इश्क की फरियाद: भाग 2

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लेखक- अलंकृत कश्यप

मोहित ने फांदी दीवार

गरमी की वजह से उस की आंखों से नींद कोसों दूर थी और बेचैनी से वह इधरउधर करवटें बदल रही थी. तभी अचानक घर में किसी के कूदने की आहट सुनाई दी. धीरेधीरे वह काला साया उस की ओर बढ़ने लगा तो निरूपमा ने पहचानने की कोशिश करते हुए पूछा, ‘‘कौन?’’

निरूपमा की आवाज सुन कर काला साया कुछ क्षणों के लिए ठिठक गया. उस की खामोशी देख कर निरूपमा का माथा ठनका. उस ने सोचा कि यह मोहित ही होगा. उस ने पास आ कर देखा तो वह मोहित ही निकला.

उस रात मोहित काफी देर तक निरूपमा से मिन्नतें करता रहा कि वह एक बार उस की बात मान ले. किंतु निरूपमा ने उसे बुरी तरह डपट दिया. शोरशराबे से उस का पति आशाराम भी जाग गया. आशाराम ने भी मोहित को डांट दिया. उस दिन मोहित को अत्यधिक विरोध सहना पड़ा, जिस से वह अपमानित हो कर तिलमिला कर रह गया.

मोहित अपनी बेइज्जती पर भलाबुरा कहता हुआ उलटे पैरों वापस लौट गया. लेकिन मोहित ने तय कर लिया था कि वह इस अपमान का बदला जरूर लेगा.

अगले दिन शाम के समय उस ने अपने भाई अंजनी, दोस्त अतुल रैदास और अब्दुल हसन को सारी बात बताई और कहा कि वह आशाराम को रास्ते से हटाना चाहता है. भाई और दोनों दोस्तों ने घटना को अंजाम देने के लिए उस का साथ देने की हामी भर दी.

इश्क के जुनून में अंधे मोहित ने निरूपमा का प्यार पाने के लिए अब कुचक्र रचना शुरू कर दिया. 24 अप्रैल, 2019 को शाम के वक्त आशाराम घर डलोना जाने वाली सवारियों का इंतजार कर रहा था. उसी समय मोहित अपने भाई अंजनी के साथ उस के टैंपो में आ कर बैठ गया. तभी मोहित ने ड्राइविंग सीट पर बैठे आशाराम से पीछे वाली सीट पर आ कर बैठने को कहा.

आशाराम मोहित साहू के पास बैठ कर बोला, ‘‘जरा सवारी ढूंढ लूं. तब तक तुम लोग बैठो, मैं अभी आता हूं.’’

‘‘नहीं यार, आज गाड़ी में कोई और नहीं चलेगा, हम तीनों ही चलेंगे. लो, पहले यह जाम पियो.’’ मोहित ने उस की तरफ शराब से भरा डिस्पोजेबल ग्लास बढ़ाते हुए कहा.

‘‘नहीं, मैं दिन में शराब नहीं पीता हूं, सवारियों को ऐतराज होता है.’’ आशाराम टैंपो की पिछली सीट से उतरते हुए बोला.

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‘‘नहीं, तुम्हें आज मेरे साथ बैठ कर तो पीनी ही पड़ेगी.’’ मोहित ने जोर देते हुए कहा.

साजिशन पिलाई शराब

कोई बखेड़ा खड़ा न हो जाए, यही सोच कर वह फिर से पिछली सीट पर आ कर बैठ गया. पिछले दिनों हुई कहासुनी को नजरअंदाज करते हुए मोहित के हाथ से गिलास ले कर एक ही सांस में वह शराब पी गया.

इस के बाद मोहित ने उसे 2 पेग और पिलाए. मोहित आशाराम को देख कर भौचक्का रह गया. फिर उस ने अंजनी को पैसे देते हुए कहा, ‘‘ले भाई, अंगरेजी की एक बोतल और ले आओ. अब हम लोग अतुल रैदास के कमरे पर चलेंगे, फिर वहीं बैठ कर पीएंगे.’’

अंजनी थोड़ी देर में दारू की बोतल ले आया. तब मोहित ने आशाराम से कहा, ‘‘अब तुम हम लोगों को अतुल रैदास के यहां छोड़ आओ, फिर अपने घर को चले जाना.’’

आशाराम उन से विवाद मोल नहीं लेना चाहता था. यही सोच कर वह उन दोनों के साथ गांव की ओर रवाना हो गया.

उस समय शाम के लगभग 7 बज चुके थे. जब वह घर नहीं पहुंचा तो उस के बडे़ बेटे सौरभ ने काल की. उस समय आशाराम ने उस से कहा था कि वह थोड़ी देर में घर आ जाएगा.

मोहित और उस के भाई अंजनी को अतुल रैदास के कमरे पर पहुंचाने के बाद जब आशाराम घर लौटने लगा तो मोहित ने आशाराम को रोक लिया और कहा कि अब यहां हम लोग जम कर पिएंगे. आशाराम मना नहीं कर सका. उन्होंने आशाराम को जम कर शराब पिलाई. जब वह नशे में धुत हो गया तब मोहित, अंजनी और अतुल ने आशाराम के गमछे से हाथपैर बांधने के बाद उस का गला घोंट कर हत्या कर दी. इस के बाद उन्होंने चाकू से उस का गला रेत दिया. अब्दुल हसन भी वहां आ चुका था. अब्दुल हसन उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर का रहने वाला था. वहां रह कर मजदूरी करता था.

इन लोगों ने मिल कर आशाराम के शव को उसी के टैंपो में लाद कर कोराना गांव के पास बाकनाला पुल के नीचे जा कर फेंक दिया. तब तक काफी रात हो चुकी थी, जिस से लाश ठिकाने लगाते समय उन्हें किसी ने नहीं देखा. उस का टैंपो उन्होंने अवस्थी फार्महाउस के पास खड़ा कर दिया था, जो बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया था.

सुबह होने पर लोगों ने आशाराम की लाश देखी तो सूचना पुलिस को दी गई.

उन की निशानदेही पर पुलिस ने अतुल रैदास के कमरे से वह चाकू भी बरामद कर लिया, जिस से आशाराम का गला काटा गया था. मोहित साहू और अंजनी साहू से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया.

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इस के बाद पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुट गई. इस के 3 दिन बाद ही अब्दुल हसन व अतुल रैदास को 30 अप्रैल, 2019 को गिरफ्तार कर लिया गया. इन्होंने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इन दोनों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने इन्हें भी जेल भेज दिया. कथा लिखने तक सभी हत्यारोपी जेल में बंद थे.

