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क्यों का प्रश्न नहीं : भाग 2

‘अब इस का क्या फायदा. तब तो मैं कहता ही रह गया था कि मैं ने ऐसा कुछ नहीं किया. मैं ऐसा कर ही नहीं सकता था, पर किसी ने मेरी एक न सुनी. किस प्रकार आप सब ने मुझे धक्के दे कर घर से बाहर निकाला, मुझे कहने की जरूरत नहीं है. मैं आज भी उन धक्कों की, उन दुहत्थड़ों की पीड़ा अपनी पीठ पर महसूस करता हूं. मैं इस पीड़ा को कभी भूल नहीं पाया. भूल पाऊंगा भी नहीं.

‘‘मुझे आज भी सर्दी की वह उफनती रात याद है. बड़ी मुश्किल से कुछ कपड़े, फौज के डौक्यूमैंट, एक डैबिट कार्ड, जिस में कुछ रुपए पड़े थे, घर से ले कर निकला था. बाहर निकलते ही सर्दी के जबरदस्त झोंके ने मेरे बूढ़े शरीर को घेर लिया था. धुंध इतनी थी कि हाथ को हाथ दिखाई नहीं देता था. सड़क भी सुनसान थी. दूरदूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था. रात, मेरे जीवन की तरह सुनसान पसरी पड़ी थी. रिश्तों के टूटन की कड़वाहट से मैं निराश था.फिर मैं ने स्वयं को संभाला और पास के

एटीएम से कुछ रुपए निकाले. अभी सोच ही रहा था कि मुख्य सड़क तक कैसे पहुंचा जाए कि पुलिस की जिप्सी बे्रक की भयानक आवाज के साथ मेरे पास आ कर रुकी. उस में बैठे एक इंस्पैक्टर ने कहा, ‘क्यों भई, इतनी सर्द रात में एटीएम के पास क्या कर रहे हो? कोई चोरवोर तो नहीं हो?’ मैं पुलिस की ऐसी भाषा से वाकिफ था.

‘‘‘नहीं, इंस्पैक्टर साहब, मैं सेना का रिटायर्ड कर्नल हूं. यह रहा मेरा आई कार्ड. इमरजैंसी में मुझे कहीं जाना पड़ रहा है. एटीएम से पैसे निकालने आया था. मुख्य सड़क तक जाने के लिए कोई सवारी ढूंढ़ रहा था कि आप आ गए.’

‘‘‘घर में सड़क तक छोड़ने के लिए कोई नहीं है?’ इंस्पैक्टर की भाषा बदल गई थी. वह सेना के रिटायर्ड कर्नल से ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं कर सकता था.

‘‘‘नहीं, यहां मैं अकेले ही रहता हूं,’ मैं कैसे कहता, घर से मैं धक्के दे कर निकाला गया हूं.

‘‘इंस्पैक्टर ने कहा, ‘आओ साहब, मैं आप को सड़क तक छोड़ देता हूं.’ उन्होंने न केवल सड़क तक छोड़ा बल्कि स्टेशन जाने वाली बस को रोक कर मुझे बैठाया भी. ‘जयहिंद’ कह कर सैल्यूट भी किया, कहा, ‘सर, पुलिस आप की सेवा में हमेशा हाजिर है.’ कैसी विडंबना थी, घर में धक्के और बाहर सैल्यूट. जीवन की इस पहेली को मैं समझ नहीं पाया था.

‘‘स्टेशन पहुंच कर मैं सैनिक आरामगृह में गया. वहां न केवल मुझे कमरा मिला बल्कि नरमगरम बिस्तर भी मिला. तुम्हारे जैसे हृदयहीन लोग इस बात का अनुमान ही नहीं लगा सकते कि उस ठिठुरती रात में बेगाने यदि मदद नहीं करते तो मेरी क्या हालत होती. मैं खुद के जीवन से त्रस्त था. मन के भीतर यह विचार दृढ़ हो रहा था कि ऐसी स्थिति में मैं कैसे जी पाऊंगा. मन में यह विचार भी था, मैं एक सैनिक हूं. मैं अप्राकृतिक मौत मर ही नहीं सकता. मैं डेरे में पनाह मिलने के प्रति भी अनिश्चित था. पर डेरे ने मुझे दोनों हाथों से लिया. पैसे की तंगी ने मुझे बहुत तंग किया. डेरे के लंगर में खाते समय मुझे जो आत्मग्लानि होती थी, उस से उबरने के लिए मुझे दूरदूर तक कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. आप ने मुझे मेरी पैंशन में से हजार रुपया महीना देना भी स्वीकार नहीं किया तो मेरे पास इस के अलावा और कोई चारा नहीं था कि पहले का पैंशन डेबिट कार्ड कैंसिल करवा कर नया कार्ड इश्यू करवाऊं. मेरे जीतेजी पैंशन पर केवल मेरा अधिकार था.

