जसोदा बेन के नरेंद्र मोदी आनंदी बेन की नजर में कुंआरे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शादीशुदा हैं. उन की शादी साल 1968 में जसोदा बेन से हुई थी. 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त चुनाव आयोग को दी गई जानकारी में खुद नरेंद्र मोदी ने जसोदा बेन से अपनी शादी की बात मानी थी. देशवासी, खासतौर से मोदीभक्त, जानते हैं कि देशसेवा की खातिर उन्होंने अपनी पत्नी को छोड़ दिया था.

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी की शादी और पत्नी को छोड़ने को ले कर अकसर आरोपप्रत्यारोप के दौर से देशवासी दोचार होते रहे हैं. मोदी ही हर मुमकिन कोशिश जिन 2 बातों से बचने की होती है उन में पहली उन की शैक्षणिक डिगरी और दूसरी उन की शादी है.

उलट इस के, जसोदा बेन कभीकभी अपने पति मोदी को याद करते जज्बाती हो उठती हैं और उन की सलामती व कामयाबी के लिए व्रतउपवास भी करती रहती हैं. यह उन की समझदारी और बड़प्पन ही कहा जाएगा कि उन्होंने छोड़ने के बाबत नरेंद्र मोदी को न कभी कोसा और न ही उन पर कोई इलजाम लगाया.

कई साक्षात्कारों में जसोदा बेन बता चुकी हैं कि शादी के बाद वे कुछ महीने ही ससुराल में रही थीं और पति के साथ तो उन्होंने कुल 3 दिन ही गुजारे. ससुराल वालों की भलमनसाहत की वे तारीफ करती हैं. वे यह भी बता चुकी हैं कि नरेंद्र मोदी ने उन से कहा था, ‘तुम अभी छोटी हो, अपनी पढ़ाई जारी रखो, मैं देशसेवा के लिए जा रहा हूं.’ और इस के बाद वे हिमालय की तरफ चले गए थे. पत्नी को छोड़ने के कुछ समय बाद नरेंद्र मोदी आरएसएस से जुड़ गए और फिर कभी उन्होंने पत्नी की सुध नहीं ली कि वह किस हाल में है.

इधर, परित्यक्ता जसोदा बेन को समझ आ गया कि पति, घरगृहस्थी और बालबच्चों का सुख उन की जिंदगी में नहीं है, तो उन्होंने गुजरात के धोलका से अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर सरकारी स्कूल में टीचर बन गईं. वे साल 2010 में रिटायर हो गई हैं.

पति के प्रधानमंत्री बनने पर उन्होंने खुशी जताई थी, लेकिन बाद में कई परेशानियों से उन्हें रूबरू होना पड़ा था. प्रधानमंत्री की पत्नी होने के नाते उन्हें जबरन सिक्योरिटी दे दी गई तो वे एक दफा इस बात पर सार्वजनिक रूप से झल्लाई थीं कि अकसर सुरक्षाकर्मियों का खर्च उन्हें ही उठाना पड़ता है.

कई मौकों पर भावुक हो कर जसोदा बेन ने मीरा की तर्ज पर पति को भक्तिभाव से याद किया, लेकिन नरेंद्र मोदी हमेशा खामोशी ओढ़े रहे. यह उन की जिद, मजबूरी और आत्मग्लानि (अगर हो तो) ही कही जाएगी, लेकिन जसोदा बेन के अपनी पत्नी होने से वे कभी मुकर नहीं पाए.

पिछले साल सर्दी में जसोदा बेन राजस्थान में एक सड़क दुर्घटना में घायल हुई थीं, तब भी मोदी ने उन के हालचाल पूछने या जानने की औपचारिकता भी नहीं निभाई.

लेकिन ये कहती हैं

मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन ने मध्य प्रदेश के हरदा जिले के टिमरनी में पिछले दिनों यह कहते सनाका सा खींच दिया कि नरेंद्र मोदी अविवाहित हैं, उन्होंने कभी शादी नहीं की. इस संबंध में आनंदी बेन का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

वीडियो में वे एक सरकारी कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं से यह कहती नजर आ रही हैं कि पूरी दुनिया जानती है कि आप के और आप के बच्चों के लिए नरेंद्र भाई ने शादी नहीं की, लेकिन उन्हें यह पता है कि डिलिवरी के वक्त और बाद में महिलाओं व बच्चों को क्याक्या परेशानियां होती हैं, इसलिए उन्होंने महिलाओं के लिए इतनी योजनाएं बनाई हैं.

यह हर कोई जानता है मध्य प्रदेश की मौजूदा राज्यपाल आनंदी बेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चहेती हैं, जिन्हें मोदी ने दिल्ली जाने से पहले गुजरात के मुख्यमंत्री पद की कुरसी सौंपी थी. आनंदी बेन का अब का यह सफेद झूठ किसी को हजम नहीं हो रहा है कि जो बात पूरी दुनिया जानती है उसे वे नहीं जानतीं कि नरेंद्र मोदी शादीशुदा हैं. अगर सबकुछ जानते हुए भी वे ऐसा कह रही हैं तो मान लेना चाहिए कि सूर्य पश्चिम से उगता है, पूर्व से नहीं.

सच पर संशय

हैरानी इस बात की भी है कि इस झूठ पर हर कोई चुप रहा, यहां तक कि विपक्ष ने भी मौका नहीं भुनाया, जबकि मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. अगर आनंदी बेन के कहने से नरेंद्र मोदी शादीशुदा से कुंआरे हो जाते हैं तो विमर्श करना लाजिमी है कि वे क्यों नरेंद्र मोदी की वैवाहिक स्थिति या सच हजम नहीं कर पा रहीं.

सार्वजनिक रूप से कही इस बात के अगर कोई व्यक्तिगत माने नहीं हैं तो तकाजा यह है कि आनंदी बेन खेद व्यक्त कर लोगों और  जसोदा बेन से माफी मांगें और अगर वीडियो फर्जी है, जिस की उम्मीद न के बराबर है, तो उस की जांच की मांग करें.

ऐसे शक अकसर पौराणिक पात्रों को ले कर रहते हैं कि किस की शादी किस से हुई थी और हुई भी थी या नहीं. अगर आनंदी बेन की मंशा और मकसद नरेंद्र मोदी को एक संत और कुंआरा आदमी साबित करने की है तो वे जोरदार सैल्यूट की हकदार हैं. वैसे, नरेंद्र मोदी की जिंदगी से ताल्लुक रखते इस वाकए के जिक्र का न कोई मौसम था न दस्तूर, बस, एक मौका जरूर था जिस से आनंदी बेन चूकीं नहीं.

भोजपुरी हीरोईनों ने बिखेरा समुद्र किनारे हौटनेस का जलवा

भोजपुरी अदाकाराओं का न सिर्फ सिल्वरस्क्रीन पर जलवा है, बल्कि वे अपनी निजी जिंदगी में भी कहर बरपाने का काम करती रहती हैं. ऐसा ही कुछ भोजपुरी की टौप अभिनेत्री अंजना सिंह ने भी किया है. अंजना सिंह ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है. इस वीडियो में उनके साथ उनकी दोस्त और भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह भी हैं. वीडियो में आप देख सकते हैं कि समुद्र किनारे दोनों किस तरह से एक दूसरे के साथ मस्ती कर रही हैं.

अक्षरा सिंह और अंजना सिंह दोनों ही हौट पैंट्स में नजर आ रही हैं, और बीच पर दिलकश अंदाज में दौड़ लगा रही हैं. उनके दौड़ने के अंदाज और पूरे वीडियो को लेकर फैन्स क्रेजी हो गए हैं, और इस पर जमकर कमेंट भी कर रहे हैं. यही नहीं, इस वीडियो के साथ अंजना सिंह ने लिखा हैः “शर्त लगी थी खुशीयों को एक लफ्ज मे लिखने की….लोग किताबे ढूंढते रह गए, हमने “दोस्त ” लिख दिया…”

वैसे भी सिनेमा की दुनिया में हीरोइनों के बीच इस तरह की दोस्ती कम ही देखने को मिलती है. अकसर दो हीरोइनों के बीच कैट फाइट की ही खबरें आती हैं, लेकिन अंजना और अक्षरा सिंह ने सिद्ध कर दिया है कि दो हीरोइनों अच्छी दोस्त भी हो सकती हैं.

‘बाहुबली बिफोर द बिगनिंग’ का हुआ ऐलान, खुलेंगे कई राज

अब आपको एक बार फिर बाहुबली देखने का मौका मिलेगा. जी हां, सबसे ज्यादा सफल और ब्लौकबस्टर फिल्मों में शुमार फिल्म बाहुबली अब एक बार फिर लोगों का मनोरंजन करने के लिए आ रही है. अगर आप सोच रहे हैं कि बाहुबली बिगनिंग और बाहुबली कन्क्लूजन के बाद अब इसका तीसरा भाग आएगा तो आप गलत हो सकते हैं. क्योंकि ऐसा नहीं है हां लेकिन बाहुबली का प्रीक्वल जरूर बनाया जाएगा.

