गर्भवती महिलाओं के लिए आवश्यक संतुलित आहार!

गर्भवती महिलाओं को बैंलेंस डाइट लेना चाहिए. कुछ महिलाओं का दृष्टिकोण होता है कि गर्भवती महिला के साथ एक नया जीवन जुड़ा हुआ होता है. इसलिए दोगुना आहार लेने की जरूरत होती है, लेकिन घर की खान-पान शैली उपयुक्त नहीं होती है. इस लिए लाखों महिलाएं गर्भावस्था के समय एनीमिया (रक्त की कमी) के कारण कई प्रकार के बीमारी से पीड़ित हो जाती है. इन सबसे बचने के लिए जरूरी है , संतुलित आहार लेना .

संतुलित आहार लेने से गर्भवती महिला एवं गर्भस्थ शिशु स्वस्थ रहते हैं. जो महिलाएं स्वस्थ रहती है, उनमें औरों की अपेक्षा प्रसव पीढ़ा को शारीरिक-मानसिक स्तर पर सहने की क्षमता अधिक होती है.

संतुलित आहार में प्रोटीन, काबरेहाइड्रेट, खनिज, मिनरल, विटामिन और वसा की उचित मात्रा मौजूद हो.

गर्भवती महिलाओं को निम्न आहार लेना चाहिए. इस समय कई बार आपको खाने का मन नहीं करता है, लेकिन मन को माना कर स्वाद बदल बदल कर संतुलित  आहार का सेवन करते रहना चाहिए . दस विंदुओ में समझते है  , संतुलित आहार के स्वाद अनुसार सेवन से क्या लाभ है . किन किन बातों का रखें ख्याल , आईए जानते है …

  1. रक्त की कमी न हो इसलिए महिला रोग विशेषज्ञ की सलाह से कैल्शियम एवं आयरन की गोली लेना शुरू से ही प्रारंभ कर देना चाहिए. साथ ही स्वाद अनुसार या जो आपको पसंद हो उस सब्जी का सेवन आपको करना है .
  2. आपके खाने के थाली में गोभी, पत्ता गोभी, सभी लंबी हरी पत्तेदार सब्जियां, तौरई, परवल, लौकी या पालक में से कोई एक प्रतिदिन शामिल होना चाहिए . इसका चुनाव आप अपने पसंद और स्वाद अनुसार कर सकती है .

3. जिन महिलाओं को गर्भपात की शिकायत पूर्व में रही हो , उन्हें अगर बैंगन, पपीता, प्याज, मिर्ची, अदरक, लहसुन, काली मिर्च और सरसों अगर पसंद हो भी तो नहीं खाना चाहिए. अगर आपको इन सब्जियों का स्वाद बहुत पसंद है तो आप बहुत कम मात्रा में प्रयोग करें.

4. फलों में काले अंगूर, केला, पका आम, खजूर, काजू आदि अत्यधिक लाभकारी होता है. जो आपको सुविधा अनुसार मिल जाए और जिनका स्वाद आपको पसंद है उसका आप सेवन कर सकती है .

5. चावल, पुलाव और खिचड़ी के साथ – साथ रोटी , चपाती, परांठा आदि गेहूं से बने आहार को अपने भोजन में स्वाद अनुसार  सम्मलित करें.

6. मक्खन, दूध, शहद में कोई एक तो आपको पसंद ही होगा , इसका सेवन आप कर सकते है . साथ ही गुड़ से या सफेद चीनी से बने मिठाई को भी आप अपने स्वाद अनुसार अपने आहार में शामिल कर सकती है . दूध से कैल्शियम की पूर्ति होती है. दूध का सेवन नियमित करें.

7. भारतीय गर्भवती महिलाएं गर्भवस्था के समय उपवास रख लेती हैं. उन्हें उपवास नहीं रखना चाहिए. इससे गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर कुप्रभाव पड़ता है.

