क्या पौर्न फिल्म देखना आप के शरीर को कमजोर कर सकता है?

आमतौर पर जब पॉर्न के बारे में बातचीत को चर्चा में लाया जाता है , तो इसे या तो जल्दी से निपटा दिया जाता है या फिर इसके बारे में बात ही नहीं की जाती. ऐसा इसलिए है क्योंकि हमारी सामाजिक कंडीशन ही ऐसी है जहां लोग पॉर्न देखना तो पसंद करतें है लेकिन उसके बारे में  या उससे होने वाले नुकसानों के बारे में बात करना नहीं चाहते. आज इंटरनेट पर इतनी पॉर्न वेबसाइट्स उपलब्ध हैं जिसको आप जितना चाहें उतना पॉर्न देख सकते है.

साउथ एशियन कंट्री में पॉर्न की बात करना यानी एक तरह का पाप करने जैसा है. सबसे ज्यादा भारत और पाकिस्तान में. या सही मायने में कहे कि यह एक तरह की हिपोक्रेसी है . इन दोनों देशों में लोग सबसे ज्यादा पॉर्न देखते है लेकिन बात करते हुए इसे पाप मानते है.

हालांकि भारत सरकार ने अधिकांश पॉर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन उन तक पहुंचना कोई मुश्किल बात नहीं. इस बात को ध्यान में रखे कि सेक्स और पॉर्न दोनो ही बहुत अगल हैं एक दूसरे से जैसे: पॉर्न एग्रेसिव सेक्स को दर्शाता है , और सेक्स फिजिकल प्लेजर है जो कि एक स्वाभाविक बात है .

यदि आप अधिक पॉर्न देखते है तो  क्या आप जानते है पॉर्न देखने के कितने नुकसान हो सकते है? कोई भी चीज यदि ज्यादा हद तक की जाये तो वह हानिकारक ही होती है. पॉर्न की लत भी उसी तरह है जो पीछा आसानी से नहीं छोड़ती है . पर आप यह जानने के बाद अपने आप पीछे हट जाएंगे कि पॉर्न से कैसे होता है नुकसान.

अत्यधिक पॉर्न पहुंच सकता है नुकसान :

* रियलिटी से दूर होना :

इंटरनेट पॉर्न की कहानियां घटिया स्टोरी लाइन पर निर्धारित है जो एक पिज्जा डिलीवरी बॉय से ले कर एस्ट्रोनॉट तक ही सीमित है . जैसे ही पॉर्न अनिवार्य रूप से रिग्रेसिव सोसायटी में सेक्स एजुकेशन का एक मात्र स्त्रोत बन जाता है , दर्शक अनियंत्रित रूप से इन हाफ– बेक्ड  स्टोरीलाइन को वास्तविक जीवन का एक हिस्सा समझ लेते है. जिससे लोगों में  कंसेंट  की  गलत समझ  पैदा होती है, और समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता है.

* आत्मसम्मान में कमी ना :

अक्सर पॉर्न वीडियो में जो लोग होते है वे कई वर्षो से इस काम को कर रहे होते है , वे अनुभवी हैं और जानते हैं की कैमरे के सामने खुद को कैसे संभालना है. एक युवा दर्शक जो ऐसे पॉर्न नियमित रूप से देखता है , वह खुद की परफॉर्मेंस और फिजिक को उनसे तुलना  करके धीरे धीरे खुद से ही नाराज हो जाते है जो उन्हे अंततः आत्मसम्मान की कमी की ओर ले जाता है.

* सेक्स के दौरान मजा ना :

इंटरनेट पॉर्न के कंटेंट को एक प्रोफेशनल टीम इस तरह दर्शती है जो लोगो को एक अलग तरह का प्लेजर देता है . उसे इस कदर प्रदर्शित करते है जो दर्शकों प्रसन्न करता है. एक मेकअप आर्टिस्ट से लेकर साउंड एडिटर तक पूरी टीम उस वीडियो को इतनी ग्लॉसी बनाती है की दर्शक सोचते है की यही हकीकत है . जबकि वास्तविकता कुछ और ही होती है . इससे आप स्वयं , अपने पार्टनर , और अपने फिजिकल इंटिमेसी से निराश हो जाते हैं.

* रिश्ते टूटने का डर :

एक रेगुलर पॉर्न दर्शक के लिए  पॉर्न वीडियो के कुछ कार्य ,  सेक्स का आदर्श बन जाते है जबकि उनके पार्टनर के सेक्स के प्रति कुछ  अलग विचार रहते है. इससे रिश्ता में दरार पड़ जाती है और शारीरिक परेशानी भी पैदा होती है .

* आदत बन जाना :

एक स्टडी के अनुसार पॉर्न की लत और ड्रग की लत को एक समान माना गया है क्योंकि दोनों एक समान तरीके से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाते हैं. इंटरनेट पर पॉर्न की आदत लगने की संभावना सबसे ज्यादा पाई गई  है.

इंटरनेट वेबसाइट इस तरह पॉर्न को दर्शाते है की यह दर्शकों की आदत ही बन जाती है. लोग ऐसे विडियोज को पसंद करते हैं और खुद को इन सब में इन्वॉल्व कर लेते हैं . चिंता की बात यह है की पॉर्न लोगों पे इस तरह हावी हो जाता है की लोग खुद की इच्छाओं को भूल जाते  हैं, अपने विचारों को बदल देते हैं, जो उन्हे खुद भी कभी महसूस नहीं होता.

कम खर्च में बढ़िया स्टाइल

अमूमन लोगों की यह सोच रहती है कि फैशन और स्टाइल का मतलब होता है महंगे कपड़े, पर अगर थोड़ा सा दिमाग लगा कर खरीदारी की जाए तो सस्ते कपड़ों से भी स्टाइल बरकरार रखा जा सकता है.

