सनी लियोन का रामू को करारा जवाब

महिला दिवस पर राम गोपाल वर्मा ने सनी लियोन को लेकर विवादित ट्वीट किया था, जिसके बाद शिकायत के अधार पर उनके खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है. वहीं अब खुद सनी लियोन ने वीडियो पोस्ट कर राम गोपाल वर्मा को करारा जवाब दिया है. ट्विटर पर शेयर किए गए वीडियो में सनी लियोनी ने असली बदलाव के लिए शब्दों को सोच-समझकर चुनने का सुझाव दिया.

क्या है मामला

राम गोपाल वर्मा ने महिला दिवस के मौके पर कई विवादित ट्वीट किए थे. उन्होंने एक ट्वीट किया कि मैं चाहता हूं कि दुनिया की हर महिला पुरुषों को उतनी ही खुशी दे, जितनी सनी लियोनी देती है.

इस ट्वीट के लिए राम गोपाल वर्मा की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना की गई. उनके इस ट्वीट के बाद गोवा में उनके खिलाफ केस दर्ज करवाया गया है, यह केस एक्टिविस्ट विशाखा महाम्बरे ने दर्ज करवाया है. वहीं रामू के खिलाफ एनसीपी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करवाते हुए धमकी दी है कि अगर वर्मा ने माफी नहीं मांगी तो उनके खिलाफ ‘जूते मारो आंदोलन’ करेगी.

कृषि जगत से जुड़े मार्च के जरूरी काम

मस्ती और धूमधाम से भरपूर त्योहार होली के रंगों से सराबोर मार्च का महीना खेती के लिहाज से काफी खास होता है. किसान होली के नशे में चूर हो कर अपने खेती के जरूरी कामों को नजरअंदाज नहीं कर सकते. हकीकत तो यह है कि होली के सुरूर और जोश से किसानों के काम करने की कूवत में काफी इजाफा हो जाता है. इसी महीने रबी की तमाम खास फसलें पक रही होती हैं, तो दूसरी ओर जायद मौसम की तमाम फसलों की बोआई का सिलसिला भी चालू हो जाता है. एक ओर गेहूं की फसल में दाने बनने लगते हैं, तो दूसरी ओर गन्ना कटाई के लिए तैयार हो जाता है. खेती की हरीभरी गतिविधियां किसानों को निहाल किए रहती हैं.

आइए डालते हैं एक तीखी सी नजर मार्च महीने के दौरान किए जाने वाले खेती के खासखास कामों पर:

 * बात मीठे से शुरू करें तो लहलहाते हुए गन्ने नजर आने लगते हैं. पिछली फसल के गन्ने कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो चुके होते हैं, लिहाजा सहूलियत के मुताबिक यह काम निबटाएं.

* गन्ने की नई फसल की बोआई का सिलसिला भी मार्च में ही शुरू हो जाता है, लिहाजा इस काम को वरीयता दे कर निबटाना चाहिए. गन्ने की बोआई के लिए 3 आंखों वाले गन्ने के टुकड़ों को इस्तेमाल करें.

* बोआई करने से पहले गन्ने के टुकड़ों को उपचारित करना न भूलें.

* गन्ना बोने के लिए शुगरकेन प्लांटर का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा. इस के जरीए बोआई करने से बोआई का काम बेहद करीने से और बराबरी से होगा.

* खेत में गन्ना बोने से पहले अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट खाद जरूरत के मुताबिक अच्छी तरह मिलाएं. खेत में खाद मिलाने से पहले तमाम तरह के खरपतवार निकालना न भूलें.

* किसान चाहें तो मरजी के मुताबिक गन्ने के 2 कूंड़ों के बीच लोबिया, मूंग या उड़द बो सकते हैं. चारे के लिहाजा से बोया जाने वाला मक्का भी 2 कूंड़ों के बीच लगाया जा सकता है. इस तरह गन्ने के साथ अतिरिक्त फसलें बो कर किसान ज्यादा फायदा उठा सकते हैं.

* इस महीने के दौरान गेहूं की बालियों में दूध तैयार होने लगता है और साथ ही दाने बनने शुरू हो जाते हैं, लिहाजा फसल का खासतौर पर खयाल रखना चाहिए.

* गेहूं की बालियों में दूध बनने के दौरान पौधों को पानी की ज्यादा दरकार होती है, लिहाजा खेत में नमी कायम रखना जरूरी है. ऐसे में खेतों की सिंचाई का खास खयाल रखें.

* मार्च में अकसर तेज हवाओं और अंधड़ों का दौर चलता रहता है. यह दौर दिन के वक्त ज्यादा चलता है. ऐसे आलम में सिंचाई करना ठीक नहीं रहता, लिहाजा गेहूं के खेतों की सिंचाई का काम रात के वक्त निबटाएं.

* दलहनी फसल उड़द की बोआई का काम पहली से 15 मार्च के बीच निबटाना सही रहेगा. बोने से पहले उड़द के बीजों को राइजोबियम कल्चर या कार्बंडाजिम से उपचारित करें. बोआई के लिए 30 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें. उड़द की बोआई लाइनों में करीब 25 सेंटीमीटर का अंतर रखते हुए करें.

* दलहनी फसल मूंग की बोआई का इरादा हो, तो इस काम को 15 मार्च के बाद कर सकते हैं. आमतौर पर मूंग की बोआई का काम 15 मार्च से 15 अप्रैल के दौरान निबटाना मुनासिब होता है. मूंग की बोआई के लिए भी 30 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें. बोआई करने से पहले बीजों को उपचारित करना न भूलें. बोआई लाइनों में करें और लाइनों के बीच का फासला 25 सेंटीमीटर रखें.

