मेरे घरवाले जल्दी से जल्दी शादी कराना चाहते हैं लेकिन मैं पढ़ाई करना चाहता हूं, क्या करूं?

सवाल

मैं 21 साल का एक कुंआरा नौजवान हूं. मुझे अपना कैरियर बनाना है और मेरे घर वाले हैं कि जल्दी से जल्दी मेरी शादी कर के अपनी जिम्मेदारी से छुटकारा पा लेना चाहते हैं.  इतना ही नहीं, वे ‘लड़की कौन ढूंढ़े’ की तर्ज पर मेरी शादी मेरी भाभी की छोटी बहन से करा देना चाहते हैं. इस बात से मैं अपनी पढ़ाई और आगे नौकरी पर ध्यान नहीं दे पा रहा हूं. मैं क्या करूं?

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जवाब

पहले आप कैरियर पर ध्यान दें, लेकिन यह भी खयाल रखें कि पत्नी अच्छी मिले तो वह कैरियर में अड़ंगा नहीं बनती. भाभी की बहन से शादी करना हर्ज की बात नहीं, बशर्ते वह आप को पसंद हो. आज नहीं तो कल शादी तो करनी ही है, पर इस के लिए अपने कैरियर की बलि न चढ़ाएं. अच्छा होगा कि यह बात घर वालों को समझाएं और उन से कुछ दिनों की मोहलत ले लें.

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मेरे बेटे और बेटी के बीच रोजाना झगड़ा होता है, मैं क्या करूं?

सवाल

बच्चे आजकल स्कूल नहीं जा रहे. औनलाइन क्लासेस चलती हैं. सारा दिन घर में बैठे रहते हैं. मेरी 10 वर्षीया बेटी और 15 साल के बेटे के बीच में रोजाना  झगड़ा होता है. बिना बात के ही दोनों तूतूमैंमैं पर उतर आते हैं. दोनों की लड़ाई में मेरे सिर में दर्द होने लगता है. मैं बहुत परेशान हो गई हूं. कैसे दूर करूं दोनों का  झगड़ा?

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जवाब

यह समस्या आज कई मातापिताओं को  झेलनी पड़ रही है. वैसे तो छोटे होने तक भाईबइन के बीच लड़ाई झगड़ा होना लाजिमी है लेकिन आज के माहौल में जब बच्चे घर से बाहर नहीं निकल रहे, स्कूल बंद हैं, फ्रैंड्स न घर आ सकते हैं और न बच्चे उन के घर जा सकते हैं संक्रमण के डर से तो उन में आपस में  झगड़ा होना आम है. बच्चे जब औनलाइन क्लासेस से फ्री हो जाते हैं और अपनी एकेडमिक एक्टिविटी से फ्री होते हैं तो टाइम पास करना उन के लिए मुश्किल हो जाता है.

तब भाईबहन बात को बढ़ा कर उसे  झगड़े का रूप दे बैठते हैं. यह सब पेरैंट्स के लिए बड़ी सिरदर्दी होती है. दोनों के बीच किसी एक को सही बताना और फिर दूसरे को मनाना, पेरैंट्स के लिए किसी पहाड़ पर चढ़ने से कम नहीं होता. लेकिन फिर भी स्थिति को आप थोड़ाबहुत संभाल सकते हैं. यदि आप देख रहे हैं कि बच्चों के बीच लगातार कंपीटिशन बना रहता है तो इस के कारण को जानें. पेरैंट्स के एक बच्चे को कम अटैंशन देने की वजह से उस बच्चे में आत्मविश्वास कम हो सकता है. जब आप कारण का पता लगा कर उसे दूर कर देंगे तो बच्चों के बीच कंपीटिशन अपनेआप खत्म हो जाएगा. बच्चों को उन के पसंद के काम में बिजी रखें. उन के साथ बैठें, बातें करें. हंसीमजाक करें. उन की पसंद का खाना, स्नैक्स आदि उन्हें देंगी तो वे दोनों खुश रहेंगे और आपस में लड़ने झगड़ने का उन्हें वक्त ही नहीं मिलेगा.

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मैं पढ़ाई करना चाहती हूं लेकिन मेरे पिताजी शादी कराना चाहते हैं, क्या करूं?

सवाल

मैं 21 साल की हूं और पढ़ाई में बहुत अच्छी हूं. मुझे सरकारी इम्तिहान पास कर के अफसर बनना है. मैं उस के लिए खूब मेहनत भी कर रही हूं, पर मेरे पिता मेरी शादी करा कर अपनी जिम्मेदारी से छुटकारा पा लेना चाहते हैं. वे समझते ही नहीं हैं कि कैरियर बनने के बाद भी मेरी शादी हो सकती है. मैं क्या करूं?

