टेलीविजन रियलिटी शो ‘बिग बौस’ की एक्स कंटेस्टेंट गिजेल ठकराल को उनकी बोल्ड और बिंदास इमेज से जाना जाता है. हौट फीगर और बोल्डनेस के कारण उन्हें इंडियन किम कार्दशियां भी कहा जाता है. गिजेल फिल्म मस्तीजादे और क्या कूल हैं हम 3 में भी नजर आ चुकी हैं. साल 2016 के बाद से गिजेल फिल्मी पर्दे से दूर हो गई हैं. हालांकि किंगफीशर की कैलेंडर गर्ल गिजेल ठकराल लगातार अपने हुस्न के जलवों को सोशल मीडिया पर बिखेरकर अपने फैन्स और बाकी लोगों से जुड़ी रही हैं.
गिजेल ने हाल ही में झरने के नीचे सफेद साड़ी में एक बेहद ही हौट फोटोशूट कराया है. उन्होंने अपने इस फोटोशूट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी शेयर की हैं. उनकी इन तस्वीरों को देख कर आपको साल 1985 में आई फिल्म “राम तेरी गंगा मैली” की एक्ट्रेस मंदाकिनी का वो झरने वाला डांस याद आ जाएगा.
बता दें बौलीवुड एक्ट्रेस मंदाकिनी ने फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली हो गई’ में जमकर बोल्ड पोज दिए थे जिसमें पानी में भिगी सफेद साड़ी वाले उनके पोज आज भी सबसे ज्यादा मशूहर हैं. अब गिजेल बिलकुल मंदाकिनी के अंदाज में झरने के नीचे कभी अपने बालों से खेलती तो कभी चट्टानों के किनारे खड़ी होकर पोज देती नजर आ रही हैं.
गिजेल की इस तस्वीर पर सोशल मीडिया यूजर्स ‘मौडर्न मंदाकिनी’ और ‘न्यू जनरेशन मंदाकिनी’ जैसे कमेंट कर रहे हैं. हालांकि कुछ लोगों ने आपत्तिजनक कमेंट्स भी किए हैं. सोशल मीडिया पर गिजेल की ये तस्वीर सबसे ज्यादा वायरल हो रही है.
अंग्रेजी न्यूज पोर्टल से बातचीत में गिजेल ने इस फोटोशूट के बारे में बताया. उन्होंने कहा- मुझे भी ईश्वर ने अन्य पुर्तगालियों की तरह खूबसूरत लुक्स से नवाजा है. इस प्रोजेक्ट में भी मैं उस तरह से पोज देती नजर आ रही हूं जैसे पहले कभी नहीं किया. मेरे फैन्स मेरी तुलना किम कादर्शियां से करते हैं. गिजेल ने कहा- मैं चाहती हूं कि मेरे फैन्स और फौलोवर्स मुझे कुछ अलग लुक्स में देखें.
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मुंबई में जुलाई का मौसम. रुखसार सुबह उठ कर रसोईघर में चाय बना ही रही थी कि हलकी बारिश होने लगी. उस ने चाय के साथसाथ गरमागरम पकौड़े भी तल दिए. इस के बाद तौलिया और नहाने के बाद पहनने वाले अंदरूनी कपड़े बाथरूम में रख दिए. बैडरूम में टैलीविजन पर कोई म्यूजिक चैनल चल रहा था.
पकौड़े तलने के बाद रुखसार ने खिड़की बंद कर दी और टैलीविजन की आवाज तेज कर दी. वह डांस करने लगी और मस्ती में खुद को दीवार पर लगे बड़े आईने में देखने लगी.
रुखसार ने काले रंग की नाइटी पहनी हुई थी. 35 साल की विधवा होते हुए भी उस ने अपने बदन को काफी मेंटेन किया हुआ था.
रुखसार मस्ती में डांस कर ही रही थी कि तभी दरवाजे की बैल बजी. उस ने टीवी की आवाज कम कर दी और एक दुपट्टा सिर पर रख लिया. रुखसार ने दरवाजा खोला. बाहर कूरियर वाला था. 25 साल का जवान लड़का. वह कहने लगा, ‘‘कूरियर है… रुखसार खान के नाम से.’’
रुखसार को याद आया कि उस ने औनलाइन शौपिंग साइट से अपने लिए एक मोबाइल फोन बुक किया था. वह बोली, ‘‘मेरा ही नाम रुखसार है.’’
लड़के ने दस्तखत करने के लिए उसे पैन दिया. पैन देते समय उस के हाथ रुखसार की उंगलियों को छू गए थे. रुखसार ने एक नजर उस की ओर देखा और दस्तखत कर दिए.
रुखसार ने 52 सौ रुपए दिए तो लड़के ने 2 सौ रुपए वापस कर दिए और बोला, ‘‘2 सौ रुपए डिस्काउंट चल रहा है.’’ रुखसार ने उस लड़के को ध्यान से देखा, जिस ने आज के बेईमानी के जमाने में भी ईमानदारी से सच कहा और 2 सौ रुपए वापस कर दिए.
थोड़ी देर बाद वह लड़का बोला, ‘‘थोड़ा पानी मिलेगा?’’
रुखसार ने पूरा दरवाजा खोला और बोली, ‘‘तुम तो काफी भीग भी गए हो. अंदर आ जाओ.’’
रुखसार ने मोबाइल वाला डब्बा अलमारी में रखा और रसोईघर में पानी लेने चली गई. उस ने अपनी छाती से दुपट्टे को अलग कर दिया था. कुछ देर बाद रुखसार ने लड़के को पानी दिया. पानी देते समय जैसे ही वह थोड़ा झुकी, लडके की नजर उस के उभारों पर जा टिकी. उस की आंखें बड़ीबड़ी हो गईं.
पानी पीतेपीते वह लड़का नजर बचा कर रुखसार के उभारों को देख रहा था कि अचानक उस ने छींक दिया. रुखसार बोली, ‘‘तुम्हें तो सर्दी लग गई है. अभी बारिश भी तेज है. तुम चाहो तो थोड़ी देर यहां रुक सकते हो.
‘‘तुम्हारे कपड़े भी काफी भीग गए हैं. चाहो तो बाथरूम में जा कर फ्रैश हो सकते हो.’’
वह लड़का बाथरूम में चला गया. दरवाजा बंद कर के लाइट जलाई. वहां रुखसार ने नहाने के लिए तौलिया और अंदरूनी कपड़े पहले से ही रखे हुए थे. लड़के ने कमीज निकाल कर उस तौलिए को पहले चूमा, फिर उसी से अपने बदन को पोंछा. उस ने रुखसार के ब्रा को अपने हाथ में लिया ही था कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.
उस ने ब्रा को वहीं पर रख दिया और थोड़ा सा दरवाजा खोला. रुखसार ने उस को काले रंग का कुरता दिया और बोली, ‘‘यह लो, इसे पहन लेना.’’
लड़के ने वह कुरता पहन लिया और अपनी कमीज सूखने के लिए डाल दी.
वह बैडरूम में जा कर टैलीविजन देखने लगा. रुखसार रसोईघर से चाय और पकौड़े ले आई और उस से पूछा, ‘‘क्या नाम है तुम्हारा?’’
लड़का बोला, ‘‘जुनैद.’’
‘‘कहां के रहने वाले हो तुम?’’
‘‘आजमगढ़.’’
‘‘मैं भी आजमगढ़ की रहने वाली हूं. आजमगढ़ में कहां से हो तुम?’’
‘‘लालगंज तहसील.’’
‘‘मैं निजामाबाद की रहने वाली हूं. लालगंज में हमारे काफी रिश्तेदार रहते हैं. अम्मीं की भी वहां की पैदाइश है.
‘‘और कौनकौन रहता है आप के साथ?’’
‘‘सिर्फ मैं.’’
‘‘और आप के शौहर?’’
‘‘उन की मौत हो गई है.’’
‘‘माफ करना, पर कैसे?’’
रुखसार ने बताया कि साल 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगे में उस के शौहर के साथ ससुराल के सभी लोग मारे गए थे. यह बताते हुए रुखसार की आंखें नम हो गईं. जुनैद ने उस का दुख बांटने की कोशिश की और अपने बारे में बताया कि उस ने आजमगढ़ से बीटैक की पढ़ाई की है और वह मालवणी में अपने चाचा के साथ पिछले एक साल से रह रहा है. जब उसे अपनी फील्ड मेकैनिकल इंजीनियरिंग में कोई नौकरी नहीं मिली, तो उस ने कूरियर कंपनी में नौकरी शुरू कर दी.
