कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक प्रियंका गांधी

राजनीति की चुनावी रणभेरी अब बज चुकी है. 2019 का आम चुनाव कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों के लिए ही जीने मरने का सवाल बन गया है. 3 राज्यों में मिली जीत से कांग्रेस में जोश है. वह इस जोश को पार्टी और वोटर दोनों के लिए इस्तेमाल करना चाहती है. यही वजह है कि कांग्रेस ने भी प्रियंका गांधी को मैदान में उतार कर अपना सब से अहम किरदार सामने कर दिया है.

कांग्रेस के पक्ष में बन रही हवा को इस ‘मास्टर स्ट्रोक’ से केवल चुनावी फायदा ही नहीं मिलेगा, बल्कि चुनाव के बाद उपजे हालात में नए तालमेल बनाने में भी खासा मदद मिलेगी. ‘शाहमोदी’ खेमे में भी इस से बेचैनी बढ़ गई है. ऐसे में एक बार फिर से प्रियंका गांधी को ले कर नएनए मैसेज वायरल होने लगे हैं.

12 जनवरी, 1972 को जनमी प्रियंका गांधी 47 साल की हो चुकी हैं. जनता उन में प्रधानमंत्री रह चुकी इंदिरा गांधी की छवि देखती है. इसी वजह से वे हमेशा ही कांग्रेस की स्टार प्रचारक मानी जाती रही हैं. समयसमय पर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता प्रियंका गांधी के राजनीति में आने को ले कर मांग भी करते रहे हैं. कई चुनावों में अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के चुनाव प्रचार में उन्होंने हिस्सा भी लिया है.

अभी तक प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली सीटों पर ही प्रचार अभियान को संभालती रही हैं या फिर परदे के पीछे रह कर काम करती रही हैं, पर साल 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी को राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है. पहली बार प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली से बाहर निकल कर चुनाव प्रचार करेंगी.

शानदार रुतबा

लोकसभा में सब से ज्यादा सीटें होने के चलते उत्तर प्रदेश बहुत अहम हो जाता है. उम्मीद की जा रही है कि प्रियंका गांधी अपनी मां सोनिया गांधी की संसदीय सीट रायबरेली से चुनाव लड़ेंगी. प्रियंका का लंबा छरहरा कद, छोटे बाल और साड़ी पहनने का लुक उन्हें दादी इंदिरा गांधी के काफी करीब लाता है.

प्रियंका गांधी के अंदर संगठन की क्षमता, राजनीतिक चतुराई और बोलने की कला सब से अलग है. लोगों से बात करते समय खिलखिला कर हंसना और अपनी बात बच्चों की तरह जिद कर के मनवाने की कला प्रियंका गांधी को दूसरों से अलग करती है.

वैसे, प्रियंका गांधी जरूरत पड़ने पर अपने तेवर तल्ख करना भी जानती हैं. इस से कार्यकर्ता अनुशासन में रहते हैं. वे देश के सब से बड़े सियासी परिवार की होने के बाद भी सियासी बातें कम करती हैं. विरोधी दल के नेता उन के बारे में कुछ भी कहें, पर वे कभी इन नेताओं पर कमैंट नहीं करती हैं. कभी मीडिया कमैंट करने के लिए कहती भी है तो वे मुसकरा कर बात को टाल जाती हैं.

जोश में है कांग्रेस

प्रियंका गांधी को ले कर कई तरह के नारे कार्यकर्ताओं के बीच बहुत मशहूर हैं. इन में ‘अमेठी का डंका बेटी प्रियंका’ और ‘प्रियंका नहीं यह आंधी है नए युग की इंदिरा गांधी है’ सब से खास हैं.

साल 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रियंका गांधी जब साल 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए आई थीं तो सब से पहले इतने दिन बाद आने के लिए माफी मांगी थी. वे औरतों और बच्चों से बेहद करीब से बात करती हैं. उम्रदराज औरतें जब उन के पैर छूने के लिए आगे बढ़ती हैं तो उन्हें वे रोक लेती हैं. उन के हाथ अपने सिर पर रख लेती हैं.

प्रियंका गांधी के इस प्यार भरे बरताव से गांव की औरतें निहाल हो जाती हैं. कईकई दिन तक वे प्रियंका गांधी की बातें करती नहीं अघाती हैं.

खूब चला जादू

साल 2007 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने अमेठी व रायबरेली इलाके में चुनाव प्रचार किया था. उत्तर प्रदेश के इन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पूरे प्रदेश की 402 विधानसभा सीटों में से 22 सीटें जीती थीं.

अमेठी रायबरेली क्षेत्र में कुल

10 विधानसभा की सीटें थीं. इन में से 7 सीटें कांग्रेस ने जीत ली थीं. इन में बछरांवा से राजाराम, संताव से शिव गणेश लोधी, सरेनी से अशोक सिंह, डलमऊ से अजय पाल सिंह, सलोन से शिवबालक पासी, अमेठी से रानी अमिता सिंह और जगदीशपुर से रामसेवक कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे. 10 में से 7 सीटें जीतना कांग्रेस के लिए चमत्कार जैसा था. कांग्रेस के लिए यह चमत्कार प्रियंका गांधी वाड्रा ने किया था.

प्रियंका गांधी ने इस के पहले साल 2004 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली संसदीय सीट पर चुनाव लड़ रही अपनी मां सोनिया गांधी के चुनाव संचालन को संभाला था, वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में भी प्रियंका गांधी ने रायबरेली और अमेठी तक अपने को समेट कर रखा था.

प्रियंका गांधी के इस सहयोग से राहुल और सोनिया को पूरे प्रदेश में पार्टी के प्रचार का मौका मिला. इस से कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 22 सीटों पर जीत हासिल हुई थी.

प्रियंका गांधी को कांग्रेस का प्रचार प्रचारक माना जाता है. इसी वजह से उन को राजनीति में सीधेतौर पर उतरने की मांग कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के द्वारा होती रहती है. चुनावी राजनीति से दूर रहते हुए प्रियंका गांधी कांग्रेस का प्रचार करती रही हैं.

कामयाबी की धुरी

प्रियंका गांधी की शादी रौबर्ट वाड्रा से हुई है. उन के एक बेटा रेयान और बेटी मिरिया हैं.