8. जिन महिलाओं को कॉस्टीपिशन (उदरकोष्ठ) रहता है वह भोजन में हरे मटर को शामिल करें.

9. कोल्ड ड्रिंक, एल्कोहल, तंबाकू, सिगरेट, पान-मसाला, फास्ट एवं जंक फूड न लें. चाय, कॉफी और आइस्क्रीम कभी-कभी खाएं. तली, भुनी चीजें न खाएं.

10. मटन, चिकन, अंडा और मछली को भोजन में शामिल करें, लेकिन अधिक मात्रा में नहीं.

इन सभी को अपने भोजन में शामिल करने से मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य ठीक रहता है.

हसबैंड के लिए तैयार करें 5 तरीके का लंच बौक्स

कामकाजी लाइफ में लंच बौक्स हमारे लिए बहुत अहम है. लंच बौक्स को आमतौर पर हम डिब्बा, टिफिन बौक्स कहते है. जिसे काम पर या स्कूल में ले जाया जाता है और इसका सबसे बड़ा चैलेंज घर की महिलाओं के लिए या वाइफ के लिए होता है क्योकि उनके लिए ये जरूरी है कि वे अपने हसबैंड को लंच में ऐसा क्या तैयार करके दें, जिससे पति का खाने में भी मन लगे और काम में भी. तो आज हम कुछ ऐसे लंच बौक्स में तेयार करने के लिए खाना बताएंगे. जिन्हे आप सिर्फ लंक बौक्स में अपने पति को बनाकर दें.

 

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राजमा चावल

राजमा चावल आपके डाइट में शामिल करने के लिए सबसे सही है, खासकर शाकाहारियों के लिए. ये लंच में हेसबैंड को तैयार करके देने का सही विकल्प खाना है. जिसे पेट भर कर खाया जा सकता है साथ ही बताया जाता है कि राजमा चावल वेट लौस करने में मददगार साबित होता है.

पालक बिरयानी

झटपट तैयार होने वाली पालक बिरयानी  हेल्थ में फायदेमंद है साथ ही टेस्ट भी इसका लाजवाब होता है. यकीन मानिए आपके हसबैंड डब्बा पूरा साफाचट कर के ही आएंगे.

शाही पनीर विद नान

दिल्ली की बटर नान और शाही पनीर खाने में बहुत टेस्टी लगता हैं नान को मैदा से बनाया जाता है और पनीर और नान घर में भी सबको बहुत पसन्द आते हैं बच्चो को तो बहुत ही पसंद आते हैं रोटी खाने का मन ना हो तो पनीर के साथ नान बच्चेबहुत खुश हो कर खाते हैं.

पराठा दही

गर्मियों के सीजन में दही पराठा  का स्वाद अलग ही मज़ा देता है. आपने पराठे की तो कई वैराइटीज़ ट्राई की होंगी लेकिन क्या कभी दही पराठा का मजा लिया है.

मिक्ड वेज और चपाती

मिक्स वेज सबकी पसंदीदा डिश है यह सब्जी ज्यादातर लोग चपाती के साथ ही खाना पसंद करते है. शादी पार्टियों की तो मिक्स वेज एक फेवरेट फूड डिश है.तो इसे अगर आप हसबैंड को लंच में देंगी तो काने वाला अंगूली चाटता रह जाएगा.

जानिए खाने में कितना Cooking Oil रखेगा आपको Healthy

कुकिंग की शुरुआत तेल से की जाती है कोई भी सब्जी या पकवान बनाने के लिए तेल का सबसे ज्यादा अहम रोल होता है. इसलिए यह जानना जरूरी है कि तेल का किस मात्रा में यूज करें, साथ ही खाने में तेल में ज्यादा है तो उसे कैसे कम करें. तेल से किस तरह फायदा और नुकसान होता है. तेल से जुड़े हर सवाल का जवाब यहां मिलेगा.