* मार्च में सरसों की फसल पक कर तैयार हो चुकी होती है. जब सरसों की 75 फीसदी फलियां पक कर सुनहरेपीले रंग की हो जाएं, तो फसल की कटाई कर लेनी चाहिए.

* पिछले महीने बोई गई सूरजमुखी के खेतों पर नजर डालें. यदि खेतों में नमी कम दिखाई दे, तो जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें. यदि खेत में पौधे ज्यादा घने दिखाई दें, तो अतिरिक्त पौधे उखाड़ कर मवेशियों को खिला दें. आमतौर पर 2 पौधों के बीच 2 फुट का फासला रखना सही रहता है.

* मवेशियों को चारे की दरकार हमेशा रहती है, लिहाजा उस का बंदोबस्त करना भी निहायत जरूरी है. चारे के लिहाज से मार्च में ज्वार, बाजरा व सूडान घास बोई जा सकती है.

* अपने प्याज व लहसुन के खेतों का मुआयना करें. उन की पनपती फसलों को देखभाल की काफी दरकार रहती है. इस बीच खेतों में खरपतवार काफी हो गए होंगे, लिहाजा खेतों की बाकायदा निराईगुड़ाई करें. कृषि वैज्ञानिकों से सलाह ले कर सही मात्रा में यूरिया का छिड़काव करें. यूरिया की खुराक मिलने से फसल काफी बेहतर हो जाती है.

* अपने आलू के खेतों का मुआयना करें. यदि फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी हो, तो जल्दी से जल्दी उस की खुदाई का काम खत्म करें. खुदाई करने के बाद खेतों को आगामी फसल के लिए तैयार करें.

* मार्च का महीना गुणकारी हलदी और अदरक की बोआई के लिए भी मुफीद होता है. सब्जी और मसाले से जुड़ी अदरक और मसालों की दुनिया की रंगत हलदी की फसलें बो कर किसान काफी कमाई कर सकते हैं.

* बोआई करने के लिए हलदी व अदरक की एकदम स्वस्थ गांठों का इस्तेमाल करें. इन की बोआई 50×25 सेंटीमीटर के फासले पर करें.

* पिछले महीने बोई गई भिंडी, राजमा व लोबिया के खेतों का जायजा लें. अगर खरपतवार दिखाई दें, तो खेतों की निराईगुड़ाई करें. निराईगुड़ाई के बाद खेतों की सिंचाई कर के टाप ड्रेसिंग के रूप में यूरिया डालें.

* ज्यादातर तो बैगन की रोपाई का काम फरवरी में कर लिया जाता है, मगर अभी भी बैगन लगाने का इरादा हो तो मार्च में भी इस की रोपाई कर सकते हैं. रोपाई के बाद हलकी सिंचाई करना न भूलें, इस से पौधे सही तरीके से लग जाते हैं.

* पिछले महीने लगाए गए बैगन के पौधों की निराईगुड़ाई करें व तमाम खरपतवार निकाल दें. इस के बाद जरूरी लगे तो हलकी सिंचाई करें.

* सब्जी वाली मीठी हरी मटर का दौर जाने के बाद मार्च में दाने वाली मटर की फसल तैयार हो जाती है. मटर की फलियां सूख कर पीली लगने लगें, तो कटाई का काम निबटाएं. मटर के दानों को गहाई के बाद इतना सुखाएं कि उन में सिर्फ 8 फीसदी नमी बाकी रहे.

* अपने आम के बागों का मुआयना करें, क्योंकि मार्च के दौरान हापर कीट व फफूंद से होने वाले रोगों का खतरा बढ़ जाता है. बीमारियों या हापर कीट का अंदेशा लगे, तो कृषि विज्ञान केंद्र के माहिरों से सलाह ले कर दवाओं का इस्तेमाल करें.

* अपने अमरूद के बाग का भी जायजा लें. इस दौरान अमरूद के पेड़ों में तना बेधक कीट का खतरा ज्यादा होता है. ऐसा होने पर कृषि वैज्ञानिक से पूछ कर माकूल दवा का इस्तेमाल करें.

* अंगूर के गुच्छों को फूल खिलने की अवस्था में जिब्रेलिक अम्ल के 50 पीपीएम वाले घोल में पेड़ में लगी हालत में ही थोड़ी देर के लिए डुबोएं. ऐसा करने से अंगूर बिल्कुल सुरक्षित रहते हैं.

* अंगूर की फसल को कीटों व रोगों से बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक की सलाह ले कर दवाओं का इस्तेमाल करें.

* इस महीने पपीते के पौधे तैयार करने के लिए नर्सरी में बीज बो सकते हैं. यदि पहले बोए गए बीजों से पौधे तैयार हो चुके हों, तो उन की रोपाई करें.

* अपने अमरूद, आम व पपीता वगैरह के पुराने बागों की सही तरीके से सफाई करें. बीचबीच में फालतू पौधे निकल आए हों, तो उन्हें जड़ से निकाल कर नष्ट कर दें.

* अगर फूलों की खेती में दिलचस्पी है, तो मार्च में रजनीगंधा और गुलदाउदी की रोपाई करें. रोपाई के बाद पौधों की हलकी सिंचाई जरूर करें.

* जाती ठंड व आती गरमी के इस मार्च महीने में गायभैंसों को अकसर अफरा की तकलीफ हो जाती है, लिहाजा उन्हें फूली हुई बरसीम खाने को न दें.

* पशुओं के रहने की जगह पर ध्यान दें और जरूरत के मुताबिक उम्दा कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें ताकि हानिकारक कीड़ों से बचाव हो सके.