कहानी सौजन्य – मनोहर कहानियां

नक्कल-असल नक्सलवाद! का मकड़जाल

यह किसी से छुपी हुई बात नहीं की छत्तीसगढ़ नक्सलवाद का गढ़ माना जाता है. यहां का “बस्तर अंचल” नक्सलवाद का केंद्र बिंदु है, जहां से कई प्रदेशों में नक्सलवाद की गतिविधियां चलती रहती है. वहीं दूसरी तरफ नक्सलवाद की आड़ में नकली नक्सलवादी भी पैदा हो गए हैं जो लोगों को ब्लैकमेल करते हैं फिरौती मांगते हैं और ऐश की जिंदगी जीते हैं . छत्तीसगढ़ की आवाम तथा दो प्रकार के नक्सलवाद से पीड़ित है एक है असल जो बंदूक की नोक पर लोगों को मार रहा है और समानांतर सरकार चला रहा है. दूसरा नकली नक्सलवाद जो भय पैदा करके पैसे ऐंठ रहा है. छत्तीसगढ़ की

पखांजुर पुलिस को मछली व्यापारियों से फर्जी नक्सली बनकर फिरौती की रकम मांगने मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने 24 घंटे में ही 2 महिला, 2 नाबालिग सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया. ये सभी आरोपी पिव्ही गांव में मछली पालन करने वाले दो व्यापारी से फर्जी नक्सली बनकर पत्र में 5-5 लाख रुपए और 1-1 बोरी चावल मांगा गया था. साथ ही दोनों व्यापारियों को फोन कर धमकी भी दी थी.थाना प्रभारी  के मुताबिक इस घटना के मास्टर माइंड महिला वैजू ध्रुव और अपने प्रेमी जोगेन बिस्वास ने प्लानिंग किया और बाकी सहयोगी सदस्यों को एकत्रित कर वारतदात को अंजाम दिया है. पहले तो पत्र के माध्यम से दोनों व्यापारी  से फिरौती मांगी गई, फिर दोनों ही व्यापारी को फोन पर धमकी भी दी गयी. पुलिस ने शिकायत के बाद जांच शुरु की और मोबाइल नंबर ट्रेस कर सभी आरोपियों को लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार किया है. इनके खिलाफ धारा 384,507,120 के तहत कार्रवाई की गई है.

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घटना के मास्टर माइंड वैजू ध्रुव नक्सली हिंसा में सन् 2010 में भुसकी मोड़ पर पुलिस पार्टी पर किये गए फायरिंग में भी शामिल थी. उस घटना में पुलिस आरक्षक बिष्णु लारिया शहीद हो गए थे. उस घटना में नक्सली वैजू ध्रुव नामक नाबालिग महिला नक्सली को बड़गांव थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था.

भूपेश बघेल के समक्ष बड़ी चुनौती

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी है जिसने झीरम घाटी नक्सल वादी हत्याकांड में अपने बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं को खोया है तत्कालीन समय के प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल बस्तर टाइगर कहे जाने वाले महेंद्र कर्मा एक समय के देश के बहुत चर्चित नेता विद्याचरण शुक्ल जैसे अनेक लोग झीरम कांड में खेत रहे ऐसे में कांग्रेस पार्टी आज जब सत्ता में है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष यह बड़ी चुनौती है कि किस तरह छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त कराएं और इस तरफ भूपेश बघेल सरकार निरंतर प्रयासरत दिखाई भी देती है हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को पत्र लिखकर पुणे मांग की है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को समूल नष्ट करने के लिए केंद्र गंभीरता के साथ राज्य सरकार का साथ दें छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अपनी गहरी जड़ें जमा चुका है उसे नष्ट करना आसान नहीं होगा मगर फिर भी अगर ईमानदारी से प्रयास किया जाए तो क्या नहीं हो सकता क्योंकि कांग्रेस ने नक्सलवाद का दंश रहा है अतः राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि भूपेश बघेल सरकार बड़ी गंभीरता से नक्सलवाद को खत्म करने में  लगी हुई है . इस हेतु छत्तीसगढ़ पुलिस जनता प्रयास करती हुई भी दिखाई दे रही है छत्तीसगढ़ में अब ऐसा कोई दिन नहीं होता जब कोई नक्सलवादी पुलिस के द्वारा मार न गिराया जाता हो या फिर आत्मसमर्पण न कर रहा हो.

इसी तरह पुलिस नक्सलवाद के खाल को पहन कर लोगों को ठगने वालों को भी जेल भेजने में लगी हुई है. जो एक सकारात्मक कदम कहा जा सकता है.

आपरेशन तेज, तेज और तेज

छत्तीसगढ़ में इन दिनों “नक्सलवाद” को खत्म करने के लिए पुलिस भी प्रयासरत दिखाई दे रही है. जी पुलिस के मुखिया डीएम अवस्थी की अध्यक्षता में  निरंतर बैठकर हो रही है यहां पुलिस मुख्यालय में नक्सल विरोधी अभियान तेज करने के लिए स्टेट लेवल कोऑर्डिनेशन कमेटी  बनाई गई है. बैठक में सुरक्षाबलों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और नक्सल विरोधी अभियान अधिक प्रभावी तरीके से चलाने पर चर्चा होती है  कमेटी की बैठक मे सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, आईबी के अधिकारी, बस्तर संभाग के आईजी और पुलिस अधीक्षक मौजूद रहते हैं.

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यही नही स्टेट कोऑर्डिनेशन कमेटी लेवल की बैठक  मे तय हुआ है कि बारिश के बाद आगामी तीन माह में नक्सलियों के विरूद्ध और अधिक तेजी से ऑपरेशन चलाया जाए.  नक्सल विरूद्ध अभियान की आगामी कार्य योजना  बनाई जा रही है. नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन तेज करने के लिए पुल-पुलियों का निर्माण तेजी से किया जाये.सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जैसे कोर एरिया वाले स्थानों पर प्लानिंग करके नक्सलियों के विरूद्ध कार्रवाई को अमलीजामा पहनाया जा रहा है नक्सलियों के साथ उनके समर्थकों पर भी कड़ी कार्यवाही  छत्तीसगढ़ में अब दिखने लगी है. सरकार  ने सुरक्षाबलों के अधिकारियों को नक्सलियों की सप्लाई चेन तोड़ने के निर्देश दिये है. नक्सलियों तक पहुंचने वाले राशन, दवाई और हथियारों की सप्लाई चेन तोड़कर प्रभावी कार्यवाही  के नजारे अब दिखने लगे है.

औलाद की खातिर : भाग 2

लेडी डाक्टर के जवाब से उमा के मन पर छाया अपराधबोध छंट गया. अब पति से उसे चिढ़ हो गई. वह सोचने लगी कि जरूर उसे पता होगा कि वह बेटा पैदा करने लायक नहीं. इसीलिए लड़कियों की हिमायत करता है.

उस दिन जब देवकुमार वापस आया तो उमा बोली, ‘‘तुम ने बता कर बहुत अच्छा किया, हकीकत बता कर मेरी आंखें खोल दीं.’’

‘‘भाभी, यह तो अच्छी बात है.’’

‘‘और अच्छी बात तब होगी, जब तुम यह बताओ कि तुम्हारे भैया का इलाज कहां कराऊं, जिस से हमारे आंगन में भी बेटा खेलेकूदे.’’

