Hindi Story: एहसास

Hindi Story: बाहर दिन का उजलापन केंचुल बदल कर शाम की सुरमई चादर ओढ़ने लगा था. रंगबिरंगे पक्षियों के झुंड किलकारियां भरते अपने नीड़ की ओर दांडी मार्च कर रहे थे. सड़क और गलियों में कार्पोरेशन की लैड लाइटों की रोशनी का दूधिया शामियाना तन चुका था. प्रकाश बाबू का मन एक रोमांचक जोश से भरा हुआ था. शुभ्रा को लड़के वाले देखने रहे थे. वे पत्नी सहित अगवानी के लिए दरवाजे पर खड़े थे. 4 का समय तय था, घड़ी की सूइयां 5 बजा रही थीं. एकएक पल की देर से  दिल बैचेन हुआ जा रहा था. बड़े लोगों की मसरूफियत अलग किस्म की होती है. कोई जरूरी काम पड़ा हो और प्रोग्राम टाल दें. पत्नी के कहने पर मोबाइल से बात करना चाहते ही थे कि एक इनोवा कार सरपट लपकती इसी ओर आती दिखी. कार का नंबर देख कर सुकून मिला. लड़के वाले ही थे.

कार पास कर रुकते ही दोनों ने मेहमानों का स्वागत किया और उन्हें अंदर ड्राइंगरूम में ले आए.
वे 5 जन थे. अभिषेक, उस के मातापिता और बहन बहनोई. इसी शहर में उन का कपड़े का कारोबार था. अभिषेक कंप्यूटर इंजीनियर था और शुभ्रा एमबीए. दोनों ही बैंगलुरु में अलगअलग जगह जौब पर थे.
नाश्ताचाय देने के बाद पहलगाम कांड आपरेशन सिंदूर पर छोटे से पोस्टमार्टमी संवाद के बाद अभिषेक की बहन ने हंस कर कहा, ‘‘आंटीजी, अब सस्पैंस खत्म भी कीजिए और अपनी लाल परी के हमें दर्शन कराएं,’’ उस के नाटकीय अंदाज पर सभी खिलखिला पड़े. शुभ्रा अपने रूम में तैयार हो रही थी. उस की सहेली काजल हंसीमजाक करती सहयोग कर रही थी. बादामी रंग का सूट. गले, बांह दामन पर महीन बेलबूटों की हलकी कढ़ाई. बाएं कंधे पर सीधा दुपट्टा. साधारण सी ज्वैलरी.

आईने के सामने आई तो काजल चहकी, ‘‘वाह, देखते ही वह कार्टून गश खा कर कहीं गिर पड़े यार…’’ फिर शुभ्रा की दोनों भौंवों के बीच में नन्ही
सी काली बिंदी लगाती हुई बोली,
‘‘यह बिंदी नहीं है, उस कार्टून की
तिरछी नजरों से प्रोटैक्ट करने के लिए ठिठौना है…’’
दोनों ठहाका लगा कर हंस पड़ीं
कि ड्राइंगरूम से मम्मी की आवाज आई, ‘‘काजल, देर करो और शुभ्रा को
ले आओ…’’
‘‘सोच ले, साथ में चल रही हूं
मैं. कहीं तेरी जगह  दिल मचल गया उस कार्टून का तो…’’ काजल ने मजाक किया.
‘‘तो क्याउस पर अभी कौपीराइट थोड़े ही लगा है. ऐसे सौ कार्टून कुरबान मेरी यार पर. अभी यह देख कि अपनी शादी में वेटर का रोल ही करना पड़ रहा.’’
दोनों धीमी चाल से चलती ड्राइंगरूम में आईं. शुभ्रा आगेआगे और काजल पीछे उस के दुपट्टे का छोर थामे. जैसे राजकुमारी और बांदी.

शुभ्रा के हाथ में ड्राई फ्रूट्स की ट्रे थी. अभिषेक के पास जगह खाली रखी गई थी. ट्रे को टेबल पर रख कर शुभ्रा वहां बैठ गई. बैठते हुए नजर तितली सी उड़ती अभिषेक पर पड़ी तो एकदम से चौंक उठी. अरेइस चेहरे को कहीं देखा है पहले. वह चौकन्नी हो गई. भीतर बैठी छठी इंद्री तेजी से यादों के मलबे को कुरेदने में लग गई. कहां देखा होगाकालेज मेंमार्केट मेंया किसी दोस्ताना फंक्शन में. दोनों के शहरों के बीच सिर्फ 30 किलोमीटर का ही तो फासला है. परंपरागत इंटरव्यू एक घंटे चला. सामने तो वह खुश दिख रहा था, पर मन कश्मकश में था. यह तो बिलकुल तय है कि पहले मिल चुके हैं, पर कहांपरिचय का लिंक मिल ही नहीं रहाऊफउस की याद्दाश्त तो खूब तेज है. पढ़ाई में टौपर रही है. फिरलौटने के लिए सभी उठ खड़े हुए तो अभिषेक ने उसे एक ओर ले जा कर कहा, ‘‘ऐसा करते हैं कि कल
मैथान डैम चलते हैं. तफरीह भी हो जाएगी और एकदूसरे को भी लेंगे, ठीक?’’

‘‘बिलकुल,’’ शुभ्रा भी यही चाहती थी. जब तक इस कार्टून से पुरानी मुलाकात का लिंक याद नहीं जाता, रिश्ते के लिए हां नहीं करेगी.
‘‘कल सुबह 10 बजे आप गांधी मोड़ पर कीमाधुरी स्वीट्सके पास मिलें. मैं वहां पहुंच जाऊंगा, ओके…’’
चैन कमबख्त किसी भी तरह नहीं पड़ रहा था. टीवी देखते, बुक पढ़ते और फेसबुक ब्राउज करते. बहुत पुरानी बात तो हो नहीं सकती. फिर भी क्यों नहीं याद रही
रात के 9 बज गए. कल की एक अधूरी पढ़ी कहानी को पूरा करने की कोशिश करने लगी. पढ़ते हुए एक जगह रैगिंग का मामला आया तो अचानक उस कार्टून से जुड़ी घटना डौल्फिन मछली की तरह उछालें भरने लगी जेहन में
सुभाष इंस्टीट्यूट औफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमैंट. मेन गेट परवैलकम फै्रशर्सका बड़ा सा बैनर. कैंपस नएपुराने छात्रछात्राओं के शोर से गूंजता. कालेज में पहला दिन था, धड़कते दिल से ही भीतर गई. शहरी कालेज का मौडर्न माहौल मन में दहशत भर रहा था.
तभी जाने किस ओर से 3 लड़के जिन्न की तरह प्रकट हो गए.
‘‘हाई.. फर्स्ट ईयर की न्यू कमर हो ? हम तुम्हारे सीनियर्सपहला दिन दोस्ताना परिचय के नामठीक…’’