बात यह है कि इस बार बाहुबली की कहानी वेब सीरिज के माध्यम से बताई जाएगी. इस बात की घोषणा सोशल मीडिया पर एक बड़ी वेब सीरिज बनाने वाली कंपनी नेटफ्लिक्स ने की है. इसके बारे में ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा गया है बाहुबली बिफोर द बिगनिंग.

गौरतलब है कि फिल्म बाहुबली के 2 भाग बने थे और दर्शकों ने इन दोनों ही फिल्मों को पसंद किया था. इन फिल्म का निर्देशन एस एस राजमौली ने किया था. विशेष बात यह है कि दक्षिण भारत में बनी हुई इस फिल्म ने पूरे देशभर में धूम मचाया. इतना ही नहीं इस फिल्म के माध्यम से फिल्म अभिनेता प्रभास और राणा दुग्गाबाती की लोकप्रियता बढ़ी.

खास बात यह भी थी कि बाहुबली 2 की रिलीज से पहले एक सवाल हर किसी के जहन में था कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? इस सवाल का जवाब पाने के लिए बाहुबली2 का बेसब्री से इंतजार किया गया था. अब खबरों क् मुताबिक बाहुबली बिफोर द बिगनिंग में कई और राज खोले जाएंगे. ये शिवगंगा की कहानी से जुड़े कई राज को दर्शकों तक पहुंचाएगा.

भोजपुरी गाने पर इस लड़की ने किया जबरदस्त डांस

भोजपुरी फिल्म जगत के सुपरस्टार खेसारीलाल यादव की फिल्म ‘राजा जानी’ पिछले ही महीने सिनेमाघरों में रिलीज हुई. वैसे इस फिल्म के सभी गाने सुपरहिट हुए, लेकिन उसमें से एक गाना ‘वीडियो कैमरा वाला’ लोगों के बीच काफी मशहूर हुआ. इतना ही नहीं अब इस गाने का क्रेज युवाओं में बढ़ता दिख रहा है, और कइयों ने तो इस गाने पर अपने डांस का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया है. इसी क्रम में इन दिनों एक लड़की का इसी गाने पर डांस का वीडियो यूट्यूब पर काफी तेजी से देखा जा रहा है.

शिवी ठाकुर द्वारा पिछले महीने 31 जुलाई को अपलोड किए गए इस वीडियो को अब तक 1,051,818 बार देखा जा चुका है. बता दें, इस वीडियो में सिर्फ एक लड़की डांस करती हुई नजर आ रही हैं. इस लड़की ने ‘वीडियो कैमरा वाला’ पर इतना जबरदस्त डांस किया है कि लोगों को उनके डांस का हर एक स्टेप बेहद पसंद आ रहा है.

बेहद पसंद किया जा रहा है राजा जानी

भोजपुरी फिल्म ‘जिला चंपारण’ के बाद बौक्‍स औफिस पर एक बार फिर से सुपरस्‍टार खेसारीलाल यादव, निर्माता सुरेंद्र प्रसाद और निर्देशक लालबाबू पंडित का जलवा फिल्‍म ‘राजा जानी’ में देखने को मिल रहा है. यह फिल्‍म एक साथ बिहार-झारखंड, नेपाल, मुंबई और गुजरात के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. जिसे सभी शो हाउसफुल चल रहे हैं. ट्रेंड पंडितों के अनुसार, दर्शकों के पहले दिन के रेस्‍पांस और रुझान इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि फिल्‍म ‘राजा जानी’ खेसारीलाल की पिछली फिल्‍म ‘जिला चंपारण’ का रिकौर्ड तोड़ देगी.

वहीं दर्शकों के दिल में एक बार फिर से खेसारीलाल यादव उतर गए हैं. फिल्‍म देखने के बाद दर्शकों का कहना है कि खेसारीलाल यादव ने फिल्‍म ‘राजा जानी’ में कमाल की अभिनय की है. स्‍क्रीन पर वे बेहद इंटरटेंनिंग नजर आ रहे हैं. तो इमोशन और एक्‍शन में भी कम नहीं लग रहे. वे भोजपुरी सिनेमा की शान हैं. उनकी फिल्‍में का हमें इंतजार रहता है. बता दें कि फिल्‍म ‘राजा जानी’ को सेंसर बोर्ड ने भी U/A सर्टिफिकेट दिया था. इस वजह से फिल्‍म देखने के लिए लोग पूरे परिवार के साथ सिनेमाघरों में आ रहे हैं.बेस्ट एक्टर के खिताब से नवाजा गया.

अमीरों का देश से पलायन

भारत से अमीरों के दूसरे देशों में पलायन ने सरकार के सामने गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है. सोचने वाली बात यह है कि पलायन करने वाले अमीरों की संख्या में हर साल लगातार बढ़ोतरी हो रही है. वर्ष 2017 में 7 हजार अमीरों ने देश छोड़ा था. यह संख्या प्रतिशत में वर्ष 2016 से 16 प्रतिशत अधिक है.

न्यू वर्ल्ड वैल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में 7 हजार भारतीय अमीरों ने दूसरे देशों की नागरिकता हासिल की. 2016 में यह संख्या 6 हजार थी जबकि वर्ष 2015 में 4 हजार थी.

भारत के ही अमीर देश नहीं छोड़ रहे हैं बल्कि चीन भी इस मामले में अग्रणी है. वर्ष 2017 में चीन के 10 हजार अमीरों ने दूसरे देशों की नागरिकता ली थी. अन्य देशों में तुर्की से 6 हजार, ब्रिटेन से 4 हजार, फ्रांस से 4 हजार और रूस से 3 हजार अमीरों ने 2017 में दूसरे देशों की नागरिकता प्राप्त की.

मौर्गन स्टेनली इन्वैस्टमैंट मैनेजमैंट के चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट और इमर्जिंग मार्केट्स के प्रमुख रुचिर शर्मा के मुताबिक, भारत के 2.1 प्रतिशत अमीरों ने देश छोड़ा है, जबकि फ्रांस के 1.3 प्रतिशत और चीन के 1.1 प्रतिशत अमीरों ने दूसरे देशों में शरण ली है.

कहां है पसंदीदा ठौर

भारतीय अमीर सब से ज्यादा अमेरिका की नागरिकता लेना चाहते हैं.   आंकड़ों से पता चलता है कि इस के बाद उन की प्राथमिकता यूएई, कनाडा, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड आदि देश हैं, जबकि चीन के अमीर अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि देशों की नागरिकता हासिल करना चाहते हैं. गौरतलब है कि भारत और चीन के जितने अमीर हर साल पलायन करते हैं, लगभग उतने ही नए अमीर हर साल पैदा भी हो जाते हैं.

सवाल उठना लाजिमी है कि जिस देश में लोग अमीर बने हैं, उसी देश को वे क्यों छोड़ रहे हैं. इस का जवाब जानने के लिए सरकार ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के 5 सदस्यों की एक समिति बनाई है. यह समिति यह पता करेगी कि अमीर भारत छोड़ कर विदेश क्यों जा रहे हैं. साथ ही, इस समिति को यह भी जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह ऐसा माहौल तैयार करें जिस से विदेश गए अमीर स्वदेश वापस लौट आएं और फिर कभी देश से पलायन के बारे में न सोचें.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अनुसार, अमीरों के दूसरे देशों में पलायन करने से कर संबंधी जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं. इस समिति का काम ऐसे सभी पहलुओं पर विचार करना और इस संबंध में समुचित नीति बनाने के लिए सुझाव देना भी है.

ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज कंपनी मौर्गन स्टैनली की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 से ले कर अब तक 23 हजार अमीर देश छोड़ कर विदेश जा चुके हैं.

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पलायन से विकास प्रभावित

क्या अमीरों को देश में कारोबार करने में परेशानी आ रही है? क्या देश की कर प्रणाली उन के कारोबार के अनुकूल नहीं है? क्या वे सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधारों से सकारात्मक उम्मीद नहीं रखते हैं? क्या उन के कारोबार में बढ़ोतरी नहीं हो रही है? ऐसे कई प्रश्न हैं जिन के सही जवाब सरकार द्वारा गठित समिति को खोजने होंगे.

वैसे लगता है कि कई अमीर कर से बचने के लिए पलायन विदेश कर रहे हैं, क्योंकि मोदी सरकार ने कर चोरों पर सख्ती करनी शुरू दी है. इस में दोराय नहीं है कि कुछ बड़े कारोबारी जरूर अच्छे कारोबारी माहौल की खोज में दूसरे देश की नागरिकता ले रहे हैं, लेकिन अधिकांश अपने काले कारनामों को छिपाने या जांच एजेंसियों व अदालत की कार्यवाही से बचने के लिए दूसरे देशों में पलायन कर रहे हैं.

देश के विकास के लिए देशी और विदेशी दोनों तरह के निवेश की दरकार है. देश का विकास केवल विदेशी निवेश से नहीं हो सकता. देशी निवेश की भी अहम भूमिका होती है. भारत से बड़े कारोबारियों का अगर इसी तरह से देश से पलायन होता रहेगा तो देश में निवेश कहां से आएगा.

