Hindi Story: बाहर दिन का उजलापन केंचुल बदल कर शाम की सुरमई चादर ओढ़ने लगा था. रंगबिरंगे पक्षियों के झुंड किलकारियां भरते अपने नीड़ की ओर दांडी मार्च कर रहे थे. सड़क और गलियों में कार्पोरेशन की लैड लाइटों की रोशनी का दूधिया शामियाना तन चुका था. प्रकाश बाबू का मन एक रोमांचक जोश से भरा हुआ था. शुभ्रा को लड़के वाले देखने आ रहे थे. वे पत्नी सहित अगवानी के लिए दरवाजे पर खड़े थे. 4 का समय तय था, घड़ी की सूइयां 5 बजा रही थीं. एकएक पल की देर से दिल बैचेन हुआ जा रहा था. बड़े लोगों की मसरूफियत अलग किस्म की होती है. कोई जरूरी काम आ पड़ा हो और प्रोग्राम टाल न दें. पत्नी के कहने पर मोबाइल से बात करना चाहते ही थे कि एक इनोवा कार सरपट लपकती इसी ओर आती दिखी. कार का नंबर देख कर सुकून मिला. लड़के वाले ही थे.
कार पास आ कर रुकते ही दोनों ने मेहमानों का स्वागत किया और उन्हें अंदर ड्राइंगरूम में ले आए.
वे 5 जन थे. अभिषेक, उस के मातापिता और बहन व बहनोई. इसी शहर में उन का कपड़े का कारोबार था. अभिषेक कंप्यूटर इंजीनियर था और शुभ्रा एमबीए. दोनों ही बैंगलुरु में अलगअलग जगह जौब पर थे.
नाश्ताचाय देने के बाद पहलगाम कांड व आपरेशन सिंदूर पर छोटे से पोस्टमार्टमी संवाद के बाद अभिषेक की बहन ने हंस कर कहा, ‘‘आंटीजी, अब सस्पैंस खत्म भी कीजिए और अपनी लाल परी के हमें दर्शन कराएं,’’ उस के नाटकीय अंदाज पर सभी खिलखिला पड़े. शुभ्रा अपने रूम में तैयार हो रही थी. उस की सहेली काजल हंसीमजाक करती सहयोग कर रही थी. बादामी रंग का सूट. गले, बांह व दामन पर महीन बेलबूटों की हलकी कढ़ाई. बाएं कंधे पर सीधा दुपट्टा. साधारण सी ज्वैलरी.
आईने के सामने आई तो काजल चहकी, ‘‘वाह, देखते ही वह कार्टून गश खा कर कहीं गिर न पड़े यार...’’ फिर शुभ्रा की दोनों भौंवों के बीच में नन्ही
सी काली बिंदी लगाती हुई बोली,
‘‘यह बिंदी नहीं है, उस कार्टून की
तिरछी नजरों से प्रोटैक्ट करने के लिए ठिठौना है...’’
दोनों ठहाका लगा कर हंस पड़ीं
कि ड्राइंगरूम से मम्मी की आवाज आई, ‘‘काजल, देर न करो और शुभ्रा को
ले आओ...’’
‘‘सोच ले, साथ में चल रही हूं
मैं. कहीं तेरी जगह दिल मचल गया उस कार्टून का तो...’’ काजल ने मजाक किया.
‘‘तो क्या... उस पर अभी कौपीराइट थोड़े ही लगा है. ऐसे सौ कार्टून कुरबान मेरी यार पर. अभी यह देख कि अपनी शादी में वेटर का रोल ही करना पड़ रहा.’’
दोनों धीमी चाल से चलती ड्राइंगरूम में आईं. शुभ्रा आगेआगे और काजल पीछे उस के दुपट्टे का छोर थामे. जैसे राजकुमारी और बांदी.
शुभ्रा के हाथ में ड्राई फ्रूट्स की ट्रे थी. अभिषेक के पास जगह खाली रखी गई थी. ट्रे को टेबल पर रख कर शुभ्रा वहां बैठ गई. बैठते हुए नजर तितली सी उड़ती अभिषेक पर पड़ी तो एकदम से चौंक उठी. अरे... इस चेहरे को कहीं देखा है पहले. वह चौकन्नी हो गई. भीतर बैठी छठी इंद्री तेजी से यादों के मलबे को कुरेदने में लग गई. कहां देखा होगा... कालेज में... मार्केट में... या किसी दोस्ताना फंक्शन में. दोनों के शहरों के बीच सिर्फ 30 किलोमीटर का ही तो फासला है. परंपरागत इंटरव्यू एक घंटे चला. सामने तो वह खुश दिख रहा था, पर मन कश्मकश में था. यह तो बिलकुल तय है कि पहले मिल चुके हैं, पर कहां... परिचय का लिंक मिल ही नहीं रहा... ऊफ... उस की याद्दाश्त तो खूब तेज है. पढ़ाई में टौपर रही है. फिर... लौटने के लिए सभी उठ खड़े हुए तो अभिषेक ने उसे एक ओर ले जा कर कहा, ‘‘ऐसा करते हैं कि कल
मैथान डैम चलते हैं. तफरीह भी हो जाएगी और एकदूसरे कोा भी लेंगे, ठीक?’’
