क्या अबौर्शन के बाद कंसीव करने में प्रौब्लम आती है?

सवाल

मैं शादी के 10 महीने बाद ही प्रैग्नैंट हो गई थी. उम्र 28 वर्ष है. कुछ मैडिकल कौम्प्लिकेशंस की वजह से मुझे अबौर्शन कराना पड़ा. सुना है कि अबौर्शन के बाद कंसीव करने में प्रौब्लम आती है. मन में इस बात का डर बैठ गया है. मुझे बताएं क्या यह सही है?

जवाब

अगर अबौर्शन अच्छी गाइनोकोलौजिस्ट की देखरेख में कराया गया है तो परेशानी की बात नहीं है. वैसे, सब की बौडी अलग होती है. बेबी कंसीव करना उसी पर निर्भर करता है. बस, ध्यान रखें कि अबौर्शन के बाद महिला का शरीर काफी कमजोर हो जाता है, ऐसी स्थिति में ऐक्सरसाइज, बहुत हैवी काम, फिजिकल इंटिमेसी जैसी चीजों से परहेज करें.

मिसकैरेज की जो भी वजह रही हो लेकिन अगर समस्या ठीक हो जाने योग्य है, तो पता करें ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति में बचाव हो सके और प्रैग्नैंसी प्लान करें तो डाक्टर से कंसल्ट करें.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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जानें Pregnancy में कैसी हो सेक्स पोजीशन, पढ़ें खबर

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाएं काफी सतर्क हो जाती हैं. कहीं गर्भस्थ शिशु को कोई हानि न पहुंचे, इस कारण वे पति से शारीरिक तौर पर भी हर संभव दूरी बनाए रखने की कोशिश करती हैं, मगर डाक्टरों के अनुसार गर्भावस्था में सेक्स किया जा सकता है.

हां, अगर प्रेगनेंट महिला की हालत नाजुक हो या फिर कोई कौंप्लिकेशन हो, तो शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए. लेकिन पत्नी से ज्यादा दिनों तक दूर रहना पति के लिए नामुमकिन हो जाता है, जिस के चलते रिश्तों में अलगाव होने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में इस स्थिति को रोकने के लिए आइए जानते हैं कि गर्भावस्था में कैसे करें सेक्स:

गर्भावस्था के दौरान सेक्स के समय इन पोजीशंस के माध्यम से सुरक्षित सेक्स का आनंद भी लिया जा सकता है और इस से होने वाले बच्चे और मां को भी कोई तकलीफ न होगी.

पहली पोजीशन: पति और पत्नी एकदूसरे के सामने लेट जाएं. पत्नी अपना बायां पैर पति के शरीर पर रख दे. इस पोजीशन में सेक्स करने से गर्भ को झटके नहीं लगते.

दूसरी पोजीशन: पत्नी पीठ के बल टखने मोड़ कर अपनी टांगें पति के कंधों पर रखे, फिर सेक्स करें. इस से पेट पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा.

तीसरी पोजीशन: पति कुरसी पर बैठे और पत्नी उस के ऊपर बैठ जाए. यह भी सेफ सेक्स में आता है.

कुछ व्यायामों के माध्यम से भी सेक्स किया जा सकता है, लेकिन इस के पहले डाक्टर से सलाह जरूर ले लें.

सावधानियां

  •  गर्भावस्था में सेक्स के दौरान पति को पत्नी का खास ध्यान रखना चाहिए. पति ज्यादा उत्तेजना में न आए और न ही पत्नी पर ज्यादा दबाव पड़े.
  •  गर्भावस्था में सेक्स करें, लेकिन किसी प्रकार का नया प्रयोग करने से बचें.
  •  सेक्स करते हुए ध्यान रहे कि पत्नी पर ज्यादा दबाव न पड़े.
  •  गर्भावस्था में प्रसव पीड़ा से पहले तक सेक्स किया जा सकता है, पर गर्भवती को इस से कोई तकलीफ  न हो तब.

