प्रेमिका से शादी के लिए मां बाप से खूनी दुश्मनी

28 अप्रैल, 2018 को दिल्ली के कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि जाकिर नगर की गली नंबर 7 में रहने वाले शमीम अहमद का दरवाजा अंदर से बंद है. काफी आवाजें देने के बावजूद भी उन के कमरे से कोई प्रतिक्रिया नहीं हो रही.

चूंकि यह मामला दक्षिणपूर्वी दिल्ली के थाना जामिया नगर के अंतर्गत आता है, इसलिए पुलिस कंट्रोल रूम से वायरलेस द्वारा यह सूचना थाना जामिया नगर को दे दी गई. सूचना मिलते ही थानाप्रभारी संजीव कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंच गए. वहां पर शमीम अहमद के बेटे अब्दुल रहमान के अलावा आसपास के लोग भी जमा थे.

अब्दुल रहमान ने पुलिस को बताया कि कल रात खाना खाने के बाद उस के अम्मीअब्बू अपने कमरे में सोने के लिए चले गए थे, जबकि वह दूसरे कमरे में सो गया था. रोजाना उस के अम्मीअब्बू ही सुबह पहले उठते थे. वही उसे जगाते भी थे, लेकिन आज वह अभी तक नहीं उठे. मैं ने काफी देर दरवाजा खटखटाया इस के बावजूद भी अंदर से कोई आवाज नहीं आ रही. वहां मौजूद पड़ोसियों ने भी अब्दुल रहमान की हां में हां मिलाई.

अब्दुल रहमान की बात सुनने के बाद थानाप्रभारी संजीव कुमार ने भी दरवाजा खटखटाया लेकिन वास्तव में अंदर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो उन्हें भी शक होने लगा. तब उन्होंने लोगों की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ दिया. दरवाजा तोड़ने के बाद जैसे ही पुलिस अंदर घुसी तो पहले कमरे में ही फर्श पर शमीम अहमद और उन की पत्नी तसलीम बानो की लाशें पड़ी थीं.

रहस्यमय मौतें

अम्मी और अब्बू की लाशें देख कर रहमान दहाडें़े मार कर रोने लगा. पड़ोसी भी हतप्रभ थे कि दोनों की मौत कैसे हो गई. उन के शरीर पर किसी चोट आदि का निशान भी नहीं था. दोनों की मौत कैसे हुई उस समय इस का पता लगाना संभव नहीं था. थानाप्रभारी संजीव कुमार ने इस मामले की जानकारी डीसीपी चिन्यम बिश्वाल को दे दी. साथ ही क्राइम इन्वैस्टीगेशन टीम को भी मौके पर बुलवा लिया.

थानाप्रभारी ने मौकामुआयना किया तो पता चला कि उस दरवाजे पर औटोमैटिक लौक लगा हुआ था, जो अंदर और बाहर दोनों तरफ से बंद हो जाता था. उन के कमरे में सवा 5 लाख रुपए की नकदी के अलावा ज्वैलरी भी मिली. इस से वहां पर लूट की संभवना नजर नहीं आई. कमरे में 2 लोग सो रहे थे, दोनों की ही संदिग्ध मौत हो गई थी.

ऐसा भी नहीं था कि उन की मौत कमरे में मौजूद किसी जहरीली गैस की वजह से हुई हो क्योंकि जब कमरे का दरवाजा तोड़ा गया था तो उस समय कमरे में किसी जहरीली गैस आदि की स्मैल भी नहीं आ रही थी. यानी उस समय कमरे में पर्याप्त मात्रा में औक्सीजन थी. लग रहा था कि उन दोनों के खाने में कोई जहरीली पदार्थ मिला दिया गया होगा.

बहरहाल इन दोनों की मौत कैसे हुई यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता लग सकता था. लिहाजा थानाप्रभारी ने जरूरी काररवाई कर के दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. डीसीपी चिन्मय बिश्बाल ने भी घटनास्थल का दौरा किया. अब्दुल रहमान शमीम अहमद का इकलौता बेटा था. वही उन के साथ रहता था, इसलिए पुलिस ने अब्दुल रहमान से कहा कि जब तक इस केस की जांच पूरी न हो जाए वह दिल्ली छोड़ कर कहीं न जाए.

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2-3 दिन बाद पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया था कि उन की मौत दम घुटने की वजह से हुई थी. यानी किसी ने उन का दम घोट कर हत्या की थी. पुलिस इस बात का पता लगाने में जुट गई कि उन का कातिल कौन है.

उधर मृतकों का बेटा अब्दुल रहमान थाने और डीसीपी औफिस के चक्कर काट कर अपने मातापिता के हत्यारे का पता लगा कर उसे गिरफ्तार करने की मांग कर रहा था. जबकि पुलिस अलगअलग तरीके से जांच कर केस को खोलने की कोशिश में लगी थी.

इस दौरान थानाप्रभारी संजीव कुमार ने अब्दुल रहमान से भी 2 बार पूछताछ की थी. लेकिन उस से कोई क्लू नहीं मिल सका था. उन के यहां जिनजिन रिश्तेदारों या परिचितों का आनाजाना था, पुलिस ने उन्हें भी थाने बुला कर पूछताछ की.

इतना ही नहीं पुलिस ने उन पेशेवर हत्यारों को भी उठा लिया जो उस समय जेल से बाहर थे. लेकिन उन से भी कोई जानकारी नहीं मिली. इधर मामले को ले कर पुलिस भी परेशान थी. घटना के 3 सप्ताह बाद पुलिस ने अब्दुल रहमान को एक बार फिर थाने बुलाया. थाना प्रभारी और इंसपेक्टर भारत कुमार की टीम ने उस से फिर पूछताछ की. सख्ती से की गई पूछताछ में अब्दुल रहमान ने अपना मुंह खोलते हुए कहा कि अपने मांबाप का हत्यारा मैं ही हूं. मैं ने ही अपने दोस्तों के साथ उन की हत्या की थी.