* होली में अकसर बच्चे मवेशियों को भी रंगों व कीचड़ वगैरह से पोत कर सराबोर कर देते हैं, लिहाजा उन की सफाई का खास खयाल रखें. भैंसों व उन के बच्चों के फालतू बाल नाई बुला कर कटवा दें. बिलकुल छोटे बच्चों के बाल न काटें, क्योंकि उन्हें कैंची या ब्लेड लगने से नुकसान हो सकता है.

* गाय भैंसें अगर हीट में आएं तो बगैर वक्त गवांए उन्हें समय रहते अस्पताल ले जा कर या डाक्टर बुला कर गाभिन कराएं.

* मवेशी डाक्टर से पूछ कर अपने तमाम मवेशियों (गाय, भैंस, भेड़, बकरी वगैरह) को पेट के कीड़े मारने वाली दवा जरूर खिलाएं.

* मुरगियां नाजुक होती हैं, लिहाजा उन की देखभाल ढंग से करें. उन के दरबों की सफाई का पूरा खयाल रखें.

होली विशेष : बुरा तो मानो होली है

फगुआ में देशज बबुआ सब्सिडी की गलीसड़ी भंग के अधकचरे नशे में इधर से उधर, उधर से इधर बिन पेंदे के नेता सा चुनावी दिनों के धक्के खा रहा था. टिकट न मिलने पर कभी इस दल को तो कभी उस दल को कोसे जा रहा था. पता ही न चल रहा था कि यह नशा भंग का है या कमबख्त वसंत का. बबुआ सरकार का आदमी होने के बाद भी सरकार की भंग के अधकचरे नशे में गा रहा था, ‘सरकार ने कहा कि बबुआ नोटबंदी के दौर में नोटबंदी के बाद भी हंस के दिखाओ, फिर यह जमाना तुम्हारा है. नोटबंदी में सरकार के सुरताल के साथ फटे गले से सुर मिलाओ, फिर यह आशियाना तुम्हारा है. …तो लो सरकार, हम नोटबंदी में जनता के गिरने के बाद भी खड़े हो गए और मिला ली है सरकार की ताल के साथ ताल, मिला ली है सरकार के चकाचक गाल के साथ अपनी फटी गाल…कि पग घुंघुरू बांध बबुआ नोटबंदी में नाचे रे…नाचे रे…नाचे रे…’ उधर जनता की खाली, बदहाली जेबें देख वसंत परेशान. खाली जेबों के ये, खाक रंग खेलेंगे? अब की बार होली के नाम पर देवर अपनी भाभियों को कैसे ठिठेलेंगे?

देशज बबुआ जब से सरकार से जुड़ा है, उसे पता है कि सरकार का काम ही है सोएजागे, हर पल हवाई दावे करना. जो दावे न करे, भला वह सरकार ही काहे की. और वफादार जनता का काम है सरकार के दावों की रक्षा के लिए चौकचौराहों पर दिनदहाड़े एकदूसरे को धक्के देते मरना. दावे सरकार के तो छलावे जनता की जिंदगी के अभिन्न अंग हैं.

सो, सरकार ने फगुआ में रंग जमाने के बहाने, होली के नशे में जनता को धुत्त बनाने के साथ भंग के चकाचक रंग में दावा किया, ‘उस की नोटबंदी रंग ला रही है. ब्लैकमनिए की ब्लैकमनी नंगेपांव दौड़ जनता से गले लगने के लिए जनता के जनधन खातों की ओर बढ़ रही है. अब आम जनता सावधान हो जाए. उस की जेब भरने वाली है’. पर जनता ने भूख के नशे में भी जो बिना बैटरी की टौर्च लिए गौर से देखा तो पाया, रे बबुआ, ब्लैकमनिए नहीं, अबके भी मुई जनता ही लूटी जा रही है. यह जनता है ही ऐसी. इस की जिंदगी में कभी इस के तो कभी उस के हाथ लुटना ही लिखा है. आदमी के जो तीसरा हाथ होता तो तीसरे के हाथों भी लुटने को सहर्ष तैयार रहता. या उसे तीसरा हाथ भी लुटने को राजी कर लेता. सरकार कोई भी हो, वह दिल्ली के तख्त पर चढ़ बस दावे करती रहती है और बेचारे बबुआढबुआ कश्मीर से कन्याकुमारी तक तालियां बजाते भूखों मरते रहते हैं, अपनी खुशी से.

अबके सरकार ने चुनाव को वसंत में मिलाते मस्ती की कौकटेल तैयार की तो चुनावी घोषणापत्र को हर तरह के रंग में हर वोटर की मांग के अनुरूप लिपाया, ढोल मंजीरा ले आ डटी फगुआ के मंच पर. जनता को बरगलाबरगला गले का वैसे ही बुरा हाल था. पर भैया, तीजत्योहार है, गाना तो पड़ेगा ही. जनता को वोटों के लिए लुभाना तो पड़ेगा ही. यही राजनीति का धर्म है. इसीलिए होली में इस बार देवर से कहीं अधिक राजनीति बेशर्म है.

सरकार को फगुआ के मंच पर जमे देख जनता छाछ की जली जीभ को मुंह में इधरउधर घुमाते बड़बड़ाने लगी. सरकार के दम में दम मिलाते ढोल की जगह अपना पिचका पेट बजाने लगी. उसे चुनाव के दिनों में भी ये सब करते देख सरकार ने उसे डांटा, ‘हद है री जनता, चुनाव के दिनों में भी पेट बजा रहे हो? क्या गम है जिस को दिखा रहे हो? अपना ये पिचका पेट दिखा तुम क्या बके जा रहे हो?

