Cricket News: खेल पर भारी रहा बेतुका विवाद

Cricket News: क्रिकेट के एशिया कप की शुरुआत इसलिए हुई थी कि एशिया में क्रिकेट खेलने वाली टीमों को एकदूसरे के साथ भिड़ने का मौका मिले और वे मजबूत बनें. वैसे भी कोई भी खेल इसीलिए खेला जाता है कि खिलाडि़यों में खेल भावना पनपे और वे हरजीत से ऊपर उठ कर खेल परंपरा को आगे बढ़ाएं.

पर इस बार क्रिकेट के एशिया कप, 2025 में भारतपाकिस्तान का आपसी विवाद पूरे टूर्नामैंट पर भारी पड़ गया. दूसरी टीमों का जैसे कोई वजूद ही नहीं था. ऐसा लग रहा था कि खेल का मैदान लड़ाई का मैदान बन गया है. हाल ही में भारतपाकिस्तान की सरहद पर हुई झड़प खेल के मैदान पर भी अपना गलत असर दिखाती नजर आई.

28 सितंबर, 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच यूएई में फाइनल मुकाबला हुआ और भारत ने इस रोमांचक मैच को 5 विकेट से जीत भी लिया, पर इन दोनों देशों के बीच खेले गए 3 मैचों में खिलाड़ी गेंदबल्ले से ज्यादा अपनी जबान और इशारों से एकदूसरे से जू झते नजर आए.

फाइनल मुकाबला जीतने के बाद तो विवाद और ज्यादा गहरा गया था. रात को 12 बजे भारत की जीत के बाद प्रैजेंटेशन सैरेमनी तकरीबन सवा घंटे देरी से शुरू हुई, क्योंकि भारतीय टीम ने एशियाई क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से एशिया कप ट्रौफी लेने से साफ इनकार कर दिया था. इस से पहले पाकिस्तान टीम के साथ भी हाथ नहीं मिलाया था. मोहसिन नकवी पुरस्कार वितरण समारोह शुरू होने से पहले एक तरफ खड़े थे और भारतीय खिलाड़ी 15 गज के भीतर खड़े थे. उन्होंने अपनी जगहों से हटने से इनकार कर दिया और समारोह में देरी होती गई.

भारतीय टीम मैनेजमैंट ने पहले ही तय कर लिया था कि खिलाड़ी मोहसिन नकवी से ट्रौफी नहीं लेंगे. मोहसिन नकवी जैसे ही स्टेज पर आए तो दर्शकों की ओर से भारतीय फैंस ने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने शुरू कर दिए.

इतना ही नहीं, मोहसिन नकवी जैसे ही स्टेज पर आए, उन्हें बताया गया कि भारतीय टीम उन से ट्रौफी नहीं लेगी और वे जबरदस्ती करेंगे तो आधिकारिक विरोध दर्ज किया जाएगा.

मोहसिन नकवी इंतजार करते रहे और अचानक आयोजकों में से कोई ट्रौफी ड्रैसिंग रूम के भीतर ले गया.

मैच खत्म होने के बाद पाकिस्तानी टीम एक घंटे बाद तक ड्रैसिंग रूम से बाहर नहीं आई. सिर्फ पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी अकेले खड़े हो कर शर्मिंदगी झेलते रहे.

तकरीबन 55 मिनट बाद जब पाकिस्तानी टीम बाहर आई, तो दर्शकों ने ‘इंडिया इंडिया’ के नारे लगाए. भारत के ट्रौफी लेने से इनकार के बाद एसीसी हैड मोहसिन नकवी एशिया कप की ट्रौफी अपने साथ ले कर चलते बने.

चैंपियन बनने के बाद भारतीय टीम को ट्रौफी न मिलने से बीसीसीआई काफी नाराज दिखी और कहा गया कि नवंबर में होने वाली अगली आईसीसी मीटिंग में मोहसिन नकवी के खिलाफ नाराजगी जताई जाएगी.

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने टीम के इनकार को सही ठहराते हुए कहा कि ऐसे किसी शख्स से भारतीय टीम ट्रौफी नहीं ले सकती जिस के देश ने हमारे देश के खिलाफ युद्ध छेड़ रहा हो. याद रहे कि मोहसिन नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष होने के साथसाथ अपने देश के गृह मंत्री भी हैं.

एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी से ट्रौफी लेने से इनकार के बाद भारतीय टीम को एशिया कप नहीं दिए जाने पर कप्तान सूर्यकुमार यादव ने कहा, ‘मैं ने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि विजयी टीम को ट्रौफी नहीं दी गई हो. लेकिन मेरे लिए मेरे खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ ही असली ट्रौफी है.’ Cricket News

Cricket Update: भारतइंगलैंड सीरीज टैस्ट क्रिकेट को मिली संजीवनी

Cricket Update: जब भारतीय क्रिकेट टीम अपने इंगलैंड दौरे के लिए निकली थी, उस से पहले बड़ा उलटफेर हुआ था. रोहित शर्मा और विराट कोहली ने अचानक रिटायरमैंट ले कर सब को चौंका दिया था. जसप्रीत बुमराह कप्तान नहीं बन पाए थे, तो उन्होंने पहले ही कह दिया था कि वे ज्यादा मैच नहीं खेल पाएंगे. 5 मैचों की इस सीरीज में भी उन्होंने 2 मैच नहीं खेले थे. शुभमन गिल और गौतम गंभीर की अगुआई में गई नई टीम को इंगलैंड में संतोषजनक प्रदर्शन करने का दबाव था.

