क्या इमोजी बता सकते है कि आपकी दिमाग में है कितना सैक्स

आज के जमाने में वौट्सऐप, फेसबुक या किसी अन्य मेसेजिंग सर्विस के जरिये हम दोस्तों को न सिर्फ संदेश भेजते हैं बल्कि इमोजी भी लगाकर अपनी अपनी भावना प्रकट करते हैं. एक नये रिसर्च के मुताबिक आप मेसेज में कितने इमोजी इस्तेमाल करते हैं ये बता सकता है कि आप सैक्स के बारे में कितना सोचते हैं.

रिसर्च के अनुसार अगर आप कोई भी टेक्स्ट बिना इमोजी (emoji) के नहीं भेजते हैं तो सैक्स आपके दिमाग पर कुछ ज़्यादा हावी हो सकता है. हम आपको बता रहे हैं रिसर्च कैसे किया गया और कैसे निष्कर्ष निकाले गये.

डेटिंग वेबसाइट मैच डौट कौम ने किया है रिसर्च

ये रिसर्च डेटिंग वेबसाइट मैच डौट कौम ने किया है. इसके रिसर्च के मुताबिक वे लोग, जो अपने लगभग हर टेक्स्ट मेसेज में इमोजी का इस्तेमाल करते हैं, उनके दिमाग में ज्यादातर वक्त सैक्स की बातें भरी रहती हैं.

रिसर्च का अहम हिस्सा रही हेलेन फिशर ने बताया कि इमोजी इस्तेमाल करने वाले न केवल अधिक सैक्स करते हैं बल्कि डेट्स खूब करते हैं. इनकी शादी की संभावना भी इमोजी का इस्तेमाल कम या बिल्कुल नहीं करने वाले लोगों की तुलना में दोगुनी होती है.

इन लोगों पर हुआ रिसर्च

25 देशों में 8 अलग-अलग भाषाओं में काम कर रही इस वेबसाइट ने इसके पहले भी एक रिसर्च किया था. इस रिसर्च के मुताबिक सर्वे में शामिल आधे से भी ज़्यादा महिला और पुरुष फ्लर्ट करते समय ‘विंक’ इमोजी का इस्तेमाल करते थे. शोध में यह भी पाया गया कि इस तरह की बातचीत में दूसरी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली प्रचलित इमोजी ‘स्माइली’ थी.

5000 लोगों पर हुए इस रिसर्च में 36 से 40 प्रतिशत लोग ऐसे थे, जो हर मेसेज में एक से अधिक इमोजी का इस्तेमाल करते थे. पाया गया कि ये लोग दिन में कई बार सेक्स के बारे में सोचते थे. वहीं, जो लोग सेक्स के बारे में कभी नहीं सोचते थे, उनके मेसेज में इमोजी का इस्तेमाल ना के बराबर था.

वहीं कई लोग ऐसे भी थे जो सैक्स के बारे में दिन में बस एक बार सोचते थे और इमोजी का इस्तेमाल तो करते थे लेकिन हर मेसेज में नहीं. इस शोध के मुताबिक इस रिसर्च में शामिल 54 प्रतिशत लोग, जो अपने मैसेज में इमोजी का इस्तेमाल करते थे, उन 31 प्रतिशत लोगों की तुलना में अधिक सैक्स करते थे जो इमोजी का इस्तेमाल नहीं किया करते थे.

वहीं एक दूसरी वेबसाइट (DrEd.com) के हाल ही के रिसर्च के अनुसार सेक्शुअली चार्ज्ड इमोजी के तौर पर केले से ज्यादा बैंगन वाली इमोजी का इस्तेमाल किया जाता है. अगर लिंग आधारित आंकड़ों पर गौर फरमाएं तो महिलाएं केले वाली इमोजी का इस्तेमाल ज्यादा करती हैं और पुरुष बैंगन वाली इमोजी का. वहीं जब बात रोमांस की आती है तो दिल बनी आंखों वाली इमोजी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है.

तंत्र साधना में इतना हुआ लीन कि काट डाला दोस्त का सिर

तथाकथित तांत्रिक परमात्मा तंत्र साधना से अपार दौलत पाने का दावा करता था. इस के लिए उस ने अपने दोस्तों विकास और धनंजय से किसी इंसान का कटा सिर लाने को कहा. 5 लाख रुपए के लालच में विकास और धनंजय अपने दोस्त राजू कुमार की हत्या कर उस का सिर काट कर तांत्रिक परमात्मा के पास ले गए. तांत्रिक ने उस खोपड़ी पर 7 दिनों तक तंत्रमंत्र क्रियाएं कीं. यह सब करने के बाद क्या उन्हें दौलत मिल सकी?

सड़क किनारे जंगल में सुबह करीब साढ़े 6 बजे कुछ लोगों की नजर एक लाश पर गई. उस लाश का सिर कटा हुआ था. इस के बाद जो भी उधर से गुजर रहा था, लाश को देखने लगा. उसी दौरान किसी ने इस की सूचना गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ पुलिस को दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई. पुलिस ने देखा कि पेड़ों के बीच एक सिरकटी लहूलुहान लाश पड़ी है. युवक की उम्र करीब 29-30 वर्ष थी. शव के धड़ से सिर गायब था, जबकि शरीर के शेष अंग मौजूद थे. 

सूचना पर पहुंची पुलिस ने डौग स्क्वायड को भी बुला लिया. टीम ने जांचपड़ताल की. मृतक की नारंगी रंग की शर्ट खून से सनी थी, जबकि वह काला सफेद व लाल पट्टी का लोअर पहने हुआ था. पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में उस का सिर तलाशा, लेकिन सिर नहीं मिला. एसीपी सिद्धार्थ गौतम भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस को शव के पास एक गद्दी का कवर भी खून से सना मिला. पुलिस ने शव की पहचान कराने का प्रयास किया, लेकिन  कोई भी उस की शिनाख्त नहीं कर सका. मौके की जांच करने के बाद ऐसा लग रहा था कि उस युवक की हत्या कहीं और करने के बाद शव वहां डाला गया था. 

पुलिस टीम को मृत युवक के दाहिने हाथ पर कुछ लिखा मिला, जो समझ में नहीं आ रहा था. इस के अलावा बाएं हाथ पर किसी नुकीली चीज से काटने के निशान थे. दोपहर को फोरैंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची और जांच की, लेकिन कोई अहम सुराग नहीं मिला. पुलिस ने घटनास्थल की काररवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया. यह घटना गाजियाबाद जिले के टीला मोड़ थाने से करीब एक किलोमीटर दूर लोनी भोपुरा इलाके में 22 जून, 2024 को घटी थी.

डीसीपी (ट्रांस हिंडन) निमिष पाटिल ने इस केस को सुलझाने के लिए एसीपी सिद्धार्थ गौतम के निर्देशन में 6 पुलिस टीमों का गठन किया. सभी टीमें अपनेअपने काम में जुट गईं. पुलिस टीमों ने इस सनसनीखेज वारदात के खुलासे के लिए घटनास्थल के निकट के इलाके को खंगालना शुरू किया. पुलिस ने दिल्ली के 161 थानों से भी लापता व्यक्तियों के बारे में जानकारी हासिल की, लेकिन उन थानों में इस हुलिए के किसी युवक की गुमशुदगी दर्ज नहीं थी. 

पुलिस टीम को हाथ पर बने टैटू से सुराग मिलने की संभावना थी. जांच के दौरान टीम ने दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आसपास के थानों में भी दर्ज गुमशुदगी के रिकौर्ड खंगालने शुरू कर दिए, लेकिन पुलिस को कुछ हासिल नहीं हुआ. पुलिस ने मृतक की फोटो लगे पैंफ्लेट गाजियाबाद और दिल्ली के सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा कर दिए थे. उन्हीं पैंफ्लेट को देख कर दिल्ली के ताहिरपुर का रहने वाला गणेश थाना टीला मोड़ पहुंचा.

उस ने पुलिस को बताया कि उस के साले का 29 साल का बेटा राजू कुमार अचानक 15 जून, 2024 को लापता हो गया. राजू बिहार के मोतिहारी जिला के पिपरा थाना का निवासी था. राजू के मातापिता का निधन हो चुका है. वह उन के साथ ही दिल्ली में ताहिरपुर में रहता था. राजू चाटपकौड़ी का ठेला कमला मार्केट में लगाता था. रात तक जब वह घर वापस नहीं आया, तब उन्हें चिंता हुई. अब सवाल था कि राजू बिना बताए कहां गायब हो गया? उन्होंने इस की संबंधित पुलिस थाने में जा कर शिकायत की, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहींं की और जांच का आश्वासन दे कर घर लौटा दिया था. 

हत्यारों तक कैसे पहुंची पुलिस

पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया. शुरुआती छानबीन के दौरान तुलसी निकेतन में एक बहुमंजिला इमारत की आठवीं मंजिल पर लगे सीसीटीवी कैमरे में एक धुंधली फुटेज हाथ लगी, जिस में एक आटो की हैड व टेल लाइट और पीछे लाल रंग के 2 ट्रायंगल रिफ्लेक्टर नजर आए थे. अब पुलिस ने उस आटो को तलाशना शुरू कर दिया. इस दौरान पुलिस सैकड़ों आटो चैक किए. पुलिस की डेढ़ महीने की मेहनत आखिर रंग लाई और पुलिस ने धुंधली फुटेज से तसवीर साफ कर उस आटोचालक के पास पहुंच गई और उस के आटो को बरामद कर लिया. पुलिस उसी आटो के आधार पर आरोपियों तक जा पहुंची.

आगे की जांच करते हुए पुलिस ने बिहार के मोतिहारी से हत्याकांड में शामिल 2 आरोपियों को 16 अगस्त, 2024 को गिरफ्तार कर लिया. इन में 24 वर्षीय विकास उर्फ मोटा निवासी गली नंबर-1,  ताहिरपुर, दिल्ली तथा उस का साथी 28 वर्षीय धनंजय निवासी कमला मार्केट, दिल्ली जो मूलरूप से हुसैनी, थाना डुमरिया घाट जिला मोतिहारी, बिहार का निवासी है, शामिल थे. जबकि तीसरा मुख्य आरोपी  विकास उर्फ परमात्मा निवासी मोतिहारी बिहार फरार हो गया. 

पता चला कि वह पुलिस से बचने के लिए नेपाल भाग गया है. इस वीभत्स हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने घटना के पौने 2 माह बाद आखिर कर दिया. आरोपियों से पूछताछ के बाद जो कहानी सामने आई, उसे सुन कर पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए. पता चला कि तीनों दोस्तों ने तंत्रमंत्र के जरिए अमीर बनने के लिए राजू नाम के युवक की हत्या कर दी थी. पुलिस ने गिरफ्तार दोनों हत्यारोपियों के कब्जे से आलाकत्ल छुरियां, आटोरिक्शा, ईरिक्शा आदि बरामद कर लिए.

5 लाख के लालच में काटा सिर

आरोपी विकास उर्फ मोटा अपने मामा मुन्ना निवासी गोकुलधाम सोसाइटी शालीमार गार्डन, गाजियाबाद का आटो किराए पर ले कर चलाता था. कुछ महीने पहले उस की मुलाकात धनंजय से हुई थी. धनंजय नई दिल्ली के कमला मार्केट निवासी अपने मामा रंजीत और रणधीर साहनी के पास रह कर खाना बनाने का ठेला लगाता था. विकास उर्फ मोटा धनंजय के ठेले पर खाना खाने के लिए आता था. इस के चलते उस की उस से दोस्ती हो गई. उसी के माध्यम से धनंजय की परमात्मा से मुलाकात हुई. परमात्मा ईरिक्शा चालक था. वह कमला मार्केट के पास किराए के कमरे में रहता था. वह इन दोनों से तंत्रमंत्र विद्या और टोनेटोटके से रुपए कमाने के साथ ही सब कुछ हासिल करने की बात कहता रहता था.

