सुष्मिता सेन कर रही हैं इस लड़के को डेट

बौलीवुड एक्टर सुष्मिता सेन वैसे तो काफी समय से इंडस्ट्री से दूर है. हालांकि वो सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव रहती हैं. और इसी वजह से वो खबरों में भी बनी रहतीं है. बता दे, अब वो अपने अफेयर को लेकर चर्चा में है. और वो शख्स रोहमन शौल हैं, हाल ही में कुछ ऐसा हुआ जिससे पता चला कि सच में सुष रोहमन को डेट कर रही हैं. रोहमन शौल पेशे से एक मौडल है.

 

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सुष्मिता सेन ने एक फोटो पोस्ट करते हुए लिखा है लव औफ माई लाइफ. गौरतलब है कि ये फोटो ताजमहल की है और कई लोगों के लिए इसमें कई शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. इसमें फ्रेंड्स के अलावा लव औफ माई लाइफ भी लिखा गया है,  सुष्मिता सेन के प्यार का ऐलान है.

हालांकि ये पहली बार नहीं है कि सुष किसी को डेट कर रही है. इसके पहले भी वो कई स्टार्स को डेट कर चुकीं है लेकिन इस बार वो काफी ज्यादा सुर्खियां बटोर रहीं है. गौरतलब है कि सुष्मिता सेन की उम्र जहां 42 साल है तो वहीं रोहमन की उम्र करीब 27 साल बताई जा रही है. हाल ही में हुए एक शो के दौरान सुष्मिता सेन की दोनो बच्चियों के साथ रोहमन भी नजर आए थे और काफी ज्यादा मस्ती करते दिख रहे थे.

अनूप जलोटा ने जवान दिखने के लिए खर्च किए लाखों रुपए

टीवी चैनल कलर्स पर प्रसारित होने वाले शो ‘बिग बौस’ सीजन 12 में भजन गायक अनूप जलोटा ने एक खुलासा किया है कि उन्होंने हेयर ट्रांसप्लांट कराया हैं. और इसके लिए 7 लाख रु. की रकम खर्च की है. अनूप ने 7 हजार बाल ट्रांसप्लांट कराए थे तभी उनके बाल सर पर दिखते है. दरअसल अनूप जलोटा शो में रोमिल, दीपक और रोहित के साथ बैठकर बात कर रहे थे तभी उन्होंने इसका खुलासा किया.

एक बाल के लिए अनूप ने 100रु. खर्च किए है. अनूप ने बिना किसी झिझक के अपने बालों के बारे में घरवालों को पूरी जानकारी दी. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि मैंने तो 100 रु. एक बाल के हिसाब से खर्च किया है लेकिन सुना है 50 रु. में भी एक बाल के हिसाब से हेयर ट्रांसप्लांट होता है.

अनूप जलोटा ने बताया कि मेरे सारे बाल चले गए थे, पर मैंने हेयर ट्रांसप्लांट करवाया. सामने की तरफ मेरी दाढ़ी के और साइड के बाल निकालकर लगाए गए हैं. यही कारण है कि जहां दाढ़ी के बाल लगे हैं वो सफेद हैं और दूसरे काले हैं मेरे दाढ़ी के कई बाल सफेद हैं. अनूप का जवाब सुनकर रोहित ने एक और सवाल किया, फिर जो बाल निकाले गए हैं वहां कैसे आते हैं? अनूप जवाब में बोले, वो तो जड़ से निकल जाते हैं, फिर दोबारा नहीं आते हैं.

सबसे पहले यह सवाल कंटेस्टेंट दीपक ठाकुर ने अनूप से उनके बालों को लेकर पूछा, आपने सिर पर जो करवाया है वो कैसे हुआ है?  फिर रोहित पूछ पड़े, आपने सिर पर क्या कराया है? अनूप जलोटा दोनों के सवालों का जवाब देते हुए कहा, मैंने हेयर ट्रांसप्लांट करवाया है. उन्होंने ये भी बताया कि वे अपने बालों में कभी कलर नहीं लगाते हैं क्योंकि उन्हें नहीं लगता है कि उम्र छिपाने की जरूरत है.

बालों के बारे में चर्चा करते हुए अनूप खासतौर से दीपक को बताते हैं, जब बाल लगाए गए तब तो तुम्हारी तरह छोटे-छोटे थे. अब जाकर ऐसे हुए हैं, लेकिन पूरे पैसे वसूल हो गए हैं. तभी रोमिल बीच में कहते हैं कि अनूप जी आप तो कभी शेव भी नहीं करते हैं. इस पर वो बताते हैं. नहीं, मैं रोजाना सुबह शेव करता हूं. एक बार दाढ़ी बढ़ाई थी लेकिन घरवालों से डांट पड़ गई तो फिर क्लीन शेव हो गया. घरवाले कहते थे जिस तरह औडियंस को तुम्हें देखना पसंद है आप हमेशा वैसे ही रहो.

दलितों का दलन करने का चलन कब होगा खत्म

लखनऊ में सफाई कर्मचारी आयोग की एक सदस्य मंजू दिलेर के सामने सफाई कर्मचारियों ने पोल खोली है कि उन को ठेकेदारों के मारफत मिलने वाले वेतन में से भी हिस्सा अधिकारियों को देना पड़ता है. यह लखनऊ में ही नहीं होता, देशभर में होता है, धड़ल्ले से होता है. जिन सफाई कर्मचारियों के साथ अफसर बैठ कर खाना खाने तक तैयार नहीं हों उन से हिस्सा मांगने पर उन्हें कोई एतराज नहीं होता. यह पूरी तरह हमारे पौराणिक धार्मिक रिवाज के हिसाब से है.

सदियों से इस देश में शूद्रों को अपने हाथ में आई लक्ष्मी को दान करने के हुक्म दिए गए हैं. शूद्रों को वैसे तो नीचा समझा गया पर उन का पैसा कभी अशुद्ध नहीं होता. सफाई कर्मचारी जैसे अछूतों का जिक्र तो हमारे पुराणों में उतना ही है जितना जानवरों का होता है पर बारबार यह कहा गया है कि शूद्र या अछूत की छुई हर चीज को शुद्ध कर के इस्तेमाल करना चाहिए पर लक्ष्मी को शुद्ध करने की जरूरत नहीं.

यह दोगलापन आज भी उसी तरह कायम है. जाति व्यवस्था है ही इसलिए कि अछूतों को मजबूर किया जा सके कि वे छोटे काम करते रहें और कम से कम पैसे लें. कहीं वे ज्यादा पैसा न मांग लें इसलिए उन्हें मारापीटा जाता है. उन्हें बैंडबाजा नहीं बजाने दिया जाता, उन्हें ऊंचों की लड़कियों के पास आने से रोका जाता है.

सफाई कर्मचारी देश की आज पहली जरूरत हैं पर स्वच्छ भारत अभियान में वे गायब रहे. यह नरेंद्र मोदी की सोचीसमझी नीति थी. अछूत सफाई कर्मचारी ब्लैकमेल न करें इसलिए ऊंचों को शौचालय बनाने को अरबों दिए गए. गरीब दलितों के शौच पर पैर न पड़ें इसलिए उन्हें छोटे से घर में शौच जाने को मजबूर करना चाहा. उन्हें पैसा दिया गया पर उन से भी कमीशन काट कर.

अफसोस की बात है कि अफसरों को समझ नहीं आया कि दलितों को घर में शौचालय बनाने को इसलिए कहा जा रहा है कि वे दूसरों के लिए अशुद्धि न फैलाएं पर अफसरों का लक्ष्मी के प्रति लालच इतना रहा कि देशभर में सफाई अभियान केवल भगवा झंडों के साथ फोटो खींचने का नाटक बन कर रह गया.

शहरों, कसबों और गांवों को साफ करना है तो दलितों को सफाई का पूरा पैसा मिलना चाहिए ताकि वे खुद साफसुथरा रहने की सोचें. उन्हें गंदा, गरीब और फटेहाल रख कर देश तरक्की नहीं कर सकता. आज देश में काम करने वाले अतिपिछड़े और दलित ही बचे हैं, बाकी सब तो सरकारी नौकरियों में घुस गए हैं.

पढ़ाई काम के लिए प्रेरित करने के लिए नहीं कराई जाती, वह तो सरकारी नौकरी पाने के लिए की जाने वाली दौड़ है. उस सरकारी नौकरी को पा कर सफाई कर्मचारी से पैसा न लो यह पाठ कहीं नहीं पढ़ाया जाता. लक्ष्मी का कोई जरीया बंद न हो, यह जरूरी है न.

