मोदी क्या छुपा रहे हैं और क्या दिखा रहे हैं

मोदी जो दिखाते हैं, उसके पीछे उससे बड़ा खतरा छुपाते हैं. अभी हम जीएसटी देख रहे हैं. ‘राष्ट्र के इतिहास का सबसे बड़ा कर सुधार’ का जश्न देख रहे हैं. ‘एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार का सपना देख रहे हैं’ और यह सब दिखाने की मोदी सरकार की जल्दबाजी देख रहे हैं. यह विज्ञापन देख रहे हैं, कि ‘‘आईये, हम जीएसटी का सहर्ष स्वागत करें.”

हमें श्रम कानूनों में संशोधन, भूमि अधिग्रहण के तौर तरीके, किसान आंदोलन, जीएसटी का विरोध, अर्थव्यवस्था का निजीकरण और ‘एक राष्ट्र, एक दल और एक नेता’ की मंशा को देखने नहीं दिया जायेगा. यह भी देखने नहीं किया जायेगा कि गो-रक्षक हिंदू तालिबानी बन गये हैं. लोगों को सार्वजनिक रूप से पीट-पीट कर मारा जा रहा है. एक राष्ट्र, एक कर और एक बाजार का सपना, किसके लिये है?

राष्ट्र यदि बाजार के लिये है, तो एक कर का विधान भी बाजार के लिये ही होगा. और बाजार पर यदि निजी वित्तीय पूंजी की पकड़ है, तो मानी हुई बात है कि उसका लाभ निजी कम्पनियों को ही मिलेगा. आम जनता को तो उसके हितों का प्रचार ही मिलेगा. भूख, गरीबी, बेरोजगारी और बढ़ती हुई महंगाई से ही उसका वास्ता पड़ेगा. देश की अर्थव्यवस्था यदि मोटाती है, तो मोटापा उस वर्ग के बदन पर चढ़ेगा जो देश और दुनिया का मालिक बन गया है, और सरकारें उसके मालिकाना हक को वैधानिक बना रही हैं.

सरकार प्रचार कर रही है-

यह एक करामात है. देश को मिली आर्थिक आजादी है. क्या कमाल है? कैसी समानता बैठाने की कवायत है? कांग्रेस के नेतृत्व में देश को आजादी 15 अगस्त 1947 की आधीरात को मिली थी. जवाहरलाल नेहरू ने कमान संभाली थी. भाजपा के नेतृत्व में देश को आर्थिक आजादी 1 जुलाई 2017 की आधी रात को मिली. कमान नरेंद्र मोदी के हाथ में है.

यदि आजादी की बात करें तो 1947 में देश की आजादी अधूरी थी. 2017 की आर्थिक आजादी उतनी ही आजाद है, जितना ‘मुक्त बाजार‘ और ‘बाजारवाद‘ वैश्विक वित्तीय ताकतों का वर्चस्व और आम लोगों की वित्तीय दासता है.

मौजूदा दौर में आजादी वह फुटबॉल है, जिसे लतियाते रहिये तो ठीक है, लेकिन हाथ में ले लीजिये तो फाउल है. हां, गोलकीपर बनी सरकार उसे हाथ में लेती है, और लाँग शॉट लगा देती है. दर्शक बनी आम जनता कभी इसकी ओर से, कभी उसकी ओर से चिल्लाती है, जबकि मैच फिक्स है. जिस जीएसटी को भाजपा की मोदी सरकार अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि और आर्थिक आजादी बता रही है, उसी भाजपा ने और नरेंद्र मोदी ने यूपीए की मनमोहन सरकार के जीएसटी के प्रस्ताव का विरोध किया था, नरेंद्र मोदी ने उसे आर्थिक विकास के लिये बाधा बताया था.

यूपीए की मनमोहन सरकार कॉरपोरेट की बनती सरकार थी, एनडीए की मोदी सरकार कॉरपोरेट की सरकार है. आम जनता को बस इतना समझना है, कि एक राष्ट्र, एक कर, एक बाजार वित्तीय तानाशाही की ओर प्रभावी कदम है, और एक राष्ट्र, एक दल, एक नेता राजनीतिक तानाशाही की चाहत है. संघ, भाजपा और मोदी इसी सोच के बनते हुए भारतीय मिसाल हैं.