परमात्मा ने धनंजय और विकास को एक दिन बताया कि वे तंत्र विद्या के जरिए बहुत पैसा कमा सकते हैं. उसे तंत्र विद्या करनी आती है. एक दिन तुम दोनों को भी बहुत पैसे मिलेंगे. परमात्मा ने दोनों को जल्द अमीर बनने का सपना दिखाया. उस ने कहा कि इस के लिए एक काम करना होगा. तुम दोनों को ऐसे अनाथ व्यक्ति की तलाश करनी होगी, जिस की हत्या कर के उस की खोपड़ी काटने के बाद उस खोपड़ी पर तंत्र क्रिया की जा सके. परमात्मा ने धनंजय से अनाथ युवक को तलाश करने के लिए 5 लाख रुपए देने का लालच भी दिया. 

रुपयों के लालच में धनंजय और विकास उर्फ मोटा एक साथ ऐसे युवक की तलाश करने लगे. इस दौरान धनंजय ने अपने पड़ोसी और दोस्त राजू कुमार, जो उस के साथ ही चाटपकौड़े का ठेला लगाता था, को निशाना बनाने के लिए अपने जाल में फंसाना शुरू कर दिया. राजू नशा करने का आदी था. इस का धनजंय और विकास ने फायदा उठाया. कई दिनों तक विकास और धनंजय ने राजू के साथ शराब पी. 15 जून, 2024 को दोनों राजू को शराब का लालच दे कर तथाकथित तांत्रिक परमात्मा के कमरे पर ले गए. वहां 6 दिन तक उसे शराब पिलाते रहे. उसे घर तक नहीं जाने दिया. सातवें दिन यानी 21-22 जून की दरमियानी रात को राजू की उन्होंने गमछे से गला दबा कर हत्या कर दी. इस के बाद शव को पंखे से लटका दिया. 

शव को छिपाने के लिए तीनों ने रात करीब ढाई बजे विकास उर्फ मोटा के आटो में शव को रखा और टीला मोड़ थाना क्षेत्र की पंचशील कालोनी ले कर गए. पुलिस द्वारा पकड़े जाने के डर से उन्होंने आटो को एक सुनसान जगह पर सड़क किनारे खड़ा किया और मीट काटने वाली छुरी से राजू का सिर काट कर अलग कर दिया. फिर उस के धड़ को जंगल में फेंक  दिया. तीनों ने राजू के कटे सिर को प्लास्टिक की बाल्टी में रखा और आटो में बैठ कर वापस दिल्ली आ गए.

कटे सिर पर 7 दिनों तक करते रहे तंत्रक्रिया

हत्या करने के बाद तीनों आरोपियों ने हैवानियत की सभी हदें पार कर दीं. परमात्मा के दिल्ली के कमला मार्केट स्थित कमरे पर चाकू से उन्होंने उस की आंखें निकालीं, फिर नाक, कान काट कर खोपड़ी की पूरी तरह खाल उतार दी. राजू की खोपड़ी के साथ परमात्मा ने काला टीका लगा कर व काले कपड़े पहन कर तंत्र साधना शुरू की. उस ने मानव खोपड़ी पर तंत्रमंत्र विद्या से पैसे कमाने का तरीका आजमाया. वह कुछ घंटे प्रयास के बावजूद सफल नहीं हुआ. लेकिन उस ने हार नहीं मानी और लगातार 7 दिनों तक वह तंत्र साधना करता रहा, फिर भी उसे कुछ हासिल नहीं हुआ.  

इस के बाद उस ने अपने दोनों साथियों से कहा कि खोपड़ी पर चोट का निशान है. यह क्रैक हो गई है. इसलिए यह खोपड़ी तंत्र साधना के लायक नहीं है. तुम लोगों को दूसरी मानव खोपड़ी लानी होगी. खोपड़ी को 7 दिनों तक कमरे में रखने से दुर्गंध आने लगी थी, तब तांत्रिक परमात्मा खोपड़ी ले कर भाग गया और उसे दिल्ली में जीटीबी अस्पताल के पास नाले में फेंक आया. अस्पताल के नाले में खोपड़ी को फेंकने की बात उस ने अपने दोनों साथियों को बताई.

आंखें निकाल कर खेले कंचे

इस घटना से 1994 की फिल्म अंदाज अपना अपनाकी याद आ जाती है. इस फिल्म में क्राइम मास्टर गोगो के किरदार में शक्ति कपूर का फेमस डायलौग था, आंखें निकाल कर गोटियां खेलूंगा.’ इन आरोपियों ने इस डायलौग को हकीकत में बदल दिया. तंत्रमंत्र क्रिया के दौरान राजू के कटे सिर से आंखें निकालने के बाद उन से तांत्रिक क्रिया करते हुए कंचे (गोटियां) भी खेले. इस बात की जानकारी पकड़े गए दोनों आरोपियों धनंजय व विकास उर्फ मोटा ने पुलिस को दी. 5 लाख रुपए का लालच दे कर परमात्मा ने जिंदा मानव की खोपड़ी लाने की बात कह कर एक निर्दोष युवक की हत्या करा दी. इस हत्याकांड का खुलासा करने व आरोपियों को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम को पुलिस कमिश्नर (गाजियाबाद) अजय कुमार मिश्र की ओर से 25 हजार रुपए का तथा डीसीपी (ट्रांस हिंडन) निमिष पाटिल की ओर से 10 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा की गई है. 

पुलिस पूछताछ में विकास और धनंजय ने बताया कि मुख्य आरोपी परमात्मा ने राजू की खोपड़ी को दिल्ली में जीटीबी अस्पताल के नाले में फेंक दिया था. उस के साथ उस की आंखें, नाक, कान और बाल भी थे.  इस तथ्य के सामने आने के बाद टीला मोड़ पुलिस ने दिल्ली पुलिस की मदद से नाले की सफाई कराई, लेकिन कई घंटे के प्रयास के बाद भी टीम को सफलता नहीं मिली. एसीपी सिद्धार्थ गौतम ने बताया, परमात्मा ने अपने एक परिचित के पास अपना ईरिक्शा 35 हजार रुपए में गिरवी रख दिया था. उस के बाद वह अपना मोबाइल बंद कर फरार हो गया. 

राजू कुमार की हत्या के बाद दोनों हत्यारोपी धनंजय और विकास एकदूसरे से मिलते थे. दोनों ने इस बीच परमात्मा से भी मिलने का प्रयास किया, लेकिन उस का कुछ पता नहीं चला. पुलिस ने यदि मृतक राजू कुमार के फूफा गणेश की बात को गंभीरता से लेते हुए 15 जून, 2024 को राजू के लापता होने पर उन के द्वारा शिकायत करने पर राजू की गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू कर दी होती तो शायद राजू की जान बच सकती थी. क्योंकि उस की हत्या 21-22 जून की रात को की गई थी. ये लालच था जल्दी अमीर बनने का और इस लालच ने एक निर्दोष दोस्त को ऐसी मौत दी, जिसे सुन कर पुलिस भी हैरान रह गई. पैसे पाने का सपना पाले हत्यारे दोस्तों के हाथ यहीं नहीं कांपे, उन्होंने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं. इन के इस जघन्य अपराध ने दोस्ती को भी शर्मसार कर दिया. 

पुलिस ने दोनों आरोपियों विकास उर्फ मोटा और धनंजय को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. वहीं पुलिस मुख्य आरोपी काला जादू करने वाले तथाकथित तांत्रिक परमात्मा की तलाश में जुटी थी. अपनी किस्मत बदलने की चाहत में एक निर्दोष को बलि का बकरा उस के ही वहशी बने दोस्तों ने बनाया. लेकिन तंत्र साधना के चक्कर में पड़ कर दोस्त की जान लेने पर भी उन्हें धन तो नहीं मिला. हां, जेल की सलाखों के पीछे जरूर जाना पड़ा.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

जब एक पति ने पत्नी के होते हुए भी किसी ओर बनाएं समलैंगिक फिर हुआ ये…

बैडमिंटन खेलतेखेलते दीपा शादीशुदा और अपनी से दोगुनी उम्र के बबलू से इस कदर प्यार करने लगी कि अपने घर वालों की खिलाफत के बावजूद भी, उस ने बबलू से शादी कर ली. बाद में सुमन नाम की एक महिला के साथ बनी नजदीकी ने दीपा को समलैंगिक संबंधों तक पहुंचा दिया, फिर… 

‘‘मम्मी मैं जानता हूं कि आप को मेरी एक बात बुरी लग सकती है. वो यह कि सुमन आंटी जो आप की सहेली हैं, उन का यहां आना मुझे अच्छा नहीं लगता. और तो और मेरे दोस्त तक कहते हैं कि वह पूरी तरह से गुंडी लगती हैं.’’ बेटे यशराज की यह बात सुन कर मां दीपा उसे देखती ही रह गई. दीपा बेटे को समझाते हुए बोली, ‘‘बेटा सुमन आंटी अपने गांव की प्रधान है वह ठेकेदारी भी करती है. वह आदमियों की तरह कपड़े पहनती है, उन की तरह से काम करती है इसलिए वह ऐसी दिखती है. वैसे एक बात बताऊं कि वह स्वभाव से अच्छी है.’’

मां और बेटे के बीच जब यह बहस हो रही थी तो वहीं कमरे में दीपा का पति बबलू भी बैठा था. उस से जब चुप नहीं रहा गया तो वह बीच में बोल उठा,‘‘दीपा, यश को जो लगा, उस ने कह दिया. उस की बात अपनी जगह सही है. मैं भी तुम्हें यही समझाने की कोशिश करता रहता हूं लेकिन तुम मेरी बात मानने को ही तैयार नहीं होती हो.’’

‘‘यश बच्चा है. उसे हमारे कामधंधे आदि की समझ नहीं है. पर आप समझदार हैं. आप को यह तो पता ही है कि सुमन ने हमारे एनजीओ में कितनी मदद की है.’’ दीपा ने पति को समझाने की कोशिश करते हुए कहा. ‘‘मदद की है तो क्या हुआ? क्या वह अपना हिस्सा नहीं लेती है? और 8 महीने पहले उस ने हम से जो साढ़े 3 लाख रुपए लिए थे. अभी तक नहीं लौटाए.’’ पति बोला. मां और बेटे के बीच छिड़ी बहस में अब पति पूरी तरह शामिल हो गया था. ‘‘बच्चों के सामने ऐसी बातें करना जरूरी है क्या?’’ दीपा गुस्से में बोली.