उस की बात सुन कर एक बार तो पुलिस भी आश्चर्यचकित रह गई कि वह अपने मांबाप का एकलौता बेटा था तो ऐसी क्या बात हो गई कि घर के इसी चिराग ने अपने मांबाप का ही खून कर दिया. पुलिस ने अब्दुल रहमान से मांबाप की हत्या करने की वजह जानने के लिए पूछताछ की तो उस ने उन की हत्या की जो कहानी बताई वह हैरान करने वाली थी.

फेसबुक की दोस्त बनी महबूबा

अब्दुल रहमान अपने मांबाप की इकलौती संतान था. पिता शमीम अहमद और मां तसलीम बानो ने उसे हमेशा अपनी पलकों पर बिठा कर रखा था. वह उस की हर फरमाइश पूरी करते थे. मांबाप का लाडला अब्दुल रहमान पढ़ाई में भी होशियार था. उस का माइंड क्रिएटिव था इसलिए उस ने एनिमेशन में डिप्लोमा किया. मांबाप चाहते थे कि उन के बेटे की कहीं अच्छी जगह नौकरी लग जाए. शमीम अहमद ने करीब डेढ़ साल पहले उस की शादी कर दी थी, लेकिन किसी वजह से उस की पत्नी से नहीं बनी. दोनों के विचारों में विरोधाभास था, इसलिए उस ने पत्नी को तलाक दे दिया.

इस के बाद फेसबुक के माध्यम से अब्दुल रहमान की दोस्ती कानपुर की रहने वाली एक लड़की से हो गई. यह दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि दोनों ही एकदूसरे को दिलोजान से चाहने लगे. यहां तक कि दोनों शादी के लिए भी तैयार हो गए.

लड़की ने कह दिया कि वह उस के लिए अपने घर वालों तक को छोड़ने के लिए तैयार है. अब बात अब्दुल रहमान को फाइनल करनी थी. वह तो तैयार था लेकिन उसे उम्मीद थी कि शायद उस के घर वाले कानपुर वाली उस की दोस्त से शादी करने के लिए तैयार नहीं होंगे.

फिर भी अब्दुल रहमान ने अपने मातापिता से कानपुर वाली अपनी दोस्त के बारे में बताया और कहा कि वह उस से शादी करना चाहता है. शमीम अहमद ने साफ कह दिया कि वह अपनी बिरादरी की लड़की के साथ ही उस की शादी करना पसंद करेंगे. इसलिए कानपुर वाली उस लड़की को वह भूल जाए. उस के साथ उस की शादी नहीं हो सकती.

मांबाप पर भारी पड़ी प्रेमिका

पिता ने जितनी आसानी से भुला देने वाली बात कही थी, वह अब्दुल रहमान के लिए उतनी आसान नहीं थी. बहरहाल घर वालों की बातों को दरकिनार करते हुए वह अपनी उस फेसबुक फ्रेंड के संपर्क में बना रहा. इतना ही नहीं वह उस से मिलने भी जाता था.

इसी दौरान घर वालों ने अब्दुल रहमान की दूसरी शादी कर दी. घर वालों के दबाव में उस ने शादी कर जरूर ली थी लेकिन उस के दिल में तो उस की कानपुर वाली प्रेमिका बसी हुई थी.

दूसरी शादी हो जाने के बाद भी वह अपनी प्रेमिका को नहीं भूला था. वह एक काल सेंटर में नौकरी करता था, इसलिए प्रेमिका को महंगे गिफ्ट आदि देने और उस से मिलने के लिए कानपुर जाता रहता था. वह अब्दुल रहमान पर शादी के लिए दबाव डाल रही थी. वह भी सोचता था कि यदि प्रेमिका ही उस की पत्नी बन जाए तो उस का जीवन हंसीखुशी से बीतेगा. लेकिन इस काम में सब से बड़ी रुकावट उस के मांबाप ही थे.

अब्दुल रहमान ने एक बार फिर से अपने मांबाप को मनाने की कोशिश की कि वह उस की कानपुर वाली दोस्त के साथ उस की शादी कर दें. लेकिन शमीम अहमद ने बेटे को न सिर्फ जम कर फटकार लगाई बल्कि हिदायत भी दी कि वह उस लड़की को भूल कर अपनी घरगृहस्थी में ध्यान लगाए.

अब्दुल रहमान की कोशिश नाकाम हो चुकी थी पर वह हारना नहीं चाहता था. आखिर उस ने भी एक सख्त फैसला ले लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए वह अपनी प्रेमिका को दुलहन बना कर घर लाएगा. इस के लिए उस ने अपने मांबाप को रास्ते से हटाने का फैसला ले लिया. यानी प्रेमिका की खातिर उस ने मांबाप तक की हत्या करने की ठान ली.

इतना बड़ा काम वह खुद नहीं कर सकता था. इस बारे में उस ने दिल्ली के नांगलोई इलाके के रहने वाले अपने दोस्त नदीम खान (32) और गुड्डू से बात की. दोनों ढाई लाख रुपए में यह काम करने के लिए तैयार हो गए. तीनों ने शमीम अहमद और तसलीम बानो की हत्या करने की पूरी योजना बना ली.

योजना के अनुसार 27-28 अप्रैल की रात नदीम खान और गुड््डू जाकिर नगर इलाके में आ गए. अब्दुल रहमान के मातापिता जब खाना खा कर अपने कमरे में सोने के लिए चले गए तो रात 11 बजे के करीब अब्दुल रहमान ने फोन कर के अपने दोनों दोस्तों को घर बुला लिया. उन के घर आने के बाद अब्दुल रहमान उन्हें अपने मातापिता के कमरे में ले गया. उन के दरवाजे पर आटोमैटिक लौक लगा था जो दोनों तरफ से बंद हो जाता था.

इन लोगों ने मुंह पर तकिया रख कर एकएक कर दोनों का दम घोंट दिया और उन की लाशें बेड से उतार कर फर्श पर डाल दीं. इस के बाद अब्दुल रहमान ने दरवाजे को बंद कर दिया. अपना काम कर के नदीम खान और गुड्डू रात में ही वहां से चले गए.

