सोशल मीडिया पर छाया नताशा का टौपलेस अवतार

बौलीवुड में आए दिन कोई ना कोई अभिनेत्री अपने हौट अवतार को लेकर सुर्खियां बटोरती नजर आती हैं. खास तौर पर फिल्म इंडस्ट्री में शोहरत व नाम कमाने के लिए वो इस तरह का बोल्ड अवतार अपनाती हैं. वे अक्सर ही अपने बोल्ड अवतार से सोशल मीडिया पर छाए रहना पसंद करती हैं. इन हौट और बोल्ड एक्ट्रेस की लिस्ट में अब एक और नाम शामिल हो गया है. यह अभिनेत्री कोई और नहीं बल्कि ‘बा बा ब्लैक शिप’ फेम अभिनेत्री नताशा सूरी है.

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इन दिनों नताशा सूरी अपने हौट फोटोशूट के चलते सुर्खियां बटोर रही हैं. मिस इंडिया रह चुकीं नताशा सूरी का हौट फोटोशूट आजकल इंटरनेट पर हर तरफ छाया हुआ है. बता दें कि नताशा ने हाल ही में एक बेहद ही बोल्ड फोटोशूट कराया है. अपने इस फोटोशूट की तस्वीरें नताशा ने खुद अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की है. इस फोटोशूट में डार्क ब्यूटी नताशा सूरी टौपलेस नजर आ रही हैं. वे इस लुक में बेहद ही सेक्सी नजर लग रही हैं. नताशा का ये सेक्सी और हौट अवतार को फोटोग्राफर कौस्तुब कांबले ने अपने कैमरे में कैद किया है.

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बता दें कि हाल ही में नताशा सूरी बंजी जंपिंग के दौरान घायल हो गई थीं. हादसे के बाद से उन्हें अगले 24 घंटे तक अस्पताल में अंडर औब्जर्वेशन रखा गया. नताशा सूरी के साथ यह हादसा इंडोनेशिया में हुआ था. दरअसल, नताशा इंडोनेशिया में थीं. इसी बीच उन्होंने बंजी जंपिंग करने की सोची और अचानक उनकी रस्सी टूट गई और उनका बैलेंस बिगड़ गया. नीचे झील होने की वजह से वह पानी में जा गिरी और उन्हें ज्यादा गंभीर चोट नहीं आईं.

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बता दें कि फिल्मों में आने से पहले नताशा वेब सीरीज ‘इनसाइड एज’ में भी नजर आ चुकीं है. इसमें वेब सीरिज में भी उनके बोल्ड और हौट अदाओं की काफी चर्चा थी. नताशा ने साल 2006 में मिस इंडिया वर्ल्ड का ताज अपने नाम किया था. नताशा ने मलयालम फिल्म ‘किंग लियर’ से सिनेमा में बतौर अभिनेत्री शुरुआत की. इस फिल्म में उनके साथ अमिताभ बच्चन भी थे. नताशा सूरी अब तक करीब 600 से भी ज्यादा फैशन शो का हिस्सा बन चुकी हैं.

शादी से पहले ही मां बनी ये अभिनेत्रियां

वैसे तो बौलीवुड हर रोज किसी न किसी वजह से सारी दुनिया में चर्चा का विषय बना रहता है. सभी प्रशंसक अपने प्रिय कलाकार के निजी जीवन के बारे में कुछ न कुछ जानने के इच्क्षुक होते हैं.

आज हम आपके लिए लेकर आए हैं बौलीवुड की कुछ बेहद खूबसूरत अभिनेत्रियों के बारें में उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें.

श्रीदेवी

बौलीवुड एक्ट्रेस श्रीदेवी ने तो सार्वजनिक तौर पर स्वीकारा था की वो शादी से पहले प्रेंग्नेंट थीं. श्रीदेवी ने जब बोनी कपूर से शादी की थी वो प्रेग्नेंट थीं. श्रीदेवी और बोनी ने 1996 में शादी की और कुछ महीने बाद ही श्री ने बड़ी बेटी जाह्नवी को जन्म दिया. आज जाह्नवी स्टार पुत्रियों में सबसे ज्यादा पौपुलर हैं.

महिमा चौधरी

दूसरा नाम है महिमा चौधरी का. महिमा ने साल 2006 में एक निजी शादी समारोह में बौबी मुखर्जी के साथ शादी की. कुछ रिपोर्टर्स का कहना है कि वे उस वक्त प्रेग्नेंट थी. शादी के कुछ ही महीने बाद महिमा चौधरी ने बेटी को जन्म दिया और इस खबर ने सभी को सकते में डाल दिया था.

कोंकणा सेन शर्मा

हाल ही में, अपने डिवोर्स के लिए खबरों में रहीं कोंकणा सेन शर्मा ने साल 2010 में अपने घर पर एक निजी समारोह में एक्टर रणवीर शौरी से शादी की थी. रणवीर और कोंकणा काफी लंबे वक्त से एक साथ थे. 2011 में कोंकणा ने बेटे को जन्म दिया. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कोंकणा ने प्रेग्नेंसी की वजह से ही जल्दबाजी में शादी की थी. हालांकि, कोंकणा ने इस बात को कभी स्वीकार नहीं किया है.

अमृता अरोड़ा

अमृता अरोड़ा ने 2009 में बिजनसमैन शकील से शादी की थी. ख़बरों की मानें तो अमृता के बारे में भी यही कहा जाता है कि वो शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हो गई थीं. शादी के बाद उन्होंने यह घोषणा करने में तनिक भी देरी नहीं की कि वो मां बनने वाली हैं.

नीना गुप्ता

बौलीवुड और टीवी की फेमस नीना गुप्ता एक जाना पहचाना नाम है. नीना गुप्ता को उनके उस कठोर फैसले के लिए भी जाना जाता है, जब उन्होंने मशहूर क्रिकेटर विवियन रिचर्ड्स के साथ रिलेशनशिप के चलते हिम्मत दिखाकर शादी से पहले मां बनने का फैसला किया था. उन्होंने शादी से पहले 1989 में बेटी मसाबा को जन्म दिया.

सारिका

दक्षिण के सुपरस्टार कमल हासन के साथ एक्ट्रेस सारिका का अफेयर था. कमल हासन की पहले शादी हो चुकी थी. अपनी पहली पत्नी से तलाक लेने के बाद कमल हासन सारिका के साथ रहने लगे और इसी दौरान खबर आई कि सारिका प्रेग्नेंट हैं. 1986 में सारिका ने बेटी श्रुति हासन को जन्म दिया और फिर 1988 में शादी कर ली.

सेलिना जेटली

मिस इंडिया रहीं सेलिना जेटली शादी से पहले ही अपने पति पीटर हाग को डेट कर रही थी. रिपोर्ट्स की माने तो जेटली शादी से पहले ही प्रेग्नेंट थी. 2012 में उन्होने जुड़वां लड़कों को जन्म दिया. पीटर दुबई के एक होटल से जुड़े हैं. बहरहाल, मां बनना कहते हैं कुदरत का सबसे हसीं तोहफा है और इस तोहफे की कद्र दुनिया करती है!

फिल्‍म ‘शेर सिंह’ में दिखेगा सबसे बड़ा आइटम सौन्ग

सुपर स्टार पवन सिंह और आम्रपाली दुबे की भोजपुरी फिलम ‘शेर सिंह’ में भोजपुरी स्‍क्रीन की खूबसूरत आइटम गर्ल ग्‍लोरी मोहन्‍ता और अभिनेता अशोक समर्थ धमाल करते नजर आयेंगे। निर्देशक शशांक राय ने ग्‍लोरी और अशोक पर एक कमाल का गाना फिल्‍माया है. यह गाना इस साल की सबसे बड़ा आइटम नंबर होगा. इसमे ग्‍लोरी ने सेट पर ऐसे ऐसे सीन शूट किये हैं, जिससे सेट पर मौजूद लोग भी देखकर दंग रह गये.  डांस मास्‍टर रिकी गुप्‍ता ने दोनों को अपने इशारों को नचाया है.

item song of movie sher singh

अशोक समर्थ भी अपनी भूमिका में बेहद शानदार लग रहे थे. उन्‍होंने भी म्‍यूजिक बीट पर ग्‍लोरी के साथ जमकर ठुमके लगाये. इस गाने में दोनों की केमेस्‍ट्री बेहद हसीन और सिजलिंग लग रही थी. बाद में ग्‍लोरी ने कहा कि वे अपने काम को फौर ग्रांटेड नहीं लेती हैं और पूरे कमंटिमेंट के साथ इसे पूरा भी करती हैं. फिल्‍म ‘शेर सिंह’ बेहद शानदार फिल्‍म है. इसमें कई चीजें पहली बार भोजपुरी सिनेमा स्‍क्रीन पर देखने को मिलेगी. इस फिल्‍म का पार्ट बनकर मुझे बेहद खुशी हुई.

item song of movie sher singh

फ़िल्म में बिग बौस फेम संभावना सेठ ने भी अपने लटके झटके और ठुमके फिल्‍म के एक गाने में सुपर स्‍टार पवन सिंह के साथ लगा चुकी हैं. निर्माता निर्देशक शशांक राय का मानना है कि फिल्म ‘शेर सिंह’ का फर्स्ट लुक फिल्म को जस्टिफाय करता है. संभावना और ग्‍लोरी ने फिल्‍म के यादगार परफौर्मेंस दिया है. फिल्म ‘शेर सिंह’ की कहानी लीक से हटकर है,इसलिए इसमें दर्शकों को खूब मजा आने वाला है.

