Serial Story: संधि प्रस्ताव- भाग 3

लेखक- अलका प्रमोद

‘‘‘देखिए, मन से हम आप के साथ हैं पर हम विवश हैं. कानून की सीमा के बाहर कुछ भी करना या करने देना हमारे लिए संभव नहीं. आप जो भी करें, कानून के अनुसार करें. कृपया आप लोग चले जाएं वरना हमें आप को जबरदस्ती हटाना पड़ेगा.’

‘‘तपन के साथ आए उन के मित्र ने उन्हें समझाया, ‘देखो, अगर पुलिस के चक्कर में पड़ गए तो हम दूसरी झंझटों में उलझ जाएंगे और यथार्थ को वापस कभी नहीं ला पाएंगे. इस से तो अच्छा है कि कुछ उपाय सोचो उसे वापस लाने का.’

‘‘‘‘पर मेरे बच्चे को हुआ क्या है? चलो, किसी झाड़फूंक वाले का पता करें,’ सुनीता ने कहा.

‘‘राजन ने कहा, ‘दीदी, टोटका नहीं, इन्होंने कोई नशा दिया है और इस का ब्रेनवाश किया है. देखा नहीं, उस की आंखें कैसी लाललाल थीं और वह अपनी सुध में नहीं लग रहा था.’

‘‘‘पर मेरे बच्चे ने इन का क्या बिगाड़ा था?’

‘‘‘कुछ नहीं, इन्हें अपना प्रचारप्रसार करने के लिए मेधावी और आकर्षक व्यक्तित्व के युवा चाहिए. ये इसी तरह मेधावी मगर सीधेसाधे बच्चों को फंसाते हैं.’

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‘‘तपन ने कहा, ‘पर हम इन की चाल कामयाब नहीं होने देंगे. हम अपने बच्चे को लिए बिना वापस नहीं जाएंगे.’

‘‘तपन और सुनीता ने बहुत हाथपैर मारे, धरतीआकाश एक कर दिया पर वे दोबारा अपने बेटे की एक झलक भी नहीं पा सके. पता नहीं उसे उन लोगों ने कहां भेज दिया.

‘‘तपन ने पुलिस से संपर्क किया पर पुलिस ने भी पल्ला झाड़ दिया. वे एसपी तक के पास गए पर उन्होंने भी कहा, ‘देखिए, आप का बेटा वयस्क है और जब वह कह रहा है कि वह अपनी इच्छा से वहां रहना चाहता है तो हम उस में क्या कर सकते हैं?’

‘‘सुनीता ने कहा, ‘पर उन लोगों ने उसे कोई नशा दिया है, उस पर जादूटोना किया है. वरना जिस लड़के ने एक दिन पहले मुझ से कहा कि वह घर आ रहा है, अचानक आश्रम कैसे पहुंच गया?’

‘‘‘और तो और, उन लोगों ने उसे एक तहखाने में बंद कर रखा है यदि वह अपने मन से गया है तो उसे बंद तहखाने में किसी कैदी की तरह रखने की आवश्यकता क्या है?’ तपन ने कहा.

‘‘‘देखिए, आप की बात ठीक है पर जब हमारे इंस्पैक्टर गए थे तो आप का बेटा आश्रम में ही था. और उस ने स्वयं उन से कहा कि वह अपनी इच्छा से आश्रम में रहना चाहता है,’ एसपी ने कहा, ‘और बिना किसी साक्ष्य के हम क्या कर सकते हैं?’

‘‘सुनीता बोलीं, ‘आप टैस्ट करवाइए. वे मेरे बेटे को कोई नशा अवश्य देते हैं क्योंकि जब वह हम से मिला तो उस ने एक बार भी मेरी ओर नहीं देखा और अनायास ही उस की दृष्टि मुझ से मिली तो उस ने तुरंत हटा ली. पर मैं ने उस क्षणांश में ही देख लिया कि उस की आंखें लाल थीं और चढ़ी हुई थीं. वह सामान्य तो बिलकुल नहीं था.’

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‘‘पर पुलिस ने साक्ष्य के अभाव में या संभवतया किसी दबाव में सहायता करने से मना कर दिया.

‘‘तपन को याद आया प्रभास. उस ने सोचा कि अभी तक उस ने क्यों नहीं सोचा प्रभास के बारे में. वह तो जनादेश चैनल में प्रोड्यूसर है. वह उस की सहायता कर सकता है. मीडिया साक्ष्य एकत्र करने में लग गई. पर प्रहरी इतने दृढ़ थे कि उन के दुर्ग में सेंध लगाना सरल न था. मीडिया ने साक्ष्य प्राप्त भी किए कि आश्रम में अफीम आती है. उस का अभियान धीरेधीरे सफलता के सोपान चढ़ रहा था कि अचानक एक दिन प्रभास के औफिस पर हमला हो गया और कई बहुमूल्य कैमरे आदि नष्ट कर दिए गए. फिर पता नहीं क्या हुआ कि प्रभास ने उस केस में धीरेधीरे रुचि लेनी बंद कर दी. एक दिन तपन ने उस से पूछा तो उलटे वह उन्हीं को समझाने लगा, ‘मेरी मानो तो तुम उसे भूल जाओ, जब तुम्हारा बेटा ही संन्यास लेना चाहता है तो क्या कर सकते हो, शायद प्रकृति यही चाहती है.’

‘‘सब ओर से हार कर तपन फिर स्वामीजी की शरण में गए उन से अपने बेटे की भीख मांगने. स्वामीजी ने मिलने से मना कर दिया. सब ओर से निराश हो कर तपन वापस लौटने को उठ खड़े हुए. तभी अखिलानंदजी से उन के साथी ने आ कर धीरे से कुछ कहा. अखिलानंद ने कहा, ‘आप खुश हो जाएं कि स्वामीजी को बेटे के प्रति आप की व्याकुलता देख कर दया आ गई.’

‘‘‘तो क्या वे यथार्थ को हमारे पास वापस भेज देंगे?’ तपन ने अधीर होते हुए पूछा.

‘‘‘नहीं, विश्वानंद तो हमारे आश्रम का अभिन्न अंग हैं. उन के प्रभावी व्यक्तित्व, ओजपूर्ण वाणी, और हिंदी व अंगरेजी दोनों में ही समानरूप से भाषण देने की क्षमता ने तो हम भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ा दी है. वे तो हमारे लिए अनमोल हीरा हैं,’ अखिलानंद ने यथार्थ को दीक्षा देने का रहस्य उजागर किया. तपन की आशा की किरण फिर धूमिल होने लगी.

‘‘कुछ क्षण ठहर कर अखिलानंद बोले, ‘हां, यदि आप चाहें तो एक तरीका है अपने बेटे के पास रहने का?’

‘‘‘वह क्या?’ तपन ने कुछ न समझते हुए पूछा.

‘‘‘आप भी हमारे आश्रम में सेवा करें. दीक्षा ले कर अपनी संपत्ति आश्रम को दान कर दें. भगवत भजन करें. आराम से रहें और भक्तों के हृदय पर राज करें,’ अखिलानंद ने तपन के सामने प्रस्ताव रखा.

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‘‘इस में दोनों का हित निहित था. सो, दोनों इस संधि प्रस्ताव से सहमत हो गए.

‘‘तपन का छोटा बेटा मलय, जो पायलट का प्रशिक्षण ले रहा था, इस सब से सहमत नहीं था. सो, उस ने अपने चाचा के साथ रहने का निर्णय ले लिया.’’

मलय के मुख से इस संधि प्रस्ताव के बारे में सुन कर अर्पिता हतप्रभ थी.

Manohar Kahaniya: बबिता का खूनी रोहन- भाग 3

इंसपेक्टर मलिक की सख्ती पर सहमे हुए लखन ने बताया तो मलिक ने उसे पूरी बात साफसाफ बताने के लिए कहा.

तब लखन ने बताया कि उस ने करीब एक साल पहले यह बाइक प्रवीण से खरीदी थी. उस समय वह एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था, लेकिन बाइक खरीदने के कुछ दिन बाद ही कोरोना महामारी के कारण हुए लौकडाउन में उस की नौकरी चली गई और वह बेरोजगार हो गया.

