.

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एक समाचार पत्र से बातचीत में सारा ने कहा कि उनकी बहन उस वक्त नशे में थी और उसने वीडियो मजाक में बना लिया था. जिसके बाद उसने उस वीडियो को फौरन डिलीट भी कर दिया. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और सारी चीजें खराब हो चुकी थीं. मैं बस इतना कहना चाहती हूं कि जमाना बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, टेक्नोलौजी हमें नुकसान पहुंचा सकती है इससे सावधान रहना चाहिए.” हालांकि बाद में आर्या ने अपनी गलती की भरपाई करने के लिए इंस्टाग्राम पर सारा की बाथटब में आराम करने की तस्वीर को शेयर किया है.

आर्या की पोस्ट से पता चलता है कि सारा खान अपनी बहन के साथ श्रीलंका में छुट्टियां बिता रही हैं. सारा बिग बौस सीजन 4 से लाइमलाइट में आ गई थीं. शो के दौरान सारा ने टीवी एक्टर अली मर्चेंट के साथ निकाह किया था. अफवाह है कि दोनों की शादी एक पब्लिसिटी स्टंट थी. हालांकि सारा का कहना है कि वह बिग बौस के पहले भी डेली शोप में काम कर रही थीं और पौपुलर थीं. पौपुलर होने के कारण ही उन्हें बिग बौस में एंट्री मिली थी. अली से शादी मैंने इसलिए की क्योंकि मैं उससे प्यार करती थी न कि पैसों के लिए या फिर चीप पब्लिसिटी के लिए जैसा कई लोग कहते हैं.”

अधिक उम्र में शादी कहां तक सही

शादी की सही उम्र क्या हो? यह ऐसा मुद्दा है जिस में देश के साथ ही दुनिया के तमाम मुल्कों में लड़के और लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र अलगअलग है. वैसे हमारे देश में लड़के की शादी की उम्र 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष रखी गई है. देश में आज भी ज्यादातर लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. देश में पहले बालविवाह का काफी चलन था, लेकिन लोगों में जागरूकता आने से अब बालविवाह में कमी आई है.

समाज में कुछ लोगों की शादी अधेड़ उम्र में होती है. इस का एक कारण यह भी है कि लड़का पढ़ाई के बाद अपने पैरों पर खड़ा हो जाए. आज के आधुनिक दौर में लड़कियां उच्चशिक्षा हासिल करने के लिए गांवों और छोटे शहरों से जा कर देश के बड़े संस्थानों में पढ़ाई कर अपना भविष्य बना रही हैं.

यही कारण है कि अब पढ़ेलिखे ज्यादातर लोग 25 साल की उम्र के बाद ही शादी के बंधन में बंध रहे हैं. इस का सब से अहम पहलू अपने भविष्य को ले कर सुरक्षा का है. शिक्षा ने समाज में जागरूकता का काम किया और नतीजा यह निकला कि लड़का और लड़की में फर्क किया जाना कम होने लगा. अब लड़कियां भी पढ़ कर नौकरी कर रही हैं. वे अच्छी तरह सैटल हो रही हैं और जीवनसाथी चुनने में जल्दबाजी नहीं कर रही हैं. इस वजह से भी शादी की उम्र में असर देखने को मिल रहा है.

लड़के और लड़की के बीच आमतौर पर 3 से 5 साल का अंतर हो तो उस जोड़ी को अच्छा माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि कम उम्र की लड़की बेहतर होती है, लेकिन अब जमाना बदल रहा है और उसी के साथ मान्यताएं व सोच भी. आज उम्र कोई बहुत बड़ा मसला नहीं रह गया है. आजकल तो कई पत्नियां अपने पति से उम्र में कई साल बड़ी भी हैं. बौलीवुड के स्टार शाहिद कपूर और मीरा राजपूत की शादी भी इसी तरह का एक उदाहरण है. उन के बीच 13 साल का अंतर है. जानेमाने अभिनेता सैफ अली खान ने अमृता सिंह और आमिर खान ने रीना से शादी की. दोनों जोडि़यों में उम्र का काफी फासला था. मशहूर मौडल व ऐक्टर मिलिंद सोमन ने भी 52 साल की उम्र में खुद से 25 साल छोटी गर्लफ्रैंड अंकिता कोंवर को विवाह के लिए चुना है.

इसी तरह, ज्यादा उम्र में शादी के जहां अनेक फायदे हैं तो वहीं कई नुकसान भी हैं. दुनिया के कई देशों में शादी की औसत आयु अलगअलग है. हमारे देश में शादी की औसत आयु 26 वर्ष है. सरकार ने बालविवाह रोकने के लिए कानून के साथ ही लोगों में शिक्षा का प्रसार कर के जागरूक करने का काम किया है. पहले मांबाप अपने बच्चों की कम उम्र में शादी कर के मुक्ति पा लेते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. समाज में लड़के के साथ लड़कियों को ले कर नजरिया बदला है और इस का सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है.

फायदे

बड़ी उम्र में शादी करना एक समझदारी भरा फैसला होता है. इस के कई फायदे हैं जिन का असर आप के वैवाहिक जीवन पर पड़ता है.

– उम्रदराज पुरुष के साथ शादी करने का सब से बड़ा फायदा यह होता है कि लड़की को अपने शौक पूरे करने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि ऐसे लोग जौब में होते हैं. उस के पति का कैरियर सैट होता है और उसे नौकरी के चक्कर में इधरउधर भागना नहीं होता. ऐसे में लड़की आराम की जिंदगी बिता सकती है. हर लड़की को ऐसी ही ससुराल की ख्वाहिश रहती है जहां उसे आर्थिक रूप से परेशानी का सामना न करना पड़े.

– ज्यादा उम्र में शादी करने का दूसरा फायदा यह होता है कि ऐेसे लोग कम उम्र के लोगों के मुकाबले ज्यादा समझदार होते हैं. किसी भी बात को गहराई से समझ कर फैसला करते हैं और सहनशील भी होते हैं. इस से यह फायदा होता है कि वैवाहिक जीवन सफल होेने के साथ ही खुशहाल भी होता है. पतिपत्नी में अकसर किसी न किसी बात पर तकरार हो जाती है, ऐसे में अगर सोचसमझ कर फैसला न लिया जाए तो जिंदगी दुश्वार हो जाती है.

– उम्रदराज होने का फायदा यह भी होता है कि अनुभवी होने के नाते आप के पार्टनर को सैक्सलाइफ में आने वाली परेशानियों का ज्ञान होता है, जिस से कई बातों का घर बैठे समाधान पाया जा सकता है.

– अधिक उम्र में शादी करने से दोनों के बीच अपनी पसंद को थोपने की मंशा नहीं रहती, बल्कि  एकदूसरे की पसंद को समझ कर रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिश होती है.

नुकसान

हर सिक्के के 2 पहलू होते हैं, एक पहलू वह होता है जिस में आप को फायदा नजर आता है और दूसरा पहलू यह है कि आप को किसी न किसी रूप में नुकसान उठाना पड़ सकता है. कुछ ऐसा ही अधिक उम्र में शादी को ले  कर है.

– अधिक उम्र में शादी करने का पहला नुकसान यह होता है कि आप अपने पार्टनर को समय कम दे पाते हैं, जिस वजह से एकदूसरे को समझने में जिंदगी गुजर जाती है. ऐसा होने से आप के वैवाहिक जीवन पर बुरा असर पड़ता है.

– अधिक उम्र की वजह से पति और पत्नी दोनों ही मैच्योर होते हैं, इसलिए विवाद होने पर समझने की कोशिश कम करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वही सही हैं. कोई भी अपनी बात से पीछे नहीं हटना चाहता और बात तूल पकड़ लेती है जिस का रिश्ते पर नकारात्मक असर होता है.