‘‘बिलकुल,’’ शुभ्रा भी यही चाहती थी. जब तक इस कार्टून से पुरानी मुलाकात का लिंक याद नहीं आ जाता, रिश्ते के लिए हां नहीं करेगी.
‘‘कल सुबह 10 बजे आप गांधी मोड़ पर की ‘माधुरी स्वीट्स’ के पास मिलें. मैं वहां पहुंच जाऊंगा, ओके...’’
चैन कमबख्त किसी भी तरह नहीं पड़ रहा था. न टीवी देखते, न बुक पढ़ते और न फेसबुक ब्राउज करते. बहुत पुरानी बात तो हो नहीं सकती. फिर भी क्यों नहीं याद आ रही...
रात के 9 बज गए. कल की एक अधूरी पढ़ी कहानी को पूरा करने की कोशिश करने लगी. पढ़ते हुए एक जगह रैगिंग का मामला आया तो अचानक उस कार्टून से जुड़ी घटना डौल्फिन मछली की तरह उछालें भरने लगी जेहन में...
सुभाष इंस्टीट्यूट औफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमैंट. मेन गेट पर ‘वैलकम फै्रशर्स’ का बड़ा सा बैनर. कैंपस नएपुराने छात्रछात्राओं के शोर से गूंजता. कालेज में पहला दिन था, धड़कते दिल से ही भीतर गई. शहरी कालेज का मौडर्न माहौल मन में दहशत भर रहा था.
तभी न जाने किस ओर से 3 लड़के जिन्न की तरह प्रकट हो गए.
‘‘हाई.. फर्स्ट ईयर की न्यू कमर हो न? हम तुम्हारे सीनियर्स... पहला दिन दोस्ताना परिचय के नाम... ठीक...’’
तीनों ने उस से हाथ मिलाया और हंसीमजाक करते दूसरी मंजिल के
एक रूम में आ गए. दरवाजा बंद सा
कर दिया.
‘‘घबराने का नहीं. बोले तो थोड़ा रैगिंग करने को मांगता बौस को... हलकाफुलका. पहला दिन का शगुन...’’ शांतनु ने ‘मुन्नाभाई’ के अंदाज में
बोलते हुए पास खड़े मनोज की ओर संकेत किया.
मनोज की ठुड्डी के ऊपर बिंदु के शक्ल की दाढ़ी थी. बदन के कपड़े भी महंगे थे. चेहरे पर अलग रुआब. उस के बाद ऊलजुलूल सवालों का सिलसिला शुरू हुआ.
शुभ्रा शर्म से पानीपानी हुई जा रही थी, जबकि लड़कों के चेहरों पर पानी था ही नहीं, पर वह आत्मविश्वास के साथ जवाब देती गई.
‘‘वैल... आज का रैगिंगवा का आखिरी इवैंट...’’ मनोज बोली में बिहारी लहजे का छौंक देता हिनहिनाया, ‘‘देखिए जे हमरा ई दोस्त अभिषेक आमिर खान जैसा दिखता. दिखता है न? बस... आगे बढ़ कर छोटा सा किस करेगा आप को. उस के बाद फिनिश. न... न... होंठ पर नहीं, ललाट पर. एतना रियायत दे रहे, ठीक?’’
‘‘प्लीज, मु?ो जाने दें. रैगिंग के नाम पर ऐसी बेहूदगी ठीक नहीं, शुभ्रा ने बड़े अदब से कहा और
इस बात का ध्यान रखा
कि चेहरे पर डर के भाव न उभर पाएं. अभी 3 साल गुजारने हैं यहां.
‘‘यह बेहूदगी है... अरे... हम तो शराफत वाली रैगिंग कर रहे यार. लौक्ड कमरे की ओवरनाइट रैगिंग आप ने देखी कहां...’’ शांतनु फनफनाया, ‘‘रैगिंग तो सीनियर्स का हक है, जो अगले साल आप को भी मिल जाएगा.’’
‘‘प्लीज, माफ करें. मु?ा से यह सब नहीं हो सकेगा. ऐसा हक मु?ो नहीं चाहिए,’’ अंदर से बेहद डर भी गई थी.