बाइक अकसर घर पर ही खड़ी रहती थी. इसी दौरान कुछ महीने पहले उस के बड़े भाई के बेटे रोहन उर्फ मनीष की एयरटेल कंपनी में नौकरी लग गई, लेकिन उस के पास भागदौड़ करने के लिए कोई साधन नहीं था.

लिहाजा उस ने अपनी बाइक रोहन को दे दी और कहा जब वह अपने लिए दूसरी बाइक खरीद ले तब उस की बाइक वापस कर देना. इस के बाद से रोहन ही उस की बाइक का इस्तेमाल करता है. उसे नहीं पता कि भीमराज पर गोली किस ने चलाई. रोहन ने खुद इस का इस्तेमाल किया था या किसी अन्य व्यक्ति को उस ने बाइक इस्तेमाल के लिए दी थी.

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जांच ले गई आरोपी रोहन तक

यह बात तो साफ हो गई कि लखन की बाइक का इस्तेमाल भीमराज पर हुए हमले में किया गया था. लेकिन वारदात वाले दिन बाइक कौन ले कर गया था, इस का खुलासा होना मुश्किल काम नहीं था. इंसपेक्टर जितेंद्र मलिक ने तत्काल सीसीटीवी की फुटेज लखन को दिखाई तो उस ने साफ कर दिया कि बाइक पर सवार युवक उस का भतीजा रोहन ही है. बस इस के बाद पुलिस के लिए रोहन को पकड़ना कोई मुश्किल काम नहीं था. पुलिस टीम ने अगली सुबह ही रोहन को उस के घर से सोते हुए दबोच लिया.

थाने ला कर जब रोहन से पूछताछ शुरू हुई तो पहले वह इधरउधर की बातें करता रहा. लेकिन जब पुलिस ने उसे सीसीटीवी में कैद हुई उस की तसवीरें दिखाईं तो उस ने कबूल कर लिया कि उसी ने भीमराज को गोली मारी थी.

आखिर ऐसी क्या बात थी कि रोहन ने भीमराज को गोली मार दी. इस सवाल के जवाब में रोहन ने कहा कि भीमराज ने उस दिन गाड़ी चलाते समय उस की बाइक को टक्कर मार दी थी और जब उस ने विरोध जताया तो वह भद्दी गालियां देने लगा. इसी बात से गुस्से में आ कर उस ने पीछा करते हुए एंड्रयूजगंज में जा कर उसे गोली मार दी.

हालांकि रोडरेज के दौरान गुस्से में गोली मार देना, दिल्ली शहर में कोई नई बात नहीं है. क्योंकि इस तरह की घटनाएं यहां अकसर होती रहती हैं. लेकिन थानाप्रभारी मलिक को रोहन की बात पर इसलिए भरोसा नहीं हुआ क्योंकि वे रोहन द्वारा भीमराज को गोली मारने की साजिश तक पहुंच चुके थे.

दरअसल, थानाप्रभारी जितेंद्र मलिक ने भीमराज और बबीता के मोबाइल फोन की जो काल डिटेल्स निकलवाई थी, उस ने रोहन के झूठ की कलई खुल गई.

दरअसल, काल डिटेल्स की जांच के बाद पुलिस ने सब से पहले भीमराज के फोन पर आने वाले नंबरों में इस बात की पड़ताल की थी कि घटना वाले दिन या उस से पहले या कुछ महीनों के दौरान उस ने सब से ज्यादा किन लोगों से बात की थी.

बबीता के मोबाइल की काल डिटेल्स की जांच की गई तो पता चला कि पिछले 3 महीनों से बबीता एक नंबर पर सब से ज्यादा और लंबीलंबी बातें किया करती थी. उस नंबर पर देर रात में भी बात करने की डिटेल थी. इसी नंबर पर वाट्सऐप मैसेजों का भी आदानप्रदान था. जिस दिन भीमराज को गोली मारी गई थी, उस दिन सुबह 7 बजे से ही इस नंबर पर बातें हुईं.

इतना ही नहीं, जिस वक्त एंड्रयूजगंज में भीमराज को गोली लगी, उस के 10 मिनट बाद भी इसी नंबर से बबीता के फोन पर काल की गई. बाद में भी कुछ काल्स के रिकौर्ड मिले. हालांकि जब बबीता से इस बात की जानकारी ली गई तो उस ने बताया कि उस ने अपने पार्लर पर जो पेमेंट स्वाइप मशीन लगवाई हुई है, उस में नेटवर्किंग की दिक्कत रहती है, इसी संबध में वह एयरटेल कंपनी के नेटवर्किंग एग्जीक्यूटिव से बात करती है. पूछने पर उस ने एग्जीक्यूटिव का नाम रोहन बताया.

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इधर जब पुलिस ने उस नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि रोहन गोविंदपुरी की गली नंबर 13 में रहता है.

रोहन जब कभी रोडरेज, तो कभी लेनदेन के विवाद की कहानी बता कर पुलिस को काफी देर तक उलझाता रहा तो इंसपेक्टर मलिक ने उस के सामने वो काल डिटेल्स रख दी, जिस में उस के फोन व बबीता के नंबर पर दिन व रात में अनगिनत बार लंबीलंबी बातें करने का रिकौर्ड था.

आखिर रोहन ने बता दी सच्चाई

रोहन पुलिस को पूछताछ में बबीता से बात करने और रातों में बातचीत का कोई स्पष्ट कारण नहीं बता सका. इसीलिए पुलिस ने जब उस के साथ सख्ती की तो वह टूट गया और उस ने सच उगल दिया.

रोहन से पूछताछ के बाद इस वारदात के पीछे नाजायज रिश्ते की एक ऐसी कहानी सामने आई, जिस में एक अधेड़ उम्र की महिला ने कमउम्र के नौजवान को अपने प्यार के जाल में फांस कर उस की ऐसी मतिभ्रष्ट कर दी कि महिला के कहने पर उस ने अधेड़ प्रेमिका के पति को गोली मार दी.

दरअसल, बबीता की उम्र भले ही 42 की हो गई थी, लेकिन ब्यूटीपार्लर चलाने के कारण आज भी वह अपने 45 साल के पति से ज्यादा आकर्षक व सुंदर थी. भीमराज के तीनों बच्चे किशोरावस्था की दहलीज से निकल कर जवानी की तरफ कदम बढ़ा रहे थे. इस कारण उस में अब पत्नी के प्रति आकर्षण कम हो गया था और बच्चों  व घरगृहस्थी चलाने की जद्दोजहद उस पर ज्यादा सवार रहती थी.

ढलती जवानी में जब पति अपनी पत्नी की देह से ऐसा उदासीन व्यवहार करे तो कुछ महिलाएं रास्ता भटक ही जाती हैं. हां, भीमराज जब कभी शराब के नशे में होता तो वह जरूर बबीता की देह को जम कर रौंदता था. लेकिन बबीता चाहती थी कि उस का पति उसे न सिर्फ प्यार करे बल्कि उसे अपने व्यवहार से भी इस बात का अहसास कराए.

बस अपने प्रति इसी उदासीन व्यवहार के कारण बबीता पति से इतर किसी दूसरे शख्स  में इस अहसास को तलाशने लगी. यह सितंबर 2020 महीने की बात है. बबीता ने अपने पार्लर पर डिजिटल पेमेंट के लिए एयरटेल का ब्राडबैंड कनेक्शन तथा एक स्वाइप मशीन लगवाई थी. इसी संबध में एयरटेल की तरफ से रोहन उस के यहां एग्जीक्यूटिव बन कर आया था. 23 साल का गबरू जवान और गठीला शरीर. न जाने क्या था, रोहन के व्यक्तित्व में कि बबीता पहली ही नजर में उस पर फिदा हो गई.

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रोहन ने भी पहली मुलाकात में ही बबीता की आखों में भरी मस्ती और देह में बसी तड़प को पढ़ लिया था. पहली ही मुलाकात के बाद दोनों के बीच नंबरों का आदानप्रदान हो गया. बबीता छोटीछोटी बात पर किसी बहाने से रोहन को अपने पार्लर पर बुलाने लगी.

2-4 मुलाकातों के बाद शिष्टाचार की भेंट अपनत्व में बदल गई और निजी व परिवार की बातें भी होने लगीं.

