Crime Story: रान्ग नंबर भाग 3

सौजन्य- सत्यकथा

पहले दोनों के मन में विचार आया कि घर से भाग कर शादी कर लें और सुकून से अपनी जिंदगी गुजारें, मगर मासूम बेटियों की खातिर नीतू कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई. राजू का भी जबलपुर शहर में कामधंधा ठीकठाक चल रहा था. उसे पता था कि नई जगह कामधंधा जमाने में कितनी मुश्किल होती है. वह अपने गांव भी नहीं लौटना चाहता था, क्योंकि उसे पता था घर वाले बालबच्चों वाली विवाहिता नीतू को इतनी आसानी से नहीं अपनाएंगे.

जैसेजैसे रविवार का दिन नजदीक आ रहा था, नीतू और राजू की चिंता बढ़ती जा रही थी. राजू को पता था कि रविवार के पहले यदि इस समस्या का कोई हल नहीं निकला तो सोनू नीतू को ले कर अपने गांव चला जाएगा. अंतत: दोनों ने सोनू को अपने प्यार की राह से दूर करने का निर्णय ले लिया था.

राजू और नीतू ने सोनू को हमेशा के लिए उन की जिंदगी से दूर करने का खौफनाक प्लान तैयार कर लिया. उन्होंने सोच लिया लिया था कि किसी भी तरह सोनू को जान से मार कर सदासदा के लिए एकदूसरे के हो जाएंगे.

घटना के दिन राजू दिन भर घर से बाहर नहीं निकला. वह सोनू की हत्या कर लाश को ठिकाने लगाने की योजना बनाता रहा. नीतू पूरे दिन सब्जी काटने वाले चाकू की धार तेज करने में लगी रही. नीतू ने तेज धार वाले चाकू को अपने तकिए के नीचे छिपा कर रख लिया था .

28 नवंबर, 2020 की रात रोज की तरह सोनू अपने घर आया तो उस ने नीतू से दूसरे दिन बस से अपने गांव वापस लौटने की चर्चा की तो नीतू ने भी हामी भर दी. यह देख कर सोनू खुश हो गया. खाना खाने के कुछ देर बाद वह अपनी बेटियों को दुलारता रहा और फिर टहलने के लिए घर से बाहर आ गया.

साढ़े 10 बजे वापस आ कर वह बिस्तर पर लेटेलेटे नीतू से प्यारभरी बातें करता रहा. अपनी दोनों बेटियों को सुलाने के बाद नीतू भी बिस्तर पर आ कर प्यार का नाटक करने लगी. जब सोनू निढाल हो कर सो गया तो नीतू आगे की योजना बनाने लगी.

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नीतू की आंखों से उस रात नींद कोसों दूर थी. उस ने रात करीब एक बजे राजू को फोन कर के घर बुला लिया. राजू के आते ही योजना के मुताबिक नीतू ने गहरी नींद सो रहे सोनू के दोनों पैर पकड़ लिए और राजू ने उस की छाती पर बैठ कर चाकू से उस का गला रेत दिया और एक हाथ की कलाई भी काट दी.

कुछ देर छटपटाने के बाद सोनू निढाल हो कर एक तरफ लुढ़क गया. अब दोनों सोनू की लाश को ठिकाने लगाने की सोचने लगे. उन्होंने बिस्तर पर गिरे खून के दागधब्बों को पोंछा. फिर लाश एक कंबल में लपेट ली.

इसी बीच नीतू ने घर का दरवाजा खोल कर बाहर का मुआयना किया. मौका देखते ही दोनों लाश को ग्रे आयरन फाउंडी के गेट नंबर 2 के पास बनी नाली में फेंक आए.

लाश को ठिकाने लगाने के बाद दोनों अपनेअपने घर चले गए और कपड़ों पर लगे खून के दाग साफ करते रहे. दूसरे दिन सुबह नीतू ने घर पर रोनापीटना शुरू कर दिया.

चीखपुकार सुन कर मोहल्ले के लोग उस के घर जमा होने लगे तो नीतू ने बताया कि उस के पति रात से घर नहीं लौटे हैं और उन का मोबाइल भी बंद है.

सोनू के गायब होने की बात सुन कर मोहल्ले के लोग उस की खोज में लग गए थे, तभी किसी ने आ कर बताया कि ग्रे आयरन फाउंडी गेट नंबर 2 के पास सोनू की लाश एक कंबल में लिपटी पड़ी है.

मोहल्ले के लोगों के साथ नीतू भी नाले के पास पहुंच गई. सोनू की लाश देख कर चीखचीख कर घडि़याली आंसू बहाने लगी.

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सोनू की लाश मिलने की खबर से नीतू का प्रेमी राजू भी वहां आ गया था. सोनू की मौत को लेकर मोहल्ले के लोग नीतू के प्रेमी राजू पर भी शक कर रहे थे. इसी बीच वहां पर रांझी थाने की पुलिस ने आ कर कुछ ही घंटों में हत्या की गुत्थी सुलझा दी.

रांझी थाना पुलिस ने 24 घंटे में ही सेल्समैन सोनू सिंह हत्याकांड का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा और ट्रेनी आईपीएस अमित कुमार ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर मामले का खुलासा किया. दोनों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, खून से सने कपड़े, मृतक सोनू और आरोपी नीतू के 3 मोबाइल, एटीएम कार्ड आदि जब्त कर लिए गए.

मृतक सोनू के घर वालों के जबलपुर पहुंचने से पहले नीतू हवालात चली गई. उस की दोनों बेटियों तनु और गुड्डी को पड़ोसियों की देखरेख में रखवाया गया. बाद में गांव से उस के परिजनों के आते ही उन के सुपुर्द किया गया.

पति से वेवफाई कर मौजमस्ती की खातिर बनाए गए नाजायज संबंधों की वजह से नीतू ने अपनी जिंदगी के साथ मासूम बेटियों की जिंदगी भी बरबाद कर दी.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story: रान्ग नंबर

खून में डूबी दूध की धार: भाग 2

सौजन्य-  सत्यकथा

जिस मां ने बेटे को 9 महीने कोख में पाला, उस के लालनपालन में अपनी नींद चैन की भी परवाह नहीं की, वही कपूत बन गया था. राहुल और उस के परिवार वालों की जानकारी से इस हत्याकांड की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह हृदयविदारक थी.

उत्तराखंड के शहर हल्द्वानी की ट्रांसपोर्ट नगर चौकी के अंतर्गत एक गांव है करायल जौलासाल. राजेंद्र शाही का परिवारइसी गांव में रहता था. राजेंद्र शाही फौज में थे. फौज में होने के कारण वह साल में एकाध बार ही अपने घर आ पाते थे. राजेंद्र शाही के परिवार में उन की पत्नी हीरा देवी सहित समेत 8 सदस्य थे. 4 बेटियों और 2 बेटों में राहुल उर्फ राजा सब से छोटा था.

राजेंद्र सिंह के फौज में होने के कारण सभी बच्चों का लालनपालन हीरा देवी की देखरेख में ही हुआ था. हीरा देवी के सभी बच्चे समझदार थे. सभी ने मन लगा कर पढ़ाई की, जिस की वजह से सभी कामयाब हो गए थे.

राजेंद्र शाही ने बहुत पहले बच्चों की सहूलियत के हिसाब से गांव के छोर पर काफी बड़ा मकान बनवाया था. उन के पास पैसों की कमी नहीं थी. उसी दौरान उन्होंने अपने घर के सामने एक प्लौट और खरीद लिया था. जिसे उन्होंने अपनी बड़ी बेटी ममता के नाम करा दिया था.

ममता अपनी मां के साथ रहती थी. दूसरे नंबर की बेटी मंजू की शादी हो चुकी थी. तीसरे नंबर पर रवींद्र सिंह था, जो फौज में चला गया था.