पर हुआ क्या? हुआ यह कि इन 5 टैस्ट मैचों ने बता दिया कि ‘लाल गेंद’ आज भी ‘क्रिकेट की क्वीन’ है. बता दिया कि टैस्ट क्रिकेट अभी मरा नहीं है, बल्कि इस का जादू बरकरार है. तभी तो यह सीरीज रिकौर्ड दर्शकों द्वारा स्टेडियम और टैलीविजन पर देखी गई. 20 जून को शुरू हुए पहले टैस्ट मैच को जिओ हौट स्टार एप पर रिकौर्ड 89.1 मिलियन दर्शकों ने देखा था.

5 दिन तक चले इस मैच में स्टेडियम हर रोज फुल रहा था. हालांकि, इंगलैंड ने यह रोमांचक मैच जीता था, पर दर्शकों ने हर पल का मजा लिया था. बाकी 4 मैच भी इसी तरह रोमांच से भरे थे.

मनोरंजन के लिहाज से इस टैस्ट सीरीज से यह बात सामने आई कि अगर कोई बड़ा लक्ष्य सामने है, तो उसे पार करने के लिए सब्र और हुनर दोनों की जरूरत होती है. अब चूंकि आईसीसी वर्ल्ड टैस्ट चैंपियनशिप होती है, तो हर टैस्ट के अलग से पौइंट मिलते हैं.

इस से टैस्ट क्रिकेट की नीरसता खत्म हुई है, क्योंकि आईसीसी वर्ल्ड टैस्ट चैंपियनशिप जीतने का मजा वैसा ही है, जैसे वनडे या टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला जीतना.

अगर आईसीसी वर्ल्ड टैस्ट चैंपियनशिप की मौजूदा टेबल पर नजर डालें तो इंगलैंड को 5वें टैस्ट मैच के रोमांचक मुकाबले में 6 रन से हराने के बाद और इस सीरीज को 2-2 की बराबरी पर ला कर भारतीय टीम तीसरे नंबर पर पहुंच गई है. आस्ट्रेलिया पहले नंबर है, जबकि श्रीलंका दूसरे नंबर पर.

इस टैस्ट सीरीज से एक बात और साबित हुई है कि टीम गेम में कोई एक ‘एक्स फैक्टर’ नहीं होता है. टैस्ट का मतलब ही खेल के मैदान पर आप के सब्र का इम्तिहान. चूंकि शुभमन गिल एक नौसिखिया टीम के अगुआ बन कर इंगलैंड गए थे, जहां की विकेट, मौसम, दूसरे हालात भारतीय पिचों और मैदानों से एकदम उलट हैं, तो उन की टीम से ज्यादा करिश्मे की उम्मीद किसी को नहीं थी.

खुद शुभमन गिल का इस टैस्ट सीरीज से पहले इंगलैंड में खराब रिकौर्ड था. उन्होंने इंगलैंड में 3 मैचों की 6 पारियों में 14.66 के औसत से सिर्फ 88 रन ही बनाए थे, पर इस बार वे 754 रनों के साथ इस सीरीज में सब से ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने. आखिरी मैच के हीरो रहे मोहम्मद सिराज ने इस सीरीज में 23 विकेट लिए.

भारत और इंगलैंड के बीच खेले गए 5 मैचों की टैस्ट सीरीज के सभी मुकाबले पांचों दिन यानी आखिरी दिन तक खेले गए. तकरीबन 8 साल बाद ऐसा हुआ, जब 5 मैचों की सीरीज के सभी टैस्ट मैच आखिरी दिन तक खेले गए.

कुलमिला कर यह टैस्ट सीरीज शानदार रही और एक सीख मिली कि अगर आप बैस्ट देते हैं तो चाहे वह क्रिकेट का मैदान हो या कोई दूसरा क्षेत्र, रिजल्ट चौंकाने वाला होता है और आप को और बेहतर करने की प्रेरणा देता है. फिर हारजीत कोई माने नहीं रखती है, काम का मजा ही आप का इनाम होता है. Cricket Update

तन्मय अग्रवाल : गेंदबाजों को धुन कर बनाया एक नया क्रिकेट रिकॉर्ड

इतिहास बनाने वाले अनेक नहीं होते कोई एक होता है जो अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर जीत दर्ज करता है. ऐसा ही कुछ हुआ जिसके कारण आज तन्मय अग्रवाल का नाम बल्लेबाज के रूप में सम्मान से लिया जा रहा है. तन्मय धरमचंद अग्रवाल का जन्म 3 मई, 1995 को हुआ. ये एक भारतीय क्रिकेटर हैॆ जो हैदराबाद के लिए खेलते हैं. तन्मय एक बाएं हाथ के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज हैं. उन्होंने 2014 में हैदराबाद के लिए अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट और लिस्ट ए क्रिकेट दोनों की शुरुआत की थी.

रणजी ट्राफी में 26 जनवरी, 2024 के दिन अरुणाचल प्रदेश और हैदराबाद के बीच खेला गया मुकाबला इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. सिर्फ एक दिन के खेल में तन्मय अग्रवाल ने धुआंधार अंदाज में गेंदबाजों की पिटाई करते हुए तिहरा शतक जमा कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया. सिर्फ 147 गेंद पर 21 छक्के और 33 चौके की मदद से तन्मय अग्रवाल नामक इस नए बल्लेबाज ने 323 रन ठोंक कर दिखा दिया कि आने वाले समय में वह देश के लिए क्या कुछ कर सकता है.

आप को बता दें कि 28 साल के तन्मय अग्रवाल का क्रिकेट की तरफ नन्ही उम्र में ही शौक पैदा हो गया था. पिता ने इन्हें क्रिकेट की तरफ प्रोत्साहित किया और देखते ही देखते तन्मय के धमाकेदार खेल का नतीजा था कि उन्होंने हैदराबाद अंडर-14 टीम में जगह बनाई.