ब्यूटीपार्लर में रखी प्यार की नींव

बबीता जहां अपने अतृप्त प्यार को पाने के लिए रोहन की तरफ झुकी जा रही थी तो जवान जिस्म की देह सुगंध से महरूम रोहन भी जल्द से जल्द बबीता के मादक जिस्म  की देह को पाने के लिए मचल रहा था.

जल्द ही दोनों के बीच ऐसे रिश्ते बन गए, जिन्हें समाज नाजायज रिश्तों का नाम देता है. रोहन के जवान जिस्म  के स्पर्श ने बबीता में एक अजीब सा रोमांच भर दिया था. वे दोनों अकसर मिलने लगे.

बबीता कभी रोहन को अपने पार्लर पर बुला कर अपनी अतृप्त देह को तृप्त कर लेती तो कभी उसे पति व बच्चों की अनुपस्थिति में अपने घर बुला लेती. कभीकभी वे किसी होटल का कमरा बुक कर के अपने अरमानों को पूरा करने लगे.

अपनी उम्र से 20 साल छोटे रोहन के प्यार में बबीता इस कदर पागल हो चुकी थी कि इस बात को भी भूल गई थी कि वह एक शादीशुदा औरत है और रोहन की उम्र से कुछ ही छोटे 3 बच्चों की मां भी है.

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Ghum Hai Kisikey Pyaar Mein की ‘पाखी’ को लगा बड़ा झटका, खोया अपना ये करीबी शख्स

कोरोना के दूसरे कहर ने देश में तबाही मचा रखी है. इस कोरोना काल में हर रोज बुरी खबर सुनने को मिलती है. कई टीवी स्टार्स बीते अपने चहेते लोगों को खो चुके हैं. हाल ही में खबर आई थी कि अनुपमा एक्टर Aashish Mehrotra के पिता का निधन हो गया है. अब खबर यह आ रही है कि सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ एक्ट्रेस एश्वर्या  शर्मा (पाखी) ने अपनी नानी को खो दिया है.

एश्वर्या  शर्मा (Aishwarya Sharma)  ने एक पोस्ट के जरिए ये दुखद सूचना दी है. उन्होंने इस पोस्ट में अपनी नानी की कुछ तस्वीरें शेयर की हैं.

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एश्वर्या  शर्मा की इस पोस्ट पर फैंस ने उनकी नानी को श्रद्धांजलि दे रहे हैं तो वहीं सीरियल गुम है किसी के प्यार में के  स्टार्स भी एश्वर्या शर्मा की नानी को श्रद्धांजलि देनी शुरू कर दी हैं. इस शो के एक्टर नील भट्ट ने  ने लिखा, काश मैं भी उनसे मुलाकात कर पाता. तो वहीं आयशा सिंह, किशोरी शाहणे और शीतल मलिक जैसे सितारों ने भी एश्वर्या शर्मा की नानी के देहांत पर शोक जाहिर किया है.

 

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एक्ट्रेस ने अपनी नानी की तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, ‘बीते दिन मैंने अपनी नानी को खो दिया. मुझे याद है जब मुझे कोरोना हुआ था तो उन्होंने मुझसे बात की थी. नानी ने मुझसे कहा था जब तक तू ठीक न हो जाए काम पर मत जाना.

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एश्वर्या  शर्मा  ने आगे लिखा,  मेरी नानी एक अच्छी इंसान था. वो हर किसी का भला चाहती थी. मैं अपनी नानी से बहुत प्यार करती हूं. मुझे अपनी नानी की बहुत याद आ रही है. भगवान मेरी नानी की आत्मा को शांति दे.

“स्वयंभू” बाबा रामदेव की धमकी के पीछे की महाशाक्ति कौन?

“बाबा रामदेव” से “लाला रामदेव” बने पतंजलि के प्रमुख स्वघोषित बाबा, स्वयं घोषित महान योगाचार्य बाबा रामदेव का हट और उनका व्यवहार सीधे-सीधे कानून सरकार और संविधान को चैलेंज करने वाला है.

वह यह कहना चाहते हैं कि आज देश में वह स्वयंभू महाशक्ति है. शासन प्रशासन को उनके खीसे में है, वे साफ-साफ यह कहना चाहते हैं कि केंद्र की नरेंद्र दामोदरदास मोदी की सरकार के रहते उनका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता, क्योंकि प्रधानमंत्री तक सीधा उनका दखल और अपना रूतबा है.

बाबा रामदेव जब तलक एक साधारण योगी थे और अपना काम निष्ठा पूर्वक कर रहे थे, तब तक उनकी सभी ओर जय जयकार थी. उन्हें देश का हर छोटा बड़ा आदमी सम्मान की दृष्टि से देखता था. क्योंकि वह योग को जन जन तक पहुंचाने का काम इमानदारी से कर रहे थे. मगर जैसे ही उन्होंने राजनीति का दामन थामा और बाबा से लाला बनने की ओर अग्रसर हुए तो उनके स्वार्थ ने उन्हें अपने मार्ग से भटका दिया.यही कारण है कि आज वह कोरोना संक्रमण काल में अपनी सेवा भावाना को प्रदर्शित करने की अपेक्षा वाक- युद्ध में लग गए हैं और डॉक्टरों, एलोपैथी सिस्टम को चैलेंज कर रहे हैं. परिणाम स्वरूप देशभर में यह चर्चा का मुद्दा बन गया है.

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एक स्वयंभू सत्ता संचालक!

बाबा रामदेव जिस तरह का व्यवहार कर रहे हैं उनकी एक एक शब्द और भाव भंगिमा से यह स्पष्ट झलक रहा है कि वे देश में आज प्रधानमंत्री दामोदरदास मोदी के संरक्षण में स्वयंभू सत्ता के संचालक बन गए हैं. उन्हें गर्व और घोर घमंड है कि वह देश की सत्ता को बनाते हैं और बिगाड़ने की कूबत रखते हैं. क्योंकि वे बहुत लोकप्रिय हो चुके हैं और जनता उनको बहुत चाहती है. यही नहीं वह बहुत महान काम कर रहे हैं, यह बात उन की बातों से साफ झलकती है कि उन्हें अपने आप पर गर्व है कि मैं मैं हूं. मेरे जैसा देश में दूसरा कोई नहीं है. और जहां तक सत्ता की बात है सत्ता तो मेरे पतंजलि के मुख्य गेट की चेरी है. यही भाव भंगिमा लेकर के बाबा रामदेव आत्मविश्वास से लबरेज पूरे एलोपैथिक सिस्टम पर प्रहार पर प्रहार कर रहे हैं. और जब कोई उनसे निवेदन करते हुए कहता है कि यह गलत है तो उसे आंख दिखाते हैं और जब कोई कानून की बात करता है तो वे पीछे हट जाते हैं और माफी मांग लेते हैं.

सवाल है कि- बाबा रामदेव का स्टैंड सही है तो फिर माफी क्यों मांग लेते हैं?

यह बात देश को समझने के लिए काफी है कि वह बिना रीढ़ के योग गुरु है. जिसका उद्देश्य अपने पतंजलि व्यवसाय को चमकाना और करोड़ों रुपए जेब में भरना है.

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भूल गए, साड़ी पहन कर भागने की घटना!

यूपीए की डॉ मनमोहन सिंह की सरकार के समय रामदेव ने अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया था. और सारी दुनिया ने देखा था कि किस तरह जब आंदोलन स्थल पर बैठे हुए बड़ी-बड़ी बातें करने वाले बाबा रामदेव को पुलिस कानून की भाषा में बात करने के लिए पहुंची तो उन्होंने अपने गेरूए वस्त्र उतारकर महिलाओं की साड़ी अन्य वस्त्र पहन कर के वहां से भाग जाने में ही अपनी भलाई समझी.

यह घटना बाबा रामदेव के सच को बताती है कि किस तरह वह पहले दहाड़ते हैं फिर पासा उलटा पड़ते ही, मौका देख भाग जाते हैं.

आज, लगभग एक दशक बाद पुनः बाबा रामदेव अपने तेवर दिखा रहे हैं. इस दफा उन पर सीधा केंद्र सरकार की मोदी सरकार का संरक्षण होने के कारण हुंकार भर रहे हैं कि किसी के बाप में दम नहीं कि मुझे गिरफ्तार कर ले!