छोटे शहरों और गांवदेहात के लड़के इस तरीके से अपनी पसंद के कपड़े खरीद सकते हैं और हफ्ते के तकरीबन सातों दिन अपनी अलग ड्रैस बना सकते हैं.

कमीज या टीशर्ट और जींस

इसे सब से कूल ड्रैस कहा जा सकता है और यह जोड़ा पड़ता भी काफी सस्ता है. वैसे भी आजकल कपड़ों के कारोबार में इतना ज्यादा कंपीटिशन है कि थोड़े से मुनाफे पर ऐसे कपड़े बाजार में खूब बिकते हैं जो बहुत सस्ते होते हैं और दुकानदार ताल ठोंक कर कह भी देते हैं कि फैशन के इस दौर में गारंटी की उम्मीद मत रखना.

जींस तो होती भी इतनी रफटफ है कि 3-4 दिन भी पहन लो कोई फर्क नहीं पड़ता. 2 जोड़ी जींस और कमीज या टीशर्ट पर ज्यादा पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ता है. 300 रुपए से मिलनी शुरू हो जाती है. ऐसा ही हाल कुछ कमीज या टीशर्ट का भी होता है. 500-600 रुपए में आप के एक जोड़ी कपड़े तैयार.

अमूमन लोग गाढ़े नीले रंग की जींस पर सफेद टीशर्ट या कमीज पहनते हैं, जो हर कलेगोरे रंग के इनसान पर फबती है. जींस बहुत तरह के रंग और स्टाइल की मिलती हैं. ऐसे ही टीशर्ट और कमीज के रंग का भी खयाल रखा जाता है.

कुरता भी कमाल का

कुरता भी महंगा नहीं पड़ता है. यह पाजामे और जींस या पैंट पर भी खूब फबता है. बाजार में सूती,  रेशमी और तमाम तरह के दूसरे कपड़ों के कुरते मिल जाते हैं. इन की कीमत भी बहुत ज्यादा नहीं होती है. आजकल तो रंगबिरंगे शौर्ट कुरते भी चलन में हैं, जो जेब के हिसाब से मुफीद होते हैं.

अब चूंकि सर्दियां शुरू होने वाली हैं तो रेडीमेड गरम कपड़ों के बाजार सजने का समय आने वाला है. चूंकि अब दिल्ली जैसे बड़े शहरों में सर्दी ज्यादा दिन नहीं टिकती हैं, इसलिए ज्यादा महंगे गरम कपड़ों पर पैसा खर्च करना जरूरी नहीं है.

साप्ताहिक बाजारों में रंगबिरंगे सस्ते स्वैटर मिल जाते हैं जो महंगे माल से बहुत कम दाम पर मिल जाते हैं. अच्छे हाफ स्वैटर तो 300 रुपए तक में मिल जाते हैं. अगर कहीं सेल लगी हो तो बड़े ब्रांड के कपड़े भी कम दाम पर मिलने का चांस रहता है.

जब भी कभी कपड़ों की खरीदारी करने जाएं तो डिस्काउंट की बात जरूर करें. कपड़े की अच्छी तरह जांचपरख कर लें. रंग छोड़ने वाले कपड़े खरीदने से बचें.

40 की उम्र और फैशन, पसंदीदा कपडे़ बेधड़क खरीदें

कहते हैं कि फिल्मी सितारे खासकर मर्द 40 के पार सब से ज्यादा हैंडसम होते हैं. आज अमिताभ बच्चन 78 साल के हैं. अगर इस में से 38 साल घटा दें तो साल 1982 में वे 40 साल के थे. यह वह दौर था जब उन की ‘दोस्ताना’, ‘शान’, ‘कालिया’, ‘शक्ति’, ‘सिलसिला’ जैसी कई दूसरी फिल्मों ने धूम मचाई थी. उस समय अमिताभ बच्चन बहुत ज्यादा हैंडसम दिखते थे. उन पर हर तरह के कपड़े फबते थे.

पर आम जिंदगी में इस उम्र के मर्द खुद को अधेड़ हुआ मान लेते हैं. अपने फैशन से ज्यादा वे बच्चों के कपड़ों की खरीदारी पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जबकि यह उन के मन की सोच होती है. अगर वे अपने फैशन और कपड़ों पर ध्यान दें तो किसी तरह से अमिताभ बच्चन से कम नहीं लगेंगे, बशर्ते वे कुछ बातों का ध्यान रखें, जैसे :

अपने शरीर के हिसाब से कपड़े चुनें. अगर आप रोजाना कसरत करते हैं और शरीर से चुस्तदुरुस्त हैं तो कोई भी ड्रैस आप पर जंचेगी. पर अगर आप कसरत नहीं कर पाते हैं तो अपने शरीर की बनावट को ध्यान में रख कर ही कपड़े खरीदें. कपड़े ऐसे हों जो आप के रंगरूप के मुताबिक जंचें.

बाजार से सिलेसिलाए कपड़े हर किसी को फिट नहीं आते हैं. उन में कद और कमर के हिसाब से कटाईछंटाई करानी पड़ती है. इस से बेहतर रहेगा कि इस उम्र वाले मर्द दर्जी से अपने सही नाप के कपड़े सिलवाएं. अब चूंकि सिलाई थोड़ी महंगी पड़ती है, लोग कपड़े सिलवाने से बचते हैं, पर यह पक्का है कि सही माप के कपड़े आप के अंदाज को चार चांद लगा देते हैं.

भड़कीले कपड़े पहनने से बचें. उम्र बढ़ना एक क्रिया है जिसे स्वीकार कर लेना ही समझदारी है. लेकिन सादा ड्रैस का मतलब यह भी नहीं है कि कुरतापाजामा पहन लिया. आप जींस, पैंट जैसी चीजें भी पहन सकते हैं, पर जल्दी बदलने वाले फैशन के कपड़े न खरीदें.