‘‘मैं जीवनभर ‘क्यों’ के प्रश्नों का उत्तर देतेदेते थक गया हूं. बचपन में, ‘खोता हो गया है, अभी तक बिस्तर में शूशू क्यों करता हूं? अच्छा, अब फैशन करने लगा है. पैंट में बटन के बजाय जिप क्यों लगवा ली? अरे, तुम ने नई पैंट क्यों पहन ली? मौडल टाउन में मौसी के यहां दरियां देने ही तो जाना है. नई पैंट आनेजाने के लिए क्यों नहीं रख लेता? चल, नेकर पहन कर जा.’

‘‘काश, उस रोज मैं नेकर पहन कर न गया होता. मैं अभी भंडारी ब्रिज चढ़ ही रहा था कि साइकिल पर आ रहे लड़के ने मुझे रोका. ‘काम करोगे?’ मुझे उस की बात समझ नहीं आई, इसलिए मैं ने पूछा था, ‘कैसा काम?’ ‘घर का काम, मुंडू वाला.’ उस ने मेरे हुलिए, बिना प्रैस किए पहनी कमीज, बिना कंघी के बेतरतीब बाल, ढीली नेकर, कैंची चप्पल, बगल में दरियां उठाए किसी घर में काम करने वाला मुंडू समझ लिया था.

‘‘मैं ने उसे कहा था, ‘नहीं, मैं ने नहीं करना है, मैं 7वीं में पढ़ता हूं.’ फिर उस ने कहा था, ‘अरे, अच्छे पैसे मिलेंगे. खाना, कपड़ा, रहने की जगह मिलेगी. तुम्हारी जिंदगी बन जाएगी.’ जब मैं ने उसे सख्ती से झिड़क कर कहा कि मैं पढ़ रहा हूं और मुझे मुंडू नहीं बनना है तब जा कर उस ने मेरा पीछा छोड़ा था. बाद में शीशे में अपना हुलिया देखा तो वह किसी मुंडू से भी गयागुजरा था. मेरे कपड़े ऐसे क्यों थे? मेरे पास इस का भी उत्तर नहीं था. बाऊजी के अतिरिक्त सभी मेरा मजाक उड़ाते रहे.

‘‘मेरे दूसरे उपनामों के साथ ‘मुंडू’ उपनाम भी जुड़ गया था. उस भाई से कभी ‘क्यों’ का प्रश्न नहीं पूछा गया जो गली की एक लड़की के लिए पागल हुआ था. अफीम खा कर उस की चौखट पर मरने का नाटक करता रहा. गली में उसे दूसरी चौखट मिलती ही नहीं थी. उस बहन से भी कभी क्यों का प्रश्न नहीं पूछा गया जो संगीत के शौक के विपरीत लेडी हैल्थविजिटर के कोर्स में दाखिला ले कर कोर्स पूरा नहीं कर सकी, पैसा और समय बरबाद किया और परिवार को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया. उस भाई से भी क्यों का प्रश्न नहीं किया गया जो पहले नेवी में गया. छोड़ कर आया पढ़ने लगा, किसी बात पर झगड़ा किया तो फौज में चला गया. वहां बीमार हुआ, फौज से छुट्टी हुई, फिर पढ़ने लगा. पढ़ाई फिर भी पूरी नहीं की. सब से छोटे ने तो परिवार की लुटिया ही डुबो दी. मैं ने बाऊजी को चुपकेचुपके रोते देखा था. मैं पढ़ने में इतना तेज नहीं था. मुझ पर प्रश्नों की बौछार लगा दी जाती. पढ़ना नहीं आता तो इस में पैसा क्यों बरबाद कर रहे हो? इस क्यों का उत्तर उस समय भी मेरे पास नहीं था और आज भी नहीं है.

2 पत्नियों ने दी पति की सुपारी : भाग 1

6जुलाई की रात कोई 8-सवा 8 बजे का वक्त था, जब दक्षिणपूर्वी दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में एक डीटीसी बस के ड्राइवर संजीव कुमार की गोली मार कर हत्या कर दी गई. जिस समय हत्या हुई, उस समय 55 वर्षीय संजीव अपनी 28 वर्षीय पत्नी गीता उर्फ नजमा और अपने 10 साल के बेटे गौरव के साथ मोटरसाइकिल से कहीं जा रहा था.

दीपालय स्कूल के पास संजीव पहुंचा ही था कि उस की चलती बाइक के बगल से एक अन्य बाइक पर 2 सवार निकले और उन्होंने संजीव की बाइक ओवरटेक करते हुए उसे गोली मार दी. गोली लगते ही संजीव एक ओर को गिर पड़ा और उसी के साथ बाइक पर बैठी उस की पत्नी और बेटा भी गिर गए.