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सीधी सी बात है कि सारा देश यह जानना समझना चाहता है कि आखिर बाबा रामदेव का गॉडफादर कौन है? आखिर बाबा रामदेव को संविधान, कानून और पुलिस का भय क्यों नहीं है? और इस संपूर्ण घटनाक्रम से नरेंद्र मोदी की छवि किस तरह धूमिल हो रही है.

बाबा रामदेव को यह समझना चाहिए कि कानून से बढ़कर हमारे यहां प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश भी नहीं है.

‘नागिन 6’ में लीड रोल निभाएंगी Niyati Fatnani, मेकर्स ने दिया Rubina Dilaik को बड़ा झटका

कलर्स टीवी का पॉपुलर शो ‘नागिन’ का 6ठा सीजन जल्द ही वापसी करने वाला है. जी हां, फैंस को इस शो का बेसब्री से इंतजार है. और ये भी अंदाजा लगाया जा रहा था कि शो में लीड रोल बिग बॉस 14 की विनर रूबीना दिलाइक निभाएंगी.

दरअसल बिग बौस 14 के दौरान एकता कपूर गेस्ट के तौर पर गई थीं तब उन्होंने कहा था कि वह रुबीना के साथ काम करना चाहती हैं. एकता की यह बात सुनकर रूबीना काफी खुश हुई थीं. तभी से अंदाजा लगाया जा रहा था कि रूबीना दिलाइक ‘नागिन 6’ में मेन रोल में नजर आएंगी.

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अब खबर यह आ रही है कि शो के मेकर्स ने रूबीना दिलाइक के फैंस को बड़ा झटका दे दिया है. जी हां, खबरों के अनुसार टीवी एक्ट्रेस नियति फतनानी इस शो में लीड रोल अदा करने वाली हैं.

 

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रिपोर्ट्स के अनुसार हाल ही में ऑडिशन पूरे हुए हैं. मिली जानकारी के अनुसार, ‘नागिन 6 के ऑडिशन पूरे हो गए हैं. खबरों की माने तो नियति फतनानी को ‘नागिन 5’ के लिए भी अप्रोच किया गया था लेकिन बाद में सुरभि चंदना को फाइनल किया गया लेकिन इस बार मेकर्स उन्हें शो में लेना चाहते हैं.

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रूबीना दिलाइक की वर्क फ्रंट की बात करे तो बिग बौस 14 के बाद वह कलर्स टीवी के शो ‘शक्ति अस्तित्व के एहसास की’ (Shakti Astitva Ke Ehsaas Ki) में नजर आ रही हैं.

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स्वच्छता, सैनिटाइजेशन और फाॅगिंग से रुकेगा गांव में संक्रमण

लखनऊ . मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि राज्य सरकार की ‘ट्रेस, टेस्ट एण्ड ट्रीट’ की नीति से प्रदेश में कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने में प्रभावी सफलता मिल रही है. पॉजिटिविटी दर में लगातार कमी तथा रिकवरी दर में निरन्तर वृद्धि हो रही है. राज्य में कोविड संक्रमण के मामलों में आशानुकूल तेजी से कमी आयी है. उन्होंने कोविड-19 से बचाव और उपचार की व्यवस्थाओं को इसी प्रकार प्रभावी ढंग से जारी रखने के निर्देश दिए हैं.

मुख्यमंत्री जी आज वर्चुअल माध्यम से आहूत एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे. बैठक में मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि विगत 24 घण्टों में प्रदेश में कोरोना संक्रमण के 3,371 नए मामले आए हैं. इसी अवधि में 10,540 संक्रमित व्यक्तियों का सफल उपचार करके डिस्चार्ज किया गया है. प्रदेश में 30 अप्रैल, 2021 को संक्रमण के अब तक के सर्वाधिक एक्टिव मामले 3,10,783 थे. वर्तमान में संक्रमण के एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 62,271 हो गयी है. इस प्रकार विगत 30 अप्रैल के सापेक्ष एक्टिव मामलों की संख्या में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आयी है.

मुख्यमंत्री जी को यह भी अवगत कराया गया कि राज्य में कोरोना संक्रमण की रिकवरी दर में लगातार वृद्धि हो रही है. वर्तमान में यह दर बढ़कर 95.1 प्रतिशत हो गयी है. प्रदेश में पिछले 24 घण्टों में रिकाॅर्ड 3,58,243 कोविड टेस्ट किए गए हैं. यह न केवल प्रदेश में एक दिन में किए गए सर्वाधिक कोरोना टेस्ट हैं, बल्कि सम्पूर्ण देश में एक दिन में सम्पन्न सर्वाधिक कोरोना टेस्ट हंै. मुख्यमंत्री जी ने इतनी बड़ी संख्या में टेस्ट को संक्रमण की रोकथाम में उपयोगी बताते हुए कहा कि प्रतिदिन लगभग इतने टेस्ट की संख्या को बरकरार रखने का प्रयास किया जाए. मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि इन टेस्ट में संक्रमण की पॉजिटिविटी दर 01 प्रतिशत से भी कम रही है. प्रदेश में अब तक कुल 4 करोड़ 77 लाख 20 हजार 695 कोविड टेस्ट किए जा चुके हैं.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गांवों को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए वृहद जांच अभियान सफलतापूर्वक चलाया जा रहा है. निगरानी समितियों द्वारा उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है. प्रदेश में संक्रमण निरन्तर कम हो रहा है. निगरानी समितियों द्वारा मेडिकल किट के वितरण की कार्यवाही निरंतर और प्रभावी ढंग से जारी रखी जाए. लक्षण युक्त एवं संदिग्ध संक्रमित व्यक्तियों को मेडिकल किट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा सेक्टर के प्रभारी अधिकारी को जवाबदेह बनाया जाए. यह अधिकारी हर लक्षण युक्त एवं संदिग्ध संक्रमित व्यक्ति को मेडिकल किट की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं.

मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि बच्चों के लिए अलग से मेडिकल किट तैयार कर निगरानी समितियों को उपलब्ध कराने का प्रबंध हो रहा है. मुख्यमंत्री जी ने कहा कि निगरानी समितियों द्वारा मेडिकल किट के वितरण के साथ ही, संबंधित व्यक्तियों की सूची बनाई जाए. यह सूची इण्टीग्रेटेड कमाण्ड एण्ड कन्ट्रोल सेन्टर (आई0सी0सी0सी0) तथा जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाए. आई0सी0सी0सी0 द्वारा मेडिकल किट प्राप्त करने वाले व्यक्तियों से किट की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त करने के साथ ही, उनका कुशलक्षेम भी लिया जाए. जनप्रतिनिधिगण द्वारा भी मेडिकल किट प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के साथ संवाद स्थापित कर उनका हालचाल प्राप्त किया जाए.

मुख्यमंत्री जी ने राज्य में ब्लैक फंगस की दवाओं की उपलब्धता के संबंध में जानकारी प्राप्त करते हुए कहा कि ब्लैक फंगस के संक्रमण से प्रभावित सभी मरीजों को दवा उपलब्ध कराई जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी जनपदों में ब्लैक फंगस की दवाओं की उपलब्धता रहे. यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस संक्रमण की दवा की कालाबाजारी न होने पाए.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोरोना संक्रमण की सम्भावित थर्ड वेव की रोकथाम के लिए मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है. इसके लिए अभी से कार्यवाही किए जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में इंसेफेलाइटिस पर सफल नियंत्रण के अनुभव का उपयोग करते हुए कोरोना संक्रमण की भविष्य में किसी भी आशंका से निपटने की तैयारी की जानी चाहिए. इसके लिए ग्रामीण क्षेत्र के सभी सामुदायिक, प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र तथा हेल्थ एवं वेलनेस सेण्टर को सुदृढ़ बनाकर प्रभावी ढंग से क्रियाशील रखा जाए. इन स्वास्थ्य केंद्रों के सुदृढ़ीकरण के लिए एक व्यक्ति को जिम्मेदारी देकर कार्य व्यवस्थित, त्वरित तथा प्रभावी ढंग से संपन्न कराया जाए. साथ ही, मुख्यालय तथा जनपद स्तर पर नियमित समीक्षा भी की जाए.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि शिक्षा विभाग में संचालित ऑपरेशन कायाकल्प की भांति जन सहयोग के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, उप स्वास्थ्य केंद्रों तथा हेल्थ एवं वैलनेस सेंटर में आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था तथा रखरखाव को बेहतर बनाया जाना चाहिए. इस सम्बन्ध में जनप्रतिनिधिगण का सहयोग प्राप्त करने का प्रयास किया जाए. मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित जिला चिकित्सालयों सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं के सम्बन्ध में समग्र जानकारी उपलब्ध कराने वाला एक मोबाइल एप विकसित किया जा रहा है. मुख्यमंत्री जी के अनुमोदन के उपरान्त इसे लॉन्च किया जाएगा.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भविष्य की आवश्यकता के दृष्टिगत कोविड बेड की संख्या में निरन्तर वृद्धि की जाए. आवश्यक मानव संसाधन की संख्या में भी लगातार बढ़ोत्तरी की जाए, इसके लिए भर्ती की कार्यवाही तेजी से सम्पन्न की जाए.

मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि कोविड-19 के उपचार की व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए उनके निर्देशों के अनुरूप कार्यवाही की जा रही है. कोविड बेड की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी की जा रही है. विगत दिवस प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों तथा अस्पतालों में 161 बेड की वृद्धि हुई है. इसमें आइसोलेशन बेड के अलावा लगभग 60 आई0सी0यू0 बेड भी शामिल हैं. मानव संसाधन में भी लगातार वृद्धि की जा रही है. विगत दिवस में 62 नए कर्मियों को भर्ती किया गया है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पीडियाट्रिक आई0सी0यू0 (पीकू) तथा निओनेटल आई0सी0यू0 (नीकू) के निर्माण की कार्यवाही युद्ध स्तर पर की जाए. इंसेफ्लाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभी से पूरी सतर्कता बरती जाए. उपचार की व्यवस्था की भी अभी से पूरी तैयारी कर ली जाए.

ए0एन0एम0, आंगनबाड़ी व आशा कार्यकत्र्रियों के प्रशिक्षण की कार्यवाही पूरी कर ली जाए. सभी जनपदों में उपलब्ध समस्त वेंटिलेटर कार्यशील अवस्था में रहें. खराब वेंटिलेटर की तुरन्त मरम्मत कराकर क्रियाशील किया जाए. वेंटीलेटर के संचालन के लिए आई0टी0आई0 में उपलब्ध टेक्निशियंस की जनपदवार सूची बनाकर राज्य स्तर पर फिजिकली ट्रेनिंग कराई जाए. ट्रेनिंग के पश्चात इन टेक्नीशियन की आवश्यकतानुसार तैनाती दी जाए. मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि पीकू और नीकू की स्थापना की कार्रवाई तेजी से गतिशील है. सभी मेडिकल कॉलेजों में 50 बेड का आई0सी0यू0 तथा 50 आइसोलेशन के बेड तैयार किए जा रहे हैं.

मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों तथा रीफिलर्स के पास पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन बैकअप उपलब्ध है. होम आइसोलेशन के मरीजों में भी ऑक्सीजन की डिमाण्ड में कमी आयी है. विगत 24 घण्टों में राज्य में 663 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई. मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिए कि ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना की कार्यवाही को त्वरित गति से आगे बढ़ाने के लिए जनपद स्तर पर नोडल अधिकारी की तैनाती कर दैनिक समीक्षा की जाए. शासन स्तर पर भी ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना के संबंध में नियमित समीक्षा की जाए.

मुख्यमंत्री जी ने निर्देशित किया कि कोविड वैक्सीनेशन की कार्यवाही व्यवस्थित, निर्बाध और सुचारु ढंग से जीरो वेस्टेज को ध्यान में रखकर संचालित की जाए.  वैक्सीनेशन सेंटर पर कोविड प्रोटोकॉल का पालन आवश्यक रूप से हो. सेंटर पर भीड़-भाड़ से बचने के लिए वेटिंग एरिया तथा ऑब्जरवेशन एरिया की भी व्यवस्था अवश्य होनी चाहिए. उन लोगों को ही वैक्सीनेशन सेंटर पर बुलाया जाए, जिनका वैक्सीनेशन किया जाना है. ग्रामीण क्षेत्र में वैक्सीनेशन कार्य को त्वरित और प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए कॉमन सर्विस सेण्टर (सी0एस0सी0) को सक्रिय कर वैक्सीनेशन हेतु रजिस्ट्रेशन हेतु उपयोग किया जाए. मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि 1 जून, 2021 से सभी 75 जनपदों में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के लोगांे के वैक्सीनेशन का कार्य प्रारंभ किया जाएगा. इस संबंध में गाइडलाइन आज जारी कर दी जाएगी.

मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि उनके निर्देशानुसार प्रत्येक जनपद में 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अभिभावकों के लिए वैक्सीनेशन हेतु अभिभावक स्पेशल बूथ बनाए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री जी ने कहा कि शहरी इलाकों से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में भी वैक्सीनेशन की व्यवस्था की जाए. सामान्यतया 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के अभिभावकों की आयु 22 से 44 वर्ष के बीच होती है. यह प्रमुख कामकाजी वर्ग है. इनके वैक्सीनेशन के विशेष प्रयास आवश्यक हैं. भविष्य में कोरोना संक्रमण से बच्चों के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए इस वर्ग को चिन्हित कर वैक्सीनेशन प्रभावी ढंग से कराया जाए. उन्होंने कहा कि भविष्य में वैक्सीनेशन कार्य को व्यापक पैमाने पर संचालित कराने के लिए आवश्यक मैन पावर की व्यवस्था कर प्रशिक्षण आदि संपन्न करा लिया जाए.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वच्छता, सैनिटाइजेशन तथा फाॅगिंग की कार्यवाही युद्ध स्तर पर जारी रखी जाए. ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, हेल्थ एवं वेलनेस सेण्टर तथा घनी आबादी के क्षेत्रों में स्वच्छता, सैनिटाइजेशन एवं फाॅगिंग का विशेष अभियान संचालित किया जाए. इसी प्रकार सभी नगर निकायों में भी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हेल्थ एवं वेलनेस सेण्टर पर स्वच्छता, सैनिटाइजेशन तथा फाॅगिंग का कार्य कराया जाए. जल-जमाव को रोकने के लिए नाले व नालियों की सफाई करा ली जाए. स्वच्छता एवं सैनिटाइजेशन के कार्य में फायर ब्रिगेड तथा गन्ना विभाग के वाहनों एवं मशीनों का उपयोग किया जाए. मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि विगत दिवस फायर ब्रिगेड के 394 फायर टेंडर्स ने स्वच्छता एवं सैनिटाइजेशन के कार्य में योगदान किया है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आंशिक कोरोना कफ्र्यू का प्रभावी ढंग से पालन कराया जाए. यह कार्यवाही सद्भाव पूर्ण होनी चाहिए. घर से बाहर निकलने वाले लोगों को मास्क के अनिवार्य प्रयोग तथा सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने के सम्बन्ध में जागरूक करने के लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम का प्रभावी उपयोग किया जाए. इसके लिए इस व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाए. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी गेहूं क्रय केन्द्र कार्यशील रहें. एम0एस0पी0 के तहत गेहूं खरीद तथा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अन्तर्गत खाद्यान्न का वितरण कोविड प्रोटोकाॅल के पूर्ण पालन के साथ सुचारु ढंग से किया जाए. सभी जनपदों में कम्युनिटी किचन का प्रभावी ढंग से संचालन किया जाए. डोर स्टेप डिलीवरी  व्यवस्था सुदृढ़ रखी जाए. औद्योगिक गतिविधियां सुचारू ढंग से संचालित रहें.

