Holi Special: निरहुआ और आम्रपाली दुबे के इस गाने में Govinda आएंगे नजर, देखें Photo

भोजपुरी इंडस्ट्री  में स्टार्स होली त्यौहार को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं. तभी तो स्टार्स इन दिनों एक के बाद एक होली से पहले स्पेशल सॉन्ग्स रिलीज करने में लगे हुए हैं.

हाल ही में पवन सिंह (Pawan Singh) ने बॉलीवुड एक्ट्रेस त्रिधा चौधरी के साथ भोजपुरी होली स्पेशल सॉन्ग ‘बबुनी तेरे रंग में’ दर्शकों के बीच रिलीज किया था. इस गाने को यूट्यूब पर खूब पसंद किया गया.

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तो अब वहीं दिनेश लाल यादव और आम्रपाली दुबे ने बॉलीवुड सुपरस्टार गोविंदा के साथ अपकमिंग होली सॉन्ग के लिए हाथ मिला लिया है.

 

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दरअसल दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ ने सोशल मीडिया अकाउंट पर आम्रपाली दुबे और गोविंदा (Govinda) के साथ एक फोटो शेयर की है, इस फोटो में दिनेश लाल यादव ने कैप्शन में लिखा है कि ‘हमारे आदर्श, जिनकी फिल्में देखकर सब कुछ सीखा.

Holi Special: पवन सिंह और चांदनी सिंह के इस गाने ने मचाया धमाल, देखें Video

उन्होंने आगे लिखा, आज ऐसे गोविंदा सर के साथ नाच के धन्य हो गया… लव यू गोविंदा सर.  तो यह भी दावा किया जा रहा है कि ये गाना इस साल का सबसे जबरदस्त और हिट गाना होने वाला है.

Holi Special: पवन सिंह और चांदनी सिंह के इस गाने ने मचाया धमाल, देखें Video

भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह तथा अभिनेत्री व संगीत जगत की सनसनी चांदनी सिंह की जोड़ी भोजपुरी सिनेमा में काफी मशहूर है. जिसके चलते इस जोड़ी की फिल्मों से लेकर संगीत एल्बम तक सुपरहिट साबित होते हैं. इन दिनों  पवन सिंह और चांदनी सिंह का एक होली पर आधारित भोजपुरी गाना ‘होली में देवरओ संग ‘ इंटरनेट पर हंगामा मचा रहा है. यूं तो यह गाना यह यशी फिल्म्स के अभय सिन्हा द्वारा निर्मित भोजपुरी  फिल्म “घातक “का  है , जो कि बहुत जल्द प्रदर्शित होने वाली है.

टीनू वर्मा निर्देशित  फिल्म “घातक” इस गीत को ‘ इंटरटेन रंगीला’ नामक यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है. आलम यह है कि इस गाने को ताबड़तोड़ व्यूज मिल रहे हैं. इस रोमांटिक और छेड़छाड़ वाले गाने में पवन सिंह और चांदनी सिंह  की केमिस्ट्री लोगो को  खूब भा रही हैं. दोनों ने इस गाने में जमकर ठुमके लगाए है. इस गाने को पवन सिंह ने ही अपनी आवाज में गाया है.

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इस वीडियो क्लिप में पवन सिंह और चांदनी के साथ दूसरे लोग भी दिखाई दे रहे हैं, जो उनके साथ थिरकते नजर आ रहे हैं. वायरल हो रहे इस वीडियो में जहां चांदनी सिंह  ग्लिटरी लंहगा में दिखाई दे रही हैं , वहीं पवन सिंह व्हाइट टी-शर्ट और जीन्स में दिखाई दे रहे हैं.  वीडियो के शुरूआत में पवन सिंह और चांदनी सिंह अपने-अपने पार्टनर के साथ डांस करते नजर आते है और जैसे-जैसे गाना आगे बढ़ता है, गाने के सिग्नेचर स्टेप्स करने लगते हैं.