गीता बाइक से गिरते बेहोश हो गई थी. जब उसे होश आया तो उस ने देखा कि उस का पति घायल अवस्था में एक ओर पड़ा है और उन के चारों तरफ भारी भीड़ जुटी है.
लोगों की मदद से वह अपने पति को ले कर पास के मजीदिया अस्पताल गई, जहां उस ने डाक्टरों को बताया कि उन का एक्सीडेंट हो गया है. डाक्टरों ने संजीव का चैकअप किया और उसे मृत घोषित करते हुए पुलिस को फोन कर दिया. क्योंकि मामला एक्सीडेंट का नहीं, बल्कि गोली लगने का था.

सूचना मिलने के बाद गोविंदपुरी के थानाप्रभारी जगदीश यादव टीम के साथ मजीदिया अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने जब गीता से घटना की जानकारी लेनी चाही तो वह पुलिस को अलगअलग बयान दे कर गुमराह करने लगी. कभी कहती कि एक्सीडेंट हुआ है, तो कभी कहती कि उसे कुछ पता नहीं, वह तो बेहोश हो गई थी और कभी कहती कि कालकाजी बस डिपो के कुछ लोगों से संजीव की दुश्मनी थी, उन्होंने उसे गोली मारी है.

इस दौरान गीता के चेहरे पर पति को खोने का वैसा गम किसी को नजर नहीं आया जो अकसर ऐसे मौकों पर दिखता है. जब उस से सख्ती से पूछताछ हुई तो उस का झूठ ज्यादा देर पुलिस के सामने टिक नहीं पाया.गीता से पूछताछ और उस के मोबाइल फोन को खंगालने के बाद जो सनसनीखेज कहानी सामने आई. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के पास सिकंदराबाद अंतर्गत आने वाले एक गांव बिलसुरी निवासी संजीव कुमार के मातापिता अपने 3 बेटों और एक बेटी के साथ दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में आ कर रहने लगे थे.

उन्होंने अपने बच्चों को यहीं के सरकारी स्कूल में पढ़ायालिखाया. बीचबीच में वह गांव भी चले जाते थे. बच्चों के जवान होने पर उन्होंने सभी की शादियां कर दीं और सभी ने इसी इलाके में अलगअलग अपनी गृहस्थी बना ली. इस के बाद मातापिता गांव लौट गए और वह खेतीकिसानी देखने लगे.

संजीव कुमार शुरू से ही परिवार से अलग रहा करता था. दबंग टाइप के संजीव की अपने भाइयों से और मातापिता से ज्यादा बनती नहीं थी. संजीव ने जब अपने दम पर डीटीसी बस ड्राइवर की सरकारी नौकरी पा ली तो उस के हौसले और बुलंद हो गए.
कुछ ही साल में वह अपनी दादागिरी और नेतागिरी की बदौलत डीटीसी कर्मचारी यूनियन का नेता भी बन गया. सरकारी तनख्वाह के अलावा वह कई अन्य गैरकानूनी तरीकों से पैसे कमाने लगा और कई जमीनों पर उस ने अवैध कब्जे कर लिए, जिन्हें बाद में सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलीभगत और रिश्वत के दम पर उस ने अपने नाम लिखवा लिया.

 

तपस्या : क्या शिखर के दिल को पिघला पाई शैली?