 

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पहले तो ये जान लें कि ज्यादा तेल खाना सेहत के लिए खतरनाक होता है लेकिन इसके बिना खाने का स्वाद नहीं बढ़ता है, हालांकि बेहतर क्वालिटी का और कम तेल खाना सेहत के लिए फायदेमंद होता है.

रोजाना कितना तेल करें यूज

एक हेल्दी व्यक्ति के लिए रोजाना औसतन 1½ टेबलस्पून तेल की जरूरत होती है इसका मतलब है कि आपको एक दिन में 20 ग्राम से ज्यादा तेल का सेवन नहीं करना चाहिए. अगर आप किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, तो बेहतर होगा कि डौक्टर से पूछ कर हेल्दी तेलों का इस्तेमाल करें या फिर फूड में तेल की मात्रा को घटा दें.

रिफाइंड तेल की जगह तिल या मूंगफली के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. ये तेल ज्यादा गरम होने पर भी खराब नहीं होते और भारतीय रसोई के लिए बहुत फायदेमंद हैं.

ज्यादा तेल खाने के ये हैं नुकसान

तेल ज्यादा खाने से दिल से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती हैं. हार्ट स्ट्रोक, धमनियों में रुकावट या कोलेस्ट्रौल का बढ़ना जैसी बीमारियों की एक वजह होती है. इसके अलावा आपको दूसरी बीमारियों का भी सामना करना पड़ सकता है.
• पेट में सूजन, दर्द और लूज मोशन की समस्या.
• पेट के माइक्रोबायोम खराब हो सकते हैं.
• इससे वजन बढ़ सकता है.
• आपको हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा हो सकता है.
• डायबटीज की समस्या हो सकती है.
• मुंहासे हो सकते हैं.
• दिमागी कामकाज पर असर पड़ सकता है.

तेल कम खाने के उपाय

न्यूट्रिशनिस्ट और डाइटीशियन का मानना है कि तेल कम खाने की पहली सीढ़ी है तले हुए खाने से परहेज. तले हुए खाने में दिनभर की जरूरत से तीन गुना ज्यादा तेल लग जाता है, जो आपके कोलेस्ट्रौल को बढ़ाता है.

तला हुआ खाने की बजाय उबली, भुनी या सीधी हुई चीजें खाएं. फैंसी सलाद खाने से भी बचें, इनमें स्वाद बढ़ाने के लिए ज्यादा तेल वाला ड्रेसिंग इस्तेमाल होता है. रोटी में घी कम लगाएं. कम तेल में पराठे बनाएं.

खाने से अधिक तेल को कम करने के उपाय

• नौन-स्टिक बर्तन और पैन का उपयोग करें: खाना पकाने के दौरान तेल को कम करने के लिए नौनस्टिक बर्तन और पैन का उपयोग करना अधिक सुविधाजनक तरीका है.
• स्टीम कुकिंग: स्टीम कुकिंग की मदद से आप खाने में तेल की मात्रा कम कर सकते हैं.
• बैलेंस डाइट: बैलेंस डाइट की आदत डालने से 20 से 25 प्रतिशत तक तेल या फैट की खुराक कम हो जाती है.
• वनस्पति घी : इसकी जगह अन्य तेलों का इस्तेमाल करें

तेल खाने के फायदे

• इम्यून सिस्टम को बढ़ावा मिलता है
• स्किन हेल्थ में सुधार कर सकता है
• बौडी ब्लोटिंग रोकने का काम करता है
• रेस्पिरेटरी हेल्थ को सपोर्ट करता है
• पाचन की क्षमता को बढ़ाता है
• याददाश्त और एकाग्रता को बढ़ाता है

एक बार इस्तेमाल किए गए तेल का बारबार इस्तेमाल करना है खतरनाक

• ट्रांस फैट बढ़ना: एक ही तेल को बार-बार इस्तेमाल करने से तेल में ट्रांस फैट बढ़ सकता है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक होता है
• कैंसर का खतरा: ज्यादा बार तेल का यूज करने से तेल में कार्सिनोजन की मात्रा बढ़ सकती है, जो कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है
• हार्ट के लिए नुकसानदायक: ट्रांस फैट के सेवन से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है
• डायबिटीज की समस्या: एक ही तेल को बार-बार उपयोग करने से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.