मेरे बौयफ्रैंड ने मेरे साथ कई बार सैक्स किया है. क्या विवाह के बाद मेरे पति को मेरे सैक्स संबंधों के बारे में पता चल जाएगा.

सवाल
मैं 20 वर्षीय युवती हूं. मेरे बौयफ्रैंड ने मेरे साथ कई बार सैक्स किया है. अब मेरा विवाह होने वाला है. मैं यह जानना चाहती हूं कि क्या विवाह के बाद मेरे पति को मेरे विवाहपूर्व सैक्स संबंधों के बारे में पता चल जाएगा, मैं क्या करूं? सलाह दें.

जवाब
जिस उम्र में आप को अपना ध्यान कैरियर में लगाना चाहिए था उस उम्र में आप ने शारीरिक संबंध बना कर गलती की है. वैसे भी आप ने बौयफ्रैंड के साथ सैक्स संबंध रजामंदी से बनाए थे तो अब क्यों डर रही हैं? विवाह पूर्व सैक्स संबंधों के बारे में पति को तब तक पता नहीं चलेगा जब तक आप खुद नहीं बताएंगी. लोगों के बीच यह आम धारणा है कि जब भी कोई युवती सैक्स संबंध बनाती है तो उसे ब्लीडिंग होती है और यही उस के वर्जिन यानी कुंआरे होने का मापदंड होता है जबकि यह धारणा गलत है क्योंकि जहां कई महिलाओं में कौमार्य झिल्ली होती ही नहीं, वहीं कुछ में यह इतनी मुलायम और लचीली होती है कि बचपन में खेलतेकूदते समय ही फट जाती है. अगर आप के पति आप की वर्जिनिटी पर सवाल उठाएं तो उन्हें यही समझाएं.

सुमन के लिए प्रेमचंद का वहशी प्रेम

21 अगस्त, 2016 की दोपहर को जिस तरह सुमन की 2 साल की बेटी सोनी घर के बाहर बरामदे से खेलते हुए गायब हुई थी, उसे देखते हुए घर वाले ही नहीं, पूरा गांव हैरान था. किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर छोटी सी बच्ची इस तरह कहां अचानक चली गई. घर में ही नहीं, उसे इधर उधर काफी खोजा गया, पर वह कहीं नहीं मिली. सोनी के न मिलने से सुमन ही नहीं, पूरा गांव परेशान था.

सोनी कहां गई, किसी की समझ में नहीं आ रहा था. बेटी के इस तरह गायब होने से सुमन का दिल बैठने लगा था. जल्दी ही यह खबर पूरे गांव में फैल गई थी. बेटी के न मिलने से सुमन का रो रो कर बुरा हाल था. सुमन की हालत देखते हुए उस के मां बाप, पड़ोसी प्रेमचंद और गांव के कुछ अन्य लोग उसे ले कर थाना फरेंदा पहुंचे और इंसपेक्टर संपूर्णानंद तिवारी को पूरी बात बताई तो उन्होंने लिखित शिकायत ले कर सोनी की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

इस के बाद थानाप्रभारी  ने सभी को सांत्वना दे कर घर भेज दिया कि वह बच्ची को ढुंढवाने की कोशिश करेंगे. मामला एक मासूम की गुमशुदगी का था, इसलिए संपूर्णानंद तिवारी ने मामले की जांच खुद संभालते हुए कारवाई शुरू कर दी.

गांव बाबू फरेंदा जा कर उन्होंने घर वालों से पूछताछ की तो पता चला कि सुमन के शादी से पहले गांव के पूर्व ग्रामप्रधान रामप्रीत के बेटे प्रेमचंद से प्रेमसंबंध थे. 2 दिन पहले वह सुमन से मिलने आया भी था. सुमन ने उसे झिड़क दिया था, तब उस ने खामियाजा भुगतने की धमकी दी थी. पुलिस के लिए इतनी जानकारी काफी थी.

संपूर्णानंद तिवारी ने सुमन और प्रेमचंद के प्रेमसंबंधों के बारे में विस्तार से पूछताछ की. इस के बाद प्रेमचंद पूरी तरह संदेह के दायरे में आ गया था. उन्होंने उस के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि वह थाने से लौटने के बाद से ही घर से गायब है. किसी को पता भी नहीं था कि वह कहां है.

प्रेमचंद के इस तरह घर से गायब होने पर पुलिस का संदेह और बढ़ गया. पुलिस खुद तो उस की खोज में जुट ही गई, मुखबिरों को भी उस की तलाश में लगा दिया. आखिरकार पुलिस ने मेहनत कर के प्रेमचंद को उसी के गांव के एक खंडहर पड़े मकान से गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई तो घाघ प्रेमचंद ने पुलिस को काफी छकाया. लेकिन अंत में उसे जुबान खोलनी ही पड़ी. अपना अपराध स्वीकार करते हुए उस ने बताया कि उसी ने सोनी का अपहरण कर उस की हत्या कर लाश को नदी में फेंक दी है.

इस घृणित कार्य को उस ने अकेले ही अंजाम दिया था. इस के बाद इस सिरफिरे आशिक ने सुमन से प्यार से ले कर सोनी की हत्या तक की जो कहानी सुनाई, उसे सुन कर पुलिस भी हैरान रह गई. वह पूरी कहानी कुछ इस प्रकार थी—

सुमन उत्तर प्रदेश के जिला महाराजगंज के गांव बाबू फरेंदा के रहने वाले सुखी और संपन्न किसान भगवानचंद की सब से बड़ी बेटी थी. वह काफी सूझबूझ वाली और खूबसूरत लड़की थी. इंटर पास करने के बाद वह आगे पढ़ना चाहती थी, लेकिन महाविद्यालय घर से दूर होने की वजह से वह आगे नहीं पढ़ सकी.

सुमन सयानी हुई तो भगवानचंद ने उस की शादी कानपुर के रहने वाले विशुनदेव से कर दी. ससुराल में भरापूरा परिवार तो था ही, सुखी और संपन्न भी था. ससुराल में उसे इतना प्यार मिला कि उसे मायके की कमी कभी नहीं खली. समय के साथ सुमन 2 बच्चों की मां बनी, जिन में बेटा विकास 5 साल का है तो बेटी सोनी 2 साल की थी.

सुमन समयसमय पर मायके आती रहती थी और 2-4 दिन रह कर ससुराल चली जाती थी. 10 अगस्त, 2016 को भी वह दोनों बच्चों को ले कर मायके आई थी. उस दिन दोपहर का समय था. सुमन घर में अकेली थी. उस समय उस के दोनों बच्चे सो रहे थे. वह कपड़े सहेज रही थी, तभी उसे अपने बाएं कंधे पर दबाव महसूस हुआ. उस ने पलट कर देखा तो पीछे गांव का ही प्रेमचंद खड़ा था. उसे देख कर उस ने हैरान हो कर कहा, ‘‘तुम…तुम ने तो मेरी जान ही निकाल दी.’’

‘‘तुम कब से मुझ से डरने लगी सुमन?’’ प्रेमचंद ने मुसकराते हुए कहा तो सुमन ने तुनक कर कहा, ‘‘मुझे इस तरह का मजाक बिलकुल पसंद नहीं. आज के बाद इस तरह का मजाक करना भी मत.’’

‘‘ठीक है बाबा, अब इस तरह कभी नहीं करूंगा. तुम बेकार ही डर गईं.’’

‘‘काम ही तुम ने ऐसा किया.’’

‘‘कैसी बातें करती हो सुमन, पहले तो तुम ने इस तरह का व्यवहार मुझ से कभी नहीं किया. सौरी, माफी मांग रहा हूं.’’ प्रेमचंद ने दोनों कान पकड़ कर कहा.

‘‘ठीक है, अब कभी ऐसा मत करना. और हां, अब जाओ, शाम को मम्मी पापा आ जाएंगे, तब शाम को मिलने आना. अगर अभी किसी ने तुम्हें यहां देख लिया तो न जाने क्या सोचेगा?’’ सुमन ने घबराते हुए कहा.

‘‘यार, मैं तुम से और तुम मुझ से प्यार करती हो, फिर इतना डर क्यों रही हो?’’