एक रात की उजास

इश्क की बिसात पर खतरनाक साजिश : भाग 1

  1. वह 8×10 फीट की साधारण रसोई थी. उस में सारी चीजें बड़े तरीके से अपनीअपनी जगह पर रखी हुई थीं. रसोईघर से सटे बाईं ओर की तरफ एक बड़ा सा दालान था. दालान से सटे 3 बड़े और
    शानदार कमरे थे. रसोईघर तक पहुंचने के लिए इन्हीं कमरों से हो कर जाना होता था. पहली मंजिल पर बने कमरे भूतल पर बने कमरों के नक्शे के आधार पर ही बने थे. मकान में कुल मिला कर 5 परिवार रहते थे.
    भूतल वाले कमरे में भारतीय सेना में हवलदार प्रवीण कुमार अपनी पत्नी मनीषा और 2 बच्चों के साथ रहता था. बाकी और कमरों में उस के 4 बडे़ भाई अपनेअपने परिवारों के साथ रहते थे.
    हरियाणा के चरखी दादरी जिले के गांव डूडीवाला बिशुनपुरा में भले ही पांचों परिवारों के चूल्हे अलगअलग जलते रहे हों लेकिन पांचों भाइयों में गजब की एकता थी. दुखसुख होने पर पांचों भाई एकदूसरे के लिए 24 घंटे एक पैर पर खड़े रहने के लिए तैयार रहते थे. भाइयों की एकता देख कर पासपड़ोस के लोग ईर्ष्या से जलभुन उठते थे, लेकिन पड़ोसियों की परवाह किए बिना पांचों भाई अपनी मस्ती में रहते थे.
    बहरहाल, एक रोज अपने किचन में घर की सब से छोटी बहू और हवलदार प्रवीण की पत्नी मनीषा खड़ी हो कर आटा गूंथने में मस्त थी. पीछे से अचानक से खुद को उस ने किसी की मजबूत बांहों में पूरी तरह जकड़ते हुए महसूस किया तो वह डर के मारे बुरी तरह उछल पड़ी. हाथ से आटा वाला परात छूटतेछूटते बचा.
    पलट कर देखा तो उस के सामने उस का देवर दीपक खड़ा था. उसे डरीसहमी हालत में देख कर वह मुसकरा रहा था.
    ‘‘देवरजी, ऐसे भी कोई मजाक करता है क्या भला?’’ डर के मारे मनीषा अभी भी कांप रही थी.
    ‘‘क्या हुआ भाभी, आप इतनी डरी सी क्यों हैं?’’ दीपक बोला.
    ‘‘आप तो ऐसे अंजान बनते हो जैसे आप को कुछ पता ही न हो. भला ऐसे भी कोई मजाक करता है क्या? अभी कोई देख लेता तो क्या होता, जानते हो भी आप?’’ मनीषा इठलाते हुए बोली.
    ‘‘हां, हमारा प्यार सरेआम रुसवा हो जाता,’’ भाभी मनीषा को अभी भी वह अपनी मजबूत बांहों में ले कर झूल रहा था.
    ‘‘आप को पता है न, आप के भैया घर आए हैं और बाहर हैं. इस हालत में अगर उन्होंने देख लिया तो कयामत के दिन सज जाएंगे. पता है न आप को वो कितने गुस्से वाले हैं और जब गुस्से का भूत उन के सिर सवार हो जाता है तो उन्हें आगेपीछे कुछ दिखाई नहीं देता.’’
    ‘‘हांहां, मैं सब जानता हूं कि वह कितने गुस्से वाले हैं. आखिरकार, भैया फौजी जो ठहरे. वैसे भी गुस्सा फौजियों की नाक पर सवार रहता है.’’ दीपक बोला.
    ‘‘जब आप सब कुछ जानते हो तो फिर…’’
    ‘‘तो फिर क्या भाभी?’’ बीच में बात काटते हुए दीपक ने कहा, ‘‘वैसे बहुत मजा आता है आप को छेड़ने में.’’
    ‘‘तो ऐसे कब तक आंखमिचौली खेलते रहोगे. भगा क्यों नहीं ले जाते यहां से मुझे, फिर जितना मजा लूटना चाहते हो, बिंदास हो कर लूटना.’’
    ‘‘हांहां, आप को यहां से भगा कर भी ले जाऊंगा और इस संगमरमर जैसे गोरे बदन से बिंदास हो कर मजे भी लूटूंगा.’’ फिर कुछ सोचते हुए आगे बोला, ‘‘लेकिन भाभी, मैं तो यह सोचता हूं कि भगा कर ले जाने की जरूरत ही क्या है? जबकि भैया खुद ही नौकरी पर भागे रहते हैं. अभी तो फिलहाल घूमनेफिरने यहां आए हैं. 2-4 दिनों में अपनी नौकरी पर फिर वापस लौट जाएंगे तो फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा.’’ दीपक ने कहा.
    ‘‘ना बाबा ना, मुझे तो डर लगता है, कहीं ये देख न लें. अगर ये देख लिए या इन को हमारे इस रिश्ते के बारे में पता चल गया तो बाबा मार ही डालेंगे मुझे जान से.’’ मनीषा हाथ नचाते हुए बोली.
    ‘‘ऐसे कैसे मार डालेंगे मेरी जान को. अब ये जान केवल मेरी है. इस पर अब सिर्फ मेरा अधिकार है. कोई टेढ़ी नजर कर के भी तो देखे, जान ले लूंगा उस हरामी के पिल्ले की.’’ कहते हुए दीपक ने मनीषा के सुर्ख गालों पर अपनी मोहब्बत का झंडा गाड़ दिया.
    दीपक के प्यार भरे चुंबन से मनीषा के शरीर में बिजली सा करंट दौड़ गया. खुद दीपक भी बेकाबू हो चुका था, लेकिन खुद को संभाल लिया और वहां से अपने घर
    चला गया.

