मैं कैसे पता करूं कि कोई लड़का मुझे पसंद करता है?

सवाल

मैं 24 वर्षीया युवती हूं. इस वर्ष मेरी स्टडी पूरी हो जाएगी. कालेजटाइम से हमारा 10 फ्रैंड्स का ग्रुप है. हम सब में बहुत मेलजोल है. उन में से एक को धीरेधीरे मैं बहुत पसंद करते हुए अब उसे चाहने की हद तक पहुंच गई हूं. मु झे पता है कि उस की कोई गर्लफ्रैंड नहीं है. मैं उसे लाइक करती हूं, यह बात मैं उस से कहना चाहती हूं लेकिन कहने से डर रही हूं कि यदि उस ने मना कर दिया तो मैं यह सहन नहीं कर पाऊंगी. यही नहीं, उस ने अगर सभी फ्रैंड्स को बता दिया तो फालतू में मैं चर्चा का विषय बन जाऊंगी और फिर सब को फेस करना मेरे लिए मुश्किल हो जाएगा. क्या कोई तरीका है कि मैं जान पाऊं कि उस के दिल में क्या है और मेरे लिए वह क्या विचार रखता है?

जवाब

आप सब फ्रैंड्स कालेजटाइम से एकदूसरे को जानते हैं तो फिर यह भी पता होगा कि सब का नेचर कैसा है, वे सब किसी भी बात को ले कर कैसा रिऐक्ट करते हैं या आप सब फ्रैंड्स के बीच की बौंडिंग कैसी है.

एक तरीका है कि आप अपनी गु्रप फ्रैंड्स में से किसी एक को अपने फेवर में ले कर अपने दिल की बात उसे बता दें और यह काम उसे सौंप दें कि वह पता लगाए कि जिस फ्रैंड को आप चाहने लगी हैं, वह आप के बारे में क्या सोचता है. अगर उस के दिल में आप के लिए फीलिंग्स हैं तो वह आप दोनों की मीटिंग करवा कर आप का काम आसान कर दे.

यदि आप किसी की मदद नहीं लेना चाहतीं और खुद पता लगाना चाहती हैं कि वह लड़का आप के बारे में क्या सोचता है, सोचता भी है या नहीं, तो कुछ बातों पर गौर करें कि क्या वह आप की बातों पर ध्यान देता है? आप पर ध्यान देता है? अगर हां, तो उस के मन में भी आप के लिए प्यार जरूर है. क्या भीड़ वाली जगह पर वह आप को घेर कर चलता है या फिर आप का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ता है? यदि हां, तो आप की मुराद पूरी हो गई.

क्या कभी आप ने गौर किया है कि वह सब के साथ होने के बावजूद आप को चोरीचोरी देखता है, तो कोई शक नहीं, उस के मन में आप के लिए लव फीलिंग्स हैं.

यदि आप किसी और लड़के की बात करती हैं तो उसे बुरा लगता है या मजाकमजाक में आप उस से फ्लर्ट करती हैं तो वह खुश हो जाता है तो सौ प्रतिशत वह आप को पसंद करता है और आप के एक इशारे का इंतजार कर रहा है. अगर वह आप की फीलिंग्स नहीं सम झ रहा है तो घबराइए नहीं. लड़के ऐसी बातें देर से सम झते हैं. अब सब बातें आप के सामने हैं. आप को खुद देखना व सम झना है. किसी से प्यार हो जाना गुनाह नहीं. यदि लड़का अच्छा है, सारी स्थितियां अनुकूल हैं तो उस से अपने दिल की बात कहने में कोई हर्ज नहीं. देखनेसम झने में कहीं वक्त हाथ से न निकल जाए.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

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धर्म बना देता है लोगों को गुलाम

सुप्रीम कोर्ट चाहे लाख कह ले कि हर वयस्क को प्रेम व विवाह का मौलिक अधिकार है और किसी बजरंगी, किसी खाप, किसी सामाजिक या धार्मिक गुंडे को हक नहीं कि इस अधिकार को छीने, मगर असल में धार्मिक संस्थाएं विवाह के बीच बिचौलिए का हक कभी नहीं छोड़ेंगी. विवाह धर्म की लूट का वह नटबोल्ट है जिस पर धर्म का प्रपंच और पाखंड टिका है और इस में किसी तरह का कंप्रोमाइज कोई भी धर्म नहीं सहेगा, सुप्रीम कोर्ट चाहे जो कहे.

जो भी धर्म के आदेश के खिलाफ जा कर शादी करेगा, सजा सिर्फ उसे ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और रिश्तेदारों को भी मिलेगी. सब को कह दिया जाएगा कि इस परिवार से कोई संबंध न रखो. कोई पंडित, मुल्ला, पादरी शादीब्याह न कराएगा. श्मशान में जगह नहीं मिलेगी, लोग किराए पर मकान नहीं देंगे, नौकरी नहीं मिलेगी.

धर्म का जगव्यापी असर है. जब लोग 7 समंदर पार रहते हुए भी कुंडली मिलान के बाद विवाह करते हों, गोरों व कालों की कुंडली भी बनवा लेते हों ताकि सिद्ध किया जा सके कि धर्म, रंग और नागरिकता अलग होने के बावजूद विवाह विधिविधान से हुआ है, तो क्या किया जा सकता है. सुप्रीम कोर्ट की फुसफुसाहट हिंदुत्व के नगाड़ों के बीच खो जाएगी.