उन दोनों को बातें करतेकरते एक घंटा हो गया था. रुखसार जुनैद को अपने निकाह की तसवीरें दिखाने लगी. जुनैद बोला, ‘‘तब आप किसी खूबसूरत अप्सरा से कम नहीं थीं.’’
रुखसार ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘अच्छा…’’ और वह खाली प्लेट और कप ले कर रसोईघर में चली गई. अब वह नहाने की तैयारी कर रही थी.
जुनैद उस समय की खूबसूरती को निहार रहा था. वह नहाने के लिए जा ही रही थी कि तभी वापस बैडरूम में गई. जुनैद हैरान रह गया.
रुखसार ने पूछा, ‘‘कैसे लगी निकाह की अलबम?’’
जुनैद बोला, ‘‘बहुत खूबसूरत,’’
वह रुखसार के गले के नीचे देख रहा था, ‘‘वैसे अभी भी आप कुछ कम नहीं हैं.’’ यह सुन कर रुखसार एक खास अदा में मुसकरा दी.
रुखसार नहाने चली गई. कुछ देर बाद बाथरूम से आवाज आई, ‘‘मैं अपना तौलिया लेना भूल गई हूं. दे दो मुझे.’’
जुनैद ने रुखसार को तौलिया दे दिया. कुछ देर बाद पानी की आवाज आने लगी. जुनैद ने सोचा कि रुखसार अब नहाने लगी है. वह अपने खूबसूरत बदन पर साबुन लगा रही होगी.
कुछ देर बाद पानी की आवाज धीमी हो कर बंद हो गई. रुखसार नहा कर बाहर आई. उस ने काले रंग का लहंगा और काले रंग की चोली पहनी थी. छाती पर दुपट्टा था और सिर पर तौलिया बंधा हुआ था. जुनैद रुखसार को देख कर भी अनजान बना टीवी देख रहा था. रुखसार आईने के सामने खड़ी थी. उस ने अपने पूरे बाल खोल दिए थे. खुले हुए लंबे बाल उस की खूबसूरती को बढ़ा रहे थे.
जुनैद के मन में आया कि वह चुपके से उठ कर रुखसार की कमर पकड़ कर उसे पूरी तरह दबा दे. तभी रुखसार ने जुनैद की तरफ देखा. इस से जुनैद घबरा गया और अपनी चोर नजरों को टीवी पर लगा दिया. कुछ देर बाद रुखसार ने अलमारी से वह मोबाइल निकाला, जो जुनैद ले कर आया था. वह उस के फीचर के बारे में जुनैद से पूछने लगी और उस के पास आ कर बैठ गई.
जुनैद ने रुखसार को वह फोन चलाना सिखाया. वह अपनी उंगलियों से उस की मुलायम उंगलियों को पकड़ कर मोबाइल के अलगअलग फीचर बताने लगा. बीचीबीच में जुनैद का हाथ रुखसार के हाथ को छू भी जाता था, पर रुखसार ने बुरा नहीं माना.
इस से जुनैद हिम्मत की बढ़ गई. अब वह जानबूझ कर उस के हाथ को छूने लगा. धीरेधीरे उस की नजरें मोबाइल से हट कर रुखसार के गले के निचले हिस्से की तरफ गईं.
इसी तरह दोपहर के 2 बज गए. बारिश धीमी हो गई थी. वे दोनों खाना खाने लगे.
जुनैद ने पूछा, ‘‘आप दोबारा निकाह क्यों नहीं कर लेतीं?’’
रुखसार बोली, ‘‘तुम ने क्यों नहीं किया अभी तक निकाह?’’
‘‘अम्मी तो कई बार जिद करती रहती हैं निकाह के लिए, पर मैं ही टाल देता हूं कि अभी तक कोई लड़की पसंद नहीं आई. जब पसंद आएगी, तो कर लूंगा.’’
‘‘तो कैसी लड़की पसंद है तुम्हें?’’ रुखसार ने पूछा.
‘‘वही जो आप की तरह समझदार हो. घरेलू काम जानती हो. जो मुझे रोज गरमागरम चाय और बिलकुल आप जैसे पकौड़े बना कर खिला सके.’’ रुखसार उस का भाव समझते हुए बोली, ‘‘मैं तो तुम से 10 साल बड़ी हूं और विधवा भी हूं.’’
जुनैद बोला, ‘‘तो क्या हुआ?’’
‘‘पर क्या तुम्हारे अब्बू और अम्मी मानेंगे?’’
‘‘अरे, निकाह मुझे करना है या अम्मीअब्बू को. तुम ने वह कहावत नहीं सुनी कि जब मियांबीवी राजी, तो क्या करेगा काजी…’’
शाम के 5 बज चुके थे. तभी जुनैद का फोन आया. उस की अम्मी ने फोन किया था. वह बात करने के लिए रसोईघर में चला गया. रुखसार दीवार से कान लगाए जुनैद की बातें सुन रही थी. जुनैद ने भांप लिया था कि रुखसार पास ही है.
तभी जुनैद बोला, ‘‘नहीं अम्मी, अब लड़की देखने की जरूरत नहीं है. मुझे एक लड़की पसंद है.’’ यह सुन कर रुखसार शरमा गई और नजरें बचा कर जुनैद को देखने लगी. इस के बाद जुनैद ने फोन काट दिया. रुखसार पीछे से आ कर उस से लिपट गई. जुनैद ने उसे अपनी बांहों में भर लिया.
रुखसार बोली, ‘‘तुम ने तो अपनी अम्मी से बात कर ली है, मुझे भी अपने अम्मीअब्बू से बात करनी होगी. अच्छा, तुम्हें घर नहीं जाना क्या? रात के 7 बज चुके हैं.’’
जुनैद ने बताया, ‘‘चाचा किसी काम से आज ही बाहर गए हैं. घर में कोई नहीं है. खाना भी बाहर ही खाना होगा.’’ तभी बारिश दोबारा शुरू हो गई. रुखसार ने जुनैद को रोका. वह बोली, ‘‘अगर बुरा न मानो, तो आज यहीं रुक जाओ.’’
जुनैद का भी मन कर रहा था उस के साथ पूरी रात रुकने का. रुखसार ने खीर, पूरी और तरकारी बनाई थी. शायद इसी खुशी में कि उसे जुनैद जैसा जीवनसाथी मिला था.
जुनैद ने खाना खाते हुए कहा, ‘‘रुखसार, तुम खाना बहुत अच्छा बनाती हो, बिलकुल मेरी अम्मी की तरह.’’
रुखसार ने जुनैद के मुंह से पहली बार अपना नाम सुना. उसे बहुत अच्छा लगा. थोड़ी देर बाद रुखसार अपने अब्बू से फोन पर बात करने बाहर चली गई.
जब वह वापस आई, तो जुनैद बोला, ‘‘क्या कहा उन्होंने?’’
‘‘उन्होंने कहा कि अगर लड़का हमारी बिरादरी का है, नेक है और अपने पैरों पर खड़ा है, तो उन्हें कोई एतराज नहीं,’’ इतना कह कर रुखसार के चेहरे पर शर्म वाली मुसकराहट आ गई. रात के 10 बजे रुखसार बोली, ‘‘मैं रसोईघर में सो जाती हूं, तुम यहीं बैडरूम में सो जाओ.’’
‘‘नहीं, मैं वहां सो जाऊंगा. और तुम बैडरूम में सोना, क्योंकि यह घर तो तुम्हारा है.’’
‘‘पर निकाह के बाद तो तुम्हारा भी हो जाएगा,’’ रुखसार के मुंह से निकल गया.
यह सुन कर जुनैद ने उसे गले से लगा लिया और उस के गालों पर एक जोरदार चुंबन जड़ दिया. उस ने उस की छाती से दुपट्टा अलग कर दिया. रुखसार भी जुनैद से पूरी तरह लिपट गई. जुनैद ने अपने होंठ उस के गुलाबी होंठों पर रख दिए. रुखसार की आंखें बंद हो गईं. उस के बाद जुनैद ने कमरे की लाइट बंद कर दी.