यही नहीं, इस के बाद तन्मय अग्रवाल अंडर-16, अंडर-19, अंडर-22 और अंडर-25 टीम में जगह बनाने में कामयाब हुए. दरअसल, 2014 में तन्मय को प्रथम श्रेणी क्रिकेट में खेलने का मौका मिला था. अभी तक वे हैदराबाद के लिए 56 प्रथम श्रेणी मैचों में 3,500 से अधिक रन बना चुके हैं. इतना ही नहीं, वे इंडियन प्रीमियर लीग में सनराइजर्स हैदराबाद के लिए साल 2017 और 2018 में टीम का हिस्सा भी बन कर अपनी चमक बिखेर चुके हैं.

महत्वपूर्ण यह है कि तन्मय अग्रवाल ने अब दक्षिण अफ्रीका के मार्को माराइस के 191 गेंद पर बनाए तिहरे शतक के रिकार्ड को 147 गेंद पर बना कर तोड़ डाला है. इसी कारनामे को वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज विवियन रिचर्ड्स ने 244 गेंद पर अंजाम दिया था. एक दिन में 300 रन बना कर तन्मय अग्रवाल ने भारतीय दिग्गज वीरेंद्र सहवाग को भी पीछे छोड़ दिया. 2009 में उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ ब्रेबोर्न टेस्ट में एक दिन में 284 रन बनाए थे.

तन्मय अग्रवाल ने अपनी इस ऐतिहासिक पारी के बाद मीडिया से रूबरू हो कर कहा, ‘यह पूर्व नियोजित पारी नहीं थी. यह एक और सामान्य दिन था और मैं हर पारी में जिस तरह से खेलता हूं उसी तरह खेल रहा था. मैं ने इस सीजन के लिए कोई लक्ष्य नहीं तय किया था. मैं बस अच्छी बल्लेबाजी करना चाहता था. यह मानसिकता मददगार रही. अच्छा लगता है कि मेरा नाम सूची में सब से ऊपर है.

‘मैं अपने परिवार और दोस्तों का शुक्रगुजार हूं जिन्होंने इतने वर्षों तक मेरा समर्थन किया. बिना उन के समर्थन के यह सफलता प्राप्त करना आसान नहीं था.’

 

24.75 करोड़ में बिक कर इस कंगारू ने बनाया इतिहास, यह कीवी खिलाड़ी हुआ फुस

हाल ही में वनडे का क्रिकेट वर्ल्ड कप भारत में खत्म हुआ था, जिस में भारत ने लगातार 10 मैच जीत कर दर्शकों का दिल अपने नाम कर लिया था, पर फाइनल मुकाबले में आस्ट्रेलिया ने भारत को आसानी से हरा कर खिताब अपने नाम कर लिया था. इस बार पैट कमिंस की अगुआई में वर्ल्ड कप खेल रही आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम कागजों पर ज्यादा मजबूत नहीं दिख रही थी और सैमीफाइनल मुकाबले तक जाने की राह भी ज्यादा आसान नहीं दिख रही थी, पर जैसे ही वह सैमीफाइनल तक पहुंची, तो फिर उस ने अपना असली रंग दिखाते हुए भारत के रंग में भंग डाल दिया.

अब पैट कमिंस को उस जीत का आईपीएल की नीलामी में बहुत बड़ा इनाम मिला है. उन्होंने साढ़े 20 करोड़ रुपए में बिक कर नया इतिहास बना दिया है. सनराइजर्स हैदराबाद ने इतनी बड़ी रकम चुका कर उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया है.

इस बार की नीलामी में पैट कमिंस का बेस प्राइस 2 करोड़ रुपए था. उन्हें खरीदने के लिए रौयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद में बोली के दौरान काफी जद्दोजेहद हुई थी, जिस में सनराइजर्स हैदराबाद ने बाजी मारी.

पर अभी पिक्चर बाकी थी. इसी आस्ट्रेलियाई टीम के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क को कोलकाता नाइट राइडर्स ने पौने 25 करोड़ रुपए में खरीद कर सब को चौंका दिया. वैसे तो आईपीएल का मतलब इंडियन प्रीमियर लीग है, पर जिस तरह से खिलाड़ियों पर पैसा बरसता है, इसे लोग ‘इंडियन पैसा लीग’ भी कहने लगे हैं.

19 दिसंबर, 2023 को दुबई के कोला एरिना हुई आईपीएल की बोली में न्यूजीलैंड के स्टार आलराउंडर डेरिल मिचेल को चेन्नई सुपर किंग्स ने 14 करोड़ रुपए की मोटी रकम दे कर खरीदा. डेरिल मिचेल का बेस प्राइस एक करोड़ रुपए था.

इसी तरह वैस्टइंडीज के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ पर रौयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने साढ़े 11 करोड़ रुपए की बोली लगाई और अपनी टीम में शामिल किया. उन का बेस प्राइस एक करोड़ रुपए था.

ऐसा पहली बार हुआ है जब देश के बाहर यह नीलामी की गई है. इस साल की मिनी औक्शन में कुल 333 खिलाड़ियों की नीलामी लगने वाली थी, जिस में 10 टीमों में कुल 77 जगहें भरी जानी थीं. इन में से 30 स्लौट विदेशी खिलाड़ियों के लिए थे.

एक टीम में ज्यादा से ज्यादा 25 खिलाड़ी और कम से कम 18 खिलाड़ी हो सकते थे, तो फ्रैंचाइजी अपनी सहूलियत के मुताबिक खिलाड़ी चुन सकते थे. इस नीलामी में उतरने वाले 333 खिलाड़ियों में से कुल 214 भारतीय और 119 विदेशी खिलाड़ी थे.

अगर भारतीय खिलाड़ी की बात करें तो भारतीय टीम के आलराउंडर हर्षल पटेल को पंजाब किंग्स ने पौने 12 करोड़ रुपए की मोटी रकम दे कर खरीदा. उन का बेस प्राइस 2 करोड़ रुपए था.

