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Readers Problem : मैं 25 साल की लड़की हूं. मेरा एक बौयफ्रैंड है.

Readers Problem-

सवाल : मैं 25 साल की लड़की हूं. मेरा एक बौयफ्रैंड है और उस की उम्र 30 साल है. हम दोनों ने खूब हमबिस्तरी की है. पर अब मुझे  लगता है कि वह लड़का एक और लड़की के साथ डेट कर रहा है और मेरी तरह उसे भी शादी के सपने दिखा रहा है. जब मैं इस बारे में उस से बात करती हूं तो वह एकदम मुकर जाता है कि यह सब मेरे मन का वह है, जबकि मुझे  पता है कि वह उस लड़की के साथ कब और कहां होता है. मुझे  बस एक बार क्लियर करना है कि वह असल में चाहता क्या है, ताकि मैं अपने भविष्य को ले कर कोई फैसला कर सकूं. मुझे अपने कैरियर पर फोकस करना है और अपनी नौकरी पर भी ध्यान देना है. मेरे घर वाले जल्द ही मेरी शादी कर देना चाहते हैं और मेरे लिए यह जानना जरूरी है कि वह लड़का आखिर चाहता क्या है? मैं क्या करूं?

जवाब : अब आप को सिवा रोनेकलपने के कुछ नहीं करना है. सीधी सी बात यह है कि अब आप के बौयफ्रैंड का मन आप से भर गया है. यह खूब हमबिस्तरी करने का साइड इफैक्ट है. उस ने शादी का वादा किया था, कोई स्टैंप पेपर पर लिखापढ़ी नहीं की थी जो आप उस पर कोई क्लेम कर सकें.

हो यही सकता है कि आप एक बार खुल कर बौयफ्रैंड से बात करें कि वह आखिर चाहता क्या है. अगर ब्रेकअप चाहता है तो आप जबरदस्ती उस के गले नहीं पड़ी रह सकतीं.

बात न बने तो बेहतर होगा कि अपना रास्ता अलग कर लें और पढ़ाईलिखाई व कैरियर पर फोकस करें. और इस बार कोई ऐसा बौयफ्रैंड ढूंढ़ें जो आम चूसने के बाद गुठली फेंकने वाला न हो.

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सवाल : मैं 21 साल की हूं और उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहती हूं. मैं ने अंगरेजी विषय में ग्रेजुएशन किया है और यहां के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हूं. पर हमारे यहां एक दिक्कत है कि बच्चे अंगरेजी विषय से बहुत ज्यादा डरते हैं या फिर झिझकते हैं कि कैसे अंगरेजी में बोलें या व्याकरण को समझें.

ऐसा नहीं है कि बच्चे इस भाषा को सीखना नहीं चाहते हैं, पर उन में एक डर घर कर गया है कि गरीब का बच्चा अंगरेजी कैसे बोल और पढ़ सकता है. मुझे  लगता है कि यह कमोबेश हर देहाती बच्चे की समस्या है. हमें ऐसा क्या करना चाहिए कि उन के मन से अंगरेजी का खौफ निकल जाए?

जवाब :  अब वह दौर जा रहा है जब यह कहा जाता था कि गरीब का बच्चा अंगरेजी नहीं पढ़ सकता या यह नहीं कर सकता या कि वह नहीं कर सकता. पढ़ने के लिए एकलौती चीज जज्बा चाहिए. चूंकि अंगरेजी हमारी मातृभाषा नहीं है, इसलिए उसे बोलने में झिझक  होती है. दूसरे गांवों में अंगरेजी बोलने का माहौल नहीं रहता.

लेकिन आप जब अंगरेजी की ट्यूशन पढ़ाती ही हैं तो कोई खास दिक्कत पेश नहीं आनी चाहिए. बच्चों को रोज 2 घंटे अंगरेजी बोलने की प्रैक्टिस कराइए. बच्चों को अंगरेजी भाषा में प्रकाशित होने वाली मैगजीन ‘चंपक’ शहर से नियमित मंगा कर दें और उन्हें उस की कहानिया बोल कर पढ़ने को कहें. इस से उन की अंगरेजी सुधरेगी, क्योंकि ‘चंपक’ की अंगरेजी बहुत सरल है. Readers Problem

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Readers Problem: सच्ची सलाह-मुझे शक है कि मेरी गर्लफ्रैंड झूठ बोल रही है

Readers Problem-

सवाल : मैं 21 साल का लड़का हूं और हरियाणा में अंबाला शहर में रहता हूं. मेरी एक गर्लफ्रैंड है जो 19 साल की है. एक दिन मैं ने उसे एक लड़के के साथ देखा, तो उस ने बताया कि वह उस का कजिन है, जबकि उस लड़के की इमेज इलाके में अच्छी नहीं है. वह आएदिन किसी न किसी लड़की को अपनी बाइक पर घुमाता दिख जाता है.

मुझे शक हो रहा है कि मेरी गर्लफ्रैंड झूठ बोल रही है. मेरे बारबार उस लड़के के बारे में पूछने पर वह बात को टाल जाती है. इस बात से मुझे तनाव रहने लगा है. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब: गर्लफ्रैंड को किसी और के साथ बाइक पर घूमते देख कर किसी भी लड़के का दिमाग घूम जाना कुदरती बात है. लेकिन यह भी सोचें कि प्यार या दोस्ती का मतलब दूसरे की जिंदगी पर हक जमाना तो नहीं होता. इस बात के कोई खास माने नहीं कि आप की गर्लफ्रैंड झूठ बोल रही है या सच. अगर वह झूठ बोल रही है तो आप दोनों के प्यार, दोस्ती और विश्वास में कोई कमी है. इसे दूर करने के जतन करें.