गर्भावस्था में सेक्स के फायदे

प्रेगनेंसी के दौरान सेक्स मां और बच्चे दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद होता है, आइए जानते हैं कैसे:

  •  गर्भावस्था में सेक्स करने से आप की पैल्विक मांसपेशियों में सिकुड़न बढ़ जाती है, जिस से वे प्रसव के लिए और मजबूत बनती हैं.
  •  प्रेगनेंसी के दौरान जल्दी पेशाब आना, हंसने या छींकने पर पानी निकलने आदि की समस्या आप के बच्चे के बड़े होने के कारण मूत्राशय पर पड़ने वाले दबाव की वजह से होती है. यह थोड़ा असुविधाजनक हो सकता है, लेकिन इस से आप की मांसपेशियां मजबूत होती हैं जो प्रसव के समय लाभ पहुंचाती हैं.
  •  सेक्स करने से महिला ज्यादा फिट रहती है. इस दौरान वह सिर्फ 30 मिनट में 50 कैलोरी कम कर सकती है जोकि उस की हैल्थ के लिए अच्छा है.
  •  गर्भावस्था में सेक्स करने से महिला की सहनशक्ति 78% बढ़ जाती है, जिस से प्रसव के समय उसे थोड़ा आराम महसूस होता है.
  • सेक्स के बाद रक्तचाप कम हो जाता है. अधिक रक्तचाप मां और बच्चे दोनों के लिए हानिकारक होता है, इसलिए बेहतर है कि ऐसी स्थिति में डाक्टर से सलाह लें.
  • औक्सीटोसिन हारमोन संभोग के समय शरीर से मुक्त होता है, जो तनाव को कम करने में उपयोगी होता है, जिस कारण अच्छी नींद आती है.
  •  शोधकर्ताओं का मानना है कि गर्भावस्था में सेक्स प्रीक्लेंपसिया से बचाता है. यह ऐसी स्थिति है, जिस में अचानक रक्तचाप बढ़ जाता है. ऐसा शुक्राणु में पाए जाने वाले प्रोटीन के कारण होता है जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है.

जब डाक्टर को कुछ जटिलताएं नजर आती हैं, तब वे सेक्स न करने की सलाह देते हैं. जटिलताएं कई प्रकार की हो सकती हैं, जैसे:

  • अगर पहले कभी गर्भपात हुआ हो तो.
  •  पहले कभी समय से पूर्व बच्चा जन्मा हो तो.
  •  किसी प्रकार का गर्भपात का जोखिम होने पर.
  • योनि से अधिक रक्तस्राव होने या तरल पदार्थ बहने की स्थिति में.
  •  एक से अधिक बच्चे होने पर.

अगर आप चाहती हैं कि आप की प्रैगनैंसी खुशहाल और सुरक्षित हो तो टोनेटोटकों जैसे गर्भ रक्षा कवच, गर्भ रक्षा हेतु चमत्कारी टोटके, पुत्र प्राप्ति के नुसखे आदि के चक्करों में उलझने से बचें, क्योंकि इस दौरान टोनेटोटके नहीं, बल्कि पतिपत्नी के बीच प्यार और अच्छे संबंध ज्यादा जरूरी हैं. इस दौरान अपने और अपने होने वाले बच्चे का पूरा ध्यान रखें. डाक्टर की सलाह पर चलें और संपूर्ण आहार लें, ताकि आप के शरीर को सभी पोषक तत्त्व पर्याप्त मात्रा में मिल सकें, जो आप के होने वाले बच्चे के विकास के लिए जरूरी हैं.

19 दिन 19 टिप्स: सेक्स चाहिए बच्चा नहीं

विवाह के बाद जोड़े सेक्स का तो जम कर लुत्फ उठाते हैं पर बच्चा पैदा करने से परहेज करते हैं. कई युवा ऐसे भी हैं जो विवाह किए बगैर सेक्स का मजा लेते रहते हैं. कई युवा कंडोम, कौपर टी, गर्भनिरोधक गोलियों आदि का इस्तेमाल कर जिस्मानी रिश्ते बना रहे हैं. इस के पीछे उन का मकसद केवल सेक्स का मजा लेना ही होता है न कि बच्चे को जन्म देना. अगर बच्चा ठहर भी जाता है तो वे उसे गिराने में जरा भी देर नहीं लगाते हैं.

सेक्स का आनंद नैचुरल और सेफ तरीके से उठाया जाए तो मजा दोगुना हो जाता है. ऐसा नहीं करने से कई तरह की बीमारियों और परेशानियों में फंसने की गुंजाइश रहती है.

आजकल मातृत्व और पितृत्व की भावना कम होती जा रही है. औरत और मर्द का रिश्ता केवल सेक्ससुख का ही रह गया है. इसी वजह से यह चलन चल पड़ा है कि लोग मांबाप बनने से कतराते हैं. समाजविज्ञानी हेमंत राव कहते हैं कि महज सेक्स का सुख उठाने वाले जोड़े 30-35 साल की उम्र तक तो यह आनंद उठा सकते हैं लेकिन उस आयु तक अगर बच्चा पाने से परहेज किया जाए तो तरहतरह की जिस्मानी और दिमागी परेशानियां शुरू हो जाती हैं. कई ऐसे मामले हैं जहां लंबे समय तक बच्चे न चाहने वाले जोड़ों को बाद में काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं.

