हैपेटाइटिस : खतरनाक बीमारी पर कार्यवाही का वक्त आया

देश में हैपेटाइटिस बीमारी का खतरा लगातार बढ़ रहा है. दुनियाभर में तकरीबन साढ़े 25 करोड़ लोग हैपेटाइटिस बी और तकरीबन 5 करोड़ लोग हैपेटाइटिस सी से पीड़ित हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि हैपेटाइटिस बी और हैपेटाइटिस सी का खतरा लगातार बढ़ रहा है और इस से रोजाना दुनियाभर में तकरीबन 35,000 जानें जा रही हैं.

health इस बीमारी से लोगों को जागरूक करने के लिए 28 जुलाई को पूरी दुनिया में ‘हैपेटाइटिस दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. इस के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अब हैपेटाइटिस के खिलाफ लड़ने का समय आ गया है और इस की थीम भी ‘कार्यवाही का वक्त आया’ रखी गई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस सिलसिले में दक्षिण एशिया के देशों से हैपेटाइटिस बी और हैपेटाइटिस सी की रोकथाम के लिए टीकाकरण, बीमारी की पहचान और इलाज सभी को देने की कोशिशें तुरंत बढ़ाने को कहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, रोकथाम और इलाज लायक होने के बाद भी पुराने संक्रमण तेजी से गंभीर बीमारियों समेत लिवर कैंसर सिरोसिस से म्यूट की वजह बन रहे हैं. मौजूदा समय में लिवर कैंसर दक्षिणपूर्व एशिया में कैंसर से होने वाली म्यूट की चौथी सब से बड़ी वजह है. मर्दों में कैंसर से होने वाली म्यूट की दूसरी सब से आम वजह भी यही है. यह तपेदिक से होने वाली म्यूट के बराबर है.

हमारे देश में वायरल हैपिटाइटिस को रोकने और इस का इलाज करने के लिए तकनीकी ज्ञान और उपकरण भी उपलब्ध हैं. हमें प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तर पर समुदायों को सामान सेवाएं देने की कोशिशों में तेजी लाने की जरूरत है. समय पर जांच और इलाज से हैपेटाइटिस बी को सिरोसिस और कैंसर पैदा करने से रोका जा सकता है.

मरीज को हैपेटाइटिस की समस्या होने पर डायरिया, थकान, भूख न लगना, उलटी होना, पेट में दर्द होना, दिल घबराना, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द रहना, वजन अचानक कम होना, सिर दर्द रहना, चक्कर आना, पेशाब का रंग गहरा होना, मल का रंग पीला हो जाना, त्वचा, आंखों के सफेद भाग का रंग पीला पड़ जाना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.

इन से बचें

-दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल.

-दूषित सिरिंज का इस्तेमाल करना.

-दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा.

-दूषित सूई से टैटू बनवाना या एक्यूपंक्चर करवाना.

-असुरक्षित यौन संबंध बनाना.

ऐसे बचें हैपेटाइटिस से

-अपना टूथब्रश और रेजर किसी के साथ साझा न करें.

-शराब का सेवन करने से बचें.

-अगर टैटू बनवाएं तो एकदम नई सूई का इस्तेमाल करें.

-टौयलैट में जाने के बाद सफाई का ध्यान रखें.

-कभी इंजैक्शन लगवाने की जरूरत पड़े तो दूषित सिरिंज का इस्तेमाल न करें.

सही समय पर इलाज और देखभाल से यह बीमारी ठीक हो जाती है. इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता है और इसी वजह से यह जानलेवा हो जाती है. अब इस की जांच की सुविधा सब जगह है.

हैपेटाइटिस सी जिस को काला पीलिया भी कहते हैं, एक संक्रामक बीमारी है, जो हैपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी की वजह से होती है और यकृत पर बुरा असर डालती है.

इस बीमार में मरीज को तकरीबन 3 महीने तक दवाएं खानी पड़ती हैं, उस के बाद फिर जांच होती है. मरीज के सही होने पर दवाएं बंद कर दी जाती हैं, नहीं तो उन्हें अगले 3 महीने के लिए जारी रखा जाता है.

सहमति से बने संबंधों में आखिर बंदिशें क्यों

व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं में पत्नियों की किसी से प्रेम करने व यौन संबंध बनाने की स्वतंत्रता है या नहीं, यह अच्छी रोचक बहस का मामला है. भारतीय दंड विधान स्पष्ट कहता है कि किसी की पत्नी के साथ संबंध बनाने पर पुरुष को दंड दिया जा सकता है पर पत्नी किसी पर पुरुष से संबंध बनाए तो उसे दंड नहीं दिया जा सकता. ऐसे मामले में पति पत्नी को तलाक अवश्य दे सकता है. नौसेना ने ब्रिगेडियर रैंक के एक अफसर को इसलिए निकाला है क्योंकि उस ने अपने एक सहयोगी की पत्नी के साथ अपनी पत्नी की इच्छा के बिना संबंध बना लिए थे. पतिपत्नी के बीच क्या हुआ यह तो नहीं मालूम पर इस संबंध को अपराध या दुर्व्यवहार की संज्ञा देना गलत होगा. कहा यही जाता है कि विवाह के बाद पतिपत्नी को एकदूसरे के प्रति निष्ठा रखनी चाहिए और किसी तीसरे की ओर नजर नहीं डालनी चाहिए. पर यह सलाह है, कानूनी निर्देश नहीं. अगर दोनों में से कोई इस वादे को तोड़ता है तो उसे विवाह तोड़ने का हक कानून में है और उस का इस्तेमाल किया जा सकता है पर इस के लिए तीनों में से किसी को भी दंडित करना गलत होगा.

विवाह से पतिपत्नी को एकदूसरे पर बहुत से अधिकार मिलते हैं पर ये अधिकार आपसी समझौते और समझदारी के हैं. समाज का काम इन पर पहरेदारी करना नहीं है.

समाज ने इस बारे में सदा एकतरफा व्यवहार किया है. सदियों से औरतों को कुलटा कहकह कर इसलिए बदनाम और घर से बेदखल किया जाता है, क्योंकि उन को पति की संपत्ति का सा हक दे दिया गया है.

भारतीय दंड कानून के अंतर्गत कभी भी पति उस बिग्रेडियर के खिलाफ फौजदारी का मुकदमा कर सकता है और उसे जेल भेजवा सकता है जबकि उस ब्रिगेडियर ने सहमति व प्यार में दूसरे की पत्नी से संबंध बनाए थे.

कुछ लोगों को यह बात भले ही अनैतिकता फैलाने वाली लगे पर सच यह है कि इस कोरी नैतिकता के दंभ के कारण पौराणिक गाथाओं की सीता और अहिल्या ने दुख भोगे और द्रौपदी ने बारबार अपमान सहा. राजा दशरथ की 3 पत्नियों को तो सहज लिया जाता है पर औरतों पर बंदिशें लगाई जाती हैं.

विवाहिता अपने शरीर व दिल के सारे अधिकार पुरुष को सौंप दे और बदले में सिर्फ घर की छत, रोटी, कपड़ा और शायद डांट, मार, तनाव पाए यह गलत है. अगर पति की बेरुखी के कारण पत्नी को कोई और आकर्षित करे तो समाज, कानून और ऐंपलायर को हक नहीं कि वे नैतिकता के ठेकेदार बन जाएं.

पतिपत्नी का प्यार दोनों की आपसी लेनदेन पर निर्भर है. जैसे प्रेम करते हुए युवक को एक लड़की के अलावा कोई और नहीं दिखता, उसी तरह लड़की को भी प्रेमी के अलावा सब तुच्छ लगते हैं. इसी तरह का व्यवहार पतिपत्नी में अपनेआप होना चाहिए. वह थोपा हुआ न हो.

पत्नियां ही अपना मन मारें, किसी के प्रति चाहत पर अपराधभाव महसूस करें, यदि किसी से हंसबोल लें तो मार खाएं जबकि पति पूरी तरह छुट्टा घूमे यह न्याय कैसे है, नैतिक कैसे है?

गलती असल में धर्मों की है जिन्होंने औरतों पर तरहतरह की बंदिशें लगाईं. विडंबना यह है कि औरतें ही सब से ज्यादा अपना मन, धन और यहां तक कि तन भी धर्म के नाम पर निछावर करती हैं. उस धर्म पर जो औरतों के लिए अन्यायी है, अत्याचारी है, अनाचारी है, असहनशील है.

मैंने शादी से पहले सेक्स किया है, क्या मेरे पति को यह बात पता चल जाएगा?

सवाल

मैं 23 साल की हूं और शादी से पहले हमबिस्तरी कर चुकी हूं. मेरे प्रेमी ने मुझे छोड़ कर दूसरी लड़की से शादी कर ली है. मैं भी उसे भूल चुकी हूं. क्या शादी के बाद मेरे पति को मेरे पहले से हमबिस्तरी करने का पता चल जाएगा?

जवाब

आप बेझिझक शादी करें और अपने पति को प्रेमी के साथ बने संबंधों के बारे में भूल कर भी न बताएं. मर्द को प्यार करने वाली, घर संभालने वाली बीवी चाहिए होती है, उस का इतिहास नहीं.

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टूटे कांच की चमक : मैट्रो में लगी नई फिल्म

उस बिल्डिंग में वह हमारा पहला दिन था. थकान की वजह से सब का बुरा हाल था. हम लोग व्यवस्थित होने की कोशिश में थे कि घंटी बजी. दरवाजा खोल कर देखा तो सामने एक महिला खड़ी थीं.

अपना परिचय देते हुए वह बोलीं, ‘‘मेरा नाम नीलिमा है. आप के सामने वाले फ्लैट में रहती हूं्. आप नएनए आए हैं, यदि किसी चीज की जरूरत हो तो बेहिचक कहिएगा.

मैं ने नीचे से ऊपर तक उन्हें देखा. माथे पर लगी गोल बड़ी सी बिंदी, साड़ी का सीधा पल्ला, लंबा कद, भरा बदन उन के संभ्रांत होने का परिचय दे रहा था.

कुछ ही देर बाद उन की बाई आई और चाय की केतली के साथ नाश्ते की ट्रे भी रख गई. सचमुच उस समय मुझे बेहद राहत सी महसूस हुई थी.

‘‘आज रात का डिनर आप लोग हमारे साथ कीजिए.’’

मेरे मना करने पर भी नीलिमाजी आग्रहपूर्वक बोलीं, ‘‘देखिए, आप के लिए मैं कुछ विशेष तो बना नहीं रही हूं, जो दालरोटी हम खाते हैं वही आप को भी खिलाएंगे.’’