फिल्म के पीआरओ संजय भूषण पटियाला हैं. फिल्‍म में पवन सिंह, आम्रपाली दुबे के अलावा अशोक समर्थ, संभावना सेठ, ग्‍लोरी मोहन्‍ता, जसवंत कुमार, अजय सूर्यवंशी, राजवीर यादव, मनीष सिंह, विजय ठाकुर, आयुषी तिवारी, स्‍वीटी सिंह, संजय वर्मा, विकास तिवारी और सचिन गिरी मुख्‍य भूमिका में नजर आयेंगे.  संगीतकार छोटे बाबा हैं, जबकि गीतकार सुमित सिंह चन्द्रवंशी, विनय निर्मल, मनोज मतलबी हैं. इस सुरीले गानों में आवाज इंदु सोनाली, व्यास जी, खुशबू जैन, अलका झा और प्रियंका सिंह की है. को प्रोड्यूसर मनीष सिंह और गायत्री केशवानी हैं. फिल्म की पटकथा वीरू ठाकुर ने लिखी है. डीओपी सुधांशु शेखर, इपी राज वीर, एचओईपी सचिन गिरी हैं. क्रिएटिव डायरेक्टर ठाकुर विजय और कविता सुनीता क्रिएशन का है.

अब वक्त है सोच बदलने का

इस देश में औरतों की क्या स्थिति है, यह एक छोटी सी घटना से जाहिर है. दिल्ली जैसे शहर की एक कालोनी में यह घटना हुई, जो आदमियों और परिवारों की मानसिकता को बताती है.

एक घर में पतिपत्नी का विवाद था तो पत्नी रूठ कर मायके चली गई. पीछे से पति ने आत्महत्या कर ली.

पति के घर वालों को लगा था कि कम से कम अब तो पति का दुख जताने के लिए झूठे ही सही, पत्नी ससुराल रोनेधोने के लिए तो आएगी पर वह नहीं आई.

पति की मौत के 2 माह बाद पति के संबंधी पत्नीके घर गए और उन में से एक ने पत्नी की छुरे से हत्या कर डाली. सालभर पहले हुई शादी का अंत दोनों की मौतों से हो गया.

पतिपत्नी में झगड़ा हो तो मामला पतिपत्नी का है. अगर शादी साल भर पुरानी हो और कोई बच्चा न हो तो औरत को जबरन पति से नहीं बांधा जा सकता. न ही उस के मरने के बाद उसे छातियां पीटपीट कर रोने का नाटक करने पर मजबूर करा जा सकता है. पर आज भी परिवारों की सोच यही है कि पत्नी का जीवन तो पति के सहारे ही चलता है.

पत्नी ने मृत पति के लिए स्यापा नहीं किया तो पति व घर वालों को अपमान लगा और इस अपमान की जड़ में यही मान्यता है कि शादी के बाद तो पत्नी पति की गुलाम हो जाए. पति मर जाए तो पत्नी रोएधोए, विधवाओं की तरह रहे. दुनियाभर के रीतिरिवाजों को पूरा करे. पति के घर वाले और पति खुद पत्नी को एक तरह से गुलाम मानने लगता है और यह किस्सा दिल्ली का है जहां की आबादी देशभर में सब से ज्यादा पढ़ीलिखी है. उसे सब से ज्यादा नई सोच मिलती है. वहां ऐसे लोग मौजूद हैं, जो हर डोर टूट जाने के बाद भी समझते हैं कि पत्नी को तो विधवा की तरह रहना ही होगा. शायद उन के मन में होगा कि पति की आत्मा को मुक्ति तभी मिलेगी.

हर औरत को अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीने का हक है. यदि वह पति के साथ भरेपूरे घर में अपनी सहमति से आती है तो उसे सब मान लेना होगा पर जब वह घर छोड़ कर ही जा चुकी हो और पति की मृत्यु हो चुकी हो तो उस पर ससुराल वालों की जिद हरगिज नहीं थोपी जा सकती.

आज भी यह सोच आखिर क्यों कायम है कि पत्नी की तो मृत देह ही पति के घर से निकलेगी?

सेहत : साफ पानी के लिए टंकियां लगाएं

प्रदीप ने हाल ही में नया घर बनवाया था. अच्छाखासा पैसा भी खर्च किया था. छत पर पानी को स्टोर करने के लिए उस ने सीमेंट, ईंट और कंक्रीट की बड़ी हौदी बनवाई थी.

कुछ दिनों तक तो वह हौदी ठीक रही, लेकिन शायद ठेकेदार ने उस में अच्छी क्वालिटी की सामग्री नहीं लगाई थी, इसलिए वह कई जगह से रिसने लगी.

इस से हौदी में सीलन इतनी ज्यादा बढ़ गई कि वह उस की छत से होते हुए नीचे कमरों की छत तक जा पहुंची. इस से सारी सफेदी भी खराब हो गई. प्रदीप को दोहरा नुकसान हो गया.

आज के जमाने में कच्चे घरों का रिवाज रह नहीं गया है. लोग पक्के घर बनवाते हैं तो उन में पानी स्टोर करने के लिए टंकी बनाना जरूरी हो जाता है.

चूंकि पानी की प्लास्टिक की टंकियां लगवाने का चलन पहले शहरों में ज्यादा था इसलिए ज्यादातर लोग जो गांवदेहात या कसबों में रहते थे वे प्रदीप की तरह ईंटों की हौदी बनवा कर ऐसी ही समस्याओं से जूझते दिखाई देते थे.

पर अब माहौल बदल गया है. सब जगह बड़े घर बनने लगे हैं जिन में प्लास्टिक की बड़ीबड़ी टंकियां रखी होती हैं. इतना ही नहीं, छोटेछोटे घरों में भी प्लास्टिक की छोटी टंकियां रखने की औप्शन रहती है.

पानी की प्लास्टिक की टंकियां मजबूत और टिकाऊ रहती हैं, इसलिए सालोंसाल चलती हैं. उन्हें बाजार से खरीद कर घर तक लाना और छत तक पहुंचाना भी ज्यादा मुश्किल काम नहीं होता है. चूंकि वे लिटर के हिसाब से बनाई जाती हैं तो घर कितना बड़ा है, उस में कितने लोग रहते हैं, उस को देखपरख कर ही टंकी खरीदी जा सकती है.

सीमेंट की हौदी तो छत पर एक ही बनती थी, लेकिन अब रसोई, बाथरूम व टौयलैट के हिसाब से अलगअलग जगह प्लास्टिक की टंकियां रखवाई जा सकती हैं.

चूंकि प्लास्टिक की टंकियों का इस्तेमाल करने से हम पानी को कई दिनों तक स्टोर कर के रख सकते हैं इसलिए समयसमय पर इन की सफाई करना भी जरूरी होता है. इस से हमें साफ पानी तो मिलता ही है साथ ही हम बीमारियों से भी बचे रहते हैं.

प्लास्टिक की टंकी की सफाई करते हुए इन बातों का रखें खास ध्यान:

* सब से पहले टंकी के वौल्व को बंद कर दें.

* अमूमन टंकी का ढक्कन इतना बड़ा होता है उस के रास्ते कोई आदमी भी आसानी से टंकी में उतर सकता है, इसलिए कपड़ा, मग और फिटकरी या क्लोरीन की गोलियां ले कर टंकी में उतर जाएं.

* टंकी में अगर पानी बचा है तो किसी बरतन की मदद से उसे बाहर निकाल दें.