भारतीय टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव को गुजरात टाइटंस ने 5 करोड, 80 लाख रुपए में खरीदा. उन का बेस प्राइस 2 करोड़ रुपए था. नएनवेले खिलाड़ी शिवम मावी को लखनऊ सुपर जायंट्स ने 6 करोड़, 40 लाख रुपए में खरीदा.

इस बार न्यूजीलैंड के भारतीय मूल के आलराउंडर खिलाड़ी रचिन रविंद्र पर सब की निगाहें थीं और लग रहा था कि वे भी बिकने का कोई नया इतिहास बना देंगे, पर ऐसा हो नहीं पाया. 5 बार की आईपीएल चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स ने रचिन रविंद्र को एक करोड़, 80 लाख रुपए में खरीदा. उन का बेस प्राइस 50 लाख रुपए था. भारत के करन नायर, मनीष पांडे के अलावा आस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ, जोश हेजलवुड के साथसाथ दूसरे देशों के कई खिलाड़ियों को इस बार कोई खरीदार नहीं मिला.

हर मोर्चे पर विफल हो रही टीम इंडिया, क्या पूरा हो पाएंगा टी-20 विश्व कप जीतने का सपना

राजकोट में हुए दूसरे टी-20 मैच में टीम इंडिया में एक तरफा मुकाबला जीत लिया. लेकिन इस जीत के साथ-साथ कई सवाल टीम इंडिया के प्रदर्शन पर खड़े हुए हैं. कार्यवाहक कप्तान रोहित शर्मा की तूफानी पारी ने मैच को वनसाइडेड बना दिया. यहां आपको ध्यान देना चाहिए कि अगले साल यानी 2020 में टी-20 विश्व कप खेला जाना है. उससे पहले टीम लगातार प्रयोग के दौर से गुजर रही है. भारत बनाम बांग्लादेश पहला टी-20 मैच दिल्ली के अरूण जेटली स्टेडियम में खेला गया. भारत ये मुकाबला हार गया. अक्सर ये देखा जाता है कि जब टीम हार जाती है तो उसकी कई खामियां गिनीं जाती है लेकिन जब टीम जीत जाती है तो वो खामियां छिप जाती है. दूसरे T-20 मैच में भी ऐसा ही हुआ. पहले T-20 की अगर हम बात करें तो टीम इंडिया हर मोर्चे पर विफल रही. बल्लेबाजी की बात करें तो टीम इंडिया के ओपनर शिखर धवन का बल्ला शांत है. शिखर विश्व कप के दौरान घायल हो गए थे. उसके बाद मैदान पर आए. लेकिन लगा नहीं कि शिखर अपनी फॉर्म में हैं. रोहित शर्मा लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल एक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर ही पूरी टीम डिपेंड रहे. युवा खिलाड़ी श्रेयस अय्यर ने जरूर कुछ रन बनाएं लेकिन उसके बाद पंत, शिवम दुबे, केएल राहुल इन सभी ने निराश किया. इन खिलाड़ियों को मौका था कि ये टीम में जगह पक्की कर पाते लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. पंत की कीपरिंग को लेकर भी तमाम सवाल उठे. पंत को अभी रिव्यू का भी सही आंकलन नहीं था.

पहले टी20 में, मैच का दसवां ओवर था जबकि डीआरएस को लेकर फैसले भारत के खिलाफ गये और आखिर में यह गलती टीम को महंगी पड़ी और उसे पहली बार बांग्लादेश से हार का सामना करना पड़ा. लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल के इस ओवर की तीसरी गेंद पर मुशफिकुर रहीम पगबाधा आउट थे लेकिन भारत ने रिव्यू नहीं लिया. गेंदबाज या विकेटकीपर पंत ने इसके लिये कप्तान को कोई सलाह भी नहीं दी। रहीम तब छह रन पर खेल रहे थे और बाद में वह 60 रन बनाकर नाबाद रहे. जबकि पगबाधा आउट का सही अंदाजा या तो गेंदबाज को होता है या फिर विकेटकीपर को. गेंदबाज को सही सलाह देने का काम विकेटकीपर को होता है.

इसी ओवर की आखिरी गेंद पर सौम्या सरकार के खिलाफ पंत ने विकेट के पीछे कैच की अपील की जिसे अंपायर ने ठुकरा दिया. पंत ने रोहित पर  डीआरएस  के लिये दबाव बनाया लेकिन  रिव्यू  से स्पष्ट हो गया कि गेंद बल्ले से लगकर नहीं गयी थी. दर्शकों ने भी  धोनी—धोनी  की गूंज से पंत को गलती का अहसास कराया. रोहित ने बाद में स्वीकार किया कि इस तरह के रिव्यू  में कप्तान पूरी तरह से गेंदबाज और विकेटकीपर पर निर्भर होता है लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि पंत अभी युवा है और वह समय के साथ बेहतर फैसले करना सीख जाएगा.

अब बात दूसरे टी-20 मैच की

यहां भी भारतीय टीम ने गलतियों का पहाड़ खड़ा कर दिया. वो तो सही रहा कि कप्तान रोहित शर्मा का बल्ला खूब गरजा और उन्होंने 43 गेंदों पर 85 रन ठोंक डाले. शिखर धवन ने भी उनका साथ दिया. जिससे ये मुकाबला टीम इंडिया ने जीत लिया. लेकिन जब टीम इंडिया की फील्डिंग कर रही थी तो खुद कप्तान रोहित शर्मा ने ही एक कैच छोड़ दिया. कैच के बाद कई बार मिसफिल्डिंग भी हुई. इधर ओवर थ्रो से रन दिए गए. टीम इंडिया की ये फील्डिंग देखकर लग नहीं रहा था कि ये टीम कुछ महीनों बाद टी-20 विश्व कप खेलने वाली हैं. ये बात सही है कि इस टीम में कोहली,बुमरहा और भुवनेश्वर कुमार नहीं है लेकिन जो टीम बांग्लादेश के खिलाफ उतरी थी वो खिलाड़ी भी कम नहीं है. यहां बात करते हैं दूसरे मैच की…