‘इधर हम एक आदमी के चारचार पेट भरने का इंतजाम कर रहे हैं, उधर वोटर भूखे मर रहे हैं. जरूर देश पर किसी भूतप्रेत का साया है. देखो तो, हम ने अपने घोषणापत्र में तुम्हारे लिए क्याक्या पकने को कड़ाही में सजाया है. बस, हमें वोट दो. इस बार सतयुग शर्तिया समझो आया है.’

जनता ने यह सुन चुनाव का तंबूरा बजाती सरकार के आगेपीछे हाथ जोड़े, ‘हुजूर, माना आप 5 साल हम से ठिठोली ही करते हो. ठिठोली करना आप का राजधर्म है. ठिठोली करना आप का जीवन का मर्म है. पर चुनाव के दिनों में तो कम से कम ठिठोली न कीजिए. होली है इस का मतलब यह बिलकुल नहीं कि होली के नाम पर जो मन करे, बके जाओ. देखो तो, हम नोटबंदी की मार से अभी भी नहीं उबरे हैं. हमें नोटबंदी से उबारो.

‘हे दीनानाथ, सुना है आप अबके भगवान को भी तारने जा रहे हो? हम तो नए नोटों के लिए अभी भी बंद पड़े एटीएम के आगे हाथ जोड़े लाइन में हाथ बांधे एकदूसरे को पीछे धकियाते, वहीं के वहीं खड़े हैं. कोई एकदूसरे से आगे न निकल जाए, इसलिए दिनरात जैसे भी हो, एकदूसरे के आगे विपक्षियों की तरह अड़े हैं. अड़ना हमारा जन्मसिद्घ अधिकार है. देखो तो, काले नोटों वाला लाला अब भी लंबी तान के सो रहा है. अब तो जागो सरकार, उस के कारनामे देख, उस के घर का पहरेदार कुत्ता तक रो रहा है.’

सरकार बोली, ‘लगता है साइकिल ने तुम्हारा दिमाग घुमाया है. रोटी हमारे आटे की खा रहे हो और हमारे ही विपरीत कमर मटका रहे हो. धत्त तेरे की जनता.’

‘माफ करना, वादेदाता. सच तो सच है. मुंह में कीड़े पड़ें जो अब हम झूठ बोलें. झूठ बोलना इन का नहीं, लोकतंत्र के राजा का काम है,’ सरकार के खासमखास ने ढोल पर थाप देते सरकार के ऊंचा सुनने वाले कान में शब्द सरकाया कि अचानक नोटबंदी के चलते सरकार को कान्हा मान राधा ने उस पर रंग गिराया. सरकार होली के रंग में भीग गई सारी.

‘ये फजीहत का रंग हम पर, फिर से किस ने डाला? गोरी सरकार को ये किस रंग से नहला रहे हो? ये किस तरह का फगुआ मना रहे हो?’ सरकार दिल्ली गलिन में राधा को झाड़ती, अपने वसन संभालती राधा को लताड़ती चीखी तो राधा बौराई, ‘सरकार, माफ करना. नोटबंदी के दौर में दूसरे रंग न खरीद पाई. होली का त्योहार बचा रहे, इसलिए पानी में तवे की कालिख ले मिलाई. अब आप सामने आ गए तो??? मैं तो अपने श्याम को और श्याम करने के लिए… सोचा, श्याम कारे ही तो हैं. होली भी हो जाएगी और…पर सरकार, लगता है अब जनता के तीजत्योहार ऐसे ही मनेंगे. हे पौपुलर सरकार, हो सके तो दिल्ली से बाहर निकलो, मोहन प्यारे. हो सके तो बयानों से बाहर निकलो, सोहन प्यारे. ऊंचे लोगों की तिजोरियां नहीं, हम गरीबों के पेट भरो जनता के सहारे.’

मोहन सुन परेशान. राधा की आंखें धुएं से फूटने से बचाने के लिए उसे गैस भी दी, तो भी अपनी न हुई. चुनाव सिर पर. जनता को कैसे फुसलाएं? नोटबंदी का अब क्या तोड़ लाएं? लेओ भैया, जे तो उन के पैरों पर कुल्हाड़ी मारतेमारते अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी पड़ गई. होली में सारा चकाचक घोषणापत्र गुड़गोबर हो गया. एजेंडे का वोटर एजेंडे में ही खो गया.

होली के हुल्लड़ में सरकार परेशान है. चुनाव से प्रैशरियाए सिर पर टोकरा भरा आसमान है. किस ओर जाएं. बिन कनैक्टिविटी के किसे डिजिटाई टोपी पहनाएं. डिजिटलिया हो छत पर खड़े कोई सिग्नल तलाश रहा है तो कोई सिग्नल के लिए हनुमानचालीसा बांच रहा है.

ऐसे में फगुआ के अवसर पर वोट बटोरने का कोई खालिस रास्ता तो दिखाओ, हे लोकतंत्र. होली में होली से अधिक वोटों को झटकने की मारधाड़ है. अब के लट्ठमार होली नहीं, वोटमार होली चली है. सभी अपनेअपने सिर पर अपनेअपने घोषणापत्रों का हैलमेट रख वोटों के लिए जनता द्वारा धकियाए जाने के बाद भी अड़े हुए हैं.

शराब बेचने के चक्कर में सोनम कपूर हुईं ‘ब्रालेस’

स्टाइल आइकॉन सोनम कपूर हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती हैं. आमतौर पर उन्हें मीडिया में इसलिए देखा जाता है कि वो अपने ड्रेसिंग स्टाइल को बेहतरीन तरीके से कैरी करती हैं. सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी सोनम का जलवा है. ऐश्वर्या राय के बाद सोनम कपूर ही एक ऐसी इंडियन हीरोइन हैं, जिनका स्टाइल स्टेटमेंट फारेन फोटोग्राफर्स को भी दीवाना बना देता है. इस बार भी सोनम के साथ कुछ ऐसा हुआ. वो मीडिया की सुर्खियां तो बनीं, लेकिन गलत अंदाज में.