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रवींद्र की शादी पिथौरागढ़ की युवती से हुई थी. उस की पत्नी अधिकांशत: पिथौरागढ़ में ही रहती थी. राजेंद्र शाही की चौथे नंबर की बेटी सपना सरकारी टीचर बनकर मनीला में रहने लगी थी. जबकि पांचवें नंबर की बेटी अंजलि भीमताल में टीचर बन गई थी. राहुल इन सब में सब से छोटा था. जो इंटरमीडिएट पास करने के बाद नौकरी की तलाश में लगा था.

इस परिवार में सभी पढ़ेलिखे होने के बावजूद एकदूसरे से तालमेल नहीं बिठा पाते थे. हीरा देवी का शुरू से ही लड़कियों की तरफ झुकाव था. यही कारण था कि उन्होंने जब घर के सामने प्लौट खरीदा था, वह किसी लड़के के नाम न करा कर अपनी सब से बड़ी बेटी ममता के नाम कराया था. वही प्लौट बाद में पारिवारिक विवाद का कारण बना.

हीरा देवी की अन्य बेटियां भी उस प्लौट पर अपना अधिकार जमाना चाहती थीं, जबकि ममता उस पर केवल अपना ही अधिकार मानती थी. इसी विवाद के चलते अब से लगभग 16 साल पहले पतिपत्नी में मनमुटाव हो गया था. मनमुटाव के चलते पतिपत्नी के रिश्तों में ऐसी दरार आई कि राजेंद्र सिंह अपने परिवार से अलग रहने लगे.

सन 1990 में राजेंद्र सिंह फौज से रिटायर हो चुके थे. उन के रिटायरमेंट के वक्त भी पतिपत्नी में पैसों को ले कर तकरार बढ़ी थी. जिस के बाद राजेंद्र सिंह ने पत्नी को घर खर्च देना बंद कर दिया था. इस पर हीरा देवी ने अदालत में पति के खिलाफ भरणपोषण का मुकदमा दायर किया था, जिस के चलते हीरा देवी को पति की तरफ से हर माह 3 हजार रुपए भरणपोषण के रूप में मिलते थे, जिस के सहारे ही हीरा देवी अपने खर्च चलाती थीं.

सन 2005 से राजेंद्र सिंह का अपने घर आनाजाना बंद हो गया था. अपना घर होने के बावजूद राजेंद्र सिंह को किराए के मकान में रहने पर मजबूर होना पड़ा. फौज से रिटायर होने के बाद उन्होंने रामनगर में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की. उस वक्त बेटा राहुल भी उन के साथ रहता था. राहुल शुरू से ही गुस्सैल और चिड़चिड़े स्वभाव का था.

राहुल ने इंटरमीडिएट करने के बाद आईटीआई की थी. इस के बावजूद उसे कहीं कोई काम नहीं मिल पाया था. राहुल जब कभी घर जाता तो उस की मां हीरा देवी उसे नौकरी न लगने का ताना मारती थी. जिस से उस की दिमागी हालत और भी खराब होती गई थी.

उस की दिमागी हालत के चलते एक बार राहुल ने खुद को भी चोट पहुंचाने की कोशिश की थी. उस की मां अपनी बेटियों को ज्यादा ही महत्त्व देती थी, जिस के कारण राहुल की मां से नहीं पटती थी. पत्नी की तरफ से राजेंद्र सिंह का मन टूटा तो उन्होंने रामनगर से नौकरी छोड़ गुजरात जा कर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी की.

गुजरात में नौकरी करने के दौरान भी राहुल उन्हीं के साथ रहा. बापबेटे के बाहर रहने के बावजूद राजेंद्र शाही की बेटियों में आपस में तकरार बनी रही.

गुजरात में नौकरी करने के दौरान राहुल किसी बीमारी का शिकार हो गया. उस की परेशानी को देखते हुए राजेंद्र शाही उसे ले कर दिल्ली आ गए. उस के बाद राजेंद्र शाही और राहुल दोनों ने दिल्ली में ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर ली.

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दिल्ली में नौकरी करने के दौरान उन्होंने राहुल का एम्स में इलाज कराया. उस दौरान राहुल बीचबीच में घर आताजाता था. लेकिन अपने प्रति मां का बदला व्यवहार देख कर वह फिर अपने पिता के पास चला जाता था. उस के अधिकांश दोस्त पढ़ाई करने के बाद नौकरियों में लग गए थे. लेकिन राहुल ही एक ऐसा बचा था, जिसे बाहर दोस्तों के उलाहने सुनने पड़ते थे और घर में मां की सुनती पड़ती थी.

अगले भाग में पढ़ें- राहुल  ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुला दिया 

खून में डूबी दूध की धार: भाग 1

सौजन्य-  सत्यकथा

20दिसंबर, 2020 को सुबह के 7 बजे का वक्त रहा होगा. ममता सो कर उठी तो सब से पहले उसे अपनी मम्मी की याद आई. क्योंकि ममता हर रात अपनी मां के लिए 5-6 बादाम पानी में भिगो कर रखती थी. जिन्हें सुबह होते ही छील कर मां को खाने के लिए देती थी.

उस ने बादाम छीले और मां हीरा देवी को आवाज लगाई. लेकिन मां ने जब कोई जबाव नहीं दिया तो वह उन के कमरे में गई. उस वक्त उस की मां लिहाफ ओढ़े सोई हुई थी.

मां को सोता देख कर उसे हैरानी हुई कि वह अभी तक सोई हुई हैं. जबकि हर रोज वह सब से पहले उठ जाती थीं.

मम्मी के पास जा कर उस ने उन के मुंह से लिहाफ हटाया तो उन के चेहरे को रक्तरंजित देख ममता के होश उड़ गए.

मां की हालत देख उस की चीख निकल गई. सुबहसुबह ममता के चीखनेचिल्लाने की आवाज सुन कर उस की छोटी बहन अंजलि और भाई रवींद्र भी कमरे में आ गए. कमरे में सोती मां हीरा देवी की किसी ने रात में गरदन काट कर हत्या कर दी थी.

सुबहसुबह हीरा देवी की हत्या की बात सुनते ही वहां कुछ ही देर में काफी लोग इकट्ठा हो गए. हीरा देवी की हत्या किस ने और क्यों की, यह कोई नहीं समझ पा रहा था. उस रात उस घर में 5 सदस्य थे, स्वयं हीरा देवी, उन की 2 बेटियां ममता, अंजलि और बेटे रवींद्र शाही व राहुल. हीरा देवी के पति राजेंद्र सिंह शाही किसी काम से घर से बाहर गए हुए थे.

हालांकि राजेंद्र शाही का घर अलग था, लेकिन घर के मुख्य दरवाजे पर लोहे का जाल वाला शटर लगा था. जिस के होते बाहर वाले इंसान का घर में घुसना नामुमकिन था. फिर ऐसे में बाहर का व्यक्ति घर में घुस कर हीरा देवी की हत्या कर के कैसे भाग सकता था. यह बात समझ के बाहर थी.

इस घटना की जानकारी हल्द्वानी की टीपी नगर पुलिस चौकी को दी गई. चौकी इंचार्ज ने यह सूचना आला अधिकारियों को दे दी. एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या की जानकारी मिलते ही एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव, सीओ शांतनु पाराशर, कोतवाल संजय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे.

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पुलिस ने अपनी काररवाई करते हुए मृतका हीरा देवी के परिवार वालों से विस्तार से जानकारी हासिल की.

पुलिस पूछताछ में ममता शाही ने बताया कि हर रोज की तरह सभी घर वाले खाना खा कर सो गए थे. वह सुबह उठी तो मम्मी को बादाम देने गई. तब उसे पता चला कि किसी ने मम्मी का गला काट कर हत्या कर दी. उन की हत्या किस ने किस समय की, किसी को कुछ नहीं मालूम. उस ने बताया कि मम्मी अलग कमरे में सोती थीं और घर के बाकी सदस्य अलग कमरों में सोते थे.