प्रियंका जब चुनाव प्रचार में जाती हैं तो आमतौर पर बच्चे उन के साथ होते हैं. वे पौलिटिक्स के साथ अपने परिवार का पूरा ध्यान रखती हैं. वे अपनी मां और भाई के सहयोगी की भूमिका में अपने को रखती रही हैं.

कई बार प्रियंका गांधी बिना कहे ही सारी बात कह जाती हैं. उन का यही अंदाज राहुल गांधी से जुदा लगता है.

राहुल गांधी अपनी बात कहने के लिए भाषण का सहारा लेते हैं. प्रियंका गांधी जब नाराज होती हैं या किसी बात से सहमत नहीं होती हैं तो उन के हावभाव से पता चल जाता है. गुस्से में प्रियंका का चेहरा तमतमा कर लाल हो जाता है.

जानकार लोग कहते हैं कि ऐसे मौके कम ही आते हैं. कार्यकर्ताओं का गुस्सा कम करने के लिए प्रियंका गांधी अपनी मुसकान का सहारा लेती हैं. वे अपने ऊपर भी गुस्सा हो जाती हैं. उन की यह अदा देख कर कार्यकर्ता सबकुछ भूल कर वापस प्रियंका गांधी की बात सुनने लगते हैं.

प्रियंका गांधी की यही सफलता विरोधी दलों के लिए सोचने का विषय बन जाता है. सभी दलों को लगता है कि अगर प्रियंका गांधी ने चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली तो उन के सामने मुश्किल खड़ी हो जाएगी.

एक ऐसी भी औरत

बीना कानपुर शहर के मोहल्ला दीनदयालपुरम की केडीए कालोनी निवासी मेवालाल की बड़ी बेटी थी. बीना के अलावा उस की 2 और बेटियां थीं. बेटियों से छोटा एक बेटा था करन. मेवालाल की पत्नी कुसुम घरेलू महिला थी जबकि वह फेरी लगा कर कपड़े बेचा करता था.

बीना जवान हो चुकी थी. मेवालाल चाहता था कि कोई सही लड़का मिल जाए तो वह उस के हाथ पीले कर दे. थोड़ी खोजबीन के बाद उसे कानपुर देहात के कस्बा मूसानगर निवासी भीखाराम का बड़ा बेटा रामबाबू पसंद आ गया. भीखाराम के पास 3 बीघा खेती की जमीन थी और कस्बे के मुर्तजा नगर में अपना मकान भी था.

रामबाबू व उस के घर वालों ने जब खूबसूरत बीना को देखा तो वह उन्हें पसंद आ गई. बीना को देख कर भीखाराम बिना किसी दहेज के बेटे की शादी करने के लिए तैयार हो गया. अंतत: सामाजिक रीतिरिवाज से 10 जून, 2008 को बीना और रामबाबू का विवाह हो गया. इस शादी से रामबाबू भले ही खुश था लेकिन बीना खुश नहीं थी. इस की वजह यह थी कि बीना ने जिस तरह पढ़ेलिखे और स्मार्ट पति के सपने संजोए थे, रामबाबू वैसा नहीं था.

बीना ससुराल में हफ्ते भर रही, पर वह पति के साथ भावनात्मक रूप से नहीं बंध सकी. हफ्ते बाद वह मायके आई तो उस का चेहरा उतरा हुआ था. कुसुम ने कारण पूछा तो वह रोआंसी हो कर बोली, ‘‘मां, तुम लोगों ने सिर्फ ये देखा कि वे दहेज नहीं मांग रहे, पर यह नहीं देखा कि लड़का कैसा है.’’

‘‘सब कुछ तो है उन के पास, तुझे किस चीज की कमी है. तुझे तो पता है कि अभी तेरी 2 बहनें और हैं. हमें उन्हें भी ब्याहना है.’’ कुसुम ने अपनी मजबूरी जाहिर की तो बीना चुप हो गई.

मां के इस जवाब के बाद बीना ने हालात से समझौता कर लिया. वह ससुराल में पति के साथ रहने लगी. ससुराल का वातावरण दकियानूसी था. बातबात पर रोकटोक होती थी. पति की कमाई भी सीमित थी, जिस के कारण बीना को अपनी इच्छाएं सीने में ही दफन करनी पड़ती थीं.

वक्त के साथ बीना 2 बच्चों शिवम और शिवानी की मां बन गई. परिवार बढ़ा तो खर्चे भी बढ़ गए. जब बीना को लगा कि रामबाबू की कमाई से घर का खर्च नहीं चल पाएगा तो उस ने पति को कानपुर शहर जा कर नौकरी या कोई काम करने की सलाह दी. पत्नी की यह बात रामबाबू को भी ठीक लगी.

रामबाबू का एक दोस्त था सजीवन, जो कानपुर शहर की योगेंद्र विहार कालोनी में रहता था. वह किसी फैक्ट्री में काम करता था. कहीं काम दिलाने के संबंध में उस ने सजीवन से बात की. सजीवन ने उसे सुझाव दिया कि वह साइकिल मरम्मत का काम शुरू करे. पंक्चर लगाने आदि से उसे अच्छी कमाई होने लगेगी.

रामबाबू को दोस्त की सलाह पसंद आ गई, उस ने खाडे़पुर कालोनी मोड़ पर साइकिल मरम्मत की दुकान खोल ली और योगेंद्र विहार कालोनी में एक कमरा किराए पर ले कर रहने लगा.

रामबाबू का साइकिल रिपेयरिंग का काम अच्छा चलने लगा. पैसा आने लगा तो रामबाबू पत्नी और बच्चों को भी शहर ले आया. शहर आ कर बीना खुश थी. शहर आने के बाद वह बनसंवर कर रहने लगी. बीना ने घर के पास ही स्थित शिशु मंदिर में बच्चों का दाखिला करा दिया. बच्चों को स्कूल भेजने व लाने का काम वह खुद करती थी.

पिंटू नाम का एक युवक रामबाबू की दुकान पर अपनी साइकिल रिपेयर कराने आता था. पिंटू बर्रा 8 में रहता था और नौबस्ता स्थित एक प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करता था. पिंटू की रामबाबू से दोस्ती हो गई. जरूरत पड़ने पर रामबाबू पिंटू से पैसे भी उधार ले लेता था. कभीकभी दोनों साथ बैठ कर शराब भी पी लेते थे. पीनेपिलाने का खर्च पिंटू ही उठता था.

