अंबेडकर के बहाने…

14 अप्रैल को देशभर में अंबेडकर जयंतियां मनाई गईं और दलित वोटों के खिसकने के डर की वजह से भारतीय जनता पार्टी ने कुछ ज्यादा जोरों से अंबेडकर की मूर्तियों को मालाएं पहनाईं. दलितों के एकलौते देवता के रूप में भीमराव अंबेडकर भी भारतीय जनता पार्टी के ही चेले थे, यह साबित करने की पूरी कोशिश राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संघ प्रमुख से ले कर हर जिले के भाजपा अध्यक्ष ने की.

अफसोस यही रहा है कि भाजपा अंबेडकर पर वह एकलौता हक नहीं जमा पाई जो वह राम, कृष्ण, शिव, गणेश और हनुमान पर जमा पाती है. दलितों का छोटा वर्ग ही भाजपा के साथ दिखा. ज्यादातर दूसरी पार्टियों के साथ या अलगथलग थे.

अंबेडकर की मूर्तियों को मालाएं पहनाना ही दलितों और ऊंची जातियों के बीच सदियोें की खाई पाटने के लिए काफी नहीं है. जब तक वर्ण भेद मन से नहीं जाएगा कुछ फर्क नहीं पड़ेगा और यह तब तक न जाएगा जब तक ऊंची जातियों के हिंदू अपने कर्मकांड खत्म न करेंगे.

हिंदू जन्म से ही साबित करने लगते हैं कि वे कौन सी जाति के हैं. यह उन के नाम के साथ चिपका होता है. उन के जन्म के रीतिरिवाजों के साथ लगा होता है. हाथ में पहने कलेवे से जाहिर होता है. माथे पर तिलक इस का सार्वजनिक विज्ञापन करता है. निजी इंगलिश मीडियम स्कूल में दाखिला लेने का मतलब होता है कि बच्चा ऊंची जाति का है क्योंकि सिवा ईडब्लूएस कोटे के इन स्कूलों में यदाकदा ही दलित बच्चों को जगह मिलती है.

कालेजों में मैस में ऊंची जातियों और नीची जातियों के छात्रों का अलगअलग बैठना साबित करता है कि कौन क्या है. प्रेम विवाहों में ऊंचीनीची जातियों पर देशभर में हो रहे विवाद साबित करते हैं कि यह भेदभाव तो युवाओं तक में है. यह सब कोई पिछले जमाने की बात नहीं है.

भारतीय जनता पार्टी के तेजतर्रार नेता जो हवा देते हैं उस से साफ लगता है कि उन के दिलों पर जाति का अहम सवार है. पार्टी में काफी दलित है पर उन्हें क्या बराबर का सा स्तर मिलता है यह दिखता नहीं है. भारतीय जनता पार्टी का समाज सुधार का कोई प्रोग्राम नहीं है. जाति तोड़ने का कोई जिक्र नहीं है. मंदिर प्रेम छोड़ने का कोई इरादा नहीं है. ये सब गुजरे जमाने की बातें हैं जिन की मंगलयानों और कंप्यूटरों के युग में जरूरत नहीं. वे सिर्फ देवी जागरण की जगह अंबेडकर परिक्रमा कर के दलित वोटों को पटाना चाहते हैं पर उन्हें अलग करने वाली खाई को पाटना नहीं चाहते.

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इस वजह से बंद होने जा रहा है प्रियंका का शो क्वांटिको

बौलीवुड से हौलीवुड तक का सफर तय करने वाली अदकारा प्रियंका चोपड़ा पिछले काफी वक्त से हौलीवुड प्रोजेक्ट में ही व्यस्त थी. लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि अमेरिकन शो क्वांटिको बंद होने वाला है. दरअसल, टीवी चैनल एबीसी प्रियंका के इस शो के तीसरे सीजन के बाद इसका प्रसारण नहीं करेगा. इस वजह से प्रियंका के शो क्वांटिको का यह आखिरी सीजन होगा.प्रियंका इस अमेरिकन टीवी शो के पिछले दो सीजन्स का हिस्सा रही हैं और अब तीसरे सीजन में भी एफबीआई एजेंट एलेक्स पैरिश की भूमिका निभा रही हैं. शो के तीसरे सीजन का प्रसारण इसी साल 26 अप्रैल से शुरू हुआ था.

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शो के पिछले दो सीजन में जहां 22 एपिसोड थे. वहीं इस सीजन में केवल 13 एपिसोड का ही प्रसारण किया जाएगा. बता दें कि क्वांटिको में प्रियंका चोपड़ा के अलावा जोश होप्किन्स, जैक मेक लाफ्लिंग, औनजन्यू एलिस, यासमिन अल मासरी, टेट एलिंग्टन, ग्राहम रोजर, एनाबेले एकोस्टा, रुसेल टौवी और एलन पौवेल जैसे एक्टर्स ने काम किया है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस शो के तीसरे सीजन के पहले एपिसोड की रेटिंग सिर्फ 0.5 रही थी. इस शो पर महज 30 लाख व्यूज मिले थे और इसी वजह से इस शो को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया गया है.

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक एबीसी द्वारा कई दूसरे शो की सीरीज को भी बंद कर दिया गया है. उन्होंने ऐसा इसलिए किया है ताकि नए शोज के लिए स्लौट खाली हो सकें. चैनल द्वारा इस फैसले को लिए जाने के बाद हौलीवुड एक्टर काल पेन ने इस खबर को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए प्रियंका को टैग किया और लिखा, प्रियंका चोपड़ा चलो हम एक फिल्म बनाएंगे.

रेड कार्पेट पर गायब हुआ दीपिका का आरके वाला टैटू

दीपिका पादुकोण पिछले दो दिनों से फ्रेंच रिवेरा में चल रहे ‘कान्‍स फिल्‍म फेस्टिवल’ का हिस्‍सा बनने के लिए पहुंची हुई हैं. यहां दीपिका पादुकोण कई बेहद अलग-अलग अंदाज में नजर आ रही हैं. कभी पर्पल पेंट-सूट तो कभी पैरलर जींस और वाइट टीशर्ट लुक, दीपिका हर अंदाज में कान्‍स में छा रही हैं.

शुक्रवार को दीपिका ने कान्‍स के रेड कारपेट पर शिरकत की और उनका पिंक ड्रेस सोशल मीडिया पर छा गया. दीपिका ‘एश इज प्‍योरेस्‍ट वाइट’ फिल्‍म के प्रीमियर का हिस्‍सा बननें पहुंचीं. लेकिन जहां सभी का ध्‍यान दीपिका पादुकोण की इस खूबसूरत ड्रेस पर था, वहीं दीपिका के गायब टैटू ने सोशल मीडिया पर फैन्‍स को चौंका दिया.

बता दें कि दीपिका पादुकोण और रणबीर कपूर लंबे समय तक रिश्‍ते में रहे थे और उसी दौरान दीपिका ने आरके यानी रणबीर कपूर के नाम का यह टैटू बनवाया था. फिर ये जोड़ी अलग हो गई, लेकिन दीपिका ने अपने पर्सनल रिश्‍ते की दूरियों को अपने काम के बीच में नहीं आने दिया. ब्रेकअप के बाद दीपिका और रणबीर ‘ये जवान है दिवानी’ और ‘तमाशा’ जैसी फिल्‍मों में साथ नजर आ चुके हैं.

रणबीर कपूर से अलग हो कर दीपिका अब रणवीर सिंह के साथ हैं और इन दोनों की इसी साल के आखिर तक शादी की खबरें भी आ रही हैं. ऐसे में कान्‍स के रेड कारपेट पर दीपिका की गर्दन से गायब हुआ यह टैटू चर्चा का विषय बन गया है.

हालांकि यह पहला मौक नहीं है, जब दीपिका बिना इस टैटू के नजर आई हैं. एक साबुन के विज्ञापन में साड़ी पहने नजर आईं दीपिका की गर्दन से यह टैटू गायब दिखा था. उस समय भी दीपिका ने मेकअप से यह टैटू छिपाया था.

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दीपिका पादुकोण अक्‍सर अपने इस टैटू के साथ नजर आती रही हैं. यहां तक कि हाल ही में मनीष मल्‍होत्रा के एक चैरिटी शो में भी दीपिका पादुकोण ने रणबीर कपूर के साथ रैंपवौक किया और यह टैटू दीपिका के साथ ही नजर आया. यहां तक की पिछले साल कान्‍स में रेड कारपेट पर चलीं दीपिका इसी टैटू के साथ नजर आई थीं. लेकिन इस बार लगता है दीपिका ने इस टैटू को छिपाना ही जरूरी समझा.