दरअसल, चार ओवर का मैच समाप्त हो गया था. पांचवां ओवर युजवेंद्र चहल (Yuzvendra Chahal) लेकर आए. चहल के सामने बांग्लादेश के ओपनर लिट्टन दास (Litton Das) थे. पहली गेंद पर दो रन लिए. दूसरी गेंद ड्रॉप हो गई. तीसरी गेंद पर जबरदस्त ड्रामा देखने को मिला. टीम इंडिया काफी वक्त से विकेट की तलाश में थी. चहल ने ओवर की तीसरी गेंद फेंकी और विकेट कीपर पंत ने स्टंपिंग कर लिटन दास को आउट भी कर दिया.थर्ड अंपायर को इसमें कुछ गड़बड़ नजर आया और उन्होंने कई बार रिप्ले देखा. लिटन दास क्रीज से बाहर थे, चहल का पैर भी बिल्कुल ठीक था इसके बावजूद जब निर्णय में देर लगी तो मैदान में खड़े खिलाड़ी भी आपस में बातचीत करने लगे. उसके बाद थर्ड अंपायर ने इसको नो बॉल करार दी साथ में फ्री हिट भी दी गई. इस फैसले से सबसे ज्यादा निराश चहल दिखे और कप्तान रोहित शर्मा भी नाखुश नजर आए.

लेकिन यह उन अजीब घटनाओं में से एक थी जो आपको क्रिकेट में देखने को मिलती हैं. चहल की फ्लाइट होती गेंद पर लिटन दास ललचा गए और क्रीज से आगे बढ़कर शॉट खेलने लगे लेकिन लेग ब्रेक पर टर्न से पूरी तरह पिट गए. पंत के लिए स्टंपिंग करना सबसे आसान था, जो अपनी उत्तेजना में गेंद को स्टंप के आगे से ही पकड़ लिया. पंत की यह बहुत छोटी गलती है लेकिन टीम को इसका बड़ा खामियाजा उठाना पड़ सकता है.

अब बात करते कुछ आकंड़ों की

पिछले 12 महीने से टीम इंडिया टी-20 में खस्ता हाल प्रदर्शन कर रही है. टी-20 में टीम इंडिया लगातार प्रयोग कर रही है और इन प्रयोगों का खराब असर टीम इंडिया के प्रदर्शन पर साफ नजर आ रहा है. टी-20 में टीम इंडिया फिसड्डी साबित हो रही है. पिछले एक साल में टीम इंडिया टी-20 की 5 में से सिर्फ 1 सीरीज अपने नाम कर पाई. इस दौरान भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में 3 मैच की सीरीज 1-1 से ड्रॉ कर पाई. फिर न्यूजीलैंड में टीम इंडिया 3 मैच की टी-20 सीरीज में 1-2 से हारी.

फरवरी में ही ऑस्ट्रेलिया ने भारत में आकर टीम इंडिया को 2-0 से हराया. सिर्फ वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम इंडिया टी-20 सीरीज जीती. सितंबर में द. अफ्रीका ने भारत में टी-20 सीरीज 1-1 की बराबरी पर खत्म की. टीम इंडिया पिछले 10 में से 5 मैच हारी, जबकि 4 मैच जीती. एक मैच बेनतीजा रहा. पहले बल्लेबाजी करते हुए तो टीम इंडिया की स्थिति और खराब है. पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने इस साल 5 में से 4 मैच गंवाए हैं.

टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया का हुआ ऐलान, रोहित शर्मा IN, केएल राहुल OUT

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) मुख्य चयनकर्ताओं ने दक्षिण अफ्रीका के साथ होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम की घोषणा कर दी है. टीम में दो मुख्य बदलाव किए गए हैं. ओपनर लोकेश राहुल को बाहर कर दिया गया है जबकि रोहित शर्मा की वापसी हुई है. युवा खिलाड़ी शुभमन गिल को टीम में शामिल किया है.

चयनकर्ताओं ने विकेटकीपर के तौर पर ऋषभ पंत और ऋद्धिमान साहा दोनों के नाम हैं. स्पिन डिपार्टमेंट में आर. अश्विन, रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव हैं. जसप्रीत बुमराह, ईशांत शर्मा के अलावा मोहम्मद शमी के जिम्मे तेज आक्रमण रहेगा. वेस्टइंडीज दौरे से बाहर रहे अश्विन को टीम में बुला लिया गया है. अश्विन को टीम में शामिल न किए जाने के बाद चयनकर्ताओं के ऊपर सवाल उठाए गए थे. इस मामले पर टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री को बयान देना पड़ा था. हालांकि अश्विन की जगह पर हनुमा विहारी को टीम में शामिल किया गया था जिस खिलाड़ी ने अपनी प्रतिभा से सबका मुंह बंद कर दिया था.

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टीम इंडिया की ओर से बल्लेबाज का आगाज रोहित शर्मा करेंगे. दूसरे सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल होंगे. उधर, हनुमा विहारी मध्यक्रम में (छठे नंबर पर) में बने रहेंगे. रोहित शर्मा ने आखिरी बार मेलबर्न टेस्ट (26-30 दिसंबर 2018) में नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 63 और पांच रनों की नाबाद पारी खेली थी, लेकिन इसके बाद वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के चौथे और आखिरी टेस्ट के अलावा बाद में वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भी नहीं चुने गए.

रोहित शर्मा ने अब तक 27 टेस्ट मैचों के करियर में कभी टेस्ट में ओपनिंग नहीं की है. उन्होंने नंबर-3 पर चार मैच खेले हैं और 21.40 की औसत से 107 रन बनाए. उनके तीनों टेस्ट शतक नंबर-6 पर आए हैं. दूसरी तरफ कैरेबियाई सीरीज में सबसे अधिक रन (289) बनाने वाले हनुमा विहारी पर टीम की निगाहें होगीं.