ये हैं बॉलीवुड के कुछ काले सच

मायानगरी मुंबई बाहर से देखने में हमें बेहद हसीं लगती है न. भले हमें बड़े होकर कुछ भी बनना हो, पर बचपन से ही बॉलीवुड में कदम रखने की हसरत हमारे दिल में हमेशा ही बनी रहती है. जिसने भी ये कहा है “ये है बंबई नगरिया तू देख बबुआ”… बहुत सही कहा है.

क्या आपको पता है कि इस जगमगाती दुनिया के पीछे एक स्याह दुनिया छुपी हुई है. जिसे शायद आप या बाकी कोई आम आदमी देखना पसंद नहीं करेगा. आज हम आपको बॉलीवुड के कुछ डार्क सीक्रेट्स बताने जा रहे हैं जो शायद आपको बिल्कुल भी पता नहीं होंगे.

धर्मेन्द्र की पहली पत्नी प्रकाश कौर केवल 20 साल की थीं. धर्मेन्द्र शादी के बाद भी लगभग हर हफ़्ते अपनी गर्ल फ्रेंड बदलते थे. प्रकाश कौर का कहना था कि हेमा मालिनी के लिए कोई भी आदमी मुझे छोड़ सकता है.

राज कुंद्रा की पहली पत्नी मां बनने वाली थीं, जब उनको पता चला कि राज उनको धोखा दे रहे हैं. और जिस दिन कविता ने अपनी बेटी को जन्म दिया उसी दिन उनको राज कुंद्रा की तरफ से उन्हें तलाक का नोटिस मिला.

गौरी खान और शाहरुख खान की जिन्दगी बाहर से देखने में बहुत अच्छी दिखाई देती ही पर सूत्रों के हवाले से ये बात सामने आई है कि वे गौरी ड्रग एडिक्ट रह चुकी हैं.

बोनी कपूर ने श्रीदेवी को अपनी पहली पत्नी मोना कपूर से ये कहकर मिलवाया था कि वो उनकी राखी-सिस्टर हैं और कुछ दिनों तक वो इसी घर में रहेंगी. कुछ दिनों बाद पता चला कि श्रीदेवी उनके बच्चे की मां बनने वाली हैं.

पूनम सिन्हा एक बहुत अच्छे परिवार से थीं और वो उनके साथ थीं जब शत्रुघ्न का अफेयर रीना रॉय के साथ चल रहा था. इन दोनों के बीच की करीबियों की बातें अब खुले तौर पर होने लगी थीं. रीना ने शत्रुघ्न से कई बार उन्हें दूसरी पत्नी के रूप में रखने यानी उनसे शादी करने की बात कही पर वो हमेशा ही इससे पीछे हटते रहे.

उन्होंने इस अफेयर के बावजूद पूनम सिन्हा से शादी की और फिर इसके बाद 7 सालों तक रीना और उनका अफेयर चलता रहा.इस बारे में एक बार पूनम सिन्हा ने कहा कि इन दोनों के बारे में जानते हुए मैंने खुद किनारे होकर रीना के लिए रास्ते खोल दिए थे पर शत्रुघ्न ऐसी लड़की से शादी नहीं करना चाहते थे.

दिशाहीन होते किशोरों का क्या होगा भविष्य

आज का किशोर यानी कल का वयस्क दिशाहीन हो रहा है. ठीक है मानसूनी बादल कब कहां कितने बरसेंगे मालूम नहीं रहता पर बरसेंगे तो सही, यह पक्का रहता है पर आज हमारे किशोरों को नहीं मालूम कि कल क्या होगा. इस के जिम्मेदार किशोर नहीं हैं, वे नेता हैं जो अपना राग अलापते रहते हैं, वे अफसर हैं जो मेज थपथपाते रहते हैं, वे मुल्लापंडे हैं जो घंटेघडि़याल खड़काते रहते हैं, शिक्षा के दुकानदार हैं जो सारा समय पैसा सिर्फ पैसा कमाते रहते हैं.

कल के युवाओं, आज के किशोरों को सही जमीन न देने की गलती आज के वयस्क, नीति निर्धारक कर रहे हैं और अफसोस यह है कि उन के कुकर्मों की सजा अगली पीढ़ी भुगतेगी. चीन की पिछली पीढ़ी ने मेहनत की, अगले कल की सोची और 1960 तक दुनिया का सब से गरीब देश आज सब से ज्यादा फैलने वाला देश बन गया है. चीनी युवाओं की कर्मठता है कि वे अफ्रीका, बंगलादेश, पाकिस्तान, थाईलैंड, म्यांमार में ही नहीं पूर्वी यूरोप के देशों में सड़कें, पुल, बांध, रेलें, स्टेडियम बना रहे हैं.