दीपिका कान्‍स से पहले मैट गाला के रेड कारपेट पर नजर आ चुकी हैं. कान्‍स में दीपिका के लुक्‍स की काफी तारीफ हो रही है.

मुझे एक लड़की से प्यार हो गया है. वह हमेशा मेरी ओर देखा करती थी, जिस से मुझे लगा था कि वह भी मुझे पसंद करती है. मैं क्या करूं.

सवाल
मुझे अपने गांव के पास के ही एक गांव की कालेज की छात्रा से प्यार हो गया है. एक दिन उस के ट्यूशन पढ़ने के लिए जाते वक्त मैं ने उसे अपने प्यार के बारे में बताने के लिए आवाज दे कर रोका. मैं कुछ कह पाता, उस से पहले ही वह मुझे पागल कह कर चली गई. वह हमेशा मेरी ओर देखा करती थी, जिस से मुझे लगा था कि वह भी मुझे पसंद करती है. मैं क्या करूं?

जवाब
कोई राह चलती लड़की कभीकभार नजरें उठा कर देख ले तो उसे प्यार नहीं समझना चाहिए. बात साफ है कि वह आप से प्यार नहीं करती. आप से रहा न जाए, तो कोई बहाना निकाल कर एक बार उस से दोटूक बात कर लें. वह मान जाए तो आगे बढ़ें, वरना उस का पीछा करना छोड़ दें.

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तोहफा हो प्यार का, न कि उधार का

फरवरी माह आते ही हर युवा प्यार के रंगों में सराबोर नजर आने लगता है. कारण है इस माह में आने वाला त्योहार वैलेंटाइन डे. जो प्यार और प्यार के इजहार का दिन है. अपने जज्बातों को शब्दों में बयां करने के लिए हर युवा दिल को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है, और हो भी क्यों न, इस दिन प्रेमी अपने प्यार का इजहार एकदूसरे को तोहफे व फूल दे कर करते हैं. कुछ युवा तो महंगे तोहफे खरीदने के लिए उधारी तक कर लेते हैं.

तोहफे की अहमियत

हर प्रेमी की यह चाहत होती है कि वह अपने वैलेंटाइन डे को यादगार बनाए. ऐसे में इस दिन को यादगार बनाने के लिए तोहफे की अहमियत बढ़ जाती है. अपने वैलेंटाइन को महंगे से महंगा तोहफा देने के लिए प्रेमी अपनी जेब तो हलकी करते ही हैं, साथ ही उधार लेने से भी नहीं कतराते, जबकि प्यार का तोहफा दिल का तोहफा होना चाहिए न कि उधार का.

प्यार की उधार चढ़ी दुकान

प्यार एक खूबसूरत एहसास है. जब किसी को किसी से प्यार हो जाता है तो वह रिश्ते की शुरुआत में अकसर इतना एक्साइटेड हो जाता है कि अपने प्यार की फीलिंग्स व्यक्त करने और अपनी शान बघारने के चक्कर में महंगा गिफ्ट खरीद कर अपने वैलेंटाइन को देता है, चाहे इस के लिए उसे किसी से उधार लेना पड़े या फिर तोहफे की कीमत किस्तों में अदा करनी पड़े. आखिर मामला प्यार का जो है, पर यह कितना सही है?

जितनी चादर हो उतने पैर पसारें

यह जरूरी नहीं कि अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए आप जरूरत से ज्यादा महंगा गिफ्ट खरीद कर अपने वैलेंटाइन को देंगे तभी उस से अपने दिल की बात कह पाएंगे. आप अपनी और उस की पसंद के अनुसार ही गिफ्ट देने की सोचें, नहीं तो बाद में समस्या आप को ही होगी और महंगे गिफ्ट की उधारी चुकातेचुकाते आप परेशान हो जाएंगे. इसलिए अपने बजट के अनुसार ही गिफ्ट का चुनाव करें.

आजकल मार्केट में हर रेंज के लव गिफ्ट्स मौजूद हैं. आप अपनी जेब के हिसाब से उन में से कोई भी चुन सकते हैं.

देखादेखी न करें

प्यार में गिफ्ट देने में कभी भी कंपीटिशन न करें. किसी दूसरे के पार्टनर ने अपने वैलेंटाइन को महंगा गिफ्ट दिया है तो आप को भी महंगा गिफ्ट देना है, यह जरूरी नहीं. अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार ही गिफ्ट का चयन करें. नहीं तो इस से आप को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कम और गिफ्ट के बारे में चिंता ज्यादा रहेगी. ऐसे में आप के प्यार की शुरुआत ही बेकार होगी और जो प्यारभरी बात आप को अपने वैलेंटाइन से करनी है, वह भी अधूरी रह जाएगी. अत: अपनी जेब और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर ही गिफ्ट खरीदें. प्यार भरा गिफ्ट जब आप अपने वैलेंटाइन को देंगे तो बात बन जाएगी.

गिफ्ट हो कुछ इस तरह खास

– अगर आप अपने दिल के जज्बातों को अपने पार्टनर से शेयर करने के लिए कोई ऐसा गिफ्ट देना चाहते हैं जो हमेशा उसे आप की याद दिलाए तो दिल से निकला संदेश दें. इस के लिए आप कुछ ऐसा करें, जिस से आप की जेब भी हलकी न हो और आप अपनी भावनाओं को भी अच्छी तरह से व्यक्त कर सकें.

– सब से पहले अपने बिजी शैड्यूल में से कुछ समय निकालें, क्योंकि सब से कीमती उपहार है आप का साथ, जो आज के समय में कम ही मिल पाता है.

– अपने हाथों से ग्रीटिंग कार्ड बनाएं व उस पर अपनी भावनाओं को कविता के रूप में लिख कर व्यक्त करें, यह अनमोल उपहार आप के वैलेंटाइन को बहुत पसंद आएगा.

– उस के पंसदीदा फोटोग्राफ्स से भरी एक खूबसूरत स्क्रैप बुक बना कर उसे तोहफे में दें. यह नायाब तोहफा उस के दिल को छू जाएगा.

–  अपने वैलेंटाइन के साथ बिताए पलों की सुनहरी यादों को फिर से दोहराएं, ये पल वाकई उसे रोमांचित कर देंगे.- अगर आप का वैलेंटाइन पढ़ने का शौकीन है तो उसे अच्छी किताब गिफ्ट करें.

– यदि आप के वैलेंटाइन की संगीत में रुचि है या उसे पुरानी फिल्में देखने का शौक है, तो उसे उस के पसंदीदा गानों व मूवी की सीडी गिफ्ट कर सकते हैं.

– जरूरी नहीं कि उस दिन आप अपने वैलेंटाइन को किसी फाइव स्टार होटल में ही पार्टी दें. अगर आप उसे उस की पसंद के अनुसार अपने हाथों से कोई स्पैशल डिश बना कर खिलाएंगी तो उसे खुशी होगी और अपनापन लगेगा. जैस चौकलेट केक, ब्राउनी, कुकीज कप केक आदि.

– युवतियों को फंकी ज्वैलरी बहुत पंसद आती है, ऐसे में यह भी आप के बजट के अनुसार आसानी से मिल जाएगी.

– ज्यादातर युवकों को स्पोर्ट्स पसंद होता है. ऐसे में आप स्पोर्ट्स का कोई आइटम या स्पोर्ट्स क्लब की मैंबरशिप उसे गिफ्ट कर सकती हैं.

ऐसे बचाएं पैसा

हमारी जिंदगी में पैसे की अहमियत कितनी है, यह हर कोई जानता है. हर आदमी ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाना चाहता है और जल्द से जल्द अमीर बनना चाहता है. लेकिन हमारा मानना है कि जब तक आप पैसे बचाना शुरू नहीं करेंगे, तब तक आप कितना भी पैसा कमा लें, आप अमीर नहीं बन सकते हैं, क्योंकि पैसा बचाना भी पैसा कमाना होता है. अगर आप एक रुपया बचाते हैं, तो इस का मतलब है कि आप ने एक रुपया कमाया. पैसे कमाना हर कोई जानता है, लेकिन उन पैसों को कैसे बचाया जाता है, यह बहुत कम लोग जानते हैं. आइए, हम आप को बताते हैं पैसे बचाने के कुछ आसान उपाय:

अगर आप दोस्तों के साथ किसी होटल में ठहरने जा रहे हैं, तो सब से पीछे रहें, क्योंकि जो आगे रहेगा, मोलभाव वही करेगा. लिहाजा, भुगतान भी वही करेगा.

अगर आप दोस्तों के साथ होटल में खाना खा रहे हैं, तो धीरेधीरे सब से आखिर तक खाते रहें. तब तक कोई न कोई बिल दे देगा.

