

आज जमाना बदल गया है और जमाने के हिसाब से लोग भी बदल गए हैं. लड़के, लड़कियों के बीच एक समय तक पर्दा होता था. लड़कियां खुलकर अपनी कोई बात तक शेयर नहीं करतीं थीं, लेकिन आज देखिए कैसे एक लड़की के मुंह से वो सारे शब्द निकल जाते हैं जो भला लड़के के मुंह के क्या निकले हैं, जी हां ये हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि एक लड़की का वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, इस वीडियो में लड़की एक लड़के से ऐसे कुछ शब्द बोल रही है जिसे सुनने के बाद आपको शर्म आ जाएगी.
दरअसल वीडियो में लड़की जब लड़के से कहती है कि मेरी ब्रा का हुक बंद कर दो तो लड़का शर्म के मारे लाल हो जाता है, लेकिन वीडियो में तो अभी ट्विवस्ट बाकी है. लड़की फिर यहीं नहीं रुकती है, बल्कि राह चलते हर शख़्स से यही सवाल कर रही है कि क्या आप मेरी ब्रा…खोल देंगे?
लड़की सड़क पर चलते लड़कियों को भी नहीं छोड़ रही है, एक दो नहीं बल्कि, कई लोगों से सिर्फ यह कह रही है. इस वीडियो को देखने के बाद आप हंसी के मारे पागल हो जाएंगे. इस लड़की का एक ही शब्द आपको पागल कर देगा कि ‘क्या आप मेरी ब्रा का हुक बंद कर देंगे?’
आप भी देखिए यह मजेदार वीडियो
कोढ़ बीमारी के शिकार ज्यादातर वे लोग होते हैं जो निचले सामाजिक और माली तबके से आते हैं. इस बीमारी के बैक्टीरिया हवा द्वारा ज्यादा फैलते हैं. पीडि़त शख्स की चमड़ी को छूने, उस के छींकने, खांसने या थूकने से यह बीमारी सेहतमंद आदमी को भी अपनी चपेट में ले लेती है.
कोढ़ होने की वजह
यह बीमारी माइक्रोबैक्टीरियम लैप्री की वजह से होती है जो सब से पहले तंत्रिका तंत्र पर हमला करती है. इस से चमड़ी और पैरों की तंत्रिकाओं पर खासतौर पर असर होता है और इन में सूजन आ जाती है. तंत्रिकाएं अक्रियाशील हो जाती हैं जिस के चलते उस हिस्से की चमड़ी सुन्न हो जाती है.
जहांजहां तंत्रिकाएं प्रभावित होती
हैं वहां की मांसपेशियों की ताकत भी धीरेधीरे कम होने लगती है. बहुत ज्यादा भीड़भाड़ और गंदगी इस बीमारी को फैलाने में मदद करती है.
जिन लोगों में बीमारियों से लड़ने की ताकत ज्यादा होती है उन में इस बीमारी के बढ़ने का खतरा कम होता है या उन के शरीर के कम हिस्सों की तंत्रिकाएं ही प्रभावित होती हैं. इन मरीजों की बीमारी को ट्यूबरक्लौयड लैप्रोसी कहते हैं, पर ऐसे मरीज दूसरे लोगों के लिए संक्रमणकारी नहीं हैं.
ऐसे लोग जिन में बीमारी से लड़ने की ताकत कम होती है, वे इस बीमारी को फैलाने वाले बैक्टीरिया से बेहतर तरीके से नहीं लड़ पाते हैं. इस के चलते यह बीमारी बहुत ज्यादा फैल जाती है.
कोढ़ के लक्षण
इस की एक दशा ट्यूबरक्लौयड में मरीज के शरीर का एक या एक से ज्यादा हिस्सा सुन्न हो जाता है. ऐसे हिस्सों की चमड़ी सूखी हो जाती है और वहां पिगमैंटेशन कम हो जाता है जिस से इन हिस्सों की चमड़ी हलके रंग की हो जाती है या कभीकभी लाल व मोटी हो सकती है. कई बार इन जगहों के बाल भी झड़ जाते हैं. वहां की तंत्रिकाएं फूल जाती हैं. उन का आकार बढ़ जाता है और उन में दर्द भी होता है.
दूसरे किस्म के कोढ़ लैप्रोमैटस लैप्रोसी में चमड़ी का ज्यादा भाग शामिल हो जाता है और पूरे शरीर की तंत्रिकाओं पर बुरा असर पड़ता है जिस से वे हिस्से सुन्न हो जाते हैं. सुन्न होने के चलते बारबार फोड़े होते हैं और जलन होती है. ऐसे मरीज को उस की चमड़ी के सुन्न होने के चलते कुछ महसूस नहीं होता है, लेकिन बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती जाती है. इस वजह से हाथपैरों की उंगलियां छोटी हो जाती हैं.
इस बीमारी में चमड़ी का खराब होना और मांसपेशियों का कमजोर हो जाना जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं. बैक्टीरिया के संक्रमण के बाद यह बीमारी अंदर ही अंदर पनपती रहती है और बाहरी तौर पर इस के लक्षण 2 से 7 साल बाद दिखाई देते हैं. कई लोगों में तो ये लक्षण 20 साल बाद दिखाई देते हैं.
संक्रमण होने और लक्षण दिखाई देने के बीच के समय को इनक्यूबेशन पीरियड कहते हैं इसलिए डाक्टरों के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि मरीज कब और कहां संक्रमण की चपेट में आया था. बच्चों में बड़ों की तुलना में संक्रमण होने का डर ज्यादा होता है.
डरें नहीं कोढ़ से
कोढ़ के मरीज आमतौर पर तब तक बहुत बीमार नहीं दिखाई देते हैं जब तक कि उन का शरीर प्रतिक्रिया नहीं दिखाता है. प्रतिक्रिया उन लोगों में एक अच्छा लक्षण हो सकता है जिन का इलाज चल रहा है जो यह दिखाता है कि उन की बीमारी में सुधार हो रहा है. उन के प्रभावित हिस्सों में लालपन हो सकता है या सूजन आ सकती है. उस हिस्से की तंत्रिकाएं फूल जाती हैं और उन में दर्द भी हो सकता है. यह इस बात का संकेत हो सकता है कि बीमारी ठीक हो रही है या और गंभीर हो रही है.
यह प्रतिक्रिया इरीथेमा नोडोसम लैप्रोसम कहलाती है. मरीज को बुखार भी आ सकता है, उत्तेजना, दर्दभरी सूजन हो सकती है, पूरे शरीर या जोड़ों में दर्द हो सकता है.
हालांकि इस बीमारी का इलाज लंबा चलता है, लेकिन यह सौ फीसदी ठीक हो जाती है.
आज भी देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा तंत्रमंत्र, झाड़फूंक के मकड़जाल में जकड़ा हुआ है. नतीजतन, आज भी देश तरक्की की दौड़ में काफी पिछड़ा हुआ है.
पाखंड के जाल में उलझी हुई जनता की इसी सोच का फायदा उठा कर देश के कई प्रकाशक अंधविश्वास फैलाने वाली किताबों के कारोबार में लगे हुए हैं. इन किताबों की कीमत भी उस की असली लागत से कई गुना ज्यादा होती है. इस के बावजूद इन किताबों को खरीदने वालों की तादाद करोड़ों में है.
अंधविश्वास फैलाने वाली इन किताबों से बाजार अटा पड़ा है. ‘इंद्रजाल के चमत्कार’, ‘वशीकरण मंत्र’, ‘महाइंद्रजाल’, ‘बंगाल का जादू’, ‘काली किताब’, ‘असम का काला जादू’ वगैरह नामों से बिकने वाली इन किताबों के चलते पोंगापथियों को बढ़ावा मिल रहा है क्योंकि इन किताबों में तंत्रमंत्र, झाड़फूंक, टोनाटोटका के नाम पर लोगों के मन में डर बैठाने व वहम पैदा कर ठगी करने के कई सारे तरीके बताए गए हैं, जिस के चलते देश में कई तरह के अपराध भी होते रहते हैं.
बेसिरपैर की बातें
एक शख्स ने बताया कि वह एक लड़की से बेइंतिहा एकतरफा प्यार करता है. उस ने कई बार उस लड़की को पटाने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुआ. ऐसे में एक दिन उसे किसी ने बताया कि ‘महागुरु के टोटके’ नाम की एक किताब खरीद लो. उस में औरतों को वश में करने के कई सारे टोटके दिए गए हैं.
उस शख्स ने वह किताब खरीद ली और दिए गए कई उपायों में से एक उपाय, जिस में श्मशान की राख में अपना थूक व वीर्य मिला कर उस लड़की को खिलाने की बात की गई थी, अपनाया.
उस शख्स ने किताब में बताए गए नुसखे के मुताबिक ही काम किया और जब वह श्मशान की राख, जिस में अपना वीर्य व थूक मिला कर वह उस लड़की के पास पहुंचा और बोला कि यह चमत्कारी राख है. इसे खाने से तुम्हारी खूबसूरती में चार चांद लग जाएंगे.