टीम के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद का कहना है कि हम रोहित शर्मा को टेस्ट में ओपनिंग का मौका देना चाहते हैं. ऐसा पहली बार होगा जब रोहित शर्मा टीम की ओपनिंग करेंगे. रोहित शर्मा का वनडे का रिकॉर्ड शानदार है. वो इस मौके को भुनाना चाहेंगे. रोहित शर्मा की भी दिली ख्वाइश रही है कि वो सफेद जर्सी में देश के लिए खेल पाएं. अब उनकी मुराद पूरी होती दिख रही है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा. रोहित शर्मा ने 27 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 1585 रन भी बनाए हैं. रोहित शर्मा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डेंस मैदान पर 6 नवंबर 2013 को टेस्ट मैच में डेब्यू किया था.

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विराट कोहली (कप्तान), मयंक अग्रवाल, रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे (उपकप्तान), हनुमा विहारी, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ऋद्धिमान साहा (विकेटकीपर), आर. अश्विन, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह , ईशांत शर्मा, शुभमन गिल.

टी-20 सीरीज के बाद भारत और साउथ अफ्रीका की टीमें विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के तहत तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेलेंगी. टेस्ट सीरीज का पहला मैच दो अक्टूबर से विशाखापत्तनम में, दूसरा 10 अक्टूबर से पुणे में और तीसरा 19 अक्टूबर से रांची में खेला जाएगा.

टीम की चिंता या फिर तेंदुलकर जैसी विदाई की चाहत रखते हैं धोनी

लंबे बालों के साथ जब वो पहली बार क्रीज पर आया तो सभी ने उस खिलाड़ी की हेयर स्टाइल की तारीफ की लेकिन उसके बाद केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया ही उनकी मुरीद हो गई. शायद आप समझ गए होंगे हम किसकी बात कर रहे हैं. हम बात कर रहे हैं महेंद्र सिंह धोनी की. वो धोनी जितने भारत को क्रिकेट विश्व कप भी जिताया, टी-20 विश्व कप भी जिताया, एशिया कप भी जिताया और चैंपियन ट्रॉफी भी हम जीतकर आए. लेकिन समय के साथ सबके खेल में बदलाव आता है. ये हमने पहले भी कई खिलाड़ियों के साथ देखा है. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी आखिरी समय स्ट्रगल कर रहे थे. उनके भी संन्यास की बातें उठने लगीं थीं. लेकिन उस खिलाड़ी के जैसे हर किसी के नसीब पर वैसी विदाई नसीब नहीं होती.

विश्व कप 2019 में लोगों ने अनुमान लगाया था कि लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर टीम इंडिया विश्व कप उठाएगी और एम एस धोनी की विदाई भी उसी तरह होगी जैसे 2011 में मुंबई के वानखेड़े मैदान पर सचिन तेंदुलकर की हुई थी. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. भारत की आकांक्षाओं को न्यूजीलैंड से मुकम्मल नहीं होने दिया और भारत को सेमीफाइनल में ही हार कर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता देखना पड़ा. विश्व कप के दौरान पूरी टीम अस्त-व्यस्त दिखी. धोनी को लेकर सवाल उठते रहे. कहा जाने लगा कि धोनी को अब मैनेजमेंट ढो रहा है, सच यो ये था कि धोनी को टीम में जगह उनके खेल को लेकर नहीं था बल्कि मैदान में उनके अनुभवों को लेकर था. इंग्लैंड के साथ मैच हारने के बाद भी धोनी के ऊपर सवाल उठे. सवाल तभी भी उठे जब न्यूजीलैंड के खिलाफ धोनी का रन बनाने के औसत 50 से भी कम का होने लगा. ऐसा लगने लगा था कि हेलीकॉप्टर शॉट्स खेलने वाला ये बल्लेबाज आज एक-एक रन में स्ट्रगल कर रहा है. धोनी क्रीज पर जम तो जाते थे लेकिन वो बड़े शॉट्स नहीं खेल पा रहे थे. सेमीफाइऩल में न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले में रवींद्र जडेजा की पारी जब तक चल रही थी जब तक धोनी की बल्लेबाजी पर कोई ज्यादा गौर नहीं कर रहा था लेकिन उसके बाद धोनी का खेल वाकई जीत वाला नहीं था.

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धोनी को संन्यास लेना चाहिए या नहीं ये उऩका निजी फैसला है लेकिन टीम मैनेंजमेंट को ये सोचना चाहिए कि धोनी से रिटायरमेंट की बात करें और उनसे पूछें कि उनका क्या प्लान है. भारत के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने भी खुलासा किया था कि चयनकर्ताओं ने उनसे कोई भी बात नहीं कि और सीधे टीम से निकाल दिया गया. ऐसा ही गौतम गंभीर के साथ भी हुआ.

भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर है जहां पर टीम दो टेस्ट, दो टी20 और तीन वनडे खेलने है. दौरा पूरा भी हो गया है. केवल एक टेस्ट मैच खेला जा रहा है. यहां पर भी धोनी का चयन नहीं किया गया. बाद में चयनकर्ताओं की तरफ से ये कहा गया कि धोनी ने इस दौरे के लिए अपने आपको अनुप्लब्ध बताया था. लेकिन सच्चाई यही है कि धोनी को टीम मे जगह ही नहीं दी गई थी. धोनी पैरा-कमांडो की ट्रेनिंग के लिए कश्मीर चले गए. वहां वो आर्मी के साथ ट्रेनिंग करते रहे और सोशल मीडिया में कई वीडियो उनके आते रहे जिसमें वो वॉलीबॉल खेलते दिखे कहीं पर वो एक्सरसाइज करते दिखे.