– हर पतिपत्नी की दिली ख्वाहिश होती है कि शादी के बाद जल्द से जल्द मांबाप बनने का सुख मिल जाए. अनेक शोधों से यह साबित हो चुका है कि ज्यादा उम्र में शादी करने से बच्चे होने की उम्मीद कम रहती है. 35 से 40 वर्ष की उम्र में गर्भधारण करना वास्तव में एक समस्या है क्योंकि इस उम्र में बांझपन की आशंका 15 से 32 फीसदी तक बढ़ जाती है और महिलाओं के गर्भवती होने के अवसर केवल 33 फीसदी तक रह जाते हैं, जबकि 35 से कम उम्र में यह अवसर 50 फीसदी होते हैं.

– ज्यादा उम्र में शादी करने से वैवाहिक जीवन पर सब से बुरा प्रभाव यह पड़ता है कि सैक्स की ख्वाहिश में कमी होने लगती है, जिस वजह से पतिपत्नी के बीच इन बातों को ले कर काफी तनातनी रहती है.

नजरअंदाज न करें कैंसर के इन लक्षणों को

शरीर के किसी भी भाग में कैंसर पनपता है तो उस के कुछ लक्षण दिखाई देते हैं. ये लक्षण इस पर निर्भर करते हैं कि कैंसर कहां है, किस आकार का है और इस के कारण उस अंग को कितना नुकसान पहुंचा है.

कैंसर के 15 लक्षण

कई अनुसंधानों में यह बात सामने आई है कि कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं भी कैंसर होने का संकेत हो सकती हैं. लेकिन याद रखें कि इन लक्षणों के दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि आप को कैंसर ही है. कई अन्य कारणों से भी ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं. किसी भी लक्षण, जो लंबे समय तक रहे और समय के साथ गंभीर हो जाए, को नजरअंदाज न करें. अधिकतर महिलाएं सोचती हैं कि ये लक्षण मामूली हैं, इसलिए वे उन्हें गंभीरता से नहीं लेतीं और डाक्टर के पास नहीं जातीं. इस से उन की बीमारी और गंभीर हो जाती है. जितनी जल्दी कैंसर का उपचार प्रारंभ कर दिया जाएगा, उतना उस के ठीक होने की संभावना बढ़ जाएगी.

आप को अपने शरीर में निम्न लक्षणों में से कोई लक्षण दिखाई दे तो उस की अनदेखी न करें, तुरंत किसी फिजिशियन से संपर्क करें.

उभार या गुमड़

शरीर में कहीं भी उभार या गुमड़ दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें. यह कैंसर की गठान हो सकती है. स्तन कैंसर का सब से शुरुआती लक्षण स्तनों में गठान के रूप में दिखाई देता है. इसे दबा कर देखें, अगर इस में तेज दर्द हो तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें.

खांसी और गले की खराश

खांसी और गले की खराश को मामूली समस्याएं माना जाता है, लेकिन अगर ये समस्याएं बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार बनी रहें तो इन्हें गंभीरता से लें. ये लैरिंक्स, फेफड़ों या थायराइड कैंसर के लक्षण हो सकते हैं. खांसी और गले की खराश 3 सप्ताह से अधिक रहे तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें.

मल त्यागने की आदतों में बदलाव

एक अध्ययन से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कैंसर से पीडि़त 18 प्रतिशत लोगों में मल त्यागने की आदतों में बदलाव आ जाता है. इन बदलावों में सम्मिलित है मल त्यागने के समय, मात्रा या रंगरूप में असामान्यता, जैसे कब्ज, लूज मोशन, अपच आदि. कई बार कुछ निश्चित खाद्य पदार्थों या दवाइयों का सेवन मल त्यागने की आदतों में बदलाव ला देता है, लेकिन यह अस्थायी होता है. अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो नजरअंदाज न करें. यह कोलन कैंसर का संकेत हो सकता है.

मूत्रमार्ग से संबंधित समस्याएं चूंकि यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फैक्शन यानी यूटीआई महिलाओं में बहुत आम है, इसलिए महिलाएं मूत्रमार्ग से संबंधित समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती हैं. लेकिन अगर आप को यूरिन में रक्त दिखाई दे, यूरिन पास करने पर नियंत्रण न रहे या यूरिन पास करते समय दर्द हो तो इन लक्षणों को गंभीरता से लें. डाक्टर से संपर्क करें क्योंकि ये ब्लैडर या किडनी कैंसर के कारण हो सकते हैं.

शरीर में तेज दर्द शरीर में लगातार तेज दर्द बना रहना बोन कैंसर या ओवेरियन कैंसर के कारण हो सकता है. अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, अगर दर्द शरीर के किसी एक भाग तक सीमित न रह कर शरीर के अलगअलग हिस्सों में फैले तो इस का कारण कैंसर हो सकता है.

ऐसा सिरदर्द जो उपचार कराने के बाद भी ठीक न हो, ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है. कमरदर्द आंत, मलाशय या अंडाशय के कैंसर का लक्षण हो सकता है. दर्द इस बात का संकेत भी है कि कैंसर जहां शुरू हुआ है वहां से शरीर के दूसरे भागों में फैलने लगा है.

वजन तेजी से कम होना

बिना किसी कारण के आप का वजन तेजी से कम होने लगे तो सतर्क हो जाएं. यह अग्नाशय, पेट, फेफड़े या आहारनाल के कैंसर का संकेत हो सकता है. अगर एक महीने में आप का 4-5 किलो वजन कम जो जाए तो यह कैंसर का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है.

निगलने में समस्या होना

गले के आंतरिक संकुचन से निगलने में रुकावट आ सकती है. यह समस्या तंत्रिका या रोग प्रतिरोधक तंत्र की गड़बड़ी के कारण हो सकती है या इस का कारण आहारनाल, गले या पेट का कैंसर भी हो सकता है.

ब्लीडिंग या डिस्चार्ज

अगर खांसने पर खून आए तो फेफड़ों के कैंसर, मल के साथ खून आए तो बड़ी आंत या मलाशय का कैंसर, यूरिन के साथ रक्त आए तो यह मूत्राशय या किडनी के कैंसर का संकेत हो सकता है. वेजाइना से आसामान्य ब्लीडिंग सर्विकल या एंडोमैट्रियल कैंसर (गर्भाशय की आंतरिक परत का कैंसर) के कारण हो सकता है. निपलों से ब्लडी डिस्चार्ज स्तन कैंसर का एक प्रमुख लक्षण है. असामान्य रक्त स्राव कैंसर के किसी भी चरण में हो सकता है. इसलिए शरीर के किसी भी भाग से असामान्य ब्लीडिंग हो तो उसे गंभीरता से लें और डाक्टर को दिखाने में देरी न करें.

त्वचा में बदलाव

त्वचा में कैंसर के साथ ही दूसरे प्रकार के कैंसरों में भी त्वचा में परिवर्तन आ सकता है. त्वचा के रंग में बदलाव, खुजली या अत्यधिक बाल उग आना, त्वचा पर तिल और मस्से हो जाना कैंसर के संकेत हो सकते हैं.

बुखार

बुखार कैंसर का एक बहुत सामान्य लक्षण है, लेकिन यह लक्षण तब दिखाई देता है जब कैंसर जहां प्रारंभ हुआ है, वहां से शरीर के बाकी भागों में भी फैलने लगता है. लगभग सभी लोगों, जो कैंसर से पीडि़त होते हैं, को इस के किसी चरण में बुखार का सामना करना पड़ता है, विशेषरूप से तब जब कैंसर इम्यून तंत्र को प्रभावित करता है. ऐसी स्थिति में शरीर के लिए संक्रमण से लड़ना कठिन हो जाता है. वैसे, बुखार आना ब्लड कैंसर का प्रारंभिक संकेत हो सकता है.

थकान

अत्यधिक थकान, जो आराम करने के बाद भी दूर न हो, कैंसर के विकसित होने का प्रमुख संकेत है. लेकिन कई कैंसरों, जैसे ब्लड कैंसर की शुरुआत में ही थकान हो सकती है. आंतों या पेट के कैंसर के कारण होने वाले ब्लड लौस के कारण भी थकान हो सकती है. स्तनों में असामान्य बदलाव

स्तनों में गठानें हो जाना, स्तनों का आकार, रूप बदल जाना, निपलों का अंदर की ओर मुड़ जाना, स्तनों की त्वचा का टैक्सचर बदल जाना, स्तनों में दर्द होना, निपलों से ब्लडी डिस्चार्ज निकलना स्तन कैंसर के प्रमुख लक्षण हैं. यह भी ध्यान रखें कि स्तन कैंसर में गठान के बजाय स्तनों की त्वचा जगहजगह से लाल या मोटी भी हो सकती है.