देवकुमार समझ रहा था कि भाभी बेटा पैदा करने के लिए उतावली है और उस के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती है. अत: उस ने जाल फैलाया, ‘‘भाभी, भैया का इलाज तो संभव नहीं है, लेकिन तुम जरूर पुत्रवती हो सकती हो.’’

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‘‘वो कैसे?’’ उमा की आंखों में उम्मीद की किरण दिखने लगी.

‘‘तुम्हें किसी दूसरे से नियोग करना होगा.’’ वह बोला.

‘‘नियोग में क्या करना होगा?’’ उमा ने पूछा.

‘‘तुम्हें पराए मर्द के साथ मिलन करना होगा.’’ देवकुमार ने बताया.

‘‘क्या बकवास कर रहे हो’’ उमा आंखें दिखाने लगी, ‘‘ऐसी बात कहते हुए तुम्हें शर्म आनी चाहिए. तुम्हारे भैया ने सुना तो न जाने क्या कर डालेंगे.’’

‘‘तो फिर बेटियों से ही संतोष करो.’’

उमा कई दिन तक सोचती रही. उस ने अपनी इच्छा दबाने का भी प्रयास किया, परंतु नाकाम रही. किसी भी दशा में वह बेटे को जन्म देना चाहती थी. बहुत सोचने के बाद वह पतित होने को तैयार हो गई.

दूसरे दिन उस ने देवकुमार को अपना निर्णय सुना दिया, ‘‘ मैं तुम्हारी सलाह पर अमल करने को तैयार हूं. सवाल यह है कि यह काम होगा कैसे?’’

‘‘भाभी, काम भी हो जाएगा और किसी को भनक तक नहीं लगेगी.’’

‘‘कैसे?’’

‘‘मैं हूं न, मेरी नसों में भी वही खून है, जो भैया के शरीर में है. खून वही रहेगा, पर शरीर बदल जाएगा. इस तरह भैया की नस्ल भी खराब नहीं होगी.’’

‘‘सोच कर बताऊंगी.’’

उमा ने काफी सोचा. फिर फैसला किया कि उसे हर हाल में बेटा चाहिए, इस के लिए वह देवकुमार से नियोग करेगी. अगले दिन उमा ने देवकुमार को नियोग करने की सहमति दे दी.

देवकुमार बेताब था तो उमा शर्म से गड़ी जा रही थी. देवकुमार ने उसे बांहों में ले कर प्यार करना शुरू किया तो उस की शर्म जाती रही. फिर वे वासना के सागर में गोते लगाने लगे. देवकुमार के नए जोश और उमा के अनुभव ने ऐसा कमाल दिखाया कि इस पहले मिलन से वे एकदूसरे के दीवाने हो गए.

कई महीने बीतने के बाद उमा को देवकुमार से गर्भ नहीं ठहरा, पर अवैध संबंध का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा. उमा तन से देवकुमार की हुई तो उसे मन से भी उस की होते देर नहीं लगी.

कोरोना महामारी के चलते देश में लौकडाउन हुआ तो 24 मई, 2020 को शिवकुमार पत्नी, बच्चों और देवकुमार के साथ फरीदाबाद से गांव वापस आ गया. फरीदाबाद में तो शिवकुमार के न रहने पर दोनों खूब मस्ती करते थे. लेकिन गांव आने पर शिवकुमार के साथसाथ घर के और लोग भी थे. उन सब की नजरों  से बच कर मिलना आसान नहीं था लेकिन दोनों किसी तरह मिल कर मिलन का आनंद ले लेते थे.

14 जुलाई, 2020 की सुबह शिवकुमार की लाश घर से 200 मीटर दूर भीटे में पड़ी मिली. सुबह गांव की महिलाएं उधर गईं तो देखा, तब उन्होंने इस की जानकारी घरवालों को दी. घरवाले वहां पहुंच कर रोनेबिलखने लगे. गांव के ही शुभम सिंह नाम के व्यक्ति ने पुलिस को घटना की सूचना दी.

सूचना पा कर एसओ मनबोध तिवारी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. मृतक शिवकुमार की लाश का उन्होंने निरीक्षण किया. उस के सिर पर किसी तेज धारदार हथियार के गहरे निशान थे. आसपास का निरीक्षण करने पर घटना से संबंधित कोई सुराग हाथ नहीं लगा.

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पूछताछ के दौरान परिजन कुछ भी बताने से हिचक रहे थे. घटना की सूचना देना तो दूर वह लाश का अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर रहे थे. इस पर एसओ को शक हो गया कि मृतक के घर वाले जानते हैं कि किस ने उन के बेटे की हत्या की है.

लेकिन हत्यारा भी कोई अपना करीबी होने के कारण मुंह नहीं खोल रहे हैं. फिलहाल एसओ मनबोध तिवारी ने घटनास्थल की काररवाई निपटा कर लाश पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दी.

पुलिस ने शिवकुमार के पिता उदयभान सिंह की तरफ से अज्ञात के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.

एसओ मनबोध तिवारी ने घटना के संबंध में गांव वालों से पूछताछ की तो पता चला कि घटना वाले दिन शाम को शिवकुमार का अपने भाई देवकुमार से झगड़ा हुआ था. इस से पहले भी दोनों भाइयों का एकदो बार झगड़ा हो चुका था. देवकुमार घर से फरार भी था. इसलिए एसओ तिवारी का शक देवकुमार पर पुख्ता हो गया.

17 जुलाई, 2020 को उन्होंने मुखबिर की सूचना पर धनपतगंज से देवकुमार को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उस से कड़ाई से पूछताछ की गई तो उस ने अपना जुर्म  स्वीकार कर लिया.

घटना से 3 दिन पहले शिवकुमार ने उमा और देवकुमार को आपत्तिजनक हालत में देख लिया था. जिस के बाद शिवकुमार ने दोनों को मारापीटा. इस के बाद शिवकुमार का देवकुमार से कई बार झगड़ा हुआ.

13 जुलाई को घटना वाली रात भी दोनों में उमा को ले कर झगड़ा हुआ. उसी रात शिवकुमार का अचानक पेट खराब हो गया. उसे दस्त हो गए. वह भीटे (गांव के बाहर स्थित टीले) की तरफ गया. पहले से जाग रहे देवकुमार ने उसे जाते देखा तो उसे भाई को सबक सिखाने का अच्छा मौका मिल गया. उस ने घर में रखी कुल्हाड़ी उठा ली और उस के पीछेपीछे हो लिया.

भीटे में पहुंचते ही देवकुमार ने पीछे से शिवकुमार के सिर पर कुल्हाड़ी से कई वार किए. शिवकुमार जमीन पर गिर कर तड़पने लगा. चंद पलों में ही उस की मौत हो गई. भाई को मारने के बाद देवकुमार घर से फरार हो गया.

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लेकिन उस का गुनाह छिप न सका और वह पकड़ा गया. देवकुमार की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी भी बरामद हो गई. आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद देवकुमार को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया.

(कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित)

औलाद की खातिर : भाग 1

35 वर्षीय शिवकुमार सिंह उत्तर प्रदेश के जिला सुलतानपुर के गांव लखनेपुर का निवासी था. उस के पिता उदयभान सिंह खेतीबाड़ी का काम करते थे. शिवकुमार के 3 भाई थे. एक बड़ा राजकुमार और 2 छोटे नरेश और देवकुमार. राजकुमार का विवाह हो चुका था, वह पिता के साथ खेती के काम में हाथ बंटाता था.

शिवकुमार का विवाह करीब 12 साल पहले उमा से हुआ था. बाद में वह 2 बेटियों की मां बनी.

उमा जब पहली बार गर्भवती हुई, तब उस की चाह बेटे की थी. यह चाहत दूसरी बार भी बनी रही. दोनों बार उमा को निराश होना पड़ा.

शिवकुमार को पता था कि बेटा न होने से उमा दुखी है. वह उसे समझाता भी था, लेकिन वह बेटा न होने के गम में घुलती रहती है. यह अलग बात है कि कई मायनों में बेटियां बेटों से लाख गुना बेहतर होती हैं.

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उमा के जी में तो आग लगी रहती कि सब के बेटे हुए, पर उसे नहीं हुआ. उस में ऐसी कौन सी कमी है, जो बेटी पर बेटी हो गई.

बच्चों के बड़े होने पर खर्च तो बढ़ा, लेकिन आमदनी उस हिसाब से नहीं बढ़ी. शिवकुमार बाहर जा कर काम करने की सोचने लगा. उस के गांव के कुछ लोग फरीदाबाद में काम करते थे. शिवकुमार ने उन से बात की तो दोस्तों ने काम पर लगवाने का वादा कर उसे फरीदाबाद बुला लिया. शिवकुमार पत्नी और बच्चों को छोड़ कर फरीदाबाद चला गया.

फरीदाबाद में एक फैक्ट्री में उस की नौकरी लग गई. वहां काम पर लगने के कुछ दिन बाद ही उस ने किराए पर कमरा ले लिया. रहने का सही ठिकाना हुआ तो वह गांव आ कर पत्नी उमा और दोनों बेटियों को अपने साथ फरीदाबाद ले गया. इस तरह उस की गृहस्थी की गाड़ी ठीकठाक चलने लगी.

शिवकुमार का छोटा भाई देवकुमार गांव में बेरोजगार घूमता था. उस ने कुछ दिनों बाद देवकुमार को भी फरीदाबाद बुला लिया. उस ने उसे भी काम पर लगवा दिया. दोनों भाई अच्छा कमाने लगे.

उमा के लिए फरीदाबाद अजनबी शहर था. वह दिन भर कमरे में ही रहती थी और कमरे में 2 ही इंसान थे, जिन से वह बात कर सकती थी, एक पति और दूसरा देवर.

पति से तो उमा सीमित बात करती लेकिन देवर देवकुमार से खूब गपशप करती थी. देवकुमार उमा से आयु में छोटा था और अविवाहित भी. वैसे भी देवरभाभी का रिश्ता होने के कारण उन में खूब पटती थी.

पहले तो उमा के प्रति देवकुमार की नीयत में खोट नहीं थी. लेकिन जब से उमा ने उस के सामने बेटा न होने का राग अलापना शुरू किया, तब से देवकुमार की नीयत डोलने लगी. भाभी की इसी कमजोरी का लाभ उठा कर देवर देवकुमार अपना उल्लू सीधा करने की सोचने लगा.

एक दिन काम से वापस आ कर देवकुमार जब उमा के पास बैठा तो उमा ने फिर अपने दुखड़े का पुलिंदा खोल दिया, ‘‘पता नहीं, मैं ने ऐसा कौन सा अपराध किया था, जिस का दंड बेटियों के तौर पर मुझे मिल रहा है.’’

देवकुमार को अपना उल्लू सीधा करने की दिशा मिल गई, ‘‘भाभी, बेटा और बेटी तो समान होते हैं, फिर तुम्हें बेटियों से चिढ़ क्यों है.’’

‘‘मुझे बेटियों से चिढ़ नहीं, अपने नसीब से शिकायत है.’’ उमा बोली, ‘‘2 बेटियों में से एक भी बेटा हो गया होता तो आज मेरे कलेजे में आग न लगी होती. कम से कम बुढ़ापे का सहारा और चिता में आग देने वाला भी तो कोई होना चाहिए. बेटा न होने से हमारे बाद तुम्हारे भैया का वंश ही खत्म हो जाएगा.’’

‘‘भाभी, विश्वास रखो,’’ देवकुमार ने आकाश की ओर उंगली उठाई, ‘‘नीली छतरी वाले के घर देर है, अंधेर नहीं. भाभी, लगातार 2 बेटियां होने से तुम खुद को दोषी क्यों मानती हो,’’ देवकुमार ने स्वार्थ की बिसात पर शातिर चाल चली, ‘‘तुम्हारी यह इच्छा जरूरी पूरी होगी.’’

उमा ने उस की आंखों में देखा, ‘‘यह तुम किस आधार पर कह रहे हो?’’

‘‘इसलिए कि शायद तुम्हें पता नहीं कि बेटा हो या बेटी, उस के लिए जिम्मेदार मां नहीं पिता होता है.’’

उमा ने चौंक कर उस की ओर देखा,‘‘मैं समझी नहीं, खुल कर बोलो.’’

‘‘भाभी जमीन को जोत कर उस में जिस पौधे का बीज डाला जाए, वही पौधा उगता है.’’ देवकुमार ने कायदे से समझाया, ‘‘अगर बीज खराब हो तो वह अंकुरित नहीं होता, मिट्टी में ही पड़ा रह कर सड़ जाता है.’’

‘‘हां, सड़ जाता है.’’

‘‘और बीज कमजोर होता है, तो उस से निकला पौधा भी कमजोर होता है न.’’

‘‘हां, होता है.’’

‘‘बस बेटियां होने की भी यही वजह है.’’ देवकुमार ने उमा को अपने शब्दों में समझा कर उस की दुखती रग पर उंगली रखी, ‘‘शिवकुमार भैया अंदर से कमजोर हैं. दरजन भर बच्चे पैदा कर लो, लड़की ही होगी. और तुम लड़के के लिए तरसती रहोगी.’’

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उमा गहरी सोच में डूब गई. देवकुमार ने उस की भावनाओं पर एक और चोट की, ‘‘मेरी बात का विश्वास न हो तो किसी पढ़े लिखे समझदार व्यक्ति से पूछ लो.’’

उमा की सोच और गहरी हो गई. उमा को इसी भंवर में फंसा छोड़ कर देवकुमार सोने चला गया. मन ही मन खुश होते हुए वह सोच रहा था कि तीर सही निशाने पर लगा है, असर जरूर देखने को मिलेगा. देवकुमार का सोचना सही था. उस की बात ने उमा के दिल पर गहरा असर किया था.

उमा कुछ देर बाद सोच के भंवर से निकली और उस ने तय किया कि वह पता करेगी कि क्या वास्तव में संतान के लिंग धारण का जिम्मेदार पिता होता है.