‘‘मैं तुम से प्यार जरूर करती थी, पर अब नहीं करती. मेरी शादी हो चुकी है. गृहस्थी बस चुकी है मेरी, 2 बच्चे हैं मेरे, प्यार करने वाला पति है. पहले जो हुआ, सो हुआ. अब उसे भूल जाओ. उन्हें मैं धोखा नहीं दे सकती.’’ सुमन ने कहा.

‘‘अचानक तुम्हें यह हो क्या गया सुमन, कैसी बहकी बहकी बातें कर रही हो तुम? अब बस भी करो और आओ मेरी बाहों में समा जाओ. तुम्हें आगोश में लेने के लिए मेरी ये बांहें कब से बेताब हैं.’’ कह कर प्रेमचंद ने सुमन को बांहों में भर लिया.

सुमन कसमसाते हुए उस की बाहों से आजाद होने के लिए तड़प उठी. और जब आजाद हुई तो गुस्से में बोली, ‘‘मैं ने कहा था न कि मेरी गृहस्थी बस चुकी है, परिवार हो चुका है मेरा. तुम जो चाहते हो, अब वह नहीं हो सकता. प्लीज, मेरी बसीबसाई गृहस्थी में आग मत लगाओ. मेरी बात को समझो और चुपचाप यहां से चले जाओ. कहो तो मैं तुम्हारे हाथ जोड़ लूं या पैर पकड़ लूं. पिछली बातों को भूल कर अब तुम मेरे ऊपर उपकार करो और यहां जाओ.’’

‘‘यह तुम क्या कर रही हो सुमन?’’ प्रेमचंद ने भर्राई आवाज में कहा, ‘‘मैं ने तो बस तुम से दिल्लगी की थी. मेरे सामने हाथ जोड़ने या पांव में पकड़ने की जरूत नहीं है. मेरी दुआएं हमेशा तुम्हारे साथ हैं और रहेंगी. भला मैं तुम्हारी गृहस्थी क्यों उजाड़ने लगा? ऐसी बात है तो आज के बाद मैं तुम्हारे सामने कभी नहीं आऊंगा. आज के बाद मैं तुम्हारी ओर देखूंगा भी नहीं. लेकिन आज मेरी इच्छा पूरी कर दो.’’ प्रेमचंद ने कहा.

लेकिन सुमन राजी नहीं हुई. प्रेमचंद ने उसे बहुत समझाया, पर सुमन ने उसे झिड़क दिया. जब किसी भी कीमतड्ड पर सुमन राजी नहीं हुई तो प्रेमचंद ने उसे धमकी देते हुए कहा, ‘‘मेरी बात न मान कर सुमन तुम ने बहुत बड़ी भूल की है. इस का खामियाजा तुम्हें भुगतना ही होगा.’’

25 साल का प्रेमचंद भी उसी के गांव का रहने वाला था. उस के पिता रामप्रीत गांव के प्रधान रहे थे. 4 भाईबहनों में प्रेमचंद दूसरे नंबर का बेटा था. इंटर पास कर के उस ने पढ़ाई छोड़ दी थी, क्योंकि आगे पढ़ने में उस का मन नहीं लगा.

पढ़ाई छोड़ने के बाद वह दिन भर आवारा दोस्तों के साथ घूमता रहता था. आतेजाते उस की नजर सुमन पर पड़ी तो उस के दिल की घंटी बज उठी. सुमन आंखों के रास्ते दिल में उतरी तो वह हर घड़ी उसी के बारे में सोचने ही नहीं लगा, बल्कि उसे एक नजर देखने के लिए उस के घर के चक्कर भी लगाने लगा. लेकिन अपने दिल की बात वह सुमन से कह नहीं सका.

दूसरी ओर सुमन भी कम नहीं थी. उस ने जल्दी ही प्रेमचंद के मन की बात भांप ली थी. पता नहीं क्यों, वह उस की ओर आकर्षित होने लगी. वह समझ नहीं पा रही थी कि ऐसा उस के साथ क्यों हो रहा है? ऐसे में जब प्रेमचंद ने हिम्मत कर के उस से दिल की बात कही तो उस ने भी अपने दिल की बात कह दी कि वह भी उस से प्यार करती है.

सुमन की स्वीकृति पर प्रेमचंद बहुत खुश हुआ. इस के बाद दोनों छिपछिपा कर मिलने लगे. संयोग से इस की भनक न तो सुमन के घर वालों को लगी और न ही प्रेमचंद के.

प्रेमचंद रोजीरोटी के चक्कर में चेन्नई चला गया तो कई सालों बाद गांव लौटा. उसी बीच सुमन की शादी ही नहीं हो गई, बल्कि वह 2 बच्चों की मां भी बन गई. इस बीच प्रेमचंद जब भी गांव आया, उस की मुलाकात सुमन से नहीं हो सकी.

संयोग से इस बार 20 अगस्त को प्रेमचंद गांव आया तो सुमन मायके आई हुई थी. सुमन के मायके में होने का उसे पता चला तो वह उस से मिलने उस के घर चला गया. लेकिन सुमन ने उसे लिफ्ट देने के बजाय झिड़क कर उस के अरमानों पर पानी फेर दिया. सुमन की बेवफाई ने प्रेमचंद को बेचैन कर दिया. उस पूरी रात वह सो नहीं सका. बिस्तर पर करवटें बदलते हुए यही सोचता रहा कि सुमन उस के साथ इस तरह बेवफाई कैसे कर सकती है?

भले ही वह अपनी मांग में किसी और के नाम का सिंदूर भर रही हो, पर प्यार तो उस ने उसी से किया था, इसलिए अब भी वह उसी की है. वह उस के बिना कैसे रह सकती है? और अगर रह सकती है तो उसे इस की सजा ऐसी मिलनी चाहिए कि जिंदगी भर दुख की धधकती आग में अपने आंसुओं को सुखाने की कोशिश करती रहे.

यही सब सोच कर उस ने सुमन को मजबूर करने के लिए एक खतरनाक षडयंत्र रच डाला. उस की योजना यह थी कि वह उस की मासूम बेटी सोनी का अपहरण कर लेगा और बदले में उस के जिस्म का सौदा करेगा. सुमन इस के लिए तैयार हुई तो ठीक, वरना वह उस की बेटी की हत्या कर देगा. बेटी को खोने के बाद वह सारी जिंदगी दर्द की आग में सुलगती रहेगी.

प्रेमचंद ने ठीक वैसा ही किया, जैसा उस ने योजना बनाई थी. योजना के अनुसार 21 अगस्त, 2016 की सुबह से ही वह सुमन और उस की मासूम बेटी पर नजर गड़ाए था. दोपहर को सोनी बरामदे में अकेली खेलती दिखाई दी तो वह चुपके से उस के पास पहुंचा और गोद में ले कर भाग गया.

उस समय सुमन घर के कामों में लगी थी. काम निपटा कर उसे बेटी की याद आई तो वह घर के बाहर आई. बरामदे में बेटी को न पा कर उस की तलाश में लग गई. काफी तलाशने के बाद भी जब उस का पता नहीं चला तो सभी ने उस के गायब होने की सूचना थाने में देने का मन बना लिया. सभी सोनी के गायब होने की सूचना देने थाने जाने लगे तो प्रेमचंद भी सब के साथ यह देखने थाने चला गया कि सोनी की गुमशुदगी में सुमन उस का नाम तो नहीं लिखवा रही है.

थाने से लौटते समय प्रेमचंद सब का साथ छोड़ कर गायब हो गया. अचानक बीच रास्ते से उस के गायब होने से सुमन को उस पर शक ही नहीं हुआ, बल्कि विश्वास हो गया कि सोनी के गायब होने के पीछे उसी का हाथ है. क्योंकि उस ने उस को धमकी दी थी कि अगर उस ने उस की बात नहीं मानी तो उसे इस का खामियाजा भुगतना होगा.

घर पहुंच कर सुमन ने प्रेमचंद की धमकी वाली बात मां बाप को बताई तो यह सब सुन कर वे सन्न रह गए. भगवानचंद ने तुरंत गांव वालों को इकट्ठा कर के पूरी बात उन्हें बताई. इस के बाद सभी रामप्रीत के घर पहुंचे और प्रेमचंद को सामने लाने और सोनी को सकुशल बरामद कराने को कहा.

