औरत को मातृत्व के बोझ तले दबा कर उस के सपने, ख्वाहिशें, कैरियर छीन लेना भी तर्कसंगत नहीं है. ममता के खूंटे से बांध कर उसे सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन समझने के बजाय उस की इच्छाओं को समझना पुरुषों का दायित्व है.