मृतका के पति राजेंद्र शाही उस रात भोटिया पड़ाव क्षेत्र अंबिका विहार में रहने वाली अपनी चाची के घर गए हुए थे. इस घटना की जानकारी उन को छोटी बेटी अंजलि ने फोन कर के दी. तब राजेंद्र शाही घर लौट आए.

घटना की जांचपड़ताल हेतु फोरैंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया था. फोरैंसिक टीम ने घटनास्थल की बारीकी से जांचपड़ताल कर के जरूरी नमूने ले कर पैक कर लिए. इस केस के खुलासे के लिए एसपी (सिटी) अमित श्रीवास्तव ने कोतवाल संजय कुमार के नेतृत्व में एक पुलिस टीम गठित कर दी.

घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने हीरा देवी की लाश पोस्टमार्टम हेतु भिजवा दी. 20 दिसंबर, 2020 को ही मृतका की बेटी मंजू शाही की तरफ से कोतवाली हल्द्वानी में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करा दिया गया.

केस दर्ज होते ही पुलिस टीम ने अपनी काररवाई में फिर से फोरैंसिक टीम के साथ घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया. पुलिस ने मृतका के पति राजेंद्र शाही और उन के परिवार वालों से पूछताछ की तो पता चला कि इस परिवार में काफी समय से संपत्ति को ले कर विवाद चल रहा था.

इस मामले में राजेंद्र शाही का सब से छोटा बेटा राहुल उर्फ राजा हमेशा तनाव में रहता था, जिस के कारण आए दिन मांबेटे में किसी न किसी बात को ले कर तकरार होती रहती थी.

इस जानकारी के मिलते ही पुलिस ने राहुल को पूछताछ के लिए अपनी कस्टडी में ले लिया. पुलिस ने राहुल को एकांत में ले जा कर उस से कड़ी पूछताछ की तो उस ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी मां को क्यों मारेगा क्योंकि मां ही उस का सहारा थी.

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उसी दौरान राहुल की बहन ममता ने पुलिस को बताया कि राहुल रात में कभी भी घर का शटर खोल कर बाहर घूमने लगता था. घटना वाली रात भी उस ने उसे रात के एक बजे घर के बाहर घूमते देखा था. इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस का उस के प्रति शक गहरा गया.

पुलिस ने उस की जांचपड़ताल करते हुए उस के कपड़े देखे. उस ने उस वक्त लोअर के ऊपर पैंट पहन रखी थी. पुलिस ने उस की पैंट उतरवाई तो सारा मामला सामने आ गया. उस की लोअर खून से सनी हुई थी.

पुलिस पूछताछ में वह लोअर पर लगे खून का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका. उस के तुरंत बाद उस ने अपनी मां की हत्या की बात कबूल ली.

अगले भाग में पढ़ें- आईटीआई करने के बाद भी राहुल को कोई काम क्यों नहीं मिल पाया था

खून में डूबी दूध की धार: भाग 3

सौजन्य-  सत्यकथा

राहुल की मानसिक हालत और भी खराब हो गई थी. जिस कारण परिवार वालों के प्रति उस का व्यवहार काफी बदल गया था. कभीकभी वह अपने पिता की जिंदगी के बारे में सोचता तो परेशान हो उठता था. उस की नजरों में इस सब का कारण उस की मां हीरा देवी थी, जिस के प्रति उसे नफरत पैदा हो गई थी.

अगस्त, 2020 को दोनों बापबेटे दिल्ली से काम छोड़ कर घर आ गए थे. राजेंद्र शाही किराए के मकान के बजाए अपने ही मकान में रहने लगे थे. दिल्ली से आने के बाद से ही राहुल नौकरी की तलाश में लगा था. लेकिन उस की मां उसे हर वक्त बेरोजगारी का ताना मारती रहती थी. जिस से उस का मानसिक संतुलन और भी खराब हो गया था. ऊपर से पारिवारिक विवाद ने घर की शांति छीन रखी थी.

चारों बहनों में जमीनजायदाद को ले कर मनमुटाव होता रहता था. उस वक्त तक राहुल का बड़ा भाई रवींद्र भी मानसिक परेशानी होने के कारण नौकरी छोड़ कर घर आ गया था.

घर के विवाद को देख कर रवींद्र सिंह ने सभी को समझाने की कोशिश की,लेकिन घर में उस की एक न चली. रवींद्र की पत्नी पहले से ही पिथौरागढ़ में रहती थी. जबकि रवींद्र सिंह परिवार के साथ ही रहता था. एक घर में रहते हुए भी परिवार में अलगअलग खाना बनता था. कुल मिला कर राजेंद्र शाही के पास जमीनजायदाद सब कुछ होने के बावजूद परिवार में खुशियां बिलकुल नही थीं.

20 दिसंबर, 2020 को राहुल कुछ ज्यादा ही परेशान था. थोड़ी देर पहले ही वह शहर से आया था. तभी उस की मां ने फिर से वही ताना मारा, ‘‘आ गया आवारागर्दी कर के, तू नौकरी करेगा भी क्यों? तुझे तो मुफ्त की रोटी खाने की आदत पड़ गई है.’’

हीरा देवी न जाने क्याक्या बड़बड़ाए जा रही थी. इस के बावजूद राहुल चुपचाप घर के अंदर चला गया. उस ने कपड़े चेंज किए, फिर मोबाइल खोल कर उसी में लग गया. लेकिन दिमाग में मां के कहे शब्द बारबार गूंज रहे थे.

Crime: अंधविश्वास, झाड़-फूंक और ‘औलाद का सुख’

शाम तक उस का दिमाग यूं ही घूमता रहा. शाम को पता चला कि उस के पिता आज कहीं गए हुए हैं. वह रात में नहीं आएंगे. राहुल अपने पिता के कमरे में सोता था. उस रात उस ने खाना खाया और फिर अपने ही कमरे में कैद हो गया. रात के 10 बजे ममता ने अपनी मां और भाई रवींद्र को खाना खिलाया और मां हीरा देवी को दवा देने के बाद कमरे में सुला दिया. हीरा देवी बीमार चल रही थी. फिर ममता भी अपने कमरे में जा कर सो गई. लेकिन उस रात राहुल अपनी मां के शब्दों से इतना आहत था कि उसे चाह कर भी नींद नहीं आ रही थी.

तभी उस के दिमाग में तरहतरह की शैतानी खुराफातें पैदा होने लगीं. उस के मन में बैठा शैतान जागा तो उस ने अपनी मां को ही मौत की नींद सुलाने की योजना बना डाली. वह देर रात उठा, फिर अपनी मां के कमरे में जा कर देखा. वह गहरी नींद में सोई पड़ी थीं.

घर के अन्य सदस्य भी अपनेअपने कमरों में सोए हुए थे. अपने कमरे से निकल कर राहुल सीधा किचन में गया. उस ने वहां से चाकू उठाया और उसे हाथ में थामे मां के कमरे की ओर बढ़ गया. हीरा देवी हर रात दवा खा कर सोती थी. उन पर दवाओं का नशा हावी रहता था.

मां को गहरी नींद में सोते देख राहुल शैतान बन गया. उस ने एक हाथ से अपनी मां का मुंह बंद किया और फिर दूसरे हाथ में थामे चाकू से मां के गले पर एक जोरदार वार कर डाला. इस से पहले कि हीरा देवी कुछ समझ पाती, चाकू के एक ही वार से उन के प्राणपखेरू उड़ गए.

मां को मौत की नींद सुलाने के बाद राहुल ने अपनी खून में सनी शर्ट चेंज कर ली. लेकिन खून सने लोअर के ऊपर उस ने पैंट पहन ली थी. उस के बाद उस ने बाहर के शटर का लगा ताला खोला, फिर वह निडर बेखौफ बाहर घूमता रहा.

उसी दौरान बाहर उस की आहट सुन कर ममता की आंखें खुलीं तो उस ने उसे बाहर घूमते हुए देखा. लेकिन वह उस की आदत को पहले से ही जानती थी. जिस के कारण उस ने उसे नहीं टोका.