प्रेमचंद का कुछ पता नहीं था. रामप्रीत ने उसे फोन कर के घर आने को कहा तो वह समझ गया कि पिता उसे घर आने को क्यों कह रहे हैं. उस ने घर आने से साफ मना कर दिया. जब उस से सोनी के बारे में पूछा गया तो उस ने पिता से भी साफसाफ कह दिया कि जब तक सुमन उस की बात नहीं मानेगी, तब तक वह सोनी को किसी भी कीमत पर नहीं लौटाएगा. साफ हो गया कि प्रेमचंद ने जो शर्तें रखी थीं, वह निहायत ही घटिया थीं. रामप्रीत बेटे की इस करतूत से गांव वालों के सामने लज्जित हो गए.

प्रेमचंद सुमन की देह के लिए पागल था. बात जब उस के पिता तक पहुंची तो उस का पागलपन सनक में बदल गया. उसे विश्वास हो गया कि सुमन अब उस की बात कभी नहीं मानेगी. फिर क्या था, उस ने मासूम सोनी का गला घोंट कर हत्या कर दी और लाश को नदी में फेंक दिया. इस के बाद गांव आ कर एक खंडहर पड़े मकान में छिप गया, जहां से पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था.

अपना अपराध स्वीकार कर के मासूम की हत्या की कहानी सुनाते समय प्रेमचंद के चेहरे पर न कोई शिकन थी और न कोई पछतावा, बल्कि अपने किए पर वह खुश था. देखा जाए तो प्रेमचंद ने सुमन को ऐसा जख्म दिया था, जो वक्त के साथ भर तो जाएगा, लेकिन उस की कसक कभी नहीं जाएगी. सुमन ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिसे उस ने अपना सब कुछ सौंप दिया, वही उसे इस तरह का दर्द देगा.

कथा लिखे जाने तक प्रेमचंद जेल में था. बेटे की करतूतों से दुखी रामप्रीत ने उस के किए की सजा दिलाने के लिए उस की जमानत की भी कोशिश नहीं की थी. जब इस सब की जानकारी सुमन के पति को हुई तो उन्हें भी बहुत दुख हुआ. पर यह सोच कर उन्होंने पत्नी को माफ कर दिया कि वह बीता हुआ पल था. बीते हुए पल पर वर्तमान को हावी होने देना ठीक नहीं है. वह सुमन को ले कर कानपुर चले गए. पति के इस फैसले से सुमन के मन को थोड़ा तसल्ली जरूर मिली होगी.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

खोखले वादों का शुभलाभ उठाते क्रोनी कैपिटलिस्ट

पंजाब नैशनल बैंक में 11,394 करोड़ रुपए के घोटाले के परदाफाश होने से स्तब्ध जनता उबर भी नहीं पाई थी कि 900 करोड़ रुपए के रोटोमैक और फिर ओरिएंटल बैंक औफ कौमर्स से 390 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी से वह और भी सन्नाटे में है. भ्रष्टाचार मुक्त देश, स्वच्छ भारत और ईमानदारी पर बड़ेबड़े दावे करने वाले नेता खामोश हैं. सरकार विपक्ष के निशाने पर है. इन घोटालों से सरकार चौतरफा घिर गई है.

नोटबंदी, जीएसटी जैसे निर्णयों के साथ अर्थव्यवस्था में ईमानदारी व सुधारों के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं. कहां तो विदेशों में जमा कालेधन को वापस लाने के वादे किए जा रहे थे और आज देश का सफेदधन ले कर भागने वाले कतार में दिख रहे हैं. ऐसे में जनता की ईमानदारी पर सरकार पर सवाल उठाने लगी है.

पीएनबी में घोटाले का यह मामला पिछले 7 वर्षों से चल रहा था लेकिन किसी को भी इस का पता नहीं चल पाया. देश के इस सब से बड़े बैंक घोटाले के बारे में बताया जा रहा है कि लेनदेन में हुए फर्जीवाड़े से कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाया गया है.

हीरो के व्यापार का किंग माना जाने वाला नीरव मोदी और उस के साथियों ने 2011 में बिना तराशे हीरे आयात करने के वास्ते लाइन औफ क्रैडिट के लिए पंजाब नैशनल बैंक की मुंबई स्थित ब्रेडी हाउस ब्रांच से संपर्क किया था. आमतौर पर बैंक विदेश से आयात को ले कर होने वाले भुगतान के लिए लैटर औफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी करता है. इस का अर्थ है कि बैंक नीरव मोदी के विदेश में मौजूद सप्लायर को 90 दिनों के लिए भुगतान करने पर राजी है और बाद में पैसा नीरव को चुकाना है. पर बैंक के कुछ कर्मचारियों ने नीरव मोदी की कंपनियों को फर्जी एलओयू जारी किए और ऐसा करते वक्त उन्होंने बैंक प्रबंधन को अंधेरे में रखा.

बैंक द्वारा दी गई ऐक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया है कि  नीरव मोदी की कंपनियों ने पूर्व डिप्टी जीएम गोकुलनाथ शेट्टी की मिलीभगत से फर्जी तरीके से 11,394 करोड़ रुपए का लैटर औफ अंडरटेकिंग ले लिया था. एलओयू एक तरह की गारंटी होती है जिस के आधार पर दूसरे बैंक कर्ज देते हैं.

घोटाले का परदाफाश

शेट्टी के रिटायर होने के बाद 16 जनवरी, 2018 को नीरव की एक कंपनी ने बे्रडी हाउस ब्रांच से गारंटी (एलओयू) देने का आग्रह किया. तब बैंक अधिकारियों ने एलओयू के बदले 100 प्रतिशत कैश जमा करने को कहा. इस पर कंपनियों ने कहा कि वे बिना कैश मार्जिन के वर्षों से एलओयू लेती रही हैं. जब इस की छानबीन शुरू हुई तो इस घोटाले का परदाफाश हो गया.

दिल्ली और मुंबई में बैंक अधिकारियों के साथ नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कंपनियों के प्रतिनिधियों की कई बैठकें हुईं. उन में कंपनियों से पैसा वापस करने को कहा गया. 15 जनवरी को 280.70 करोड़ रुपए के एक एलओयू की अवधि पूरी हो गई तो आरबीआई और सीबीआई को इस की जानकारी दे दी गई. इस के बाद मेहुल चौकसी की

2 कंपनियों के 65.25 करोड़ रुपए के एलओयू की लायबिलिटी 7 फरवरी को पूरी हो गई. इस की जानकारी भी आरबीआई और सीबीआई को दे दी गई तो छानबीन के बाद 12 फरवरी को पता चला कि कुल 11,394 करोड़ रुपए के एलओयू फर्जी तरीके से जारी किए गए.

गोकुलनाथ शेट्टी मार्च 2010 से मुंबई शाखा में पीएनबी के विदेशी विनिमय विभाग में कार्यरत था. कथित रूप से उस ने मनोज खारत नाम के एक क्लर्क के साथ मिल कर एलओयू जारी किए थे.

साजिश रचने वाले लोगों ने एक और कदम आगे बढ़ कर सोसाइटी फौर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनैंशियल टैलिकम्युनिकेशन (स्विफ्ट) का नाजायज फायदा उठाने का फैसला किया. यह इंटरबैंक मैसेजिंग सिस्टम है जिसे विदेशी बैंक पैसा जारी करने से पहले लोन का ब्योरा पता लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं. बैंक के कर्मचारियों ने अपने बड़े अधिकारियों की जानकारी के बिना गारंटी को हरी झंडी देने के लिए स्विफ्ट तक अपनी पहुंच का फायदा उठाया.

ऐसा करने पर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं को कोई शक नहीं हुआ और उन्होेंने नीरव मोदी की कंपनियों को फौरैक्स क्रैडिट जारी कर दिया. यह रकम एक विदेशी बैंक के साथ पीएनबी के खाते में दी गई थी जिसे नोस्ट्रो अकाउंट कहते हैं. पैसा इस अकाउंट से मोदी के विदेश में मौजूद बिना तराशे हीरे सप्लाई करने वाले लोगों को भेजा गया. जब ये फर्जी एलओयू परिपक्व होने लगे तो पीएनबी के भ्रष्ट कर्मचारियों ने 7 वर्षों तक दूसरे बैंकों की रकम का इस्तेमाल इस लोन को रिसाइकिल करने के लिए किया.