* टंकी को धीरेधीरे किसी ब्रश से रगड़ें.

* इस के साथ टंकी की भीतरी सतह को कपड़े की मदद से अच्छी तरह से साफ करें.

* जब लगे कि टंकी पूरी तरह साफ हो चुकी है तो उस में फिटकरी या क्लोरिन की गोलियां डाल दें. ध्यान रखें कि सफाई करते हुए स्टौप वौल्व को कोई नुकसान न पहुंचे.

* टंकी के बाहर आ जाएं और ढक्कन को अच्छी तरह बंद कर दें.

* अब बंद किए गए वौल्व को खोल दें जिस से टंकी में पानी भर जाए.

* टंकी की भीतरी सफाई के साथसाथ उसे बाहर से भी चमकाना न भूलें.

धरी रह गई झूठी आन, बान और शान

उत्तर प्रदेश के जिला फिरोजाबाद के थाना सिरसागंज का एक गांव है नगला नाथू. 23 अप्रैल, 2018 की रात 11 बजे गांव का ही एक आदमी गांव में आयोजित एक कार्यक्रम से दावत खा कर अपने घर जा रहा था.

जब वह मुन्नीलाल झा के घर के पास से गुजर रहा था तो उसे झाडि़यों में किसी लड़की के कराहने की आवाज सुनाई दी. उस ने पास जा कर देखा तो खून से लथपथ एक युवती कराह रही थी. उस व्यक्ति ने पूछा कौन है, लेकिन युवती की ओर से कोई जवाब नहीं आया.

उस व्यक्ति ने आसपास के लोगों को जानकारी दी, तो लोग अपनेअपने घरों से निकल आए. उन्होंने जब झाडि़यों में देखा तो वे उस लड़की को पहचान गए. वह मुन्नीलाल की 19 वर्षीय बेटी किरन थी.

जब लोगों ने मुन्नीलाल को यह सूचना देनी चाही तो देखा मुन्नीलाल के दरवाजे पर ताला लगा था. सभी परेशान थे कि किरन की यह हालत किस ने की है? उसी दौरान किसी ने इस की सूचना पुलिस को दे दी. कुछ ही देर में थानाप्रभारी सिरसागंज रविंद्र कुमार दुबे पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

पुलिस को किरन अपने घर के बाहर चबूतरे के कोने पर झाडि़यों में लहूलुहान अवस्था में तड़पती मिली. पुलिस किरन को उपचार के लिए सरकारी ट्रामा सेंटर फिरोजाबाद ले गई.

उस समय उस के परिवार का कोई भी व्यक्ति साथ नहीं था. केवल पड़ोस की एक महिला साथ थी. उस की हालत गंभीर थी, इसलिए डाक्टरों ने उसे आगरा के लिए रेफर कर दिया. लेकिन आगरा ले जाते समय रास्ते में ही किरन ने दम तोड़ दिया.

पुलिस ने चौकीदार राजकुमार की तरफ से भादंवि की धारा 302, 120बी के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज कर काररवाई शुरू कर दी. पुलिस को यह मामला औनर किलिंग का लग रहा था. थानाप्रभारी ने मामले की जानकारी एसएसपी डा. मनोज कुमार को दी तो वह भी मौके पर पहुंच गए. उन्होंने थानाप्रभारी को मृतका के घर वालों का पता लगाने के निर्देश दिए.

पुलिस ने किरन की लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. उस समय रिश्तेदारों की बात तो छोडि़ए, मोहल्ले का कोई भी व्यक्ति शव के पास नहीं था. लावारिस हालत में शव ऐसे ही पड़ा था.

काफी समय बाद मृतका की बड़ी बहन सीमा, जोकि विधवा है, के ससुराल वाले वहां आ गए. पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव उन के हवाले कर दिया. उन्होंने अपने गांव वरनाहल ले जा कर उस का अंतिम संस्कार कर दिया.

मुन्नीलाल और परिवार वालों को तलाशने के लिए एसएसपी मनोज कुमार ने पुलिस की 3 टीमों का गठन किया. एसपी (देहात) महेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने संभावित स्थानों पर दबिश दी लेकिन उन का पता नहीं चला.

घटना के तीसरे दिन पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर मुन्नीलाल को करहल रोड पर स्थित दिहुली चौराहे के निकट से सीओ अजय चौहान और थानाप्रभारी रविंद्र कुमार दुबे ने हिरासत में ले लिया. वह फरार होने के लिए वहां किसी वाहन का इंतजार कर रहा था.

थाने ला कर जब उस से उस की बेटी किरन की हत्या के बारे में पूछताछ की गई तो उस ने कहा कि बेटी ने उस का जीना हराम कर दिया था. ऐसे हालात में उस के सामने यह कदम उठाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था. अपनी बेटी की हत्या करने की उस ने जो कहानी बताई, इस प्रकार निकली.

गांव नगला नाथ निवासी मुन्नीलाल अहमदाबाद में प्राइवेट नौकरी करता था. उस की पत्नी की कई साल पहले मौत हो चुकी थी. मुन्नीलाल के 2 बेटियां सीमा व किरन और 3 बेटे गौरव, आकाश व राज थे. बड़े बेटे गौरव की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी.

उस की विधवा पत्नी भी गांव में ही परिवार के साथ रहती है. बड़ी बेटी सीमा की शादी जिला मैनपुरी के गांव बरनाहल में हो गई थी. जब उस के बेटे बड़े हुए तो वह भी मजदूरी करने लगे. बेटों के काम करने पर घर का खर्चा आसानी से चलने लगा.

किरन जब जवान हुई तो उस के घर से कुछ दूर रहने वाले अवनीश से उसे प्यार हो गया. दोनों जब तक एकदूसरे को देख नहीं लेते, उन्हें चैन नहीं मिलता था. धीरेधीरे उन का प्यार परवान चढ़ने लगा.

वे चोरीछिपे मुलाकात भी करने लगे. हालांकि दोनों की जाति अलगअलग थी. इस के बावजूद उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया था. एक बार किरन ने उस से पूछा भी लिया, ‘‘अवनीश, वैसे मैं जातपांत में विश्वास नहीं करती, पर समाज से डर कर तुम मुझे कहीं भूल तो नहीं जाओगे?’’

इस पर अवनीश ने उस के होंठों पर हाथ रख कर उसे चुप कराते हुए कहा, ‘‘किरन, दो सच्चे प्रेमियों को मिलने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती. हमारे प्यार के बीच चाहे कितने भी व्यवधान आएं, मैं वादा करता हूं कि तुम्हारा हर तरह से साथ दूंगा. मैं जिंदगी भर तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगा.’’

किरन और अवनीश अपने भावी जीवन के सपने देखते. जमाने से बेखबर वे अपने प्यार में मस्त रहते थे. पर गांवदेहात में प्यारमोहब्बत की बातें ज्यादा दिनों तक नहीं छिप पातीं. यदि किसी एक व्यक्ति को भी इस की भनक लग जाती है तो कानाफूसी से बात पूरे मोहल्ले में ही नहीं बल्कि गांव भर में फैल जाती है.

किसी तरह किरन के घर वालों को भी पता चल गया कि उस का अवनीश के साथ चक्कर चल रहा है. लिहाजा उस के पिता ने उसे समझाया कि वह उस लड़के से मिलनाजुलना बंद कर दे. पर उस के सिर पर तो प्यार का भूत सवार था. ऐसे में पिता के समझाने का उस पर कोई फर्क नहीं पड़ा.

उधर अवनीश के घर वालों ने भी उसे समझाया पर उस पर भी कोई असर नहीं हुआ. यानी दोनों की मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा. वह पहले से अब ज्यादा सतर्क जरूर हो गए थे. मुन्नीलाल तो अहमदाबाद में काम करता था. वह कभीकभार घर आता था. किरन अपनी विधवा भाभी, भाई आकाश व राज के साथ रहती थी.

घर वालों की बंदिशें लगाने के बाद भी प्रेमी युगल छिपछिप कर मिलते रहे. उन के मिलने का यह सिलसिला निरंतर चलता रहा. इस के चलते दोनों परिवारों में तल्खी बढ़ती गई. 22 मार्च, 2018 को मुन्नीलाल गांव आया हुआ था. उस ने जब अवनीश को अपने घर के पास चक्कर काटते देखा तो उस का खून खौल उठा.