इस गाने को लेकर चांदनी सिंह काफी उत्साहित हैं. वह कहती हैं-“होली हम सबका पसंदीदा त्यौहार है. और  अगर पवन सिंह जी के साथ आपको होली पर एलबम करने का अवसर मिल जाए तो क्या कहना? वैसे मैं  याशी फिल्म्स के अभय सिन्हा जी की आभारी हू जिन्होने मुझे फिल्म घातक में इतना बेहतरीन गाना दिया. टीनू वर्मा जी भी कमाल के निर्देशक हैं.”

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Holi Special: Nikki Tamboli ने जान कुमार सानू के गालों पर लगाया रंग, कहा ‘तेरी बाहों में मेरा जहान’

बिग बॉस 14 फेम निक्की तम्बोली (Nikki Tamboli) और जान कुमार सानू (Jaan Kumar Sanu) की दोस्ती आज भी बरकरार है. जी हां, शो खत्म के होने के बाद भी दोनों की दोस्ती सुर्खियों में छायी हुई है.

शो के दौरान ये दिखाया गया था कि जान कुमार सानू ने निक्की तम्बोली के सामने अपने प्यार का इजहार किया था, जो काफी चर्चे में थी. तो अब शो खत्म होने के बाद ये दोनों क्वालिटी टाइम बिता रहे हैं. ये जानकारी सोशल मीडिया से मिली है.

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दरअसल निक्की तम्बोली ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें निक्की, जान कुमार सानू के साथ होली खेलती दिख रही हैं. जी हां, निक्की तम्बोली अपने स्पेशल दोस्त जान कुमार सानू के गालों पर गुलाल लगा रही हैं. और जान के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान छायी है.

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि दोनों ने सफेद रंग का कुर्ता पहना है. और पारस छाबड़ा और माहिरा शर्मा के गाने पर होली मना रहे हैं.

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बीच बिग बॉस 14 के दौरान निक्की और जान के बीच खट्टा-मीठा रिश्ता देखने को मिला था. शो खत्म होने के बाद दोनों की शिकायतें गायब हो चुकी है. तो वहीं ये खबर आ रही थी कि टोनी कक्कड़ और निक्की तम्बोली के बीच प्यार का रिश्ता पनप रहा है.

एक्स गर्लफ्रेंड को लेकर ‘अनुपमा’ फेम Sudhanshu Pandey ने किया ये खुलासा

‘अनुपमा’ फेम एक्टर सुधांशु पांडे इन दिनों काफी सुर्खियों में छाए हुए हैं. इस सीरियल में उनका किरदार (वनराज) काफी मशहूर है. सुधांशु पांडे और रूपाली गांगुली का ऑनस्क्रिन रिलेशनशिप को दर्शक काफी पसंद करते हैं. तो अब सुधांशु पांडे (वनराज) ने अपनी एक्स गर्लफ्रेंड को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है. तो आइए जानते हैं एक्टर ने क्या कहा है.

दरअसल उनकी ऑनस्क्रीन बहू किंजल यानी निधि शाह ने उनसे कई सारे सवाल पूछे थे और इसी सवाल-जवाब के बीच निधि शाह ने सुधांशु पांडे से पूछा कि क्या एक्स-गर्लफ्रेंड के साथ उनका दोस्ती का रिश्ता है?  तो ऐसे में एक्टर ने कहा, एक्स के साथ मेरी अच्छी खासी दोस्ती है.

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यह सीरियल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर पर आधारित है. वनराज (सुधांशु पांडे) शादीशुदा होते हुए भी काव्या से प्यार करता है. लेकिन समय के साथ-साथ वनराज को अपनी पत्नी की अहमियत समझ आती है लेकिन उसकी पत्नी खुद से दूर कर देती है. ऐसे में उसके पास अपनी गर्लफ्रेंड के पास दोबारा लौट जाने के अलावा और कोई ऑप्शन नहीं बचता.

 

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सुधांशु पांडे अपनी दमदार एक्टिंग से दर्शकों के दिल पर राज करते हैं. तो वहीं कुछ लोग इस रोल के लिए खरी उन्हें खरी-खोटी भी सुनाते हैं. कुछ दिन पहले खबर ये भी आ रही थी सुधांशु पांडे ने कहा था कि ‘अनुपमा’ के एक सीन के स्क्रिप्ट को पढ़कर वो काफी इमोशनल हो गए थे.