घरेलू निवेश के बिना देश का विकास समुचित तरीके से नहीं हो सकता. बड़े कारोबारी जब देश में कारोबार करेंगे तभी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, कारोबारी गतिविधियों में तेजी आएगी, उद्योगधंधों का विकास होगा, नए उत्पादों का निर्माण होगा, विविध उत्पादों की मांग में इजाफा होगा, कर्ज की मांग बढ़ेगी और बाजार का विस्तार होगा. बड़े कारोबारियों के विदेश जाने से देश का नुकसान हो रहा है, जबकि दूसरे देशों को फायदा.

देशों के खजानों में इजाफा

आजकल भारतीय अमीर डोमिनिका, सैंट लूसिया, एंटीगुआ, ग्रेनाडा, सैंट किट्स, माल्टा या साइप्रस जैसे देशों की नागरिकता ले रहे हैं. कुछ देश 3-4 महीने के लिए नागरिकता की एवज में अमीरों से 1 से 2.4 लाख रुपए वसूल करते हैं. इस तरह से नागरिकता हासिल करने वालों की संख्या में बीते साल 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि जुलाई 2017 से फरवरी 2018 के बीच इस तरह से नागरिकता लेने वाले अमीरों की संख्या में 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

कम खर्च में नागरिकता मिलने या ज्यादा परेशानी न होने की वजह से भारतीय अमीर कौमनवैल्थ औफ डोमिनिका और सैंट लूसिया सरीखे कैरिबियाई आइलैंड्स की नागरिकता लेने को इच्छुक रहते हैं. दूसरी बात यह है कि इन देशों के पासपोर्ट से ब्रिटेन, सिंगापुर, मलयेशिया, हौंगकौंग सहित 120 देशों में बिना वीजा के यात्रा की जा सकती है.

हां, इन सुवधिओं के एवज में नए नागरिकों को वहां के सरकारी खजाने में एक लाख डौलर जमा कराना होता है. एंटीगुआ जैसे देश तो ज्यादा कमाई करने के लिए सरकारी खजाने में 50 हजार डौलर यानी रुपए में लगभग 34 लाख, जमा करने वाले अमीरों को फटाफट नागरिकता दे रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि ऐसे देशों में विदेशी आय, कैपिटल गेन, गिफ्ट, उत्तराधिकार में मिली संपत्ति आदि पर कोई कर नहीं लगता है. चीन में जिन अमीर भारतीयों का कारोबार है, वे ग्रेनाडा की नागरिकता हासिल कर रहे हैं, क्योंकि यह एक ऐसा कैरिबियाई देश है जिस का पासपोर्ट रहने पर चीन जाने के लिए वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ती है. ग्रेनाडा भारतीय अमीरों से 2 लाख डौलर ले कर नागरिकता मुहैया करा रहा है.

परिवारों को भी सुरक्षा

चूंकि भारत दोहरी नागरिकता की इजाजत नहीं देता है, इसलिए वैसे भारतीय अमीर, जो अपने परिवार की सुरक्षा चाहते हैं, थाईलैंड और पुर्तगाल की नागरिकता लेने की कोशिश करते हैं, क्योंकि इन देशों में परिवारों को भी सुरक्षा मुहैया कराई जाती है. साइप्रस एक ऐसा देश है जो पूरे परिवार को 6 महीने के भीतर नागरिकता देता है, लेकिन इस के लिए इच्छुक उम्मीदवार को कम से कम 20 लाख डौलर रियल एस्टेट में 3 साल के लिए निवेश करना होता है. हंगरी की नागरिकता सस्ती होने के कारण भारतीय अमीर वहां की नागरिकता लेने में भी रुचि ले रहे हैं.

नियमों और नैतिकता की बात करें तो कोई भी देश वैसे व्यक्ति को नागरिकता नहीं दे सकता है जो बैंक का कर्ज न चुकाने का दोषी है या फिर जिस ने कर चोरी की है या अपराधी है. आमतौर पर दूसरे देश के अधिकारियों को नागरिकता लेने वाले उम्मीदवार के बारे में कोई खास जानकारी नहीं होती है और नागरिकता पाने का इच्छुक उम्मीदवार अपनी कारगुजारियों के बारे में बताता नहीं है. ऐसे में दूसरे देशों को ऐसे तमाम मामलों की जानकारी नहीं हो पाती है और एक बार नागरिकता मिलने के बाद ऐसे मामलों का खुलासा होने पर भी उन के खिलाफ कोई भी कार्यवाही संभव नहीं हो पाती.

वास्तव में अमीरों का पलायन एक गंभीर मसला है जिस के दो पहलू हैं. पहला, अगर कोई बड़ा कारोबारी देश में मौजूदा व्यवस्था से असंतुष्ट हो कर देश छोड़ रहा है तो यह निश्चितरूप से चिंता की बात है. दूसरा, अगर कोई अमीर कर चोरी या धोखाधड़ी या बैंक का लोन चुकाए बिना या फिर कोई अपराध करने के बाद दूसरे देश की नागरिकता हासिल कर रहा है तो यह और भी ज्यादा चिंता की बात है. दोनों स्थितियां देश के लिए अच्छी नहीं हैं. ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह जल्दी से जल्दी अमीरों के पलायन को रोकने की कोशिश करे और जरूरत के अनुसार सुधारात्मक उपायों को लागू करे.

इस अभिनेत्री ने लिया Kiki चैलेंज

बता दें कि पिछले कुछ समय से Kiki चैलेंज ने सोशल मीडिया पर धूम मचा रखी है. हौलीवुड, बौलीवुड के साथ साथ टीवी सेलब्स भी Kiki चैलेंज के रंग में रंगे हुए हैं. Kiki चैलेंज एक डांस चैलेंज है जिसमें आपको अपनी चलती कार से उतरकर मशहूर सिंगर ड्रेक के गाने In My Feelings पर परफौर्म करना होता है. वहीं मुंबई पुलिस ने इस चैलेंज को खतरनाक बताते हुए इसे न करने की चेतावनी दी है.

लेकिन श्रद्धा आर्या जो कि ‘कुंडली भाग्य’ में प्रीता के रोल में दिखाई दे रही हैं, उन्होंने मुंबई पुलिस की चेतावनी के बावजूद सड़क पर kiki चैलेंज लिया है. इतना ही नहीं मुंबई पुलिस की चेतावनी को नजरअंदाज कर उन्होंने अपना ये डांस वीडियो इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. हालांकि श्रद्धा ने ये चैलेंज लेने के बाद लोगों को इसे ट्राइ न करने की चेतावनी भी दी है.

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श्रद्धा ने वीडियो पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा है- ‘इसे व्यस्त सड़को पर कभी भी करने की कोशिश न करें. इसे करना खतरनाक है. मैं तो ये कहूंगी कि इसे बिल्कुल ट्राई न करें. हम फिल्म बिजनेस में हैं इसलिए हमें पता है कि इन सभी चीजों को सुरक्षित रुप से कैसे करना चाहिए.’

मौत के रहस्य में लिपट गई अर्पिता तिवारी

मायानगरी मुंबई के मलाड में 24 वर्षीय मशहूर टीवी एंकर, गायिका और अभिनेत्री अर्पिता तिवारी मीरा रोड स्थित एक फ्लैट में अकेली रहती थी. वह काफी बिंदास और जिंदादिल युवती थी और अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती थी. अपने काम में किसी का हस्तक्षेप करना या उस पर बंदिश लगाना उसे पसंद नहीं था. वह खुले आसमान में आजाद पक्षियों की तरह उड़ना चाहती थी.

त्रिवेणीनाथ तिवारी की 3 बेटियों में से वह सब से छोटी थी. बिगबौस सीजन-4 की विजेता, टीवी एंकर और भोजपुरी फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी उन की सब से बड़ी बेटी है. श्वेता तिवारी अपने पति अभिनव कोहली और 2 बेटियों के साथ रहती हैं. वहीं त्रिवेणीनाथ तिवारी पत्नी निर्मला और मंझली बेटी विनीता के साथ मुंबई के घोड़ाबांधा के सरस्वती अपार्टमेंट में रहते थे.

हाईसोसायटी और हाइफाइ लाइफस्टाइल में जीने वाली अर्पिता तिवारी ने 9 दिसंबर, 2017 की सुबह तकरीबन 11 बजे पिता त्रिवेणीनाथ तिवारी को फोन कर के बताया कि वह एक इवेंट के लिए एस्सेल टावर जा  रही है. वहां कुछ जरूरी काम है, काम निपटा कर वह शाम तक लौट आएगी. वैसे भी अर्पिता जब भी घर से कहीं बाहर जाती थी तो पिता को जरूर सूचित करती थी. उस दिन भी घर से निकलते समय उस ने उन्हें बता दिया था.