ASI के फरेेबी प्यार में बुरे फंसे थाना प्रभारी : भाग 1

सामान्य दिनों की तरह शुक्रवार 24 जून, 2022 को इंदौर महानगर के पुलिस कमिश्नर के औफिस में चहलपहल बनी हुई थी. पुलिसकर्मी दोपहर बाद के अपने रुटीन वाले काम निपटाने में व्यस्त थे. साथ ही उन के द्वारा कुछ अचानक आए काम भी निपटाए जा रहे थे.दिन में करीब 3 बजे का समय रहा होगा. वहीं पास में स्थित पुलिस आयुक्त परिसर में गोली चलने की आवाज आई. सभी पुलिसकर्मी चौंक गए. कुछ सेकेंड में ही एक और गोली चलने की आवाज सुन कर सभी दोबारा चौंके. अब वे अलर्ट हो गए थे और तुरंत उस ओर भागे, जिधर से गोलियां चलने की आवाज आई थी. पुलिस आयुक्त के कमरे के ठीक बाहर बरामदे का दृश्य देख कर सभी सन्न रह गए.

पुलिस कंट्रोल रूम में ही काम करने वाली एएसआई रंजना खांडे जमीन पर अचेत पड़ी थी. उस के सिर के नीचे से खून रिस रहा था. कुछ दूरी पर ही भोपाल श्यामला हिल्स थाने के टीआई हाकम सिंह पंवार भी अचेतावस्था में करवट लिए गिरे हुए थे.खून उन की कनपटी से तेजी से निकल रहा था. उन्हें देख कर कहा जा सकता था कि दोनों पर किसी ने गोली चलाई होगी. किंतु वहां किसी तीसरे के होने का जरा भी अंदाजा नहीं था. हां, टीआई के पैरों के पास उन की सर्विस रिवौल्वर जरूर पड़ी थी.

एक महिला सिपाही ने रंजना खांडे के शरीर को झकझोरा. वह उठ कर बैठ गई. उसे गोली छूती हुई निकल गई थी. वह जख्मी थी. उस की गरदन के बगल से खून रिस रहा था. उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया. जबकि टीआई के शरीर को झकझोरने पर उस में कोई हरकत नहीं हुई. उन की सांसें बंद हो चुकी थीं. रंजना के साथ टीआई को भी अस्पताल ले जाया गया.गोली चलने की इस वारदात की सूचना पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र को भी मिल गई. वह भी भागेभागे घटनास्थल पर पहुंच गए. तब तक की हुई जांच के मुताबिक टीआई हाकम सिंह के गोली मार कर खुदकुशी करने की बात चर्चा में आ चुकी थी. सभी को यह पता था कि यह प्रेम प्रसंग का मामला है. मरने से पहले टीआई ने ही एएसआई रंजना खांडे पर गोली चलाई थी.

इस के बाद अपनी कनपटी पर रिवौल्वर सटा कर गोली मार ली थी. रंजना खांडे की गरदन को छूती हुई गोली निकल गई थी. गरदन पर खरोंच भर लगी थी, किंतु वह वहीं धड़ाम से गिर पड़ी थी. रंजना के गिरने पर टीआई ने उसे मरा समझ लिया था. परंतु ऐसा हुआ नहीं था. पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि रंजना ने टीआई पंवार पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था. जबकि पंवार रंजना पर ब्लैकमेल करने का आरोप लगा चुके थे.

रंजना टीआई को कर रही थी ब्लैकमेल,रंजना और टीआई पंवार के बीच गंभीर विवाद की यही मूल वजह थी. इसे दोनों जल्द से जल्द निपटा लेना चाहते थे. इस सिलसिले में उन की कई बैठकें हो चुकी थीं, लेकिन बात नहीं बन पाई थी.टीआई पंवार तनाव में चल रहे थे. इस कारण 21 जून को बीमारी का हवाला दे कर छुट्टी पर इंदौर चले गए थे. उन्हें घटना के दिन रंजना ने 24 जून को मामला निपटाने के लिए दिन में डेढ़ बजे कौफीहाउस बुलाया था.

जबकि रंजना खुद अपने भाई कमलेश खांडे के साथ 10 मिनट देरी से पहुंची थी. उन के बीच काफी समय तक बातचीत होती रही. उसे बातचीत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वे एकदूसरे से बहस कर रहे थे, जो आधे घंटे बीत जाने के बाद भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी. बगैर किसी नतीजे पर पहुंचे दोनों सवा 2 बजे कौफीहाउस से बाहर निकल आए थे.

पुलिस कमिश्नर औफिस के पास रीगल थिएटर है. उसी के सामने कौफीहाउस बना हुआ है. यह केवल पुलिस वालों के लिए ही है. बाहर निकलने पर भी दोनों में बहस होती रही. बताते हैं कि वे काफी तैश में थे. बहस करीब 40 मिनट तक चलती रही.