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मीठी के सामने खुलेगा आदित्य और मालिनी की रिश्ते का सच, Imlie में आएगा नया ट्विस्ट

स्टार प्लस का सीरियल ‘इमली’  में इन दिनों कहानी एक नया मोड़ ले रही है. शो के पिछले एपिसोड में आपने देखा था कि देव पगडंडिया आ चुका है और वह इमली से माफी मांगता है. सीरियल के अपकमिंग एपिसोड में महाट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं, शो के लेटेस्ट एपिसोड के बारे में.

मिली जानकारी के अनुसार शो के अपकमिंग एपिसोड में ये दिखाया जाएगा कि देव, मीठी से आदित्य का सच बता देगा. हालांकि देव को नहीं मालूम है कि आदित्य की शादी पहले इमली से भी हुई है.

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देव, मीठी से ये भी कहेगा कि वह अपने समधियों का शुक्रगुजार है कि उनके कारण ही वह इमली से मिला. देव की ये बात सुनकर मीठी सदमे में चली जाएगी.

देव के खुलासों के बीच आदित्य की एंट्री होगी और यहीं पर दर्शकों को महाट्विस्ट देखने को मिलेगा. तो वहीं इस बीच अनु भी पगडंडिया आ जाएगी और इसके बाद वो इमली और आदित्य की जमकर क्लास लगाएगी.

 

हाल ही में इस सीरियल में आपने देखा कि देव से मीठी को मिले धोखे की बात करते सत्यकाम आग बबूला हो जाता है और उसे जान से मार डालने की बात कहता है.तो उधर मीठी आकर देव को बचा लेती है. इस दौरान देव मीठी से अपने किए की सजा मांगता है.

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हंसाना सबसे मुश्किल काम: धामा वर्मा

भोजपुरी, हिंदी और बंगला फिल्मों के कलाकार धामा वर्मा ने कई सुपरहिट फिल्में दी हैं. वे बेहद मंजे हुए कलाकारों में गिने जाते हैं. फिल्मों में उन की संवाद अदायगी और ऐक्टिंग बेहद पसंद की जाती है. ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ के दौरान उन से हुई एक मुलाकात में उन के फिल्मी सफर पर लंबी बातचीत हुई. पेश हैं, उसी के खास अंश :

आप ने अपने सफर की शुरुआत हिंदी फिल्मों से की थी, फिर भोजपुरी फिल्मों की तरफ रुझान कैसे हुआ?

मैं ने गौतम घोष के डायरैक्शन में बनी फिल्म ‘पतंग’ से अपने ऐक्टिंग कैरियर की शुरुआत की थी. उस फिल्म में मेरे साथ शबाना आजमी, ओम पुरी, मोहन अगाशे और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे दिग्गज कलाकारों की पूरी टीम थी.

इस के बाद मुझे लगा कि हिंदी फिल्मों के साथसाथ भोजपुरी सिनेमा में भी अपना हाथ आजमाना चाहिए, क्योंकि भोजपुरी का दर्शक वर्ग बहुत बड़ा है. कई फिल्मों में दमदार रोल कर के मैं दर्शकों के दिलों में आसानी से जगह बनाने में कामयाब रहा.

भोजपुरी सिनेमा को दिलाई पहचान: बृजेश त्रिपाठी

आप ने हिंदी और भोजपुरी फिल्मों के साथसाथ बंगला फिल्मों में भी काम किया है. बंगला भाषा की कोई यादगार फिल्म?

मैं ने गौतम घोष के डायरैक्शन में बनी बंगला फिल्म ‘शून्य’ में काम किया था. यह फिल्म माओवादियों की बैकग्राउंड पर बनी थी.

आप फिल्मों के अलावा टैलीविजन पर भी काफी सक्रिय रहते हैं. आप ने अभी तक किनकिन धारावाहिकों में काम किया है?