अब्दुल रहमान अपने कमरे में आ गया. इस के बाद उसे रात भर नींद नहीं आई. सुबह होने पर उस ने मोहल्ले के लोगों को यह कह कर इकटठा कर लिया कि पता नहीं क्यों आज अम्मी और अब्बू दरवाजा नहीं खोल रहे.

अब्दुल रहमान से पूछताछ के बाद पुलिस ने नदीम खान को भी गिरफ्तार कर लिया जबकि गुड्डू फरार हो गया था. दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है.

पति संग मालदीव में नेहा धूपि‍या का रोमांस

बौलीवुड अभिनेता अंगद बेदी और नेहा धूपिया इन दिनों मालदीव में छुट्टियां मना रहे हैं. इस जोड़े ने सोशल मीडिया पर अपने वैकेशन की तस्वीरें शेयर की हैं जिन्हें खूब लाइक और शेयर किया जा रहा है. बता दें कि नेहा और अंगद ने 10 मई को दिल्ली में गुपचुप तरीके से शादी कर ली थी. दोनों की शादी का खुलासा अचानक से सोशल मीडिया पर किया गया था. दोनों के शादी करने के बाद ऐसा कहा जा रहा था कि नेहा प्रेग्नेंट हैं लेकिन अंगद लगातार इन खबरों को नकारते आए.

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नेहा और अंगद इन दिनों मालदीव में हैं और वहां से उनकी कई तस्वीरें सामने आई हैं. मालदीव की हर तस्वीर में नेहा अंगद के पीछे छिपी नजर आ रही हैं. खार इसकी वजह क्या है ये तो नेहा ही बताएंगी. वैसे हर तस्वीर में नेहा और अंगद साथ में बेहद खुश नजर आ रहे हैं. नेहा ने हाल ही में एक तस्वीर शेयर की थी जिसमें वह पूल में पति अंगद के साथ मस्ती करती नजर आ रही हैं. नेहा ने ये तस्वीर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की हैं.

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शादी के बाद नेहा और अंगद ने अपनी लव स्टोरी को लेकर कहा था, ‘जब सालों पहले मैं अंडर 19 क्रिकेट खेलता था तब मैंने नेहा को नोटिस किया था. उस दौरान नेहा मिस इंडिया कौनटेस्ट की तैयारी कर रहीं थी. इसके बाद हम मुंबई में मिले और दोस्त बन गए.’

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वहीं नेहा ने कहा था, ‘अंगद ने 4 साल पहले उन्हें शादी के लिए प्रपोज किया था लेकिन तब नेहा ने मना कर दिया था. नेहा उस समय किसी और के साथ रिलेशन में थीं. दोनों के दोस्त जानते थे कि अंगद, नेहा से प्यार करते हैं लेकिन ये सिर्फ एकतरफा था.’

घटती नौकरियां

सरकार ने प्रौविडैंट फंड का जो कानून बना रखा है वह देश में रोजगारों की अच्छी जानकारी देता है. हाल में जारी हुए आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि सितंबर 2017 से मार्च 2018 के बीच प्रौविडैंट फंड का लाभ उठाने वालों की संख्या 39.35 लाख से घट कर 34.40 लाख रही यानी 5 लाख लोगों की नौकरी चली गई.

यह जीएसटी और नोटबंदी का बुरा असर है. छोटे और मझोले व्यापारों पर इन दोनों सरकारी प्रहारों की भारी मार पड़ी है और सरकार है कि बजाय खुद को सुधारने के, लगातार जीएसटी और नोटबंदी के गुणगान कर रही है.

व्यापारियों ने जबरन वसूले जा रहे टैक्स देने तो शुरू कर दिए हैं पर इस का मतलब यह नहीं कि उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है. अगर व्यापारी खुश होते तो इसे हाथोंहाथ लेते. इस ने तो व्यापारियों और उद्योगपतियों को चार्टर्ड अकाउंटैंटों का गुलाम बना दिया है. यह औनलाइन फाइलिंग, कहने को चाहे सरल लगे कि दफ्तर नहीं छोड़ना पड़ता, लेकिन आप इस तरह के सौफ्टवेयर के इतने गुलाम हो जाते हैं कि आप की अपनी सूझबूझ और सोच कुंठित होने लगती है.

नई नौकरियां न मिलने की बात तो एकतरफ है, सवाल यह उठता है कि 125 करोड़ जनता में से सिर्फ 39 लाख लोग ही प्रौविडैंट फंड के दायरे में क्यों आते हैं? क्या बाकी के लिए रोजगार सिर्फ खेती करने या पकौड़े बेचने में ही हैं? सवाल यह भी उठता है कि सरकार ने आखिर क्यों ऐसा कानून बना रखा है जो सिर्फ 39 लाख रोजी पाए लोगों पर लागू होता है?

सरकारों ने असल में ऐसा तंत्र बना रखा है कि सुधार और सुरक्षा के नाम पर एक खास वर्ग को ही काम मिल सके. देश के अधिकांश कामगार खेतों, दुकानों, सड़कों पर काम करते हैं. वे इतना कम वेतन पाते हैं कि उन्हें एंप्लौयड कहना ही गलत होगा. उन की आर्थिक हालत बेरोजगारों सी रहती है.

सरकार के ये आंकड़े सरकार की ही पोल खोलते हैं कि करोड़ों नौकरियां निकलेंगी. यहां तो नौकरियों का ही टोटा हो रहा है.

भोजपुरी अदाकारा ने किया ‘कजरा रे..’ पर डांस

भोजपुरी अदाकारा पूनम दुबे को उनके शानदार डांस के लिए जाना जाता है. हाल ही में पूनम ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक डांस वीडियो शेयर किया है जो काफी वायरल हो रहा है. पूनम के फैंस उनके इस वीडियो को फैंस काफी पसंद कर रहें है. पूनम दुबे इस वीडियो में बौलीवुड के सुपर हिट डांस नंबर कजरारे कजरारे पर ऐश्वर्या के स्टेप को कौपी करती हुई नजर आ रहीं हैं.