सांस फूलना

सांस लेने में परेशानी होना या सांस फूलना जैसे संकेतों को गंभीरता से लें क्योंकि इन का कारण फेफड़ों का कैंसर हो सकता है.

पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग

ब्लीडिंग, जो मासिकचक्र का भाग नहीं है, मेनोपौज के बाद होने वाली ब्लीडिंग कभी भी सामान्य नहीं है. वेजाइना से असामान्य ब्लीडिंग सर्विकल या एंडोमैट्रियल कैंसर यानी गर्भाशय की आंतरिक परत का कैंसर के कारण हो सकती है.

पेट फूलना

महिलाओं में हार्मोन परिवर्तनों और मासिकचक्र के दौरान शारीरिक बदलाव के कारण अकसर पेट फूलने की समस्या हो जाती है. लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहे तो इस का कारण स्तन, आंतों, अग्नाशय, अंडाशय या गर्भाशय का कैंसर हो सकता है.

(लेखक बीएल कपूर सुपरस्पैशियलिटी अस्पताल, नई दिल्ली में औंकोलौजिस्ट हैं.)

दूसरी औरत के जाल में फंसा इदरीस

मुरादाबाद से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित कस्बा कांठ के मोहल्ला पट्टीवाला के रहने वाले कारोबारी इदरीस 11 जनवरी, 2018 को गायब हो गए. दरअसल, इदरीस की कांठ में ही कपड़ों की सिलाई की फैक्ट्री है. उन की फैक्ट्री में सिले कपड़े कई शहरों के कारोबारियों को थोक में सप्लाई होते हैं.

11 जनवरी को वह प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कारोबारियों से पेमेंट लेने के लिए घर से निकले थे. जब भी वह पेमेंट के टूर पर जाते तो फोन द्वारा अपने परिवार वालों के संपर्क में रहते थे. घर से निकलने के 2 दिन बाद भी जब उन का कोई फोन नहीं आया तो उन की पत्नी कनीजा ने बड़े बेटे शहनाज से पति को फोन कराया तो इदरीस का फोन स्विच्ड औफ मिला. शहनाज ने अब्बू को कई बार फोन मिलाया, लेकिन हर बार फोन बंद ही मिला. इस पर कनीजा भी परेशान हो गई.

इदरीस की फैक्ट्री के रिकौर्ड में उन सारे कारोबारियों के नामपते व फोन नंबर दर्ज थे, जिन के यहां फैक्ट्री से तैयार माल जाता था. चूंकि इदरीस प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के लिए निकले थे, इसलिए शहनाज ने प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कारोबारियों को फोन कर के अपने अब्बू के बारे में पूछा.

कारोबारियों ने शहनाज को बता दिया कि इदरीस उन के पास आए तो थे लेकिन वह 11 जनवरी को ही पेमेंट ले कर चले गए थे. पता चला कि दोनों कारोबारियों ने इदरीस को 5 लाख रुपए दिए थे. यह जानकारी मिलने के बाद इदरीस के घर वाले परेशान हो गए. सभी को चिंता होने लगी.

इदरीस ने जानपहचान वाले सभी लोगों को फोन कर के अपने अब्बू के बारे में पूछा लेकिन उसे उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली. तभी कनीजा शहनाज के साथ प्रतापगढ़ पहुंच गईं. वहां के एसपी से मुलाकात कर उन्होंने पति के गायब होने की बात बताई.

एसपी ने इदरीस का फोन सर्विलांस पर लगवा दिया. इस से उस की अंतिम लोकेशन अमरोहा जिले के गांव रायपुर कलां की पाई गई. यह गांव अमरोहा देहात थाने के अंतर्गत आता है. प्रतापगढ़ पुलिस ने उन्हें अमरोहा देहात थाने में संपर्क करने की सलाह दी.

society

30 जनवरी, 2018 को शहजाद और कनीजा थाना अमरोहा देहात पहुंचे. उन्होंने इदरीस के गुम होने की जानकारी थानाप्रभारी धर्मेंद्र सिंह को दी. थानाप्रभारी ने शहनाज की तरफ से उस के पिता की गुमशुदगी दर्ज कर ली. शहनाज ने शक जताया कि उस के घर के सामने रहने वाली फरीदा और उस के पति आरिफ ने ही उस के पिता को कहीं गायब किया होगा.

रहस्य से उठा परदा

मामला एक कारोबारी के गायब होने का था, इसलिए थानाप्रभारी ने सूचना एसपी सुधीर यादव को दे दी. एसपी सुधीर यादव ने सीओ मोनिका यादव के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित की. टीम में थानाप्रभारी धर्मेंद्र सिंह, एसआई सुनील मलिक, डी.पी. सिंह, महिला एसआई संदीपा चौधरी, कांस्टेबल सुखविंदर, ब्रजपाल सिंह आदि को शामिल किया गया.

पुलिस ने सब से पहले इदरीस के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकाली तो पता चला कि इदरीस के घर के सामने रहने वाली फरीदा ने 13 जनवरी को इदरीस के मोबाइल पर 50 बार काल की थी. शहनाज ने भी फरीदा और उस के पति पर शक जताया था, इसलिए पुलिस को भी फरीदा पर शक हो गया.

पुलिस ने फरीदा और उस के पति आरिफ को पूछताछ के लिए उठा लिया. उन दोनों से पुलिस ने इदरीस के बारे में सख्ती से पूछताछ की. पुलिस की सख्ती के आगे फरीदा और उस के पति ने स्वीकार कर लिया कि उन्होंने शहजाद की हत्या कर उस की लाश बशीरा के आम के बाग में दफन कर दी है.

थानाप्रभारी धर्मेंद्र सिंह ने इदरीस का कत्ल हो जाने वाली बात एसपी को बता दी. यह जानकारी पा कर एसपी सुधीर कुमार थाना अमरोहा देहात पहुंच गए. उन की मौजूदगी में थानाप्रभारी ने अभियुक्तों को रायपुर कलां निवासी बशीरा के आम के बाग में ले जा कर खुदाई कराई तो इदरीस की लाश करीब 5 फीट नीचे दबी मिली.

पुलिस ने वह लाश अपने कब्जे में ले ली. जरूरी काररवाई कर के पुलिस ने इदरीस की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. फरीदा और आरिफ ने पूछताछ के दौरान इदरीस की हत्या की जो कहानी बताई, वह अवैध संबंधों पर आधारित निकली—

इदरीस की कांठ में ही कपड़ों की सिलाई करने की फैक्ट्री थी. उस की फैक्ट्री में फरीदा नाम की महिला भी सिलाई करती थी. वह इदरीस के घर के सामने ही रहती थी. उस का पति साइकिल मरम्मत करता था. अन्य कारीगरों के मुकाबले इदरीस फातिमा का बहुत खयाल रखता था.

इतना ही नहीं, वह अन्य कारीगरों से उसे ज्यादा पेमेंट करता था. इस मेहरबानी की वजह यह थी कि इदरीस फरीदा को चाहने लगा था. इदरीस की कोशिश रंग लाई और उस के फरीदा से प्रेम संबंध बन गए.

इदरीस और फरीदा दोनों ही बालबच्चेदार थे, जहां इदरीस के 5 बच्चे थे, वहीं फरीदा भी 2 बच्चों की मां थी. करीब डेढ़ साल से दोनों के नाजायज संबंध चले आ रहे थे. इसी दौरान फरीदा एक और बेटे की मां बन गई. इदरीस फरीदा के छोटे बेटे को अपना बेटा बताता था, इसलिए वह उस का कुछ खास ही खयाल रखता था. इदरीस फरीदा को बहुत चाहता था. वह चाहता था कि फरीदा जिंदगी भर के लिए उस के साथ रहे, इसलिए वह फरीदा पर निकाह करने का दबाव बना रहा था.