रात्रि भोज पर नीलिमाजी ने कई तरह के स्वादिष्ठ पकवानों से मेज सजा दी. राजमा, चावल, दहीबड़े, आलू, गोभी और न जाने क्याक्या.

‘‘तो इस भोजन को आप दालरोटी कहती हैं?’’ मैं ने मजाकिया स्वर में नीलिमा से पूछा तो वह हंस दी थीं.

जवाब उन के पति प्रो. रमाकांतजी ने दिया, ‘‘आप के बहाने आज मुझे भी अच्छा भोजन मिला वरना सच में, दालरोटी से ही गुजारा करना पड़ता है.’’

लौटते समय नीलिमाजी ने 2 फोल्ंिडग चारपाई और गद्दे भी भिजवा दिए. हम दोनों पतिपत्नी इस के लिए उन्हें मना ही करते रहे पर उन्होंने हमारी एक न चलने दी.

अगली सुबह, रवि दफ्तर जाते समय सोनल को भी साथ ले गए. स्कूल में दाखिले के साथ, नए गैस कनेक्शन, राशन कार्ड जैसे कई छोटेछोटे काम थे, जो वह एकसाथ निबटाना चाह रहे थे. ब्रीफकेस ले कर रवि जैसे ही बाहर निकले नीलिमाजी से भेंट हो गई. उन के हाथ में एक परची थी. रवि को हाथ में देते हुए बोलीं, ‘‘भाई साहब, कल रात मैं आप को अपना टेलीफोन नंबर देना भूल गई थी. जब तक आप को फोन कनेक्शन मिले, आप मेरा फोन इस्तेमाल कर सकते हैं.’’

नीलिमाजी ने 2 दिन में काम वाली बाई और अखबार वाले का इंतजाम भी कर दिया. जब घर सेट हो गया तब भी नीलिमा को जब भी समय मिलता आ कर बैठ जातीं. सड़क के आरपार के समाचारों का आदानप्रदान करते उन्हें देख मैं ने सहजता से अनुमान लगा लिया था कि उन्होंने महिलाओं से अच्छाखासा संपर्क बना रखा है.

उस समय मैं सामान का कार्टन खोल रही थी कि अचानक उंगली में पेचकस लगने से मेरे मुंह से चीख निकल गई तो नीलिमाजी मेरे पास सरक आई थीं. उंगली से खून निकलता देख कर वह अपने घर से कुछ दवाइयां और पट्टी ले आईं और मेरी चोट पर बांधते हुए बोलीं, ‘‘जो काम पुरुषों का है वह तुम क्यों करती हो. यह सोनल क्या करता रहता है पूरा दिन?’’

नीलिमा दीदी का तेज स्वर सुन कर सोनल कांप उठा. बेचारा, वैसे ही मेरी चोट को देख कर घबरा रहा था. जब तक मैं कुछ कहती, उन्होंने लगभग डांटते हुए सोनल को समझाया, ‘‘मां का हाथ बंटाया करो. ये कहां की अक्लमंदी है कि बच्चे आराम फरमाते रहें और मां काम करती रहे.’’

सोनल अपने आंसू दबाता हुआ घर के अंदर चला गया. मैं अपने बेटे की उदासी कैसे सहती. अत: बोली, ‘‘दीदी, सोनल मेरी बहुत मदद करता है पर आजकल इंटरव्यू की तैयारी में व्यस्त है.’’

‘‘इंटरव्यू, कैसा इंटरव्यू?’’

‘‘दरअसल, इसे दूसरे स्कूलों में ही दाखिला मिल रहा है. लेकिन हम चाहते हैं कि इसे ‘माउंट मेरी’ स्कूल में ही दाखिला मिले.’’

‘‘क्यों? माउंट मेरी स्कूल में कोई खास बात है क्या?’’ नीलिमा ने भौंहें उचका कर पूछा तो मुझे अच्छा नहीं लगा था. अपने घर किसी पड़ोसी का हस्तक्षेप उस समय मुझे बुरी तरह खल गया था.

बात को स्पष्ट करने के लिए मैं ने कहा, ‘‘यह स्कूल इस समय नंबर वन पर है. यहां आई.आई.टी. और मेडिकल की कोचिंग भी छात्रों को मिलती है.’’

‘‘अजी, स्कूल के नाम से कुछ नहीं होता,’’ नीलिमा बोलीं, ‘‘पढ़ने वाले बच्चे कहीं भी पढ़ लेते हैं.’’

‘‘यह तो है फिर भी स्कूल पर काफी कुछ निर्भर करता है. कुशाग्र बुद्धि वाले बच्चों को अच्छी प्रतिस्पर्धा मिले तो वे सफलता के सोपान चढ़ते चले जाते हैं.’’

‘‘लेकिन इतना याद रखना सविता, इन्हीं स्कूलों के बच्चे ड्रग एडिक्ट भी होते हैं. कुछ तो असामाजिक गतिविधियों में भी भाग लेते देखे गए हैं,’’ इतना कहतेकहते नीलिमा हांफने लगी थीं.

खैर, जैसेतैसे मैं ने उन्हें विदा किया.

नीलिमा की जरूरत से ज्यादा आवाजाही और मेरे घरेलू मामले में दखलंदाजी अब मुझे खलने लगी थी. कई बार सुना था कि पड़ोसिनें दूसरे के घर में घुस कर पहले तो दोस्ती करती हैं, बातें कुरेदकुरेद कर पूछती हैं फिर उन्हें झगड़े में तबदील करते देर नहीं लगती.

एक दिन मैं और पड़ोसिन ममता एक साथ कमरे में बैठे थे. तभी नीलिमा आ गईं और बोलीं, ‘‘यह तुम्हारा पंखा बहुत आवाज करता है, कैसे सो पाती हो?’’

यह कह कर वह अपने घर गईं और टेबल फैन उठा कर ले आईं.

‘‘कल ही मिस्तरी को बुलवा कर पंखा ठीक करवा लो. तब तक इस टेबल फैन से काम चला लेना.’’

पड़ोसिन ममता के सामने उन की यह बेवजह की घुसपैठ मुझे अच्छी नहीं लगी थी. रवि दफ्तर के काम में बेहद व्यस्त थे इसलिए इन छोटेछोटे कामों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे. सोनल भी ‘माउंट मेरी स्कूल’ के पाठ्यक्रम के  साथ खुद को स्थापित करने में कुछ परेशानियों का सामना कर रहा था, मिस्तरी कहां से बुलाता? मैं भी इस ओर विशेष ध्यान नहीं दे पाई थी. मैं ने उन्हें धन्यवाद दिया और एक प्याली चाय बना कर ले आई.

चाय की चुस्कियों के बीच उन्होंने टटोलती सी नजर चारों ओर फेंक कर पूछा, ‘‘सोनल कहां है?’’

‘‘स्कूल में ही रुक गया है. कालिज की लाइब्रेरी में बैठ कर पढे़गा. आ जाएगा 4 बजे तक .’’

नीलिमा के चेहरे पर चिंता की आड़ीतिरछी रेखाएं उभर आईं. कभी घड़ी की तरफ  देखतीं तो कभी मेरी तरफ. लगभग सवा 4 बजे सोनल लौटा और किताबें अपने कमरे में रख कर बाथरूम में घुस गया. मैं ने तब तक दूध गरम कर के मेज पर रख दिया था.

नए कपड़ों में सोनल को देख कर नीलिमाजी ने मुझ से प्रश्न किया, ‘‘सोनल कहीं जा रहा है?’’

‘‘हां, इस के एक दोस्त का आज जन्मदिन है, उसी पार्टी में जा रहा है.’’

सोनल घर से बाहर निकला तो बुरा सा मुंह बना कर बोलीं, ‘‘सविता, जमाना बड़ा खराब है. लड़का कहां जाता है, क्या करता है, इस की संगत कैसी है आदि बातों का ध्यान रखा करो. अपना बच्चा चाहे बुरा न हो लेकिन दूसरे तो बिगाड़ने में देर नहीं करते.’’

नीलिमा की आएदिन की टीका- टिप्पणी के कारण सोनल अब उन से चिढ़ने लगा था. उन के आते ही उठ कर चला जाता. मुझे भी उन की जरूरत से ज्यादा घुसपैठ अच्छी नहीं लगती थी, किंतु उन के सहृदयी, स्नेही स्वभाव के कारण विवश हो जाती थी.

धीरेधीरे, मैं ने अपने घर का दरवाजा बंद रखना शुरू कर दिया. घर के  अंदर घंटी बंद करने का स्विच और लगवा लिया. अब जब भी दरवाजे पर घंटी बजती मैं ‘आईहोल’ में से झांकती. अगर नीलिमा होतीं तो मैं घंटी को कुछ देर के लिए अनसुनी कर देती और यह समझ कर कि घर के अंदर कोई नहीं है, वह लौट जातीं.

काफी राहत सी महसूस होने लगी थी मुझे. कई आधेअधूरे काम निबट गए. कुछ लिखनेपढ़ने का समय भी मिलने लगा. सोनल भी अब खुश रहता था. पढ़ने के बाद जो भी थोड़ाबहुत समय मिलता वह मेरे पास बैठ कर बिताता. शाम को जब रवि दफ्तर से लौटते, हम नीचे जा कर बैठ जाते. कुछ नए लोगों से जानपहचान बढ़ी, कुछ नए मित्र भी बने.

उन्हीं दिनों मैट्रो में एक नई फिल्म लगी थी. हम दोनों पतिपत्नी पिक्चर गए थे, बरसों बाद.

अचानक, रवि के मोबाइल की घंटी बजी. नीलिमाजी थीं. बदहवास, परेशान सी बोलीं, ‘‘भाई साहब, आप जहां भी हैं जल्दी घर आ जाइए. आप के घर का ताला तोड़ कर चोरी करने का प्रयास किया गया है.’’

धक्क से रह गया दिल. पिक्चर आधे में ही छोड़ कर दौड़तीभागती मैं घर की सीढि़यां चढ़ गई थी. रवि गाड़ी पार्क कर रहे थे. दरवाजे पर ही रमाकांतजी मिल गए. बोले, ‘‘घबराने की कोई बात नहीं है, भाभीजी. हम ने चोर को पकड़ कर अपने घर में बंद कर रखा है. पुलिस के आते ही उस लड़के को हम उन के हवाले कर देंगे.’’

मैं ने बदहवासी में दरवाजा खोला. अलमारी खुली हुई थी. कैमरा, वाकमैन, घड़ी के साथ और भी कई छोटीछोटी चीजें थैले में डाल दी गई थीं. लाकर को भी चोर ने हथौड़े से तोड़ने का प्रयास किया था पर सफल नहीं हो पाया था. एक दिन पहले ही रवि के एक मित्र की शादी में पहनने के लिए मैं बैंक से सारे गहने निकलवा कर लाई थी. कुछ नगदी भी घर में पड़ी थी. अगर नीलिमा ने समय पर बचाव न किया होता तो आज अनर्थ ही हो जाता.