कजरारे कजरारे गाना रानी मुखर्जी और अभिषेक बच्चन के फिल्म ‘बंटी और बबली’ का है. आपको याद होगा कि कजरारे कजरारे गाने पर फिल्म में ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन और अमिताभ बच्चन ने बहुत शानदार डांस किया था. पूनम दुबे का कजरारे पर डांस आपको ऐश्वर्या राय के डांस की याद दिलवा देगा.

पूनम दुबे का फिल्मों की लिस्ट में चना जोर गरम, लूटेरे, मोहब्बत, रंगदारी टैक्स, बहुरानी, हम है जोड़ी नंबर वन, ये मोहब्बते, द रियल इंडियन मदर, ये मोहब्बतें, इंतकाम, जानम, घुस के मारब, हमार फर्ज और बाबा रंगीला आदि शामिल हैं.

11 दूल्हों को लूटने वाली दुल्हन

6 मई, 2018 का दिन था. सुबह के यही कोई 11 बज रहे थे. उत्तराखंड के जिला हरिद्वार के थाना पीरान कलियर के थानाप्रभारी देवराज शर्मा अपने औफिस में बैठे थे. तभी किसी व्यक्ति ने उन्हें फोन कर के कहा, ‘‘सर, मेरा नाम अशोक है और मैं धनौरी कस्बे में रहता हूं. मैं एक मामले में आप से बात करना चाहता हूं.’’

‘‘बताइए क्या मामला है?’’ थानाप्रभारी ने कहा.

‘‘सर, मेरे साथ एक धोखाधड़ी हुई है.’’ अशोक ने बताया.

‘‘किस तरह की धोखाधड़ी हुई है आप के साथ?’’ थानाप्रभारी ने पूछा.

‘‘सर, दरअसल बात यह है कि गत 2 मई, 2018 को ज्वालापुर के रहने वाले मेरे एक परिचित तथा उस के दोस्त मुकेश ने मेरी शादी रीता से कराई थी, जो जिला कोटद्वार के पौड़ी की रहने वाली थी. इस शादी के लिए मैं ने 2 लाख रुपए में अपनी प्रौपर्टी गिरवी रख कर लोन लिया था.’’ अशोक बोला.

‘‘इस के बाद क्या हुआ?’’ थानाप्रभारी देशराज शर्मा ने पूछा.

‘‘सर, इस शादी में मुकेश बिचौलिया था. उस ने मेरी शादी कराने के एवज में मुझ से 50 हजार रुपए नकद लिए थे. मुकेश ने मुझ से कहा था कि रीता एक गरीब घर की लड़की है. उस के पिता महेंद्र उस की शादी में ज्यादा रकम खर्च नहीं कर सकते. वह साधारण तरीके से शादी कर के बेटी के हाथ पीले करना चाहते हैं.’’ अशोक ने बताया.

‘‘क्या तुम ने मुकेश और महेंद्र से भी संपर्क किया था?’’ शर्मा ने पूछा.

‘‘नहीं सर, इस बीच हमारी बात सिर्फ मुकेश के माध्यम से ही चलती रही और महेंद्र से केवल उस दिन मुलाकात हुई थी, जिस दिन वह वरवधू को आशीर्वाद देने के लिए आया था. मुकेश ने यह शादी 2 अप्रैल को हरिद्वार की रोशनाबाद कोर्ट में कराई थी. इस के बाद मुकेश व महेंद्र हम से कभी नहीं मिले. शादी के 2 दिन बाद ही रीता हमारे घर से सोनेचांदी की सारी ज्वैलरी और नकदी ले कर भाग गई. रीता को हम ने कोटद्वार, ज्वालापुर, बिजनौर आदि कई जगहों पर तलाश किया, मगर हमें उस का कुछ भी पता नहीं चल सका. अब मुकेश का फोन  भी बंद है.’’ अशोक ने बताया.

‘‘तुम्हारी बातों से लग रहा है कि तुम शादी कराने वाले ठगों के गिरोह के चक्कर में फंस गए हो. इसीलिए उन्होंने अपने फोन भी बंद कर लिए हैं. अगर दुलहन रीता ठीक होती तो वह जेवर सहित क्यों भागती?’’ थानाप्रभारी बोले.

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‘‘आप ठीक कह रहे हैं सर, अब मैं इन जालसाजों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराना चाहता हूं.’’ अशोक ने कहा.

‘‘ठीक है तुम धनौरी पुलिस चौकी चले जाओ. वहां के चौकी इंचार्ज रंजीत सिंह तोमर से मिल कर तुम अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हो.’’ थानाप्रभारी ने बताया.

पुलिस ने शुरू की जांच

इस के बाद अशोक धनौरी पुलिस चौकी पहुंचा और चौकी इंचार्ज रंजीत तोमर से मिल कर खुद के ठगे जाने की घटना सिलसिलेवार बता दी. अशोक की तहरीर पर चौकी इंचार्ज ने लुटेरी दुलहन रीता उर्फ पूजा, बिचौलिए मुकेश तथा रीता के तथाकथित बाप महेंद्र के खिलाफ भादंवि की धाराओं 420, 417, 406 तथा 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

थानाप्रभारी ने चौकी प्रभारी रंजीत तोमर को ही इस केस की जांच करने के निर्देश दिए और इस केस की जानकारी सीओ (रुड़की) स्वप्न किशोर सिंह को भी दे दी.

7 मई की शाम को एसपी (देहात) मणिकांत मिश्रा और सीओ स्वप्न किशोर सिंह थाना पीरान कलियर पहुंचे. उन्होंने इस ठग गिरोह को पकड़ने के लिए थानाप्रभारी देशराज शर्मा व चौकी प्रभारी रंजीत तोमर के साथ मीटिंग की.