देर रात 11 बजे तक जब अर्पिता का फोन नहीं आया तो त्रिवेणीनाथ थोड़े चिंतित हुए. उन का मन नहीं माना तो बेटी को फोन किया. अर्पिता घर लौट आई थी, उस ने पिता का फोन रिसीव कर के बताया कि वह घर आ चुकी है और डिनर भी कर लिया है, अब सोने जा रही है. बेटी का हालचाल मिल जाने के बाद त्रिवेणीनाथ को तसल्ली हो गई तो वह भी पत्नी के साथ सोने के लिए चले गए.

अगले दिन यानी 10 दिसंबर, 2017 की सुबह करीब 9 बजे त्रिवेणीनाथ तिवारी की मंझली बेटी विनीता के फोन पर एक काल आई. उस समय विनीता अपने औफिस में थी. फोन की स्क्रीन पर डिसप्ले हो रहे नंबर को देखा तो वह पहचान गई कि वह वह काल छोटी बहन अर्पिता के बौयफ्रैंड पंकज जाधव की है. विनीता ने काल रिसीव की तो पंकज ने उस से पूछा, ‘‘अर्पिता घर पर है?’’

यह सुन कर विनीता चौंक गई. उसे बड़ा अटपटा लगा कि वह यह बात क्यों पूछ रहा है. उस ने कहा, ‘‘वह घर पर है या नहीं, मुझे नहीं पता. लेकिन मैं पापा से पूछ कर अभी बताती हूं.’’

आधे घंटे बाद फिर पंकज का फोन आया. विनीता काल रिसीव करते हुए बोली, ‘‘सौरी पंकज, काम में बिजी थी. पापा से बात नहीं कर पाई. तुम कुछ टाइम दो, मैं अभी पापा से बात करती हूं.’’

‘‘रहने दो, अब इस की जरूरत नहीं है.’’ पंकज जाधव बोला.

‘‘क्या मतलब, तुम्हें अर्पिता की खबर मिल गई?’’ विनीता ने पूछा.

‘‘हां, मुझे खबर मिल गई है.’’ पंकज जाधव मायूस से स्वर में बोला.

‘‘क्या बात है पंकज, आज तुम्हारी जुबान कैसे लड़खड़ा रही है?’’

‘‘बात ही कुछ ऐसी है विनीता, तुम भी सुनोगी तो चक्कर खा जाओगी.’’

‘‘पहेलियां मत बुझाओ पंकज, सीधेसीधे बताओ कि तुम कहना क्या चाहते हो?’’

‘‘विनीता, एक बुरी खबर है.’’

‘‘बुरी खबर है…’’ विनीता घबरा गई, ‘‘कैसी बुरी खबर? जल्दी बताओ, ये मजाक का समय नहीं है.’’

‘‘अर्पिता अब इस दुनिया में नहीं रही. उस ने 15वीं मंजिल से कूद कर आत्महत्या कर ली है.’’

‘‘क्या बकवास कर रहे हो तुम, होश में भी हो, इस तरह की बात कर रहे हो. कहीं तुम ने सुबहसुबह चढ़ा तो नहीं ली?’’ विनीता घबराते हुए बोली.

‘‘मैं नशे में नहीं, पूरे होश में हूं.’’ पंकज जाधव ने सफाई देते हुए कहा, ‘‘विनीता, मैं सच बोल रहा हूं, अर्पिता ने बिल्डिंग से कूद कर जान दे दी है.’’

‘‘ये सब कब और कैसे हुआ?’’ विनीता ने खुद को संभालते हुए सवाल किया.

‘‘मलाड की मानवस्थल बिल्डिंग से…’’

इस के बाद पंकज जाधव पूरी कहानी बताता चला गया.

अर्पिता की मौत ने तिवारी परिवार को हिला दिया

बहन की मौत की सूचना पा कर विनीता का माथा घूम गया. उस के दिमाग ने काम करना बंद कर दिया. वह समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे. थोड़ी देर बाद जब उस ने खुद को संभाला तो पिता के पास फोन करने के बजाए बड़ी बहन श्वेता तिवारी को फोन किया. उस ने उसे पूरी बात बता दी. विनीता ने पिता को अर्पिता की मौत की खबर इसलिए नहीं दी क्योंकि वह कुछ दिनों पहले ही पथरी का औपरेशन करवा कर अस्पताल से लौटे थे. श्वेता ने जब बहन की मौत की खबर सुनी तो वह भी सन्न रह गई.

विनीता श्वेता से मौके पर पहुंचने की बात कहते हुए औफिस से मलाड स्थित मानवस्थल के लिए रवाना हो गई. तब तक अर्पिता की मौत की सूचना मालवणी थाने को मिल चुकी थी. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी दीपक देशराज टीम के साथ मौके पर पहुंच चुके थे. डीसीपी जोन-11 विक्रम देशमाने भी वहां पहुंच गए. अर्पिता की लाश बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर एसी डक्ट पर अर्द्धनग्न अवस्था में पड़ी मिली.

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अर्पिता कोई छोटीमोटी हस्ती नहीं थी. ग्लैमर की दुनिया का एक बेहतरीन नगीना थी वह. इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उस ने जी तोड़ मेहनत की थी. जीवन के सपनों को हकीकत में लाने के लिए उस ने दिनरात मेहनत की थी, तब कहीं जा कर वह टीवी एंकर, गायिका और हीरोइन बनी थी. उस की मौत की खबर पूरे बौलीवुड में फैल गई.

अर्पिता की मौत की सूचना मिलते ही बौलीवुड के तमाम कलाकार मौके पर पहुंच चुके थे. विनीता के अलावा श्वेता भी अपने पति अभिनव कोहली के साथ मौके पर पहुंच चुकी थीं. पुलिस अपने काम में जुटी थी. लाश की अवस्था देख कर यही अनुमान लगाया जा रहा था कि अर्पिता के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसे ऊपर से फेंक दिया गया होगा. लेकिन शव नीचे आने के बजाय दूसरी मंजिल पर एसी डक्ट पर आ गिरा. पुलिस ने अनुमान लगाया कि निश्चय ही इस घटना को अंजाम देने में एक से अधिक लोग शामिल रहे होंगे.

कागजी खानापूर्ति पूरी कर के पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. श्वेता और विनीता दोनों बहनों ने साफसाफ कहा कि अर्पिता खुदकुशी नहीं कर सकती. वह बेहद जिंदादिल इंसान थी. अपने सपनों के साथ जीती थी. सपनों को हासिल करने के लिए जीतोड़ संघर्ष करती थी. उस का मर्डर हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि अर्पिता के प्रेमी पंकज जाधव का उस की हत्या में हाथ संभव है.

अर्पिता की मौत की खबर दोनों बहनें अपने पिता से भला कब तक छिपा कर रख सकती थीं. यह बात आखिर उन्हें पता लगनी ही थी, इसलिए उन्होंने पिता को भी यह सूचना दे दी. त्रिवेणीनाथ ने जैसे ही यह खबर सुनी, वे धम्म से बिस्तर पर जा गिरे. निर्मला देवी भी बेसुध हो कर बैठ गईं.

त्रिवेणीनाथ की समझ में यह नहीं आ रहा था कि जब देर रात 11 बजे अर्पिता से उन की बात हुई थी तो उस समय उस ने खुद को अपने फ्लैट में मौजूद होने की बात कही थी. फिर वह कब और कैसे मानवस्थल बिल्डिंग पहुंच गई. यह बात उन्हें परेशान कर रही थी.

उन्होंने यह सच्चाई जब बेटियों को बताई तो वे चौंके बिना नहीं रह पाईं. वाकई मामला पेचीदा और रहस्यमय बन गया था. जिस मंजिल पर अर्पिता की लाश मिली थी, उसी मंजिल पर उस के प्रेमी पंकज जाधव का फ्लैट था. इन दिनों अर्पिता और पंकज के बीच प्रेम संबंधों को ले कर विवाद चल रहा था.

श्वेता तिवारी का आरोप

अर्पिता पंकज से शादी करना चाहती थी, जबकि पंकज इस के लिए तैयार नहीं था. पिछले 8 सालों तक दोनों के बीच चले आ रहे प्रेम संबंध टूटने के कगार पर पहुंच चुके थे.

श्वेता तिवारी ने आरोप लगाया कि पंकज और अर्पिता के बीच अकसर लड़ाई होती रहती थी और दोनों जल्द ही अलग होना चाहते थे. अर्पिता की मौत किसी घटना का परिणाम है. यह न तो सुसाइड है और न ही एक्सीडेंट. यह सुनियोजित तरीके से रेप और मर्डर का मामला है. उस ने मांग की कि इस घटना में हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक कुछ भी कहने से बचने की कोशिश करती रही. 12 दिसंबर को अर्पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को मिल गई. रिपोर्ट ने उस की मौत को और रहस्यमय बना दिया था. एक ओर जहां परिवार वाले रेप के बाद हत्या का आरोप लगा रहे थे, वहीं अर्पिता की मौत के मामले में आई प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सभी को चौंका कर रख दिया.

रिपोर्ट के मुताबिक, उस के साथ किसी तरह की जोरजबरदस्ती नहीं की गई थी. लेकिन मौत की वजह मल्टीपल इंजरी बताई गई. ये इंजरी या तो कूदने की वजह से या फिर ऊपर से नीचे फेंकने की वजह से आई थीं. अर्पिता के सिर और शरीर के कई हिस्सों में चोट के गहरे निशान थे. यही नहीं, उस के खून में अल्कोहल की मात्रा भी पाई गई.