सोनम एक इवेंट के दौरान ऐसी ड्रेस में दिखीं, जो बहुत ज़्यादा रीविलिंग थी. अब मल्लिका शेरावत से ऐसे ड्रेस की उम्मीद हो सकती है, लेकिन स्टाइल आइकॉन सोनम कपूर से नहीं. दरअसल मुंबई में एक विदेशी लिकर के लॉन्च पर सोनम ने एक ब्लैक कलर का जंप शूट पहना.

इसमें सोनम लग तो बहुत खूबसूरत रही थीं, लेकिन उनके स्तन का निचला हिस्सा सबका ध्यान अट्रैक्ट कर रहा था. सोनम उस लिकर कंपनी का ऐड करने में कुछ इस कदर व्यस्त थीं कि वो घर से ब्रा पहनना ही भूल ही गई थीं. एक तरफ साइड से उनके स्तन पूरी तरह से दिख रहे थे, जो वल्गर लग रहा था. अब पैसे के लिए सोनम अपना ड्रेसिंग सेंस ही बदल देंगी, ये तो नहीं पता था.

बॉलीवुड हीरोइनें फिल्मों के साथ-साथ अपने ड्रेसिंग सेंस से भी दर्शकों को मन मोह लेती हैं. खासतौर पर युवा लड़कियां इन्हें कॉपी करने से पीछे नहीं हटतीं. लेकिन इस तरह के ड्रेस तो किसी का भी ध्यान आकर्षित तो कर सकते हैं, लेकिन लड़कियों का स्टाइल स्टेटमेंट नहीं बन सकते. मीडिया में सोनम के इस ड्रेस की काफी बुराई भी हुई.

सोनम ने अपनी ड्रेस और खुद को डिफेंड करने के लिए कई टि्वट भी किये. सोनम ने कहा कि ने इन तस्वीरों को अलग ही मकसद से खींचा है. वैसे भी मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, मुझे अपने शरीर पर फक्र है.’ इस तरह से सोनम कपूर ब्रालेस हुई, शराब बेचने के चक्कर में – अब भला जब सोनम को अपनी ड्रेस पर कोई फर्क नहीं पड़ता, तो आप कौन होते हैं कमेंट करने वाले.

होली में ‘दीवाली’ का मजा लेंगे नेता

5 राज्यों के विधानसभा चुनाव अब खत्म हो चुके हैं. नेताओं को चुनाव परिणाम का इंतजार है. 11 मार्च को मतगणना का काम होगा. 11 मार्च की दोपहर तक मतगणना से यह पता चल जायेगा कि किस पार्टी में कितना दम है  जीत का मजा लेने वाले नेता होली में ‘दीवाली’ का मजा लेंगे. उसके बाद होली के रंग खेलेंगे. हारने वाले नेताओं की होली फीकी होगी. उनके लिये होली का मजा नहीं रह जायेगा. नेताओं से अधिक उनके समर्थकों में जोश है. हर तरह होली में ‘दीवाली’ मनाने की तैयारी चल रही है. नेता और उनके समर्थक पूरी तरह से दीवाली मनाने की तैयारी में पहले ही पटाखे और फुलझडी खरीद रहे हैं. नेताओं का दावा है कि 11 मार्च को पहले जीत की खुशी में ‘दीवाली’ मनाई जायेगी इसके बाद होली का रंग और फाग खेला जायेगा.

गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश में से सबसे अधिक कड़ा मुकाबला उत्तर प्रदेश में था. यहा 7 चरणों में चले चुनाव ने नेताओं को थका दिया. प्रदेश में एक माह से अधिक केवल चुनाव ही हुआ. बाकी जरूरी काम टाल दिये गये थे. तहसील और थाने तक सूने पड़ गये. चुनाव किसी रोजगार सरीखा दिखने लगा था. चुनाव प्रचार का यह हाल था कि बड़े नेताओं के उतरने से लग ही नहीं रहा था कि यह विधानसभा के चुनाव हैं. राहुल गांधी-अखिलेश यादव को जवाब देने के लिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी पूरी कैबिनेट प्रचार में उतार दी थी.

करोडों खर्च करने के बाद भी नेताओं को अपनी जीत का भरोसा नहीं हुआ. चुनाव के प्रचार से लेकर मतगणना के बीच के समय में वह लोग पूजा पाठ से लेकर तंत्रमंत्र तक का सहारा लेने लगे. चुनाव प्रचार के समय मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, मजार, सभी जगह माथा टेकते यह लोग देखे गये. चुनाव के बाद बहुत सारे नेता पंडितों और ज्योतिषयों के चक्कर लगाते देखे गये. कई लोगों ने तो गुप्त स्थानों पर विशेष पूजा अभियान भी शुरू कर रखा है. मीडिया और दूसरों की नजर से बचने के लिये यह लोग बहुत ही गोपनीय तरीके से पूजा करा रहे हैं.

कई बड़े नेताओं के समर्थक तो अपने नेता की जीत के लिये उसके कपडे रखकर तंत्रमंत्र करने में लगे हैं. तंत्रमंत्र और ऐसी पूजा करने वाले के पौ बारह हो रहे हैं. इनको पता है कि अगर इनके कहे अनुसार नेता जीत गया तो आने वाले पूरे 5 साल इनकी चांदी रहेगी. अपने नेता से मनचाहा काम करा सकेंगे. चुनाव के समय से लेकर मतगणना तक कई नेताओं के हाथ में पहने जाने वाली अंगूठियों की संख्या में इजाफा हो गया. कुछ के गले में लाकेट बढ गया तो कुछ नेताओं ने रत्न लगा ब्रेसलेट पहन लिया.