फिलहाल सब्र से काम लें और इस बाबत ज्यादा पूछताछ उस से न करें.

उसे ही पहल करने दें. लेकिन मन ही मन किसी भी हालात के लिए तैयार रहें और अपना ध्यान पढ़ाई व कैरियर पर लगाएं.

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Readers Problem: सच्ची सलाह -जीवन और रिश्तों के सवाल

Readers Problem –

सवाल :  मैं 21 साल की लड़की हूं. मेरा एक बौयफ्रैंड है और उस की उम्र 24 साल है. हम दोनों ने खूब हमबिस्तरी की है. पर अब मुझे लगता है कि वह लड़का मेरे लायक नहीं है. इस की वजह यह है कि वह शादी के नाम पर चुप हो जाता है और जब कभी बोलता भी है तो कहता है कि अभी वह शादी करने के मूड में नहीं है.

उस से दूर होने की वजह यह भी है कि मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली जाना चाहती हूं और वह इस में अड़ंगा लगा रहा है. उसे लगता है कि अगर मैं दिल्ली गई तो किसी और के चक्कर में उसे भूल जाऊंगी. इतना ही नहीं, वह धमकी दे रहा है कि अगर मैं दिल्ली गई तो वह सब को हमारे बारे में बता देगा. मुझे  अब उस से डर लगने लगा है. मैं क्या करूं?

जवाब : आप का आशिक अब अपनी पर उतारू हो आया है, इसलिए उसे उस की ही जबान में समझाएं कि आप कोई उस की गुलाम या रखैल नहीं हैं. कई बार हमबिस्तरी कर लेने का यह मतलब नहीं कि वह आप को बीवी समझाने लगे. उलटे वह तो आप की जवानी के मजे लूटने के बाद शादी ही नहीं करना चाहता. जाहिर है कि उस की नीयत में खोट है और वह सरासर आप को ब्लैकमेल कर रहा है.

इस से डरें नहीं, बल्कि राज खोलने की धमकी का डट कर मुकाबला करें और उसे धमकी दें कि आप इस की रिपोर्ट पुलिस में करने से हिचकिचाएंगी नहीं. मुमकिन यह भी है इस से वह और आक्रामक हो जाए, इसलिए संभल कर रहें और धीरेधीरे उस से दूरी बनाते दिल्ली जा कर पढ़ाई पर फोकस करें.


सवाल : मेरी उम्र 39 साल है. मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश में रहता हूं. मेरी शादी को 13 साल हो चुके हैं. मेरी पत्नी बहुत ही सरल स्वभाव की है और मां थोड़ी सख्तमिजाज. मेरी मां की सख्ती की वजह यह भी है कि मेरे कोई औलाद नहीं है और मेरी मां को लगता है कि उन की बहू बांझ है. पर डाक्टरी रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं है. बच्चा न होने की कोई ठोस वजह डाक्टर ने नहीं बताई है.

पर इस सब में हमारे घर में हमेशा तनाव का माहौल रहता है. मेरी पत्नी को अपनी सास की जलीकटी सुननी पड़ती है. हम दोनों पतिपत्नी ऐसा क्या करें कि यह क्लेश खत्म हो जाए?

जवाब : इस क्लेश की असल वजह आप की मां हैं, जिस से छुटकारा पाना आसान काम नहीं. कई बार शादी के सालोंसाल बाद भी बच्चा नहीं होता, जबकि पतिपत्नी दोनों में कोई खोट नहीं होता. यह एक चांस की बात है, इसलिए आप डाक्टर के मशवरे के मुताबिक चलें.

मां को तो बस समझाया ही जा सकता है, जो अपने दौर में जीते हुए सोच रही हैं कि इस साल शादी हुई और दूसरे साल ही घर में किलकारी गूंजी.

पत्नी को भी कहें कि वह जितना हो सके सब्र से काम ले. इस पर भी बात न बने तो मां को भाई या बहन के यहां कुछ दिन के लिए बीचबीच में छोड़ दिया करें.


सवाल :  मेरी उम्र 21 साल है और मैं राजस्थान के सीकर शहर में रहती हूं. कालेज में मेरी एक सहेली है जो बहुत से लड़कों से दोस्ती बनाए हुए है. दोस्ती क्या वह उन के साथ घूमतीफिरती भी है. एक दिन उस ने मुझ से कहा कि उस का दोस्त मेरे चक्कर मे है और मुझे  फिल्म दिखाना चाहता है.

मैं ने मना किया तो बोली कि तू तो दकियानूसी सोच की है. लड़के के साथ डेट पर जाने से डरती है, जबकि यही उम्र है मजे करने की. कई बार तो मुझे  भी खुद पर शक होता है कि क्या मैं वाकई इतनी गई गुजरी हूं कि लड़के के साथ डेट पर जाने के नाम से ही मेरे हाथपैर फूल जाते हैं, पर फिर लगता है कि मैं जैसी हूं वैसी ही ठीक हूं. मुझे कुछ समझा  नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं? मैं कैसे इन हालात को हैंडल करूं?