अगर आप रेलगाड़ी में सफर कर रहे हैं, तो टिकट न लें. अगर टिकट चैकर आता दिखे, तो सीट से खड़े हो कर बाथरूम की तरफ जाने लगें. वह टिकट नहीं मांगेगा. अगर टिकट मांग भी ले, तो ‘बाथरूम से आता हूं’ कह कर बाथरूम में ही कुछ देर आराम करें. टिकट चैकर आगे चला जाएगा. ॥ नईनई चीजों को खरीदने के बजाय आप जुगाड़ तकनीक का इस्तेमाल करें.

॥ रोजाना बाजार या दफ्तर जाने के लिए किसी दोस्त की घड़ी से अपना समय मिला लें और उस की गाड़ी पर बैठ कर जाने की कोशिश करें. ॥ अगर आप का बिजली का बिल ज्यादा आता है, तो दिन में मीटर का इस्तेमाल करें और रात में खंभे पर तार डाल कर बिजली जलाएं.

॥ घर में नमक, मसाला, मिर्च का उपयोग महीने में 2-4 दिन पड़ोसियों से मांग कर करें. इस से भी काफी बचत होती है. आप महीने में 1-2 दिन किसी से कुछ मांगेंगे, तो वह शर्म के मारे इनकार नहीं करेगा. ॥ अगर आप अखबार पढ़ने के शौकीन हैं और अखबार पर पैसे खर्च नहीं करना चाहते हैं, तो ऐसी जगहों पर जा कर बैठें, जहां लोग अखबार पढ़ रहे हों. वहीं अखबार पढ़ें. मुमकिन हो, तो उस अखबार को घर पर भी ले आएं. बाद में रद्दी में बेच दें.

॥ सब्जी खरीदनी हो, तो थोड़ीथोड़ी सब्जी कई जगहों से लें, क्योंकि आमतौर पर सब्जी वाले जब सब्जी तौलते हैं, तो थोड़ी ज्यादा ही तौलते हैं. अगर आप को हर बार 50 ग्राम सब्जी भी ज्यादा मिलती है, तो बहुत फायदा होगा. कैसे? यह गणित मैं समझाता हूं. अगर आप को 2 किलो एक ही सब्जी खरीदनी है, तो आधाआधा किलो सब्जी 4 दुकानों से खरीदें. अगर हर बार 50 ग्राम सब्जी भी ज्यादा मिलती है, तो आप को 200 ग्राम सब्जी का फायदा होगा.

॥ दाढ़ीमूंछ खुद बनाएं और बाल कटवाने के लिए किसी सड़कछाप सैलून में जाएं. कम पैसे में काम हो जाएगा. ॥ अगर रोजाना बस या आटोरिकशा से जाना हो, तो एक रुपया कम दें. पूरे पैसे मांगने पर खुले नहीं हैं का बहाना बनाएं. अगर वह न माने, तो 5 सौ रुपए का बड़ा नोट दिखाएं.

॥ अगर किसी पार्टी में जाना हो, तो घर के सभी सदस्यों के साथ जाएं. उस दिन का पूरा खाना बच जाएगा. ॥ अगर आप की किसी कार्यक्रम में उपहार देने की बारी आए, तो आप किसी बहाने से दूसरी जगह चले जाएं, फिर कार्यक्रम खत्म होने पर ही आएं.

॥ अगर किसी को उपहार देना जरूरी लगे, तो बड़े डब्बे में कम कीमत का उपहार देने की कोशिश करें. ॥ अगर मोबाइल फोन के खर्च से परेशान हैं, तो किसी से बात करने के लिए मिस काल करें. आप कई बार मिस काल करेंगे, तो दूसरी तरफ से फोन जरूर आएगा.

॥ अगर आप से कोई कुछ मांगे, तो बहाना बनाने की कोशिश करें. ॥ अगर कोई आप को किसी काम के लिए बारबार फोन कर रहा हो, तो फोन न उठाएं. काफी देर बाद उठाएं. अगर वह पूछे तो कह दें कि मोबाइल फोन साइलैंट मोड पर था. शोर के चलते मैं फोन को सुन नहीं सका.

हम ने इन उपायों को अपना कर पैसा बचाना शुरू कर दिया है और अमीर बनने की ओर अपना पहला कदम बढ़ा दिया है. हमें पूरा यकीन है कि जल्द ही हमारा नाम दुनिया के बड़ेबड़े अमीरों के साथ गिना जाने लगेगा.

क्या आप अमीर नहीं होना चाहेंगे? अगर हां, तो इन उपायों को आप भी आजमा सकते हैं.

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हाय मेरी बैटरी

कभी होस्टल जा रहे बेटे को मां पूछती थी, ‘बेटा, सभी कपड़े रख लिए हैं न, घी का कनस्तर, अचार का डब्बा ठीक से रख लेना और जो सूखे मेवे रखे हैं, उन्हें बराबर खाते रहना. चड्डीबनियान, तौलिया वगैरा मत भूल जाना.’

फिर सासबहू के सीरियल का दौर आया. मां की चिंता में शेविंग किट, ब्लैड, डिओ वगैरा आ गए. ‘एक से क्या होगा बेटा, 2 रख ले.’

‘मां, इस की एक बूंद ही काफी है एक बार की शेविंग में,’ बेटा कौन्फिडैंटली जवाब देता. बेटे की होशियारी पर मां मन ही मन बलैयां उतार लेतीं.

अब लेटैस्ट मां पूछ रही है, ‘बेटा, बैटरी फुल चार्ज है न. पावरबैंक जरूर रख लेना. ट्रेन में बैठते ही चार्जर पावर प्लग में लगा देना, नहीं तो कोई और ठूंस कर बैठ जाएगा. किसी से ज्यादा घुलनामिलना मत, कानों में हैडफोन लगा कर पूरा चौकन्ना रह कर आराम से गाने सुनते हुए जाना. बेटा संस्कार भले ही घर भूल कर चला जाए, लेकिन हैडफोन बिलकुल नहीं भूल सकता.

अकसर मांबाप कालेज जाते बेटे से यह पूछना भूल जाते हैं कि हैलमैट क्यों नहीं लगाया? लाइसैंस, नो पौल्यूशन कार्ड, इंश्योरैंस पेपर, आरसी वगैरा हैं साथ में?

लेकिन जब से हाथ में स्मार्टफोन आया है, बेटा काफी समझदार हो गया है. बस, बेटे का एक ही दुख है, बैटरी, बैटरी ज्यादा नहीं चलती. बीच मझदार में दम तोड़ देती है. वैसे बेटे के इस विराट दुख में सब का दुख समाहित है, हाय, बैटरी ज्यादा नहीं चलती.

देखा जाए, तो एक स्मार्टफोनधारी की मनोस्थिति उस मोर की तरह होती है जो अपने सुनहरे, सजीले पंखों को देख कर नाचता तो है, लेकिन पैरों की तरफ देख कर मन ही मन रोता है. उसी तरह स्मार्टफोन से जो खुशी मिलती है, थ्रिल जगता है, टच करते हुए गुदगुदी होती है, लेकिन बैटरी को देख कर वह काफूर हो जाती है. हाय, कितनी क्षणभंगुर है बैटरी लंबी है स्मार्टफोन में देखी जाने वाली चीजों की फेहरिस्त.

बैटरी पीडि़त के मन से अपनेआप ही काव्यनुमा आह फूट पड़ती है. परीक्षा के पर्सेंट से भी मूल्यवान बैटरी के पर्सेंट हो गए हैं. उस पर आदमी लगातार टकटकी लगाए रहता है. वह छीज रही है, दिल बैठ रहा है. एक अदद बैटरी के आगे इंसान खुद को कितना असहाय, निरुपाय, पराजित सा फील करता है.

आज हर हाथ को बतौर फोन स्मार्ट होने का भ्रम है. एक आंख इसे देख कर खुश होती है तो दूसरी बैटरी को घूर कर कुढ़ती है. हर्ष और विषाद मिश्रित ऐसे चेहरे देख कर लगता है, देश की सब से बड़ी समस्याएं आतंक, घुसपैठ, सीमा विवाद, लोकतंत्र, कट्टरता, बेरोजगारी, सरकार, भ्रष्टाचार, नोटबंदी, जीएसटी वगैरा नहीं, बल्कि एक अदद बैटरी है. बाकी समस्याएं तो क्षणिक आवेशभर की हैं, परमानैंट प्रौब्लम तो बैटरी की ही है.

बैटरी हमारी चिंता के केंद्रीय भाव में आ बैठी है. बैटरी चले, तो लाइफ चलती सी लगे. 2 लोग आपस में बातचीत भी करते हैं, तो बैटरी दन से बीच में  कूद पड़ती है. यार, इस बैटरी का कोई समाधान बताओ न. दोपहर भी नहीं पकड़ती?