वेस्टइंडीज दौरे के बाद भारतीय क्रिकेट टीम का चयन दक्षित अफ्रीका के खिलाफ होने वाले टी-20 के लिए किया गया. उसमे भी धोनी का चयन नहीं किया गया. यहां भी चयनकर्ताओं का वहीं घिसा पिटा बयान आया कि धोनी उपलब्ध नहीं है. जबकि यहां भी सच्चाई छिपाई गई. अब धोनी को लेकर कहा जा रहा है कि उनको टीम की चिंता है इसलिए वो संन्यास नहीं ले रहे. मतलब कि धोनी को लगता है कि अभी तक उनके जगह पर कोई परफेक्ट खिलाड़ी नहीं आया इसलिए वो संन्यास नहीं आया. लेकिन धोनी को और टीम दोनों को एक दूसरे के बगैर रहने की आदत डालती होगी. इस बात में कोई शक नहीं है कि धोनी महान खिलाड़ी है लेकिन मुझे याद सुनील गावस्कर की एक बात याद आती है उन्होंने कहा था कि आपको तब संन्यास ले लेना चाहिए जब लोग ये कहने लगें कि ये संन्यास कब लेगा. मसलन की धोनी को अब खुद संन्यास की घोषणा कर देनी चाहिए.

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धोनी के मन में क्या है ये तो महज धोनी ही जानते हैं लेकिन मेरे अनुसार धोनी टी-20 विश्व कप के बाद संन्यास की घोषणा जरुर करेंगे. धोनी हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लेते रहे हैं. जब उन्होंने कप्तानी छोड़ी थी तभी भी चौंका दिया था उसके बाद क्रिकेट के मैदान पर भी उनके कई निर्णय चौंकाने वाले होते हैं. फिलहाल वक्त यही कह रहा है कि धोनी को संन्यास ने लेना चाहिए.

VIDEO: 38 साल के हुए धोनी, टीम ने यूं मनाया जश्न

7 जुलाई, 1981 को जन्मे भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी 38 साल के हो गए हैं. पूरे देश में धोनी के फैंस ने धूमधाम से उनका जन्मदिन मनाया और पार्टी की. खुद धोनी ने पत्नी साक्षी, बेटी जीवा और अपनी पूरी टीम के साथ जन्मदिन का केक काटा और जमकर सेलिब्रेशन किया. इस सेलिब्रेशन की फोटोज और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. जिनमें धोनी मस्ती के मूड में नजर आ रहे हैं. धोनी इन दिनों वर्ल्ड कप के लिए इंग्लैंड में हैं.

विराट ने कहा- बड़े भाई की तरह….

विराट कोहली ने भी धोनी को जन्मदिन की बधाई दी और कहा कि आप टीम में बड़े भाई की तरह हैं. खबर है 2019 का वर्ल्ड कप धोनी का आखिरी वर्ल्ड कप होगा क्योंकि इसके बाद वो क्रिकेट से संन्यास ले लेंगे. ज्ञात हो कि धोनी पर फिल्म भी बन चुकी है जिसमें उनकी पूरी कहानी को दिखाया गया था. धोनी भारतीय टीम के सबसे अच्छे खिलाड़ियों में से हैं और इनकी निजी जिंदगी भी काफी रोमांचक भरी है ये बात तो फिल्म ‘एमएस धोनी- ए अनटोल्ड स्टोरी’ से सबको पता ही चल गई होगी.

 

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You just have to say something says cutie #zivadhoni ❤❤❤❤

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धोनी का विनिंग छक्का…

याद होगा जब 2011 में वर्ल्ड कप में धोनी ने लास्ट में छक्का मारकर इंडिया को जिताया था. उस वक्त टीम इंडिया में वीरेंद्र सहवाग, सचिन तेंदुलकर, युवराज सिंह, हरभजन सिंह, आशीष नेहरा जैसे क्रिकेटर टीम में थे और महेंद्र सिंह धोनी इस टीम की कप्तानी कर रहें थे. वे दिन कोई नहीं भूल सकता जब इंडिया विश्वकप जीती थी.

कैप्टन कूल…

कैप्टन कूल के नाम से मशहूर महेंद्र सिंह धोनी जब फील्ड पर उतरते थे तो लोग कहते थें धोनी धो डाल और आज भी उनका खेलने का अंदाज बेहद अलग है. टीम इंडिया को धोनी के रूप में बहुत ही मजबूत और दमदार खिलाड़ी मिला है, जो फील्ड पर उतरते ही चौके छक्के की लड़ी लगा देता था. धोनी को पद्मभूषण से सम्मानित भी किया गया है. भारतीय क्रिकेट का इतिहास धोनी द्वारा रचा गया है.

2011 में जब इंडिया ने विश्वकप जीता था तो सचिन तेंदुलकर ने उनकी तारीफ करते हुए कहा था की महेंद्र सिंह धोनी एक दमदार कप्तान है, जिनके अंडर में मैंने खेला है. मैंने ऐसी कप्तानी अपने 22 साल के करियर में नहीं देखी. अब तक धोनी 90 टेस्ट, 348 वन-डे और 98 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. उनकी बल्लेबाजी भले ही आज उतना कमाल न दिखाती हो लेकिन उनका अब तक का रिकौर्ड काफी अच्छा रहा है.