‘‘यह बात तुम क्यों नहीं समझती. मैं कब से तुम्हें समझाता रहा हूं कि सुमन से दूरी बना लो.’’ बबलू सिंह ने कहा तो दीपा गुस्से में मुंह बना कर दूसरे कमरे में चली गई. बबलू ने भी दीपा को उस समय मनाने की कोशिश नहीं की. क्योंकि वह जानता था कि 2-4 घंटे में वह नारमल हो जाएगी. बबलू सिंह उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर के इस्माइलगंज में रहता था. कुछ समय पहले तक इस्माइलगंज एक गांव का हिस्सा होता था. लेकिन शहर का विकास होने के बाद अब वह भी शहर का हिस्सा हो गया है. बबलू सिंह ठेकेदारी का काम करता था. इस से उसे अच्छी आमदनी हो जाती थी इसलिए वह आर्थिकरूप से मजबूत था

उस की शादी निर्मला नामक एक महिला से हो चुकी थी. शादी के 15 साल बाद भी निर्मला मां नहीं बन सकी थी. इस वजह से वह अकसर तनाव में रहती थी. बबलू सिंह को बैडमिंटन खेलने का शौक था. उसी दौरान उस की मुलाकात लखनऊ के ही खजुहा रकाबगंज मोहल्ले में रहने वाली दीपा से हुई थी. वह भी बैडमिंटन खेलती थी. दीपा बहुत सुंदर थी. जब वह बनठन कर निकलती थी तो किसी हीरोइन से कम नहीं लगती थी. बैडमिंटन खेलतेखेलते दोनों अच्छे दोस्त बन गए. 40 साल का बबलू उस के आकर्षण में ऐसा बंधा कि शादीशुदा होने के बावजूद खुद को संभाल न सका. दीपा उस समय 20 साल की थी. बबलू की बातों और हावभाव से वह भी प्रभावित हो गई. लिहाजा दोनों के बीच प्रेमसंबंध हो गए. उन के बीच प्यार इतना बढ़ गया कि उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया.

दीपा के घर वालों ने उसे बबलू से विवाह करने की इजाजत नहीं दी. इस की एक वजह यह थी कि एक तो बबलू दूसरी बिरादरी का था और दूसरे बबलू पहले से शादीशुदा था. लेकिन दीपा उस की दूसरी पत्नी बनने को तैयार थी. पति द्वारा दूसरी शादी करने की बात सुन कर निर्मला नाराज हुई लेकिन बबलू ने उसे यह कह कर राजी कर लिया कि तुम्हारे मां बनने की वजह से दूसरी शादी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. पति की दलीलों के आगे निर्मला को चुप होना पड़ा क्योंकि शादी के 15 साल बाद भी उस की कोख नहीं भरी थी. लिहाजा न चाहते हुए भी उस ने पति को शौतन लाने की सहमति दे दी.

घरवालों के विरोध को नजरअंदाज करते हुए दीपा ने अपनी उम्र से दोगुने बबलू से शादी कर ली और वह उस की पहली पत्नी निर्मला के साथ ही रहने लगी. करीब एक साल बाद दीपा ने एक बेटे को जन्म दिया जिस का नाम यशराज रखा गया. बेटा पैदा होने के बाद घर के सभी लोग बहुत खुश हुए. अगले साल दीपा एक और बेटे की मां बनी. उस का नाम युवराज रखा. इस के बाद तो बबलू दीपा का खास ध्यान रखने लगा. बहरहाल दीपा बबलू के साथ बहुत खुश थी.

दोनों बच्चे बड़े हुए तो स्कूल में उन का दाखिला करा दिया. अब यशराज जार्ज इंटर कालेज में कक्षा 9 में पढ़ रहा था और युवराज सेंट्रल एकेडमी में कक्षा 7 में. दीपा भी 35 साल की हो चुकी थी और बबलू 55 का. उम्र बढ़ने की वजह से वह दीपा का उतना ध्यान नहीं रख पाता था. ऊपर से वह शराब भी पीने लगा. इन्हीं सब बातों को देखने के बाद दीपा को महसूस होने लगा था कि बबलू से शादी कर के उस ने बड़ी गलती की थी. लेकिन अब पछताने से क्या फायदा. जो होना था हो चुका.

बबलू का 2 मंजिला मकान था. पहली मंजिल पर बबलू की पहली पत्नी निर्मला अपने देवरदेवरानी और ससुर के साथ रहती थी. नीचे के कमरों में दीपा अपने बच्चों के साथ रहती थी. उन के घर से बाहर निकलने के भी 2 रास्ते थे. दीपा का बबलू के परिवार के बाकी लोगों से कम ही मिलनाजुलना  होता था. वह उन से बातचीत भी कम करती थी. बबलू को शराब की लत हो जाने की वजह से उस की ठेकेदारी का काम भी लगभग बंद सा हो गया था. तब उस ने कुछ टैंपो खरीद कर किराए पर चलवाने शुरू कर दिए थे. उन से होने वाली कमाई से घर का खर्च चल रहा था.

शुरू से ही ऊंचे खयालों और सपनों में जीने वाली दीपा को अब अपनी जिंदगी बोरियत भरी लगने लगी थी. खुद को व्यस्त रखने के लिए दीपा ने सन 2006 में ओम जागृति सेवा संस्थान के नाम से एक एनजीओ बना लिया. उधर बबलू का जुड़ाव भी समाजवादी पार्टी से हो गया. अपने संपर्कों की बदौलत उस ने एनजीओ को कई प्रोजेक्ट दिलवाए. इसी बीच सन 2008 में दीपा की मुलाकात सुमन सिंह नामक महिला से हुई. सुमन सिंह गोंडा करनैलगंज के कटरा शाहबाजपुर गांव की रहने वाली थी. वह थी तो महिला लेकिन उस की सारी हरकतें पुरुषों वाली थीं. पैंटशर्ट पहनती और बायकट बाल रखती थी. सुमन निर्माणकार्य की ठेकेदारी का काम करती थी. उस ने दीपा के एनजीओ में काम करने की इच्छा जताई. दीपा को इस पर कोई एतराज था. लिहाजा वह एनजीओ में काम करने लगी

सुमन एक तेजतर्रार महिला थी. अपने संबंधों से उस ने एनजीओ को कई प्रोजेक्ट भी दिलवाए. तब दीपा ने उसे अपनी संस्था का सदस्य बना दिया. इतना ही नहीं वह संस्था की ओर से सुमन को उस के कार्य की एवज में पैसे भी देने लगी. कुछ ही दिनों में सुमन के दीपा से पारिवारिक संबंध बन गए. दीपा को ज्यादा से ज्यादा बनठन कर रहने और सजनेसंवरने का शौक था. वह हमेशा बनठन कर और ज्वैलरी पहने रहती थी. 2 बच्चों की मां बनने के बाद भी उस में गजब का आकर्षण था. उसे देख कर कोई भी उस की ओर आकर्षित हो सकता था. एनजीओ में काम करने की वजह से सुमन दीपा को अकसर अपने साथ ही रखती थी. दीपा इसे सुमन की दोस्ती समझ रही थी पर सुमन पुरुष की तरह ही दीपा को प्यार करने लगी थी.

एक बार जब सुमन दीपा को प्यार भरी नजरों से देख रही थी तो दीपा ने पूछा, ‘‘ऐसे क्या देख रही हो? मैं भी तुम्हारी तरह एक महिला हूं. तुम मुझे इस तरह निहार रही हो जैसे कोई प्रेमी प्रेमिका को देख रहा हो.’’

‘‘दीपा, तुम मुझे अपना प्रेमी ही समझो. मैं सच में तुम्हें बहुत प्यार करने लगी हूं.’’ सुमन ने मन में दबी बातें उस के सामने रख दीं. सुमन की बातें सुनते ही वह चौंकते हुए बोली, ‘‘यह तुम कैसी बातें कर रही हो? कहीं 2 लड़कियां आपस में प्रेमीप्रेमिका हो सकती हैं?’’

 ‘‘दीपा, मैं लड़की जरूर हूं पर मेरे अंदर कभीकभी लड़के सा बदलाव महसूस होता है. मैं सबकुछ लड़कों की तरह करना चाहती हूं. प्यार और दोस्ती सबकुछ. इसीलिए तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मैं तुम से शादी भी करना चाहती हूं.’’

‘‘मैं पहले से शादीशुदा हूं. मेरे पति और बच्चे हैं.’’ दीपा ने उसे समझाने की कोशिश की.

‘‘मैं तुम्हें पति और बच्चों से अलग थोड़े कर रही हूं. हम दोस्त और पतिपत्नी दोनों की तरह रह सकते हैं. सब से अच्छी बात तो यह है कि हमारे ऊपर कोई शक भी नहीं करेगा. दीपा, मैं सच कह रही हूं कि मुझे तुम्हारे करीब रहना अच्छा लगता है.’’

‘‘ठीक है बाबा, पर कभी यह बातें किसी और से मत कहना.’’ दीपा ने सुमन से अपना पीछा छुड़ाने के अंदाज में कहा.

 ‘‘दीपा, मेरी इच्छा है कि तुम मुझे सुमन नहीं छोटू के नाम से पुकारा करो.’’

‘‘समझ गई, आज से तुम मेरे लिए सुमन नहीं छोटू हो.’’ इतना कह कर सुमन और दीपा करीब आ गए. दोनों के बीच आत्मीय संबंध बन गए थे. सुमन ने रिश्ते को मजबूत करने के लिए एक दिन दीपा के साथ मंदिर जा कर शादी भी कर ली. सुमन के करीब आने से दीपा के जीवन को भी नई उमंग महसूस होने लगी थी कि कोई तो है जो उसे इतना प्यार कर रही है. इस के बाद सुमन एक प्रेमी की तरह उस का खयाल रखने लगी थी. समय गुजरने लगा. दीपा के पति और परिवार को इस बात की कोई भनक नहीं थी. वह सुमन को उस की सहेली ही समझ रहे थे. एनजीओ के काम के कारण सुमन अकसर ही दीपा के साथ उस के घर पर ही रुक जाती थी. 

सुमन को भी शराब पीने का शौक था. बबलू भी शराब पीता था. कभीकभी सुमन बबलू के साथ ही पीने बैठ जाती थी. जिस से सुमन और बबलू की दोस्ती हो गई. सुमन के लिए उस के यहां रुकना और ज्यादा आसान हो गया था. उस के रुकने पर बबलू भी कोई एतराज नहीं करता था. वह भी उसे छोटू कहने लगा. साल 2010 में उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव हुए तो सुमन ने अपने गांव कटरा शाहबाजपुर से ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ा. सुमन सिंह का भाई विनय सिंह करनैलगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर बदमाश था. उस के पिता अवधराज सिंह के खिलाफ भी कई आपराधिक मुकदमे करनैलगंज थाने में दर्ज थे. दोनों बापबेटों की दबंगई का गांव में खासा प्रभाव था. जिस के चलते सुमन ग्रामप्रधान का चुनाव जीत गई. उस ने गोंडा के पूर्व विधायक अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया की बहन सरोज सिंह को भारी मतों से हराया.

ग्राम प्रधान बनने के बाद सुमन सिंह सीतापुर रोड पर बनी हिमगिरी में फ्लैट ले कर रहने लगी. सन 2010 में प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद उस ने अपने संबंधों की बदौलत फिर से ठेकेदारी शुरू कर दी. अपनी सुरक्षा के लिए वह .32 एमएम की लाइसैंसी रिवाल्वर भी साथ रखने लगी. उस की और दीपा की दोस्ती अब और गहरी होने लगी थी. सुमन किसी न किसी बहाने से दीपा के पास ही रुक जाती थी. ऐसे में दीपा और सुमन एक साथ ही रात गुजारती थीं. यह सब बातें धीरेधीरे बबलू और उस के बच्चों को भी पता चलने लगी थीं. तभी तो उन्हें सुमन का उन के यहां आना अच्छा नहीं लगता था. 

सुमन महीने में 20-25 दिन दीपा के घर पर रुकती थी. शनिवार और रविवार को वह दीपा को अपने साथ हिमगिरी कालोनी ले जाती थी. दीपा को सुमन के साथ रहना कुछ दिनों तक तो अच्छा लगा, लेकिन अब वह सुमन से उकता गई थी. एक बार सुमन ने दीपा से किसी काम के लिए साढ़े 3 लाख रुपए उधार लिए थे. तयशुदा वक्त गुजर जाने के बाद भी सुमन ने पैसे नहीं लौटाए तो दीपा ने उस से तकादा करना शुरू कर दिया. तकादा करना सुमन को अच्छा नहीं लगता था. इसलिए दीपा जब कभी उस से पैसे मांगती तो सुमन उस से लड़ाईझगड़ा कर बैठी थी. 27 जनवरी, 2014 की देर रात करीब 9 बजे सुमन दीपा के घर अंगुली में अपना रिवाल्वर घुमाते हुए पहुंची. दीपा और बबलू में सुमन को ले कर सुबह ही बातचीत हो चुकी थी. अचानक उस के धमकने से वे लोग पशोपेश में पड़ गए.