ठीक है बोलने की आजादी चीन में नहीं है पर भई, भारत में भगवा गमछाधारियों ने कौन से हमारे लिए  यहां छोड़ी है. हमारे किशोरों तक को या तो उन्होंने अपनी भाषा बोलने वाला तोता बना दिया या पुलिस भेज कर विरोध करने वालों को डरा दिया.

समाज का निर्माण नई सोच से होता है जो समाज सदियों से गोबर और गंद के गड्ढे में फंसा हो, उसे जिस नए पल की तलाश है वह किशोरों के मन में पैदा होती है पर हम ने उन किशोरों को या फिर तो मोबाइल पकड़ा दिए या मौजमस्ती की राह दिखा दी. स्कूलों में अब वादविवाद प्रतियोगिताएं नहीं होतीं, स्पैलिंग बी (मधुमक्खी) जैसी निरर्थक प्रतियोगिता ज्ञान के नाम पर होती हैं.

किशोरों को औब्जैक्टिव परीक्षा के नाम पर अपनी बात कहने की आदत सुधारने से हटा दिया है. अब उन्हें सिर्फ हां या न कहना आता है, बुलैट प्वाइंट से अपनी बात समझाने का पाठ पढ़ा डाला. झंडे फहराने से काम नहीं चलता, न ही जस्टिन बीबर की म्यूजिकल इवनिंग में थिरकने से कुछ बनता है.

किशोरों को नई हवा का आनंद लेने दें. हर बारिश, हर मानसून एक नई उमंग ले कर आता है. उस की भीनी सुगंध का आनंद हो, बारिश का पानी सीवर के पानी में मिल कर सड़ांध न मारे यह देखना जरूरी है.

आपने पहले नहीं देखा होगा सिद्धार्थ और जैकलिन का ये अवतार

सुंदर, सुशील और रिस्की जेंटलमैन से मिलना चाहेंगे आप? आइए, हम मिलवाते हैं आपको. ये बात तो आप जानते ही होंगे कि सिद्धार्थ मल्होत्रा और जैकलिन फर्नांडिस स्टारर फिल्म ‘ए जेंटलमैन’ (A Gentleman) का बेहद इस्ट्रेस्टिंग सा और हॉट सा पोस्टर रिलीज हो चुका है.

इस फिल्म में रिस्की ऋषि और इंम्पलिव किस्म की काव्या की जोड़ी वाकई काफी अलग लग रही है. इस फिल्म से संबंधित जितनी भी तस्वीरें सामने आई हैं, चाहे वो फिल्म का पोस्टर हो या सोशल मीडिया पर इन सितारों द्वारा शेयर की गई तस्वीरें हों, सभी में दोंनो ही कलाकारों के अलग अंदाज नजर आ रहे हैं.

तस्वीरों में बोल्ड जैकलिन सिद्धार्थ की बाहों में हैं, तो वहीं सिद्धार्थ ने अपने दोनों हाथों में गन थाम रखी है. सामने आई तस्वीरों में जैकलिन का ये बोल्ड अवतार सोशल मीडिया पर छाया हुआ है और साथ ही दूसरे पोस्टर में दोनों का लिपलॉक भी खूब सुर्खियां बटोर रहा है.

लालची मामा का शिकार हुई एक भांजी

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले की सोहागपुर तहसील में जमीनों के दाम उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़े हैं, क्योंकि यह सैरसपाटे की मशहूर जगह पचमढ़ी के नजदीक है. इस के अलावा सोहागपुर से चंद किलोमीटर की दूरी पर एक और जगह मढ़ई तेजी से सैलानियों की पसंद बनती जा रही है. इस की वजह वाइल्ड लाइफ का रोमांच और यहां की कुदरती खूबसूरती है. सैलानियों की आवाजाही के चलते सोहागपुर में धड़ल्ले से होटल, रिसोर्ट और ढाबे खुलते जा रहे हैं.

दिल्ली के पौश इलाके वसंत विहार की रहने वाली 40 साला लीना शर्मा का सोहागपुर अकसर आनाजाना होता रहता था, क्योंकि यहां उस की 22 एकड़ जमीन थी, जो उस के नाना और मौसी मुन्नीबाई ने उस के नाम कर दी थी.