जवाब : आप जैसी हैं वैसी ही ठीक हैं, जबरदस्ती अपनेआप को बदलने की कोशिश न करें. लड़कों से दोस्ती करना या उन के साथ डेट पर जाना कोई गुनाह भी नहीं. जब मन किसी लड़के से दोस्ती करने का हो तो बेहिचक करें, लेकिन अगर आप संस्कारों और सख्त परवरिश के दबाव में ऐसा करने से अपनेआप को रोकती हैं तो यह भी खुद के साथ ज्यादती ही है, इसलिए सोचसमझ कर फैसला लें और लड़कों में भी दिलचस्पी लेना शुरू करें.

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Special Story : प्यार किया तो परिवार छोड़ो

Special Story. राहुल और नेहा कालेज में साथ पढ़ते थे. दोनों ने नौकरी लगने के बाद शादी कर ली. राहुल के मातापिता इस शादी के खिलाफ थे, लेकिन बेटे की जिद के आगे झुक गए. शादी के बाद नेहा ससुराल में रहने लगी. मगर वहां हर छोटी बात पर उस की तुलना उस की जेठानी से होने लगी.

दरअसल, राहुल के बड़े भाई की शादी उस के मातापिता की पसंद की लड़की से हुई थी, जो दहेज भी खूब लाई थी. ऐसे में नेहा को अपनी ससुराल में खूब तानेउलाहने मिलने लगे. शादी के बाद नेहा नौकरी पर भी जाती थी, मगर सुबह जल्दी उठ कर उसे जेठानी के साथ पूरे घर का काम खत्म करना होता था और फिर भी वह ढेर सारा तनाव ले कर औफिस पहुंचती थी.

शाम को थकीहारी नेहा घर लौटती तो सास की वही जलीकटी कान में गरम सीसे सी घुसती, ‘‘हम ने तो छोटी बहू लाने के लिए बड़े सपने देखे थे. कितने अच्छेअच्छे रिश्ते आ रहे थे राहुल के लिए. इसे तो कुछ करनाधरना ही नहीं आता. अगर हमारी पसंद की लड़की आती तो ऐसा नहीं होता… अपने घर से क्या लाई है? मुंह उठाए खाली हाथ चली आई. मेरा बेटा तो फंस गया.’’

कुछ सालों बाद हालात इतने खराब हो गए कि राहुल को अलग घर लेना पड़ा. अलग रहने के बाद रोज का टकराव खत्म हो गया. नेहा भी अपने औफिस शांति से जाने लगी.

यह कहानी केवल राहुल और नेहा की नहीं है, बल्कि भारत के ऐसे हजारों जोड़ों की है जिन्होंने लव मैरिज की है.

भारत में प्रेम विवाह आज भी केवल 2 लोगों का नहीं, बल्कि 2 विचारधाराओं का टकराव है. एक ओर नई पीढ़ी है, जो अपने जीवनसाथी का चुनाव खुद करना चाहती है, तो दूसरी ओर पारंपरिक परिवार व्यवस्था है, जो शादी को केवल 2 लोगों का नहीं, बल्कि 2 परिवारों का मिलन मानती है. यही कारण है कि प्रेम विवाह करने वाले हजारों नौजवान शादी के बाद ऐसे तनाव का सामना करते हैं, जिस की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होती है.

प्रेम विवाह और बहू पर पहला हमला

भारतीय परिवारों में प्रेम विवाह के बाद सब से ज्यादा दबाव लड़की पर पड़ता है. लड़के के मातापिता और रिश्तेदार अकसर यह मानने को तैयार नहीं होते कि उन के बेटे ने उन की इच्छा के खिलाफ अपनी अपनी पसंद से किसी लड़की को चुना है. वे लड़की को ताना मारते हैं कि इस ने हमारे बेटे को फंसा लिया… दानदहेज तो कुछ लाई नहीं… आवारा है, मेरा लड़का फंस गया…

ये केवल शब्द नहीं होते, बल्कि ये धीरेधीरे लड़की को सताने का रूप ले लेते हैं. लड़की को हर छोटीबड़ी बात पर यह एहसास कराया जाता है कि वह इस परिवार में जबरन घुसी है.

इस का नतीजा यह होता है कि शादी के शुरुआती सालों में ही पतिपत्नी का जीवन तनाव से भरा हो जाता है. कई बार पति अपनी पत्नी और मातापिता के बीच संतुलन नहीं बना पाता है. घर 2 गुटों में बंट जाता है और सब से ज्यादा नुकसान उस लड़की का होता है, जिस ने केवल अपने पसंद के इनसान से शादी करने का हौसला दिखाया था.

जब प्रेम विवाह अपराध जैसा लगे

आज भी देश के अनेक हिस्सों में प्रेम विवाह को परिवार की इज्जत से जोड़ कर देखा जाता है. लड़की या लड़का हर अपनी पसंद से शादी कर ले तो इसे मातापिता की हार सम?ा लिया जाता है. अखबार और टीवी चैनल ऐसे समाचारों से भरे पड़े हैं, जिन में प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों को सामाजिक बहिष्कार, धमकियों, हिंसा और यहां तक कि औनर किलिंग का सामना करना पड़ा है. अनेक मामलों में लड़की को ससुराल में लगातार सताया जाता है, क्योंकि उसे परिवार की पसंद के बजाय बेटे की पसंद माना जाता है.