‘सेम प्रौब्लम हीयर,’ सामने से जवाब आता है, अभी थोड़ी देर पहले 70 प्रतिशत थी, अभी देखा तो 24 प्रतिशत.

कुल वार्त्तालाप में आधे से भी ज्यादा को बैटरी हजम कर जाती है. बैटरी से शुरू हो कर वार्त्ता पावरबैंक पर खत्म हो जाती है.

इंसान आकुल है. कितने व्हाट्सऐप, कितने यूट्यूब, कितने फेसबुक, ट्विटर, वायरल सच, वीडियो जिंदगी में गहरे तक धंसे पड़े हैं, बैटरी बीतने से पहले सब से गुजर जाना है.

वैसे यह भी ताज्जुब की बात है कि आज फोन तो अच्छेखासे स्मार्ट हो रहे हैं और लगातार होते ही जा रहे हैं. सुबह जो फीचर थे, शाम तक कई फटीचर से हो जाते हैं. बावजूद बैटरी कतई बाबा आदमहव्वा के जमाने सी चल रही है. लगता है इस पर कोई काम ही नहीं हो रहा है. गोया कि सारा जोर तन साफ करने पर है, मन का मैल छांटने की फिक्र किसी को नहीं.

ऐसी बैटरी आदमी को दार्शनिक भी बना देती है. बेटा, जो है उसी से संतोष कर. यह  मान ले, बैटरी का कैरेक्टर नेताओं और उन के बयानों की तरह हो गया है. सुबह दिए, दोपहर को मुकरे, शाम तक कह देंगे, कौन सा बयान?

बैटरी सुबह चार्ज, दोपहर आतेआते पावरबैंक शरणागत. पावरबैंक भी कोई खास मदद नहीं कर पा रहे हैं. समय किस के पास है इत्ता. सबकुछ फास्ट चाहने वाली युवापीढ़ी के लिए यह भी धीमीगति के समाचारों की तरह है. यही हाल रहा, तो फ्यूचर में बैंकों से ज्यादा पावरबैंक खोलने पड़ेंगे. हर एकाध किलोमीटर पर होंगे, जहां से स्मार्टफोन वाले पावर लेंगे और अपनी आभासी दुनिया में मशगूल हो जाएंगे.

कभीकभी लगता है कि पूरा देश ही पावरबैंक है, जिस से हर कोई अपनेअपने हिसाब से चार्जिंग खींचने में लगा है. ऐसे बैंकों की खास टैगलाइन हो सकती है, ‘चलेगा फोन, बढ़ेगा देश.’ नारों के जरिए देश बहुत बढ़ जाया करते हैं.

देश भले ही गड्ढे में चला जाए, मगर हमारा फोन चलते रहना चाहिए. इसी फिक्र में हर व्यक्ति बैटरी सहेजने के मूड में और पावर सेविंग मोड में है. उन सब फीचर्स को फौलो कर रहा है जहां बैटरी की बचत हो सकती है. इतनी सेविंग तो लाइफ की भी नहीं होती. जिंदगी रहे न रहे, बस अंतिम समय तक बैटरी बची रहे दोस्तों.

चाह ऐसी है कि चाहे हाईटैक किस्म के प्लेन, डब्बे, रक्षा उपकरण, सिलेबस, स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, गवर्नमैंट इत्यादि भले मत बनाओ, चाहो तो डैवलपमैंट को भी एक बार पोस्टपौंड कर दो, भले छीन लो सारे रोजगार, लेकिन प्लीज बैटरी का कोई स्थायी इंतजाम कर दो.

‘बाबा, बैटरी को ले कर बहुत परेशान हूं, यह ज्यादा देर नहीं चलती, कोई समाधान बताइए?’

दुनिया में हर समस्या का समाधान बताने वाले बाबा लोग भी बैटरी के नाम पर बगलें झांकने लगेंगे, ‘बेटा, बैटरी तो हमारी भी नहीं चल पा रही, जो मिली है, उसी से काम चला. यों समझ ले जीवन की तरह यह भी क्षणभंगुर है.’

पब्लिक के हाल देख कर सरकारें आगे इस दिशा में बढ़ जाएं, तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. सरकारों को चाहिए ऐसी ही पब्लिक, जो भेड़ों की तरह सिर दिनरात स्मार्टफोन की स्क्रीन में धंसाए रहे. ऊपर उठाए, तब तक 5 साल मजे से बीत जाएं.

हो सकता है, भविष्य में चुनाव बैटरी आधारित ही हो जाएं. घोषणापत्रों में शुमार हो जाए, हम देंगे मुफ्त बैटरी. एक दल लोक लुभावन घोषणा करेगा. दूसरा कूद पड़ेगा ‘जी, हम देंगे बैटरी का बाप बैटरा. भले हर हाथ को काम न दे पाएं सरकारें, मगर हर हाथ बैटरी जरूर देने लगेंगी.’

घरघर चार्जिंग की सप्लाई भी दे सकती हैं. फिर प्रैशर कुकर, साडि़यां, बरतन, चावल, टीवी मुफ्त देने का वादा करने वाले दल सूची में स्मार्टफोन भी जोड़ लेंगे.

‘अजी, उन को छोडि़ए, हम ऐसी बैटरी बनाएंगे, जिसे चार्ज करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. हमारी बैटरी पर मुहर लगाइए और चौबीस घंटे स्मार्ट रहिए, इस स्मार्टफोन ने लोगों को स्मार्टली बिना काम ही बिजी कर दिया.

घर, दफ्तर, सार्वजनिक स्थलों से बस, ट्रेन, प्लेन में देखिए. सफर शुरू होते ही सब हरकत में आते हैं और स्मार्ट फोन में बिजी हो जाते हैं. बगल में कोई बम भी फिट कर जाए, तो पता तभी चलेगा, जब वह फट जाएगा. तब भी शायद होश में न आएं सब से पहले स्मार्ट फोन संभालेंगे, फिर बैटरी चैक करेंगे. सैल्फी विद बौंब या लाइव हो जाएंगे आफ्टर बौंब.

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ई-वे बिल कारोबारियों के लिए मुसीबत

जीएसटी यानी वस्तु और सेवाकर से होने वाली परेशानियों को ध्यान में न रखते हुए केंद्र सरकार ने कारोबारियों के लिए नई ई-वे बिल व्यवस्था लागू कर दी है, जिस में बहुत से ऐसे नियम हैं जो व्यापारियों के लिए सुविधाजनक नहीं हैं. व्यापारियों का कहना है कि अभी हम जीएसटी के जंजाल से जूझ ही रहे थे कि ई-वे बिल के रूप में नई मुसीबत सामने खड़ी हो गई है. हालात यह है कि कारोबारी को बजाय कारोबार करने के, औनलाइन खानापूर्ति करने में ही अपना समय लगाना होगा.

वहीं, सरकार का दावा है कि ई-वे बिल से कारोबारियों की मुसीबतें कम होंगी. उन को टैक्स औफिस के चक्कर नहीं लगाने होंगे. वे अपने फोन से ही ई-वे बिल बना सकेंगे. इस से वे पूरे देश में कहीं भी अपना माल भेजने के लिए स्वतंत्र होंगे.

उधर, कारोबारियों की परेशानी यह भी है कि ई-वे बिल के दायरे में अब 20 वस्तुओं को शामिल कर लिया गया है. इस से कारोबारियों के सामने और ज्यादा परेशानियां आई हैं.

जिन वस्तुओं को ई-वे बिल के दायरे में लाया गया है उन में सुपारी, लोहा, इस्पात, सभी प्रकार के खा• तेल, वनस्पति घी, कोलतार, कोल, सभी प्रकार की टाइल्स, अखबारी कागज, सभी तरह के दूसरे कागज, स्टोन, सिगरेट, सिगार, टायरट्यूब, कत्था, खैनी, जरदा, तंबाकू से बने प्रोडक्ट्स, लुंब्रीकेंट्स, स्किम्ड पाउडर, पेंट, वार्निश, सेनिटरी वेयर और फिटिंग, वुड और टिंबर शामिल हैं. ऐसे में करीबकरीब हर कारोबारी इस दायरे में आ गया. ई-वे बिल की परिधि में आई ज्यादातर चीजें रोजमर्रा की हैं. ऐसे में कारोबारियों की मुसीबतें तो बढ़ेंगी ही, ये चीजें महंगी भी हो जाएंगी.