मैंऔर रवि कुछ क्षण बाद जब नीलिमा के घर पहुंचे तो वह उस चोर लड़के को बुरी तरह मार रही थीं. रमाकांतजी ने पत्नी के चंगुल से उस लड़के को छुड़ाया, फिर बोले, ‘‘जान से ही मार डालोगी क्या इसे?’’ तब नीलिमा गुस्से में बोली थीं, ‘‘कम्बख्त, पैदा होते ही मर क्यों नहीं गया.’’

कुछ ही देर में पुलिस आ गई और उस लड़के को पकड़ कर अपने साथ ले गई. हम सब के चेहरे पर राहत के भाव उभर आए थे.

इस के बाद ही पसीने से लथपथ नीलिमा के सीने में तेज दर्द उठा तो सब उन्हें सिटी अस्पताल ले गए. डाक्टरों ने बताया कि हार्ट अटैक है. 3 दिन और 2 रातों के  बाद उन्हें होश आया. जिस दिन उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज होना था हम पतिपत्नी सुबह ही अस्पताल पहुंच गए थे. डाक्टरों ने हमें समझाया कि इन्हें हर प्रकार के टेंशन से दूर रहना होगा. जरा सा रक्तचाप बढ़ा तो दोबारा हार्टअटैक पड़ सकता है.

रमाकांतजी कुरसी पर बैठे एकटक पत्नी को देखे जा रहे थे. अचानक उन का गला भर आया. वे कांपते स्वर में बोले, ‘‘जिस के दिल में, ज्ंिदगी भर का नासूर पल रहा हो वह भला टेंशन से कैसे दूर रह सकता है. सविताजी, जिस लड़के ने आप के घर का ताला तोड़ कर चोरी करने का प्रयास किया वह हमारा बेटा था.’’

विश्वास नहीं हुआ था अपने कानों पर. लोगों को शिक्षित करने वाले रमाकांतजी और पूरे महल्ले की हितैषी नीलिमा का बेटा चोर, जो खुद के स्नेह से सब को स्ंिचित करती रहती थीं उन का अपना बेटा अपराधी?

रमाकांतजी ने बताया, ‘‘दरअसल, नीलिमा ने आप लोगों को कार में बिल्ंिडग से बाहर जाते हुए देख लिया था. कोई आधा घंटा भी नहीं बीता होगा, जब दूध ले कर लौट रही थीं कि आप के घर का ताला नदारद था और दरवाजा अंदर से बंद था. पहले नीलिमा ने सोचा कि शायद आप लोग लौट आए हैं लेकिन जब खटखट का स्वर सुनाई दिया तो उन्हें शक हुआ. धीरे से उन्होंने दरवाजा बाहर से बंद किया और चौकीदार को बुला लाई. थोड़ी देर में चौकीदार की सहायता से चोर को अपने घर में बंद कर दिया और फोन कर पुलिस को सूचित भी कर दिया.’’

हतप्रभ से हम पतिपत्नी एकदूसरे का चेहरा देखते तो कभी रमाकांतजी के चेहरे पर उतरतेचढ़ते हावभावों को पढ़ने का प्रयास करते.

‘‘शहर के सब से अच्छे स्कूल ‘माउंट मेरी कानवेंट’ में हम ने अपने बेटे का दाखिला करवाया था,’’ टूटतेबिखरते स्वर में रमाकांत बताने लगे, ‘‘इकलौती संतान से हमें भी ढेरों उम्मीदें थीं. यही सोचते थे कि हमारा बेटा भी होनहार निकलेगा. पर वह बुरी संगत में फंस गया. हम दोनों पतिपत्नी समझते थे कि वह स्कूल गया है पर वह स्कूल नहीं, अपने दोस्तों के पास जाता था. स्कूल से शिकायतें आईं तो डांटफटकार शुरू की, मारपीट का सिलसिला चला पर सब बेकार गया. उसे तो चरस की ऐसी लत लगी कि पहले अपने घर से पैसे चुराता, फिर पड़ोसियों के घरों में चोरी करने लगा. लोग हम से शिकायतें करने लगे तो हम ने स्पष्ट शब्दों में सब से कह दिया कि ऐसी नालायक औलाद से हमारा कोई संबंध नहीं है.’’

सहसा मुझे याद आया वह दिन जब निर्मला ने स्कूल के मुद्दे को छेड़ कर मुझ से कितनी बहस की थी. मेरे सोनल में शायद वह अपने बेटे की छवि देखती होंगी. तभी तो समयअसमय आ कर सलाहमशविरा दे जाती थीं. यह सोचते ही मेरी आंखों की कोर से टपटप आंसू टपक पड़े.

निर्मला की तांकनेझांकने की आदत से मैं कितना परेशान रहती थी. यही सोचती थी कि इन का अपने घर में मन नहीं लगता पर आज असलियत जान कर पता चला कि जब अपना ही खून अपने अस्तित्व को नकारते हुए बगावत का झंडा खड़ा कर बीच बाजार में इज्जत नीलाम कर दे तो कैसा महसूस होता होगा अभिभावकों को?

सच, व्यक्तित्व तो दर्पण की तरह होता है. जहां तक नजर देख पाती है उतना ही सत्य हम पहचानते हैं, शीशे के पीछे पारे की पालिश तक कौन देख सकता है? काश, नीलिमा की प्रतिछवि को पार कर कांच की चमक के पीछे दरकती गर्द की चुभन को मैं ने पहचाना होता पर अब भी देर नहीं हुई थी. वह मेरे लिए पड़ोसिन ही नहीं, आदरणीय बहन भी बन गई थीं.

सही फैसला : क्या पूरी हुई सुनील और पूनम की प्रेम कहानी?

सुनील मुजफ्फरपुर का रहने वाला था. बीए करने के बाद उसे कोलकाता में नौकरी मिल गई. कुछ दिनों की कोशिश के बाद उसे किराए पर मकान भी मिल गया.

मकान मालिक का नाम रंजीत प्रसाद था. उन की उम्र 40 साल के आसपास थी. उन की पत्नी का नाम पूनम था, जिस की उम्र 22 साल के आसपास थी. वह बेहद खूबसूरत थी.

पूनम रंजीत प्रसाद की दूसरी पत्नी थी. उन की पहली पत्नी की 4 साल पहले मौत हो गई थी. बच्चे की लालसा में रंजीत प्रसाद ने 2 साल पहले पूनम से शादी की थी. मगर पूनम ने भी उन्हें अब तक कोई बच्चा नहीं दिया था.

मकान 2 मंजिल का था. मकान मालिक ऊपरी मंजिल पर रहते थे और सुनील नीचे रहता था.

सुनील रंजीत प्रसाद को भैया कहता था और पूनम को भाभी. वह उन के घर के छोटेमोटे काम भी कर देता था.

एक दिन रंजीत प्रसाद ने सुनील से कहा, ‘‘अब तुम्हें खाना बनाने की जरूरत नहीं. कल से तुम हमारे साथ ही खाना खाओगे.’’

पहले सुनील इस के लिए तैयार नहीं हुआ, मगर जब पूनम ने भी जोर दिया, तो वह उन लोगों के साथ खाना खाने के लिए राजी हो गया. मगर शर्त यह रखी कि भोजन के बदले उन्हें रुपए लेने होंगे. आखिरकार रंजीत प्रसाद ने भी उस की शर्त मान ली.

धीरेधीरे सुनील को लगने लगा कि वह पूनम को चाहने लगा है. अगर पूनम उसे नहीं मिलेगी, तो उस की जिंदगी बेकार हो जाएगी.

इसी तरह 6 महीने बीत गए. उस के बाद एक दिन ऐसा वाकिआ हुआ कि वे दोनों एकदूसरे में समाए बिना न रह सके.

उस दिन रविवार था. सुनील की छुट्टी थी. रंजीत प्रसाद रोजाना की तरह सुबह 11 बजे अपनी दुकान पर चले गए थे. वे रात के 10 बजे से पहले घर नहीं लौटते थे. वे अपनी दुकान वृहस्पतिवार को बंद रखते थे.

दोपहर का भोजन करते समय अचानक पूनम ने सुनील से कहा कि वह उस के साथ सिनेमाघर में कोई फिल्म देखना चाहती है.

सुनील को लगा कि जैसे उस के मन की मुराद पूरी हो गई हो. दोनों ने शाम को फिल्म देखने की योजना बना ली.

शाम को सुनील अपने कमरे में तैयार हो रहा था कि अचानक वहां पूनम आ गई. वह एकटक उसे देखने लगा. उस की नजरें पूनम के हर एक अंग को निहारने लगीं.

कसा हुआ बदन, उभरी हुई छाती, बड़ीबड़ी आंखें, पतली कमर, गुलाबी होंठ और उस समय उस ने काले रंग का सूट भी पहन रखा था, जो उस के गोरे रंग पर कयामत ढा रहा था.

सुनील कुछ कहता, इस से पहले पूनम बोली, ‘‘क्या हुआ? इस तरह आंखें फाड़ कर मुझे क्यों देख रहे हो? क्या मैं इस लिबास में अच्छी नहीं लग रही?’’

‘‘अच्छी तो आप हर लिबास में लगती हैं, मगर इस लिबास में तो कुछ और ही बात है भाभी.’’

पूनम मुसकराती हुई बोली, ‘‘क्या तुम्हारा दिल घायल हो गया है?’’

सुनील खुद पर काबू न पा सका और दिल की बात जबान पर झट से ला दिया, ‘‘अगर मैं कहूं कि मेरा दिल आप को पाने के लिए छटपटा उठा है, तो…?’’

‘‘ऐसी बात है, तो तुम्हीं बताओ कि तुम्हारे दिल की छटपटाहट दूर करने के लिए मुझे क्या करना होगा?’’

सुनील को लगा कि अगर उस ने यह मौका गंवा दिया, तो पूनम को कभी भी पा नहीं सकेगा.

उस ने बगैर देर किए झट से पूनम को अपनी बांहों में भर लिया और कहा, ‘‘आप को कुछ करना नहीं है. जो कुछ करना है, मुझे करना है. आप को सिर्फ मेरा साथ देना है.’’

इतना कहने के बाद सुनील पूनम के गुलाबी गालों और रसीले होंठों को बारबार चूमने लगा.

थोड़ी देर बाद पूनम बोली, ‘‘अब छोड़ो, नहीं तो फिल्म जाने में देर हो जाएगी.’’