इस केस के खुलते ही पुलिस ने मौके का मुआयना कर हत्या में प्रयुक्त चाकू, कमरे से राहुल के खून से सने कपड़े तथा वारदात के बाद खून से सने हाथ धोने में प्रयुक्त साबुन भी बरामद कर लिया था. पुलिस ने राहुल को अपनी ही मां की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

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जमीनजायदाद के मोह ने एक हंसतेखेलते परिवार को बिखरने पर मजबूर कर दिया था, जिस की परिणति परिवार के सभी लोग रिश्तेनातों को दरकिनार कर कोर्टकचहरी के चक्कर लगा रहे थे.

वहीं घर की अशांति और बेरोजगारी से परेशान राहुल के दिल में परिवार वालों के प्रति इतनी नफरत पैदा हो गई थी कि उस ने अपनी मां को मौत की नींद सुला दिया. हत्या भी ऐसी अकल्पनीय जिसे सुन कर रोंगटे खड़े हो जाएं.

Crime: अंधविश्वास, झाड़-फूंक और ‘औलाद का सुख’

बच्चा पाने की चाह में दंपत्ति क्या कुछ कर गुजरते हैं, इसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते. ऐसे दंपत्ति जिन्हें औलाद का सुख नहीं मिला है जैसे-जैसे समय व्यतीत होता जाता है, बच्चा पाने की चाह में वह सब कुछ कर गुजरते हैं जो सामान्य आम आदमी नहीं करेगा.
ऐसी स्थिति में रूपए पैसे की हानि तो होती ही है, जग हंसाई के पात्र भी बन जाते हैं. ऐसा ही एक सनसनीखेज घटना ग्राम छत्तीसगढ़ के जिला बालोद में घटित हुई. जिसका ताना-बाना झाड़-फूंक अंधविश्वास और पैसों की बर्बादी पर जाकर खत्म होता है.
यह तो एक ऐसा उदाहरण नजीर है जिस पर पुलिस ने अंकुश लगाया. और दोषियों को जेल भेजा है. अन्यथा कितने ही लोग लुट जाते हैं और जुबान भी लोक लाज के कारण बंद रखते हैं.
आइए! आज की रिपोर्ट में हम आपको ऐसे ही सच्चे घटनाक्रम की बानगी से रूबरू कराते हैं और यह बताने का प्रयास करते हैं कि अगर आपके आसपास भी ऐसा कुछ हो रहा है तो आप सतर्क सकते रहें.
पहला घटनाक्रम-

छत्तीसगढ़ के जिला पेंड्रा मरवाही में हिमाचल से जड़ी बूटी लाकर बेचने का माया जाल रचना एक शख्स को औलाद पैदा हो जाने का भ्रम रचा कर अस्सी हजार रुपए ठग लिए.

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दूसरा घटनाक्रम-

जिला बेमेतरा के एक साहू परिवार जिसे औलाद नहीं हो रही थी बच्चा होने  का झूठा दिलासा देकर 50000 रुपए ठगने वाले गांव के ही एक बैगा गुनिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल.
तीसरा घटनाक्रम-
छत्तीसगढ़ के रतनपुर में एक मिश्रा परिवार को पंजाब से आए हुए एक वैद द्वारा अवलाद दिलाने का आश्वासन देकर 25  हजार ठगा गया और फिर वह गायब हो गया.

संतान सुख का भ्रामक मायाजालसंतान सुख की चाहत में लोग किस तरह अंधविश्वास के फेर में झाड़-फूंक और नकली दवाइयों के चक्कर में पड़ कर लूट जाते हैं उसकी एक बानगी यहां प्रस्तुत है-

छत्तीसगढ़ के जिला बालोद के गुंडरदेही थाना अंतर्गत ग्राम मुंदेरा में दम्पती को संतान सुख दिलाने झाड़ फूंक व तंत्र विद्या के नाम पर 40 हजार रुपए की ठगी करने वाले पति-पत्नी को गुंडरदेही पुलिस ने तत्परता का परिचय देते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. घटनाक्रम कुछ इस तरह था-
गुंडरदेही थाना अंतर्गत ग्राम मुंदेरा में दम्पती को संतान सुख दिलाने झाड़ फूंक व तंत्र विद्या के नाम पर 40 हजार रुपए की ठगी करने वाले पति-पत्नी को गुंडरदेही पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.पुलिस के मुताबिक ग्राम मुंदेरा में बीते दिनों डेरा वाले आए थे, जहां लोगों को झाड़-फूंक तंत्र विद्या से लाभ का लालच दिखाकर लूटा जा रहा था. इसी दौरान गांव के एक दम्पती को संतान सुख नहीं हो रहा था.
आरोपी राजकुमार पटोती पिता स्व. लंखाराम पटोती जाति गोड़ (50) निवासी कुगदा थाना कुम्हारी जिला दुर्ग एवं उनकी 100 भगवती उर्फ लक्ष्मी पटोती (45) ने पीडि़त दंपती से 40 हजार रुपए मांगे और कहा कि तंत्र विद्या से संतान सुख मिलेगा. प्रार्थी को धमकी दी कि रुपए न देने पर सब कुछ तहस-नहस हो जाएगा.डरे हुए पीडि़त दंपती ने आरोपियों को पैसों दे दिए.
पुलिस के मुताबिक आरोपी और भी लोगों से ठगी कर चुका है. ग्राम मुंदेरा में प्रार्थी केतराम साहू पिता हलधर प्रसाद साहू साकिन बोदल थाना रनचिरई की रिपोर्ट पर  मामला दर्ज किया गया आरोपी घुमंतु हैं जो डेरा बनाकर रहते हैं. भोले-भाले ग्रामीणों को, जिसका बच्चा नहीं होता है, झाड़-फूंक के नाम पर उन्हें ठगते हैं। इसी तरह प्रार्थी से 40,000 रुपए ले लिया.

संतान सुख और  गहराता “अंधविश्वास”.

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दंपत्ति को जब कुछ वक्त बीत जाने के बाद औलाद का सुख नहीं मिलता तो वह लोगों के कहने पर या तो चिकित्सकों के यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं. अथवा “अंधविश्वास” की जाल में फंस जाते हैं.जहां तक विज्ञान और चिकित्सक का संबंध है यहां तो लोगों को सही जानकारी प्राप्त हो जाती है और अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में पर जहां अपने ग्रुप में पैसे बर्बाद करते हैं. वही जड़ी बूटी और नकली दवाइयों के चक्कर में पड़ कर अपने स्वास्थ्य और धन को बर्बाद करते हैं ऐसे ही हालात में फंस जाने कितने लोग अंत में सर पीट कर रह जाते हैं.
अंधविश्वास और झाड़-फूंक के खिलाफ मुहिम चलाने वाले शिव दास महंत के मुताबिक हमारे पास अक्सर ऐसे मामलों में सलाह के लिए लोग संपर्क करते हैं हमारा प्रयास रहता है कि जिन्हें संतान सुख नहीं मिला है वह झाड़-फूंक  को और अंधविश्वास के फेर में न पड़े यही सलाह हम लगातार दंपत्ति  को देते रहते हैं.
अधिवक्ता बी के शुक्ला के मुताबिक कानून के मुताबिक ऐसे मामलों में हमारी यह सलाह रहती है कि अंधविश्वास और झाड़-फूंक से बचकर समझदारी का परिचय देते हुए दंपत्ति अनाथ बच्चों को गोद लें.
सामाजिक कार्यकर्ता एवं डॉ जी आर पंजवानी के मुताबिक लोगों को यह समझना चाहिए कि झाड़-फूंक से बच्चे नहीं होते आज के इस जागरूकता, शिक्षा के समय में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हुए और बालक गोद लेकर के संतान सुख का लाभ लिया जा सकता है.