कैसे बनेगा ई-वे बिल

सरकार ने ई-वे बिल के लिए जीएसटीएन पोर्टल से अलग वैबसाइट बनाई है. इस के जरिए देशभर के सभी कारोबारी और ट्रेडर्स इस वैबसाइट पर ई-वे बिल को जनरेट कर सकेंगे. सरकार ने व्यापारियों की सुविधा के लिए एंड्रौएड फोन के लिए ई-वे बिल का ऐप भी लौंच किया है. इस को मोबाइल के प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं. इस ऐप के जरिए भी कारोबारी ई-वे बिल को जनरेट कर सकते हैं. इस ऐप को डाउनलोड करने पर कारोबारी को अपनी डिटेल और जीएसटीएन नंबर रजिस्टर करना होगा.

इधर, कारोबारी ई-वे बिल की खामियों से खासे परेशान हैं. पोर्टल और इंटरनैट की दिक्कतों के साथ ही साथ उन्हें कई तरह की अव्यावहारिक दिक्कतों का भी सामना करना पड़ रहा है.

सरकार कहती है कि ई-वे बिल लागू होने से कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों को किसी भी टैक्स औफिस या चैकपोस्ट पर जाने की जरूरत नहीं होगी. कारोबारी ई-वे बिल को इलैक्ट्रौनिकली स्वयं निकाल पाएंगे. कारोबारी औफलाइन भी एसएमएस के जरिए ई-वे बिल बनवा सकेंगे.

जिन कारोबारियों के पास इंटरनैट की सुविधा नहीं होगी और जिन को एक दिन में ज्यादा ई-वे बिल जनरेट नहीं करने हैं, वे एसएमएस के जरिए ई-वे बिल को जनरेट करवा सकते हैं. इस के लिए कारोबारी को अपना मोबाइल नंबर रजिस्टर कराना होगा. इसी नंबर से एसएमएस के जरिए ई-वे बिल की रिक्वैस्ट डिटेल दे कर वे ई-वे बिल जनरेट करवा सकते हैं. ई-वे बिल जनरेट करने पर क्यूआर कोड जनरेट होगा. इस कोड के जरिए ही जीएसटी अधिकारी कभी भी व्हीकल की चैकिंग कर सकते हैं. इस के जरिए ही व्हीकल को ट्रैस भी किया जा सकेगा.

कारोबारियों को ई-वे बिल बनाने के लिए वैबसाइट पर जा कर जीएसटी का यूजर पासवर्ड डालना होगा. इस के बाद ही वे अपना ई-वे बिल जनरेट कर सकेंगे. अगर कारोबारी ने अपना ई-वे बिल रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो उन्हें अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इस के बाद ई-वे बिल पर रजिस्ट्रेशन क्लिक करना होगा. यहां पर जीएसटीएन नंबर भरने से पासवर्ड मिल जाएगा. इस से ही वे अपना ई-वे बिल बना सकेंगे.

हड़बड़ी में लिया गया फैसला

ई-वे बिल को ले कर कारोबारियों को पोर्टल के अलावा भी कुछ दिक्कतें हैं. कारोबारी चाहते हैं कि सरकार इस में संशोधन करे. अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष संदीप बंसल कहते हैं, ‘‘ई-वे बिल किसी भी तरह से कारोबार के हित में नहीं है. इस के लागू होने के बाद वे कारोबारी भी जीएसटीएन नंबर लेने के लिए मजबूर हो गए हैं जो जीएसटी के दायरे में नहीं आते. सरकार ने जीएसटी लागू करने में जिस तरह की हड़बड़ी दिखाई, वैसी ही हड़बड़ी उस ने ई-वे बिल के लिए भी दिखाई. बिना पूरी तैयारी के इस को लागू किया गया है. जीएसटी में रोज नए बदलाव हो रहे हैं, जिस से कारोबारी परेशान हो रहे हैं. इस तरह के बदलावों से यह लगता है कि सरकार कारोबारियों के हित के बजाय उन का अहित करने का काम कर रही है.’’

वे कहते हैं, ‘‘आज भी देश में तमाम ऐसे कारोबारी हैं जो इंटरनैट और कंप्यूटर की जटिलताओं से दूर हैं. वे मेहनत और ईमानदारी से कारोबार करते हैं, समय पर टैक्स देते हैं. वे चाहते हैं कि सरकार टैक्स को सरल करे, जिस से उन्हें इस झमेले से मुक्ति मिल सके.

केंद्र की भाजपा सरकार लगातार कारोबारियों को परेशान करने वाले कानून बना रही है. विपक्ष में रहते हुए कभी जिस एफडीआई का वह विरोध करती थी, आज खुद उस ने उसी को लागू कर दिया. महंगाई और पैट्रोलियम पदार्थों के दामों को ले कर वह पहले विरोध करती थी अब उस का समर्थन कर रही है. पूरे देश पर जीएसटी लागू किया पर पैट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी नहीं लगा रही है. अगर पैट्रोलियम पदार्थों पर जीएसटी लागू हो जाए तो ये काफी हद तक सस्ते हो जाएंगे.

बदलाव की मांग

कारोबारी ई-वे बिल के कुछ  प्रावधानों में बदलाव चाहते हैं.

•       30 किलोमीटर से ज्यादा दूर माल भेजने पर ई-वे बिल बनाना होगा.

—      कारोबारी चाहते हैं कि आज शहरों की घटती दूरी को देखते हुए यह कम है. इस में तो एक महल्ले से दूसरे महल्ले के बीच माल भेजने वाले को ई-वे बिल बनाना जरूरी हो जाएगा. ऐसे में ई-वे बिल के लिए कम से कम 60 किलोमीटर की दूरी का प्रावधान किया जाए.

•       50 हजार रुपए से ज्यादा का माल भेजने के लिए ई-वे बिल बनाना होगा.

—      कारोबारी कहते हैं कि इस नियम से सभी के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो जाएगा. तब जीएसटी रजिस्ट्रेशन से छूट की बात बेमानी होगी. इसलिए यह सीमा बढ़ा कर कम से कम 2 लाख रुपए की जाए.

•       माल भेजने के लिए ट्रक का नंबर देना होगा.

—      कारोबारी कहते हैं कि कई बार ट्रांसपोर्ट वाले माल भेजते समय ट्रक बदल देते हैं. कोई दूसरी परेशानी भी खड़ी हो सकती है. ऐसे में ट्रक का नंबर बाद में बदलने का प्रावधान शामिल किया जाए.

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शादी का झांसा देने वाला फरजी सीबीआई अधिकारी

12 दिसंबर, 2017 को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के थाना अशोका गार्डन में काफी भीड़भाड़ थी. धीरेधीरे यह भीड़ बढ़ती जा रही थी. लोग यह जानने के लिए उस भीड़ का हिस्सा बनते जा रहे थे कि आखिर यहां हो क्या रहा है? लोग उत्सुकता से एकदूसरे का मुंह भी ताक रहे थे कि यहां हो क्या रहा है? उधर से गुजरने वाला हर आदमी बिना ठिठके आगे नहीं बढ़ रहा था.

इस की वजह यह थी कि शायद माजरा उस की समझ में आ जाए. जब उन्हें सच्चाई का पता चला तो सभी के सभी हक्केबक्के रह गए. एक लड़की, जिस की उम्र 23-24 साल रही होगी, वह एक लड़के का गिरेबान पकड़ कर कह रही थी, ‘‘सर, इस ने मेरी जिंदगी बरबाद कर दी. इस ने मेरे साथ बहुत बड़ा धोखा किया है.’’

इस के बाद उस लड़की ने थाना पुलिस को जो बताया, उस के अनुसार उस लड़के ने फरजी आईपीएस अधिकारी बन कर उसे शादी का झांसा दिया था. काफी समय तक वह उस की इज्जत को तारतार करते हुए उस के भरोसे से खेलता रहा. यही नहीं, शादी करने के नाम पर उस ने उस से लाखों रुपए भी लिए थे.

लड़की को जब लड़के की सच्चाई का पता चला तो उस ने फरार होने की कोशिश की, लेकिन लड़की ने घर वालों की मदद से उसे पकड़ लिया और थाने ले आई. हर मांबाप की यही ख्वाहिश होती है कि वह अपनी औलाद को पढ़ालिखा कर इस काबिल बना दे कि वह खूब तरक्की करे.

ऐसी ही ख्वाहिश याकूब मंसूरी की भी थी. वह अपनी बेटी जेबा को गेट की तैयारी करवा रहे थे. जबकि मुसलमानों में आमतौर पर यही माना जाता है कि लड़कियों को ज्यादा पढ़ालिखा कर उन से नौकरी थोड़ी ही करानी है. लेकिन याकूब मंसूरी की सोच इस के विपरीत थी. वह जेबा को पढ़ालिखा कर कुछ करने के लिए प्रेरित करने के साथसाथ हर तरह से उस की मदद भी कर रहे थे.