एक दिन पिंटू दुकान पर आया तो रामबाबू बोला, ‘‘पिंटू, आज मेरे बेटे शिवम का जन्मदिन है. मेरी तरफ से आज तुम्हारी दावत है. शाम को फैक्ट्री से सीधे घर आ जाना, भूलना मत.’’

‘‘ठीक है, मैं जरूर आऊंगा.’’ कहते हुए पिंटू फैक्ट्री चला गया. शाम को पिंटू गिफ्ट ले कर रामबाबू के घर पहुंच गया. रामबाबू उस का ही इंतजार कर रहा था. उस ने पिंटू को गले लगाया फिर पत्नी को आवाज दी, ‘‘बीना, देखो तो कौन आया है.’’

बेटे का जन्मदिन होने की वजह से बीना पहले से ही सजीधजी थी. पति की आवाज सुन कर वह आ गई. वह पिंटू की ओर देख कर बोली, ‘‘मैं ने आप को पहचाना नहीं.’’

‘‘भाभीजी, जब मैं आप के घर कभी आया ही नहीं तो पहचानेंगी कैसे? मैं रामबाबू भैया का दोस्त हूं, नाम है पिंटू.’’ वह बोला.

पिंटू की बीना से यह पहली मुलाकात थी. पहली ही मुलाकात में बीना पिंटू के दिलोदिमाग पर छा गई. रामबाबू ने पिंटू की खूब खातिरदारी की. उस समय बीना भी मौजूद रही. इस के बाद पिंटू ने ठान लिया कि वह किसी भी तरह बीना को हासिल कर के रहेगा.

वह उसे हासिल करने का प्रयास करने लगा. पिंटू जानता था कि बीना तक पहुंचने का रास्ता रामबाबू ही है. अत: उस ने रामबाबू को शराब का आदी बनाने की सोची. इसी के चलते वह शराब की बोतल ले कर रामबाबू के घर जाने लगा. घर में दोनों बैठ कर शराब पीते फिर खाना खाते. इस बीच पिंटू की निगाहें बीना के जिस्म पर ही गड़ी रहती थीं. शराब के नशे में पिंटू कभीकभी बीना से मजाक व छेड़खानी भी कर लेता था.

बीना जल्द ही पिंटू के आने का मकसद समझ गई थी. वह बीना की आर्थिक मदद भी करने लगा. बच्चों की जरूरत का सामान और खानेपीने की चीजें भी लाने लगा. धीरेधीरे पिंटू ने अपने अहसानों व लच्छेदार बातों से बीना के दिल में जगह बना ली. अब बीना भी पिंटू से खुल कर हंसनेबोलने लगी थी.

एक दिन बीना सजधज कर बाजार के लिए घर से निकलने वाली थी, तभी पिंटू आ गया. वह बीना को एकटक देखता रहा, फिर बोला, ‘‘भाभी बनठन कर किस पर बिजली गिराने जा रही हो?’’

‘‘मक्खनबाजी बंद करो, अभी मुझे कहीं जाना है. बाद में बात करेंगे. ओके…’’ कहते हुए बीना बाजार के लिए चल दी. पिंटू भी वहां से चला गया.

एक दिन बीना का पति रामबाबू मूसानगर गया हुआ था और बच्चे स्कूल. बीना घर के काम निपटाने के बाद बच्चों को स्कूल से लाने की तैयारी कर रही थी, तभी पिंटू आ गया. इस अकेलेपन में पिंटू खुद को रोक नहीं सका और उस ने बीना को अपनी बांहों में भर लिया. बीना ने कसमसा कर हलका प्रतिरोध किया, लेकिन पिंटू की पकड़ मजबूत थी सो वह छूट नहीं सकी.

हकीकत में बीना पिंटू की बांहों में एक अकल्पनीय सुख महसूस कर रही थी. यही वजह थी कि उस के सोए हुए अरमान जाग उठे. वह भी पिंटू से अमरबेल की तरह लिपट गई. इस के बाद उन्माद के तूफान में उन की सारी मर्यादाएं बह गईं.

उस दिन बीना तो मर्यादा भूल ही गई थी, पिंटू भी भूल गया था कि वह अपने दोस्त की गृहस्थी में आग लगा रहा है. जल्दी ही बीना पिंटू के प्यार में इतनी दीवानी हो गई कि वह पति से ज्यादा प्रेमी का खयाल रखने लगी. पिंटू भी अपनी कमाई बीना पर खर्च करने लगा. बीना जो भी डिमांड करती, पिंटू उसे पूरी करता. रामबाबू उन दोनों के मिलन में बाधक न बने, इसलिए पिंटू रामबाबू को शराब की दावत दे कर उस का विश्वासपात्र दोस्त बना रहता था.

ऐसे रिश्तों को ज्यादा दिनों तक छिपा कर नहीं रखा जा सकता, देरसबेर पोल खुल ही जाती है. जब पिंटू का रामबाबू की अनुपस्थिति में बीना के यहां ज्यादा आनाजाना हो गया तो पड़ोसियों को शक होने लगा. कालोनी में उन के संबंधों को ले कर कानाफूसी शुरू हो गई. किसी तरह बात रामबाबू के कानों तक भी पहुंच गई. रामबाबू अपने दोस्त पिंटू पर अटूट विश्वास करता था, इसलिए उस ने सुनीसुनाई बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. लेकिन उस के मन में शक का कीड़ा जरूर कुलबुलाने लगा.

शक के आधार पर एक रोज रामबाबू ने बीना से पिंटू के बारे में पूछा तो वह तुनक कर बोली, ‘‘पिंटू तुम्हारा दोस्त है. तुम्हीं उसे ले कर घर आए थे. वह आता है तो मैं उस से हंसबोल लेती हूं. पासपड़ोस के लोग जलते हैं, पड़ोसियों की झूठी बातों में आ कर तुम भी मुझ पर शक करने लगे.’’

‘‘मैं शक नहीं कर रहा, केवल पूछ रहा हूं.’’ रामबाबू प्यार से बोला.

‘‘पूछना क्या है, अगर तुम्हें मुझ से ज्यादा पड़ोसियों की बातों पर भरोसा है तो पिंटू को घर आने से मना कर दो. लेकिन सोच लो, पिंटू हमारी मदद भी करता है और तुम्हारी पार्टी भी. तुम्हारी कमाई से मकान का किराया, बच्चों की फीस और घरगृहस्थी का खर्च क्या चल पाएगा?’’