सीबीआई ने 13 फरवरी को नीरव मोदी ग्रुप, गीतांजलि ग्रुप और चांदरी पेपर ऐंड अलायड प्रोडक्ट्स नाम की कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की. सीबीआई ने नीरव मोदी, उन की पत्नी एमी, भाई निशाल और कारोबारी साझेदार मेहुल चौकसी के खिलाफ मामला दर्ज किया. 14 फरवरी को आंतरिक जांच पूरी होने के बाद पीएनबी ने बौंबे स्टौक ऐक्सचेंज को इस फर्जीवाड़े की जानकारी दी. मामला उजागर होने की भनक लगते ही नीरव मोदी जनवरी में भारत छोड़ कर न्यूयौर्क भाग गया.

15 फरवरी को प्रवर्तन निदेशालय ने मोदी के मुंबई, सूरत और दिल्ली के कई दफ्तरों में छापामारी की और प्रिवैंशन औफ मनी लौड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया.

कौन है नीरव मोदी

नीरव मोदी के पिता हीरा कारोबारी थे जो भारत से बैल्जियम के एंटवर्प चले गए. नीरव मोदी का लालनपालन वहीं पर हुआ लेकिन वह व्यापार के लिए मुंबई आ गया. उस ने अपने चाचा मेहुल चौकसी से व्यापार करना सीखा. पीएनबी घोटाले में मेहुल चौकसी का नाम भी शामिल है. नीरव मोदी 2013 से फोर्ब्स की अमीरों की सूची में अपना नाम बरकरार रखे हुए है. उस के ब्रैंड को अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा, बिपाशा बासु, एंड्रिया डायाकोनु  और रोजी हंटिंगटन प्रोमोट करते हैं. हालांकि, प्रियंका चोपड़ा अब अलग हट गई हैं.

46 वर्षीय नीरव व्हार्टन ड्रौपआउट है. उस के ज्वैलरी शोरूम में एक ज्वैलरी के दाम 5 लाख से 50 करोड़ रुपए तक हैं. नीरव मोदी, उस की पत्नी एमी, भाई निशाल और मेहुल चौकसी डायमंड्स आरयूएस, सोलर ऐक्सपोर्ट्स तथा स्टैलर डायमंड्स में भागीदार हैं. इन कंपनियों की हौंगकौंग, दुबई और न्यूयौर्क में इकाइयां हैं.

1999 में नीरव ने फायरस्टार कंपनी बनाई. फोर्ब्स के मुताबिक, नीरव की नैटवर्थ 11 हजार करोड़ रुपए है. फोर्ब्स की सूची में नीरव 85वें स्थान पर है. उस के ज्वैलरी स्टोर  लंदन, न्यूयौर्क, लास वेगास, हवाई, सिंगापुर, बीजिंग जैसे 16 शहरों में हैं. भारत में दिल्ली और मुंबई में उस के कई स्टोर्स हैं.

जब देश नीरव मोदी के घोटाले पर हैरान था तभी रोटोमैक और सेठ द्वारका दास इंटरनैशनल ज्वैलर का घोटाला भी सामने आ गया. पैनकिंग रोटोमैक कंपनी के प्रमुख विक्रम कोठारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. कोठारी, उन की पत्नी साधना और पुत्र राहुल कोठारी पर बैंक औफ बड़ौदा समेत 7 बैंकों को 3,695 करोड़ रुपए की चपत लगाने का आरोप है. इसी तरह सीबीआई ने दिल्ली स्थित डायमंड आभूषण निर्यातक द्वारका दास सेठ इंटरनैशनल कंपनी के खिलाफ ओरिएंटल बैंक औफ कौमर्स के साथ 389.85 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज किया है. कंपनी के निदेशकों सभ्य सेठ, रीता सेठ, कृष्णकुमार सिंह और रवि सिंह पर आरोप हैं कि उन्होंने बैंक के साथ धोखाधड़ी की.

घोटालों का घटाटोप

देश में बैंक धोखाधड़ी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. भारतीय बैंकिंग की स्थिति पर इंडियन इंस्टिट्यूट औफ मैनेजमैंट, बेंगलुरु की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद मानते हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में वर्ष 2012 से 2016

के बीच 22,743 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हुई. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2017 में पहले 9 महीने में आईसीआईसीआई बैंक में करीब 455, स्टेट बैंक औफ इंडिया में 429, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक में 244 और एचडीएफसी बैंक में 237 मामले पकड़े गए.

नीरव मोदी से पहले भी कई बैंकिंग घोटाले सामने आ चुके हैं. 2014 में कोलकाता के उद्योगपति बिपिन बोहरा पर कथिततौर पर फर्जी दस्तावेज के सहारे सैंट्रल बैंक औफ इंडिया से 1,400 करोड़ रुपए का लोन लेने का आरोप लगा था. उसी साल सिंडिकेट बैंक के पूर्व चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एस के जैन पर रिश्वत ले कर 8,000 करोड़ रुपए का ऋण मंजूर करने का मामला सामने आया था. 2014 में ही यूनियन बैंक ने विजय माल्या को विलफुल डिफौल्टर घोषित कर दिया था. इस के बाद एसबीआई और पीएनबी ने भी यही राह अपनाई.

बाद में सीबीआई ने विजय माल्या के खिलाफ 9,000 करोड़ रुपए की कर्जवसूली के लिए चार्जशीट दाखिल की. 2016 में विजय माल्या देश छोड़़ कर भाग गया. तब से वह ब्रिटेन में रह रहा है. ललित मोदी 6,000 करोड़ रुपए के साथ भाग गया. भारत सरकार उस के प्रत्यर्पण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही है. हर तरफ गजब की सांठगांठ चल रही है.

कुछ समय पहले 7,000 करोड़ रुपए के एक और घोटाले में विनसम डायमंड्स का नाम सामने आया था. जतिन मेहता की विनसम डायमंड्स कंपनी का मामला भी नीरव मोदी जैसा ही था. हर तरफ कोलकाता के कारोबारी नीलेश पारेख का मामला भी सुर्खियों में रहा. सीबीआई ने 2017 में नीलेश को मुंबई एअरपोर्ट से गिरफ्तार किया था. उस पर कम से कम 20 बैंकों से 2,223 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप थे. पारेख ने यह पैसा शेल कंपनियों के माध्यम से हौंगकौंग, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात ट्रांसफर कर दिया था.

बढ़ता डूबत ऋण

आंकड़े बताते हैं कि जितना देश में एनपीए यानी डूबत ऋण है दुनिया के 137 देशों की उतनी जीडीपी है. पिछले 5 सालों में बैंकों में 1 लाख से ज्यादा रकम के 5,064 घोटाले हुए. इन में बैंकों को 16,770 करोड़ रुपए की चपत लगी.

कहने को पीएनबी घोटाला 11,300 करोड़ रुपए का बताया जाता है पर नीरव मोदी ने अन्य बैंकों से भी करीब 8 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लिया है. इस तरह यह घोटाला 15 से 20 हजार करोड़ रुपए का बैठता है.

30 सितंबर, 2013 तक डूबत खातों की कुल राशि 28,416 करोड़ रुपए थी और 30 सितंबर, 2017 तक यानी 4 वर्षों में यह बढ़ कर 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपए हो गई, अर्थात नरेंद्र मोदी की सरकार के दौरान यह लूट तकरीबन चारगुना बढ़ गई.

मजे की बात यह है कि बैंकों को बचाने के लिए सरकार 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा देने की योजना बना रही है यानी साफ है कि सरकार फिर क्रोनी कैपिटलिस्टों के लिए राहत और लूट का इंतजाम कर रही है. सरकार से पूछा जाना चाहिए कि यह पैसा किस का है और इस से वह किसे बचाने की कोशिश कर रही है. जाहिर है आम आदमी, किसान को तो बिलकुल नहीं.

पगपग पर सांठगांठ है. सरकार अपराधियों को विदेश भगा देती है और फिर वर्षों तक जनता का मन बहलाने के लिए प्रत्यर्पण का ड्रामा करती है. 5 साल पहले ललित मोदी को भगाया, 2 साल विजय माल्या को हो रहे हैं, अब नीरव मोदी. यह पक्का है कि यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है. जो पूंजीपति प्रधानमंत्री के विदेश दौरों में बिजनैस डैलीगेट्स के तौर पर नजर आते हैं और फिर प्रधानमंत्री के साथ खिंची तसवीरों  से रुतबा बना कर मोटा धन उगाते हैं, उन पर नजर रखी जानी चाहिए.