जेबा मंसूरी भी अपने वालिद के सपनों को साकार करने में पूरी ईमानदारी से जुटी थी. वह परीक्षा की तैयारी मेहनत से कर रही थी. वह पढ़ने में भी काफी होशियार थी. उसे पूरी उम्मीद थी कि इस साल वह गेट की परीक्षा पास कर लेगी. इस के लिए वह रातदिन मेहनत कर रही थी. लेकिन जो सपने उस ने बुने थे, उस पर समीर खान की नजर लग गई.

मैट्रीमोनियल साइट से हुई दोस्ती

जवान होती लड़की के लिए हर मांबाप की यही ख्वाहिश होती है कि उन की बेटी के लिए किसी भी तरह एक अच्छा सा लड़का मिल जाए. इस के लिए मांबाप लड़के वालों की तमाम तरह की मांगों को पूरी करने की कोशिश भी करते हैं. अच्छे रिश्ते के लिए ही याकूब मंसूरी ने शादी डाटकौम पर बेटी जेबा की प्रोफाइल बनाई थी.

उन्होंने ऐसा बेटी के सुखद भविष्य के लिए किया था. लेकिन हो गया उल्टा. शायद इसीलिए जहां शादी की शहनाई बजनी थी, वहां अब मातम पसरा था. समाज में आज इतना बदलाव आ गया है कि लड़केलड़कियां अपनी पसंद से शादी करने लगे हैं. इस में कोई बुराई भी नहीं है. क्योंकि जब लड़के और लड़की को जीवन भर साथ रहना है तो पसंद भी उन्हीं की होनी चाहिए.

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इसीलिए अब परिचय सम्मेलन आयोजित किए जाने लगे हैं. इस से सब से बड़ा फायदा यह हुआ है कि लड़के के साथ लड़की को भी अपनी पसंद का जीवनसाथी मिल जाता है. चूंकि जमाना हाइटेक हो चुका है, इसलिए अब विवाह के लिए जीवनसाथी तलाशने का काम औनलाइन भी होने लगा है. कई प्लेटफार्म लोगों की शादी के लिए अच्छा जरिया बन गए हैं.

जेबा मंसूरी ने थाना अशोका गार्डन पुलिस को जो तहरीर दी थी, उस के अनुसार शादी के नाम पर उस के साथ धोखा हुआ था. जेबा ने नए साल में अपने लिए तरहतरह के जो अरमान पाले थे, नए साल के कुछ दिनों पहले ही उस के साथ जो हुआ, उस से उस के सारे अरमान एक ही झटके में चकनाचूर हो गए.

उस ने क्या सोचा था और उस के साथ क्या हो गया. शादी के नाम पर उस लड़के ने उस के साथ बहुत भयानक खेल खेला था, जिसे वह चाह कर भी इस जनम में नहीं भुला पाएगी. जेबा ने जो शिकायत दर्ज कराई है, उस के अनुसार उस के शादी के नाम पर धोखा खाने की कहानी कुछ इस प्रकार है—

जेबा प्रतियोगी परीक्षा गेट की तैयारी कर रही थी. जवान होती बेटी की शादी के लिए पिता याकूब मंसूरी ने शादी डाटकौम पर प्रोफाइल बना दी थी. शादी डाटकौम के जरिए शादी के लिए उस की प्रोफाइल पर एक रिक्वेस्ट आई. रिक्वेस्ट में दिए मोबाइल नंबर पर याकूब मंसूरी ने बात की.

इस बातचीत में उस ने अपना नाम समीर खान बताया था. उस ने बताया कि वह चेन्नई में सीबीआई में बतौर अंडरकवर डीएसपी नौकरी करता है. याकूब ने उस के घर वालों से बात करने की इच्छा जाहिर की तो उस ने अपने पिता अनवर खान का नंबर दे दिया. अनवर खान से समीर खान के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि उन का बेटा समीर सीबीआई में अंडरकवर डीएसपी है. फिलहाल उस की पोस्टिंग चेन्नई में है.

बातचीत के लिए जेबा को ले गया होटल में

इस के बाद समीर ने याकूब मंसूरी से जेबा का मोबाइल नंबर यह कह कर मांग लिया कि वह उस से बात करेगा. अगर वह उसे पसंद आ गई तो वह इस जानपहचान को जल्दी ही शादी जैसे खूबसूरत रिश्ते में बदल देगा. याकूब मंसूरी ने समीर की बातों पर विश्वास कर के उसे जेबा का नंबर दे दिया.

अक्तूबर महीने में एक दिन जेबा के मोबाइल पर समीर ने फोन किया. दोनों में काफी देर तक बातें हुईं. दोनों ने एकदूसरे को अपनेअपने घर परिवार और विचारों के बारे में बताया. समीर ने ऐसी लच्छेदार बातें कीं कि जेबा उस के दिखाए सब्जबाग में फंस गई. इस के बाद अकसर उन की बातें होने लगीं. वाट्सऐप पर भी संदेशों का आदानप्रदान होने लगा.

ऐसे में ही एक दिन समीर ने भोपाल आ कर जेबा से मिलने की ख्वाहिश जाहिर की, जिसे वह मना नहीं कर सकी. समीर के भोपाल आने की बात पर एक ओर जहां जेबा खुश हो रही थी, वहीं दूसरी ओर अंजाना सा डर भी सता रहा था. क्योंकि किसी से फोन पर बात करना अलग बात होती है और आमनेसामने मिलना अलग.

लेकिन शादी का मामला था, इसलिए जेबा ने मिलना मुनासिब समझा. आखिर वह समीर को लेने भोपाल रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई.  यह 22 नवंबर, 2017 की बात है. दोनों ने एकदूसरे को देखा तो पहली नजर में ही पसंद कर लिया.

समीर ने जेबा के घर जाने के बजाय उस के साथ स्टेशन से सीधे नूरउससबा पैलेस होटल पहुंचा. जबकि जेबा उसे घर ले जाना चाहती थी. लेकिन समीर की मरजी के आगे उस की एक न चली.

होटल में उस ने डबलबैड कमरा लिया था, जिस में दोनों 2 दिनों तक रुके. इस बीच समीर ने अपने परिवार के बारे में जेबा को खूब बढ़ाचढ़ा कर बताया. उस के बताए अनुसार, उस के परिवार के ज्यादातर लोग सरकारी नौकरियों में हैं. कोई जज है तो कोई इसी तरह की अन्य सरकारी नौकरी में. अपने पिता के बारे में उस ने बताया कि उन का मुंबई में कपड़ों का बहुत बड़ा बिजनैस है, इसलिए वह वहीं रहते हैं. वह बनारस का रहने वाला है, जहां उस की काफी जमीनजायदाद है.

समीर ने पसंद किया जेबा को

अपने घरपरिवार के बारे में बता कर समीर ने जेबा से कहा कि वह उसे पसंद है और उस से शादी के लिए तैयार है. समीर अच्छे घर का लड़का था और सीबीआई में अफसर था, इसलिए जेबा ने भी हामी भर दी. जेबा के हां करते ही समीर उस से छेड़छाड़ करने लगा. इस के बाद सारी मर्यादाएं लांघते हुए उस ने उस के साथ शारीरिक संबंध बना लिए.

जेबा भी उस के बहकावे में आ कर गुनाहों के ऐसे दलदल में जा फंसी, जहां से निकलना किसी भी लड़की के लिए बहुत मुश्किल होता है. भोपाल में 2 दिन रुकने के बाद समीर ने कहा कि औफिशियल काम से उसे दिल्ली जाना है. इस से जेबा को लगा कि वाकई उसे वहां जरूरी काम होगा.

लेकिन बाद में पता चला कि वह सब झूठ था. यह सब जेबा काफी बाद में जान पाई. दिल्ली जाने के बाद समीर ने उसे फोन किया. डरते हुए उस ने बताया कि उन के होटल में रुकने का पता उस के घर वालों को चल गया है, जिस से वे काफी नाराज हैं. उस की बातें सुन कर जेबा शौक्ड रह गई. वह यह क्या कह रहा है, अब क्या होगा, उस की कितनी बदनामी होगी?

समीर ने जेबा को समझाते हुए कहा कि वह बिलकुल परेशान न हो. यह बात भोपाल में किसी को पता नहीं है, सिर्फ उस के घर वालों को ही पता है. इस बात से वे काफी नाराज हैं. लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है. कुछ दिनों में वह सब संभाल लेगा. वह बिलकुल परेशान न हो. वह उन्हें मना लेगा. वह फिर भोपाल आ रहा है. 2 दिन बाद समीर फिर भोपाल आया और नूरउससबा होटल के उसी कमरे में ही रुका. लेकिन इस बार जेबा होटल में उस के साथ नहीं रुकी, लेकिन उस से मिलने रोज आती रही.