सुनील ने पूनम को अपनी बांहों से जुदा नहीं किया. उस ने पूनम के गालों पर एक जोरदार चुंबन जड़ कर कहा, ‘‘मैं कुछ और ही सोच रहा हूं.’’

‘‘वह क्या?’’

‘‘आज जब हम दोनों ने एकदूसरे पर अपने प्यार का इजहार कर ही दिया है, तो क्यों न जिंदगी का असली मजा बिस्तर पर लिया जाए? फिल्म फिर कभी देख लेंगे.’’

पूनम मुसकरा कर बोली, ‘‘खयाल बुरा नहीं है. दरवाजा बंद कर लो. मैं बिस्तर पर चलती हूं.’’

पूनम को अपनी बांहों से अलग कर सुनील कमरे का दरवाजा बंद करने चला गया.

वह दरवाजा बंद कर के बिस्तर पर आया, तो वहां पूनम मुंह के बल लेटी थी. सुनील की बेकरारी बढ़ गई, तो वह पूनम के कपड़े उतारने लगा. पूनम का संगमरमरी बदन देख कर सुनील को लगा कि आज उस की प्यास बुझ जाएगी.

वह धीरेधीरे प्यार के रास्ते पर आगे बढ़ता गया… पूनम भी लाजशर्म छोड़ कर उस का साथ देती गई.

प्यार की मंजिल पर पहुंच कर जब दोनों शांत हो गए, तो पूनम ने कहा, ‘‘आज तुम से जो सुख मुझे मिला है, वैसा सुख मुझे मेरे पति से सुहागरात को भी नहीं मिला था.’’ न चाहते हुए भी सुनील ने उस से पूछ लिया, ‘‘ऐसा क्यों?’’

‘‘शायद इसलिए कि वे उम्र में मुझ से काफी बड़े हैं. मैं सच कहती हूं, पति से मैं एक दिन भी खुश नहीं हो पाई. अगर मैं उन से संतुष्ट होती, तो अपना जिस्म तुम्हें क्यों सौंपती?’’

‘‘फिर आप ने रंजीत भैया से शादी क्यों की?’’

‘‘यह मेरी मजबूरी थी. मेरे पिता बहुत गरीब थे. मेरे अलावा उन की

4 बेटियां और थीं. मैं सब से बड़ी थी. कोई भी बिना दहेज के मु?ा से शादी करने के लिए तैयार नहीं था. मेरे पिता की दहेज देने की हैसियत नहीं थी.

‘‘इसलिए जब रंजीत प्रसाद ने मुझसे शादी करने के लिए पिता को प्रस्ताव दिया, तो वे मान गए. मैं पिता की मजबूरी समझाती थी, इसलिए इस बेमेल शादी का विरोध नहीं कर पाई.

‘‘मैं ने सोचा था कि रंजीत प्रसाद उम्र में मुझ से 18 साल बड़े जरूर हैं, मगर जब वे मुझे प्यार करेंगे, तो मैं सुख से भर जाऊंगी, पर ऐसा नहीं हुआ.

‘‘2 साल तक मैं ने अपनी कामनाओं को दबा कर रखा, मगर जब तुम्हें देखा, तो अपनेआप पर काबू न रख सकी और सोचा कि अपनी प्यास बुझने के लिए अपनेआप को तुम्हारे हवाले कर दूंगी. अभी मैं तुम्हारी बांहों में हूं.’’

यह कह कर पूनम चुप हो गई, तो सुनील ने उसे अपनी बांहों में कस लिया. उस के गालों पर एक चुंबन जड़ने के बाद कहा, ‘‘मैं सच कहता हूं भाभी, अगर आप मुझे नहीं मिलतीं, तो मैं जी नहीं पाता.’’

उस दिन के बाद से दोनों को जब भी मौका मिलता, वे एकदूसरे में समा जाते.

2 साल बीत गए. इस बीच सुनील के मातापिता ने शादी करने के लिए उस पर कई बार दबाव डाला, मगर उस ने हर बार कोई न कोई बहाना बना दिया.

एक बार जब सुनील गांव गया, तो उस की मां ने अपना यह फैसला सुनाया कि अगर उस ने 6 महीने के अंदर शादी नहीं की, तो वे खुदकुशी कर लेंगी.

यह सुन कर सुनील चिंता में पड़ गया. उस की मां ने उस के लिए एक लड़की भी देख रखी थी.

पूनम को सुनील इतना ज्यादा प्यार करने लगा था कि किसी भी हाल में वह उस से अलग नहीं होना चाहता था. काफी सोचने के बाद उस ने फैसला किया कि वह समाज की परवाह किए बिना पूनम से शादी करेगा.

गांव से लौट कर सुनील कोलकाता आया. मौका देख कर एक दिन उस ने पूनम को अपनी बांहों में भर लिया और कहा, ‘‘मुझे तुम से कुछ कहना है.’’

‘‘मैं भी तुम्हें एक बात बताने के पिछले एक हफ्ते से बेचैन हूं. कहो तो बता दूं.’’

‘‘पहले तुम अपनी बात कहो, फिर मैं कहूंगा.’’

‘‘मैं तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हूं…’’ कहतेकहते पूनम शरमा गई, ‘‘मैं जानती हूं कि तुम मुझे बहुत प्यार करते हो, इसीलिए मैं ने यह फैसला किया है कि अब मैं रंजीत प्रसाद के साथ नहीं रहूंगी. उन से तलाक ले कर तुम से शादी करूंगी. तुम मुझ से शादी करोगे न?’’

सुनील खुशी से झूम उठा. पूनम ने कहा कि सब से पहले वह अपने और सुनील के जिस्मानी संबंध की जानकारी अपने पति को देगी और फिर उन से तलाक की बात करेगी. अगर वे मान गए तो ठीक, नहीं तो उन्हें नामर्द साबित कर के कोर्ट से तलाक ले लेगी.

पूनम ने सुनील से कहा था कि वह रंजीत प्रसाद से रात में तलाक की बात करेगी और अगले दिन सुबह वह उसे उन का फैसला बता देगी.

मगर अगले दिन सुबह सुनील को पूनम से बात करने का मौका नहीं मिला. मजबूरी में वह दफ्तर चला गया.

दफ्तर से लौट कर सुनील शाम के 6 बजे घर आया, तो पूनम अपने कमरे में थी. रोज की तरह उस समय रंजीत प्रसाद घर पर नहीं थे.

पूनम के पास बैठ कर सुनील ने उस से पूछा, ‘‘तुम ने रंजीत से तलाक की बात की?’’

‘‘बात की थी, मगर उन्होंने जो कुछ कहा, उस पर सोचने के बाद मैं ने अपना फैसला बदल दिया.

‘‘अब मैं उन्हें तलाक नहीं दूंगी और न ही तुम्हारे साथ कोई संबंध रखूंगी.’’

यह सुन कर सुनील हैरान रह गया. उस ने पूनम से पूछा, ‘‘ऐसी कौन सी बात उन्होंने तुम्हें बताई कि तुम मेरे साथ विश्वासघात करने पर उतारू हो गई.’’

‘‘उन से बात करने के बाद मुझे पता चला कि उन्हें मेरे और तुम्हारे नाजायज संबंध की जानकारी बहुत पहले से थी. उन्होंने जानबूझ कर हमें रोकने की कोशिश नहीं की.

‘‘उन्होंने ऐसा इसलिए किया कि उन का मानना है कि औरत अगर किसी मर्द के साथ बेवफाई करना चाहे, तो सात तालों में बंद रहने के बावजूद कर डालेगी. अगर औरत किसी के प्रति वफादार रहना चाहेगी, तो दुनिया में ऐसी कोई ताकत नहीं है कि उसे बेवफाई करने पर मजबूर कर दे.

‘‘मेरे पति ने मुझे यह भी कहा, ‘अगर तुम्हें मुझ से संतुष्टि नहीं मिलती है, सुनील से मिलती है, तो तुम उस से नाजायज संबंध बनाए रख सकती हो. मगर मुझे तलाक दे कर उस से शादी करने की बात मत करो, क्योंकि मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं, तुम्हारे बिना मेरी जिंदगी बेकार हो जाएगी.’

‘‘मेरे पति की बातों ने मुझे झकझोर कर रख दिया. आखिरकार मैं ने फैसला किया कि अब मैं पति को नहीं छोड़ूंगी.’’

पूनम का फैसला जान कर सुनील गुस्से में आ गया. उस ने पूनम का गला दबोच लिया और कहा, ‘‘अगर तुम मुझ से शादी नहीं करोगी, तो मैं तुम्हें जान से मार दूंगा.’’

पूनम ने कहा, ‘‘तुम मुझे जान से मार दो, मैं चूं तक नहीं करूंगी. पर पति के साथ बेवफाई करने को मत कहना.’’

सुनील उस के गले पर अपने हाथ का दबाव डालने ही जा रहा था कि अचानक उसे लगा कि वह सही नहीं है, सही रास्ते पर तो पूनम थी.

उस के बाद सुनील ने पूनम के गले पर से अपना हाथ हटा लिया और कहा, ‘‘मैं तुम्हें मार नहीं सकता पूनम, क्योंकि मैं तुम्हें दिल की गहराइयों से चाहता हूं. तुम्हें तुम्हारा पति भी चाहता है. तुम तो एक ही हो. तुम दोनों के साथ तो रह नहीं सकती, इसलिए तुम अपने पति के साथ ही रहो.

‘‘मैं कल ही तुम्हारे घर से, तुम्हारी दुनिया से दूर चला जाऊंगा. तुम अपने पति के साथ हमेशा खुश रहना.’’

हियरिंग ऐड : क्या सालों बाद भी माया ने किया उसका इंतजार

फूलों सी नाजुक उस लड़की से कोई तो रिश्ता है मेरा वरना उसे देखते ही दिल
इतना बेचैन क्यों होता है? उस की आंखों में मैं अपना अक्स क्यों ढूंढने
लगता हूं ? एक अजनबी लड़की के होठों से अपना नाम क्यों सुनना चाहता हूं ?
मेरा दिल कह रहा था एक बार उस से अपने दिल की बात कह दूं. मैं मौके की
तलाश में था.

उस दिन वह कॉलेज कैंटीन में अकेली बैठी कुछ पढ़ रही थी. कैंटीन उस वक्त
खाली सा था. मैं उस के सामने वाली चेयर पर जा कर बैठ गया और गला साफ करते
हुए कुछ कहने की हिम्मत जुटाने लगा. मगर उस का ध्यान मेरी तरफ नहीं था.
वह नौवल पढ़ने में मशगूल थी.