थानाप्रभारी इंसपेक्टर दीपक देशराज ने घटना की जांच शुरू की. घटनास्थल पर पहुंच कर उन्होंने बिल्डिंग के चौकीदार से पूछताछ की. चौकीदार ने उन्हें एक चौंकाने वाली जानकारी दी. उस ने बताया कि 9 दिसंबर की रात साढ़े 11 बजे के करीब अर्पिता अपने प्रेमी पंकज जाधव के साथ उस के फ्लैट पर आई थी. दोनों बहुत खुश थे. कमरे में जाते ही दोनों झगड़ने लगे. दोनों के बीच हाथापाई भी हुई थी. उस के बाद उन्होंने भीतर से दरवाजा बंद कर लिया. फिर क्या हुआ, कुछ पता नहीं चला.

पार्टी में ऐसा क्या हुआ था कि अर्पिता को मौत के मुंह में जाना पड़ा  पुलिसिया जांच पड़ताल में पता चला कि उसी रात पंकज जाधव के दोस्त और 3डी डिजाइनर अमित हाजरा, जोकि मानवस्थल बिल्डिंग में 15वीं मंजिल पर रहता है, ने अपने फ्लैट में एक पार्टी रखी थी. उस पार्टी में अर्पिता तिवारी, पंकज जाधव के अलावा अमित का पेइंगगेस्ट मनीष, उस का साथी श्रवण सिंह और कृष्णा मौजूद थे.

पार्टी भोर के 4 बजे तक चली थी. पार्टी में सभी ने जम कर ड्रिंक की थी. 4 बजे के बाद सभी सोने के लिए चले गए. पंकज जाधव, अर्पिता और अमित हाजरा हाल में जा कर सो गए, बाकी के 2 मनीष और कृष्णा कमरे में सोने चले गए. सुबह 9 बजे जब आंखें खुलीं तो वहां अर्पिता नहीं थी. खोजबीन करने पर उसी बिल्डिंग के दूसरी मंजिल पर उस की लाश डक्ट पर झूलती हुई मिली.

पुलिस ने कमरे की तलाशी ली तो कमरे में महंगी शराब की कई खाली बोतलें मिलीं. जांचपड़ताल से पता चला कि अर्पिता की मौत वाशरूम की खिड़की से गिरने से हुई थी. पुलिस ने जब वाशरूम का दरवाजा खोला तो वह भीतर से बंद था. फिर इस से अनुमान लगाया गया कि अर्पिता ने आत्महत्या के लिए वाशरूम की खिड़की तोड़ कर छलांग लगाई होगी. पुलिस वाशरूम का दरवाजा तोड़ कर भीतर दाखिल हुई. खिड़की के कांच के टुकड़े फर्श पर बिखरे पड़े थे, अब तक की परिस्थितियां आत्महत्या की ओर इशारा कर रही थीं.

जहां पुलिस अभिनेत्री अर्पिता तिवारी की मौत को एक हादसा मान कर चल रही थी, वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उस का नजरिया बदल गया. रिपोर्ट में मल्टीपल इंजरी यानी शरीर पर लगी जगहजगह चोट किसी और तरफ इशारा कर रही थी. यानी अर्पिता की मौत एक हादसा नहीं, बल्कि हत्या थी.

श्वेता जैसी बनना चाहती थी अर्पिता

त्रिवेणीनाथ तिवारी की तहरीर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मालवणी पुलिस ने मृतका के प्रेमी पंकज जाधव सहित 5 आरोपियों अमित हाजरा, श्रवण सिंह, मनीष जायसवाल और कृष्णा के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

जैसेजैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ती गई, वैसेवैसे अर्पिता की मौत का राज भी गहराता गया. पुलिस ने पांचों आरोपियों पंकज, अमित, श्रवण, मनीष और कृष्णा को थाने बुला कर उन से पूछताछ की.

एंकर अर्पिता तिवारी की रहस्यमयी मौत को तकरीबन एक महीना होने जा रहा था, लेकिन अभी तक मौत की वजह को ले कर पुलिस के हाथ खाली थे. इस गुत्थी को सुलझाने के लिए मुंबई पुलिस ने वारदात के दौरान अर्पिता के साथ मौजूद रहे पांचों लोगों का कलिना स्थित डाइरेक्टोरेट औफ फोरैंसिक साइंस लेबोरेटरी (डीएफएसएल) में लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया. डीएफएसएल स्टाफ ने पौलीग्राफी टेस्ट करने से पहले जांच करने वाले पुलिस अधिकारी से भी पूछताछ की.

5 लोग जिन में एक कुक भी था, उन्हें मालवणी पुलिस स्टेशन में बुला कर रोज पूछताछ की जा रही थी, लेकिन पुलिस पांचों आरोपियों द्वारा दिए गए बयानों की कडि़यों को मिलाने में नाकाम रही.

पुलिस ने इस मामले की गहराई से जांच की तो जो जानकारी सामने निकल कर आई, वह काफी दिलचस्प निकली.

24 वर्षीया अर्पिता त्रिवेणीनाथ तिवारी की 3 बेटियों में सब से छोटी और चुलबुली थी. तिवारीजी मूलत: झारखंड के जमशेदपुर जिले के रहने वाले थे. कालांतर में वे मुंबई में आ कर बस गए थे और घोड़ाबाधा के सरस्वती अपार्टमेंट में परिवार सहित रहने लगे थे.

बड़ी बेटी श्वेता तिवारी ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा तो उन की किस्मत के सितारे चमक उठे. एंकरिंग से कैरियर शुरू करने वाली श्वेता तिवारी ने कई धारावाहिकों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया. इस के बाद उन्होंने भोजपुरी फिल्मों में भी अभिनय कर के सफलता हासिल की.

बड़ी बहन की कामयाबी देख कर बचपन से ही अर्पिता के मन में भी फिल्मी दुनिया में जाने का शौक था. वह भी रुपहले परदे पर चमकते सितारों की तरह खुद दिखने के सपने देखने लगी थी. तब वह छोटी थी और जमशेदपुर के हिलटौप स्कूल में पढ़ती थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई में पिता के पास आ कर रहने लगी, जिस के बाद उस ने इवेंट मैनेजमेंट का कोर्स किया और एक्टिंग भी सीखी.

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इसी दौर में उसे टेलीविजन पर एंकरिंग करने का मौका मिल गया. यहीं से उस के कैरियर की शुरुआत हुई. कैरियर के पहले पायदान पर कदम रखते ही उस की किस्मत के सितारे बुलंद होते गए. धीरेधीरे अर्पिता आगे बढ़ती गई. उस ने ऐंकरिंग से मौडलिंग और मौडलिंग से फिल्मी दुनिया में पांव जमाए. सफलता उस के कदम चूमती गई. अपनी मेहनत से उस ने करोड़ों रुपए कमाए थे.

बात उन दिनों की है जब अर्पिता 16-17 साल की रही होगी. तब उस के जीवन में पंकज जाधव ने कदम रखा. अर्पिता ने उसे अपने दिल में बसा लिया. दोनों एकदूसरे से प्यार करते थे. पंकज जाधव उस के पड़ोस में ही रहता था. वह बेहद खूबसूरत और कसरती बदन का लड़का था.

श्वेता तिवारी ने बताया कि अर्पिता एक कामयाब लड़की थी. लाखों कमा रही थी. जबकि पंकज जाधव बेरोजगार था. वहअपनी कमाई से पंकज को जेबखर्च देती थी.

प्रेम संबंधों का खेल बना मूल कारण

धीरेधीरे अर्पिता के मांबाप और बहनों को उस के प्रेमसंबंधों के बारे में पता चल गया था. आधुनिक खयालातों के त्रिवेणीनाथ तिवारी ने बेटी को अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र छोड़ दिया था. उन्हें उस पर पूरा भरोसा था कि वह जीवन में कोई ऐसा गलत कदम नहीं उठाएगी, जिस से घर वालों को शर्मिंदगी उठानी पड़े.

बाद के दिनों में अर्पिता ने मीरा रोड पर एक फ्लैट ले लिया. पंकज जाधव ने भी मलाड कच्चा रोड स्थित मानवस्थल बिल्डिंग में एक फ्लैट ले लिया था. दोनों अपने परिवारों से अलग अपनेअपने फ्लैट में रहते थे. अर्पिता के इस फैसले से न तो त्रिवेणीनाथ तिवारी को आपत्ति हुई और न ही किसी और को. बल्कि घर वाले उस के फैसले से खुश थे.

धीरेधीरे अर्पिता और पंकज जाधव के रिलेशनशिप को 8 साल बीत चुके थे. पंकज जाधव जहां 8 साल पहले खड़ा था, आज भी वहीं था. उस के स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आया था. वह अर्पिता की कमाई पर ऐश कर रहा था.