वह अवनीश को सबक सिखाना चाहता था, इसलिए उस ने किरन पर दबाव डाल कर थाना सिरसागंज में अवनीश, उस के 2 भाइयों चिंटू व धर्मवीर, जगदीश और मनीष के खिलाफ किरन के साथ छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज करा दी. घर वालों के दबाव में किरन ने रिपोर्ट तो लिखा दी, लेकिन उस ने आरोपियों के खिलाफ बयान नहीं दिया.

गांव वालों ने दोनों पक्षों में समझौता कराने का भरसक प्रयास किया, लेकिन मुन्नीलाल ने समझौता करने से साफ मना कर दिया. एक दिन किरन ने अवनीश से मुलाकात कर बता दिया कि उस के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए उसे मजबूर कर दिया था, पर वह अभी भी उस से प्यार करती है और करती रहेगी. यानी किरन का अपने प्रेमी से मिलना बंद नहीं हुआ.

किरन अवनीश से मिलती तो उस पर जल्दी शादी करने के लिए दबाव डालती. अवनीश ने कहा कि वह उस से शादी को तैयार है लेकिन जो मुकदमा लिखा दिया है, उसे वापस ले लो. इस के बाद किरन ने अपने घर वालों पर अवनीश के साथ शादी कराने का दबाव बनाना शुरू कर दिया.

चूंकि अवनीश दूसरी बिरादरी का था, इसलिए किरन के घर वालों ने साफ कह दिया कि उस के साथ शादी नहीं हो सकती. पर किरन अपनी जिद पर अड़ी रही. उस ने साफ कह दिया कि वह छेड़खानी के मुकदमे में अवनीश और उस के भाइयों के खिलाफ गवाही नहीं देगी और अगर अवनीश के साथ उस की शादी नहीं की तो वह अपनी जान दे देगी.

इस बात ने आग में घी का काम किया. मुन्नीलाल समझ गया कि किरन की जिद से मोहल्ले में उन की बदनामी हो रही है. तब उस ने अपने बेटे आकाश के साथ योजना बना कर एक खौफनाक निर्णय ले लिया. इसी बात को ले कर किरन का घटना की रात को पिता व भाई आकाश से काफी झगड़ा हुआ.

उस झगड़े में इश्क का जुनून किरन के सिर चढ़ कर बोलने लगा. उस ने इस बात की भी चिंता नहीं की कि उस का अंजाम क्या होगा. किरन के तेवर देख कर बापबेटे गुस्से में भर गए लेकिन उन्होंने उस समय उस से कुछ नहीं कहा.

रात को किरन जब चारपाई पर गहरी नींद में सो गई तो मुन्नीलाल ने उस पर कुल्हाड़ी से प्रहार किया. वह चीखी तो आकाश ने उसे ईंट से मारना शुरू किया.

कुल्हाड़ी और ईंट के वार से वह बेहोश हो गई. वह उसे चारपाई पर ही जलाना चाहते थे पर वह फिर से चीख पड़ी. कहीं पड़ोसी न आ जाएं, इसलिए उन्होंने उसे उठा कर बाहर चबूतरे के पास झाडि़यों में फेंक दिया और घर के सभी लोग ताला लगा कर फरार हो गए.

रात में गांव वालों ने किरन की चीखपुकार की आवाज सुनी तो उन्होंने सोचा कि मुन्नीलाल शायद किरन को पीट रहा है. क्योंकि किरन के किस्से की पूरे मोहल्ले को जानकारी थी. इस के कुछ देर बाद आवाज आनी बंद हो गई तो लगा कि उन का झगड़ा अब बंद हो गया है.

पुलिस ने मुन्नीलाल से पूछताछ के बाद उस के घर से खून सनी चारपाई व ईंट भी कब्जे में ले ली. बाद में मुन्नीलाल की निशानदेही पर कुल्हाड़ी भी बरामद हो गई. हत्या में शामिल उस के बेटे आकाश के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी. पुलिस ने मुन्नीलाल से विस्तार से पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

अवनीश की भाभी कविता ने बताया कि किरन शादी करने के लिए अवनीश पर दबाव डाल रही थी. उस से कहा गया कि हम शादी के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले मामले में राजीनामा कर ले. लेकिन किरन का पिता राजीनामा नहीं होने दे रहा था. घटना वाले दिन अवनीश के घर वाले राजीनामे के लिए जब किरन को थाने ले जाने लगे तो मुन्नीलाल व उस का बेटा आकाश तैयार नहीं हुए.

कविता ने बताया कि घटना वाले दिन मुन्नीलाल दोपहर को यही कोई बारहएक बजे पटिया पर कुल्हाड़ी पैनी कर रहा था. इसे गांव के कई लोगों ने देखा था. लोग समझे कि लकड़ी काटने के लिए धार लगा रहा है. लेकिन क्या पता था कि वह अपनी बेटी को मारने के लिए धार लगा रहा था.

बहरहाल, झूठी शान दिखाने के चक्कर में मुन्नीलाल बेटी के कत्ल के आरोप में जेल चला गया और एक प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत हो गया. कथा लिखे जाने तक आकाश को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी थी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

रिश्तों का रेतीला महल

अपनी नौकरी के चलते गीता को घर का काम निपटा कर जल्दी सोना होता था और सुबह जल्दी ही उठना पड़ता  था. लेकिन उस दिन उठने में थोड़ी देर हो गई थी. अब उस के पास एक ही रास्ता था कि जल्दी से रसोई का काम निपटाए. काम भी कम नहीं था. सुबह के नाश्ते से ले कर दोपहर का खाना तक बनाना होता था. इस की वजह यह थी कि उस की बेटी सुदीक्षा कालेज जाती थी, जो दोपहर को घर लौटती थी. इसलिए उस का खाना बनाना जरूरी था. साथ ही यह भी कि उसे खुद को और पति कुलदीप को अपना लंच बौक्स साथ ले कर जाना होता था.

दरअसल 37 वर्षीय गीता पंजाबी भाषा की प्रोफेसर थी और पिछले 15 सालों से सिविल लाइंस लुधियाना स्थित एक शिक्षण संस्थान में पढ़ाती थी. उस का पति कुलदीप रेलवे में बतौर इलेक्ट्रिशियन तैनात था.
कुलदीप सुबह साढ़े 8 बजे अपनी ड्यूटी पर चला जाता था और शाम को साढ़े 5 बजे घर लौटता था. कुलदीप के चले जाने के बाद साढ़े 9 बजे गीता भी अपने कालेज चली जाती थी. जबकि सुदीक्षा कालेज के लिए 10 बजे घर से निकलती थी. सब के जाने के बाद घर में कुलदीप का छोटा भाई हरदीप अकेला रह जाता था.

हरदीप नगर निगम लुधियाना की पार्किंग के एक ठेकेदार के पास काम करता था. उस की रात की ड्यूटी होती थी. वह अपने भाईभाभी के पास ही रहता था. हरदीप रात 8 बजे घर से ड्यूटी पर जाता था और सुबह 9 बजे लौटता था. काम से लौट कर वह दिन में घर पर ही सोता था.

कुलदीप, उस की पत्नी गीता, बेटी सुदीक्षा और हरदीप सहित 4 सदस्यों का यह परिवार लुधियाना के अजीत नगर, बकौली रोड, हैबोवाल के मकान नंबर 1751/21 ए की गली नंबर-3 में रहता था. कुलदीप के पिता राममूर्ति की कुछ वर्ष पहले मौत हो चुकी थी.

पिता की मौत के बाद कुलदीप ही घर का एक मात्र बड़ा सदस्य था. कुलदीप को मिला कर परिवार में 3 कमाने वाले थे, सो घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी. सब कुछ ठीकठाक चल रहा था.

पिता की दुश्मन बेटी

उस दिन कुलदीप, गीता और सुदीक्षा घर से जाने की तैयारी कर रहे थे. अपनेअपने हिसाब से सभी को जल्दी थी. गीता ने नाश्ता तैयार कर लिया था. उस ने पति को आवाज दी, ‘‘नाश्ता लग गया है, जल्दी आ जाइए. मुझे कालेज के लिए देर हो रही है.’’

कुलदीप नाश्ते की टेबल पर आ कर बैठ गया तो गीता ने उसे परांठे परोस दिए. कुलदीप नाश्ता करने लगा तो उसे बेटी का ध्यान आया. उस ने गीता से पूछा, ‘‘सुदीक्षा कहां है?’’

‘‘अपने कमरे में होगी, तुम नाश्ता करो.’’