‘‘क्या बात है छोटू आज तो बिलकुल माफिया अंदाज में दिख रहे हो.’’ दीपा बोली.

इस के पहले कि सुमन कुछ कहती. बबलू ने पूछ लिया, ‘‘छोटू अकेले ही आए हो क्या?’’

‘‘नहीं, भतीजा विपिन और उस का दोस्त शिवम मुझे छोड़ कर गए हैं. कई दिनों से दीपा के हाथ का बना खाना नहीं खाया था. उस की याद आई तो चली आई.’’

सुमन और बबलू बातें करने लगे तो दीपा किचन में चली गई. सुमन ने भी फटाफट बबलू से बातें खत्म कीं और दीपा के पीछे किचन में पहुंच कर उसे पीछे से अपनी बांहों में भर लिया. पति और बच्चोें की बातें सुन कर दीपा का मूड सुबह से ही खराब था. वह सुमन को झिड़कते हुए बोली, ‘‘छोटू ऐसे मत किया करो. अब बच्चे बड़े हो गए हैं. यह सब उन को बुरा लगता है.’’

उस समय सुमन नशे में थी. उसे दीपा की बात समझ नहीं आई. उसे लगा कि दीपा उस से बेरुखी दिखा रही है. वह बोली, ‘‘दीपा, तुम अपने पति और बच्चों के बहाने मुझ से दूर जाना चाहती हो. मैं तुम्हारी बातें सब समझती हूं.’’ दीपा और सुमन के बीच बहस बढ़ चुकी थी दोनों की आवाज सुन कर बबलू भी किचन में पहुंच गया. लड़ाई आगे बढ़े इस के लिए बबलू सिंह ने सुमन को रोका और उसे ले कर ऊपर के कमरे में चला गया. वहां दोनों ने शराब पीनी शुरू कर दी. शराब के नशे में खाने के समय सुमन ने दीपा को फिर से बुरा भला कहा.

दीपा को भी लगा कि शराब के नशे में सुमन घर पर रुक कर हंगामा करेगी. उस की तेज आवाज पड़ोसी भी सुनेंगे जिस से घर की बेइज्जती होगी इसलिए उस ने उसे अपने यहां रुकने के लिए मना लिया. बबलू सिंह ऊपर के कमरे में सोने चला गया. दीपा के कहने के बाद भी सुमन उस रात वहां से नहीं गई बल्कि वहीं दूसरे कमरे में जा कर सो गई. 28 जनवरी, 2014 की सुबह दीपा के बच्चे स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे. वह उन के लिए नाश्ता तैयार कर रही थी. तभी किचन में सुमन पहुंच गई. वह उस समय भी नशे की अवस्था में ही थी. उस ने दीपा से कहा, ‘‘मुझ से बेरुखी की वजह बताओ इस के बाद ही परांठे बनाने दूंगी.’’

‘‘सुमन, अभी बच्चों को स्कूल जाना है नाश्ता बनाने दो. बाद में बात करेंगे.’’ पहली बार दीपा ने छोटू के बजाय सुमन कहा था.

‘‘तुम ऐसे नहीं मानोगी.’’ कह कर सुमन ने हाथ में लिया रिवाल्वर ऊपर किया और किचन की छत पर गोली चला दी. गोली चलते ही दीपा डर गई. वह बोली, ‘‘सुमन होश में आओ.’’ इस के बाद वह उसे रोकने के लिए उस की ओर बढ़ी. सुमन उस समय गुस्से में उबल रही थी. उस ने उसी समय दीपा के सीने पर गोली चला दी. गोली चलते ही दीपा वहीं गिर पड़ी. गोली की आवाज सुन कर बच्चे किचन की तरफ आए. उन्होंने मां को फर्श पर गिरा देखा तो वे रोने लगे. बबलू उस समय ऊपर के कमरे में था. बच्चों की आवाज सुन कर वो और उस की पहली पत्नी निर्मला भी नीचे आ गए. निर्मला सुमन से बोली, ‘‘क्या किया तुम ने?’’

‘‘कुछ नहीं यह गिर पड़ी है. इसे कुछ चोट लग गई है.’’ सुमन ने जवाब दिया. निर्मला ने दीपा की तरफ देखा तो उस के पेट से खून बहता देख वह सुमन पर चिल्ला कर बोली, ‘‘छोटू तुम ने इसे मार दिया.’’ दीपा की हालत देख कर बबलू के आंसू निकल पड़े. उस ने पत्नी को हिलाडुला कर देखा. लेकिन उन की सांसें तो बंद हो चुकी थीं. वह रोते हुए बोला, ‘‘छोटू, यह तुम ने क्या कर दिया.’’ वह दीपा को कार से तुरंत राममनोहर लोहिया अस्पताल ले गया जहां डाक्टरों ने दीपा को मृत घोषित कर दिया. चूंकि घर वालों के बीच सुमन घिर चुकी थी. इसलिए उस ने फोन कर के अपने भतीजे विपिन सिंह और उस के साथी शिवम मिश्रा को वहीं बुला लिया. तभी सुमन ने अपना रिवाल्वर विपिन सिंह को दे दिया. विपिन ने रिवाल्वर से बबलू के घरवालों को धमकाने की कोशिश की लेकिन जब घरवाले उलटे उन पर हावी होने लगे वे दोनों वहां से भाग गए

तब अपनी सुरक्षा के लिए सुमन ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. बबलू के भाई बलू सिंह ने गाजीपुर थाने फोन कर के दीपा की हत्या की खबर दे दी. घटना की जानकारी पाते ही थानाप्रभारी नोवेंद्र सिंह सिरोही, एसएसआई रामराज कुशवाहा, सीटीडी प्रभारी सबइंसपेक्टर अशोक कुमार सिंह, रूपा यादव, ब्रजमोहन सिंह के साथ मौके पर पहुंच गए. हत्या की सूचना पाते ही एसएसपी लखनऊ प्रवीण कुमार, एसपी(ट्रांसगोमती) हबीबुल हसन और सीओ गाजीपुर विशाल पांडेय भी घटनास्थल पर पहुंच गए.

बबलू के घर पहुंच कर पुलिस ने दरवाजा खुलवा कर सब से पहले सुमन को हिरासत में लिया. उस के बाद राममनोहर लोहिया अस्पताल पहुंच कर दीपा की लाश कब्जे में ले कर उसे पोस्टमार्टम हाउस भेज दियापुलिस ने थाने ला कर सुमन से पूछताछ की तो उस ने सच्चाई उगल दी. इस के बाद कांस्टेबल अरुण कुमार सिंह, शमशाद, भूपेंद्र वर्मा, राजेश यादव, ऊषा वर्मा और अनीता सिंह की टीम ने विपिन को भी गिरफ्तार कर लिया. उन से हत्या में प्रयोग की गई रिवाल्वर और सुमन की अल्टो कार नंबर यूपी32 बीएल6080 बरामद कर ली. जिस से ये दोनों फरार हुए थे.

देवरिया जिले के भटनी कस्बे का रहने वाला शिवम गणतंत्र दिवस की परेड देखने लखनऊ आया था. वह एक होनहार युवक था. लखनऊ घूमने के लिए विपिन ने उसे 1-2 दिन और रुकने के लिए कहा. उसे क्या पता था कि यहां रुकने पर उसे जेल जाना पड़ जाएगा. दोनों अभियुक्तों के खिलाफ पुलिस ने भादंवि की धारा 302, 506 के तहत मामला दर्ज कर के उन्हें 29 जनवरी, 2014 को मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर जेल भेज दियाजेल जाने से पहले सुमन अपने किए पर पछता रही थी. उस ने पुलिस से कहा कि वह दीपा से बहुत प्यार करती थी. गुस्से में उस का कत्ल हो गया. सुमन के साथ जेल गए शिवम को लखनऊ में रुकने का पछतावा हो रहा था.

अपराध किसी तूफान की तरह होता है. वह अपने साथ उन लोगों को भी तबाह कर देता है जो उस से जुड़े नहीं होते हैं. दीपा और सुमन के गुस्से के तूफान में शिवम के साथ विपिन और दीपा का परिवार खास कर उस के 2 छोटेछोटे बच्चे प्रभावित हुए हैं. सुमन का भतीजा विपिन भागने में सफल रहा. कथा लिखे जाने तक उस की तलाश जारी थी.

   — कथा पुलिस सूत्रों और मोहल्ले वालों से की गई बातचीत के आधार पर

हरियाणा : राम रहीम के आगे साष्टांग राजनीति

हरियाणा की राजनीति में जेल में बंद आरोपी और कैद की सजा भुगत रहे तथाकथित ‘बाबा’ राम रहीम के सामने एक बार फिर राजनीति ने हाथ जोड़ लिया है और सिर झुका कर साष्टांग करती दिखाई दे रही है. यह तो एक उदाहरण मात्र है, हमारे देश में धार्मिक पाखंड के आगे नेता सत्ता पाने के लिए लंबे समय से साष्टांग करते रहे हैं. दरअसल, इस की वजह हरियाणा विधानसभा चुनाव हैं, जहां के 9 जिलों के तकरीबन 30 सीटों पर लाखों की संख्या में उन के ‘भगत’ हैं. इन्हीं की वोट की ताकत के आगे बाबा विभिन्न चुनावों में उलटफेर की कोशिश करते रहे हैं. इस में कभी पास हो जाते हैं और कभी फेल. जेल जाने के बाद उन के जादू में कमी जरूर आई है, लेकिन बाहर आते ही भक्त और नेता चरण वंदना शुरू कर देते हैं.

वोटिंग से पहले राम रहीम का फिर पैरोल पर सशर्त बाहर आना यह बताता है कि नेताओं का वजूद किस तरह कमजोर होता जा रहा है. उन पर से लोगों का भरोसा उठ चुका है और उन्हें ऐसे अपराधियों की जरूरत है, जो उन्हें कुरसी तक पहुंचाएं.

अब यह चर्चा छिड़ गई है कि बाबा राम रहीम इस बार कितना चुनाव में कितना असर डालेंगे? आइए, आप को बताते हैं कि पैरोल पर रिहाई के बाद राम रहीम की क्या स्थिति है. राम रहीम मुसकराते हुए सुबहसुबह भारी सुरक्षा के बीच रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ गए हैं. इधर चुनाव आयोग ने सशर्त उन्हें 20 दिनों की पैरोल दी है. निर्देश है कि वे न तो हरियाणा में रहेंगे और न ही चुनाव प्रचार करेंगे. मगर इस के बावजूद नेताओं को उन की जरूरत महसूस हो रही है. ऐसा लग रहा है कि उन के भक्त उन के कहे पर वोट देंगे.

दरअसल, ऐसा अनेक बार हो चुका है. राम रहीम के नाम यह रिकौर्ड है कि जेल में रहते हुए वे बारबार बाहर आते रहे हैं और उस का एक ही सबब है, सत्ता पक्ष की मदद करना. अगर देखें तो पाएंगे अब तक तथाकथित ‘बाबा’ राम रहीम तकरीबन 275 दिन पैरोल या फरलो पर बाहर रह चुके हैं. यह कैसा संयोग है कि वह अमूमन वे उन्हीं दिनों जेल से बाहर आते हैं, जब कहीं न कहीं चुनाव चल रहे होते हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि देश की सुप्रीम कोर्ट को इस पर स्वयं संज्ञान ले कर इस की जांच करानी चाहिए और नरेंद्र मोदी की सीबीआई को भी इसे संज्ञान में लेना चाहिए.