ड्रैस को खास बनाते हैं आप के जूते या सैंडल. जींस के साथ किसी भी तरह के जूते या सैंडल चल सकते हैं, पर अगर आप पैंट पहन रहे हैं तो जूते भी उसी के मुताबिक चुनें. साथ ही अपनी बैल्ट को अपने जूतों से मैच कराना न भूलें. अगर आप ब्लैक बैल्ट पहन रहे हैं, तो साथ में काले रंग के जूते ही पहनने चाहिए. भूरे रंग के जूते के साथ भूरे रंग की बैल्ट ही पहनें. ज्यादा सर्द मौसम न हो तो मैचिंग के सैंडल भी पहने जा सकते हैं.

बढ़ती उम्र का यह मतलब नहीं है कि आप अपने कपड़ों की खरीदारी करना ही बंद कर दें. अब शहर और कसबों में फैशन का एक सा होना आप की खरीदारी को आसान कर देता है. दुकान में जाएं और अपनी मनपसंद ड्रैस को पैक कराएं.

दोस्त कौन अच्छे कौन सच्चे

सही कहा है अच्छा दोस्त वह नहीं होता जो मुसीबत के समय उपदेश देने लगे वरन अच्छा दोस्त वह होता है, जो अपने दोस्त के दर्द को खुद महसूस करे और बड़े हलके तरीके से दोस्त के गम को कम करने का प्रयास करे. यह एहसास दिलाए जैसे यह गम तो कुछ है ही नहीं. लोग तो इस से ज्यादा गम हंसतेहंसते सह लेते हैं.

वैसे भी सही रास्ता दिखाने के लिए किताबें हैं, उपदेश देने के लिए घर के बड़े लोग हैं और उलाहने दे कर दर्द बढ़ाने के लिए नातेरिश्तेदार हैं. ये सब आप को आप की गलतियां बताएंगे, उपदेश देंगे पर जो दोस्त होता है वह गलतियां नहीं बताता, बल्कि जो गलती हुई है उसे कुछ समय को भुला कर दिमाग शांत करने का रास्ता बताता है. आप के सारे तनाव को बड़ी सहजता से दूर करता है.

तभी तो कहा जाता है कि पुराना दोस्त वह नहीं होता जिस से आप तमीज से बात करते हैं वरन पुराना दोस्त तो वह होता है, जिस के साथ आप बदतमीज हो सकें. दोस्ती का यही उसूल होता है कि अपने दोस्त के गमों को आधा कर दे और खुशियों को दोगुना. केवल पुराने दोस्त ही ऐसे होते हैं, जो हमें और हमारे एहसासों को गहराई से सम झने और महसूस करने में सक्षम होते हैं.

सच है कि दोस्ती का रिश्ता बहुत ही प्यारा और खूबसूरत होता है. सच्चे दोस्त आप को भीड़ में अकेला नहीं छोड़ते, बल्कि आप की दुनिया बन जाते हैं. वे हमेशा आप के साथ होते हैं भले ही परिस्थितियां आप को दूर कर दें. वे आप से जुड़े रहने का कोई न कोई तरीका खोज निकालते हैं. वे आप का हौसला बनते हैं. एक समय आ सकता है जब आप के घर वाले आप को छोड़ दें, एक समय वह भी आ सकता है जब आप का बौयफ्रैंड/गर्लफ्रैंड या आप का जीवनसाथी भी आप की सोच को गलत ठहराने लगे, आप से दूरी बढ़ा ले? पर आप के सच्चे दोस्त ऐसा कभी नहीं करते. अगर दोस्तों को आप अपने मन की उल झन बताते हैं तो वे उन्हें सम झते हैं क्योंकि वे आप को गहराई से सम झते हैं, वे आप के अंदर  झांक सकते हैं.

किसी ने कितने पते की बात कही है: बैठ के जिन के साथ हम अपना दर्द भूल जाते हैं, ऐसे दोस्त सिर्फ खुश नसीबों को ही मिल पाते हैं…

आज वयस्कों को दोस्तों की और ज्यादा जरूरत है, क्योंकि रिश्तेदार तो कई शहरों में बिखरे रहते हैं. मौके पर वे कभी चाह कर भी काम नहीं आ पाते तो कभी मदद करने की उन की मंशा ही नहीं होती. वे बहाने बनाने में देर नहीं लगाते. मगर सच्चे दोस्त किसी भी तरह आप की मदद करने पहुंच ही जाते हैं. इसीलिए तो कहा जाता है कि दोस्ती का धन अमूल्य होता है. यही नहीं बातचीत करने और दिल का हाल बता कर मन हलका करने के लिए भी एक साथी यानी दोस्त की जरूरत सब को होती है.

क्यों जरूरी हैं दोस्त

दोस्त कुछ नया सीखने का अवसर देते हैं. नई भाषा, नई सोच, नई कला और नई सम झ ले कर आते हैं. हमें कुछ नया करने और सीखने का मौका और हौसला देते हैं. हमारे डर को भगाते हैं और सोच का दायरा बढ़ाते हैं. मान लीजिए आप का दोस्त एक कलाकार या लेखक है तो उस के साथसाथ आप भी अपनी कला निखारने का प्रयास कर सकते हैं. कुछ आप उसे सिखाएंगे तो कुछ उस से सीखेंगे भी. दोस्त आप को कठिनाइयों का सामना करने में मदद करते हैं, सही सलाह देते हैं, आप की भावनाओं को सम झते हैं, अवसाद से बचाते हैं. दोस्तों के साथ आप घरपरिवार के साथसाथ कार्यालय की समस्याओं पर भी चर्चा कर सकते हैं.