मैं ने फिर से अपना गला साफ किया और टेबल पर रखे उस के हाथ थाम कर कहना
शुरू किया,” आज तक मैं ने कभी किसी के लिए ऐसा महसूस नहीं किया जैसा आप
के लिए करता हूं. यह प्यारी बोलती सी आंखें, ये घुंघराले बाल, यह मासूम
सा चेहरा मेरी आंखों में बस गया है. सोतेजागते, पढ़तेलिखते हर वक्त आप ही
नजर आती हो. यू आर माय फर्स्ट लव एंड द फर्स्ट लव विल बी द लास्ट लव. डू
यू लाइक मी?”

माया एक हल्की मुस्कान लिए मेरी नजरों में देख रही थी. उस ने कोई जवाब
नहीं दिया तो मैं थोड़ा असहज हो गया,” देखिए मैं दूसरे लड़कों की तरह
नहीं हूं. आई रियली लव यू. रूह की गहराइयों से प्यार करता हूं आप को. ”

वह अब भी मुझे वैसे ही देखती रही. एक बार फिर कोई जवाब न पा कर मैं ने उस
के हाथ छोड़ दिए और आंखें नीची कर ली.

तब जैसे वह होश में आई और तुरंत बोली,” एक्चुअली आई डोंट नो व्हाट डिड यू
से. मैं ने सुना नहीं. मेरे कान खराब हैं न. ”

मैं हतप्रभ रह गया. मेरी इतनी मेहनत बेकार गई थी. इतनी फीलिंग्स के साथ
मैं ने इतना कुछ कहा और वह तो कुछ सुन ही नहीं सकी. बहरी है बेचारी. मन
में अफसोस हुआ. इशारे से कुछ कहती हुई वह बैग खोलने लगी और मैं सॉरी कह
कर वहां से उठ गया.

“अरे सुनो. रुको तो. कहाँ जा रहे हो?” वह पुकार रही थी. मगर मैं अपनी ही
धुन में बाहर निकल आया.

मेरे पहले प्यार का पहला प्रपोजल सुना ही नहीं गया था. पर मैं ने हिम्मत
नहीं आ हारी और वही सब बातें एक कागज पर लिख कर फिर से उस के पास पहुंचा
और उसे कागज थमा दिया. मैं ने यह भी लिख दिया था कि आप बहरी हैं यह जान
कर बहुत दुख हुआ. मगर आप के अंदर इतनी खूबियां हैं कि है एक कमी कोई
मायने नहीं रखती.

कागज पढ़ कर वह मुस्कुरा उठी और सहजता से बोली,” आई रियली लाइक यू. कल
तुम क्या कह रहे थे यह मैं ने कानों से तो नहीं सुना मगर तुम्हारे दिल
में क्या है यह अच्छी तरह महसूस किया था. जब तुम मेरे पास आ कर बैठे थे
उसी पल मैं ने तुम्हें अपना दिल दे दिया था. तुम दूसरे लड़कों से बहुत
अलग हो. जैसा मैं चाहती थी बिल्कुल वैसे हो. तुम्हें यह भी बता दूं कि
मैं बहरी नहीं, बस सुनाई कम देता है. यह हियरिंग ऐड न लगाऊं तो हल्की
आवाज कान तक नहीं पहुंचती. जब कोई चिल्ला कर बोले तभी सुनाई देता है. पर
यह हियरिंग ऐड लगाते ही सब कुछ क्लियर सुन सकती हूं. कल मैं इसे निकालने
के लिए ही बैग खोल रही थी. तब तक तुम चले गए. मुझे लगा बहरी समझ कर तुम
दोबारा नहीं आओगे. मगर आज तुम फिर से वापस आए तो मुझे यकीन हो गया है कि
तुम्हारा प्यार सच्चा है. ”

” प्यार तो रूह से होता है. एक जुड़ाव जो तुम्हारे लिए महसूस किया, कभी
किसी और के लिए नहीं किया, ” मैं ने कहा.

” मेरे आगेपीछे हजारों लड़के घूमते हैं मगर किसी की आंखों में वह प्यार
नहीं था जो प्यार तुम्हारी आंखों में है. कितनी सादगी और सरलता से तुमने
अपने दिल की बात कह दी. सच तुम्हारी ही तलाश थी मुझे, ” वह मुझे चाहत भरी
नजरों से देख रही थी.

इस तरह वह यानी माया मेरी जिंदगी में आ गई. हम साथ हंसते, साथ खातेपीते
और साथ ही पढ़ते. वह ऐसी लड़की थी जो जिंदगी पूरी तरह जीना चाहती थी. खुद
के साथ दूसरों का भी ख्याल रखती. खूब मस्ती करती और पढ़ाई के समय सीरियस
हो कर पढ़ती भी. उसे नोवेल्स पढ़ने का बहुत शौक था. अक्सर नोवेल्स के
किरदारों में गुम रहती.

हम ने बेहद खूबसूरत लम्हे साथ बिताए. वह कभी मुझ से बोर हो जाती या झगड़ा
होता तो वह अपने हियरिंग ऐड कान से निकाल कर पर्स में रख लेती. फिर मैं
कितना भी बोलता रहता उसे फर्क नहीं पड़ता. थोड़ी देर के बाद मुझे याद आता
कि उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा होगा. हम दोनों बाद में इस बात पर बहुत
हंसते.

इसी तरह समय बीत रहा था. हम ने ग्रेजुएशन कर लिया. माया और मैं ने अब
एमबीए का कोर्स ज्वाइन कर लिया था. इधर कुछ दिनों से मां मेरी शादी की
बातें करने लगी थी. मगर मैं अभी माया के मन की थाह लेना चाहता था. हम ने
अब तक शादी को ले कर कोई चर्चा नहीं की थी.

एक दिन माया एक नौवेल पढ़ती हुई उस के किरदारों के बारे में बताने लगी, ”
जानते हो इस नौवेल के दोनों मुख्य किरदारों ने शादी कहां की ?”

“कहां की?”

” उन्होंने पानी के जहाज पर शादी की,” यह बात बताते वक्त उस की आंखों में
एक चमक थी. फिर अचानक गंभीर हो कर बोली,” अच्छा यह बताओ कि हम अपनी शादी
कहां करेंगे?”

मैं मुस्कुरा पड़ा. मेरे दिल को तसल्ली मिली कि माया मेरे साथ पूरी
जिंदगी के सपने देख रही है. उस ने फिर से मुझ से पूछा तो मैं ने उस के
हाथों को चूम कर कहा,” हम आसमान में शादी करेंगे. बादलों के बीच प्लेन
में बैठ कर हमेशा के लिए एकदूसरे के बन जाएंगे. ”

सुन कर वह खिलखिला उठी और मेरे गले लग गई. बिना कुछ कहे ही हम ने एकदूसरे
को शादी के लिए प्रपोज कर लिया था. अगले दिन मैं ने विचार किया कि अब
मुझे मां से शादी की बात कर लेनी चाहिए. आखिर मां मेरी शादी को ले कर
बहुत सपने देख रही है. दरअसल मैं मां का इकलौता बेटा हूं. बड़ी दीदी की
शादी हो चुकी है और पापा 2 साल पहले हमें छोड़ कर जा चुके हैं. सही मायने
में मां के सिवा मेरा कोई नहीं था.

मैं ने मां को हर बात सच बताने की ठानी और उन के पास पहुंच गया.

” मां आप काफी समय से पूछ रही थीं न कि मैं शादी कब करूंगा. तो बस आज आप
से यही कहने आया हूं कि मैं अब शादी के लिए तैयार हूं. मैं ने आप के लिए
बहू भी देख रखी है. ”

“अच्छा सच,” मां का चेहरा खुशी से खिल उठा था.

मैं ने मां को माया के बारे में सब कुछ बताते हुए कहा ,” मां वह इतनी
खूबसूरत है जैसे स्वर्ग की अप्सरा हो, सांचे में ढला हुआ उस का बदन और मन
से इतनी भली लड़की है कि क्या बताऊँ. आंखें इतनी प्यारी हैं कि किसी को
देख ले तो वह फिर से जी जाए और बाल तो ऐसे कि आप देखोगे न तो आप को लगेगा
कि उस के अंदर कुदरत ने केवल खूबसूरती ही भर दी है. पर मां उसे नजर न लग
जाए इसलिए कुदरत ने एक छोटी सी कमी भी रख छोड़ी है, ” मेरी आवाज थोड़ी धीमी
हो गई थी.

” कमी? कैसी कमी बेटा ?” मां ने पूछा.

” मां उस के कानों में समस्या है. सुनने की समस्या.”

” यह क्या कह रहा है तू? मेरा इकलौता बेटा एक बहरी लड़की से शादी करेगा?
लोग क्या कहेंगे और भला तुझ में कौन सी कमी है जो तुझे ऐसी लड़की लाने की
सूझी?”मां एकदम से भड़क उठी.

” अरे मां वह बहरी नहीं है बस ऊंचा सुनती है. मगर हियरिंग ऐड लगा कर सब
कुछ सुन सकती है,” मैं ने मां को समझाना चाहा.

मगर मां अड़ गई थीं,” अरे बेटा वह हर समय तो मशीन लगा कर नहीं रहेगी न.
मान ले जब वह सो रही है या आराम कर रही है और उस ने मशीन उठा कर रखी हुई
है उस वक्त अचानक घर में कोई हादसा हो जाए, मैं गिर जाऊं, उस के बच्चे का
पैर फिसल जाए या फिर कुछ और हो जाए. तब हम तो चिल्लाते रह जाएंगे न और
उसे कुछ सुनाई ही नहीं देगा. बेटे आंखों देखी मक्खी नहीं निगली जा सकती.
केवल खूबसूरत होना काफी नहीं. घर भी तो चलाना होगा न. पूरी दुनिया में
तुझे एक बहरी लड़की ही मिली थी? नहीं बेटा मैं इस शादी की अनुमति नहीं दे
सकती.” मां ने अपना फैसला सुना दिया था. इस के बाद मैं ने मां को लाख
समझाना चाहा मगर वह नहीं मानी.

मां ने मुझे साफ शब्दों में कहा,” सुन ले अगर मां के लिए जरा सी भी
मोहब्बत और इज्जत है तो तू उस लड़की से शादी नहीं करेगा. उसे भूल जा या
फिर मुझे भूल जा. ”

मेरे लिए मां से बढ़ कर कोई नहीं था सो मैं ने मां के बजाय माया को भूलना
ही मुनासिब समझा. मैं माया से दूरियां बढ़ाने लगा. वह करीब आने की कोशिश
करती तो मैं बहाने बना कर दूर चला जाता. बहुत दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.

एक दिन उस ने मेरा हाथ पकड़ कर नम आंखों से पूछा,” तुम मुझे अवॉयड क्यों
कर रहे हो मनीष? मुझ से शादी नहीं करोगे?”