मैं ने ‘क्या दिल में है’, ‘अर्जुन पंडित’, ‘जीजी मां’, ‘दीया और बाती हम’, ‘लाल इश्क’, ‘क्राइम पैट्रोल’, ‘सावधान इंडिया’ और ‘विधान’ जैसे धारावाहिकों में काम किया है. भोजपुरी के एक धारावाहिक ‘घरआंगन’ में भी अहम रोल निभाया है. इस के अलावा वैब सीरीज ‘किराएदार’ व ‘बैडगर्ल’ में भी काम कर चुका हूं.

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आप ने अमिताभ बच्चन के साथ भी काम किया है. उन से क्या सीखने को मिला?

मुझे भोजपुरी फिल्म ‘गंगा’ में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला था. वे फिल्म सैट पर सहज रहते हैं और साथी कलाकारों का हर समय हौसला बढ़ाते हैं.

भोजपुरी सिनेमा में कई अच्छे कौमेडियनों की बाढ़ आ गई है. ऐसे में कितना कंपीटिशन बढ़ा है?

यह भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए अच्छा संकेत है कि अच्छे कौमेडी कलाकार आ रहे हैं. इस से भोजपुरी फिल्मों का दायरा बढ़ेगा.

एक कलाकार के लिए हंसाना सब से मुश्किल विधा मानी जाती है? ऐसा क्यों है?

ऐक्टिंग की सब से मुश्किल विधा है लोगों को हंसाना. इस में कलाकार अपनी पूरी कला लगा देता है. रुलाने के लिए किसी को मार कर रुलाया जा सकता है, गरीबी दिखा कर रुलाया जा सकता है, लेकिन हंसाने के लिए अंदर से फीलिंग लानी पड़ती है, जो मुश्किल काम है.

भोजपुरी के सब से ज्यादा दर्शक बिहार में ही हैं. क्या वजह है कि वहां फिल्मों की शूटिंग को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है?

बिहार सरकार अपने प्रदेश में फिल्मों को बढ़ावा देने के प्रति उदासीन है. अगर वह प्रदेश में शूटिंग को बढ़ावा देती है, तो वहां रोजगार की उम्मीद बढ़ेगी.

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‘जमाई राजा’ फेम Ravi Dubey ने डिलीट किया इंस्टाग्राम अकाउंट, सामने आई ये वजह

टीवी एक्टर रवि दुबे इन सुर्खियों में छाए हुए है. वे जमाई राजा’ के दूसरे सीजन के जरिए भी फैंस का दिल जितने में कामयाब रहे. हाल ही में  जमाई 2.0 ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ऑनएयर हुआ. इस वेब शो में रवि दुबे और निया शर्मा की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री फैंस को खूब पसंद आया.

मिली जानकारी के अनुसार रवि दुबे ने घोषणा की है कि वो अब अपना इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर रहे हैं. एक्टर ने सोशल मीडिया पर अपने फैन्स को बताया है कि  अगले कुछ दिनों के लिए इंस्टाग्राम डिलीट कर रहा हूं.

 

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बताया जा रहा है कि वह अपनी पत्नी सरगुन मेहता के साथ समय बिताने चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने ब्रेक लिया है. रिपोर्ट के अनुसार एक्टर पढ़ने के लिए भी टाइम निकालना चाहते हैं क्योंकि उनके पास एक फुल पैक शेड्यूल है. एक्टर ने बैक-टू-बैक अपने प्रोजेक्ट‍्स के लिए शूटिंग कर रहे थे और उन्होंने ब्रेक भी नहीं लिया. कभी-कभी उन्होंने रात भर भी शूटिंग की.

 

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आपको बता दें कि रवि दुबे और निया शर्मा की जोड़ी टेलीविजन की सबसे पॉपुलर जोड़ियों में से एक है. हालांकि ये भी खबर आ रही थी कि शो के सेट पर दोनों के बीच अनबन भी हुई थी पर अब उनके बीच सब ठीक है.

Holi Special: वनराज को सबसे पहले रंग लगाने के लिए काव्या चलेगी नयी चाल तो क्या करेगी Anupamaa

स्टार प्लस का मशहूर सीरियल अनुपमा की कहानी में धमाकेदार ट्विस्ट दिखाया जा रहा है. कहानी के ट्रैक में दिलचस्प मोड़ आ चुका है. जिससे फैंस को इस सीरियल में हाईवोल्टेज ड्रामा देखने को मिल रहा है. तो चलिए जानते हैं ‘अनुपमा’ के नए ट्विस्ट के बारे में.