याद रहे कि तकरीबन महीनाभर पहले ही पैरोल पर रह कर राम रहीम जेल गए थे. पूछा जा रहा है कि एक तरफ संगीन मामलों में सजायाफ्ता कैदी को पैरोल मिल जाती है, वहीं बहुत सारे आरोपियों को जमानत तक नहीं मिल पाती. बहुत सारे कैदियों को बहुत जरूरतमें भी पैरोल नहीं मिलती है.

शायद नेताओं को यह जानकारी है कि राम रहीम का हरियाणा के कुछ जिलों में खासा असर है, इसलिए अनुयायियों को राजनीतिक संदेश देने उन्हें बाहर लाया आता है. बता दें कि इससे पहले वे हरियाणा नगरनिकाय चुनाव के समय 30 दिन की पैरोल पर बाहर आए थे. आदमपुर विधानसभा उपचुनाव से पहले उन्हें 40 दिन की पैरोल मिली थी. हरियाणा पंचायत चुनाव से पहले भी उन्हें पैरोल मिली थी. राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले उसे 29 दिन की फरलो दी गई थी.

कुलमिला कर जब तक देश की सब से बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट का डंडा नहीं चलेगा, यह मजाक जारी रहेगा.

हरियाणा में लगभग 20 फीसदी दलित मतदाता हैं. इसे अपने पक्ष में लेने के लिए बाबा जैसे अपराधी को भी जेल से बाहर ला कर के नेताओं ने दिखा दिया है कि वे सत्ता के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं.

कहते हैं न कि दूध का जला छाछ को भी फूंकफूंक कर पीता है, हरियाणा में भी राजनीति और नेता यही कर रहे हैं, राम रहीम हर बार कोशिश करते हैं कि उन का असर दिखे. साल 2019 के में चुनाव में सिरसा (डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय) में भी भाजपा जीत नहीं पाई. इसी तरह साल 2012 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की डूबती नैया भी बाबा नहीं बचा पाए थे, जबकि बाबा का आशीर्वाद लेने कैप्टन सपत्नीक सिरसा पहुंचे थे. इतना ही नहीं डबवाली सीट पर डेरा सच्चा सौदा ने खुल कर इनेलो का विरोध किया था, पर इनेलो उम्मीदवार जीत गए. साल 2009 में अजय चौटाला भी डेरा के विरोध के बावजूद इस सीट से जीत गए थे. कुलमिला कर राम रहीम का जादू कभी चलता है, कभी नहीं चलता मगर नेता उन का आशीर्वाद लेने के लिए उन के अपराधी चेहरे को भूल जाते हैं और यह बताते हैं कि उन का जनता से सरोकार हो या फिर नहीं हो, वे राम रहीम बाबा को सिर पर बैठाने के लिए तैयार हैं.

गले पड़ने वाले आशिक से बचें कैसे, ये है आसान टिप्स

Sex Tips in Hindi: इतना ही नहीं, वे उसे अपने साथ कहीं भी ले जा सकेंगी. इस प्रोडक्ट का नाम ‘बौयफ्रेंड हग स्पीकर्स’ (Boyfriend Hug Speakers) है. 2 बड़ी बांहों वाले इस प्रोडक्ट की बाजुओं में ब्लूटुथ स्पीकर्स भी लगे हैं जिन को गले लगाने पर म्यूजिक बजता है. सवाल उठता है कि ऐसा नकली बौयफ्रेंड बनाने की जरूरत ही क्या है? इस का जवाब यह है कि जापान (Japan) ही नहीं, बल्कि अब हर कहीं ऐसे भावनात्मक लड़कों की कमी हो गई है जो अपनी गर्लफ्रेंड को गले लगा कर उस को राहत दे सकें. हां, गले पड़ने वाले लड़कों की कमी नहीं है. दूर क्यों जाएं, भारत में मीडिया में ऐसी खबरें भरी रहती हैं जिन में गले पड़ने वाले लड़कों की गुस्ताखियां या कहें अपराध लड़कियों के लिए आफत का सैलाब बन गए हैं.

जरा सी जवानी फूटी नहीं की कुछ मनचले बन जाते हैं फिल्म ‘डर’ के शाहरुख खान. लड़की थोड़ा सा पास आई नहीं कि वे उस पर सिर्फ अपना हक समझने लगते हैं, बपौती समझने लगते हैं. मजाल है कोई दूसरा देख जाए. अगर लड़की गलती से गर्लफ्रेंड बन गई तो फिर उन की जासूसी शुरू हो जाती है कि वह कहां जाती है, किस से मिलती है, सोशल मीडिया पर उस के कितने लड़के दोस्त हैं वगैरह.

दिल्ली मेट्रो की एक सच्ची घटना है. एक लड़का और एक लड़की आपस में बैठे बातें कर रहे थे कि अचानक लड़के ने उस लड़की का मोबाइल फोन उस से तकरीबन छीन लिया और उस के व्हाट्सएप मैसेज देखने लगा. लड़की का एकदम से मुंह उतर गया. उस लड़के ने वहीं पर बवाल मचा दिया कि वह दूसरे लड़कों से चैटिंग क्यों करती है?

लड़की ने उस लड़के के सभी सवालों के संतुष्ट करने वाले जवाब दिए पर उस लड़के ने देखते ही देखते उस लड़की की सुबह बरबाद कर दी. बाद में क्या हुआ यह तो नहीं पता पर यह उस लड़की के लिए यह खतरे की घंटी थी कि वह उस लड़के से रिश्ता तोड़ ले नहीं तो आने वाले समय में वह उस के ऐसा गले पड़ेगा कि उस को लेने के देने पड़ जाएंगे.

ऐसे बेहूदा लड़के ही लड़कियों पर तेजाब फेंकने या उन के साथ रेप करने की वारदात को अंजाम देते हैं. लड़की के नाराज होने पर वे चाहे कितनी बार माफी मांग लें लेकिन जब अपनी पर आते हैं तो उसी लड़की का मजाक बनाने में देर नहीं लगाते हैं.

अगस्त, 2018 की बात है. देश की राजधानी दिल्ली के भारत नगर इलाके में एक सिरफिरे आशिक हरीश ने लड़की अंशुल के घर में घुस कर उसे गोली मार दी थी.

शुरुआती जांच में पता चला था कि आरोपी हरीश अंशुल को पहले से ही जानता था. वे दोनों तकरीबन 5 साल तक रिलेशनशिप में रह चुके थे लेकिन किसी वजह से अंशुल की सगाई किसी दूसरे लड़के के साथ हो गई थी. सगाई के बाद अंशुल ने हरीश से ब्रेकअप कर लिया था जिस वजह से हरीश उस से नाराज था.

माना कि अंशुल की सगाई से हरीश दुखी था पर इस तरह उस पर गोली चलाने का लाइसेंस हरीश को किस ने दिया जो वह उस की जान लेने पर तुल गया? अगर यही मामला उलटा होता तब हरीश क्या करता?

समझदारी तो इसी में है कि इस तरह के गले पड़ने वाले सिरफिरे आशिकों से लड़कियों को समय रहते दूर हो जाना चाहिए, क्योंकि भारत में तो अभी उन का तनाव दूर करने वाले रोबोट बने नहीं हैं. यहां तो फिल्म ‘रोबोट’ का चिट्टी खुद ऐश्वर्या राय का दीवाना हो कर उस के गले पड़ गया था.

होटल में सैक्स से मिलता है चरम सुख

पार्टनर के बीच प्यार,बातें और हर चीज शेयर हो लेकिन शारिरीक सुख न हो तो पार्टनर एक दूसरे से परेशान होने लगते है. दो पार्टनर के लिए ये जरूरी है कि उन्हे सैक्स का आनंद जरुर मिले. जिसके लिए वे कभी या कभी गार्डन या होटलों में सैक्स करना पसंद करते है लेकिन कहां कब ज्यादा सुख मिल सकता है इस बात की जानकारी इस आर्टिकल में देंगे.

जी हां, सुनकर आपको हैरानी हो लेंकिन पार्ट्नर्स को सैक्स का सुख होटल के कमरे में मिलता है. अक्सर लोग महसूस करते हैं कि होटल के कमरे में अपने साथी के साथ बनाया गया सैक्स संबंध घर के बेडरूम की तुलना में ज्यादा आनंददायक और संतुष्टि भरा होता है. यह किसी एक या दो व्यक्ति की सोच नहीं है, बल्कि 11 देशों में 2,200 लोगों पर किए गए शोध के दौरान यह बात सामने आई थी.

निष्कर्ष के मुताबिक, अधिकांश लोगों का जवाब था कि होटल में बनाए गए सेक्सुअल रिलेशन की अवधि घर की अपेक्षा काफी ज्यादा लगभग 25 से 49 मिनट के बीच रही. और यही नहीं, तीन में से एक के मुताबिक, घर की तुलना में होटल में सैक्स के दौरान उन्हें चरम सुख मिला.

इस शोध में कनाडा और ओस्ट्रेलियाई लोगों का पता चला कि वे घर से ज्यादा होटल में सैक्स रिलेशन बनाना पसंद करते है. उनकी सैक्स पावर भी घर के रुम से ज्यादा लिमिटेड टाइम पर होती है. जिससे वे सैक्स का भरपूर आनंद ले पाते ैहै.

ऐसा भारत देश में भी है ज्वाइंट फैमिली, सिंगल फैमिली होते है औरत और मर्द संबंध बनाने के लिए रात को इंतजार करते है और एक समय निधारित करते है इससे आप एक कंट्रोल में आ जाते है जबकि सैक्स एक प्राकृतिक एनर्जी की तरह काम करती है जो किसी भी वक्त हो सकती है.

घर का माहौल ही पारिवारिक होता है जहां बच्चा बूढ़ा सभी होते है तो सैक्स का अच्छा समय बाहर रूमे में करना होता है. इससे सैक्स में फोकस भी बना रहता है और आप अपने पार्टनर के साथ अच्छे से सैक्स भी कर सकते है. इससे आपको सैक्स में सुख मिलेगा और सैक्स के बाद होने वाली खुशी भी मिलेंगी. इसके साथ ही आप कुछ रोमांटिक पोज भी ट्राएं कर सकते है.

  • बटरफ्लाई सैक्स पोजीशन
  • डौगी स्टाइल
  • स्टैंडिंग अप

होटल का माहौल

सैक्स ड्राइव का मजा लेने के लिए होटल का माहौल बहुत ज्यादा मायने रखता है. आरामदायक बिस्तर , धीमी सी लाइट किसी को भी उत्साहित करने के लिए काफी है. होटल के कमरे में मिनीबार वहां का एक और आकर्षण हो सकता है जो आपके प्रवास के दौरान यौन कामेच्छा को बढ़ाएगा.

रमेश चंद्र छबीला : अकाश और सीमा के प्यार कंप्यूटर का रोल

…उसी चौराहे पर हो टल से बाहर निकल कर आकाश ने एक टैक्सी की और ड्राइवर से बांद्रा चलने को कहा. थोड़ी ही देर में वह टैक्सी मुंबई की सड़कों पर दौड़ने लगी.