हर चीज का समय होता है. बारबार गर्भपात कराने पर बच्चेदानी कमजोर हो जाती है, उस के फटने के आसार भी बढ़ जाते हैं. बारबार गर्भपात कराने से बां झपन की समस्या के होने का भी खतरा होता है. अगर बच्चा ठहर भी जाता है तो जन्म लेने वाले बच्चे के कमजोर और बीमार होने का खतरा बना रहता है. कई ऐसे उदाहरण हैं जहां देर से बच्चा होने पर वह दिमागी और जिस्मानी तौर पर बहुत कमजोर होता है. उस के कई अंगों का ठीक से विकास नहीं हो पाता है.

आज के युवा बच्चे को ऐसेट नहीं बल्कि लाइबिलिटी मानते हैं. यही वजह है कि ‘सेक्स का मजा लो और फिर अपने काम में लग जाओ’ की सोच बढ़ती जा रही है. अब वंश आगे बढ़ाने और मांबाप बनने का आनंद उठाना गुजरे जमाने की बात जैसी होती जा रही है. पहले के लोग बच्चे को बुढ़ापे का सहारा मानते थे पर आज के लोगों की सोच ऐसी नहीं है. उन की सोच है कि पैसा है तो सबकुछ खरीदा जा सकता है. कैरियर बनाओ, पैसा कमाओ और सेक्स का भरपूर मजा उठाओ, यही आज के युवाओं की सोच है.

हमारे देश में आज भी शादी की तमाम रस्मों और हनीमून की प्लानिंग तो की जाती है पर बच्चों की नहीं, जिस का नतीजा अनचाहा गर्भ या गर्भपात ही होता है. डा. नीरू अरोरा कहती हैं, ‘‘गर्भनिरोधक यानी कौंट्रासैप्टिव के चुनाव के मामले में आज कई दंपती यह तय ही नहीं कर पाते हैं कि कौन सा गर्भनिरोधक उन के लिए उपयुक्त है.’’

गर्भनिरोधकों के बारे में महिलाओं के मन में अनेक गलत धारणाएं रहती हैं, जैसे गर्भनिरोधक गोली से भविष्य में गर्भधारण में समस्या होगी, सेक्स की चाहत नहीं रहेगी, कैंसर की संभावना बढ़ेगी, वजन बढ़ जाएगा वगैरह. ये सारी धारणाएं गलत हैं.

‘गर्भनिरोधक गोलियों के प्रयोग से ओवेरियन कैंसर व सिस्ट के चांसेस कम होते हैं. इन के प्रयोग से घबराना नहीं चाहिए.’’

गर्भनिरोधक 2 प्रकार के होते हैं, प्राकृतिक व कृत्रिम.

A. प्राकृतिक गर्भनिरोधक

प्राकृतिक गर्भनिरोधक तरीकों का प्रयोग करते समय किसी भी तरह की गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग नहीं किया जाता. इस के खास तरीके में सिर्फ मासिक चक्र को ध्यान में रखते हुए ‘सेफ पीरियड’ में ही सेक्स किया जाता है.

1 सुरक्षित मासिक चक्र :

परिवार नियोजन के प्राकृतिक तरीकों में से एक सुरक्षित मासिक चक्र है. इस तरीके के तहत ओव्यूलेशन पीरियड के दौरान शारीरिक संबंध न रखने की सावधानियां बरती जाती हैं.

आमतौर पर महिलाओं में अगला पीरियड शुरू होने के 14 दिन पहले ही ओव्यूलेशन होता है. ओव्यूलेशन के दौरान शुक्राणु व अंडे के फर्टिलाइज होने की ज्यादा संभावना होती है. दरअसल, शुक्राणु सेक्स के बाद 24 से 48 घंटे तक जीवित रहते हैं, जिस से इस दौरान गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है.

फायदा :

इस में न किसी दवा की, न किसी कैमिकल की और न ही किसी गर्भनिरोधक की जरूरत होती है. इस में किसी भी तरह का रिस्क या साइडइफैक्ट का डर भी नहीं रहता.

