मनीष और शोभना ने बड़े जोश से अपनी गृहस्थी की शुरुआत की थी लेकिन जिस तरह नींव कमजोर होती है तो इमारत मजबूत नहीं रहती ठीक उसी तरह मनीष और शोभना की गृहस्थी चरमराने लगी. प्रस्तुत है एन.के. सोमानी की कहानी.

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