अगले ही दिन बीमारी का बहाना बना कर उमा एक लेडी डाक्टर के यहां गई. उस ने डाक्टर से पूछा तो उस ने कहा कि संतान के लिंग निर्धारण का उत्तरदायी पिता होता है. डाक्टर ने उमा को एक्सवाई की थ्योरी भी समझा दी.

जानें आगे की कहानी अगले भाग में…

औलाद की खातिर

कातिल हसीना : भाग 3

राजेश साधारण पढ़ालिखा युवक था. वह दिल्ली में किसी कंपनी में काम करता था. बात तय होने के बाद 8 जून, 2015 को मुनकी का ब्याह राजेश के साथ हो गया.

शादी के बाद मुनकी अपनी ससुराल में रहने लगी. मुनकी ने जैसे पति का सपना संजोया था, राजेश वैसा ही था. वह उसे खूब प्यार करता था और उस की हर ख्वाहिश पूरी करता था.

मुनकी को ससुराल में वैसे तो हर तरह का सुख था, लेकिन पति की कमी उसे खलती थी. क्योंकि राजेश दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में काम करता था. उसे महीने 2 महीने  बाद ही छुट्टी मिल पाती थी. फिर कुछ दिन पत्नी के संग रह कर वह वापस चला जाता था. मुनकी ने पति के साथ रहने की इच्छा जताई तो राजेश ने यह कह उसे कर अपने साथ ले जाने से मना कर दिया कि मांबाप की सेवा कौन करेगा.

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मुनकी की ससुराल और मायके में चंद खेतों की दूरी थी. अत: मुनकी का मायके आनाजाना लगा रहता था. वह सुबह मायके जाती तो शाम को ससुराल आ जाती थी. मुनकी की शादी हो जरूर गई थी, लेकिन कंधई सिंह उसे भूला नहीं था. वह अब भी एक तरफा प्यार में उस का दीवाना था. जब भी वह मायके आती थी तो कंधई उसे ललचाई नजरों से देखा करता था. कभीकभी वह उस से हंसीमजाक भी कर लेता था.

कंधई सिंह ने जब देखा कि मुनकी उस की किसी बात का बुरा नहीं मानती तो वह उस की ससुराल भी जाने लगा. उस ने मुनकी के सासाससुर से भी मेलजोल बढ़ा लिया था. वह कंधई को इसलिए घर आने से मना नहीं करते थे, क्योंकि वह उन की बहू का मौसेरा भाई था.

हर तरह का मुनकी को ससुराल में आना पसंद नहीं था लेकिन वह इस वजह से उसे मना नहीं कर पाती थी, क्योंकि उसे डर सता रहा था कि कहीं कंधई पुरानी बातों का जिक्र उस के पति और ससुराल वालों से न कर दे.

कंधई सिंह ने मुनकी देवी की ससुराल आना शुरू किया तो उस ने पुरानी हरकत फिर शुरू कर दी. कभी वह उस से प्यार का इजहार करता तो कभी शारीरिक छेड़छाड़. मुनकी उस से पीछा छुड़ाने की कोशिश करती थी. उस ने कई बार सोचा कि वह सासससुर से कहे कि वह कंधई को घर न आने दें, पर वह हिम्मत नहीं जुटा सकी. इस तरह समय बीतता रहा.

4 फरवरी, 2020 की शाम मुनकी घर में अकेली थी. उस की सास पड़ोस में हो रहे कीर्तन में गई थी और ससुर खेत पर सिंचाई करा रहे थे. तभी कंधई सिंह आ गया. उस ने सूना घर देखा तो उसे मुनकी की देह जीतने का यह सुनहरा मौका लगा. उस ने भीतर से दरवाजे की कुंडी बंद कर ली और अंदर के कमरे में जा कर मुनकी को दबोच लिया.

मुनकी भी अस्मत बचाने के लिए कंधई से भिड़ गई. स्वयं को मुक्त कराने के लिए वह कंधई को गालियां भी बक रही थी. और उस पर थप्पड़ भी बरसा रही थी. लेकिन कंधई उसे बेतहाशा चूमचाट रहा था. किसी तरह मुनकी उस के शैतानी चंगुल से छूट गई और कुंडी खोल कर बाहर आ गई.

इस के बाद कंधई भी नहीं रुका और वहां से चला गया. कुछ देर बाद उस की सास भी आ गई. लेकिन उस ने कंधई की हरकतों की जानकारी अपनी सास को नहीं दी.

देर रात मुनकी के सासससुर गहरी नींद में सो गए तब मुनकी ने अपने पति राजेश को फोन मिलाया और कहा, ‘‘आप तुरंत घर आ जाइए. मैं मुसीबत में हूं. न आए तो मैं अपनी जान दे दूंगी.’’

‘‘पर ऐसी क्या बात हो गई, जो तुम जान देने की बात कर रही हो.’’ राजेश ने पत्नी से पूछा.

‘‘हर बात का जवाब फोन पर नहीं दिया जा सकता. कुछ गंभीर बातें होती हैं, जो आमनेसामने बैठ कर ही की जा सकती हैं. इसलिए तुम फौरन घर आ जाओ.’’ मुनकी ने पति को जवाब दिया.

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राजेश, अपनी पत्नी को बेहद प्यार करता था. वह जान गया कि मुनकी किसी बात को ले कर बेहद परेशान है. अत: उस ने घर जाने का निश्चय किया और उसी दिन वह दिल्ली से ट्रेन में बैठ कर घर के लिए चल दिया.

पति को बताई व्यथा

18 घंटे के सफर के बाद राजेश घर पहुंचा तो मुनकी उसे देखते ही फूटफूट कर रोने लगी. कुछ देर बाद जब आंसुओं का सैलाब थमा तो उस ने अपनी व्यथा पति को बताई और बदतमीज मौसेरे भाई कंधई सिंह को सबक सिखाने को उकसाया.

पत्नी की आपबीती सुन कर राजेश का खून खौल उठा. उस ने कंधई को सबक सिखाने की ठान ली. राजेश ने अपने ससुर भीखू को घर बुलाया और सारी बात बता कर सहयोग मांगा. भीखू पहले से ही कंधई पर जलाभुना बैठा था. वह राजेश का साथ देने को राजी हो गया. इस के बाद राजेश, भीखू और मुनकी देवी ने सिर से सिर जोड़ कर कंधई सिंह की हत्या की योजना बताई.

इधर 2-3 दिन बीत गए और मुनकी ने कोई शिकवा शिकायत नहीं की तो कंधई सिंह को लगा कि मुनकी दिखावे का विरोध करती है. दिल से वह भी उस से मिलना चाहती है. अत: अब जब भी मौका मिलेगा वह अपनी इच्छा पूरी कर लेगा. भले ही मुनकी विरोध जताती रहे.

7 फरवरी, 2020 की रात 8 बजे एक बार फिर राजेश भीखू और मुनकी ने आपस में मंत्रणा की. फिर तीनों तेंदुआ बरांव गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास पहुंच गए. राजेश अपने साथ लोहे की रौड ले आया था. राजेश और भीखू स्कूल के पूर्वी छोर पर खेत किनारे घात लगा कर बैठ गए.