वह लड़की उस शख्स की बातों में आ कर उस राख को खाने जा रही थी लेकिन राख को नाक के पास ले जाने पर उस में से अजीब सी बदबू आई जिसे ले कर उस को कुछ शक हो गया.
उस लड़की ने उस शख्स से मीठीमीठी बातें कर के उस राख की सचाई उगलवा ही ली. उस के बाद उस लड़की ने उन महाशय की जम कर धुनाई की और धमकी भी दी कि दोबारा उस ने उस के पास फटकने की कोशिश भी की तो वह पुलिस में शिकायत कर देगी.
तंत्रमंत्र, टोनेटोटके की जितनी भी किताबें बाजार में बिक रही हैं, उन का न कोई वैज्ञानिक आधार होता है और न ही उन किताबों में लिखी बातों में कोई सचाई होती है.

दिल्ली के बड़े प्रकाशन से छपी एक किताब में औरतों को वश में करने का एक उपाय लिखा है कि रविवार के दिन चील की आंख ला कर उस में केसर और कस्तूरी मिला कर उसे पीस कर औरत को खिलाने से वह वश में हो जाती है.
इस तरह की बेकार की बातों में लोग फंस कर ऐसा कर भी बैठते हैं और ये बातें झूठी साबित होने के बाद भी अंधविश्वास की जकड़ से बाहर नहीं निकल पाते हैं.
अपराध को बढ़ावा
तंत्रमंत्र, टोनेटोटके के नाम पर बिकने वाली इन किताबों से अपराध को जन्म देने वाली वारदातें बढ़ जाती हैं, क्योंकि जो लोग झाड़फूंक व भूतप्रेत जैसी बेकार की बातों में यकीन रखते हैं, वे इन लिखे उपायोें के आधार पर धोखाधड़ी, नरबलि, ब्लैकमेलिंग, यहां तक कि बच्चा पैदा करने के नाम पर रेप जैसी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं.
2 साल पहले नरबलि के मामले में पकड़े गए एक शख्स ने जब नरबलि दिए जाने की वजह बताई तो वह बेहद चौंकाने वाली थी. उस ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उस ने तंत्रमंत्र और झाड़फूंक की एक किताब खरीदी थी जिस में जमीन में गड़े धन को पाने का उपाय लिखा था.
उस शख्स ने उस किताब में बताए गए उपाय के मुताबिक अपने पड़ोस के बच्चे की बलि दे दी.
सुबह जब उस बच्चे के परिवार वाले गांव के बाहर पहुंचे तो वह शख्स बदहवास हालत में एक गड्ढा खोदने में लगा था और पास में उस बच्चे की सिर कटी लाश पड़ी हुई थी.
गांव के लोगों ने इस घटना की जानकारी पुलिस को दी. पुलिस द्वारा पकड़े जाने पर उस शख्स ने नरबलि दिए जाने की बात कबूल ली.
इस घटना से यह जाहिर होता है कि तंत्रमंत्र की किताबें कितनी खतरनाक होती हैं. अंधविश्वासी लोग ऐसी किताबों में लिखी बातों पर आसानी से विश्वास कर उन में बताए गए उपाय अपना कर खुद के साथसाथ अपने परिवार और दूसरों का भी नुकसान कर बैठते हैं.
जहां देश का पूरा किताब बाजार अंधविश्वास, तंत्रमंत्र और पोंगापंथ की किताबों से भरा पड़ा है, वहीं दिल्ली प्रैस ने देश की कई भाषाओं में प्रकाशित होने वाली अपनी अलगअलग पत्रिकाओं के जरीए लोगों में जागरूकता बढ़ाने का काम किया है.
आजादी के पहले दिल्ली प्रैस ने अंगरेजी पत्रिका ‘द कैरवान’ के जरीए लोगों में सामाजिक चेतना जगाने का जो काम शुरू किया था वह आज ‘सरस सलिल’, ‘सरिता’, ‘मुक्ता’, ‘चंपक’, ‘गृहशोभा’ जैसी पत्रिकाओं के साथ और भी मजबूत हुआ है.
अंधविश्वास उन्मूलन के मुद्दे पर काम कर रहे प्रवीण गुप्ता का कहना है कि महाराष्ट्र की तर्ज पर पूरे देश में जादूटोना विरोधी कानून बना कर उसे लागू करना चाहिए, जिस से पोंगापंथ के नाम पर होने वाली लूट से जनता को बचाया जा सके.
भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की इस मोस्ट अवेटेड भोजपुरी फिल्म ‘वांटेड’ बहुत ही जल्द सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. इस फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज हो चुका है. ट्रेलर के बाद फिल्म का एक और गाने का औडियो ट्रैक भी यूट्यूब पर रिलीज कर दिया गया. फिल्म ‘वांटेड’ के इस गाने का नाम ‘बिन बियाहे राजाजी’ है, जो लोगों को बेहद पसंद आ रहा है और यही वजह है कि रिलीज होने के बाद इस गाने को अब तक 1,113,296 बार देखा जा चुका है.
ऐसी उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस गाने का वीडियो भी रिलीज किया जाएगा. बता दें, फिल्म के ट्रेलर में पवन सिंह का जबरदस्त एक्शन नजर आ रहा है. ट्रेलर में वह काफी दमदार डायलौग भी बोलते दिख रहे हैं. जैसे, ‘आंख कमजोर और लाचार लोग दिखाते हैं मंत्रीजी, हम लोगों को उनकी औकात दिखाते हैं’ और ‘इस हनुमान ने सिर्फ अशोक वाटिका उखाड़ा है, अभी लंका दहन बाकी है.’ पवन सिंह अपने एक्शन अंदाज में नजर आ रहे हैं और हैरतअंगेज एक्शन के साथ कहर ढाह रहे हैं. इसमें कोई शक नहीं कि फिल्म में पवन सिंह के डायलौग भी काफी जोरदार है.
फिल्म के ट्रेलर की बात करें तो इसमें पवन सिंह एक्शन मूड और दमदार किरदार में दिख रहे है. साल 2018 में पवन सिंह की यह पहली फिल्म है. इसको लेकर पवन सिंह ने कहा, “फिल्म ‘वांटेड’ बेहद उम्दा कांसेप्ट पर बनी फिल्म है, जिसमें एक्शन के अलावा रोमांस भी दिखेगा, वो भी भोजपुरिया स्टाइल में. मुझे फिल्म से काफी उम्मीदें हैं और अपने चाहने वालों पर भी भरोसा है कि वो मुझे अपना प्यार पहले की ही तरह देंगे.”
सुबह का वक्त था. उत्तरपूर्वी दिल्ली की दिलशाद कालोनी में रहने वाले संजीव शर्मा चाय की चुस्कियां लेते हुए अखबार पढ़ रहे थे, तभी उन के पड़ोसी नदीम ने उन्हें खबर दी कि उन के स्कूल का गेट खुला हुआ है और अंदर पुकारने पर गार्ड देवीलाल भी जवाब नहीं दे रहा है.
संजीव शर्मा का एच-432, ओल्ड सीमापुरी में बाल कौन्वेंट स्कूल था. देवीलाल उन के स्कूल में रात का सुरक्षागार्ड था. शर्माजी ने रहने के लिए उसे स्कूल में ही एक कमरा दे दिया था.
नदीम की बात सुन कर संजीव कुमार शर्मा उस के साथ अपने स्कूल की तरफ निकल गए. संजीव शर्मा जब अपने स्कूल में देवीलाल के कमरे में गए तो वहां लहूलुहान हालत में देवीलाल की लाश पड़ी थी. उस के सिर तथा दोनों हाथों से खून निकल रहा था.
यह खौफनाक मंजर देख कर संजीव कुमार शर्मा और नदीम के होश फाख्ता हो गए. संजीव शर्मा ने उसी समय 100 नंबर पर फोन कर के वारदात की सूचना पुलिस को दे दी. यह इलाका चूंकि सीमापुरी थानाक्षेत्र में आता है, इसलिए थाना सीमापुरी के एसआई आनंद कुमार और एसआई सौरभ घटनास्थल एच-432, ओल्ड सीमापुरी पहुंच गए. तब तक वहां आसपास रहने वाले कई लोग पहुंच चुके थे.
पुलिस ने एक फोल्डिंग पलंग पर पड़ी सिक्योरिटी गार्ड देवीलाल की लाश का निरीक्षण किया तो उस के सिर पर चोट थी. ऐसा लग रहा था जैसे उस के सिर पर कोई भारी चीज मारी गई हो. इस के अलावा उस की दोनों कलाइयां कटी मिलीं.
बिस्तर के अलावा फर्श पर भी खून ही खून फैला हुआ था. कमरे में रखी दोनों अलमारियां खुली हुई थीं. काफी सामान फर्श पर बिखरा हुआ था. हालात देख कर लूट की संभावना भी नजर आ रही थी.
इसी कमरे की मेज पर शराब की एक बोतल व 2 गिलास तथा बचा हुआ खाना भी मौजूद था. एसआई सौरभ ने यह सूचना थानाप्रभारी संजीव गौतम को दे दी. हत्याकांड की सूचना पा कर थानाप्रभारी संजीव गौतम पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे.