कुलदीप ने वहीं बैठेबैठे सुदीक्षा को आवाज दे कर पुकारा, पर वह नहीं आई. कुलदीप ने 2-3 बार आवाज दी पर सुदीक्षा के कमरे से कोई जवाब नहीं आया. गीता ने एक बार फिर टोका, ‘‘तुम नाश्ता करो, वह आ जाएगी.’’ पर कुलदीप को चैन नहीं आया, क्योंकि उसे सुबह का नाश्ता और रात का खाना पत्नी और बेटी के साथ खाना पसंद था.

पत्नी के मना करने के बावजूद कुलदीप नाश्ता छोड़ कर बेटी के कमरे में गए. सुदीक्षा के कमरे में जा कर उन्होंने देखा कि सुदीक्षा कानों में हैडफोन लगाए किसी से हंसहंस कर बातें कर रही थी. यह देख कर कुलदीप को गुस्सा आ गया. उस ने आगे बढ़ कर देखा तो स्क्रीन पर तरुण का नाम था.

तरुण उर्फ तेजपाल सिंह भाटी, सुदीक्षा का बौयफ्रैंड था, यह बात कुलदीप अच्छी तरह जानता था. तरुण हंसबड़ारोड पर पंज पीर के पास मेहर सिंह नगर में रहता था, उस की मैडिकल शौप थी. पिछले 3 सालों से सुदीक्षा और तरुण के प्रेमसंबंध थे. कुलदीप शुरू से ही इन संबंधों का विरोध करता था. इसे ले कर उस ने सुदीक्षा को कई बार फटकारा भी था. इतना ही नहीं तरुण को ले कर बापबेटी म७ें कई बार कहासुनी भी हुई थी. फिर भी सुदीक्षा ने तरुण का साथ नहीं छोड़ा.

कुलदीप उसे बराबर समझाता था कि फालतू के प्यारव्यार के चक्कर में न पड़ कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे. लेकिन सुदीक्षा ने पिता की बात कभी नहीं मानी. वह खुद को आजाद मानती थी और आजाद ही रहना चाहती थी. अपनी जिंदगी में उसे किसी की दखलंदाजी बरदश्त नहीं थी. तरुण के मामले में तो वह किसी की भी नहीं सुनती थी.

फोन की स्क्रीन पर तरुण का नंबर देख कर कुलदीप के तनबदन में आग लग गई. उस ने डांटते हुए सुदीक्षा से कहा, ‘‘हजार बार मना किया है कि इस लफंगे से संबंध नहीं रखना, पर तुम हो कि मानती ही नहीं. क्या मेरी बातें तुम्हारी समझ में नहीं आतीं, या सब कुछ जानसमझ कर अनजान बनने का नाटक करती हो.’’

सुदीक्षा के कमरे से पति के जोरजोर से बोलने की आवाज सुन कर गीता भी वहां आ गई. उस ने भी बेटी को डांट कर चुप रहने के लिए कहा. लेिकन बापबेटी के बीच फोन पर तरुण से बातचीत को ले कर कहासुनी चालू रही. इस बहस में दोनों में से कोई हारने को तैयार नहीं था.

कुलदीप पिता होने का अधिकार समझ कर बेटी को गलत राह पर जाने से रोक रहा था, जो अपनी जगह पर ठीक भी था. जब बच्चे अपना लक्ष्य भूल कर रास्ता भटकने लगते हैं, तो पिता का कर्तव्य बन जाता है कि वह अपनी संतान को गलत राह पर जाने से रोके और अपनी समझ के अनुसार उस का सही मार्गदर्शन करे. यही कुलदीप कर रहा था.

दूसरी ओर कोई तरुण को भलाबुरा कहे यह सुदीक्षा को बरदाश्त नहीं था. यही कारण था कि कुलदीप जब भी बेटी को समझाने की कोशिश करता तो वह हत्थे से उखड़ जाती थी. इस के साथ ही बापबेटी के बीच तरुण को ले कर महाभारत शुरू हो जाता था.

तरुण के मामले में सुदीक्षा अपने पिता को अपना कट्टर दुश्मन मानती थी. उस दिन कहासुनी से शुरू हुई बात अचानक इतनी ज्यादा बढ़ गई कि गुस्से में कुलदीप ने सुदीक्षा के हाथों से मोबाइल छीन कर फर्श पर पटक दिया. इस के बाद वह गुस्से में नाश्ता किए बिना ही घर से निकल गया. खाने का टिफिन भी घर पर ही छोड़ दिया था.

परिवार में किसी तीसरे का  दखल भी बढ़ाता है कलह

कुलदीप के बिना कुछ खाएपीए घर से निकल जाने के बाद गीता और सुदीक्षा भी बिना नाश्ता किए अपनेअपने कालेज चली गईं. रात को कुलदीप ने एक बार फिर बेटी को प्यार से समझाने के लिए खाने की टेबल छत पर लगवाई. कुलदीप का भाई हरदीप खाना खा कर काम पर जाने की तैयारी कर रहा था.
गीता, सुदीक्षा और कुलदीप ने जब तक खाना शुरू किया तब तक हरदीप जा चुका था. मांबाप और बेटी के बीच जो थोड़ा बहुत मनमुटाव था, वह एक साथ खाना खाने से खत्म हो गया. खाना खाने के बाद कुलदीप नीचे अपने कमरे में सोने के लिए चला गया. गीता और सुदीक्षा छत पर ही सो गईं. यह बीती 19 जुलाई की बात है.

अगली सुबह यानी 20 जुलाई, 2018 की सुबह साढ़े 5 बजे उठ कर गीता छत से नीचे आई. यह उस का रोज का नियम था. नित्यकर्म से फारिग हो कर जब वह पति कुलदीप को जगाने उस के कमरे में की ओर जा रही थी, तभी अचानक उस की नजर खुले हुए मुख्य दरवाजे पर पड़ी, मुख्यद्वार खुला हुआ था.
वह तेजी से कुलदीप के कमरे की ओर लपकी. कमरे के भीतर का दृश्य देख कर उस की आत्मा तक कांप उठी. सामने बेड पर खून से लथपथ कुलदीप की लाश पड़ी थी.

गीता ने डर कर जोरजोर से चिल्लाना शुरू कर दिया. उस के रोने चिल्लाने की आवाज सुन कर अड़ोसीपड़ोसी जमा हो गए. किसी ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन पर सूचना दी कि अजीत नगर की गली नंबर-3 के मकान नंबर-1715/21 ए में एक आदमी की हत्या हो गई है, जल्दी पहुंचें.
पुलिस कंट्रोल रूम ने यह सूचना संबंधित थाने हैबोवाल को दे दी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी परमदीप सिंह अपने सहायक पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

सुबह का समय था, दिन अभी पूरी तरह से नहीं निकला था. इस के बावजूद वहां अपेक्षा से अधिक भीड़ जमा थी. जहां हत्या हुई थी, वह 40 वर्षीय कुलदीप सिंह संघड़ उर्फ मोनू का था. हत्या भी उसी की हुई थी. थानाप्रभारी परमदीप सिंह ने घटनास्थल का मुआयना किया. कुलदीप की लाश कमरे में बैड पर पड़ी थी. उस की हत्या किसी तेजधार हथियार से गला रेत कर की गई थी. कटने पर गले से बहा खून बैड पर फैला हुआ था.

खून देख कर ऐसा लगता था, जैसे कुलदीप की हत्या कुछ घंटे पहले ही की गई हो, क्योंकि खून का रंग अभी तक लाल था, काला नहीं हुआ था. घनी आबादी वाली उस मध्यमवर्गीय परिवारों की कालोनी के एक मकान में इस तरह हत्या हो जाना आश्चर्य वाली बात थी.

मामले की गंभीरता को देखते हुए परमदीप सिंह ने घटना की सूचना अपने उच्चाधिकारियों और क्राइम टीम को दे दी थी. सूचना मिलते ही लुधियाना पुलिस कमिश्नर डा. सुखचैन सिंह गिल, एडीसीपी गुरप्रीत कौर पोरवाल, एसीपी (वेस्ट) गुरप्रीत सिंह, स्पैशल स्टाफ की टीम और क्राइम ब्रांच टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

डौग स्क्वायड भी मौके पर बुला लिया गया था. सब ने आते ही अपनाअपना काम शुरू कर दिया. घटनास्थल से कुछ फिंगरप्रिंट भी उठाए गए. खोजी कुत्ते ज्यादा मदद नहीं कर पाए. वह मृतक के कमरे से निकल कर आंगन में चक्कर लगाने के बाद बाहर सड़क पर आ कर रुक गए.