पत्नी की बात पर विश्वास कर रामबाबू शांत हो गया.

एक दिन रामबाबू दुकान पर गया और काम भी किया. लेकिन 2 घंटे बाद उसे लगा कि बदन टूट रहा है और बुखार है. वह दुकान बंद कर के घर पहुंच गया. कमरा अंदर से बंद था. कुंडी खुलवाने के लिए उस ने जंजीर की ओर हाथ बढ़ाया ही था कि तभी उसे कमरे के अंदर से पत्नी के हंसने की आवाज आई. रामबाबू ने अपना हाथ रोक लिया. उस ने दरवाजे की झिर्री से देखा तो दंग रह गया. उस की पत्नी आपत्तिजनक स्थिति में थी.

रामबाबू का खून खौल उठा. लेकिन उस समय वह बोला कुछ नहीं. वह कुछ देर जड़वत खड़ा रहा. फिर खटखटाने पर दरवाजा खुला तो उसे देख कर बीना व पिंटू अपराधबोध से कांपने लगे. दोनों ने रामबाबू से माफी मांगी और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का वादा किया.

दोनों को माफ करने के अलावा रामबाबू के पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था. पत्नी की बेवफाई से रामबाबू को गहरी ठेस लगी थी. उसे अब अपनी इज्जत बचानी थी, इसलिए उस ने कानपुर शहर छोड़ कर घर जाने का निश्चय कर लिया.

बीना को घर वापस जाने की बात पता चली तो उस ने बच्चों की पढ़ाई का सवाल उठाया. लेकिन रामबाबू मानने को तैयार नहीं हुआ. पत्नी और बच्चों को साथ ले कर वह मूसानगर स्थित अपने घर आ गया. रामबाबू खेतीकिसानी व मजदूरी कर के बच्चों का पालनपोषण करने लगा. उस ने दोनों बच्चों का दाखिला कस्बे के प्राइमरी स्कूल में करा दिया.

बीना के गांव चले जाने के बाद पिंटू परेशान हो उठा. उसे बीना की याद आने लगी. पिंटू से जब नहीं रहा गया तो वह बीना की ससुराल पहुंच गया. वहां रामबाबू ने उसे बेइज्जत किया और बीना से नहीं मिलने दिया. इस के बाद तो यह सिलसिला ही बन गया. पिंटू आता और बेइज्जत हो कर वापस हो जाता.

कुछ महीने ससुराल में रहने के बाद बीना ने विरोध शुरू कर दिया. दरअसल बीना ससुराल में कैदी जैसा जीवन व्यतीत कर रही थी. घर से बाहर निकलने पर पाबंदी थी, जबकि वह स्वतंत्र विचरण करना चाहती थी. साथ ही वह अभावों से भी जूझ रही थी.

एक दिन बीना ने रामबाबू से साफ कह दिया कि वह शहर जा कर खुद कमाएगी और अपना व बच्चों का पालनपोषण करेगी. रामबाबू ने विरोध किया लेकिन वह नहीं मानी. बीना ससुराल छोड़ कर कानपुर शहर चली गई.

नौबस्ता थाने के अंतर्गत धोबिन पुलिया कच्ची बस्ती में किराए पर मकान ले कर वह अकेली ही रहने लगी. उस ने नौकरी के लिए दौड़धूप की तो उसे आवासविकास नौबस्ता स्थित एक प्लास्टिक फैक्ट्री में नौकरी मिल गई.

नौकरी मिल जाने के बाद बीना अपने दोनों बच्चों को भी साथ रखना चाहती थी. लेकिन रामबाबू ने बच्चों को उस के साथ भेजने से साफ इनकार कर दिया. लेकिन बच्चों के लिए उस का मन तड़पता तो वह जबतब बच्चों से मिलने जाती और उन्हें खर्चा दे कर चली आती. कभीकभी वह बच्चों से मोबाइल पर भी बात कर लेती थी.

पिंटू को जब पता चला कि बीना वापस कानपुर शहर आ गई है तो उस ने फिर से बीना से मिलनाजुलना शुरू कर दिया. पर बीना ने उसे पहले जैसी तवज्जो नहीं दी.

बीना जिस प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करती थी, वहीं पर 25-26 साल का सुनील भी काम करता था. सुनील बीना के घर से कुछ दूरी पर कच्ची बस्ती में ही रहता था.

बीना और सुनील हंसमुख स्वभाव के थे, इसलिए दोनों में खूब पटती थी. छुट्टी वाले दिन वह सुनील के साथ घूमने भी जाती थी, सुनील उसे चाहने लगा था.

धीरेधीरे सुनील और बीना नजदीक आते गए और दोनों में नाजायज संबंध बन गए. सुनील सुबह बीना के घर आता. दोनों साथ चायनाश्ता करते और फिर साथसाथ फैक्ट्री चले जाते. शाम को भी सुनील बीना का घर छोड़ देता. कभीकभी वह बीना के घर रुक जाता, फिर रात भर दोनों मौजमस्ती करते.

बीना के सुनील के साथ संबंध बन गए तो उस ने पहले प्रेमी पिंटू को भाव देना बंद कर दिया. अब पिंटू जब भी उस के पास आता तो बीना विरोध करती. वह उसे घर में शराब पीने को भी मना करती.

पिंटू को वह अपने पास फटकने नहीं देती थी. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि बीना में इतना बड़ा बदलाव कैसे आ गया. उस ने गुप्त रूप से पता किया तो सच्चाई सामने आ गई. उसे पता चल गया कि बीना के सुनील से संबंध बन गए हैं.

सुनील को ले कर बीना और पिंटू में झगड़ा होने लगा. पिंटू बीना पर दबाव डालने लगा कि वह सुनील का साथ छोड़ दे लेकिन बीना इस के लिए तैयार नहीं थी. प्रेमिका की इस बेवफाई से पिंटू परेशान रहने लगा.

10 फरवरी, 2018 को पिंटू रात 8 बजे शराब के ठेके से बोतल खरीद कर बीना के घर पहुंचा तो वहां सुनील मौजूद था. सुनील वहां से चला गया तो पिंटू ने बीना से सुनील के बारे में पूछा. बीना ने उसे सब कुछ सच बता दिया. इस पर पिंटू को गुस्सा आ गया.