तीनों ने उस से हाथ मिलाया और हंसीमजाक करते दूसरी मंजिल के
एक रूम में गए. दरवाजा बंद सा
कर दिया.
‘‘घबराने का नहीं. बोले तो थोड़ा रैगिंग करने को मांगता बौस कोहलकाफुलका. पहला दिन का शगुन…’’ शांतनु नेमुन्नाभाईके अंदाज में
बोलते हुए पास खड़े मनोज की ओर संकेत किया.
मनोज की ठुड्डी के ऊपर बिंदु के शक्ल की दाढ़ी थी. बदन के कपड़े भी महंगे थे. चेहरे पर अलग रुआब. उस के बाद ऊलजुलूल सवालों का सिलसिला शुरू हुआ.
शुभ्रा शर्म से पानीपानी हुई जा रही थी, जबकि लड़कों के चेहरों पर पानी था ही नहीं, पर वह आत्मविश्वास के साथ जवाब देती गई.
‘‘वैलआज का रैगिंगवा का आखिरी इवैंट…’’ मनोज बोली में बिहारी लहजे का छौंक देता हिनहिनाया, ‘‘देखिए जे हमरा दोस्त अभिषेक आमिर खान जैसा दिखता. दिखता है ? बसआगे बढ़ कर छोटा सा किस करेगा आप को. उस के बाद फिनिश. होंठ पर नहीं, ललाट पर. एतना रियायत दे रहे, ठीक?’’
‘‘प्लीज, मु? जाने दें. रैगिंग के नाम पर ऐसी बेहूदगी ठीक नहीं, शुभ्रा ने बड़े अदब से कहा और
इस बात का ध्यान रखा
कि चेहरे पर डर के भाव उभर पाएं. अभी 3 साल गुजारने हैं यहां.
‘‘यह बेहूदगी हैअरेहम तो शराफत वाली रैगिंग कर रहे यार. लौक्ड कमरे की ओवरनाइट रैगिंग आप ने देखी कहां…’’ शांतनु फनफनाया, ‘‘रैगिंग तो सीनियर्स का हक है, जो अगले साल आप को भी मिल जाएगा.’’
‘‘प्लीज, माफ करें. मु? से यह सब नहीं हो सकेगा. ऐसा हक मु? नहीं चाहिए,’’ अंदर से बेहद डर भी गई थी.
अचानक मनोज तल्ख आवाज में चिल्ला पड़ा, ‘‘बहुत हुआ ड्रामाअभिषेक, आगे बढ़ो,’’ उस की कड़क आवाज पर सभी डर से सहम गए.
अभिषेक हड़बड़ा कर आगे बढ़ा और शुभ्रा के ललाट पर ?ाट से किस जड़ कर पीछे हट गया.
तो यह कार्टून उर्फ अभिषेक वही आमिर खान है. पूरी घटना आंखों के आगे जिंदा हो आई. कैसी तो हवस
टपक रही थी चेहरे से. जिस लड़के
के मन में औरतों के लिए जरा भी
इज्जत नहीं, जिस का चरित्र ढीला हो
उस से शादीकभी नहीं. परआसानी से नहीं छोड़ेगी. कल जरूर मिलेगी. पहले जम कर क्लास लेगी, फिर मना कर देगी.
दूसरे दिन तय समय परमाधुरी स्वीट्सके पास गया अभिषेक. ओला कार से उतरते देख कर मजाकिया हंसी, ‘‘इनोवा के रहते एक भाड़े की
कार से…’’
‘‘हांकभीकभी आम जन की भीड़ का हिस्सा बन कर भीड़ में चलने का मजा ही कुछ और होता है,’’ अभिषेक के होंठों पर मोहक मुसकान तितली सी नाच रही थी. शुभ्रा मन में हंसी, लफ्फाजी में भी अव्वल.
दोनों मैथान डैम पर गए. 2 गेट खुले हुए थे और बेग से गिरता दूधिया पानी सिहरन से भर रहा था. सैर के दौरान हर मुद्दे पर बातें होती रहीं. क्या अभिषेक को रैगिंग का वाकिआ याद नहीं आया? आया है तो असल मुद्दे पर क्यों नहीं रहे बरखुरदार.
दोनों पार्क में चले आए. वहां सैलानियों की खूब चहलपहल थी. अभिषेक पुचका यानी पानी पूरी के ठेले के पास गया.

‘‘शायद तुम्हारे मन में वह रैगिंग वाली घटना अभी भी गांठ बन कर जमी हुई है…’’
‘‘वह घटना साधारण लग रही है आप कोसाधारण. एक हफ्ते तक अपसैट रही थी मैं. उस लंपट के एक इशारे पर लपक कर किस कर बैठनाएक लड़की की इज्जत का जरा भी खयाल नहीं आया…’’ शुभ्रा फट पड़ी.
‘‘जैसा तुम सम? रही हो मैं वैसा नहीं हूं. लड़कियों और औरतों के लिए मेरे मन में खूब इज्जत है. छुटपन से ही ऐसे संस्कार मिले हैं. पूरी अकैडमिक लाइफ में लड़कियों की ओर बुरी नजर से कभी देखा ही नहीं, विश्वास करोपर उस समय मैं मजबूर था.’’
‘‘मजबूर…’’ पुचका मुंह में डालता हाथ थम गया.
‘‘हांमनोज का बाप एमएलए था. गवर्निंग बौडी का चेयरमैन भी. गंदी रैगिंग के कई रिकौर्ड थे मनोज के नाम. इन लोगों से पंगा ले कर कालेज में पढ़ पाना मुश्किल होता. तुम्हें 3 साल गुजारने थे. बात हलकी किस पर छूट रही थी, सो तुम्हारे फायदे के लिए करना पड़ा.’’
‘‘क्या बकवास हैउस समय आप की आंखों में लिजलिजी चमक देखी थी…’’ रूमाल से मुंह पोंछती शुभ्रा के लहजे में मजबूती थी, ‘‘मैं आप से शादी नहीं कर सकती…’’
‘‘लिजलिजी चमक नहीं धुआंता गुस्साकहो तो मां की कसम खा सकता हूं…’’ अभिषेक बोला.
‘‘चलिए, वहां कोन वाली कुल्फी खाते हैं,’’ थोड़ा आगे ही कुल्फी स्टौल था. शुभ्रा मामला बदलती स्टौल की ओर बढ़ गई. स्टौल से एक लड़की बाहर निकल रही थी कि 2 लड़के शरारत से जानबू? कर उस से टकरा गए. कुल्फी धप्प से नीचे.

‘‘सौरीसौरी…’’ बापी आंख मारते हुए बोला, ‘‘आइए, कौर्नैटो से भी अच्छी कुल्फी आइसक्रीम खरीद कर दूंगा…’’ और बेहिचक उस की कलाई थाम कर बाहर की ओर खींचने लगा.
लड़की डर से चीख पड़ी, ‘‘यह क्या कर रहे हो, हाथ छोडि़ए.’’
अभिषेक की नजर पड़ी, तो लड़के की हिमाकत पर हैरान रह गया. तेजी
से पास कर बोला, ‘‘अरे वाह, सरेआम गुंडई…’’
‘‘तुम बीच में क्यों टपक रहे हो? हम मैडम से बात कर रहे हैं ,’’ उस के साथी बकुल ने अभिषेक को धक्का दे कर कहा.
इस धक्के से अभिषेक नीचे गिर पड़ा. कोहनी छिल गई. शुभ्रा घबरा गई. वह लड़की कलाई छुड़ाते हुए बोली, ‘‘हर्जाने की कोई बात नहीं दादा. इट्स ओके.’’
कलाई छूटी तो बकुल ने लड़की का दुपट्टा खींच लिया, ‘‘कुल्फी तो हमारे संग खानी ही होगी मैडम.’’
यह देख कर अभिषेक की आंखों में खून उतर आया. लपक कर बापी का कौलर पकड़ कर चीखा, ‘‘दुपट्टा दीजिए इन का, नहीं तो…’’
‘‘ओहइतनी गरमी…’’ एक विलेन जैसी खिलखिलाहट के संग छाती पर एक जोरदार फाइट. अभिषेक की दर्दीली कराह निकल गई और सिर चकरा गया.
बापी उस लड़की की बांह पकड़ कर फिर से खींचने लगा. जोर से खींचने से लड़की कुछ कदम आगे घिसट गई.
शुभ्रा बड़बड़ा उठी, ‘‘किडनैपिंग…’’
वह लड़की डर से चिल्ला रही थी, ‘‘प्लीज हैल्पबचाओ…’’
इन लोगों की ?ाड़प से मजमा
जुट गया वहां. मजमे में मजा लेने वाले ज्यादा थे. लड़कों की मवाली वाली हरकतें लोगों के मन में खौफ भर
रही थीं.