साथसाथ खाना खा कर  अलग सोए थे

थानाप्रभारी परमदीप सिंह को मृतक कुलदीप की 37 वर्षीय पत्नी गीता ने बताया कि कुलदीप ने रात को करीब साढे़ 9 बजे मेरे और 17 वर्षीय बेटी सुदीक्षा के साथ छत पर खाना खाया था. खाना खाने के बाद लगभग 10 बजे वह नीचे अपने कमरे में सोने चले गए थे. बाद में मैं ने नीचे आ कर घर का मुख्य द्वार बंद कर के ताला लगाया था, फिर मैं छत पर बेटी के साथ सोने चली गई थी.

रोज की तरह सुबह साढ़े 5 बजे जब मैं छत से उतर कर नीचे आई, तो मैं ने कुलदीप के कमरे में उन की लाश देखी. उस समय घर का मुख्य द्वार खुला हुआ था. यह देख मैं ने घबरा कर शोर मचा दिया. जिस से अड़ोसीपड़ोसी जमा हो गए. उन्हीं में से किसी ने पुलिस को फोन किया होगा.

मृतक कुलदीप के भाई हरदीप ने बताया कि वह रात के करीब साढे़ 9 बजे जब काम पर जा रहा था, तब भाईभाभी और सुदीक्षा छत पर बैठ कर खाना खा रहे थे. सुबह साढ़े 5 बजे मेरे दोस्त और पड़ोसी लाला ने फोन पर मुझे यह खबर दी. हरदीप ने यह भी बताया कि रात को रोजाना कुलदीप ही बाहर वाले मुख्य दरवाजे पर ताला लगाया करता था.

उस ने यह भी बताया कि कुलदीप को शराब पीने की आदत थी. अपनी ड्यूटी से आने के बाद वह सोने से पहले तक 1-2 घंटे घर पर ही बैठ कर शराब पीया करता था. हरदीप के अनुसार घर से उस के भाई की काले रंग की स्पलेंडर मोटर साइकिल और 2 फोन भी गायब थे, जिन में एक फोन ओप्पो कंपनी का था और दूसरा चाइनीज सेट था.

मृतक की बेटी सुदीक्षा ने अपने बयान में सिर्फ इतना ही बताया कि मां के रोने की आवाज सुन कर वह छत से नीचे आई थी.

बहरहाल सब थानाप्रभारी ने मृतक कुलदीप के भाई हरदीप के बयानों के आधार पर कुलदीप की हत्या का मुकदमा भादंवि की धारा 302, 120 बी, 34 के अंतर्गत अज्ञात हत्यारों के खिलाफ दर्ज कर लिया. प्राथमिक काररवाई कर के उन्होंने लाश पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दी. इस हत्याकांड से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था.

पुलिस को नहीं मिला क्लू

खुद को हाईटेक सिस्टम से लैस बताने वाली लुधियाना पुलिस ने घटनास्थल की हाईटेक तरीके से ही जांच की थी. पुलिस की पूरी टीम ने डेढ़ से 2 घंटे में पूरे घटनास्थल की जांच की. अब तक की जांच पड़ताल में यह बात सामने आई कि कुलदीप के हत्यारे जो भी रहे हों, वह थे जानने वाले.
क्योंकि घटनास्थल से ऐसा कोई चिह्न नहीं मिला था, जिस से पता चलता कि हत्यारों ने घर में प्रवेश करने के लिए कोई जोर जबरदस्ती की हो. संभवत: कुलदीप की हत्या में किसी नजदीकी का हाथ था.

बहरहाल, परमजीत सिंह ने आगामी तफ्तीश शुरू करते हुए घटनास्थल के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज चैक की. मृतक की पत्नी गीता, बेटी सुदीक्षा और नजदीकी रिश्तेदारों के अलावा कुलदीप के दोस्तों और सहकर्मियों से भी पूछताछ की गई. लेकिन परमदीप सिंह के हाथ ऐसा कोई सूत्र नहीं लगा जिसे कुलदीप की हत्या से जोड़ कर देखा जा सके.

पूछताछ के दौरान पड़ोसियों ने बताया था कि कुलदीप और उस की पत्नी गीता के बीच अकसर झगड़ा होता था. इस बारे में जब गीता से पूछा गया तो उस ने बताया कि कुलदीप अनुशासनप्रिय था. लेकिन शाम को थोड़ी पीने के बाद वह और भी ज्यादा अनुशासित हो जाता था. वह जब तब सुदीक्षा को ठीक से पढ़ने और कोई अधिकारी बनने के बारे में कहा करता था, जिसे ले कर दोनों के बीच कहासुनी हो जाती थी.

बाहर से कौन और कैसे आया?

थानाप्रभारी परमदीप सिंह के लिए यह केस चुनौतीपूर्ण बन चुका था. उन्होंने एक बार फिर सारे घटनाक्रम का शुरू से अध्ययन किया. कत्ल के वक्त केवल मांबेटी ही घर पर थीं. पुलिस को यह बात खटक रही थी कि आखिर कातिल घर में दाखिल कैसे हुए. क्योंकि बिना फ्रैंडली एंट्री के घर में दाखिल होना संभव नहीं था.

वारदात के वक्त मृतक कुलदीप का छोटा भाई हरदीप भी अपनी ड्यूटी पर गया हुआ था. छानबीन में वह न केवल निर्दोष पाया गया, बल्कि उस के बयान ने पुलिस के शक की सुई मृतक की पत्नी गीता की ओर घुमा दी थी.

गीता ने बताया था कि खाना खाने के बाद उस ने खुद मुख्यद्वार बंद किया था. जबकि हरदीप का कहना था कि मुख्यद्वार उस का भाई कुलदीप ही बंद करता था. सोने से पहले कुलदीप को 5-7 मिनट टहलने की आदत थी. टहलने के बाद वह मुख्यद्वार बंद कर चाबी कमरे में खूंटी के पास लटका देता था ताकि सुबह गीता को चाबी ढूंढने में परेशानी न हो. सोचने वाली बात यह भी थी कि जब घर में 2 लोग मौजूद थे तो किसी तीसरे ने बाहर से आ कर कुलदीप की हत्या कैसे कर दी.

इस का मतलब घर का एक आदमी बाहर वाले से मिला हुआ था. या दोनों ही मिले हुए थे. अथवा दोनों ने ही मिल कर कुलदीप की हत्या की थी और मामले को लूटपाट का जामा पहना दिया गया था. जो भी खिचड़ी पकी थी, वह घर के अंदर ही पकी थी. यह बात जेहन में आते ही परमदीप सिह ने गीता और सुदीक्षा की पिछले एक हफ्ते की काल डिटेल्स निकलवाई.

काल डिटेल्स में एक ऐसा नंबर सामने आया जिस पर सुदीक्षा की बहुत बात होती थी. कई काल्स तो घंटे भर से भी ज्यादा की थीं और कई काल देर रात भी की गई थीं. यहां तक कि घटना वाली रात 19 जुलाई को थोड़ेथोड़े अंतराल से दोनों की उस समय तक बात होती रहती थी, जिस समय कुलदीप की हत्या की जा रही थी.

सोचने वाली बात यह थी कि क्या ऐसा संभव था कि नीचे वाले कमरे में लूटपाट के साथ किसी की हत्या की जा रही हो और ऊपर छत पर फोन पर बातें करने वाले को भनक तक ना लगे.
कोई खटका, कोई आहट सुनाई ना दे, ऐसा कैसे संभव था? यह बात परमदीप सिंह को हजम नहीं हो रही थी.

उन्होंने तत्काल उस नंबर के मोबाइल की काल डिटेल्स चैक कीं तो पुलिस के कान खड़े हो गए. थोड़ी सख्ती करने पर सारी सच्चाई सामने आ गई. पुलिस ने सुदीक्षा के 21 वर्षीय प्रेमी तरुण उर्फ तेजपाल सिंह भाटी को हिरासत में ले लिया, जो हंबड़ा स्थित पंजपीर रोड के मेहर सिंह नगर का रहने वाला था. उस की मैडिकल शौप थी. वह बीए सैकेंड ईयर में पढ़ रहा था.

तरुण ने खोला भेद

पूछताछ के दौरान तरुण ने बहुत चौंका देने वाला खुलासा कर के पुलिस को हैरत में डाल दिया. तरुण ने सब इंसपेक्टर परमदीप सिंह को बताया कि कुलदीप की हत्या खुद सुदीक्षा ने ढाई लाख रुपए दे कर करवाई थी.