दोस्त कहां और कैसे खोजें

आप उन स्थानों पर दोस्तों की तलाश करें जहां आप की रुचियां आप को ले जाती हैं. मसलन, प्रदर्शनी, फिटनैस क्लब, संग्रहालय, क्लब, साहित्यिक मंच या फिर कला से जुड़ी दूसरी संस्थाएं. आप डांस अकादमी या स्विमिंग सेंटर भी जा सकते हैं और वहां अच्छे दोस्त पा सकते हैं. ऐसी जगहों पर आप को अपने जैसी सोच वाले लोग मिलेंगे. आप सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लौग्स पर भी अपनी अभिरुचि से जुड़े दोस्तों की तलाश कर सकते हैं.

पड़ोसी हो सकते हैं अच्छे दोस्त

अकसर हम अपनी सोसाइटी या अपार्टमैंट के लोगों को भी नहीं पहचानते. आसपास रहने वाले लोगों के साथ भी हैलोहाय से ज्यादा संबंध नहीं रखेते. कभी गौर करें कि आप अपने पास रहने वाले लोगों के साथ कितनी बार संवाद करते हैं? क्या त्योहारों के मौकों पर उन्हें तोहफे देने, खुशियां बांटने या कुशलमंगल जानने जाते हैं? सच तो यह है कि हम उन्हें इग्नोर करते हैं पर वास्तव में एक पड़ोसी अच्छा दोस्त बन सकता है और आप इस दोस्त से रोजना मिल सकते हैं, साथ घूमने जा सकते हैं, बातें कर सकते हैं, कठिन समय में ये तुरंत आप की मदद को हाजिर हो सकते हैं.

औफिस में ढूंढें दोस्त

औफिस में हम अपनी जिंदगी का सब से लंबा वक्त बिताते हैं. यहां आप को समान सामाजिकमानसिक स्तर के लोगों की कमी नहीं होगी. बहुत से औप्शंस मिलेंगे. कई बार हम औफिस के लोगों से केवल काम से जुड़ी बातें ही करते हैं और औपचारिक रिश्ता ही रखते हैं पर जरा इस से आगे बढ़ कर देखें. कुछ ऐसे दोस्त ढूंढें जिन के साथ काम के सिलसिले में आप की प्रतिस्पर्धा नहीं या फिर जो आप के साथ चलना जानते हैं. ऐसे दोस्त न केवल आप के मनोबल को बढ़ाएंगे, बल्कि दिनभर के काम के बीच आप को थोड़ा रिलैक्स होने का मौका भी देंगे. यदि आप अपने औफिस के दोस्तों के प्रति ईमानदार रहते हैं और उन के सुखदुख में काम आते हैं, तो यकीन मानिए वे भी हमेशा आप का साथ देंगे.

इंटरनैट

इंटरनैट के माध्यम से आप अच्छे दोस्त ढूंढ़ सकते हैं. यह आप पर निर्भर करता है कि आप उन के साथ सालों की घनिष्ठ मित्रता के बंधन में बंधे रहना चाहते हैं या सिर्फ चैट कर मजे करना चाहते हैं खासकर विपरीतलिंगी व्यक्ति के साथ अकसर दोस्ती आकर्षणवश हो जाती है. लोग जिंदगी का मजा लेना चाहते हैं, पर इस सोच से अलग दोस्ती में घनिष्ठता और ईमानदारी रखना आप की जिम्मेदारी है.

अब सवाल उठता है कि औनलाइन दोस्त कैसे ढूंढें़? आज के समय में आप के पास इंटरनैट पर बहुत से औप्शंस हैं. आप स्काइप, फेसबुक, ट्विटर, डेटिंग साइट््स आदि पर दोस्त खोज सकते हैं. इस के लिए सोशल नैटवर्क पर अपने पेज को ठीक से डिजाइन करने की आवश्यकता है. इस के अलावा आप अपने कुछ विचार या मैसेज भी पोस्ट कर सकते हैं. सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर अपनी बात रख सकते हैं. दूसरों के पोस्ट पर अपने कमैंट्स दे कर समान सोच वाले लोगों से संपर्क बढ़ा सकते हैं.

पुराने दोस्त हैं कीमती

यदि आप बचपन में कुछ ऐसे दोस्त बनाने में कामयाब रहे जो अब भी आप के साथ हैं तो इस से अच्छा आप के लिए और कुछ नहीं हो सकता. यदि आप के अपने पूर्व सहपाठियों के साथ संबंध नहीं हैं तो उन्हें खोजने का प्रयास करें. आज सोशल नैटवर्क का उपयोग कर यह काम बड़ी आसानी से किया जा सकता है. कौन जानता है शायद आप भी आपसी विश्वास और स्नेह पर बने अपने पिछले दोस्ती के रिश्तों को पुनर्जीवित करने में सक्षम हो जाएं.

सब से विश्वसनीय दोस्त बचपन के दोस्त ही होते हैं. इन के साथ आप बिना किसी हिचकिचाहट अपने दुखदर्द, अपनी तकलीफें और सीक्रेट शेयर कर सकते हैं. लंगोटिया यार साधारणतया कभी धोखा नहीं देते, क्योंकि वे आप को सम झते हैं. वे परिस्थितियों को देख कर नहीं, बल्कि आप के दिल की सुन कर सलाह देते हैं.

दोस्त बनाने के लिए क्या है जरूरी

आप को अजनबियों के साथ भी एक आम भाषा में अपनी भावनाएं व्यक्त करना और दूसरों का ध्यान आकर्षित करना आना चाहिए. कुछ लोग जन्म से ही इस कला में निपुण होते हैं. सब से जरूरी है कि दूसरों में रुचि लीजिए. दूसरों के हक के लिए आवाज उठाएं. अपनी भावनाएं शेयर कीजिए तभी सामने वाला आप के आगे खुलेगा और आप को दोस्त बनाने के लिए उत्सुक होगा.