लीना शर्मा की इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपए में थी, लेकिन इस में से 10 एकड़ जमीन उस के रिश्ते के मामा प्रदीप शर्मा ने दबा रखी थी. 21 अप्रैल, 2016 को लीना शर्मा खासतौर से अपनी जमीन की नपत के लिए भोपाल होते हुए सोहागपुर आई थी.

23 अप्रैल, 2016 को पटवारी और आरआई ने लीना शर्मा के हिस्से की जमीन नाप कर उसे मालिकाना हक सौंपा, तो उस ने तुरंत जमीन पर बाड़ लगाने का काम शुरू कर दिया.

दरअसल, लीना शर्मा 2 करोड़ रुपए में इस जमीन का सौदा कर चुकी थी और इस पैसे से दिल्ली में ही जायदाद खरीदने का मन बना चुकी थी. 29 अप्रैल, 2016 को बाड़ लगाने के दौरान प्रदीप शर्मा अपने 2 नौकरों राजेंद्र कुमरे और गोरे लाल के साथ आया और जमीन को ले कर उस से झगड़ना शुरू कर दिया.

प्रदीप सोहागपुर का रसूखदार शख्स था और सोहागपुर ब्लौक कांग्रेस का अध्यक्ष भी. झगड़ा इतना बढ़ा कि प्रदीप शर्मा और उस के नौकरों ने मिल कर लीना शर्मा की हत्या कर दी.

हत्या चूंकि सोचीसमझी साजिश के तहत नहीं की गई थी, इसलिए इन तीनों ने पहले तो लीना शर्मा को बेरहमी से लाठियों और पत्थरों से मारा और गुनाह छिपाने की गरज से उस की लाश को ट्रैक्टरट्रौली में डाल कर नया कूकरा गांव ले जा कर जंगल में गाड़ दिया.

लाश जल्दी गले, इसलिए इन दरिंदों ने उस के साथ नमक और यूरिया भी मिला दिया था. हत्या करने के बाद प्रदीप शर्मा सामान्य रहते हुए कसबे में ऐसे घूमता रहा, जैसे कुछ हुआ ही न हो. जाहिर है, वह यह मान कर चल रहा था कि लीना शर्मा के कत्ल की खबर किसी को नहीं लगेगी और जब उस की लाश सड़गल जाएगी, तब वह पुलिस में जा कर लीना शर्मा की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखा देगा. लेकिन उस ने ऐसा नहीं किया.

लीना शर्मा की जिंदगी किसी अफसाने से कम नहीं कही जा सकती. जब वह बहुत छोटी थी, तभी उस के मांबाप चल बसे थे, इसलिए उस की व उस की बड़ी बहन हेमा की परवरिश मौसी ने की थी.

मरने से पहले ही मौसी ने अपनी जमीन इन दोनों बहनों के नाम कर दी थी. बाद में लीना शर्मा अपनी बहन हेमा के साथ भोपाल आ कर परी बाजार में रहने लगी थी.

लीना शर्मा खूबसूरत थी और होनहार भी. लिहाजा, उस ने फौरेन ट्रेड से स्नातक की डिगरी हासिल की और जल्द ही उस की नौकरी अमेरिकी अंबैसी में बतौर कंसलटैंट लग गई. लेकिन अपने पति से उस की पटरी नहीं बैठी, तो तलाक भी हो गया. जल्द ही अपना दुखद अतीत भुला कर वह दिल्ली में ही बस गई और अपनी खुद की कंसलटैंसी कंपनी चलाने लगी.

40 साल की हुई तो लीना शर्मा ने दोबारा शादी करने का फैसला कर लिया, लेकिन शादी के पहले वह सोहागपुर की जमीन के झंझट को निबटा लेना चाहती थी, पर रिश्ते के मामा प्रदीप शर्मा ने उस के मनसूबों पर पानी फेर दिया.

लीना शर्मा की हत्या एक राज ही बन कर रह जाती, अगर उस के दोस्त उसे नहीं ढूंढ़ते. जब लीना शर्मा तयशुदा वक्त पर नहीं लौटी और उस का मोबाइल फोन बंद रहने लगा, तो भोपाल में रह रही उस की सहेली रितु शुक्ला ने उस की गुमशुदगी की खबर पुलिस कंट्रोल रूम में दी.