ASI के फरेेबी प्यार में बुरे फंसे थाना प्रभारी : भाग 3

टीआई की रखैल रेशमा भी करने लगी ब्लैकमेल रंजना ने कुछ मिनट की एक वीडियो क्लिपिंग उन्हें वाट्सऐप कर दी. उसे देखते ही पंवार का दिमाग सुन्न हो गया. तभी रंजना के भाई ने फोन कर धमकी दी कि उस तरह के कई वीडियो उस के पास हैं. उन्होंने अगर जरा सी भी होशियारी दिखाई और पैसे नहीं दिए, तब वह सीधा बहन के साथ बलात्कार का आरोप लगा देगा. उस के बाद की पूरी प्रक्रिया क्या हो सकती है, उसे वह अच्छी तरह जानता है.

बाद में रेशमा उर्फ जागृति भी रंजना से मिल गई. फिर इन्होंने मिल कर टीआई पंवार को मानसिक रूप से प्रताडि़त करना शुरू कर दिया. इस की पुष्टि पंवार के मोबाइल नंबर की साइबर फोरैंसिक जांच से हुई.इस बारे में पंवार के घर वालों ने भी पुलिस से शिकायत की थी. पूछताछ में पंवार की पत्नी लीलावती, भाई रामगोपाल, भतीजा भूपेंद्र पंवार, मुकेश पंवार और पिता भंवरसिंह पंवार ने फोन पर धमकी मिलने की बात बताई.

उन्होंने बताया कि हाकम सिंह से रंजना ही नहीं, बल्कि उस की बहन और भाई भी पैसे की मांग करते थे. पैसे नहीं देने पर बलात्कार के झूठे मुकदमे में फंसा देने की धमकी भी देते थे.पंवार की मौत गोली मार कर आत्महत्या किए जाने की पुष्टि के बाद पुलिस की जांच में 4 लोगों के खिलाफ प्रताडि़त करने की एफआईआर दर्ज की गई. उन 4 लोगों में मुख्य आरोपी रंजना खांडे, रेशमा उर्फ जागृति, कमलेश और गोविंद जायसवाल का नाम था.

एफआईआर में उन्होंने झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा कर जेल भेजने की धमकी देने और पैसा मांगने की बात कही गई थी. जांच में पाया गया कि 31 मार्च से 24 जून, 2022 के बीच मृतक के मोबाइल पर रेशमा उर्फ जागृति ने फोन कर के धमकियां दी थीं. ये धमकियां पूरी तरह से ब्लैकमेल करने और मानसिक प्रताड़ना की थीं. टीआई पंवार ने अपने मोबाइल में इन की रिकौर्डिंग कर रखी थी. मोबाइल पर मिली कुल 7 धमकियां तिथिवार रिकौर्ड थीं.

धमकी देने वाले आरोपियों में रेशमा ने पंवार से मकान के लिए पैसे और रजिस्ट्री के लिए प्रताडि़त किया था. ऐसा नहीं करने पर बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराने और अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी दी थी. ऐसे ही रंजना और उस के भाई कमलेश 25 लाख रुपए और गाड़ी की मांग कर रहे थे.
रंजना ने टीआई पंवार से कहा था कि उन्होंने कपड़ा व्यापारी गोविंद जायसवाल को रखने के लिए जो 25 लाख रुपए दिए थे, वह उस से मांग कर दें. दूसरी तरफ गोविंद जायसवाल पैसा वापस नहीं कर रहा था. वह टालमटोल कर रहा था.

पंवार को रेशमा ने 24 जून को गोविंद से पैसा लाने का दबाव बनाया था. उसी समय रंजना और कमलेश भी पैसा और गाड़ी के लिए पंवार को इंदौर में इंडियन कैफे हाउस के सामने बुलाया था. इस तरह से पंवार दोतरफा मानसिक तनाव में आ चुके थे.मुख्यालय के प्रांगण में ही बहा खून

टीआई पंवार को गोविंद से पैसे ले कर अश्लील वीडियो के वायरल होने से रोकने के लिए रंजना, रेशमा और कमलेश को देने थे. पंवार ने कमलेश और रंजना से इंडियन कौफीहाउस में बातचीत के दौरान गोविंद से मोबाइल पर काल कर अपने रुपए मांगे थे. उन्होंने बातचीत में खुद को बहुत परेशान बताया था और अनर्थ होने तक की बात कही थी. इसी क्रम में रेशमा काल कर पंवार को मोबाइल पर धमकियां देती रही. उस ने फोन पर यहां तक कह दिया था कि जो पैसा और चैक नहीं दे रहा है, उसे मार कर खुद मर जाए.