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समझाने पर भी नहीं माने फरीदा और इदरीस

उधर इदरीस और फरीदा के प्रेमसंबंधों की जानकारी पूरे मोहल्ले को थी. फरीदा के पति आरिफ ने भी फरीदा को बहुत समझाया कि उस की वजह से परिवार की मोहल्ले में बदनामी हो रही है. वह इदरीस से मिलना बंद कर दे. उधर इदरीस के पिता बाबू ने भी इदरीस को समझाया कि वह क्यों अपनी घरगृहस्थी और कारोबार को बरबाद करने पर तुला है. फरीदा को भूल कर वह अपने परिवार पर ध्यान दे.

लेकिन इदरीस फरीदा के प्रेमजाल में ऐसा फंसा था कि उसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं था. उस के सिर पर एक ही धुन सवार थी कि फरीदा अपने पति को तलाक दे कर उस के साथ निकाह कर ले. वह यही दबाव फरीदा पर लगातार बना रहा था, पर फरीदा ऐसा करने को मना कर रही थी. वह कह रही थी कि जैसा चला आ रहा है, वैसा ही चलता रहने दे.

घटना के करीब 15 दिन पहले जब रात में फरीदा के पास इदरीस का फोन आया तो फोन की घंटी बजने से आरिफ की नींद खुल गई. फरीदा लिहाफ के अंदर ही इदरीस से बातें करने लगी. किसीकिसी फोन के स्पीकर की आवाज इतनी तेज होती है कि पास का आदमी भी बातचीत सुन सकता है.

फरीदा के पास भी ऐसा ही फोन था. वह अपने प्रेमी इदरीस से जो भी बात कर रही थी, वह आरिफ भी सुन रहा था. इदरीस उस से कह रहा था कि वह अपने पति आरिफ को ठिकाने लगवा दे. इस काम में वह उस की पूरी मदद करेगा. उस के बाद हम दोनों निकाह कर लेंगे.

अपनी हत्या की बात सुन कर आरिफ के होश उड़ गए. उस ने उस समय पत्नी से कुछ भी कहना मुनासिब नहीं समझा. सुबह होते ही आरिफ ने इस बारे में पत्नी से बात की. वह झूठ बोलने लगी. इस बात पर दोनों के बीच नोकझोंक भी हुई.

इस के बाद आरिफ ने फरीदा को विश्वास में लिया और घरगृहस्थी का वास्ता दे कर कहा, ‘‘देखो फरीदा, इदरीस कितना गिरा हुआ आदमी है, वह मेरी हत्या कराने पर तुला है. अपने स्वार्थ में वह तुम्हारी भी हत्या करवा सकता है. तुम खुद सोच लो कि अब क्या चाहती हो. यहां रहोगी या उस के साथ?’’

फरीदा ने अपने बच्चों का वास्ता दे कर आरिफ से कहा, ‘‘मैं इसी घर में तुम्हारे और बच्चों के साथ रहूंगी. उस के साथ नहीं जाऊंगी.’’

बन गई कत्ल की भूमिका

आरिफ ने सोचा कि आज नहीं तो कल इदरीस उस के लिए नुकसानदायक साबित होगा, इसलिए उस ने तय कर लिया कि वह इदरीस को सबक सिखाएगा. इस काम में उस ने पत्नी फरीदा को भी मिला लिया. फरीदा ने पति को यह भी बता दिया कि इदरीस पार्टियों से पेमेंट लेने के लिए प्रतापगढ़ और सुलतानपुर गया हुआ है. इस पर आरिफ ने उस से कहा कि किसी बहाने से उसे बुला लो तो बाकी का काम वह कर देगा.

आरिफ के साले फरियाद को यह पता था कि इदरीस की वजह से उस की बहन के घर में तनाव रहता है, इसलिए आरिफ के कहने पर फरियाद भी इदरीस की हत्या के षडयंत्र में शामिल हो गया.

उधर प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कारोबारियों से करीब 5 लाख रुपए का कलेक्शन कर के इदरीस 13 जनवरी को कांठ लौट रहा था. सफर में उस ने अपना फोन साइलेंट मोड पर लगा लिया था. फरीदा ने इदरीस से बात करने के लिए फोन किया पर इदरीस को इस का पता नहीं चला. फरीदा उसे लगातार फोन कर रही थी.

कांठ पहुंचने पर इदरीस ने जैसे ही अपना फोन देखा तो प्रेमिका की 50 मिस्ड काल देख कर चौंक गया. उसे लगा कि पता नहीं क्या बात है जो उस ने इतनी बार फोन मिलाया. इदरीस ने फरीदा को फोन कर के कहा, ‘‘फरीदा, मेरा फोन साइलेंट मोड पर था, इसलिए तुम्हारी काल के बारे में पता नहीं लगा. बताओ, क्या बात है?’’

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‘‘मैं ने तय कर लिया है कि मैं आरिफ को तलाक दे कर तुम से निकाह करूंगी. इसी बारे में तुम से बात करना चाह रही थी.’’ फरीदा बोली, ‘‘मैं चाहती हूं कि तुम अभी कांठ बसअड्डे पर आ जाओ, वहीं पर हम बात कर लेंगे.’’

प्रेमिका के मुंह से अपने मन की बात सुन कर इदरीस खुश हो गया. उस ने कहा, ‘‘फरीदा, मैं कुछ देर में ही वहां पहुंच रहा हूं. तुम भी जल्द पहुंच जाना.’’

‘‘ठीक है, तुम आ जाओ, मैं वहीं मिलूंगी.’’ फरीदा बोली.

इदरीस थोड़ी देर में बसअड्डे पर पहुंच गया. फरीदा अपने पति के साथ वहां पहले से ही मौजूद थी. औपचारिक बातचीत के बाद फरीदा ने कहा, ‘‘रायपुर खास गांव में मेरे भाई के यहां खाने का इंतजाम है. वहां चलते हैं, वहीं बातचीत हो जाएगी.’’

इदरीस खानेपीने का शौकीन था. उस समय भी वह शराब पिए हुए था, इसलिए फरीदा के साथ रायपुर खास गांव जाने के लिए तैयार हो गया. जब वह वहां पहुंचा तो फरीदा के भाई फरियाद ने इदरीस का गर्मजोशी से स्वागत किया. उस ने चिकन बना रखा था.

कुछ देर बातचीत के बाद फरियाद ने उस से खाना खाने को कहा तो शराब के शौकीन इदरीस ने शराब पीने की इच्छा जताई. इस पर फरियाद ने कहा कि यह सब घर पर संभव नहीं है. पीनी है तो कांठ बसअड्डे पर ठेका है, वहीं पर पी लेंगे.

इदरीस को मिली मौत की दावत

इदरीस बसअड्डे पर जाने के लिए तैयार हो गया. इदरीस और आरिफ फरियाद की मोटरसाइकिल पर बैठ कर कांठ बसअड्डे पहुंच गए. इदरीस ने पैसे दे कर एक बोतल रम मंगा ली. फरियाद एक बोतल रम और पकौड़े ले आया तो आरिफ बोला, ‘‘चलो, बाग में बैठ कर पिएंगे. उस के बाद खाना खाएंगे. वहीं बात भी हो जाएगी.’’

शराब की बोतल और पकौड़े ले कर तीनों मोटरसाइकिल से आम के बाग में पहुंच गए. बाग में बैठ कर तीनों ने शराब पी. योजना के अनुसार आरिफ व फरियाद ने कम पी और इदरीस को कुछ ज्यादा ही पिला दी थी.

इदरीस जब ज्यादा नशे में हो गया तो आरिफ इदरीस से बोला, ‘‘देखो इदरीस भाई, तुम पैसे वाले हो. मैं छोटा सा एक साइकिल मैकेनिक हूं. मेरी तुम्हारी क्या बराबरी. तुम यह बताओ कि मेरा घर क्यों बरबाद कर रहे हो. तुम्हारी वजह से वैसे भी मोहल्ले में मेरी बहुत बदनामी हो गई है. अब तो पीछा छोड़ दो.’’