Ghum Hai KisiKey Pyaar Meiin: चौहान हाउस में आएगा नया मेहमान, अब क्या करेगी भवानी

टीआरपी चार्ट्स में धमाल मचाने  वाला सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ नए ट्विस्ट एंड टर्न देखने को मिल रहा है. शो की कहानी में इन दिनों दिखाया जा रहा है कि सई ने चौहान हाउस में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है. तो विराट भी सई पर विश्वास करना शुरू कर दिया है तो उधर भवानी नहीं चाहती कि सई चौहान हाउस में टिकी रहे. तो ऐसे में शो के नए एपिसोड में खूब धमाल होने वाला है. आइए बताते हैं, क्या होगा शो में आगे…

शो के लेटेस्ट ट्रैक में ये दिखाया जा रहा है कि सई को लेकर भवानी और पाखी की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. उन्हें ये समझ नहीं आ रहा है कि वो किस तरह से सई को रोके.

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तो वहीं सई देवयानी और हारिणी के रिश्ते को लेकर परेशान है. हारिणी, माधुरी को ही अपनी मां समझती है. सई अपनी परेशानी विराट के साथ साझा करती है. जिसके बाद विराट और सई मिलकर हारिणी को घर लाने के लिए निकल जाते हैं.

 

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एक तरफ विराट और सई की बढ़ती नजदीकियों से पाखी भड़क जाती है. ऐसे में वह विराट के साथ बैंक जाने का प्लान बनाती है. विराट और सई की वजह से सोनाली और करिश्मा, पाखी की मजाक बनाने वाले हैं. सोनाली और करिश्मा की बातें सुनकर पाखी का पारा और चढ़ जाएगा.

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तो इसी बीच सई, हारिणी को चौहान हाउस ले आएगी. शो के अपकमिंग एपिसोड में ये देखना दिलचस्प होगा कि हारिणी को चौहान हाउस में देखकर भवानी का क्या क्या रिएक्शन होगा.

सीरियल के बीते एपिसोड में आपने देखा कि भवानी, देवयानी मामले में दखल करने के लिए सई को धन्यवाद कहती है. भवानी के यू टर्न लेते ही पाखी जल भुनकर राख हो जाती है. पाखी आरोप लगाती है कि सई भवानी की फेवरेट बहू बनती जा रही है.

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उत्तर प्रदेश: अगड़ों को मलाई एससीबीसी को पसंद नहीं आई

75 जिलों के तकरीबन 12 करोड़ वोटरों का फैसला भाजपा के खिलाफ गया है. जो एससीबीसी तबका भाजपा के साथ था, वह अब उस से छिटक गया है. इस की वजह यह थी कि भाजपा ने उस से वोट तो लिए, पर सत्ता में भागीदारी नहीं दी. इस के बाद पंचायत चुनाव में वह भाजपा से दूर हो गया.

सरकार के तमाम दावों के बाद भी थाने और तहसील में रिश्वतखोरी कम होने के बजाय बढ़ गई है. रिश्वत का रेट भी दोगुना हो गया है. योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से अपने खिलाफ बोलने वालों को निशाने पर लेना शुरू किया, उस से उन के खिलाफ एक चिनगारी सुलग रही थी. पंचायत चुनाव के फैसले ने चिनगारी को हवा देने का काम किया है.

उत्तर प्रदेश में बहुमत की सरकार बनाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने धर्म के नाम पर एससी (शैड्यूल कास्ट) और बीसी (अदर बैकवर्ड कास्ट) को साथ तो लिया, पर जब सत्ता में भागीदारी देने का समय आया, तो मलाई सवर्णों के नाम कर दी.

भाजपा को यह पता था कि इस से एससीबीसी नाराज हो सकते हैं. बीसी जाति के केशव प्रसाद मौर्य को उत्तर प्रदेश का उपमुख्यमंत्री बनाया गया.

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पद के दूसरे पद अगड़ों को दिए गए. इन में मुख्यमंत्री का पद ठाकुर जाति के योगी आदित्यनाथ को और उपमुख्यमंत्री का दूसरा पद ब्राह्मण जाति के डाक्टर दिनेश शर्मा को दे दिया गया.

भाजपा को यह लग रहा था कि एक मुख्यमंत्री और 2 उपमुख्यमंत्री बना कर जातीय समीकरण को ठीक कर लिया गया है. जैसेजैसे सत्ता पर अगड़ों की पकड़ मजबूत होती गई, एससीबीसी को अपनी अनदेखी महसूस होने लगी. ऐसे में एससीबीसी जातियां अलगथलग पड़ने लगीं.

उत्तर प्रदेश में साल 2022 में विधानसभा के चुनाव होंगे. इस के पहले साल 2021 में उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव हुए. इन चुनावों में जिला पंचायत सदस्य के 3,050 पदों के लिए चुनाव हुए.

पंचायत चुनावों में पहली बार इन पदों को राजनीतिक दलों के बैनर के साथ लड़ा गया. इसे सब से मजबूती से भारतीय जनता पार्टी ने ही लड़ा. मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को पंचायत चुनावों का प्रभारी बनाया गया. बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया.

भाजपा को गांवों में समर्थन कम मिलता रहा है. ऐसे में उस की योजना यह थी कि पंचायत चुनाव के बहाने वह गांवगांव में अपना जनाधार मजबूत कर लेगी. भाजपा के विपक्षी दलों सपा और बसपा ने पंचायत चुनाव में कोई मेहनत नहीं की. अखिलेश यादव ने तो ट्विटर पर पंचायत चुनाव को ले कर लिखा भी. मायावती ने ट्विटर पर भी इन चुनावों और अपनी पार्टी को ले कर कोई खास प्रचार  नहीं किया.

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पंचायत चुनावों में अलग हो गए एससीबीसी

पंचायत चुनावों के जब नतीजे सामने आए, तो भाजपा को सब से ज्यादा निराशा ही हाथ लगी. भाजपा की मेहनत और उम्मीद से बहुत खराब नतीजे सामने आए. 3,050 पदों के जब नतीजे सामने आए, तो भाजपा को 764 जगहों पर जीत मिली. उस के मुकाबले समाजवादी पार्टी को 762 जगहों पर जीत मिली और उस की सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल को 68 पद मिले.

अगर समाजवादी पार्टी और लोकदल की सीटें मिला दी जाएं, तो 830 सीटें हो जाती हैं, जो भाजपा की 764 सीटों में से 66 सीटें ज्यादा हैं.

इस तरह से भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश में करारी मात मिली है. इस के अलावा बसपा को 381, कांग्रेस को 76, आम आदमी पार्टी को 64 और निर्दलीयों को 935 पद मिले. अब यही सदस्य मिल कर जिला पंचायत अध्यक्ष को चुनेंगे.

राजनीतिक समीक्षक, पत्रकार विमल पाठक कहते हैं, ‘गांवों में भाजपा को अगड़ी जातियों का समर्थन तो मिला, लेकिन एससीबीसी जातियों ने भाजपा का साथ नहीं दिया. इस वजह से भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा.

‘लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा ने धर्म के हथियार का प्रयोग किया था. पंचायत चुनाव में धर्म की जगह जाति हावी हो गई. भाजपा के लिए यह खतरे की घंटी है.

‘अगर जाति के आधार पर ही साल 2022 के विधानसभा चुनावों में वोट पड़े, तो भाजपा के लिए चुनाव जीतना भारी पड़ जाएगा. भाजपा के अंदर अलगअलग स्तर पर जातीयता को ले कर जिस तरह का विभाजन दिख रहा है, उस से विधानसभा चुनाव में जीत की राह मुश्किल दिख रही है.’

नहीं चली धर्म की राजनीति

भाजपा के लिए सब से डराने वाली बात यह है कि धर्म का कार्ड पंचायत चुनाव में नहीं चला. उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के साथ ही साथ पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव भी थे. वहां भी भाजपा के धर्म का कार्ड नहीं चला.

पंचायत चुनावों में भाजपा को अपनी हार का सब से ज्यादा मलाल अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा की हार को ले कर है. यहां से भाजपा को सब से ज्यादा उम्मीद थी.

वाराणसी में जिला पंचायत की  40 सीटें हैं. इन में से केवल 8 सीटें ही भाजपा को मिली हैं. यहां समाजवादी पार्टी को 15 और बसपा को 5 सीटें मिलीं. अपना दल ‘एस’ को 3, आम आदमी पार्टी और सुहेलदेव समाज पार्टी को एकएक सीट मिली. 3 सीटें निर्दलीय के खाते में गईं.