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नौकरियों की कमी आने वाले सालों में एक बहुत बड़ा तूफान ला सकती है. देश में नए जवानों की गिनती तो तेजी से बढ़ रही है, पर नौकरियों की किल्लत भी बढ़ रही है. सरकार पहले लोगों से टैक्स लगा कर मिले पैसे से सरकारी नौकरियां दे कर कुछ को खुश रखती थी, पर अब टैक्स से आने वाला पैसा कम होने लगा है.
रेलवे ने चाहे कहा है कि वह एक लाख नौकरियां देगी, पर यह वादा है काले धन के 15 लाख रुपए खाते में जमा करने की तरह का. रेलों का देश में जो हाल है, उस से लगता नहीं कि नई नौकरियों की गुंजाइश है. वैसे भी जो जवान नौकरियों को लिए खड़े हैं, वे ज्यादातर चाहे पढ़लिख लें, पर कुशल हरगिज नहीं हैं. ज्यादातर नकल मार कर सर्टिफिकेट लिए घूम रहे हैं.
शहरों में पहले छोटेमोटे काम मिल जाते थे, पर लगता है कि जीएसटी की मार की वजह से छोटे कारखाने व छोटे व्यापारियों का काम ठप हो जाएगा और वे जो कम कुशल लोगों को नौकरी दे सकते थे, अब नहीं दे सकेंगे. खेतों में काम के मौके कम हो रहे हैं, क्योंकि वहां टै्रक्टर और मशीनों से काम होने लगा है. फिर वह काम 12 महीनों नहीं चलता. सेना भी अपने सैनिकों को कम करने वाली है.
नए जवान लड़कों की गिनती सरकार के लिए सिर्फ आंकड़ा भर है, क्योंकि सरकार को तो गौरक्षा, संस्कृति, राष्ट्रवाद, धर्म की ज्यादा पड़ी है. सरकार का आधा ध्यान तो टैक्सों को जमा करने के नएनए तरीकों पर लगा है. वह नए धंधे तैयार करने पर सोच ही नहीं रही है.
सिर्फ यह कहने से कि देश की कुल आय 6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है, काफी नहीं है, क्योंकि इस आय में बरबाद होने वाले कामों पर लगा पैसा भी शामिल है.
भारत में बेरोजगारी की हालत अभी इसलिए बहुत बुरी नहीं दिख रही, क्योंकि लोगों को अभी भी बहुत कम में गुजारा चलाने की आदत है. आप किसी बाजार, महल्ले, गांव, गली, खेत, फैक्टरी में चले जाएं, आप को खाली बैठे लोग नजर आ जाएंगे, जो वैसे बेरोजगार नहीं हैं. उन्हें कुछ वेतन मिलता है, पर चूंकि काम नहीं है, तो वही वेतन बहुत होता है. वे असल में देश व घर पर बोझ हैं.
यह सरकार कर सकती है कि देश में बेरोजगारी न हो. इस देश की जमीन ऐसी है कि वह हर हाथ को काम दे सकती है, पर यहां बरबादी और काम रोकने का रिवाज बना हुआ है. हर जना दूसरे का काम रोकता है और हर जना समय बरबाद कर रहा है. लोगों का अरबोंखरबों का काम हर साल बेकार में जाता है. धर्म तो इस बरबादी का सब से बड़ा नमूना है, जिस पर लोग, सरकार और समाज जीभर कर पैसा देते हैं और निठल्लों को पालते हैं.
अगर बेरोजगारों को किसी ने एक झंडे के नीचे खड़ा कर लिया, तो हर दल की मुसीबत हो जाएगी, यह पक्का है. और यह भी पक्का है चाहे सरकार बदल जाए, नई नौकरियां नहीं निकलेंगी.
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फिल्म ‘काबिल’ में सुप्रिया यानी गौतम जब बलात्कार का शिकार होती है तब रोहन यानी रितिक रोशन फटाफट उसे पुलिस स्टेशन व जांच के लिए हौस्पिटल ले जाता है ताकि सुप्रिया के गुनहगारों को सजा मिल सके. लेकिन पुलिस के अजीबोगरीब सवालों से वह इतना परेशान हो जाता है कि सुप्रिया की शारीरिक व मानसिक स्थिति पर ध्यान नहीं दे पाता. वह सुप्रिया को संभालने के बजाय उस से बात ही नहीं करता. वह यह सोचसोच कर खुद को दोषी मानने लगता है कि वह इस काबिल भी नहीं है कि सुप्रिया की रक्षा कर पाए? रोहन को इस तरह शांत देख कर सुप्रिया को लगने लगता है कि रेप की घटना की वजह से रोहन उस के साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जिस का परिणाम यह होता है कि सुप्रिया रोहन मेरे कारण और परेशान न हो इसीलिए वह आत्महत्या कर लेती है.
यह तो कहानी है फिल्म की, लेकिन वास्तविक जीवन में भी जब प्रेमिका बलात्कार की शिकार होती है तो रिश्ते में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं. कुछ प्रेमी सोचते हैं काश, मैं ने उसे अकेला न छोड़ा होता, काश, मैं ने डिं्रक करने से मना किया होता, मैं उस के साथ होता तो ऐसा कभी नहीं होता और खुद को दोषी मानने लगते हैं.
कुछ प्रेमी प्रेमिका को इस का दोषी मान कर ब्रेकअप तक कर लेते हैं, जबकि यह समय ऐसा होता है जिस में पार्टनर को एकदूसरे के साथ की जरूरत होती है इस गम से बाहर निकालने में.
प्रेमिका बलात्कार की शिकार हो तो क्या करें
– मोरली सपोर्ट करें : इस वक्त प्यार व सपोर्ट की खास जरूरत होती है, इस से लगता है कि कोई है जिस के साथ जिंदगी गुजारी जा सकती है, क्योंकि इस तरह की घटना के बाद लड़की को ऐसा लगने लगता है कि कोई उस के साथ नहीं रहेगा. अब वह किसी काबिल नहीं है और वह खुद को दोषी मानने लगती है. इसलिए जब भी आप की प्रेमिका ऐसा कुछ कहे तो कुछ सकारात्मक बातें कहें ताकि उस का मनोबल बढ़े. इस वक्त परिवार को भी काफी सपोर्ट की जरूरत होती है, उन का भी साथ दें. जब जांचपड़ताल के मामले में उन्हें कहीं जाना हो तो साथ जाएं ताकि उन का हौसला बरकरार रहे.
– हर गम की दवा प्यार : गम कितना भी गहरा क्यों न हो, लेकिन प्यार से निभाया जाए तो कुछ भी मुश्किल नहीं होता, इसलिए प्यार से इस स्थिति से प्रेमिका को बाहर निकालें. ऐसा भी हो सकता है कि प्रेमिका के घर वाले उस का साथ न दें उसे भलाबुरा सुनाएं, लेकिन यह आप की जिम्मेदारी है कि आप उस के परिवार वालों को समझाएं कि इस में किसी का दोष नहीं है. उन की बेटी ने ऐसा कुछ भी नहीं किया कि आप उस के साथ ऐसा व्यवहार करें बल्कि आप अपनी बेटी का साथ दें, ताकि वह इस गम से बाहर निकल सके.
– स्मार्ट माइंड से लें स्मार्ट ऐक्शन : जब आप की प्रेमिका के साथ रेप हो रहा है तब आप हाथ पर हाथ रखे न बैठे रहें बल्कि स्मार्ट माइंड से स्मार्ट ऐक्शन लें. जैसे तुरंत पुलिस को कौल करें, फोन से पुलिस की गाड़ी का हौर्न बजाएं, वीडियो बना लें ताकि अपराधियों के खिलाफ सुबूत मिल सके.
– प्रीकौशन पिल्स दें : रेप हो गया है अब क्या करें, कितनी बदनामी होगी, ऐसी बातें ही न सोचते रहें बल्कि थोड़ा स्मार्ट बनें ताकि आप की प्रेमिका के साथ और बड़ा हादसा न हो. इसलिए प्रेमिका को प्रीकौशन पिल्स दें ताकि गर्भ न ठहरे, क्योंकि पता चला आप दोनों रेप के गम में डूबे रहें और कोई बड़ा हादसा हो जाए.