‘‘देखो आरिफ, तुम एक बात ध्यान से सुन लो. मैं फरीदा से बहुत प्यार करता हूं. अब फरीदा मेरी है. उसे मुझ से कोई भी अलग नहीं कर सकता. तुम्हें यह भी बताए देता हूं कि उस का जो 5 महीने का बच्चा है, वह मेरा ही है.’’

आरिफ भी नशे में था. यह सुनते ही उस का और फरियाद का खून खौल उठा. दोनों ने उस से कहा कि लगता है तू ऐसे नहीं मानेगा. इस के बाद दोनों ने इदरीस के गले में पड़े मफलर से उस का गला घोंट दिया, जिस से उस की मौत हो गई.

इदरीस की हत्या करने के बाद उन्होंने उस की लाश मोटरसाइकिल से बाग के बीचोबीच ले जा कर डाल दी. तलाशी लेने पर इदरीस की जेब से 5 लाख रुपए और एक मोबाइल फोन मिला. दोनों ही चीजें उन्होंने निकाल लीं.

उस के बाद फरियाद घर से फावड़ा ले आया. आरिफ और फरियाद ने करीब 5 फुट गहरा गड्ढा खोद कर इदरीस की लाश दफन कर दी. लाश ठिकाने लगा कर वे अपने घर लौट गए. इदरीस की जेब से मिले पैसे दोनों ने आपस में बांट लिए.

पुलिस ने फरीदा, उस के पति आरिफ के बाद फरियाद को भी गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर पुलिस ने 70 हजार रुपए, इदरीस का मोबाइल फोन और फावड़ा बरामद कर लिया.

पुलिस ने 11 फरवरी, 2018 को तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. कथा संकलन तक तीनों अभियुक्त जेल में बंद थे.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

एटीएम कार्ड की क्लोनिंग, विदेशी ठगों का मायाजाल

इसी 25 फरवरी की बात है, दोपहर का समय था. जयपुर के महेशनगर पुलिस थाने में ड्यूटी अफसर अपनी सीट पर बैठे थे, तभी करीब 22-24 साल का एक युवक थाने पहुंचा. वह सीधा ड्यूटी अफसर के पास पहुंचा और अपना परिचय दे कर बोला, ‘‘सर, मेरा नाम महेशराज मीणा है और मैं महेशनगर में रहता हूं.’’

‘‘बताइए, थाने कैसे आना हुआ?’’ ड्यूटी अफसर ने पूछा.

‘‘साहब, मेरे बैंक खाते से 15 हजार रुपए निकाल लिए गए, जबकि एटीएम कार्ड मेरे पास है.’’ महेशराज ने घबराए लहजे में कहा, ‘‘साहब, मेरे मोबाइल पर ट्रांजैक्शन का मैसेज आया, तब पता चला कि मेरे खाते से पैसे निकल गए हैं.’’

ड्यूटी अफसर ने महेशराज को कुरसी पर बैठने का इशारा करते हुए पूछा, ‘‘तुम्हारे पास मैसेज कब आया?’’

‘‘साहब, मैसेज तो आज ही आया है.’’ महेशराज ने कहा, ‘‘आश्चर्य की बात यह है कि आज मैं किसी एटीएम से पैसे निकालने भी नहीं गया, फिर भी मेरे एकाउंट से 15 हजार रुपए निकल गए.’’

ड्यूटी अफसर महेशराज से उस के खाते से पैसे निकलने के बारे में जानकारी ले रहे थे, इसी दौरान 2-3 और लोग थाने पहुंच गए. ड्यूटी अफसर ने उन लोगों के आने का कारण पूछा तो पता चला महेश की तरह उन के एकाउंट से भी पैसे निकल गए हैं.

थाने पहुंचे दिनेश कुमार ने बताया कि उस के खाते से 20 हजार रुपए निकाल लिए गए हैं. चंद्रलता नवल ने 40 हजार रुपए निकलने की बात बताई. अर्जुन अग्रवाल के खाते से भी 30 हजार रुपए निकाले गए थे.

ड्यूटी अफसर इन लोगों से बातचीत कर ही रहे थे कि 2 लोग और थाने पहुंच गए. इन में कमलेश कुमारी मीणा ने बताया कि उस के खाते से 10 हजार रुपए निकाले गए हैं जबकि प्रदीप ने 20 हजार रुपए निकलने की बात कही. इस तरह उस दिन 3-4 घंटे में ही 10-11 लोग इस तरह की शिकायत ले कर थाने पहुंचे कि उन के खाते से बिना एटीएम कार्ड के रकम निकाल ली गई. ड्यूटी अफसर ने इन लोगों से अलगअलग बात कर के तह में जाने की कोशिश की तो पता चला कि इन लोगों के खाते से रकम दिल्ली में निकाली गई थी.

यह बात भी सामने आई कि ये सभी ट्रांजैक्शन उस दिन दोपहर 1 से 2 बजे के बीच हुए थे. पीडि़त लोगों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने कुछ दिनों पहले महेशनगर फाटक और 80 फुटा रोड पर लगे 3 एटीएम से पैसे निकाले थे. इस के बाद एटीएम से कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया था.

ड्यूटी अफसर को मामला गंभीर लगा. उन्होंने थानाप्रभारी जयसिंह और अपने उच्चाधिकारियों को इस तरह के मामले होने की सूचना दी. इसी के साथ पुलिस ने सभी पीडि़तों से लिखित में रिपोर्ट ले ली. पुलिस ने इन लोगों को जल्द से जल्द अपने एटीएम कार्ड ब्लौक करवाने की भी हिदायत दी, ताकि उन के खाते से और रकम न निकाली जा सके.

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उस दिन शाम तक 10 ऐसे पीडि़तों ने महेशनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई. इन लोगों के खातों से करीब ढाई लाख रुपए निकाले गए थे. इस में 3 हजार रुपए से ले कर 40 हजार रुपए तक की रकम शामिल थी. इन पीडि़तों में 2 बैंक कर्मचारी भी शामिल थे. भारतीय स्टेट बैंक में सहायक चेतराम मीणा के खाते से दिल्ली में आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम से 30 हजार रुपए निकाल लिए गए थे. बैंक कर्मचारी अतेंद्र मीणा के खाते से भी 30 हजार रुपए निकाले गए थे.

जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच भी सक्रिय हो गई. महेशनगर थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच ने पीडि़तों से बातचीत की तो यह बात साफ हो गई कि इन वारदातों को एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर के अंजाम दिया गया था. क्योंकि सारे पीडि़त जयपुर के थे. वे दिल्ली गए भी नहीं थे और दिल्ली के एटीएम से उन के खातों से पैसे निकाल लिए गए थे.

पुलिस ने जांचपड़ताल शुरू भी नहीं की थी कि अगले दिन यानी 26 फरवरी को सुबह से ही महेशनगर थाने पर लोगों का जमावड़ा होने लगा. ये लोग भी अपने खाते से रकम निकाले जाने की शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे थे. उस दिन शाम तक 28 पीडि़त और सामने आ गए. इन में राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिक सुशील शर्मा के खाते से 3 बार में 10-10 हजार रुपए निकाले गए थे. चार्टर्ड एकाउंटेंट गजेंद्र शर्मा ने पुलिस को बताया कि उन्होंने 21 फरवरी को जयपुर के किशनपोल बाजार स्थित पीएनबी के एटीएम से 5 हजार रुपए निकाले थे. इस के 3 घंटे बाद ही उन के खाते से 10,500 रुपए निकालने का मैसेज आ गया.

सीए गजेंद्र शर्मा के भाई देवेंद्र शर्मा के खाते से 4 बार में 38 हजार रुपए निकाल लिए गए थे. इन के अलावा मीना कंवर के खाते से 16 हजार, देवेंद्र सिंह के खाते से 25 हजार, चंद्रप्रकाश शर्मा के खाते से 40 हजार, रामप्रताप शर्मा के खाते से 30 हजार, सरमया थौमस के खाते से 40 हजार, मयंक गौड़ के खाते से 18,500, चुन्नीलाल गुप्ता के खाते से 40 हजार रुपए निकाले गए.