सलीकेदार कपड़े पहनें

अपने कपड़ों के प्रति सतर्क रहें. कपड़े ऐसे हों जो आप के आकर्षण को बढ़ाएं और व्यक्तित्व को उभारें. कपड़ों के साथ ही अपने अंदर से आ रही गंध के प्रति भी सचेत रहें. मुंह से बदबू या कपड़ों से पसीने की गंध न आ रही हो. हलकी खुशबू का इस्तेमाल करें. बालों को सही से संवारें. इंसान दोस्त उसे ही बनाना चाहता है जो साफसुथरा और सलीकेदार हो.

जानबूझ कर शेखी न बघारें

अकसर लोग शेखी बघारने के क्रम में  झूठ का ऐसा जाल बुनते हैं कि फिर खुद ही उस में उल झ कर रह जाते हैं. इसी तरह दूसरों की नजरों में आने के लिए कुछ ऐसा न बोल जाएं जो मूर्खतापूर्ण लगे.

 झगड़ा जल्दी सुल झाएं

दोस्त के साथ आप का  झगड़ा हो गया है तो यह जानने की कोशिश में न उल झें कि आप में से कौन सही है और कौन दोषी है, बल्कि सुलह करने वाले पहले व्यक्ति बनें. दोस्ती को खत्म करना बहुत सरल है पर इसे बनाए रखना बहुत कठिन. लंबे और विश्वसनीय रिश्ते के लिए एक मजबूत नींव बनाना कठिन काम है, पर वह नींव आप को ही तैयार करनी है.

याद रखिए 2 लोग जिन के शौक और दृष्टिकोण विपरीत हैं कभी दोस्त नहीं बन सकते. इसलिए समान हित और सोच वालों को अपना दोस्त बनाएं और जीवन के एकाकीपन को दूर करें.

गहरी दोस्ती के राज

अपने दोस्त के लिए हमेशा खड़े रहें. यदि धन से उस की मदद नहीं कर सकते तो कोई बात नहीं, मन से उस का साथ दें. उस को मानसिक सपोर्ट दें. उस की परेशानियों को बांटें और समस्याओं को सुल झाने का प्रयास करें. जब भी उसे आप की सहायता की जरूरत पड़े तो तुरंत आगे आएं. हमेशा कोशिश करें कि सामने वाले ने आप के लिए जितना किया जरूरत पड़ने पर आप उस से बढ़ कर उस के लिए करें. इस से आप को भी संतुष्टि मिलेगी और उस के दिल में भी आप के लिए सम्मान और प्यार बढ़ेगा. तभी तो आप की दोस्ती ज्यादा गहरी और लंबी चल सकेगी.

पैसे के मामलों में थोड़ी तटस्थता रखें

पैसों के मामले में थोड़े तटस्थ रहें. जब भी आप साथ कहीं घूमने जाते हैं, कोई चीज खरीदते हैं या दोस्त आप के लिए कुछ ले कर आता है तो पैसों का हिसाबकिताब बराबर रखने का प्रयास करें. जब भी आप दोनों मिल कर कुछ खर्च कर रहे हों तो किसी एक पर अधिक भार न पड़ने दें. भले ही छोटेमोटे खर्च ही क्यों न हुए हों, कोशिश करें कि खर्च आधाआधा बांट लें. अगर आप 4-5 दोस्त हैं तो सब मिल कर रुपए खर्च करने की कोशिश करें.

जहां तक बात कुछ बड़ी परेशानियों के समय खर्च करने की आती है जैसे घर में बीमारीहारी हो जाए या आप का दोस्त किसी क्रिमिनल केस में फंस जाए और उसे आप की मदद की जरूरत हो जैसे बेल देनी हो या उस के लिए कोई काबिल वकील तलाश करना हो अथवा मैडिकल ट्रीटमैंट के लिए तुरंत पैसों की जरूरत हो तो इस तरह के मामलों में कभी भी रुपए खर्च करने में आनाकानी न करें. यानी जब बात जान पर आ जाए तो बिना कुछ सोचे दिल खोल कर खर्च करें, क्योंकि यह बात आप का दोस्त जिंदगीभर नहीं भूल सकेगा और समय आने पर आप के लिए वह भी जान की बाजी लगा देगा. इसलिए अपने दोस्त होने की जिम्मेदारी को ऐसे समय जरूर निभाएं.

घबराएं नहीं भरोसेमंद बनें

यदि आप दोनों की जीवनस्तर में काफी असमानताएं हैं यानी कोई अमीर है और दूसरा गरीब तो ऐसी स्थिति में भी आप की दोस्ती पर कोई फर्क न पड़े. दोस्ती के लिए सिर्फ एक भरोसा, एक विश्वास और एक अपनापन ही सब से अहम होता है. यदि आप सामने वाले के लिए भरोसेमंद साबित होते हैं, जरूरत के वक्त उस के साथ खड़े रहते हैं, उस के सीक्रेट्स किसी से शेयर नहीं करते और उसे भरपूर मानसिक सपोर्ट देते हैं तो यकीन मानिए आप दोनों की दोस्ती की नींव बहुत मजबूत और गहरी रहने वाली है. आर्थिक स्तर का कोई असर आप की दोस्ती पर नहीं पड़ेगा.

विवाहितों में दोस्ती

दोस्ती का एक खूबसूरत पहलू यह भी हो सकता है कि आप दोनों पतिपत्नी की दोस्ती किसी ऐसे कपल से हो जो बिलकुल आप के जैसे हों. ऐसी दोस्ती का अलग ही आनंद होता है. इस में ध्यान देने की बात यह है कि आप दोनों समान रूप से उस कपल के साथ जुड़े हों यानी आप की जीवनसाथी भी उस कपल के साथ दोस्ती ऐंजौय कर रही हो और किसी तरह की मिसअंडरस्टैंडिंग क्रिएट न हो रही हो. इस तरह 2 कपल्स की दोस्ती 2 परिवारों की दोस्ती जैसी हो जाती है. आप चारों मिल कर एक खूबसूरत परिवार जैसा रिश्ता बना लेते हैं. आप चारों मिलबैठ कर बातें करें. ऐसी दोस्ती महानगरों में बहुत उपयोगी है. इस से अकेलापन तो दूर होगा ही विश्वसनीय रिश्ते भी मिल जाते हैं.