वाराणसी में अपना दल और सुहेलदेव समाज पार्टी भाजपा की सहयोगी पार्टी रही हैं. इस के बाद भी यह पंचायत चुनाव अलगअलग हो कर लड़े थे. असल में साल 2019 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने अपने सहयोगी दलों को जब दरकिनार करना शुरू किया, तो सहयोगी दल अलगअलग हो गए.

अगर भाजपा को अपना दल और सुहेलदेव समाज पार्टी के पिछड़ा और दलित तबके का साथ मिलता, तो भाजपा के खाते में 11 सीटों से ज्यादा मिल जातीं और सपा को बढ़त नहीं मिलती.

मथुरा में भाजपा को बहुजन समाज पार्टी और लोकदल ने कड़ी टक्कर दी. मथुरा में बसपा को 12, लोकदल को  9 और भाजपा को 8 सीटें मिलीं.

अयोध्या में भाजपा को सपा ने कड़ी टक्कर दी. 40 सीटों में से 24 सीटों पर सपा ने जीत हासिल की और भाजपा के खाते में केवल 6 सीटें ही गईं.

साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में महज 8 महीने ही रह गए हैं. ऐसे में धार्मिक शहरों में भाजपा की हार से यह साफ लग रहा है कि धर्म का अस्त्र अगर चुनाव में नहीं चला, तो भाजपा को हार का सामना करना पड़ेगा.

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वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है, ‘भारतीय जनता पार्टी ने केवल धर्म के एजेंडे को ही आगे रख कर काम किया. ऐसे में रोजगार, विकास की बातें बेमानी हो गई थीं.

‘भारतीय जनता पार्टी को यह लग रहा था कि वह केवल बूथ प्रबंधन के सहारे ही यह चुनाव जीत जाएगी. पंचायत चुनाव में मतदाताओं ने भाजपा को यह बता दिया है कि वोट लेने के लिए जनता के काम भी करने पड़ते हैं.’

कृषि कानून का असर

पंचायत चुनाव पर किसान आंदोलन का भी असर देखने को मिला. कृषि कानूनों के खिलाफ जब किसानों ने आंदोलन शुरू किया, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने इस में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया.

पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को बहुत समर्थन मिला था. किसान आंदोलन का जिस तरह से भाजपा ने दमन किया और किसानों पर तरहतरह के लांछन लगाए, उस से किसान तबका बहुत नाराज था.

भाजपा को लग रहा था कि अगर पंचायत चुनावों में उस को जीत मिल गई, तो वह विधानसभा चुनाव के प्रचार में कह सकती है कि कृषि कानूनों को किसानों ने स्वीकार कर जीत दिला दी है. नोटबंदी और जीएसटी के बाद चुनाव जीतने पर वह ऐसे ही तर्क देती रही है. नोटबंदी, जीएसटी और तालाबंदी के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के चुनाव नतीजों पर ऐसे ही तर्क दिए गए थे.

पंचायत चुनावों में कृषि कानून भी एक मुद्दा बना. किसानों ने भाजपा के खिलाफ इस कारण भी वोट किए. इस का सब से ज्यादा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर पड़ा. जहां साल 2014 से  ले कर 2019 के सभी चुनावों में भाजपा को सब से ज्यादा वोट मिले थे.

भाजपा ने अखिलेश सरकार के समय नोएडा, मुजफ्फरनगर और कैराना को हिंदूमुसिलम के नाम पर भड़काया गया. इस का यह असर पड़ा कि भाजपा को सब से ज्यादा वोट मिले थे.

साल 2017 में जब भाजपा की सरकार बनी, तो सहारनपुर में दलित और सवर्णों के बीच जातीय हिंसा हुई. इस हिंसा में योगी सरकार का रुख दलितों को पसंद नहीं आया. यहीं से दलित भाजपा में खुद को बेहतर हालत में नहीं पा रहा था. धीरेधीरे पिछड़ी जातियां भी ऐसे ही अनुभव करने लगी थीं.

पंचायत चुनावों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को सब से ज्यादा नुकसान हुआ. जनता ने समाजवादी पार्टी, लोकदल, बसपा ही नहीं, बल्कि भीम आर्मी तक को वोट दिया.

मेरठ, सहारनपुर, शामली, बागपत, आगरा और अलीगढ़ जैसे जिलों में लोकदल और समाजवादी गठबंधन को सब से ज्यादा वोट मिले. भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को हार का मुंह देखना पड़ा.

भाजपा ने किसान आंदोलन के समय किसानों की जिस तरह से अनदेखी की, वह पंचायत चुनावों पर भारी पड़ी. भाजपा को अभी भी कृषि कानूनों को वापस लेने पर विचार करना चाहिए. किसानों ने जाति और धर्म से ऊपर उठ कर पंचायत चुनावों में वोट दिया है. पंचायत चुनावों में मिली जीत के बाद किसान आंदोलन और मजबूत होगा.

 सरकार के लिए खतरे की घंटी

पंचायत चुनाव के फैसले उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के लिए खतरे की घंटी हैं. पंचायत चुनावों में हार के बाद भाजपा के अंदर बगावत के सुर सुनाई देने लगे हैं. कई विधायक और सांसद कोरोना संक्रमण के बहाने सरकार पर शब्दबाण चलाने लगे हैं. समस्या यह है कि अगड़ी जातियों में ब्राह्मण भी उन के खिलाफ दबी जबान से बोलने लगे हैं.

उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में भी 2 गुट बन गए हैं. विरोध करने वाले गुट के लोग ‘औफ द रिकौर्ड’ बात कर के अपनी भड़ास निकालते हैं. यही भड़ास हवा के रूप में आगे बढ़ती है और सरकार की छवि को खराब करती है.

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सरकार पार्टी के नेताओं से ज्यादा ब्यूरोक्रेसी पर निर्भर है. ब्यूरोक्रेसी के फरमान जनता पर भारी पड़ते हैं. कोरोना काल में यह देखने को मिला. अफसर योगी को यह सम?ाते रहे कि गांवगांव आप की छवि निखर रही है. पंचायत चुनावों में बड़ी सफलता के बाद विधानसभा चुनाव में आप को कोई चुनौती देने वाला नहीं होगा. कोरोना काल में चुनाव कराने का फैसला योगी सरकार पर भारी पड़ा. जब अस्पताल नहीं मिल रहे, औक्सीजन नहीं मिल रही, श्मशान घाट में जगह नहीं मिल रही, तो लोगों ने सरकार के खिलाफ वोट देने का फैसला किया.

चुनाव नतीजे आने के बाद भी परिणामों को भाजपा के पक्ष में दिखाने का काम अफसरों ने करना शुरू कर दिया है. मुख्य मुकाबला अभी बाकी है. जिला पंचायत सदस्य तो जीत गए, पर विपक्ष के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पद जीतना आसान नहीं होगा. अफसर अब यह कोशिश करेंगे कि जिला पंचायत सदस्यों को भाजपा के पक्ष में किया जाए. समाजवादी पार्टी के विधायक अंबरीष सिंह पुष्कर कहते हैं, ‘बहुत से जिलों में प्रशासन ने जीत गए उम्मीदवारों को जीत के प्रमाणपत्र देने में गड़बड़ी करने की कोशिश की थी. मोहनलालगंज में जब हम ने धरना देने का काम किया, तब प्रशासन ने प्रमाणपत्र दिए. ऐसे में इस बात की संभावना प्रबल है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में खरीदफरोख्त हो.’

कोरोनल डिप्रेशन का बढ़ता खतरा

लेखक- धीरज कुमार   

जिस तरह से अपने देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर बढ़ रही है और पूरे देश में संक्रमित लोगों की तादाद रोजाना बढ़ती जा रही है, उस से डाक्टरों के साथसाथ आम लोग भी कोरोना वायरस के बदले हुए स्ट्रेन के चलते चिंतित और परेशान हैं. हर किसी के मन में यह लग रहा है कि कहीं वह कोरोना वायरस से ग्रसित न हो जाए.