शुभ्रा की बड़बड़ाहट अभिषेक ने
सुन ली. सचमुचलड़कों के इरादे खतरनाक हैं. लड़की को यों खतरे में छोड़ देना गवारा नहीं हुआ उसे.
शुभ्रा का कलेजा किसी अनजाने डर से धकधक कर रहा था, पर आगे बढ़ते अभिषेक को रोकने की हिम्मत भी कर सकी. अभिषेक के दिमाग में कभी के सीखे कराटे के एकमुश्त दांव जुगुनू से चिलक उठे. खड़ी हथेलियों को क्रौस में ला कर टांग घुमाते हुए बापी की गरदन और बकुल की जांघों पर सीधी चोट की. बापी की आंखों के आगे तारे नाच गए, जबकि बकुल मांमांचिल्लाता दोनों हाथों से अपनी जांघ के कोमल हिस्से को पकड़े उकड़ू ढह गया.
शुभ्रा उस लड़की का हाथ पकड़ कर भीड़ की ओर दौड़ गई. अभिषेक भी उस ओर दौड़ना चाह रहा था कि तभी बापी के हाथ में धारदार छूरा चमक उठा. अभिषेक थम गया. भागना नहीं सामना करना होगा अब. छुरे पर नजर जमाए पैंतरा तौल रहा था कि बापी का हाथ लहराया और बांह पर गहरा जख्म बन गया.
दर्द से अभिषेक की चीख निकल गई. वहां से लहू बहने लगा. गुस्से से चेहरे और गरदन की नसें खिंच गईं. दांत भींचते हुए पगलाया सा बापी पर खड़ी हथेलियों और टांगों से यों कराटे फेंके  कि छुरे समेत बापी दूर जा गिरा.
तभी पुलिस वैन का सायरन गूंज गया. दोनों लड़के लंगड़ाते हुए किसी तरह उठे और पलक ?ापकते गायब हो गए. उन के जाते ही भीड़ की हमदर्दी तीनों के नजदीक सिमट आई.
आननफानन शुभ्रा ने एक आटोरिकशा रोका. लोगों की मदद से घायल अभिषेक को आटोरिकशा में चढ़ाया. आटोरिकशा घर की ओर तेजी से दौड़ चला.
शुभ्रा की नम आंखों में अभिषेक के लिए अथाह प्यार हिलोरें मार रहा था. अगर आज अभिषेक होता तोदुपट्टे को उस की बांह के जख्म पर बांधती बुदबुदाई, ‘‘माय लवमाय हीरो…’’

महावीर अग्रवाल

Hindi Story: शेरनी की दहाड़

सुनीता के सपनों की उड़ान उस के गांव की पगडंडियों से शुरू हो कर शहर की यूनिवर्सिटी तक जा पहुंची थी. ऊंची कदकाठी, दोहरा बदन और आंखों में आत्मविश्वास की चमक. वह सिर्फ खूबसूरत और सुशील ही नहीं, बल्कि फौलादी इरादों वाली लड़की थी. जब वह अपनी मोटरसाइकिल पर सवार हो कर निकलती, तो उस की सख्त शख्सीयत और स्वाभिमान देखने लायक होता. सुनीता के मामा शहर के नामी वकील थे. वही उस के आदर्श थे. वह भी उन्हीं की तरह काला कोट पहन कर गरीबों को इंसाफ दिलाने का सपना देखती थी. कानून की पढ़ाई के साथसाथ वह यह भी जानती थी कि इंसाफ की पहली सीढ़ी बेखौफ और नाइंसाफी के खिलाफ खड़ा होना है.

लेकिन उस शहर की चमक के पीछे अपराध का अंधेरा भी था. जिस इलाके में सुनीता रहती थी, वहां राजा नाम के एक बदमाश का खौफ था. राजा और उस के साथी आएदिन राहगीरों को लूटते और लड़कियों के साथ बदतमीजी करते थे. राजा अकसर सुनीता को दूर से घूरता था, पर उस की आंखों की तेज चमक और कड़क स्वभाव को देख कर वह सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था. उसे सुनीता के कड़क स्वभाव से डर लगता था. शांति तब भंग हुई, जब सुनीता को पता चला कि पड़ोस की मासूम दिव्या ने स्कूल जाना छोड़ दिया है. कई दिनों से वह खामोश और डरी हुई थी. दिव्या को राजा ने बीच सड़क पर रोक कर उस के साथ बदतमीजी की थी.

दिव्या के मातापिता डर के मारे पुलिस के पास जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे थे. उन का खामोश डर और दिव्या की सिसकियां सुनीता के कानों में गूंज उठीं. उसे लगा कि अगर आज वह चुप रही तो उस की पढ़ाई लिखाई, उस की हिम्मत और वकालत का उस का सपना, सब बेकार है. उस के खून में उबाल गया. अगले दिन सूरज की तपिश के बीच सुनीता ने अपनी चमचमाती बाइक सीधे उस चौराहे पर रोकी, जहां राजा अपने चमचों के साथ बैठा था. इंजन बंद हुआ, चारों तरफ सन्नाटा छा गया. सुनीता ने धीमे से हैलमैट उतारा, उस के खुले बाल हवा में लहराए और उस की तीखी नजरों ने सीधे राजा को भेदा. ‘‘भाई, जरा यहां तो आना,’’ सुनीता की आवाज गूंजी, जिस में चेतावनी और शालीनता दोनों थे.

राजा अपनी अकड़ में साथियों के साथ बाइक के पास पहुंचा. उसे लगा, शायद कोई मदद मांग रही है, पर सुनीता की आंखों में अंगारे थेसुनीता ने बिना डरे, सीधे राजा की आंखों में ?ांकते हुए कहा, ‘‘तुम्हारी हरकतें हदें पार कर रही हैं राजा. अपनी ताकत निहत्थों पर आजमाना बंद करो. बेहतर होगा कि आज के बाद तुम यहां किसी लड़की की तरफ आंख उठा कर भी देखो, वरना याद रखनाकानून की पढ़ाई बाद में काम आएगी, मेरा हाथ पहले चलेगा.’’ सुनीता की आवाज में ऐसी दहाड़ और आत्मविश्वास था कि राजा के पैर कांपने लगे. उस ने हड़बड़ाते हुए कहा, ‘‘मैं नेमैं ने क्या किया?’’ सुनीता ने कड़क कर जवाब दिया, ‘‘वही, जो एक बुजदिल करता है. तुम्हें शर्म नहीं आती बहनबेटियों को छेड़ते हुए? मैं ने तुम्हेंभाईकह कर पुकारा है, इस शब्द की लाज रख लो, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहना.’’

वह दबंग राजा, जिस से पूरा महल्ला थरथर कांपता था, सुनीता के सामने बौना पड़ गया. उस ने हाथ जोड़ लिए और वहां से चला गया. वह डर सिर्फ पुलिस का नहीं था, वह एक स्वाभिमानी लड़की के तेज का डर था. कुछ ही दिनों में बदलाव साफ दिखने लगा. सुनीता ने केवल उसे सुधारा, बल्कि उसे उस की रुकी हुई पढ़ाई दोबारा शुरू करने के लिए भी बढ़ावा दिया, ‘‘कुछ बन कर दिखाओ. मातापिता का मान बढ़ाओ. यह जिंदगी घरपरिवार, समाज और देश का मान बढ़ाने के लिए मिली है.’’ ‘‘सम? गया दीदी,’’ राजा ने हाथ जोड़ कर कहा. राजा के बदमाश साथी, जो कल तक लड़कियों को छेड़ते थे, भी सुनीता कोदीदीकह कर सम्मान देने लगे थे. कालोनी के लोगों ने राहत की सांस ली. वे अब सुनीता कोशेरनीकहने लगे थे. सुनीता ने साबित कर दिया कि आत्मविश्वास और हिम्मत ही एक महिला का सब से बड़ा गहना और सब से ताकतवर हथियार है.         