घटनास्थल का मौकामुआयना करने के बाद थानाप्रभारी इस नतीजे पर पहुंचे कि हत्यारा स्कूल में मित्रवत दाखिल हुआ था और उस ने मृतक के साथ शराब भी पी थी. इसलिए उस की हत्या में उस का कोई नजदीकी ही शामिल हो सकता है. खुली अलमारी और बिखरा सामान लूट की तरफ इशारा कर रहा था.
स्कूल मालिक संजीव शर्मा ने बताया कि देवीलाल जम्मू का रहने वाला था. पिछले 2 साल से वह उन के स्कूल में रात को सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम कर रहा था. थानाप्रभारी ने मौके पर क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम बुला कर गिलास तथा शराब की खाली बोतल से फिंगरप्रिंट्स उठवा लिए.
मौके की काररवाई निपटाने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए जीटीबी अस्पताल भेज दिया. फिर स्कूल मालिक संजीव शर्मा की तहरीर पर गार्ड देवीलाल उर्फ दीनदयाल की हत्या का मामला दर्ज करवा दिया.
थानाप्रभारी संजीव गौतम ने इस केस की तफ्तीश इंसपेक्टर (इनवैस्टीगेशन) जे.के. सिंह को सौंप दी. उन्होंने डीसीपी नूपुर प्रसाद, एसीपी रामसिंह को भी घटना के बारे में अवगत करा दिया.
डीसीपी नूपुर प्रसाद ने इस हत्याकांड का खुलासा करने के लिए एसीपी रामसिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की, जिस में आईपीएस हर्ष इंदोरा, थानाप्रभारी संजीव गौतम, अतिरिक्त थानाप्रभारी अरुण कुमार, इंसपेक्टर (इनवैस्टीगेशन) जे.के. सिंह, स्पैशल स्टाफ के इंसपेक्टर हीरालाल, एसआई मीना चौहान, एएसआई आनंद, कांस्टेबल प्रियंका, वीरेंद्र, संजीव आदि शामिल थे.
टीम ने जांच शुरू की और स्कूल के प्रिंसिपल तथा मालिक संजीव कुमार शर्मा से मृतक गार्ड देवीलाल की गतिविधियों के बारे में विस्तार से पूछताछ की तो उन्होंने बता दिया कि गार्ड देवीलाल सीमापुरी की ही एक ट्रैवल एजेंसी में पिछले 20 सालों से गार्ड की नौकरी कर रहा था.

इस के बीवीबच्चे जम्मू के गांव गुडि़याल में रहते हैं. पिछले 2 सालों से वह उन के स्कूल में नौकरी कर रहा था. चूंकि उस की ड्यूटी रात की थी, इसलिए उन्होंने रहने के लिए स्कूल में ही उसे एक कमरा दे दिया था.
संजीव शर्मा से बात करने के बाद पुलिस ने स्कूल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को भी खंगाला. मगर उस से पुलिस को कोई भी सुराग नहीं मिला. क्योंकि स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरे केवल दिन के वक्त चालू रहते थे. शाम होने पर उन्हें बंद कर दिया जाता था.
कहीं से कोई सुराग न मिलने पर पुलिस ने मृतक के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स का अध्ययन किया गया तो पुलिस की निगाहें मृतक के फोन पर आई अंतिम काल पर अटक गईं. उस नंबर पर गार्ड की पहले भी बातें हुई थीं और 3 मार्च, 2018 की रात साढ़े 10 बजे लोकेशन उस फोन नंबर की घटनास्थल पर ही थी.
जांच में वह फोन नंबर सीमापुरी की ही रहने वाली महिला अंजलि का निकला. पुलिस ने अंजलि के फोन नंबर की भी काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में भी एक फोन नंबर ऐसा मिला, जिस की लोकेशन घटना वाली रात को अंजलि के साथ घटनास्थल की थी. इतनी जांच के बाद पुलिस टीम को केस के खुलासे के आसार नजर आने लगे.
पुलिस टीम सीमापुरी में स्थित अंजलि के घर पहुंच गई. पुलिस को देख कर अंजलि एकदम से घबरा गई. इंसपेक्टर जे.के. सिंह ने अंजलि से पूछा, ‘‘तुम गार्ड देवीलाल को कैसे जानती हो?’’
‘‘मेरा बेटा उसी स्कूल में पढ़ता है, जहां देवीलाल गार्ड था, इसलिए कभीकभी उस से मुलाकात होती रहती थी. इस से ज्यादा मैं देवीलाल के बारे में कुछ नहीं जानती.’’ अंजलि ने बताया.
इंसपेक्टर जे.के. सिंह को लगा कि अंजलि सच्चाई को छिपाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि उन के पास अंजलि और देवीलाल के बीच अकसर होने वाली बातचीत का सबूत मौजूद था. इसलिए वह पूछताछ के लिए उसे थाने ले आए. थाने में उन्होंने अंजलि से पूछा, ‘‘3 मार्च की रात साढे़ 10 बजे तुम देवीलाल के कमरे में क्या करने गई थी?’’
यह सवाल सुनते ही अंजलि की बोलती बंद हो गई. कुछ देर की चुप्पी के बाद उस ने जो कुछ बताया, उस से देवीलाल की हत्या की गुत्थी परतदरपरत खुलती चली गई. उस ने स्वीकार कर लिया कि उस ने अपने दूसरे प्रेमी साजिद उर्फ शेरू के साथ मिल कर देवीलाल की हत्या की थी. देवीलाल की हत्या क्यों की गई, इसे जानने के लिए 2 साल पीछे के घटनाक्रम पर नजर दौड़ानी होगी, जो इस प्रकार है—
40 वर्षीय देवीलाल पिछले 20 सालों से पुरानी सीमापुरी में जयवीर ट्रैवल एजेंसी में नौकरी करता था. लेकिन वहां पगार कम होने के कारण उस के घर की आर्थिक जरूरतें पूरी नहीं हो पाती थीं. चूंकि ट्रैवल एजेंसी में उस का काम दिन में होता था, इसलिए रात के समय खाली होने के कारण वह संजीव कुमार शर्मा के स्कूल में गार्ड के रूप में नौकरी करने लगा. संजीव शर्मा ने उसे रहने के लिए स्कूल में ही एक कमरा भी दे दिया था.
देवीलाल का साल में एक बार ही घर जाना होता था. बाकी समय उस का समय दिल्ली में गुजरता था. चूंकि उस की पत्नी प्रमिला जम्मू में ही रहती थी, इसलिए वह बाजारू औरतों के संपर्क में रहता था.
2 जगहों पर काम करने के कारण थोड़े ही समय में उस के पास काफी रुपए इकट्ठे हो गए थे. वह अपने सभी रुपए अपने अंडरवियर में बनी जेब में रखता था.
अंजलि की शादी करीब 8 साल पहले सुरेंद्र के साथ हुई थी. शादी की शुरुआत में तो अंजलि सुरेंद्र के साथ बहुत खुश थी. बाद में वह एक बेटे की मां बनी, जिस का नाम कपिल रखा. सुरेंद्र प्राइवेट नौकरी करता था. उसी से वह अपने परिवार का पालनपोषण कर रहा था.
अंजलि की यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रह सकी. बीमारी की वजह से सुरेंद्र की नौकरी छूट गई. इस से परिवार में आर्थिक समस्या खड़ी हो गई.
अंजलि के पास जो थोड़ेबहुत पैसे जमा थे, वह भी सुरेंद्र की बीमारी पर खर्च हो गए थे. अंजलि ने सुरेंद्र को बचाने की जीतोड़ कोशिश की लेकिन एक दिन उस की मौत हो गई.
पति की मौत से अंजलि की आंखों में अंधेरा छा गया. जैसेतैसे कर उस ने पति का दाहसंस्कार किया, फिर जीविका चलाने के लिए सीमापुरी की एक कैटरिंग शौप में नौकरी करने लगी. वहां से उसे जितनी पगार मिलती थी, उस से बड़ी मुश्किल से मांबेटे का गुजारा होता था.
2 साल पहले उस ने बेटे कपिल का एडमिशन ओल्ड सीमापुरी में स्थित बाल कौनवेंट स्कूल में नर्सरी कक्षा में करवाया. यह स्कूल ओल्ड सीमापुरी का एक नामचीन प्राइवेट स्कूल है. वह रोजाना सुबह बेटे को स्कूल छोड़ने जाती थी और छुट्टी के समय उसे स्कूल से लेने पहुंच जाती थी. बच्चे की छुट्टी होने तक वह अन्य मांओं की तरह गेट पर खड़ी हो कर बेटे का इंतजार करती थी.
हालांकि अंजलि एक विधवा थी, लेकिन उस के सौंदर्य में आज भी कशिश बरकरार थी. गरीबी का अभिशाप भी उस के खूबसूरत चेहरे का रंग फीका नहीं कर पाया था. उस के हुस्न का आलम यह था कि वह जिधर भी निकलती, युवकों की प्यासी निगाहें चोरीचोरी उस के रूप का रसपान करने, उस के हसीन चेहरे पर टिक जातीं.