सीरियल के पिछले एपिसोड में आपने देखा कि पाखी की वजह से शाह फैमिली काव्या को घर से बाहर करती है. और इस बात से वह आग बबूला हो जाती है. और बदला लेने के लिए प्लान बनाती है.

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तो वहीं शो के लेटेस्ट एपिसोड में दिखाया गया कि शाह हाउस में होली सेलिब्रेट कर रहे हैं. और इस खास मौके पर बा, अनुपमा से कहती है इस बार तुम जरूर होली खेलना और जो तुमने नहीं किया है, वो सारे शौक पूरा कर लेना.

बा ये भी कहती हैं कि वनराज को सबसे पहले रंग लगाना. तो वहीं वनराज कहता है कि उसे रंग नहीं पसंद और वो अपने कमरे से बाहर नहीं निकलने वाला. उधर काव्या ये सारी बातें सुनकर गुस्सा हो जाती है और वह मन ही मन सोचती है कि चाहे जो भी हो वनराज को सबसे पहले वह ही रंग लगाएगी.

 

इस शो के अपकमिंग एपिसोड में ये दिखाया जाएगा कि वनराज रंग की डर से अपने कमरे में जाने लगता है. तो उधर घरवाले अनुपमा से कहते हैं कि तुम होली खेलना, लेकिन किसी को अंदर आने मत देना. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि वनराज को सबसे पहले रंग लगाने के लिए काव्या क्या नई चाल चलेगी.

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सीरियल के लेटेस्ट ट्रैक में ये भी दिखाया गया था कि होलिका दहन पर शाह फैमिली में जश्न मनाया जा रहा है. तो वहीं वनराज आग से नारियल निकालता है और ऐसे में उसका हाथ जल जाता है ये देखकर अनुपमा उसके हाथ पर आइस लगाती है.

Serial Story- काश: भाग 2

रामशरण जी को अपनी सरकारी नौकरी के वे दिन याद आ गए जब उन के औफिस में आने वाला हर व्यक्ति उस महकमे के लिए शिकार समझा जाता था. जिसे काटना और आर्थिकरूप से निचोड़ना हर सरकारी कर्मचारी का प्रथम कर्तव्य था. दूसरों की क्या बातें करें, स्वयं

रामशरण जी प्रत्येक किए जाने वाले कार्य का दाम लगाया करते थे बिना यह जानेसमझे कि सामने वाला किस आर्थिक परिस्थिति का है, उस का कार्य समय पर न किए जाने की दशा में उस का कितना नुकसान हो सकता है.

सरकार की तरफ से मिलने वाला वेतन तो उन के लिए औफिस बेअरिंग चार्जेज जैसा ही था. बाकी जिस को जैसा कार्य करवाना हो उस के अनुसार भुगतान करना आवश्यक होता था.

रामशरण जी के औफिस का अपना नियम था- ‘देदे कर अपना काम करवाएं, न दे कर अपनी बेइज्जती करवाएं.’ और इसी नारे वाले सिद्धांत के तहत काम कर के उन्होंने वसूले गए पैसों से शहर में 5 आलीशान प्रौपर्टीज बना रखी हैं जिन का किराया ही लाखों रुपए में आता है और मिलने वाली पैंशन ज्यों की त्यों बैंक में जमा रहती है.

‘शाबाश बेटा. अपने सिद्धांतों पर सदा कायम रहो,’ रामशरण जी के मुंह से अचानक ही आशीर्वचन फूट पड़े. लेकिन मन ही मन कह रहे थे शादी होने के बाद बढ़ती जरूरतों के आगे सब सिद्धांत धरे के धरे रह जाएंगे.

टीटीई अगले कोच में चला गया और रामशरण जी अपनी बर्थ पर सो गए.

सुबह करीब 10 बजे रामशरण जी अपने गंतव्य स्थल पर पहुंच गए. अभी अपनी बर्थ से उठने का उपक्रम कर ही रहे थे कि लगभग 40 साल का व्यक्ति उन के सामने आ खड़ा हुआ.