पुलिस कमिश्नर लुधियाना व अन्य पुलिस उच्चाधिकारियों के समक्ष दिए गए तरुण के इस बयान के बाद कुलदीप की हत्या के अपराध में गीता और सुदीक्षा को गिरफ्तार कर लिया गया.

उसी दिन सुदीक्षा, उस के प्रेमी तरुण और मां गीता को कुलदीप की हत्या के इलजाम में अदालत में पेश कर के आगामी पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर ले लिया गया.

तरुण और सुदीक्षा की निशानदेही पर पुलिस ने उस का मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया, जो उस ने छत पर छिपा रखा था. साथ ही उस की वह चुन्नी और खून से सना तौलिया भी मिल गया, जो वारदात में इस्तेमाल हुआ था.

तरुण और सुदीक्षा ने इस हत्याकांड में लिप्त 4 और लोगों के नाम भी बताए. हैबोवाल थानाप्रभारी परमदीप सिंह ने इन आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए एक विशेष टीम बनाई. जिस में हंबड़ां चौकी प्रभारी एएसआई मनजीत सिंह सिंघम, कांस्टेबल प्रगट सिंह, जतिंदर सिंह व जीतू कुमार को शामिल किया गया.

इस टीम ने 25 जुलाई को बड़े नाटकीय ढंग से सागर गैंग के सरगना एवं कौंट्रैक्ट किलर सागर उर्फ न्यूट्रन को, उस के 3 साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया, जबकि इस मामले का 8वां आरोपी जसकरन अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर था.

पकडे़ गए आरोपियों की पहचान फील्डगंज के प्रेमनगर निवासी सागर ब्राह्मणिया. खुडु मोहल्ले के दीपक धालीवाल उर्फ दीपा व सीएमसी के निकट रहने वाले विशाल जैकप के रूप में हुई. पकड़े गए आरोपी 18 से 21 साल के बीच के थे जो कि 10वीं तक ही पढ़े थे. ये सभी आपस में दोस्त थे, सागर, विशाल और दीपक को राजपुरा रोड से काबू किया गया, जबकि न्यूट्रन को ढोलेवाल चौक से पकड़ा गया. पूछताछ में इन सभी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.

पिता नहीं प्रेमी चाहिए था

आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल व लाल रंग की स्कूटी के अतिरिक्त मृतक की स्पलैंडर मोटरसाइकिल, उस का पर्स, परिचय कार्ड व अन्य सामान बरामद हुआ, जबकि वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद करने के लिए इन का पुलिस रिमांड लेना पड़ा.

रिमांड के दौरान की गई पूछताछ में कुलदीप की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह खून के रिश्तों को तारतार कर मर्यादाओं का गला घोंटने वाली एक ऐसी असभ्य और जिद्दी औरत की कहानी थी, जिस ने अपने प्रेमी से रिश्ता रखने के लिए अपने ही पिता का खून बहा दिया था.

कुलदीप अकसर शराब पी कर नशे में गीता व सुदीक्षा से मारपीट करता था. इस की वजह यह थी कि कुलदीप को बेटी और तरुण उर्फ तेजपाल के प्रेम संबंधों पर सख्त आपत्ति थी. वैसे तो उसे उन तमाम रिश्तों पर ऐतराज था, जो बेटी की पढ़ाई और उस के भविष्य के आडे़ आते थे.

वह नहीं चाहता था कि उस की बेटी तेजपाल से मेलमिलाप रखे. उस ने कई बार सुदीक्षा को मोबाइल पर बात करते हुए पकड़ लिया था और तैश में आ कर बेटी का मोबाइल भी तोड़ दिया था, जबकि गीता इस मामले में बेटी को ऊंचनीच समझाने की जगह उलटे उसी का साथ दिया करती थी.

इस का नतीजा यह निकला कि सुदीक्षा अपनी मां की शय पा कर दिनप्रतिदिन बिगड़ती चली गई और पिता पर हावी होने की कोशिश करने लगी, जो कुलदीप को कतई मंजूर नहीं था. इसलिए वह शराब पीने के बाद इस बात को ले कर पत्नी और बेटी से झगड़ा किया करता था.

उधर सुदीक्षा अपने प्रेमी तरुण को किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं थी. वह हर समय अपने पिता को नीचा दिखाने के लिए योजनाएं बनाती रहती थी. इस बीच सुदीक्षा ने अपने पिता के बारे में गीता से कहना शुरू कर दिया कि उस का शराबी पिता उस पर बुरी नजर रखता है. वह कभी भी उस की इज्जत की धज्जियां उड़ा सकता है. पति की यह बात गीता को नागवार गुजरी और उस ने बिना विवेक से काम लिए बेटी की बातों पर विश्वास कर लिया और पति के कत्ल की साजिश रच डाली.

अपने बयानों में सुदीक्षा ने बताया कि उस के तेजपाल के साथ पिछले 3 सालों से प्रेम संबंध थे. तरुण की तरह सुदीक्षा भी प्राइवेट तौर पर बीए कर रही थी. पिता को रास्ते से हटाने के लिए गीता ने तेजपाल से बात की. तीनों ने मिल कर 3 महीने पहले अप्रैलमई में योजना तैयार की.

हिस्ट्रीशीटर से हुआ हत्या का सौदा

कुलदीप की हत्या के लिए पहले तेजपाल ने बीड़ा उठाया था. बीते जून महीने की 18 तारीख को वह पूरी तैयारी के साथ कुलदीप की हत्या करने के लिए उस के घर आया था, लेकिन एन मौके पर उस की हिम्मत जवाब दे गई. फलस्वरूप योजना धरी की धरी रह गई.

एक बार योजना नाकाम रहने पर गीता व सुदीक्षा ने तेजपाल के माध्यम से उस के दोस्त कुख्यात हिस्ट्रीशीटर सागर सूद उर्फ न्यूट्रन से मिल कर कुलदीप को कत्ल करने की बात की. फलस्वरूप कुलदीप की हत्या का सौदा ढाई लाख रुपए में तय हो गया. सागर सूद एलआईजी फ्लैट फेज-3 का रहने वाला था. उस पर लुधियाना के सराभा नगर व थाना डिवीजन नंबर-6 में हत्या के प्रयास, मारपीट, चोरी और अन्य संगीन धाराओं में कई मामले दर्ज थे.

आखिरी बार उसे हत्या के प्रयास के मामले में थाना सलेम टाबरी पुलिस ने गिरफ्तार किया था. इस मामले में विशाल भी सह अभियुक्त था. सागर बीते मई महीने में जेल से बाहर आया था. जून में उस ने लुधियाना की एक युवती से प्रेम विवाह कर लिया था और उस के साथ चंडीगढ़ में रहने लगा था. तरुण से उस की पहले से ही दोस्ती थी.

नयानया विवाह हुआ था, न्यूट्रन को पैसों की सख्त जरूरत थी. यही सोच कर जब तरुण ने कुलदीप का कत्ल करने के लिए ढाई लाख रुपए देने की बात कही तो वह तुरंत तैयार हो गया. तरुण ने उसे 6 हजार रुपए एडवांस दे दिए. बाकी रकम काम करने के बाद देना तय हुआ. साथ ही यह भी तय हुआ कि कुलदीप को इस तरह मौत के घाट उतारा जाए ताकि उस की मौत प्राकृतिक लगे.

ऐसा इसलिए ताकि कुलदीप की मौत के बाद रेलवे की तरफ से मिलने वाला पैसा उस की पत्नी गीता को मिल जाए. उसी पैसे में से सुपारी के शेष पैसे देना तय हुआ. यह भी तय हुआ कि कत्ल के बाद घर में जो भी पैसा और कीमती सामान होगा, उसे कातिल अपने साथ ले जाएंगे.

सागर कुलदीप की हत्या की वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार हो गया और उस ने हत्या करने के लिए फूलप्रूफ योजना तैयार कर ली. न्यूट्रन ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए अपने दोस्तों सागर ब्राह्मणिया, दीपक धालीवाल उर्फ दीपा व विशाल जैकप को अपनी योजना में शामिल कर लिया.

एडवांस 6 हजार रुपए में से 8 सौ रुपए उस ने चंडीगढ़ से लुधियाना आने के लिए टैक्सी के किराए पर खर्च कर दिए, जबकि 12 सौ रुपए में लुधियाना बस अड्डे के पास अपनी नई पत्नी को होटल का कमरा किराए पर ले कर दिया था. इस के बाद एक वह और उस के दोस्त मोटरसाइकिल व स्कूटी पर सवार हो कर कुलदीप के घर पहुंचे.

