जब पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर तफतीश शुरू की, तो वह हैरान रह गई कि सीमा के सिम की आखिरी लोकेशन राजनांदगांव में महेश के भाड़े के कमरे के आसपास थी.
पूछताछ करने के लिए पुलिस महेश को छुईखदान थाने ले गई, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ. लेकिन सीमा के घर वालों को पक्का यकीन था कि सीमा के गायब होने में इसी दारूबाज का हाथ हो सकता है.
सीमा के घर वालों की तसल्ली के लिए पुलिस ने महेश को पकड़ कर लौकअप में डाल दिया. उसे डरायाधमकाया और कुटाई भी की, लेकिन वह कुछ नहीं उगला.
महेश के खिलाफ कोई ठोस सुबूत नहीं मिलने से पुलिस ने उस को इस शर्त पर छोड़ दिया कि वह राजनांदगांव छोड़ कर कहीं नहीं जाएगा और सीमा के मामले में बुलावे पर थाने में तुरंत हाजिर हो जाएगा.
अभी इतनी ही आपबीती महेश के दिमाग से गुजरी थी कि उस के कमरे का सामान खड़कने लगा, बरतन गिरने लगे, खिड़कियां बजने लगीं. इस से उस की तंद्रा टूट गई. उस ने देशी दारू एक गिलास में उड़ेली और बिना पानी मिलाए ही पी गया.
जब शैतानी नशा सिर चढ़ा, तब महेश को लगा कि सीमा उस के सामने ही बैठी है. वह उसे घूर कर गुस्से से बोल रही है, ‘कितनी दारू पीएगा? पीपी कर मर जाएगा, पर गम कम नहीं होगा तेरा.’
महेश ने अपने सिर को जोरदार झटका दे कर दोबारा सामने देखा, तो वहां कोई नहीं था. क्या यह उस का वहम है? नहींनहीं, यह वहम नहीं, बल्कि हकीकत है. अभीअभी उसे देखा है.
महेश डर के मारे कमरे से निकल ही रहा था कि सीमा ने उसे लंगी मार कर गिरा दिया और चीखने लगी, ‘मुझे मारेगा तू… मैं तुझे जिंदा चबा जाऊंगी…’
इस बार सीमा का रूप भयानक हो चुका था. उस के लंबे बाल बिखरे व उलझे हुए थे. हाथों में लंबेलंबे नाखून उग आए थे. दांत इस कदर बाहर निकले हुए थे जैसे पिशाचिनों के निकले रहते हैं. जीभ लपलपाते हुए वह महेश का गला दबा ही रही थी कि वह उनींदे से घबरा कर जाग उठा और ‘नहींनहीं, मुझे मत मार’ कहता हुआ खाट से जमीन पर औंधे मुंह गिर पड़ा.
महेश के बिस्तर से गिरते ही दरवाजा जोर से खुला, जैसे कोई दरवाजा खोल कर भाग गया हो. वह पसीने से तरबतर हो गया. ख्वाब के बारे में सोचा, तो सोचता ही रह गया. उस की सांस फूल गई और किसी धौंकनी की तरह चलने लगी. आज की रात भी वह सो न सका कि सुबह हो गई.
महेश सुबह दफ्तर गया, तो वहां भी उस के कानों को वही डरावनी आवाजें सुनाई देने लगीं, जो रात को सुनाई दे रही थीं. इस तरह सीमा के कत्ल के बाद उस का लगातार खानापीना, उठनाबैठना, रहनासोना और जीना हराम हो गया. वह जिंदा लाश बन कर रह गया.
रातों की नींद व दिन का चैन रोजाना उड़ जाने से वह बचैनी से एक दिन गिरतेपड़ते पुलिस थाना पहुंचा. खुद को पुलिस के हवाले किया. एक सरकारी वकील के सामने लिखित में जुर्म कबूला और रुंधे गले से सबकुछ उगलने लगा.
यह सुन कर थानेदार के चेहरे पर मुसकान तैर गई. उन्होंने फोन लगाया, ‘‘सीमा बेटी, जहां भी हो, थाने में फौरन पहुंचो, तुम्हारा गुनाहगार थाने में सरैंडर करने आया है.’’
‘‘सीमा… क्या वह जिंदा है?’’ महेश का चेहरा फक्क पड़ गया, मुंह खुला का खुला रह गया. काटो तो खून नहीं जैसी हालत हो गई.
‘‘हां, अब आगे बोलो और क्या बताना चाह रहे हो सीमा की मौत के बारे में?’’ थानेदार ने उस की ओर हिकारत से देख कर कहा.
महेश की हालत सांपछछूंदर सी हो गई, मति चकराने लगी. उसे कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा था कि आगे क्या बोले, इसीलिए वह कभी थानेदार की ओर देखता रहा, तो कभी नीचे मुंडी कर अपनेआप को.
इतने में एक स्कूटी थाने में आ कर रुकी. सीमा दनदनाते हुए थानेदार के रूम में जा पहुंची. महेश सीमा को देख कर हैरानी से खड़ा हो गया, ‘‘अरे सीमा, तू…’’
‘हां, मैं सीमा. मैं हूं जिंदा. तू ने तो मुझे मार ही डाला था नीच. पर, मैं उस फरिश्ते बुजुर्ग की मेहरबानी से बच गई, जो उस रात अपने खेत की रखवाली करने के लिए वहां से निकल रहा था.
‘‘मेरे अचानक घर पहुंचने पर मेरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वहां मैं ने अपनी सहेलियों के साथ मिल कर तुझे सताने, डराने और तड़पाने का प्लान बनाया. इस काम में पुलिस ने भी हमारी मदद की.
‘‘तुम्हारे घर का जो ताला तुम्हें खुला मिला था, वह मैं ने अपने भाई की मदद से डुप्लीकेट चाबी का जुगाड़ कर खोला था और तुम्हारे घर में तुम्हें मैं अपनी सहेली के साथ मिल कर डरा रही थी.’’
महेश रंगे हाथ पकड़ में आए अपराधी की तरह सिर झुकाए सब सुनता रहा. उस की दशा ऐसी हो गई थी, जैसे अभी धरती फट पड़े, तो वह उस में समा जाए.
सीमा ने अचानक पैतरा बदला और बोली, ‘‘अब तक तू ने सीमा का प्यार देखा है, अब लातघूंसे देख…’’ और हिम्मती सीमा तैश में महेश की लातघूंसों से इस कदर मरम्मत करने लगी कि वह अधमरा हो गया.
थानेदार ने सीमा से कहा, ‘‘न बेटी, कानून इस को सजा देगा…’’ लेकिन, सीमा के हाथपैर रुकने का नाम नहीं ले रहे थे, जैसे वह पूरी भड़ास अभी उतार देना चाह रही हो. जब वह थक गई, तब उस के ऊपर थूक कर चली गई.