मीटिंग में उन्होंने इस केस को खोलने के संबंध में कुछ दिशानिर्देश देते हुए कहा कि यह गिरोह अब जल्द ही आसपास के क्षेत्र में शादी के लिए किसी नए व्यक्ति को शिकार बनाएगा. आप अपने मुखबिरों को सतर्क कर दें.

एसपी (देहात) मणिकांत मिश्रा ने थानाप्रभारी के नेतृत्व में एक टीम बनाई. इस टीम में एसआई रंजीत तोमर, चरण सिंह चौहान, अहसान अली, कांस्टेबल अरविंद, ब्रजमोहन, महिला कांस्टेबल सुषमा आदि को शामिल किया गया.

इस के बाद थानाप्रभारी और चौकी इंचार्ज ने अपने मुखबिरों को भी सतर्क कर दिया और उन ठगों की तलाश में जुट गए. उन्होंने मुकेश के फोन नंबर को भी सर्विलांस पर लगा दिया. उन्हें तलाश करतेकरते 7 दिन बीत चुके थे. मगर अभी तक उन के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी.

17 मई, 2018 को एसआई रंजीत सिंह तोमर को एक मुखबिर ने उन ठगों के बारे में एक महत्त्वपूर्ण जानकारी दी. एसआई रंजीत तोमर ने इस सूचना से थानाप्रभारी और सीओ स्वप्न किशोर सिंह को भी अवगत करा दिया.

मुखबिर ने बताया था कि गैंग के सदस्य हरिद्वार के टिबड़ी इलाके में हैं. यह गिरोह कल रात ही राजस्थान के जयपुर शहर के रहने वाले संजय को शिकार बना कर लौटा है. रीता ने संजय से 2 दिन पहले ही शादी की थी. वह यहां से कहीं जाने की तैयारी में है.

पुलिस क्षेत्राधिकारी स्वप्न सिंह ने पुलिस टीम को तुरंत टिबड़ी जाने के निर्देश दिए. पुलिस टीम ने मुखबिर द्वारा बताई गई जगह पर दबिश दी तो वहां पर मुकेश उर्फ यादराम, उस के बेटे अरुण, भोपाल और रीता उर्फ पूजा को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उन से पूछताछ की गई तो शादी कर के लूट का धंधा चलाने वाले इस गैंग की कहानी सामने आई, जो इस प्रकार निकली—

रीता उर्फ पूजा मूलरूप से जिला बिजनौर के कस्बा अफजलगढ़ की रहने वाली थी. उस का भाई राजू और पिता कृपाल सिंह गांव में खेतीबाड़ी करते थे. सन 2002 में पिता ने उस की शादी झाड़पुर निवासी पवन से कर दी. बाद में रीता 2 बेटों और एक बेटी की मां बनी. रीता के गलत चालचलन की वजह से सन 2013 में पवन ने उसे छोड़ दिया और बच्चों सहित उस से अलग रहने लगा था.

जिस्मफरोशी से आई ठगी के धंधे में

रीता की बदचलनी की वजह से पति से संबंध टूट जाने की बात उस के मायके वालों को भी पता चल गई थी इसलिए उस के मायके वालों ने भी उस से नाता तोड़ लिया था. रीता के भाई राजू का एक दोस्त था मुकेश जो कि बिजनौर के नरैना गांव का रहने वाला था. पति द्वारा छोड़े जाने के बाद रीता ने मुकेश के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा ली थीं.

मुकेश उस वक्त ज्वालापुर के कड़च्छ मोहल्ले में रहता था. साथसाथ रहने पर दोनों के नाजायज संबंध बन गए. मुकेश रीता के जरिए कमाई करना चाहता था, लिहाजा उस ने उसे जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया. वह उसे धंधा करने के लिए रात को होटलों में भेजता. 2 सालों तक उन का यह धंधा चलता रहा.

सन 2015 में मुकेश ने सोचा कि होटलों में जिस्मफरोशी के धंधे में पुलिस के छापे आदि का डर रहता है. पकडे़ जाने पर जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है. इसलिए मुकेश ने रीता से सलाह कर के यह धंधा बदलने का विचार किया.

उस ने रीता से कहा कि वह उसे गरीब घर की लड़की बता कर उस की शादी ऐसे अमीर परिवार के युवकों से करा दिया करेगा, जिन की शादी नहीं हो रही हो. शादी के बाद वह उस परिवार के जेवर व नकदी ले कर रफूचक्कर हो जाया करेगी.

रीता को मुकेश की यह सलाह पसंद आ गई और उन्होंने अपने इस नए धंधे को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया.

इस के बाद उन दोनों ने कुछ ऐसे लोगों को ढूंढना शुरू कर दिया जो किसी कारण से अपनी शादी बिरादरी में या अन्य कहीं नहीं कर पा रहे थे. शादी के समय मुकेश अधेड़ व्यक्ति भोपाल को रीता के बाप के रूप में पेश करता था. उसे फिल्मी स्टाइल में रीता के बाप का अभिनय करते हुए कन्यादान जैसी रस्में पूरी करनी होती थीं. इस काम के एवज में मुकेश उसे 2 हजार रुपए प्रति शादी देता था.

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मुकेश पहले तो किसी अमीर व्यक्ति से रीता की शादी करवाता, उस के बाद रीता अपने कथित पति के घर के जेवर व नकदी ले कर एकदो दिन में ही वहां से फुर्र हो जाती थी.

मुकेश व रीता के जालसाजी के इस धंधे में अकसर मुकेश का बेटा अरुण भी शामिल रहता था. मुकेश उसे भी ठगी की रकम में से हिस्सा देता था. शादी के नाम पर ठगी करने की लगभग 10 घटनाओं को वह अंजाम दे चुके थे. इस गिरोह में मुकेश का बेटा अरुण रीता का भाई बनता था. जबकि ज्वालापुर की लाल मंदिर कालोनी का रहने वाला भोपाल लड़की का फरजी पिता बनता था.

रीता ने बताया कि अब तक वह गरीब लड़की बन कर उत्तर प्रदेश, राजस्थान व हरियाणा के 11 लोगों से शादी का नाटक कर के ठग चुकी है. वह यह धंधा पिछले 3 सालों से कर रही थी. ठगी के कुछ शिकार लोग लोकलाज के चलते पुलिस तक नहीं गए थे.

