चायनाश्ता ले कर महेंद्री आई तो उस ने सानिया के साथ चायनाश्ता किया. फिर सानिया से बोला, ‘‘सानिया, इसे भी अपना ही घर समझो, मौसी शाम को लड़का दिखा देगी. मुझे जरूरी काम न होता तो मैं भी शाम तक रुक जाता. लड़का पसंद आ जाए तो मैं और नीलम तुम्हारे हाथ पीले कर देंगे.’’
‘‘ठीक है अंकल,’’ सानिया मुसकरा कर बोली.सानिया को महेंद्री के सुपुर्द कर के दिलीप वहां से चला आया. उसे सानिया की कीमत मिल गई थी. एक ही रात में उस ने 40 हजार रुपए कमा लिए थे.
महेंद्री ने सानिया को आराम करने को कहा और दूसरे कमरे में जा कर किसी से फोन पर बात करने लगी.
शाम को 2-3 आदमी सानिया को देखने आए. उन्होंने चेहरों पर मास्क लगा रखे थे. महेंद्री से बात करने के बाद दूसरे दिन वह अपने साथ सानिया को ले कर राजस्थान के लिए चले गए. वहां कितनी ही जगह सानिया को दिखाया गया. एक पार्टी से एक लाख रुपए में शादी के लिए सौदा हुआ, लेकिन उन्होंने पूरी रकम का इंतजाम नहीं किया तो वे लोग सानिया को वापस महेंद्री के पास छोड़ कर चले गए.
महेंद्री को अपने 40 हजार रुपयों की फिक्र होने लगी. वह सानिया को अच्छे दाम में बेचना चाहती थी. इस के लिए सानिया को अच्छा भी दिखना जरूरी था. महेंद्री उस के बनावशृंगार और कपड़ों की खरीद के लिए सावित्री के घर ले गई.
सावित्री बवाना में ही रहती थी. सावित्री को महेंद्री ने बताया कि सानिया उस की रिश्तेदार है. लेकिन पारखी सावित्री ने एक ही नजर में ताड़ लिया कि महेंद्री इस लड़की को बेचने के लिए कहीं से फांस लाई है.
महेंद्री के काले कारनामों से सावित्री परिचित थी. उसे सानिया पर तरस आ गया. उस ने एकांत में सानिया को महेंद्री की हकीकत से वाकिफ करा दिया. सानिया सकते में आ गई. उस का दिल बैठ गया. वह यह जान कर घबरा गई कि वह गलत लोगों के हाथों में फंस गई है. उस ने निर्णय ले लिया कि वह सावित्री के पास रहेगी.सानिया ने महेंद्री के साथ जाने को मना किया तो महेंद्री गुस्से में आ गई. उस ने सावित्री को खरीखोटी सुनाई. सावित्री ने उसे अच्छे से जलील कर के भगा दिया.
सानिया अब सावित्री को अपनी मां मान कर उसी के साथ रहने लगी थी लेकिन महेंद्री को यह कैसे सहन होता कि उस का माल सावित्री हड़प जाए. वह फिर सावित्री से मिलने के लिए और सानिया को ले जाने के लिए उस के घर पहुंची तो मालूम हुआ कि वह सानिया को ले कर बाजार गई है.महेंद्री बाजार में उसे तलाश करने निकली तो डिफेंस कालोनी थाने की एसआई चंचल की नजर में आ गई. एसआई चंचल के साथ कांस्टेबल होशियार सिंह था. उसी की मदद से उस ने महेंद्री को पकड़ लिया और डिफेंस कालोनी थाने में ले आई.
दरअसल, कुछ दिनों से 3 लड़कियां घर से लापता थीं. उन की रिपोर्ट डिफेंस कालोनी थाने में दर्ज थी. एसआई चंचल उन्हीं की तलाश में बवाना आई थी. उसे मालूम था कि महेंद्री लड़कियों की खरीदफरोख्त करती है.महेंद्री से जब सख्ती से पूछताछ हुई तो उन गुमशुदा लड़कियों का तो नहीं, सानिया का महेंद्री के पास से सावित्री के कब्जे में जाने का राज जरूर खुल गया.डिफेंस कालोनी पुलिस ने इस मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी. उन के दिशानिर्देशन में एक पुलिस टीम का गठन किया गया, जिस की कमान एसआई चंचल, किशोर, कांस्टेबल होशियार के हाथों में सौंपी गई.