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‘सर, आप रामशरण जी हैं?’ उस व्यक्ति ने नम्रता से पूछा.

‘जी, हां, मैं रामशरण ही हूं,’ उन्होंने जवाब दिया.

‘मैं ईरिकशा का ड्राइवर रहमत खान हूं. आप को आप की कैब एट जीरो एट जीरो तक छोड़ने के लिए निर्देशित किया गया हूं,’ वह व्यक्ति बोला.

‘लेकिन मैं ने तो ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया. खैर, बाहर तो जाना ही है, सो चलते हैं. कितने चार्जेज लेंगे आप?’ रामशरण जी ने पूछा.

‘आप जैसे बुजुर्गों के अनुभवों का लाभ उठाने और आशीर्वाद पाने के लिए यह सेवा मुफ्त है,’ रहमत खान बोला.

‘क्या बुजुर्गों का इतना सम्मान?’ रामशरण जी आश्चर्य से बोले. बोलने के साथ ही उन्हें यह भी याद आ गया कि एक बार उन के दफ्तर में एक बुजुर्ग किसी छोटे से काम के लिए आ गए थे. यद्यपि काम छोटा सा ही था और रामशरण जी चाहते तो उसे मिनटों में कर देते. लेकिन समस्या, बस, इतनी सी थी कि उसूले के पक्के उस बुजुर्ग ने ऊपर से ‘कुछ’ देने से इनकार कर दिया था. रामशरण जी ने तब उसे इतना परेशान कर दिया था कि भूख के मारे वह बूढ़ा गश खा कर गिर पड़ा था. बौस के हस्तक्षेप के बाद रामशरण जी को उस खूसट का काम मुफ्त

में करना पड़ा था.

‘जी, हां, आप तो हमारे देश कि धरोहर हैं. आप के अनुभवों से ही तो शिक्षा ग्रहण कर हमें आगे बढ़ना है,’ रहमत खान रिकशा चलाते हुए बोला, ‘लीजिए यह रही आप की टैक्सी कैब एट जीरो एट जीरो.’

‘इतनी भीड़ में से प्लेटफौर्म नंबर 5 से पार कर के यहां टैक्सी तक आना सचमुच एक दुष्कर कार्य था. आप का बहुतबहुत धन्यवाद. यह रहा आपका ईनाम,’ कहते हुए रामशरण जी ने ड्राइवर की तरफ 50 रुपए का एक नोट बढ़ा दिया.

‘जी धन्यवाद, मगर मैं इस तरह के ईनाम या बख्शिश को स्वीकार नहीं कर सकता. मैं अपनी कमाई से सुखी जीवन व्यतीत कर रह हूं. मुझे मेरी मेहनत का पर्याप्त पैसा मेरे नियोक्ता द्वारा दिया जा रहा है. वैसे भी, आप जो दे रहे हैं उसे साधारण भाषा में रिश्वत कहते है और उस का आधुनिक भारत में कोई स्थान नहीं है,’ ड्राइवर रहमत खान मुसकराते हुए बोला.

टीटीई के बाद एक छोटे से ड्राइवर की ईमानदारी ने रामशरण जी को सोचने पर विवश कर दिया. उन के लिए यह अनुभव बहुत ही शर्मिंदगीभरा था.

‘क्या यह टैक्सी एट जीरो एट जीरो भी फ्री है?’ रामशरण जी ने अचकचाते हुए रिकशा के ड्राइवर से पूछा.

‘जी, नहीं. मगर इस में आप को सिर्फ 30 फीसदी किराया ही देना होगा,’ रिकशा के ड्राइवर ने बतलाया.

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‘क्या आप ही रामशरण जी हैं?’ कैब के ड्राइवर ने टैक्सी का दरवाज़ा खोलते हुए पूछा.

‘जी, हां, मैं ही रामशरण हूं,’ जवाब में रामशरण जी ने बोला.