विधायक का चुनाव लड़ रहे एक नेता जी तो चुनाव में पर्चा दाखिल करने से लेकर अब तक हर दिन के रंग के हिसाब से कपड़े अपने साथ रखने लगे. जिस दिन के रंग के हिसाब से वह कपड़े नहीं पहन पाते उस दिन के रंग का रूमाल उनकी जेब में आ गया. एक नेता जी को पंडित ने बताया कि प्रचार भर अपने बाल मत कटाना तो वह पूरे महीने बाल कटवाने नहीं गये. कई नेताओं की पत्नियों ने अपने पति की जीत के लिये व्रत रखा. मजे की बात यह है कि इसमें कई दलित नेता भी शामिल हैं जो पूजा का विरोध करते हैं. देखने वाली बात यह है कि जीत किसके पक्ष में रहती है. जिसके पक्ष में जीत होगी उसका पुजारी खुलकर बतायेगा और जो हारेगा उसका पुजारी मौन व्रत रख लेगा.

इस फिल्म के लिए वजन बढ़ाएगी यह अभिनेत्री

एमी जैक्सन अपनी आने वाली फिल्म के लिए वजन बढ़ाएंगी. एमी को फिल्म मेकर और म्यूजिक वीडियो प्रोड्यूसर एंडी मोरहन ने अपनी नई फिल्म के लिए संपर्क किया है, जिसमें फिल्म में हृष्ट-पुष्ट दिखने के लिए वह 10 किलो तक वजन बढ़ाएंगी. फिल्म की कहानी एक इंडियन ब्रिटिश शख्स पर आधारित है, जिसमें एमी उनकी गर्लफ्रेंड के किरदार में होंगी.

एमी इसके अलावा फिल्म “2.0” में सुपरस्टार रजनीकांत के साथ अहम किरदार में नजर आने वाली हैं, जिसमें उनके साथ सह-अभिनेता अक्षय कुमार भी होंगे. फिल्म का निर्देशन एस शंकर कर रहे हैं, जबकि फिल्म में संगीत एआर रहमान ने दिया है. इस फिल्म में एमी का किरदार काफी अहम माना जा रहा है. इस फिल्म के इसी साल रिलीज होने की उम्मीद है.

समेकित प्रणाली ने अनीता को दिलाई अलग पहचान

अगर इनसान में कुछ कर गुजरने का जज्बा होता है, तो कामयाबी उस के कदम चूमती है. नालंदा जिले के चंडी प्रखंड के अनंतपुर गांव की रहने वाली अनीता कुमारी का जज्बा कुछ ऐसा ही है. अनीता ने बताया कि वे बीए (गृहविज्ञान) पास कुशल गृहणी थीं. उन के पति संजय कुमार बीए पास करने के बाद नौकरी की तलाश में काफी भटके, मगर जब नौकरी नहीं मिल पाई तो खेती करने लगे. उन लोगों के पास खेती लायक 3 एकड़ 23 डिसीमल जमीन थी. पति के साथ मेहनत करने के बाद किसी तरह अनीता के परिवार का गुजारा चल रहा था. अनीता सोचती थीं कि किस प्रकार से बच्चों को अच्छी तालीम दी जाए. इसी समस्या को ले कर अनीता कृषि विज्ञान केंद्र हरनौत गईं. वहां के कार्यक्रम संचालक से उन की मुलाकात हुई. उन्होंने अनीता को मशरूम उत्पादन की सलाह दी. कार्यक्रम संचालक के सहयोग से अनीता कृषि तकनीकी प्रबंध अभिकरण (आस्था) के जरीए सब से पहले रांची के कृषि विश्वविद्यालय गईं. वहां उन्होंने मशरूम उत्पादन के तौरतरीके सीखे और उस के फायदे आदि के बारे में जानकारी हासिल की.

इस के बाद अनीता ने राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा, समस्तीपुर और पंतनगर के कृषि विश्वविद्यालय में जा कर मशरूम उत्पादन के साथसाथ उस के बीज उत्पादन की तकनीक भी सीखी. आज अनीता इस काम में इतनी माहिर हो चुकी हैं कि अपने गांव में रोजाना 100 किलोग्राम मशरूम उत्पादन के लक्ष्य को अगले सीजन तक हासिल कर लेंगी. अनीता के समझाने से 200 लोग मशरूम उत्पादन की तालीम ले चुके हैं, जिन में ज्यादातर महिलाएं हैं. इन लोगों ने मशरूम उत्पादन भी शुरू कर दिया है.

अनीता मशरूम के बीज भी तैयार कर रही हैं. कृषक हित समूह की सचिव अनीता विकलांग महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं. राष्ट्रीय बागबानी मिशन के तहत अनीता को मशरूम स्पानलैब स्थापित करने के लिए करीब 15 लाख रुपए की जरूरत थी. उन्हें सरकार की ओर से 90 फीसदी सब्सिडी यानी 13 लाख 50 हजार रुपए अनुदान के रूप में दिए गए.

मशरूम उत्पादन व मधुमक्खीपालन की बदौलत अनीता की डिमांड जिले और राज्य के बड़े अधिकारियों के किचन तक हो गई है. ग्रामीण महिलाओं की माली हालत सुधारने के लिए राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे ग्रामीण जीविकोपार्जन कार्यक्रम ‘जीविका’ की जिम्मेदारी भी उन्हीं को दी गई है.