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदीप शर्मा से संपर्क किया, तो वह घबरा गया और भांजी के गुम होने की रिपोर्ट सोहागपुर थाने में लिखाई, जबकि वही बेहतर जानता था कि लीना शर्मा अब इस दुनिया में नहीं है. देर से रिपोर्ट लिखाए जाने से प्रदीप शर्मा शक के दायरे में आया और जमीन के झगड़े की बात सामने आई, तो पुलिस का शक यकीन में बदल गया.

मामूली सी पूछताछ में प्रदीप शर्मा ने अपना जुर्म कबूल कर लिया, लेकिन शक अब लीना शर्मा की बहन हेमा पर भी गहरा रहा है कि वह क्यों लीना शर्मा के गायब होने पर खामोश रही थी? कहीं उस की इस कलयुगी मामा से किसी तरह की मिलीभगत तो नहीं थी? इस तरफ भी पुलिस पड़ताल कर रही है, क्योंकि अब उस पर सच सामने लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है.

लीना शर्मा के दिल्ली के दोस्त भी भोपाल आ कर पुलिस के आला अफसरों से मिले और सोहागपुर भी गए. हेमा के बारे में सोहागपुर के लोगों का कहना है कि वह एक निहायत ही झक्की औरत है, जिस की पागलों जैसी हरकतें किसी सुबूत की मुहताज नहीं. खुद उस का पति भी स्वीकार कर चुका है कि वह एक मानसिक रोगी है.

अब जबकि आरोपी प्रदीप शर्मा अपना जुर्म कबूल कर चुका है, तब कुछ और सवाल भी मुंहबाए खड़े हैं कि क्या लीना शर्मा का बलात्कार भी किया गया था, क्योंकि उस की लाश बिना कपड़ों में मिली थी और उस के जेवर अभी तक बरामद नहीं हुए हैं?

आरोपियों ने यह जरूर माना कि लीना शर्मा का मोबाइल फोन उन में से एक ने चलती ट्रेन से फेका था. लाश चूंकि 15 दिन पुरानी हो गई थी, इसलिए पोस्टमार्टम से भी बहुत सी बातें साफ नहीं हो पा रही थीं. दूसरे सवाल का ताल्लुक पुश्तैनी जायदाद के लालच का है कि कहीं इस वजह से तो लीना शर्मा की हत्या नहीं की गई है?

प्रदीप शर्मा ने अपनी भांजी के बारे में कुछ नहीं सोचा कि उस ने अपनी जिंदगी में कितने दुख उठाए हैं और परेशानियां भी बरदाश्त की हैं. लीना शर्मा अगर दूसरी शादी कर के अपना घर बसाना चाह रही थी तो यह उस का हक था, लेकिन उस की दुखभरी जिंदगी का खात्मा भी दुखद ही हुआ.

ऐसे इश्तिहार छपते रहते हैं कि अमीर घरों की लड़कियों को खुश कर के 10 हजार कमाएं. इनकी हकीकत क्या है.

सवाल
बहुत से अखबारों में आए दिन ऐसे इश्तिहार छपते रहते हैं कि अमीर घरों की लड़कियों व औरतों को खुश कर के 10 हजार से 20 हजार रुपए तक कमाएं. ये लोग एक हजार रुपए मैंबरशिप के मांगते हैं. आखिर इन इश्तिहारों की हकीकत क्या है?

जवाब

ऐसे इश्तिहारों के चक्कर में बिलकुल नहीं पड़ना चाहिए. इन के चक्रव्यूह में फंसने वाले की छीछालेदर हो जाती है. अपनी कमाई के लिए जो लोग एक हजार रुपए मांग रहे हों, वे 10 हजार या 20 हजार रुपए क्या दिलाएंगे. ये लोग ग्राहक को फंसा कर उस की उलटी सीधी तसवीरें खींच कर उसे ब्लैकमेल भी करते हैं. इन से उचित दूरी बनाए रखें.

अभिषेक ने ऐसे कही थी ऐश्वर्या राय से अपने दिल की बात

बॉलीवुड की मशहूर जोड़ियों में से एक अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय ने 20 अप्रैल, 2007 को शादी की थी. यानि कि इसी साल दोंने ने अपनी शादी के 10 साल पूरे किए हैं. अपनी शादी और ऐश्वर्या को प्रपोज करने के पलों को याद करते हुए अभिषेक ने ट्विटर अकाउंट पर काफी कुछ लिखा था. अपने पुराने दिनों को याद करते हुए अभिषेक ने ऐश्वर्या के साथ अपने इस सफर को बेहद ही खुशनमा बताया है.