यह बात पंवार के दिमाग में बैठ गई. और फिर उन्होंने जो निर्णय लिया वह उन्हें खतरनाक राह पर ले गया. रेशमा, रंजना, कमलेश और गोविंद जायसवाल की एक साथ मिली प्रताड़नाओं से पंवार टूट गए.
करीब 50 मिनट तक वह मानसिक उत्पीड़न से जूझते रहे. एक समय आया जब उन्होंने मानसिक संतुलन खो दिया और अपनी सर्विस रिवौल्वर हाथ में पकड़ ली. कौफीहाउस से निकलने के बाद बरामदे में उन्होंने रंजना के हाथ से उस का मोबाइल छीनने की कोशिश की, क्योंकि उसी में अश्लील वीडियो थीं. मोबाइल रंजना के हाथ से नीचे गिर गया, जिसे रंजना ने तुरंत उठा लिया.

तभी उन्होंने रिवौल्वर रंजना खांडे पर तान दी. जब तक रंजना कुछ कहतीसुनती, तब तक रिवौल्वर से गोली निकल चुकी थी. गोली चलते ही रंजना वहीं जमीन गिर पड़ी थी. पंवार ने तुरंत रिवौल्वर को अपनी कनपटी से सटाया और दूसरी गोली चला दी. इस तरह हत्या और आत्महत्या की इस वारदात में हत्या तो नहीं हो पाई लेकिन आत्महत्या जरूर हो गई.

इस मामले की जांच पूरी होने के बाद रेशमा, रंजना खांडे, कमलेश खांडे, कपड़ा व्यापारी गोविंद जायसवाल को भादंवि की धारा 384, 385, 306 के तहत अजाक थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया.
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजेश हिंगणकर ने एएसआई रंजना खांडे को निलंबित कर दिया. आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम ने उन के ठिकानों पर दबिश डाली, लेकिन वह वहां से फरार मिले.

मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने महाकाल मंदिर क्षेत्र में बसस्टैंड के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में रंजना ने टीआई पंवार से अपने अवैध संबंधों की बात कुबूली. उस ने बताया कि उन्हीं संबंधों की वीडियो से ब्लैकमेल कर वह टीआई से क्रेटा कार मांग रही थी.इस के बाद पुलिस ने टीआई की पत्नी का दावा करने वाली रेशमा को भी गिरफ्तार कर लिया.

वारदात के करीब 2 हफ्ते बाद रंजना के भाई कमलेश की आग से झुलस कर मौत हो गई. दरअसल, कमलेश धामोद स्थित अपने घर पर दालबाटी बना रहा था. उस समय उपले गीले होने की वजह से जल नहीं पा रहे थे. उन्हें जलाने के लिए कमलेश ने जैसे ही पैट्रोल डाला, तभी उस के कपड़ों में आग लग गई.
घर में आग से वह काफी देर तक छटपटाता रहा. घर वालों ने किसी तरह उस की आग बुझाई और उसे इलाज के लिए धार अस्पताल ले गए. हालत गंभीर होने की वजह से उसे एमवाई अस्पताल रैफर कर दिया. जहां इलाज के दौरान उस की मौत हो गई.

इंदौर के हनुमान मंदिर के पास एलआईजी सोसायटी में रहने वाला व्यापारी गोविंद जायसवाल कथा लिखने तक गिरफ्तार नहीं हो सका था. पुलिस ने आरोपी रंजना खांडे और रेशमा उर्फ जागृति से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

अपना बेटा : मामाजी को देख क्यों परेशान हो उठे अंजलि और मुकेश

2 सगे भाइयों की साझा प्रेमिका की नफरत का सैलाब : भाग 2

‘‘सर, मयंक की बहन सोनिका के साथ मेरी शादी सन 2017 में हुई थी. सोनिका मानसिक रोगी थी, इसलिए उस से नहीं पटी. वह केवल 5 दिन ससुराल रही फिर मायके चली गई. भाई सुरेंद्र व मयंक के उकसाने पर सोनिका ने दहेज उत्पीड़न का मामला मेरे खिलाफ दर्ज करा दिया था. मामले को रफादफा करने के लिए मयंक व सुरेंद्र 50 लाख रुपए मांग रहे थे. न देने पर जानमाल के नुकसान की धमकी दी थी. इसलिए शक है कि मयंक, सुरेंद्र ने एक अन्य साथी के साथ मिल कर हमारे मांबाप की हत्या कर दी है. आप रिपोर्ट दर्ज कर उचित काररवाई करें.’’ अनूप ने कहा.