संयुक्त परिवार की असली चुनौती

प्रेम विवाह की ज्यादातर समस्याओं का संबंध केवल प्रेम विवाह से नहीं, बल्कि विवाह के बाद की रहने की व्यवस्था से भी है. भारत में अभी भी बड़ी तादाद में नौजवान शादी के बाद अपने मातापिता के साथ ही रहते हैं. यह व्यवस्था अरेंज मैरिज में तो किसी तरह चल जाती है, क्योंकि दोनों परिवारों की मरजी और रजामंदी उस शादी से जुड़ी होती है, लेकिन प्रेम विवाह में अकसर टकराव रहता है.

पश्चिमी देशों में नहीं होता ऐसा

पश्चिमी देशों में भी परिवार होते हैं, मातापिता होते हैं और पीढि़यों के बीच मतभेद भी होते हैं. लेकिन वहां शादी के बाद एक खास फर्क दिखाई देता है. पश्चिमी देशों में यहां की तरह अपने जवान बच्चों के लिए दूल्हा या दुलहन मातापिता नहीं ढूंढ़ते, बल्कि वहां ज्यादातर प्रेम विवाह ही होते हैं. कालेज में, औफिस में लड़कालड़की एकदूसरे को पसंद कर लेते हैं, डेट करते हैं और बात बन गई तो शादी कर लेते हैं. शादी के बाद ज्यादातर जोड़े अपना घर बसाते हैं. वे अपने मातापिता से प्यार और इज्जत का रिश्ता बनाए रखते हैं, लेकिन उन की रोजमर्रा की घरेलू जिंदगी अलग होती है.

इस व्यवस्था के चलते सासबहू, बहूननद या दामादससुर के बीच होने वाले दैनिक टकराव का डर बहुत कम हो जाता है. नया शादीशुदा जोड़ा अपनी शर्तों पर जिंदगी शुरू करता है और अपने रिश्ते को विकसित होने का समय देता है.

इस का मतलब यह नहीं है कि पश्चिमी समाज में कोई समस्या नहीं है. वहां तलाक की दर ज्यादा है और दूसरी तमाम सामाजिक चुनौतियां भी हैं. लेकिन प्रेम विवाह को ले कर पारिवारिक दुश्मनी काफी कम दिखाई देती है, क्योंकि शादी के बाद निजी आजादी को अहमियत दी जाती है. वहां दहेज हत्याएं नहीं होती हैं, बहू को जला कर नहीं मार डालते हैं, उस को फांसी पर नहीं लटका देते हैं या उसे समाज के सामने बेइज्जत नहीं करते हैं.

अलग रहना है हल

भारतीय संस्कृति में मातापिता से अलग रहने की बात अकसर लालच या काहिली से जोड़ दी जाती है. लेकिन हर  बार ऐसा नहीं होता है. अगर 2 पीढि़यों के विचारों में लगातार टकराव हो रहा हो, अगर घर का माहौल जहरीला बन चुका हो, अगर पतिपत्नी का रिश्ता लगातार दबाव में हो, तो अलग रहना कई बार रिश्तों को बचाने का अच्छा जरीया बन सकता है.

अलग रहने का मतलब मातापिता को छोड़ देना नहीं है. इस का मतलब केवल इतना है कि हर परिवार को अपनी निजता और आजादी मिले. कई परिवारों में देखा गया है कि अलग घर में रहने के बाद बहू और सास के संबंध पहले से बेहतर हो जाते हैं, क्योंकि रोजरोज की दखलअंदाजी खत्म हो जाती है.

कुछ बातों पर गौर कर लें

आज प्रेम विवाह करने वाले नौजवानों के सामने सब से बड़ा मुद्दा केवल प्यार नहीं, बल्कि माली और सामाजिक समस्याओं का भी है, इसलिए शादी से पहले कुछ सवालों पर विचार कर लेना जरूरी है, जैसे :

* क्या लड़का और लड़की दोनों अपने पैरों पर खड़े हैं?

* क्या दोनों नौकरी या किसी कारोबार से अपना घर चला सकते हैं?

* क्या वे किराए का घर लेने या अलग रहने के हालात में हैं?

* क्या वे परिवार के विरोध का मानसिक दबाव झेल सकते हैं?

* क्या वे दोनों एकदूसरे के प्रति इतने प्रतिबद्ध हैं कि मुश्किल समय में साथ खड़े रह सकें?

केवल प्यार की बुनियाद पर लिया गया फैसला कई बार जिंदगी की चुनौतियों के सामने कमजोर पड़ जाता है, इसलिए प्रेम विवाह करने से पहले भावनाओं के साथसाथ माली और सामाजिक तैयारी भी जरूरी है.

मांबाप को भी बदलना होगा

सारी जिम्मेदारी केवल नौजवान पीढ़ी पर नहीं डाली जा सकती है. मातापिता को भी यह सम?ाना होगा कि बच्चे कोई जायदाद नहीं हैं, जिन की जिंदगी के हर फैसले पर उन का आखिरी हक हो. अगर बेटा या बेटी पढ़लिख कर अपने जीवनसाथी का चुनाव करता है, तो उसे अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. जो बहू या दामाद परिवार में आया है, उसे इज्जत मिलनी चाहिए, फिर चाहे शादी लव मैरिज हो या पारंपरिक तरीके से की गई हो.