– दोषी को मीडिया से करें हाईलाइट : खुद से हीरो बनने की कोशिश न करें बल्कि दोषी को हाईलाइट करने के लिए मीडिया का सहारा लें. अगर मीडिया मामले को उजागर करता है तो पुलिस भी तुरंत ऐक्शन लेती है. आप चाहें तो किसी एनजीओ की मदद भी ले सकते हैं. ऐसे कई एनजीओ हैं जो इस तरह के मामलों में सहायता करते हैं.
– गम से उभरने का वक्त दें : ऐसी उम्मीद न कर बैठ जाएं कि कुछ दिन बाद वह नौर्मल हो जाएगी. अगर वह नौर्मल नहीं होती तो आप उसे डांटने न लगें कि क्या ड्रामा कर रखा है, इतने दिन से समझा रहा हूं, लेकिन तुम्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है, बल्कि उसे इस गम से उभरने का वक्त दें. बारबार न कहते रहें कि जो हुआ भूल जाओ, ऐसा कर के आप उसे और गम में धकेलते हैं.
– काउंसलिंग न करें मिस : इस दौरान मैंटल और इमोशनल कई तरह की समस्याएं होती हैं. इन्हें काउंसलिंग द्वारा कंट्रोल किया जा सकता है. काउंसलिंग से न केवल गम से उभरने में मदद मिलती है बल्कि जीने की एक नई राह भी मिलती है, इसलिए काउंसलिंग कभी मिस न करें. संभव हो तो आप भी साथ जाएं ताकि ऐसा न लगे कि आप जबरन भेज रहे हैं.
– दूसरों के लिए मिसाल बनें : ऐसा न करें कि दब्बू बन कर चुपचाप बैठ जाएं और प्रेमिका को भी भूल जाने को कहें बल्कि इस के खिलाफ कठोर कदम उठाएं ताकि आप को देख कर बाकी युवाओं को हिम्मत व प्रेरणा मिले.
क्या न करें
– रिश्ता तोड़ने की गलती न करें : आप की प्रेमिका का बलात्कार हुआ है, आप उस के साथ रहेंगे तो लोग आप के बारे में भी तरहतरह की बातें करेंगे, ऐसी बातें सोचसोच कर रिश्ता तोड़ने की गलती न करें. जरा सोचिए, अगर आप की बहन का बलात्कार हुआ होता, तो क्या आप अपनी बहन से रिश्ता तोड़ लेते नहीं न? तो फिर इस रिश्ते में ऐसा क्यों? इसलिए रिश्ता तोड़ने के बजाय अपनी सोच का दायरा बढ़ाएं और पार्टनर का साथ दें.
– प्रेमिका को दोषी न मानें : इस हादसे के लिए कभी भी अपनी प्रेमिका को दोष न दें कि रात में बाहर घूमने व छोटे कपड़े पहनने की वजह से ऐसा हुआ है बल्कि उस पर विश्वास करें, उस की बातें सुनें. हो सकता है आप की प्रेमिका उस वक्त कुछ अजीब तरह की बातें करे, लेकिन आप उन बातों पर गुस्सा करने के बजाय सुनें और प्यार से समझाएं कि इस में उस की कोई गलती नहीं है.
– मरजी के बिना न करें सैक्स : यह ठीक है कि आप अपना प्यार प्रदर्शित करने के लिए प्रेमिका के करीब जाना चाहते हैं ताकि उसे इस बात का एहसास करा सकें कि वह आप के लिए अब भी वैसी ही है जैसी पहले थी, लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि वह इस घटना से इतनी डिस्टर्ब हो कि आप की इस भावना को समझ ही न पाए और आप पर गुस्सा करने लगे, जोरजोर से चिल्लाने लगे कि आप उस का रेप कर रहे हैं. इसलिए कभी भी खुद से सैक्स का प्रयास न करें.
अगर प्रेमिका सहमति से संबंध बनाना चाहती है तो उस का साथ दें, मना न करें. आप के ऐसा करने से प्रेमिका को लग सकता है कि उस का रेप हुआ है. इसलिए आप मना कर रहे हैं.
कभी ऐसा भी हो सकता है कि वह खुद पहल कर संबंध बनाए, लेकिन बाद में सारा दोष आप पर डाल दे और चिल्लाने लगे. ऐसी स्थिति के लिए भी खुद को तैयार रखें. ऐसा न करें कि आप भी उलटा चिल्लाने लगें कि तुम ही आई थी संबंध बनाने, मैं तो नहीं चाहता था, बल्कि धैर्य से काम लें.
– गलत कदम न उठाएं और न उठाने दें : कई बार युवा जोशजोश में ऐसे कदम उठा लेते हैं जिस का खमियाजा बाद में भुगतना पड़ता है इसलिए न तो आप गलत कदम उठाएं और न ही प्रेमिका को उठाने दें.
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‘मनुस्मृति’ के मुताबिक, समाज में वर्ण व्यवस्था जन्म के हिसाब से तय की जाती थी. ब्राह्मण को मुख, क्षत्रिय को हाथ, वैश्य को जांघ व शूद्र को पैर माना गया. पढ़ेलिखे व कामचोर पैसे वालों ने इस में चालाकी दिखाई. उन्होंने अपनी सहूलियत के काम छांट कर खुद कब्जा लिया. पैसे, ताकत व हक पर काबिज हो कर खुद ही अगड़े बन गए और कमरतोड़ मेहनत, खेतीबारी, मजदूरी, सेवा, साफसफाई व जानवरों की खाल उतारने जैसे काम गरीब, जाहिल, अनपढ़ व कमजोरों के जिम्मे तय कर दिए. इस से समाज का कमजोर तबका पीछे व नीचे हो गया. अगड़े फायदे में रहे. ताकतवर की हैवानियत व मतलबपरस्ती के चलते समाज में कमजोरों पर हमेशा जुल्म होते रहे हैं.
कामचोरी को तरजीह
आमतौर पर कहा जाता है कि अगर पेट भरना है, तो काम करो. मेहनत कर के खाओ, लेकिन अफसोस की बात है कि मेहनत कर के खाने की बात अगड़े व असरदार लोग सिर्फ दूसरों के लिए करते हैं. मेहनत के सभी काम खासकर नीची जातियों के कंधों पर हैं. सारी नसीहतें कमजोरों पर ही लागू होती हैं.
अगड़े और दाढ़ीचोटी वाले बिना करेधरे ही खीरपूरी खाते रहे हैं. अब भी वे अपनी खिदमत पिछड़ों, दलितों व कमजोरों से ही कराते हैं. दिमागी फुतूर व झूठी शान दिखाने के लिए कम से कम काम करने वालों को समाज में बड़ा व ऊंचा और काम करने वालों को छोटा व नीचा समझा जाता है, इसलिए निकम्मों की फौज बरकरार है.
हमारे समाज का ढांचा सदियों से ऐसा ही बेढब रहा है कि जो लोग कुछ नहीं करते, उन्हें ब्राह्मण बता कर सिरमाथे पर बिठाया गया. सब से ऊंचा दर्जा दिया गया. पंडेपुजारी जीने से मरने तक के कर्मकांड कराने में भोले भक्तों से दानदक्षिणा और चढ़ावा लेते रहे हैं, इसलिए उन के मेहनत करने का तो सवाल ही नहीं उठता.
यह कैसी चाल
मांग कर खाने वाले ऊंचे व अगड़े कैसे हो सकते हैं? लेकिन जातियों का जंजाल बनाने वालों ने उन्हें ज्ञानी व पूज्य बता कर जबरदस्ती समाज में ऊपर बिठाया. यह उलटबांसी है कि जो समाज में भीख मांग कर खाए, दूसरों को बेवकूफ बनाए, वह सब से ऊंचा यानी ब्राह्मण कहलाए.
जो राज करे, दूसरों को हुक्म दे, गरीबों से टैक्स वसूल कर मौज मारे, उन्हें क्षत्रिय कह कर समाज में दूसरे नंबर पर रखा गया. खुद काम करना उन की शान के भी खिलाफ था, इसलिए वे भी दासदासियों के सहारे ही रहे.