अर्पिता पंकज पर शादी के लिए दबाव बना रही थी, जबकि वह शादी के लिए तैयार नहीं था. इन्हीं बातों को ले कर अकसर दोनों में झगड़ा भी हो जाता था. रोजरोज के झगड़े से अर्पिता ऊब चुकी थी. उस ने पंकज से अपने संबंधों को तोड़ने का फैसला कर लिया था.

अर्पिता की दोस्ती या प्यार पंकज जाधव से नहीं अमित हाजरा से था इस बीच दोनों के बीच एक नई कहानी ने जन्म ले लिया. इस कहानी में अर्पिता को चाहने वाला एक और प्रेमी आ गया जो अर्पिता को पंकज जाधव से कहीं ज्यादा प्यार करता था. वह कोई और नहीं, पंकज जाधव का दोस्त अमित हाजरा था. जिस बिल्डिंग में पंकज जाधव रहता था, उसी की 15वीं मंजिल पर अमित भी रहता था. पंकज के माध्यम से ही अमित का परिचय अर्पिता से हुआ था. बाद में मिलनसार अर्पिता से जल्द ही उस की दोस्ती हो गई.

अर्पिता और पंकज जाधव के रिश्ते टूटने और अलग हो जाने के बाद अमित की अर्पिता से ज्यादा नजदीकी हो गई. उस ने अर्पिता की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया. अर्पिता अमित की मंशा समझ गई थी. वह उस की ओर ध्यान देने के बजाय पंकज से संबंध सुधारने की कोशिश करने लगी. लेकिन पंकज अपनी आदतों में सुधार लाने को तैयार नहीं था.

घटना से करीब 4 दिन पहले अर्पिता और अमित हाजरा के बीच फेसबुक पर लंबी बातचीत हुई थी. अमित अर्पिता से संबंध बनाने के लिए उस पर दबाव बना रहा था. इस बात को ले कर दोनों के बीच खासा विवाद हुआ था. उस ने अर्पिता को देख लेने की धमकी तक दे डाली थी, लेकिन अर्पिता ने यह बात अपने तक ही सीमित रखी. घर में किसी को नहीं बताई.

बहरहाल, अब लौट कर क्राइम सीन पर आते हैं. एक महीने की जांचपड़ताल के बाद पार्टी में मौजूद रहे अमित के नौकर ने पुलिस के सामने चौंका देने वाला बड़ा खुलासा किया. उस ने उस रात अमित हाजरा को अर्पिता के कपड़े खोलते हुए देखा था. उस ने बताया कि 10 दिसंबर की सुबह करीब साढे़ 5 बजे उस की नींद खुली. उस ने देखा कि अमित अर्पिता के बेहद करीब सो रहा था. जबकि जब वे सोने गए थे तो तीनों अलगअलग सो रहे थे.

नौकर ने सब को चौंका दिया बयान दे कर  नौकर के मुताबिक उस ने उस दिन औरों के मुकाबले कम शराब पी थी, इसलिए उस की आंखें सुबह जल्दी खुल गईं. जब उस की आंखें खुलीं तो उस ने देखा कि अर्पिता के बगल में सोया अमित उस के कपड़े हटा रहा था. नौकर को जगा देख कर वह आंख बंद कर लेट गया. नौकर को लगा कि यह सब अर्पिता की मरजी से हो रहा है, इसलिए वह चुपचाप वहां से चला गया.

नौकर के बयान ने पुलिस को बुरी तरह उलझा दिया था. हालांकि जिस हालत में अर्पिता की लाश बरामद की गई थी, उसे देख कर यही लग रहा था कि उस के साथ दुष्कर्म किया गया होगा. लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सब का भ्रम तोड़ दिया. रिपोर्ट में अर्पिता के साथ कोई जोरजबरदस्ती वाली बात नहीं बताई. उस के बाद अर्पिता की मौत की गुत्थी उलझ कर रह गई. पुलिस अब भी उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने में जुटी हुई थी.

अर्पिता की मौत के बाद सभी दोस्तों ने बयान दिए थे कि अर्पिता ने खुदकुशी की है. मगर बाद में पुलिस ने इसे हत्या बताया था और अब चारों दोस्तों में से एक अमित हाजरा को 15 जनवरी, 2018 को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि जांच का दायरा बड़ा होने की बात कह कर पुलिस हत्या का मकसद अभी नहीं बता रही है.

पुलिस के मुताबिक अमित ने अलगअलग बयान बदले. पुलिस को दिए गए बयान और पौलीग्राफी टेस्ट में दिए गए बयान में अंतर पाया गया. पुलिस को शक है कि अमित हाजरा इस हत्याकांड में पुलिस को गुमराह कर रहा है. बस इसी आधार पर अमित हाजरा को गिरफ्तार किया गया है.

पुलिस ने पंकज जाधव को क्लीन चिट नहीं दी है. वह भी संदेह के दायरे में है. सबूत मिलने पर पंकज जाधव को भी गिरफ्तारी होगी. सूत्रों की मानें तो अमित हाजरा के बयान से पुलिस को कुछ ऐसे सबूत मिले हैं, जिस से हत्या में शामिल होने की पुष्टि होती है.

कथा लिखे जाने तक अमित हाजरा के वकील बी. हैटकर ने 8 फरवरी, 2018 को सेशन कोर्ट में उस की जमानत की अरजी दाखिल की, जो अदालत ने खारिज कर दी.

अमित अभी भी जेल में बंद है. बाकी के आरोपियों की जांच चल रही थी. पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही थी कि अर्पिता हत्याकांड में इन की भूमिका क्या है. फिलहाल कथा लिखे जाने तक पुलिस मौत की उलझी गुत्थी सुलझाने में जुटी हुई थी.

तांत्रिकों के जाल में दिल्ली

लोग चाहे कितने भी जागरूक हो गए हों, भले ही डिजिटल क्रांति आ गई हो लेकिन आज भी समाज में अंधविश्वास कायम है. कुछ अंधविश्वासी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए तांत्रिकों के पास पहुंचते हैं. तांत्रिक भी ऐसे लोगों की अंधी आस्था का लाभ उठाने से नहीं चूकते.

अंधविश्वास में डूबे ऐसे लोग आर्थिक शोषण के साथसाथ शारीरिक शोषण भी करा बैठते हैं. ऐसी बात नहीं है कि केवल अनपढ़ और निम्न तबके के लोग ही तांत्रिकों के पास पहुंचते हैं. सच्चाई तो यह है कि उच्च वर्ग के कई लोग भी तांत्रिकों की शरण में जाते हैं, मामूली पढ़ेलिखे नहीं बल्कि उच्चशिक्षित भी.

तथाकथित तांत्रिकों के चक्कर में फंस कर कई परिवार बरबाद हो चुके हैं, क्योंकि अपने स्वार्थ के लिए ये तांत्रिक कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं. दिल्ली के मंदिर मार्ग इलाके में एक तांत्रिक के क्रियाकलाप की ऐसी खौफनाक हकीकत सामने आई कि सुनने वाले का भी कलेजा कांप उठे.

सेंट्रल दिल्ली के थाना मंदिर मार्ग का एक इलाका है कालीबाड़ी, जो प्रसिद्ध बिड़ला मंदिर (लक्ष्मीनारायण मंदिर) के सामने है. वैसे इस इलाके में अधिकांशत: सरकारी फ्लैट बने हुए हैं, जिन में सरकारी कर्मचारी रहते हैं.

यहीं के एक फ्लैट में 44 साल की के.वी. रमा अपने पति डी.वी.एस.एस. शिव शर्मा (45 साल) और 2 बच्चों के साथ रहती थी. के.वी. रमा शर्मा भारत सरकार के एक मंत्रालय में स्टेनोग्राफर के पद पर नौकरी करती थी. जबकि पति शिव शर्मा डीएलएफ कंपनी में फाइनैंस मैनेजर थे. इस दंपति की बेटी 7वीं कक्षा में और बेटा 5वीं कक्षा में पढ़ रहे थे.

दोनों मियांबीवी कमा रहे थे, इसलिए घर पर हर महीने सैलरी के रूप में मोटी रकम आती थी. कुल मिला कर यह छोटा सा परिवार हर तरह से खुश और सुखी था.

कहते हैं जब किसी व्यक्ति के पास जरूरत से ज्यादा पैसा आने लगता है तो उस का दिमाग और ज्यादा सक्रिय हो जाता है. वह उस पैसे से और ज्यादा पैसे कमाने के उपाय खोजता है. शिव शर्मा भी अपने पैसे को और ज्यादा करने के उपाय खोजने लगे.

किसी ने उन्हें बताया कि शेयर मार्केट की कुछ कंपनियां ऐसी हैं, जिन में पैसे लगाने पर अच्छाखासा मुनाफा कमाया जा सकता है. यह बात शिव शर्मा को समझ आ गई. उन्हें शेयर मार्केट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, लिहाजा उन्होंने इंटरनेट से अच्छा लाभांश देने वाली कुछ कंपनियों के बारे में जानकारी हासिल कर ली.