जानबूझ कर खेल

जो उद्योगपति रंगेहाथ पकड़े जाते हैं वे दरअसल ऐसे होते हैं कि जो सब नियमकायदों का उल्लंघन कर के करोड़ोंअरबों का कर्ज लेते हैं और उसे डूबत खाते में डलवा देते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि दिवालिया घोषित होने के बाद उन का कुछ नहीं  बिगड़ता. अगर डिफौल्टरों की सूची देखें तो बारबार वही लोग सामने आते हैं जो पहले डिफौल्टर घोषित हो चुके हैं. वे फिर से सरकारी बैंकों तक पहुंचने में कामयाब हो जाते हैं. वे बढ़ाचढ़ा

कर बिजनैस परियोजनाओं के प्रस्ताव पेश करते हैं और लोन लेने में सफल हो जाते हैं. बाद में कर्ज चुकाने में नाकाम रहते हैं. यह बैंक अधिकारियों, बिजनैसमेन व सरकारी तंत्र का मिलाजुला खेल है.

हिम्मत व चोरी कर सीना जोरी का आलम तो देखिए कि नीरव मोदी बैंक को खुलेआम पैसा नहीं चुकाने की चुनौती दे रहा है. बैंक प्रबंधन को लिखे पत्र में नीरव ने कहा है कि उस ने उस की साख खराब कर दी. मामले को तूल दे कर ऋण वापसी के सभी रास्ते बंद कर दिए. उस के ब्रैंड को बरबाद कर दिया गया.

सरकारी बैंकों में नेताओं की चलती है. बड़े पूंजीपतियों और नेताओं की मिलीभगत होती है. सरकारी बैंकों के अफसरों की इतनी हिम्मत नहीं होती कि वे मना कर सकें. 1969 में इंदिरा गांधी ने जब 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था तब कहने को उन का लक्ष्य बैंकों में जमा पूंजी से राष्ट्रीय विकास करना था पर असल में बैंकों पर खुद का नियंत्रण करना था ताकि पूंजीपतियों को मनमरजी से लोन बांटा जा सके और वक्त पड़ने पर उन्हीं से वसूली की जा सके. इस के बाद  संपूर्र्ण बैंकिंग व्यवस्था पर डूबत खातों का घुन लग गया.

डिफौल्टर कंपनियों के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया के लिए शुरुआत में जो मामले नैशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल को भेजे गए उन में इस्पात, बिजली और सीमेंट शामिल हैं. बड़ी मात्रा में कौर्पोरेट कंपनियों द्वारा बैंकों का पैसा दबाया गया. देशभर की दर्जनों कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया में हैं. सरकार ऐसी कंपनियों की संपत्तियों को बेचने की तैयारी कर रही है. एस्सार अपने स्टील कारोबार का बड़ा हिस्सा बेचने को मजबूर है. वह अपने तेल व्यापार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहा है. जिंदल स्टील को अपने रेल व्यापार का 49 प्रतिशत हिस्सा बेचना पड़ रहा है. वह अपना 3,500 मेगावाट का पावर प्लांट भी बेचने को तैयार है.

रीयल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को अपने रैंटल और भूमि संपत्ति में से 40 फीसदी हिस्सा बेचना पड़ रहा है. उस के दिल्ली स्थित भव्य साकेत मौल तक को बेचने की नौबत आ गई है. जेवीके को बैंकों का पैसा लौटाने के लिए अपने बेंगलुरु और मुंबई एअरपोर्ट में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचनी पड़ रही है और सड़क से जुड़ी अपनी पूरी संपत्ति को वह बेच रहा है.

जीएफआर हाईवे प्रोजैक्ट, साउथ अफ्रीकन कोल माइंस, इस्तांबुल एअरपोर्ट और सिंगापुर पावर प्रोजैक्ट का 70 प्रतिशत, इंडोनेशिया के 2 कोयला खदानों को बेचना चाहता है. जेपी ग्रुप अल्ट्राटैक, यमुना ऐक्सप्रैस वे और जेएसडब्लू में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रहा है.

टाटा द्वारा यूके में कोरस स्टील प्लांट, धमरा पोर्ट को बेचना पड़ रहा है. वह दक्षिण अफ्रीका में नियोटिल बेच रहा है और मुंबई में उसे अपनी जमीन तक बेचनी पड़ रही है. लैंको ग्रुप आंध्र प्रदेश और उडुपी में अपने बिजली प्लांट बेच रहा है. रेणुका सुगर, ब्राजील पावर, चीनी और बायोफ्यूल के कारोबार को निबटाने में जुटा है. वीडियोकौन 6 सर्किल में अपना टैलीकौम स्पैक्ट्रम बेचने को मजबूर है. मोजांबिक में वह तेल संपत्ति बेच रहा है.

बिड़ला सीमेंट को अपना सीमेंट व्यापार और सड़क से जुड़ी तमाम परियोजनाएं बेचनी पड़ रही हैं.

सहारा समूह की 86 संपत्तियां बिक रही हैं. वह फार्मूला वन में अपना 42 प्रतिशत, मुंबई में सहारा होटल, लंदन के होटल, न्यूयौर्क प्लाजा होटल, द ड्रीम न्यूयौर्क होटल और 4 हवाईर् जहाज बेच रहा है. 9,000 करोड़ रुपए ले कर भागे लिकरकिंग विजय माल्या की सारी संपत्तियां भी बिक रही हैं.

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के हालात भी बुरे हैं. उसे मुंबई में बिजली कंपनी के उत्पादन और वितरण की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचनी पड़ रही है.

सवाल है कि कंपनियां फेल क्यों हो रही हैं? हमारे यहां कच्चा माल है, श्रमशक्ति है, बाजार है, ग्राहक हैं, संसाधन हैं तो कोई व्यापार फेल क्यों होता है? जब सरकारी बैंक मेहरबान हैं, सरकार टैक्सों में छूट मिल रही है, आयातनिर्यात में भारी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, तो फिर कंपनियां दिवालिएपन की कगार पर क्यों पहुंच रही हैं. विदेशी कंपनियां कैसे यहां आ कर मालामाल हो रही हैं? स्टील, माइंस, बिजली कंपनियां क्यों फेल हो गईं? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए क्रोनी कैपिटलिज्म को समझना जरूरी है.

क्रोनी कैपिटलिज्म

दरअसल, शासकों और अमीरों ने मिल कर एक भ्रष्ट व्यवस्था बना ली है. सांठगांठ वाली यह व्यवस्था क्रोनी कैपिटलिज्म कहलाती है. इस में कारोबार में कामयाबी व्यापारी और सरकार के आपसी संबंध से तय होने लगती है. इस के तहत सरकारी तंत्र उद्योगपतियों को लीगल परमिट के आवंटन में पक्ष ले कर उन्हें अनुदान दे कर, टैक्स संबंधित सहूलियतें दे कर तथा अन्य आर्थिक अनियमितताओं के जरिए फायदा पहुंचाता है.

पिछली मनमोहन सिंह सरकार ने कौर्पोरेट पर खूब पैसा लुटाया. अब उन का कारोबार चला नहीं तो वे कंपनियां दिवालिया घोषित हो रही हैं. कौर्पोरेट और नेता परस्पर मदद कर एकदूसरे की ताकत बढ़ाते रहे हैं.

स्पैशल इकोनौमिक जोन यानी सेज, निजी अस्पतालों, स्कूलों को मुफ्त जमीन आवंटन, शहरों में औद्योगिक क्षेत्रों के कथित विकास, मशीनरी, कर्ज, सब्सिडी बिना मेहनत किए ज्यादा फायदे के सौदे साबित होते रहे हैं. इस तरह की सहूलियतों का भरपूर दोहन कर मोटा पैसा बनाने की ललक अधिक है.

पिछले कुछ समय से देश में अरबपतियों की बाढ़ और किसी भी तरीके से पूंजी बढ़ाने की प्रवृत्ति ने भारत को क्रोनी कैपिटलिस्ट देशों की सूची में 9वें स्थान पर ला खड़ा किया है.

क्रोनी कैपिटलिज्म में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा नहीं होती. यह मुक्त उद्यमशीलता, अवसरों के विस्तार और आर्थिक वृद्धि के लिए नुकसानदेह है.

