सौजन्य- सत्यकथा
लेखक- निखिल
इसी दिन पुलिस ने गिरफ्तार एएसआई और बर्खास्त होमगार्ड जवानों को पूछताछ और बयान लेने के बाद अदालत में पेश किया. अदालत ने तीनों को 31 अक्तूबर को जेल भेज दिया.
चूंकि इस दौरान बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे थे. इसलिए पुलिस की पिटाई से इंजीनियर आशुतोष की मौत के मामले को चुनाव आयोग ने गंभीरता से लिया. आयोग ने एक नवंबर को भागलपुर की प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किन्नी को इस मामले की जांच करने के आदेश दिए. उन्हें अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह में चुनाव आयोग को सौंपने को कहा गया.
सिर्फ आश्वासन
चुनाव आयोग के निर्देश पर प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किन्नी ने 2 नवंबर को ही बिहपुर पहुंच कर मामले की जांच शुरू कर दी.
उन्होंने एसपी स्वप्नाजी मेश्राम और एसडीपीओ दिलीप कुमार की मौजूदगी में थाने में पुलिसकर्मियों से आशुतोष के साथ हुई घटना के बारे में पूछताछ की.
उन्होंने कहा कि आरोपी थानाध्यक्ष को जल्दी ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उस की बर्खास्तगी का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा.
ये भी पढ़ें- धर्म परिवर्तन की एक गोली
एसपी ने उन्हें बताया कि फरार आरोपी थानेदार की संपत्ति की कुर्की के लिए अदालत में प्रार्थनापत्र लगाया गया है. वंदना किन्नी ने उसी दिन भागलपुर डीएम के साथ मड़वा गांव जा कर मृतक इंजीनियर आशुतोष के घर वालों को सांत्वना दी और उन से घटना के बारे में जानकारी ली.
3 नवंबर को अदालत के आदेश पर बिहपुर के निलंबित थानेदार रंजीत कुमार के मुंगेर स्थित मकान की कुर्की कर ली गई. एसआईटी ने एसडीपीओ दिलीप कुमार के नेतृत्व में थानेदार के मकान से सारा सामान जब्त कर लिया.
इस के अलावा एक और आरोपी जहांगीर को भी एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया. जहांगीर बिहपुर पुलिस थाने की जीप का निजी चालक था. आरोप है कि थानेदार के कहने पर उस ने भी आशुतोष की बेरहमी से पिटाई की थी.
आश्वासनों का अंबार
उसी दिन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने आशुतोष के घर वालों से मुलाकात कर शोक संवेदना जताई. उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा.
यह घटना हृदयविदारक है. इस मामले में उन्होंने पीडि़त परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा दिलाने और आशुतोष की पत्नी को सरकारी नौकरी दिलाने की बात भी कही.
प्रमंडलीय आयुक्त वंदना किन्नी मामले की जांच के लिए 6 नवंबर को दोबारा बिहपुर पहुंची. उन्होंने एनएच 31 पर महंथ चौक पर दुकानदारों और प्रत्यक्षदर्शियों से 24 अक्तूबर को आशुतोष के साथ हुई घटना के बारे में पूछताछ की.
इस के बाद वह बिहपुर थाना इलाके के ही कोरचक्का गांव पहुंची. इसी गांव के देवेंद्र सिंह से साइड में चलने की बात पर आशुतोष की उस दिन झड़प हुई थी. इसी झड़प के दौरान बिहपुर थानेदार रंजीत वहां पहुंच गया और आशुतोष को धमकाने के बाद पीटते हुए थाने ले गया था.
आयुक्त को देवेंद्र गांव में नहीं मिला. वह नेपाल गया हुआ था. बाद में आयुक्त वंदना किन्नी ने नवगछिया में एसपी से इस मामले की जांचपड़ताल के बारे में पूछा.
भागलपुर के जिलाधिकारी प्रवीण कुमार की अनुशंसा पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय ने 9 नवंबर को आशुतोष की मौत के मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए.
इस मामले की जांच नवगछिया सिविल कोर्ट के एसीजेएम-3 प्रमोद कुमार पांडेय को सौंपी गई. उन्हें एक महीने में जांच पूरी कर रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सौंपने को कहा गया.
ये भी पढ़ें- धर्म परिवर्तन की एक गोली- भाग 2
नवगछिया एसपी स्वप्नाजी मेश्राम ने बिहपुर के निलंबित थानेदार रंजीत कुमार की बर्खास्तगी की अनुशंसा डीआईजी से की. एसपी की अनुशंसा पर थानेदार की बर्खास्तगी की काररवाई विभागीय स्तर पर शुरू हो गई.
इंजीनियर आशुतोष के पिता अजय पाठक गोड्डा कालेज में प्रोफेसर थे. आशुतोष के दादा प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य और स्वतंत्रता सेनानी थे. उन के मातापिता का निधन हो चुका था. गोड्डा में आशुतोष का ननिहाल है. उन्होंने गोड्डा से ही पढ़ाई की थी. वह अच्छे क्रिकेटर भी थे.
सौफ्टवेयर इंजीनियर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कई शहरों में नौकरी की. कई साल तक वह बेंगलुरु में नौकरी करते रहे. लौकडाउन होने पर वे बेंगलुरु छोड़ कर अपने गांव आ गए और भागलपुर में नौकरी करने लगे थे.
अभी तक आंसू बहा रही है स्नेहा
आशुतोष की शादी करीब 3 साल पहले स्नेहा से हुई थी. उन के 2 साल की एक बेटी है. उस के ससुर कटिहार पुलिस में दरोगा हैं.
कथा लिखे जाने तक आरोपी थानेदार रंजीत कुमार की गिरफ्तारी नहीं हुई थी. वह पुलिस की पकड़ से बच कर अपने दांवपेच लगाने में जुटा था.
माना यह जा रहा था वह पुलिस से कितनी भी आंख मिचौली करे, एक न एक दिन उसे अपने किए की सजा जरूर मिलेगी. नेताओं और अफसरों के वादे के बावजूद मृतक आशुतोष के घर वालों को न तो कोई आर्थिक मदद मिली थी और न ही आश्रित को नौकरी.
आशुतोष की मौत से स्नेहा की मांग का सिंदूर उजड़ गया. 2 साल की मासूम बेटी मारवी के सिर से पिता का साया छिन गया. पति की मौत के गम से स्नेहा अभी उबर नहीं पा रही है. वह रात को सोते हुए उठ बैठती है और उस दिन की घटना को याद कर आंसू बहाती है.
बहरहाल, इस घटना से बिहार पुलिस का अमानवीय चेहरा उजागर हुआ है. पुलिस पहले ही बदनाम रही है, इस घटना ने आम लोगों में पुलिस का भरोसा कम किया है. देश में जहां रोजाना नए कानून बन रहे हैं. शिकायतों के लिए सरकार और अफसर हैं. इंसाफ देने के लिए अदालतें है. संविधान ने लोगों को कई तरह की आजादी और अधिकार दिए हैं.
फिर भी इस तरह की हो रही घटनाएं देशवासियों का सिर शर्म से झुकाने को मजबूर कर देती हैं.