इस के बाद उन्होंने उन कंपनियों के शेयर खरीदने शुरू कर दिए. शुरुआत में उन्हें फायदा हुआ तो उन की दिलचस्पी और बढ़ती गई. उन्होंने शेयर मार्केट में और ज्यादा पैसा लगाया. इस में उन्हें मिलाजुला अनुभव मिलने लगा. कुछ शेयरों ने लाभ दिया तो कुछ में उन्हें नुकसान भी हुआ. हो चुके नुकसान की भरपाई के लिए उन्होंने मोटा निवेश किया.

इस का नतीजा यह निकला कि उन्हें इस में भारी नुकसान हुआ. इस से उन की जमापूंजी तो चली ही गई, साथ ही उन पर कई लाख रुपए का कर्ज भी चढ़ गया. औफिस के लोगों से भी उन्होंने काफी पैसे उधार ले लिए थे. जिन लोगों से शिव शर्मा ने पैसे उधार ले रखे थे, उन के पैसे समय पर नहीं लौटाए तो उन्होंने तकादा करना शुरू कर दिया. कुछ लोग पैसे मांगने उन के फ्लैट तक आने लगे.

फलस्वरूप शिव शर्मा तनाव में रहने लगे. पत्नी के.वी. रमा को भी लोगों की तकादा करने वाली बात अच्छी नहीं लगती थी. शिव शर्मा कर्ज निपटाने के लिए पत्नी से पैसे मांगते थे. उन का कर्ज उतारने में पत्नी भी सहयोग कर देती थी. इन सब बातों को ले कर पतिपत्नी में नोंकझोंक होने लगी. शिव शर्मा तनाव की वजह से चिड़चिड़े हो गए थे, इसलिए वह गुस्से में पत्नी की पिटाई कर देते थे.

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घर में शुरू हो गई कलह

नतीजतन जिस घर में पहले सभी लोग शांति से रहते थे, अब वहां कलह ने डेरा डाल लिया था. पत्नी सरकारी कर्मचारी थी, वह अच्छीखासी सैलरी पाती थी, इसलिए वह पति की तनाशाही सहने के बजाय करारा जवाब दे देती तो पति उस पर हाथ छोड़ देता.

के.वी. रमा महसूस करने लगी कि पति की वजह से ही वह शारीरिक और मानसिक समस्या से जूझ रही है. उधर शिव शर्मा लोगों के तकादे से परेशान थे. वह पत्नी से और पैसे मांगते तो वह मना कर देती कि अब उसे फूटी कौड़ी नहीं देगी.

एक दिन रमा ने अपने एक जानकार से अपने घर की समस्या के बारे में चर्चा की. उस जानकार ने बताया कि आप के पति पर किसी ऊपरी हवा का चक्कर हो सकता है. ऐसे में अगर किसी तांत्रिक से मिला जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है.

रमा इस तरह के अंधविश्वास से दूर रहती थी. हालांकि उस ने कई सार्वजनिक स्थानों पर तांत्रिकों के पैंफ्लेट चिपके देखे थे, जिन में हर तरह की समस्या का समाधान कुछ घंटों में करने की बात लिखी होती थी. इस के अलावा लोकल केबल चैनल पर भी ऐसे तांत्रिकों के विज्ञापन देखे थे.

रमा तंत्रमंत्र, टोनेटोटकों आदि को केवल ढकोसला समझती थी. पर अब जब उन के एक जानकार ने घर की समस्या के बारे में तांत्रिक के पास जाने की सलाह दी तो रमा ने भी सोचा कि अगर घर का तनाव किसी तांत्रिक के पास जाने से ठीक हो जाए तो तांत्रिक के पास जाने में कोई बुराई नहीं है. यानी जिस बात को वह अंधविश्वास और ढकोसला बताती थी, अब जरूरत पड़ने पर वह उसी पर विश्वास करने लगी.

करना पड़ा तंत्रमंत्र पर विश्वास

रमा किसी तांत्रिक को नहीं जानती थी, उस के जानकार ने दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके रहने वाले तांत्रिक श्याम सिंह उर्फ भगतजी के बारे में बताया. उस से पता ले कर वह तथाकथित तांत्रिक श्याम सिंह के पास पहुंच गई. तांत्रिक ने सब से पहले बातों बातों में रमा से उस के परिवार की आर्थिक स्थिति को समझा. इस के बाद रमा ने पति के बारे में एकएक बात तांत्रिक को बता दी.

रमा की बात सुनने के बाद तांत्रिक ने अपनी आंखें मूंद लीं और अपनी गद्दी पर बैठेबैठे ही बोला, ‘‘आप के पति के साथ किसी ने कुछ कर दिया है, जिस की वजह से वह घर का एकएक सामान बेच देंगे. यानी वह घर की बरबादी कर के रहेंगे.’’

‘‘भगतजी, इस का उपाय क्या है. मैं चाहती हूं कि वह शेयर बाजार से एकदम दूर हो जाएं. इस शेयर बाजार ने तो हमारे घर की सुखशांति सब छीन ली है.’’ रमा ने कहा.

‘‘देखो, मैं समाधान तो कर दूंगा. वह शेयर में पैसे भी नहीं लगाएंगे, साथ ही बदसलूकी भी नहीं करेंगे. लेकिन इस में करीब एक लाख रुपए का खर्च आएगा.’’ तांत्रिक बोला.

‘‘कोई बात नहीं, हम आप को यह रकम दे देंगे. लेकिन हमें समस्या का समाधान चाहिए.’’ रमा ने कहा.

‘‘आप इस की चिंता न करें. आप हमारे रिसैप्शन पर 30 हजार रुपए जमा करा दीजिए, जिस से हम अपना काम शुरू कर सकें.’’ तांत्रिक ने कहा तो रमा ने पैसे रिसैप्शन पर बैठी लड़की को दे दिए.

वह इस विश्वास से घर चली आईं कि अब समस्या दूर हो जाएगी.

तांत्रिक ने कुछ मंत्र बुदबुदाने के बाद रमा को भभूत देते हुए कहा, ‘‘लो यह भभूत, तुम 7 शनिवार तक पति को शाम के खाने में मिला कर दे देना, सब कुछ ठीक हो जाएगा. ध्यान रखना केवल शनिवार को ही देना. इसे खाने में तब मिलाना जब मिलाते समय कोई टोके नहीं.’’

‘‘ठीक है भगतजी, मैं ऐसा ही करूंगी.’’ कह कर रमा घर चली आई. तांत्रिक के कहे अनुसार रमा ने ऐसा ही किया. वह हर शनिवार को शाम के खाने में पति के खाने में तांत्रिक द्वारा दी गई भभूत मिला कर देने लगी थी. उसे उम्मीद थी कि भभूत अपना असर जरूर दिखाएगी. पर 4-5 सप्ताह बाद भी पति के व्यवहार में कोई फर्क नहीं पड़ा तो रमा ने तांत्रिक को फोन किया. जवाब में तांत्रिक ने कहा कि 7 शनिवार होने दो, पूरा असर होगा. इस बीच रमा तांत्रिक से फोन पर बात करती रहती थी.

किसी तरह शिव शर्मा को इस बात का आभास हो गया था कि उस की पत्नी किसी तांत्रिक के पास जाती है. शिव शर्मा ने पत्नी से इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा.

7 शनिवार पति को भभूत खिलाने के बाद भी पति पर कोई असर नहीं हुआ तो रमा तांत्रिक के पास पहुंची. तांत्रिक ने फिर दूसरी भभूत दी.

इतना ही नहीं, तांत्रिक से उस के फ्लैट पर पूजा, हवन भी कराया. निश्चित दिनों तक भभूत खिलाने के बाद भी पति की आदतों में कोई फर्क नहीं पड़ा तो रमा फिर से तांत्रिक से मिली. चूंकि वह पति से अब ज्यादा ही परेशान हो चुकी थी, इसलिए उस ने तांत्रिक से शीघ्र समाधान करने के लिए कहा.

बना लिया मारने का प्लान

इस पर तांत्रिक ने रमा से कहा कि अब तो इस के लिए आरपार की लड़ाई लड़नी पड़ेगी. रमा ने भी कह दिया कि पति के स्थाई निदान के लिए वह तैयार है. इस के बाद तांत्रिक ने एक बोतल पानी में कुछ घोल कर दे दिया.

तांत्रिक श्याम सिंह उर्फ भगतजी मूलरूप से उत्तराखंड का रहने वाला था. वह दक्षिणपुरी में किराए के मकान में पिछले दोढाई साल से अपना धंधा चला रहा था.

वह पहाड़ों से कुछ जड़ीबूटियां लाता रहता था. उन में से ही कोई बूटी उस ने बोतल के पानी में घोल कर रमा को दे दी थी. घर पहुंच कर रमा ने एक गिलास में बोतल का पानी पति को देते हुए कहा, ‘‘लो, यह बाबाजी का दिया हुआ प्रसाद है. इसे पी लो, सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी.’’