” नहीं मैं तुम से शादी नहीं कर सकता. तुम किसी और को देख लो.,” मैं ने
जानबूझ कर बात इतनी खराब अंदाज में कही ताकि उसे बुरा लगे और वह मुझ से
दूर हो जाए. सचमुच ऐसा ही हुआ.

माया भड़क उठी,” किसी और को देख लो, इस का क्या मतलब होता है मनीष? आज तक
हम ने एकसाथ कितने ही सपने देखे और आज तुम ..”

” हां मैं कह रहा हूं कि किसी से भी कर लो शादी और मेरा पीछा छोड़ो ,” कह
कर मैं उस से हाथ छुड़ा कर घर आ गया और फिर कमरा बंद कर शाम तक रोता रहा.

मैं जानता था अब माया कभी भी मुझ से बात तक नहीं करेगी. ऐसा लग रहा था
जैसे किसी ने मेरे शरीर से रूह निकाल कर अलग कर दिया हो. मेरे होठों की
हंसी छिन गई हो. उस दिन के बाद माया मुझ से बिल्कुल कटीकटी रहने लगी. एक
दो महीने बाद ही फाइनल एग्जाम थे सो हमारे कॉलेज में प्रिपरेशन के लिए
छुट्टी हो गई. फिर एग्जाम हुए और इस बीच मेरा प्लेसमेंट एक मल्टीनेशनल
कंपनी में हो गया. माया ने भी कहीं और ज्वाइन कर लिया था. उस से मेरा कोई
संपर्क नहीं रह गया.

इन दिनों में जी तो रहा था मगर जीने की चाह मिट चुकी थी. मां सब समझ रही
थीं. फिर भी उन्हें लगता था कि कोई और लड़की मेरी जिंदगी में आएगी तो सब
नॉर्मल हो जाएगा. मगर मैं ने दिल के सारे दरवाजे इस कदर बंद कर लिए थे कि
कोई और लड़की दिल में आ ही नहीं सकती थी.

मां ने कई खूबसूरत लड़कियों के रिश्ते मुझे सुझाए. एक से बढ़ कर एक
लड़कियों के फोटो दिखाए मगर मुझे कोई पसंद नहीं आई. एक तो उन की बहन की
रिश्तेदार थी. मां ने उसे घर भी बुला लिया. मगर मुझे कोई रुचि लेते न देख
फिर उसे वापस भेज दिया. इस तरह 5 साल बीत गए. मां बीमार रहने लगी थी. वह
किसी भी तरह मुझे खुश देखना चाहती थीं .

अंत में एक दिन उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और कहा,” बेटा मैं समझ
चुकी हूं कि तू माया के बगैर खुश नहीं रह सकता. देख तो क्या हालत बना ली
है अपनी. जा मैं कहती हूं माया को ही अपना ले. मां हूँ, तेरे चेहरे पर यह
गमी बर्दाश्त नहीं कर सकती. ”

मां की बात सुन कर में फूटफूट कर रो पड़ा.,” मां अब अनुमति देने से क्या
होगा? 5 साल बीत चुके हैं. उस ने कब की शादी कर ली होगी. मेरा कोई
कांटेक्ट भी नहीं है उस से, ” मैं ने बुझे स्वर में कहा..

” बेटा मेरा दिल कहता है, अगर वह भी तुझ से प्यार करती होगी तो उस ने भी
जरूर अब तक शादी नहीं की होगी.”

मैं ने मां की बात का मान रखा और अपनी जिंदगी को ढूंढने निकल पड़ा.बड़ी
मुश्किल से उस की सहेली का पता मालूम किया जो ससुराल में थी. मैं ने उस
से माया का पता पूछा तो उस ने कहा कि उसे भी कुछ नहीं पता. शायद माया ने
उस से कुछ भी न बताने का वादा किया लिया होगा. बाद में मैं ने एक दो
दोस्तों से भी बात की मगर किसी को भी उस के बारे में पता नहीं था.

फिर एक दिन अचानक मेरी मुलाकात कॉलेज के एक लड़के से हुई जो दिल ही दिल
में माया को चाहता था. हालचाल पूछने पर उसी ने माया का जिक्र छेड़ा. उस
ने बताया कि वह एक मीटिंग में के सिलसिले में शिमला गया था. वही माया से
मुलाकात हुई थी. वह अपनी कंपनी को रिप्रेजेंट कर रही थी.

” क्या वह शादीशुदा है ?” मैं ने छूटते ही पूछा तो वह हंस पड़ा.

” उस समय तक मतलब करीब 3 महीने पहले तक तो वह अविवाहिता ही थी.”

मेरे चेहरे पर सुकून की रेखा खिंच गई. मैं ने जल्दी से उस से माया का
एड्रेस लिया और शिमला पहुंच गया. रास्ते भर में यही सोचता रहा कि माया
कैसी होगी? मुझे देख कर उस का रिएक्शन क्या होगा? कहीं वह मुझ से मिलने
से मना तो नहीं कर देगी? मैं दिए गए एड्रेस पर पहुंचा तो मुझे गार्डन में
एक लड़की खुले बालों में पौधों को पानी देती नजर आई. मैं ने एक पल में
पहचान लिया वह माया ही थी. चेहरे पर वही सादगी भरी मुस्कान और ललाट पर
सूर्य की लाली. बेहद हसीन गजल सा उस का व्यक्तित्व. दिल किया उसे बाहों
में समेट लूँ. 5 सालों से दिल में दफन सारे जज्बात उमड़ पड़ने को बेकरार
से थे.

मगर फिर ठहर गया. इन 5 सालों में आई दूरी कहीं उस के लिए मुझे अजनबी तो
नहीं बना गई? मैं उस के सामने जा कर खड़ा हो गया. वह उन्हीं निगाहों से
मुझे देखने लगी जब पहली बार मैं ने उसे प्रपोज किया था मगर उस ने हियरिंग
ऐड न लगा होने की वजह से सुना नहीं था.

मैं ने एक बार फिर अपने दिल की बात उसी अंदाज में कहनी शुरू की ,”माया
इतने सालों में एक भी लम्हा ऐसा नहीं जब मैं ने तुम्हें याद न किया हो.
मैं ने तुम्हारा दिल दुखाया मगर मैं विवश था. मां नहीं चाहती थी कि तुम
उन की बहू बनो पर मैं तुम्हें मां की रजामंदी के बाद ही अपने घर ले जाना
चाहता था. आज वह दिन आ गया है. मैं इसीलिए आया हूं. बताओ माया क्या मुझ
से शादी करोगी?”

माया एकटक मुझे देख रही थी. मेरी बात खत्म होने पर उस ने कान की तरफ
इशारा करते हुए कहा कि उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा. तब मैं ने चिल्ला कर
कहा,” माया मुझ से शादी करोगी?”

माया हंस कर हां कहती हुई मेरे सीने से लग गई. आज हमारी इतने सालों की
तपस्या पूर्ण हो गई थी. हम एकदूसरे की बाहों में थे.

बदल गए है इन पौपुलर शो के कैरेक्टर्स, कार्तिक और न्यारा के बच्चे भी पौपुलर

टीवी में कई ऐसे शो है जो काफी पौपुलर है. ये शो आज भी उतने पौपुलर है जितने की शुरुआत होने के समय पर थे. इन पौपुलर शो की डिमांड आज भी दर्शकों के बीच काफी है. टीवी के कुछ ऐसे शो है जो आज बहुत बदल चुके है. जिनके लीड एक्टर और एक्ट्रैसेस में काफी बदलाव आ चुका है. लेकिन शो की पौपुलरेटी में बिलकुल बदलाव नहीं आया है. आज हम कुछ उन शो का ज्रिक करेंगे. जिनमें काफी बदलाव आ चुका है. लेकिन दर्शक आज भी उन्हे उतना ही पसंद करते है.

 

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ये रिश्ता क्या कहलाता है

ये रिश्ता क्या कहलाता है एक हिंदी टीवी सीरियल है. जिसकी शुरुआत साल 2009 में हुई थी. कहानी में लीड रोल करने वाले कैरेक्टर अक्षरा और नैतिक है. जिनके प्यार की कहानी इस सीरियल में दिखाई गई है. इसकी कहानी में कई बार लीप आया है, एक बार चार साल का, दस साल का, सात साल का,.

लीप आने के बाद सीरियल की कहानी दिनो दिन चेंज हो गई. पहले सीरियल में करन महता फिर और हिना खान ने शुरुआत की थी, लेकिन इसके बाद ये सीरियल के लीड एक्टर और एक्ट्रेस शिवांगी जोशी और मोहसिन खान है.

कई लीप के बाद, नायरा और कार्तिक शो की लीड बन गए. कार्तिक और नायरा की कहानी के साथ उनके भाई बहन – नक्ष, गायू, कीर्ति और शुभम की कहानी पर सीरियल दिखाया जाता है. बाद में, गायू को शो से हटा दिया जाता है और शुभम मर जाता है. तब कहानी में नक्ष और कीर्ति की शादीशुदा जिन्दगी को दिखाया जाता है.

गुम है किसी के प्यार में  

‘गुम है किसी के प्यार में’ स्टार प्लस पर दिखाया जाता है. आयशा सिंह, नील भट्ट और ऐश्वर्या शर्मा भट्ट ये आज के कैरेक्टेर्स हैं. ये सीरियल अपने रोमांस और प्यार के लिए बहुत पौपुलर है.

स्टार प्लस पर प्रसारित होने वाला शो ‘गुम है किसी के प्यार में’ छोटे पर्दे के सबसे मशहूर शोज में गिना जाता है. शो की कहानी विराट नाम के एक पुलिस अफसर के बारे में है जो एक पिता की मौत के वक्त उससे किए गए वादे के चलते उसकी बेटी से शादी कर लेता है. लेकिन, कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब विराट की पुरानी गर्लफ्रेंड उसकी जिंदगी में लौट आती है और अब वह दोनों तरफ आकर्षित हो रहा है. इस पर पूरी कहानी बेस्ड है जो कि दर्शकों को आज भी रोके हुए है. सीरियल में 6-7 साल का लीप भी आया.

तारक महता का उल्टा चश्मा

सबका पसंदीदा शो ‘तारक महता का उल्टा चश्मा’ इन दिनों लोगों के बीच बहुत पौपुलर है.  ये एक पौपुलर सीरियल है. जो कि सब टीवी पर आता है इसकी शुरुआत साल 2008 में हुई. इसका निर्माण नीला असित मोदी और असित कुमार मोदी ने किया है. यह कहानी मुंबई के गोकुलधाम की है, जहां अलग अलग जगह, कल्चर और परम्पराओं के लोग एक दूसरे के साथ खुशी से रहते है.