इस के अलावा सुशीला तंवर के खाते से 40 हजार, सुशील कुमार राज के खाते से 30 हजार, सुशीला राठौड़ के खाते से 5 हजार, अजय कुमार के खाते से 2 हजार, योगेंद्र कुमार के खाते से 26500, दुर्गेश दवे के खाते से 5 हजार, लख्मीचंद के खाते से 40 हजार, राखी सिंह के खाते से 30 हजार, ललतेश सिंह के खाते से 70 हजार और रामअवतार बुनकर के खाते से 40 हजार रुपए सहित अन्य कई लोगों के खातों से भी पैसे निकाले गए थे.

2 दिन में 38 लोगों के बैंक खातों से रकम निकाले जाने से पुलिस भी हैरान थी. पुलिस ने जांच शुरू की तो सामने आया कि बदमाशों ने महेशनगर में 80 फुटा रोड पर एसबीआई, पीएनबी और इंडसइंड बैंक के एटीएम में स्किमर लगाए थे. ये स्किमर 24 फरवरी तक लगे हुए थे, क्योंकि उन्हीं एटीएम कार्ड धारकों के पैसे निकाले गए, जिन्होंने एक सप्ताह के भीतर इन एटीएम से ट्रांजैक्शन किया था. इन से डाटा चोरी कर 2 दिन में करीब 40 लोगों के खातों से 7 लाख रुपए से ज्यादा निकाल लिए गए थे. जांच में पता चला कि बदमाशों ने क्लोन कार्ड से दिल्ली में जनकपुरी व पालम इलाके में रकम निकाली थी.

पुलिस ने उन तीनों एटीएम के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज बैंक प्रबंधकों से मांगी. इस के अलावा सभी पीडि़तों से उन के एटीएम कार्ड के पासवर्ड बदलने को भी कहा. पीडि़तों के संबंधित बैंक खातों का स्टेटमेंट, उन्होंने 2 महीने में किसकिस एटीएम से पैसे निकाले थे, आदि की जानकारी एकत्र की. बदमाशों ने दिल्ली में जिसजिस एटीएम से रकम निकाली, उन की वीडियो फुटेज हासिल करने के लिए एक टीम दिल्ली भेजने का निर्णय लिया गया.

लगातार पीडि़तों के सामने आने से यह संख्या बढ़ती जा रही थी. करीब एक सप्ताह में ही जयपुर के महेशनगर, जवाहर सर्किल, बजाजनगर व ज्योतिनगर पुलिस थाने में इस तरह की वारदात के 88 मामले दर्ज हो गए. इन में पीडि़तों से 27 लाख 32 हजार रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी की गई थी.

जयपुर काफी समय से साइबर ठगों के निशाने पर रहा है. दिल्ली, नोएडा, झारखंड व छत्तीसगढ़ के ठग आए दिन बैंक अधिकारी या बीमा अधिकारी बन कर अथवा अन्य कोई प्रलोभन दे कर लोगों के बैंक खातों से ठगी करते रहे हैं.

नोटबंदी के बाद कैशलेस का प्रचलन बढ़ने से साइबर ठगों को अपना शिकार ढूंढने में आसानी हो गई है. जयपुर कमिश्नरेट में सन 2011 में साइबर क्राइम के केवल 88 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2012 में यह संख्या घट कर 74 रह गई. इस के बाद 2013 में साइबर क्राइम के 123, सन 2014 में 373, सन 2015 में 574, सन 2016 में 531 और 2017 में 643 मामले दर्ज हुए.

अब साइबर क्राइम का नया रूप सामने आ गया था. एटीएम कार्ड की क्लोनिंग के जरिए फरजी एटीएम कार्ड तैयार कर के इतनी बड़ी संख्या में लोगों से धोखाधड़ी के सामने आने पर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल चिंतित हो उठे. उन्होंने अपने मातहत अधिकारियों की बैठक बुलाई और बदमाशों का जल्द से जल्द पता लगाने को कहा.

कमिश्नर अग्रवाल ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (प्रथम) प्रफुल्ल कुमार के निर्देशन और पुलिस उपायुक्त (अपराध) डा. विकास पाठक के नेतृत्व में एक टीम गठित की. इस टीम में क्राइम ब्रांच के इंसपेक्टर मुकेश चौधरी, महेश नगर थानाप्रभारी जय सिंह, महेश नगर थाने के सबइंसपेक्टर सुनील, क्राइम ब्रांच के सबइंसपेक्टर धर्म सिंह और मनोज कुमार के साथ कई कांस्टेबलों को शामिल किया गया.

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पुलिस टीम ने संबंधित बैंकों से रिकौर्ड हासिल किया. एटीएम बूथों की सीसीटीवी फुटेज जांची. आवश्यक तकनीकी जांचपड़ताल के बाद एक टीम दिल्ली भेजी गई. इस के अलावा पुलिस ने देश भर में ऐसे गिरोहों की जानकारी जुटाई, जो एटीएम कार्ड की क्लोनिंग के अपराध से जुड़े रहे हैं.

इस में पता चला कि एक गिरोह के बदमाशों ने पिछले साल देहरादून में एटीएम कार्ड के क्लोन बना कर जयपुर से रुपए निकाले थे. इस मामले में देहरादून एसटीएफ ने गिरोह के मास्टरमाइंड रामवीर को सितंबर 2017 में पुणे से गिरफ्तार किया था. रामवीर हरियाणा के बहादुरगढ़ का रहने वाला था. इस गिरोह में महिलाएं भी थीं.

उधर जयपुर से दिल्ली गई पुलिस टीम ने उन एटीएम की वीडियो फुटेज हासिल की, जिन से जयपुर के लोगों के एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर के रकम निकाली गई थी. इन फुटेज के आधार पर पुलिस ने 7 मार्च को दिल्ली से 3 विदेशी साइबर ठगों को पकड़ लिया.

इन में रोमानिया के काटनेस्कू, डुयिका बोगडन निकोलेई और सियोबानू शामिल थे. ये तीनों पर्यटक वीजा पर दिल्ली आए थे और वापस रोमानिया जाने की तैयारी में थे.

दरअसल, पुलिस को जयपुर में एटीएम की वीडियो फुटेज में हेलमेट पहने लोग स्किमर लगाते नजर आए थे. इन फुटेज में उन के चेहरे नहीं दिख रहे थे. हां, शरीर का अंदाजा हो रहा था. दिल्ली में पुलिस ने जो वीडियो फुटेज हासिल किए, उन में इन के चेहरे साफ दिखाई दिए. चेहरों से पता चला कि ये बदमाश विदेशी हैं. इस पर पुलिस ने वीजा खंगाले तो फोटो और वीडियो फुटेज से इन का मिलान हो गया. इस के बाद पुलिस ने इन लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने इन तीनों विदेशी साइबर ठगों से करीब 53 लाख 50 हजार रुपए नकदी के अलावा क्लोनशुदा विभिन्न बैंकों के 5 एटीएम कार्ड, एक मल्टीपरपज कार्ड रीडर, एक हौटस्पौट, एक स्पाई कैमरा, एक माइक्रो चिप, एक लैपटौप, 4 काले रंग के मास्क, एक कैप, 2 पासपोर्ट व आईडी, 4 मोबाइल फोन आदि बरामद किए.

इन विदेशी ठगों से पूछताछ में पुलिस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, क्योंकि ये केवल टूटीफूटी अंगरेजी बोलते थे. सख्ती करने पर ‘आई डोंट नो आई डोंट नो’ कह कर चुप हो जाते थे.