कुछ पढ़ेलिखे और समझदार लोग मास्क लगा रहे हैं और दूरी का पालन कर रहे हैं, वहीं कुछ बेपरवाह लोग मौजमस्ती में हाटबाजार और सड़कों पर घूमते नजर आ रहे हैं. कुछ सम झदार लोग वायरस से बचाव के लिए काफी एहतियात बरत रहे हैं, ठंडी चीजों से परहेज कर रहे हैं, गरम पानी पी रहे हैं व भीड़भाड़ से अपनेआप को दूर रख रहे हैं.

कुछ लोग टीका लगवाने की भी कोशिश कर रहे हैं, ताकि इस बीमारी के जोखिम से बचा जा सके, वहीं कुछ लोग कोरोना वायरस के चलते जितने ज्यादा चिंतित हो गए हैं कि एक तरह से डिप्रैशन का शिकार हो गए हैं.

वैसे तो लोग बारबार हाथ धो रहे हैं, तरहतरह के सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं, यहां तक तो ठीक है, लेकिन कुछ लोग बारबार अपनी सांसें चैक कर के देख रहे हैं. कुछ लोग टैलीविजन और दूसरे मीडिया में खबरें देख कर जिनजिन लक्षणों के बारे में बताया जा रहा है, उन्हें खुद में ढूंढ़ कर अपनेआप को शक के घेरे में डाल रहे हैं. ऐसा करना सही नहीं है.

शक की इसी बीमारी को कोरोनल डिप्रैशन का नाम दिया जा रहा है. आज इस तरह के डिप्रैशन से सैकड़ों लोग पीडि़त हो चुके हैं. कई लोगों को इस डिप्रैशन की वजह से नींद नहीं आ रही है. कई लोग बारबार नींद खुलने की शिकायतें भी कर रहे हैं. मन में घुसे इस डर की वजह से सिरदर्द और चिंता होना लाजिमी है.

संजीव कुमार रोहतास, बिहार में एक कालेज में पढ़ाते हैं. उन्होंने बताया, ‘‘कई बार बुरे सपनों के चलते मेरी नींद टूट जा रही है. ऐसा लग रहा है कि मुझे कोरोना हो चुका है. खुद के तापमान को बारबार नापने की कोशिश करता हूं. अपनी सांसें रोक कर चैक कर रहा हूं.

‘‘कभी गुड़, तो कभी गोल मिर्च (गोलकी मसाला) खा कर अपनेआप को टैस्ट करने की कोशिश कर रहा हूं कि कहीं खाने का स्वाद तो नहीं चला गया है? कहीं मेरी सांसें तो नहीं अटक रही हैं? सीने में दर्द तो नहीं हो रहा है? ऐसा मन में डर के चलते हो रहा है.

‘‘पर, जब मैं डाक्टर के पास गया, तो उन्होंने मु झे पूरी तरह से ठीक बताया और जरूरत पड़ने पर नींद की गोली खाने को दे दी. अब मैं इस वहम से छुटकारा पा गया हूं.’’

वहीं डेहरी ओन सोन की रहने वाली मंजू देवी का कहना है, ‘‘घर पर कोई आ रहा है, तो मु झे इस बात का डर रहता है कि कहीं उन से मैं भी कोविड 19 से ग्रस्त न हो जाऊं. मैं काफी डरी हुई हूं. ऐसे माहौल में मैं क्या करूं, सम झ में नहीं आ रहा है. दिनरात चिंता के चलते सिर में दर्द और नींद नहीं आने की बीमारी हो गई है.

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‘‘कभीकभी तो शक के चलते जब तक खुद को साफसुथरा नहीं कर लेती हूं, तब तक अपने बच्चों के पास भी  नहीं जा पाती हूं. कभी बीच में उठ कर अपने बच्चों को चैक करती हूं, तो कभी खुद को.’’

इस तरह की बेवजह की चिंता और घबराहट बढ़ने की अहम वजह है कि टैलीविजन और दूसरे मीडिया में यह दिखाया जा रहा है कि श्मशान घाटों पर अनेक लाशें रोजाना जल रही हैं. वहां लंबीलंबी कतारें लगी हुई हैं. अस्पताल के बाहर उन के परिवार वालों को चीखतेचिल्लाते हुए दिखाया जा रहा है. देशभर में औक्सीजन सिलैंडर की काफी कमी हो गई है. उन के लिए जगहजगह मारामारी हो रही है.

इस तरह की खबरें सभी चैनलों पर कमोबेश दिखाई जा रही हैं. यह सब आम लोगों में डर पैदा कर रहा है. इस तरह की खबरों से लोगों में घबराहट बढ़ रही है और इस घबराहट से उन में डिप्रैशन बढ़ रहा है.

कुछ लोगों को तो यह लग रहा है कि इस महामारी के बाद वे अपनेआप को बचा पाएंगे या नहीं?

इतना ही नहीं, कुछ लोग मोबाइल पर और मीडिया में देख रहे वीडियो को एकदूसरे को भेज रहे हैं, जिस से डर का माहौल बनता जा रहा है. ऐसे में सम झ में नहीं आ रहा है कि कुछ लोग अपने परिवार वालों को जागरूक कर रहे हैं या उन्हें डरा रहे हैं? हालांकि यह डर लाजिमी है, लेकिन कुछ लोगों में डर इतना बढ़ गया है कि उन में डिप्रैशन बढ़ता ही जा रहा है.

सासाराम के अर्ष मल्टीस्पैशलिटी नर्सिंगहोम के डायरैक्टर डाक्टर आलोक तिवारी का कहना है, ‘‘कोरोना की वजह से लोगों में घबराहट ज्यादा बढ़ गई है. कोरोना से पीडि़त की मौत कोरोना वायरस से कम, बल्कि घबराहट के चलते हार्टअटैक से ज्यादा हो रही है. कुछ लोग एहतियात के तौर पर पहले से ही काढ़ा पी रहे हैं, अपने ऊपर तरहतरह के प्रयोग कर रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं करना चाहिए. ऐसी चीजें लिवर के लिए नुकसान देने वाली हो सकती हैं.

‘‘सरकार द्वारा जारी कोरोना गाइडलाइन का पालन करें. पर इस के लिए दहशत में पड़ने की जरूरत नहीं है. अगर किसी आदमी में कोरोना के लक्षण जैसे सर्दी, खांसी, बुखार, पेट खराब, शरीर में दर्द, आंखों का लाल हो जाना, थकावट जैसे लक्षण पाए जाते हैं, तो तुरंत अस्पताल में इस की जांच कराएं.

‘‘अगर जांच के बाद यह पता चलता है कि किसी को कोरोना हो गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि डाक्टर के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करें.

‘‘वैसे, घर पर ही शरीर के तापमान को माप कर पता किया जा सकता है  कि बुखार है या नहीं. घर पर ही औक्सीमीटर से औक्सीजन लैवल को जांच सकते हैं. अगर औक्सीजन लैवल 94 से नीचे आ रहा है तो अस्पताल में जाने की जरूरत है, वरना घर पर भी इलाज किया जा सकता है.’’

घबराने से काम नहीं चलेगा. घर पर रह कर डाक्टर के निर्देशों का पूरी तरह से पालन करना चाहिए. पौष्टिक आहार, जैसे फलसब्जियां वगैरह का सेवन करें. सांस लेने की कसरत करनी चाहिए. साफसफाई का ध्यान रखना चाहिए. सब से जरूरी बात है कि खुद को घर के दूसरे लोगों से अलग कमरे में कर लेना चाहिए, ताकि घर के बाकी लोग कोरोना वायरस की चपेट में न आने पाएं.

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सोशल मीडिया पर डाले गए तरहतरह के काढ़ा वगैरह के सेवन के बारे में भरम फैलाया जा रहा है. उस के बहुत ज्यादा सेवन से बचना चाहिए. बेवजह की चिंता भी नहीं करनी चाहिए. सब से जरूरी है कि भरम फैलाती खबरों से दूर रहना चाहिए.

अपने आसपास क्या हो रहा है, इस पर नजर जरूर रखनी चाहिए. घर की छत पर या अपने गार्डन में कसरत  करनी चाहिए. खुद को अफवाहों से दूर रख कर कोरोनल डिप्रैशन से बचा जा सकता है.

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