आखिरकार किसी भी शादी की कामयाबी इस बात से तय नहीं होती कि रिश्ता किस ने तय किया था. उस की कामयाबी इस बात से तय होती है कि उस में प्यार, इज्जत और विश्वास कितना है.

प्रेम विवाह न तो सभी समस्याओं का समाधान है और न ही सभी समस्याओं की जड़. लेकिन एक सच बारबार सामने आता है कि प्रेम विवाह करने वाले अनेक जोड़े पारिवारिक टकराव का सामना करते हैं, खासकर तब जब वे ऐसे घर में रहते हैं जहां उन्हें पूरी स्वीकृति नहीं मिलती है, इसलिए आज के नौजवानों को प्रेम विवाह करने से पहले केवल दिल की नहीं, बल्कि दिमाग की भी सुननी चाहिए. अपनी जेब पर भी नजर डाल लेनी चाहिए.

नएनवेले जोड़े किराए के घर में रह कर भी अपनी नई जिंदगी शुरू कर सकते हैं. रिश्तों की कामयाबी की बुनियाद मकान का मालिक होना नहीं, बल्कि आपसी इज्जत, आर्थिक सम?ादारी और पारिवारिक सहयोग होता है. जब आप किसी तीसरेचौथे शख्स की दखलअंदाजी के बिना एकदूसरे के साथ होते हैं और एकदूसरे को वक्त देते हैं, तो आप का आपसी रिश्ता, जो अभी नयानया बना है, जल्दी ही मजबूत होने लगता है. एकदूसरे पर विश्वास जमता है, जो लंबी और कामयाब शादीशुदा जिंदगी के लिए जरूरी है. आप अलग घर ले कर रहेंगे तो तनाव से दूर रहेंगे. खुश रहेंगे, जिम्मेदार बनेंगे और भविष्य की प्लानिंग बेहतर तरीके से कर पाएंगे. Special Story

Special Story : प्यार किया तो कमाना जरूरी

Special Story. लव मैरिज करने वालों को एक लाइन बहुत पसंद आती है कि ‘प्यार किया तो डरना क्या’. बात सही है, पर जब यह प्यार शादी में बदलता है तो यही लाइन कुछ इस तरह बदल जाती है कि प्यार किया है तो कमाना है.

होता यह है कि बहुत से जोड़े जब प्यार में होते हैं, तो अपने परिवार वालों से अलग, किसी अलग जगह पर रहने की ठान कर शादी कर लेते हैं, पर जब पेट भरने की बात आती है, तो उन के पास प्लान नाम की कोई चीज नहीं होती है.

समस्तीपुर के मनोज और प्रिया ने भी लवमैरिज की थी. मनोज की उम्र 23 साल थी और प्रिया की 21. चूंकि दोनों के घर वाले इस शादी के खिलाफ थे, तो उन्होंने दिल्ली आ कर अपनी जिंदगी की शुरुआत की.

शादी के पहले 6 महीने तो मनोज और प्रिया ने दिल्ली के उत्तम नगर में वन बैडरूम फ्लैट में जैसेतैसे गुजार दिए, फिर मनोज को अक्ल आई कि वह प्रिया को अपने भरोसे दिल्ली लाया था, तो अब उस के लिए ऐसी कमाई भी तो होनी चाहिए, जिस में महीने के महीने पैसा आता रहे, पर एक कड़वा सच यह भी था कि समाज की तरह प्रिया भी मनोज से ‘सैटल्ड’ होने की उम्मीद करने लगी थी.

वैसे भी हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 24 कहती है कि पति को पत्नी और बच्चों का भरणपोषण करना है. कमाई नहीं है तो कोर्ट भी तुम से ही सवाल करेगा.

पर जब पत्नी ही पति को उस की आमदनी के लिए कठघरे में खड़ा करने लगे, तो हालात और बुरे हो जाते हैं. ऐसा ही मनोज के साथ हुआ. प्रिया ने घर संभालने की बात कह कर रोजगार से पल्ला झाड़ लिया.

अब मनोज को अपने पिता का ताना याद आया, ‘‘बेटा, शादी तो कर रहा है, पर प्रिया को खिलाएगा क्या?’’

मनीज के पिता की बात में दम था कि किराया, राशन, मैडिकल… यह खर्च है पल्ले? इस का सीधा सा मतलब है कि ऐसे जोड़े के पास कुछ महीने का खर्च जेब में जरूर होना चाहिए.

यहां सवाल उठता है कि कितनी कमाई ठीक है? दिल्ली में 2 लोगों का बेसिक खर्च 20,000 से 25,000 रुपए महीना हो सकता है, ताकि छत और दो वक्त का खाना अफोर्ड हो सके.

मनोज इस मामले में थोड़ा सही रहा, क्योंकि वह मेहनती था और पढ़ालिखा भी था. वह घटाजोड़ में माहिर था तो जल्दी ही उस की एक अकाउंटैंट के यहां असिस्टैंट की नौकरी लग गई. तनख्वाह थी 18,000 रुपए महीना.

प्रिया को भी अक्ल आई

पहले तो प्रिया किसी भी तरह की नौकरी या दूसरे रोजगार से बचती रही, पर जब उन दोनों की बचत जीरो रहने लगी, तो उस ने भी अपनी गली के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया. बच्चे काफी आने लगे तो कमाई भी अच्छी होने लगी.