पिंटू ने तेज धार वाला चाकू साथ लाया था. उस ने चाकू निकाला और उस की गरदन पर वार कर दिया. बीना जमीन पर गिर गई. उस के बाद पिंटू बीना के सीने पर बैठ गया और यह कहते हुए उस की गरदन रेत दी कि बेवफाई की सजा यही है. बीना की हत्या करने के बाद पिंटू ने शराब पी फिर बाहर से दरवाजे की कुंडी बंद कर फरार हो गया.

11 फरवरी की सुबह सुनील बीना के घर पहुंचा तो दरवाजे की कुंडी बाहर से बंद थी. वह कुंडी खोल कर कमरे में गया तो उस के होश उड़ गए. फर्श पर बीना की खून से सनी लाश पड़ी थी. सुनील ने पहले पासपड़ोस के लोगों फिर थाना नौबस्ता पुलिस को सूचना दी.

सूचना पाते ही नौबस्ता थानाप्रभारी अखिलेश जायसवाल पुलिस टीम के साथ आ गए. उन्होंने महिला की हत्या की सूचना अपने अधिकारियों को दे दी. कुछ देर बाद ही एसएसपी अखिलेश कुमार मीणा, एसपी (साउथ) अशोक कुमार वर्मा वहां पहुंच गए.

मृतका की उम्र 32 वर्ष के आसपास थी. फोरैंसिक टीम ने भी मौके पर जांच की. पुलिस अधिकारियों ने सूचना देने वाले सुनील तथा मृतका के पति रामबाबू से पूछताछ की. रामबाबू ने पत्नी की हत्या का शक अपने दोस्त पिंटू करिया पर जताया. रामबाबू की तहरीर पर पुलिस ने पिंटू करिया के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया और उस की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी.

शाम करीब 5 बजे नौबस्ता थानाप्रभारी अखिलेश जायसवाल ने मुखबिर की सूचना पर पिंटू करिया को नौबस्ता के दासू कुआं के पास से गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने सहज ही अपना जुर्म कबूल कर लिया. उस ने बताया कि बीना ने उस के साथ विश्वासघात किया था. इसी खुन्नस में उस ने उसे मार डाला.

पुलिस ने पिंटू की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू और खून सने कपड़े भी बरामद कर लिए. पूछताछ के बाद पुलिस ने 12 फरवरी, 2018 को उसे कानपुर कोर्ट में रिमांड मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया गया. कथा संकलन तक उस की जमानत नहीं हुई थी.

 -कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

भाजपा के राज में सामाजिक विकास नहीं ब्राह्मणवाद का ढोंग बढ़ा?

छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में 15-15 साल, गुजरात में 20 साल और राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड जैसे राज्यों में राज कर चुकी भारतीय जनता पार्टी के समय में भले कुछ और न हुआ हो, वह दलित, पिछड़ी जातियों का हिंदूकरण कराने में जरूर कामयाब हुई है. निचली और पिछड़ी जातियों में हिंदुत्व का उभार हुआ है.

मिडिल क्लास में हिंदू धार्मिकता बढ़ रही है. इस के देशभर में प्रचारप्रसार में भाजपा के राज वाले राज्यों का बड़ा योगदान रहा है. निचली, पिछड़ी जातियों के हिंदूकरण की वजह से ऊंची जातियों में भाजपा के प्रति नाराजगी जाहिर होने लगी थी.

गुजरात दंगों ने गुजराती समाज का हिंदूकरण करा दिया था. भाजपा ने हिंदुत्व विचारधारा को घरघर पहुंचाया. दलित, पिछड़ों को मूर्तियां दी जा रही हैं.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज सिंह चौहान ने अपने 15 साल के राज में सब से ज्यादा धार्मिक यात्राएं कराईं. वे खुद पिछड़े तबके से होते हुए भी हवनयज्ञ, तीर्थयात्राएं, मंदिर परिक्रमा करते रहे और गौ व ब्राह्मण महिमा का गुणगान करते रहे.

शिवराज सिंह चौहान ने दलितों को कुंभ स्नान कराने के पीछे इस तबके का शुद्धीकरण कर उसे ब्राह्मण बनाया था. हिंदू रीतिरिवाजों से जोड़ कर हिंदू धर्म में संस्कारित कराया था ताकि दलित तबका ब्राह्मणों की सेवा कर सके और दानदक्षिणा दे.

मुख्यमंत्री द्वारा सांसारिक सुखों का त्याग का दावा करने करने वाले 5 साधुओं तक को मंत्री बना दिया गया.

दलित, पिछड़े नेताओं की मूर्तियां लगाई गईं और इन तबके के लोगों को मूर्ति पूजा की ओर धकेलने की कोशिशें की गईं. चुनावों में हनुमान को दलित, वंचित जाति का बता कर इस तबके को हनुमान की पूजा करने और मंदिर बनाने का संदेश दिया गया.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आएदिन हिंदू धर्म की बात करते रहते हैं. राजस्थान में वसुंधरा राजे मंदिरों की परिक्रमा करती रहीं. दलितों और पिछड़ों का शुद्धीकरण कर उन्हें ब्राह्मण बनाने की कोशिश होती रही.

यह अलग बात है कि दलितों और मुसलिमों पर हमले जारी रहे. दलित और पिछड़े तबके वाले हिंदू धर्म के संस्कारों को अपनाने में हिचकिचाते थे या डरते थे, उन्हें भाजपा सरकार ने हौसला दिया.

भाजपा के पार्टी दफ्तरों में दलित, पिछड़े तबके के नेता, कार्यकर्ता माथे पर तिलक, भगवा जैकेट, कुरतापाजामा पहने नजर आने लगे. मौब लिंचिंग की घटनाओं में पिछड़े और दलित जातियों के नौजवान ज्यादा भागीदार पाए गए. पिछड़ी जातियों के नौजवान गौ रक्षक बना दिए गए.

उत्तर प्रदेश के दादरी में मोहम्मद अखलाक नामक शख्स के घर में घुस कर भीड़ ने लाठी और ईंटों से हमला किया गया और फिर उस की हत्या कर दी गई.