एसआई चंचल की टीम ने सानिया का एम्स में मैडिकल एग्जामिनेशन करवा कर इस बात की पुष्टि की कि क्या सानिया के साथ यौनाचार भी किया गया.ऐसी बात सामने नहीं आई तो पुलिस जांच दल ने सानिया को निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली, शिवाजी ब्रिज, मिंटो ब्रिज आदि स्टेशनों के प्लेटफार्म दिखाए. पुलिस टीम यह पता लगाना चाहती थी कि पहली बार वह किस स्टेशन और किस प्लेटफार्म पर नीलम को मिली थी.सानिया दिल्ली के स्टेशनों और स्थानों से अपरिचित थी, उसे मालूम नहीं था कि वह टे्रन से कहां उतरी थी.
एसआई चंचल ने अपनी टीम के साथ इस विषय पर माथापच्ची की तो उन्हें पुरानी दिल्ली स्टेशन को जांच के दायरे में लेने का खयाल आया, कारण सानिया गुवाहाटी से अवध आसाम एक्सप्रैस से दिल्ली आई थी और यह ट्रेन पुरानी दिल्ली स्टेशन ही आती है.जांच के लिए टीम सानिया को पुरानी दिल्ली स्टेशन ले कर आई. सानिया ने वह प्लेटफार्म और जगह पहचान ली, जहां बैठ कर वह हताशा में रोने लगी थी. वह 13 नंबर का प्लेटफार्म था.जांच दल ने वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो पहली अगस्त के दिन शाम के समय सानिया 2 कैमरों में दिखाई दे गई. उस के साथ नीलम भी बैठी नजर आ रही थी. पुलिस के लिए यह एक पुख्ता सबूत था.
जांच दल चूंकि डिफेंस कालोनी थाने का था और पुरानी दिल्ली का एरिया उन के क्षेत्र में नहीं आता था, इसलिए अपने यहां जीरो एफआईआर दर्ज कर के यह केस पुरानी दिल्ली स्टेशन के दायरे में आने वाले थाने को 23 अगस्त, 2022 को ट्रांसफर कर दिया गया.क्षेत्र के एसीपी प्रवीण कुमार के संज्ञान में यह केस आया तो उन्होंने थाने के प्रभारी शिवदत्त जैमिनी को आदेश दिया कि इस केस को बड़ी संजीदगी से हैंडल करें.थानाप्रभारी शिवदत्त जैमिनी ने एसआई राजेंद्र कुमार के दिशानिर्देशन में काम करने के लिए एक टीम का गठन कर दिया. इस में एएसआई सुखपाल, कांस्टेबल रवि, पल्लवी को शामिल किया गया.
महेंद्री को भी इस थाने की कस्टडी में दे दिया गया था. सानिया और सावित्री भी इस थाने को सौंप दी गईं.
पुख्ता सबूत एकत्र करने के बाद एसआई राजेंद्र ने अपनी टीम के साथ शास्त्री पार्क इलाके में दबिश दे कर दिलीप और नीलम को भी गिरफ्तार कर लिया.
दिलीप अपनी पत्नी नीलम के साथ शास्त्री पार्क की गली नंबर 1, मकान नंबर एफ-3 में रहता था. उस का पुश्तैनी पता वार्ड नंबर-15, खाटी गांव, थाना छातापुर, जिला सुपोल, बिहार था. शास्त्री पार्क में अपनी पत्नी नीलम के साथ रहते हुए छोटेमोटे अपराध करता था. कभीकभी वे दोनों कोई बड़ा अपराध भी करते थे.महेंद्री लड़कियां खरीद कर उन्हें ऐसे लोगों को बेचती थी, जिन की किसी कारणवश शादी नहीं हो पाती थी. वह कई लड़कियों को देहमंडी में भी बेच चुकी थी. उस पर पहले भी कई केस चल रहे थे. इस बार सानिया को बेचने के चक्कर में वह फिर पकड़ी गई थी. पुलिस ने भादंवि धारा 363, 366ए, 370, 370ए, 372, 373,120/34 तथा 21 पोक्सो एक्ट लगा कर दिलीप पूर्वे, नीलम और महेंद्री को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. सावित्री बेकुसूर थी, इसलिए उसे छोड़ दिया गया.
सानिया के पिता का नाम नौइमुल था. सानिया को मां का नाम मालूम नहीं था. मांबाप बांग्लादेश में कहां काम करते हैं, वह नहीं जानती थी.बचपन से वह दादादादी के पास पली थी. दादा की मौत के बाद घर में फाके पड़े तो वह काम की तलाश में दिल्ली आ गई थी और लड़कियों का सौदा करने वाले लोगों के चंगुल में फंस गई थी.पुलिस ने दिलीप पूर्वे, उस की पत्नी नीलम और महेंद्री से पूछताछ कर उन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. सानिया वापस अपने घर रामपुर टाउन नहीं जाना चाहती थी, इसलिए पुलिस ने उसे नारी निकेतन में भेज दिया.