पत्नी जरूर करे कमाई

लव मैरिज हो या अरेंज मैरिज, लड़की के लिए कमाई कितनी जरूरी है? यह सवाल अब बहुत माने रखता है, क्योंकि पहले लड़कियों से उन के रोजगार के बारे लोग नहीं पूछते थे, पर अब पतिपत्नी का रिश्ता, कमाई के लिहाज से बराबरी का माना जाता है.

इस में लड़की के मन में ‘अपनी कमाई है’ तो ‘एहसान’ वाली फीलिंग नहीं आती है और वह घर से जुड़े फैसले लेने में भी अपनी राय देती है.

लड़की के रोजगार होने पर, मान लो कल को लड़के की जौब चली जाए या वह आंखें दिखाए, तो आप के पास पास औप्शन है. माली तौर पर कमजोर लड़की सब से ज्यादा दुख झेलती है. साथ ही वह अपने घर वालों को जवाब दे सकती है कि ‘वह कमा तो रही है, अपने पैरों पर खड़ी है’. यह सुन कर मांबाप का गुस्सा थोड़ा कम होता है.

साथ ही डबल इनकम होने से लवमैरिज की राह आसान हो जाती है. जब दोनों कमाते हैं, तो 5 साल का काम 2 साल में हो सकता है.

लव मैरिज करने से पहले के टिप्स

बहुत बार ऐसा होता कि शादी करने के समय लड़का और लड़की दोनों बेरोजगार होते हैं. तो क्या वे लवमैरिज न करें. जरूर करें, पर इस से पहले 6 महीने दोनों कोई अच्छा सा रोजगार ढूंढ़ें, फिर शादी करें. याद रखिए कि आप का प्यार 6 महीने इंतजार कर लेगा, पर उस की भूख नहीं करेगी.

अगर दोनों में से कोई एक कमाता है तो जो नहीं कमाता है वह घर संभाले, लेकिन साथ ही यह टारगेट सैट करो कि एक साल में दूसरा भी कमाने लगे.

कर्ज के जाल से बचें

बहुत बार लड़के अपने दोस्तों से उधार मांगते हैं या फिर लड़की अपने मायके वालों की शक्ल देखती है, पर कब तक उधार की जिंदगी जिएंगे. सब से बुरा दौर वह होता है जब किसी साहूकार से बहुत ज्यादा ब्याज पर पैसा लेना पड़ता है. इस से आपसी रिश्ते में खटास पैदा हो सकती है.

यहां से ब्लेम गेम शुरू हो जाता है कि ‘तेरे चक्कर में घर छोड़ा’, ‘तू ने कहा था संभाल लूंगा’. यहीं से भूखे पेट प्रेमी से पति बना बंदा भी विलेन लगता है.

Readers Problem: मेरी पत्नी घर से अक्सर बाहर रहती है, मैं क्या करूं?

Readers Problem: सवाल

मैं 28 साल का शादीशुदा मर्द हूं. मेरे 2 बच्चे हैं. पिछले कुछ समय से मेरी पत्नी के स्वभाव में बहुत ज्यादा बदलाव आया है. वह घर से अकसर बाहर रहती है और बेवजह की खरीदारी करती है.

मेरी आमदनी बहुत ज्यादा नहीं है और जब भी मैं उसे बाजार जाने से रोकता हूं, तो वह मुझे झिड़क देती है. वह कहती है कि टाइमपास के लिए वह बाजार जाती है.

इस तरह की फुजूल खरीदारी और मटरगश्ती को ले कर मैं उसे हर तरह से समझा कर हार गया हूं, पर वह टस से मस नहीं होती है. मैं क्या करूं?

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जवाब

लगता है कि आप की पत्नी को भी रईस औरतों जैसा चसका लग गया है. गैरजरूरी खरीदारी इन दिनों में नीम चढ़े करेले जैसी साबित हो रही है, क्योंकि महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है और आमदनी घटती जा रही है.

आप पत्नी को समझाएं कि जितनी चादर हो उतने ही पैर पसारे जाएं, जिस से आगे चल कर पैसों की किल्लत न हो. आप उस से प्यार से पेश आते हुए बात करें.

आप उसे अपने बच्चों के भविष्य का हवाला दें और ज्यादा से ज्यादा समय उस के साथ गुजारें. इस से उस के मन की बात बाहर आएगी, तभी यह समस्या सुलझेगी.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

 सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

 

Readers Problem: मेरा बौयफ्रैंड मुझे चीट कर रहा है

Readers Problem: मैं अपने बौयफ्रैंड से बहुत प्यार करती हूं, लेकिन हाल ही में उस की जिंदगी में एक और लड़की आ गई है. वह उस से ज्यादा बात करने लगा है और  दूरी बनाने लगा है. मैं अंदर से टूट रही हूं. मैं क्या करूं?

आप का टूटना स्वाभाविक है, क्योंकि यह सिर्फ किसी इंसान को खोने का डर नहीं, बल्कि अपनी जगह छिनते जाने का दर्द है. जब हम किसी से सच्चा प्यार करते हैं और अचानक महसूस होता है कि उस की जिंदगी में कोई और अहम होने लगा है तो आत्मसम्मान, सुरक्षा और भविष्य तीनों एकसाथ हिल जाते हैं. इस दर्द में खुद को कमजोर या दोषी ठहराना ठीक नहीं है.