नुकसान :

यह तरीका पूरी तरह से कामयाब नहीं कहा जा सकता. यदि पीरियड समय पर नहीं होता तो गर्भधारण की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है.

2 कैलेंडर वाच :

प्राकृतिक तरीकों में एक कैलेंडर वाच है, जिसे सालों से महिलाएं प्रयोग में लाती हैं. इस में ओव्यूलेशन के संभावित समय को शरीर का टैंप्रेचर चैक कर के जाना जाता है और उसी के अनुसार सेक्स करने या न करने का निर्णय लिया जाता है. इस में महिलाओं को तकरीबन रोज ही अपने टैंप्रेचर को नोट करना होता है. जब ओव्यूलेशन होता है तो शरीर का तापमान आधा डिगरी बढ़ जाता है.

फायदा :

इस में किसी भी प्रकार की दवा या कैमिकल का उपयोग नहीं होता. इस से कोई साइड इफैक्ट नहीं पड़ता और न सेहत के लिए ही कोई नुकसान होता.

नुकसान :

यह उपाय भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिन की माहवारी नियमित नहीं होती.

3 स्खलन विधि :

इस विधि में स्खलन से पहले सेक्स क्रिया रोक दी जाती है, ताकि वीर्य योनि में न जा सके.

फायदा : इस का कोई भी साइड इफैक्ट नहीं है.

नुकसान : सहवास के दौरान हर पल दिमाग में इस की चिंता रहती है. लिहाजा, सेक्स का पूरापूरा आनंद नहीं मिल पाता. इस के अलावा शुरू में निकलने वाले स्राव में कुछ मात्रा में स्पर्म्स भी हो सकते हैं. इसलिए यह विधि कामयाब नहीं है.

B. कृत्रिम गर्भनिरोधक

प्रैग्नैंसी रोकने की जिम्मेदारी अकसर महिलाओं को ही उठानी पड़ती है. इसलिए उन्हें इस के लिए इस्तेमाल होने वाले कौंट्रासैप्टिव की जानकारी होना बेहद जरूरी है.

  1. गर्भनिरोधक गोलियां : गर्भनिरोधक गोलियां भी कई प्रकार की होती हैं :

साइकिल गर्भनिरोधक गोली : इस का पूरा कोर्स 21 दिन का होता है. इस की 1 गोली माहवारी के पहले दिन से ही रोज ली जाती है. इस के साथ ही 3 हफ्ते तक बिना नागा यह गोली लेनी चाहिए.

फायदा :

इस के उपयोग से माहवारी के समय दर्द से भी आराम मिलता है.

नुकसान :

आप यदि एक दिन भी गोली खाना भूल गईं तो प्रैग्नैंट हो सकती हैं, साथ ही सिरदर्द, जी मिचलाना, वजन बढ़ना आदि समस्याएं भी हो जाती हैं.

ओनली कौंट्रासैप्टिव पिल :

इसे ओसीपी भी कहा जाता है. इस का भी कोर्स 21 दिनों का होता है, जिस में 7 गोलियां हीमोग्लोबिन की भी होती हैं. इस तरीके से महिलाओं को एनीमिया की शिकायत नहीं होती क्योंकि इस में प्रोजेस्टेरोन और इस्ट्रोजन हार्मोन होते हैं.

आपातकालीन गोलियां: असुरक्षित सहवास के बाद अनचाहे गर्भ से बचने के लिए इस का इस्तेमाल किया जाता है.

फायदा :

इस गोली का सेवन यौन संबंध बनाने के 72 घंटों के अंदर किया जाता है तो यह 96 फीसदी तक प्रभावशाली होती है.

नुकसान :

इस का प्रयोग करना स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक नहीं है.

2. कौपर टी :

गर्भनिरोधक के रूप में यह विश्व में सब से ज्यादा इस्तेमाल होती है. यह अंगरेजी के टी (ञ्ज) अक्षर के शेप की होती है और इस में पतला सा तार लगा होता है. इसे गर्भाशय के भीतर लगाया जाता है. इस से गर्भ नहीं ठहर पाता. जब भी बच्चे की चाहत हो इसे निकलवाया जा सकता है.

फायदा :

इस में 99 फीसदी तक फायदा है. एक बार बच्चा होने के बाद दूसरा बच्चा होने के समय में गैप के लिए कौपर टी एक अच्छा जरिया है.

नुकसान :

कौपर टी लगाने के बाद 2-3 महीने तक माहवारी ज्यादा आती है, लेकिन बाद में ठीक हो जाती है. इसे डाक्टर के द्वारा ही लगाया और निकलवाया जाता है.