Crime Story: काली नजर का प्यार भाग 3

सौजन्य-  सत्यकथा

इधर वीरेंद्र ने अपने व वर्षा के प्रेम संबंधों की जानकारी मां को दी तो सरस्वती भड़क उठी. उस ने वीरेंद्र से साफ कह दिया कि वह बिनब्याही लड़की को घर में नहीं रख सकती. उस ने कोई बवाल कर दिया तो हम सब फंस जाएंगे. बदनामी भी होगी.

इस पर वीरेंद्र ने मां को समझाया कि वे दोनों एकदूसरे से प्रेम करते हैं. 6 महीने बीतते ही शादी कर लेंगे. वर्षा के घर वालों को भी साथ रहने में कोई ऐतराज नहीं है. इस बीच हम लोग वर्षा को परख भी लेंगे कि वह घर की बहू बनने लायक है भी या नहीं.

सरस्वती देवी का मन तो नहीं था, लेकिन बेटे के समझाने पर वह राजी हो गई.

इस के बाद वीरेंद्र ने 5 जून, 2020 को वर्षा को राठ स्थित शीतला माता मंदिर बुला लिया. यहां उस ने उस की मांग में सिंदूर लगाया. फिर उसे अपने घर ले आया. सरस्वती ने आधेअधूरे मन से बिनब्याही दुलहन का स्वागत किया और घर में पनाह दे दी.

वर्षा महीने भर तो मर्यादा में रही, उस के बाद रंग दिखाने लगी. वह न तो घर का काम करती और न ही खाना बनाती. सरस्वती देवी उस से कुछ कहती तो वह उसे खरीखोटी सुना देती. देवर अनिल के साथ भी वह दुर्व्यवहार करती. पति वीरेंद्र को भी उस ने अंगुलियों पर नचाना शुरू कर दिया. वर्षा मनमानी करने लगी तो घर में कलह होने लगी.

कलह का पहला कारण यह था कि वर्षा को संयुक्त परिवार पसंद नहीं था. वह सास देवर के साथ नहीं रहना चाहती थी. कलह का दूसरा कारण उस की स्वच्छंदता थी. जबकि सरस्वती देवी चाहती थी कि वर्षा मर्यादा में रहे.

उधर वर्षा को घर की चारदीवारी कतई पसंद न थी. वह स्वच्छंद विचरण चाहती थी. तीसरा अहम कारण पति का वेतन था. वर्षा चाहती थी कि वीरेंद्र जो कमाए, वह उस के हाथ पर रखे. जबकि वीरेंद्र अपना आधा वेतन मां को दे देता था. इस बात पर वह झगड़ा करती थी.

10 नवंबर, 2020 की शाम 4 बजे सरस्वती देवी खाना तैयार करने नवोदय विद्यालय छात्रावास चली गई. अनिल व वीरेंद्र भी काम पर गए थे. घर में वर्षा ही थी. शाम 5 बजे वीरेंद्र घर आ गया. आते ही वर्षा ने वीरेंद्र से वेतन के संबंध में पूछा. वीरेंद्र ने बताया कि उसे वेतन मिल तो गया है. लेकिन उसे पैसा मां को देना है. क्योंकि दीपावली का त्यौहार नजदीक है और मां को घर का सारा सामान लाना है.

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यह सुनते ही वर्षा गुस्से से बोली, ‘‘शारीरिक सुख मेरे से उठाते हो और पैसा मां के हाथ में दोगे. यह नहीं चलेगा. आज रात मां के कमरे में ही जा कर सोना, समझे.’’

वर्षा की बात सुन कर वीरेंद्र तिलमिला उठा और उस ने गुस्से में वर्षा के गाल पर एक तमाचा जड़ दिया. वर्षा गम खाने वाली कहां थी, वह वीरेंद्र से भिड़ गई. दोनो में मारपीट होने लगी. इसी बीच वर्षा की निगाह सिलबट्टे पर पड़ी. उस ने सिल का बट्टा उठाया और वीरेंद्र के सिर पर प्रहार कर दिया.

बट्टे के प्रहार से वीरेंद्र का सिर फट गया और वह जमीन पर गिर पड़ा. इस के बावजूद वर्षा का हाथ नहीं रुका और उस ने उस के सिर व चेहरे पर कई और वार किए. जिस से वीरेंद्र की मौत हो गई. कथित पति की हत्या करने के बाद वर्षा ने घर पर ताला लगाया और फरार हो गई.

इधर रात 8 बजे सरस्वती देवी नवोदय विद्यालय छात्रावास से खाना बना कर घर आई तो घर के दरवाजे पर ताला लटक रहा था. सरस्वती ने वर्षा के मोबाइल फोन पर काल की तो उस का मोबाइल फोन बंद था.
फिर उस ने अपने छोटे बेटे अनिल को फोन कर घर पर बुला लिया. अनिल ने भी वर्षा को कई बार काल की लेकिन उस से बात नहीं हो पाई.

सरस्वती और उस के बेटे अनिल ने पड़ोसियों से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि वर्षा बदहवास हालत में घर के बाहर निकली थी. ताला लगाने के बाद वह बड़बड़ा रही थी कि सास और पति उसे प्रताडि़त करते हैं. वह रिपार्ट लिखाने पुलिस चौकी जा रही है. पड़ोसियों की बात सुन कर सरस्वती का माथा ठनका. किसी अनिष्ट की आशंका से उस ने राठ कोतवाली को सूचना दी.

सूचना पाते ही कोतवाल के.के. पांडेय पुलिस टीम के साथ आ गए. पांडेय ने दरवाजे का ताला तुड़वा कर घर के अंदर प्रवेश किया.

उन के साथ सरस्वती व अनिल भी थे. कमरे में पहुंचते ही सरस्वती व अनिल दहाड़ मार कर रो पड़े. कमरे के फर्श पर 22 वर्षीय वीरेंद्र की खून से लथपथ लाश पड़ी थी. सरस्वती ने पांडेय को बताया कि यह उन के बड़े बेटे की लाश है.

चूंकि हत्या का मामला था. अत: के.के. पांडेय ने सूचना वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को दी. कुछ ही देर में एसपी नरेंद्र कुमार सिंह, एएसपी संतोष कुमार सिंह, तथा डीएसपी अखिलेश राजन घटनास्थल पर आ गए. पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया.

वीरेंद्र की हत्या सिल के बट्टे से सिर पर प्रहार कर के की गई थी. उस की उम्र 22-23 वर्ष के बीच थी. खून से सना आलाकत्ल बट्टा शव के पास ही पड़ा था, जिसे अधिकारियों ने सुरक्षित करा लिया.

निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल हमीरपुर भिजवा दिया. उस के बाद मृतक की मां व भाई से घटना के बारे में पूछताछ की.

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सरस्वती देवी ने बताया कि वर्षा उस के बेटे वीरेंद्र के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रह रही थी. उसी ने वीरेंद्र की हत्या की है. उस का मायका राठ कोतवाली के गांव सैदपुर में है. सरस्वती देवी की तहरीर पर थानाप्रभारी के.के. पांडेय ने भादंवि की धारा 302 के तहत वर्षा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली और उस की तलाश शुरू कर दी.

रात 11 बजे थानाप्रभारी ने पुलिस टीम के साथ सैदपुर गांव में चंदा देवी के घर छापा मारा. घर पर उस की बेटी वर्षा मौजूद थी. पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया. उसे थाना राठ कोतवाली लाया गया.
थाने पर जब उस से वीरेंद्र की हत्या के संबंध में पूछा गया तो उस ने सहज ही हत्या का जुर्म कबूल कर लिया.

उस ने बताया कि वीरेंद्र से रुपए मांगने पर उस का झगड़ा हुआ था. गुस्से में उस ने वीरेंद्र पर सिल के बट्टे से प्रहार किया. जिस से उस का सिर फट गया और उस की मौत हो गई. पुलिस से बचने के लिए वह घर में ताला लगा कर मायके चली गई थी, जहां से वह पकड़ी गई.