 यह  जरूरी है कि प्यार में तीसरे व्यक्ति का आना संयोग नहीं, बल्कि संकेत होता है. यह संकेत इस बात का कि आप का बौयफ्रैंड या तो भ्रम में है या भावनात्मक रूप से स्पष्ट नहीं या फिर आप के रिश्ते को ले कर उतना गंभीर नहीं रहा. उस की दूरी आप की कमी का प्रमाण नहीं है. किसी और से ज्यादा बात करना और आप से कटते जाना उस के चुनाव हैं, आप की असफलता नहीं.

ऐसे समय में खुद को तोड़ कर, चुपचाप सब सह लेना प्रेम नहीं होता. शांत और स्पष्ट शब्दों में उस से बात करना जरूरी है आरोप नहीं, लेकिन सच्चाई के साथ. यह जानना आप का अधिकार है कि वह क्या चाहता है और आप उस के जीवन में कहां खड़ी हैं. अगर वह टालता है, भ्रम में रखता है या आप को ओवरथिंकिंग कह कर चुप कराना चाहता है तो यह भावनात्मक लापरवाही है.

सब से कठिन, लेकिन सब से जरूरी बात खुद को पकड़ कर रखना. जिस रिश्ते में आप रोज टूट रही हैं, वहां सिर्फ प्यार के नाम पर ठहरना धीरेधीरे आप को खो देगा. प्यार वह नहीं होता जिस में आप को बारबार अपनी अहमियत साबित करनी पड़े. अगर वह सच में आप का है तो वह आप को असुरक्षा में नहीं छोड़ेगा और अगर नहीं तो खुद को बचा कर निकलना हार नहीं, आत्मसम्मान की जीत है.

आप अभी दर्द में हैं, इसलिए साफ सोचना मुश्किल है लेकिन याद रखिए आप किसी की औप्शन बनने के लिए नहीं, बल्कि किसी की चौइस बनने के लायक हैं.

मैं 25 साल की युवती हूं और मेरा बौयफ्रैंड मुझ से शादी का वादा करता है, लेकिन जब भी मैं घरवालों से बात करने की बात करती हूं तो वह टाल देता है. वह कहता है कि अभी सही समय नहीं है. मुझे डर लगता है कि कहीं वह टाइम पास तो नहीं कर रहा. मुझे क्या फैसला लेना चाहिए.

हम आप की परेशानी समझ रहे हैं. भविष्य को ले कर अनिश्चिता होना बहुत चिंता देता है. केवल वादा करना और सच में कदम उठाना-दोनों अलग बातें हैं. आप को उन से साफसाफ पूछना चाहिए कि वे शादी के बारे में कब और कैसे आगे बढ़ना चाहते हैं. उन से एक तय समय पूछें और जानें कि वे क्या तैयारी कर रहे हैं.

अगर वे ईमानदारी से अपनी वजह बताते हैं और सच में कुछ कदम उठाने को तैयार हैं तो थोड़ा इंतजार करना ठीक हो सकता है. लेकिन अगर वे हर बार बहाना बनाते हैँ और कोई साफ जवाब नहीं देते तो आप को अपने आत्मसम्मान और भविष्य के बारे में सोचना चाहिए. किसी भी रिश्ते में साफ बात और सच्ची नीयत बहुत जरूरी होती है.   

Readers Problem: मेरा बॉयफ्रेंड दूसरी लड़कियों से भी बात करता है, क्या वह मुझे धोखा दे रहा है?

सवाल

मैं कालेज में पढ़ती हूं. मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती हूं. वह भी मुझ से प्यार करता है और हमारे बीच सबकुछ हो चुका है. पर वह लड़का दूसरी लड़कियों से भी बात करता है. क्या वह मुझे धोखा दे रहा है?

जवाब

शादी से पहले यह सबकुछ हो जाना खासतौर से लड़कियों के लिए ठीक बात नहीं है. दूसरी लड़कियों से बात करने का यह मतलब तो नहीं कि आप का प्रेमी अब आप से प्यार नहीं करता है. बेवजह के शक को दिल में जगह न बनाने दें और उस लड़के से खुल कर बात करें.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
सब्जेक्ट में लिखे…  सरस सलिल- व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

Readers Problem: मैं 6 फुट लंबा खूबसूरत नौजवान हूं, क्या मैं अपना करियर एक्टिंग में बना सकता हूं?

Readers Problem: सवाल-

मैं 21 साल का 6 फुट लंबा खूबसूरत नौजवान हूं. मेरे नैननक्श तीखे हैं और आसपास के लोग मुझे कहते हैं कि मैं फिल्मों में करियर बना सकता हूं.

मैं ने कभी लोगों के सामने ऐक्टिंग नहीं की है, लेकिन मैं सीखना जरूर चाहता हूं. क्या कोई संस्था ऐक्टिंग का कोर्स सिखाती है?

जवाब-

यह बात ‘नाच न जाने आंगन टेढ़ा’ सरीखी है. अगर तीखे नैननक्श और खूबसूरती ही फिल्मों में करियर के पैमाने या गारंटी होते तो हर चौथा आदमी फिल्म इंडस्ट्री में होता. लेकिन हकीकत यह है कि फिल्मों में जमने के लिए ऐक्टिंग का हुनर आना जरूरी है जो आप के मुताबिक आप में नहीं है, तो बेवजह वक्त बरबाद न करें और पढ़ाईलिखाई पर ध्यान दें.