 

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Happy Bday ❤️

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फिल्मी है लव स्टोरी…

अगर उनके निजी जिंदगी की बात की जाए तो उनकी शादी की कहानी भी काफी दिल्चस्प रही है. महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर बनी फिल्म ‘एमएस धोनी-ए अनटोल्ड स्टोरी’ में धोनी और साक्षी की पहली मुलाकात एक फाइव स्टार होटल में होना दिखाया गया है. लेकिन ये सच नहीं है. महेंद्र सिंह धोनी और साक्षी एक दूसरे को बचपन से जानते थे. दोनों की मुलाकात हुई, दोस्ती हुई और फिर शादी हो गई. आज उनकी एक बेटी है. मार्च 2008 में दोंनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया था. इसके बाद साक्षी टीम इंडिया के कप्तान के जन्मदिन में भी शामिल हुईं. रिलेशन में आने के बाद भी किसी को नहीं पता चला था कि दोनों रिलेशन में हैं लेकिन एक दिन तो सच सबको पता चलना ही था. कुछ ऐसी ही बहुत सी बातें है धोनी के बारे में जिनको जान कर आपको हैरानी होगी.

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World Cup के दौरान इस 87 साल की महिला ने जीता फैंस का दिल

मंगलवार, 2 जुलाई को बांग्लादेश के साथ हुए एक रोचक मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार जीत हासिल की. पहले तो बल्लेबाजी में रोहित शर्मा ने शतक ठोंक कर नया रिकौर्ड बनाया और बाद में जसप्रीत बुमरा की बूमरैंग गेंदबाजी ने विरोधी टीम पर ऐसा शिकंजा कसा कि उसे टूर्नामेंट से ही बाहर कर दिया.

विराट को भी मिली तारीफें…

इस सब में विराट कोहली की कप्तानी की भी जमकर तारीफ हुई कि मैदान के अलहदा आकार को देखते हुए उन्होंने 4 तेज गेंदबाज और एक स्पिनर को टीम में जगह दी थी. उन का यह फैसला गेंदबाजों ने सही साबित किया.

मैच की इन घटनाओं ने जीता दिल…

इस मैच में 2 और ऐसी घटनाएं हुई थीं जिन्होंने सब का दिल जीत लिया. एक तो तब जब रोहित शर्मा बल्लेबाजी कर रहे थे. अपनी धुआंधार बल्लेबाजी में उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 5 छक्के जड़े थे. उन में एक छक्का स्टेडियम में मैच का लुत्फ ले रही एक भारतीय फैन मीना को जा लगा था. वैसे, ऐसा अक्सर हो जाता है पर जब मैच खत्म हुआ तो रोहित शर्मा उस महिला मीना से खासतौर पर मिलने गए थे. उन्होंने उन का हालचाल लिया और खेद भी प्रकट किया लेकिन साथ ही अपने आटोग्राफ वाली एक हैट भी उन्हें भेंट की. शायद उन्हें मजाकमजाक में समझा भी दिया कि आगे कोई गेंद आप के पास आए तो उसे लपक लेना.

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87 साल की महिला पहुंचीं मैच देखने…

इसी तरह दूसरा किस्सा तो और भी मजेदार रहा. एक उम्रदराज महिला का भारतीय टीम की हौसला अफजाई करना उन्हें ‘आर्यन लेडी’ का खिताब दिला गया. दरअसल, जब यह मैच चल रहा था तब टेलीविजन के कैमरे एक 87 साल की महिला पर फोकस कर रहे थे कि वे मानो किसी बच्ची की तरह भारतीय टीम को जीतने के लिए प्रेरित कर रही थीं.

विराट और रोहित मिलने पहुंचे…

टीम इंडिया की ये फैन थीं चारुलता पटेल. उन का उत्साह और क्रिकेट के प्रति दीवानगी लाजवाब थी. यही वजह थी कि मैच जीतने के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा उन से मिलने पहुंच गए थे. व्हील चेयर पर आई इस बूढ़ी अम्मा के जज्बे ने भारत की इस जीत में चार चांद लगा दिए.

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आखिर क्यों नेहा धूपिया और अंगद बेदी से नाराज हैं युवराज सिंह?

क्रिकेट की दुनिया के जाने-माने स्पोर्ट्समैन युवराज सिंह और बौलीवुड कलाकार अंगद बेदी एक समय बहुत अच्छे दोस्त हुआ करते थे लेकिन आज ये दोनों एक-दूसरे से कटे-कटे रहते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि युवराज और अंगद के बीच आई इस दूरी की वजह कोई और नहीं बल्कि अंगद बेदी की पत्नी नेहा धूपिया हैं.

युवराज सिंह और नेहा धूपिया एक समय एक-दूसरे को डेट कर रहे थे पर उनका ये रिश्ता ज्यादा लंबा ना चल पाया और फिर अंगद बेदी और नेहा रिलेशनशिप में आए और पिछले साल दोनों ने चुपचाप शादी कर डाली. युवराज अंगद से इस बात पर नाराज हैं कि अंगद ने अपनी शादी के बारे में उन्हे बताया तक नहीं.

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युवराज सिंह अंगद बेदी से इतने नाराज है कि युवराज ने अपनी रिटायरमेंट पार्टी में नेहा और अंगद दोनों को नहीं बुलाया जबकि उनकी पार्टी में कई बौलीवुड सेलेब्स और बड़े-बड़े क्रिकेटर आए थे. युवराज का नेहा और अंगद को ना बुलाना पार्टी में सबको अखरा था.

युवराज सिंह ने पिछले साल फ्रेंडशिप डे पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने इनडायरैक्टली अंगद के प्रति गुस्सा जाहिर किया था. युवराज ने पोस्ट में लिखा था, ‘मुझे अभी-अभी पता चला कि बीते दिन फ्रेंडशिप-डे था. मैं उन लोगों को बताना चाहता हूं जिनको मैं अपना अच्छा दोस्त समझता था कि मुझे खुशी है मैं अपने कुत्तों को ज्यादा प्यार करता है. आप जीते हैं और सीखते हैं. हैप्पी फ्रेंडशिप डे.’

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युवराज सिंह के इस पोस्ट के बाद अंगद बेदी मीडिया के सामने आए और कहा कि ‘मेरा दोस्त मेरी वजह से ही नाराज है. युवराज की नाराजगी बेवजह नहीं है, उनके पास अपने कारण हैं.

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