हेल्दी नाश्ता करना है शरीर के लिए बेहद जरूरी

प्रोटीन हमारे शरीर की ग्रोथ के लिए महत्त्वपूर्ण है. इस के लिए अंकुरित दालें  विविध प्रकार के पोषक अनाज लिए जा सकते है. ऐंटीऔक्सीडैंट पदार्थों का सही मात्रा में सेवन करें. इस के लिए ग्रीन टी जरूर नाश्ते में शामिल करें. प्रतिदिन मौसमी जैसे फलों को अपने ब्रेकफास्ट में लेना न भूलें. जूस और शेक को नाश्ते की लिस्ट में जरूर रखें. पैक्ड जूस की जगह ताजे जूस का प्रयोग करें. नाश्ते में कार्बोहाइड्रेट्स और प्रोटीन, फैट और मिनरल्स का होना जरूरी है.

सुबह सुबह की भागादौड़ी में अधिकतर महिलाएं अपने नाश्ते को ले कर लापरवाही करती हैं. या तो वे टालमटोल करती रहती हैं या नाश्ता करना भूल ही जाती हैं. ऐसा करना महिलाओं की सेहत के लिए बेहद हानिकारक है. सुबह का नाश्ता स्वस्थ शरीर के लिए बेहद मायने रखता है. यह नाश्ता ही होता है, जो पूरे दिन हमारी पाचन क्रिया को सक्रिय बनाए रखता है. एक मैडिकल सैंटर के संचालक का कहना है, ‘‘यह धारणा बिलकुल गलत है कि सुबह नाश्ता न करने से मोटापा कम होता है. मोटापे को कम करने के लिए सही समय पर संतुलित आहार लेना चाहिए.’’

सुबह के नाश्ते की महत्ता बताते हुए वे कहते हैं, ‘‘हमारी डाइजेशन की क्रिया सुबह के वक्त सब से बेहतर होती है. जिस तरह सुबह सुबह कोई अच्छी बात सुनने से हमारा पूरा दिन अच्छा बीतता है, हमारे भीतर सकारात्मकता का संचार होता है, उसी तरह सुबह स्वस्थ नाश्ता करने से पूरे दिन हमारे शरीर में ताजगी बनी रहती है.’’

नाश्ता न करने पर

  1. डाक्टरों का मानना है कि सुबह नाश्ता न करने से चेहरे पर उम्र बढ़ने का प्रभाव जल्दी ही दिखाई पड़ने लगता है.
  2. हमारी पाचनक्रिया असंतुलित हो जाती है, जिस से तरह तरह की बीमारियां होने लगती हैं.
  3. गौरतलब है कि स्वस्थ नाश्ता न करने से हमें आलस बहुत जल्द आने लगता है. साथ ही साथ हम भारीपन सा महसूस करते हैं.

कौन सी चीजें जरूरी

  1. सुबह का नाश्ता चूंकि हमारी पाचन क्रिया की शुरुआत करता है, इसलिए उस में कुछ मूल तत्त्वों का समावेश करना बेहद जरूरी है.

2. महिलाओं को प्राय: ऐसा लगता है कि वसायुक्त पदार्थ खाने से हमारी चरबी बढ़ जाएगी. लेकिन नाश्ते में सही मात्रा में वासयुक्त पदार्थों का होना भी बेहद जरूरी है. इस के लिए दुग्ध पदार्थों, देशी घी, मक्खन इत्यादि उचित अनुपात में खाएं.

3. जरा सोचिए, सुबहसुबह खाली पेट जब अपने आराध्य को याद करने में परेशानी होती है, तो भूखे पेट हमारे काम सुचारु रूप से कैसे होंगे.