पप्पू यादव के दावे पर बवाल   
बिहार में पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिला कर केंद्रशासित प्रदेश बनाने की साजिश रच रही है. इस योजना के तहत पहले पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू कराया जा सकता है. इस के बाद बिहार विधानसभा से एक प्रस्ताव पास करवाने की कोशिश की जाएगी. इस पूरे प्रोसैस के बाद सीमांचल क्षेत्र के साथ पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, रायगंज और दिनाजपुर जैसे कुछ जिलों को जोड़ कर एक नया केंद्रशासित प्रदेश बनाया जा सकता है, जबकि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने साफ शब्दों में कहा कि ये दावे तथ्यों के बिलकुल उलट हैं और इन में रत्तीभर भी सच्चाई नहीं है.   

Hindi Kahani: संकट मोचन

Hindi Kahani: ‘हां सब की इच्छा पूरी होती है.’ आजकल भगवानों में कारोबारी होड़ लगी हुई है. सब ने एक ऐसा स्लोगन ढूंढ़ निकाला है, जो आम आदमी को अपनी तरफ खींचता है. कहते हैं कि यहां सब की इच्छा पूरी होती हैऔर इस में कोई शक भी नहीं कि ज्यादातर लोगों की इच्छाएं पूरी होती हैं. 90 से 95 फीसदी तक, पर वे कैसे पूरी होती हैं? क्या यह किसी बाबा या भगवान का चमत्कार है या जो चंदा हम उस द्वार पर चढ़ाते हैं या फिर कोई मनोविज्ञान?

पहले तो हमें यह देखना होगा कि हम मांग क्या रहे हैं? मान लीजिए कि एक गरीब आदमी के पास एक टूटी हुई साइकिल है, जो रोजाना वर्कशौप में ही खड़ी रहती है. वह भगवान से एक साइकिल मांगता है और कहता है कि पुरानी ही देदे भगवान, बस रोजाना वर्कशौप ठीक कराने जाना पड़े. एक इनसान के पास एक ठीक सी साइकिल है, पर थोड़ी पुरानी हो गई है, वह भगवान से एक नई साइकिल की इच्छा रखता है.
एक इनसान, जिस के पास साइकिल है और 10-12 हजार रुपए हैं, वह एक पुराने स्कूटर या पुरानी मोटरसाइकिल की इच्छा रखता है और जिस के पास पुराना दोपहिया है, वह एक नए दोपहिया के लिए प्रार्थना करता है.

ठीकठाक दोपहिए वाला एक पुरानी कार की इच्छा रखता है और पुरानी कार वाला एक नई कार की. और इसी तरह एक छोटी कार वाला एक बड़ी कार की. कोई लड़का या लड़की अच्छे कालेज में दाखिले की, फिर अच्छी नौकरी की. कोई बहनबेटी की शादी की. खतरनाक बीमारी हो गई है, तो उस के ठीक होने की. सड़क पर सोता होगा तो ?ाग्गी की और ?ाग्गी में सोता होगा तो एक किराए के कमरे की, किराए के 3 कमरे हों तो  अपना हो जाए चाहे एक ही हो. और अगर एक कमरा है तो 2 कमरे, 2 हों तो 3 कमरेऔर इन में से ज्यादातर लोगों की तमन्ना पूरी हो जाती है. किसी गरीब आदमी की ?ाग्गी की छत बहुत ठीक होने के चलते उस में बारिश में पानी टपकता है या सर्दीगरमी में ठंड और गरमी लगती होगी, तो वह भगवान से यही कहता होगा कि कुछ पैसे जाएं, तो मैं छत ठीक करवा लूं.

क्यों और कैसे यह इच्छा पूरी होती है, क्योंकि वह भक्त अपनी इच्छा पूरी करने के काफी करीब है, वह उस को पाने वाला ही है, कोशिश तो वह कर ही रहा है और वह अपनी इच्छा पूरी करने में सक्षम है और उस की इच्छा बहुत बड़ी भी नहीं है. टूटी हुई साइकिल वाले के लिए पुरानी ठीक साइकिल, पुरानी ठीक साइकिल वाले के लिए नई साइकिल और नई साइकिल वाले के लिए पुराना स्कूटर, पुराने स्कूटर वाले के लिए नया स्कूटर और नए स्कूटर वाले के लिए पुरानी कार और पुरानी कार वाले के लिए नई कार और छोटी कार वाले के लिए बड़ी कार की इच्छा पूरी होने की बहुत ज्यादा उम्मीद रहती है. सड़क पर सोने वाले के लिए ?ाग्गी, ?ाग्गी वाले के लिए किराए के कमरे की इच्छा पूरी होने की बहुत ज्यादा उम्मीद रहती है. ये सब लोग अपने मकसद के बहुत करीब हैं.

बहनबेटी का ब्याह भी हो ही जाएगा, चाहे जो भी लड़का मिलेगा. बेटेबेटी का भी कालेज में दाखिला होगा और कहीं कहीं नौकरी भी लग ही जाएगी. शुरू में कम और बाद में ज्यादा तनख्वाह की नौकरी लग जाएगी. आज के हालात और इच्छा में आर्थिक अंतर जितना कम होगा, उतनी ही इच्छा पूरी होने की उम्मीद ज्यादा और जल्दी रहेगी. जितना अंतर ज्यादा होगा, उतना समय ज्यादा लगेगा और उम्मीद कम हो जाएगी या फिर उस इच्छा को पूरा करने के लिए गलत रास्ता अपनाना होगा. अगर टूटी हुई साइकिल का मालिक एक नई मोटरसाइकिल की इच्छा करने लगे तो उस की उम्मीद कम हो जाएगी और इच्छा पूरी हुई तो बहुत ज्यादा समय लगेगा. अगर एक किराए के कमरे में रहने वाला कोठी की तमन्ना करने लगे तो
उस की उम्मीद बहुत कम हो जाएगी और हो सकता है कि एक पीढ़ी भी पार कर जाए.

एक आदमी जिस के पास साइकिल है और 10-12 हजार रुपए हैं, तो सम?ों कि आप की इच्छाएं कैसे पूरी हो रही हैं. गांव के लोगों की इच्छाएं पूरी नहीं होतीं, क्योंकि उन की इच्छाएं होती ही नहीं हैं. इच्छाएं क्यों नहीं होतीं, क्योंकि उन की जेब में पैसे ही नहीं हैं. वे किसी भी इच्छा को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए वे भगवान के द्वार अपनी अर्जी नहीं लगाते हैं. मु? ऐसे फोन आते हैं कि आप लक्ष्मी, हनुमान, गणेश किसी एक का लौकेट खरीद लें, जो ओरिजनल है (बाजार में डुप्लीकेट भी हैं), आप की सब इच्छाएं पूरी हो जाएंगी और आप के घर लक्ष्मी बरसेगी. कीमत मात्र 3,000 रुपए. मैं ने उस से कहा कि मु? 100 लौकेट दे दें, लेकिन मैं अभी पैसे नहीं दूंगा. मैं  उन को भारत के किसी गरीब गांव में जा कर बांट दूंगा और एक साल बाद जा कर देखूंगा कि कितने लोगों के घर लक्ष्मी बरसी है.

अगर उन में से 50 फीसदी लोग भी अमीर (पेटभर पौष्टिक भोजन, बच्चों को पढ़ाईलिखाई, कपड़े, बड़ों को स्कूटर) हो गए होंगे, तो मैं आप को 6,000 के हिसाब से 3 लाख के बदले 6 लाख दूंगा. इस के बाद से उस का फोन आना बंद हो गया यानी कोई चमत्कार, बाबा या भगवान कुछ नहीं कर रहा. आप ही कर रहे हैं.
एक स्लोगन है किभगवान उन की सहायता करता है, जो अपनी सहायता स्वयं करते हैंतो फिर भगवान क्या करता है? यानी मु? ही कुछ करना है और मैं कर भी रहा हूं, तभी तो मेरी समस्याएं दूर हो रही हैं.
भगवान, अल्लाह, गौड से मेरा मतलब सर्वशक्तिमान यानी सुपर पावर से है.   Hindi Kahani

News Story: एआई समिट, चीनी कुत्ता और भारत की साख

News Story: होली आने वाली थी. अनामिका अपने घर जाना चाहती थी, पर विजय को उसी के साथ होली खेलनी थी. एक दिन जब अनामिका विजय के घर आई, तो विजय ने कहा, ‘‘यार, होली पर घर मत जाओ . अब तो ठंड भी कम हो गई है. मुझे लगता है कि इस बार की होली हम दोनों मस्ती और मजे से मनाएंगे.’’