समाज में तीसरे नंबर पर तिजारत करने वाले सेठसाहूकारों को वैश्य बता कर रखा गया. कुछ को छोड़ कर लेनदेन, कर्ज, सूद व खरीदफरोख्त की आड़ में जमाखोरी, मुनाफाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट, चालाकी व घटतोली की खरपतवारें भी खूब उगीं व फलींफूलीं, लेकिन इन सब के बावजूद हमारे समाज में केवल ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों को समाज में पैसा, रुतबा, शोहरत व इज्जत मिली.
कई बार तोड़ा गया
शूद्रों को ऊलजलूल बातें बता कर भरमाया गया कि पिछले जन्मों में तुम्हारे कर्म खराब रहे हैं. तुम ने बहुत से पाप किए हैं. इसलिए तुम तो सिर्फ अगड़ों की सेवा करने के लिए ही पैदा हुए हो. पापों से छुटकारा पाने के लिए खूब जी लगा कर बेगारी करो. तुम्हारा यही फर्ज है. तुम मैला उठाओ. सफाई करो. खेत जोतो. फसल काटो. रोड़ेपत्थर ढोओ.
इतना ही नहीं, अगड़ों ने शूद्रों को हमेशा बरगलाए रखा. उन्हें गलत समझाया व गलतियां करने के लिए उकसाया. उन्हें भरोसा दिया गया कि जीनेखाने के लिए जब भी जरूरत हो, तो हम से कर्ज ले लो, उसी में जीना सीखो. उसी में मरो, ताकि कम से कम अगले जन्म में तो तुम्हें पिछले पापों से छुटकारा मिल सके.
नीची जातियों पर दबंगों ने तरहतरह की पाबंदियां लगाईं. उन्हें अपवित्र बता कर एक ओर छुआछूत माना, वहीं दूसरी ओर उन की बहूबेटियों की इज्जत लूटी. विरोध करने पर उन्हें मारापीटा गया, बेइज्जत किया गया.
धर्म के ठेकेदारों ने भी उन्हें उलटा पाठ पढ़ा कर बहलायाफुसलाया. उन्हें तरहतरह के अंधवश्विसों में फंसाया. भूतप्रेत, भाग्य और भगवान के भरोसे रहना सिखाया. दानपुण्य, तीर्थ, तेरहवीं, मुंडन वगैरह करने में लगाया. गंडेतावीज की आड़ में उन्हें जम कर लूटा. ग्रहों के नाम पर उन्हें इतना डरा दिया गया कि वे बहस करने के लायक ही नहीं रहे और चढ़ावा चढ़ाते रहे.
कड़वी सचाई
यह बात भी जगजाहिर है कि हमेशा दिल लगा कर काम करने व मेहनत करने की सीख दी जाती है, लेकिन मेहनत के काम में पूरा भेदभाव हुआ. उस में भी बंटवारा किया गया.
यह कहां की तुक है कि पिछड़े व दलित अपनी कूवत से भी ज्यादा काम करें, ऊपर से अगड़ों के जुल्म सहें?
जब तक कामचोरों की फौज है या फिर जब तक साफसफाई करना सिर्फ सफाई मुलाजिमों की ही जिम्मेदारी है, तब तक लाख सफाई अभियान चलाओ, कुछ बदलने वाला नहीं है.
अमीरों के शहरी इलाके भले ही चमक जाएं, लेकिन गांवकसबों में बसे असल हिंदुस्तान में लगे कूड़े के ढेर बढ़ते रहेंगे, बजबजाती नालियां उफनती रहेंगी, बीमारियां भी पनपती रहेंगी, इसलिए जरूरत है गांवदेहात के लोगों में जागरूकता लाने, तालीम व हुनर को बढ़ाने व सोच को सुधार कर बदलने की. हम सब लोगों का नया नजरिया ही इस में बदलाव ला सकता है और देश खुशहाल हो सकता है.
VIDEO : फंकी पाइनएप्पल नेल आर्ट
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बौलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल द्वारा सोशल मीडिया पर उनकी बोल्ड तस्वीरें पोस्ट किया जाना जारी है और लोग उन्हें ट्रोल करना जारी रखे हुए हैं. इस बार अमीषा ने कोई बोल्ड तस्वीर तो अपलोड नहीं की लेकिन इस बार उन्हें डैमेज जींस पहन कर अपनी तस्वीरें खिंचवाना और उन्हें अपलोड करना भारी पड़ गया. कुछ ही घंटों में तस्वीर पर हजारों लाइक्स तो आ गएं लेकिन कमेंट बौक्स में यूजर्स ने जो प्रतिक्रियाएं दीं वह पिछली बार की तरह काफी रूखी थीं. एक यूजर ने लिखा- आपकी हालत वाकई में बड़ी फटीचर हो गई है. एक अन्य यूजर ने कमेंट बौक्स में लिखा- कपड़ा कम पड़ गया था क्या?
सय्यद नाम के एक यूजर ने लिखा- फटी जींस की भी तस्वीर अपलोड कर दी, कौन्फिडेंस लेवल तो हद है. हद तो तब हो गई जब एक यूजर ने कमेंट बौक्स में लिखा दिया कि बिचारी बूढ़ी आंटी के पास पैंट खरीदने तक के पैसे नहीं हैं, एक काम करो प्लेट लेकर मंदिर के सामने बैठ जाओ. इस तरह के तमाम कमेंट इस तस्वीर पर किए गए हैं.
हालांकि यह पहला मामला नहीं है कि जब सोशल मीडिया पर अमीषा पटेल को ट्रोल किया गया है. हाल ही में अमीषा पटेल ने अपने ट्विटर हैंडल से कुछ नई तस्वीरें शेयर की थीं. इन तस्वीरों में अमीषा व्हाइट कलर की टी-शर्ट पहनी हुई नजर आ रही हैं. अलग-अलग तस्वीरों में एक ही टी-शर्ट होने की वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल होना पड़ा है.
वर्क फ्रंट की बात करें तो अमीषा के पास इस वक्त बहुत ज्यादा काम नहीं है वह फिल्म शौर्टकट रोमियो में नजर आई थीं और अब साल 2018 में उनकी 2 फिल्में बौक्स औफिस पर रिलीज होने जा रही हैं. उनकी पहली फिल्म है देसी मैजिक जिसमें वह सोनिया सक्सेना का किरदार निभाएंगी और दूसरी है भईयाजी सुपरहिट जिसमें उनका रोल भूमिका नाम की एक लड़की का होगा. पिछले काफी वक्त से उनकी कोई भी फिल्म बौक्स औफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा सकी है. देखना यह होगा कि उनकी आने वाली फिल्म बौक्स औफिस पर कैसा प्रदर्शन करती है.
2016 में प्रदर्शित सफल फिल्म ‘‘बागी’’ की सिक्वअल फिल्म है-‘बागी 2’, जिसमें इस बार टाइगर श्राफ के साथ दिशा पटनी ने मुख्य भूमिका निभायी है. एक्शन से भरपूर यह फिल्म इंटरवल तक दर्शकों को बांधकर रखती है. मगर इंटरवल के बाद दर्शक निराश होते हैं.
फिल्म शुरू होती है गोवा के एक स्कूल के सामने से. जहां नेहा (दिशा पटनी) अपनी चार वर्ष की बेटी रिया को स्कूल छोड़ने आयी है. अचानक उसकी कार के पीछे एक दूसरी गाड़ी आकर रुकती है, जिसमें से दो लोग निकलकर नेहा को उसकी गाड़ी से निकालकर घायल कर सड़क पर फेक देते हैं. और उसकी गाड़ी व बेटी रिया को लेकर भाग जाते हैं. फिर कहानी दो माह के बाद गुरुद्वारा से शुरू होती है, जहां नेहा मदद मांगने हर दिन आती रहती है.
गुरुद्वारा के ग्रंथी उसे आश्वासन देते हैं कि कोई न कोई उसकी मदद करेगा, तब उसे अपने पूर्व प्रेमी रौनी (टाइगर श्राफ) की याद आती है. और वह रौनी को फोन करती है. उधर कश्मीर मे सैनिक छावनी में रौनी उर्फ कमांडो रणवीर प्रताप सिंह (टाइगर श्राफ) को मानवाधिकार आयोग के सवालों का सामना कर रहा है. उस पर आरोप है कि आतंकवादियों की हत्या करने के बाद लोगों के पत्थरों से बचने के लिए एक इंसान को ढाल के तौर पर अपनी गाड़ी के आगे बोनट पर बांधने का. उसे साफ बरी कर दिया जाता है. तभी उसे नेहा का फोन मिलता है.