एक दिन शाम के समय जब स्कूल का गार्ड देवीलाल गेट पर ड्यूटी दे रहा था, तभी अचानक उस की निगाह अंजलि पर पड़ी. अंजलि को देख कर उस की आंखें चमक उठीं. वह उस पर डोरे डालने की योजनाएं बनाने लगा.
गार्ड देवीलाल उस के बेटे कपिल का विशेष ध्यान रखने लगा. वह कपिल को चौकलेट, टौफी आदि दे कर उस का करीबी बन गया. अंजलि ने देखा कि देवीलाल कपिल को खूब प्यार करता है तो वह घर से उस के लिए कुछ न कुछ खाने की चीज बना कर लाने लगी.
इस तरह दोनों ही एकदूसरे को चाहने लगे. अंजलि को जब कभी पैसों की जरूरत होती तो वह उस की मदद भी कर देता. गार्ड की सहानुभूति पा कर अंजलि उस की दोस्त बन गई. अपने मोबाइल नंबर तो वे पहले ही एकदूसरे को दे चुके थे, जिस से वह बातचीत करते रहते थे.
देवीलाल ने जब देखा कि खूबसूरत अंजलि पूरी तरह शीशे में उतर गई है तो वह रात के समय उसे स्कूल में बुलाने लगा. अंजलि के आने पर वह उस के साथ महंगी शराब पीता. अंजलि भी उस के साथ शराब पीती फिर दोनों अपनी हसरतें पूरी करते थे.
अंजलि को जब भी पैसों की जरूरत होती, देवीलाल अपने अंडरवियर की जेब से निकाल कर उसे दे देता था. अंजलि उस के पास इतने सारे रुपए देख कर बेहद प्रभावित हो गई थी, इसलिए वह देवीलाल को हर तरह से खुश रखने की कोशिश करती थी.
धीरेधीरे उस का देवीलाल के पास आनाजाना इतना बढ़ गया कि आसपड़ोस के लोगों को भी उस के अवैध संबंधों की जानकारी हो गई. लेकिन अंजलि और देवीलाल को इस से कोई फर्क नहीं पड़ा. देवीलाल को जब भी मौका मिलता, वह अंजलि को अपने कमरे में बुला कर अपनी हसरतें पूरी कर लेता.

अंजलि की मौसी मधु का पति साजिद उस का हालचाल पूछने उस के पास आता रहता था. दोनों सालों से एकदूसरे को जानते थे. अंजलि के पति की मौत के बाद साजिद ने ही अंजलि को सहारा दिया था. साजिद भी अंजलि के हुस्न पर लट्टू था. साजिद के साथ भी अंजलि के शारीरिक संबंध थे.
वह कईकई दिन अंजलि के यहां रुक जाता था. इस कारण उस के और मधु के संबंधों में भी खटास आ चुकी थी. साजिद ड्राइवर था, हरियाणा से करनाल बाइपास की ओर आने वाले यात्रियों को अपनी इनोवा कार में ढोया करता था.
साजिद को जब अंजलि और गार्ड देवीलाल के संबंधों की जानकारी हुई तो वह इस का विरोध करने लगा. चूंकि अंजलि पर गार्ड देवीलाल खुल कर खर्च करता था, इसलिए वह उसे छोड़ना नहीं चाहती थी. वह साजिद को किसी तरह समझा देती फिर मौका मिलते ही देवीलाल से मिलने स्कूल में बने उस के कमरे में चली जाती थी. किसी तरह साजिद को यह बात पता चल ही जाती थी, तब उस ने अंजलि पर देवीलाल से रिश्ता तोड़ देने का दबाव बनाया.
अंजलि के दिमाग में एक शैतानी योजना ने जन्म ले लिया. साजिद की इनोवा कार खराब थी. कार ठीक कराने के लिए उस के पास पैसे तक नहीं थे, इसलिए वह खाली बैठा था.
तब अंजलि ने साजिद को बताया कि देवीलाल के पास काफी रुपए रहते हैं. अगर दोनों मिल कर उस का काम तमाम कर दें तो उस के रुपयों पर आसानी से हाथ साफ किया जा सकता है.
साजिद तो देवीलाल से पहले से ही खार खाए बैठा था. लालच में वह उस की हत्या करने के लिए राजी हो गया. अब दोनों अपनी इस योजना को अंजाम देने के लिए अवसर की तलाश में रहने लगे. 3 मार्च, 2018 की रात देवीलाल का मूड बना तो उस ने उसी समय अंजलि को फोन कर दिया.
इस से पहले उस ने व्हिस्की की बोतल और खाना पैक करवा लिया. रात के 10 बजे उस ने अपनी प्रेमिका अंजलि को फोन कर के स्कूल में पहुंचने के लिए कहा तो अंजलि और साजिद की आंखें खुशी से चमकने लगीं.
अंजलि ने पहले तो शृंगार किया. होंठों पर सुर्ख लिपस्टिक लगाई, फिर साजिद की बुलेट मोटरसाइकिल पर बैठ कर कौन्वेंट स्कूल के नजदीक पहुंचा. अंजलि जिस समय स्कूल में पहुंची, रात के 10 बज रहे थे. देवीलाल की निगाहें केवल अंजलि पर पड़ीं तो वह उसे टकटकी लगाए देखता रह गया. उसे अंजलि इतनी सुंदर पहले कभी नहीं लगी थी. अंजलि के अंदर आने पर उस ने बांहों में भर कर चूमा फिर अपने कमरे पर बिछी चारपाई पर ले गया. तभी अंजलि ने उस से कोल्डड्रिंक लाने की फरमाइश की.
देवीलाल कोल्डड्रिंक लाने स्कूल से बाहर गया, तभी मौका मिलते ही अंजलि ने फोन कर के साजिद को अंदर बुलाया और छिप जाने के लिए कह दिया. देवीलाल के आने के बाद अंजलि व्हिस्की में कोल्डड्रिंक मिला कर उसे शराब पिलाने लगी. देवीलाल ने अंजलि के लिए भी पैग बना लिया.
अंजलि भी शराब की शौकीन थी, लेकिन उस दिन उस ने स्वयं तो कम पी लेकिन देवीलाल को अधिक पिला कर मदहोश कर दिया. जब अंजलि ने देवीलाल को बेसुध देखा तो उस ने साजिद को इशारा कर बुला लिया.
अंजलि ने उस से देवीलाल का काम तमाम करने के लिए कहा. फिर साजिद ने देवीलाल के सिर पर लोहे की रौड का भरपूर वार कर उस का काम तमाम कर दिया. इस के बाद साजिद और अंजलि ने देवीलाल के अंडरवियर में रखे लगभग 60 हजार रुपए तथा मोबाइल फोन ले लिया.
जब दोनों वहां से जाने लगे तो अंजलि को शक हुआ कि कहीं देवीलाल बच न जाए. अगर वह बच गया तो वह इस मामले में फंस जाएगी, इसलिए अंजलि ने साजिद को उस की कलाई की नसें काटने के लिए कहा.
यह सुन कर साजिद ने अपने साथ लाए पेपर कटर से देवीलाल के दोनों हाथों की नसें काट दीं, जिस से उस का खून बह गया. देवीलाल की हत्या करने के बाद दोनों शातिर इत्मीनान से अपने घर लौट गए.
अंजलि की निशानदेही पर पुलिस ने उस के पहले प्रेमी साजिद को भी उस के घर से गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों की निशानदेही पर देवीलाल से लूटे गए रुपए, 3 मोबाइल फोन, मोटरसाइकिल तथा हत्या में प्रयुक्त रौड, पेपर कटर बरामद कर लिया. पुलिस ने दोनों को 7 मार्च को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
संतोष तुम्हारे पास पैसे तो बहुत होते हैं, फिर भी तुम पैसों की चिंता में रहते हो, क्यों भाई? तुम्हारा मालिक भी तुम पर कितना भरोसा करता है. पैसा, गाड़ी सब तुम्हारे भरोसे पर रखा है.’’ प्रिंटिंग प्रैस में काम करने वाले अजय ने अपने दोस्त संतोष को समझाते हुए कहा.
‘‘यार तुम लोगों को लगता है कि जो पैसा, गाड़ी है, वह मेरे लिए है. तुम लोग बहुत भोले और नासमझ हो. तुम्हें पता होना चाहिए कि हर मालिक अपने काम से काम रखता है. जब तक उस का काम रहता है, तब तक गाड़ी और पैसा सब देगा. काम निकलने के बाद न गाड़ी देगा और न पैसा. हम जैसों को कुत्ता समझते हैं. एक गलती करो तो 10 गाली मिलती हैं और नौकरी से निकालने की धमकी अलग.’’ संतोष पर शराब का नशा चढ़ चुका था. वह अपने मन की भड़ास निकालते हुए बोला.
‘‘संतोष, तुम अजय भाई की बात को समझो कि वह कहना क्या चाहते हैं? हम तीनों में सब से ज्यादा खुशहाल तुम्हारा ही मालिक है. तुम ही कुछ कर सकते हो.’’ संतोष और अजय के तीसरे दोस्त सर्वेश ने दोनों के बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा.