‘‘पर मैं पिछले 2 साल से अपने घर नहीं गई हूं. मम्मीपापा चाहते हैं कि मैं घर जाऊं उन के पास. अगर तुम्हें मेरे साथ होली खेलनी है, तो साथ चलो. बड़ा मजा आएगा,’’ अनामिका बोली.
‘‘तुम बात को कहां ले जा रही होमम्मी, आप कुछ बोलो …’’ विजय ने अपनी मम्मी को इस मामले में शामिल करते हुए कहा.


‘‘यह तुम दोनों का मामला है. मुझे तो होली वैसे भी ज्यादा पसंद नहीं है. पर एकदूसरे को रंग मलो, फिर उतारते फिरो. इस से तो अच्छा है कि घर पर बैठो और दहीभल्ले, गुजिया, चाय पार्टी करो. पर नहीं, लोगों को तो रंग के साथ भांग का नशा चाहिए. और नहीं तो दारू पार्टी कर के पूरे त्योहार का मजा बिगाड़ देते हैं.
‘‘मुझे तो रंगों से वैसे भी एलर्जी है. मैं इस पचड़े में नहीं फंसना चाहती.
यह तुम दोनों की समस्या है, खुद ही सुलझा,’’ मम्मी ने दो टूक अपनी
बात रखी.


‘‘वाह, बेटे ने मां का साथ मांगा, पर मां ने उसे ही लपेट दिया. अरे यार, हर त्योहार का अपना मजा होता है. तुम्हें रंग पसंद नहीं तो क्या लोग होली खेलना छोड़ दें,’’ इसी बीच पापा ने विजय का साथ दिया.
‘‘वही तो पापा. मम्मी को होली खेलना पसंद नहीं और ये अनामिकाजी अपने घर जा रही हैं. वैसे, जहां तक मम्मी की रंगों से एलर्जी से समस्या है, तो एआई कब काम आएगा,’’ विजय बोला.


‘‘एआई और रंग का क्या तालमेल बना?’’ अनामिका ने पूछा.
‘‘किस दुनिया में जी रही हो. क्या तुम नहीं जानती कि एआई होली की तैयारी में मदद करता है, जैसे कि रंगों की डिजाइनिंग, गानों की रिकमैंडेशन और होली के लिए खास औफर्स.
‘‘इतना ही नहीं, एआई होली के दौरान सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मदद करता है, जैसे कि रंगों की पहचान और अवैध गतिविधियों की निगरानी,’’ विजय बोला.
तुम होली मेरे साथ खेलोगे या फिरओरियनरोबोटिक डौग के साथ?’’ अनामिका ने ताना कसा.
‘‘मतलब? यह तुम ने क्यों कहा?’’ विजय ने पूछा.
‘‘तुम ने दिल्ली में फरवरी महीने में हुए एआई समिट में हुए गलगोटियास यूनिवर्सिटी के विवाद का नहीं पढ़ा था क्या खबरों में?’’
‘‘गलगोटियास यूनिवर्सिटी का क्या मामला है?’’ विजय ने पूछा.
‘‘मैं ने खबर में पढ़ा था कि इस समिट में गलगोटियास यूनिवर्सिटी की एक प्रोफैसर नेहा सिंह ने एक रोबोट डौग को दिखाते हुए कहा कि इस का नामओरियनहै. उन्होंने यह भी कहा कि यह रोबोट उन की यूनिवर्सिटी के सैंटर औफ एक्सीलैंस में बनाया गया है.’’
‘‘तो इस पर विवाद कैसे हुआ?’’ विजय बोला.
‘‘दरअसल, सोशल मीडिया यूजर्स और फैक्ट चैकर्स ने तुरंत पकड़ लिया कि यहयूनिट्री जीओ2’ नाम का चाइनीज रोबोट है. चीन की कंपनी यूनिट्री रोबोटिक्स का ऐसा रेडीमेड प्रोडक्ट जो औनलाइन 2 से 3 लाख रुपए में आसानी से मिल जाता है.


‘‘इस का खुलासा होते ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया. लोग बोले कि यूनिवर्सिटी ने विदेशी प्रोडक्ट को अपना बता दिया,’’ अनामिका ने अपनी बात सम?ाई.
‘‘फिर यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?’’ यह सवाल विजय के पापा का था.
‘‘यूनिवर्सिटी ने एक्स (ट्विटर) हैंडल पर बयान जारी किया, जिस में यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया कि गलगोटियास ने यह रोबोट डौग नहीं बनाया है, ही हम ने कभी ऐसा दावा किया है. हम दुनियाभर से (चीन, सिंगापुर, अमेरिका) सब से अच्छी टैक्नोलौजी ला कर छात्रों को एक्सपोजर देते हैं.
‘‘यूनिट्री से लिया गया रोबोट


सिर्फ दिखाने के लिए नहीं है, यह एक चलताफिरता क्लासरूम है. हमारे छात्र इसे इस्तेमाल करते हैं, इस की लिमिट्स टैस्ट करते हैं और अपनी नौलेज बढ़ाते हैं. इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती. लर्निंग की भी नहीं. हमारा मकसद छात्रों को आगे की टैक्नोलौजी से जोड़ना है, ताकि वे भारत में ही ऐसी चीजें डिजाइन, इंजीनियर और मैन्युफैक्चर कर सकें.


‘‘लेकिन यूनिवर्सिटी की इस बात पर भी मामला नहीं सुल? और कहा गया कि यूनिवर्सिटी का दावा गलत और भ्रामक है. वीडियो में प्रोफैसर (नेहा सिंह) ने साफ कहा था कि रोबोट हमारे सैंटर औफ एक्सीलैंस में बना है और नामओरियनदिया है. कई यूजर्स ने कहा कि पहले तो अपना बता दिया, अब क्लैरिफिकेशन में मुकर रहे हैं.’’


‘‘पर यह यूनिट्री रोबोट डौग आखिर बला क्या है?’’ इस बारे में विजय की मम्मी को अच्छी तरह जानना था.
‘‘आंटीजी, जितना मैं ने सम? है, यूनिट्री रोबोटिक्स एक चाइनीज कंपनी है. यह 4 पैरों वाले (क्वाड्रुपैड) रोबोट बनाती है. ये रोबोट असली जानवरों की तरह चलते हैं. ये औब्स्टेकल्स पार करते हैं. इंडस्ट्रियल इंस्पैक्शन करते हैं और मनोरंजन के काम भी आते हैं. यूनिट्री के रोबोट बौस्टन डायनामिक्स के स्पौट से सस्ते और आसानी से मिल जाते हैं,’’ अनामिका बोली.


‘‘मु? लगता है कि गलत या अधूरी जानकारी देने से अच्छा है कि अपना होमवर्क सही से किया जाए. गलगोटियास यूनिवर्सिटी की प्रोफैसर बिना सटीक जानकारी के कैमरे के सामने जोशजोश में ज्यादा बोल गईं,’’ विजय ने कहा.


‘‘गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है. यूनिवर्सिटी ने इस पूरी घटना कोगलतफहमीकरार दिया है. यूनिवर्सिटी ने कहा कि पवेलियन पर तैनात प्रतिनिधि को प्रोडक्ट की तकनीकी उत्पत्ति की सही जानकारी नहीं थी. कैमरे के सामने आने के उत्साह में प्रतिनिधि ने उत्पाद के स्रोत को ले कर गलत और भ्रामक दावे कर दिए.