सात दिन की छुट्टी लेकर वह गोवा के लिए रवाना होता है. कश्मीर से गोवा पहुंचते पहुंचते रौनी को कौलेज दिनों में नेहा से अपनी पहली मुलाकात, प्यार और फिर किस तरह नेहा के पिता ने नेहा की शादी शेखर (दर्शन कुमार) से करा दी थी, वह सब याद आता है. इस प्यार में गम सहने के बाद वह गुस्से से आर्मी से जुड़ जाता है.
गोवा में नेहा, रौनी को बताती है किस तरह उसकी बेटी रिया का दो माह पहले अपहरण हुआ था, पर अब तक उसकी बेटी नहीं मिली. पुलिस ने यह मसला बंद कर दिया है. रौनी, नेहा के साथ पुलिस स्टेशन पहुंचता है. पुलिस इंस्पेक्टर से कुते के गलत व्यवहार पर रौनी मारामारी कर लेता है. जिसके चलते उसे लौकअप में डाल दिया जाता है. रात में ढाई बजे डीआईजी शेरगिल (मनोज बाजपेयी) आकर उसे छोड़ देते हैं.
अब रौनी, उस्मान (दीपक डोबरियाल) से किराए पर गाड़ी लेकर रिया की तलाश में लग जाता है. एक दिन उसे पता चलता है कि शेखर का छोटा भाई सनी (प्रतीक बब्बर) हमेशा ड्रग्स में डूबा रहता है और उसका संबंध ड्रग्स के धंधे से है. इसी बीच उसकी मुलाकात हौटेल में अपने बगल वाले कमरे में ठहरे लखनऊ के पुलिस इंस्पेक्टर त्यागी से होती है. वह चालाकी से त्यागी का पहचान पत्र हथिया लेता है. अब वह उत्तर प्रदेश का पुलिस औफिसर त्यागी बनकर अपने मिशन में जुट जाता है. पर सफलता नहीं मिलती है. तब वह अखबार में रिया के लापता का विज्ञापन छपवा देता है.
विज्ञापन छपने के बाद रौनी के पास कई फोन आते हैं. वह एक इंसान से हौटेल में मिलता है, जो कि खुद को रिया का पिता बताता है और रिया का जन्म प्रमाणपत्र सहित सारी चीजें दिखाता है. उसका दावा है कि उसकी बेटी मुंबई में गुम हुई थी. तो वहीं शैखर, रौनी को बुलाता है और उसे एक नयी कहानी सुनाता है. शेखर के अनुसार उनकी अपनी कोई बेटी नहीं है. नेहा का गर्भपात हो गया था. इस सदमें वह पगला गयी है और नेहा को लगता है कि उसकी बेटी रिया थी, जबकि हमारी कोई बेटी नहीं है.
शेखर से सारा सच सुनने के बाद रौनी को भी यकीन हो जाता है कि रिया गलत है और वह नेहा के पास पहुंच कर कह देता है कि उसकी कोई बेटी नहीं है, फिर वह क्यों नाटक कर रही है? नेहा कहती है कि सारे लोग झूठ बोल रहे हैं. पर रौनी,नेहा की बात पर यकीन नहीं करता है. वह उसे अलविदा कह कर वापस आने लगता है, तो अचानक उसकी नजर दीवार पर लिखे कुछ वाक्यों पर पड़ती है और उसे अहसास हो जाता है कि नेहा सच बोल रही है. पर तब तक देर हो चुकी होती है. नेहा छठे माले से छलांग लगाकर आत्महत्या कर चुकी होती है.
इधर अब गोवा पुलिस स्टेशन में पंजाब के मशहूर पुलिस इंस्पेक्टर एलएसडी (रणदीप हुड्डा) का आगमन हो चुका हैं, जिनकी वेषभूषा पुलिस की नहीं, बल्कि चरसियों वाली है. बहुत तेज तर्रार है. एलएसडी के आने से डीआईजी शेरगिल भी अंदर से डर जाते हैं. नेहा की मौत की जांच करते हुए एलएसडी, शेखर से पूछताछ करते हुए कह देता है कि वह सब कुछ झूठ बोल रहा है.
उधर नेहा की मौत के बाद उस्मान, रौनी को बता देता है कि रिया, सनी के पास है. वास्तव में उस्मान भी सनी के ड्रग्स के व्यापार से जुड़ा हुआ है. रौनी, सनी के अड्डे पर उसे पकड़ने का प्रयास करता है, पर वह भागता है और बीच सड़क पर इन दोनों को एलएसडी पकड़ लेता है. पुलिस स्टेशन में पूछताछ के दौरान ही डीआईजी शेरगिल पहुंच जाते हैं और बडे़ नाटकीय तरीके से वह सनी को गोली मार देते हैं. फिर शेरगिल अपने घर रौनी को समझाते हैं कि वह ऐसा कदम ना उठाए, जिससे चीजें उलझ जाए. उसी दौरान वह किसी को फोन पर कहते हैं कि मैं तुम्हारे लिए कुछ भेज रहा हूं.
रौनी, शेरगिल के पास से निकलकर उस्मान के पास पहुंचता है, तो वहां पता चलता है कि उस्मान को दो लोगों ने अधमरा कर दिया है, रौनी गुस्से में उन दोनों की हत्या कर देता है. इस बीच उस्मान भी मर जाता है, तभी मेरे हुए इंसान का फोन बजता है. उससे रौनी को पता चलता है कि शेरगिल ने उसकी तस्वीर खींच कर इन आदमियों के पास भेजी थी, जिससे कि वह रौनी को मार सके.
अब रौनी को रिया के होने की जगह का पता चल जाता है. रौनी रवाना होता है. एलएसडी भी अपनी फौज के साथ उसका पीछा कर रहा है और जब लोग बीचपर बने फार्महाउस में तमाम हत्याएं करते हुए अंदर पहुंचते हैं. तो उसका सामना शेरगिल से होता है. एलएसडी की गोलियों से शेरगिल मारा जाता है. लेकिन उससे पहले शेरगिल कबूल कर लेता है कि पैसा कमाने के लिए असली ड्रग्स माफिया तो वही है, उसी के आदेश पर ही गोवा में सारा ड्रग्स का कारोबार फैला हुआ है.
रिया भी उसी के कब्जे में है. शेखर और सनी ने शेरगिल के कहने पर स्कूल सहित हर जगह पैसा खिला रखा था, वास्तव में शेखर को एक दिन पता चल जाता है कि नेहा कभी मां नहीं बन सकती. क्योंकि शेखर नपुंसक है. तब शेखर को अहसास हो जाता है कि रिया उसकी अपनी बेटी नहीं हैं और अब वह रिया को खत्म करने की कोशिश करता है. इसलिए सनी से कहकर उसने रिया का अपहरण करवाया, जो बाद में शेरगिल के पास पहुंच गयी. अंत में अब रौनी को अहसास होता है कि रिया, रौनी और नेहा की प्रेम की निशानी है, फिर वह बेटी को अपने साथ रख लेता है.
कथानक के स्तर पर नवीनता न होते हुए भी इंटरवल तक फिल्म की पटकथा अच्छी है, मगर इंटरवल के बाद फिल्म बिखर जाती हैं. फिल्म का जो रहस्य अंत में आता है, पटकथा लेखन की कमी के चलते उस रहस्य का आकलन दर्शक बीच में ही कर लेते हैं. इंटरवल के पहले ही दिशा पटनी का किरदार खत्म हो जाता है. फिल्म के संवाद ठीक ठाक हैं.
फिल्म का गीत संगीत प्रभावित नहीं करता. फिल्म में एक पुरानी फिल्म का अति मशहूर गाना ‘एक दो तीन ..’ का रीमेक किया गया है. पहले इस गाने पर माधुरी दीक्षित ने नृत्य किया था. मगर इस बार इस फिल्म में यह गाना जैकलीन फर्नांडिज पर फिल्माया गया है. यह गाना पुराने गीत की तुलना में कहीं नहीं ठहरता.