अचानक मनोज तल्ख आवाज में चिल्ला पड़ा, ‘‘बहुत हुआ ड्रामा... अभिषेक, आगे बढ़ो,’’ उस की कड़क आवाज पर सभी डर से सहम गए.
अभिषेक हड़बड़ा कर आगे बढ़ा और शुभ्रा के ललाट पर ?ाट से किस जड़ कर पीछे हट गया.
तो यह कार्टून उर्फ अभिषेक वही आमिर खान है. पूरी घटना आंखों के आगे जिंदा हो आई. कैसी तो हवस
टपक रही थी चेहरे से. जिस लड़के
के मन में औरतों के लिए जरा भी
इज्जत नहीं, जिस का चरित्र ढीला हो
उस से शादी... कभी नहीं. पर... आसानी से नहीं छोड़ेगी. कल जरूर मिलेगी. पहले जम कर क्लास लेगी, फिर मना कर देगी.
दूसरे दिन तय समय पर ‘माधुरी स्वीट्स’ के पास आ गया अभिषेक. ओला कार से उतरते देख कर मजाकिया हंसी, ‘‘इनोवा के रहते एक भाड़े की
कार से...’’
‘‘हां... कभीकभी आम जन की भीड़ का हिस्सा बन कर भीड़ में चलने का मजा ही कुछ और होता है,’’ अभिषेक के होंठों पर मोहक मुसकान तितली सी नाच रही थी. शुभ्रा मन में हंसी, लफ्फाजी में भी अव्वल.
दोनों मैथान डैम पर आ गए. 2 गेट खुले हुए थे और बेग से गिरता दूधिया पानी सिहरन से भर रहा था. सैर के दौरान हर मुद्दे पर बातें होती रहीं. क्या अभिषेक को रैगिंग का वाकिआ याद नहीं आया? आया है तो असल मुद्दे पर क्यों नहीं आ रहे बरखुरदार.
दोनों पार्क में चले आए. वहां सैलानियों की खूब चहलपहल थी. अभिषेक पुचका यानी पानी पूरी के ठेले के पास आ गया.
‘‘शायद तुम्हारे मन में वह रैगिंग वाली घटना अभी भी गांठ बन कर जमी हुई है...’’
‘‘वह घटना साधारण लग रही है आप को... साधारण. एक हफ्ते तक अपसैट रही थी मैं. उस लंपट के एक इशारे पर लपक कर किस कर बैठना... एक लड़की की इज्जत का जरा भी खयाल नहीं आया...’’ शुभ्रा फट पड़ी.
‘‘जैसा तुम सम?ा रही हो मैं वैसा नहीं हूं. लड़कियों और औरतों के लिए मेरे मन में खूब इज्जत है. छुटपन से ही ऐसे संस्कार मिले हैं. पूरी अकैडमिक लाइफ में लड़कियों की ओर बुरी नजर से कभी देखा ही नहीं, विश्वास करो... पर उस समय मैं मजबूर था.’’
‘‘मजबूर...’’ पुचका मुंह में डालता हाथ थम गया.
‘‘हां... मनोज का बाप एमएलए था. गवर्निंग बौडी का चेयरमैन भी. गंदी रैगिंग के कई रिकौर्ड थे मनोज के नाम. इन लोगों से पंगा ले कर कालेज में पढ़ पाना मुश्किल होता. तुम्हें 3 साल गुजारने थे. बात हलकी किस पर छूट रही थी, सो तुम्हारे फायदे के लिए करना पड़ा.’’
‘‘क्या बकवास है... उस समय आप की आंखों में लिजलिजी चमक देखी थी...’’ रूमाल से मुंह पोंछती शुभ्रा के लहजे में मजबूती थी, ‘‘मैं आप से शादी नहीं कर सकती...’’
‘‘लिजलिजी चमक नहीं धुआंता गुस्सा... कहो तो मां की कसम खा सकता हूं...’’ अभिषेक बोला.
‘‘चलिए, वहां कोन वाली कुल्फी खाते हैं,’’ थोड़ा आगे ही कुल्फी स्टौल था. शुभ्रा मामला बदलती स्टौल की ओर बढ़ गई. स्टौल से एक लड़की बाहर निकल रही थी कि 2 लड़के शरारत से जानबू?ा कर उस से टकरा गए. कुल्फी धप्प से नीचे.
‘‘सौरीसौरी...’’ बापी आंख मारते हुए बोला, ‘‘आइए, कौर्नैटो से भी अच्छी कुल्फी आइसक्रीम खरीद कर दूंगा...’’ और बेहिचक उस की कलाई थाम कर बाहर की ओर खींचने लगा.