‘‘लेकिन यह मामला इतना ज्यादा बड़ा हो गया था कि बात बिगड़ती चली गई. सरकार ने इसे नैशनल एम्बैरसमैंट (राष्ट्रीय शर्म की बात) बताया. इस पूरे मामले पर आईटी सैक्रेटरी एस. कृष्णन ने साफ कहा, ‘एग्जिबिटर्स को ऐसे आइटम्स नहीं दिखाने चाहिए जो उन के नहीं हैं.’
‘‘18 फरवरी को गलगोटियास के स्टौल की बिजली काट दी गई और यूनिवर्सिटी को तुरंत एक्सपो खाली करने का आदेश दिया गया.’’


‘‘फिर तो विपक्ष ने केंद्र सरकार को खूब घेरा होगा?’’
‘‘बिलकुल. मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सदस्य जौन ब्रिटास ने सोशल मीडिया हैंडलएक्सपर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि ग्रेटर नोएडा में बनी गलगोटियास यूनिवर्सिटी कोप्रमुख भाजपा नेताओं का संरक्षण और समर्थनहासिल है.


‘‘शिव सेना (उद्धव ठाकरे) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटना कोशर्मनाकबताया और कहा कि इस से देश और इस शिखर सम्मेलन की साख को भारी नुकसान हुआ है.
‘‘तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने कहा, ‘गलगोटियास नामक एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी ने इंडिया एआई समिट में गो2 नामक चीनी रोबोट को अपना आविष्कार बताने की कोशिश की, लेकिन असली शर्मनाक बात यह है कि सरकारी चैनल डीडी न्यूज ने उन का पूरा प्रचार किया. आज डीडी न्यूज और भाजपा एकजैसे हैं. यह चैनल भाजपा का प्रचार माध्यम बन गया है.’
‘‘सही कहूं तो यह मुद्दा बहुत ज्यादा बड़ा बन गया था, जिस से इस एआई समिट की साख को बहुत बड़ा धक्का लगा है,’’ अनामिका बोली.


‘‘पर एक विवाद तो कांग्रेस ने भी खड़ा किया. सुना है कि समिट में कांग्रेस के लोगों ने खूब हंगामा किया था? क्या था पूरा मामला?’’ विजय ने पूछा.
अनामिका ने बताया,

‘‘शुक्रवार, 20 फरवरी को समिट में उस समय अफरातफरी मच गई थी, जब यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने वहां जम कर विरोध प्रदर्शन किया. जानकारी के मुताबिक, कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा घेरे को तोड़ कर अंदर प्रवेश किया और नारेबाजी की.

‘‘विरोध प्रदर्शन का जो वीडियो सामने आया, उस में साफ देखा गया कि प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टीशर्ट उतार कर विरोध जता रहे थे. इन लोगों ने इस समिट, 2026 की आलोचना भी की और पीएम मोदी पर अमेरिका से ट्रेड डील परसम?ाताकरने का आरोप भी लगाया.
‘‘एक बयान में इंडियन यूथ कांग्रेस ने कहा कि उस के कार्यकर्ता एआई समिट में देश की पहचान से सम?ाता करने वाले प्रधानमंत्री के खिलाफ विरोध कर रहे थे. बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया.’’


‘‘अमेरिका की ट्रेड डील से इस एआई समिट का क्या लेनादेना?’’ ‘‘इंडियन यूथ कांग्रेस के एक औफिशियल पोस्ट में कहा गया कि इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एआई समिट में देश की पहचान से सम?ाता करने वाले प्रधानमंत्री के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और प्रोटैस्ट किया.
‘‘यह विरोध कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस बयान के बाद हुआ, जिस में उन्होंने समिट के और्गैनाइजेशन को ले कर सरकार पर हमला किया था. उन्होंने कहा था कि भारत के टैलेंट और डाटा का फायदा उठाने के बजाय, एआई समिट एक बेतरतीब तमाशा हैभारतीय डाटा बिक्री के लिए है, चीनी प्रोडक्ट दिखाए जा रहे हैं.


‘‘कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एआई समिट में अव्यवस्था का आरोप लगाया था और दावा किया था कि जो भारत के लिए एकशोपीसइवैंट हो सकता था, वहपूरी तरह से अव्यवस्थामें बदल गया.


‘‘मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी दावा किया कि खाने और पानी जैसी बेसिक सुविधाओं की कमी के कारण विजिटर्स और एग्जिबिटर्स दोनों कोबहुत ज्यादा परेशानीका सामना करना पड़ रहा है.
‘‘समिट में जिस समय कांग्रेस यूथ कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया उस समय एआई समिट में तमाम दिग्गज और प्रतिनिधि मौजूद थे. यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता पोस्टरबैनर ले कर अंदर पहुंच गए थे.’’
‘‘पर सरकार तो इसे कामयाब समिट बता रही है. ऐसा क्यों? कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सरकार का क्या कहना है?’’ विजय के पापा ने पूछा.


‘‘अंकल, वे लोग तो भड़के हुए थे. भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन कोस्टुपिडिटी टू न्यूडिटी’ (मूर्खता से नग्नता) तक का सफर बताया. उन्होंने कहा कि यह देश की उपलब्धियों का अपमान है. वहीं, शहजाद पूनावाला ने इस प्रदर्शन कोएंटी इंडियाऔरचरित्रहीनकरार दिया. भाजपाई समर्थित कई संगठनों ने कांग्रेस के विरोध में खूब प्रदर्शन किए.


‘‘और जहां तक इस समिट के कामयाब होने की बात है, तो भारत सरकार के मुताबिक, ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिटअब तक का सब से बड़ा एआई समिट था. ब्रिटेन, साउथ कोरिया और फ्रांस में यह समिट होने के बाद, पहली बारग्लोबल साउथके किसी देश में यह समिट हुआ.


‘‘21 फरवरी को 88 देशों और अंतराष्ट्रीय संगठनों ने नई दिल्ली एआई इम्पैक्ट समिट डिक्लेरेशन का समर्थन किया. इन में अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जरमनी और यूरोपियन यूनियन शामिल हैं.
‘‘समिट के दौरान भारत के 3 एआई मौडल को भी लौंच किया गया. इन 3 मौडल के नाम हैंसर्वम, ज्ञानी और भारतजेन. इन मौडल्स का फोकस भारत की भाषाओं के इस्तेमाल पर था.


‘‘साथ ही, समिट के दौरान कई कंपनियों ने भारत में आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस में निवेश करने के वादे भी किए. इस में रिलायंस, माइक्रोसौफ्ट, गूगल जैसी कई कंपनियां शामिल हैं.’’ ‘‘मुझे लगता है कि जब कोई इतना बड़ा समिट होता है, तो वहां विवाद भी होते हैं. पर इस तरह के समिट के होते ही किसी तरह के फैसले पर नहीं पहुंचना चाहिए. कुछ समय देना चाहिए कि समिट में जोकुछ हुआ, उस का नतीजा क्या रंग लाएगा.


‘‘तकनीक से फायदा नुकसान दोनों होता है. यह तो उस को इस्तेमाल करने वाले पर निर्भर करता है कि वह आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस जैसी तकनीक को किस तरह से अपनी जिंदगी में उतारता है,’’ विजय ने कहा. ‘‘एकदम सही कहा. तकनीक दोधारी तलवार की तरह होती है. इस का इस्तेमाल सोचसम? कर करना चाहिए,’’ अनामिका ने हां में हां मिलाई, ‘‘चलो, हम ने खूब बहस कर ली अब तुम मु? कौफी पिलाओ. बाद में होली पर भी डिस्कस कर लेंगे.’’


‘‘क्यों नहीं. अब कोई रोबोट डौग तो हमारे लिए यहां कौफी लाएगा नहीं,’’ विजय का इतना कहते ही अनामिका खिलखिला कर हंस पड़ी. ‘‘तुम दोनों बैठो, आज कौफी मैं बनाता हूं,’’ विजय के पापा ने कहा तो मम्मी हैरान थीं यह सुन कर.        