समेकित कृषि प्रणाली ने अनीता व उन के परिवार की हालत ही बदल दी है. आज अनीता बदहाली की जिंदगी से निकल कर खुशहाल जिंदगी गुजार रही हैं. आज वे मशरूम उत्पादन, मशरूम बीज उत्पादन, मछलीपालन, मधुमक्खीपालन व मुरगीपालन वगैरह के साथसाथ अन्य फसलों की खेती भी कर रही हैं.

मशरूम व मशरूम बीजों की 5 जिलों में बिक्री : अनीता आज मशरूम उत्पादन कक्ष व मशरूम बीज लैब की स्थापना कर चुकी हैं. उन के यहां रोजाना 20 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन हो रहा है. इस के अलावा रोजाना 100 किलोग्राम मशरूम बीज का उत्पादन भी हो रहा है. मशरूम व मशरूम के बीजों को 5 जिलों भागलपुर, पटना, हाजीपुर, नालंदा व मुंगेर में सप्लाई किया जा रहा है.

पटना के 575 घरों में हो रही होम डिलीवरी : अनीता मशरूम का अचार भी बनाती हैं. उन का क्षितिज एग्रोटेक से टाईअप हुआ है. इस के जरीए पटना के 575 घरों में मोबाइल से होम डिलीवरी हो रही है. शहद, अचार, सत्तू, आटा, चावल, मसूर दाल, चना दाल, अरहर दाल व बासमती चावल की डिलीवरी की जा रही है. वे एमेजेन कंपनी से भी बात कर रही हैं, ताकि उन के उत्पाद देश के हर राज्य व विदेशों में रहने वाले लोगों को आसानी से मिल सकें.

हर साल 3 क्विंटल शहद का उत्पादन : अनीता को मधुमक्खी के 50 बक्सों से हर साल 3 क्विंटल शहद हासिल हो रहा है. इस से करीब 45000 रुपए सालाना की आमदनी हो रही है.

सम्मान से काम का जोश बढ़ा : साल 2012 में उन्हें बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर द्वारा नवाचार कृषक पुरस्कार से नवाजा गया. साल 2015 में उन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा जगजीवन राम अभिनव किसान पुरस्कार से नवाजा गया.

इन सम्मानों से नवाजे जाने पर अनीता कहती हैं कि यह तो उन के काम का इनाम है. ये पुरस्कार मिलने से उन में नया जोश व उत्साह पैदा हुआ है और भविष्य में कुछ और बेहतर करने की प्रेरणा मिली है.

मुलायम परिवार विवाद का ये है पार्ट 2

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के ताजा बयान से यह साफ हो चुका है कि मुलायम परिवार का विवाद खत्म नहीं हुआ था. साधना गुप्ता के बयान से यह भी साफ हो गया है कि उनकी अपनी महत्वाकांक्षा है. अब वह खुद राजनीति में न आना चाहती हों, पर अब वह पर्दे के पीछे नहीं रहना चाहती. साधना चाहती हैं कि उनका बेटा प्रतीक राजनीति में आये. साधना गुप्ता का मर्म कुछ ऐसा ही है जैसा साल 2000 के करीब था. साल 2000 में जब साधना गुप्ता की कोई पहचान नहीं नही थी. साल 2003 में जब मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो पहली बार साधना गुप्ता उनके साथ मुख्यमंत्री आवास में रहने गई. पहली बार मुलायम के सर्मथकों को यह पता चला था कि मुलायम की दूसरी पत्नी है.

इसी दौर में मुलायम पर आय से अधिक जायदाद का मसला उठा. वहां से प्रमाण मिला कि प्रतीक यादव मुलायम का बेटा है. उसके बाद साधना गुप्ता को सबकुछ ठीक लगने लगा था. परिवार में अंदर और बाहर साधना गुप्ता का अपना प्रभाव बन गया था. साल 2012 में जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने तब से साधना गुप्ता को परिवार में दूरी का अहसास होने लगा. यह सच है कि मुलायम और साधना की मुलाकात जिस समय हुई थी उस समय साधना राजनीति में आना चाहती थीं. अब साधना खुद स्वीकार करती हैं कि नेताजी ने उनको राजनीति में नहीं आने दिया.

2017 के विधानसभा चुनाव के पहले मुलायम परिवार में उठे झगड़े में साधना गुप्ता पूरी तरह से चुप थीं. चुनाव खत्म होते होते जिस तरह से साधना गुप्ता ने खुलकर अपनी बातचीत की और उसको बाकायदा प्रचारित किया गया उससे साफ है कि चुनाव परिणाम के बाद अगर सपा की प्रदेश में सरकार नहीं बनी तो अखिलेश यादव के खिलाफ मुलायम परिवार में विरोध के नये सुर सुनाई देंगे. अभी तक अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे, इस कारण सपा संगठन पर उनका कब्जा आसानी से हो गया. अगर अखिलेश दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बने तो हालात बदले होंगे. ऐसे में कुर्सी से हटने के बाद अखिलेश को चुनौतियों का सामना करना सरल नहीं होगा.