भोजन से जुड़ी अच्छी आदतें

भोजन करना हमारी बुनियादी जरूरत है. इस के बगैर काम करने की हमारी ताकत पर बुरा असर पड़ता है. ज्यादा दिनों तक भूखा रहने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है. क्या आप जानते हैं कि भोजन करना भी एक कला है और उस से जुड़ी कुछ आदतें ऐसी हैं, जो आप की सेहत बना सकती हैं:

1. भोजन करने से पहले अगर शौच की हाजत लगी है, तो उसे कर के ही भोजन करने बैठें. अगर पेशाब करने की इच्छा हो तो उसे कर लें.

2. भोजन करने से पहले साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है.

3. भोजन तभी करें, जब जोरों की भूख लगी हो.

4.  भोजन को ठीक से चबा कर खाना चाहिए. जल्दबाजी में भोजन को निगल लेने से वह ठीक से पचेगा नहीं. यही नहीं, दांतों का काम आंतों को करना होगा. एक ग्रास को कम से कम 25 से 30 बार चबाना चाहिए.

5. भोजन के ग्रास छोटेछोटे लें, ताकि उन्हें खाने, चबाने में सुविधा रहे. बड़ेबड़े ग्रास ले कर खाना बेहूदगी है.

6. भोजन के पहले या भोजन के दौरान और भोजन के तुरंत बाद ढेर सारा पानी न पीएं. इस से भोजन को पचाने में दिक्कत होती है. जरूरत पड़ने पर भोजन के दौरान 1-2 घूंट पानी ले सकते हैं, वरना भोजन के एक घंटा बाद ही पानी पीना चाहिए.

7. भोजन को शांत मन से करना चाहिए. जब आप दुखी हों, गुस्से या तनाव में हों, तब भोजन करने नहीं बैठना चाहिए. इस से न तो भोजन का स्वाद आएगा और न ही आप भरपेट भोजन कर सकेंगे.

8. एक ही बार में ठूंसठूंस कर खाने के बजाय हर 4 घंटे बाद थोड़ाथोड़ा खा लेना चाहिए. इस से पाचन सही रहता है और हर समय ऊर्जा बनी रहती है. डायबिटीज के मरीजों के लिए तो टुकड़ेटुकड़े में भोजन करना बेहद जरूरी है. इस से उन की शुगर सामान्य स्तर पर बनी रह सकती है.

9.  अपने भोजन में सभी चीजों को शामिल करें. किसी पसंदीदा चीज को खाना व दूसरी चीजों को चखना तक मंजूर न होना, यह आदत ठीक नहीं. घर में जोकुछ बना हो, खाना चाहिए. इस से आप का भोजन पौष्टिक व संतुलित होगा.

10. शादीब्याह या पार्टी में जाएं तो व्यंजन को देख कर ललचाएं नहीं. स्वाद के बजाय सेहत पर ध्यान दें. उतना ही खाएं, जिसे आप पचा सकें.

11. भोजन करें तो उन चीजों से परहेज करें जो आप के लिए मना है. अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं तो मीठे से तोबा करें. अगर हाई ब्लडप्रैशर है तो नमक कम खाएं. दालसब्जियों में ऊपर से नमक न डालें. अगर दिल की बीमारी है तो ज्यादा वसा यानी फैट वाला भोजन न लें. इस के अलावा भी अगर फूड एलर्जी है तो ऐसी चीजों के सेवन से बचें.

12. भोजन एकांत में नहीं परिवार वालों के साथ करें, तो उस का मजा ही अलग है. टैलीविजन के सामने बैठ कर भोजन न करें.

13. भोजन हमेशा ताजा, पचने वाला करना चाहिए.

14. भोजन की थाली से बीच में उठ कर जाना ठीक नहीं. अगर कोई काम है तो पहले उसे निबटा लें.

15. भोजन चाहे घर में करें या बाहर, उतना ही थाली में लें, जितना खा सकें.

16. कोशिश करें कि रोजाना तय समय पर ही भोजन करें.