अखलाक का बेटा दानिश उन्हें बचाने आया तो उसे घायल कर दिया गया. आरोपी पिछड़ी जातियों के निकले. इन जातियों के कुछ नौजवानों ने अखलाक पर गौ मांस खाने और घर में रखने का आरोप लगाया और गांव के मंदिर में लाउडस्पीकर से ऐलान कर के भीड़ को इकट्ठा किया गया.

सहारनपुर में दलित बस्ती में तोड़फोड़ की गई और आगजनी का मामला भी दलितों पर हमले की बड़ी घटना थी. यहां महाराणा प्रताप जयंती पर जुलूस निकाला गया और उन्हें हिंदू धर्म का रक्षक बताया गया. यह जुलूस दलित बस्ती से निकला तो दोनों समुदायों का झगड़ा हो गया. बाद में दलितों के घर जला दिए गए और उन के घरों में तोड़फोड़ की गई.

इसी तरह राजस्थान के अलवर में गौ गुंडों द्वारा 55 साल के पहलू खान की हत्या कर दी गई. पहलू खान गायों को ले कर अपने घर जा रहा था.

इन्हीं दिनों शंभूलाल रैगर ने अफराजुल नामक युवक की लव जिहाद के नाम पर हत्या कर दी थी. शंभूलाल रैगर ने अफराजुल को न केवल मौत के घाट उतारा, बल्कि इस दिल दहला देने वाले अपराध का वीडियो बना कर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड भी किया.

सरकारों का ऐसी घटनाओं को समर्थन मिलता रहा और आरोपियों का बचाव किया गया. सहारनपुर घटना में दलित युवा नेता चंद्रशेखर को देशद्रोह का मामला बना कर जेल भेज दिया गया.

टैलीविजन चैनलों पर शनि की दशा पर प्रवचन देने और उपाय बताने वाले मदन दाती को महामंडलेश्वर बना दिया गया.

मदन दाती राजस्थान के पाली के मेघवाल जाति के दलित समुदाय से हैं. यह बात अलग है कि अब वे अपने आश्रम में रह रही एक युवती के साथ बलात्कार मामले में फंसे हुए हैं और अपने सहयोगियों के साथ पैसों के लेनदेन मामले में विवादों में भी हैं.

मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जो विधायक चुन कर आ रहे हैं, वे अब पिछड़े, दलित नहीं, ब्राह्मण बन चुके हैं. ज्यादातर की 2-3 पीढि़यां सामाजिक और माली तौर पर बदल गई हैं.

लेकिन अभी भी इन तबकों का माली, सामाजिक विकास नहीं हो पाया. भाजपा ने इसे सामाजिक समरसता का नाम जरूर दिया, पर दलित दूल्हों को घोड़ी से उतारे जाने की सब से ज्यादा वारदातें भाजपा के राज वाले राज्यों में ही हुईं.

भाजपा के राज वाले राज्य शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मामलों में पिछड़े हुए हैं. इन राज्यों में  निचली व पिछड़ी जातियों के लड़केलड़कियों की स्कूल छोड़ने की दर सब से ज्यादा है.  इन तबकों के हाथों में ‘गीता’, ‘रामायण’ तो थमाईर् जा रही है, पर पढ़ाईलिखाई, रोजगार का इंतजाम कर के असली सामाजिक, माली विकास से अभी भी कोसों दूर हैं.

ब्यूटी पार्लर गांव गांव फैलता कारोबार

आज के बदलते दौर में ब्यूटी पार्लर रोजगार का एक बड़ा जरीया बन गया है. शहरों से फैलता हुआ यह कारोबार अब गांवकसबों तक में जा पहुंचा है.

शहरों में बड़ीबड़ी कंपनियों ने इस मेकअप कारोबार को संभाल लिया है. लोग ब्रांडैड कंपनियों के ब्यूटी पार्लर में जा कर ही मेकअप कराना चाहते हैं. इस से अलग कसबों और गांवों में छोटे और कम लागत से शुरू होने वाले ब्यूटी पार्लर में काम बढ़ रहा है.

ऐसे में मेकअप की अच्छी जानकारी रखने वाली लड़कियां गांवकसबों के छोटे हाटबाजारों में ब्यूटी पार्लर का कारोबार बढ़ा रही हैं.

गांवकसबों में रहने वाली लड़कियां ब्यूटी पार्लर चलाने की ट्रेनिंग ले कर अपना कारोबार शुरू कर सकती हैं.

आज हर उम्र के लोग ब्यूटी पार्लर में जा कर सजनासंवरना चाहते हैं, इसलिए इस कारोबार की संभावनाएं भी काफी बढ़ गई हैं. अब ब्यूटी पार्लर चलाने की जानकारी और उस के कामकाज को सिखाने के लिए छोटेछोटे शहरों में ट्रेनिंग स्कूल भी खुल गए हैं.

क्या कर सकती हैं आप

मेकअप आर्टिस्ट, मसाज थेरैपिस्ट, ब्यूटी टीचर, कौस्मैटिक काउंसलर और ब्यूटी मैनेजर जैसे काम ब्यूटी पार्लर का कोर्स कर के शुरू किए जा सकते हैं.

ब्यूटी पार्लर के क्षेत्र में  कारोबार कर के आप अपना भी ब्यूटी पार्लर खोल सकती हैं. इस के लिए हेयर स्टाइलिस्ट, स्किन ट्रीटमैंट स्पैशलिस्ट, पर्सनल ग्रूमिंग स्पैशलिस्ट, मैनीक्योर व पैडीक्योर स्पैशलिस्ट का काम भी सीखा जा सकता है. इन सब को भलीभांति सीख कर अपना ब्यूटी पार्लर खोला जा सकता है.

इस के अलावा किसी दूसरे के ब्यूटी पार्लर में भी नौकरी की जा सकती है. अगर आप अपने अंदर लिखने की कूवत को बढ़ा लेती हैं तो अखबारों और पत्रपत्रिकाओं में ब्यूटी निखारने के तरीके लिख कर भी घर बैठे कमाई कर सकती हैं.

जरूरत इस बात की है कि इस बारे में अच्छे इंस्टीट्यूट से ही ट्रेनिंग हासिल करें. आज ब्यूटी पार्लर का कारोबार जिस तरीके से बढ़ा है, उसी जोर से खूबसूरती निखारने के सामान बनाने का काम भी बढ़ गया है.