‘‘बात तो हम समझते हैं अजय भाई, पर करें क्या. यह नहीं समझ आ रहा है. हम उस से कैसे पैसे निकालें. तुम लोग बताओ, हम हर काम करने को तैयार हैं.’’ संतोष ने कहा.
‘‘संतोष भाई, तुम्हारा मालिक मोटी मुरगी है. बस तुम उस की कमजोर नस दबा दो, वह खुद मुंहमांगी रकम दे देगा. फिल्में नहीं देखते, मालिकों से कैसे पैसा लिया जाता है.’’ अजय ने संतोष को समझाया.
‘‘बात समझ में आ गई अजय भाई, हम रोजाना उस के बेटे को स्कूल छोड़ने जाते हैं. एक दिन हम यही तोता अपने पिंजरे में पाल लेंगे और तभी आजाद करेंगे, जब पैसा मिलेगा नहीं तो तोते को दुनिया से आजाद कर देंगे.’’
शराब के नशे में संतोष यह सोच ही नहीं पा रहा था कि उस के कदम अपराध की तरफ बढ़ रहे हैं. बातों में उस के दोस्त अजय और सर्वेश उसे उकसा रहे थे. बातोंबातों में तीनों ने एक ही झटके में मोटा पैसा कमाने की योजना बना ली.
असल में संतोष राणा प्रताप मार्ग स्थित सूर्योदय कालोनी में रहने वाले अनूप अग्रवाल के घर में गाड़ी चलाने का काम करता था. अनूप अग्रवाल लखनऊ के बड़े बिजनैसमैन थे. उन की बेटी मुंबई में पढ़ रही थी. बेटा अर्णव लामार्टीनियर कालेज में पढ़ता था.
लामार्टीनियर कालेज लखनऊ का सब से मशहूर कालेज है और सब से सुरिक्षत इलाके में बना है. जहां से कुछ ही दूरी पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का आवास है. सूर्योदय कालोनी से लामार्टीनियर कालेज की दूरी बामुश्किल 3 किलोमीटर है. अनूप रोज अपने ड्राइवर संतोष के साथ अपनी कार से उसे स्कूल भेजते थे, वही दोपहर में अर्णव को लेने भी जाता था.
अनूप ने 10 माह पहले ही संतोष को अपने यहां ड्राइवर रखा था. संतोष मूलरूप से सीतापुर जिले के खैराबाद का रहने वाला था. वह अनूप के बिजनैस से जुड़े लेनदेन के काम भी करता था. उसे पूरे व्यापार के बारे में पता था. संतोष अनूप के घर से कुछ ही दूरी पर किराए का कमरा ले कर रहता था.
ऐसे में जरूरत पड़ने पर वह जल्दी ही अनूप के घर आ जाता था. अपने दोस्तों के साथ नशे में हुई बातचीत के बाद संतोष अब कुछ ऐसा करना चाहता था, जिस से उसे बहुत सारा पैसा मिल जाए. अनूप की अच्छी कमाई देख कर उसे लालच आ चुका था.
19 मार्च, 2018 की सुबह करीब 9 बजे थे. संतोष अर्णव को एसयूवी कार से स्कूल के लिए घर से निकला. साढ़े 9 बजे से उस की परीक्षा थी. वह जल्दी से जल्दी स्कूल पहुंचना चाहता था. रोजाना वह अपने घर से हजरतगंज होते स्कूल जाता था. लेकिन उस दिन संतोष ने कार 1090 चौराहे से गोमती नगर की तरफ मोड़ दी.

अर्णव ने कारण पूछा तो संतोष बोला, ‘‘हजरतगंज में जाम है. स्कूल के लिए देर हो जाएगी.’’ अर्णव कक्षा 9 में पढ़ता था. उसे परीक्षा की टेंशन थी, इसलिए वह चुपचाप अपनी बुक्स देखने लगा.
अर्णव को ले कर कार 1090 चौराहे पहुंची तो संतोष का दोस्त अजय गाड़ी के सामने आ गया. संतोष दरवाजा खोल कर गाड़ी के नीचे उतरा तो उसे डांटने लगा. जब तक अर्णव कुछ समझ पाता, तब तक संतोष अपनी सीट पर बैठ गया और अजय अर्णव की बगल बैठ गया.
अजय ने बैठते ही उस की कमर से तमंचा लगा कर उसे चुप रहने के लिए कहा. गाड़ी वापस मुड़ कर सीतापुर रोड की तरफ जाने लगी. इस बीच अर्णव को नशे का इंजेक्शन दे कर बेहोश कर दिया गया था. अर्णव को इन लोगों ने बोरे में भर कर पिछली सीट पर डाल दिया. गाड़ी अब सीतापुर रोड से होते हुए आगे निकल गई थी.
अर्णव को स्कूल छोड़ कर जब संतोष घर नहीं आया तो पहले घर वालों को लगा कि वह कहीं किसी काम से चला गया होगा. लेकिन स्कूल से फोन आ गया कि अर्णव की आज परीक्षा थी, वह स्कूल नहीं आया. इस पर घर वालों से संतोष के मोबाइल नंबर पर फोन करना शुरू किया तो वह बंद मिला.
कुछ देर में यह बात साफ हो गई कि ड्राइवर संतोष अर्णव को ले कर गायब हो गया है. इस के बाद घर, परिवार के लोग और रिश्तेदार एकत्र हो गए. मोहल्ले में कोहराम मच गया. तत्काल लखनऊ पुलिस को सूचना दी गई.
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ब्रजेश पाठक के अग्रवाल परिवार से करीबी रिश्ते थे, उन से यह बात बताई गई. उन्होंने लखनऊ के एसएसपी से कहा. लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार ने तुरंत पुलिस की एक टीम बना कर एएसपी (पूर्वी) सर्वेश कुमार मिश्रा को इस मामले को संभालने को कहा.
लामार्टिनियर कालेज लखनऊ का प्रतिष्ठित कालेज है. वहां के बच्चे के अपहरण की सूचना से उत्तर प्रदेश पुलिस के आला अफसर भी चौकन्ने हो गए. डीजीपी ओ.पी. सिंह ने आईजी सुजीत पांडे को मामले में त्वरित काररवाई करने के लिए कहा. स्थानीय पुलिस के साथ उत्तर प्रदेश की स्पैशल टास्क फोर्स को भी इस में लगा दिया गया.
एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश छुट्टी पर थे. उन की छुट्टी रद्द कर के उन्हें भी मामले में लगा दिया गया. अनूप अग्रवाल का घर हजरतगंज थाना क्षेत्र में आता है. वहां के इंसपेक्टर आनंद शाही भी छुट्टी पर थे. उन्हें भी तुरंत बुलाया गया. पूरे लखनऊ की पुलिस एक घंटे में अलर्ट हो गई. गाड़ी नंबर सभी थानों को भेज दिया गया. टोल प्लाजा पर कार का नंबर चेक किया गया तो यह बात साफ हो गई कि कार सीतापुर जिले की तरफ गई है.
इंटौला थाने के इंसपेक्टर शिवशंकर सिंह ने बताया कि अनूप की गाड़ी टोल प्लाजा से 9 बज कर 29 मिनट 52 सेकेंड पर गुजरी है. इस में 3 लोग दिख रहे थे. सीसीटीवी फुटेज में ड्राइवर का चेहरा साफ नहीं दिखा, पर पुलिस को यह पता चल चुका था कि कार अर्णव को ले कर सीतापुर की तरफ गई है. यह सूचना मिलते ही लखनऊ पुलिस ने सीतापुर पुलिस से संपर्क किया. उन्होंने एसपी आनंद कुलकर्णी को इस घटना की सूचना दे दी.
इस के बाद सीतापुर पुलिस ने घेराबंदी तेज कर दी. लखनऊ पुलिस ने संतोष का मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगा रखा था. सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा, इंसपेक्टर आनंद शाही और इंसपेक्टर कृष्णानगर अंजनी पांडेय ड्राइवर संतोष की काल डिटेल्स खंगाल रहे थे.
इस में 3 फोन नंबर ऐसे मिले, जिन की सुबह 10 बजे से आपस में बातचीत हुई थी. इन में एक नंबर बंद हो गया था, जबकि बाकी के 2 नंबरों की लोकेशन सीतापुर के मानपुर गांव में दिख रही थी. मानपुर गांव खैराबाद पुलिस थाना क्षेत्र में आता है. वहां की पुलिस को एलर्ट किया गया.
खैराबाद की पुलिस जब मानपुर पहुंची तो पुलिस को मोड़ पर ही कुछ लोग मिल गए उन्होंने बताया कि एक लाल रंग की कार खेत की तरफ गई है. पुलिस वहां गई तो ड्राइवर संतोष और अर्णव खेत में ही मिल गए. सीतापुर पुलिस ने जब इन लोगों को पकड़ा, तब तक अर्णव के पिता अनूप को ले कर लखनऊ पुलिस भी वहां पहुंच चुकी थी.