इस सीरियल में एक्ट्रेस दिशा वाकनी काफी पौपुलर कैरेक्टर है. जो कि जेठालाल की पत्नी है. इस सीरियल के एक्टर और एक्ट्रेस भी बदल चुके है. शो को 2020 में एक विवाद का सामना करना पड़ा थी. जब नेहा मेहता ने यह कहते हुए शो छोड़ दिया कि” मुझे लगता है कि कई क्षेत्रों में सेट पर अनुशासन और शिष्टाचार बनाए नहीं रखा गया था”. साल 2022 में, उन्होंने दावा किया कि शो के निर्माताओं ने शो छोड़ने के बाद उनका बकाया भुगतान नहीं किया है.

बता दें, शो में एक्टर और एक्टर्स चेंज होने से शो की टीआरपी जरूर गिर गई. लेकिन शो आज भी पौपुलर है. शो में कौमेडी का अच्छा तड़का लगा हुआ है.

मेरा पति सेक्स में फोरप्ले नहीं करता है, मैं क्या करूं ?

सवाल

मैं 35 साल महिला हूं. मेरी शादी को 10 साल हो गए हैं. मैं अपनी सैक्स लाइफ को एन्जौय नहीं कर पाती हूं, क्योंकि मेरे पति मुझे संतुष्ट नहीं करते. वह फोरप्ले नहीं करते. वह मुझे गले लगाते हैं  और मेरे साथ सैक्स करने लगते हैं और मुझे ओरल सैक्स करने के लिए कहते हैं. वह बहुत स्वार्थी है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब

पहले ये समझना जरूरी है कि आपका पार्टनर आपको कितना समझती है. आप दोनों में कितनी आपसी मेल है. यदि आपका पति आपकी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है तो इसे सुलझाने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाएं.

कम्यूनिकेशन की कमी को दूर करें

अपनी भावनाओं और जरूरतों के बारे में खुलकर बात करें. प्यार से समझाएं कि आपको किन बातों की ज़रूरत है. पति से पूछें कि वे आपसे क्या चाहते हैं. दोनों पक्षों की बात सुनना जरूरी है. बिना आरोप लगाए, बिना गुस्सा किए बात करें. सकारात्मक रहें. रिश्ते में रोमांस लाएं साथ ही अपनी सैक्सुअल बात को रखें.

आपके मन में सैक्शुअल रिलेशन को लेकर जो भी सवाल या इच्छाएं हैं उन्हें पति के साथ शेयर करें. आप शर्म महसूस करती हैं तो यह बात भी पति को बताएं. आपस में बातचीत करके आप अपने रिश्ते को बेहतर बना सकते हैं.

फोरप्ले के बाद आफ्टर प्ले भी बहुत अहम रोल निभाता है. अगर आप चाहते हैं कि पार्टनर के साथ आपका कनेक्ट और मजबूत बनें तो आफ्टरप्ले पर कम से कम 20 मिनट जरूर लगाना चाहिए.

रही बात ओरल सैक्स करने की तो आप उनसे साफ कह सकती हैं कि ओरल सैक्स पहले आपसे शुरू होगा, और फिर उनकी बारी आएगी? इससे आपका समझौता हो सकता है.

मेरी फिजीकल ऐक्टिविटी ज्यादा नहीं है ऐसे में बहुत मोटी हो गई हूं, मैं क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 25 वर्ष है. खानेपीने की जंकफूड का सेवन करना मेरी कमजोरी है. इसी का नतीजा है कि मैं बहुत मोटी हो गई हूं. मेरी फिजीकल ऐक्टिविटी ज्यादा नहीं है. घर पर ही रहती हूं. मेरा काम औनलाइन ही है, ऐक्सरसाइज करने में आलस करती हूं और खानेपीने पर कंट्रोल नहीं रख पाती. अपनी आदतों से खुद ही परेशान हो गई हूं. जिंदगी के प्रति उदासीन होती जा रही हूं. ऐसा लग रहा है मैं डिप्रैशन का शिकार हो रही हूं. कृपया मुझे इस स्थिति से उबारें.

जवाब

आप खुद मान रहीं हैं कि आप की आदतें गलत हैं फिर भी उन्हें दूर करने का प्रयास नहीं कर रहीं,
यह तो गलत है न. खानेपीने का शौकीन होना गलत बात नहीं लेकिन हर चीज की अति गलत होती है.
जंकफूड का ज्यादा सेवन, घर पर बैठे रहना, फिजिकल ऐक्सरसाइज न करना इन सब के कारण आप का मोटापा बढ़ा है.

उदास होने की जरूरत नहीं, अभी भी वक्त है. आप पहले की तरह पतली हो सकती हैं. ऐसा भी नहीं कि आप के पास वक्त नहीं. घर पर ही रहती हैं. आप अपनी सामान्य रूटीन लाइफ में कुछ परिवर्तन कर के अपना मोटापा कम कर सकती हैं, क्योंकि अभी तो आप की उम्र कम है, आगे चल कर यही मोटापा ब्लड प्रैशर, डायबिटीज, हाई कोलैस्ट्रौल व अन्य कई बीमारियों का कारण बन सकता है. रही बात ऐक्सरसाइज की तो वह तो करनी ही पड़ेगी, उस से आप बच नहीं सकतीं इसलिए आलस बिलकुल मत करें. एरोबिक्स क्लासेस जौइन कर सकतीं हैं. स्विमिंग, जौगिंग, साइक्ंिलग, स्किपिंग, पुशअप इन सब के बाद से शरीर से विभिन्न अंगों की चर्बी को कम किया जा सकता है.

दिन में 2 से 3 बार ग्रीन टी पिएं. एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद, 3 बड़े चम्मच नीबू का रस, एक चुटकी काली मिर्च पाउडर डाल कर हर रोज सुबह पिएं. रोटी कम सलाद ज्यादा खाएं. रोज 8 गिलास पानी जरूर पिएं. पानी गरम पिएंगी तो शरीर डिटौक्स होने लगेगा. इस में मैटाबोलिज्म बढ़ेगा और बौडी स्लिम होगी. इस के अलावा खाना थोड़ाथोड़ा कर के 4 बार खा सकती हैं. रात को खाना खाने के बाद थोड़ा टहल लें. इन सब बातों को फौलो करेंगी तो वह दिन दूर नहीं जब आप की एक बार फिर परफैक्ट बौडी होगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

शरणार्थी : मीना ने कैसे लगाया अविनाश को चूना

वह हांफते हुए जैसे ही खुले दरवाजे में घुसी कि तुरंत दरवाजा बंद कर लिया. अपने ड्राइंगरूम में अविनाश और उन का बेटा किशन इस तरह एक अनजान लड़की को देख कर सन्न रह गए.

अविनाश गुस्से से बोले, ‘‘ऐ लड़की, कौन है तू? इस तरह हमारे घर में क्यों घुस आई है?’’

‘‘बताती हूं साहब, सब बताती हूं. अभी मुझे यहां शरण दे दो,’’ वह हांफते हुए बोली, ‘‘वह गुंडा फिर मुझे मेरी सौतेली मां के पास ले जाएगा. मैं वहां नहीं जाना चाहती हूं.’’

‘‘गुंडा… कौन गुंडा…? और तुम सौतेली मां के पास क्यों नहीं जाना चाहती हो?’’ अविनाश ने जब सख्ती से पूछा, तब वह लड़की बोली, ‘‘मेरी सौतेली मां मुझ से देह धंधा कराना चाहती है. उदय प्रकाश एक गुंडे के साथ मुझे कोठे पर बेचने जा रहा था, मगर मैं उस से पीछा छुड़ा कर भाग आई हूं.’’

‘‘तू झूठ तो नहीं बोल रही है?’’

‘‘नहीं साहब, मैं झूठ नहीं बोल रही हूं. सच कह रही हूं,’’ वह लड़की इतना डरी हुई थी कि बारबार बंद दरवाजे की तरफ देख रही थी.

अविनाश ने पूछा, ‘‘ठीक है, पर तेरा नाम क्या है?’’

‘‘मीना है साहब,’’ वह लड़की बोली,

अविनाश ने कहा, ‘‘घबराओ मत मीना. मैं तुम्हें नहीं जानता, फिर भी तुम्हें शरण दे रहा हूं.’’

‘‘शुक्रिया साहब,’’ मीना के मुंह से निकल गया.

‘‘एक बात बताओ…’’ अविनाश कुछ सोच कर बोले, ‘‘तुम्हारी मां तुम से धंधा क्यों कराना चाहती है?’’

मीना ने कहा, ‘‘जन्म देते ही मेरी मां गुजर गई थीं. पिता दूसरी शादी नहीं करना चाहते थे, मगर रिश्तेदारों ने जबरदस्ती उन की शादी करा दी.

‘‘मगर शादी होते ही पिता एक हादसे में गुजर गए. मेरी सौतेली मां विधवा हो गई. तब से ही रिश्तेदार मेरी सौतेली मां पर आरोप लगाने लगे कि वह पिता को खा गई. तब से मेरी सौतेली मां अपना सारा गुस्सा मुझ पर उतारने लगी.

‘‘इस तरह तानेउलाहने सुन कर मैं ने बचपन से कब जवानी में कदम रख दिए, पता ही नहीं चला. मेरी सौतेली मां को चाहने वाले उदय प्रकाश ने उस के कान भर दिए कि मेरी शादी करने के बजाय किसी कोठे पर बिठा दे, क्योंकि उस के लिए वह कमाऊ जो थी.

‘‘मां का चहेता उदय प्रकाश मुझे कोठे पर बिठाने जा रहा था. मैं उस की आंखों में धूल झोंक कर भाग गई और आप का मकान खुला मिला, इसी में घुस गई.’’

अविनाश ने पूछा, ‘‘कहां रहती हो?’’

‘‘शहर की झुग्गी बस्ती में.’’

‘‘तुम अगर मां के पास जाना चाहती हो, तो मैं अभी भिजवा सकता हूं.’’

‘‘मत लो उस का नाम…’’ मीना जरा गुस्से से बोली.

‘‘फिर कहां जाओगी?’’ अविनाश ने पूछा.

‘‘साहब, दुनिया बहुत बड़ी है, मैं कहीं भी चली जाऊंगी?’’

‘‘तुम इस भेडि़ए समाज में जिंदा रह सकोगी.’’

‘‘फिर क्या करूं साहब?’’ पलभर सोच कर मीना बोली, ‘‘साहब, एक बात कहूं?’’

‘‘कहो?’’