  पुलिस की पूछताछ में जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार है—

रोमानिया के रहने वाले काटनेस्कू, डुयिका बोगडन निकोलेई और सियोबानू अलगअलग समय पर दिल्ली आए थे. सब से पहले डुयिका बोगडन निकोलेई सितंबर में दिल्ली आया. इस के बाद काटनेस्कू दिसंबर में और बाद में सियोबानू दिल्ली पहुंचा. इन्होंने दिल्ली में ग्रेटर कैलाश में 7 हजार रुपए महीने के किराए पर एक फ्लैट लिया. दिल्ली में इन के साथ एक महिला मित्र भी थी. दिल्ली में इन्होंने तुर्की के बदमाशों से स्किमिंग डिवाइस खरीदी थी. दिल्ली से ये लोग कई दूसरे शहरों में भी वारदात करने के लिए गए. बीच में डुयिका बोगडन निकोलेई करीब एक महीने तक मुंबई और 3 सप्ताह तक आगरा में ठहरा. तीनों साथी दिल्ली में कुछ दिन रुके. फिर महिला मित्र को छोड़ कर ये जयपुर आ गए.

जयपुर में त्रिवेणीनगर में इन्होंने इंटरनेट पर बुकिंग करा कर 22 हजार रुपए महीने के किराए पर एक अपार्टमेंट में फ्लैट लिया. मकान मालिक ने सीआईडी के लिए सी फार्म पर इस की औनलाइन जानकारी दी थी. जयपुर में घूमने के लिए इन्होंने एमआई रोड से 300 रुपए प्रतिदिन किराए पर 2 एक्टिवा स्कूटी लीं.

जयपुर में घूम कर इन्होंने एटीएम बूथों को चिह्नित किया. चिह्नित किए गए एटीएम बूथों पर अलसुबह जा कर इन्होंने स्किमर और कैमरे लगा दिए. एटीएम मशीन पर जहां कार्ड स्वाइप किया जाता है, वहां इन्होंने एक चिप लगाई और जहां पर पिन नंबर लिया जाता है, उस जगह के ऊपर माइक्रो कैमरे फिट किए. इन बदमाशों ने एटीएम बूथ पर स्किमर व कैमरे लगाते समय अपने चेहरों पर हेलमेट लगा रखे थे. इस से इन के चेहरे वीडियो फुटेज में नजर नहीं आए.

जब कोई उपभोक्ता एटीएम बूथ में एटीएम कार्ड को स्वाइप करता तो चिप उसे पढ़ लेती थी और उस कार्ड की सारी जानकारी चिप में चली जाती थी. जब रुपए निकालने के लिए पिन नंबर डाला जाता था तो पासवर्ड वाली जगह के ऊपर लगे माइक्रो कैमरे से ठगों को उस एटीएम कार्ड का पिन नंबर पता चल जाता था. बाद में वे एटीएम कार्ड का क्लोन बना कर दूसरी जगह के किसी एटीएम से रकम निकाल लेते थे.

इन ठगों ने फरवरी के पहले सप्ताह में जयपुर में महेशनगर, जवाहर सर्किल, बजाज नगर और ज्योतिनगर में 8 एटीएम बूथों पर स्किमर और माइक्रो कैमरे लगाए थे. 20 फरवरी के आसपास ये लोग जयपुर में एटीएम बूथों पर लगाए स्किमर व माइक्रो कैमरे निकाल कर दिली चले गए.

दिल्ली में इन्होंने स्किमर व माइक्रो कैमरे से डाटा निकाल कर एटीएम कार्ड की क्लोनिंग की. इस के बाद विभिन्न स्थानों पर अलगअलग बैंकों के एटीएम से उन फरजी एटीएम कार्ड के जरिए लोगों के बैंक खातों से रकम निकाल ली.

इन साइबर ठगों ने पूछताछ में बताया कि वे 12 मार्च को रोमानिया जाने वाले थे. इस से पहले वे बैंक खातों से फरजीवाड़े से निकाली गई 50 लाख रुपए से ज्यादा की रकम को बिटकौइन में बदलनी थी, ताकि दिल्ली एयरपोर्ट पर इतनी बड़ी रकम के साथ न पकड़े जाएं. इन्होंने यूरोप समेत 6 देशों में कार्ड क्लोनिंग कर लोगों के बैंक खातों से रकम निकालने की बात बताई. भारत में इन्होंने जयपुर के अलावा आगरा व मुंबई में वारदात करने की बात भी कही है. पुलिस इन मामलों की पुष्टि करने में जुटी है.

गिरफ्तार सियोबानू के खिलाफ रोमानिया में हत्या समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. जयपुर पुलिस ने रोमानिया के दूतावास को ये सारी जानकारियां दे कर तीनों आरोपियों का आपराधिक ब्यौरा भी मंगाया गया है.

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गिरफ्तारी के बाद रिमांड अवधि के दौरान इन तीनों विदेशी साइबर ठगों से जयपुर के अशोक नगर में पूछताछ की जा रही थी. इस बीच एक दिन आरोपी डुयिका बोगडन निकोलेई ने पुलिस की मौजूदगी में थाने से भागने का प्रयास किया. हालांकि पुलिस ने उसे तुरंत दबोच लिया. इस संबंध में अशोक नगर थाने के रोजनामचे में रपट लिखी गई.

इन ठगों से बरामद 53 लाख रुपए में से करीब 28 लाख रुपए की ठगी के मामले जयपुर के विभिन्न थानों में दर्ज हैं. जयपुर पुलिस ने आगरा व मुंबई पुलिस से इस तरह की ठगी के मामलों की जानकारी मांगी थी, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला. अगर जल्दी ही किसी राज्य की पुलिस ने कोई दावा नहीं किया तो बाकी के 25 लाख रुपए की राशि अदालत से आदेश ले कर सरकारी खजाने में जमा कराई जाएगी.

हालांकि जयपुर पुलिस ने साइबर ठगों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली, लेकिन देश भर में ऐसे पचासों गिरोह सक्रिय हैं, जो रोजाना किसी न किसी तरीके से लोगों के बैंक खातों से पैसे निकाल रहे हैं. ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं को ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है.

भारत में एटीएम कार्ड क्लोनिंग के अभी बहुत कम मामले सामने आए हैं. चिंता की बात यह है कि ऐसे गिरोह से महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं. पिछले साल देहरादून में 97 लोगों के एटीएम क्लोनिंग के आरोप में पकड़े गए साइबर ठगों के गिरोह में हरियाणा के सोनीपत की अनिल कुमारी भी शामिल थी. इस गिरोह ने जयपुर में रकम निकाली थी. जयपुर पुलिस द्वारा पकड़े गए विदेशी साइबर ठगों के साथ भी उन की महिला मित्र थी. हालांकि अभी उस महिला की आपराधिक संलिप्तता सामने नहीं आई है. फिर भी पुलिस उस की तलाश कर रही है.

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक क्रैडिट व डेबिट कार्ड पर एक चुंबकीय पट्टी होती है, जिस में खाताधारक और उस के खाते की डिटेल की कोडिंग होती है. इस मैगनेट टेप से डाटा कौपी करने की प्रक्रिया को स्किमिंग कहते हैं.

इस के लिए इलैक्ट्रौनिक डिवाइस स्किमर लगा कर चुंबकीय पट्टी में दर्ज जानकारी कौपी हो जाती है. इस से एटीएम कार्ड का क्लोन तैयार किया जाता है.

रिजर्व बैंक ने पिछले साल जुलाई में औनलाइन बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी से संबंधित नियमों में बदलाव किया था. इस के मुताबिक कार्ड क्लोनिंग से संबंधित मामलों में बैंक नुकसान की भरपाई करने के लिए जिम्मेदार है.

कार्ड क्लोनिंग का पता चलने पर होम ब्रांच को सूचना दे कर 3 दिन में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराएं. बैंक में स्टैंडर्ड औपरेटिंग प्रोसीजर फौर्म भरें. इस फौर्म पर बैंक की कमेटी नुकसान की भरपाई का फैसला लेगी. औनलाइन फ्रौड से बचने के लिए बीमा भी करा सकते हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

बिजली का मारा प्रेमी बेचारा

नए जमाने के एक प्रेमी ने जब अपनी प्यारी और चुलबुली प्रेमिका के सामने शादी का प्रस्ताव रखा, तो उस की प्रेमिका ने अपनी शर्तों की लिस्ट उस के सामने पेश कर दी. ‘‘ठीक है. मैं तुम्हारा प्रस्ताव स्वीकार करती हूं. लेकिन, क्या तुम मेरी शर्तों के मुताबिक शादी के बाद मुझे खुश और सुखी रखोगे?’’