17. भोजन के ठीक पहले या तुरंत बाद चायकौफी, आइसक्रीम व कोल्ड ड्रिंक का सेवन नहीं करना चाहिए. इस से पाचन क्रिया पर बुरा असर होता है.

18. भोजन हमेशा बैठ कर खाना चाहिए. खड़ेखड़े खाने की आदत ठीक नहीं है.

19. जहां तक मुमकिन हो, बाजार के खाने से बचें. मेले, ठेलों पर बिकने वाले चाटपकौड़ी या दूसरी चीजों का सेवन न करें, तो ही अच्छा है.

20. भोजन जैसा भी बना हो, उसे मन से खाएं. उस में मीनमेख न निकालें.

21. भोजन को इतमीनान से करें. उसे करने में 20 से 30 मिनट का समय लगना चाहिए. 5 मिनट में फटाफट खाने की आदत ठीक नहीं है.

22.  अगर भोजन करते समय खांसी आने लगे या ठसका लग जाए, तो वहां से उठ जाएं. राहत मिलने पर दोबारा भोजन शुरू करें.

23.  भूख से हमेशा थोड़ा कम खाएं, तो बेहतर रहेंगे. डट कर खाने से सुस्ती, आलस, घबराहट, बेचैनी वगैरह की शिकायत होगी.

24. अगर आप को एसिडिटी की शिकायत है, तो ज्यादा समय खाली पेट न रहें. नाश्ता जरूर लें. इस से एसिडिटी नहीं होगी.

25. भोजन करें तो 2 बेमेल चीजें एकसाथ न लें, जैसे खीर के साथ दही, अचार वगैरह का सेवन न करें.

26. अगर भोजन के पहले या उस के बाद कोई दवा लेना जरूरी है, तो उसे जरूर लें, खासतौर पर डायबिटीज के मरीज.

27. भोजन के बाद प्लेट या थाली में हाथ न धोएं. घर हो या बाहर, हर जगह इस बात का ध्यान रखना चाहिए.

28.  भोजन करने के फौरन बाद कड़ी मेहनत वाला काम नहीं करना चाहिए. भोजन के तुरंत बाद दौड़ना, तेज चलना, सीढि़यां चढ़ना, कसरत करना, जिस्मानी संबंध बनाना वगैरह काम नहीं करना चाहिए. इसी तरह भोजन के बाद मालिश करना, नहाना जैसे काम भी नहीं करने चाहिए.

29. भोजन करते ही सो जाना ठीक नहीं. दोपहर के भोजन के आधा घंटे बाद 20 मिनट की  झपकी ली जा सकती है. रात का भोजन करने के 2 घंटे बाद ही सोना चाहिए.

30.  भोजन के बाद ठीक से कुल्ला करना जरूरी है, ताकि दांतों में फंसे भोजन के कण बाहर निकल जाएं और बदबू पैदा न करें. रात के भोजन के बाद ब्रश कर के ही सोना चाहिए.

गलत आदतों के शिकार हो रहे हैं बच्चें

सैक्स की जरूरत केवल लडक़ों को ही होती हो, लड़कियों को नहीं, यह जरूरी नहीं. फरीदाबाद दिल्ली के निकट एक मामले में एक लडक़ी की शिकायत पर एक लडक़े को जेल भेज दिया गया क्योंकि वह लडक़ा घर के सामने ही रहता था और उसे 2-3 साल से गंदे मैसेज भेजता था, उस पर सैक्स करने का दबाव डालता था. लडक़ी की शिकायत थी कि उस ने उस के अंगों में उंगली डाल कर उस का रेप किया था.

सवाल उठता है कि उंगल डाली हो या यौनांग यह क्या लडक़ी की रजामंदी के बिना हो सकता है. क्या कोई महीनों एक तरफा गंदे या प्यार के मैसेज किसी के फोन पर बारबार भेज सकता है. क्या कोई लडक़ा महीनों किसी लडक़ी का पीछा करेगा और अगर उसे जरा सा भी बढ़ावा लडक़ी से नहीं मिले.