‘कृपया अपना आधारकार्ड दे दीजिए. उसे सिस्टम में अपडेट करना आवश्यक है,’ ड्राइवर बोला. डिटेल्स फीड होते ही कैब अपनी रफ़्तार से चल पड़ी. लगभग डेढ़ घंटे चलने के बाद कैब अपने गंतव्य स्थान पर थी. फेयर मीटर 930 रुपए का चार्ज बतला रहा था.

‘कितने पैसे हुए, भैया?’ रामशरण जी ने पूछा यद्यपि वे जानते थे कि उन्हें 30 फीसदी के हिसाब से 310 रुपए ही देना है.

‘279 रुपए, सर,’ कैब ड्राइवर कैलकुलेशन करने के बाद बोला.

‘अरे भैया, ठीक से कैलकुलेशन करो. 930 का थर्टी परसैंट 310 होता है, न कि 279. अपना नुकसान क्यों कर रहे हैं? आप को जेब से भरना पड़ेगा,’ रामशरण जी ने कहा.

‘जी, आप जैसे बाहर से आए हुए बुजुर्गों के लिए कैब कंपनी ने कुल बिल का 10 परसैंट डिस्काउंट औफर भी दिया हुआ है. सो 310 का 10 परसैंट 279 ही हुआ ना,’ कैब ड्राइवर मुसकराकर समझाता हुआ बोला.

‘अच्छा, अच्छा. यह लो 300 रुपए और बचे हुए पैसे अपने पास रख लो,’ रामशरण जी बोले.

Serial Story- काश: भाग 3

‘अरे जनाब, कमाल की बातें करते हैं आप. जिन पैसों पर मेरा हक नहीं, उन्हें कैसे ले लूं? क्या आप मेरे ईमान का इम्तिहान ले रहे हैं? कुदरत का करम है साहब हम पर. हमें अपनी मेहनत के अलावा नया पैसा भी नहीं चाहिए.’ स्पष्ट था कि कैब का ड्राइवर ज्यादा पढ़ालिखा नहीं था,

मगर फालतू पैसे लेना उसे गवारा नहीं था.

‘लीजिए साहब, यह आप के  21 रुपए. यदि पैसा देना ही है तो किसी मांगने वाले फ़कीर को दे दीजिए,’ ड्राइवर पैसे वापस करता हुआ बोला.

रामशरण जी का यह लगातार 3 विभिन्न स्तर के व्यक्तियों द्वारा किया गया अपमान था.

इतनी ईमानदारी व खुद्दारी कि बातें सुन कर रामशरण जी को ऐसा लगा मानो वे भारत में नहीं, किसी और देश में आ गए हैं. वर्ष दो हज़ार पचास (2050) का भारत इतना ईमानदार, खुद्दार. भ्रष्टाचार जैसे शब्दों से कोसों दूर. उन्हें तो यह विश्वास ही नहीं हो रहा था.

इस भारत पर रामशरण जी मन ही मन गर्व कर रहे थे. साथ ही साथ, वे अपनेआप को धिक्कार रहे थे अपने द्वारा किए गए भ्रष्टाचारों के लिए. वे सोच में पड़ गए..काश, स्वयं उन्होंने भी इन युवाओं की भांति राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हितों के ऊपर रखा होता तो देश मीलों आगे होता.

मगर इतना बदलाव हुआ कैसे? 2020 में ही तो उन्होंने रिटायरमैंट लिया है. 70 सालों में जो देश भ्रष्टाचार को ख़त्म नहीं कर पाया था, मात्र 30 सालों में भारत इतना परिवर्तित कैसे हो गया? रामशरण जी इस बदलाव का कारण जानने के लिए अतिउत्सुक थे.

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मृतक के अंतिम संस्कार के बाद सभी लोग हौल में बैठे हुए थे. माहौल थोड़ा हलका हो गया था. अपनी उम्र के लोगों के बीच बैठे रामशरण जी ने अपने साथ घटित हुई तीनों घटनाएं सुनाईं.