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जवाब

आप के पिता की चिंता अपनी जगह उतनी ही ठीक है, जितनी कि खुद के कैरियर के लिए आप की अपनी दलीलें हैं.

आप उन से एक तयशुदा समय मांग लें कि इतने साल बाद नौकरी नहीं लगी तो शादी कर लूंगी. साथ ही, उन्हें यह एहसास कराती रहें कि लड़कियों की पढ़ाईलिखाई अच्छी हो तो घरवर अच्छा मिल जाता है और बुरे समय में नौकरी ही सहारा होती है.

अगर सरकारी नौकरी मिल जाए तो बुरा समय भी आने से डरता है. वे न मानें, तो आप भी अपनी जिद पर अड़ी रहें.

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ऑनलाइन क्लास से लिखने की आदत छूट गई है, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 12वीं क्लास का छात्र हूं. कोरोना के चलते इस बार स्कूल तो बिलकुल ठप हो गया है. औनलाइन क्लास तो होती है, पर उस से लिखने की आदत बिलकुल छूट गई है. अगर कल को बोर्ड के इम्तिहान होंगे तो उन में लिखना तो पड़ेगा न. इसी बात को सोचसोच कर मैं तनाव में रहता हूं. मु झे सही
सलाह दें.

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जवाब

यह आप की ही नहीं, बल्कि करोड़ों छात्रों की समस्या है कि कोरोना के चलते पढ़ाईलिखाई डगमगा गई है. आप औनलाइन पढ़ाई के बाद बचे वक्त में लिखने की प्रैक्टिस करते रहें. इस से इम्तिहान में लिखने की परेशानी नहीं आएगी.

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मेरी सासू मां सोने पर भी पाबंदियां लगाती है, मैं क्या करूं?

सवाल
मैं 25 वर्षीय महिला हूं. हाल ही में शादी हुई है. पति घर की इकलौती संतान हैं और सरकारी बैंक में कार्यरत हैं. घर साधनसंपन्न है. पर सब से बड़ी दिक्कत सासूमां को ले कर है. उन्हें मेरा आधुनिक कपड़े पहनना, टीवी देखना, मोबाइल पर बातें करना और यहां तक कि सोने तक पर पाबंदियां लगाना मुझे बहुत अखरता है. बताएं मैं क्या करूं?

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जवाब
आप घर की इकलौती बहू हैं तो जाहिर है आगे चल कर आप को बड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी. यह बात आप की सासूमां सम झती होंगी, इसलिए वे चाहती होंगी कि आप जल्दी अपनी जिम्मेदारी सम झ कर घर संभाल लें. बेहतर होगा कि ससुराल में सब को विश्वास में लेने की कोशिश की जाए. सासूमां को मां समान सम झेंगी, इज्जत देंगी तो जल्द ही वे भी आप से घुलमिल जाएंगी और तब वे खुद ही आप को आधुनिक कपड़े पहनने को प्रेरित कर सकती हैं.

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घर का कामकाज निबटा कर टीवी देखने पर सासूमां को भी आपत्ति नहीं होगी. बेहतर यही होगा कि आप सासूमां के साथ अधिक से अधिक रहें, साथ शौपिंग करने जाएं, घर की जिम्मेदारियों को समझें, फिर देखिएगा आप दोनों एकदूसरे की पर्याय बन जाएंगी.

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नानाजी की मौत से बहुत दुखी हूं, मैं क्या करूं?

सवाल

कुछ महीने पहले मेरे नानाजी गुजर गए. वे मुझे बहुत मानते थे. उन्होंने मुझे कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं होने दी. उन के बगैर मेरा मन बहुत दुखी रहता है. मैं क्या करूं?

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जवाब

जीनामरना तो जिंदगी का दस्तूर है. आज नानाजी गए हैं, कल को और लोग भी जाएंगे. आप नानाजी की मौत को सहजता से स्वीकार करें.

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मैंने पैतृक संपत्ति में से अपना हक मांगा तो लोग मुझे लालची समझ रहे हैं, क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 55 वर्ष है. मायका मेरा संपन्न है. 2 भाई हैंदोनों बहुत अच्छा कमा रहे हैंअपने अलगअलग घरों में रहते हैं. मम्मीपापा दोनों अपनी पैतृक कोठी में रहते थे. दोनों की पिछले वर्ष मृत्यु होने के बाद उस पैतृक कोठी को बेचने की बात उठी.  मैंने उस में अपना हिस्सा मांगा क्योंकि मेरे पति की कोई खास कमाई नहीं है. भाइयों के पास धनदौलतजमीनजायदाद की कमी नहीं है. इसलिए पैतृक संपत्ति में से मैं ने अपना हक मांगा. लेकिन दोनों भाइयों के मुंह बन गए. रिश्तेदारी में मुझे लालची औरत समझा जा रहा है. क्या मैं ने अपना हक मांग कर कोई गलत काम किया है. मुझे अपराधबोधी बनाया जा रहा है. मैं मानसिक यंत्रणा से गुजर रही हूं. बताइएक्या मैं इस से पीछे हट जाऊंअपना हक न लूं?