Hindi Kahani: लुट गई जोगी तेरे प्यार में

Hindi Kahani: जमीला और शर्मिला पक्की सहेलियां थीं. उन की दोस्ती को देख कर घरपरिवार वाले और पड़ोसी उन्हें दो जिस्म एक जान कहते थे. दोनों सहेलियों ने गांव में ही एकसाथ पढ़ाई की थी. आगे की पढ़ाई के लिए गांव में स्कूल होने, गरीबी और परदा प्रथा की वजह से उन के परिवारों ने आगे दिलचस्पी नहीं दिखाई. नतीजतन, वे दोनों घर पर ही रह कर परिवार के साथ बीड़ी बनाने का काम करने लगीं.
जमीला कब जवान हो गई, उस की सम? में नहीं आया. घर के बड़ेबूढ़े जब उसे टोकते, ‘बड़ी हो गई है तू, ठीक से दुपट्टा ओढ़ कर बाहर निकला कर. अकेले घूमने मत जाना. बहू, इसे नकाब ला कर दे. अब कोई छोटी बच्ची थोड़े ही है, बड़ी हो गई…’


वह सोचती, ‘आखिर मु? में ऐसा क्या हुआ है? जब मैं स्कूल जाती थी, तब कोई कुछ नहीं कहता था.’
शर्मिला की शादी पास के गांव में हो गई और जमीला अकेली रह गई. दिल की बात कहनेसुनने वाला कोई रहा. उस की जिंदगी कैद के पंछी की तरह रह गई. बीड़ी बनाते और घर का काम करतेकरते उस का दम घुटने लगा. समय पंख लगा कर उड़ने लगा. जवानी जमीला को जिंदगी का मजा लूटने की दावत देने लगी. वह अंदर ही अंदर कसमसाने लगी. जब वह जवान जोड़ों को देखती, तो उस की बेचैनी और बढ़ जाती. शहनाई की आवाज सुन कर वह जोश में जाती. ‘‘जमीला के अब्बू, देखनाजमीला को क्या हुआ है…’’ उस की मां ने घबरा कर आवाज दी.


‘‘आया बेगम,’’ बाहर अपने दोस्तों के साथ बैठे जमीला के अब्बू जावेद मियां ने कहा. वे दौड़ेदौड़े बैठक में आए, जहां जमीला अकेली बैठी बीड़ी बनातेबनाते बेहोश हो कर गिर गई थी. ‘‘क्या हुआ बेटी, देखो मु?आंखें खोलोबेगम, पानी लाओइस के मुंह पर पानी के छींटे मारो,’’ जावेद मियां ने कहा. तब तक उन के दोस्त भी अंदर गए थे. ‘‘कैसे हो गया यह सब?’’ मौलाना ने पूछा, जो जावेद के दोस्त थे.
‘‘क्या बताऊंजमीला बैठी बीड़ी बना रही थी कि एकाएक बेहोश हो कर गिर पड़ी,’’ जमीला की मां ने बताया. मौलाना ने ?ाड़फूंक शुरू कर दी. मुंह पर पानी के छींटे मारे, प्याज सुंघाई गई और तकरीबन आधा घंटे बाद जमीला को होश गया. जमीला कुछ थकीथकी सी लग रही थी, इसलिए उसे आराम करने की सलाह दे कर जावेद मियां के दोस्त वहां से चले गए. दूसरे दिन मौलाना ने जावेद मियां के घर पर दस्तक दी. दोनों बैठ कर जमीला की बीमारी पर बातचीत करने लगे.


‘‘देखो जावेद मियां, ऐसे हालात में लड़की की शादी करने में मुश्किल आएगी,’’ मौलवी ने कहा. ‘‘बात तो सही है, पर इस का कोई उपाय तो बताओ? ‘‘जमीला के ठीक होते ही मु? जैसा भी लड़का मिलेगा, मैं उस की शादी कर दूंगा,’’ कह कर जावेद मियां चुप हो गए. ‘‘ठीक है, मैं पता करता हूं, फिर तुम्हें खबर करूंगा…’’ मौलाना ने कहा, ‘‘अब मैं चलता हूं.’’ तकरीबन हफ्तेभर बाद मौलाना जावेद मियां के घर दोबारा आए. ‘‘आओ मौलाना, काफी दिन बाद आना हुआ,’’ जावेद मियां ने कहा. ‘‘मैं तुम्हारे काम में लगा था. बड़ी मुश्किल से एक शख्स मिला है. उस का कहना है कि वह लड़की को ठीक कर देगा. कुछ वक्त लगेगा, पैसा भी खर्च होगा. जब तक ?ाड़फूंक चलेगी, तब तक यह बात किसी तक पहुंचे, वरना इल्म टूट जाएगा.’’ ‘‘मौलाना, मु? हर शर्त मंजूर है. तुम आज से ही इलाज शुरू करा दो. अपनी बेटी की बेहतरी के लिए मैं कुछ भी करने को तैयार हूं.’’


मौलाना के मन में खोट था. उस ने अपने एक दूर के साले असद से इस पूरे मसले पर पहले ही बात कर ली थी. मौलाना ने उस से कहा था, ‘देखो मियां, मैं ने सौदा पटा लिया है. जावेद मियां की जमीन अपनी जमीन से लगी हुई है. हमें उसे हड़पना है. अब जा कर फंसा है. पहले तो बड़ीबड़ी बातें करता था, खेत जाने का रास्ता बंद कर दिया था, इसलिए मजबूरी में मु? उस से दोस्ती करनी पड़ी. तुम ऐसी चाल चलो कि जावेद की जमीन बिक जाए और वह मु?मिल जाए.’ असद एक शातिर बदमाश था. उस की बीवी उस की हरकतों से तंग कर पिछले 10 सालों से अपने मायके में बैठी थी. गांव के भोलेभाले लोगों को गंडेतावीज बना कर देना, उन से रकम ऐंठना उस का पेशा था. असद ने जावेद मियां के घर कर अपना काम शुरू कर दिया. शुरूशुरू में तो जमीला को कुछ भी अच्छा लगा, लेकिन अकेले में पराए मर्द को पा कर वह धीरेधीरे खुश रहने लगी. जब असद को महसूस हुआ कि जमीला उस की ओर खिंच रही है, तो उस ने जावेद मियां से कहा, ‘‘जावेद साहब, कुछ जरूरी काम से मैं 1-2 दिन के लिए घर जा रहा हूं, लेकिन जल्दी ही वापस जाऊंगा.’’


जाने से पहले मौलाना और असद के बीच साजिश की लंबी बात चली. इसी के तहत वह अचानक अपने घर चला गया. इधर जावेद मियां परेशान हो उठे, क्योंकि जमीला फिर से बारबार बेहोश होने लगी थी.
वे घबरा कर मौलाना के पास गए और असद को जल्द से जल्द बुलाने की गुहार लगाई. मौलाना की खबर पा कर असद वापस आया ही था कि 8-10 मर्द और औरत उसे ढूंढ़ते हुए जावेद मियां के घर जा पहुंचे.
वे सभी गुजारिश करने लगे, ‘जोगी बाबा गांव वापस चलो, हम सब परेशान होने लगे हैं.’ इसी बीच मौलाना ने कर लोगों को सम?ाया कि आप के जोगी बाबा 2 दिन बाद आप के पास जाएंगे. रात में असद उर्फ जोगी बाबा के शरीर में भयानक हलचल होने लगी और वह जोरजोर से हंसने लगा. घर के सभी लोग जाग गए. बाहर से आए उस के चेले दुआ मांगने लगे, परेशानी से बचने के उपाय पूछने लगे. जोगी बाबा का गुस्से से भरा मिजाज देख कर सब डर गए. असद ने बताया कि जावेद के घर के पीछे किसी ने काला जादू कर दिया है, उसे निकाल कर नदी में डाल दो. पर सावधान, किसी की जान जा सकती है. 5 क्विंटल पुलाव बना कर फातिहा दिलाओ और पहले कहीं से काले जादू की पुडि़या ढूंढ़ो.