‘इस में आश्चर्य की क्या बात, अंकल जी. यह तो भारतवर्ष का पुनर्निर्माण चल रहा है. अब इस युवा पीढ़ी ने ठान लिया है कि भ्रष्टाचार नाम का शब्द हमारे शब्दकोष से हटाना ही है. इस भ्रष्टाचार के कारण न सिर्फ अपनों में, बल्कि अजनबियों और अंजानों में भी हमें नीचा देखना

पड़ा है,’ पास ही बैठा एक युवक बोल पड़ा जो इन लोगों की बातें सुन रहा था.

‘मगर यह हो किस की प्रेरणा से रहा है और इस के पीछे कारण क्या हैं?’ रामशरण जी ने कुतूहल से पूछा.

‘इस के पीछे किसी व्यक्तिविशेष की प्रेरणा नहीं है. बस, सब लोग अपने आत्मबल की प्रेरणा से अपने आत्मसम्मान को बचाने के लिए यह कार्य कर रहे है. विदेशियों द्वारा दिया गया भ्रष्ट भारतीय का तमगा इस युवा पीढ़ी को नागवार और अपमानित गुजरा. शायद यही कारण है

कि यहां के लोगों ने रिश्वत, नज़राना, उपहार, ईनाम और बख्शिश जैसे नामों से मिलने वाले पैसों का बहिष्कार पूरी नम्रता के साथ कर दिया है.

‘नई शिक्षा प्रणाली का भी इस में बड़ा योगदान है. आप लोगों के समय में आप लोग हमारे पिछले शासकों की वीरता, अंगरेजों से गुलामी मुक्ति की गाथा, सभ्यता का विकास और प्रेरणाशून्य कहानियां व कविताएं पढ़ा करते थे.

‘नई शिक्षा प्रणाली में पहली कक्षा से ही यह बतलाना शुरू कर दिया जाता है कि भ्रष्टाचार क्या है. भ्रष्टाचार के प्रकार और रूप क्याक्या हैं. भ्रष्टाचार से हमारे देश को क्याक्या नुकसान हैं. इस के कारण से हम प्रगति की रफ़्तार में किस सीमा तक पिछड़ रहे हैं. भ्रष्टाचार करने के बाद पकड़े गए लोगों को दी गई कड़ी सजा का भी पूरे विस्तार से वर्णन किया गया है.

‘इन कहानियों में भ्रष्टाचारियों को मिली सामजिक प्रताड़ना का जिक्र भी किया गया है तथा यह भी सुझाया गया है कि भ्रष्टाचारियों को आजीवन सामाजिक पृथक्करण जैसी सजाएं भी दी जानी चाहिए. इस तरह की कहानियों का आज की युवा पीढ़ी के बाल मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ा है और उसी परिवर्तन को आप देख व महसूस कर रहे हैं.

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‘यही नहीं, ईश्वर क्या है? एक अनजाना, अज्ञात भय ही न? नई शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार के प्रति एक अनजाना भय पैदा करने कि सफल कोशिश भी की गई है ताकि लोग भ्रष्टाचार को दूर से ही सलाम करें,’ युवक ने एक ही सांस में अपनी पूरी बात कह दी.

‘काश, हमारे समय में भी शिक्षा प्रणाली ने इस तरह के परिवर्तन स्वीकार किए होते, तो शायद आज भारत की तसवीर भी बेदाग़ और साफ़ छवि वाली होती. हम लोग भी इस दलदल से मुक्त होते. भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्थिति कहीं और अधिक सुदृढ़

होती,’ रामशरण जी बोल उठे.

“अजी, सुबह के 7 बज गए हैं, आज औफिस जाने का मूड नहीं है क्या?” पत्नी उन के चेहरे से कम्बल हटाती हुई बोली.

‘ओह, तो यह एक सपना था,’ रामशरण जी बुदबुदाए.

कहते हैं, सुबह का सपना सच होता है. काश, यह सपना भी सच हो जाए. काश, हमारी शिक्षा प्रणाली में इस तरह के सकारात्मक परिवर्तन आ जाएं. रही बात मेरी स्वयं की, तो मैं स्वयं किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार न करने और अपने काम को पूरी ईमानदारी से करने की कसम खाता हूं.

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रामशरण जी ने मन ही मन प्रण किया और एक झटके में बिस्तर से बाहर आ गए.

काश…

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