अंत में जब समीर ने दबाव डाला तो वह 8 नवंबर से 23 नवंबर तक होटल में रुकी. समीर से उस के शारीरिक संबंध बन ही चुके थे, इसलिए इस बार भी वह उस से शारीरिक संबंध बनाता रहा.

जेबा ने ऐतराज जताया तो उस ने होटल में ही काजी को बुला लिया और उन के सामने कहा कि वह उस से निकाह कर के उसे अपनी बीवी मान रहा है. इस तरह से जेबा का निकाह समीर से हो गया. वह समीर की बीवी बन कर रहने लगी, जबकि उन के इस निकाह का कोई लिखित सबूत नहीं था.

इतने दिनों तक होटल में साथ रुकने के बाद जेबा समीर को अपने मम्मीपापा से मिलवाने के लिए सागर ले गई, जहां मकरोनिया सागर में उस का पुश्तैनी मकान था. वहां भी वह अपनी लच्छेदार बातों के जाल में फंसा कर जेबा के घर वालों के सामने एक अच्छा लड़का बना रहा. याकूब मंसूरी और उन की पत्नी को भी समीर पसंद आ गया था. अब इस रिश्ते में कोई अड़चन नहीं थी. कुछ समय तक सागर में रुक कर दोनों भोपाल लौट आए. समीर भोपाल स्थित जेबा के घर पर भी कई दिनों तक रुका. वहां भी दोनों ने जिस्मानी रिश्ते बनाए.

ट्रेनिंग के लिए जाने की बात कह कर ठगे लाखों रुपए

समीर ने जेबा के साथसाथ उस के घर वालों को भी इस बात का पक्का यकीन दिला दिया था कि वह सीबीआई में अंडरकवर डीएसपी है और उस का सिलेक्शन आईपीएस के रूप में हो गया है, जिस की ट्रेनिंग हैदराबाद में होनी है. आईपीएस की ट्रेनिंग पर वह इसलिए नहीं जा पा रहा था, क्योंकि किसी वजह से स्टे लगा था. लेकिन अब स्टे हट गया है, इसलिए उसे ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जाना है.

ऐसे में ही जेबा ने उस से पूछ लिया कि वह वरदी क्यों नहीं पहनता तो उस ने कहा कि वह सीबीआई अफसर है, इसलिए उसे पहचान छिपा कर रखनी पड़ती है. जब कभी औफिस जाना होता है तो वह वरदी पहनता है.

जेबा के कहने पर एक दिन समीर ने उसे आईपीएस की वरदी पहन कर दिखाते हुए कहा कि जब कभी औफिशियल मीटिंग होती है, तब वह यह वरदी पहन कर जाता है. जेबा को उस वरदी पर संदेह हुआ, क्योंकि उस पर सीनियर अफसरों के बैज लगे थे. इस के बाद समीर ने उसे सील लगे हुए कई दस्तावेज दिखाए.

एक दिन समीर परेशान सा सोफे पर चुपचाप बैठा था. जेबा ने परेशानी की वजह पूछी तो उस ने धीमी आवाज में कहा, ‘‘क्या बताऊं, मुझे ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद जाना है, जिस के लिए काफी पैसों की जरूरत है. होटल में मिलने को ले कर पापा अभी तक नाराज हैं, इसलिए उन से किसी तरह की मदद की उम्मीद नहीं है. अब परेशानी यह है कि ट्रेनिंग का खर्च कहां से आएगा.’’

समीर की बातों में आ कर जेबा ने कहा, ‘‘आप परेशान मत होइए, मैं आप के लिए पैसों का इंतजाम कर दूंगी.’’

समीर मना करता रहा, इस के बावजूद कई बार में जेबा ने तकरीबन 2 लाख रुपए उसे दे दिए. क्योंकि उसे कभी उस पर संदेह नहीं हुआ था.

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परिवार से मिलवाने की बात को टाल जाता था

जब भी जेबा समीर से घर वालों के बारे में पूछती या मिलवाने की बात कहती, वह कोई न कोई बहाना बना कर टाल जाता. जेबा को उस से मिले करीब 2 महीने हो गए थे, लेकिन उस ने अपने मम्मीपापा से मिलवाने की कौन कहे, फोन पर बात तक नहीं करवाई थी.

इन्हीं बातों से जेबा को उस पर शक होने लगा. संदेह गहराया तो उस ने अपने पापा से समीर के बारे में पता करने को कहा. उस ने और उस के मम्मीपापा ने समीर से उस की नौकरी और पढ़ाई के कागजात मांगे तो वह टालमटोल करने लगा. याकूब मंसूरी ने अपने कई परिचितों को समीर के बारे में पता करने के लिए लगा दिया. नतीजा यह निकला कि उस की असलियत का पता चल गया.

समीर को पता नहीं कैसे भनक लग गई कि उस की पोल खुल गई है. वह अपना बैग ले कर घर से भागने की फिराक में था, तभी जेबा ने कहा, ‘‘समीर, हमें तुम्हारी असलियत का पता चल गया है. अब मैं तुम्हें पुलिस के हवाले करूंगी, जिस से तुम्हारी जिंदगी जेल में कटेगी.’’

समीर डर गया. उस ने कहा, ‘‘अगर तुम लोगों ने मेरी शिकायत पुलिस में की तो मैं तुम सभी को जान से मार दूंगा.’’

लेकिन उस की इस धमकी से न जेबा डरी और न उस के मम्मीपापा. याकूब मंसूरी ने अपने दोस्तों की मदद से समीर को पकड़ लिया और थाना अशोका गार्डन ले गए, जहां वह खुद को पुलिस अधिकारी होने का भरोसा दिलाता रहा और वादा करता रहा कि जेबा से ही शादी करेगा.

लेकिन शादी का झांसा दे कर शारीरिक शोषण करने के साथ लाखों रुपए ऐंठने वाले समीर की असलियत जेबा को पता चल गई थी, इसलिए उस ने उस की किसी बात पर भरोसा नहीं किया. मामले की नजाकत को भांपते हुए अशोका गार्डन पुलिस ने समीर को तुरंत हिरासत में ले लिया.

समीर को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने याकूब मंसूरी के घर में रखे उस के बैग को कब्जे में ले कर तलाशी ली तो उस में से राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, सीबीआई सहित कई संस्थानों की फरजी मोहरें मिलीं. यही नहीं, उस के पास से डीआईजी रैंक के पुलिस अधिकारी की वरदी भी मिली. समीर ने एक गलती यह की थी कि उस ने जो वरदी खरीदी थी, वह डीआईजी रैंक के पुलिस अधिकारी की थी. 3 स्टार और अशोक चक्र लगी वरदी को पुलिस ने कब्जे में ले लिया था. पूछताछ में उस ने बताया कि यह वरदी उस ने बिहार के भागलपुर से खरीदी थी.

शातिर दिमाग है ठग समीर खान

एएसपी हितेश चौहान के अनुसार, समीर अनवर खान बहुत ही शातिर दिमाग था. उस ने बड़ी चालाकी से शादी डाटकौम पर अपनी प्रोफाइल बना कर जेबा मंसूरी जैसी पढ़ीलिखी लड़की को अपने जाल में फांस लिया था. बाद में पता चला कि उस ने ऐसा ही कारनामा पंजाब में किया था. मध्य प्रदेश पुलिस ने पंजाब पुलिस से जानकारी हासिल की तो पता चला कि ऐसे ही मामले में वह वहां भी गिरफ्तार किया गया था. जमानत पर रिहा होने के बाद वह फरार हो गया था.

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ के अनुसार, समीर मूलरूप से उत्तर प्रदेश के जिला वाराणसी का रहने वाला था. उस ने दिखावे के लिए एमटेक में अप्लाई कर रखा था. उस के पिता मुंबई में झुग्गीझोपड़ी में रहते थे और फेरी में कपड़े बेच कर गुजरबसर करते थे. उस ने जेबा से बताया था कि वाराणसी में उस की तमाम जमीनजायदाद है, लेकिन यह सब झूठ था.

मजे की बात यह थी कि उस ने पंजाब में जो धोखाधड़ी की थी, उस में उस ने 40-50 लाख रुपए की चपत लगाई थी. लेकिन कहीं से भी नहीं लगता था कि इतना पैसा उस के पास होगा.

थाना अशोका गार्डन पुलिस ने समीर के खिलाफ भादंवि की धारा 170, 419, 420, 471, 472, 473, 376 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया था. कथा लिखे जाने तक समीर पुलिस रिमांड पर था. पुलिस उस से कई पहलुओं पर पूछताछ कर रही थी. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में समीर ने जो बताया है, उस से जाहिर होता है कि वह छोटामोटा अपराधी नहीं है.