3. गर्भनिरोधक इंजैक्शन :

यह इस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरौन का इंजैक्शन है. यह 2 महीने या 3 महीने में लगाया जाता है. यह ओव्यूलेशन रोकता है, जिस से गर्भ नहीं ठहरता.

फायदा :

इस का 99 फीसदी फायदा होता है. माहवारी भी कम दिनों तक होती है और माहवारी में दर्द नहीं होता.

नुकसान :

इस से वजन बढ़ जाता है. इस इंजैक्शन के बाद नियमित व्यायाम और खानपान में संतुलित आहार जरूरी है.

दाई से डिलीवरी न कराएं

फिल्म ‘दंगल’ तो आप सब को याद होगी ही. हरियाणा का एक ठेठ देहाती पहलवान जब साधनों की कमी में खुद कुश्ती में कोई बड़ा कारनामा नहीं कर पाता है, तो उसे अपनी आने वाली औलाद से उम्मीद बंध जाती है. औलाद भी लड़का ही चाहिए, क्योंकि तब समाज में लड़कियों को लड़कों की तरह लंगोट बांध कर अखाड़े में उतरने की तो सोचिए भी मत, ढंग से स्कूल में भेज दो तो गनीमत समझी जाती थी.

बेटे के चक्कर में पहलवान महावीर फोगाट बने आमिर खान के एक के बाद एक 4 बेटियां पैदा हो जाती हैं. बाद में इस फिल्म की कहानी क्या मोड़ लेती है, उस पर ज्यादा बात नहीं करेंगे, पर हां एक गंभीर मुद्दे पर जरूर सोचेंगे कि फिल्म में आमिर खान की पत्नी बनी साक्षी तंवर की जचगी कहां और कैसे होती है.

महावीर फोगाट का घर एक ऐसे किसान का घर था, जहां सुखसुविधाओं के नाम पर जरूरत का कुछ पुराना सामान, खाना बनाने के लिए चूल्हा और ईंधन की लकडि़यां ही थीं. घर की जर्जर होती दीवारों के बंद कमरे के बाहर महावीर फोगाट अपनी औलाद की पहली रुलाई सुनने के लिए बेचैन खड़ा होता है.

दरवाजा खुलता है तो एक बुढि़या दाई मायूस सा चेहरा लिए बेटी होने की खबर देती है. ऐसा एक बार नहीं, बल्कि 4 बार होता है, क्योंकि महावीर फोगाट 4 बेटियों का बाप जो बनता है. पर हर बार जचगी दाई से ही होती है.

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वहां पर गनीमत यह होती है कि उस दाई से कोई हादसा नहीं होता है. यह भी कह सकते हैं कि आज से 25-30 साल पहले तक दाई से जचगी कराने पर इतना ध्यान नहीं दिया जाता था. लेकिन आज जब गांवदेहात के आसपास के कसबे या छोटे शहर में लेडी डाक्टर मिल जाती हैं, तो भी बहुत से लोग जचगी गांव में किसी दाई से ही करा लेते हैं.

यूनिसैफ द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दुनियाभर में पेट से होने  और जचगी से जुड़ी समस्याओं के चलते तकरीबन 2,90,000 औरतों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था.

अंदाजा है कि हर साल 28,00,000 गर्भवती औरतों की मौत हो जाती है, जिस के पीछे की सब से बड़ी वजह सही पोषण और उचित देखभाल का न मिल पाना होता है.

इतना ही नहीं, दुनियाभर में एकतिहाई नवजात बच्चों की मौतें अपने जन्म के दिन ही हो जाती हैं, जबकि बाकी तीनचौथाई बच्चे जन्म के एक हफ्ते के भीतर ही मर जाते हैं.

दिक्कत यह है कि आज भी भारत के बहुत से गांवों में बच्चा पैदा होने को गंभीरता से नहीं लिया जाता है, जबकि यह एक तरह से बच्चे के साथसाथ उस औरत का भी दूसरा जन्म होता है, जो मां बनती है. लिहाजा, जचगी ऐसी किसी बूढ़ी औरत से करा दी जाती है, जो दिल की थोड़ी पक्की जरूर होती है, पर उसे जचगी के समय होने वाले खतरों की उतनी जानकारी नहीं होती है, जितनी किसी माहिर डाक्टर को होती है.