प्रेमी ने उस के नजदीक सरकते हुए कहा, ‘‘तुम जल्दीजल्दी अपनी शर्तें बताओ. मैं हर हाल में तुम्हें खुश और सुखी रखूंगा.’’

प्रेमिका ने एक मीठी मुसकान अपने गुलाबी होंठों पर लाते हुए कहा, ‘‘मैं नए जमाने की लड़की हूं. मुझे नएनए डिजाइन के बदलते फैशन के कपड़े पहनने का शौक है. क्या तुम मेरा यह शौक पूरा करोगे?’’

‘‘हां, बिलकुल. तुम अपनी दूसरी शर्त बताओ?’’ प्रेमी उतावला हुआ जा रहा था. ‘‘मुझे घूमनेफिरने का भी शौक है. क्या तुम मुझे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा कर घुमाने ले जाओगे? पैट्रोल पर पैसा खर्च करते वक्त अगर चीखोगेचिल्लाओगे, तो मैं तुम्हारे दिमाग की चकरी यानी पहिया घुमा दिया करूंगी,’’ प्रेमिका के गुलाबी होंठों पर फैली मीठी मुसकान में अब मजाक भी शामिल हो चुका था. ‘‘हांहां, मैं तुम्हें हफ्ते में 2-3 दिन दूर या नजदीक कहीं घुमानेफिराने ले जाया करूंगा. तुम अपनी तीसरी शर्त भी पेश करो?’’ वह बेकरार हुआ जा रहा था.

‘‘सुनो, आगे सुनो. शादी के बाद तुम मुझ से लड़ाईझगड़ा मत करना. गाली तो कभी मत देना. मैं तुम्हारे घर में जा कर कपड़े नहीं धोऊंगी. झाड़ूपोंछा नहीं लगाऊंगी. बरतन साफ नहीं करूंगी. बोलो, मेरी यह शर्त भी मंजूर है?’’ ‘‘डार्लिंग, तुम्हें कपड़े धोने, झाड़ूपोंछा लगाने, बरतन साफ करने का काम नहीं करना पड़ेगा. हमारे घर में ये सब काम एक बाई करती है…

‘‘हां, यह बताओ कि चाय या कौफी बना कर पिला दिया करोगी? खाना बना कर खिला दिया करोगी? कहीं बेलन का इस्तेमाल एक मिसाइल की तरह तो नहीं किया करोगी?’’ ‘‘मेरे महबूब, मैं उन मौडर्न लड़कियों में से नहीं हूं, जिन्हें चायकौफी बनाना नहीं आता. खाना पकाना नहीं आता. जिन का पकाया भोजन खा कर कोई भी बीमार हो जाए.

‘‘मैं ने अपनी मरजी से खाना वगैरह बनाने का काम अच्छी तरह सीखा हुआ है. बड़ेबड़े शैफ भी मेरी मम्मी का मुकाबला नहीं कर सकते.’’ ‘‘यों तो प्यारमुहब्बत में कोई शर्त नहीं होनी चाहिए. खैर… तुम्हारी कोई और शर्त हो, तो वह भी बताओ?’’ अपनी होने वाली सास की तारीफ सुन कर प्रेमी जैसे जलभुन गया था. उस की आवाज ही बदल गई थी. आवाज में खनक जैसे कहीं खो गई थी.

प्रेमिका सतर्क हुई, ‘‘क्या हुआ? अभी से रंग बदलने लगे? मेरी शर्तें सुनसुन कर बेचैन क्यों हो रहे हो? ऐ मेरे जानू, आजकल घर बसाना खालाजी का घर नहीं है कि कोई भी मुंह उठाए इस में घुसा चला आए.’’ प्रेमिका ने चुटकी लेते हुए आगे कहा, ‘‘मेरी अगली शर्त यह है कि मुझे मेकअप करने का बढि़या व महंगा सामान ले कर दिया करोगे या मुझे खुद खरीदने दिया करोगे. मुझे सजनेसंवरने का भी बहुत ज्यादा शौक है. मंजूर है?’’

‘‘तुम अपना यह शौक भी बेफिक्र हो कर हमारे घर में पूरा कर सकती हो. तुम कहोगी, तो मैं आसमान के तारे तोड़ कर तुम्हारी मांग में सजा दिया करूंगा, मेरी जानेमन. मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं.’’ ‘‘देखो, फिल्मी डायलौग बोल कर मुझे लुभाने की कोशिश मत करो. यों भी मुझे मक्खनबाजी पसंद नहीं है. इस से दिमाग मोटा हो जाता है. यह तो शादी के बाद ही पता चलेगा कि तुम्हारा मेरे प्रति प्यार और लगाव कितने साल तक पूरे रंग में कायम रहता है.

‘‘कई मर्दों का प्यार घटिया और सस्ते मेकअप के सामान की तरह जल्दी फीका पड़ जाता है, बल्कि ऐक्सपायरी दवा की ऐलर्जी की तरह तड़पाने लगता है, सताने लगता है.’’ ‘‘ऐ मेरी महबूबा, कैसी बातें करती हो? मैं दूसरे मर्दों जैसा नहीं हूं. मुझ पर भरोसा रख कर अपनी अगली शर्त भी लगे हाथ पेश करो?’’

‘‘मुझे लैपटौप और स्मार्ट फोन पर अपनी फ्रैंड्स के साथ चैटिंग करने से न तो तुम रोकोगे और न ही तुम्हारे परिवार का कोई और सदस्य ऐसा करेगा. बोलो, मंजूर है?’’ ‘‘हां, मंजूर है. आगे बोलो?’’ प्रेमी ने पूरा मुंह खोल कर उबासी लेते हुए कहा. अपनी प्रेमिका की शर्तें सुनसुन कर उस के कानों में ‘सांयसांय’ की आवाज गूंजने लगी थी.

‘‘मैं ने अपने घर में रूखासूखा भोजन कभी नहीं खाया. दालें व सब्जियां महंगी होने के बावजूद तुम रोज बदलबदल कर चीजें लाया करोगे. और हां, साथ में अदरक, धनिया, टमाटर व सलाद का सामान भी. बिना सलाद के भोजन का क्या स्वाद?’’ ‘‘हमारा पूरा परिवार बेशक भूखे पेट रहे, लेकिन तुम्हें खानेपीने को मिलेगा.’’

‘‘शाबाश, मेरे प्रेमी. तुम सचमुच मुझे बहुत ज्यादा प्यार करते हो,’’ खुशी में प्रेमिका ने उसे चूम लिया. प्रेमी के मन में तरंगें पैदा हो गईं. पूरे तन में जैसे बिजली का हलका सा करंट दौड़ गया. प्रेमी के प्यार के लोहे को गरम देख कर प्रेमिका ने घर में एयरकंडीशनर फिट कराने की शर्त भी रख दी.

यह शर्त सुन कर प्रेमी के लहू में आया उबाल ठंडा पड़ गया. वह उस के पास से झट उठ खड़ा हुआ और बोला, ‘‘तुम्हारी बाकी सभी शर्तें मुझे स्वीकार हैं, लेकिन एयरकंडीशनर फिट कराने वाली शर्त मंजूर नहीं, क्योंकि बिजली इतनी ज्यादा महंगी हो चुकी है कि लोग पंखेकूलर चलाने में भी डरने लगे हैं. ‘‘बिजली के भारीभरकम बिल अदा करने में नाकाम रहने पर मेरे पापा घर छोड़ कर कहीं चले गए हैं. लाख ढूंढ़ने पर भी वे आज तक हमें नहीं मिले. मेरी मम्मी का रोरो कर बुरा हाल हो गया. क्या तुम चाहती हो कि शादी के बाद मैं भी घर छोड़ कर चला जाऊं और फिर कभी वापस न आऊं?’’

अब प्रेमिका का उतरा चेहरा देखने लायक था.

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