होटल प्रबंधन को भी लगाया लाखों का चूना

समीर कितना शातिरदिमाग है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह भोपाल के सब से मशहूर होटल नूरउससबा में 2 नवंबर, 2017  से 23 नवंबर, 2017 तक लड़की के साथ रुका रहा, लेकिन होटल प्रबंधन को उस की कारगुजारियों की तनिक भी भनक नहीं लगी. वह इतने बड़े होटल को लाखों का चूना लगा कर रफूचक्कर हो गया था.

अच्छा हुआ कि वक्त रहते जेबा मंसूरी को उस पर शक हो गया, वरना हाथ से निकलने के बाद फिर शायद ही कभी वह चंगुल में फंसता. नूरउससबा पैलेस होटल में 20 दिनों से ज्यादा रहने के बाद भी वह पैसे दिए बिना  वहां से फरार हो गया था. होटल प्रबंधन के बताए अनुसार, 2 नवंबर से 23 नवंबर, 2017 तक होटल में रहने और खानेपीने का बिल 2 लाख 15 हजार 311 रुपए बना था.

समीर ने चालाकी से काम लेते हुए होटल प्रबंधन को भरोसे में लेने के लिए 20 हजार रुपए एडवांस जमा करा दिए थे. उसे वहां 24 नवंबर तक रुकना था, लेकिन एक दिन पहले ही वह अपना बोरियाबिस्तर समेट कर वहां से चलता बना.

पंजाब में आईएएस बन कर कर चुका है फरजीवाड़ा

समीर के बताए अनुसार, उस ने पंजाब के कपूरथला में भी एक बीएससी की छात्रा के साथ जालसाजी की थी. वहां भी उस ने कुछ ऐसी ही कहानी गढ़ी थी. उस ने वहां बताया था कि उस का सिलेक्शन आईएएस में हो गया है. इस तरह उस के बहकावे में आ कर उस लड़की ने समीर से सन 2016 में निकाह कर लिया था. वहां उस ने अपना नाम शमशेर बताया था.

जब फरजी आईएएस का झूठ सामने आया तो कपूरथला के थाना फगवाड़ा पुलिस ने जनवरी, 2016 में शमशेर के खिलाफ धोखाधड़ी, दहेज अधिनियम और धमकाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर के उसे गिरफ्तार कर लिया था. शमशेर उर्फ समीर वहां 2 महीने तक जेल में बंद रहा. उस की दादी ने जमानत कराई तो जेल से बाहर आते ही वह फरार हो गया.

अब देखना यह है कि मध्य प्रदेश के साथसाथ पंजाब पुलिस समीर उर्फ शमशेर को धोखाधड़ी, पैसे ऐंठने, शारीरिक शोषण और फरजी पदों का गलत इस्तेमाल करने के अपराध में कितनी सजा दिलवा सकती है. पुलिस यह भी पता कर रही है कि यह काम समीर अकेला ही करता था या उस के साथ और कोई भी था.

एक्ट्रेस ने बेटे संग कराया बिकनी फोटोशूट

बोल्‍ड फोटोज को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाली बौलीवुड अदाकारा लीजा हेडन एक बार फिर अपने फोटोशूट की वजह से चर्चा में हैं. इस बार उन्होंने अपने बेटे जैक के साथ बिकनी पहनकर अंडर वाटर फोटोशूट कराया है. अपनी इन तस्वीरों को उन्होंने सोशलमीडिया पर पोस्ट किया है. लेकिन लगता है कि ये तस्वीरें लोगों को जरा भी पसंद नहीं आई है. तभी तो लोग उन्हें इस तस्वीरों को लेकर ट्रोल कर रहे हैं.

ताजा फोटो में वह अपने एक साल के बच्चे के साथ पानी के अंदर इंज्वाय करती नजर आ रही हैं. उन्होंने बच्चे के साथ अंडरवाटर फोटोशूट कराया है. इस तस्वीर को देखने के बाद कुछ यूजर्स ने लीजा हेडन की आलोचना की तो कुछ ने उनकी तारिफ की है. यूजर्स ने लीजा को इस तरह बच्‍चे के साथ पानी में नहीं जाने की नसीहत दी है. उनका कहना है कि अपने फोटोशूट के चक्कर में वह बच्चे की जान लेने पर उतारू हैं. कुछ ने इस फोटोशूट को बच्चे के लिए खतरनाक बताया. वहीं एक यूजर ने लिखा ‘एक मां और महिला के रूप में आप प्रेरणा हैं’, वहीं अन्य यूजर ने कमेंट किया, ‘मैं भी अपने बच्चे के साथ ऐसी तस्वीर खिंचवाना चाहती हूं.

हालांकि, लीजा हेडन ने फोटो के साथ यह जानकारी भी दी थी कि स्वीमिंग क्लास के दौरान यह फोटोशूट कराया गया है और कई मां ने भी अपने बच्चे के साथ ऐसी तस्वीरें खिंचवाई हैं.

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बता दें कि इन दिनों लीजा फिल्मों से दूर अपना ज्यादा से ज्यादा वक्त बेटे जैक के साथ बिता रही हैं. वह अक्सर सोशल मीडिया पर अपने बेटे के साथ तस्वीरें पोस्ट करती हैं. बता दें कि इससे पहले भी लीजा अपनी प्रेगनेंसी के दौरान फोटोशूट के चलते सुर्खियों में रह चुकी हैं. लीजा ने अपने ब्वायफ्रेंड डिनो लालवानी से शादी की है. साल 2010 में उन्होंने सोनम कपूर की फिल्म ‘आयशा’ से बौलीवुड में एंट्री की थी. इसके अलावा वह फिल्म ‘क्वीन’, ‘शौकीन्स’ और ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में नजर आ चुकी हैं. लीजा हेडन ने माडलिंग से करियर की शुरुआत की थी.

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किराएदार-मकानमालिक

संपत्ति का अधिकार मुख्य मौलिक अधिकार है हालांकि एक संविधान संशोधन में इसे हलका करने की कोशिश की गई थी. यह अधिकार ही असल में अन्य अधिकारों का आधार है क्योंकि यदि संपत्ति न हो तो जेल हो या न हो, क्या फर्क पड़ता है. संपत्ति न हो तो जेल ही न होती. संपत्ति न हो तो कौन संस्थाएं बना सकेगा? यहां तक कि धर्म की दुकानें भी संपत्ति के अधिकार पर ही तो चल सकती हैं.

संपत्ति के इस अधिकार को पिछले 70-75 सालों से किराए कानूनों के माध्यम से छीना जा चुका है. देशभर में लाखों मकानमालिक अपने हक को खुल्लमखुल्ला किराएदार द्वारा खाता देख रहे हैं और सरकार किराएदार का समर्थन कर रही है. दिल्ली में एक कानून वर्षों से बना पड़ा है पर लागू नहीं हो रहा क्योंकि किराएदार दुकानदारों की धौंस चल रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में हरियाणा के बहादुरगढ़ के एक ऐसे विवाद में किराएदार को खंडहर होती दुकान में रहते रहने का आदेश दे दिया और 20 सालों से लड़ रहे मकानमालिक को रास्ता नपवा दिया. सुप्रीम कोर्ट चाहता तो इस फालतू के कानून को अलविदा कह सकता था.

मकानों में अचानक कमी आए तो किराएदार सुरक्षा कानून बनाने का औचित्य होता है पर जब मकान बने हों और किराएदार न मिल रहे हों तो किराया कानून निरर्थक हो जाता है. यह किराएदार के लिए असुरक्षित हो जाता है क्योंकि कानून संरक्षित सस्ते मकान में रह कर वह पुराने खंडहर में ही बना रहता है और नया जोखिम नहीं लेता.

सभी शहरों के पुराने व मैले इलाकों में ऐसे किराएदारों की भरमार है जो सस्ते किराए के मोह में बदबूदार इलाकों में बने रहते हैं. यह कानून न होता तो वे कब के बाहर निकल कर अच्छे मकानों में चले जाते. इन इलाकों में किराएदारों की वजह से अरबोंखरबों की संपत्तियां खाली पड़ी हैं. इतनी की ही संपत्तियां रखरखाव के अभाव में गिरने की हालत में हैं. पर सस्ते, सुरक्षित किराएदारों को अपनी संपत्तियों से निकालने की जहमत मकानमालिक उठाना नहीं चाहते.

जो मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे उन में तो मकानमालिकों को आधीपौनी राहत मिलनी ही चाहिए. सुप्रीम कोर्ट तक वही मकानमालिक जाएगा जो अपने हक को वाजिब समझता होगा.

VIDEO : मरीन नेल आर्ट

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