जिन लोगों ने पुलिस से शिकायत की थी तो पुलिस उन लोगों के पास तक नहीं पहुंच सकी. क्योंकि पुलिस को उन लोगों का पता मालूम नहीं था.

रीता ने बताया कि सन 2017 में उस ने हरियाणा के जिला करनाल निवासी 2 युवकों को ठगा था. उन के यहां से भी वह लाखों रुपए की ज्वैलरी और नकदी ले कर रफूचक्कर हो गई थी. पिछले साल उस ने शिवदासपुर गांव तेलीवाला के युवक एस. कुमार को ठग कर उस के लगभग 50 हजार रुपए और जेवरों पर हाथ साफ किया था.

गत 24 अप्रैल, 2017 को मुकेश ने उस की शादी मुजफ्फरनगर जिले के गांव गुर्जरहेड़ी निवासी संदीप शर्मा से कराई थी. शादी के 2 दिन बाद ही वह रात को 3 बजे संदीप शर्मा के परिवार का मालपानी समेट खिसक गई थी.

मुकेश था आदतन अपराधी

कुछ महीने पहले ही मुकेश ने उस की शादी बिजनौर के सोनू के साथ कराई थी. उस शादी में भी वह 2 दिन बाद घर के जेवर व नकदी ले कर फरार हो गई थी. सोनू ने इस की शिकायत पुलिस से की तो एसआई मीनाक्षी गुप्ता को इस की जांच सौंपी गई. इस प्रकरण में मुकेश ने सोनू के घर वालों को वधू का नाम नेहा बताया था.

पूछताछ में मुकेश ने भी बताया कि पहले उस की रीता के भाई राजू से गहरी दोस्ती थी. करीब 5 साल पहले जब रीता की बदचलनी की वजह से उस के भाई व बाप ने उस से नाता तोड़ लिया था तो वह उस के साथ रहने लगी थी. पहले वह दोनों कोटद्वार के कौडि़यों कैंप मोहल्ले में रहा करते थे. इस के बाद वह ज्वालापुर के मोहल्ला कड़च्छ में रहने लगे.

ठगी की रकम से डबल हिस्सा लेने के लिए मुकेश ने अपने बेटे अरुण को भी इस गैंग में शामिल कर लिया था. पुलिस को मुकेश के बारे में पता चला कि वह आपराधिक प्रवृत्ति का इंसान है. कोटद्वार के लकड़ी पड़ाव में सन 2011 में हुए डबल मर्डर में भी वह शामिल था.

सन 2013 में एडीजे कोर्ट कोटद्वार से उसे आजीवन कारावास की सजा हो चुकी थी. आरोपी की अपील माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड, नैनीताल में विचाराधीन है. वर्तमान में मुकेश जमानत पर था.

इस गिरोह के गिरफ्तार होने की सूचना पर एसएसपी कृष्ण कुमार और एसपी (देहात) मणिकांत मिश्रा भी थाने पहुंच गए. एसएसपी ने प्रैस कौन्फ्रैंस आयोजित कर मीडिया को इस शातिर गैंग के बारे में जानकारी दी.

पुलिस ने अभियुक्तों के पास से 35 हजार रुपए नकद, चांदी के गहने, मंगलसूत्र, बिछुए आदि बरामद किए. पूछताछ के बाद चारों अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया.

केस की जांच एसआई रंजीत तोमर कर रहे थे. एसआई तोमर आरोपियों के शिकार सभी लोगों से संपर्क कर आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य इकट्ठा कर रहे थे, जिस से उन्हें कोर्ट से उचित सजा मिल सके.

– पुलिस सूत्रों पर आधारित.

अल्लाह के नाम पर बेटी की कुर्बानी

रमजान का पवित्र महीना चल रहा था. मसजिद से सुबह की अजान हुई तो शबाना की आंखें खुल गईं. वह फटाफट सेहरी के लिए उठी तो देखा कि उस की 4 साल की बेटी रिजवाना बिस्तर पर नहीं थी. वहां केवल छोटी बेटी ही दिखी. शबाना ने सोचा कि रिजवाना को शायद टौयलेट आया होगा तो वह नीचे चली गई होगी.

उस ने रिजवाना को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इस पर शबाना सोचने लगी कि रिजवाना कहां गई होगी. मेरे पास ही तो सो रही थी. शबाना अपनी बेटी को तलाश करने लगी. यह 8 जून, 2018 के तड़के की बात है.

राजस्थान में जोधपुर जिले के पीपाड़ शहर में सिलावटों का मोहल्ला है. इस मोहल्ले में नवाब अली अपने मामा मोहम्मद साजिद के घर में उन के साथ ही ऊपरी मंजिल पर रहता था. नवाब अली और मोहम्मद साजिद मिल कर मीट की दुकान चलाते थे. नवाब अली मूलरूप से पिचियाक गांव का रहने वाला था. वह अपनी बीवी शबाना और 4 साल की बेटी रिजवाना तथा एक छोटी बेटी के साथ मामा के मकान में रहता था.

जून महीने में राजस्थान में भीषण गरमी पड़ती है इसलिए नवाब अली अपनी बीवी और दोनों बेटियों के साथ छत पर सोया हुआ था. शबाना को जब बेटी रिजवाना नहीं मिली तो वह उसे देखने नीचे की मंजिल पर बने कमरे में गई.

कमरे का दृश्य देख कर शबाना की आंखें फटी रह गईं. वहां उस की मासूम रिजवाना खून में सनी पड़ी थी. उस के गले से खून बह रहा था. बेटी को रक्तरंजित हालत में देख कर शबाना रोने लगी. उस ने नब्ज देख कर बेटी के जिंदा होने का अनुमान लगाने की कोशिश की लेकिन उसे कुछ पता नहीं चला.