इस सिलसिले में फरीदाबाद के मेवला महाराजपुर गांव की एक आंगनबाड़ी महिला हैल्पर ने बताया कि यहां की कच्ची कालोनियों में रहने वाले ज्यादातर लोग दूसरे राज्य के गरीब परिवारों के होते हैं. सरकारी अस्पताल में बच्चा जनने के लिए आधारकार्ड जैसे पहचानपत्र की जरूरत होती है और बहुत से लोगों के पास वह नहीं होता है. लिहाजा, ऐसी औरतें घर पर ही अपनी सगीसंबंधी औरतों या पड़ोस की औरतों की मदद से जचगी करा लेती हैं.

इसी गांव की रहने वाली रेखा का दूसरा बेटा गांव में ही दाई के हाथों पैदा हुआ था, जबकि पहला बेटा सरकारी अस्पताल में.

रेखा के मुताबिक, घर हो या अस्पताल, सारा काम तो जच्चा को ही करना होता है. अगर वह शरीर और मन से मजबूत है तो उस की मददगार कोई डाक्टर है या दाई, कोई फर्क नहीं पड़ता है.

पर, रेखा का यह बयान भावुकता पर ज्यादा टिका है. इस बात को एक उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए, कोई औरत पहली बार मां बनने वाली है और वह किसी ऐसे गांव में रहती है, जहां आसपास प्रसूति केंद्र तो है, लेकिन उस की ससुराल वाले गांव की दाई से ही जचगी कराना चाहते हैं.

चूंकि वह औरत पढ़ीलिखी है और जचगी के दौरान अपने और होने वाले बच्चे के लिए कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है, तो अपनी ससुराल वालों की सलाह को दरकिनार कर के वह डाक्टर से मिलती है और समयसमय पर अपनी जांच कराती है. वहां डाक्टर द्वारा खून, पेशाब, ब्लड प्रैशर, वजन, पोषण वगैरह की जांच होते रहने से उस औरत को बहुत फायदा होता है, जो एक दाई उसे कभी नहीं बता पाएगी.

याद रखिए, मां बनने वाली जिन औरतों का ब्लड ग्रुप आरएच नैगेटिव होता है, उन के बच्चे की पीलिया या दूसरी किसी दिक्कत से मौत हो जाने का डर रहता है. लेकिन समय से पहले आरएच नैगेटिव ब्लड ग्रुप पता चल जाने पर सावधानी बरती जा सकती है और बच्चे में नया खून ‘ट्रांसफ्यूजन’ से यानी बदल कर उस की जान बचाई जा सकती है. गांवदेहात में क्या, बहुत सी शहर की औरतों को इस बारे में शायद ही जानकारी हो, दाई की तो छोड़ ही दीजिए.

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बहुत सी औरतें अपनी दाई से यह बात छिपा जाती हैं कि उन को पहले गर्भपात भी हो चुका है यानी उन का पेट गिर चुका है. उन की यही लापरवाही खुद उन के लिए और आने वाले बच्चे के लिए खतरनाक हो सकती है, क्योंकि अगर ऐसा हुआ है, तो दाई कुछ नहीं कर पाएगी, जबकि माहिर डाक्टर समय रहते जच्चा को बता देगी कि उसे क्याक्या सावधानियां बरतनी होंगी.

इस सिलसिले में दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल की गाइनोकौलोजिस्ट डाक्टर शिल्पी सचदेव ने बताया, ‘‘आमतौर पर गांवदेहात में लोग घर पर ही किसी दाई से जचगी इसलिए करा लेते हैं, क्योंकि वे प्राइवेट अस्पताल के खर्च से बचना चाहते हैं या फिर सरकारी अस्पताल में लंबी लाइनों में नहीं लगना चाहते हैं, जबकि गांव में जच्चा का कोई टैस्ट नहीं होता है. मां और बच्चे का वजन कितना है या पेट में बच्चे का सिर नीचे है या फिर उलटा है, यह भी दाई को नहीं पता होता है.

‘‘अगर मां का ब्लड ग्रुप नैगेटिव है और पिता का ब्लड ग्रुप पौजिटिव है तो जचगी में बच्चे को दिक्कत हो सकती है. इस के लिए एक इंजैक्शन लगाया जाता है. अगर पहली जचगी में यह इंजैक्शन नहीं लगता है, तो दूसरी जचगी में बच्चे को बहुत नुकसान हो सकता है.