योजना के अनुसार मुनकी ने रात लगभग 8 बजे कंधई सिंह से मोबाइल फोन पर बात की और देह मिलन के बहाने उसे प्राथमिक विद्यालय के पूर्वी छोर पर बुला लिया.

कंधई सिंह इस के लिए न जाने कब से तड़प रहा था. सो वह मुनकी के झांसे में आ गया. उस ने पत्नी राधा से कहा कि वह जरूरी काम से जा रहा है. कुछ देर में वापस आ जाएगा. फिर वह घर से निकला और प्राथमिक विद्यालय के पूर्वी छोर पर पहुंच गया. मुनकी उस का ही इंतजार कर रही थी. वह मुनकी से बात करने लगा. तभी घात लगाए बैठे राजेश और भीखू ने उस पर हमला कर दिया.

रौड के प्रहार से कंधई सिंह का सिर फट गया और वह रास्ते में ही गिर पड़ा. इस के बाद भीखू और मुनकी ने कई प्रहार कंधई सिंह के सिर व चेहरे पर किए जिस से उस की मौत हो गई. नफरत और घृणा से भरी मुनकी ने कंधई के गुप्तांग पर भी प्रहार कर उसे कुचल दिया. हत्या करने के बाद राजेश ने कंधई का मोबाइल फोन तोड़ कर वहीं फेंक दिया. फिर वह्य तीनों फरार हो गए.

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12 फरवरी, 2020 को थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय ने अभियुक्त राजेश, भीखू तथा मुनकी से पूछताछ करने के बाद उन्हें श्रावस्ती की जिला अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जिला जेल भेज दिया गया.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित  

कातिल हसीना : भाग 2

जानकी से छोटी मुनकी थी. छरहरी काया की मुनकी दिखने में सहज थी. उस का पढ़ाई में मन नहीं लगता था इसलिए उस ने प्राइमरी से आगे नहीं पढ़ी. फिर वह घर के कामों में हाथ बंटाने लगी. भीखू के घर से कुछ दूरी पर मुन्नू सिंह रहते थे. वह खेतीकिसानी करते थे. उन के परिवार में पत्नी कमला देवी के अलावा कंधई सिंह और वकील सिंह नाम के 2 बेटे थे.

भीखू और मुन्नू के परिवारों में काफी प्रेम था. दोनों ही परिवारों के सदस्य एकदूसरे के घर आतेजाते थे. कंधई सिंह जवान हुआ तो मुन्नू सिंह ने उस का विवाह राधा नाम की युवती के साथ कर दिया. राधा ने ससुराल आते ही सभी का मन मोह लिया. वह पति के साथसाथ सासससुर की भी खूब सेवा करती थी.

कंधई सिंह रंगीनमिजाज था. घर में सुंदर पत्नी होने के बावजूद वह पराई औरतों को ललचाई नजरों से देखता था, जिस से उस की शिकायतें घर आती रहती थीं. पत्नी राधा उसे समझाती थी लेकिन वह उस की बात हंस कर टाल देता था.

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मौसेरी बहन पर बुरी नजर

कंधई सिंह का भीखू के घर आनाजाना था. मुनकी रिश्ते में उस की मौसेरी बहन थी. दरअसल कंधई और मुनकी की मां एक ही गांव की थीं. इस तरह कंधई सिंह मुनकी की मां को मौसी कहता था और मुनकी देवी कंधई की मां को मौसी कहती थी. दोनों में खूब बातें होती रहती थीं.

एक शाम कंधई सिंह मुनकी के घर पहुंचा तो वह सजधज कर कहीं जा रही थी. उस के इस रूप को देख कर कंधई सिंह ठगा सा रह गया. उस का सुहाना रूप पलक झपकते ही कंधई की आंखों के रास्ते से दिल में उतर गया. वह सोचने लगा कि चिराग तले अंधेरा. मुनकी इतनी लाजवाब यौवन की मल्लिका है, इस ओर तो मैं ने ध्यान नहीं दिया.

रंगीनमिजाज कंधई सिंह के मन में कामना की ऐसी आंधी चली कि उस की धूल ने सारे रिश्तेनातों को ढक लिया. वह भूल गया कि मुनकी उस की मौसेरी बहन है. वह चाहता था कि मुनकी उस के सामने रहे और वह उसे अपलक निहारता रहे.

लेकिन ऐसा संभव नहीं था. उसे मां के साथ किसी कार्यक्रम में जाना था. मुनकी चली गई तो वह भी वापस घर आ गया. लेकिन उस रात नींद उस की आंखों तक नहीं पहुंच पाई. आती भी कैसे उस की आंखों में तो मुनकी का अक्स बसा था और जेहन में उस के ही खयाल धमाचौकड़ी मचा रहे थे.

किया प्यार का इजहार

दूसरे रोज कंधई सिंह मुनकी के घर पहुंचा तो वह घर में अकेली थी. भीखू खेत पर था और मां उसे नाश्तापानी देने खेत पर गई थी. उचित मौका देख कर कंधई ने मुनकी की कलाई थाम ली और बोला, ‘‘मुनकी, तुम बहुत सुंदर हो. तुम्हारा यह रूप मेरी आंखों में रचबस गया है. मैं तुम्हें चाहने लगा हूं.’’

मुनकी अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली, ‘‘भैया, आज आप को क्या हो गया है, जो इस तरह की बेहूदा बातें कर रहे हो. मैं रिश्ते में आप की बहन लगती हूं. भला कोई भाई अपनी बहन की कलाई इस तरह पकड़ता है. चले जाओ घर से, वरना मैं शोर मचा दूंगी.’’

मुनकी के तेवर देख कर कंधई सिंह चला गया तो मुनकी सोचने लगी कि कंधई अब पहले जैसा नहीं रहा. उस की सोच बदल गई है, मन में पाप भी है. इसलिए उस ने निश्चय किया कि अब वह उस से सतर्क रहेगी. रिश्तेदारी में कलह न हो इसलिए मुनकी ने कंधई की इस हरकत को शरारत मानकर यह बात अपने मातापिता को नहीं बताई.

इधर जब 2-3 दिन बीत गए और कोई शोरशराबा नहीं हुआ तो कंधई समझ गया कि मुनकी ने किसी से शिकायत नहीं की है, अत: उस की हिम्मत बढ़ गई. वह मन ही मन सोचने लगा कि मुनकी दिखावे के तौर पर विरोध करती है. वह भी उस से प्यार करती है. इसलिए कंधई अब मुनकी का प्यार पाने को उतावला रहने लगा.

एक रोज मुनकी के मातापिता जब खेतों के लिए निकल गए तभी कंधई सिंह आ धमका. उस ने मुख्य दरवाजा बंद किया और मुनकी को बांहों में भर लिया, फिर गालों को चूमने लगा. मुनकी कसमसाई और खुद को छुड़ाते हुए बोली, ‘‘भैया यह पाप है.’’