11 नवंबर, 2020 को पुलिस ने अभियुक्ता वर्षा को हमीरपुर की कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जिला जेल भेज दिया गया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

Crime Story: काली नजर का प्यार भाग 1

सौजन्य-  सत्यकथा

जिला हमीरपुर का एक बड़ा कस्बा है राठ. मूलत: मध्य प्रदेश के गांव सरमेड़ के रहने वाले
मूलचंद्र अनुरागी का परिवार राठ के मोहल्ला भटियानी में रहता था. परिवार में पत्नी सरस्वती के अलावा 2 बेटे वीरेंद्र व अनिल थे. गांव में मूलचंद्र का पुश्तैनी मकान व जमीन थी. वह खुद गांव में रह कर घरजमीन की देखरेख करता था.

पत्नीबच्चों से मिलने वह राठ आताजाता रहता था. मूलचंद्र की पत्नी सरस्वती, राठ स्थित नवोदय विद्यालय में रसोइया थी. वह छात्रावास में रहने वाले छात्रों के लिए खाना बनाती थी. सरस्वती का बड़ा बेटा वीरेंद्र मिठाई की एक दुकान में काम करता था.

वीरेंद्र बताशा बनाने का उम्दा कारीगर था, जबकि छोटा बेटा अनिल राठ की ही एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में नौकरी कर रहा था. चूंकि सरस्वती और उस के दोनों बेटे कमाते थे, सो घर की आर्थिक स्थिति ठीक थी.

सरस्वती बेटों के साथ खुशहाल तो थी, लेकिन घर में बहू की कमी थी. वह वीरेंद्र की शादी को लालायित रहती थी.

वीरेंद्र अनुरागी जिस दुकान में काम करता था, उसी में अशोक नाम का एक युवक काम करता था. अशोक राठ कस्बे से आधा किलोमीटर दूर स्थित सैदपुर गांव का रहने वाला था. अशोक की छोटी बहन वर्षा अकसर उसे लंच देने आया करती थी.

जयराम की 2 ही संतानें थीं अशोक और वर्षा. कुछ साल पहले जयराम की मृत्यु हो चुकी थी. मां चंदा देवी ने उन दोनों को तकलीफें सह कर बड़ा किया था. आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण अशोक और वर्षा ज्यादा पढ़लिख नहीं सके थे.

अशोक 10वीं कक्षा छोड़ कर नौकरी करने लगा था, जबकि वर्षा 10वीं कक्षा पास करने के बाद मां के घरेलू कामों में हाथ बंटाने लगी थी.

20 वर्षीय वर्षा गोरीचिट्टी, छरहरी काया की युवती थी. नैननक्श भी तीखे थे. सब से खूबसूरत थी उस की आंखें. खुमार भरी गहरी आंखें. उस की आंखों में ऐसी कशिश थी कि जो उन में देखे, खो सा जाए.

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एक दिन वर्षा अपने भाई अशोक को लंच देने दुकान पर आई. वीरेंद्र की नजरें वर्षा की नजरों से मिलीं, तो वह उन में मानो डूब सा गया. जी में आया, उन्हीं खुमार भरी आंखों की अथाह गहराइयों में पूरी उम्र डूबा रहे. खुद भी उबरना चाहे तो उबर न सके. कुछ पल के लिए आंखों से आंखें मिली थीं, लेकिन उन्हीं लम्हों में वीरेंद्र वर्षा की आंखों पर फिदा हो गया. इस के बाद वर्षा की आंखें उस की सोच की धुरी बन गईं.

उस दिन के बाद वीरेंद्र को वर्षा के आने का इंतजार रहने लगा. हालांकि अशोक से बोलचाल पहले से थी, लेकिन वर्षा तक पहुंच बनाने के लिए उस ने उस से संबंध प्रगाढ़ बना लिए. इन्हीं संबंधों की आड़ में उस ने वर्षा से परिचय भी कर लिया.

वर्षा से परिचय हुआ तो बेइमान कर देने वाली उस की नजरें वीरेंद्र का दिल और तड़पाने लगीं. अब वीरेंद्र को इंतजार था उस पल का, जब वर्षा अकेले में मिले और वह उस से अपने दिल की बात कह सके.
किस्मत ने एक रोज उसे यह मौका भी मुहैया करा दिया.

उस रोज वर्षा भाई को खाना खिला कर जाने लगी, तो ताक में बैठा वीरेंद्र उस के पीछेपीछे चल पड़ा. तेज कदमों से वह वर्षा के बराबर में पहुंचा. वर्षा ने सिर घुमा कर वीरेंद्र को देखा और मुसकराने लगी.

वीरेंद्र बोला, ‘‘मुझे तुम से एक जरूरी बात कहनी है.’’

वर्षा के कदम पहले की तरह बढ़ते रहे, ‘‘बोलो.’’

‘‘मुझे जो कहना है, सड़क चलते नहीं कह सकता.’’

सहसा वीरेंद्र की नजर कुछ दूर स्थित पार्क पर पड़ी, ‘‘चलो, वहां पार्क में बैठते हैं. सुकून से बात हो जाएगी.’’
‘‘चलो,’’ वर्षा मुसकराई, ‘‘तुम्हारी बात सुन लेती हूं.’’

वे दोनों पार्क में जा कर बैठ गए. उस के बाद वर्षा वीरेंद्र से मुखातिब हुई, ‘‘अब बोलो, क्या कहना है?’’
वीरेंद्र के पास भूमिका बनाने का समय नहीं था. अत: उस ने सीधे तौर पर अपनी बात कह दी, ‘‘तुम्हारी आंखें बहुत हसीन हैं.’’

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वर्षा की मुसकराहट गाढ़ी हो गई, ‘‘और मैं?’’
‘‘जिस की आंखें इतनी हसीन हैं, कहने की जरूरत नहीं कि वह कितनी हसीन होगी.’’
वर्षा ने उसे गहरी नजरों से देखा, ‘‘तुम मेरे हुस्न की तारीफ करने के लिए यहां ले कर आए हो या कुछ और कहना है?’’

वीरेंद्र ने महसूस किया कि वर्षा प्यार का सिलसिला शुरू करने के लिए उकसा रही है. अत: उस के दिल की बात जुबान से बयां हो गई, ‘‘तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो. मुझे तुम से प्यार हो गया है.’’

कुछ देर तक वर्षा उस की आंखों में देखती रही, फिर आहिस्ता से बोली, ‘‘प्यार ही तो ऐसी चीज है, जिस पर न दुनिया का कोई कानून लागू नहीं होता, न इसे दबाया या छिपाया जा सकता है. लेकिन प्यार के कुछ तकाजे भी होते हैं.’’

वीरेंद्र ने धड़कते दिल से पूछा, ‘‘कैसे तकाजे?’’

‘‘वफा, ईमानदारी और जिंदगी भर साथ निभाने का जज्बा.’’

अगले भाग में पढ़ें- वर्षा को लिवइन रिलेशनशिप में भी दोहरा लाभ नजर आ रहा था.

Crime Story: काली नजर का प्यार भाग 2

सौजन्य-  सत्यकथा

वीरेंद्र समझ गया कि वर्षा कहना चाहती है कि वह उस का प्यार कबूल तो कर सकती है, मगर शर्त यह है कि उसे शादी करनी होगी. उस वक्त वीरेंद्र के सिर पर वर्षा को पाने का जुनून था, सो उस ने कह दिया, ‘‘मैं टाइमपास करने के लिए तुम्हारी तरफ प्यार का हाथ नहीं बढ़ा रहा हूं, बल्कि संजीदा हूं. मैं तुम से शादी कर के वफा और ईमानदारी से साथ निभाऊंगा.’’