अखिलेश के स्वभाव से वाकिफ लोगों का अंदाजा है कि अखिलेश यादव झुकने वाले नहीं हैं. कुर्सी पर रहें या कुर्सी पर न रहें, परिवार के विवाद पर उनका जो स्टैंड पहले था, वही आगे भी रहेगा. मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटने के बाद विरोधी ही नहीं परिवार के लोग भी लाभ लेने के लिये अखिलेश को दवाब में लेंगे. साधना गुप्ता कहती हैं कि ‘अब तक चुप थी अब जवाब दूंगी. दुष्ट लोगों ने परिवार को तोड़ा है.’ पूरी बातचीत में साधना गुप्ता ने यह नहीं बताया कि दुष्ट कौन थे? अखिलेश की नजर में अमर सिंह इसके जिम्मेदार थे, अब वह पार्टी से बाहर हैं. असल में मुलायम के परिवार का विवाद राजनीतिक उत्तराधिकार से जुड़ा है. इसका पार्ट वन भले ही खत्म हो गया हो पर पार्ट टू बाकी है.

इस एक्ट्रेस ने पोस्ट की बिना कपड़ों की बाथरूम सेल्फी

टीवी के साथ ही साथ बॉलीवुड की फिल्म में भी अपने हुस्न का मायाजाल फैला चुकी मोहतरमा गीजेल ठकराल जो की टीवी के चर्चित रियलिट शो ‘बिग बॉस’ की एक्स-कंटेस्टेंट भी रह चुकी है वह फिर से अपने घर के बाथरूम में धूम मचाती हुई हमें नजर आ रही हैं. जी हां, अभी कुछ समय पहले ही ‘बिग बॉस’ की एक्स-कंटेस्टेंट गीजेल ठकराल ने अपना सिजलिंग फोटोशूट इंस्टाग्राम पर शेयर किया था, जो वायरल हुआ था.

जिसके बाद अब एक बार फिर से वह कुछ हॉट बाथरूम सेल्फी लेकर आई जिन्हें  हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे है. वैसे गीजेल ठकराल वही हैं जिन्होंने ‘बिग बॉस’ के 9वें सीजन में बतौर वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट एंट्री ली थी.

इसके अलावा वे फेमस किंगफिशर कैलेंडर में भी नजर आ चुकी हैं. टीवी पर वे लाइफ ओके के शो ‘वेलकम : बाजी मेहमानवाजी की’ और ‘सर्वाइवर इंडिया’ जैसे शोज में नजर आ चुकी हैं. उन्हें 2016 में रिलीज हुईं दो फिल्मों ‘मस्तीजादे’ और ‘क्या सुपरकूल हैं हम 3’ में देखा गया था. अबकी बार हॉट गीजेल ठकराल ने हाल ही में बाथरूम सेल्फी पोस्ट की हैं, जिसमें व्हाइट कलर के बाथरोब में नजर आ रहीं गीजेल एक ब्यूटी प्रोडक्ट को प्रमोट करती दिखाई दे रही हैं.

मेकअप से बढ़ता है महिलाओं का आत्मविश्वास

कामकाजी महिलाएं दफ्तरों में लिपीपुती हों या सुबह मुंह धोया, बाल बनाए और पुरुषों की तरह दफ्तरों में जा पहुंचीं, सवाल काफी दिनों से चर्चा में है. कुछ का कहना है कि महिलाओं को दफ्तरों, कारखानों, व्यवसायों में पुरुषों की तरह सधे कपड़ों में पर बिना मेकअप के आना चाहिए, तो कुछ का कहना है कि उन्हें भरसक आकर्षक बन कर रहना चाहिए. असल में यह विवाद वृद्ध होती कामकाजी महिलाओं और युवा महिलाओं के बीच है. पुरुषों को इस से क्या फर्क पड़ता है कि कामकाजी महिला कैसी दिख रही है. 2 नजर उठा कर देख लेने के बाद यह बेमानी हो जाता है और आदमी को काम से मतलब रह जाता है.

दूसरी साथी औरतें जरूर जलभुन जाती हैं. अनुभवी, होशियार पर शरीर पर कम ध्यान देने वाली औरतों को तब बुरा लगता है जब उन्हें लगे कि उन की प्रतियोगिता केवल काम में ही नहीं दिखने में भी है, वे इस बात पर सख्त एतराज करती हैं कि कामकाजी औरतें मेकअप कर के आएं.

बड़ी उम्र के पुरुष बौसों को रिझाने में अकसर मेकअप की हुई औरतें सफल हो जाती हैं और अपनी व्यावसायिक योग्यता में कमी को छिपा जाती हैं. इस का बहुतों को मलाल रहता है.

जिन क्षेत्रों में पर्सनैलिटी की खास जरूरत न हो वहां तो मेकअप विवाद का मामला बन जाता है. दरअसल, मेकअप करना हर औरत का प्राकृतिक अधिकार होना चाहिए. यह उस के व्यक्तित्व का हिस्सा है. जैसे बढ़ी हुई दाढ़ी, बिखरे बाल, फटी कमीज वाले पुरुष किसी भी क्षेत्र में स्वीकार्य नहीं हैं, वैसे ही बिना स्मार्ट बने औरतें किसी भी क्षेत्र में स्वीकार्य नहीं रहतीं.

मेकअप आत्मविश्वास देता है, बल देता है, प्राकृतिक गुणों को उभारता है और उन्हें कैश करने का हक हर सुंदर स्त्री को है. जैसे कुछ बुद्धि का इस्तेमाल करती हैं, वैसे ही कुछ जन्म से मिले सौंदर्य का इस्तेमाल कर सकती हैं.

शिक्षा, खेलकूद, अभिनय, विवाह, मित्रता आदि में व्यक्तित्व का असर होता है और स्मार्ट स्त्रीपुरुष दोनों ही कुछ ज्यादा सफलता पाते हैं. इस पर एतराज नहीं होना चाहिए. इसे नकारना तो गलत ही होगा. मेकअप करना चाहे घर में हो, राजनीति में हो या फिर दफ्तरोंकारखानों में, गलत नहीं है पर अति हर चीज की बुरी होती है.

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