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जवाब

यह अफसोस की बात है कि हमारे समाज में पैतृक संपत्ति में अपना बराबर का हक मांगने वाली लड़कियों की समाज में लालची स्त्री की छवि बनती हैन कि अपने हक के लिए जागरूक लड़की की. मतलब लड़की सिर्फ अपने हिस्से के हक को मांगने भर से भी लालचीतेजतर्रार और विद्रोही मान ली जाती है जबकि भाई अपनी बहन के आर्थिक हक को मारने के बाद भी लालची नहीं माने जाते. अकसर ही बहनों का हक छीनने का न तो भाइयों को खुद ही कोई अपराधबोध होता है और न ही परिवाररिश्तेदार या समाज ही उन्हें ऐसा महसूस कराने की कोशिश करते हैं. लेकिन यदि संपत्ति में अपना हिस्सा लेने के कारण भाइयों से संबंध खत्म या खराब हो जाएं तो परिवाररिश्तेदार और समाज के लोग अकसर ही इस बात के लिए बहनों को और भी ज्यादा अपराधबोध में डालने की भरपूर कोशिश करते हैं.

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मायके से संबंध खराब होने और रिश्तेदारों में छवि बिगड़ने के डर के चलते ही हिंदू उत्तराधिकार कानून बनने के 13 सालों बाद भी ज्यादातर लड़कियां पैतृक संपत्ति में अपना हक नहीं ले पा रही हैं. समय के साथ लड़कों की सोच में बदलाव होगासो होगा लेकिन इस की पहल लड़कियों को ही करनी होगी क्योंकि खुद चल कर कोई उन का हक देने नहीं आएगा. साथ ही यदि मातापिता बचपन से ही सिर्फ बेटों को ज्यादा अहमियत न दें और लड़कियों को अकसर ही भाइयों की खुशी के लिए कुछ न कुछ त्याग करने को न कहें तो बेटे भी संपत्ति के बंटवारे को बहुत ही सहजता से लेंगे. लेकिन तब तक महिलाओं को मायके से संबंध खराब होने के डर से अपने आर्थिक हकों को नहीं छोड़ना चाहिए. जो संबंध सिर्फ संपत्ति के देने और न देने से ही कमजोर या मजबूत होता हो उस संबंध के खोखलेपन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

बहरहालआप अपराधबोध से ग्रस्त न हों और अपना हक लेने में संकोच न करें.

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मेरा 13 साल का बेटा घर पर बैठा-बैठा मोटापे का शिकार हो रहा है, क्या करूं?

सवाल

मैं 32 वर्षीय गृहिणी हूं. मेरी समस्या मेरे बेटे को ले कर है. कोरोना के कारण कई परेशानियां आईं. उन में से एक परेशानी यह है कि मेरा 13 साल का बेटा घर पर बैठाबैठा मोटापे का शिकार हो रहा है. मैं अपने इकलौते बेटे की हैल्थ को ले कर बहुत चिंतित हूं. समझ नहीं आ रहा, क्या करूं?

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जवाब

कोरोना के कारण लाइफस्टाइल एकदम से बदल गया. एक परेशानी जो देखने में आ रही है वह है बच्चों में मोटापा. हैल्दी खाना न खाने, बाहर खेलने न जाने और एक्स्ट्रा एक्टिविटी न करने की वजह से बच्चे बड़ी तेजी से मोटापे का शिकार हो रहे हैं. लेकिन आप ज्यादा टैंशन मत लीजिए. सब से पहले तो दिनभर का रूटीन और शैड्यूल फिक्स करें. बच्चा ही नहीं,  बल्कि आप सब भी उस रूटीन को फौलो करें. रूटीन में थोड़ा समय फिजिकल एक्टिविटी के लिए भी रखें. बेटे के खाने पर नजर रखें. अनहैल्दी चीजें घर पर रखें ही नहीं. बच्चों को स्नैक्स पसंद हैं तो घर पर ही बनाएं. तलने के बजाय बेक करें. आटा नूडल्स बनाएं. पास्ता में ज्यादा से ज्यादा सब्जियां डालें. स्प्राउट्स चाट बना कर दें. बच्चे मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम खेलने में मस्त रहते हैं तो सम झदारी से उन्हें म्यूजिक चला कर डांस करने को कहें.

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