एक्शन प्रधान फिल्म के हिसाब से काफी अच्छे एक्शनन दृश्य है. मगर फिल्म के अंतिम तीस मिनट में एक्शन जबरन ठूंसा हुआ लगता है, जिसके चलते फिल्म भी लंबी हो गयी है. इतना ही नहीं टाइगर श्राफ द्वारा प्रतीक बब्बर का पीछा करने का सीन भी बेवजह टीवी सीरियल की तरह लंबा खींचा गया है. यदि इसे एडीटिंग टेबल पर कसा जाता तो बेहतर होता.
जहां तक अभिनय का सवाल है, तो टाइगर श्राफ व दिशा पटनी की केमिस्ट्री काफी अच्छी जमी है. वैसे भी निजी जीवन में उनके बीच जिस तरह के रिश्ते की चर्चाएं होती रहती हैं, उसे देखते हुए यह केमिस्ट्री अच्छी होनी ही थी. फिल्म में टाइगर श्राफ की मेहनत भी नजर आती है. मगर टाइगर श्राफ को अभी भी संवाद अदायगी पर मेहनत करने की जरुरत है. दिशा पटनी ने प्रेमिका व पत्नी दोनों ही किरदारों को बेहतर तरीके से जिया है. खुशी व गम हर तरह के भाव उनके चेहरे पर अच्छे ढंग से उभर कर आते हैं. जबकि टाइगर श्राफ ने अपने एक्शन दृश्यों पर मेहनत करने के अलावा अपने शरीर को दिखाने पर ही ज्यादा ध्यान दिया है.
छोटे किरदार में भी प्रतीक बब्बर निराश करते हैं. दर्शन कुमार की प्रतिभा को जाया किया गया है. ड्रग माफिया और डीआईजी शेरगिल दोनों ही किरदारों में मनोज बाजपेयी अपनी छाप छोड़ते नजर आते हैं, मगर उनके अभिनय में कई जगह दोहराव नजर आता है. दीपक डेाबरियाल ठीक ठाक ही हैं.
दो घंटे 14 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘बागी 2’’ का निर्माण साजिद नाड़ियादवाला ने किया है. फिल्म के निर्देशक अहमद खान, संवाद कथा लेखक हुसेन दलाल, पटकथा लेखक जो जो खान, अब्बास हैरापुरवाला, नीरज कुमार मिश्रा, संगीतकार जुलियस पक्कियम, मिठुन, संदीप शिरोड़कर, गौरव रोशिन व प्रणय रिजय, कैमरामैन संथाना कृष्णन व रविचंद्रन तथा फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं – टाइगर श्राफ, दिशा पटनी, प्रतीक बब्बर, मनोज बाजपेयी,दर्शन कुमार, रणदीप हुड्डा, दीपक डोबरियाल और ‘एक दो तीन’ गाने में जैकलीन फर्नांडिज.
रणबीर कपूर की जिंदगी में क्या चल रहा है, यह समझना बड़ा मुश्किल हो रहा है. पाकिस्तानी अदाकारा माहिरा खान के साथ उनकी पुरानी मुलाकातों पर परदा डाला जा चुका है. माहिरा खान भी कह चुकी हैं कि रणबीर कपूर से उन्हें कभी प्यार नहीं था और चर्चाएं हो रही थीं कि अब रणबीर कपूर व आलिया भट्ट के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं. रणबीर कपूर के ही चलते आलिया भट्ट ने सिद्धार्थ मल्होत्रा से भी रिश्ते खत्म कर लिए.
लेकिन अब सूत्रों से जो खबरें मिल रही हैं, वह काफी चैंकाने वाली हैं. सूत्रों का दावा है कि बल्गेरिया में अयान मुखर्जी के निर्देशन में आलिया भट्ट के साथ रणबीर कपूर फिल्म ‘‘ब्रम्हास्त्र’’ की शूटिंग कर रहे थे. शूटिंग खत्म होते ही आलिया भट्ट और अयान मुखर्जी सीधे मुंबई लौट आए, लेकिन रणबीर कपूर लंदन उतर गए. सूत्रों का दावा है कि इन दिनों माहिरा खान भी लंदन में अपनी विवादास्पद फिल्म ‘‘वर्णा’’ के प्रमोशन के लिए हैं. सूत्र दावा कर रहे हैं कि रणबीर कपूर ने लंदन में माहिरा खान से मुलाकात की. अब इस मुलाकात के क्या मायने हैं, यह कहना बड़ा मुश्किल है.
इतना ही नहीं रणबीर कपूर के अति नजदीकी सूत्र दावा करते हैं कि लंदन में रणबीर कपूर व माहिरा खान की मुलाकातें हुई, दोनों ने कुछ समय साथ में बिताया और माहिरा खान पाकिस्तान वापस जा चुकी हैं, मगर रणबीर कपूर लंदन में हैं. वह फिल्म ‘‘ब्रम्हास्त्र’’ के एक्शन दृष्यों के लिए आवश्यक एक्शन की ट्रेनिंग ले रहे हैं. सूत्र दावा कर रहे हैं कि रणबीर कपूर लंदन में भारतीय मार्शल आर्ट मसलन कलारी पयट्टू और वर्मा कलाई की ट्रेनिंग ले रहे हैं. अब सवाल यह है कि भारतीय मार्शल आर्ट, वह भी कलारी पयट्टू के लिए भारत में केरला में ट्रेनिंग लेने की बजाय लंदन को रणबीर कपूर ने क्यों चुना?
बौलीवुड से जुड़े सूत्र दावा कर रहे हैं कि रणबीर कपूर अपनी जिदगी में कोई नई खिचड़ी पका रहे हैं.
श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव अपनी आने वाली फिल्म ‘स्त्री’ की शूटिंग में लगे हुए हैं. लेकिन इस शूटिंग के दौरान यह दोनों सितारे जबरदस्त मस्ती करते नजर आए हैं. इस मस्तीभरे माहौल का एक वीडियो श्रद्धा कपूर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें श्रद्धा, राजकुमार के साथ शाहरुख खान और मनीषा कोयराला की फिल्म ‘दिल से’ के टाइटल सौन्ग पर नाचते और गाते नजर आ रहे हैं.
लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होते वीडियोज की यह कतार यहीं नहीं थमी है. श्रद्धा एक वीडियो में फिल्म ‘बीवी नंबर 1’ के गाने ‘आजा न छूले मेरी चुनरी, पर भी थिरकती दिख रही हैं.
फिल्म ‘स्त्री’ की शूटिंग फिलहाल भोपाल में के चंदेरी में चल रही है. शूटिंग से मिले ब्रेक के दौरान फिल्म की सारी टीम काफी कूल अंदाज में नजर आई. कैंडल लाइट डिनर के साथ म्यूजिक और मस्ती के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. आप भी देखें श्रद्धा और राजकुमार राव के वायरल होते यह वीडियो.
बता दें कि ‘स्त्री’ एक हौरर कौमेडी फिल्म है. फिल्म की शूटिंग भी असली भुतिया इलाके में हो रही हैं. फिल्म के फर्स्ट शेड्यूल की शूटिंग पूरी हो चुकी है. फिल्म को अमर कौशिक डायरेक्ट कर रहे हैं. वहीं फिल्म की कहानी राज और डीके ने लिखी है. राज डीके बौलीवुड की सुपरहिट फिल्मों की कहानी लिख चुके हैं. ‘स्त्री’ में पहली बार पर्दे पर श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की जोड़ी नजर आएगी.
देश में विकास की गंगा ला देने के वादों के साथ 3 साल पहले आई राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार के विकास की बातें हवाहवाई साबित हो रही हैं. विकास के अलावा हिंदुत्व के बुनियादी मुद्दों समेत गैरजरूरी बातें सुर्खियों में जरूर छाई हुई हैं और सरकार की वाहवाही हो रही है. जनता और नेता आत्ममुग्ध दिखाई दे रहे हैं. गंभीर बात यह है कि मीडिया में भी विकास की सुर्खियां गायब हो रही हैं. अब न रोजगार की खबरें दिख रही हैं, न तरक्की की. हम अपने ही लोगों से नस्लीय लड़ाई लड़ रहे हैं.