पत्नी के विश्वास पर शिव शर्मा ने वह पानी पी लिया. पानी पीने के बाद उन की हालत बिगड़ने लगी. हालत बिगड़ने पर पत्नी उन्हें डा. राममनोहर लोहिया अस्पताल ले गई. पति को अस्पताल में भरती कराने के बाद रमा ने जब देखा कि पति की हालत गंभीर है तो वह वहां से घर चली आई. अस्पताल में कुछ देर बाद ही शिव शर्मा की मौत हो गई.

शिव शर्मा की मौत के बाद अस्पताल के लोगों ने रमा को ढूंढा पर वह नहीं मिली. इस पर अस्पताल प्रशासन द्वारा पुलिस को खबर दे दी गई. पुलिस ने लाश अस्पताल की मोर्चरी पहुंचवा दी. थाना मंदिर मार्ग के थानाप्रभारी आदित्य रंजन भी वहां पहुंच गए.

पुलिस छानबीन कर रमा के फ्लैट तक पहुंच गई. थाने बुला कर जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि तांत्रिक श्याम सिंह द्वारा दिया गया पानी पीने के बाद ही उन की हालत बिगड़ी थी.

रमा की निशानदेही पर पुलिस ने दक्षिणपुरी से तांत्रिक श्याम सिंह को भी हिरासत में ले लिया. उस ने पूछताछ में स्वीकार कर लिया कि उस ने रमा को दिए गए पानी में जहर मिलाया था. पुलिस तांत्रिक को भी थाने ले आई.

उधर शिव शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी जहरीले पदार्थ के सेवन से मृत्यु होने की पुष्टि हो गई. तब पुलिस ने आरोपी के.वी. रमा और तांत्रिक श्याम सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

इस तरह एक तांत्रिक के चक्कर में फंस कर रमा ने अपनी गृहस्थी खुद ही उजाड़ ली.

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खजाना मिलने के लालच में गंवाए 17 लाख रुपए

कहते हैं लालच बुरी बला है. ज्यादा लालच हमेशा नुकसानदायक होता है. दिल्ली के मंगोलपुरी के रहने वाले किशनलाल (परिवर्तित नाम) के साथ ऐसा ही हुआ. मंगोलपुरी के वाई ब्लौक में रहने वाले किशनलाल के परिवार में पत्नी के अलावा 5 बच्चे हैं. उन की दवाई की दुकान है. उन का कारोबार अच्छाखासा चल रहा था. करीब 6 साल पहले उन के मकान में जाहिद नाम का एक युवक किराए पर रहता था.

एक दिन जाहिद किशनलाल के घर आया. वह काफी दिनों बाद आया था, इसलिए उन्होंने जाहिद की खूब खातिरतवज्जो की. बातचीत के दौरान जाहिद ने बताया कि वह तांत्रिक है. अपनी तंत्र विद्या से लोगों का भला करता है. उस ने किशनलाल ने कहा, ‘‘आप के इस घर में काला साया है. यह परिवार के लिए अहितकर है. यदि शीघ्र ही इस का समाधान नहीं किया गया तो परिवार में किसी की जान भी जा सकती है.’’

यह सुन कर किशनलाल घबरा गए. वह बोले, ‘‘इस का समाधान कैसे होगा. तुम तो तांत्रिक हो, इसलिए तुम्हीं बताओ.’’

‘‘आप परेशान मत होइए. समाधान हो जाएगा, लेकिन इस की पूजा आदि पर करीब 30 हजार रुपए खर्च होंगे.’’ जाहिद ने बताया.

जाहिद किशनलाल से पूजा के नाम पर 30 हजार रुपए ले गया. करीब 10 दिन बाद जाहिद फिर से किशनलाल के यहां आया. वह बोला, ‘‘10 दिन की पूजा के दौरान मुझे पता चला कि आप के घर में मुगलों की दौलत गड़ी हुई है. यही मुसीबत का साया है. अगर खुदाई कर के दौलत निकाल कर पूजा की जाए तो यह साया दूर हो जाएगा.’’

घर में खजाना गड़ा होने की बात सुन कर किशनलाल खुश हो गए. उन्होंने जाहिद से मकान में खुदाई करने को कहा तो जाहिद ने कहा यह काम बड़ा है. इस काम में 2 तांत्रिकों को और लगाया जाएगा. इस के लिए उस ने किशनलाल से 60 हजार रुपए और ले लिए.

जाहिद 2 तांत्रिकों को किशनलाल के घर ले आया. तांत्रिकों ने किशनलाल के घर में पूजा कर के बताया कि वास्तव में इस घर में भारी मात्रा में खजाना दबा हुआ है. यकीन दिलाने के लिए उन तांत्रिकों ने फर्श की खुदाई शुरू कर दी. थोड़ी खुदाई करने पर सोने का एक सिक्का मिला. सिक्का देख कर किशनलाल खुश हो गए. उन्होंने वह सिक्का एक ज्वैलर को दिखाया. ज्वैलर ने सिक्के की जांच कर के बताया कि सिक्का 100 प्रतिशत सोने का है.

इस के बाद किशनलाल को लालच आ गया. उन्होंने और खुदाई कराने को कहा तो जाहिद ने कहा कि आगे की खुदाई से पहले पूजा करनी होगी, वरना वह साया इस कार्य में व्यवधान डालेगा. जाहिद ने उन से 3 लाख रुपए के अलावा 110 लोगों को खाना खिलाने और उन्हें कपड़े दान दिए जाने का खर्च मांगा. किशनलाल ने वह भी दे दिया.

इस के बाद उन तांत्रिकों ने किशनलाल से पूजा आदि के नाम पर 11 लाख रुपए और ऐंठ लिए. किशनलाल ने भी यह सोच कर रकम दे दी कि जो खजाना निकलेगा, उस के मुकाबले यह रकम मामूली है. इसी लालच में उन्होंने इतनी बड़ी रकम उन तांत्रिकों को दे दी थी. जाहिद और उस के साथी किशनलाल से अब तक 17 लाख रुपए ऐंठ चुके थे. किशनलाल ने लालच में आ कर पैसे ब्याज पर ला कर दिए थे.

अगले दिन जाहिद ने किशनलाल को फोन कर के बताया कि उन्हें अशोक विहार थाना पुलिस ने पकड़ लिया है. पुलिस 6 लाख रुपए मांग रही है. किशनलाल थाना अशोक विहार गए तो पता चला कि पुलिस ने उन्हें नहीं पकड़ा है. तब उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें ठगा जा रहा है. किशनलाल को अपने साथ हुई ठगी का बड़ा अफसोस हुआ. उन्होंने इस की शिकायत पुलिस से की.

तांत्रिकों के चक्कर में पड़ कर कई परिवार बरबाद हो चुके हैं. 7 फरवरी, 2018 को उत्तर पश्चिमी दिल्ली के नेताजी सुभाष पैलेस क्षेत्र में तांत्रिक के बहकावे में आ कर एक व्यक्ति ने अपनी बेटी को ही उस के हवाले कर दिया. पीडि़त लड़की ने पुलिस को बताया कि तांत्रिक बुरी आत्माओं को भगाने के नाम पर पिछले 12 सालों से उस के साथ रेप करता रहा.

18 फरवरी, 2018 को भी एक महिला ने इसलिए खुदकुशी कर ली थी कि बच्चा न होने पर उस के ससुराल वालों ने उसे तांत्रिक के हवाले कर दिया था. पश्चिमी दिल्ली के जखीरा में एक महिला ने बेटे की चाह में अपनी दोनों बेटियों को मार दिया था. तांत्रिक के कहने पर वह महिला अपनी 5 साल और 6 माह की बेटी के ऊपर लेट गई थी, जिस से दोनों बेटियों की मौत हो गई थी.

दिल्ली में ही 22 फरवरी, 2018 को एक दोस्त की इसलिए हत्या कर दी थी क्योंकि तांत्रिक ने आरोपी से कहा था कि तुम्हारी बहन पर दोस्त ने जादू किया था, इसलिए बहन ने आत्महत्या कर ली थी.

आजकल तांत्रिकों ने भी अपने बिजनैस का ट्रेंड बदल दिया है. दिल्ली एनसीआर के तांत्रिकों का बिजनैस फेसबुक, वाट्सऐप और ट्विटर पर भी चल रहा है. तांत्रिक इन माध्यमों पर प्रचार कर के अपनी चमत्कारिक शक्तियों से कुछ ही घंटों में किसी भी समस्या का समाधान करने का दावा करते हैं. कई तांत्रिकों ने तो अपना प्रभाव जमाने के लिए आकर्षक वेबसाइट भी बनवा रखी है.

इन वेबसाइटों पर औनलाइन बुकिंग की भी विशेष सुविधा उपलब्ध करा रखी है. पेमेंट भी ये औनलाइन पहले ही जमा करा लेते हैं. अपनी समस्याओं का समाधान कराने के चक्कर में लोग जब तथाकथित तांत्रिकों द्वारा ठगे जाते हैं तो शर्म की वजह से यह बात किसी को बताने में हिचकते हैं. यानी ठगे जाने के बावजूद भी लोग बदनामी की वजह से चुप रहते हैं.

यही वजह है कि तांत्रिकों का अंधी आस्था के नाम पर ठगी का यह बिजनैस खूब फलफूल रहा है.

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