आकाश सीट पर आराम से बैठ गया. उस की आंखों के सामने बारबार फिल्म मशहूर हीरोइन सीमा का हंसतामुसकराता चेहरा आ रहा था. पिछले कुछ महीनों में उस ने सीमा के मोबाइल फोन पर अनेक मैसेज भेजे थे, पर जब किसी का भी जवाब नहीं मिला तो उस ने रजिस्टर्ड डाक से चिट्ठी भेजी. पर लगता है कि सीमा ने जवाब न देने की कसम खा ली है. कहीं ऐसा तो नहीं कि सीमा ने उसे भुला दिया हो या जानबू?ा कर भुलाना चाहती हो?

लेकिन आकाश तो सीमा को भुला नहीं पा रहा है. आज 2 साल बाद सीमा से मिलने वह मुंबई आया है.

आकाश कुछ भूलीबिसरी यादों के जाल में उलझता चला गया. तकरीबन 7 साल पहले जब वह बीए में पढ़ रहा था तब सीमा भी उस की क्लास में ही पढ़ती थी. वह बहुत खूबसूरत थी. लड़के उस से बात करना चाहते थे, पर वह किसी से सीधे मुंह बात नहीं करती थी.

उन दिनों कालेज में एक नाटक खेला गया था जिस में आकाश हीरो था और हीरोइन सीमा थी. नाटक खूब पसंद गया था. इस के बाद उन दोनों की दोस्ती बढ़ती चली गई थी.

बीए करने के बाद आकाश दिल्ली आ गया था और अपना कैरियर बनाने के लिए उस ने आगे की पढ़ाई शुरू कर दी थी. 3 साल का कोर्स करने के बाद उस ने नौकरी की तलाश शुरू कर दी थी.

आकाश को गुड़गांव की एक मल्टीनैशनल कंपनी में नौकरी मिल गई थी. उस ने एक फ्लैट भी किराए पर ले लिया था.

कुछ महीने बाद एक दिन आकाश ने अपने औफिस में सीमा को देखा तो चौंक उठा था. सीमा भी उसे देख कर बहुत खुश हुई थी.

सीमा ने बताया था कि वह भी इसी कंपनी में नौकरी करती है. कंपनी ने उस का ट्रांसफर लखनऊ से यहां कर दिया है.

आकाश ने सीमा के रहने की समस्या का हल निकालते हुए बताया था कि उस के पास

2 कमरों का फ्लैट है और वह अकेला रहता है. जब तक कहीं कमरे का इंतजाम न हो जाए, तब तक सीमा उस के साथ रह सकती है. इस के बाद वे दोनों एक ही फ्लैट में रहने लगे थे.

एक दिन सीमा को डेंगू बुखार हो गया तो आकाश उसे डाक्टर के पास

ले गया था. दिन में सीमा की देखभाल के लिए एक नर्स का भी इंतजाम कर दिया था, लेकिन शाम को जब नर्स चली जाती तो वह खुद सीमा की देखभाल करता था.

सीमा की मां को जब उस की बीमारी का पता चला तो वे भी वहां आ गई थीं. उन्होंने उन दोनों के इकट्ठे रहने पर एतराज जताया था, पर सीमा ने

जब आकाश की तारीफ करते हुए उस के अच्छे बरताव और आदत के बारे में बताया तो वे चुप रह गईं.

मां की तो इच्छा थी कि आकाश व सीमा की शादी हो जाए, पर सीमा यह कह कर टाल गई थी कि वह अभी कुछ साल शादी नहीं करना चाहती है.

एक दिन दिल्ली में फिल्म बनाने वाली एक कंपनी ने नई हीरोइन के लिए टैस्ट लिया था. हजारों लड़कियों ने उस में भाग लिया था. 2 लड़कियां चुनी गईं जिन में सीमा पहले नंबर पर थी.

सीमा का पहली फिल्म में काम करने का कौंट्रैक्ट साइन हुआ था. इस फिल्म के लिए उसे 50 लाख रुपए मिलने वाले थे.

सीमा नौकरी से इस्तीफा दे कर अपनी मां के साथ मुंबई चली गई थी.

आकाश अकेला रह गया था. अकेले उस का मन नहीं लगता था. वह फोन पर सीमा से बात कर लेता था.

सीमा की पहली फिल्म ‘अनजान साजन’ की शूटिंग शुरू हो गई थी. आकाश भी फिल्म की शूटिंग देखने मुंबई चला गया था.

फिल्म रिलीज हुई. आकाश ने भी देखी थी. दर्शकों ने फिल्म को पसंद किया था. पत्रपत्रिकाओं में फिल्म की तारीफ लिखी गई थी.

एक दिन सीमा ने आकाश को फोन पर कहा था कि उस के पास 3-4 फिल्मों के औफर आ चुके हैं. यहां आ कर बहुत अच्छा लग रहा है. अब वह भी एक मशहूर हीरोइन बन जाएगी.

2 सालों में ही सीमा की 3 फिल्में रिलीज हो गई थीं. तीनों फिल्में खूब चली थीं.

आकाश सीमा को फोन करता तो उधर घंटी जाती रहती, पर कोई जवाब न मिलता था. वह सोचता कि हो सकता है सीमा शूटिंग में बिजी हो, सो रही हो या किसी मीटिंग में हो. उस ने फोन पर मैसेज भेजने शुरू कर दिए. कोई जवाब नहीं मिला, तो उस ने चिट्ठी भी लिख कर भेजी, पर उस का भी कोई जवाब नहीं आया.

क्या फिल्म नगरी की चकाचौंध में सीमा अपना पुराना समय भूल रही है? क्या फिल्मों की कामयाबी से सीमा का दिमाग खराब हो रहा है? सीमा कितनी बदल चुकी है… यही सब देखने तो आकाश यहां आया है.

‘‘गाड़ी कहां रोकनी है साहब?’’ ड्राइवर ने पूछा.

आकाश चौंक उठा. यादों के जाल से बाहर निकल कर उस ने पता बताया.

टैक्सी रुकी. ड्राइवर को पैसे दे कर आकाश एक बड़े से मकान के सामने जा पहुंचा और डोर बैल बजाई.

एक अधेड़ औरत ने दरवाजा खोल कर पूछा, ‘‘किस से मिलना है?’’

‘‘सीमा मैडम से.’’

‘‘वे अभी नहीं मिल सकतीं. मीटिंग में बिजी हैं.’’

आकाश ने जेब से विजिटिंग कार्ड निकाल कर देते हुए कहा, ‘‘यह अपनी मैडम को दे देना और जैसा वे कहें मु?ो बता देना.’’

विजिटिंग कार्ड ले कर वह औरत चली गई. कुछ ही देर बाद वह लौट कर आई और बोली, ‘‘आइए.’’

आकाश कमरे में पहुंचा. सीमा के सामने सोफे पर 2 आदमी बैठे थे. मेज पर शराब, बीयर, सोडा, बर्फ, नमकीन वगैरह सामान रखा था.

आकाश को देखते ही सीमा ने मुसकरा कर स्वागत करते हुए कहा, ‘‘आइए, आइए, वैलकम.’’

आकाश के चेहरे पर भी मुसकान फैल गई.

सीमा ने परिचय कराया, ‘‘आप से मिलिए, आप हैं मिस्टर सूरज कुमार. मेरी नई फिल्म के डायरैक्टर और आप हैं सेठ गोपी चंद्र… प्रोड्यूसर.’

‘‘मैं आकाश.’’

‘‘ये मेरे फ्रैंड हैं. गुड़गांव में रहते हैं,’’ सीमा उन दोनों से बोली.

शराब पीने का दौर शुरू हो गया.

‘‘मेरी फिल्में कैसी लगीं आकाश?’’

‘‘बहुत अच्छी लगीं. औफिस के सभी लोगों ने देखीं,’’ कहता हुआ आकाश शिकायत भरे लहजे में बोला, ‘‘सीमा, तुम ने मेरे फोन ही उठाने बंद कर दिए हैं. मैं तो तुम से 2 बातें करना चाहता था.’’

‘‘क्या करूं आकाश, यहां आ कर पता चला कि फिल्म कलाकारों की लाइफ कितनी बिजी होती है. न दिन का पता चलता है और न रात का. जब नींद आती है तो सपने में भी लाइट, कैमरा और ऐक्शन सुनाई देता है.’’

‘‘मैं ने तुम्हें मोबाइल पर मैसेज भेजे. मैं ने कई चिट्ठियां भी लिखीं, पर कोई जवाब नहीं मिला.’’

‘‘वे पत्र नहीं, प्रेमपत्र थे. भागदौड़ भरी इस जिंदगी में अब मेरे पास इतना समय कहां जो किसी प्रेमपत्र का जवाब दूं. फोन पर मैसेज पढ़ना और जवाब देना मुझे टाइम बरबाद करना लगता है.’’

आकाश चुप रहा. वह सीमा की आंखों में कुछ खोज रहा था.

सीमा ने आकाश की ओर देखते हुए कहा, ‘‘आकाश, मेरे पास रोजाना अनेक मैसेज आते हैं, फोन आते हैं. प्रेमपत्र आते हैं. इस समय मेरे प्रेमियों की संख्या न जाने कितनी है. कोई मैसेज भेजता है कि तुम्हारे बिना मैं जी नहीं पाऊंगा. कोई मेरे प्यार में पागल हो चुका है. किसी को दिनरात मेरे ही सपने आते हैं. कोई मेरे साथ एक रात बिताने के लाखों रुपए

देने को तैयार है. अब तुम ही बताओ आकाश कि मैं किसकिस को अपना प्रेमी बनाऊं?’’

‘‘क्या तुम ने मुझे भी इन दूसरे लोगों की तरह समझ लिया है? मुझ में और उन में बहुत फर्क है.’’

‘‘देखो आकाश, अभी मैं अपना कैरियर बनाने में बिजी हूं. प्रेम और शादी जैसी फालतू चीजों के बारे में सोचने का भी समय मेरे पास नहीं है.’’

‘‘मुझे तुम से ऐसी उम्मीद नहीं थी सीमा.’’

‘‘तुम ने क्या सोचा था कि तुम्हारे आते ही मैं तुम से लिपट कर कहूंगी कि कहां रह गए थे? इतने दिन बाद आए हो. मुंबई में अकेली बोर हो गई हूं. मुझ से शादी कर लो प्लीज. अब यह अकेलापन सहा नहीं जाता,’’ सीमा ने ताने भरे शब्दों में कहा और खिलखिला कर हंस दी.

यह सुन कर डायरैक्टर व प्रोड्यूसर भी हंसने लगे.

सीमा के ये ताने आकाश सहन नहीं कर पाया. वह उठा और कमरे से बाहर निकल आया.

आकाश गुड़गांव वापस आ गया. उस का ख्वाब टूट गया कि सीमा अब भी उस से प्रेम करती है. वह समझ चुका था कि सीमा के पास खूबसूरती, जवानी, पैसा सबकुछ है. इन सब के साथ उस में घमंड भी आ चुका है.

अब आकाश ने सीमा को फोन करने बंद कर दिए, पर सीमा उस के दिल व दिमाग से नहीं निकल पा रही थी. रात की तनहाई में जब वह बिस्तर पर सोने की कोशिश करता तो सीमा की यादें उस की आंखों के सामने आने लगतीं.

एक साल बाद आकाश ने अखबार में एक खबर पढ़ी तो बुरी तरह चौंक उठा. खबर थी कि हीरोइन सीमा की शादी एक अंगरेज से. पिछले दिनों फिल्म हीरोइन सीमा एक फिल्म ‘लंदन का छोरा’ की शूटिंग के लिए लंदन गई थीं. वहां एक अमीर नौजवान जौन पीटर से मुलाकात हुई. अब वे उस से शादी करने वाली हैं.

खबर पढ़ते ही आकाश ने अखबार एक तरफ फेंक दिया. दिल में गुस्से का ज्वालामुखी धधक उठा. नसों में खून का बहना तेज हो गया.