‘‘कुछ दिनों तक आप मुझे अपने यहां नहीं रख सकते हैं?’’ मीना ने जब यह सवाल उठाया, तब अविनाश सोचते रहे. वे कोई जवाब नहीं दे पाए.

मीना ही बोली, ‘‘क्या सोच रहे हैं आप? मैं वैसी लड़की नहीं हूं, जैसी आप सोच रहे हैं.’’

‘‘तुम्हारे कहने से मैं कैसे यकीन कर लूं?’’ अविनाश बोले, ‘‘और फिर तुम्हारी मां का वह आदमी ढूंढ़ता हुआ यहां आ जाएगा, तब मैं क्या करूंगा?’’

‘‘आप उसे भगा देना. इतनी ही आप से विनती है,’’ यह कहते समय मीना की सांस फूल गई थी.

मीना आगे कुछ कहती, तभी दरवाजे के जोर से खटखटाने की आवाज आई. कमरे में तीनों ही चुप हो गए. इस वक्त कौन हो सकता है?

मीना डरते हुए बोली, ‘‘बाबूजी, वही गुंडा होगा. मैं नहीं जाऊंगी उस के साथ.’’

‘‘मत जाना. मैं जा कर देखता हूं.’’

‘‘वही होगा बाबूजी. मेरी सौतेली मां का चहेता. आप मत खोलो दरवाजा,’’ डरते हुए मीना बोली.

एक बार फिर जोर से दरवाजा पीटने की आवाज आई.

अविनाश बोले, ‘‘मीना, तुम भीतर जाओ. मैं दरवाजा खोलता हूं.’’

मीना भीतर चली गई. अविनाश ने दरवाजा खोला. एक गुंडेटाइप आदमी ने उसे देख कर रोबीली आवाज में कहा, ‘‘उस मीना को बाहर भेजो.’’

‘‘कौन मीना?’’ गुस्से से अविनाश बोले.

‘‘जो तुम्हारे घर में घुसी है, मैं उस मीना की बात कर रहा हूं…’’ वह आदमी आंखें दिखाते हुए बोला, ‘‘निकालते हो कि नहीं… वरना मैं अंदर जा कर उसे ले आऊंगा.’’

‘‘बिना वजह गले क्यों पड़ रहे हो भाई? जब मैं कह रहा हूं कि मेरे यहां कोई लड़की नहीं आई है,’’ अविनाश तैश में बोले.

‘‘झूठ मत बोलो साहब. मैं ने अपनी आंखों से देखा है उसे आप के घर में घुसते हुए. आप मुझ से झूठ बोल रहे हैं. मेरे हवाले करो उसे.’’

‘‘अजीब आदमी हो… जब मैं ने कह दिया कि कोई लड़की नहीं आई है, तब भी मुझ पर इलजाम लगा रहे हो? जाते हो कि पुलिस को बुलाऊं.’’

‘‘मेरी आंखें कभी धोखा नहीं खा सकतीं. मैं ने मीना को इस घर में घुसते हुए देखा है. मैं उसे लिए बिना नहीं जाऊंगा…’’ अपनी बात पर कायम रहते हुए उस आदमी ने कहा.

अविनाश बोले, ‘‘मेरे घर में आ कर मुझ पर ही तुम आधी रात को दादागीरी कर रहे हो?’’

‘‘साहब, मैं आप का लिहाज कर रहा हूं और आप से सीधी तरह से कह रहा हूं, फिर भी आप समझ नहीं रहे हैं,’’ एक बार फिर वह आदमी बोला.

‘‘कोई भी लड़की मेरे घर में नहीं घुसी है,’’ एक बार फिर इनकार करते हुए अविनाश उस आदमी से बोले.

‘‘लगता है, अब तो मुझे भीतर ही घुसना पड़ेगा,’’ उस आदमी ने खुली चुनौती देते हुए कहा.

तब एक पल के लिए अविनाश ने सोचा कि मीना कौन है, वे नहीं जानते हैं, मगर उस की बात सुन कर उन्हें उस पर दया आ गई. फिर ऐसी खूबसूरत लड़की को वे कोठे पर भिजवाना भी नहीं चाहते थे.

वह आदमी गुस्से से बोला, ‘‘आखिरी बार कह रहा हूं कि मीना को मेरे हवाले कर दो या मैं भीतर जाऊं?’’

‘‘भाई, तुम्हें यकीन न हो, तो भीतर जा कर देख लो,’’ कह कर अविनाश ने भीतर जाने की इजाजत दे दी. वह आदमी तुरंत भीतर चला गया.

किशन पास आ कर अविनाश से बोला, ‘‘यह क्या किया बाबूजी, एक अनजान आदमी को घर के भीतर क्यों घुसने दिया?’’

‘‘ताकि वह मीना को ले जाए,’’ छोटा सा जवाब दे कर अविनाश बोले, ‘‘और यह बला टल जाए.’’

‘‘तो फिर इतना नाटक करने की क्या जरूरत थी. उसे सीधेसीधे ही सौंप देते,’’ किशन ने कहा, ‘‘आप ने झूठ बोला, यह उसे पता चल जाएगा.’’

‘‘मगर, मुझे मीना को बचाना था. मैं उसे कोठे पर नहीं भेजना चाहता था, इसलिए मैं इनकार करता रहा.’’

‘‘अगर मीना खुद जाना चाहेगी, तब आप उसे कैसे रोक सकेंगे?’’ अभी किशन यह बात कह रहा था कि तभी वह आदमी आ कर बोला, ‘‘आप सही कहते हैं. मीना मुझे अंदर नहीं मिली.’’

‘‘अब तो हो गई तसल्ली तुम्हें?’’ अविनाश खुश हो कर बोले.

वह आदमी बिना कुछ बोले बाहर निकल गया.

अविनाश ने दरवाजा बंद कर लिया और हैरान हो कर किशन से बोले, ‘‘इस आदमी को मीना क्यों नहीं मिली, जबकि वह अंदर ही छिपी थी?’’

‘‘हां बाबूजी, मैं अगर अलमारी में नहीं छिपती, तो यह गुंडा मुझे कोठे पर ले जाता. आप ने मुझे बचा लिया. आप का यह एहसान मैं कभी नहीं भूलूंगी,’’ बाहर निकलते हुए मीना बोली.

‘‘हां बेटी, चाहता तो मैं भी उस को पुलिस के हवाले करा सकता था, मगर तुम्हारे लिए मैं ने पुलिस को नहीं बुलाया,’’ समझाते हुए अविनाश बोले, ‘‘अब तुम्हारा इरादा क्या है?’’

‘‘किस बारे में बाबूजी?’’

‘‘अब इतनी रात को तुम कहां जाओगी?’’

‘‘आप मुझे कुछ दिनों तक अपने यहां शरणार्थी बन कर रहने दो.’’

‘‘मैं तुम को नहीं रख सकता मीना.’’

‘‘क्यों बाबूजी, अभी तो आप ने कहा था.’’

‘‘वह मेरी भूल थी.’’

‘‘तो मुझे आप एक रात के लिए अपने यहां रख लीजिए. सुबह मैं खुद चली जाऊंगी,’’ मीना बोली.

‘‘मगर, कहां जाओगी?’’

‘‘पता नहीं.’’

‘‘नहीं बाबूजी, इसे अभी निकाल दो,’’ किशन विरोध जताते हुए बोला.

‘‘किशन, मजबूर लड़की की मदद करना हमारा फर्ज है.’’

‘‘वह तो ठीक है, पर कहीं इसी इनसानियत में हैवानियत न छिपी हो बाबूजी.’’

‘‘आप आपस में लड़ो मत. मैं तो एक रात के लिए शरणार्थी बन कर रहना चाहती थी. मगर आप लोगों की इच्छा नहीं है, तो…’’ कह कर मीना चलने लगी.

‘‘रुको मीना,’’ अविनाश ने उसे रोकते हुए कहा. मीना वहीं रुक गई.

अविनाश बोले, ‘‘तुम कौन हो, मैं नहीं जानता, मगर एक अनजान लड़की को घर में रखना खतरे से खाली नहीं है. और यह खतरा मैं मोल नहीं ले सकता. तुम जो कह रही हो, उस पर मैं कैसे यकीन कर लूं?’’

‘‘आप को कैसे यकीन दिलाऊं,’’ निराश हो कर मीना बोली, ‘‘मैं उस सौतेली मां के पास भी नहीं जाना चाहती.’’

‘‘जब तुम सौतेली मां के पास नहीं जाना चाहती हो, तो फिर कहां जाओगी?’’

‘‘नहीं जानती. मैं रहने के लिए एक रात मांग रही थी, मगर आप को एतराज है. आप का एतराज भी जायज है. आप मुझे जानते नहीं. ठीक है, मैं चलती हूं.’’

अविनाश उसे रोकते हुए बोले, ‘‘रुको, तुम कोई भी हो, मगर एक पीडि़त लड़की हो. मैं तुम्हारे लिए जुआ खेल रहा हूं. तुम यहां रह सकती हो, मगर कल सुबह चली जाना.’’

‘‘ठीक है बाबूजी,’’ कहते हुए मीना के चेहरे पर मुसकान फैल गई… ‘‘आप ने डूबते को तिनके का सहारा दिया है.’’

‘‘मगर, सुबह तुम कहां जाओगी?’’ अविनाश ने फिर पूछा.

‘‘सुबह मौसी के यहां उज्जैन चली जाऊंगी?’’

अविनाश ने यकीन कर लिया और बोले, ‘‘तुम मेरे कमरे में सो जाना.’’

‘‘आप कहां साएंगे बाबूजी?’’ मीना ने पूछा.

‘‘मैं यहां सोफे पर सो जाऊंगा,’’ अविनाश ने अपना फैसला सुना दिया और आगे बोले, ‘‘जाओ किशन, इसे मेरे कमरे में छोड़ आओ.’’

काफी रात हो गई थी. अविनाश और किशन को जल्दी नींद आ गई. सुबह जब देर से नींद खुली. मीना नहीं थी. सामान बिखरा हुआ था. अलमारियां खुली हुई थीं. उन में रखे गहनेनकदी सब साफ हो चुके थे.

अविनाश और किशन यह देख कर हैरान रह गए. उम्रभर की कमाई मीना ले गई. उन का अनजान लड़की पर किया गया भरोसा उन्हें बरबाद कर गया. जो आदमी रात को आया था, वह उसी गैंग का एक सदस्य था, तभी तो वह मीना को नहीं ले गया. चोरी करने का जो तरीका उन्होंने अपनाया, उस तरीके पर कोई यकीन नहीं करेगा.

मीना ने जोकुछ कहा था, वह झूठ था. वह चोर गैंग की सदस्य थी. शरणार्थी बन कर अच्छा चूना लगा गई.

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