लड़की डर से चीख पड़ी, ‘‘यह क्या कर रहे हो, हाथ छोडि़ए.’’
अभिषेक की नजर पड़ी, तो लड़के की हिमाकत पर हैरान रह गया. तेजी
से पास आ कर बोला, ‘‘अरे वाह, सरेआम गुंडई...’’
‘‘तुम बीच में क्यों टपक रहे हो? हम मैडम से बात कर रहे हैं न,’’ उस के साथी बकुल ने अभिषेक को धक्का दे कर कहा.
इस धक्के से अभिषेक नीचे गिर पड़ा. कोहनी छिल गई. शुभ्रा घबरा गई. वह लड़की कलाई छुड़ाते हुए बोली, ‘‘हर्जाने की कोई बात नहीं दादा. इट्स ओके.’’
कलाई छूटी तो बकुल ने लड़की का दुपट्टा खींच लिया, ‘‘कुल्फी तो हमारे संग खानी ही होगी मैडम.’’
यह देख कर अभिषेक की आंखों में खून उतर आया. लपक कर बापी का कौलर पकड़ कर चीखा, ‘‘दुपट्टा दीजिए इन का, नहीं तो...’’
‘‘ओह... इतनी गरमी...’’ एक विलेन जैसी खिलखिलाहट के संग छाती पर एक जोरदार फाइट. अभिषेक की दर्दीली कराह निकल गई और सिर चकरा गया.
बापी उस लड़की की बांह पकड़ कर फिर से खींचने लगा. जोर से खींचने से लड़की कुछ कदम आगे घिसट गई.
शुभ्रा बड़बड़ा उठी, ‘‘किडनैपिंग...’’
वह लड़की डर से चिल्ला रही थी, ‘‘प्लीज हैल्प... बचाओ...’’
इन लोगों की ?ाड़प से मजमा
जुट गया वहां. मजमे में मजा लेने वाले ज्यादा थे. लड़कों की मवाली वाली हरकतें लोगों के मन में खौफ भर
रही थीं.
शुभ्रा की बड़बड़ाहट अभिषेक ने
सुन ली. सचमुच... लड़कों के इरादे खतरनाक हैं. लड़की को यों खतरे में छोड़ देना गवारा नहीं हुआ उसे.
शुभ्रा का कलेजा किसी अनजाने डर से धकधक कर रहा था, पर आगे बढ़ते अभिषेक को रोकने की हिम्मत भी न कर सकी. अभिषेक के दिमाग में कभी के सीखे कराटे के एकमुश्त दांव जुगुनू से चिलक उठे. खड़ी हथेलियों को क्रौस में ला कर टांग घुमाते हुए बापी की गरदन और बकुल की जांघों पर सीधी चोट की. बापी की आंखों के आगे तारे नाच गए, जबकि बकुल मां... मां... चिल्लाता दोनों हाथों से अपनी जांघ के कोमल हिस्से को पकड़े उकड़ू ढह गया.
शुभ्रा उस लड़की का हाथ पकड़ कर भीड़ की ओर दौड़ गई. अभिषेक भी उस ओर दौड़ना चाह रहा था कि तभी बापी के हाथ में धारदार छूरा चमक उठा. अभिषेक थम गया. न... भागना नहीं सामना करना होगा अब. छुरे पर नजर जमाए पैंतरा तौल रहा था कि बापी का हाथ लहराया और बांह पर गहरा जख्म बन गया.
दर्द से अभिषेक की चीख निकल गई. वहां से लहू बहने लगा. गुस्से से चेहरे और गरदन की नसें खिंच गईं. दांत भींचते हुए पगलाया सा बापी पर खड़ी हथेलियों और टांगों से यों कराटे फेंके कि छुरे समेत बापी दूर जा गिरा.
तभी पुलिस वैन का सायरन गूंज गया. दोनों लड़के लंगड़ाते हुए किसी तरह उठे और पलक ?ापकते गायब हो गए. उन के जाते ही भीड़ की हमदर्दी तीनों के नजदीक सिमट आई.
आननफानन शुभ्रा ने एक आटोरिकशा रोका. लोगों की मदद से घायल अभिषेक को आटोरिकशा में चढ़ाया. आटोरिकशा घर की ओर तेजी से दौड़ चला.
शुभ्रा की नम आंखों में अभिषेक के लिए अथाह प्यार हिलोरें मार रहा था. अगर आज अभिषेक न होता तो... दुपट्टे को उस की बांह के जख्म पर बांधती बुदबुदाई, ‘‘माय लव... माय हीरो...’’
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