बहुत सारे लोग इस तरह का सामान भी बनाते हैं जो खूबसूरती निखारने के बजाय उसे खराब कर देते हैं इसलिए आप को अपने काम की सही जानकारी होनी चाहिए. सही जानकारी होने से काम अच्छा होता है और लोग आप के काम की तारीफ भी करते हैं जिस से आप का कारोबार भी बढ़ता है.

कहां से करें कोर्स

मेकअप प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी लैक्मे ने अब ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भी खोले हैं. इन में कई तरह के कोर्स भी सिखाए जाते हैं. यहां पर अलगअलग मीआद के कोर्स कराए जाते हैं.

इंदिरानगर, लखनऊ में लैक्मे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट चलाने वाली अनीता मिश्रा कहती हैं, ‘‘आज के दौर में मेकअप के क्षेत्र में कैरियर के मौके बढ़ रहे हैं. इस क्षेत्र में काम शुरू करने से पहले पूरी जानकारी का होना जरूरी है.’’

अच्छे ब्यूटी पार्लर के जरीए भी ब्यूटी ट्रेनिंग ली जा सकती है. इस तरह के कोर्स करने की अलगअलग फीस ली जाती है.

अनीता मिश्रा आगे कहती हैं कि काबिल लड़कियों के लिए लैक्मे की ओर से स्कौलरशिप देने का भी इंतजाम है.

कितना लगता है पैसा

अगर किसी छोटे कसबे में ब्यूटी पार्लर खोलना है तो जगह को छोड़ कर 50,000 से 60,000 रुपए में ब्यूटी पार्लर खोला जा सकता है. इस के लिए बिजलीपानी का अच्छा इंतजाम होना चाहिए. इस के लिए 800 से 2,000  वर्गफुट की जगह जरूर होनी चाहिए.

ब्यूटी पार्लर जिस जगह पर खोला जाता है, वह जगह भी साफसुथरी होनी चाहिए ताकि लड़कियों और औरतों को वहां जाने में किसी तरह की कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े.

ब्यूटी पार्लर को कुछ लोग सही नहीं मानते हैं इसलिए ब्यूटी पार्लर चलाने वाली को बहुत सावधान रहने की जरूरत होती है. लेडी ब्यूटी पार्लर में आदमियों का घुसना न के बराबर होना चाहिए.

अभी तक छोटी जगहों पर हेयर कटिंग, आईब्रो सैटिंग, हेयर कलर, मेहंदी, ब्राइडल मेकअप और फेसियल का ज्यादा जोर रहता है.

इस के अलावा शादीब्याह के मौके पर लोग पैडीक्योर और मैनीक्योर भी कराते हैं. इस तरह का ब्यूटी पार्लर चला कर 25,000 से 30,000 रुपए हर महीने कमाए जा सकते हैं.

यही वजह है कि अब ब्यूटी पार्लर का कोर्स कर के अपने पैरों पर खड़ी होने वाली लड़कियों व औरतों की तादाद बढ़ती जा रही है.

सब से बड़ी बात तो यह है कि कुंआरी लड़कियों के अलावा शादीशुदा औरतें  भी इस क्षेत्र में अपना एक अलग ही मुकाम बना सकती हैं. यह घर की आमदनी बढ़ाने का सब से बढि़या तरीका है.

देखें अक्षय की आने वाली फिल्म ‘सूर्यवंशी’ की जबरदस्त झलक

अक्षय कुमार अपनी नई फिल्म ‘सूर्यवंशी’ के साथ बड़े पर्दे पर जल्दी ही नजर आने वाले हैं. फिल्म की रिलीज डेट भी अनाउंस कर दी गई है. रोहित शेट्टी के निर्देशन में बन रही ये फिल्म 2020 में ईद के मौके पर सिनेमा घरों में लगेगी.  फिल्म का फर्स्ट लुक शेयर करते हुए खुद अक्षय कुमार ने इसकी जानकारी दी है. फिल्म में अक्षय, वीर सूर्यवंशी नाम के पुलिस वाले के किरदार में नजर आएंगे.

इस फिल्म के प्रोड्यूसर करण जौहर हैं. फिल्म की शूटिंग गोवा में शुरू हो गई है. आपको बता दें कि रोहित शेट्टी के निर्देशन में रणवीर स्टारर फिल्म सिंबा में ही इस फिल्म की घोषणा कर दी गई थी. इस फिल्म में अक्षय की एक छोटी सी झलक दिखाई गई थी. दर्शकों ने सिंबा को बेहद पंसद किया और बौक्स औफिस पर भी फिल्म ने धमाल मचाया.

 

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Here’s Bajirao, Simmba and Sooryavanshi along with our creator, @itsrohitshetty signing off from the #Umang show tonight 🙌🏻

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रोहित शेट्टी सिंबा के अलावा दिलवाले, सिंघम, चेन्नई एक्सप्रेस, गोलमाल सीरीज, बोल बच्चन और औल द बेस्ट जैसी जबरदस्त फिल्में दे चुके हैं. उनकी सभी फिल्में बौक्स औफिस पर अच्छी चली हैं.

 

आम्रपाली दुबे का ये वीडियो हुआ वायरल

भोजपुरी सिनेमा में आम्रपाली दुबे और दिनेश लाल यादव की जोड़ी सुपरहिट है. हाल ही में ये दोनो कलाकार ‘निरहुआ चलल लंदन’ फिल्म  में नजर आए थे. बौक्स औफिस पर इस फिल्म को काफी अच्छा रिस्पौन्स भी मिला था.

amrpali dubey

आपको बता दें, आम्रपाली दुबे का नया वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे निरहुआ के गाना पर जमकर अदाएं दिखा रही हैं और इस वीडियो को खूब पसंद भी किया जा रहा है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें वे भरपूर मस्ती करती नजर आ रही हैं.

 

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आम्रपाली दुबे  ने इस वीडियो के कैप्सन में लिखा हैः निरहुआ फैन. इस तरह आम्रपाली दुबे एक बार फिर अपने फैन्स का दिल जीतने में कामयाब रही हैं.

कब बनेगी राकेश शर्मा की बायोपिक फिल्म?