राजनीतिक पार्टियां क्रोनी कैपिटलिज्म के लिए एकदूसरे पर आरोप लगाती रही हैं. भाजपा और आम आदमी पार्टी कांग्रेस पर क्रोनी कैपिटलिज्म का यह कहते हुए आरोप लगाती रही हैं कि 2जी घोटाला, कोयला घोटाला के जरिए यूपीए नेताओं के करीबी कारोबारियों को अनुचित फायदा पहुंचाया गया.

उधर, भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप है कि वे अडाणी और अंबानी जैसे कुछ करीबी उद्योगपतियों को कौडि़यों के भाव जमीन तथा दूसरी सुविधाएं मुहैया कराते रहे हैं. दूसरी तरफ आम आदमी, किसान, छोटे व्यापारी हैं जो मामूली कर्ज के लिए बैंकों के चक्कर लगातेलगाते थक जाते हैं. पहले तो उन्हें आसानी से कर्ज नहीं मिलता. और अगर कर्ज मिल भी गया तो जरा सी चूक होने पर बैंक 1 लाख रुपए के लोन पर किसान की 25 लाख रुपए की जमीन नीलाम कर देता है.

आम आदमी पर बैंक सख्त

आम आदमी अपनी जिंदगी की आवश्यक जरूरतों के लिए बैंकों से कर्ज लेता है और किस्त चुकाने में यदि उस से चूक हो जाती है तो बैंक उस की कुर्की कर उसे दिवालिया बना देता है, जबकि पूंजीपति सांठगांठ कर के बैंकों का पैसा लूट कर विदेश भाग जाते हैं.

जीवन के लिए अनिवार्य रोटी, कपड़ा और मकान से जुड़े कर्ज को चुकाने में आम आदमी से जरा सी चूक होने पर बैंकों की ज्यादतियां शुरू हो जाती हैं. बैंक आम कर्जदार की संपत्तियां नीलाम कर उसे न घर का छोड़ता है न घाट का. ये वे लोग होते हैं जिन की मंशा बैंक से कर्ज ले कर भागना नहीं होती. क्रोनी कैपिलिस्टों की तरह ये विलफुल डिफौल्टर नहीं होते, पर बैंक इन की संपत्तियां कुर्क कर देता है या फिर नीलाम कर के वसूली कर लेता है. बैंकों की इस नीलामी में कई लोग बेघर हो जाते हैं. उन की अपनी जोड़ी संपत्ति भी बिक जाती है.

हाल ही में अखबारों और बैंकों की वैबसाइट्स पर कुछ लोगों के मकानों की नीलामी के नोटिस देखिए:

28 फरवरी, 2018 को इलाहाबाद बैंक ने हिंदुस्तान समाचारपत्र में कर्ज चूककर्ताओं की संपत्तियों की नीलामी का विज्ञापन दिया है. इस में चंद्रभूषण ठाकुर के गांव सैदुल्लाबाद, लोनी, गाजियाबाद के रिहायशी फ्लैट नं. एसएफ-3, द्वितीय तल की 20.76 लाख रुपए में नीलामी की सूचना दी गई है.

23 फरवरी के दैनिक जागरण में ओरिएंटल बैंक औफ कौमर्स ने गीता सिंह पत्नी अनिरुद्ध सिंह के रिहायशी मकान संख्या ई-26, जवाहर विहार कालोनी, सदर तहसील, रायबरेली पर 9,99,500 रुपए का कर्ज 60 दिनों में न चुकाने पर इस संपत्ति पर कब्जा कर नीलाम कर देने की सूचना दी है.

ओरिएंटल बैंक औफ कौमर्स ने जानकीपुरम, लखनऊ के प्रवीन कुमार वर्मा के मकान नं. बी-1/281 को 2,18,19,000 रुपए न चुकाने पर 22 फरवरी के दैनिक जागरण में नोटिस प्रकाशित किया है.

स्टेट बैंक औफ इंडिया ने मकान, जमीन नंबर 10, बिल्हा ब्लौक, राहंगी, जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़ की मेघा भट्ट को 8 लाख 25 हजार रुपए के लिए इस संपत्ति की नीलामी करने के लिए अपनी वैबसाइट पर नोटिस प्रसारित किया है.

स्टेट बैंक की अमेठी शाखा ने प्रदीप कुमार कौशल के रिहायशी मकान वार्ड नं. 6, रामलीला मैदान, मौजा भनौली, अमेठी के 8.50 लाख रुपए न चुकाने पर नीलामी का विज्ञापन निकाला है.

यूनियन बैंक औफ इंडिया महल्ला किशनपुरा, जालंधर की मधुबाला के मकान नं. 352 के 36 लाख रुपए न चुकाने पर नीलामी की तैयारी कर रहा है.

कैलाश डूडेजा के फ्लैट नं. 201, सैक्टर-सी, लिंबोडी, खंडवा रोड, इंदौर को 18 लाख रुपए में बेचने के लिए सूचना जारी की है. बैंक औफ इंडिया ने चिंचवाड, पुणे के एम पी सिंह के फ्लैट नं. 202 की 59 लाख रुपए में नीलामी की सूचना प्रकाशित की है. देना बैंक ने जयपुर के लखीचंद जैन के घर को 47.75 लाख रुपए में नीलाम करने का नोटिस दिया है.

खोखले वादे

जो देश खोखले दावों के बल पर जीता है, मेहनत के बजाय मंत्रों से सुखी, अमीर बनने की उधेड़बुन में दिनरात लगा रहता है, वहां ऐसे हालात सामने आते हों तो आश्चर्य कैसा?

इस देश में ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा,’ ‘ईज औफ डूइंग बिजनैस में भारत की रैंकिंग सुधरने का ढिंढोरा,’ ‘कालाधन वापस लाएंगे,’ ‘हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख जमा होंगे,’ ‘भारत विश्वगुरु होगा,’ ‘नोटबंदी से कालाधन बाहर निकलेगा,’ ‘जीएसटी से कर चोरी, बेईमानी रुकेगी,’ ‘राष्ट्रवाद,’ ‘मंदिर वहीं बनाएंगे,’ ‘वंदेमातरम’ और ‘गौभक्ति’ जैसे थोथे नारे और वादे प्रचारित किए गए. इन का देश के विकास से कोई लेनादेना नहीं है. स्टार्टअप, स्टैंडअप, मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना अब तक कोई रंग नहीं ला पाई हैं. फिर भी खोखले दावे किए जाते हैं.

ट्रांसपेरैंसी इंटरनैशनल की ताजा रिपोर्ट कहती है कि भारत भ्रष्टाचार के मामले में 2 पायदान और आगे बढ़ गया है. वह 183 देशों में 81वें स्थान पर जा पहुंचा है. 2016 में भारत 79वें नंबर पर था यानी बीते साल के दौरान देश में भ्रष्टाचार और बढ़ा है.

हमारे यहां जितने खोखले वादे, नारे हैं उतनी ही लूट ज्यादा है. व्यवस्था बेईमानों के नियंत्रण में है, वह बेईमानी को उकसाती है. तुम बेईमानी करो ताकि व्यवस्था में बैठे बेईमानों को भी फायदा मिले.

देश थोथे भाषणों, प्रवचनों से नहीं चलता. देश की जनता मेहनत करेगी तो वह अपने खूनपसीने की कमाई को लुटने नहीं देगी.

सरकार मेहनत के बजाय निकम्मापन और बेईमानी के रास्ते दिखाती है. भूमि, भवन मुफ्त, ब्याजमुक्त कर्ज, टैक्सों में छूट, बाजार की उपलब्धता, आयातनिर्यात की सुविधाएं जैसे अनगिनत साधन बैठेबिठाए उपलब्ध कराए जाते हैं. कौर्पोरेटजगत इन सुविधाओं का जम कर शुभलाभ उठाता है. फिर भी कुछ समय बाद पता चलता है कि कंपनियां फायदे के बजाय घाटे में जा रही हैं.

घाटे के बाद भी सरकार की मेहरबानी में कोई कमी नहीं आती. सरकार उन्हें दिवालिया घोषित कर देती है. उन के कर्ज को डूबत ऋण खाते में डाल देती है. कर्जदार का कुछ नहीं बिगड़ता. उस के घर से कुछ नहीं जाता. उलटा, वह सरकारी पैसे से अपनी निजी संपत्ति जोड़ लेता है.

मजे की बात है कि दिवालिया होने के बावजूद सरकार फिर से उन्हीं लोगों को दूसरी दिवालिया कंपनियां खरीदने के लिए कर्ज व सुविधाएं देने को तैयार दिखती है.