ज्यादा से ज्यादा लोगों को खाना खिलाओ. जोगी बाबा जो कहे वह करो. सब ठीक हो जाएगा.
काफी मशक्कत के बाद आखिर कपड़े में लिपटी एक पुडि़या मिल गई. उस पुडि़या में हड्डी, काजल, सिंदूर, अनाज, काली चूड़ी वगैरह मिली. शक अब यकीन में बदल गया. ‘‘जावेद मियां, बात को सम?…’’ मौलाना ने कहा, ‘‘बच्ची प्यारी है या जायदाद. तुम ऐसा करो कि मेरे नाम जमीन की रजिस्ट्री कर दो. पूरा खर्चा मैं करता हूं. जब पैसा हो, तो मेरा पैसा लौटा देना और जमीन वापस ले लेना.’’ मौलाना ने अपनी चाल से जावेद को फांस लिया. अंधविश्वास में फंसे जावेद ने मौलाना की बात मान कर जमीन की रजिस्ट्री उन के नाम कर दी. इधर असद उर्फ जोगी बाबा ने ऐसी चाल चली कि जमीला ने अपनेआप को उस के हवाले कर दिया. अब वे दोनों बीमारी की आड़ लेकर जिंदगी का मजा लूटने लगे. ?ाड़फूंक के बहाने अब दोनों को कोई नहीं रोक पाता था. जमीला को जब से पराए मर्द का चसका लगा था, तब से वह खुश रहने लगी थी. उस के मांबाप इसे जोगी बाबा की ?ाड़फूंक का नतीजा मान रहे थे.

धीरेधीरे साल पूरा होने को आया. उस के मांबाप को जमीला की शादी की फिक्र होने लगी और वे
लड़के की तलाश में जुट गए. इस बात की भनक असद को लग गई. वह मौका पा कर वहां से रफूचक्कर हो गया. इसी बीच जमीला की शादी पक्की हो गई, लेकिन एक दिन वह अचानक बेहोश हो कर गिर पड़ी.
लोगों के ?ाक?ोरने पर भी होश नहीं आया, तो उसे अस्पताल ले जाया गया. लेडी डाक्टर ने जांच करने के बाद कहा, ‘‘हम ने बच्ची को देख लिया है. अब वह होश में गई है. आप उस का खयाल रखिए. भारी चीज उठाने दें, क्योंकि आप की बेटी मां बनने वाली है.’’ लेडी डाक्टर की यह बात सुन कर जावेद, उस की बेगम और रिश्तेदारों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. उन की जमीला ढोंगी जोगी के प्यार में लुट चुकी थी.  Hindi Kahani

लेखक  ए. खान

Hindi Kahani: आंखों से एक्सरे 

Hindi Kahani: जवानी की दहलीज पर खड़े दिवाकर की एक अजीब आदत थी कि जहां भी कोई लड़की दिख जाती, उस की आंखें उसी पर टिक जातीं. राह चलती, बाजार जाती, मंदिर या कालेज जाती, कोई भी लड़की दिवाकर की पारखी निगाहों से बच नहीं पाती. वह हर लड़की को ऊपर से नीचे तक ऐसे ताड़ता, जैसे उस की आंखों में सचमुच एक्सरे मशीन लगी हो.


एक दिन बाजार जाते समय की बात है. इसी हरकत को देख कर दिवाकर के एक दोस्त सोमेश ने पूछ ही लिया, ‘‘यार, इस तरह लड़कियों को घूरने से तुम्हें क्या मिलता है?’’ दिवाकर तुरंत उछल पड़ा और बोला,‘‘नयनसुख, पार्टनर नयनसुख. देखना तो मेरा शौक है , कोई गुस्ताखी थोड़े ही कर रहा हूं.’’ सोमेश ने गंभीर हो कर कहा, ‘‘लेकिन यह गलत बात है. किसी को यों घूरना भी एक तरह की बदतमीजी है, पता है ?’’


दिवाकर ने हंसते हुए हाथ ?ाटका, ‘‘अरे यार, मैं कौन सा लड़की छेड़ रहा हूं या भद्दे कमैंट्स पास कर रहा हूं? बस, खामोशी से आंखें ही तो सेंकता हूं. मेरी आंखें एक्सरे हैं, जो देखना होता है, देख लेती हैं. हाहाहा.’’ दिवाकर की बेशर्मी देख कर सोमेश ने सब्र रखते हुए कहा, ‘‘तुम्हें अंदाजा है कि तुम्हारी इसटकटकीसे लड़कियां कितना अनकंफर्टेबल महसूस करती हैं?’’ दिवाकर ने जैसे कुछ सुना ही हो और बोला, ‘‘अरे यार, अब तू मत शुरू हो जा किसी सत्संगी बाबा की तरह प्रवचन ले कर. इस उम्र में यह सब करूं तो क्या बुढ़ापे में करूंगा?’’


सोमेश ने बात बढ़ाना बेकार समझ पर दोस्ती के नाते सम?ाता हुआ साथ चलता गया. इसी दौरान वे दोनों कालेज की ओर जाने वाली सड़क पर पहुंच गए. अचानक दिवाकर की नजर सड़क किनारे खड़ी एक लड़की पर गई. वह उस की छोटी बहन दिव्या थी, जो बुरी तरह परेशान हो कर स्कूटी स्टार्ट करने की कोशिश कर रही थी. दिवाकर फौरन दौड़ पड़ा और बोला, ‘‘क्या हुआ दिव्या?’’ दिवाकर को देख कर दिव्या ने राहत की सांस ली और बोली, ‘‘अच्छा हुआ भैया कि आप गए. मेरी स्कूटी बंद हो गई है. आज कालेज में मेरा इंटरनल टैस्ट है, अगर इसे घर रख कर जाती हूं, तो पेपर छूट जाएगा. अच्छा हुआ कि आप मिल गए.’’


दिवाकर एकदम से बोला, ‘‘तुम टैंशन मत लो.’’फिर सोमेश को स्कूटी थमाते हुए दिवाकर बोला, ‘‘यार, इसे गैराज पहुंचा देना. मैं दिव्या को कालेज छोड़ कर आता हूं.’’ कालेज 7 किलोमीटर की दूरी पर था. मोड़ पर शहर जाने वाली बस कर रुकी, जिस में वे दोनों चढ़ गए. बस खचाखच भरी थी. समय की मजबूरी में उन्हें उसी बस में चढ़ना पड़ा. बस चल पड़ी. कुछ ही देर में दिवाकर ने देखा कि कई लड़के दिव्या को घूर रहे थे, बिलकुल उसी ढिठाई से, जैसा वह किया करता था.


कुछ लड़के अपने दोस्तों के साथ कानाफूसी कर रहे थे. कोई टेढ़ी मुसकान फेंक रहा था, तो कोई दिव्या को ऊपरनीचे ताड़ रहा था. दिव्या बारबार दुपट्टा ठीक कर रही थी. वह कभी नजरें ?ाका कर फर्श की ओर देखने लगती, कभी पीछे हटने की नाकाम कोशिश करती. दिवाकर यह सब देख रहा था. पहली बार उसे लगा कि बस में कईदिवाकरबैठे हुए हैं और उस की बहन का जिस्म उन की आंखों से एक्सरे की तरह भेद रहा है. उस का खून खौल रहा था, पर भीड़ भरी बस में वह उतना ही बेबस था, जितनी दिव्या.


उस पल दिवाकर को कुछ एहसास हुआ, वही एहसास जिसे सोमेश उस की सम? में सालों से डालने की कोशिश कर रहा था. हर लड़की, जिसे वह नयनसुख की चीज सम? कर ताड़ता था, शायद यही शर्मिंदगी महसूस करती होगी. दिवाकर ने बस में खड़ेखड़े पहली बार आंखें ?ाका लीं और शायद पहली बार उसे सम? आया किनयनसुखकह कर की गई उस की हर हरकत, किसी की जिंदगी में कितना बड़ादुखबन सकती है. Hindi Kahani  

लेखक –   विनोद कुमार विक्की

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