रोनी स्क्रूवाला ने करीबन दो साल पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा की बायोपिक फिल्म बनाने का ऐलान किया था, मगर अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि इस फिल्म में अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का किरदार कौन निभाएगा? जब फिल्म के निर्माण की घोषणा हुई थी, उस वक्त इस फिल्म में राकेश शर्मा का किरदार आमिर खान निभा रहे थे. पर बाद में आमिर खान ने इस फिल्म से यह कहकर किनारा कर लिया कि वह ‘महाभारत’ पर फिल्म करने जा रहे हैं, जिसमें वह कृष्ण का किरदार निभाएंगे.

इस फिल्म से आमीर खान के हटने के बाद शाहरुख खान जुड़े. मगर ‘जीरो’  की असफलता के बाद शाहरुख खान ने भी इस फिल्म को छोड़ दिया. उसके बाद इस फिल्म के साथ विक्की कौशल को जोड़ा गया. विक्की कौषल ने तो खुशी जाहिर की थी कि उन्हे राकेश षर्मा का किरदार निभाने पर गर्व होगा. मगर अब खबर है कि इस फिल्म से विक्की कौशल ने भी दूरी बना ली है.

बहरहाल,सूत्र दावा कर रहे हैं कि अब इस फिल्म में राकेश शर्मा का किरदार रणबीर कपूर निभाएंगे. सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि निर्माता रौनी स्क्रूवाला ने फिल्म को फिल्माने के लिए मुंबई के फिल्म सिटी स्टूडियो में सेट भी लगा लिया है. पर बौलीवुड का एक तबका अभी भी मानने को तैयार नहीं है कि इस फिल्म का निर्माण जल्द शुरू होगा?

भारत की शूटिंग के लिए गोवा पहुंचे सलमान, वायरल हुआ ये लुक

बौलीवुड सुपरस्टार सलमान खान फिर से फिल्म भारत की शूटिंग में बिजी हो गए हैं. फिल्म के अगले शेड्यूल की शूटिंग गोवा में हो रही है. फिल्म की कास्ट गोवा पहुंच चुकी है. इस बीच सलमान खान का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वे आर्चरी करते नजर आ रहे हैं. सलमान फिल्मों की तहर इसमें भी परफेक्ट खेल दिखाते नजर आ रहे हैं.

वायरल वीडियो में सलमान स्पोर्टी लुक में हैं. वे शूटिंग के बीच में खुद को एंटरटेन करते नजर आ रहे हैं. वे एकाग्रता के साथ निशाना साधते दिखे. उन्होंने पहले ही एटेंम्प्ट में एक दम सटीक निशाना लगाया. वहां मौजूद कास्ट के बाकी सदस्य सलमान की हौसलाफजाई कर रहे थे. सलमाने के परफ्केट निशाने के बाद सभी उन्हें चीयर करने लगे. सलमान को निशानेबाजी का शौक काफी पहले से है. यही नहीं वे खाली समय में पेंटिंग करना भी खूब पसंद करते हैं.

 

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फिल्म भारत की बात करें तो ये एक साउथ कोरियन फिल्म एन ओड टू माई फादर का हिंदी रिमेक है. फिल्म में आजादी के बाद देश में हुए बड़े इवेंट्स को एक आम नागरिक के दृष्टिकोण से दर्शाती नजर आएगी. फिल्म इस साल ईद के मौके पर रिलीज की जाएगी. फिल्म की कास्ट में सलमान के अलावा कटरीना कैफ, दिशा पाटनी, सुनील ग्रोवर और तब्बू भी अहम रोल में हैं.

पुलवामा हमले पर बौलीवुड बनाएगा फिल्म

बीते फरवरी 14 तारीख को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के करीब 40 जवानों की मौत हो गई. इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी हमला करते हुए एयर स्ट्राइक किया. इस पूरे घटनाक्रम पर बौलीवुड में फिल्म बनने वाली है, फिल्म के साथ संजय लीला भंसाली और भूषण कुमार जैसे बड़े नाम जुड़ गए हैं.

खबरों की माने को फिल्म के निर्देशक होंगे अभिषेक कपूर. अभिषेक केदारनाथ के निर्माता हैं. भंसाली और भूषण कुमार के अलावा महावीर जैन भी फिल्म को प्रोड्यूस करेंगे. अभी तक फिल्म का स्टारकास्ट तय नहीं किया गया है. पर प्रोडक्शन और डायरेक्शन टीम को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि बड़े सितारे फिल्म से जुड़ेंगे.

वहीं खबर ये भी है कि फिल्म और टीवी सीरियल बनाने वाले निर्माताओं ने पुलवामा से लेकर बालाकोट तक और बाद में विंग कमांडर अभिनन्दन वर्तमान की वापसी तक को फिल्मी जामा पहनाने का फैसला किया है.

आपको बता दें कि 26 फरवरी को बालाकोट में जैश ए मोहम्मद के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की गई थी, जिसमें दावा किया जा रहा है कि बहुत से आतंकी मारे गए हैं. हालांकि अभी तक मारे गए आतंकियों के आधिकारिक आंकड़े नहीं मिले हैं. पर देश के वायुसेना की इस जवाबी कार्रवाई से देशवासी बड़े ही जोश में हैं.

29 मार्च को आएगी फिल्म ‘‘द लीस्ट आफ दीज: द ग्राहम स्टेंस स्टोरी’’

अनीस डेनियल निर्देशित अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘‘द लीस्ट आफ दीजः द ग्राहम स्टेंस स्टोरी’’ अब 29 मार्च को भारत में रिलीज होने वाली है. इस फिल्म में भारतीय अभिनेता शरमन जोशी ने मुख्य भूमिका निभायी हैं. वैसे यह फिल्म अमेरिका में रिलीज हो चुकी है. अमेरिका में इस फिल्म ने 607015 डालर कमाए हैं.

फिल्म ‘‘द लीस्ट आफ दीजः द ग्राहम स्टेंस स्टोरी’’ की कहानी भारत में सक्रिय रहे क्रिश्चियन मिशनरी ग्राहम स्टेंस की कहानी है, जो कि उड़ीसा में कुष्ठ रोगियों और गरीब आदिवासियों के लिए काम कर रहे थे. लेकिन 1999 में ग्राहम स्टेंस को उनके दो बेटों के साथ हिंदूवादी संगठन ‘‘बजरंग दल’’ के लोगों ने जिंदा जला दिया था.

इस फिल्म में शरमन जोशी के अलावा स्टीफन बाल्डविन व प्रकाश बेलेवाडी की भी अहम भूमिकाएं हैं.

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