अभिषेक ने ऐश्वर्या को कैसे प्रपोज किया?

आज तक यह बात दुनिया से छुपी हुई थी, लोग अनुमान लगाकर ही यह बताते थे की अभिषेक ने ऐश्वर्या को ऐसे प्रपोज किया था या वैसे, पर अब अभिषेक बच्चन ने खुद अपने प्रपोज के बारें में बताया है. अभिषेक ने बताया की आज से 10 साल पहले न्यूयौर्क की कड़कड़ाती ठण्ड में बालकनी में खड़ी ऐश्वर्या से पूछा था की वो मुझसे शादी करेगी क्या? ऐश्वर्य का जबाव जब हाँ आया तो मुझे मेरी जिंदगी की वो खुशी मिल गई जो में सालों से चाहता था.

डरते हुए किया था प्रपोज

अभिषेक कहते हैं की ऐश्ववर्य को प्रपोज करना मेरे लिए बहुत मुश्किल था, जब मैं ऐश्वर्या को अपने दिल की बात बताने लगा तब मेरे दिल की धडकने बहुत ज्यादा बढ़ गई थी. ऐसा लग रहा था की यदि ऐश्वर्या ने ना कर दिया तो मेरी जिंदगी खत्म हो जायेगी. फिर भी मेने अपने आप को संभाला और ऐश्वर्या को कह ही दिया की मैं उनसे मोहब्बत करता हूं

क्या आपको मालूम है

फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ में ऐश्वर्या और अभिषेक ने पहली बार साथ काम किया था. इसके बाद दोनों फिल्म ‘उमराव जान’ में भी एक साथ नजर आए थे. इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं. फिल्म ‘गुरु’ को रिलीज हुए भी 10 साल हो चुके हैं. ये फिल्म 12 जनवरी, 2007 को रिलीज हुई थी. अभिषेक-ऐश्वर्या की शादी को भी 10 साल होने वाले हैं. आज दोनों 5 साल की बेटी आराध्या के माता पिता हैं.

करिश्मा कपूर से टूटी थी सगाई

आपको बता दें कि एक समय अभिषेक की शादी करिश्मा कपूर सो होने वाली थी. अक्टूबर 2002 में अभिषेक और करिश्मा की सगाई भी हो गई थी लेकिन जनवरी 2003 में ये रिश्ता टूट गया. इसके करीब 4 साल बाद अभिषेक और ऐश्वर्या की शादी हुई.

इंटरनेट पर धूम मचा रहीं है ‘क्‍वीन ऑफ डार्क’

आपके लिए और कई और लोगों के लिए शायद सुंदरता के मायने गोरा रंग और एक फिट फिगर होगा. लेकिन इस मॉडल को देखकर आपकी ये गलतफहमी जरूर दूर हो जाएगी.

पूरी दुनिया में काले रंग को हीनता की नजरों से देखा जाता है. कहीं न कहीं काले रंग के कारण लोगों को अपमान सहना पड़ता है लेकिन हम ये भूल जाते हैं कि हम सभी खास हैं. सभी अपने अपने ढंग से बेहद सुंदर और खास होते हैं.

अगर कोई रंग को ध्यान में रखकर लोगों को सुंदर नहीं समझते तो इस ‘क्वीन ऑफ डार्क’ को जरूर देखें.

नाज है इस मॉडल को खुद पर

दक्षिणी सूडान की 24 वर्षीय मॉडल न्याकिम गैटवेच का रंग पूरी तरह से काला है लेकिन न्याकिम ने कभी इस बात पर शर्म महसूस नहीं की. बल्कि वो तो अपने काले रंग पर नाज़ करती हैं. उसके लिए काला होना कोई अभिशाप नहीं है. अपने इसी जज्बे के कारण न्याकिम ने सोशल मीडिया और इंटरनेट पर धूम मचा रखी है.

लोगों ने रख दिया ये नाम

काले रंग की वजह से इंटरनेट और सोशल मीडिया पर लोगों ने न्याकिम का नाम ‘क्वीन ऑफ डार्क’ रख दिया है. अपने रंग के बारे में न्याकिम का कहना है कि रंग-रूप भगवान की देन तो जो उसने दिया उसे खुदा की नियामत मानकर सम्मान से रख लेना चाहिए. न्याकिम को अपने गहरे काले रंग से बिलकुल भी नफरत नहीं है.