ओम पुरी और कादर खान जैसे दर्जनों मामूली शक्लसूरत वाले ऐक्टर सिर्फ ऐक्टिंग के दम पर चले और विनोद मेहरा और राजकिरण सरीखे दर्जनों हीरो खूबसूरत और तीखे नैननक्श के होते हुए भी नहीं चल पाए, क्योंकि वे ऐक्टिंग में कमजोर थे.

अगर आप के पास मुकम्मल पैसा और वक्त हो तो पहले किसी नामी इंस्टीट्यूट से ऐक्टिंग का कोई कोर्स करें.

Sex Tips In Hindi: पार्टनर हो कामुक

Sex Tips In Hindi: किसी भी रिलेशनशिप में रजामंदी से फिजिकल होने में कोई बुराई नहीं है और हैल्दी सैक्स रिश्ते को और ज्यादा मजबूत करता है. पर अगर आप का पार्टनर कुछ ज्यादा ही कामुक है यानी उसे हर समय सैक्स की ही सूझती है, तो फिर कभीकभार यह समस्या भी बन जाती है.

काफी समय पहले टैलीविजन पर एक क्राइम शो आया था, जहां एक नौजवान अपनी कामुकता पर कंट्रोल नहीं कर पाता है. वह देह धंधे वालियों के भी पसीने छुड़ा देता है. अपनी कामुकता के चलते वह क्राइम करता है और एक देह धंधे वाली जब पुलिस को बताती है कि एक नौजवान उस के पास आ कर बड़ी देर तक बड़ी बेरहमी से सैक्स करता है, तो पुलिस को सूत्र मिलता है कि हो न हो जो क्राइम हुआ है, वह इसी नौजवान की करतूत है. होता भी यही है.

यह तो एक अपराधी की कामुकता का नमूना है. पर कभीकभार पतिपत्नी और प्रेमीप्रेमिका भी इसी कामुकता के भुक्तभोगी हो जाते हैं. राखी को शादी से पहले नहीं पता था कि उस में कामुकता कूटकूट कर भरी है. सुहागरात पर उस का पति मनोहर भी हैरान रह गया कि किस तरह इस बौराई औरत को संतुष्ट करे.

हालांकि, वह मन ही मन खुश भी हो रहा था कि उसे ऐसी बीवी मिली है, जो बिस्तर पर सिर्फ बिछती नहीं है, बल्कि पूरा मजा लेती है और एक तरह से उस की मर्दानगी को चैलेंज कर के सैक्स लाइफ का लैवल बढ़ा देती है.

पर अगर कोई पार्टनर अपनी कामुकता के चलते हिंसक हो जाता है, तो सैक्स का मजा बिगड़ जाता है.
दिवाकर जब अपनी गलफ्रैंड सीमा के साथ बिस्तर पर होता है, तो अपनी कामुकता को कंट्रोल नहीं कर पाता है.

सीमा को एक ही शिकायत रहती है कि दिवाकर उसे प्यार करने की जगह रौंदने पर उतारू हो जाता है. उसे यहांवहां काटता है, उस के नाजुक अंग को बेहरमी से मसलता है और सैक्स को बड़ा ही पीड़ादायक बना देता है, जबकि दिवाकर के लिए सैक्स का मतलब ही यही है.

तो फिर इस कामुकता पर कंट्रोल कैसे पाया जाए कि दोनों पार्टनर सैक्स सुख को अच्छे से भोग सकें? इन कुछ खास टिप्स को जरूर ध्यान में रखें :

* सब से पहले अपने पार्टनर से खुल कर इस बारे में बात करें. अगर आप के पार्टनर को पता होगा कि आप अपनी कामुकता को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं, तो वह कई तरह से इस पर काबू पाने में आप की मदद कर सकती है या कर सकता है.

* अपने कामुक विचारों पर काबू करने की कोशिश करें. अपना ध्यान किसी दूसरी जगह लगाएं और हर समय सैक्स के बारे में सोचने से बचें.

* खुद को खाली न रहने दें. अपने दिनभर के काम को पहले से प्लान कर के रखें. अगर दोनों पार्टनर वर्क फ्रौम होम कर रहे हैं, साथ रहने से कामुकता भड़क सकती है, लिहाजा, औफिस के काम पर ज्यादा फोकस करें. टाइमपास के दूसरे तरीके अपनाएं, जैसे साथ बैठ कर कोई फिल्म देख लें या कोई किताब पढ़ कर उस पर चर्चा करें.

* कामुकता बढ़ाने वाली चीजों से दूर रहें. पोर्न फिल्म न देखें. इस के उलट आप अपनी कसरत पर ध्यान दें. अगर घर पर जिम के उपकरण हैं, तो आप वर्कआउट कर सकते हैं.

* कभीकभार कामुकता इस कदर भारी पड़ जाती है कि बिना प्रोटैक्शन के किया गया सैक्स पार्टनर को प्रैग्नैंट कर सकता है. पर क्या आप परिवार को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं? अगर नहीं, तो ऐसी कामुकता को खुद पर बिलकुल न हावी होने दें.

याद रखिए, रोमांस और प्यार का मतलब सिर्फ सैक्स करना ही नहीं होता है. पार्टनर को और भी बहुत से तरीकों से रि झाया जा सकता है, उस का दिल जीता जा सकता है, तो एकदूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और कामुकता को दूर भगाएं. Sex Tips In Hindi

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