मुंबई में सीमा की शादी जौन पीटर से हो गई. शादी के बाद हनीमून के लिए शिमला जाने की जानकारी आकाश को अखबार से मिल गई.

आकाश भी शिमला जा पहुंचा. उस ने पता कर लिया कि सीमा और उस का अंगरेज पति किस होटल में ठहरे हैं. उस ने उसी होटल में एक कमरा ले लिया.

आकाश सीमा से अकेले में कुछ कहना चाहता था. अगले दिन जौन पीटर अकेला होटल से बाहर निकला तो आकाश कमरे में घुस गया.

आकाश को देखते ही सीमा बुरी तरह चौंक उठी. उस के मुंह से निकला, ‘‘आकाश तुम… यहां कब आए?’’

‘‘मैं तुम्हें शादी की मुबारकबाद देने आया हूं मिसेज सीमा जौन पीटर. यह काम मैं फोन पर भी कर सकता था, पर मैं ने फोन नहीं किया, क्योंकि तुम ने न फोन सुनना था और न मैसेज पढ़ना था.’’

‘‘क्या कहना चाहते हो?’’ सीमा ने उस की ओर देख कर पूछा.

‘‘हमारे देश में विदेशी चीजों का कितना मोह है. यहां प्रेमी भी विदेशी चाहिए और पति भी. खैर, तुम ने जो भी किया है, सोचसमझ कर ही किया होगा.’’

‘‘यही शिकायत करने आए हो?’’

‘‘मैं यह कहने आया हूं सीमा कि जिस देश में तुम जा रही हो, उन की और हमारे देश की सभ्यता और संस्कृति में जमीनआसमान का फर्क है. वहां शादीब्याह को एक खेल समझ जाता है. वहां एक बांह में पत्नी और दूसरी बांह में प्रेमिका होती है. वहां जराजरा सी बात पर तलाक हो जाता है.’’

‘‘आखिर तुम कहना क्या चाहते हो?’’

‘‘मैं केवल एक बात जानना चाहता हूं कि क्या तुम्हें अपने देश में कोई

भी लड़का पति बनाने के लायक नहीं लगा?’’

‘‘मेरी निजी जिंदगी के बारे में

पूछने वाले तुम कौन हो? क्या लगते हो मेरे?’’

‘‘तुम्हारी एक फिल्म आई थी ‘ओल्ड लवर’, बस मुझे भी वही समझ लो,’’ आकाश ने कहा और कमरे से बाहर निकल आया. सीमा उसे देखती रह गई.

कुछ दिनों के बाद सीमा अपने पति जौन पीटर के साथ लंदन चली गई.

2 साल बाद… लंदन के हवाईअड्डे पर इंडियन एयरलाइंस का हवाईजहाज उतरा. अनेक मुसाफिरों के साथ आकाश भी हवाईजहाज से बाहर निकला.

आकाश ने एक अफसर से कुछ बात की और एक औफिस में घुस गया.

आकाश ने कंप्यूटर पर काम करती हुई सीमा को देखा तो उस के दिल की धड़कनें तेज होने लगीं और आंखों की चमक बढ़ गई.

आकाश ने धीरे से पुकारा, ‘‘हैलो सीमा.’’

सीमा ने आकाश को देखा तो चौंक उठी. उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि आकाश उस के सामने खड़ा है.

‘‘तुम सपना नहीं देख रही हो सीमा. मैं आकाश ही हूं,’’ सामने की सीट पर बैठते हुए आकाश ने कहा.

सीमा कुछ समझ नहीं पा रही थी

कि कहां से बात शुरू करे? आकाश अचानक लंदन क्यों आया है? उस का पता आकाश को किस ने दिया है?

‘‘कैसे आए हो? यहां घूमनेफिरने या किसी काम से आना हुआ है?’’ सीमा ने पूछा.

सीमा की आंखों के सामने वह मंजर आ गया जब उस ने मुंबई में आकाश का मजाक उड़ाया था. शिमला में भलाबुरा कहा था. इतना होने पर भी आकाश उस से मिल रहा है. आखिर क्यों? क्या आकाश को उस के बारे में सब पता चल गया है?

‘‘मैं किसी काम से नहीं बस तुम से मिलने के लिए ही आया हूं सीमा. मुझे अखबारों से पता चल गया था कि कुछ दिनों के बाद ही तुम्हारी और जौन पीटर की अनबन हो गई. तुम ने उस का घर छोड़ कर यहां हवाईअड्डे पर नौकरी कर ली.’’

‘‘आकाश, तुम ने ठीक कहा था कि हम दोनों देशों की संस्कृति में जमीनआसमान का फर्क है. मैं ने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि पीटर का रूप इतना घिनौना होगा. वह इनसान नहीं हवस का एक पुजारी है. मैं ने बहुत सहन किया, पर जब सहन नहीं हुआ तो मैं ने उस का घर छोड़ दिया और यहां हवाईअड्डे पर नौकरी कर ली. कुछ महीने पहले हमारा तलाक हो चुका है.’’

आकाश चुपचाप सीमा की ओर देखता रहा.

सीमा ने कहा, ‘‘अपने बारे में बताओ आकाश. यहां लंदन में अकेले ही आए हो या परिवार के साथ?’’

‘‘सीमा, मैं आज भी परिवार के नाम पर अकेला ही हूं. तुम ने तो शादी कर ली थी और मैं ने शादी न करने का पक्का इरादा कर लिया था. बस, यों समझ लो कि मैं आज भी उसी चौराहे पर खड़ा हूं जहां तुम ने मुझे छोड़ा था. अच्छा, एक बात बताओ सीमा…’’

‘‘पूछो?’’

‘‘क्या तुम्हें कभी अपने देश भारत की याद नहीं आती?’’

‘‘बहुत याद आती है. लेकिन अब सोचती हूं किस मुंह से जाऊं. अब वहां कौन है मेरा? मां को पिछले साल हार्ट अटैक हो गया था और वे बच न पाईं. अब तो पछतावे के अलावा मैं कर ही क्या सकती हूं.

‘‘पता नहीं क्या हो गया था मुझे जो मैं एक विदेशी पर यकीन करते हुए सबकुछ छोड़ कर यहां चली आई,’’ कहतेकहते सीमा की आंखें भर आईं.

‘‘सीमा, वहां तुम्हारा सबकुछ है. तुम्हारे अपने सभी वहां हैं. इस देश की भीड़ में मैं तुम्हें नहीं खोने दूंगा. अब मैं तुम्हें अपने से दूर नहीं होने दूंगा. अब तुम हमेशा मेरे साथ रहोगी. अगर तुम फिल्मों में काम करना चाहोगी तो मुझे एतराज नहीं होगा.’’

सीमा की आंखें डबडबा गई. वह रो देना चाहती थी. इतना सब होने के बाद भी आकाश उसे अपनाने के लिए यहां आया है, इतनी दूर. उसे लगा मानो वह अकेली किसी अंधेरी गुफा में भटक रही थी और अचानक आकाश ने उस का हाथ पकड़ कर सही रास्ता दिखा दिया.

वहशी प्रेमी से बचें

पूर्वी अफ्रीका का देश केन्या अपनी जंगल सफारी के लिए जाना जाता है. यहां के मशहूर केन्या पर्वत पर ही इस देश का नाम पड़ा है, पर हालिया कुछ घटनाओं ने इस देश को शर्मसार कर दिया है. दरअसल, यहां पर पिछले कुछ समय से लड़कियों और औरतों के प्रति जिस तरह से हिंसा के मामले बढ़े हैं, वे चिंता की बात है.

केन्या के ब्यूरो औफ नैशनल स्टैटिस्टिक्स में साल 2023 के जनवरी महीने में जारी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि केन्या में लड़कियों और औरतों के खिलाफ हिंसा बहुत ज्यादा बढ़ी है. 15 साल की उम्र से ही वे शारीरिक हिंसा की शिकार होती हैं.

हाल में एक और दर्दनाक मामला इस काली लिस्ट में शामिल हो गया है. हैवानियत की शिकार कोई और नहीं, बल्कि पैरिस ओलिंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाली एथलीट रेबेका चेपटेगई थीं, जिन्हें उन के बौयफ्रैंड ने आग लगा कर जला दिया था.

वैसे तो रेबेका चेपटेगई मूल रूप से युगांडा की थीं, पर फिलहाल वे केन्या में रहती थीं.

रेबेका चेपटेगई वैस्टर्न नजोए काउंटी इलाके में रहती थीं और वारदात के समय अपने घर में थीं. आसपास के लोगों ने बताया कि रविवार, 1 सितंबर, 2024 को उन का अपने बौयफ्रैंड डिकसन डिमा के बीच ?ागड़ा हो रहा था. जिस जमीन पर वह घर बना है, उसी को ले कर बहस

हो रही थी. दोनों का ?ागड़ा इतना गंभीर था कि उन की आवाजें घर से बाहर आ रही थीं.

इसी बीच गुस्साए प्रेमी ने रेबेका पर पैट्रोल डाल कर आग लगा दी, जिस से वे बुरी तरह झूलस गई. इस वारदात के 3 दिन बाद इलाज के दौरान रेबेका की मौत हो गई.

अब जरा भारत के आशिकों का वहशीपन भी देख लें. मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव का है. बेहटा मुजावर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली 20 साल की एक लड़की की शादी 19 मार्च, 2024 को होनी थी. पर उस लड़की का प्रेम संबंध अपने ही गांव के रहने वाले एक लड़के से चल रहा था.

पुलिस के मुताबिक, प्रेमिका की शादी तय होने से प्रेमी बेहद नाराज था. उस ने अपनी प्रेमिका को मिलने के

लिए खेत पर बुलाया. प्रेमिका खेत पर पहुंची, जहां उन दोनों में झगड़ा हो गया. गुस्साए प्रेमी ने अपनी प्रेमिका का हाथ (पंजा) धारदार खुरपी से काट कर अलग कर दिया.

इसी तरह उत्तर प्रदेश के अयोध्या के गोसाईंगंज इलाके के रेलवे स्टेशन के पास एक खंडहर में प्रेमी ने अपनी प्रेमिका की हत्या कर उस की लाश पर कैमिकल डाल कर जला दिया था.

यह मामला अगस्त, 2024 का है. पुलिस ने प्रेमी को पकड़ लिया था. आरोपी प्रेमी ने पूछताछ में बताया कि वह और उस की प्रेमिका दोनों एकसाथ मुंबई गए थे. बाद में लड़की किसी और लड़के से बात करने लगी थी, जो आरोपी को पसंद नहीं आ रहा था. इसी वजह से उन दोनों का झगड़ा होता था.

आरोपी ने पुलिस को आगे बताया कि उस ने अपनी प्रेमिका को पहले पत्थर से सिर कुचल कर मार डाला, फिर उस की लाश को कैमिकल डाल कर जलाने की कोशिश की, ताकि लाश जल्दी गल जाए और हत्या का सुबूत मिट जाए.

साल 2022 के मई महीने में हुआ श्रद्धा हत्याकांड ऐसा ही एक और मामला था, जिस ने पूरे देश को झकझोर दिया था. शादी का दबाव बनाने के लिए और प्रेमिका पर शक होने के चलते आफताब पूनावाला ने दिल्ली में श्रद्धा वालकर की हत्या कर दी थी. हत्या के बाद उस ने श्रद्धा की लाश के 35 टुकड़े किए थे और उन्हें फ्रिज में रख दिया था. फिर इन टुकड़ों को वह धीरेधीरे अगले कुछ महीनों में महरौली के जंगलों में फेंकता रहा था.