वह रोती हुई तेजी से सीढि़यां चढ़ कर छत पर पहुंची और वहां सो रहे पति नवाब अली को जगा कर नीचे वाले कमरे में खून से लथपथ पड़ी बेटी रिजवाना के बारे में बताया. इस पर नवाब अपनी बीवी के साथ नीचे वाले कमरे में आया और वहां खून फैला देख कर बीवी से कहा कि लगता है इस पर बिल्ली ने हमला किया है, इस से उस का गला कट गया है.

शबाना की चीखपुकार सुन कर नवाब अली के मामा मोहम्मद साजिद के परिवार वाले भी जाग गए. शबाना पति के साथ खून से लथपथ बेटी को अस्पताल ले गई. अस्पताल में डाक्टरों ने चैकअप के बाद बच्ची को मृत घोषित कर दिया. नवाब अली ने बच्ची पर बिल्ली के हमले की बात कह कर अस्पताल में डाक्टरों को संतुष्ट कर दिया और बेटी का शव घर ले आया.

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तब तक सूरज का उजाला नजर आने लगा था. नवाब की मासूम बेटी की मौत होने का पता चलने पर मोहल्ले के लोग भी एकत्र हो गए. नवाब ने मोहल्ले वालों को भी बेटी पर बिल्ली के हमले की बात बताई, लेकिन यह बात लोगों के गले नहीं उतरी. इस बीच किसी आदमी ने पुलिस को सूचना दे दी.

पुलिस मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने जब बच्ची की लाश का निरीक्षण किया तो उस के शरीर पर कहीं भी बिल्ली के पंजों के निशान नहीं दिखे.

गला भी किसी धारदार हथियार से काटा हुआ दिख रहा था, इसलिए पुलिस को शक हो गया कि यह हत्या का मामला है. पुलिस ने लाश पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भिजवा दी.

पुलिस ने बच्ची की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जोधपुर से विधिविज्ञान प्रयोगशाला की टीम को मौके पर बुलाया, लेकिन इन से भी पुलिस को कोई ऐसे सबूत नहीं मिले, जिस से हत्यारे तक पहुंचा जा सके. पुलिस ने डाक्टरों के पैनल से बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया.

पुलिस इस बात से भी आश्चर्यचकित थी कि जब कमरे में बच्ची के मातापिता सो रहे थे तो फिर गला रेतने के समय उन्हें रिजवाना के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुनाई क्यों नहीं पड़ी. मां के पास सो रही रिजवाना नीचे वाले कमरे में कैसे पहुंची. पुलिस को इस बात के भी कोई सबूत नहीं मिले कि हत्यारा बाहर से आया था, क्योंकि घर के दरवाजे बंद थे.

मासूम बच्ची की हत्या से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. शबाना की तरफ से पुलिस ने अज्ञात आदमी के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. जोधपुर एसपी (ग्रामीण) राजन दुष्यंत राजन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) खींवसिंह भाटी और पुलिस उपाधीक्षक सेठाराम बंजारा ने भी मौके पर पहुंच कर जांचपड़ताल की.

एसपी राजन दुष्यंत ने मौकामुआयने के बाद थाने में पुलिस अधिकारियों के साथ इस मामले पर चर्चा की. उन्हें लगा कि रिजवाना की हत्या में परिवार के ही किसी सदस्य का हाथ रहा होगा.

परिवार वालों ने जब रिजवाना का शव दफना दिया तो पुलिस नवाब अली और उस के मामा मोहम्मद साजिद को पूछताछ के लिए थाने ले आई. दोनों से अलगअलग पूछताछ की गई.

पूछताछ में नवाब अली ने अपनी बेटी रिजवाना की हत्या की जो लोमहर्षक कहानी सुनाई, उसे सुन कर पुलिस अफसर भी स्तब्ध रह गए.

नवाब अली कुरैशी ने पुलिस को बताया कि रमजान के महीने में अल्लाह को खुश करने के लिए वह अपनी सब से प्यारी चीज की कुरबानी देना चाहता था. वह बेटी रिजवाना को बहुत प्यार करता था, इसलिए उसे ही कुरबान कर दिया. नवाब जिस छुरी से बकरे काटता था, उसी से उस ने अपनी बेटी को हलाल कर दिया.

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26 साल के नवाब ने पुलिस को बताया कि मैं नमाजी हूं. बेटी को कुरबान कर के अल्लाह को खुश करना चाहता था. वह कई दिनों से अपने ननिहाल में थी. मैं ने रिजवाना को ननिहाल से बुलवा लिया.

7 जून को उसे बाजार ले गया और शहर में घुमायाफिराया. उसे मिठाई, फ्रूट, चौकलेट आदि खिलाए और उस की पसंद की चीजें दिलवाईं. उस के बाद मैं घर आ गया. रात को रिजवाना अपनी मां शबाना के साथ छत पर सोई थी, मैं भी पास में ही सोया था.

आधी रात बाद मैं रिजवाना को चुपके से उठा कर नीचे के कमरे में ले गया. वहां उसे कलमा सुनाया. फिर अपनी गोद में बिठा कर बकरा काटने वाली छुरी से धीरेधीरे उस का गला रेत दिया.

बेटी को हलाल करने से मेरी पैंट खून से सन गई तो मैं ने कपड़े बदले. फिर छुरी और खून से सने कपड़े छिपा कर रख दिए और वापस छत पर आ कर सो गया. मुझे नींद नहीं आ रही थी, पर मैं सोने का नाटक कर रहा था.

बाद में जब शबाना मुझे बेटी की लाश के पास ले गई तो मैं ने बेटी पर बिल्ली के हमले की बात कह कर मामले को दूसरा रूप देने की कोशिश की लेकिन बाद में पुलिस आ गई और मेरी मंशा पूरी नहीं हो सकी.

पुलिस ने बेटी की हत्या के आरोप में नवाब अली कुरैशी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया और वहां से उसे जेल भेज दिया गया. दूसरी ओर इसलाम से जुड़े लोगों ने आरोपी के बयान और कृत्य को धर्मविरोधी बताया. इन का कहना था कि इसलाम में इंसान का कत्ल हराम है. यह कृत्य सरासर धर्म के खिलाफ है.