पुलिस अधिकारियों के आदेश पर बर्रा थानाप्रभारी दीनानाथ मिश्रा ने अनूप की तहरीर पर उस के साले मयंक व सुरेंद्र के खिलाफ हत्या की रिपोेर्ट दर्ज कर ली और उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया.थाने ला कर उन से कड़ाई से पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने हत्या का जुर्म कुबूल नहीं किया. उन्होंने बहन के विवाद की बात तो स्वीकार की, लेकिन हत्या को नकार दिया.

इधर फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और सबूत जुटाए. टीम ने नीचे बने बाथरूम में बेंजीडाइन टेस्ट किया, जिस में खून निकलने की पुष्टि हुई. जो खून बरामद हुआ, उस का टीम ने ओबीटीआई टेस्ट किया जिस से मानव रक्त की पुष्टि हुई. इस से यह स्पष्ट हो गया कि बाथरूम में खून से सनी वस्तु को धोया गया था. कोमल आई शक के दायरे में

कोमल के हाथ में कट का निशान तथा खून लगा था. टीम ने कोमल के हाथपैर और कपड़ों पर बेंजीडाइन व ओबीटीआई टेस्ट किया, जिस में मानव रक्त की पुष्टि हुई.
अनूप के घर के बाईं ओर अभिषेक कुमार का घर था. उन के घर के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगा था. टीम ने इस कैमरे की फुटेज की जांच की तो चौंकाने वाली जानकारी मिली.

फुटेज में एक युवक मुंह पर सफेद कपड़ा लपेटे रात पौने एक बजे अनूप के घर में दाखिल हुआ और फिर वही व्यक्ति रात सवा 2 बजे घर से बाहर निकलते दिखा. आते समय वह खाली हाथ था, लेकिन जाते समय उस के हाथ में एक लाल रंग का थैला था. फोरैंसिक टीम को शक हुआ कि यह युवक कातिलों का साथी हो सकता है, अत: टीम ने फुटेज सुरक्षित कर ली.

फोरैंसिक टीम ने घर के एकएक सामान की जांच की. अलमारी में रखे कोमल के कपड़ों की जांच की तो उस के अधोवस्त्रों में सीमेन की पुष्टि हुई. टीम को शक हुआ कि कोमल ने मृतक दंपति की हत्या से पहले या बाद में कातिल से शारीरिक संबंध बनाए थे या फिर कातिल ने जबरदस्ती कोमल से संबंध बनाए होंगे.

टीम ने अधोवस्त्र (पैंटी) को मैडिकल जांच हेतु सुरक्षित कर लिया. टीम ने घटनास्थल से लगभग 18 नमूने एकत्र किए. डौग स्क्वायड टीम ने खोजी कुतिया को घटनास्थल पर छोड़ा. वह लाशों को सूंघ कर भौंकती हुई घर में चक्कर लगाती रही. एक बार वह प्रथम तल पर भी गई लेकिन चंद मिनट बाद ही वापस आ गई.

दूसरे राउंड में वह भौंकती हुई घर के बाहर निकली और 200 मीटर दूर तक गई. वह वहां चक्कर लगाती रही, फिर वापस आ गई. डौग स्क्वायड टीम न तो आलाकत्ल बरामद कर सकी और न ही कोई अन्य सबूत जुटा पाई. अब तक पुलिस अधिकारियों ने कोमल, अनूप और मृतक मुन्नालाल के मोबाइल फोन को अपने कब्जे में ले लिया था. डीसीपी (क्राइम) सलमान ताज पाटिल ने मृतक के मोबाइल फोन को खंगाला तो वह चौंक पड़े.

कोमल के मोबाइल में मिले तथ्य मोबाइल फोन में एक सुसाइड नोट लिखा गया था, ‘2 दिन से हम बहुत उलझन में थे. किसी ने ढंग से खायापिया भी नहीं. बहू ने दहेज उत्पीड़न का केस किया था, उस से और उलझन में रहते थे. इसी मामले में हमारी बेटे से बहस हो गई. अनूप ने हम दोनों को गाली दी और हम को मारा तो हम ने जहर खा लिया.’

मोबाइल फोन पर ड्राफ्ट किए गए इस सुसाइड नोट को पढ़ कर सलमान ताज पाटिल ने अनुमान लगाया कि कातिल बेहद चालाक है. उस ने पहले दंपति को जहर दे कर मारने की कोशिश की और बेटे अनूप को फंसाने की साजिश रची. कामयाब न होने पर दंपति की धारदार हथियार से हत्या कर दी. डीसीपी ने कोमल का मोबाइल फोन चैक किया तो उस के मोबाइल में स्क्रीन शौट लिया गया सुसाइड नोट मौजूद था. लेकिन कोमल ने ट्रूकालर डाटा, काल लौग, वाट्सऐप चैट और वाट्सऐप काल का डाटा डिलीट कर दिया था.

मौसी के प्रेमी से पंगा

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