दिल्ली में ही साहिल नाम के एक प्रेमी (बाद में खुलासा हुआ कि पति था) ने अपनी प्रेमिका निक्की की कार के अंदर हत्या कर दी थी और फिर उस  की लाश अपने रैस्टोरैंट के फ्रिज में रख दी थी.

दरअसल, साहिल ने किसी दूसरी लड़की के साथ सगाई कर ली थी और  फिर वह निक्की से मिलने उस के फ्लैट पर गया था. इस दौरान उस की शादी को ले कर कहासुनी हुई, जिस के बाद उसे गुस्सा आ गया और उस ने मोबाइल के केबल से पीडि़ता का गला घोंट दिया था.

पूरी दुनिया में ऐसे मामलों की भरमार है, जहां गुस्साए किसी प्रेमी ने अपनी प्रेमिका पर जानलेवा हमला किया और अपने प्यार को ही शर्मसार कर दिया.

भारत में तो हमेशा से लड़की को दोयम दर्जे का समझ जाता है. वे घर के बाहर ही क्या, भीतर भी खुद को महफूज नहीं मानती हैं और जब उन का प्रेमी ही वहशीपन पर उतर आए तो फिर वे किस से गुहार लगाएं, क्योंकि प्रेमी के साथ

तो वे अच्छी जिंदगी बिताने के सपने देखती हैं.

पर गुस्सैल प्रेमी का क्या किया जाए और उसे कैसे कंट्रोल में रखा जाए, यह बहुत बड़ा सवाल बन जाता है, जबकि गुस्से का जवाब गुस्सा तो बिलकुल नहीं होता है और यहीं से हर मुसीबत की शुरुआत होती है.

अमूमन तो यही कहा जाता है कि अगर प्यार में तकरार न हो तो फिर कैसा प्यार, पर यही तकरार जब गुस्से में बदल जाता है, तो प्रेमी का असली रूप सामने आ जाता है और फिर केन्या हो या भारत, वह वही वहशीपन दिखाता है, जो किसी मासूम लड़की की जान आफत में डाल देता है.

फिर भी कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिन पर अमल करने से प्रेमीप्रेमिका के बीच की तल्खी को कम किया जा सकता है, जैसे :

* जब भी लड़की को यह लगे कि उस का प्रेमी अब गुस्से में फट पड़ने वाला है, तो वह सब्र से काम ले. उस की बात का तुरंत जवाब न दे और कड़वे शब्द तो बिलकुल न कहें.

* अगर आप का प्रेमी सच में आप से प्यार करता है, लेकिन गुस्सैल भी है, तो उस की दुखती रग पर हाथ न रखें और माहौल को हलका बनाने के लिए बात को नया रुख दे दें.

* अगर आप को शक है कि प्रेमी किसी तरह की बेवफाई कर रहा है, तो बिना किसी ठोस वजह के नतीजे पर न पहुंचें. अपनी बात को उस के सामने रखें और उस के नजरिए को भी समझे.

* अगर आप को यह डर लगता है कि प्रेमी गुस्से में कुछ भी कर सकता है, तो अकेले में मिलने से बचें और धीरेधीरे उस से दूरी बना लें.

* अगर बात बहुत ज्यादा बिगड़ रही है, तो किसी अपने से मन की बात कहें. ज्यादा ही गंभीर मसला है, तो पुलिस की मदद लेने से भी न झिझकें.

मेरी सास पूरे दिन बेटी के घर की खोज खबर लेती रहती हैं, क्या करूं?

सवाल
मेरी ननद की शादी को अभी केवल 4 महीने हुए हैं. वर का चुनाव घर वालों ने स्वयं किया था अर्थात ननद की अरेंज्ड मैरिज है. बावजूद इस के मेरी सास बेटी की ससुराल के सदस्यों के बारे में मीनमेख निकालती रहती हैं, जबकि सभी लोग काफी शिष्ट और शालीन हैं. सास दिन में कई कई बार फोन कर के बेटी के घर की खोज खबर लेती रहती हैं. उसे अनापशनाप सलाह देती हैं. उन का व्यवहार कहां तक उचित है? चाह कर भी मैं उन्हें मना नहीं कर सकती. क्या करूं कि वे अनावश्यक दखलंदाजी बंद कर दें?

जवाब

आप बहू हैं इसलिए यदि सास को कोई सलाह देंगी तो उन्हें नागवार गुजरेगा. इसलिए आप पति से कहलवाएं. वे अपनी मां को समझाएं कि वे बेटी के परिवार में हस्तक्षेप न करें. बेटे को समझाना आप की सास को अखरेगा नहीं और आप की चिंता भी दूर हो जाएगी.

मिथुन चक्रवर्ती को ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ मिलने पर विवाद, क्या है दाल में काला

द्र मोदी की सरकार सत्ता में आने के बाद हर उसे संस्था को कमजोर कर रही है, जिस की एक गरिमा थी, सम्मान था, ऊंचाई थी. अब मिथुन चक्रवर्ती को ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ देने की घोषणा कर यह दुनिया को जता दिया है कि वे सिर्फ अपना हित साधने में लगे हैं, उन्हें अपने से ही मतलब है.

अब जहां तक मिथुन चक्रवर्ती का सवाल है, तो वे एक लोकप्रिय फिल्म स्टार हो सकते हैं, मगर उन के खाते में एक भी फिल्म नहीं है, जिस का उन्होंने भूलेबिसरे भी निर्माण या निर्देशन किया हो. दादा साहब फाल्के के बारे में सारी दुनिया जानती है कि उन्होंने देश में, फिल्म जगत में जो काम किया, उसे कभी नहीं भुलाया जा सकता. उन्होंने फिल्मों में अभिनय किया, निर्देशन किया, निर्माण किया और अमर हो गए. उन के सम्मान में यह पुरस्कार भारत सरकार प्रदान करती है. मगर उस का एक उद्देश्य है कि देश में यह संदेश जाना चाहिए कि जिन लोगों ने उन के रास्ते पर चल कर के फिल्म निर्माण किया, देशसमाज को संदेश दिया, उन्हें सम्मानित किया जा रहा है.

हम मिथुन चक्रवर्ती के योगदान को खारिज नहीं करते, मगर उन्होंने सिर्फ अभिनय के क्षेत्र में काम किया और अब जब वे खुल कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम चुके हैं, तो अब उन्हें दादा साहब फाल्के जैसा सर्वोच्च सम्मान देना सवाल खड़ा करता है कि क्या भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी की सरकार को अपने भाजपा परिवार से हट कर कोई महान कलाकार नहीं दिखाई दिया?

भारतीय सिनेमा में आज भी एक से बढ़ कर एक निर्देशक हैं और पहले भी रहे हैं, उन्हें यह सम्मान दे कर ‘दादा साहब फाल्के सम्मान’ का सम्मान रखना चाहिए था. मगर नरेंद्र मोदी की सरकार ने ‘दादा साहब फाल्के सम्मान’ को तारतार कर दिया है.

डिस्को डांसर से ज्यादा क्या अभी भी दर्शक मिथुन चक्रवर्ती को ‘डिस्को डांसर’ जैसी फिल्मों से आगे याद नहीं कर पाते. ऐसे में हम आप को बताएंगे कि हिंदी सिनेमा में डिस्को डांस को लोकप्रिय बनाने वाले और ‘मृगया’, ‘सुरक्षा’, ‘डिस्को डांसर’, ‘डांसडांस’ जैसी फिल्मों के मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को सिनेमा के क्षेत्र में उन के योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें अद्वितीय ‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ प्रदान किए जाने की घोषणा कर दी है.

मिथुन चक्रवर्ती को यह पुरस्कार 8 अक्तूबर को 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में दिया जाएगा.
इस घोषणा का कहीं तनिक भी विरोध दर्ज नहीं कराया गया है, इस से पता चलता है कि हमारा देश आज किस दौर से गुजर रहा है, जहां सच बोलने और लिखने की हिम्मत और साहस कोई नहीं कर पा रहा है.

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि मिथुन चक्रवर्ती की शानदार सिनेमाई यात्रा ‘पीढ़ियों को प्रेरित’ करती है. यह घोषणा करते हुए गौरव महसूस हो रहा है कि ‘दादा साहब फाल्के’ चयन समिति ने मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को भारतीय सिनेमा में उन के उल्लेखनीय योगदान के लिए यह पुरस्कार देने का फैसला किया है. 3 सदस्यीय निर्णायक मंडल ने मिठुम चक्रवर्ती को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना. निर्णायक मंडल में पूर्व दादा साहब पुरस्कार विजेता आशा पारेख, अभिनेता और राजनेता खुशबू सुंदर और फिल्म निर्माता विपुल अमृतलाल शाह जैसे चेहरे रहे हैं.

दूसरी तरफ मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि जब उन्हें यह खबर मिली, तो उन के दिमाग में भोजन और सिर छिपाने के शुरुआती संघर्ष के दिनों सहित जीवन की अब तक की तमाम यादें ताजा हो गईं.

उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे पास शब्द नहीं हैं. यह ऐसा अवसर है जिस ने अतीत की यादें ताजा कर दीं. मैं कोलकाता से मुंबई गया था. मुंबई में मेरे पास खाना नहीं था और कभीकभी मुझे पार्क में भी सोना पड़ा. ये सारी चीजें मुझे याद आने लगीं. इन तमाम चीजों के बाद आपको यह सम्मान मिलता है. मैं निशब्द हूं. मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि मैं यह पुरस्कार अपने परिवार और दुनियाभर में अपने प्रशंसकों को समर्पित करता हूं.’

मिथुन चक्रवर्ती ने कोलकाता में पत्रकारों से कहा, ‘आप जानते हैं कि मेरा जीवन कभी आसान नहीं रहा. मुझे कभी चीजें थाली में परोस कर नहीं मिली. मुझे हर चीज के लिए लड़ना पड़ा, लेकिन जब इस तरह के परिणाम आते हैं, तो आप हर दर्द भूल जाते हैं.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ के लिए चुने जाने की घोषणा पर खुशी व्यक्त करते हुए उन्हें एक सांस्कृतिक दूत बताया है.

नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘प्रसन्नता है कि मिथुन चक्रवर्ती को भारतीय सिनेमा में उन के अद्वितीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है. वे एक सांस्कृतिक आदर्श हैं और उन की बहुमुखी प्रतिभा के लिए उन्हें पीढ़ियों से सराहा जाता रहा है.’

‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ की घोषणा से कुछ महीने पहले ही मिथुन चक्रवर्ती को भारत सरकार के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया था.

मिथुन चक्रवर्ती का वास्तविक नाम गौरांग चक्रवर्ती है. मृणाल सेन की साल 1976 में आई फिल्म ‘मृगया’ से मिथुन चक्रवर्ती ने फिल्मों में अभिनय की शुरुआत की थी, जिस के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी जीता था. उन्होंने वर्ष 1992 की फिल्म ‘तहादेर कथा’ (सर्वश्रेष्ठ अभिनेता) और वर्ष 1998 की फिल्म ‘स्वामी विवेकानंद’ (सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता) के लिए भी 2 और राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे.

मिथुन चक्रवर्ती वर्ष 1982 की फिल्म ‘डिस्को डांसर’ से मशहूर हो गए थे. यह भी सच है कि वे लंबे समय तक दूसरे और तीसरे दर्जे के अभिनेता ही बने रहे. उन्होंने फिल्मों में जो भी काम मिला, उसे ईमानदारी से करने का प्रयास किया, मगर ‘दादा साहब फाल्के सम्मान’ जैसा अद्वितीय सम्मान पाने जैसा कोई काम उन्होंने अभी तक नहीं किया है, जिस के कारण आने वाली पीढ़ियां उन से प्रेरणा लें और समाज में सकारात्मक संदेश जाए.

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