पूछताछ में संतोष ने बताया कि अपहरण की साजिश उस ने अपने मौसेरे भाई कासिमपुर सीतापुर निवासी सर्वेश यादव और पारा रोड निवासी दोस्त अजय के साथ मिल कर रची थी. लखनऊ से अर्णव को अगवा करने में संतोष और अजय शामिल थे.
सर्वेश ने उन के छिपने की व्यवस्था की थी. कार को खेत में खड़ा कर के संतोष और अर्णव को वहीं छोड़ कर सर्वेश और अजय टोह लेने लखनऊ चले गए थे.
पुलिस ने जब अर्णव को बरामद किया तो उस ने बताया कि ड्राइवर संतोष ने उसे बताया था कि बदमाशों ने दोनों को अगवा कर लिया है. उस ने मुझे भी चुपचाप खेत में छिपे रहने को कहा था. अगवा करने वाले कुछ भी कर सकते हैं,इसलिए हम ने शोर नहीं मचाया. कार में ही अर्णव का बैग मिला. पुलिस संतोष और अर्णव को ले कर लखनऊ चली आई जिस ने भी अपहरण की घटना में ड्राइवर संतोष का नाम सुना हैरान था कि वह ऐसा कैसे कर सकता है.
पुलिस के साथ पिता को देख कर अर्णव उन से लिपट कर रोने लगा था. उसे पिता ने बताया कि संतोष ने ही यह सारा काम किया है. तब अर्णव को भरोसा हुआ कि संतोष कितना बुरा आदमी है. अर्णव को सकुशल बरामद कर के पुलिस ने राहत की सांस ली.
लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार का अगला प्रयास 2 अपहर्त्ताओं अजय और सर्वेश को गिरफ्तार करना था. पुलिस ने उन की तलाश शुरू कर दी. 20 मार्च की शाम को पुलिस को पता चला कि दोनों फरार अभियुक्त बैकुंठ धाम के पास गोमती नदी के किनारे हैं.पुलिस ने वहां पर घेराबंदी की तो खुद को फंसता देख अभियुक्तों ने पुलिस टीम पर फायर कर दिया.
इस के जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की तो अजय के पैर में गोली लग गई. वह घायल हो गया. दूसरा अभियुक्त फरार हो गया. अजय के पिता सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं. उन के साथ ही वह रहता था. पिता को यह पता भी नहीं था कि बेटा अपहरण में लिप्त है.
मुठभेड़ में शामिल पुलिस टीम के सीओ (हजरतगंज) अभय कुमार मिश्रा, इंसपेक्टर आनंद कुमार शाही, अंजनी कुमार पांडेय, शिवशंकर सिंह, एसआई आशीष द्विवेदी, कांस्टेबल सुदीप, राम निवास, अनीस, यशकांत, सुधीर, वीर सिंह के कार्य की एसएसपी ने भी सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत किया. डीजी ओ.पी. सिंह ने पुलिस टीम को चाय पार्टी दी.

डीजीपी ने आईजी सुजीत पांडेय, एसएसपी दीपक कुमार, सीतापुर के एसपी आनंद कुलकर्णी की भी तारीफ की. जिस तरह से पुलिस ने केवल 4 घंटे में बच्चे को बरामद कर बदमाशों को पकड़ा उस से लगता है कि अगर पुलिस सही तरह से तालमेल मिला कर काम करे तो अपराधियों के हौसले पस्त होते देर नहीं लगेगी.
– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित कथा में कुछ पात्रों के नाम परिवर्तित हैं.
मंगलवार को महबूबा मुफ्ती अपनी सरकार के वरिष्ठ अफसरों के साथ रमजान के बाद उपजे हालात पर चर्चा कर रही थीं. तभी एक अफसर के मोबाइल पर संदेश आया कि भाजपा ने सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला कर लिया है और बहुत जल्द गवर्नर हाउस में चिट्ठी पहुंचने वाली है. महबूबा मुफ्ती के लिए भी यह फैसला चौंकाने वाला ही था क्योंकि हर बार की तरह इस बार भी उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा नेतृत्व उन्हें एक मौका और देगा. लेकिन ऐसा हो न सका.
महबूबा मुफ्ती की सरकार को गिराकर भाजपा ने 2019 के लिए सबसे बड़ा जुआ खेला है. एक भाजपा नेता कहते हैं, ‘एक प्रदेश की आधी सरकार गिराकर अगर अगले साल दिल्ली में पूरी सरकार बन सकती है तो इससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता. बस इतना डर है कि कहीं ये फैसला लेने में डेढ़-दो साल ज्यादा तो नहीं लग गए’.
सुनी-सुनाई से कुछ ज्यादा है कि महबूबा सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला मुख्यत: तीन व्यक्तियों का था. गृह मंत्री और अरुण जेटली को बाद में बताया गया कि अगर भाजपा और वक्त लगाएगी तो जम्मू-कश्मीर की सरकार बचाने के चक्कर में पार्टी 2019 का लोकसभा चुनाव भी हार सकती है. भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को कुछ ऐसी ही रिपोर्ट मिली थी. पिछले दो हफ्तों के दौरान जब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह संघ के नेताओं से मिले तो उन्हें साफ नसीहत दी गई. देश भर में फैले अपने स्वयंसेवकों की फीडबैक के हवाले से संघ पदाधिकारियों ने अमित शाह को बताया कि महबूबा मुफ्ती की सरकार के साथ भाजपा का साथ जितना लंबा खिंचता जाएगा मोदी सरकार की साख घटती जाएगी.
संघ के एक बड़े पदाधिकारी ने कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी पूंजी उसकी राष्ट्रवादी पार्टी की छवि है और नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी कमाई उनकी कड़े फैसले लेने वाले नेता की छवि है. उनके मुताबिक महबूबा मुफ्ती की सरकार को सहारा देते-देते भाजपा धीरे-धीरे ये दोनों ही छवियां खोती जा रही थी. रमज़ान में कश्मीर में सीज़फायर को संघ पूरी तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण के चश्मे से देख रहा था.
उधर, भाजपा नेतृत्व की दलील थी कि वह अपने सहयोगी दल को दिए वादे को पूरा करने के लिए एक जोखिम उठा रहा है. सूत्रों के मुताबिक संघ एक इस पदाधिकारी ने कहा कि इस जोखिम को उठाने में भाजपा की छवि पर बट्टा लग चुका है और जितनी जल्दी हो सके उस जख्म पर राष्ट्रवादी फैसले का रहम लगाया जाए नहीं तो बहुत देर हो जाएगी. संघ को जो अच्छी तरह जानते हैं वे समझ चुके होंगे कि ऐसी इशारों में कही गई भाषा का क्या मतलब होता है. वही हुआ. रमज़ान खत्म हुआ. सीज़फायर खत्म हुआ और साथ ही गठबंधन भी खत्म हो गया.
भाजपा नेतृत्व के पास दूसरी रिपोर्ट राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की थी. सुनी-सुनाई है कि पिछले एक महीने में जिस तरह की खबरें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तक पहुंची वे बेहद गंभीर थीं. इन रिपोर्टों के आने के बाद भी आंखें बंद रखना सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक साबित हो सकता था. खुफिया विभाग के एक अफसर की मानें तो पिछले एक महीने में जैसी घटनाएं घाटी में हुई उसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मन बना चुके थे कि अब कश्मीर में हालात तभी सुधर सकते हैं जब वहां सिर्फ राज्यपाल शासन हो.
उदाहरण के तौर पर कुछ बातें पता चली. जैसे जैश-ए-मोहम्मद के जिस ग्रुप ने सेना के जवान औरंगज़ेब खान की हत्या की थी उसके बारे में खबर मिल चुकी थी. कुछ इंटरसेप्ट मिले थे जिससे उसके ठिकाने तक पहुंचा जा सकता था. सेना उसी वक्त ऑपरेशन चलाना चाहती थी. लेकिन सुनी-सुनाई है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ईद के वक्त ऐसे किसी ऑपरेशन के एकदम खिलाफ थीं.
जम्मू-कश्मीर पुलिस को ऐसे किसी ऑपरेशन में शरीक होने से रोक दिया गया. इसके बाद इफ्तार के लिए जाते वक्त रोज़ेदार शुजात बुखारी की हत्या ने केंद्र सरकार को कड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर कर दिया. जैसा कि गृहमंत्री ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘रोजे के वक्त रोजेदार को गोली से भूनते हैं. ये कौन सा धर्म है? अब इंसाफ होगा’.
पीडीपी की खबर रखने वाले कश्मीर के एक पत्रकार की मानें तो महबूबा मुफ्ती को सोमवार रात तक यकीन नहीं था कि भाजपा अचानक समर्थन वापस लेने का फैसला लेगी. वे बताते हैं, ‘जम्मू-कश्मीर के भाजपा नेताओं को सोमवार रात तक दिल्ली पहुंचने का फरमान भेजा गया था. भाजपा महासचिव राम माधव आंध्र प्रदेश के कार्यक्रम में व्यस्त थे. उन्हें भी मंगलवार सुबह दिल्ली में रहने के लिए कहा गया. केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह को भी राजधानी में टिके रहने का संदेश भेजा गया. जम्मू से दिल्ली निकले भाजपा के प्रदेश नेताओं को भी इसका अंदाज़ा नहीं था कि क्या होने वाला है.’