‘‘दाई के साथ सब से बड़ी समस्या यह होती है कि बहुत बार वह साफसफाई का ध्यान नहीं रखती है. वह दस्ताने नहीं पहनती है. इस से मां और बच्चे दोनों को इंफैक्शन होने का खतरा बना रहता है. दाई के पास टांके लगाने का भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं होता है. दूसरे अहम उपकरण भी नहीं होते हैं.

‘‘अगर जचगी के दौरान खून ज्यादा बहने लगता है, तो दाई को सही तकनीक नहीं पता होती है कि कैसे उस पर काबू पाया जाए. इस से मां की जान को खतरा हो सकता है.

‘‘कभीकभार तो जचगी के बाद गर्भनाल अंदर ही रह जाती है. यह भी एक बहुत बड़ी समस्या है. अगर बच्चा एकदम से नहीं रोया या उस को औक्सीजन नहीं मिल पा रही है, उस के फेफड़े नहीं फूल रहे हैं, तो दाई को इस से निबटने का तरीका पता ही नहीं होता है, जबकि अस्पताल में आधुनिक उपकरण होते हैं, जिन की मदद से डाक्टर ऐसी किसी समस्या का हल तुरंत निकाल लेता है.

‘‘ऐसे बहुत से केस सुनने में आते हैं कि जब किसी बच्चे में पूरी औक्सीजन नहीं पहुंचने से वे विकलांग तक हो जाते हैं या दिमागी तौर पर वे अच्छी तरह बढ़ नहीं पाते हैं. अगर किसी औरत को थायराइड की दिक्कत होती है, तो इस का बुरा असर पैदा होने वाले बच्चे पर भी पड़ सकता है.

‘‘किसी मां के पेट में पल रहे बच्चे में अगर कोई बनावट संबंधी खराबी है, तो गांव में उस का पता ही नहीं चल पाता है, जबकि डाक्टर इन सब बातों की पूरी जानकारी रखता है.

‘‘दाई गर्भनाल काटने के लिए अच्छे ब्लेड का इस्तेमाल नहीं करती है. कपड़ा भी कैसा है, इस का ज्यादा ध्यान नहीं रखती है. इस से इंफैक्शन का खतरा बढ़ जाता है.’’

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पहले तो सुविधाएं न होने और जानकारी की कमी में लोग दाई से जचगी करा लेते थे और अगर कोई हादसा हो जाता था तो उसे ऊपर वाले का फैसला मान कर चुप्पी साध लेते थे, पर अब ऐसा करने या सोचने की कोई वजह नहीं है.

याद रखिए, अगर बच्चे सेहतमंद पैदा नहीं होंगे तो वे बड़े हो कर अपनी पूरी ताकत से देश को आगे बढ़ाने में कामयाब नहीं हो पाएंगे. दाई के पास  नहीं, बल्कि जचगी के लिए डाक्टर के पास जाएं, जच्चाबच्चा को सहीसलामत घर वापस लाएं.

मां बनी ‘देसी बौयज’ की ये एक्ट्रेस, शेयर की बेटी की Photo

ब्रज़ीलियन एक्ट्रेस ब्रूना अब्दुल्लाह अपने एक्टिंग के टेलेंट से कई बौलीवुड फिल्में कर काफी फैन फोलोविंग गेन कर चुकीं है. ब्रूना अब्दुल्लाह देखते ही देखते बहुत ही जल्द सबकी फेवरेट बनती जा रही हैं. ब्रूना ने कई फिल्मों के साथ काफी रीएलिटी शो भी किए हैं. खुशी की बात ये है कि ब्रूना के घर में 31 अगस्त को एक नए महमान ने दस्तक दी है.

बेटी ने लिया जन्म…

ब्रूना अब्दुल्लाह ने इस बात की जानकारी अपने फैंस को सोशल मीडिया से दी कि उनके घर एक बेटी ने जन्म लिया है. जानकारी देने के साथ ब्रूना ने अपनी बेटी की फोटो भी फैंस के साथ शेयर की जिसमें वे बेहद प्यारी लग रही है.

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बेटी का नाम भी किया शेयर…

ब्रूना अब्दुल्लाह ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम के ज़रिए अपनी बेटी का नाम भी फैंस को बताया. ब्रूना ने अपनी बेटी का नाम इसाबेला रखा है. वे अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर काफी एक्साइटिड थी और उनकी ये एक्साइट्मेंट उनके द्वारा शेयर किए जाने वाली फोटोज से साफ नज़र आ रही थी. अपनी बेटी को जन्म देने के कुछ समय पहले ब्रूना ने अपना बेबी बंप शो करते हुए फोटो शेयर की जिसमें वे काफी खुश नज़र आ रही थीं.