इसी तरह पतिपत्नी आपस में भी एकदूसरे के दोस्त बने रहने चाहिए. जब तक जीवनसाथी को आप दोस्त नहीं मानते तब तक सही अर्थों में आप जीवन के सुखदुख में एकदूसरे का साथ नहीं दे पाएंगे. इसलिए हमेशा एकदूसरे को अपना दोस्त मानें. इस से रिश्ते में गहराई आती है.

रहस्य छिपा कर रखने की आदत डालें

दोस्ती का एक बहुत बड़ा उसूल होता है कि अपने दोस्त के राज कभी न खोलें. उन्हें किसी से शेयर न करें, क्योंकि सामने वाला आप को बहुत विश्वास के साथ अपना मान कर अपने सीक्रेट्स, फीलिंग्स या वीकनैस शेयर करता है. उन बातों को यदि आप किसी से कह देंगे तो फिर दोस्ती टूटने में एक पल का समय नहीं लगेगा. इसलिए सामने वाले को यह भरोसा दिलाएं कि आप किसी भी परिस्थिति में उस के राज किसी से नहीं कहेंगे. ऐसी दोस्ती में ही व्यक्ति दोस्त को अपना सबकुछ बता सकता है और अपना मन हलका कर सकता है.

स्टील के बर्तन में पकाएं जाने वाला खाना हो सकता है नुकसानदायक

इस बात से तो आप सभी वाकिफ होंगे कि पुराने जमाने में भोजन पकाने के लिए मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल किए जाते थे. लेकिन धीरे-धीरे ये बर्तन क्ले पॉट की जगह मेटल में बदल गए. आज के समय में हमारे घरों में स्टील के बर्तन ज्यादा पाएं जाते है लेकिन कई लोगों का मानना है कि इस तरह के बर्तन में पकाया जाने वाला खाना आपकी सेहत के लिए नुकसान दायक होता है. तो आइए आज इस आर्टिकल में हम यही जानेंगे कि स्टील में पकाएं जाने वाला आपको कितना नुकसान दे सकता है.

स्टील के बर्तन में खाना पकाने के नुकसान

स्टील के बर्तन में खाना पकाने से इसके अंश खाने में मिल सकते हैं. इनका बेस काफी पलता होता है, इसलिए जिस भोजन को हल्की आंच में देर तक पकाने की जरूरत पड़ती है, उसे इससे दूर रखना चाहिए, वरना खाना खराब हो सकता है, या जल सकता है.

अगर स्टील के बर्तन को उसके स्मोक पॉइंट से ज्यादा हीट तक ले जाए तो इनमें मौजूद ट्राइग्लिसराइड्स टूटने लगते हैं और वो फ्री फैटी एसिड बन जाता है. ये न ही पानी में घुल पाते हैं और न ही हमारा पेट इनका पाचन सही तरीके से कर पाता है.

इन चीजों को स्टील के बर्तन में न पकाएं

स्टील के बर्तन में ऐसी चीजें पकाने की सलाह नहीं दी जाती जो पानी और नमक घोलकर तैयार किया जाता है. आमतौर पर हम नूडल्स, पास्ता, मैक्रोनी को स्टील के पैन में बनाते हैं. इससे नमक और तेल बर्तन के बेस में जम जाते हैं और इससे खारे पानी का निशान बन जाता है और रिएक्ट कर सकता है.

स्टील के बर्तन को ओवन में न डालें

कई बार हम आसल की वजह से स्टील के बर्तन ओवन में डाल देते हैं, जो नुकसानदेह और रिस्की भी है. चूंकि कोई भी मेटल इलेक्ट्रिसिटी का कंडक्टर होता है, इसलिए इसमें आग लगने का डर रहता है. ऐसा करना आपकी सुरक्षा के लिए खतरा है.

पुरुषों के चेहरे की चमक के लिए सिर्फ फेसवॉश ही काफी नहीं, अपनाएं ये टिप्स

पुरुषों की स्किन महिलाओं की तुलना में ज्यादा सख्त होती है. साथ ही घनी दाढ़ी और मूंछ होने की वजह से पसीना इनकी स्किन में ज्यादा ठहरता है और फिर एक्ने और दाग-धब्बों का कारण बनता है.  इसके अलावा चेहरे पर गंदगी का ज्यादा देर तक जमा होना स्किन का ग्लो छीन लेता है और आपकी स्किन डल नजर आ सकती है. ऐसे में पुरुष अपनी स्किन केयर रूटीन में इन चीजों को शामिल कर सकते हैं जो कि उन्हें ग्लोइंग स्किन पाने में मदद कर सकता है.

1. दिन में दो बार स्किन क्लीनजिंग करें

पुरुष स्किन क्लीनजिंग पर सबसे कम ध्यान देते हैं. जबकि ये सबसे ज्यादा जरूरी है। तो, हर पुरुष को दिन में दो बार स्किन क्लीनजिंग करनी चाहिए. इसके लिए आप चारकोल , मुल्तानी मिट्टी या फिर मिंट जैसे एक्टिव इंग्रीडिएंट वाले क्लींनजर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

2. शेविंग के बाद मॉइस्चराइजर लगाएं

शेविंग के बाद स्किन को मॉइस्चराइज करना बेहद जरूरी है. ऐसा इसलिए कि शेविंग की वजह से स्किन रूखी हो जाती है और रेजन बर्न और बम्स नजर आने लगते हैं. ऐसे में एलोवेरा बेस्ड मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल आपकी स्किन में ड्राइनेस को कम करके, स्किन को हाइड्रेटेड रखने में मदद कर सकते हैं.