मृत जिराफ संग फोटोशूट पर ट्रोल हुईं कृति सेनन

कृति सेनन हाल ही में अपने एक नए फोटोशूट को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार हो गईं. इस फोटोशूट में कृति एक मृत जिराफ के साथ पोज देती नजर आ रही हैं. कृति ने यह कवर शूट एक मैगजीन के लिए कराया था, जिसे इस मैगजीन ने ही अपने इंस्‍टाग्राम पर शेयर किया. लेकिन इसके बाद से ही कृति को इसके लिए ट्रोल किया जाने लगा. कई एनिमल लवर्स को कृति का ये अंदाज बिलकुल पसंद नहीं आया है.

दरअसल इस तस्‍वीर में कृति के पीछे बड़ी सी खिड़की पर लटकता हुआ जिराफ नजर आ रहा है. एक फोटो में कृति जिराफ का मुंह छूते हुए नजर आ रही हैं. कृति का यही फोटो एक मैग्‍जीन के कवर पर भी लिया गया है. वैसे तो कृति ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए यह कवरशूट कराया था, लेकिन उनका यही अंदाज सोशल मीडिया पर जरा भी पसंद नहीं किया जा रहा है. कृति को इसके लिए जमकर ट्रोल किया जा रहा है.

बता दें कि यह फोटोशूट लंदन के अनहौय पार्क में किया गया था, जहां कई जानवरों को प्रिजर्व कर के रखा जाता है. यहां प्राकृतिक रूप से मरने वाले जानवरों को टैक्‍सीडर्मी विधि से संजो कर रखा जाता है. हालांकि मैगजीन ने कृति के पोस्‍ट के साथ ही यह भी साफ किया है कि इस शूट के दौरान या बाद में किसी जानवर को कोई आपत्त‍ि नहीं पहुंचाई गई है. बता दें कि इससे पहले इसी साल मार्च में सोनम कपूर भी लंदन के इस अहोय पार्क में ब्राइड्सटुडेइन मैगजीन के लिए यहां फोटोशूट करा चुकी हैं.

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इस सारे विवाद पर चुप्‍पी तोड़ते हुए कृति सेनन ने अपनी अलोचनाओं का जवाब दिया है. कृति ने कहा, ‘यह लंदन के होटल जैसे स्‍थान पर कराया गया एक सामान्‍य फोटोशूट था. यह सब पूरी तरह नकली था. मैं भी जानवरों से प्‍यार करती हूं.’

ताजमहल है सिर्फ ताजमहल

ताजमहल को किस ने और क्यों बनाया, यह बात आर्किटैक्टों या हिस्टोरियनों के मतलब की हो सकती है, पर आमजन के लिए यह सौंदर्य का अद्भुत नमूना है. ताजमहल उन सैकड़ों मकबरों में से एक है जिन्हें मुगल व अन्य राजाओं ने अपने मरने के बाद शरीर को रखे जाने के लिए बनवाया था, लेकिन इस इमारत की जो वास्तुकला है वह अनूठी है. प्रवेश करते ही चबूतरे पर खड़े हो कर इमारत को देखने के साथ ही जो अनुभूति होती है वह अनूठी होती है.

अफसोस यह है कि देश की भगवा ब्रिगेड जहां इस को भगवा रंग में रंगने में लगी है, वहीं इमारत के आसपास उगते कारखाने इस का रंग फीका कर रहे हैं. देश का पुरातत्त्व विभाग इस की देखभाल करता है पर यह देखभाल खालिस भारतीय तौर पर बेदिल से अधकचरी की जाती है. सरकारी अमले की ताजमहल में रुचि है ही नहीं, यह इस बात से साफ है कि सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि या तो इस की देखभाल करो या फिर इसे गिरा दो.

एक बार एक ब्रिटिश औफिसर ने इसे गिराने का प्रस्ताव रखा भी था ताकि इस ‘खंडहर’ के पत्थर सड़क बनाने में इस्तेमाल किए जा सकें. गनीमत है कि तभी पुरातत्त्व विभाग ने इसे संरक्षित करने का जिम्मा लिया. ताजमहल अब न मकबरा है जिसे किसी मुगल बादशाह ने बनवाया था, न भगवा भाषा में कोई हिंदू मंदिर. यह तो एक भव्य सुंदर इमारत है जिस के हर कोने से शांति और प्रेम टपकता है. यह विशाल होेते हुए भी अपना सा लगता है और जो इस की छावं में होता?है उसे यह बौना नहीं बनाता, यह इस की खासीयत है.

ताजमहल यों ही प्रेम का प्रतीक नहीं बन गया. मुगल राजाओं ने दुनियाभर में इस से बड़ेबड़े निर्माण कराए हैं. मिस्र में पिरामिड हैं, चीन में ग्रेटवाल है, रोम में वैटिकन है, पेरिस में एफिल टावर है पर इन सब से प्रेम का एहसास नहीं टपकता. ये सब खुशी के प्रतीक नहीं हैं जैसे सफेदशुद्ध लगता ताजमहल है.

इस शुद्धसफेद ताज का रंग अब भूरा हो रहा है और सुप्रीम कोर्ट इसीलिए झल्ला रहा है क्योंकि सरकार का कोई अफसर या नेता इसे ठीक करने की जिम्मेदारी नहीं ले रहा है. इसे ठीक करने के लिए पिछले 20-25 वर्षों में इस के 20-30 मील के दायरे में बनीं फैक्टरियां अगर बंद करनी पड़ें, मकानमहल्ले हटाने पड़ें, सड़कें बंद करनी पड़ें तो कोई हर्ज नहीं. इन सब ने जानते हुए भी ताजमहल को नुकसान पहुंचाने का काम किया है. इन से हमदर्दी जताने की जरूरत नहीं है क्योंकि डिज्नीलैंड फिर बनाए जा सकते हैं लेकिन ताजमहल नहीं.

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