जम्मू से निकलने से पहले एक पार्टी नेता ने पत्रकारों को बताया था कि जम्मू के सभी विधायक चाहते हैं कि सरकार से समर्थन वापस लिया जाए क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो 2019 का आम चुनाव और तीन साल बाद विधानसभा चुनाव भी हारना तय है. लेकिन ऐसा वे पिछले तीन साल से कहते आए थे और दिल्ली से हर बार यही जवाब मिलता था कि अभी थोड़ा धीरज रखें और इंतजार करें, वक्त रहने पर फैसला किया जाएगा.
जब प्रदेश के नेता इस बार अमित शाह से मिले तब तक फैसला हो चुका था. अमित शाह के दफ्तर से ही इन नेताओं ने अपना संदेश जम्मू-कश्मीर के राजभवन में भेजा. फिर महबूबा मुफ्ती को भी बताया गया कि भाजपा ने उनकी सरकार गिराने का फैसला कर लिया है. प्रेस कांफ्रेंस करने से पहले भाजपा इतना सब कुछ कर चुकी थी. दोपहर ढाई बजे तक यह तय हो चुका था कि कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस भी महबूबा को समर्थन नहीं देगी और कश्मीर में राज्यपाल शासन ही इकलौता विकल्प है.
मंगलवार को अमित शाह से मिलने वालों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पहले चंद लोगों में से थे. सुनी-सुनाई है कि अजीत डोभाल ने अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी थी. उन्होंने अपने साथ-साथ प्रधानमंत्री का संदेश भी भाजपा अध्यक्ष तक पहुंचा दिया था. इस बार फैसला अमित शाह का नहीं था. समर्थन वापसी का फैसला प्रधानमंत्री ने किया था. अमित शाह को उस फैसले को अक्षरश: लागू करना था.
अब भाजपा के पास करीब 10 महीने बचे हैं. दिल्ली के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं, ‘तीन साल लंबी दोस्ती के बाद तलाक का गम मनाने का वक्त भी नहीं बचा है. अब मोदी सरकार को अगले 10 महीने में कुछ ऐसा कर दिखाना होगा जिससे जनता ये भूल जाए कि कभी महबूबा और मोदी की दोस्ती भी हुई थी.’ फिलहाल कश्मीर में ऑपरेशन ऑलआउट चलाने का आदेश दिया जा चुका है. मुख्यमंत्री के जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के लिए नए गवर्नर की खोज भी शुरू हो गई है.
(साभार : सत्याग्रह)
31 मई को आए 15 उपचुनावों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि वर्ष 2019 के आम चुनावों में विपक्षी दलों में गठबंधन हो पाए या न हो पाए लेकिन इतना पक्का है कि मोदी के विरोध में अधिकांश जनता अपना वोट किसी सक्षम दल को ही देगी. आज जनता आसानी से समझ लेती है कि पलड़ा किस का भारी है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव में वोटों के विभाजन के बावजूद भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाया जबकि ऐसी ही स्थिति में, इसी वोट शेयर में, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में वोटों के बंटवारे के कारण भाजपा जम कर जीत गई थी. कांग्रेस की उदारता 2019 में होने वाले आम चुनावों में काफी काम आएगी. कांग्रेस ने ही कर्नाटक में विपक्षी दलों को एक मंच पर एकत्र किया था. यह जनता दल (सैक्युलर) के देवगौड़ा या उन के पुत्र कुमारस्वामी के वश का नहीं था. जो उत्साह विरोधी दलों में अब पैदा हुआ है और जिस तरह भारतीय जनता पार्टी आक्रामक भूमिका से आत्मरक्षक भूमिका में चली गई है, वह कांग्रेसी नेताओं की धौंस जताने की प्रवृत्ति को छोड़ने से हुआ है. 2019 में दल चाहे एक न हों पर होगा सीधा मुकाबला ही.
भारतीय जनता पार्टी ने अपने 4 सालों के शासन से सिद्ध कर दिया है कि वह नितांत पेशवाईराज स्थापित करना चाहती है जिस में कहने को चाहे साहूजी महाराज राज कर रहे हों पर शासन की बागडोर ब्राह्मण पेशवा के हाथों में ही रहेगी. जमीनी हकीकत से बेखबर या उस की चिंता न करने वाले आज के ब्राह्मण शासक सदियों से रामायण, महाभारत, पुराणों, स्मृतियों को आदर्श मान कर राज करना चाहते हैं. इन ग्रंथों का न तब कोई आदर्श था न आज है. चूंकि इन्हें पढ़ने की इजाजत वर्गविशेष को ही थी इसलिए इन का उपयोगसदुपयोग वही जानते थे. यदि आज संविधान को गुप्तज्ञान बना दिया जाए और इसे केवल सरकार व जज ही पढ़ सकें तो क्या देश में लोकतंत्र रहेगा? वह हिटलरशाही होगी और जो जनता को मंजूर नहीं है.
महंगाई या बेरोजगारी आज जनता के लिए इतना महत्त्वपूर्ण विषय नहीं है जितना संवैधानिक अधिकार. इन अधिकारों के जरिए 85 प्रतिशत जनता को नया रास्ता मिला है. इन पर आक्रमण वही समझ सकता है जो इन का पहली बार उपयोग कर रहा हो. वहीं, जो सामाजिक तौर पर पहले से ही श्रेष्ठ हैं, वे संवैधानिक अधिकारों की मांग नहीं करते क्योंकि उन के पास उस से बढ़ कर अधिकार हैं. भारतीय जनता पार्टी के साथ दिक्कत यह है कि उस की अर्धशिक्षित, पाखंडवादी फौज यह समझने को तैयार नहीं है कि जहां बहुमत की चलती हो वहां जनता से अधिकार छीनना सब से बड़ा जुर्म होता है. भगवाधारी स्वयंसेवकों ने कानून हाथ में ले कर जो आतंक मचा रखा है, उस पर जनविद्रोह नहीं हो रहा क्योंकि उस के जनक पुलिस वाले नहीं हैं. पर लोगों को रुष्ट करने के लिए ये काफी हैं. 2019 में भाजपा को चुनौती उस के अपने ही पिट्ठू देंगे, विपक्षियों के मंच नहीं. यह 15 में से केवल 3 सीट जीत पाने से साफ है.
काजल जब भी अपने पति राजन के बारे में सोचती थी, उस का मन कसैला हो उठता था. उस ने तो सुना था कि पति अपनी पत्नी की इज्जत का रखवाला होता है, पर उस ने तो पैसों के लिए उस की इज्जत को ही दांव पर लगा दिया था. खुद तो बुराई के रास्ते पर चल ही पड़ा था, उसे भी इस रास्ते पर चलने को मजबूर कर दिया था. 6 महीने पहले जब काजल की शादी राजन से हुई थी, तो वह मन में हजारों सपने ले कर अपने पति के घर आई
थी. शुरुआती दिनों में उस के सपने पूरे होते भी दिखे थे. उस के ससुराल वाले खातेपीते लोग थे और वहां कोई कमी नहीं थी. गरीबी में पलीबढ़ी काजल के लिए इतना होना बहुत था. उसे लगा था कि ससुराल आ कर उस की जिंदगी बदल गई है, उस की गरीबी हमेशा के लिए पीछे छूट गई है, पर बीतते दिनों के साथ उस का यह सपना टूटने लगा था.
काजल के मायके की जिंदगी गरीबी और तंगहाली से भरी जरूर थी, पर वहां उस की इज्जत थी. जैसे ही वह 20 साल की हुई थी, उस के मांबाप उस की इज्जत के प्रति कुछ ज्यादा ही सचेत हो उठे थे. शादी के शुरू के दिनों में राजन का बरताव काजल के प्रति अच्छा था. उस के सासससुर भी उस का खयाल रखते थे, पर आगे चल कर राजन का बरताव काजल के प्रति कठोर होता चला गया.
राजन कपड़े का कारोबार करता था. उसे अपने कारोबार में 50 हजार रुपए का घाटा हुआ. उसे महाजन का उधार चुकाने के लिए अपने एक दोस्त से 50 हजार रुपए का कर्ज लेना पड़ा.
रजत नाम का यह दोस्त जब राजन से अपने पैसे मांगने लगा, तो उस के हाथपैर फूलने लगे. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह इतने रुपए कहां से लाए, ताकि अपने दोस्त के कर्ज से छुटकारा पा सके. उस ने इस बारे में गहराई से सोचा और तब उसे लगा कि उस की पत्नी ही उसे इस कर्ज से छुटकारा दिला सकती है. अपनी इस सोच के तहत राजन ने काजल से बात की और उस से कहा कि वह अपने मांबाप से 50 हजार रुपए मांग लाए. पर जहां दो वक्त की रोटी का जुगाड़ ही मुश्किल से हो पाता हो, वहां इतने पैसों का इंतजाम कहां से हो पाता.