पारंपरिक शादियां चलती हैं, तो इसलिए कि शादी चलाना पतिपत्नी के लिए जरूरी होता है, उन का कुंडली, जाति, गोत्र, सपिंड, धर्म से कोई मतलब नहीं होता. शादी दिलों का व्यावहारिक समझौता है. एकदूसरे पर निर्भरता तो प्राकृतिक जरूरत है ही, सामाजिक सुरक्षा के लिए भी जरूरी है और इस के लिए किसी धर्मगुरु के आदेश की जरूरत नहीं. यदि प्यार हो, इसरार हो, इकरार हो, इज्जत हो तो कोई भी शादी सफल हो जाती है. बच्चे मातापिता पर अपनी निर्भरता जता कर किसी भी बंधन को, शादी को ऐसे गोंद से जोड़ देते हैं कि सुप्रीम कोर्ट, कानून या कुंडली की जरूरत नहीं.

कुंडली, जाति, गोत्र, सपिंड के प्रपंच पंडितों ने जोड़े हैं, ये धर्म की देन हैं, प्राकृतिक या वैज्ञानिक नहीं. शादी ऐसा व्यक्तिगत कृत्य है जो व्यक्ति के जीवन को बदल देता है और धर्म इस अवसर पर मास्टर औफ सेरिमनीज नहीं मास्टर परमिट गिवर बन कर पतिपत्नी को जीवन भर का गुलाम बना लेता है.

शादी में धर्म शामिल है, तो बच्चे होने पर उसे बुलाया जाएगा और तभी उसे धर्म में जोड़ लिया जाएगा ताकि वह मरने तक धर्म के दुकानदारों के सामने इजाजतों के लिए खड़ा रहे.

विधर्मी से विवाह पर धर्म का रोष यही होता है कि एक ग्राहक कम हो गया है. चूंकि दूसरे धर्म का ग्राहक भी कम होता है, दोनों धर्मों के लोग एकत्र हो कर इस तरह के विवाह का विरोध करते हैं. आमतौर पर शांति व सुरक्षा तभी मिलती है जब पति या पत्नी में से एक धर्म परिवर्तन को तैयार हो.

अगर उसी धर्म में गोत्र या सपिंड का अंतर भुला कर शादी हो रही हो तो धर्म के दुकानदारों के लिए दोनों को मार डालने के अलावा कोई चारा नहीं होता. शहरों में तो यह संभव नहीं होता पर गांवों में इसे चलाना आसान है, संभव है और लागू करा जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट चाहे जितना कह ले, जब तक देश में धर्म के दुकानदारों का राज है और आज तो राज ही वे कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल नरेंद्र मोदी के अच्छे दिन आ चुके हैं, जैसा है.

प्रेम संबंधों को लीलता कोविड

कोविड का काला साया हजारों प्रेमसंबंधों को लील जाएगा. हम मौतों की बात नहीं कर रहे. शहरों में पनप रहे लवअफेयर युवाओं के अब अपने शहरगांव लौटने की वजह से आधेअधूरे रह गए. जिन को मिल कर बर्थडे मनाने थे, मांबाप के घर में मातम मना रहे हैं. जो उसी शहर में हैं तो भी एकदूसरे से मिल नहीं पा रहे. आज आधुनिक दौर की मोहब्बत/दोस्ती का दस्तूर यह है कि जो दिखा नहीं, वह दूर हुआ. सिर्फ फेसबुक, वीडियो चैट पर देखा जाएगा तो सिर्फ चेहरा दिखेगा, हाथों का टच नहीं होगा, बांहों की गिरफ्त नहीं. जो प्रेमसंबंध अभी अधपके थे वे तो गारंटी से सूख जाएंगे.

वैसे भी, युवा मन चंचल होता है. अगर शहर की डैशिंग पर्सनैलिटी नहीं है तो पड़ोस की आधीअधूरी से ही काम चला लो. सैक्सुअल अट्रैक्शन का न तो जेब से सीधा संबंध है, न स्मार्टनैस से. अगर 2 जवां हों तो यह कहीं भी पैदा हो सकता है. पुराना वाला छूट गया, तो कोई बात नहीं, नया हाजिर है जो कम से कम कोविड तक तो गारंटी से चलेगा.

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अब कोविड के बाद कौन, कहां पहुंचेगा, यह कौन जानता है. शहर बदल सकते हैं, चेहरे लटक सकते हैं, समस्याएं बदल सकती हैं. कोविड की डैथ किसी से लव सौंग छीन सकती है. डैथ की वजह से आई नई जिम्मेदारियां रंग में भंग डाल सकती हैं.

आज जो युवा पनपते प्रेम का पौधा छोड़ कर आए हैं उन्हें यह सोच कर चलना चाहिए कि उस की मार को सहने की क्षमता उन में बहुत कम है. सो, ज्यादा सपने न देखें. यदि व्हाट्सऐप संदेश सूखने लगें,  डीपी धूमिल होने लगे, आई लव यू की जगह बिजी दिखने लगे तो बेचैन न हों, यह कोविड की पैदा की गई नई सिचुएशन है. कोई बिट्रेयल हो, जरूरी नहीं.

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कोविड तो शादियों तक को खाने लगा हैप्रेमसंबंधों को तो छोड़ ही दें. यह महामारी ऐसी है जिस के फुटप्रिंट न जाने जीवन में कहांकहां पड़ेंगे. सफल वही होंगे जो हर एंगल से सोच रहे हैं.

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