3. घर से निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाएं

घर से निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना आपकी स्किन को कई समस्याओं से बचा सकता है. ये धूप की वजह से त्वचा को तमाम नुकसानों से बचा सकता है जैसे सनबर्न का कारण बन सकता है. इसके अलावा ये स्किन में पिग्मेंटेशन को कम करने में मदद कर सकता है.

4. एक्सरसाइज के बाद फेस वॉश करें

एक्सरसाइज के बाद फेस वॉश करना आपकी स्किन में पसीने को जमा होने से रोक सकता है. दरअसल, पसीने का बढ़ना पिंपल्स बढ़ा सकता है जिससे एक्ने की समस्या भी बढ़ सकती है. ऐसे में एक्सरसाइज के बाद फेस वॉश जरूर करें.

5. रात में सोने से पहले अपना चेहरा जरूर साफ करें

रात में सोने से पहले अपना चेहरा जरूर साफ करें. ये आदत में डालना बेहद जरूरी है नहीं तो आपको स्किन से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं. तो, रात में जब सोने जाएं तो चेहरा क्लीन कर लें.

संतरा खाने से भी हो सकती है कई बीमारियां, जानिए इसके नुकसान

संतरा का स्वाद भला किसी अपनी तरफ आकर्षित नहीं करता, इसमें एस्कॉर्बिक एसिड यानी विटामिन सी की भरपूर होता है, जिसके जरिए इम्यूनिटी बूस्ट की जा सकती है. जिसके बाद वायरल इंफेक्शन का खतरा कम हो जाता है. ऐसे में सर्दी, खांसी, जुकाम और फ्लू जैसी बीमारियां ज्यादा परेशान नहीं करतीं. भले ही संतरे में फायदों की भरमार है, लेकिन कई मामलों में इसके नुकसान भी सामने आ सकते हैं.

1. एलर्जी

संतरा खाने एक गंभीर खतरा हो सकता है, वो है एलर्जी. ये खतरनाक स्थिति उन लोगों को प्रभावित कर सकती है जिन्होंने संतरे को कभी भी पहले नहीं खाया है. संतरे के कारण स्किन में जलन और खुजली हो सकती है, इसके साथ कुछ लोगों की त्वचा लाल हो जाती है.इसके अलावा, संतरे के सेवन से इंसान को गले में सूजन, फेफड़ों में समस्या, और आंखों में एलर्जी की शिकायत हो सकती है.

2. फोटोटॉक्सिसिटी

संतरे के बीजों में खास तौर से लिमोनिन पाया जाता है. ये एक उच्च प्रकार की फाइटोकेमिकल होते है जिसे सीमित मात्रा में खआना चाहिए. इसमें त्वचा में सूजन होने लगती है और सूरज की किरणों का असर स्किन पर होने लगता है. संतरे के कारण आप फोटोटॉक्सिसिटी  के शिकार बन सकते हैं.

3. साइट्रस सेंसिटिविटी

कई लोग खट्टे फल और सब्जियों के प्रति संवेदनशीद होते हैं, इस परेशानी को साइट्रस सेंसिटिविटी कहा जाता है, इससे बचने के लिए लिए आपको संतरे और नींबू का सेवन बेहद कम कर देना चाहिए वरना होंठ, जुबान और गले में चुभन या खुजली पैदा हो सकती है.

बालों को संवारें और संभालें

गांवदेहात में पहले नौजवानों का अमूमन एक तरह का ही हेयर स्टाइल होता था, फौजी की तरह बिलकुल छोटे बाल रखना. इस से उन्हें रोजमर्रा के काम करते हुए दिक्कत नहीं होती थी और चूंकि उन की बौडी भी सौलिड होती थी तो वे बाल उन पर जंचते भी थे.

पर अब माहौल बदल गया है. गांवदेहात के बच्चे पढ़लिख कर शहरों में नौकरी करने लगे हैं और जब से मोबाइल फोन का दौर आया है तब से उन्हें भी बालों के नए से नए फैशन की जानकारी होने लगी है और वे बालों को ले कर सजग भी रहने लगे हैं.

शादीब्याह के मौके पर तो वे बाकायदा सैलून में जा कर नए स्टाइल की कटिंग कराते हैं और जम कर पैसे भी खर्च करते हैं. इस के अलावा भी वे नहाते समय अच्छी क्वालिटी का साबुन या शैंपू इस्तेमाल करते हैं.

बालों को चमकीला, घना और महफूज बनाए रखने के लिए उन पर ध्यान देना पड़ता है. इस के लिए नियमित रूप से शैंपू के साथ कंडीशनर भी लगाएं. इस के अलावा बालों में नियमित रूप से तेल लगाने से भी वे मजबूत बनते हैं. तेल से सिर की खाल मालिश करने से बाल की जड़ें मजबूत होती हैं और खून का दौरा भी बढ़ता है, जो बालों की सेहत के लिए काफी अच्छा होता है.

छोटे बालों की देखभाल करना आसान होता है, पर किसी लड़के ने लंबे बाल रखे हैं तो उन की देखभाल पर खास ध्यान देना होता है. अगर उन की रोजाना साफसफाई न की जाए तो वे रूखे हो जाते हैं, गंदगी बढ़ जाती है, कभीकभार तो उन बालों में जूं भी हो जाती हैं.

इस से बालों की खूबसूरती बढ़ने के बजाय कम हो जाती है और लोग आप को देख कर नाकभौं सिकोड़ने लगते हैं, इसलिए बड़े बाल हमेशा साफ रहें और उन्हें करीने से रखा जाए.