दरअसल वर्षा अपनी मां की मजबूरियां जानती थी. चंदा देवी ने बहुत तकलीफें उठा कर पति का इलाज कराया था. इलाज में उस पर जो कर्ज चढ़ा था, उस की भरपाई होने में बरसों लग जाने थे. परिवार में कोई ऐसा न था जो युवा हो चुकी वर्षा के भविष्य के बारे में सोचता. मां बेटी को दुलहन बना कर विदा कर पाने की हैसियत में नहीं थी. छोटा भाई अशोक खुद अपनी जिम्मेदारियों से जूझ रहा था. अत: वर्षा को अपने भविष्य का निर्णय स्वयं करना था.

वर्षा 20 साल की भरीपूरी युवती थी. उस के मन में किसी का प्यार पाने और स्वयं भी उसे टूट कर चाहने की हसरत थी. मन में इच्छा थी कि कोई उसे चाहने वाला मिल जाए, तो वह जीवन भर के लिए उस का हाथ थाम ले. इस तरह उस का भी जीवन संवर जाएगा और वह भी अपनी गृहस्थी, पति व बच्चों में रमी रहेगी.

लोग गलत नहीं कहते, इश्क पहली नजर में होता है. वर्षा के दिल में भी तब से हलचल मचनी शुरू हो गई थी, जब वीरेंद्र से पहली बार उस की नजरें मिली थीं.

वर्षा की आंखें खूबसूरत थीं, तो वीरेंद्र की आंखों में भी प्यार ही प्यार था. उस पल से ही वीरेंद्र वर्षा की सोच का केंद्र बन गया था. वर्षा ने जितना सोचा, उतना ही उस की ओर आकर्षित होती गई. वर्षा का मानना था कि वीरेंद्र अच्छा और सच्चा आशिक साबित हो सकता है. उस के साथ जिंदगी मजे से गुजर जाएगी.

वर्षा ने यह भी निर्णय लिया कि जब कभी भी वीरेंद्र प्यार का इजहार करेगा, तो वह मुहब्बत का इकरार कर लेगी. उम्मीद के मुताबिक उस दिन वीरेंद्र ने अपनी चाहत जाहिर की, तो वर्षा ने उस का प्यार कबूल कर लिया. उस दिन से वर्षा और वीरेंद्र का रोमांस शुरू हो गया.

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वर्षा के प्रेम की जानकारी उस की मां चंदा देवी और भाई अशोक को भी हो गई थी. चूंकि वर्षा और वीरेंद्र शादी करना चाहते थे, सो उन दोनों ने उन के प्यार पर ऐतराज नहीं किया. एक प्रकार से वर्षा को मां और भाई का मूक समर्थन मिल गया था.

दूसरी ओर वर्षा वीरेंद्र के जितना करीब आ रही थी, उतना ही उसे लग रहा था कि अभी वह वीरेंद्र को ठीक से समझ नहीं पाई, अभी उसे और समझना बाकी है.

अत: वीरेंद्र को समझने के लिए वर्षा ने उस के साथ लिवइन रिलेशनशिप में रहने का मन बना लिया. सोचा वीरेंद्र उस की अपेक्षाओं के अनुरूप साबित हुआ, तो उस से शादी कर लेगी. कसौटी पर खरा न उतरा, तो दोनों अपने रास्ते अलग कर लेंगे.

वर्षा को लिवइन रिलेशनशिप में भी दोहरा लाभ नजर आ रहा था. पहला लाभ यह है कि वीरेंद्र को ठीक से समझ लेगी. दूसरा लाभ यह कि अपनी जवानी को घुन नहीं लगाना पड़ेगा. वीरेंद्र उस की देह का सुख भोगेगा, तो वह भी वीरेंद्र के जिस्म से आनंद पाएगी.

एक रोज जब वर्षा और वीरेंद्र का आमनासामना हुआ और बातचीत का सिलसिला जुड़ा तो वीरेंद्र ने जल्द शादी करने का प्रस्ताव रखा. इस पर वर्षा बोली, ‘‘मुझे शादी की जल्दी नहीं है बल्कि हमें अभी एकदूसरे को समझने की जरूरत है.’’

‘‘6 महीने से हमारा रोमांस चल रहा है,’’ वीरेंद्र के शब्दों में हैरानी थी, ‘‘और अब तक तुम मुझे समझ नहीं पाई.’’

‘‘समझी तो हूं, लेकिन उतना नहीं जितना जीवन भर साथ रहने के लिए समझना चाहिए.’’

‘‘पूरी तरह समझने में कितना वक्त लगेगा?’’ वीरेंद्र ने उदास मन से पूछा.

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कुछ देर गहरी सोच में डूबे रहने के बाद वर्षा ने जवाब दिया, ‘‘शायद 6 महीने और.’’

‘‘और इस दौरान मेरा क्या होगा?’’ वीरेंद्र ने पूछा.

वर्षा के होंठों पर मुसकान आई, ‘‘तुम्हारे साथ मैं भी रहूंगी.’’

वीरेंद्र के सिर पर हैरत का पहाड़ टूट पड़ा, ‘‘बिन ब्याहे मेरे साथ रहोगी.’’

‘‘इस में बुरा क्या है?’’ वर्षा मुसकराई, ‘‘नए जमाने के साथ लोगों की सोच और जिंदगी के तरीके भी बदलते रहते हैं. शहरों कस्बों में बहुत सारे लोग लिवइन रिलेशनशिप में रह रहे हैं, हम भी रह लेंगे.’’
‘‘यानी कि शादी किए बिना ही तुम घर रहोगी.’’

वर्षा ने वीरेंद्र की ही टोन में जवाब दिया, ‘‘बेशक.’’

चूंकि वीरेंद्र वर्षा का दीवाना था. अत: जब वर्षा ने वीरेंद्र के सामने लिवइन रिलेशनशिप का प्रस्ताव रखा तो वह फौरन राजी हो गया.

अगले भाग में पढ़ें- वर्षा मनमानी करने लगी तो घर में कलह होने लगी

“अपराधी नौकर” से कैसे  हो बचाव!

आमतौर पर माना जाता है कि मालिक और नौकर का संबंध चिरकालिक है. दोनों ही एक दूसरे के पूरक है. ऐसे में अगर नौकर विश्वासघात करने लगे, आस्तीन का सांप बन जाए तो फिर मालिक का तो भगवान ही मालिक है.

ऐसी अनेक घटनाएं हमारे आसपास घटित होती है. जब नौकर विश्वासघात पर उतर आता है.और अपने ही मालिक को डस लेता है. आखिर नौकर की ऐसी करतूतों से कैसे बचा जा सकता है.

आज के इस अपराध पूर्ण माहौल में, यह एक बड़ी चिंता का विषय है. क्योंकि कब कौन, कहां क्या निर्णय लेता है और अपराध कर बैठता है यह कोई भी नहीं जान सकता. आइए! आज इस लेख में नौकर मालिक के संबंधों और अपराध को रेखांकित करते हुए कुछ घटनाओं के माध्यम से हम आपको जिंदगी के सच को दिखाने का प्रयास करते हैं. विधि और समाज के महत्वपूर्ण लोगों के विचार भी इस आलेख में शामिल किए गए हैं.

Crime Story: प्यार के भंवर में (भाग-2)

घर का भेदी- नौकर

छत्तीसगढ़ के जिला रायगढ़ में अपने घर में लगातार चोरियां होती देख परेशान मालिक ने घर में मोबाइल को वीडियो रिकार्डिंग मोड पर रखकर छोड़ दिया. जब मोबाइल को दोबारा चेक किया तो पता चला कि आरोपी और कोई नहीं, घर का ही एक विश्वासपात्र नौकर  है. मालिक ने नौकर के विरुद्ध थाने में अपराध दर्ज करायी.  शशांक अग्रवाल (21 साल) पिता डा. राजेन्द्र फ्रेंड्स कॉलोनी में रहते हैं.