बोल्‍ड एंड ब्‍यूटीफुल

न्याकिम न सिर्फ खूबसूरत हैं बल्कि काफी बोल्ड भी हैं. हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक उबेर ड्राइवर के साथ अपनी बातचीत शेयर की थी. वह ड्राइवर न्याकिम से स्किन को ब्लीच करवाने की कह रहा था. न्याकिम बताती हैं कि ड्राइवर ने उनसे कहा कि अगर वो चाहती हैं तो दस हज़ार डॉलर में अपनी स्किन को ब्लीच करवा सकती हैं. न्याकिम ड्राइवर की ये बात सुनकर ज़ोर से हंसने लगीं. ड्राइवर के सवाल के जवाब में न्याकिम ने कहा कि धरती पर हम सब भगवान की बनाई हुई कृतियां हैं. मुझे ईश्वर ने जैसा भी बनाया है मैं उससे खुश हूं. तो ड्राइवर ने न्याकिम से कहा – तो क्या तुम इस काले रंग को ईश्वर का वरदान मानती हो?

रंग को लेकर लोग करते है सवाल

न्याकिम ने बताया कि अकसर लोग उनके रंग के बारे में अजीबोगरीब सवाल पूछते रहते हैं. न्याकिम कहती हैं कि ऐसा पहली बार नहीं है जब उन्हें इस तरह के सवालों का सामना करना पड़ रहा है. न्याकिम बताती हैं कि बचपन से ही उन्हें अपने काले रंग को लेकर चिढ़ाया जाता रहा है.

बहुत कुछ सहना पड़ता है

न्याकिम को अपने काले रंग की वजह से बहुत कुछ सहना पड़ा है. वह बताती हैं कि जबसे वो यूएस से आईं हैं तभी से उनके काले रंग की आलोचना होने लगी है. उनके साथ ऐसा बचपन से हो रहा है. लेकिन अब ये सब चीज़ें उन्हें और भी ज्यादा मजबूत बनाती हैं.

हौंसला और जज्‍बा

अपने काले रंग को लेकर न्याकिम ने हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दिया और इसी का नतीजा है कि न्याकिम आज इंटरनेशनल मॉडल बन चुकी हैं. न्याकिम अपने रंग को लेकर काफी पॉजीटिव सोचती हैं. न्याकिम का कहना है कि उन्हें अपने काले रंग से पॉजीटिव एनर्जी मिलती है. उन्हें अपना डार्क कलर काफी लकी लगता है. इस मॉडल के हौंसले और जज्‍बे को हमारा सलाम.

फिल्म इंडस्ट्री में वरदान है वैनिटी वैन

अपने फिल्मी करियर में श्रीदेवी ने बरसात में फिल्माए गानों से धूम मचाई थी. इनमें चांदनी ‘फिल्म’ में ‘लगी आज सावन…’, ‘चालबाज’ में ‘ना जाने कहां से आई है’ और ‘मिस्टर इंडिया’ में ‘काटे नहीं कटते’ गाने बहुत हिट रहे हैं.

पर श्रीदेवी को बारिश में गानों का फिल्माया जाना किसी यातना से कम नहीं लगते थे. कई बार मीडिया से बातचीत करते हुए श्रीदेवी ने अपने बरसात के गानों पर टिप्पणी करते हुए कहा, “बरसात के गाने यातना हैं. मैं उनका कतई आनंद नहीं ले सकती क्यूंकि अधिकतर उन गानों को फिल्माते वक्त मैं बीमार हो जाया करती थी.” हाल ही में आई उनकी फिल्म ‘मॉम’ आई है. इस फिल्म में श्रीदेवी ने अक्षय खन्ना और नवाज़ुद्दीन सिद्दिकी के साथ काम किया है

वरदान बनी वैनिटी वैन

कई दशकों से फिल्म जगत में काम कर रही श्रीदेवी को बदली हुई फिल्म इंडस्ट्री अच्छी लगती है. उनके मुताबिक, आज की अभिनेत्रियों को बहुत सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं. इन सुविधाओं में वरदान है वैनिटी वैन.

श्रीदेवी के अनुसार आज की महिला अदाकारा के लिए वैनिटी वैन वरदान है. हमारे वक्त ऐसी कोई सुविधा नहीं हुआ करती थी. हम लोगों के समय तो पेड़ों या झाड़ियों के पीछे या बस के पीछे हम कपड़े बदला करते थे.