लंबे बालों को रखते समय अपनी कदकाठी और चेहरे की शेप का भी ध्यान रखें. फैशन के चलते उन्हें चलताऊ रंग से न रंगें, इस से आप समय से पहले उन से हाथ धो बैठेंगे. उन पर अच्छी क्वालिटी का रंग लगाएं, फिर भले ही थोड़ा महंगा ही क्यों न हो. सस्ता और घटिया क्वालिटी का रंग बालों के साथसाथ सिर की चमड़ी को भी नुकसान पहुंचा सकता है.

इस के अलावा सौफ्ट कंघा ही बालों में इस्तेमाल करें. बालों को तौलिए से ज्यादा जोर से न रगड़ें. बालों को धूलमिट्टी से बचाएं. फैशन के चक्कर में बालों के साथ ज्यादा जोरआजमाइश न करें.

क्या आप जानते है इस 5 रुपए के पान के पत्ते के अनेकों फायदे

खाने के बाद कई लोगों का मन करता है कि वह कुछ मीठा खाएं तो भारत में ज्यादातर लोग पान, मीठा पान, सादा पान और मसालेदार पान खाना पसंद करते है लेकिन, हम इस एक पत्ते को चबाने की एक नियमित आदत डाल ले तो यह हमारे लिए फायदेमंद होगा. पान के हरे पत्ते में अनेकों गुण छिपे होते हैं. हमें बस इसे किसी चूने, कत्थे या स्वाद के बिना खाने की आदत डालनी होगी. पान में मौजूद तत्व पाचन तंत्र, दिल के स्वास्थ्य और तनाव से राहत देने में मदद करते हैं.  अगर आप पान के शौकीन हैं तो जानिए इसके फायदें.

1. पाचन में सुधार

पान में मौजूद गुण पाचन शक्ति को बढ़ाते हैं और कब्ज दूर करने में मदद करते हैं. नियमित रूप से पान चबाने से पाचन संबंधी समस्याएं दूर हो सकती हैं.

2. दांतों के लिए फायदेमंद

पान खाने से दांतों और मसूड़ों को लाभ पहुंचता है और मुंह की बदबू दूर होती है. यह दांतों को मजबूत बनाता है और दांतों की सफाई में मदद करता है.

3. तनाव कम करता है

पान में मौजूद इंग्रेडिएंट्स तनाव कम करने में मदद करते हैं. पान चबाने से मानसिक शांति मिलती है.पान में मौजूद एरोमाथेरेपी गुण सकारात्मक भावनाएं पैदा करता है जो तनाव को कम करता है.

4. दिल के लिए फायदेमंद

पान खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और हृदय रोगों का खतरा कम होता है. यह हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है.

5. वजन घटाने में मदद

पान में कैलोरी कम और पानी ज्यादा होता है जिससे वजन नियंत्रण में मदद मिलती है. पान चबाने से भूख कम लगती है जिससे वजन कम होने में सहायता मिलती है. पान में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल चयापचय को बढ़ावा देते हैं जिससे वजन कम होता है.

 

कैंसर के खिलाफ रक्षा

कुछ अध्ययनों के अनुसार, पान के पत्तों में मौजूद एंटीकैंसर प्रॉपर्टीज भी हो सकती हैं, जो कैंसर के खिलाफ रक्षा कर सकती हैं. पान में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स फ्री रेडिकल्स को रोकते हैं जो कैंसर का कारण बनते हैं. पान में मौजूद पॉलीफेनॉल और फ्लेवोनॉयड्स ट्यूमर के विकास को रोकते हैं

High BP में क्या है फायदेमंद, Coffee या green tea, जानें यहां

कॉफी और ग्रीन टी का सेवन हर उम्र के लोग करते हैं. इन दोनों में से अक्सर ग्रीन टी को ज्यादा हेल्दी माना जाता है, वजन घटाने की ख्वाहिश रखने वाले लोग अक्सर इस चाय का सेवन करना पसंद करते हैं. आपने सुना होगा कि हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए कैफीन का सेवन अच्छा नहीं होता, क्योंकि इससे बीपी और ज्यादा बढ़ जाता है. अब कॉफी और ग्रीन टी दोनों में ही ये कंपाउंड पाया जाता है, तो क्या बीपी के मरीजों के लिए दोनों ही बुरे हैं?

कॉफी बेहतर है या ग्रीन टी?

रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में ये पाया कि जिन लोगों ने एक दिन में एक बार कॉफी पी और डेली ग्रीन टी का सेवन किया, उनमें दिल की बीमारियों का खतरा नहीं पाया गया, भले ही वो बीपी के मरीज थे. 19 साल तक चली इस स्टडी के शुरुआती वक्त में 40 से 79 साल की उम्र के 6570 से ज्यादा पुरुषों और 12,000 महिलाओं को शामिल किया गया था, जिन्हें कैंसर के खतरे के इवेलुएशन के लिए जापान कोलैबोरेटिव कोहोर्ट स्टडी से चुना गया था.

कॉफी न पिएं हाई बीपी के पेशेंट

एक कप कॉफी पीने से तकरीबन 80 से 90 मिलीग्राम कैफीन मिलता है, ये हाई ब्लड प्रेशर के कंडीशन में अच्छा नहीं है. बेहतर है कि हाई बीपी के मरीज कॉफी न पिएं क्योंकि लॉन्ग टर्म में इससे दिल की बीमारियों का खतरा पैदा हो जाएगा.

क्या ग्रीन टी पी सकते हैं बीपी के मरीज?

ग्रीन टी में कैफीन जरूर पाया जाता है, लेकिन इसमें इस कंपाउंड की मात्रा काफी कम होती है, जो हार्ट रेट और मेटाबॉलिज्म को खतरनाक लेवल तक नहीं बढ़ाती, फिर भी ग्रीन टी पीने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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