मेहनती कंपनियां खुद अपने साधनसुविधाएं जुटा लेती हैं. वे किसी की मुहताज नहीं होतीं, लेकिन जिन का इरादा ही बेईमानी के बल पर पैसा जोड़ना होता है वे इस तरह के फर्जीवाड़े करती रहती हैं.

जिस देश में मेहनतकश ज्यादा होंगे वहां लूट नहीं होगी. मेहनत की कमाई को वे लूटने ही नहीं देंगे. जिन लोगों ने बिना मेहनत पैसा, सुविधाएं पाईं, उन्हें लूट का कोई दुख नहीं होगा. लेकिन मेहनत की कमाई को कोईर् लूटने नहीं देगा.

असल में हमेशा से यहां काम न करने वाले मिल कर, मेहनत करने वालों की कमाई को लूटने की तिकड़म करते आए हैं. राजामहाराजा अमीरों से कर्ज ले कर उन्हें हर साधनसुविधा प्रदान करते आए थे. आम आदमी, किसानों से टैक्स वसूली चलती आई है.

देश के विकास के लिए सरकार और पूंजीपतियों की सांठगांठ वाली यह व्यवस्था खतरनाक है. इस से आम आदमी की कमाई लुट जाती है. लूटने वाले हमेशा की तरह दानदक्षिणा और घूस दे कर तीर्थयात्रा पर चले जाते हैं, पापों के प्रायश्चित्त करने का उन्हें उपाय जो बताया गया है.

भ्रष्टाचार का रास्ता है रक्षा उत्पादों पर विदेशी निर्भरता

भारत ने इजरायल के साथ एक और रक्षा सौदा किया है. इस सौदे में भारत बराक 8 एयर एंड मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदेगा. यह सौदा 777 मिलियन डौलर यानी लगभग 5,700 करोड़ रुपए का है.

पिछले दिनों रूस के साथ हुए पांच अरब डौलर के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीद सौदे के बाद भारत का यह दूसरा बड़ा सौदा है. इजरायल से मिलने वाला यह सिस्टम सतह से आकाश में मार कर के दुश्मन की हमलावर मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर देगा. यह सिस्टम नौसेना के सात हमलावर जहाजों की सुरक्षा के लिए लिया जा रहा है. इजरायल की नौसेना इस का इस्तेमाल कर रही है.

इस सिस्टम का उपयोग वायुसेना और थलसेना भी कर सकती है. डिफेंस सिस्टम बनाने वाली कंपनी  इजरायल एयरोस्पेस  इंडस्ट्रीज ने कहा है कि भारत के साथ मिल कर तैयार किए गए बराक 8 सिस्टम सौदे से दोनों देशों के रक्षा संबंध और मजबूत हुए हैं. दोनों देशों का रक्षा व्यापार अब बढकर 6 अरब डौलर यानी करीब 44 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का हो गया है.

कहने को यह सिस्टम भारत के सहयोग से बन रहा है जिस में डीआरडीओ व अन्य कंपनियां शामिल हैं. भारत हमेशा से सैन्य उत्पादों ओर तकनीक के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा है. कहने को रक्षा मंत्रालय ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादों को तरजीह देने की कोशिश कर रहा है.

सेना की ओर से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि उस ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अब तक 25 परियोजनाओं की पहचान की है पर इस के लिए बजट नहीं है. जिस कारण इन परियोजनाओं पर आगे नहीं बढा जा सकता. हो सकता है कि इन्हें बंद करना पड़े.

सेना ने यह भी कहा था कि सरकार ने रणनीतिक साझीदारी में रक्षा उपकरण देश में बनाने की एक नई पहल की है. इस में विदेशी कंपनियों को कहा गया था कि वह भारतीय साझीदारी में देश में अपना कारखाना लगाएं. इन में बनने वाले उपकरणों की खरीद सरकार करेगी.

सेना का कहना है कि यह कहना मुश्किल है कि भविष्य में देश में रक्षा उपकरण बन सकेंगे या नहीं. असल में सरकार की इसी योजना के तहत रफाल सौदे में अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस कंपनी को साझीदार बनाया गया था. अब यह मामला सरकार के गले की फांस बना हुआ है.

असल में सरकार और सेना को अपने देश में रक्षा उपकरण बनाने में दिलचस्पी नहीं है क्योंकि विदेशों से आयात किए जाने वाले अरबों के सैन्य उपकरणों में करोड़ों की दलाली का खेल होता है.

अमेरिका, फ्रांस, रूस, इजरायल जैसे देश हथियारों के सब से बड़े व्यापारी हैं. भारत इन देशों से हथियारों का सब से बड़ा खरीदार है. यह दलाली राजनीतिक पार्टियों से ले कर सरकार, सेना और बिचौलियों के बीच बंटती है. इस में सब  के वारेन्यारे होते हैं इसलिए किसी भी पार्टी की सरकार यह खजाना लुटाना नहीं चाहती.

इसलिए सेना की रक्षा सामग्री खरीदने के मामले में विदेशों पर निर्भरता बढती जा रही है. पिछले चार सालों में इस में करीब पांच गुना बढ़ोतरी हुई है.

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औडिशन के लिए डायरेक्टर ने कहा, कपड़े उतारकर दिखाओ

बौलीवुड  के #MeToo अभियान के तहत पिछले कई दिनों से यौन उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं. इंडस्ट्री की कई महिला कलाकारों ने खुले तौर पर अपनी आपबीती शेयर की हैं. बता दें, टीवी चैनल कलर्स पर प्रसारित होने वाले ‘दिल से दिल तक’  की फेम जैस्मीन भसीन ने अपनी आपबीती सुनाई.

उन्होंने जूम टीवी को फोन पर अपनी आपबीती शेयर करते हुए बताया,  ‘जब मैं मुबंई आई थी, तब मैं अलग-अलग जगह औडिशन्स और मीटिंग्स के लिए जाती थी. इसी दरम्या मेरी एजेंसी ने मुझे एक मीटिंग के बारे में बताया. एजेंसी ने बताया कि एक डायरेक्टर हैं जो एक मूवी बना रहे हैं. तुम्हें उनसे जाकर मिलना चाहिए और औडिशन देना चाहिए. डायरेक्टर का औफिस वर्सोवा में था.

जैसमिन ने बताया, हमारी बातचीत शुरू हुई तो मुझे थोड़ा अजीब लगा. डायरेक्टर ने  शुरुआत में मुझसे पूछा कि आप एक्ट्रेस बनने के लिए क्या कर सकती है,किस हद तक जा सकती हैं. ऐसे ही बातों-बातों में उन्होंने मुझसे बोला कि मैं तुम्हें बिकनी में देखना चाहता हूं. क्या तुम मुझे अपने कपड़े उतारकर दिखाओगी, मुझे समझ आ गया कि कुछ गडबड है. मैंने उन्हें बोला कि रोल में तो ऐसा कुछ नहीं है. इसलिए मुझे नहीं लगता कि किसी लड़की से सवाल करने का ये कोई तरीका है.

फिर उन्होंने मुझसे बोला कि मैं बस ऐसे ही तुम्हारी बौडी लुक्स देखना चाहता हूं. मैंने सोच लिया था कि मैं ऐसी परिस्थिति से भाग नहीं सकती हूं. मैंने उन्हें बोला कि जिस तरह से आप चाहते हैं, फिलहाल मैं आपको औडिशन देने की स्थिति में नहीं हूं. इतना कहकर मैं वहां से निकल गई.

इसके बाद मैंने मेरी एजेंसी को कौल किया और कहा कि ये डायरेक्टर ठीक नहीं है और पूरी बात बताई. एजेंसी ने मुझसे माफी मांगी. साथ ही उन्होंने कहा कि वो ये सुनिश्चित करेंगे कि अब कोई और लड़की उस डायरेक्टर के पास ना जाए.

जैस्मीन ने कहा, ‘हमें यौन उत्पीड़न के बारे में बात करना के लिए मजबूत होने की जरूरत है. कोई भी इससे इनकार नहीं कर सकता है कि यौन उत्पीड़न नहीं है. लड़कियों को पता होना चाहिए कि कैसे ऐसी परिस्थितियों से लड़ना है. किसी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा नहीं करना चाहिए, जिसे वो नहीं जानती हैं.’

 

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