सैक्स रेप के मामलों में ज्यादातर बात रजामंदी से काफी हद तक बढ़ती है और फिर लडक़ा कपड़े उतारने और साथ हम बिस्तर होने को कहता है. रेप आनंद नहीं दे सकता, हां मर्दानगी जरूर दिखा सकता है. बहुत बार रेप किया जाता है लडक़ी को या उस के घरवालों को सबक सिखाने के लिए. कई बार दुश्मनी की वजह से रेप किया जाता है. पर जहां महीनों लडक़ा घर से दफ्तर और दफ्तर से घर तक लडक़ी का पीछा करता हो, वहां लडक़ी की इच्छा भी न जागती हो यह कहना सच से मुंह मोडऩा होगा.

औरतों को हक देने के नाम पर सैक्स गुनाहों पर समाज अब कठोर हो रहा है पर अदालती बूटी के नीचे अब कंकरपत्थर और वोटों के साथसाथ प्यार के खुशबूदार फूल भी पिसने लगे हैं.

बहुत से लडक़ेलडक़ी के पहली बार नकारने के बाद आगे नहीं बढ़ते अब क्योंकि उन्हें डर होता है कि कहीं लडक़ी हंगामा खड़ा न कर दे. असल में वे रुकता है कि यह पहले कदम को नकारना केवल शर्माना हो, यह जताना हो कि लडक़ी चालू नहीं है, या फिर लडक़ी डरीसहमी हो और लडक़े को परखना चाहती हो.

आज के कानूनों ने उस प्यार को रौक दिया है. बहुत से लडक़े डर कर लड़कियों से दूर भाग जाते है कि वहीं वह नाराज हो कर शिकायत न कर दे. यह भागना लड़कियों को भारी पड़ता है क्योंकि लडक़ी समझती है कि उस में कहीं कोर्ई कमी नहीं है कि लडक़े उसे प्यार नहीं करते.

14-15 साल की होते ही हर लडक़ी के मन में एक ऐसे प्यार की जरूरत होने लगती है जो उस पर जान छिडक़े, उस के साथ घूमे, उस के दुखदर्द शेयर करे. उस की गोद में लेट कर अपने गम भुला सके. दुनिया भर से बचा सके. कानूनों ने यह सब बंद कर दिया है.

वैसे ही अब समाज और कट्टर होने लगा ङ्क्षहदूमुसलिम भेदभव तो ही रहा है. साथ ही जाति का भेद भी बढऩे लगा है जबकि अब हर जाति का रहनसहन और खानपीन एक सा होने लगा है. स्कूल, कालेज या काम की जगह जब लडक़े लडक़ेलडक़ी मिलते हैं, एकदूसरे को पसंद करने लगते हैं तो महीनों उन्हें जाति का पता भी नहीं चलता.

जब प्यार पकने लगे तो कानून का डर आ जाता है. किसी भी बात पर अनबन होने पर पुलिस बीच में आ जाती है. पुलिस इन मामलों में खूब इंटरेस्ट लेती है क्योंकि ये कानून व्यवस्था के नहीं होते. इस में मोटी रिश्वत मिलती है. मामले को सुलझाने के नाम पर दोनों पक्ष खूब खिलातेपिलाते हैं. जज भी अपने को लड़कियों को बचाने के नाम पर लडक़ों को सजा दे देते हैं पर भूल जाते हैं कि यह औरतों के लिए गलत फैसला है. यह समाज के फिर से पुराने जमाने में ले जा रहा है जहां लडक़ेलड़कियां शादी मांबाद और बिचौलिए पंडितों के हिसाब से करते थे. तब शादी तो हो जाती थी पर दोनों अपने मनचाहों को शादी के बाद ढूढ़तेफिरते थे और घर कलहों बटें में डूबते थे. आज के युग में ढील देना जरूरी है.

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