चुनाव प्रचार के दौरान किए गए एक करोड़ रोजगारों के वादे पर कहीं गंभीरता नहीं दिखती. योजनाओं और कार्यक्रमों का जमीनी लैवल पर कोई असर नजर नहीं आ रहा है. ‘सब का साथ, सब का विकास’ महज खोखला नारा लग रहा है. गैरबराबरी बढ़ाने वाली सोच का बोलबाला बढ़ रहा है. नौजवान नौकरियों के लिए जूझ रहे हैं. किसानों की खुदकुशी के मामले रुक नहीं रहे हैं और सैनिक सीमा पर मर रहे हैं.
मई, 2014 में जब नरेंद्र मोदी की सरकार चुनी गई थी, तब केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी इस सरकार से तमाम तरह के विकास को ले कर ठोस कदम उठाने की एक उम्मीद जगी थी, पर अब वह धुंधली नजर आ रही है. हालात ऐसे हैं कि बाजार ठप हैं. छोटी व मझोली कंपनियों में निराशा का माहौल बना हुआ है. कर्मचारियों में जोश नहीं है और तो और पड़ोसी देशों चीन, पाकिस्तान, नेपाल से संबंध तनावपूर्ण बनते जा रहे हैं. बेरोजगारी और महंगाई देश में अब बहस का मुद्दा ही नहीं रही हैं.
विपक्ष बेअसर दिखाई दे रहा है. विपक्षी दल सरकार को संसद और बाहर घेरने में नाकाम साबित हो रहे हैं. चमत्कारों, अवतारों पर भरोसा करने वाली जनता भी नरेंद्र मोदी को नए अवतार में देख कर खुश हो रही है. विकास की खबरें गायब हैं.
सरकार का काम शौचालयों को बनाना, साफसफाई, मन की बात में केवल अपनी बात कहना रह गया है. हर जगह भाषणों का बोलबाला है. सरकार का सारा जोर विपक्ष को कमजोर करने, उसे कोसने में लगा रहता है. राज्यों के चुनाव जीतने में लगा रहा है. घरवापसी, गौवध और गौमांस पर पाबंदी की खबरें हावी हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केदारनाथ यात्रा, वाराणसी यात्रा, गंगा सफाई, यमुना की स्वच्छता, नर्मदा की पूजा, योग दिवस, योग को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिलाने, संस्कृति की महानता के चर्चे और 120 करोड़ की आबादी का बारबार गुणगान करने जैसी बातें सुर्खियों में रहती हैं.
सरकार विकास की कोरी बातें कर रही है, पर विकास होगा कैसे, यह कोई नहीं बता रहा. चीन जैसे देश से हम प्रति व्यक्ति आय में पिछड़ते जा रहे हैं.
साल 2013 में जहां चीन की प्रति व्यक्ति आय 5721 डौलर थी, वहीं साल 2015 में बढ़ कर 6497 डौलर हो गई. यानी प्रति व्यक्ति आय 776 डौलर बढ़ी, जबकि भारत की इसी अवधि में 1551 डौलर और 1751 डौलर थी. इस दौरान भारत की प्रति व्यक्ति आय महज 200 डौलर बढ़ी. अब अगर इसी तरह प्रति व्यक्ति आय बढ़ती रही, तो भारत चीन से विकास के मामले में बहुत पीछे रह जाएगा.
विकास के मामले में चीन के नतीजे चौंकाने वाले हैं. वहां विकास की औसत दर 9 फीसदी और पिछले तकरीबन 20 सालों में 30 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके हैं, जबकि भारत में गरीबी स्थायी देन लगती है. शायद लोगों के पहले के जन्म के पापों के फल की वजह से यह टिकाऊ बन चुकी है. अब भला सरकार नियति के फैसले में कैसे दखल कर सकती है?
चीन की माली बढ़ोतरी आज 6 से 7 फीसदी है. नैशनल इंटैलीजैंस काउंसिल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की कामकाजी आबादी अपने चरम पर 99.4 करोड़ होगी, पर भारत की कामकाजी आबादी साल 2050 से पहले अपने चरम तक शायद ही पहुंच पाए.
चीन अकेला सब से बड़ा अर्थव्यवस्था वाला देश होगा और साल 2030 तक वह अमेरिका को भी पीछे छोड़ देगा. चीन के बुनियादी विकास की कामयाबी देखने लायक है. वहां दिनरात परियोजनाओं पर काम चल रहा है. उस ने गंवई इलाके में कामधंधे को बढ़ावा दिया और बड़ी मात्रा में पैसे को व्यवस्थित किया है. चीन जाने वाले भारतीय कारोबारी वहां से लौट कर बताते हैं कि वहां भारत से बेहतर काम होता है.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चीन में पढ़ाईलिखाई की दर 95 फीसदी से ज्यादा है, जो वास्तव में पढ़ेलिखे हैं, जबकि भारत में करीब 75 फीसदी हैं, जो सिर्फ कुछ अक्षर समझ सकते हैं. भारत सरकार इस का देश की उत्पादकता का सही से इस्तेमाल नहीं कर पा रही है. वह ऐसी किसी तरह की कोई योजना बनाने में भी नाकाम दिख रही है. उलटा देश में धर्म के नाम पर लाखों निठल्लों की फौज बैठी है, जो किसी भी तरह की उत्पादकता से दूर है. ये परजीवी मेहनती लोगों पर बोझ बने हुए हैं. यहां 5 जने एक काम करने वाले के ऊपर निर्भर हैं.
भारतीय श्रम ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 2 सालों में रोजगार वृद्धि दर पिछले 8 सालों के मुकाबले अपने न्यूनतम स्तर पर है. साल 2015 में महज 1.55 लाख और साल 2016 में 2.31 लाख लोगों को ही नौकरी मिल पाई थी.
वहीं इस के उलट साल 2009 में सब से ज्यादा 10 लाख नौकरियों में भरती करने का ऐलान हुआ था. 7 फीसदी की दर से बढ़ती अर्थव्यवस्था की विकास दर का दंभ भरने वाली इस सरकार के लिए इतनी कम नौकरियों का होना न होने के बराबर है.
चीन, जापान जैसे देश इसलिए तरक्की कर रहे हैं कि वहां धर्म की दखलअंदाजी नहीं है. चीन में जो थोड़ाबहुत धर्म है, उस का असर ज्यादा नहीं है. हमारे यहां तो धर्म के अलावा कुछ है ही नहीं. मीडिया की तमाम सुर्खियां धर्म से पैदा हुई लगती हैं.
भारत सहित दुनिया के बहुत से देशों में धर्म की स्थापना के लिए धार्मिक क्रांतियां हो रही हैं. हमारे यहां हिंदू राष्ट्र के लिए जोर पकड़ रहा है. अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे यूरोपियन देश ईसाईयत के अलावा अब खुल कर दूसरे धर्मों से परहेज करते दिखने लगे हैं. वे अपने यहां दूसरों के घुसने पर रोक लगाने की कोशिशों में हैं.
मुसलिम देश भी कट्टरता का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हैं. पाकिस्तान, बंगलादेश, अफगानिस्तान, सूडान, अल्जीरिया, ईरान, इराक, सऊदी अरब जैसे देश मजहब के खूनी पंजों से घायल हैं, फिर भी धर्म का दामन पकड़े हुए हैं. मुसलिम सुधारक मुस्तफा कमाल पाशा का तुर्की अब इसलामी देश बनने के सपने देख रहा है.
दुनियाभर में धर्म, नस्ल, जाति के नाम पर अंदरूनी अघोषित गृहयुद्ध चल रहे हैं. धार्मिक देशों का हाल सामने है. तालिबान ने अफगानिस्तान को तबाह कर दिया. पाकिस्तान धार्मिक देश के तौर पर बरबादी के कगार पर खड़ा है.
सदियों से धर्म, जाति से चल रही माली व्यवस्था वाले भारत की माली नीतियों में अब भी अतीत की सोच हावी है. यहां अर्थव्यवस्था धर्म, जाति, नस्ल से बुरी तरह घिरी हुई है. गरीबी, पिछड़ापन, अपढ़ता, ऊंचनीच, भेदभाव, माली रूप से गैरबराबरी इसी का नतीजा है. यहां के नेता बिना ठोस योजनाओं के केवल बातें करना जानते हैं.