कुलदीप की जिंदगी की आखिरी रात

आसपास घर होने के कारण न्यूट्रन पकडे़ जाने का रिस्क नहीं लेना चाहता था, क्योंकि उस की नईनई शादी हुई थी. इसीलिए उस ने अपने दोस्तों को साथ मिलाया था. कुलदीप के घर का मुख्यद्वार गीता और सुदीक्षा ने पहले से ही खोल कर रखा था. जब ये लोग घर में दाखिल हुए तो कुलदीप बैडरूम में गहरी नींद सो रहा था.

न्यूट्रन और उस के साथियों ने कुलदीप को सोते वक्त दबोच लिया और उस का मुंह तौलिए से दबा कर गले के चुन्नी से घोंट दिया, जबकि 2 लोगों ने उस की टांगें और बाजू पकड़ रखे थे. इस बीच जब कुलदीप बेसुध हो गया तो जसकरण ने उस के दिल की धड़कन चैक की, जो चल रही थी. इस पर न्यूट्रन और विशाल ने साथ लाए तेजधार हथियारों से वार कर के उस की गरदन काट कर उसे मौत के घाट उतार दिया.

इस के बाद ये लोग कुलदीप का पर्स, जिस में करीब 2000 रुपए थे, उस का पहचान पत्र, कमरे में रखे 2 मोबाइल फोन और मोटरसाइकिल ले कर भाग गए. कुलदीप का कत्ल करने के बाद सागर ने मोबाइल से इस की सूचना तरुण को दे दी.

तरुण ने मोबाइल पर यह बात सुदीक्षा को बता दी. योजना के अनुसार कुलदीप की हत्या होने की खबर मिलते ही दोनों मांबेटी ने सबूत मिटाने की कोशिश की. वे छत से नीचे आईं और खून से सने तौलिए व चुन्नी काले रंग की पोलीथिन में डाल कर पीछे के खाली प्लाट में फेंक दी, जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया था. कुलदीप की पत्नी गीता पुलिस को दिए अपने बयान में बुरी तरह फंस गई थी. उस ने पुलिस को बताया था कि जब वह सुबह उठी तो सीढि़यों पर लगे दरवाजे की कुंडी उस ने ही खोली थी. जब वह नीचे आई तो घर के मेनगेट के लौक में अंदर से चाबी लगी हुई थी और वह खुला हुआ था.

इसी पर पुलिस को संदेह हुआ कि जब ऊपर से कोई नहीं आया तो मेन गेट का लौक किस ने खोला, जबकि कुलदीप का रूटीन था कि वह सोने से पहले मेन गेट लौक कर के चाबी को कुंडी पर टांग देता था.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

हर रोल के लिए तैयार निशा झा

वैसे तो निधि झा अपनी भोजपुरी फिल्म ‘संघर्ष’ में हीरो की बेटी का किरदार निभा रही हैं पर वे हीरोइन के किरदार निभाने को भी तैयार हैं.

फिल्मी परदे पर बिहार की बेटियों की गिनती लगातार बढ़ती ही जा रही है. इसी सिलसिले में निशा झा का नाम तेजी से ऊपर उठ रहा है.

निशा झा ने भोजपुरी की फिल्म ‘संघर्ष’ में खेसारीलाल यादव की बेटी का किरदार निभाया है. वे मूलत: दरभंगा जिले से आती हैं, मगर अभी दिल्ली में रहती हैं और 12वीं जमात में पढ़ती हैं. ऐक्टिंग करने का शौक उन को अपनी मां सुधा झा से मिला है, जो खुद भी एक थिएटर आर्टिस्ट हैं.

इस से पहले निशा झा स्वरा भास्कर के साथ हिंदी फिल्म ‘अनारकली औफ आरा’ में भी नजर आ चुकी हैं.

निशा झा पराग पाटिल के डायरैक्शन में बनी भोजपुरी फिल्म ‘संघर्ष’ को अपनी पहली फिल्म मानती हैं. ऐक्टिंग की दुनिया में नाम कमाने की ख्वाहिश रखने वाली निशा झा को बचपन से अदाकारी करने का शौक था. वे अपनी मां की अदाकारी को देखते हुए बड़ी हुई हैं और मां के काफी करीब हैं.

निशा झा कहती हैं कि ऐक्टिंग उन के लिए जुनून है, इसलिए वे बस अच्छी कहानी वाली फिल्मों में काम करने की तमन्ना रखती हैं. वे हिंदी और भोजपुरी समेत किसी भी बोली या भाषा की फिल्म में काम कर सकती हैं.

निशा झा ने फिल्म ‘संघर्ष’ के बारे में बताया कि उन्हें इस फिल्म के लिए पराग पाटिल ने तलाशा है. फिर निशा ने फिल्म की कहानी सुनी और जब उन्हें लगा कि फिल्म की कहानी अच्छी है, तब उन्होंने हामी भी भर दी.

इस फिल्म में निशा झा खेसारीलाल यादव और काजल राघवानी की बेटी के किरदार में हैं. उन्हें अपने किरदार पर गर्व है और वे कहती हैं कि आज भी वे अपनी मां से काफी जुड़ी हुई हैं.

निशा झा अभी बिहार में नहीं रहती हैं मगर बिहार से उन का लगाव कम नहीं हुआ है. वे कहती हैं कि बिहार उन के दिल में है और वे बिहार से प्यार करती हैं. उन्हें बिहार के लोगों की मासूमियत बेहद अच्छी लगती है.

निशा झा को भोजपुरी सिनेमा इंडस्ट्री में खेसारीलाल यादव और काजल राघवानी पसंद हैं और बौलीवुड में उन की रोल मौडल ऐश्वर्या राय बच्चन हैं. इस के अलावा डांस करना उन की हौबी है और वे डांस में माधुरी दीक्षित को अपना रोल मौडल मानती हैं.

कांग्रेस की चुप्पी में छिपा है ‘महागठबंधन का भविष्य’

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना राज्यों के चुनाव को 2019 का सेमीफाइनल माना जा रहा है. इन सभी राज्यों में भाजपा की हार की संभावना प्रबल है. मिजोरम को छोड़ कर बाकी सभी 4 राज्य एक दूसरे की सीमाओं से लगे राज्य हैं. मुख्य मुकाबला मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में है. जहां कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने है.

भाजपा के लिये मुसीबत यह है कि वह इन राज्यों में लबे समय से राज्य कर रही है. इन राज्यों में विकास का ऐसा कोई काम नहीं हुआ जिसे उदाहरण के रूप में पेश किया जा सके. भाजपा के लिये राहत वाली बात यह है कि यहां कांग्रेस का समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पाटी से गठबंधन नहीं हुआ.

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पाटी ने गठबंधन न होने का ठीकरा कांग्रेस के सर फोड़ दिया है. बसपा ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान को ही जिम्मेदार ठहराया तो सपा ने कांग्रेस के सुस्त रूख को इसका जिम्मेदार माना. बसपा की मायावती और सपा के अखिलेश यादव ने कांग्रेस के खिलाफ अपनी राय दी.

इसके बाद भी कांग्रेस की ओर से कोई आक्रमक बात नहीं कही गई. असल में सपा और बसपा दोनों ही कांग्रेस से यह चाहते थे कि वह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इन  दोनों दलों को ज्यादा से ज्यादा सीटे दे. जबकि उत्तर प्रदेश में वह कांग्रेस को कम से कम सीट देना चाहते थे. ऐसे में कांग्रेस के लिये गठबंधन करना लाभकारी नहीं लग रहा था.

गठबंधन के लिये जो फार्मूला सपा-बसपा उत्तर प्रदेश में लागू कर रहे थे वह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में लागू नहीं करना चाहते थे. ऐसे में कांग्रेस के लिये जरूरी हो गया कि वह बिना महागठबंधन को तोड़े मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव को अकेले लड़े.

अगर कांग्रेस को यहां सफलता मिलती है तो उसकी हैसियत अपने से ही बढ़ जायेगी. उस पर दूसरे दलों का दबाव खत्म हो जायेगा. गठबंधन की गांठ न उलझे इस लिये अखिलेश और मायावती के बयान पर कांग्रेस जबाव नहीं देना चाहती. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस भले ही सत्ता की दौड़ में प्रबल दावेदार न हो पर बाकी प्रदेशों में वह सत्ता की दौड़ में मुख्य मुकाबले में है. इसके बाद भी उसने सपा-बसपा के आरोपों का जवाब न देकर बता दिया कि वह विपक्षी एकता की पक्षधर है.

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