श्रीदेवी ने बताया की शौचालय की कमी की वजह से वो शूटिंग के दौरान पूरे दिन पानी भी नहीं पिया करती थीं. वहीं अगर किसी सीन के 10 रीटेक हो जाएं तो निर्माता महंगी रील खत्म होने के दबाव में आ जाता था, पर आज ये सारी दिक्कतें पूरी तरह से खत्म हो चुकी हैं.

अपनी बेटी जाह्नवी के भविष्य पर उन्हें नहीं है कोई जल्दबाजी

ये बात तो कई दिनों से चर्चाओं में है और हर तरफ से श्रीदेवी की बड़ी बेटी जाह्नवी के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे जल्द ही फिल्मों में कदम रखने वाली हैं.

हालांकि उन्हें लगता है कि जाह्नवी के भविष्य को लेकर बातें करना जल्दबाजी होगी.

ऐसी भी खबरें आई थीं कि जाह्नवी रणबीर कपूर को बहुत पसंद करती हैं, लेकिन श्रीदेवी कहना है, “ये सब खबरें बहुत ही परेशान करती हैं और ये बातें महत्व देने योग्य नहीं हैं.”

फिल्म ‘इंग्लिश विंग्लिश’ के पांच साल के बाद श्रीदेवी शक्तिशाली मां के किरदार में नजर आई हैं, इस फिल्म ‘मॉम’ में.

मुझे लगता है कि मैं एक गलत शरीर में कैद होकर रह गई हूं

तन्नू जब तेरह साल की थीं तब उन्हें एहसास हुआ कि उनका शरीर तो लड़के का है, लेकिन उसके अंदर कुछ-कुछ लड़की जैसा होता है.

अपने परिवार को ये सब बताना उनके लिए बहुत ही मुश्किल रहा. सोलह साल की उम्र तक उनको विश्वास हो गया था कि वो एक गलत शरीर में कैद होकर रह गई हैं.

असल में वो लड़की की तरह ही हैं. बस वहां से खुद को बदलने की तन्नू की शुरुआत हो गई.

दूसरी तरफ निताशा को सिर्फ तीन साल की उम्र में पता चल गया कि अंदर से वो एक लड़की हैं. शरीर लड़के का और आत्मा लड़की की, लेकिन इसके साथ ही शुरू हुआ एक नया चैलेंज जो तन्नू और निताशा दोनों ने महसूस किया.

बिना मां-बाप से पूछे लड़की बनने के बाद घर वालों को मनाने मे काफी परेशानी हुई. आज भी दोनों के परिवार वालों ने इनको पूरी तरह से अपनाया नहीं है. निताशा के पिताजी को समझने में काफी समय लगा कि जो लोग इनको हंसी का पात्र समझते हैं, उनके लिए ये मॉडल तैयार है.

अगस्त महीने में भारत में मिस ट्रांस क्वीन इंडिया कॉन्टेस्ट है और इसकी तैयारियां चल रही हैं. तन्नू सिंह इस इवेंट की पोस्टर मॉडल हैं. मीडिया से बात करते हुए कुछ सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने अपने जीवन से जुड़ी कई बातों पर लोगों का ध्यान खींचा.

अगर कोई प्यार का इजहार करे तब क्या होता है?

इस सवाल पर तन्नू कहती हैं कि जिदगी भर कोई प्यार दे, ऐसा नहीं हुआ है.

‘कोई काम नहीं देता, कहता है छक्कवा काम करेगा!’

हमसफर की तलाश

निताशा का कहना है कि प्यार से ही हम एक-दूसरे के करीब आ सकते हैं. तन्नू और निताशा दोनों को हमसफर की तलाश है. हम आपको बता देना चाहते हैं कि मॉडलिंग के बाद तन्नू ऐक्ट्रेस बनना चाहती हैं और निताशा भी बॉलीवुड का रुख करना चाहती हैं.

वे चाहती हैं कि इस तरह के एलजीबीटी समुदाय को उनके अधिकार मिलें. वे कहती हैं, “जिनको लगता है कि वो एक गलत शरीर में हैं, उनको भी अपनी जिंदगी जीने का पूरा हक है. वे अपनी बात परिवार को बताएं और इस जिंदगी को और ख़ूबसूरत बनाएं.

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