शशांक बताते हैं इनकी क्लिनिक गांधी गंज में है. क्लिनिक और घर की देखभाल के लिए डाक्टर ने दिलेश्वर पटेल निवासी चिनारा चैनपुर कोरबा को तीन साल से रखा है. 15 अप्रैल को शशांक अग्रवाल और इनके माता-पिता घर बंद कर शाम 5.30 बजे क्लिनिक गए थे. घर में इलेक्ट्रीशियन काम कर रहा था, दिलेश्वर भी घर पर था. कुछ महिनों से लगातार अलमारी से रुपए और जेवरात चोरी हो रहे थे. डॉ. राजेन्द्र ने चोरी का पता लगाने के लिए उनकी पत्नी के मोबाइल को वीडियो रिकार्डिंग मोड में डालकर बेडरूम में छिपा दिया था. रात करीब 9.30 बजे डॉक्टर अग्रवाल जब घर पहुंचे तो उन्होंने अपना मोबाइल चेक किया.मोबाइल की वीडियो रिकार्डिंग में दिलेश्वर घर की अलमारी खोलकर 90 हजार रुपए ले जाता दिखा.इस पर उनके द्वारा कोतरा रोड में पहुंच रिपोर्ट दर्ज कराई गई. रिपोर्ट पर कोतरा रोड पुलिस ने आरोपी नौकर को जेल की हवा खाने भेज दिया है.

मास्टरमाइंड नौकर

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मोबाइल दुकान में काम करने वाले कर्मचारी ने मालिक के विश्वास का फायदा उठाकर अकाउन्ट से अपने खाते में 6 लाख रुपए ट्रांसर्फर कर लिया. घटना की रिपोर्ट गुढिय़ारी थाने में दर्ज की गई है. रायपुर के अशोकनगर , गुढिय़ारी निवासी साधुराम जीवनानी ने रिपोर्ट दर्ज कराई  कि प्रार्थी का एक मोबाइल दुकान है. दुकान में काम करने वाले अखिलेश्वर पाण्डेय विश्वास के कारण ग्राहकों को मोबाइल फायनेंस ब्रिकी होम क्रेडिट कंपनी द्वारा किया जाता है.खिलेश्वर पाण्डेय दुकान का एकाउन्ट एवं मोबाइल खरीदी बिक्री का काम करता है, जिसके  कारण आरोपी को खाता संबंधित आईडी पासवर्ड दिया था. 7 जनवरी को प्रार्थी के मोबाइल पर 10 हजार रुपए निकालने के संबंध में मैसेज आया जिसके बाद बैंक जाकर खाते की जांच कराने पर अखिलेश्वर पाण्डे ने कई बार में 6 लाख 2 हजार 920 रुपए पीडि़त के एचडीएफसी बैंक खाते से अपने खाते में ट्रांसर्फर किया है. इसके बाद 7 जनवरी से दुकान में काम करना बंद कर दिया है. रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अमानत में खयानत की  के तहत अपराध कायम कर कर लिया.

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जब नौकर ही हत्यारा निकला

किस्से कहानियों और फिल्मों में हम अक्सर नौकर को वफादार के रूप में पाते हैं मगर ऐसी भी बहुत सी कहानियां हैं जब नौकर पीठ पर घाव कर देता है.

ऐसी ही एक घटना छत्तीसगढ़ के नवगठित जिला पेंड्रा में घटित हुई.यहां पुलिस ने कंप्यूटर दुकान संचालक की हत्या का खुलासा करते हुए मामले में मृतक की पत्नी और उसके ड्राइवर को गिरफ्तार किया पुलिस की पूछताछ में मृतक की आरोपी पत्नी ने इकबालिया बयान में बताया पति से परेशान थी और  तंग आकर ड्राइवर के साथ मिलकर हत्या  की है. पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त कार और वारदात को अंजाम देने के लिए उपयोग किये गए डंडे को भी बरामद कर लिया है.

यह सनसनीखेज मामला गौरेला थाना क्षेत्र का है,  पुलिस को सूचना मिली कि चुक्तिपानी और ज्वालेश्वर मार्ग पर सड़क किनारे खाई में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला है. पुलिस मौके पर पहुचकर जांच शुरू की तब पुलिस को पता चला कि शव पेण्ड्रा थानाक्षेत्र के कुदरी गांव में रहने वाले रजनीश डेनियल का है, जो कंप्यूटर दुकान संचालित करता था. पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि रजनीश डेनियल  घर से अचानक गायब हो गया था, जिस पर उसकी पत्नी माग्रेट डेनियल ने  पेण्ड्रा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

खाई में मिले शव की शिनाख्ती के लिए पुलिस ने मार्गेट डेनियल को बुलाया शव की पहचान उसकी पत्नी ने की और शव जो पुलिस ने पंचनामा पोस्टमार्टम कार्रवाई के बाद परिजन को सौंप दिया, शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मृतक की हत्या किसी वजनी चीज से सर में चोट मारने और गला दबाने से हुई है.

पुलिस ने मामले में अलग-अलग बयान लिया यहां तक की मनोवैज्ञानिक तरीके से भी पूछताछ की गई. पुलिस को मामले में संदेह मृतक की पत्नी पर हुआ, जिस पर कड़ाई से की गई पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल कर ली. मृतक की पत्नी ने बतलाया कि वो अपने पति से काफी परेशान थी. रजनीश उसे शारीरिक और मानसिक रूप से काफी परेशान करता था, यहां तक की खाने-पीने को भी नहीं दिया करता था. प्रताड़ना से तंग आकर मार्ग्रेट डेनियल ड्राइवर भूरेलाल को पैसे और जमीन का लालच देकर रजनीश डेनियल को मारने का प्लान बनाया.

छत्तीसगढ़ के आदिवासी जिला जशपुर में एक व्यापारी को उसके यहां काम करने वाले नौकर में ऐसा दंश दिया जिसे वह शायद कभी नहीं भूल सकता और पुलिस भी उस नौकर को अभी तक ढूंढ नहीं पाई है. रामलाल नामक एक कपड़ा व्यवसायी के गोदाम का पचास हजार का कीमती कपड़ा नौकर ने बेच दिया और पता चलने पर नौकर धीरज फरार है.

ऐसे ही एक घटना क्रम में जिला बेमेतरा के कोतवाली थाना अंतर्गत एक जनरल स्टोर के नौकर ने अपने मालिक  घनश्याम तिवारी को लाखों रुपए का चूना लगा दिया मालिक ने नौकर रमाकांत को रुपए जमा करने बैंक भेजा मगर नौकर पैसे लेकर से फरार हो गया.

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आखिर क्या है उपाय

जैसा कि हम जानते हैं नौकर और मालिक, मालिक और नौकर का संबंध चोली दामन का संबंध है. ऐसे में जब ऐसी बहुतेरी घटनाएं समाज में घटित हो रही हैं. जब नौकर अपराधी हो जाता है तब एहतियात, सतर्कता लाजमी हो जाती है.

हाईकोर्ट के अधिवक्ता एसएस मसीह के मुताबिक आज समय आंख बंद करके किसी पर विश्वास करने का  नहीं है. ऐसे में जब आपके यहां कार्यरत सर्वेंट अर्थात नौकर चाहे कितना ही पुराना क्यों ना हो आप सहजता और सरलता बनाते हुए अपनी आंखें खुली रखें. कभी भी अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक के दस्तावेज नौकर को न बताएं और एक मर्यादा के तहत माहौल बनाकर काम लें.

वहीं संगीत मनोविज्ञान के शिक्षक घनश्याम तिवारी के मुताबिक नौकर और मालिक एक दूसरे के पर्याय हैं नौकर के बिना काम नहीं चल सकता मगर मालिक को चाहिए कि एहतियात बरतते हुए अपने महत्वपूर्ण सूचनाओं को अभी भी नौकर से शेयर न करें.

सामाजिक कार्यकर्ता रमाकांत श्रीवास के मुताबिक नौकर पर पूर्ण रूप से आंख बंद करके विश्वास करना घातक हो सकता है. आज के समय में जब गुप्त कैमरे लग चुके हैं, ऐसे में बहुत तरह से राहत भी मिल जाती है मगर  एहतियात अपरिहार्य है.

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