पति के साथ शेयर की फोटो…

ब्रूना ने अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान अपना काफी ख्याल रखा और आने वाले सदस्य के बारे में पल-पल की जानकारी अपने फैंस के साथ शेयर की. साथ ही इन खबरों के बीच उन्होनें अपने पति की फोटो भी शेयर की. उनकी इन फोटोज देख ये कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि वे अपनी पर्सनल लाइफ में काफी खुश हैं और ब्रूना और उनके पति के बीच काफी प्यार है.

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We 3 ❤️ . . #homeawayfromhome #goa #30weeks

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शादी से पहले ही थीं प्रेग्नेंट…

बता दें, ब्रूना अब्दुल्लाह ने अपने पति ‘एलन फ्रेस’ के साथ इसी साल के मई महीने में शादी की थी जिससे ये पता चलता है कि ब्रूना शादी से पहले ही प्रेग्नेंट हो चुकी थीं. ब्रूना ने अक्षय कुमार और जौन अब्राहम के साथ फिल्म “देसी बौयज़” में एक आइटम सौंग परफोर्म किया था और उनहोनें “ग्रैंड मस्ती”, “मस्तीज़ादे”, “जय हो”, जैसी कई हिट फिल्में भी की हैं. साथ ही ब्रूना अब्दुल्लाह ने “खतरों के खिलाड़ी सीज़न 9”, “नच बलिए सीज़न 6” जैसे रीएलिटी शो में भी भाग लिया है.

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Written By: Karan Manchanda

नये तरीके से बेबी को जन्म देंगी “देसी ब्यौज” की ये एक्ट्रेस

बौलीवुड में इन दिनों खूशियों की लहर है. एक और कुछ स्टार्स शादी के बंधन में बंध रहे हैं. तो वही कुछ एक्ट्रेसेस जल्द ही मां बनने वाली हैं. इन्हीं में से कुछ एक्ट्रेसेस सोशल मीडिया पर अपनी प्रेग्नेंसी के हसीन पलों को शेयर कर रही हैं. एमी जैक्सन ,समीरा रेड्डी के बाद अब ब्राजीलियन मौडल और कई आइटम नंबर में नजर आ चुकी ब्रूना अब्दुल्लाह अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर काफी एक्साइटेड हैं. हाल ही में सोशल मीडिया पर ब्रूना ने कुछ फोटोज शेयर की हैं जिसमें वो काफी अच्छी लग ही हैं.

वौटर बर्थ टेक्निक से होगी डिलीवरी

ब्रूना अब्दुल्लाह अपनी प्रेग्नेंसी के 27वें हफ्ते में है और वो इसे लेकर काफी एक्साइटेड हैं. ब्रूना की प्रेग्नेंसी काफी सुर्खियों में है क्योंकि हाल ही में एक इंटरव्यू में उन्होंने इस बात का खुलासा किया है कि वो अपने बच्चे की डिलीवरी वौटर बर्थ टेक्निक के जरिए करेंगी. उनका कहना था “’मैं पहले कभी मां बनने के बारे में ज्यादा नहीं सोचा लेकिन अब जब मैं मां बनने वाली हूं तो अपने बच्चे को देखने का इंतजार नहीं कर पा रही हूं”  साथ ही ब्रूना ने ये भी बताया की – ‘मुझे पानी से बहुत प्यार है. मैं पानी के अंदर रिलैक्स करके बच्चे को जन्म देना चाहती हूं’

आपको बता दे की डिलीवरी वौटर बर्थ टेक्निक में मां बाथटब में पानी के अंदर रहकर दर्द सहती है. इस दौरान डौक्टर्स और नर्स मां के आसपास रहते हैं. इस टेक्निक में मां को दर्द से कुछ राहत मिलती है और बच्चे का जन्म नेचुरल तरीके से होता है.

शादी के बिना ही मां बनने वाली है ब्रूना

ब्रूना ने भी शादी नहीं की है, वो अपने बौयफ्रेंड एलन के साथ रिश्ते में हैं और शादी से पहले ही नन्हें मेहमान के स्वागत की तैयारी कर रही है. आपको बता दे की ब्रूना अक्की (अक्षय कुमार)  की फिल्म ‘देसी ब्यौज’ के अलावा फिल्म ‘ग्रैंड मस्ती’ और ‘आई हेट लव स्टोरी’ में भी काम कर चुकी हैं.

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