‘‘ठीक है,’’ राजन उदास लहजे में बोला.
‘‘पर मेरे पास एक और तरीका है,’’ काजल मुसकराते हुए बोली, ‘‘मेरे पास रूप और जवानी की दौलत तो है. मैं इसी का इस्तेमाल कर के पैसों का इंतजाम करूंगी.’’
‘‘क्या बकवास कर रही हो तुम?’’ राजन तेज आवाज में बोला. ‘‘मैं बकवास नहीं, बल्कि सच कह रही हूं.’’
‘‘नहीं, तुम ऐसा नहीं कर सकतीं. आखिरकार मैं तुम्हारा पति हूं और कोई पति अपनी पत्नी की इज्जत का सौदा नहीं कर सकता.’’ ‘‘पर मैं कर सकती हूं,’’ काजल कुटिल आवाज में बोली, ‘‘क्योंकि पैसा पहले है और पति बाद में.’’
उन की स्कीम के अनुसार, रात के तकरीबन 10 बजे राजन लौटा, तो उस के साथ उस का वह दोस्त रजत भी था, जिस से उस ने कर्ज लिया था. राजन अपने दोस्त रजत को ले कर अपने बैडरूम में आ गया. उस ने काजल से कहा कि वह उस के और उस के दोस्त के लिए खानेपीने का इंतजाम करे.
आधे घंटे बाद जब काजल उन का खाना ले कर बैडरूम में पहुंची, तो दोनों शराब की बोतल खोले बैठे थे. काजल खाना लगा कर एक ओर खड़ी हो गई. शराब पीने के साथसाथ वे दोनों खाना खाने लगे.
खाना खाते समय रजत रहरह कर काजल को बड़ी कामुक निगाहों से देखने लगता था.
जब वे लोग खाना खा चुके, तो काजल जूठे बरतन ले कर रसोईघर में चली गई. थोड़ी देर बाद राजन ने आवाज दे कर उसे पुकारा. काजल कमरे में बैड के पास खड़ी थी और राजन के साथ बैठा रजत उसे बड़ी कामुक निगाहों से घूर रहा था.
काजल ने आंखों ही आंखों में कुछ इशारा किया और राजन उठता हुआ बोला, ‘‘काजल, तुम यहीं बैठो, मैं अभी आया.’’ इतना कहने के बाद राजन तेजी से कमरे से निकल गया और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया. पर वह कमरे से निकला था, घर से नहीं.
राजन दरवाजे के पास अपने मोबाइल फोन के साथ छिपा बैठा था, ताकि काजल और रजत के प्यार के पलों की वीडियो फिल्म बना सके. राजन के कमरे से निकलते ही रजत काजल से छेड़छाड़ करने लगा.
‘‘यह क्या कर रहे हो तुम?’’ काजल नकली नाराजगी दिखाते हुए बोली, ‘‘छोड़ो मुझे.’’ ‘‘तुम्हें कैसे छोड़ दूं जानेमन?’’
रजत बोला. ‘‘बड़ी कोशिश के बाद तो तुम मेरे हाथ आई हो,’’ कहते हुए उस ने काजल को अपनी बांहों में भर लिया.
रजत की इस हरकत से काजल पलभर को तो बौखला उठी, फिर उस की बांहों में मचलते हुए बोली, ‘‘छोड़ो मुझे, वरना मैं तुम्हारी शिकायत अपने पति से करूंगी.’’ ‘‘पति…’’ कह कर रजत कुटिलता से मुसकराया.
‘‘तुम्हारा पति भला मेरा क्या बिगाड़ लेगा? वह तो गले तक मेरे कर्ज में डूबा हुआ है. ‘‘सच तो यह है कि वह खुद चाहता है कि मैं तुम्हारी जवानी से खेलूं, ताकि उसे कर्ज चुकाने के लिए थोड़ी और मुहलत मिल जाए.’’
‘‘नहीं, राजन ऐसा नहीं कर सकता,’’ काजल अपने पति पर भरोसा करते हुए बोली. ‘‘तुम्हें यकीन नहीं आता?’’ रजत उस का मजाक उड़ाते हुए बोला, ‘‘तो खुद जा कर दरवाजा चैक कर लो. तुम्हारे पति ने बाहर से दरवाजा बंद कर दिया है.’’
‘‘नहीं,’’ कह कर काजल दरवाजे की ओर भागी, पर शराब और वासना के नशे से जोश में आए एक मर्द से एक औरत कब तक बचती. रजत ने झपट कर उसे अपनी बांहों में उठाया और बिस्तर पर उछाल दिया. अब काजल संभलती हुई उस पर सवार थी. ऐसा करते हुए यह बात रजत के सपने में भी न थी कि उस का यह मजा आगे चल कर उस के लिए कितनी बड़ी मुसीबत खड़ी करने वाला है.
रजत के जाने के बाद जब राजन कमरे में आया, तो नकली गुस्सा और अपमान से भरी काजल बोली, ‘‘कैसे पति हो तुम? पति तो अपनी पत्नी की इज्जत की हिफाजत के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा देते हैं, पर तुम ने तो अपना कर्ज उतारने के लिए अपनी पत्नी की इज्जत को ही दांव पर लगा दिया?’’ बदले में राजन मुसकराते हुए बोला, ‘‘काजल, कुछ पल रजत के साथ बिताने के एवज में अब हमें उस के कर्ज से जल्दी ही छुटकारा मिल जाएगा.’’
इस के तीसरे दिन जब रजत अपने पैसे मांगने राजन के घर पहुंचा, तो राजन ने उसे अपने मोबाइल फोन से बनाई वह वीडियो फिल्म दिखाई, फिर उसे धमकाता हुआ बोला, ‘‘रजत, अब तुम अपने पैसे भूल ही जाओ. अगर तुम ने ऐसा नहीं किया, तो मैं यह वीडियो क्लिप पुलिस तक पहुंचा दूंगा और तुम्हारे खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दूंगा कि तुम ने मेरी पत्नी के साथ बलात्कार किया है. इस के बाद पुलिस तुम्हारी क्या गत बनाएगी, इस की कल्पना तुम आसानी से कर सकते हो.’’ रजत हैरान सा राजन को देखता रह गया. उस के चेहरे से खौफ झलकने लगा था. वह चुपचाप राजन के घर से निकल गया.
इधर राजन ने उस के इस डर का भरपूर फायदा उठाया. इस वीडियो क्लिप को आधार बना कर वह रजत को ब्लैकमेल कर उस से पैसे ऐंठने लगा. रजत राजन की साजिश का शिकार जरूर हो गया था, पर वह भी कम शातिर न था. आखिर वह लाखों रुपए का कारोबार ऐसे ही नहीं चलाता था. उस ने इस मामले पर गहराई से विचार किया और राजन के हथियार से ही उसे मात देने की योजना बनाई.
अपनी योजना के तहत जब अगली बार राजन उस से पैसे वसूलने आया, तो रजत बोला, ‘‘राजन, तुम कब तक मुझे यों ही ब्लैकमेल करते रहोगे? आखिरकार तुम मेरे दोस्त हो, कम से कम इस बात का तो लिहाज करो.’’ ‘‘मैं पैसे के अलावा और किसी का दोस्त नहीं.’’
‘‘अगर मैं पैसे कमाने का इस से भी बड़ा जरीया तुम्हें बता दूं, तो क्या तुम मेरा पीछा छोड़ दोगे?’’ ‘‘क्या मतलब?’’ राजन की आंखों में लालच की चमक उभरी.
‘‘मेरी नजर में एक करोड़पति है, जिस की कमजोरी खूबसूरत और घरेलू औरतें हैं. अगर तुम बुरा न मानो, तो तुम काजल को उस के पास भेज दिया करो. इस से तुम हजारों नहीं, बल्कि लाखों रुपए कमा सकते हो.’’ लालच के चलते काजल और राजन रजत द्वारा फैलाए जाल में फंस गए.
अब रजत ने उस आदमी के साथ काजल के रंगीन पलों की वीडियो क्लिप बना ली और एक शाम जब पतिपत्नी उस के पास आए, तो यह फिल्म उन्हें दिखाई, फिर रजत बोला, ‘‘मैं जानता था कि तुम लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आओगे. सो, मैं ने यह खूबसूरत वीडियो क्लिप बनाई है. ‘‘अब अगर तुम ने भूल कर भी मेरे घर का रुख किया, तो इस वीडियो फिल्म के जरीए मैं यह साबित कर दूंगा कि तुम्हारी पत्नी देह धंधा करती है और इस की आड़ में लोगों को ब्लैकमेल करती है. तुम इस में उस की मदद करते हो. तुम न सिर्फ उस के दलाल हो, बल्कि एक ब्लैकमेलर भी हो.’’
यह सुन कर पतिपत्नी के मुंह से बोल न फूटे. वे हैरान हो कर रजत को देखते रहे, फिर अपना सा मुंह ले कर उस के घर से निकल गए.