‘‘प्यार में पाप और पुण्य नहीं देखा जाता. प्यार की शुरुआत तो करो. मोहब्बत तुम्हें भी मजा देने लगेगी.’’ कंधई ने समझाया.

मुनकी के तेवर तीखे हो गए, ‘‘बहुत हो गया भैया, तुम घर से चले जाओ. वरना बहुत बुरा हो जाएगा.’’ कंधई सिंह का इरादा और आगे बढ़ने का था, लेकिन तभी पड़ोसन ने कुंडी खटखटाई जिस से वह डर गया. फिर मौके की नजाकत भांप कर कंधई वहां से चला गया.

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पत्नी ने कंधई को दी चेतावनी

शाम को जब मुनकी के मातापिता खेत से घर लौटे तो मुनकी ने उन से कंधई की शिकायत कर दी. बेटी की बात सुन कर भीखू का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा. वह उस के घर पहुंचा और कंधई को खूब खरीखोटी सुनाई. उस ने कंधई की शिकायत उस की मां कमला से भी की. कमला ने कंधई को समझाने का भरोसा दे कर भीखू का गुस्सा शांत किया.

दूसरे रोज जब कंधई अपने खेतों पर गया तो मुनकी मन में क्रोध व नफरत का गुबार ले कर उस के घर पहुंची. उस समय घर में कंधई की पत्नी राधा थी. राधा ने मुनकी का तमतमाया चेहरा देखा तो पूछ बैठी, ‘‘क्या बात है मुनकी, तुम गुस्से में लग रही हो?’’

‘‘भाभी, भैया को समझा देना. वरना ठीक नहीं होगा.’’ मुनकी गुस्से से बोली.’’

‘‘ऐसा क्या किया, तुम्हारे भैया ने?’’ राधा ने पूछा.

‘‘भाभी, भैया रिश्ते की सीमा और मर्यादा भूल गए हैं. पिछले कुछ समय से वह मुझे परेशान कर रहे हैं. एक तरफा प्यार में दीवाने बन गए हैं.’’

पति की करतूत सुन कर राधा सन्न रह गई. फिर किसी तरह स्वयं के मनोभावों पर नियंत्रण कर के बोली, ‘‘मुनकी यह तुम ने अच्छा किया कि मुझे बताने चली आई. तुम यह बात किसी और को मत बताना, मैं सब संभाल लूंगी. अब तुम निश्चिंत हो कर घर जाओ.’’

मुनकी को विश्वास था कि राधा ही उसे इस मुसीबत से मुक्ति दिला सकती है. इसीलिए वह उस के पास शिकायत करने आई थी. राधा को सारी बात बताने के बाद मुनकी का दुख हलका हो गया और वह अपने घर लौट आई.

पत्नी ने कंधई को दी चेतावनी

शाम को कंधई घर लौटा, तो राधा ने उसे आड़े हाथों लिया, ‘‘बहन पर ही नीयत खराब करते हुए तुम्हें शर्म नहीं आई, चुल्लू भर पानी में डूब कर मर क्यों नहीं गए?’’ राधा ने उंगली उठाते हुए पति को चेतावनी दी, ‘‘आइंदा तुम ने मुनकी के साथ ऐसीवैसी हरकत की तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.’’

कंधई पहले तो चौंका, फिर संभल कर बोला, ‘‘राधा मुझे माफ कर दो. आइंदा ऐसी गलती नहीं होगी.’’ उस समय उस ने चुप रहने में ही भलाई समझी.

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इधर भीखू को इस बात का डर था कि कहीं कंधई उस की बेटी के साथ कोई ऐसीवैसी हरकत न कर दे जिस से परिवार की बदनामी हो. इसलिए वह मुनकी की शादी के लिए लड़का ढूंढ़ने लगा. काफी दौड़धूप के बाद उसे पड़ोसी गांव बालकराम पुरवा, मजरा रामपुर का एक लड़का राजेश पसंद आ गया.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में… 

कातिल हसीना : भाग 1

उस दिन फरवरी 2020 की 7 तारीख थी. सुबह के 8 बजे थे. घना कोहरा छाया हुआ था, जिस से सूरज अपनी चमक नहीं बिखेर पा रहा था. उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के तेंदुआ बरांव गांव का रहने वाला सुंदर सिंह अपने खेतों की ओर जा रहा था.

जब वह प्राथमिक विद्यालय के पूर्वी छोर पर अपने खेतों के पास पहुंचा तो वहां एक युवक की लाश देख कर वह ठिठक गया. फिर वह उल्टे पैर गांव की ओर दौड़ पड़ा. गांव पहुंच कर उस ने लाश पड़ी होने की जानकारी गांव वालों को दी. उस के बाद तो गांव में कोहराम मच गया. कुछ ही देर में लाश के पास ग्रामीणों की भीड़ जुट गई.

लाश पड़ी होने की खबर जब इसी गांव के रहने वाले वकील सिंह को लगी तो उस का माथा ठनका. क्योंकि उस का भाई कंधई सिंह बीती रात से घर से गायब था. पूरा परिवार रात भर उस की तलाश में जुटा रहा, परंतु उस का कुछ पता नहीं चल पाया था. अत: वह बदहवास हालत में घटना स्थल पर पहुंचा.

शव औंधे मुंह पड़ा था. उस ने जैसे ही शव को पलटा वैसे ही उस की चीख निकल पड़ी. क्योंकि वह शव उस के भाई कंधई सिंह का ही था. किसी ने बड़ी बेहरमी से की थी. इस के बाद बड़ी उस के परिवार में कोहराम मच गया. मृतक की मां कमला देवी और पत्नी राधा भी मौके पर आ गईं और शव से लिपट कर दोनों रोने लगीं.

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इसी दौरान किसी ने फोन कर के शव मिलने की सूचना थाना मल्हीपुर में दे दी. हत्या की खबर पाते ही थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय पुलिस टीम के साथ ले तेंदुआ बरांव गांव की तरफ चल दिए. इस बीच उन्होंने यह सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी थी.

जब पुलिस घटनास्थल पर पहुंची तब तक वहां ग्रामीणों की भीड़ जुट गई थी. थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने में जुट गए. कंधई सिंह के सिर पर किसी भारी चीज से प्रहार कर के उसे मौत के घाट उतारा था. चेहरे पर भी प्रहार कर उस की पहचान मिलाने की कोशिश की गई थी.

सिर व चेहरे पर गहरी चोट के निशान थे. कपड़े, खून से तरबतर थे. जमीन पर भी खून फैला था, जिसे मिट्टी ने सोख लिया था. हत्यारे ने मृतक के गुप्तांग को भी कुचला था. उसे देख कर ऐसा लग रहा था कि हत्या अवैध रिश्तों के चलते की गई है. मृतक की उम्र यही कोई 30 वर्ष के आसपास थी और वह शरीर से हृष्टपुष्ट था.

थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय अभी घटनास्थल का निरीक्षण कर ही रहे थे कि सूचना पा कर एसपी अनूप कुमार सिंह, एएसपी वी.सी. दूबे तथा सीओ हौसला प्रसाद घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर फोरैंसिक टीम को भी बुलवा लिया. पुलिस अधिकारियों ने जहां घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, वहीं फोरैंसिक टीम ने भी वहां से साक्ष्य जुटाए. घटनास्थल पर एक टूटा हुआ मोबाइल भी पड़ा मिला था जिसे थानाप्रभारी ने जाब्ते की काररवाई में शामिल कर लिया.

पुलिस अधिकारियों ने मृतक की पत्नी राधा को सांत्वना देने के बाद उस से पूछताछ की. राधा ने बताया कि बीती रात 8 बजे उस ने पति के साथ खाना खाया. उस के बाद वह बरतन साफ करने लगी, तभी पति के मोबाइल फोन पर किसी का फोन आया. नंबर देख कर वह घर के बाहर निकले और बात करने के बाद वापस आए. फिर बोले कि जरूरी काम से जा रहे हैं, कुछ देर में आ जाएंगे, पर वह वापस नहीं आए.

खोजने पर नहीं मिला

तब रात 11 बजे राधा ने अपनी सास कमला को जगा कर यह जानकारी दी. कमला ने भी कंधई का फोन मिलाया, लेकिन उस का मोबाइल बंद था. उस के बाद घर वाले उसे रात भर खोजते रहे, पर उस का पता नहीं चला. सुबह मालूम हुआ कि किसी ने उसे मार डाला है.

‘‘तुम्हें किसी पर शक है?’’ एएसपी वी.सी. दूबे ने मृतक की मां कमला देवी से पूछा.

‘‘नहीं, साहब, हमें किसी पर शक नहीं है. हमारा न किसी से लेनदेन का झगड़ा है और न ही जमीन जायदाद का. मैं तो खुद हैरान हूं कि मेरे बेटे को किस ने और क्यों मार डाला?’’ कमला ने बताया.

परिवारजनों से पूछताछ के बाद एसपी अनूप कुमार सिंह ने हत्या का परदाफाश करने तथा कातिलों को पकड़ने के लिए एक पुलिस टीम का गठन किया. इस टीम में मल्हीपुर थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय, सीओ (जमुनिहा) हौसला प्रसाद, सीओ (भिनगा), जंग बहादुर सिंह, एसआई किसलय मिश्र, ए.के. सिंह (क्राइम ब्रांच) आदि को शामिल किया गया. टीम की कमान एएसपी वी.सी. दूबे को सौंपी गई.

पुलिस टीम ने सब से पहले घटनास्थल का निरीक्षण किया, फिर तेंदुआ बरांव गांव के विभिन्न वर्गों के लोगों से घटना के संबंध में पूछताछ की. इस पूछताछ से पता चला कि मृतक कंधई सिंह रंगीनमिजाज था. घर में खूबसूरत पत्नी होने के बावजूद वह बाहर ताकझांक करता था. इसी बात को ले कर कई साल पहले उस की कहासुनी गांव के ही भीखू से हुई थी. कंधई सिंह भीखू की बेटी मुनकी से छेड़छाड़ करता था. भीखू ने बेटी की शादी कर दी, इस के बाद भी कंधई सिंह ने उस का पीछा नहीं छोड़ा और उस की ससुराल आनेजाने लगा था.

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पुलिस टीम को लाश के पास से जो टूटा हुआ मोबाइल मिला था, उस का सिम सहीसलामत था, पुलिस ने उस फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई. उस से पता चला कि वह फोन मृतक का ही था. काल डिटेल्स से जानकारी मिली कि 7 फरवरी की रात 8.58 बजे कंधई सिंह के मोबाइल पर आखिरी काल जिस मोबाइल नंबर से आई थी वह नंबर राजेश पुत्र धनीराम निवासी बालकरामपुरवा, मजरा रामपुर, थाना मल्हीपुर जिला श्रावस्ती का था. राजेश भीखू का दामाद था, उस समय उस की कंधई से एक मिनट बात हुई थी.

अब पुलिस को राजेश से बात करना जरूरी हो गया. लिहाजा पुलिस टीम राजेश के घर पहुंची, लेकिन उस के घर पर ताला लगा था. राजेश और उस के घर वालों के फरार होने से पुलिस का शक और पुख्ता हो गया. इस के बाद पुलिस ने राजेश के ससुर भीखू सिंह के घर पर छापा मारा. भीखू भी परिवार सहित फरार था.

उन दोनों की तलाश में पुलिस टीम ने कई संभावित ठिकानों पर छापे मारे लेकिन उन का पता नहीं चला. आखिर में पुलिस टीम ने राजेश व अन्य की टोह में अपने खास मुखबिर लगा दिए.

तीनों हुए गिरफ्तार

पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर नासिर गंज चौराहे से भीखू, राजेश और उस की पत्नी मुनका देवी को हिरासत में ले लिया. थाने में पुलिस जब राजेश, भीखू तथा मुनकी देवी से कंधई सिंह की हत्या के संबंध में पूछताछ की तो वे तीनों एक सुर हो कर मुकर गए, लेकिन जब उन पर सख्ती बरती गई तो वह तीनों टूट गए और कंधई सिंह की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया. पुलिस ने उन की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे की रौड भी बरामद कर ली, जो राजेश ने अपने घर में छिपा दी थी.

पुलिस टीम ने कंधई सिंह की हत्या का खुलासा करने तथा कातिलों को पकड़ने की जानकारी एसपी अनूप कुमार सिंह को दी. जानकारी पाते ही वह थाना मल्हीपुर आ गए. उन्होंने अभियुक्तों से विस्तृत पूछताछ की. फिर खुलासा करने वाली पुलिस टीम की पीठ थपथपाई और 15 हजार रुपए ईनाम देने की घोषणा की.

इस के बाद उन्होंने पुलिस सभागार में प्रैस वार्ता की और हत्यारोपियों को मीडिया के समक्ष पेश कर घटना का खुलासा किया.

चूंकि उन तीनों ने हत्या का जुर्म कबूल कर लिया था और हत्या में प्रयुक्त आलाकत्ल भी बरामद करा दिया था, इसलिए थानाप्रभारी देवेंद्र पांडेय ने मृतक के भाई वकील सिंह को वादी बना कर भादंवि की धारा 302 के तहत भीखू, राजेश तथा मुनकी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली. इस के बाद उन लोगों से विस्तार से पूछताछ की गई तो एक हसीना की कातिल चाल का सनसनीखेज खुलासा हुआ.

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उत्तर प्रदेश में श्रावस्ती जिले के मल्हीपुर थाने के अंतर्गत एक गांव है तेंदुआ बरांव. भीखू अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता था. उस के परिवार में पत्नी सोमवती के अलावा 2 बेटियां थीं, जानकी और मुनकी. भीखू मेहनतमजदूरी कर अपने परिवार का पालनपोषण करता था. बड़ी बेटी जानकी जवान हुई तो उस ने उस का विवाह कर दिया. वह अपनी ससुराल में खुशहाल थी.

जानें आगे क्या हुआ अगले भाग में…

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